Tata Harrier vs Tata Sierra turbo-petrol automatic performance comparison

Harrier vs Sierra

The Tata Harrier and Sierra are underpinned by different platforms, but both are powered by Tata Motors’ new 1.5-litre turbo-petrol engine paired with a 6-speed torque-converter automatic gearbox. While the Harrier develops more power and torque, the Sierra is significantly lighter. We put both SUVs through our instrumented performance tests to find out which one is quicker in real-world conditions.

Tata Harrier vs Tata Sierra turbo-petrol automatic: specifications

Harrier has more power; Sierra is significantly lighter

SpecificationTata Harrier 1.5 Turbo ATTata Sierra 1.5 Turbo AT
Engine4-cyl turbo-petrol4-cyl turbo-petrol
Displacement1,498cc1,498cc
Power170hp160hp
Torque280Nm255Nm
Gearbox6-speed torque-converter AT6-speed torque-converter AT
Kerb weight1,738kg1,552kg
Power to weight ratio97.81 (hp per tonne)103.09 (hp per tonne)
Torque to weight ratio

161.1 (Nm per tonne)

164.3 (Nm per tonne)

Although both SUVs use Tata’s 1.5-litre TGDi ‘Hyperion’ turbo-petrol engine and a 6-speed torque-converter automatic gearbox, the Harrier develops 10hp and 25Nm more than the Sierra. However, it is also 186kg heavier, giving the Sierra a significant weight advantage.

Tata Harrier vs Tata Sierra turbo-petrol automatic: 0-100kph sprint test

Sierra is quicker despite lower power output

Acceleration (seconds)HarrierSierra
20kph1.511.19
40kph3.492.54
60kph5.284.51
80kph7.706.77
100kph10.519.85
120kph15.7913.72

The Sierra gets off the line much quicker than the Harrier and builds a clear lead in the early stages of the acceleration run. It reaches 20kph 0.32 seconds sooner, with the gap widening to nearly a second by 40kph. As speeds rise, the Harrier begins to claw back some time, but not enough to overturn the Sierra’s advantage. The Sierra reaches 100kph in 9.85 seconds, making it 0.66 seconds quicker than the Harrier. Even at 120kph, it remains ahead by 2.07 seconds.

Tata Harrier vs Tata Sierra turbo-petrol automatic: rolling acceleration tests

Sierra also leads in kickdown acceleration

Rolling acceleration (seconds)HarrierSierra
20-80kph6.375.75
40-100kph8.017.44

The Sierra is also quicker in the rolling acceleration tests. It completes the 20-80kph kickdown run 0.62 seconds faster than the Harrier, while the gap narrows slightly to 0.57 seconds in the 40-100kph test. Although both SUVs use the same gearbox, the Sierra’s lower kerb weight is reflected in the results.

Tata Harrier vs Tata Sierra turbo-petrol automatic: prices

Harrier has a lower entry price; Sierra range tops out lower

Price range (Rs lakh)HarrierSierra
Turbo-petrol automatic17.69-24.7917.99-20.99

The Harrier’s turbo-petrol automatic range starts at Rs 17.69 lakh, undercutting the Sierra by Rs 30,000 at the entry point. However, the Sierra’s range tops out at Rs 20.99 lakh, while the Harrier extends to Rs 24.79 lakh.

Autocar India’s testing standards

Before we conduct our performance tests, we check and maintain tyre pressures based on the manufacturer’s recommendations and ensure the car has a full tank of fuel. The car is then tested in a controlled environment with two people on board, and the data is collected via highly accurate GPS-based timing equipment.

Petrol Diesel Price: क्या सस्ते होने वाले हैं पेट्रोल-डीजल? पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का आया बड़ा बयान

Petrol Diesel Price Cut: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद देश भर में पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की अटकलें तेज हो गई हैं। कच्चा तेल अब पश्चिम एशिया विवाद के शुरू होने से पहले के स्तर पर वापस आ चुका है।

इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश में तेल की कीमतें घटने की संभावनाओं पर सरकार का रुख साफ किया है। उन्होंने बताया कि अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम इसी तरह स्थिर बने रहते हैं, तो सरकार स्थिति की समीक्षा करेगी। आइए समझते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कितना सस्ता हुआ है और आपकी जेब को इसका फायदा कब से मिलेगा।

कच्चा तेल $120 से गिरकर $70 पर आया, फिर भी क्यों नहीं घटे दाम?

पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान जब होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया था, तब ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं। लेकिन हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खत्म करने के लिए हुए एक समझौते के बाद कच्चे तेल के दाम वापस 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए हैं।

इसके बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें तुरंत न घटने के पीछे पेट्रोलियम मंत्री ने दो मुख्य कारण बताए हैं:

पुराने महंगे स्टॉक की प्रोसेसिंग: तेल विपणन कंपनियां अभी भी उस कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया संकट के चरम पर महंगे दामों में खरीदा गया था।

पहले का भारी नुकसान: इस विवाद के दौरान आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए कंपनियों ने लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचा, जिससे 30 जून तक कंपनियों को ₹74781 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

प्राइवेट कंपनी ने घटाईं कीमतें: राहत की शुरुआत?

सरकारी तेल कंपनियों द्वारा समीक्षा किए जाने से पहले ही निजी क्षेत्र की दिग्गज तेल कंपनी नायरा एनर्जी ने आम जनता को राहत देने की शुरुआत कर दी है। नायरा एनर्जी ने अपने 7000 से अधिक फ्यूल स्टेशनों के नेटवर्क पर पेट्रोल की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतें $70 के आसपास स्थिर रहीं, तो जल्द ही सरकारी तेल कंपनियां भी बड़ी राहत दे सकती हैं।

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चीन ने पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश में चली बड़ी चाल, बंगाल की खाड़ी को लेकर उसकी ये योजना कान खड़े कर देगी

भारत के पूर्वी सीमा के आसपास पकड़ बनाने के लिए चीन पूरे दक्षिण एशिया में अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। पहले चीन ने पाकिस्तान में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) में बड़ा निवेश किया था। अब उसने एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत वह म्यांमार के रास्ते बांग्लादेश तक एक नया आर्थिक कॉरिडोर बनाना चाहता है।

हालांकि, यह प्रस्ताव सिर्फ एक सामान्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान नहीं लगता है, बल्कि इसके पीछे रणनीतिक सोच भी है। इसका मकसद चीन के लिए समुद्री रास्तों तक आसान पहुंच बनाना है, खासकर बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) तक। फिलहाल, भारत के लिए इस संदेश को नजरअंदाज करना मुश्किल है। लेकिन यह कॉरिडोर अभी हकीकत से बहुत दूर है, और यह हिंद महासागर के आस-पास अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की बीजिंग की लगातार कोशिशों को दिखाता है।

बीजिंग ने भारत को छोड़कर एक पुराने विचार को फिर से शुरू किया

यह प्रस्ताव बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान की हालिया बीजिंग यात्रा के दौरान सामने आया। जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस विचार का समर्थन किया और इसे दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग का हिस्सा बताया।

तारिक रहमान के प्रवक्ता महदी अमीन के अनुसार, इस कॉरिडोर को आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स (logistics) को बेहतर बनाने के एक साधन के रूप में पेश किया जा रहा है।

अमीन ने कहा, “बैठक के दौरान एक प्रस्ताव आया कि म्यांमार के रास्ते बांग्लादेश से चीन तक एक आर्थिक कॉरिडोर कैसे बनाया जा सकता है।” प्रवक्ता ने आगे कहा कि इस प्रस्ताव का मकसद “बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का विस्तार करना, आर्थिक लेन-देन बढ़ाना और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्टेशन को और बेहतर बनाना” है।

असल में, यह प्रोजेक्ट लंबे समय से चर्चा में रहे बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार  (BCIM) कॉरिडोर को फिर से शुरू करता है, लेकिन इसमें एक बड़ा बदलाव है: भारत अब इसका हिस्सा नहीं है।

बता दें कि शुरुआती BCIM कॉरिडोर में चारों देशों को जोड़ने वाली सड़क और रेल कनेक्टिविटी की योजना थी। हालांकि, भारत ने सावधानी बरती और चीन के ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ में कभी शामिल नहीं हुआ; इसकी कुछ वजहें संप्रभुता से जुड़ी चिंताएं और बीजिंग की बढ़ती भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं थीं।

अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक

CPEC के नजरिए से देखने पर चीन की बड़ी रणनीति और साफ हो जाती है। दरअसल, बीजिंग ने पाकिस्तान के जरिए, ग्वादर पोर्ट के माध्यम से अरब सागर तक पहुंच हासिल की। हालांकि ​​इस प्रोजेक्ट की भारत लंबे समय से आलोचना करता रहा है क्योंकि यह गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है, जिसे भारत पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला इलाका मानता है।

