Viral Post: 35 लाख की नौकरी छोड़ की UPSC की तैयारी, फिर… सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कहानी

ज्यादातर लोग आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद करोड़ों के पैकेज वाली नौकरी का सपना देखते हैं। लेकिन आईआईटी दिल्ली के एक पूर्व छात्र ने अलग रास्ता चुना। खबरों के मुताबिक, उन्हें एक जापानी कंपनी से 35 लाख रुपये सालाना के पैकेज का ऑफर मिला था, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया। उनका सपना आईपीएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना था। इसलिए उन्होंने मोटी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला किया। उनकी ये मेहनत रंग लाई और पहली ही कोशिश में वो आईपीएस अधिकारी बन गए। अब उनकी ये स्टोरी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

आईईटी से की पढ़ाई

आईपीएस अधिकारी अर्चित चांडक की प्रेरणादायक कहानी हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विकास अल्विस नाम के एक यूजर ने शेयर की है। पोस्ट में अर्चित ने आरामदायक करियर का ऑप्शन छोड़कर सिविल सेवा की राह चुनी। वायरल पोस्ट के मुताबिक, “अर्चित चांडक नागपुर के रहने वाले हैं और उन्होंने कम उम्र से ही पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन किया। 2012 में वह जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE) में शहर के टॉपर बने, जिसके बाद उन्हें IIT दिल्ली में दाखिला मिला। वहां उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में B.Tech की पढ़ाई पूरी की।”

पहली ही कोशिश में मिली सफलता

साल 2016 में आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद अर्चित चांडक को एक जापानी कंपनी से करीब 35 लाख रुपये सालाना के पैकेज वाली नौकरी का ऑफर मिला था। लेकिन उन्होंने इस आकर्षक नौकरी को स्वीकार करने के बजाय यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया। अर्चित चांडक की मेहनत आखिरकार सफल रही। यूपीएससी की तैयारी शुरू करने के करीब दो साल बाद उन्होंने साल 2018 में पहली ही कोशिश में सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। इस परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 184 हासिल की, जिसके बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए हुआ। उनकी यह सफलता कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई।

छोड़ी 35 लाख की नौकरी

उन्होंने आगे दावा किया कि चांडक ने अपने करियर की शुरुआत नागपुर में डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) के रूप में की थी और फिलहाल वह महाराष्ट्र के अकोला में सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) के पद पर तैनात हैं। पोस्ट शेयर करने वाले यूजर ने लिखा, “मैं कहना चाहता हूं कि जिंदगी हमेशा हमारे कंट्रोल में होनी चाहिए। देखिए उन्हें कितना कॉन्फिडेंस था कि वह ₹35 LPA की नौकरी का ऑफर ठुकरा सकते थे और पूरी तरह से नए सिरे से कुछ करने की तैयारी कर सकते थे। खुद पर भरोसा कमाल कर सकता है।” ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही।

सोशल मीडिया यूजर्स ने किया कमेंट

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने फाइनेंशियल सिक्योरिटी चुनने के बजाय अपने सपने को पूरा करने के चांडक के कमिटमेंट की तारीफ की। एक यूजर ने कमेंट किया, “सफलता अक्सर आपके करियर को आपके मकसद के साथ जोड़ने से मिलती है, न कि सिर्फ सबसे ज्यादा सैलरी के पीछे भागने से।” एक तीसरे यूजर ने कहा, “यह सिर्फ खुद पर भरोसा नहीं था। यह उस मकसद के लिए सोच-समझकर रिस्क लेने की इच्छा भी थी जिस पर उसे सच में भरोसा था।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “तो फिर IIT JEE और बीच का क्या मकसद है जब मकसद पब्लिक सर्विस ही हो।” एक अन्य यूजर ने कहा, “कमाई ज्यादा है IAS IPS बनकर..35L तो महीना कमा लेगा।”

कच्चे तेल की नरमी और जियोपॉलिटिकल जोखिम कम होने से इन सेक्टर्स को होगा फायदा, इन पर रहे नजर

अमर सिंह

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश के तौर पर,भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा तेल आयात करता है। इसलिए,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से उसे फायदा होता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में प्रति बैरल $1 की गिरावट से देश के सालाना आयात बिल में आम तौर पर लगभग 10,000 से 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।

इसके साथ ही जियोपॉलिटिकल जोखिम कम हो रहे हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव का घटना,ईरान-इजरायल युद्ध का समाधान,होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही का शुरू होना भी भारत के लिए फायदेमंद है। इससे देश को महंगाई कम होने,करंट अकाउंट घाटा घटने,रुपये को सहारा मिलने और RBI व सरकार के लिए पॉलिसी बनाने की बेहतर गुंजाइश मिलने जैसे फायदे होंगे।

इतिहास गवाह है कि तेल की कीमतों में भारी गिरावट (जैसे 2014-16 के दौरान) ने कुछ खास सेक्टर को काफी फायदा पहुंचाया है,भले ही ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार धीमी रही हो। मौजूदा हालात से फायदे में रहने वाले सेक्टर एक जैसे नहीं हैं। ये फायदे उन इंडस्ट्रीज़ तक सीमित हैं जहां फ्यूल या कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की लागत का हिस्सा बहुत ज्यादा होता है,या जहां कम महंगाई और ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम से बिक्री की मात्रा(वॉल्यूम)सीधे तौर पर बढ़ती है।

कच्चे तेल के भाव कम होने से एविएशन सेक्टर को सीधा और बड़ा फायदा मिलता है। भारतीय एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF)का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत होता है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से ATF की कीमतें तुरंत कम हो जाती हैं,जिससे इंडिगो,एयर इंडिया और स्पाइसजेट के ऑपरेटिंग मार्जिन में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होती है।

