Market cues : 23800 के ऊपर टिके रहने पर निफ्टी में 24500 का लेवल मुमकिन, 23800 के नीचे जाने पर बढ़ सकती है गिरावट

Trade setup for today : 19 जून को निफ्टी में 0.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ बाजार की लगातार पांच दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया। प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद,इंडेक्स अपने शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा। इसने MACD में बुलिश क्रॉसओवर भी बनाए रखा,हालांकि RSI में थोड़ी नरमी आई। वहीं,शुक्रवार को बढ़त के बावजूद इंडिया VIX निचले स्तर पर ही बना रहा। बाजार जानकारों के मुताबिक,कंसोलिडेशन के दौर में निफ्टी को 23,800 के सपोर्ट जोन (10-दिन और 50-दिन के EMA) को बनाए रखने की जरूरत है। अगर यह लेवल टूटता है,तो इंडेक्स के 23,700–23,600 तक गिरने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि,अगर इंडेक्स 23,800 के ऊपर बना रहता है,तो यह 24,200–24,300 और उसके बाद 24,500 की ओर बढ़ सकता है,जो एक अहम रेजिस्टेंस लेवल है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,932, 23,898 और 23,842

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,043, 24,077 और 24,133

गैप-डाउन ओपनिंग के बाद,डेली चार्ट पर निफ्टी 50 ने निचले शैडो वाली एक छोटी बॉडी वाली बुलिश कैंडल बनाई। इससे पता चलता है कि ऊंचे स्तरों से थोड़ी गिरावट आई है,लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारी में भी दिलचस्पी दिखी है। हालांकि,अगले सेशन में इंडेक्स 100-दिन के EMA के ऊपर नहीं टिक पाया,लेकिन यह अपने शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा और ये दोनों ही ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। 10-दिन का EMA भी 50-दिन के EMA के ऊपर जाने की कगार पर है। RSI में थोड़ी नरमी आई लेकिन यह अपनी रेफरेंस लाइन से ऊपर बना रहा,जबकि MACD ज़ीरो लाइन और सिग्नल लाइन दोनों के ऊपर रहा,हालांकि हरे हिस्टोग्राम बार में मोमेंटम में कुछ कमी दिखी। ये सभी बातें बताती हैं कि थोड़े समय के कंसोलिडेशन के बावजूद ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,782, 57,862 और 57,992

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,522, 57,441 और 57,311

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,772, 56,012

बैंक निफ्टी की लगातार छह दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया और प्रॉफ़िट बुकिंग के कारण इसमें 0.5% की गिरावट आई,लेकिन यह पिछले दिन के निचले स्तर को बनाए रखने में कामयाब रहा। डेली टाइमफ़्रेम पर बैंकिंग इंडेक्स ने छोटी बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जिसमें नीचे की तरफ़ एक छोटी शैडो थी। यह हल्की गिरावट (करेक्शन)का संकेत है,जबकि कुल मिलाकर ट्रेंड अभी भी बुल्स के पक्ष में है। इंडेक्स अप्रैल के स्विंग हाई और फरवरी के हाई से अप्रैल के लो तक आए करेक्शन के 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल से ऊपर बना रहा। यह सभी अहम मूविंग एवरेज से भी ऊपर रहा,जो ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। RSI गिरकर 67.81 पर आ गया, लेकिन अपनी सिग्नल लाइन से काफी ऊपर बना रहा,जबकि MACD ने अपना बुलिश क्रॉसओवर बनाए रखा,हालांकि हरे हिस्टोग्राम बार थोड़े हल्के पड़ गए। ये सभी बातें बताती हैं कि कुछ प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद,ओवरऑल बुलिश ट्रेंड बना हुआ है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

लगातार 23 सेशन तक नेट बायर बने रहने के बाद,19 जून को घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) नेट सेलर बन गए और उन्होंने ₹1,159 करोड़ के शेयर बेचे। इसके उलट,विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट बायर बनकर उभरे और उन्होंने ₹4,859 करोड़ के शेयर खरीदे,जिससे विदेशी निवेशकों की फिर से दिलचस्पी का संकेत मिलता है।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX 2.35 प्रतिशत बढ़कर 12.97 पर पहुंचने के बावजूद निचले स्तर पर बना रहा। यह इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी नीचे ट्रेड करता रहा। मार्केट में तेज़ी के नज़रिए को बनाए रखने के लिए इसके 14 के स्तर से नीचे बने रहना जरूरी है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 19 जून को पिछले सेशन के 1.12 से गिरकर 0.91 पर आ गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

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F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

LPG Price Today: सऊदी अरामको ने बढ़ाई कॉन्ट्रैक्ट प्राइस, क्या भारत में महंगा होगा गैस सिलेंडर?

LPG Price Today: LPG सिलेंडर के रेट आज सोमवार को ना तो बढ़े हैं और ना ही घटे हैं। आखिरी बार 7 जून को कंपनियों ने 29 रुपये की बढ़ोतरी घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में की थी। वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडर के रेट में तब 42 रुपये से 53.50 रुपये का इजाफा हुआ था। अच्छी बात यह है कि अमेरिका-ईरान समझौते बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुल हो गया है। ऐसे में भारत जो कि LPG के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है वो अब आसानी से इंपोर्ट कर पाएगा।

ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में दो बार इजाफा हुआ था। वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम तब से अबतक 79% बढ़ चुके हैं।

