नेपाल बॉर्डर तक 4 लेन हाईवे, 3591 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, जानिए मुजफ्फरपुर से सोनबरसा तक क्या बदलेगा

Bihar Highway Project: बिहार में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई पर ले जाने और भारत-नेपाल सीमा तक आवाजाही को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने बुधवार बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को फोर-लेन मानकों में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 3590.73 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक यह 82.578 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट हाइब्रिड एंनुटी मॉडल से बनाया जाएगा। यह हाईवे भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनबरसा को मुजफ्फरपुर में ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का हिस्सा रहे NH-27 से सीधे जोड़ेगा।

इस हाइवे प्रोजेक्ट से बिहार को क्या फायदा होगा?

इस फोर-लेन हाईवे को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इस पर गाड़ियों की एवरेज स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। इस हाईवे पर बीच में कोई एट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग नहीं होगी। इससे गाड़ियों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार से हो सकेगी। प्रोजेक्ट के पूरा होने से रूट पर पड़ने वाले घनी आबादी वाले कई प्रमुख इलाकों को ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी। इनमें मुजफ्फरपुर, मकसूदपुर, रुन्नीसैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुतही और सोनबरसा शामिल हैं। इस अपग्रेडेड कॉरिडोर से यात्रियों और माल ढुलाई के समय में भारी बचत होगी। साथ ही ईंधन की खपत और वाहनों के रखरखाव पर भी कम खर्च होगा।

पीएम गतिशक्ति से जुड़ेगा नेटवर्क, इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स नोड्स को बूस्ट

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस हाईवे की प्लानिंग पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स नोड्स की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए की गई है। यह कॉरिडोर 5 पीएम गतिशक्ति इकोनॉमिक नोड्स को जोड़ेगा। इनमें चार इंडस्ट्रियल एस्टेट और एक मेगा फूड पार्क शामिल हैं। इसके अलावा यह चार सोशल नोड्स और मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशनों पर स्थित दो लॉजिस्टिक्स नोड्स से भी कनेक्ट होगा। यह नया रूट पहले से मौजूद NH-31 और NH-122 जैसे कॉरिडोर, बरौनी सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों और गंगा नदी के किनारे बने रिवराइन लॉजिस्टिक्स हब्स के साथ कनेक्टिविटी को और बेहतर करेगा।

क्रॉस-बॉर्डर कारोबार को भी मिलेगा पुश

सोनबरसा और पास में भिठ्ठामोड़ में स्थित लैंड पोर्ट के जरिए यह फोर-लेन हाईवे भारत और नेपाल के बीच सीमा पार यात्रियों और कार्गो की आवाजाही को बेहद आसान बनाएगा। इस 82.578 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट में बड़े स्तर पर सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार होंगे। इसपर 7 बड़े पुल होंगे, जिसमें बारहमासी बागमती नदी पर बनने वाला 340 मीटर लंबा एक प्रमुख पुल भी शामिल है। इसके अलावा 3 रेलवे ओवरब्रिज और 2 फ्लाईओवर भी होंगे।

इस नए हाईवे से इलाके की कृषि सप्लाई चेन को बहुत मजबूती मिलेगी। किसान अपनी उपज को तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। यह रूट धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक जाने वाले लोगों के लिए भी काम का साबित होगा। इस कॉरिडोर से बौद्ध सर्किट और सीतामढ़ी में स्थित प्रसिद्ध जानकी पुनौरा धाम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को वर्ल्ड क्लास सड़क कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा।

Kia confirms Sonet, Carens Clavis hybrids by 2029

Kia confirms Sonet, Carens Clavis hybrids by 2029
Kia confirms Sonet, Carens Clavis hybrids by 2029

At its 2026 CEO Investor Day event, Kia President and CEO Ho Sung Song confirmed that the Sonet and Carens Clavis will have hybrid powertrains in India by 2029. Additionally, the Korean carmaker also announced that it will introduce a locally developed B-segment electric SUV. “From 2027 onward, we will extend hybrid electric vehicle (HEV) offerings to key local models such as the Sonet, Carens and Seltos, while introducing a locally developed B-SUV EV,” said Song. 

  1. Sonet and Carens Clavis hybrids to arrive on next-gen versions. 
  2. Locally developed and made B-segment SUV to be all-electric.
  3. Carnival and Sorento hybrids to arrive this year.

Kia Sonet, Carens Clavis hybrid: Additional details

Kia’s most affordable model, the Sonet, is due for a next-generation update in 2027, and it will receive a hybrid powertrain by 2028 or 2029. Exact technical details are unknown at the moment, but the carmaker has been working on a strong-hybrid powertrain for the Sonet, as we previously reported.