तेल के भाव घटने से एयरलाइंस या तो अपने मार्जिन को सुरक्षित रख सकती हैं या कम किराए के जरिए डिमांड बढ़ा सकती हैं। ये दोनों ही बातें इस सेक्टर के लिए अच्छी हैं। कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होने से हेजिंग की लागत भी कम हो जाती है। पहले के दौर में,तेल की कीमतों में बदलाव पर एयरलाइन शेयरों ने अच्छी तेजी दिखाई है। घरेलू हवाई ट्रैफिक में अभी भी मजबूत बढ़त बनी हुई है,इसलिए ईंधन की कम लागत इनके मुनाफे और क्षमता बढ़ाने में आने वाली एक बड़ी रुकावट को दूर कर सकती है।

इसके बाद डाउनस्ट्रीम ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs)और कच्चे तेल से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का नंबर आता है। इंडियन ऑयल,BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने की कम लागत का फायदा मिलता है। जब रिटेल फ्यूल की कीमतों में बदलाव में देरी होती है या टैक्स की वजह से कीमतों में आई गिरावट का कुछ हिस्सा एडजस्ट हो जाता है। ऐसे में इनका मार्केटिंग मार्जिन बढ़ जाता है। इनको इन्वेंट्री से होने वाला फायदा भी मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में कमी से पेंट सेक्टर को फायदा होता है। इनके कच्चे माल की लागत (जैसे सॉल्वैंट्स,रेजिन और कुछ एडिटिव्स)का 35-50 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल से जुड़ा होता है। ऐसे में कच्चे तेल में नरमी से एशियन पेंट्स,बर्जर पेंट्स और ऐसी दूसरी कंपनियों को अच्छे मार्जिन या कीमतें तय करने में लचीलेपन का फायदा मिलता है।

टायर बनाने वाली कंपनियों (अपोलो टायर्स,MRF,सिएट,JK टायर)को सिंथेटिक रबर और कार्बन ब्लैक की लागत में कमी से राहत मिल रही है। लुब्रिकेंट्स और कुछ खास केमिकल सेगमेंट को भी इसका फायदा हो रहा है। जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो इन कंपनियों के लिए लागत कम,मार्जिन ज्यादा वाली क्लासिक स्थितियां बनती हैं।

तेल की कीमतों में कमी से ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को लागत और मांग,दोनों ही फ्रंट पर फायदा होता है। टू-व्हीलर और पैसेंजर गाड़ियों के मामले में,पेट्रोल और डीजल की कम कीमतें गाड़ियों की कुल ओनरशिप लागत (टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप)को बेहतर बनाती हैं। कीमत को लेकर संवेदनशील बाजार में यह खरीदारी का एक अहम कारण होता है। पहले भी देखा गया है कि जब ईंधन की कीमतें कम रही हैं,तब एंट्री-लेवल और मास-मार्केट सेगमेंट में रिटेल बिक्री में तेजी आई है।

इसके अलावा क्रूड की कीमतों में कमी से कमर्शियल गाड़ियों और बड़े लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम (ट्रकिंग,लास्ट-माइल डिलीवरी)को डीजल खर्च पर सीधे बचत होती है,जो वेरिएबल कॉस्ट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों की ऑपरेटिंग लेवरेज बेहतर होती है और ज्यादा ब्याज दरों वाले माहौल में वॉल्यूम रिकवरी में मदद मिल सकती है। भारत में सामान की ढुलाई के लिए सड़क परिवहन ही मुख्य जरिया (70%) है,इसलिए सप्लाई चेन पर इसका मल्टीप्लायर असर काफी अहम है।

कच्चे तेल में नरमी से कंज्यूमर-फेसिंग सेक्टर और फाइनेंशियल सेक्टर को मैक्रो-लेवल पर दूसरे दौर के फायदे मिलते हैं। फ्यूल और ट्रांसपोर्ट की लागत कम होने से महंगाई कम होती है। इससे RBI को पॉलिसी रेट्स को मैनेज करने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिलती है। इससे क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी में सुधार होता है। जिन बैंकों और NBFCs का रिटेल और SME पोर्टफोलियो मज़बूत है,उन्हें कम महंगाई,स्थिर या कम रेट्स और बेहतर होते कॉर्पोरेट कैश फ्लो के अच्छे चक्र से फायदा होता है।

इसके अलावा ईंधन और ट्रांसपोर्ट पर खर्च कम होने से’कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी’और कुछ खास FMCG कैटेगरी में खर्च करने लायक आय(डिस्पोजेबल इनकम)में थोड़ी लेकिन वास्तविक बढ़ोतरी देखने को मिलती है। अगर कम महंगाई और बेहतर फिस्कल हेडरूम (ईंधन सब्सिडी का दबाव कम होने से)से बेहतर कैपेक्स(पूंजीगत व्यय)माहौल बनता है या ब्याज दरों पर निर्भर मांग में सुधार होता है,तो रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो सकता है।

भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से इन प्रभावों का असर सिर्फ तेल के गणित से कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। ग्लोबलअनिश्चितता कम होने से इक्विटी रिस्क प्रीमियम घटता है,FII निवेश को बढ़ावा मिलता है और कुल मिलाकर जोखिम लेने की क्षमता बेहतर होती है। ग्लोबल ट्रेड और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़े सेक्टर जैसे कुछ कैपिटल गुड्स,चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज़्म/हॉस्पिटैलिटी शेयरों के लिए अनुकूल माहौल बनता है। सप्लाई-चेन में स्थिरता से आयात पर निर्भर असेंबली इंडस्ट्रीज को भी मदद मिलता है।

