ऑक्सफोर्ड MBA ग्रेजुएट ने छोड़ी नौकरी, गांव में एवोकाडो उगाकर कमाए 8 लाख

आखिर क्या वजह है कि कोई व्यक्ति विदेश में मिली शिक्षा और कॉर्पोरेट की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर गांव में खेती करने का फैसला करता है? जयपाल नाइक के लिए यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि कॉर्पोरेट की एक जैसे रूटीन से परेशान और गांव की जिंदगी के प्रति बढ़ते लगाव के कारण धीरे-धीरे हुआ बदलाव था।

उनका सफर लंदन से शुरू हुआ, जहां उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग में MBA किया। इसके बाद उन्होंने हीथ्रो एयरपोर्ट के कस्टम्स डिपार्टमेंट में और फिर हैदराबाद में कॉर्पोरेट नौकरी की। इतने अच्छे करियर के बावजूद, धीरे-धीरे उनका ध्यान हैदराबाद से लगभग 45 किलोमीटर दूर अपने गाँव, डेबडागुडा की ओर मुड़ने लगा।

क्या खेती से होने वाली कमाई, समय के साथ कॉर्पोरेट नौकरी से मिलने वाली स्थिर आय की बराबरी कर सकती है?

जयपाल को इसका जवाब कई सालों की कोशिशों, नुकसान और बदलावों के बाद मिला। ’30Stades’ के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया, “एक साल बाद मैंने नौकरी छोड़ दी क्योंकि मुझे 9-से-5 वाली कॉर्पोरेट जिंदगी का एक जैसापन पसंद नहीं आ रहा था। मैंने खेती में अपने परिवार का साथ देने का फैसला किया।”

उस समय, उनका परिवार पारंपरिक खेती करता था और केमिकल का इस्तेमाल करके मक्का, ज्वार, सब्जियां और अरहर की दाल उगाता था। लेकिन, बढ़ती लागत और अस्थिर कीमतों की वजह से मुनाफा कम हो रहा था। उन्होंने बताया, “बाजार में कीमतें अस्थिर थीं और खेती की लागत बढ़ती जा रही थी, जिससे मुनाफ़े पर असर पड़ रहा था। मिट्टी में केमिकल का इस्तेमाल करना अब फ़ायदेमंद नहीं रह गया था।”

जब आमदनी कम होने लगी, तो जयपाल ने बागवानी में दूसरे विकल्पों पर विचार करना शुरू किया। लेकिन उन्होंने देखा कि कई पारंपरिक फल उगाने वाले किसान पहले से ही ज़्यादा सप्लाई और कीमतों में भारी गिरावट के कारण नुकसान उठा रहे थे। उन्होंने कहा, “यह साफ़ था कि विदेशी फलों की खेती करना सही रहेगा क्योंकि इसमें कॉम्पिटिशन कम है और मांग ज़्यादा है।”

2013 में, उन्होंने एवोकाडो की खेती की दिशा में अपना पहला बड़ा कदम उठाया। उन्होंने इज़राइल से 200 ‘हस’ (Hass) एवोकाडो के पौधे 1,200 रुपये प्रति पौधे की दर से मंगवाए। यह प्रयोग नाकाम रहा। उन्होंने याद करते हुए कहा, “हस एवोकाडो ठंडी जलवायु के लिए उपयुक्त होते हैं और 30°C से ज़्यादा तापमान में जीवित नहीं रह सकते। तेलंगाना में ये पौधे ठीक से नहीं पनपे और सारा निवेश डूब गया।”

इस झटके के बाद, वह सिविल कॉन्ट्रैक्टिंग के काम में लौट आए, लेकिन COVID-19 महामारी के दौरान वह काम भी बंद हो गया। इसके बाद वह फिर से खेती की ओर मुड़े, लेकिन इस बार बेहतर प्लानिंग और हालात की बेहतर समझ के साथ। जयपाल ने बताया कि एवोकाडो इसलिए खास थे क्योंकि भारतीय बाज़ार अभी विकसित हो रहा था, जबकि पारंपरिक फलों के मामले में अक्सर ज़्यादा सप्लाई के कारण कीमतें गिर जाती हैं।