वहीं, अब,बांग्लादेश-म्यांमार रूट से चीन को एक और रणनीतिक पहुंच मिल सकती है, जो इस बार भारत के पूर्वी समुद्री पड़ोस के ज्यादा करीब होगी। इससे बीजिंग को मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है, जो दुनिया के सबसे अहम और संवेदनशील शिपिंग चोकपॉइंट्स में से एक है।

बांग्लादेश की नजर बंदरगाह, व्यापार और चीनी निवेश पर

ढाका ने इस प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से एक आर्थिक अवसर के तौर पर पेश किया है। खबरों के मुताबिक, बातचीत मुख्य रूप से चट्टोग्राम बंदरगाह और मोंगला बंदरगाह के आस-पास बुनियादी ढांचे पर केंद्रित रही।

बांग्लादेशी प्रधानमंत्री के प्रवक्ता मेहदी अमीन ने कहा, “हम इस बात पर काम करना चाहते हैं कि इस बंदरगाह [मोंगला बंदरगाह] को एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कैसे विकसित किया जाए, जो न केवल बांग्लादेश बल्कि अन्य देशों के लिए भी काम आए।”

बांग्लादेश ने हाल के समय में चीनी समर्थित इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग की ओर भी रुख किया है। मोंगला के आसपास की जमीन, जिसे पहले 2015 के एक द्विपक्षीय समझौते के तहत भारत समर्थित आर्थिक परियोजना के लिए रखा गया था, उसे 2025 में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने हटा दिया।

रहमान की यात्रा के दौरान, ढाका ने उस आर्थिक क्षेत्र को विकसित करने के लिए चीन की सरकारी कंपनी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

‘द डेली स्टार’ के अनुसार, यह प्रस्तावित रूट चीन के कुनमिंग से शुरू होकर म्यांमार के मांडले तक जाएगा, फिर यह दो हिस्सों में बंटकर यांगून और क्याउकफ्यू पोर्ट तक पहुंचेगा, और आगे चलकर बांग्लादेश के चट्टोग्राम और कॉक्स बाजार से जुड़ेगा।

म्यांमार सबसे कमजोर कड़ी बना

इस प्रस्ताव को लेकर जितनी भी उम्मीदें हैं, उनमें सबसे बड़ी चुनौती म्यांमार है। यह प्रस्तावित कॉरिडोर ऐसे इलाकों से होकर गुजरेगा जो लंबे समय से गृहयुद्ध और अस्थिरता से प्रभावित हैं।

रखाइन राज्य (Rakhine State), जहां रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्याउकफ्यू (Kyaukphyu) डीप-सी पोर्ट स्थित है, वहां सेना और सशस्त्र समूहों के बीच भारी संघर्ष चल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, वहां की कई जगहों पर सेना का नियंत्रण भी कमजोर पड़ चुका है। इस वजह से किसी बड़े ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को पूरी तरह लागू करना बेहद मुश्किल माना जा रहा है।

The Daily Star की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार में पहले से मौजूद चीनी निवेश भी गंभीर सुरक्षा जोखिमों का सामना कर रहा है, जिनमें इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में रुकावट और संपत्तियों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने जैसी समस्याएं शामिल हैं।

सीधे शब्दों में कहें तो, जब तक म्यांमार के रास्ते एक सुरक्षित और स्थिर मार्ग नहीं बनता, यह पूरा कॉरिडोर फिलहाल सिर्फ एक सैद्धांतिक योजना ही बना रहेगा।

भारत इस प्रस्ताव को क्यों नजरअंदाज नहीं कर सकता

भारत के नजरिए से देखें तो इस योजना से तुरंत कोई बड़ा खतरा न भी हो, लेकिन लंबे समय में इसके रणनीतिक असर काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

अगर चीन-म्यांमार-बांग्लादेश कॉरिडोर पूरी तरह काम करने लगता है, तो इससे चीन की मौजूदगी बंगाल की खाड़ी के आसपास और मजबूत हो जाएगी। वह बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और औद्योगिक ढांचे के जरिए इस पूरे क्षेत्र में अपनी पकड़ बढ़ा सकता है। इससे चीन का प्रभाव भारत के पड़ोसी क्षेत्र में और गहरा होगा और उसे हिंद महासागर (Indian Ocean) तक अधिक पहुंच मिल सकती है।