सस्ती एनर्जी और शांत भू-राजनीतिक स्थिति का मेल वोलैटिलिटी के उन मुख्य कारणों में से एक को घटाता है,जिन्होंने समय-समय पर भारत की विकास गाथा में बाधा डाली है।

एक बार होने वाले इन्वेंट्री या मार्जिन से मिलने वाले फायदे और लगातार होने वाली कमाई में बढ़ोतरी के बीच फ़र्क करना जरूरी है। ग्राहकों को कितना फायदा होगा और कंपनियां कितना फायदा अपने पास रखेंगी,यह टैक्स पॉलिसी,कॉम्पिटिशन की तीव्रता और प्राइसिंग डिसिप्लिन पर निर्भर करेगा। फायदा पाने वाले सेक्टर की हर कंपनी को एक जैसा फायदा नहीं होगा। बैलेंस-शीट की मजबूती,प्राइसिंग पावर और ऑपरेशनल क्षमता के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां ज्यादा बेहतर स्थिति में रहेंगी।

बुनियादी नज़रिए से देखें तो,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कम होते जियोपॉलिटिकल तनाव का मेल भारत के लिए एक अच्छा संकेत है। इससे बाहरी फैक्टर का दबाव कम होता है,महंगाई पर लगाम लगती है और ज्यादा कर्ज वाले सेक्टर में कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है। जब तेल की कीमतें गिरती हैं और तो बाजार अक्सर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है।

इस स्थिति में निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जिनका ऑपरेटिंग लेवरेज ज़्यादा हो (खासकर ईंधन या कच्चे तेल से जुड़े इनपुट के मामले में),जिनकी बैलेंस शीट मज़बूत हो (ताकि वे किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकें) और जिनकी वॉल्यूम ग्रोथ भरोसेमंद हो। ऐसे माहौल में, एविएशन,OMCs,पेंट,टायर,ऑटोमोबाइल,लॉजिस्टिक्स और ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले फाइनेंशियल सेक्टर में चुनिंदा निवेश करना,भारत की जारी स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी में शामिल होने का एक भरोसेमंद तरीका है।

अमर सिंह एंजेल वन में रिसर्च के सीनियर VP हैं.

 

Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

 

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गर्मियों में पसीने से गंदा हुआ तकिया बन सकता है खतरा, ऐसे करें सफाई

गर्मियों के मौसम में रात को पसीना आना बहुत आम बात है, लेकिन यही पसीना धीरे-धीरे हमारे तकिये के अंदर जमा होने लगता है और हमें पता भी नहीं चलता। समय के साथ यह नमी बैक्टीरिया और गंदगी का कारण बनती है, जिससे तकिये से बदबू आने लगती है और उस पर पीले दाग-धब्बे भी दिखाई देने लगते हैं। ऐसा तकिया इस्तेमाल करने से नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है और सुबह उठने पर असहज महसूस होता है।

इतना ही नहीं, गंदे तकिये पर सोने से स्किन से जुड़ी समस्याएं जैसे एलर्जी, रैशेज और पिंपल्स का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए तकिये की साफ-सफाई पर ध्यान देना बेहद जरूरी है, ताकि नींद भी अच्छी मिले और सेहत भी सुरक्षित रहे।

लोग क्यों डरते हैं तकिया धोने से?

अधिकतर लोग तकिये को धोने से इसलिए बचते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वॉशिंग मशीन में डालने से उसका शेप और रुई खराब हो जाएगी। लेकिन सही तरीके अपनाकर आप आसानी से तकिये को नया जैसा साफ और फ्लफी बना सकते हैं।

धोने से पहले सबसे जरूरी चेक

सबसे पहले तकिये का केयर लेबल जरूर देखें। ज्यादातर कॉटन, सिंथेटिक और डाउन पिलो मशीन में धुल जाते हैं। लेकिन मेमोरी फोम वाले तकिये को कभी भी मशीन में नहीं डालना चाहिए, वरना वह खराब हो सकता है।

एक साथ दो तकिये क्यों जरूरी हैं?

वॉशिंग मशीन में सिर्फ एक तकिया डालने से उसका बैलेंस बिगड़ सकता है। इसलिए हमेशा दो तकिये साथ में धोएं। इससे मशीन भी सही चलेगी और दोनों तकिये अच्छे से साफ हो जाएंगे।

बदबू और दाग हटाने का घरेलू जादू

सिर्फ डिटर्जेंट काफी नहीं होता। इसके लिए डिटर्जेंट के साथ आधा कप बेकिंग सोडा और आधा कप सफेद सिरका मिलाएं। बेकिंग सोडा बदबू को खत्म करता है, जबकि सिरका पीले दागों को हटाने में मदद करता है।

सही वॉशिंग सेटिंग है गेम चेंजर

तकिये को हमेशा ‘जेंटल’ या ‘डेलिकेट’ मोड पर गुनगुने पानी के साथ धोएं। इससे बैक्टीरिया और धूल के कण भी साफ हो जाते हैं और तकिये का आकार भी सुरक्षित रहता है।

एक्स्ट्रा रिंस से मिलेगा परफेक्ट क्लीन रिजल्ट

धोने के बाद एक अतिरिक्त रिंस साइकल जरूर चलाएं। इससे तकिये के अंदर बचा हुआ साबुन और झाग पूरी तरह निकल जाता है और तकिया ज्यादा फ्रेश महसूस होता है।