शहरवार देखें कीमतें

शहर घरेलू सिलेंडर की कीमतकमर्शियल सिलेंडर की कीमत
दिल्ली 942.0 रुपये3113.5 रुपये
मुंबई941.5 रुपये 3067.5 रुपये
कोलकाता968.0 रुपये3256.0 रुपये
चेन्नई 957.5 रुपये 3283.0 रुपये
बेंगलुरु944.5 रुपये 3198.0 रुपये
आईजॉल1094.0 रुपये3598.5 रुपये
लखनऊ979.5 रुपये3236.0 रुपये
गाजियाबाद939.50 रुपये3113.50 रुपये
पटना1031.5 रुपये3400.5 रुपये

भारत में LPG की कीमत पड़ोसी देशों से भी कम

सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत पड़ोसी और कई विकसित देशों के मुकाबले बहुत कम है। नई दिल्ली में 14.2 किलों का एक सिलेंडर 942 रुपये में उपलब्ध है, जबकि पाकिस्तान में इसकी कीमत 1046 रुपये, नेपाल में 1207 रुपये, बांग्लादेश में 1225 रुपये और श्रीलंका में 1241 रुपये, अमेरिका में 1755 रुपये, आस्ट्रेलिया में 1765 रुपये और कनाडा में 2411 रुपये हैं। उज्जवला योजना के तहत लाभार्थियों को यही सिलेंडर 642 रुपये में मिलता है, जो इन देशों के मुकाबले बेहत कम है।

सऊदी अरामको ने बढ़ाया कॉन्ट्रैक्ट प्राइस

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने जून महीने के लिए LPG के आधिकारिक विक्रय मूल्य (OSP) में 1% से 3% तक की बढ़ोतरी की है। कंपनी ने प्रोपेन की कीमत में 10 डॉलर प्रति मीट्रिक टन और ब्यूटेन की कीमत में 20 डॉलर प्रति मीट्रिक टन का इजाफा किया है। इसके बाद प्रोपेन का नया भाव 760 डॉलर प्रति मीट्रिक टन और ब्यूटेन का 820 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गया है।

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा बंद होने की आशंकाओं ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि वैश्विक बाजार में गैस की कीमतों को बढ़ावा मिल रहा है।

क्या होगा असर?

सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में हुई इस बढ़ोतरी का असर सरकारी खाजने के साथ-साथ आम आदमी की जेब पर भी पड़ेगा। अगर अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में इसी तरह गैस के दाम ऊंचे स्तर पर बने रहे, तो हो सकता है कि 1 जुलाई को सरकारी तेल कंपनियों की अगली समीक्षा बैठक में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में एक बार फिर से बढ़ोतरी कर दी जाए।

बता दें कि सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस एक अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क रेट है, जिस पर सऊदी अरामको हर महीने दुनिया भर के देशों को एलपीजी बेचती है। चूंकि सऊदी अरब दुनिया में LPG का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है इसलिए इसके द्वारा तय की गई कीमत को दुनिया का एलपीजी का आधिकारिक रेट मान लिया जाता है।

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Stocks to Watch: Tata Motors, RVNL और Goodluck समेत इन स्टॉक्स पर फोकस; हफ्ते के पहले कारोबारी दिन कमाई का मौका

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों में तेजी के बीच हफ्ते के पहले कारोबारी दिन आज गिफ्ट निफ्टी से घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 68.50 प्वाइंट्स यानी 0.28% की बढ़त के साथ 24,117.00 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 19 जून को सेंसेक्स (Sensex) 607.08 प्वाइंट्स यानी 0.78% की गिरावट के साथ 76,802.90 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 154.90 प्वाइंट्स यानी 0.64% की फिसलन के साथ 24,013.10 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: इन स्टॉक्स पर रहेगी नजर

Reliance Industries

रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी जियो प्लेटफॉर्म्स ने सेबी के पास आईपीओ का ड्राफ्ट दाखिल किया है। इस आईपीओ के तहत 27 करोड़ नए इक्विटी शेयरों जारी करने की योजना है। आईपीओ से मिलने वाले ₹27,500 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज हल्का करने और आम कॉर्रपोरेट उद्देश्यों में किया जाएगा।

Tata Motors Commercial Vehicle (Tata Motors CV)

टाटा मोटर्स कमर्शियल वेईकल को अलग-अलग सेगमेंट में 3,400 से ज़्यादा इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल (eCV) के ऑर्डर मिले हैं। इनमें लगभग 2,000 SCV और पिक-अप, लगभग 900 ट्रक और लगभग 500 बसों के ऑर्डर शामिल हैं।

Rail Vikas Nigam Ltd (RVNL)

रेल विकास निगम को एनएमडीसी से ₹2,977 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट का लेटर ऑफ़ अवार्ड (LoA) मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट आंध्र प्रदेश के विजग में 10 MTPA की हैंडलिंग क्षमता वाले बफर स्टॉकपाइल और ब्लेंडिंग यार्ड बनाने के लिए है।

Power Mech Projects

पावर मेक प्रोजेक्ट्स को जेएसडब्ल्यू थर्मल एनर्जी से पश्चिम बंगाल के सालबोनी में 2×800 MW के थर्मल पावर प्रोजेक्ट के बीटीजी एरिया में सिविल और स्ट्रक्चरल काम के लिए ₹1,008.9 करोड़ का ऑर्डर मिला है।

Sun Pharmaceutical Industries

सन फार्मा ने ₹271.2 करोड़ में इनोवकेयर लाइफसाइंसेज के 100% आउटस्टैंडिंग शेयर खरीदने का फैसला किया है। इनोवकेयर लाइफसाइंसेज फार्मास्युटिकल दवाओं, न्यूट्रास्युटिकल्स और कॉस्मेस्युटिकल प्रोडक्ट्स की देश में मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और बिक्री के बिजनेस में है।