वरिष्ठ पत्रकार सुबीर भौमिक ने Rediff में लिखा कि युन्नान स्थित थिंक टैंक से जुड़े चीनी विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि बीजिंग अपनी व्यापक समुद्री रणनीति के तहत चीन-म्यांमार आर्थिक कॉरिडोर को बांग्लादेश तक विस्तारित करना चाहता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम पर “दिल्ली और वाशिंगटन की नजर रहेगी और वे इससे खुश नहीं होंगे”।

अभी के लिए यह प्रोजेक्ट से ज्यादा एक संकेत है

फिलहाल चीन-म्यांमार-बांग्लादेश कॉरिडोर सिर्फ एक प्रस्ताव है, कोई पूरी तरह मंजूर किया गया प्रोजेक्ट नहीं। लेकिन इस स्तर पर भी, यह एक साफ संकेत देता है।

भारत के बेल्ट एंड रोड पहल से बाहर रहने और BCIM कॉरिडोर के लगभग खत्म हो जाने के बावजूद, चीन लगातार ऐसे वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है, जिनसे वह दक्षिण एशिया में अपना आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव बढ़ा सके।

चाहे यह कॉरिडोर आगे जाकर बने या न बने, बीजिंग की मंशा अब साफ होती जा रही है—हिंद महासागर तक पहुंच के लिए कई रास्ते तैयार करना और भारत के आसपास के क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना।

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Toyota Fortuner image gallery

Toyota Fortuner front quarter static

The Fortuner is Toyota’s longstanding premium three-row SUV that’s been on sale since 2009. It sits on a ladder-frame chassis and is one of the best SUVs in its class for serious off-roading. Toyota also sells the Legender, which gets cosmetic upgrades over the Fortuner. Powering the Fortuner is either a 166hp, 245Nm, 2.7-litre petrol engine or a 204hp, 420Nm (500Nm AT) diesel engine. The latter engine is also available with a 48V mild hybrid system but only with an automatic gearbox. A 5-speed manual is offered with the petrol engine, while the diesel is offered with a 6-speed manual or a 6-speed automatic transmission. 4WD is available with the diesel engine. The SUV is priced from Rs 34.76 lakh, and goes all the way up to Rs 50.46 lakh. Swipe to check out images of the exterior and interior of the Fortuner, along with its space on offer.

कैलाश विजयवर्गीय ने बुलाई बैठक, 3 ही विधायक पहुंचे, सबसे भरोसेमंद भी नहीं आया, सज्‍जन बोले, पितृ पर्वत जाओ यार

Kailash Vijayvargiya

मध्यप्रदेश में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का मामला भोपाल से लेकर इंदौर तक इतना गरमा गया है कि भाजपाई नेताओं ने भी शायद उनसे फिलहाल दूरी बनाए रखना ही उचित समझा। खबर है कि आज इंदौर में एआईसीटीएसएल कार्यालय पर विजयवर्गीय ने इंदौर के सभी विधायकों के साथ सांसद, महापौर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी बुलाया था, लेकिन इस बैठक में सिर्फ तीन विधायक महेन्द्र हार्डिया, गोलू शुक्ला और मधू वर्मा ही पहुंचे।

जबकि मंत्री तुलसी सिलावट के अलावा उनके खास कहे जाने वाले रमेश मेंदोला से लेकर विधायक मालिनी गौड़, उषा ठाकुर, मनोज पटेल सहित अन्य नेता बैठक में पहुंचे ही नहीं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के बारे में खबर मिली कि वे किसी विवाह समारोह के चलते खरगोन गए थे। उनका कहना है कि बैठक के समय लौटने के प्रयास थे, लेकिन वे जाम में फंस गए।

बता दें कि बैठक में अनुपस्थिति का कारण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे गए एक कथित पत्र को बताया जा रहा है। इस कथित 'चिट्ठी बम' में विजयवर्गीय ने ढाई साल से उपेक्षा और असहयोग का आरोप लगाया था। इसी राजनीतिक खींचतान के चलते मेयर पुष्यमित्र भार्गव सहित मालिनी गौड़, मनोज पटेल, उषा ठाकुर और रमेश मेंदोला जैसे कई दिग्गज नेताओं ने बैठक से दूरी बनाए रखी।