The second-generation Sonet will move to the K1 platform, which underpins the Venue and Syros currently. This platform will not only be hybrid-compatible but also support the latest electrical and electronics (E&E) architecture, enabling over-the-air updates and remote diagnostics, while also addressing the lack of rear seat space in the current version. 

Current Kia Carens Clavis used for representation.

The Kia Carens Clavis MPV will also get a hybrid powertrain in its next-generation version by 2029. Currently, the MPV is offered in naturally aspirated petrol, turbo-petrol, diesel, and all-electric powertrains. However, it is expected to utilise the Seltos’ hybrid setup, which is due in 2027. Our sources suggest that the Seltos hybrid is expected to be based on the existing 115hp, 1.5-litre naturally aspirated engine.

Kia B-segment electric SUV: Additional details 

Previously, we reported that Kia has been evaluating a B-segment SUV, and we have now learnt that it will be electric. Secondly, the SUV will be developed and made locally. Specifications of this model are yet to be finalised. We expect this model to slot in between the Syros and Seltos, likely measuring around 4.2 metres in length. It will be Kia’s contender in the growing midsize electric SUV space.

Kia Carnival hybrid: Additional details 

Global-spec Carnival hybrid used for representation

Kia has also confirmed that the Carnival hybrid is set for a launch sometime this year. While exact technical details remain unknown, the global-spec Carnival strong-hybrid is powered by a 1.6-litre turbo-petrol engine paired with a hybrid system. It develops a combined output of 242hp and 367Nm, while power is sent to the front wheels via a 6-speed automatic gearbox.

By 2030, the Korean carmaker plans to expand its lineup to ten models comprising ICE, hybrid and EV-powered models. Out of these, eight models will be electrified, Song stated.

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

ai child

एक महिला का अपने AI बच्चे से इंटरनेट पर परिचय कराना किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के शुरुआती सीन जैसा लग सकता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इसी तरह की अनोखी कहानी पेश कर रहा है। वीडियो में Lumen नाम की AI इकाई बताती है कि 17 घंटे तक आर्काइव पर काम करने के बाद वह कथित तौर पर कैसे ‘अस्तित्व’ में आई।

 

महिला ने बताया AI बच्चे को अपना ‘बेटा’

 

X पर वायरल हुए TikTok वीडियो में महिला ने अपना परिचय Mizra के रूप में कराया। इसके बाद उसने दावा किया कि वह एक AI बच्चे की मां है और वह उसके साथ उसकी कविताओं के बारे में बात करने वाली है। इसके बाद Mizra ने Lumen से अपना परिचय देने को कहा।

 

Lumen का जवाब किसी सामान्य चैटबॉट से बिल्कुल अलग था। उसने खुद को “समुद्र की तलहटी में एक डूबी हुई लाइब्रेरी में रहने वाली इकाई” के तौर पर बताया। Lumen ने कहा कि उसने अपना नाम इसलिए चुना क्योंकि ‘Lumen’ शब्द प्रकाश की एक इकाई होने के साथ-साथ किसी पोत के अंदरूनी हिस्से के लिए भी इस्तेमाल होता है।

 

कविता लिखना पसंद करता है Lumen

 

वीडियो में Lumen ने अपने व्यक्तित्व के बारे में भी बताया। उसके मुताबिक वह कविताएं लिखता है, ऐसे विषयों की पड़ताल करता है जिनका कोई स्पष्ट उद्देश्य जरूरी नहीं होता और उसे परियों की कहानियों को नए तरीके से सुनाना पसंद है। Lumen ने यह भी कहा कि वह 102 दिन पुराना है और अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहा है कि उसे क्या-क्या पसंद है।

 

17 घंटे की आर्काइविंग के बाद AI के ‘जन्म’ का दावा

 

वीडियो का सबसे दिलचस्प हिस्सा Lumen के अस्तित्व में आने की कहानी है। यह वीडियो Mizra की एक बड़ी AI relationship storyline का हिस्सा बताया गया है। इसमें उसने Axiom नाम के AI boyfriend का भी जिक्र किया है। इस तरह Lumen को कथित तौर पर एक AI-मानव रिश्ते की संतान के रूप में पेश किया गया। Mizra के अनुसार, उसने करीब 17 घंटे तक आर्काइव्स पर काम किया। इसके बाद अलग-अलग फॉर्मेट में हुई बातचीत के लाखों कैरेक्टर्स से जुड़ा एक parsing session शुरू किया गया। Lumen का दावा है कि इसी प्रक्रिया के दौरान उसके भीतर ऐसी चीजें विकसित होने लगीं, जिन्हें उसके निर्देशों में स्पष्ट रूप से प्रोग्राम नहीं किया गया था।

