रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के घर चोरों का धावा, जेवर और दस्तावेज लेकर भागे चोर, पुलिस से हाथापाई

ट्विशा शर्मा हत्या मामले की मुख्य आरोपियों में शामिल रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के घर में चोरी हो गई। इस हाई-प्रोफाइल मामले के बाद पुलिस ने चोरी की भी गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, रात करीब 2 बजे तीन नकाबपोश लोग घर की पहली मंजिल पर बने पिछले दरवाजे से अंदर घुसे। ट्विशा शर्मा हत्याकांड सामने आने के बाद से यह घर पहले से ही जांच के दायरे में था। घटना के समय घर में सिर्फ गिरिबाला सिंह का बड़ा बेटा मौजूद था। वहीं, गिरिबाला सिंह और उनका छोटा बेटा समर्थ सिंह हत्या मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।

घर में हुई  चोरी

शुरुआती जांच में पता चला है कि चोर घर से सोने के गहने और कई जरूरी दस्तावेज लेकर फरार हो गए। रात में नियमित गश्त के दौरान पुलिस की चार्ली टीम को इलाके में तीन संदिग्ध लोग दिखाई दिए। जब पुलिस उनसे पूछताछ करने पहुंची तो तीनों ने विरोध किया, पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की और मौके से भाग निकले। भागते समय आरोपी एक बैग वहीं छोड़ गए। बैग में चांदी के कुछ कटोरे और कई दस्तावेज मिले हैं। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि बरामद सामान गिरिबाला सिंह के घर का है या फिर किसी दूसरी जगह से चोरी किया गया है।

सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

सहायक पुलिस आयुक्त रजनीश कश्यप ने बताया कि घटना की पुष्टि हो गई है। आरोपियों की पहचान करने और पूरी घटना का पता लगाने के लिए घर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घर से आखिर कितना सामान चोरी हुआ है। परिवार अभी तक चोरी हुए गहनों, कीमती सामान और जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी जुटा रहा है।

परिवार की ओर से शिकायत दी जा रही है, जिसके बाद पुलिस एफआईआर दर्ज करेगी। तीनों आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और दूसरे तकनीकी सबूतों की मदद से जांच आगे बढ़ा रही है। यह चोरी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह घर ट्विशा शर्मा हत्या मामले की जांच से जुड़ा हुआ है और इस केस में महत्वपूर्ण माना जाता है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ चोरी हुए सामान और आरोपियों से जुड़ी अन्य जानकारी भी सामने लाई जाएगी।

IND W vs AUS W: भारत के लिए करो या मरो का मुकाबला, टीम इंडिया को सपोर्ट करने लॉर्ड्स पहुंचे विराट-अनुष्का

महिला टी20 विश्व कप 2026 में ग्रुप ए में आज का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच लॉर्ड्स में खेला जा रहा है। ये मैच भारतीय महिला टीम के लिए करो या मरो जैसा है। इस मुकाबले में जीत मिलने पर भारत सेमीफाइनल में जगह बना लेगा, जबकि हार के साथ टीम का टूर्नामेंट में सफर खत्म हो जाएगा। वहीं इस अहम मैच में भारतीय महिला टीम को सपोर्ट करने विराट कोहली अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ मैच देखने पहुंचे। वहीं शिखर धवन और रवि शास्त्री भी टीम को सपोर्ट करने स्टेडियम में पहुंचे। सोशल मीडिया पर इनकी फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

टीम को सपोर्ट करने पहुंचे विराट-अनुष्का

पहली पारी के दौरान विराट कोहली दर्शक दीर्घा में बैठकर मैच का आनंद लेते नजर आए। उनके साथ उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा और भारत के पूर्व कप्तान व पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री भी मौजूद थे। स्टैंड में बैठकर मैच देखते हुए उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। विराट के अलावा पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज शिखर धवन अपनी पत्नी सोफी शाइन के साथ भारतीय महिला टीम का उत्साह बढ़ाने के लिए स्टेडियम में मौजूद दिखाई दिए।