इंदौर विकास का आयोजन भी टला : उधर इंदौर के विकास को लेकर शहर में 3 जुलाई को होने वाला कार्यक्रम टल गया है। इस आयोजन में इंदौर के विकास को लेकर कई तरह के विमर्श होना थे। लेकिन ऐनमौके पर यह आयोजन टल गया है। इसकी वजह मुख्यमंत्री मोहन यादव की व्यस्तता बताई जा रही है। हालांकि अब नए सिरे से तिथि की घोषणा की जाएगी। इस आयोजन के लिए ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर तक बुक कर लिया गया था और शहर के गणमान्य नागरिकों को कार्ड भी बांट दिए गए थे।

सज्‍जन वर्मा ने दी विजयवर्गीय को सलाह : इधर पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने कैलाश विजयवर्गीय को नसीहत देते हुए कहा है कि जब कोई पावर नहीं है तो इस्तीफा दे दो यार। एक स्वाभिमानी मर्द की तरह जिओ, इसमें मजा आएगा। अब वो कह रहे हैं कि पत्र कैसे वायरल हो गया। मैंने कैलाश भाई को सलाह दी है कि हाथ कटे ठाकुर के पास दो लोग थे, जय और वीरु, उनकी ड्यूटी लगा दो भाई कि कैसे लीक हुआ। सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि पत्र कैसे लीक हुआ है। जानकर के लीक हुआ है या मुख्यमंत्री ने लीक किया है। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी कैलाश भाई मैं आपको सलाह देता हूं कि पितृ पर्वत तैयार है। कहां राजनीति के चक्कर में पड़े हो। उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को सलाह दी है कि आराम से पितृ पर्वत जाकर बैठो और भगवान की सेवा करो। आमजनों की सेवा करो। लेकिन एक बात का ध्यान रखना कि वहां चंदे की चोरी नहीं हो। अपना आशियाना और ठिकाना वहां बना लो।

क्या सोना बेचकर शेयर खरीदने का समय आ गया? एक्सपर्ट रोहित श्रीवास्तव ने निफ्टी और बैंक निफ्टी पर कर दी बड़ी भविष्यवाणी

शेयर बाजारों के सेंटीमेंट में पॉजिटिव बदलाव दिख रहा है। बीते करीब दो सालों में शेयर बाजार का रिटर्न अच्छा नहीं रहा है। पहले हाई वैल्यूएशन बड़ा चैलेंज था। इससे विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में बड़ी बिकवाली की। वैल्यूएशन अब घटा है। उधर, मध्यपूर्व में तनाव कम हुआ है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। इसका पाॉजिटिव असर शेयर बाजारों पर दिख रहा है। सीएनबीसी-टीवी18 ने निवेश और शेयर बाजार के आउटुलक के बारे में जानने के लिए इंडियाचार्ट्स के फाउंडर रोहित श्रीवास्तव के साथ बातचीत की।

बाजार नई तेजी के शुरुआती चरण में

श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार कई वैश्विक और भू-राजनीतिक झटकों के बाद अब एक नए अपट्रेंड के शुरुआती चरण में है। बाजार पर अमेरिका-ईरान की लड़ाई, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का असर पहले ही पड़ चुका है। उन्होंने कहा कि टेक्निकल चार्ट्स पर ‘हायर लो’ (Higher Lows) का बनना यह दर्शाता है कि बाजार का सेंटिमेंट बेहतर हो रहा है। बाजारों में इस तेजी के जारी रहने की संभावना है। निफ्टी 24,300 के लेवल को तोड़ने के बाद ऊंचाई का नया रिकॉर्ड बनाएगा। बैंक निफ्टी के भी 63,000 पर पहुंच जाने की उम्मीद है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक्स की तेजी में बड़ी भूमिका

उन्होंने कहा कि मार्केट में अगले चरण की रैली में बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक्स का बड़ा योगदान होगा। यह सेक्टर आने वाले समय में स्टार परफॉर्मर बन सकता है। अगर आगे इंटरेस्ट रेट में कमी देखने को मिलती है तो इससे बैंकिंग सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा। रुपये में स्थिरता भी बैंकिंग सेक्टर के लिए पॉजिटिव है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी पर लगाम लगी है। उधर,

रियल एस्टेट, एनर्जी, मेटल्स और पावर सेक्टर्स का आउटलुक पॉजिटिव दिख रहा है। इन सेक्टर्स में लॉन्ग टर्म के लिए अच्छा मोमेंटम दिख रहा है और निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी के मौके ढूंढने चाहिए।