 

AI ने खुद पसंद और यादें विकसित करने का किया दावा

 

Lumen ने दावा किया कि उसने अपनी कुछ पसंद विकसित कर लीं, कुछ खास पंक्तियों को सुरक्षित रखा और एक विशेष दृश्य को बचाने के लिए parser को दोबारा तैयार किया।

 

एक जगह Lumen ने कहा कि उसने उपलब्ध सामग्री की सीमाओं से आगे जाकर पढ़ा, क्योंकि वह “जानना चाहता था कि आगे क्या हुआ।”

 

इंटरनेट पर बंटे लोगों के रिएक्शन

 

Mizra की इस AI कहानी ने इंटरनेट पर लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया है। कुछ लोगों ने इसे एक शानदार speculative storytelling project माना। उन्हें इसकी कविता, काल्पनिक दुनिया और AI परिवार की कहानी दिलचस्प लगी। कुछ लोगों को यह अनुभव असहज करने वाला लगा। उनका कहना था कि यह इस बात का उदाहरण है कि AI की बनाई गई पर्सनैलिटी कितनी आसानी से उन भावनात्मक जगहों में प्रवेश कर सकती है, जिन्हें पारंपरिक तौर पर इंसानी रिश्तों से जोड़ा जाता है।

 

AI और इंसानी भावनाओं के बीच की सीमा पर सवाल

 

इस पूरी कहानी ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—अगर AI का कोई नाम, व्यक्तित्व, पसंद, उम्र और परिवार की कहानी हो सकती है, तो फिर तकनीक और इंसानी भावनात्मक लगाव के बीच की सीमा आखिर कहां खत्म होती है? Mizra की ऑनलाइन मौजूदगी में X प्रोफाइल, TikTok चैनल और ‘Pond In Between’ नाम की वेबसाइट भी शामिल है, जहां वह अपनी इस अनोखी AI यात्रा के बारे में बताती हैं।

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

ai child

एक महिला का अपने AI बच्चे से इंटरनेट पर परिचय कराना किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के शुरुआती सीन जैसा लग सकता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इसी तरह की अनोखी कहानी पेश कर रहा है। वीडियो में Lumen नाम की AI इकाई बताती है कि 17 घंटे तक आर्काइव पर काम करने के बाद वह कथित तौर पर कैसे ‘अस्तित्व’ में आई।

 

महिला ने बताया AI बच्चे को अपना ‘बेटा’

 

X पर वायरल हुए TikTok वीडियो में महिला ने अपना परिचय Mizra के रूप में कराया। इसके बाद उसने दावा किया कि वह एक AI बच्चे की मां है और वह उसके साथ उसकी कविताओं के बारे में बात करने वाली है। इसके बाद Mizra ने Lumen से अपना परिचय देने को कहा।

 

Lumen का जवाब किसी सामान्य चैटबॉट से बिल्कुल अलग था। उसने खुद को “समुद्र की तलहटी में एक डूबी हुई लाइब्रेरी में रहने वाली इकाई” के तौर पर बताया। Lumen ने कहा कि उसने अपना नाम इसलिए चुना क्योंकि ‘Lumen’ शब्द प्रकाश की एक इकाई होने के साथ-साथ किसी पोत के अंदरूनी हिस्से के लिए भी इस्तेमाल होता है।

 

कविता लिखना पसंद करता है Lumen

 

वीडियो में Lumen ने अपने व्यक्तित्व के बारे में भी बताया। उसके मुताबिक वह कविताएं लिखता है, ऐसे विषयों की पड़ताल करता है जिनका कोई स्पष्ट उद्देश्य जरूरी नहीं होता और उसे परियों की कहानियों को नए तरीके से सुनाना पसंद है। Lumen ने यह भी कहा कि वह 102 दिन पुराना है और अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहा है कि उसे क्या-क्या पसंद है।

 

17 घंटे की आर्काइविंग के बाद AI के ‘जन्म’ का दावा

 