तकिये को फिर से फ्लफी बनाने का सीक्रेट

अगर ड्रायर है तो उसके साथ 2–3 टेनिस बॉल्स डाल दें। ये तकिये के अंदर रुई को एक जगह चिपकने नहीं देते और तकिया फिर से फूला हुआ हो जाता है।

धूप है सबसे नेचुरल क्लीनर

ड्रायर न हो तो तकिये को धूप में अच्छे से सुखाएं। हल्के हाथों से थपथपाने के बाद उसे फ्लैट रखकर सूखने दें। धूप से नमी और बदबू दोनों खत्म हो जाती हैं और तकिया बिल्कुल नया जैसा हो जाता है।

छोटा सा हाइजीन रिमाइंडर

बेहतर हाइजीन के लिए तकिये को साल में 2–3 बार जरूर धोएं और हर हफ्ते तकिये का कवर बदलना न भूलें। इससे आपकी नींद भी बेहतर होगी और हेल्थ भी सुरक्षित रहेगी।

SIP ने संभाल लिया भारतीय मार्केट, दो वजहों से शेयरों में आया ताबड़तोड़ निवेश, लेकिन जेपीमॉर्गन ने जारी किया यह अलर्ट

टैक्स और पॉलिसी में कई बदलाव ने भारतीय स्टॉक मार्केट में निवेश को अधिक आकर्षक बना दिया है। यह दावा जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट में किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो वर्षों में शेयर बाजार से सुस्त रिटर्न के बावजूद इन बदलावों के चलते घरेलू शेयर मार्केट में निवेश की रफ्तार यानी इनफ्लो के लगातार मजबूत बने रहने की संभावना है। जेपीमॉर्गन के मुताबिक लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स, डेट म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर टैक्स में हालिया बदलावों ने रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो को ऐसा बना दिया कि इक्विटी में निवेश अधिक आकर्षक हो गया।

पॉलिसी और टैक्स से इक्विटी मार्केट को मिल रहा सपोर्ट

जेपी मॉर्गन ने अपनी इक्विटी स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में कहा कि पॉलिसी और टैक्स से इक्विटी मार्केट को सपोर्ट मिल रहा है। इक्विटी पर 12.5% ​​LTCG टैक्स लगता है, और इंडेक्सेशन हटाने, इंश्योरेंस पॉलिसी से मिलने वाले पैसे पर टैक्स और डेट म्यूचुअल फंड के लिए स्लैब-रेट टैक्स से इक्विटी की चमक बढ़ी। ब्रोकरेज फर्म का मानना ​​है कि इन स्ट्रक्चरल बदलाव और SIP के जरिए खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से इक्विटी मार्केट में घरेलू निवेश लगातार मजबूत बना रहेगा।

जेपीमॉर्गन का कहना है कि वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में अपना निवेश कम किया लेकिन फिर भी घरेलू निवेशक डटे रहे। इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स ने भले ही बहुत ज्यादा रिटर्न नहीं दिया, लेकिन रिटेल निवेशकों ने एसआईपी के जरिए निवेश जारी रखा। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इससे बाजार में लॉन्ग टर्म बदलाव का संकेत मिल रहा है।

SIP से मिला सपोर्ट लेकिन इस बात को लेकर किया अलर्ट

जेपीमॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में एसआईपी के बढ़ते महत्व पर जोर दिया, जो इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश आने का मुख्य जरिया बन गए हैं। जेपीमॉर्गन के मुताबिक हर महीने एसआईपी में निवेश का लगातार बढ़ना दिखाता है कि घरों की बचत का अधिकतर हिस्सा अब फाइनेंशियल एसेट्स में जा रहा है और आने वाले वर्षों में भी इस रुझान के बने रहने की उम्मीद है। हालांकि जेपीमॉर्गन ने चेतावनी दी है कि अगर लंबे समय तक एसआईपी में मासिक निवेश ₹25 हजार करोड़ से कम रहता है, तो निवेशकों के नजरिए पर दबाव पड़ सकता है।

एक और रिस्क रेगुलेटरी बदलावों से जुड़ा है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इन बदलावों से डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग वॉल्यूम में 20% से अधिक की गिरावट आ सकती है और इसका असर मार्केट की एक्टिविटीज पर पड़ सकता है।

Nifty Outlook for June 29: निफ्टी के चार्ट पर ये लेवल्स करें मार्क, 5 एक्सपर्ट्स ने तैयार की ये ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी

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Dividend Stock: महिंद्रा ग्रुप की कंपनी दे रही है ₹110 का रिकॉर्ड डिविडेंड, फायदा पाने के लिए 3 जुलाई से पहले बन जाएं शेयरहोल्डर

कंप्रेसर, पंप और डीजल इंजन बनाने वाली स्वराज इंजन्स के शेयरहोल्डर्स को जल्द ही 110 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड मिलने वाला है। डिविडेंड वित्त वर्ष 2025-26 के लिए है। ​यह कंपनी की ओर से घोषित अब तक का सबसे ज्यादा डिविडेंड अमाउंट है। शेयरहोल्डर्स की पात्रता तय करने के लिए रिकॉर्ड डेट 3 जुलाई 2026 रखी गई है। इस तारीख तक जिन शेयरधारकों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, वे डिविडेंड पाने के हकदार होंगे।

इस डिविडेंड पर कंपनी की 20 जुलाई को होने वाली सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट किया जाएगा। इससे पहले वित्त वर्ष 2025 के लिए महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप की कंपनी स्वराज इंजन्स ने अपने शेयरहोल्डर्स को 104.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दिया था। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। स्वराज इंजन्स में महिंद्रा एंड महिंद्रा के पास 52.11 प्रतिशत शेयरहोल्डिंग है।