Deep Industries

दीप इंडस्ट्रीज को ओएनजीसी से असम एसेट के लखमानी GGS-5 में गैस कम्प्रेशन चार्टर हायरिंग सर्विस के लिए तीन साल का ‘लेटर ऑफ अवार्ड’ मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट की कुल अनुमानित वैल्यू लगभग ₹83.81 करोड़ है।

Bharat Forge

भारत फोर्ज ने रक्षा मंत्रालय के साथ ₹425 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। इसके तहत कोलकाता-क्लास के जहाजों पर ऑनबोर्ड बिजली बनाने के लिए भारतीय नौसेना को गैस टरबाइन जनरेटर सप्लाई किया जाएहा। इस कॉन्ट्रैक्ट पर पांच साल में काम पूरा करना है।

Kirloskar Oil Engines

किर्लोस्कर ऑयल इंजिन्स को डिजिटल इंफ्रा कंपनी हाइपरनेक्स्ट (HyperNext) से एक बड़ा ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर में किर्लोस्कर ऑयल इंजिन्स के 2,500 kVA ऑप्टिप्राइम डुअल कोर पावर सिस्टम की 96 यूनिट्स (कुल 192 MW क्षमता) शामिल हैं।

Goodluck India

गुडलक इंडिया की सब्सिडियरी गुडलक डिफेंस एंड एयरोस्पेस को एक कंपनी से ₹255 करोड़ का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर रेडी-टू-फिल कंडीशन में 155 एमएम लॉन्ग-रेंज एंपटी शेल्स की सप्लाई के लिए है।

Knowledge Marine & Engineering Works

नॉलेज मरीन एंड इंजीनियरिंग वर्क्स (KMEW) को अपनी सब्सिडियरी नॉलेज शिपयार्ड के साथ मिलकर इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) से ₹66.11 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर 10 हाइब्रिड इलेक्ट्रिक पैसेंजर फेरी के डिजाइन, निर्माण, सप्लाई, टेस्टिंग और कमीशनिंग के लिए है। हर फेरी की क्षमता 20 यात्रियों की होगी और कंपनी को इसके मेंटनेंस और सपोर्ट का काम भी संभालना है।

Garden Reach Shipbuilders & Engineers

पब्लिक एंटरप्राइजेज विभाग ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स को ‘नवरत्न’ का दर्जा दिया है।

Patanjali Foods

पतंजलि फूड्स को कन्नूर जिले में ज्वार के आटे के एक बैच की बिक्री पर रोक का आदेश मिला है। यह रोक इसलिए लगाई गई है क्योंकि इसमें क्लोरपायरीफॉस (Chlorpyriphos) कीटनाशक के अवशेष एक लिमिट से अधिक पाए गए थे।

Aavas Financiers

घनश्याम रावत ने आवास फाइनेंसर्स के प्रेसिडेंट और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर के पदों से इस्तीफा दे दिया है, जबकि आशुतोष अत्रे ने प्रेसिडेंट और चीफ रिस्क ऑफिसर के पदों से इस्तीफा दिया है। इनका इस्तीफा 21 सितंबर, 2026 से प्रभावी होगा। बोर्ड ने घनश्याम गुप्ता को कंपनी का अंतरिम चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर और पुनीत पुरुषोत्तम अग्रवाल को अंतरिम चीफ रिस्क ऑफिसर नियुक्त किया है। इनकी नियुक्तियां आज 22 जून से प्रभावी होंगी।

UCO Bank

सरकार ने यूको बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजेंद्र कुमार साबू को मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। उनके पास इसका अतिरिक्त प्रभार 31 अगस्त, 2026 तक या इस पद पर किसी की नियुक्ति होने तक (जो भी पहले हो) रहेगा।

Nestle India

नेस्ले इंडिया के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 3 जुलाई को होनी है, जिसमें स्पेशल डिविडेंड और फाइनल डिविडेंड के प्रस्ताव पर विचार होगा। इसकी रिकॉर्ड डेट 10 जुलाई फिक्स हो चुकी है।

Himadri Speciality Chemical

हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल ने इंटरनेशनल बैटरी कंपनी (IBC) के साथ अपनी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत किया है। आईबीसी अमेरिका की टेक्नोलॉजी डेवलपर और केमिस्ट्री-एग्नोस्टिक प्रिजमैटिक लिथियम-आयन सेल्स मैन्युफैक्चरर है। हिमाद्री ने इसमें $6.6 लाख का अतिरिक्त निवेश करके इसमें अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 20.47% कर ली है। इस निवेश से पहले हिमाद्री ने इंटरनेशनल बैटरी कंपनी में $54.3 लाख का निवेश किया था और पूरी तरह से डाइल्यूटेड आधार पर इसकी 17.29% हिस्सेदारी थी।

General Insurance Corporation of India

वित्त मंत्रालय ने डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज के एडिशनल सेक्रेटरी देबाशीष प्रुस्टी (Debasish Prusty) को तत्काल प्रभाव से जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के बोर्ड में डायरेक्टर के तौर पर नॉमिनेट किया है।

एक्स-डेट

आज डीएमआर इंजीनियरिंग, पैनासोनिक कॉर्बन इंडिया कंपनी और संगम इंडिया के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे।

F&O Ban

आज कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया में एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

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GIFT Nifty ऊपर, एशियाई बाजारों में तेजी के साथ सेंसेक्स-निफ्टी के लिए अच्छी शुरुआत का संकेत, सभी की नजरें US-ईरान बातचीत, क्रूड पर

सोमवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के थोड़ी बढ़त के साथ खुलने की संभावना है, जिसे GIFT Nifty से मिले अच्छे संकेतों और एशियाई बाज़ारों में बढ़त का सपोर्ट मिला है। हालांकि, US-ईरान शांति बातचीत को लेकर अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निवेशकों के सतर्क रहने की उम्मीद है।