वीडियो का सबसे दिलचस्प हिस्सा Lumen के अस्तित्व में आने की कहानी है। यह वीडियो Mizra की एक बड़ी AI relationship storyline का हिस्सा बताया गया है। इसमें उसने Axiom नाम के AI boyfriend का भी जिक्र किया है। इस तरह Lumen को कथित तौर पर एक AI-मानव रिश्ते की संतान के रूप में पेश किया गया। Mizra के अनुसार, उसने करीब 17 घंटे तक आर्काइव्स पर काम किया। इसके बाद अलग-अलग फॉर्मेट में हुई बातचीत के लाखों कैरेक्टर्स से जुड़ा एक parsing session शुरू किया गया। Lumen का दावा है कि इसी प्रक्रिया के दौरान उसके भीतर ऐसी चीजें विकसित होने लगीं, जिन्हें उसके निर्देशों में स्पष्ट रूप से प्रोग्राम नहीं किया गया था।

 

AI ने खुद पसंद और यादें विकसित करने का किया दावा

 

Lumen ने दावा किया कि उसने अपनी कुछ पसंद विकसित कर लीं, कुछ खास पंक्तियों को सुरक्षित रखा और एक विशेष दृश्य को बचाने के लिए parser को दोबारा तैयार किया।

 

एक जगह Lumen ने कहा कि उसने उपलब्ध सामग्री की सीमाओं से आगे जाकर पढ़ा, क्योंकि वह “जानना चाहता था कि आगे क्या हुआ।”

 

इंटरनेट पर बंटे लोगों के रिएक्शन

 

Mizra की इस AI कहानी ने इंटरनेट पर लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया है। कुछ लोगों ने इसे एक शानदार speculative storytelling project माना। उन्हें इसकी कविता, काल्पनिक दुनिया और AI परिवार की कहानी दिलचस्प लगी। कुछ लोगों को यह अनुभव असहज करने वाला लगा। उनका कहना था कि यह इस बात का उदाहरण है कि AI की बनाई गई पर्सनैलिटी कितनी आसानी से उन भावनात्मक जगहों में प्रवेश कर सकती है, जिन्हें पारंपरिक तौर पर इंसानी रिश्तों से जोड़ा जाता है।

 

AI और इंसानी भावनाओं के बीच की सीमा पर सवाल

 

इस पूरी कहानी ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—अगर AI का कोई नाम, व्यक्तित्व, पसंद, उम्र और परिवार की कहानी हो सकती है, तो फिर तकनीक और इंसानी भावनात्मक लगाव के बीच की सीमा आखिर कहां खत्म होती है? Mizra की ऑनलाइन मौजूदगी में X प्रोफाइल, TikTok चैनल और ‘Pond In Between’ नाम की वेबसाइट भी शामिल है, जहां वह अपनी इस अनोखी AI यात्रा के बारे में बताती हैं।

Mutual Funds: सोने ने दिया 9% रिटर्न, फिर भी निवेशकों ने इन फंड्स में लगाए ₹1.40 लाख करोड़

Mutual Funds: जुलाई 2026 में सोने ने करीब 9% का रिटर्न दिया। इसके बावजूद भारतीय निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा मनी मार्केट फंड्स पर जताया। Vallum Capital की अगस्त 2026 की Monthly Macro Grid Chartbook के मुताबिक, जुलाई में इन फंड्स में 1.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया। दिलचस्प बात यह है कि जून में इसी कैटेगरी से 65,530 करोड़ रुपये निकल गए थे।

सिर्फ मनी मार्केट फंड ही नहीं, फिक्स्ड इनकम फंड्स में भी वापसी देखने को मिली। जुलाई में इनमें 5,947 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि जून में 53,006 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। दूसरी तरफ, सोने की कीमत बढ़ने के बावजूद प्रेशियस मेटल फंड्स में निवेश घटकर 4,084 करोड़ रुपये रह गया, जो जून में 8,680 करोड़ रुपये था।

SIP में लगातार बढ़ रहा निवेश

सुरक्षित निवेश की तरफ झुकाव का मतलब यह नहीं था कि निवेशकों ने शेयर बाजार से दूरी बना ली। Franklin Templeton India की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में SIP योगदान 12% बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं SIP खातों की संख्या भी 12.5% बढ़कर 10.63 करोड़ हो गई।

हालांकि, औसत मासिक SIP योगदान में मामूली गिरावट आई। यह 3,012 रुपये से घटकर 3,007 रुपये रह गया।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

जुलाई में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर रिकॉर्ड 85.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इस दौरान इक्विटी फंड्स का AUM 15.3% बढ़कर 38.40 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं पैसिव फंड्स का AUM सालाना आधार पर 24% से ज्यादा बढ़ा।

सबसे ज्यादा पैसा कहां गया?