Swaraj Engines के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 3946.50 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 4800 करोड़ रुपये के करीब है। शेयर 2 साल में 30 प्रतिशत चढ़ा है। 3 साल में कीमत 90 प्रतिशत और 3 महीनों में 12 प्रतिशत उछली है। शेयर BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है। BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 4,725.95 रुपये और एडजस्टेड लो 3,300 रुपये है।

Swaraj Engines की वित्तीय सेहत

कंपनी का जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 545.79 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 54.56 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 2,007.13 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 196.31 करोड़ रुपये रहा।

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3 जुलाई महिंद्रा ग्रुप की इन कंपनियों के डिविडेंड की भी रिकॉर्ड डेट

3 जुलाई महिंद्रा एंड मंहिद्रा, टेक महिंद्रा, महिंद्रा लाइफ और एसएमएल महिंद्रा के डिविडेंड के लिए भी रिकॉर्ड डेट है। महिंद्रा एंड मंहिद्रा 33 रुपये, टेक महिंद्रा 36 रुपये, महिंद्रा लाइफ 3.50 रुपये और एसएमएल महिंद्रा 23.50 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देने वाली है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Dividend Stocks: इस हफ्ते 40 से ज्यादा कंपनियां देंगी डिविडेंड का तोहफा, बजाज और M&M जैसे नाम शामिल

Dividend Stocks: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए नया हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। 29 जून से 3 जुलाई के बीच 40 से ज्यादा कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होने जा रहे हैं। इनमें Bajaj Holdings & Investment के स्पेशल डिविडेंड और Mahindra & Mahindra (M&M) के अब तक के सबसे बड़े डिविडेंड पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

इसके अलावा Shriram Finance, Bharat Forge, Union Bank of India, Bajaj Finserv, Bajaj Finance समेत कई कंपनियां भी इस हफ्ते डिविडेंड के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करेंगी। आइए जानते हैं किस दिन कौन-कौन से शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे।

29 जून: Raymond और Kalpataru समेत ये कंपनियां 

29 जून को Raymond Lifestyle का शेयर एक्स-डिविडेंड होगा। कंपनी ने 2 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर 1 रुपये का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है।

Kalpataru Projects भी 29 जून को एक्स-डिविडेंड होगा। कंपनी ने 11 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है। 13 अगस्त या उससे पहले डिविडेंड का भुगतान किया जाएगा।

इसके अलावा Jyothy Labs भी 3.50 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करेगा। वहीं, Kansai Nerolac Paints ने 2.50 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है।

30 जून: Bajaj Group के तीन शेयरों पर रहेगी नजर

30 जून को Bajaj Group की तीन बड़ी कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे। इनमें Bajaj Finserv, Bajaj Holdings & Investment और Bajaj Finance शामिल हैं। इसी दिन Maharashtra Scooters भी 60 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड के लिए एक्स-डिविडेंड होगा।

Bajaj Finserv ने 1.50 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है। Bajaj Finance ने 6 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।

Bajaj Holdings & Investment ने निवेशकों को बड़ा तोहफा दिया है। कंपनी ने 80 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड और 50 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड घोषित किया है। यानी कुल 130 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड मिलेगा।

1 जुलाई: DCM Shriram और Grovy India

1 जुलाई को DCM Shriram Fine Chemicals का शेयर 0.40 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड के लिए एक्स-डिविडेंड होगा।

वहीं, रियल एस्टेट कंपनी Grovy India भी 0.10 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करेगी।

2 जुलाई: Chembond Material और Lloyds Enterprises

2 जुलाई को Chembond Material Technologies का शेयर 2 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड के लिए एक्स-डिविडेंड होगा।

इसके अलावा Lloyds Enterprises भी 0.05 रुपये प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड के लिए एक्स-डेट पर रहेगा।

3 जुलाई: M&M, Bharat Forge, Shriram Finance समेत 33 कंपनियां

3 जुलाई इस हफ्ते का सबसे व्यस्त दिन रहने वाला है। इस दिन 33 कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे।

  • Mahindra & Mahindra ने 33 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है। यह कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड है।
  • Bharat Forge निवेशकों को 6.50 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड देगी।
  • Shriram Finance ने 6 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है।
  • Union Bank of India ने 5 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड तय किया है।
  • Thermax ने 14 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड और 6 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड घोषित किया है।
  • Akums Drugs & Pharmaceuticals ने 1 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड और 2 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड घोषित किया है।
  • Biocon अपने निवेशकों को 0.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी।

इन सभी कंपनियों ने 3 जुलाई को रिकॉर्ड डेट तय की है। यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों का नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होगा, वही डिविडेंड पाने के पात्र होंगे।

Stocks to Buy: ये 10 स्टॉक्स दे सकते हैं 51% तक रिटर्न, एक्सपर्ट्स ने दी खरीदने की सलाह

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Video: एक छलांग और खत्म हो गई जिंदगी! दोस्तों के सामने हुआ दिल दहला देने वाला हादसा

दोस्तों के साथ घूमने के लिए गया एक युवक कभी वापस घर नहीं लौट सका। महाराष्ट्र के मालवन में एक रिजॉर्ट के स्विमिंग पूल में नहाते समय हुए हादसे में 25 साल के युवक की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि युवक ने पूल के कम गहरे हिस्से में छलांग लगा दी, जिससे उसे गंभीर चोट लगी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है, जिसे देखकर लोग दुख जता रहे हैं और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।

एक छलांग और खत्म हो गई जिंदगी! 