GIFT Nifty सुबह 8.35 बजे 24,117.00 के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद भाव से 68.50 पॉइंट या 0.31 प्रतिशत ज़्यादा है, जो घरेलू इक्विटी के लिए हल्की अच्छी शुरुआत का संकेत देता है। यह संकेत शुक्रवार को भारतीय बाज़ारों के पांच सेशन की बढ़त का सिलसिला टूटने के बाद आया है, जो एक्सेंचर के गाइडेंस में कटौती के बाद इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में भारी बिकवाली से प्रभावित हुआ था।

19 जून को सेंसेक्स 607.08 पॉइंट्स या 0.78 फीसदी गिरकर 76,802.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 154.90 पॉइंट्स या 0.64 फीसदी गिरकर 24,013.10 पर बंद हुआ। निफ्टी IT इंडेक्स 3.7 फीसदी गिरकर तीन साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया और बेंचमार्क इंडेक्स पर सबसे बड़ी रुकावट बनकर उभरा।

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रोग्रेस की खबरों के बाद सोमवार को एशियाई मार्केट मजबूती के साथ ऊपर कारोबार कर रहे थे। कतर और पाकिस्तान के अधिकारियों ने कहा कि बातचीत करने वालों ने 60 दिनों के अंदर फाइनल एग्रीमेंट के रोडमैप पर प्रोग्रेस की है, जिससे शांति प्रक्रिया के टूटने के डर को शांत करने में मदद मिली।

जापान का निक्केई पिछले हफ्ते लगभग 8 फीसदी बढ़ने के बाद 1.9 परसेंट बढ़ा, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी 2.6 फीसदी और चढ़ा, जिससे सेमीकंडक्टर स्टॉक्स की वजह से हाल की रैली और बढ़ गई। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 1 फीसदी की बढ़त हुई। जियोपॉलिटिकल सेंटिमेंट में सुधार ने भी कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त को रोकने में मदद की। ब्रेंट क्रूड 0.4 फीसदी गिरकर लगभग $80 प्रति बैरल पर आ गया, जो शुरू में इस चिंता के कारण बढ़ा था कि ईरान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग पर रोक लगा दी है। US क्रूड लगभग $77.5 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।

भारतीय बाजारों के लिए तेल एक अहम वैरिएबल बना हुआ है। हालांकि कीमतें हाल के निचले स्तर से वापस ऊपर आई हैं, लेकिन वे संघर्ष के चरम के दौरान देखे गए लेवल से काफी नीचे हैं। भारतीय रुपया भी 11 हफ्तों में अपनी सबसे अच्छी साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने के बाद इस हफ्ते मजबूत स्थिति में आ रहा है, जिसे कम कच्चे तेल की कीमतों और बेहतर बाहरी सेंटिमेंट का सपोर्ट मिला है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के अनुसार, US-ईरान बातचीत से जुड़े डेवलपमेंट के प्रति बाजार सेंसिटिव बने रहने की संभावना है। उन्होंने कहा, “भारतीय इक्विटी बाजार सावधानी के साथ खुल सकते हैं क्योंकि बातचीत की खराब शुरुआत की खबरों से संभावित US-ईरान शांति समझौते को लेकर उम्मीद कम हो गई है।” पोनमुडी ने कहा कि निवेशक कच्चे तेल की कीमतों और बातचीत से जुड़े डेवलपमेंट दोनों पर करीब से नज़र रखेंगे।

पिछले सेशन में इंस्टीट्यूशनल फ्लो ने एक पॉजिटिव सरप्राइज दिया। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) 19 जून को नेट बायर के तौर पर सामने आए, उन्होंने 4,859 करोड़ रुपये के इक्विटी खरीदे। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) लगातार 23 सेशन की खरीदारी के बाद नेट सेलर बन गए और 1,159 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

टेक्निकल नजरिए से, पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी एक कंस्ट्रक्टिव स्ट्रक्चर बनाए हुए है। 24,100-24,200 ज़ोन अभी भी तुरंत रेजिस्टेंस एरिया बना हुआ है, और इस बैंड के ऊपर लगातार मूव 24,400 की ओर रैली का रास्ता खोल सकता है। नीचे की तरफ, 23,900 एक अहम सपोर्ट लेवल बना हुआ है। उस ज़ोन से नीचे ब्रेक होने पर नई प्रॉफिट बुकिंग शुरू हो सकती है और इंडेक्स 23,800 की ओर खिंच सकता है।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, बढ़त के साथ खुल सकते है भारतीय बाजार 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ब्रेक्जिट के 10 साल: ब्रिटेन को भारी पड़ा अलग होने का फैसला

Brexit Impact on UK

-आयुष यादव

 

23 जून 2016 को हुए इस ऐतिहासिक फैसले को 'ब्रेक्जिट' नाम दिया गया। तब 52 प्रतिशत यानी करीब 1।7 करोड़ से ज्यादा लोगों ने यूरोपीय संघ से अलग होने के पक्ष में वोट किया था। भले ही जीत का अंतर मामूली था, लेकिन इस फैसले ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज को सबसे बड़ा झटका दिया। हालांकि, इस अलगाव की कागजी कार्रवाई को पूरा होने में भी करीब पांच साल का लंबा वक्त लग गया।

 

ब्रेक्जिट की मुख्य वजह यूरोपीय संघ से नाराजगी और 2008 का वैश्विक आर्थिक संकट था। अलग होने के समर्थकों का दावा था कि अकेले रहने पर ब्रिटेन फिर से मजबूत होगा और अपने घरेलू मुद्दों पर ध्यान दे सकेगा। वहीं, विरोधियों ने चेतावनी दी थी कि इससे देश को भारी आर्थिक नुकसान होगा और दुनिया में उसकी साख कमजोर होगी। आज 10 साल बाद, ब्रिटेन वहीं खड़ा है जो विरोधियों ने आशंका जताई थी।