पौधों के बीच जगह की समस्या के बावजूद, बागान के पौधे अच्छी तरह से पनपे और लगातार बढ़ते रहे। शुरुआत में, हर पेड़ से लगभग 5 से 10 किलो फल मिलते थे। शुरुआती बिक्री एक एक्सपोर्टर के जरिए होती थी जो उपज को कुवैत भेजता था। उन्होंने याद करते हुए कहा, “मैंने अपने एक दोस्त के ज़रिए इन्हें कुवैत भेजा, जो एक एक्सपोर्टर था।”

एक दुर्घटना के कारण एक्सपोर्ट रुकने पर, जयपाल ने घरेलू बाजार में बिक्री शुरू कर दी। उन्होंने स्थानीय स्तर पर लगभग 250 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचना शुरू किया, जहां मांग स्थिर बनी रही। जैसे-जैसे बागान के पेड़ बड़े हुए, पैदावार में काफ़ी सुधार हुआ। उन्होंने बताया, “अब, जब पौधे अपने छठे साल में हैं, तो पैदावार बढ़कर लगभग 20 किलो प्रति पेड़ हो गई है।”

1.2 एकड़ ज़मीन पर फल देने वाले लगभग 250 पेड़ों से उन्हें एवोकाडो से सालाना लगभग 8 लाख रुपये की कमाई होती है। उन्होंने आगे कहा, “यही ऑर्गेनिक एवोकाडो खेती की मुख्य खूबी है। इससे प्रति एकड़ अच्छा मुनाफ़ा मिलता है और जैसे-जैसे पेड़ बड़े होते हैं, पैदावार भी बढ़ती जाती है।”

उनके खेती के मॉडल में एक अहम बात ऑर्गेनिक खेती है। वह केमिकल वाले फ़र्टिलाइज़र और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि गाय के गोबर, गोमूत्र, नीम की खली और ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं। जयपाल ने बताया, “आप 1 किलो ऑर्गेनिक एवोकाडो को ₹1,000 प्रति किलो के भाव से भी बेच सकते हैं। वहीं, केमिकल का इस्तेमाल करके उगाए गए एवोकाडो से ₹100 प्रति किलो भी नहीं मिलते। केमिकल से पैदावार तो बढ़ सकती है, लेकिन इससे कीमत कम हो जाती है, साथ ही मिट्टी को नुकसान पहुxचता है और लागत भी बढ़ती है।”

वे मंडियों या बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय, फसल कटने से पहले ही WhatsApp और सोशल मीडिया के ज़रिए सीधे ग्राहकों को अपना माल बेचते हैं। खेती के साथ-साथ जयपाल ने नर्सरी का बिज़नेस भी शुरू किया है। वे एवोकाडो के पौधे बेचते हैं; बल्ब वैरायटी के पौधे ₹300 और पिंकर्टन वैरायटी के पौधे ₹400 में मिलते हैं। वे हर साल 5,000 से 10,000 पौधे बेचते हैं, जिससे उनकी कमाई में लगभग ₹5 लाख का योगदान होता है।

जयपाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि खेती में कामयाबी सिर्फ़ फ़सल चुनने से नहीं, बल्कि प्लानिंग, बाज़ार की समझ और स्थानीय हालात के हिसाब से काम करने से मिलती है। उन्होंने कहा, “खेती में कामयाबी का मतलब सिर्फ़ कोई विदेशी फल उगाना नहीं है। इसका मतलब है बाज़ार की मांग के हिसाब से फ़सल चुनना, स्थानीय मौसम के अनुकूल ढलना और लागत कम रखते हुए ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा कमाना।”

उन्होंने यह भी माना कि विदेशी फलों की खेती में शुरुआत में जोखिम होते हैं, लेकिन उनका कहना था कि जो लोग डटे रहते हैं, उन्हें लंबे समय में बहुत फ़ायदा हो सकता है। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, “विदेशी फलों की खेती में शुरू में ज़्यादा जोखिम होता है, लेकिन लंबे समय में मिलने वाला फ़ायदा काफ़ी ज़्यादा हो सकता है।”

विशेषाधिकार हनन मामले में विधानसभा सचिवालय सख्त,पुलिस कमिश्नर-DM को रिपोर्ट देने का निर्देश