मृतक की पहचान महाराष्ट्र के सांगली जिले के इस्लामपुर निवासी श्रेणिक मिलिंद टाकले के रूप में हुई है। वह वीकेंड की छुट्टियां बिताने अपने दोस्तों के साथ मालवन घूमने गए थे। सभी लोग वायरी के एक रिजॉर्ट में ठहरे थे। दोपहर में वे स्विमिंग पूल में मस्ती कर रहे थे। कुछ दोस्त पूल में तैर रहे थे, जबकि बाकी लोग पूल के किनारे डांस कर रहे थे और संगीत का आनंद ले रहे थे।

इस हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ युवक स्विमिंग पूल में नहाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि एक युवक पूल के किनारे डांस कर रहा है। तभी कैमरा घूमता है और 25 वर्षीय श्रेणिक एक कमरे की छत पर खड़ा नजर आता है। इसके बाद वह पूल में छलांग लगा देता है। बताया जा रहा है कि उसे यह पता नहीं था कि वह पूल के कम गहरे हिस्से में कूद रहा है, जिसके कारण बड़ा हादसा हो गया।

दोस्तों के सामने हुआ दिल दहला देने वाला हादसा

रिपोर्ट के मुताबिक, छलांग लगाने के बाद श्रेणिक का सिर पूल की तली से जोर से टकराया, जिससे उसे गंभीर चोट लगी। शुरुआत में उसके दोस्तों को समझ नहीं आया कि क्या हुआ है। लेकिन जब काफी देर तक वह पानी से बाहर नहीं निकला, तो सभी घबरा गए और उसे तुरंत बाहर निकालकर पास के अस्पताल ले गए। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इस हादसे के बाद सोशल मीडिया पर लोग युवक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना जता रहे हैं। वहीं, कई लोगों ने स्विमिंग पूल में सुरक्षा नियमों का पालन करने की जरूरत पर भी जोर दिया। लोगों का कहना है कि ज्यादातर पूलों में साफ तौर पर लिखा होता है कि कम गहरे हिस्से में गोता नहीं लगाना चाहिए। एक यूजर ने लिखा, “ज्यादातर स्विमिंग पूलों की गहराई करीब 6 फीट तक होती है और वहां साफ चेतावनी दी जाती है कि पूल में गोता न लगाएं।” वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा, “युवक ने कम गहरे पानी में सीधा गोता लगा दिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि पानी की गहराई बहुत कम थी। संभव है कि उसका सिर पूल की कंक्रीट की तली से जोर से टकराया, जिससे यह दुखद हादसा हो गया।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह स्विमिंग पूल गोता लगाने के लिए पर्याप्त गहरा नहीं था। ऐसा लगता है कि युवक का सिर पूल की तली से टकरा गया।” वहीं, एक और व्यक्ति ने कहा, “यह बेहद दुखद घटना है। तैराकी का सबसे जरूरी नियम है कि कम गहरे पानी में कभी भी गोता नहीं लगाना चाहिए। सुरक्षित डाइव के लिए पानी की पर्याप्त गहराई होना बहुत जरूरी है।” एक अन्य यूजर ने इस हादसे पर दुख जताते हुए लिखा, “यह दिल तोड़ने वाली घटना है। एक पल की लापरवाही पूरी जिंदगी बदल सकती है। मेरी संवेदनाएं युवक के परिवार और उसके सभी करीबियों के साथ हैं। ईश्वर उसकी आत्मा को शांति दे।”

Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

Market View : गुरुवार को पिछले कारोबारी सत्र में आखिरी घंटे में बाजार में ऊपरी स्तर से मुनाफावसूली आई थी। सेंसेक्स-निफ्टी ऊपरी स्तर से फिसलकर बंद हुए थे। हालांकि सेंसेक्स 109 प्वाइंट चढ़कर 77,100 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 34 प्वाइंट चढ़कर 24,056 पर बंद हुआ था। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए थे। ऑटो और FMCG शेयरों में खरीदारी आई थी। मेटल,PSE और तेल-गैस इंडेक्स गिरावट पर बंद हुए थे। IT और एनर्जी शेयरों में दबाव देखने को मिला था। बैंक निफ्टी 27 प्वाइंट चढ़कर 58,177 पर बंद हुआ था। मिडकैप 400 प्वाइंट गिरकर 61,796 पर बंद हुआ था।

निफ्टी के 50 में से 26 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयरों में बिकवाली रही थी। बैंक निफ्टी के 14 में से 8 शेयरों में गिरावट आई थी। डॉलर के मुकाबले रुपया 27 पैसे मजबूत होकर 94.40/$ पर बंद हुआ था।

बंधन AMC में VP-इक्विटीज,प्रतीक पोद्दार ने बाजार पर बात करते हुए कहा कि गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें। यह डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का मौका है। गिरावट में अच्छे स्टॉक्स सस्ते दाम पर मिलते हैं। मिड और स्मॉलकैप में भी अवसर मिलने पर एग्रेसिव खरीदारी की जा सकती है। ऑटोमैटिक रीबैलेंसिंग से रिस्क कंट्रोल में रहता है। इस समय पैनिक सेलिंग नहीं,डिसिप्लिन्ड एलोकेशन पर जोर होना चाहिए।

डेट पोर्टफोलियो की रणनीति

प्रतीक पोद्दार ने बताया कि उनके फंड का डेट हिस्से का लगभग पूरा पैसा निवेशित है। कैश होल्डिंग बहुत सीमित। सिर्फ हाई क्वालिटी डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर फोकस है। AAA रेटेड बॉन्ड्स में बड़ा एक्सपोजर है। इसका ड्यूरेशन करीब 4 साल के आसपास है। बाजार गिरने पर डेट से पैसा निकालकर इक्विटी में शिफ्ट करने पर फोकस है।

रीबैलेंसिंग की स्ट्रैटेजी

रीबैलेंसिंग का सबसे बड़ा आधार है वैल्यूएशन। जहां रिस्क-रिवॉर्ड बेहतर दिखता है,वहां निवेश बढ़ाते हैं। सेक्टर और स्टॉक दोनों का लगातार रिव्यू करते रहना चाहिए। महंगे पॉकेट्स से निकलकर सस्ते अवसरों की तलाश की सलाह होगी।

बाजार की गिरावट में डेट का रोल?