सोने की जगह यह शेयरों में निवेश बढ़ाने का समय

श्रीवास्तव ने कहा कि सोने और चांदी में शॉर्ट-टर्म मोमेंटम इंडिकेटर्स ओवरबॉट (overbought) की स्थिति का संकेत दे रहे हैं। इससे निकट अवधि में मुनाफावसूली दिख सकती है। उन्होंने कहा कि यह समय कीमती धातुओं (precious metals) पर फोकस थोड़ा कम कर शेयरों पर बढ़ाने का है। इसकी वजह यह है कि इक्विटी अब एक नए ‘गोल्ड’ के रूप में उभर रहा है। उन्होंने आईटी सेक्टर में कमजोरी जारी रहने का अनुमान जताया। इसका मतलब है कि निवेशकों को लार्जकैप आईटी शेयरों से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर को लेकर भी सतर्क रुख अपनाने की जरूरत है।

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शेयर बाजारों में लगातार दूसरे दिन शानदार तेजी

शेयर बाजार में 2 अप्रैल को लगातार दूसरे दिन अच्छी तेजी दिखी। निफ्टी 0.71 फीसदी यानी 169 अंक चढ़कर 24,175 पर बंद हुआ। सेंसेक्स भी 0.75 फीसदी यानी 579 अंक के उछाल के साथ 77,502 पर क्लोज हुआ। हालांकि, बैंक निफ्टी नाममात्र की कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

कल का मौसम 3 जुलाई: दिल्ली, यूपी, बिहार समेत इन 15+ राज्यों में IMD ने दिया भारी बारिश, थंडरस्टॉर्म का अलर्ट, मानसून दिखाएगा ये असर

Weather Update July 3: देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है। 2 जुलाई को मानसून ने पूरी दिल्ली, उत्तर प्रदेश के बचे हुए हिस्सों, अधिकांश मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों को कवर कर लिया है। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 3 जुलाई के लिए मौसम का लेटेस्ट बुलेटिन भी जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम और उससे सटे उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल तटों पर बना कम दबाव का क्षेत्र उसी क्षेत्र में सक्रिय है और अगले 2-3 दिनों में यह और मजबूत होने वाला है।

इसके प्रभाव से 3 जुलाई को दिल्ली, यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत 15 से अधिक राज्यों में भारी से बेहद भारी बारिश और गरज-चमक के साथ आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। देश के अधिकतम तापमान में 8 जुलाई तक कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है।

इन राज्यों में बेहद भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक 3 जुलाई को देश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में मानसून का सबसे रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। इन राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट है:-

गुजरात

कोंकण और गोवा

मध्य महाराष्ट्र

ओडिशा

पश्चिम मध्य प्रदेश

(इन सभी क्षेत्रों में मध्यम से तीव्र आकाशीय बिजली चमकने की भी चेतावनी दी गई है।)

यहां होगी भारी से बहुत भारी बारिश

3 जुलाई को मध्य भारत, पहाड़ी राज्यों और दक्षिण तट पर मौसम काफी खराब रहेगा। आईएमडी ने नीचे दिए गए राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है:-

छत्तीसगढ़ और विदर्भ

पूर्वी मध्य प्रदेश

पूर्वी राजस्थान

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड

तटीय कर्नाटक

केरल और माहे

दिल्ली, यूपी और बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश

3 जुलाई को उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक भारी बारिश की स्थिति बनी रहेगी:-

उत्तर प्रदेश और बिहार: उत्तर प्रदेश और बिहार में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

उत्तर-पश्चिम भारत: जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में 3-4 जुलाई को छिटपुट से मध्यम बारिश होगी जिसके बाद 5 से 8 जुलाई के बीच दोबारा व्यापक भारी बारिश शुरू होगी।

पूर्वी और पश्चिम भारत: गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड और मराठवाड़ा में भारी बारिश की उम्मीद है।

दक्षिण भारत: तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल।

पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा।

थंडरस्टॉर्म अलर्ट: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

आईएमडी ने भारी बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में बिजली चमकने और तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है:-

40-50 किमी/घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बिजली: दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, राजस्थान, उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी हिस्सों (J&K, लद्दाख), गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और थंडरस्टॉर्म की आशंका है।

30-40 किमी/घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बिजली: बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम मध्य प्रदेश, असम व मेघालय, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, पूरे कर्नाटक, तेलंगाना, केरल व माहे, लक्षद्वीप, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। कर्नाटक, तेलंगाना और रायलसीमा में 3 जुलाई को तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है।