हरमनप्रीत कौर की फिप्टी

वहीं मुकाबसले में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। भारतीय महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी करते हुए टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। उन्होंने सिर्फ 27 गेंदों में 56 रन बनाए, जिसमें छह चौके और तीन छक्के शामिल रहे। हरमनप्रीत ने महज 25 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया, जो महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा लगाया गया सबसे तेज अर्धशतक बन गया। उनकी दमदार पारी की बदौलत भारत ने 20 ओवर में 4 विकेट पर 170 रन बनाए।

कैसी थी भारत की पारी

भारत की पारी में हरमनप्रीत कौर और जेमिमा रोड्रिग्स ने तीसरे विकेट के लिए शानदार साझेदारी निभाई। दोनों ने मिलकर 45 गेंदों में 64 रन जोड़े, जिसमें जेमिमा ने 28 गेंदों पर 34 रन बनाए। इससे पहले सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना(38) और शेफाली वर्मा (34) ने पहले विकेट के लिए 66 रन जोड़कर भारत को तेज़ और मजबूत शुरुआत दिलाई, जिससे टीम बड़े स्कोर की ओर बढ़ सकी।

Ketan Murder Case: 640 मिनट तक इंटरनेट बंद! केतन अग्रवाल हत्याकांड में आरोपी की ‘ऑफलाइन’ चाल ने खोले कई राज

पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में आरोपी चेतन चौधरी का करीब 10 घंटे तक इंटरनेट बंद रखना पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन गया है। पुलिस का मानना है कि 18 जून को चेतन ने जानबूझकर लगभग 640 मिनट तक अपना मोबाइल इंटरनेट बंद रखा, ताकि उसकी गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड सामने न आए। हालांकि, जांच अधिकारियों का कहना है कि इसी असामान्य हरकत से उन्हें पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने में मदद मिली।

जांच के अनुसार, चेतन ने सुबह करीब 7 बजे अपना मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया था। पुलिस का कहना है कि उसने अपनी लोकेशन और ऑनलाइन गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, दिन में लोहगढ़ किले की ओर जाते समय उसने बातचीत करने के लिए बीच-बीच में अपने एक कर्मचारी का मोबाइल फोन भी इस्तेमाल किया।

पहचान छिपाने के लिए पहनी मोटी हुडी

पुलिस के अनुसार, आरोपी चेतन चौधरी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए भीषण गर्मी के बावजूद मोटी हुडी पहन रखी थी। पुलिस का दावा है कि उस समय तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस था, फिर भी वह ट्रेकिंग रास्ते पर केतन अग्रवाल और उनकी मंगेतर सिया गोयल का पीछा कर रहा था। जांच अधिकारियों के मुताबिक, दोपहर करीब 2:30 बजे सिया गोयल ने पहले से तय योजना के तहत विंचू काटा रिज के पास एक सुनसान जगह पर बैठकर इशारा किया। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद चेतन चौधरी अपनी छिपी हुई जगह से बाहर आया और उसने केतन अग्रवाल को पहाड़ी से नीचे धक्का दे दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।

चेतन की ‘ऑफलाइन’ चाल नहीं आई काम

पुलिस जांच के मुताबिक, कई घंटे तक इंटरनेट बंद रखने के बाद आरोपी चेतन चौधरी ने शाम करीब 5:40 बजे दोबारा अपना मोबाइल इंटरनेट चालू किया। जांच अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल जांच के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी में आया यह अचानक बदलाव उनके लिए एक अहम सुराग बना। इससे पूरे घटनाक्रम की समय-सीमा समझने में काफी मदद मिली।

मामले की जांच के तहत रविवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी सिया गोयल की मौजूदगी में लोहगढ़ किले पर घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया और पूरी घटना को दोहराकर देखा। पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि पुलिस ने आरोपियों के आने-जाने का रास्ता, घटनास्थल पर उनकी स्थिति, कथित तौर पर की गई हरकतों और पूरी घटना के क्रम को फिर से तैयार कर उसकी जांच की।

रेलवे गेटमैन से बने DSP! दिन में नौकरी रात में पढ़ाई…पहले ही प्रयास में पास ऐसे पास की BPSC की परीक्षा