डेट का अहम काम वोलैटिलिटी कम करना है। डेट रिटर्न्स को ज्यादा स्थिर बनाए रखता है। यह पश्चिम एशिया संकट और टैरिफ वॉर जैसे इवेंट्स में सुरक्षा कवच का काम करता है। बाजार गिरते ही इक्विटी वेट घटता है और डेट वेट बढ़ता है।

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बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड

बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड (Bandhan Aggressive Hybrid Fund) के बारे में बताते हुए प्रतीक पोद्दार ने कहा कि यह फंड सिर्फ हाई-रिस्क निवेशकों के लिए नहीं है। मॉडरेट रिस्क प्रोफाइल वाले भी इसे चुन सकते हैं। इसमें इक्विटी-डेट का बैलेंस कॉम्बिनेशन है। इसमें सिर्फ रिटर्न नहीं,रिस्क मैनेजमेंट पर भी फोकस है। निवेशकों को बार-बार रीबैलेंसिंग की जरूरत नहीं होती। यह 3-5 साल के नजरिया के लिए बेहतर है।

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Rohit Sharma: रोहित शर्मा को 2027 वर्ल्ड कप खेलना चाहिए? वेंगसरकर और मांजरेकर की राय अलग-अलग

भारतीय टीम के अनुभवी बल्लेबाज रोहित शर्मा अभी भी वनडे टीम की योजनाओं का अहम हिस्सा हैं। इसी वजह से उन्हें जुलाई में इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए टीम में शामिल किए जाने की उम्मीद है। वनडे क्रिकेट में उनके लंबे भविष्य को लेकर चर्चा लगातार जारी है। ऐसे में इंग्लैड के खिलाफ होने वाला मुकाबले उनके लिए भी काफी अहम माना जा रहे हैं। रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर क्रिकेट जगत में अलग-अलग राय सामने आ रही है।

कई लोगों के मुताबिक, उनके अनुभव और शानदार बल्लेबाजी को देखते हुए उन्हें अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप की टीम में होना चाहिए। वहीं, कुछ युवा खिलाड़ियों को मौका देने का समय आ गया है। रोहित की बढ़ती उम्र और फिटनेस को लेकर भी लगातार चर्चा हो रही है।

वेंगसरकर ने क्या कहा

भारत के पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने न्यूज एजेंसी PTI से कहा, रोहित शर्मा ने अपने करियर में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, इसलिए उनके भविष्य का फैसला भी वही करें। वेंगसरकर ने कहा, “उन्होंने (रोहित) भारत और अपने लिए बहुत अच्छा किया है। ये उन पर निर्भर करता है। वह पिछले (लगभग) 20 सालों से इंटरनेशनल क्रिकेट खेल रहे हैं और मुझे यकीन है कि उन्हें सबसे अच्छी तरह पता है कि चीजों को कैसे करना है।”

वर्ल्ड खेलने को लेकर क्या कहा

जहां दिलीप वेंगसरकर के मुताबिक, रोहित शर्मा को अपने भविष्य का फैसला खुद करना चाहिए, वहीं पूर्व भारतीय बल्लेबाज संजय मांजरेकर की राय इससे अलग है। उनके अनुसार, रोहित को 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम का हिस्सा नहीं होना चाहिए। सोनी स्पोर्ट्स से बात करते हुए मांजरेकर ने कहा, “50 ओवर में ओपनिंग करना मजेदार है। ये एक रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम है। मुझे लगता है कि ये आपको ऐसे खिलाड़ी को देना चाहिए जो अपने प्राइम में हो और जिसके पास और 5-10 साल हों। अगर आप सिर्फ रोहित शर्मा के बारे में सोच रहे हैं, तो ये सही नहीं है। आपको भारतीय क्रिकेट, भारतीय क्रिकेट के भविष्य के बारे में सोचना होगा। उस हिसाब से, मुझे नहीं लगता कि रोहित शर्मा (वन-डे) टीम में मेरी पसंद होंगे।”

अफगानिस्तान के खिलाफ रोहित की पारी

रोहित शर्मा ने अब तक 285 वनडे मैचों में 11,720 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 33 शतक और 62 अर्धशतक भी निकले हैं। रोहित शर्मा ने अपना पिछला वनडे मुकाबला अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू सीरीज में खेला था। उस तीन मैचों की सीरीज में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए तीन पारियों में कुल 143 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 69 गेंदों में 79 रन की तेज पारी भी खेली, जिससे उन्होंने एक बार फिर अपनी शानदार फॉर्म का परिचय दिया।

Mango festival in US: भारतीय आम का अमेरिका में जलवा! वॉशिंगटन में मुफ्त में चखने के लिए उमड़ी हजारों की भीड़