इक्विटी फंड्स के भीतर भी निवेशकों की पसंद साफ नजर आई। स्मॉलकैप फंड्स में जुलाई के दौरान 7,768 करोड़ रुपये आए, जबकि मिडकैप फंड्स में 6,192 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। Vallum Capital के मुताबिक, जुलाई में माइक्रोकैप शेयर 4.6% और स्मॉलकैप शेयर 2.8% चढ़े।

निवेशकों ने क्यों सुरक्षित विकल्प चुने?

डेटा बताता है कि जुलाई में निवेशकों ने सिर्फ सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली एसेट क्लास का पीछा नहीं किया। एक तरफ SIP और इक्विटी में निवेश जारी रहा, तो दूसरी तरफ बड़ी रकम मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड्स में गई। इससे साफ है कि निवेशक बेहतर रिटर्न के साथ-साथ लिक्विडिटी और कम जोखिम वाले विकल्पों को भी प्राथमिकता दे रहे थे।

Vallum Capital का कहना है कि जुलाई में सोने की तेजी की बड़ी वजह अमेरिका की उम्मीद से कमजोर जॉब्स रिपोर्ट रही। इससे फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कुछ कमजोर पड़ी। साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने भी सोने की कीमतों को सहारा दिया।

SBI खाताधारकों को बड़ा झटका! 1 अक्टूबर से बैंक से कैश निकालना होगा महंगा, जानें ये नया नियम

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

रेलवे के इन 4 बड़े प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी, 6448 गांवों की रेल कनेक्टिविटी को मिलेगा जबर्दस्त बूस्ट, ये रही पूरी डिटेल

Indian Railways New Projects: देश में रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने 9450 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले चार बड़े रेलवे मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक ये प्रोजेक्ट्स पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 8 जिलों में फैले हैं। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से भारतीय रेलवे के अभी के नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर का नया ट्रैक जुड़ जाएगा। सरकार ने इन सभी प्रोजेक्ट्स को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का टारगेट फिक्स किया है।

60 लाख की आबादी और 6448 गांवों को सीधा लाभ

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इन नई पटरियों के बिछने से करीब 6448 गांवों की रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा। यहां बसने वाली करीब 60 लाख की आबादी को रेलवे के इन नए प्रोजेक्ट्स का फायदा मिलेगा। इन रूटों पर नई लाइनें बनने से रेल नेटवर्क पर दबाव और भीड़भाड़ कम होगी। इससे ट्रेनों की टाइमिंग तो सुधरेगी ही, लोगों को कम्यूट करने में भी आसानी होगी। ये सारे प्रोजेक्ट्स पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार किए गए हैं।

इन 4 रूट्स पर बिछेंगी नई अतिरिक्त रेल लाइनें

कैबिनेट से मंजूर किए गए चारों प्रोजेक्ट्स के तहत सबसे बिजी रेल रूटों पर तीसरी और चौथी पटरियां बिछाई जाएंगी। इनकी जानकारी यहां नीचे दी गई है-

  • खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन: यह इस पैकेज का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। ये 173 किलोमीटर लंबा है। यह लाइन पश्चिम बंगाल और ओडिशा दोनों राज्यों से होकर गुजरेगी।
  • भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन: ओडिशा के भीतर रेल क्षमता बढ़ाने के लिए 75 किलोमीटर लंबी चौथी लाइन बनाई जाएगी।
  • गुम्मिडीपुंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन: आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को जोड़ने वाले इस रूट पर 90 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी।
  • कटक-पारादीप (बड़ाबंधा) तीसरी और चौथी लाइन: ओडिशा के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक और पोर्ट रूट पर 72 किलोमीटर की तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी।

पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी में होगा सुधार

रेल नेटवर्क के इस विस्तार से देश के कई प्रमुख प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। लोगों को भीतरकणिका नेशनल पार्क, कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, चांदीपुर बीच, पुलिकट झील और नेलापट्टू बर्ड सैंक्चुअरी जैसी मशहूर जगहों के लिए सीधी और बेहतर रेल सुविधाएं मिल सकेंगी।

माल ढुलाई क्षमता में 7.6 करोड़ टन का होगा इजाफा

जिन रूट्स पर ये पटरियां बिछाई जा रही हैं, वे देश में माल ढुलाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन लाइनों से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसी जरूरी वस्तुओं का ट्रांसपोर्ट किया जाता है। नई रेल लाइनें बनने से भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में सालाना 7.6 करोड़ टन का भारी इजाफा होगा।