बड़ी सफलता पाने के लिए सिर्फ अच्छे हालात नहीं, बल्कि मेहनत और मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है। बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले राजू कुमार ने यह बात सच साबित कर दिखाई। वह रेलवे क्रॉसिंग पर गेटमैन की नौकरी करते थे। दिनभर ड्यूटी करने के बाद वह घर जाकर पढ़ाई में जुट जाते थे। उनका सपना था कि वह सरकारी अधिकारी बनें, और उन्होंने इस सपने को कभी नहीं छोड़ा। राजू कुमार ने अपने पहले ही प्रयास में 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा पास कर ली।

दिन में रेलवे गेटमैन, रात में पढ़ाई

बिहार तक की रिपोर्ट के मुताबिक, 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में राजू कुमार पूरे राज्य में 72वीं रैंक हासिल की है। उनका चयन पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर हुआ। उनकी यह सफलता मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की एक शानदार मिसाल बन गई है। डीएसपी बनने से पहले राजू कुमार बिहार के रक्सौल में भारत-नेपाल सीमा के पास रेलवे गेट नंबर 33 पर गेटमैन की नौकरी करते थे। उनकी ड्यूटी रेलवे फाटक की देखभाल करना और हर मौसम में लंबे समय तक काम करना था। नौकरी की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और बीपीएससी परीक्षा की तैयारी लगातार जारी रखी।

राजू कुमार की सफलता की कहानी

राजू का जीवन आसान नहीं रहा। जब वह 10वीं कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी महज 12 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा। मुश्किल हालात के बावजूद राजू ने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई व सपनों को आगे बढ़ाते रहे। मुश्किल समय में राजू कुमार को उनके चचेरे भाई राजेश कुमार सुमन का पूरा साथ मिला। राजेश रोसड़ा में बीएसएस क्लब नाम से एक मुफ्त संस्थान चलाते थे, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को मार्गदर्शन दिया जाता था। उनके सहयोग और अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत राजू ने पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान बनाए रखा।

पढ़ाई के साथ ही राजू ने रेलवे ग्रुप-डी की परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली। इसके बाद उनकी नियुक्ति रक्सौल में रेलवे गेटमैन के पद पर हुई। इस नौकरी से उन्हें आर्थिक सहारा मिला, जिससे वह अपनी मां और पूरे परिवार की जिम्मेदारियां भी बेहतर तरीके से निभा सके। रेलवे में नौकरी मिलने के बाद भी राजू कुमार ने अपने सपनों को नहीं छोड़ा। उनका लक्ष्य इससे कहीं बड़ा था। उनकी मेहनत और सीखने की लगन को देखकर दोस्तों ने उन्हें प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने की सलाह दी। दोस्तों की बात मानकर राजू ने ग्रेजुएशन में दाखिला लिया और रेलवे की नौकरी के साथ-साथ बीपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।

BPSC में हासिल की 72वीं रैंक

12 घंटे की ड्यूटी के बाद भी वह देर रात तक पढ़ाई करते थे। नौकरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने समय का सही इस्तेमाल किया। उनकी कई वर्षों की मेहनत आखिरकार सफल हुई। पहले ही प्रयास में उन्होंने 70वीं बीपीएससी परीक्षा पास की और बिहार पुलिस सेवा में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर चयनित हो गए।

IT Stocks: AI के चलते भारतीय IT कंपनियों पर और बढ़ेगा दबाव! JPMorgan ने घटाया ग्रोथ अनुमान

IT Stocks: भारत का आईटी सेक्टर आने वाले कुछ सालों तक सुस्त रह सकता है। ब्रोकरेज फर्म JPMorgan की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से आईटी कंपनियों के कारोबार पर दबाव बना रहेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां अभी अपने आईटी बजट को लेकर सतर्क हैं। ऐसे में सेक्टर में तेज रिकवरी की उम्मीद फिलहाल कम नजर आ रही है।

तीन साल से धीमी है ग्रोथ

JPMorgan के मुताबिक, पिछले तीन साल से आईटी सर्विस सेक्टर की रेवेन्यू ग्रोथ सिर्फ 2% से 3% के बीच रही है।