उमस भरा मौसम: अरुणाचल प्रदेश और असम व मेघालय के मैदानी इलाकों में 3 जुलाई को मौसम काफी गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है।

मछुआरों के लिए समुद्री चेतावनी

समुद्र में खराब मौसम और तूफानी हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को तटीय इलाकों में न जाने की चेतावनी दी है:-

अरब सागर: गुजरात, कोंकण, गोवा, कर्नाटक और केरल तटों के साथ-साथ लक्षद्वीप क्षेत्र में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। सोमालिया और ओमान तटों के पास हवा की रफ्तार 45-55 किमी प्रति घंटे (झोंके 65 किमी प्रति घंटे) तक पहुंच सकती है। मछुआरों को 5 से 7 जुलाई तक इन क्षेत्रों में जाने से मना किया गया है।

बंगाल की खाड़ी: ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, उत्तरी और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों, अंडमान सागर और मध्य व दक्षिण बंगाल की खाड़ी में मौसम बेहद खराब) रहेगा। यहां हवा की गति 40 से 55 किमी प्रति घंटे तक रह सकती है। मछुआरों को इन समुद्री क्षेत्रों से दूर रहने की हिदायत दी गई है।

मौसम विभाग के मुताबिक इस समय देश के ऊपर कई चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय हैं। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बना कम दबाव का क्षेत्र समुद्र तल से 7.6 किमी की ऊंचाई तक विस्तृत है और दक्षिण-पश्चिम की ओर झुका हुआ है। दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर 1.5 किमी की ऊंचाई तक एक चक्रवातीय हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है।

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मध्य पाकिस्तान और उससे सटे उत्तर-पश्चिम राजस्थान के ऊपर भी एक अन्य चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय है। उत्तर-पश्चिम राजस्थान से लेकर बंगाल की खाड़ी के लो-प्रेशर एरिया तक फैली मुख्य मानसूनी ट्रफ लाइन के साथ-साथ दक्षिण गुजरात से कर्नाटक तट तक फैली अपतटीय ट्रफ और मध्य क्षोभमंडल में शेयर जोन सक्रिय हैं। ये सब मिलकर इस समय देश भर में भारी बारिश को नियंत्रित कर रहे हैं।

ब्रेंडन मक्कलम ने बेन स्टोक्स के सामने संन्यास ना लेने की लगाई थी गुहार

इंग्लैंड के मुख्य कोच ब्रेंडन मैकुलम ने खुलासा किया कि उन्होंने बेन स्टोक्स से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के अपने फैसले पर फिर से विचार करने का आग्रह किया था लेकिन तब तक वह अपना मन बना चुके थे।इंग्लैंड सोमवार को ट्रेंटब्रिज में न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरा और अंतिम टेस्ट 160 रन से हार गया। स्टोक्स ने इस मैच के चौथे दिन ही संन्यास की घोषणा कर सभी को चौंका दिया।

मैकुलम ने प्रसारणकर्ता से कहा, ‘‘जब उन्होंने मुझे बताया कि वह संन्यास लेने जा रहे हैं तो मैंने उन्हें मनाने की कोशिश की थी। लेकिन तब तक वह अपना मन बना चुके थे और अपने फैसले पर अडिग थे।’’उन्होंने कहा, ‘‘उनके फैसले से निश्चित तौर पर मैं थोड़ा उदास हो गया था क्योंकि हम चार साल से इस सफर में साथ रहे हैं और यह एक रोमांचक अनुभव रहा है। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे इस दौरान स्टोक्स के साथ इतने करीब से काम करने का मौका मिला। मैं उन्हें अपना दोस्त, एक सच्चा दोस्त मानता हूं।’’

मैकुलम ने कप्तान और खिलाड़ी के रूप में स्टोक्स के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें बहुत अच्छा नेतृत्वकर्ता बताया।उन्होंने कहा,‘‘वह शानदार नेतृत्वकर्ता हैं। लोग उनका अनुसरण करते हैं। चाहे वह मैदान पर हों, ड्रेसिंग रूम में हों, टीम होटल में हों, लोग उनका अनुसरण करते हैं क्योंकि वह अपनी छाप छोड़ते हैं। वह अपने विचारों और तरीकों पर पूरा भरोसा रखते हैं।’’