Mango festival in US: अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में शनिवार 27 जून को भारतीय आमों की मिठास और भारतीय व्यंजनों की खुशबू ने हजारों लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित ‘टेस्टिंग सेशन’ में शामिल होने के लिए हजारों लोग डाउनटाउन वॉशिंगटन के ड्यूपॉन्ट सर्कल पहुंचे, जहां उन्होंने भारतीय आमों और स्वादिष्ट बिरयानी का मजा लिया। भारतीय दूतावास की तरफ से आयोजित ‘Taste the Tropical Magic’ कार्यक्रम में 8,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने भारतीय आमों के साथ बिरयानी, लस्सी, आम का हलवा, चाय और कॉफी का मुफ्त स्वाद चखा।

डाउनटाउन वॉशिंगटन के Dupont Circle में आयोजित इस ‘फूड फेस्टिवल’ में लोग अमेरिका के पड़ोसी राज्यों वर्जीनिया और मैरीलैंड से भी पहुंचे। कार्यक्रम में केसर, लंगड़ा, मालदा समेत कई प्रसिद्ध भारतीय आमों की किस्में लोगों को चखने के लिए उपलब्ध कराई गईं। आम प्रेमियों की लंबी-लंबी कतारें कार्यक्रम समाप्त होने तक लगी रहीं। भारतीय मूल के लोगों की ताजा हुई बचपन की यादें भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक दिशा ने कहा कि उन्हें अपनी दादी के साथ बिताए बचपन के दिन याद आ गए।

उन्होंने पीटीआई से कहा, “गर्मियों में मेरी दादी हमें आम खिलाया करती थीं। आज मैं सिर्फ भारतीय आमों का वही स्वाद फिर से महसूस करने यहां आई हूं।” वहीं, अमेरिका में FIFA World Cup देखने आए विदेशी पर्यटक एंड्रयू ने केसर आम का स्वाद लेने के बाद कहा, “यह अब तक का सबसे स्वादिष्ट आम है, जो मैंने कभी खाया है।”

‘सिर्फ आम नहीं, भारत के स्वाद का उत्सव’

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल आम चखाने तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ आम का एक टुकड़ा या भारत की एक झलक नहीं, बल्कि भारत के विविध स्वादों का उत्सव है।” उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम पिछले कई वर्षों से वॉशिंगटन के ग्रीष्मकालीन कैलेंडर का हिस्सा रहा है।

पिछले साल भारतीय दूतावास ने केवल एक टेस्टिंग बूथ लगाया था। लेकिन भारी भीड़ को देखते हुए इस बार पांच टेस्टिंग बूथ लगाए गए था। इस दौरान लोगों ने मुफ्त में आमों के अलावा बिरयानी, लस्सी, आम का हलवा, भारतीय चाय और कॉफी का आनंद लिया।

भारतीय भोजन के और आयोजन होंगे

कार्यक्रम की जबरदस्त सफलता के बाद राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि भविष्य में भारतीय दूतावास अमेरिका में ऐसे फूड प्रमोशन कार्यक्रम अधिक नियमित रूप से आयोजित करेगा। ताकि अधिक से अधिक लोग भारतीय व्यंजनों और फलों से परिचित हो सकें।

अमेरिका में बढ़ रही भारतीय आमों की मांग

कौशल खाकर ने कहा कि आम बेहद नाजुक फल है। लेकिन तेज लॉजिस्टिक्स की मदद से भारतीय प्रवासियों तक ताजा और उच्च गुणवत्ता वाले आम पहुंचाए जा रहे हैं। वहीं, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष अभिषेक देव ने बताया कि अमेरिका को भारतीय आमों का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भारत ने अमेरिका को 2,300 टन आम निर्यात किए थे। इस सालयह आंकड़ा एक महीने पहले ही पार हो चुका है, जिससे मांग में लगातार वृद्धि का संकेत मिलता है।

देव ने आगे कहा, “पिछले साल हमने अमेरिका को 2,300 टन आम का निर्यात किया था। इस वर्ष हमने एक महीने पहले ही इस आंकड़े को पार कर लिया।” अमेरिका में भारतीय आमों की कहानी 2006 से शुरू हुई, जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने भारतीय आमों को अमेरिका भेजने का रास्ता साफ किया था।

2006 में खुला था अमेरिकी बाजार

अमेरिका में भारतीय आमों की कहानी वर्ष 2006 से शुरू होती है, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने भारत से आमों के आयात का रास्ता साफ किया था। इससे पहले अमेरिका ने मैंगो सीड वीविल (आम की गुठली में लगने वाले कीट) के खतरे के कारण भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगाया हुआ था।

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जनवरी 2006 में अमेरिकी कृषि विभाग ने इर्रेडिएशन (कम मात्रा के विकिरण उपचार) किए गए फलों के आयात की अनुमति दी। इसके बाद भारतीय अल्फांसो आम की पहली खेप अमेरिका पहुंची, जिसका वहां जोरदार स्वागत हुआ।

कार्यक्रम की मुख्य बातें

वॉशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास ने आयोजित किया ‘Taste the Tropical Magic’ मैंगो फेस्टिवल।

8,000 से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा।

अेमेरिकी लोगों ने केसर, लंगड़ा, मालदा सहित कई भारतीय आमों का मुफ्त स्वाद चखा।

बिरयानी, लस्सी, आम का हलवा, चाय और कॉफी भी परोसी गई।

अमेरिका में भारतीय आमों की मांग और निर्यात लगातार बढ़ रहा है।

2006 में भारतीय आमों के लिए अमेरिकी बाजार खुलने के बाद से उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी है।