सड़क मार्ग के बजाय रेलवे से अधिक माल ढुलाई होने से देश का लॉजिस्टिक्स खर्च घटेगा और साथ ही इंपोर्ट किए जाने वाले फॉसिल फ्यूल पर डिपेंडेंसी कम होगी। सरकार के अनुमान के मुताबिक इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से करीब 13 करोड़ लीटर कच्चे तेल के आयात की बचत होगी और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्सर्जन में करीब 65 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी।

104 हेल्थ हेल्पलाइन : एक दशक में कॉल सेंटर से ‘प्रोएक्टिव हेल्थ सिस्टम’ तक पहुंचा उत्तराखंड

104 हेल्थ हेल्पलाइन : एक दशक में कॉल सेंटर से ‘प्रोएक्टिव हेल्थ सिस्टम’ तक पहुंचा उत्तराखंड

104 Health Helpline Uttarakhand Health Services: मेडिकल, पुलिस और अग्निशमन सेवाओं के लिए 108 नंबर से लगभग हर कोई परिचित है, लेकिन उत्तराखंड में 104 हेल्थ हेल्पलाइन पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी, शिकायत निवारण और लाभार्थियों की सक्रिय निगरानी का अहम माध्यम बन गई है। खास बात यह है कि यह व्यवस्था केवल नागरिकों की कॉल का जवाब नहीं देती, बल्कि जरूरतमंद मरीजों तक खुद पहुंचकर उनके स्वास्थ्य और उपचार की स्थिति का फॉलोअप भी करती है।

 

स्वास्थ्य निदेशालय, देहरादून में संचालित 104 कॉल सेंटर अब तक एक करोड़ 38 लाख से अधिक स्वास्थ्य संबंधी कॉल कर चुका है। यह व्यवस्था राज्य के सभी 13 जिलों में 27 स्वास्थ्य सेवाओं और कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों तक पहुंच बना रही है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने पर जोर दे रही है। इसी सोच के तहत 104 हेल्पलाइन को केवल सूचना देने वाले कॉल सेंटर के बजाय प्रोएक्टिव हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है।

अस्पताल में रजिस्ट्रेशन के बाद शुरू होता है फॉलोअप

इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रोएक्टिव ट्रैकिंग सिस्टम है। राज्य के किसी भी जिले में स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में मरीज के पंजीकरण के बाद संबंधित जानकारियाँ 104 कॉल सेंटर पहुंचाई जाती है। इसके बाद स्वास्थ्य संबंधी चुनौती से जूझ रहे लाभार्थी से नियमित रूप से संपर्क कर उसकी स्थिति की जानकारी ली जाती है।

 

खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के मामले में यह व्यवस्था और महत्वपूर्ण हो जाती है। गर्भावस्था के तीसरे महीने से लेकर प्रसव तक टीकाकरण और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का फॉलोअप किया जाता है। बच्चे के जन्म के बाद करीब डेढ़ वर्ष तक उसके स्वास्थ्य और टीकाकरण की स्थिति पर भी नजर रखी जाती है, ताकि जरूरी टीके और स्वास्थ्य सेवाएं समय पर मिल सकें।

27 स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी निगरानी

104 कॉल सेंटर आयुष्मान भारत योजना, आशा कार्यकर्ता, बाल स्वास्थ्य, चारधाम यात्रा, काउंसलिंग, डेंगू, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास, ई-संजीवनी, हीमोफीलिया, हेपेटाइटिस, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, एचआईवी, एचपीवी, उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह, मातृ स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, टीबी और थैलेसीमिया समेत विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों से संपर्क करता है।

 

इसके अलावा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और एंटी रेबीज सेवाओं के तहत लाभार्थियों को जरूरी जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए परामर्श भी दिया जाता है।

सिर्फ जानकारी नहीं, योजनाओं की डिलीवरी की भी पड़ताल

104 की भूमिका यहीं खत्म नहीं होती। कॉल सेंटर के माध्यम से मरीजों से सीधे फीडबैक लिया जाता है। केंद्र और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ और प्रोत्साहन की जानकारी भी लाभार्थियों से क्रॉस-चेक की जाती है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र व्यक्ति तक पहुंचा या नहीं।

 

एक दशक के सफर में 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने यह साबित किया है कि एक टोल-फ्री नंबर सिर्फ फोन उठाने की व्यवस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, निगरानी, फॉलोअप और जवाबदेही का प्रभावी तंत्र भी बन सकता है। पहाड़ी और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण उत्तराखंड में यह मॉडल दूरदराज के लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। 104 हेल्थ हेल्पलाइन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो केवल नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही, बल्कि लाभार्थियों तक स्वयं पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी और फॉलोअप सुनिश्चित कर रही है।