 

अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ा अलगाव

ब्रेक्जिट समर्थकों ने सपना दिखाया था कि यूरोपीय संघ से बाहर निकलकर ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था नए आयाम छुएगी। लेकिन कोरोना महामारी, यूक्रेन युद्ध और हाल ही में अमेरिका-इस्राएल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।

 

ब्रिटेन के कारोबारियों को अब यूरोपीय देशों के साथ व्यापार करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि 27 देशों का यह समूह आज भी ब्रिटेन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। हालांकि, ब्रिटिश सामानों पर कोई टैक्स (टैरिफ) नहीं लगाया गया है, लेकिन कस्टम के कागजी काम, बॉर्डर सर्टिफिकेट और वीजा पाबंदियों जैसी गैर-टैरिफ अड़चनों ने व्यापार को बेहद मुश्किल बना दिया है। अमेरिका के साथ जिस बड़े व्यापार समझौते का वादा ब्रेक्जिट समर्थकों ने किया था, वह भी अब तक नहीं हो पाया है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ब्रिटेन यूरोपीय संघ में रहता तो आज उसकी अर्थव्यवस्था 4 से 8 प्रतिशत बड़ी होती। इसका मतलब होता कि लोगों का जीवनस्तर बेहतर होता और पब्लिक सर्विसेज, खासकर नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) को अरबों पाउंड मिलते। ब्रेक्सिट के प्रचार के दौरान लाल रंग की बस पर यह वादा चमकाया गया था कि अलग होने से एनएचएस को हर हफ्ते 35 करोड़ पाउंड (करीब 46।8 करोड़ डॉलर) अतिरिक्त मिलेंगे।

 

किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर जोनाथन पोर्ट्स कहते हैं, “ब्रेक्जिट ने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पहले के मुकाबले छोटा कर दिया है। इसका असर किसी अचानक आए संकट की तरह नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश और उत्पादकता पर धीरे-धीरे और लगातार पड़ने वाले बोझ के रूप में दिख रहा है।”

 

इसके उलट, ब्रेक्जिट समर्थकों का कहना है कि इतने बड़े फैसले का नतीजा शॉर्ट-टर्म में नहीं देखा जा सकता और प्रवासियों पर नियंत्रण जैसे बड़े अधिकारों के बदले शुरुआती आर्थिक नुकसान के लिए देश तैयार था।

 

प्रवासियों के मुद्दे पर बढ़ता गुस्सा

ब्रेक्जिट के जरिए ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच 'फ्री मूवमेंट' (बिना वीजा आवाजाही) तो खत्म हो गई, लेकिन सीमाओं को सुरक्षित करने के मोर्चे पर मिले जुले नतीजे रहे हैं। यूरोपीय देशों से आने वाले प्रवासियों की संख्या में तो भारी कमी आई है, लेकिन गैर-यूरोपीय देशों से आने वाले लोगों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इसकी वजह पिछली कंजर्वेटिव सरकार द्वारा वीजा नियमों में किए गए बदलाव थे, ताकि बुजुर्गों की देखभाल जैसे क्षेत्रों के लिए जरूरी कामगारों की कमी को पूरा किया जा सके।

 

हालांकि, अब सरकार इस पर नियंत्रण पाती दिख रही है। नेट माइग्रेशन (आने और जाने वाले लोगों का अंतर) साल 2023 के 9 लाख से घटकर पिछले साल 1,71,000 पर आ गया है। इस गिरावट के बावजूद, देश में अवैध रूप से आने वाले प्रवासियों को लेकर गुस्सा चरम पर है। अफगानिस्तान और सूडान जैसे युद्धग्रस्त इलाकों से लोग इंग्लिश चैनल पार करके छोटी नावों के जरिए ब्रिटिश तटों पर पहुंच रहे हैं।

 

साल 2022 में इन नावों से 46,000 और पिछले साल 41,000 लोग ब्रिटेन आए। सरकारी खर्च पर इन्हें होटलों में ठहराए जाने को लेकर जनता में इतना गुस्सा है कि कुछ जगहों पर भीड़ ने हिंसक प्रदर्शन किए और होटलों में आग लगाने की कोशिश भी की।

 

जनता को हो रहा है पछतावा

ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। 14 साल तक सत्ता में रहने के बाद कंजर्वेटिव पार्टी को 2024 में हार का सामना करना पड़ा। मौजूदा लेबर पार्टी की सरकार भी जनता को प्रभावित नहीं कर पाई है और प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के जल्द ही इस्तीफे की खबरें आ रही हैं। इस बीच, धुर दक्षिणपंथी नाइजेल फारेज की अगुवाई वाली 'रिफॉर्म यूके' पार्टी को लगातार जनसमर्थन मिल रहा है, जो पिछले एक साल से ओपिनियन पोल्स में सबसे आगे चल रही है।

 

इसके साथ ही, देश में यह भावना मजबूत हो रही है कि ब्रेक्जिट पूरी तरह फेल रहा है। इप्सोस के दो हालिया सर्वेक्षणों में शामिल 52 प्रतिशत लोग फिर से यूरोपीय संघ में शामिल होना चाहते हैं, जबकि सिर्फ 33 प्रतिशत इसके खिलाफ हैं। वहीं, 48 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ब्रेक्जिट के नतीजे उम्मीद से बदतर रहे हैं और सिर्फ 9 प्रतिशत इसे उम्मीद से बेहतर मानते हैं। 48 प्रतिशत लोग आज ही यूरोपीय संघ में शामिल होने के लिए एक और जनमत संग्रह का समर्थन करते हैं।