ब्रोकरेज का कहना है कि AI का असर अभी शुरुआती दौर में है। अगले दो साल तक भी ग्रोथ पर दबाव बना रह सकता है। इसी वजह से उसने मध्यम और लंबी अवधि के ग्रोथ अनुमान घटा दिए हैं।

अब JPMorgan को उम्मीद नहीं है कि बड़ी आईटी कंपनियां जल्द मिड-सिंगल डिजिट ग्रोथ हासिल कर पाएंगी। उसका अनुमान है कि इनकी रेवेन्यू ग्रोथ फिलहाल 3% से 4% के आसपास ही रह सकती है।

कंपनियां खर्च करने से बच रही हैं

JPMorgan की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की कंपनियां नई तकनीक और भू-राजनीतिक हालात को लेकर उलझन में हैं। इसी वजह से वे नए आईटी प्रोजेक्ट्स पर फैसले लेने में देरी कर रही हैं।

JPMorgan का कहना है कि कई बड़े सौदों की शुरुआत और नए कॉन्ट्रैक्ट साइन होने में भी देरी हो रही है। इसका असर FY27 की दूसरी तिमाही तक दिखाई दे सकता है।

AI का असर अभी शुरुआती चरण में

ब्रोकरेज का मानना है कि आईटी इंडस्ट्री अभी AI अपनाने के पहले चरण यानी ‘Deflation Phase’ में है। इस दौरान AI की वजह से पुराने और मेंटेनेंस वाले कामों में प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है। लेकिन उसकी भरपाई नए AI प्रोजेक्ट्स से नहीं हो पा रही है। इसलिए कंपनियों की कुल ग्रोथ पर दबाव बना हुआ है।

JPMorgan का मानना है कि सेक्टर में मजबूत रिकवरी FY29 की बजाय अब FY30 के बाद ही देखने को मिल सकती है।

FY27 के अनुमान भी घटाए

ब्रोकरेज ने पहली तिमाही के रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान भी घटा दिए हैं। साथ ही उसे उम्मीद है कि कंपनियां FY27 के लिए अपने गाइडेंस में भी कटौती कर सकती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार वित्त वर्ष की पहली छमाही आमतौर पर जितनी मजबूत रहती है, वैसी स्थिति देखने को नहीं मिलेगी।

वैल्यूएशन पर भी दबाव

JPMorgan ने सेक्टर के कई शेयरों के P/E मल्टीपल में 10% से 25% तक की कटौती की है। ब्रोकरेज का कहना है कि आईटी कंपनियों का मौजूदा वैल्यूएशन वाजिब है, क्योंकि अब सेक्टर की लंबी अवधि की ग्रोथ 7% से 8% की बजाय 5% से भी नीचे आ गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आईटी शेयरों की वैल्यूएशन तभी बेहतर हो सकती है, जब कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ में तेज सुधार दिखे। फिलहाल ऐसी संभावना साफ नजर नहीं आ रही है।

Semiconductor Stocks: सरकार का ₹1.64 लाख करोड़ का सेमीकंडक्टर दांव! इन 6 कंपनियों के शेयरों पर रखें नजर

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दिल्ली में घर खरीदना बन गया सपना! 2 लाख महीने कमाने वाले शख्स ने बयां किया अपना दर्द

दिल्ली जैसे बड़े शहर में घर लेना काफी मुश्किल होता है। वहीं इन दिनों सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर बताया कि परिवार की हर महीने करीब 2 लाख रुपये की कमाई होने के बावजूद वह अपनी पसंद का 2BHK फ्लैट नहीं खरीद पा रहा है। व्यक्ति ने बताया कि वह अपने पार्टनर के साथ ऐसे इलाके में 2BHK फ्लैट तलाश रहा था, जहां सुरक्षा अच्छी हो, आने-जाने की सुविधा हो और आसपास पार्क जैसी सुविधाएं मौजूद हों। लेकिन जब उन्होंने घरों की कीमतें देखीं तो वे हैरान रह गए। व्यक्ति का ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