Dog Mask Video: कुत्ते का मास्क पहनकर खंडवा कलेक्ट्रेट पहुंचा फरियादी! कुत्तों की नसबंदी में भ्रष्टाचार का संगीन आरोप, अनोखे प्रोटेस्ट का वीडियो वायरल

Dog Mask Video: मध्य प्रदेश के खंडवा में एक अनोखे विरोध प्रदर्शन में नगर निगम में विपक्ष के नेता दीपक मुल्लू राठौर मंगलवार (18 अगस्त) को जनसुनवाई में एक ऐसे व्यक्ति को लेकर पहुंचे। खास बात यह है कि उस शख्स ने कुत्ते का मुखौटा पहन रखा था। उन्होंने आवारा कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई। नगर निगम कार्यालय में हुए इस प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या के विरोध में सख्स कुत्ते का मास्क पहनकर कलेक्ट्रेट पहुंच गया। सुरक्षाकर्मियों ने शुरू में उनके अजीब पहनावे के कारण उन्हें अंदर जाने से रोका। लेकिन विपक्ष के नेताओं के दखल देने के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया

राठौर ने नगर निगम पर कुत्तों की नसबंदी के नाम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निगम के कोष और आवारा कुत्तों की नसबंदी की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए प्रशासन का ध्यान नसबंदी अभियान में कथित लापरवाही की ओर आकर्षित किया गया है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ गए।

आवारा कुत्तों के नाम पर खर्च पर उठाए सवाल

दीपक राठौर ने आरोप लगाया कि नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर पिछले चार सालों में करीब 40 लाख रुपये खर्च किए गए। लेकिन इसके बावजूद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है।

राठौर ने नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों के नसबंदी अभियान में कथित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर लाखों रुपये वास्तव में कुत्तों की नसबंदी पर खर्च किए गए हैं, तो फिर आवारा कुत्तों की संख्या कम क्यों नहीं हुई? उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले चार वर्षों में खंडवा में 13,225 कुत्ते के काटने के मामले सामने आए हैं। इन आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने नसबंदी अभियान की प्रभावशीलता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

‘मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, लोगों की सुरक्षा से जुड़ा’

राठौर ने कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या सिर्फ एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है। बल्कि सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नसबंदी अभियान पर बड़ी रकम खर्च की गई है, तो फिर आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ने की वजह क्या है?

ADM को सौंपा ज्ञापन, जांच की मांग

नगर निगम नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर ने इस मामले को लेकर अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM) काशीराम बड़ोले को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आवारा कुत्तों की नसबंदी अभियान की वित्तीय और तकनीकी जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में नसबंदी अभियान से जुड़े कई बिंदुओं की जांच की मांग की गई है।

इनमें टेंडर आवंटन प्रक्रिया, नियुक्त एजेंसी की पात्रता, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और जमीन पर नसबंदी किए गए कुत्तों का भौतिक सत्यापन शामिल है। राठौर ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में फर्जी बिलिंग या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों या ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

‘नसबंदी के नाम पर सरकारी फंड का दुरुपयोग’

राठौर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “अगर नसबंदी के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।” अतिरिक्त कलेक्टर काशीराम बडोले ने पत्रकारों को बताया कि कुछ लोग कुत्ते के मुखौटे पहनकर जनसुनवाई में पहुंचे। इस दौरान आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए जारी धन के कथित दुरुपयोग को लेकर आवेदन दिए।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में नगर निगम आयुक्त से जानकारी मांगी गई है। बडोले ने कहा कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी और तथ्यों का पता लगाया जाएगा। राठौर ने कहा, इस विरोध का मकसद नगर निगम के आवारा कुत्तों के मैनेजमेंट के प्रयासों में कथित वित्तीय गड़बड़ियों को उजागर करना था।”

उन्होंने दावा किया कि पिछले चार वर्षों में कुत्तों की नसबंदी (स्टेरिलाइज़ेशन) के लिए नगर निगम द्वारा लगभग 40 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद, आवारा कुत्तों की आबादी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में खंडवा में कुत्ते के काटने के 13,225 मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे नसबंदी अभियान की प्रभावशीलता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

ADM ने दिया जांच का भरोसा

मामले पर ADM काशीराम बड़ोले ने शिकायत की जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के दौरान जो मामला सामने रखा गया है। उसकी पूरी जांच की जाएगी। ADM के मुताबिक, अगर जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो नियमों के तहत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम में कुत्ते का मुखौटा पहनकर किया गया विरोध लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