 

दोबारा जुड़ने की राह नहीं आसान

इस माहौल के बीच, 2024 में चुनी गई लेबर सरकार फूंक फूंक कर कदम रख रही है। उसने साफ कर दिया है कि वह ब्रेक्जिट के फैसले को पलटने या यूरोपीय संघ के सिंगल मार्केट में वापस जाने का कोई इरादा नहीं रखती। प्रधानमंत्री स्टार्मर का पूरा ध्यान सिर्फ व्यापार को आसान बनाने और रिश्तों को सुधारने पर है, जिसके लिए वह अगले महीने यूरोपीय संघ के साथ एक समिट भी करने वाले हैं।

 

वहीं, प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे एंडी बर्नहैम ने गुरुवार को एक विशेष चुनाव में जीत हासिल की है। उन्होंने उस सीट पर रिफॉर्म पार्टी को हराया है जिसने ब्रेक्जिट का भारी समर्थन किया था। चुनाव प्रचार के दौरान यूरोपीय संघ में दोबारा शामिल होने के मुद्दे पर एंडी बर्नहैम ने कहा, “मैं यूके के दोबारा यूरोपीय संघ में शामिल होने का प्रस्ताव नहीं दे रहा हूं। मैं जनमत संग्रह में किए गए फैसले का सम्मान करता हूं। अगर हम उस वोट का सम्मान नहीं करते हैं, तो लोकतंत्र को मजबूत करने के बारे में मेरी कही हर बात का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।”

 

‘सिर्फ 2 पैसे ज्यादा और शनिवार-रविवार की छुट्टी…’ कर्मचारी का ऐसा इस्तीफा पढ़कर आप भी हंस पड़ेंगे!

नौकरी छोड़ने के पीछे की वजहें अक्सर लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं। कोई बेहतर करियर के लिए कदम बढ़ाता है तो कोई नई चुनौतियों की तलाश में कंपनी बदलता है। लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसा इस्तीफा वायरल हो रहा है, जिसने अपनी सादगी और ईमानदारी से लोगों का ध्यान खींच लिया है। इस पत्र में न तो बड़े-बड़े कॉर्पोरेट शब्दों का इस्तेमाल किया गया और न ही लंबी-चौड़ी सफाई दी गई।

कर्मचारी ने बेहद सीधे और मजेदार अंदाज में अपनी बात रखी, जिसे पढ़कर इंटरनेट यूजर्स मुस्कुराने पर मजबूर हो गए। यही वजह है कि यह इस्तीफा तेजी से सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। कई लोग इसे नौकरीपेशा लोगों की असली सोच और आज के कार्यस्थल की हकीकत का सबसे सटीक उदाहरण भी बता रहे हैं।

LinkedIn पर शेयर हुई अनोखी चिट्ठी

यह इस्तीफा HR कंसल्टेंट अंश्वर्या गुप्ता ने LinkedIn पर शेयर किया। उन्होंने इसे अपनी “Resignation Series Part 20” का हिस्सा बताया। तस्वीर में कर्मचारी फरहान का हाथ से लिखा छोटा-सा इस्तीफा नजर आता है, जिसने देखते ही देखते लोगों का ध्यान खींच लिया।

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क्या लिखा था इस्तीफे में?

फरहान ने अपने पत्र में बेहद सरल शब्दों में लिखा:

“Dear Sir, सामने वाली कंपनी शनिवार-रविवार की छुट्टी और 2 पैसे ज्यादा दे रही है, तो मैं बिक गया।”

इसके बाद उन्होंने अपना नाम लिखकर पत्र समाप्त कर दिया।

ईमानदारी पर फिदा हुए यूजर्स

फरहान का इस्तीफा लोगों को खूब पसंद आ रहा है। कई यूजर्स ने कहा कि आज के समय में बेहतर वेतन और वर्क-लाइफ बैलेंस ही नौकरी बदलने की सबसे बड़ी वजह बन चुके हैं।

एक यूजर ने लिखा, “सब इस्तीफे की बात कर रहे हैं, लेकिन मैं तो उनकी शानदार हैंडराइटिंग का फैन हो गया हूं।”

दूसरे ने मजाकिया अंदाज में कहा, “LinkedIn कहता है करियर ग्रोथ, लेकिन असली दुनिया में लोग ज्यादा सैलरी और वीकेंड ऑफ के लिए नौकरी बदलते हैं।”

वीकेंड की छुट्टी बनी सबसे बड़ा आकर्षण

कई लोगों ने टिप्पणी की कि अगर नौकरी में शनिवार और रविवार की छुट्टी मिल जाए तो कर्मचारी थोड़ा कम वेतन भी स्वीकार कर सकते हैं। कुछ यूजर्स ने इसे कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों और कार्यस्थल की सच्चाई का सबसे ईमानदार उदाहरण बताया।

सोशल मीडिया पर छाई चर्चा

यह अनोखा इस्तीफा अब हजारों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे मजेदार होने के साथ-साथ नौकरीपेशा लोगों की वास्तविक सोच का प्रतिबिंब भी मान रहे हैं। फरहान की दो लाइन की चिट्ठी ने एक बार फिर दिखा दिया कि कभी-कभी सबसे सरल बातें ही सबसे ज्यादा असर छोड़ जाती हैं।

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80 मिनट की अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद फिर बढ़ा तनाव, ट्रंप की धमकी पर ईरान का कड़ा जवाब; संयुक्त फोटो सेशन भी रद्द

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US Iran News in Hindi : स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता मात्र 80 मिनट में खत्म हो गई। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बड़े हमले की धमकी दी। इस पर ईरान ने पलटवार करते हुए कहा कि इस्लामिक गणराज्य को धमकाने से कोई फायदा नहीं होगा। हालांकि पाकिस्तान और कतर ने एक बयान जारी कर वार्ता की सफलता का दावा किया। ALSO READ: Top News 22 June: ट्रंप की धमकी से फिर भड़का ईरान, अयोध्या राम मंदिर मामले में SIT की बड़ी कार्रवाई

  

क्या है वार्ता पर पाकिस्तान और कतर का दावा?

अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की वार्ता मात्र 80 मिनट में खत्म। पाकिस्तान और कतर ने संयुक्त बयान जारी कर कहा- अमेरिका और ईरान में फाइनल डील पर रोडमैप को लेकर सहमति बनी। लेबनान को लेकर डिकॉम्प्लेक्शन सेल पर सहमति बनी। दोनों पक्ष हाईलेवल कमेटी बनाने पर सहमत। चीफ नेगोशिएटर कमेटी को रिपोर्ट करेंगे।

 

ट्रंप की ईरान को धमकी

शांति वार्ता के बीच अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को फिर हमले की धमकी दी। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि ईरान को तुरंत लेबनान में अपने सहयोगी समूहों को परेशानी पैदा करने से रोकना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम ईरान पर फिर से बहुत कड़ा हमला करेंगे, जैसा हमने पिछले सप्ताह किया था, बल्कि उससे भी ज्यादा सख्ती से। ट्रंप की धमकी के बाद दोनों देशों में तनाव चरम पर पहुंच गया और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ गया।

 

ईरान का पलटवार

ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते के बाद एक बार फिर से टकराव के आसार नजर आने लगे हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते 

 

हुए कहा कि इस्लामिक गणराज्य को धमकाने से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप को अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए। हमारी सशस्त्र सेनाएं उन्हें अलग तरीके से जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी दबाव की नीति पहले भी सफल नहीं हुई और आगे भी उसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

 

नहीं हुआ संयुक्त फोटो सेशन

ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, वार्ता शुरू होने से पहले दोनों पक्षों के बीच हाथ मिलाने और संयुक्त तस्वीर लेने की योजना बनाई गई थी। बहरहाल ट्रंप की धमकी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी जताते हुए अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित संयुक्त फोटो सेशन में शामिल होने से इनकार कर दिया।

edited by : Nrapendra Gupta

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : GIFT Nifty में बढ़त को देखते हुए,बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty के 22 जून को बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। शुरुआती कारोबार में GIFT Nifty बढ़त के साथ 24,124.50 के आसपास ट्रेड कर रहा था। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

IT,ऑयल एंड गैस और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में बिकवाली के कारण,19 जून को भारतीय इक्विटी इंडेक्स की लगातार पांच दिनों की बढ़त का सिलसिला थम गया और वे गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी 24,000 के आसपास रहा। सेंसेक्स 607.08 अंक या 0.78 प्रतिशत गिरकर 76,802.90 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी 154.90 अंक या 0.64 प्रतिशत गिरकर 24,013.10 पर आ गया।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 08.00 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 78 अंक यानी 0.32 फीसदी की बढ़त के साथ 24,126 के आसपास कारोबार कर रहा था।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 2.12 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। वहीं,स्ट्रेट टाइम्स 0.13 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। हैंगसेंग 1.60 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। ताइवान के बाजार में 2.75 फीसदी की तेजी है। कोस्पी 1.09 फीसदी ऊपर दिख रहा है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.46 फीसदी की गिरावट नजर आ रही है।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, बढ़त के साथ खुल सकते है भारतीय बाजार

अमेरिकी बाजार

जूनटीन्थ (Juneteenth) की सरकारी छुट्टी के कारण शुक्रवार, 19 जून को अमेरिकी बाजार बंद रहे।

डॉलर इंडेक्स

सोमवार को डॉलर मजबूत रहा क्योंकि मध्य पूर्व में फिर से युद्ध शुरू करने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों और तेहरान के होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने के ऐलान के बाद,अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते पर अनिश्चितता के बादल छा गए। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 100.80 के स्तर पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10-साल और 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में 2 बेसिस पॉइंट से ज्यादा की बढ़त हुई है। जिससे ये क्रमशः 4.47% और 4.20% पर पहुच गए हैं।

एशियन करेंसी

सोमवार को ज्यादातर एशियाई करेंसीज में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरावट दिख रही है। थाई बाहत एकमात्र ऐसी करेंसी रही जिसमें बढ़त दिखी,जबकि जापानी येन और चीनी रेनमिनबी में सबसे ज्यादा गिरावट आई।

जापानी येन में 0.12 प्रतिशत की गिरावट आई है। उसके बाद चीनी रेनमिनबी में 0.11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। दक्षिण कोरियाई वॉन,मलेशियन रिंगित, ताइवानी डॉलर,इंडोनेशियाई रुपिया,फिलीपीनी पेसो और सिंगापुर डॉलर में भी 0.03-0.10 की मामूली गिरावट है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

लगातार 23 सेशन तक नेट बायर बने रहने के बाद,19 जून को घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) नेट सेलर बन गए और उन्होंने ₹1,159 करोड़ के शेयर बेचे। इसके उलट,विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट बायर बनकर उभरे और उन्होंने ₹4,859 करोड़ के शेयर खरीदे,जिससे विदेशी निवेशकों की फिर से दिलचस्पी का संकेत मिलता है।

Delhi Weather Today: दिल्ली में आज बारिश और आंधी का अलर्ट, 40°C से नीचे रहेगा पारा

Delhi Weather Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार, 22 जून को बारिश, आंधी और तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिससे इस महीने की शुरुआत से पड़ रही भीषण गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और दिन के दौरान आंधी-तूफान व बिजली कड़कने के साथ बहुत हल्की से हल्की बारिश होने का अनुमान लगाया है।