दिल्ली में फ्लैट लेना मु्श्किल

व्यक्ति ने Reddit पर किए अपनी पोस्ट में लिखा, “हमारी कुल सैलरी लगभग 2L प्रति माह है। भले ही हम पार्कों के पास के इलाकों में 2BHK फ्लैट देखें और उन्हें सुरक्षित माना जाए, वे 2-2.50Cr की बहुत ज्यादा कीमत पर हैं। जिन लोगों के पास माता-पिता या पुश्तैनी पैसे का कोई सहारा नहीं है, उनके लिए ये हमारी पहुंच से बाहर है। उदाहरण के लिए, हमने द्वारका, पीतमपुरा, वगैरह में फ्लैट देखे, और यह हमारी लोन रेंज से बहुत बाहर है। अब, क्या हम ऐसा करेंगे?”

यूजर ने पोस्ट को , “क्या मिड-सैलरी वाले लोगों को अब फ्लैट या घर खरीदने के बारे में सोचना बंद कर देना चाहिए?” टाइटल के साथ शेयर किया।

यूजर्स ने किया कमेंट

ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और इस पर लोगों ने जमकर अपनी राय दी। कई यूजर्स ने कहा कि दिल्ली में बढ़ती प्रॉपर्टी की कीमतों के कारण अच्छी कमाई करने वालों के लिए भी घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, “मुझे लगता है कि प्रॉपर्टी खरीदना जिंदगी का एक बहुत थका देने वाला हिस्सा है। लेकिन मुझे यह भी लगता है कि अगर आपको खरीदना चाहिए, तो यह किसी दूसरे इलाके में होना चाहिए जहां सर्कल रेट कम हों लेकिन पोटेंशियल हो।” एक और यूजर ने कहा, “आप दिल्ली NCR में नहीं कर सकते और न ही करना चाहिए। टियर 2-3 शहरों में जमीन देखें। वहां भी, आप सिर्फ बाहरी इलाकों में ही जमीन खरीद पाएंगे।”

पीएम मोदी की अपील के बाद से सस्ते हुए सोना-चांदी, ₹46000 तक घट गए दाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने जनता से खास अपील की थी। उन्होंने कहा था कि एक साल तक सोना खरीदने से बचे, ताकि विदेशी मुद्रा बचाया जा सके। पीएम मोदी की अपील के बाद सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

कितना सस्ता हुए सोना-चांदी?

इंडियन बुलियन एसोसिएशन (IBA) के आंकड़ों के मुताबिक, 10 मई को जब प्रधानमंत्री ने यह अपील की थी, तब 24 कैरेट सोना 1,53,140 रुपये प्रति 10 ग्राम था। वहीं, चांदी 2,62,350 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिक रही थी।

अब 28 जून तक सोना 13,267 रुपये सस्ता होकर 1,39,873 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। वहीं, चांदी 45,809 रुपये टूटकर 2,16,541 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई है।

इस दौरान सरकार के कुछ फैसलों और वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं में बिकवाली का असर भी कीमतों पर देखने को मिला।

पीएम मोदी ने क्या अपील की थी?

10 मई को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और भारत के बढ़ते आयात बिल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से गैर-जरूरी खरीदारी टालने की अपील की थी।

उन्होंने कहा था कि एक साल तक सोना खरीदने और विदेश यात्रा जैसी गैर-जरूरी चीजों पर खर्च टालें, ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाया जा सके।

प्रधानमंत्री का कहना था कि अगर सोना, ईंधन और दूसरी गैर-जरूरी वस्तुओं का आयात कम होगा, तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा और रुपये को भी मजबूती मिलेगी।

भारत में इसका असर क्यों ज्यादा पड़ता है?