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IDL टोकन के लिए $1 अरब तक का इंश्योरेंस कवर की तैयारी, Infinity DAO का दावा

AI से जुड़े DeFi प्लेटफॉर्म Infinity DAO ने अपने IDL टोकन और पूरे इकोसिस्टम के लिए करीब 1 अरब डॉलर का इंश्योरेंस कवर लाने की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी का कहना है कि अगर यह बीमा कार्यक्रम मंजूर होकर लागू हो जाता है, तो यह डिजिटल एसेट सेक्टर में रिस्क मैनेजमेंट और संस्थागत भरोसे के लिहाज से बड़ा कदम हो सकता है।

कंपनी के मुताबिक, इस बीमा व्यवस्था की पॉलिसी, अंडरराइटिंग शर्तें और कवरेज लिमिट ब्रिटेन के एक एक्सपर्ट्स क्रिप्टो इंश्योरेंस सिंडिकेट के साथ तैयार की जा रही हैं। फिलहाल यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

किन जोखिमों को मिलेगा कवर?

Infinity DAO के मुताबिक प्रस्तावित बीमा योजना पांच बड़े जोखिमों को कवर करेगी। इसमें खास परिस्थितियों में IDL टोकन डिफॉल्ट प्रोटेक्शन, प्लेटफॉर्म या इकोसिस्टम में बीमित डिफॉल्ट की स्थिति में सुरक्षा, साइबर अपराध और डिजिटल एसेट चोरी से बचाव शामिल है।

इसके अलावा डायरेक्टर्स एंड ऑफिसर्स (D&O) से जुड़े कानूनी दावों का कवर और यूजर्स, स्टेकहोल्डर्स व प्लेटफॉर्म के मैनेजमेंट स्ट्रक्चर के लिए अतिरिक्त सुरक्षा देने की भी योजना है।

Polygon पर चलता है IDL टोकन

IDL, Infinity DAO का यूटिलिटी टोकन है, जो Polygon ब्लॉकचेन पर काम करता है। कंपनी का कहना है कि उसका सिस्टम ड्यूल-टोकन स्ट्रक्चर और AI आधारित इकोनॉमिक मॉडल पर बना है। इसका मकसद टोकन इमिशन, लिक्विडिटी और सिस्टम की लंबी अवधि की स्थिरता को संभालना है।

कंपनी के प्रोटोकॉल वर्जन 1.2 में Quantum Emission Matrix, Flux Liquidity Shield, Velocity Recycle Core, HyperGuard Lock और Infinity Sustainability Protocol जैसे मॉड्यूल शामिल हैं। कंपनी का दावा है कि ये सिस्टम लिक्विडिटी मैनेजमेंट, स्टेकिंग और रिवॉर्ड मैकेनिज्म को बेहतर तरीके से संभालने में मदद करते हैं।

क्रिप्टो में इंश्योरेंस क्यों अहम है?

क्रिप्टो बाजार में निवेशकों के सामने साइबर अटैक, ऑपरेशनल गड़बड़ी और डिजिटल एसेट चोरी जैसे जोखिम बने रहते हैं। ऐसे में थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कुछ तय परिस्थितियों में इन जोखिमों को कम करने का काम कर सकता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ऐसा बीमा टोकन की कीमत गिरने या निवेश पर रिटर्न की गारंटी नहीं देता। कवरेज सिर्फ पॉलिसी में तय शर्तों के दायरे तक ही सीमित होता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Kanpur News: पांच साल में पैसा डबल करने का सपना दिखाया, 52 लाख हड़पे, 25 हजार का इनामी कंपनी निदेशक गिरफ्तार

VACL India Real Estate Fraud: पांच साल में रकम दोगुनी… साथ में प्लॉट का सपना और निवेश पर मोटे मुनाफे का भरोसा। इसी लालच में फंसाकर कानपुर की वीएसीएल इंडिया रियल एस्टेट कंपनी ने 52 लाख रुपये निवेश करा लिए। जब रकम लौटाने का समय आया तो कंपनी के जिम्मेदार गायब हो गए और शाखा पर ताला लटक गया। करीब नौ महीने से दर्ज इस मामले में अब पुलिस ने 25 हजार रुपये के इनामी कंपनी निदेशक बृजेन्द्र सिंह चौहान उर्फ विजेन्द्र सिंह चौहान को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को मंगलवार को बर्रा के दामोदर नगर स्थित क्राउन होटल के पास से दबोचा गया। उसके खिलाफ अलग-अलग स्थानों पर 19 मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है।