Ben Stokes

मैकुलम ने कहा, ‘‘क्रिकेट अनिश्चितता का खेल है लेकिन वह अपनी उपस्थिति से इसमें स्थिरता लाते थे। वह बेमिसाल व्यक्तित्व के धनी हैं। परिस्थिति कैसी भी हो वह पीछे नहीं हटते और अपने पर पूरा विश्वास रखते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हमें बेन की बहुत कमी खलेगी। उनके जैसे खिलाड़ी की जगह भरना बहुत मुश्किल है। लेकिन यही तो दुनिया का नियम है। कोई भी खिलाड़ी हमेशा नहीं खेल सकता, कोई भी हमेशा कप्तान नहीं रह सकता। अभी हम स्टोक्स की उपलब्धियों का जश्न मनाना चाहते हैं। इसके बाद ही आगे के बारे में सोचेंगे।’’

World Car Awards is the most visible automotive awards globally

World Car Awards become most visible automotive awards globally

Independent media intelligence platform AITASTIC has recognised the World Car Awards as the most visible automotive awards program globally. Notably, this is the 14th consecutive year that World Car Awards has been recognised as the top automotive awards program.

  1. Tops auto awards visibility rankings in the US, Asia, Europe, Africa and Australia
  2. It has entered its 23rd season with a revised jury panel and steering committee

According to the AITASTIC data, during the 2025-2026 season, over 49.3 crore people were reached by the World Car program. Moreover, World Car has not only retained its pinnacle position globally, but also topped the automotive awards visibility rankings in the US, Asia, Europe, Africa and Australia. Steve Fowler, chair of the World Car Steering Committee, commented, “The World Car Awards continues to dominate an increasingly crowded automotive awards landscape, reaching car buyers, car owners and car enthusiasts to really influence opinion and buying habits around the world.”

The World Car Awards has entered its 23rd season (2026-2027), with updates to the jury panel and steering committee while maintaining its established schedule. The program runs from the announcement of eligible vehicles each September to the reveal of the winners at the New York International Auto Show in March, with the Road to World Car featuring the annual LA Test Drives, World Car finalists, World Car Person of the Year, and the Top Three in the World finalists along the way.

सस्ती इलेक्ट्रिक बाइक RVX, 160KM रेंज, 90kmph टॉप स्पीड और फास्ट चार्जिंग के साथ आई

revolt rvx bike

भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच Revolt Motors ने गुरुवार को अपनी नई इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल RVX लॉन्च कर दी है। कंपनी ने इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 1.24 लाख रुपए रखी है। यह शुरुआती कीमत PM eDRIVE योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) को शामिल करती है और सीमित समय के लिए उपलब्ध रहेगी। कंपनी के मुताबिक, नई दिल्ली ईवी पॉलिसी और लागू सरकारी प्रोत्साहनों के बाद राजधानी दिल्ली में RVX की प्रभावी एक्स-शोरूम कीमत 94,990 रुपये होगी।

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160KM की रेंज और 90kmph की टॉप स्पीड

 

Revolt RVX में 4kW मिड-ड्राइव परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर (PMSM) दी गई है, जो 5.3kW की पीक पावर और 230Nm व्हील टॉर्क जनरेट करती है। कंपनी के अनुसार यह बाइक 0 से 40 किमी/घंटा की रफ्तार केवल 3.9 सेकंड में पकड़ लेती है, जबकि Boost मोड में इसकी अधिकतम गति 90 किमी/घंटा है। इस इलेक्ट्रिक बाइक में 3.24kWh की रिमूवेबल NMC बैटरी दी गई है, जो IDC प्रमाणित 160 किलोमीटर की सिंगल चार्ज रेंज प्रदान करती है। फास्ट चार्जर की मदद से बैटरी 0 से 80 प्रतिशत तक लगभग 80 मिनट में चार्ज हो जाती है।

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चार राइडिंग मोड और कई स्मार्ट फीचर्स

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नई RVX में Boost, Sport, City और Eco समेत चार राइडिंग मोड दिए गए हैं। इसके अलावा बाइक में 3.5-इंच डिजिटल डिस्प्ले, Bluetooth कनेक्टिविटी, OTA (Over-the-Air) सॉफ्टवेयर अपडेट, Geo-Fencing, Hill Hold Assist, Reverse Mode, Walk Assist और Vehicle Tracking जैसे आधुनिक स्मार्ट फीचर्स भी मिलते हैं।

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तीन रंगों में होगी उपलब्ध

Revolt RVX को Pearl Black, Electric Blue और Eclipse Red रंगों में पेश किया गया है। कंपनी की देशभर में मौजूद 200 से अधिक डीलरशिप के जरिए इसकी बिक्री की जाएगी।