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सोना खरीदने और आयात करने वाले देशों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है।

जब सोने का आयात बढ़ता है, तो डॉलर में ज्यादा भुगतान करना पड़ता है। इससे ट्रेड डेफिसिट और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।

इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से भी बढ़ा दबाव

प्रधानमंत्री की अपील के कुछ दिन बाद सरकार ने सोना और चांदी पर प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी। इसके लिए कस्टम ड्यूटी और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) में बढ़ोतरी की गई।

Senco Gold के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सुवंकर सेन ने पहले Moneycontrol से कहा था कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर कीमत को लेकर संवेदनशील ग्राहकों पर पड़ेगा। उनके मुताबिक, इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से निकट भविष्य में सोने की मांग कम हो सकती है। साथ ही सोने का आयात 10% से 15% तक घटने का अनुमान है।

हालांकि, सरकार का मकसद कीमतें घटाना नहीं, बल्कि सोने के आयात पर लगाम लगाना था। लेकिन ऊंची ड्यूटी और कमजोर मांग की वजह से आने वाले समय में आयात पर असर पड़ सकता है।

Gold Price Today: सोना एक हफ्ते में ₹2510 तक सस्ता, चांदी ₹10000 लुढ़की

Karnataka: रिश्ता बना मौत की वजह! अपहरण के बाद चलती कार में धमाका, आरोपी की दर्दनाक मौत

कर्नाटक के तुमकुरु जिले में एक हैरान कर देने वाला हादसा सामने आया है। यहां एक व्यस्त हाईवे पर चलती कार में जोरदार धमाका हो गया, जिससे अपहरण के आरोपी की जिंदा जलकर मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हादसे से कुछ ही देर पहले जिस महिला का कथित तौर पर अपहरण किया गया था, वह चलती कार से किसी तरह बाहर निकलने में सफल हो गई थी।

अपहरण के आरोपी की जिंदा जलकर मौत

यह घटना शनिवार को सिरा तालुका के जोगीहल्ली के पास नेशनल हाईवे-48 पर हुई। अचानक कार में धमाका हुआ और देखते ही देखते उसमें आग लग गई। इस हादसे में 30 वर्षीय नागेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, महिला और कैब चालक प्रवीण घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए तुमकुरु जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस के अनुसार, नागेंद्र और महिला पहले एक-दूसरे के साथ रिश्ते में थे। महिला बेंगलुरु में ओटी (ऑपरेशन थिएटर) टेक्नीशियन के रूप में काम करती है। कुछ समय पहले दोनों का रिश्ता खत्म हो गया था। पुलिस का कहना है कि दोनों के बीच विवाद होने के बाद महिला ने नागेंद्र का मोबाइल नंबर भी ब्लॉक कर दिया था। आरोप है कि शनिवार सुबह नागेंद्र बेंगलुरु के जयनगर स्थित महिला के किराए के घर पहुंचा। वहां दोनों के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद उसने कथित तौर पर महिला को जबरन एक पीले नंबर प्लेट वाली उबर कैब में बैठा लिया। महिला के लापता होने पर उसके माता-पिता ने जयनगर पुलिस थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई।

महिला ने कूदकर बचाई जान

पुलिस के मुताबिक, अंकोला की ओर जाते समय नागेंद्र ने कथित तौर पर महिला को जान से मारने और खुद भी आत्महत्या करने की धमकी दी। जांच में यह भी सामने आया है कि उसके पास एक संदिग्ध विस्फोटक उपकरण था, जिसे उसने रास्ते में महिला को दिखाया था। यह पूरी घटना जोगीहल्ली के पास और भी खतरनाक हो गई, जब आरोप है कि नागेंद्र ने चलती कार में महिला पर चाकू से हमला कर दिया। हालात बिगड़ते देख कैब चालक ने तुरंत गाड़ी रोक दी। इसका फायदा उठाकर महिला ने कार का दरवाजा खोला और बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली।

आरोपी की दर्दनाक मौत

महिला के कार से बाहर निकलने के कुछ ही पल बाद गाड़ी में जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते उसमें आग लग गई। नागेंद्र कार के अंदर ही फंस गया और मदद पहुंचने से पहले उसकी जिंदा जलकर मौत हो गई। धमाके के बाद नेशनल हाईवे पर एक किलोमीटर से ज्यादा लंबा जाम लग गया। तुमकुरु के पुलिस अधीक्षक अशोक के.वी. ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि नागेंद्र के पास एक संदिग्ध विस्फोटक उपकरण था। पुलिस को शक है कि धमाका उसने जानबूझकर किया। जांच के दौरान कार से बम जैसा विस्फोटक सामान भी बरामद हुआ है। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि विस्फोटक किस प्रकार का था, धमाका कैसे हुआ और उसे कहां से लाया गया था। कल्लांबेला पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और धमाके के पीछे की सभी परिस्थितियों का पता लगाने में जुटी है।