मौसम विभाग के अनुसार, अधिकतम तापमान 37°C से 39°C के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 26°C से 28°C के बीच रहने की संभावना है।

रविवार को शहर में मौसम सुहावना रहा

IMD के आंकड़ों के मुताबिक, रविवार को राजधानी में अधिकतम तापमान 38.9°C दर्ज किया गया, जो मौसम के औसत से 0.3 डिग्री ज्यादा था। न्यूनतम तापमान 28.8°C रहा, जो सामान्य से 0.8 डिग्री ज्यादा था।

रविवार सुबह 8:30 बजे सापेक्ष आर्द्रता (relative humidity) 39% थी, जिससे पता चलता है कि पिछले हफ्ते की तुलना में मौसम कम उमस भरा था।

वहीं, उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम के बदलते पैटर्न के कारण पिछले कुछ दिनों से हल्के तापमान का दौर जारी रहा और पारा 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे ही बना रहा।

आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाओं की संभावना

IMD ने सोमवार के लिए दिल्ली-NCR के कुछ इलाकों में हल्की बारिश के साथ आंधी-तूफान और बिजली कड़कने की संभावना जताई है। इस दौरान 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चल सकती हैं, और कुछ इलाकों में हवा के झोंके 60 किमी/घंटा तक पहुंच सकते हैं। लोगों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा करते समय सावधानी बरतें और तूफानी मौसम में पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचें।

उम्मीद है कि मौसम की इस स्थिति के कारण उमस भरे हालात के बावजूद दिन का तापमान नियंत्रण में रहेगा।

दिल्ली का AQI ‘मध्यम’ श्रेणी में

रविवार को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘मध्यम’श्रेणी में रही। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 127 दर्ज किया गया।

बता दें कि 101 से 200 के बीच का AQI ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है, जबकि 51 से 100 के बीच की रीडिंग को ‘संतोषजनक’ माना जाता है।

IMD के ताजा अनुमान के मुताबिक, पूरे हफ्ते आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की उम्मीद है। बीच-बीच में होने वाली बारिश से राष्ट्रीय राजधानी में तापमान को गर्मी के चरम स्तर से नीचे बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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Crude Oil Price: US-ईरान शांति बातचीत के बीच ट्रंप की नई धमकी से डरा क्रूड बाजार, कीमतों में आया 2% का उछाल, ब्रेंट $82 के निकला पार

Crude Oil Price: सोमवार, 22 जून को तेल की कीमतों में तेज़ी आई, जब प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर हिज़्बुल्लाह इज़राइल पर हमले जारी रखता है तो ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन हो सकता है। इससे यह चिंता बढ़ गई कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही शांति बातचीत में रुकावट आ सकती है।

सोमवार को मार्केट खुलने पर ब्रेंट क्रूड 2.2% तक बढ़कर $82.30 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट $78 के निशान से ऊपर चढ़ गया।

आज कच्चे तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

रविवार को बातचीत की शुरुआत अनिश्चित थी, जब ईरानी मीडिया ने बताया कि ट्रंप की चेतावनी के बाद तेहरान ने स्विट्जरलैंड में बातचीत रोक दी है। हालांकि, बातचीत से जुड़े सूत्रों ने कहा कि बातचीत जारी है। ईरान ने इज़राइल पर लेबनान में सीज़फ़ायर तोड़ने का भी आरोप लगाया।

स्विस रिसॉर्ट बर्गेनस्टॉक में हुई हाई-लेवल बातचीत 60 दिन के बातचीत के समय की शुरुआत है, जो पिछले हफ़्ते ट्रंप के तनाव कम करने के मकसद से एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग पर साइन करने के बाद शुरू हुई थी। हालांकि ईरान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का दावा किया, लेकिन वीकेंड में इस ज़रूरी पानी के रास्ते से तेल की सप्लाई ज़्यादातर बिना रुके जारी रही।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत सोमवार सुबह तक चली और होर्मुज स्ट्रेट से नेविगेशन को सुरक्षित रखने और दक्षिणी लेबनान में इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच सीज़फ़ायर का पालन पक्का करने जैसे मुद्दों पर फोकस रही।

फॉक्स न्यूज़ ने ट्रंप के हवाले से कहा कि उन्होंने ईरानी नेताओं को चेतावनी दी थी कि होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की किसी भी कोशिश के गंभीर नतीजे होंगे, और कहा कि वे ईरान वापस नहीं जाएंगे।

इस बीच, हाल के हफ़्तों में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है, हालांकि वे अभी भी लड़ाई से पहले के लेवल से ऊपर हैं। यह गिरावट रिफाइनरियों द्वारा कुछ समय के लिए विकल्प ढूंढने और इस उम्मीद को बढ़ाने की वजह से हुई है कि लड़ाई का आखिरकार हल ग्लोबल एनर्जी मार्केट के तेज़ी से नॉर्मल होने का रास्ता बना सकता है।

नई अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों को थोड़ा बढ़ा दिया है, यह एक ऐसा डेवलपमेंट है जो जल्द ही सेंटीमेंट पर असर डाल सकता है। इन्वेस्टर्स बातचीत से आगे की हेडलाइंस पर फोकस कर सकते हैं, क्योंकि प्रोग्रेस या बढ़ोतरी के किसी भी संकेत का एनर्जी की कीमतों और बड़े मार्केट सेंटीमेंट पर बड़ा असर पड़ सकता है। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा, “कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं और अभी $77–78 प्रति बैरल की रेंज में ट्रेड कर रही हैं, जबकि हाल ही में यह लगभग $73 प्रति बैरल तक गिर गई थी।”

 

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