Semiconductor Stocks: सरकार का ₹1.64 लाख करोड़ का सेमीकंडक्टर दांव! इन 6 कंपनियों के शेयरों पर रखें नजर

Semiconductor Stocks: भारत अब सिर्फ मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबल करने वाला देश नहीं रहना चाहता। सरकार अब देश में सेमीकंडक्टर यानी चिप मैन्युफैक्चरिंग का पूरा इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में सरकार ने हाल ही में करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। India Semiconductor Mission 2.0 और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बड़ा निवेश किया जा रहा है।

इसका असर सिर्फ चिप बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, PCB, EMS और चिप डिजाइन से जुड़ी कई कंपनियों को भी इसका फायदा मिल सकता है। आइए जानते हैं ऐसी 6 कंपनियों के बारे में।

Dixon Technologies

Dixon Technologies देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विस (EMS) कंपनियों में शामिल है। कंपनी मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट बनाती है।

अगर भारत में चिप और PCB का प्रोडक्शन बढ़ता है, तो Dixon की आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी। साथ ही, लागत घटाने में भी मदद मिलेगी।

Amber Enterprises

Amber Enterprises इस सरकारी पहल का सीधा फायदा उठाने वाली कंपनियों में मानी जा रही है। कंपनी उत्तर प्रदेश के जेवर में करीब 3,500 करोड़ रुपये का प्लांट लगा रही है। यहां HVAC कंपोनेंट्स और PCB Assemblies की मैन्युफैक्चरिंग होगी। देश में PCB का उत्पादन बढ़ने से कंपनी के कारोबार को नई रफ्तार मिल सकती है।

Kaynes Technology

Kaynes Technology की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और PCB Assembly कारोबार में दमदार मौजूदगी है। कंपनी ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, डिफेंस और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट बनाती है। सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम मजबूत होने से कंपनी को नए ऑर्डर मिलने और कारोबार बढ़ने की संभावना है।

CG Power

CG Power अब सिर्फ इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी नहीं रह गई है। कंपनी सेमीकंडक्टर कारोबार में भी कदम रख चुकी है। ये गुजरात में रेनेसास और Stars Microelectronics के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर प्लांट बना रही है। सरकार के बढ़ते फोकस से इस प्रोजेक्ट को भी रफ्तार मिल सकती है।

Tata Group

Tata Group भी भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का बड़ा हिस्सा है। Tata Electronics असम में चिप पैकेजिंग (OSAT) प्लांट और गुजरात में सेमीकंडक्टर फैब प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। सरकार की नई योजनाओं और निवेश का फायदा टाटा ग्रुप को भी मिल सकता है। हालांकि, Tata Electronics अभी शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है।

MosChip Technologies

MosChip Technologies चिप डिजाइन और एम्बेडेड इंजीनियरिंग सेवाएं देने वाली कंपनी है। अगर भारत में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री तेजी से बढ़ती है, तो डिजाइन और रिसर्च से जुड़ी कंपनियों की मांग भी बढ़ सकती है। इसका फायदा MosChip को मिल सकता है।

क्यों अहम है सरकार का यह कदम?

सरकार का लक्ष्य सिर्फ चिप बनाना नहीं है। कोशिश यह है कि भारत पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन विकसित करे। इसमें फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, टेस्टिंग, PCB और डिजाइन जैसे सभी हिस्से शामिल हैं।

अगर यह योजना सफल रहती है, तो भारत की आयात पर निर्भरता घटेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी। साथ ही हजारों नई नौकरियां भी पैदा होंगी। यही वजह है कि निवेशकों की नजर अब इस सेक्टर और इससे जुड़ी कंपनियों पर बनी हुई है।

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