विशेषाधिकार हनन मामले में विधानसभा सचिवालय सख्ती दिखाई है। अब विधानसभा सचिवालय ने कानपुर के पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी (डीएम) को 5 कार्यदिवस के भीतर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।

Monsoon Heavy Rain Alert: यूपी, बिहार, दिल्ली समेत इन 20+ राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान का अलर्ट! 8 जुलाई तक ऐसा रहेगा मौसम

Monsoon Heavy Rain Alert: मौसम विभाग(IMD) के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तटों पर आज सुबह 08:30 बजे एक कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। इसके अगले 2-3 दिनों में और अधिक मजबूत होने की संभावना है। मानसून की मुख्य ट्रफ लाइन इस समय उत्तर-पश्चिम राजस्थान से लेकर बंगाल की खाड़ी में बने इस लो-प्रेशर एरिया के केंद्र तक गुजर रही है। दक्षिण गुजरात से लेकर कर्नाटक तट तक एक अपतटीय ट्रफ भी सक्रिय है। इन मजबूत प्रणालियों के कारण देश भर में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है।

इन क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी

आईएमडी ने चेतावनी दी है कि कुछ राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है:-

दक्षिण गुजरात क्षेत्र और कोंकण: 2 से 5 जुलाई के दौरान अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट।

सौराष्‍ट्र और कच्‍छ: 2 से 4 जुलाई के बीच अत्यधिक भारी बारिश की संभावना।

पश्चिम मध्य प्रदेश और ओडिशा: 3 और 4 जुलाई को मूसलाधार से अत्यधिक भारी बारिश की आशंका।

मध्य महाराष्ट्र: 3 से 5 जुलाई के दौरान अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी।

क्षेत्रवार मौसम का पूरा पूर्वानुमान और अलर्ट (2 से 8 जुलाई 2026)

1- उत्तर-पश्चिम भारत (दिल्ली, यूपी, हरियाणा, पंजाब और पहाड़ी राज्य)

दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब: 2 जुलाई को व्यापक बारिश के बाद 3-4 जुलाई को हल्की से छिटपुट बारिश होगी लेकिन 5 से 8 जुलाई के बीच एक बार फिर यहां भारी बारिश का नया दौर शुरू होगा। 2 जुलाई को पंजाब और दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश दर्ज की गई है।

उत्तर प्रदेश: पश्चिमी यूपी में 2 से 7 जुलाई के बीच और पूर्वी यूपी में 2 से 8 जुलाई के बीच अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। वहीं 3-4 जुलाई को दोनों क्षेत्रों में गरज-चमक की स्थिति रहेगी।

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश: उत्तराखंड में 2 से 8 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश होगी। 2-3 जुलाई को बहुत भारी और 4-8 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। हिमाचल में 2-3 जुलाई और 5-6 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख: 2-3 जुलाई और 7-8 जुलाई को व्यापक बारिश के साथ भारी बारिश हो सकती है।

राजस्थान: पूर्वी राजस्थान में 2 से 6 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश और 7-8 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। पश्चिमी राजस्थान में 2 जुलाई को 50-60 किमी/घंटे की रफ्तार से थंडरस्क्वाल (आंधी) और धूल भरी आंधी चलने की चेतावनी है जबकि 5-7 जुलाई के बीच यहां भारी बारिश हो सकती है।

आंधी-तूफान का अलर्ट: दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 2 से 8 जुलाई के दौरान 40-50 किमी/घंटे (झोंके 60 किमी/घंटे तक) की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।

2- मध्य भारत (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ)

मध्य प्रदेश: पूरे राज्य में 2 से 8 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। पश्चिम मध्य प्रदेश में 2 जुलाई और 5-8 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी जबकि 3-4 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 3-4 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी।

छत्तीसगढ़ और विदर्भ: दोनों क्षेत्रों में 2 और 3 जुलाई को बहुत भारी बारिश की संभावना है। छत्तीसगढ़ में 4 से 8 जुलाई और विदर्भ में 4 व 7-8 जुलाई को भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। 2 और 3 जुलाई को इस पूरे क्षेत्र में तेज आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट है।

3- पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल)

बिहार: बिहार में 2 से 4 जुलाई और 7-8 जुलाई को छिटपुट से लेकर भारी बारिश होगी जबकि 5 और 6 जुलाई को राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक रूप से भारी बारिश का अनुमान है। 2 जुलाई और 5-6 जुलाई को यहां तेज आंधी चलने की भी संभावना है।

झारखंड: 4 से 8 जुलाई के बीच झारखंड में व्यापक रूप से भारी बारिश होने की संभावना है।

ओडिशा: लो-प्रेशर एरिया के कारण ओडिशा में 2 जुलाई को बहुत भारी बारिश, 3 और 4 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश तथा 7-8 जुलाई को पुनः भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

पश्चिम बंगाल और सिक्किम: गंगीय पश्चिम बंगाल में 4-5 जुलाई को बहुत भारी बारिश तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 7-8 जुलाई को भारी बारिश होने की उम्मीद है।

4- पश्चिम भारत (गुजरात, कोंकण और गोवा)

गुजरात क्षेत्र, कोंकण और गोवा: इन क्षेत्रों में 2 से 8 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश जारी रहेगी। गुजरात क्षेत्र और कोंकण में 2 से 5 जुलाई के दौरान कुछ जगहों पर मूसलाधार बारिश होगी, जबकि गुजरात क्षेत्र में 6 से 8 जुलाई के बीच बहुत भारी बारिश का अलर्ट है।

सौराष्‍ट्र और कच्‍छ: 2 से 4 जुलाई तक अत्यधिक भारी बारिश के बाद 5-6 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 7-8 जुलाई को भारी बारिश होने की संभावना है।

मराठावाड़ा: 3 जुलाई को यहां भारी बारिश की संभावना है जिसके बाद 4 से 8 जुलाई के बीच मौसम थोड़ा धीमा रहेगा।

5- दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत (कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश)

तटीय कर्नाटक: 2 से 8 जुलाई के दौरान लगातार बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक: केरल और माहे में 3 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी जबकि 4 से 8 जुलाई तक भारी बारिश जारी रहेगी। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 5 से 8 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश: तेलंगाना में 2 जुलाई को व्यापक बारिश और 2-4 जुलाई के दौरान भारी बारिश की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में 2 से 5 जुलाई के बीच भारी बारिश हो सकती है।

तेज हवाओं का अलर्ट: कर्नाटक, तेलंगाना और रायलसीमा क्षेत्र में 2 से 8 जुलाई के दौरान तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

6- पूर्वोत्तर भारत (असम, मेघालय और त्रिपुरा)

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 2 से 8 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी जिसमें 2 से 4 जुलाई के बीच भारी बारिश का अलर्ट है।

असम और मेघालय में 3 और 4 जुलाई को भारी बारिश के साथ 30-40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।

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‘पैसे से ज्यादा जरूरी है हेल्थ’, करोड़ों की सैलरी छोड़ वेट्रेस बनीं महिला की कहानी कर देगी हैरान

Left corporate Job: 33 साल की उम्र में एक अच्छी-खासी कॉर्पोरेट सैलरी वाली नौकरी छोड़कर वेट्रेस का काम करने वाली एक महिला का किस्सा वायरल हो गया है। उसने बताया कि कैसे करियर में इस बदलाव ने उसकी लंबे समय से चली आ रही सेहत की समस्याओं को ठीक कर दिया। उसने इंस्टाग्राम पर अपनी कहानी शेयर करते हुए बताया कि अपनी कॉर्पोरेट डेस्क जॉब के आखिरी छह महीने उसने अपनी बीमारी की असली वजह जानने के लिए लगातार टेस्ट करवाने में बिताए थे। आखिर में पता चला कि इसकी असली वजह कॉर्पोरेट स्ट्रेस (काम का तनाव) ही था।

सारामा कॉर्निश ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “अपनी कॉर्पोरेट नौकरी के आखिरी 6 महीनों में, मैं बस हवा और पत्तियों जैसा हल्का खाना खा रही थी और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्पेशलिस्ट से हर तरह के टेस्ट करवा रही थी ताकि पता चल सके कि मुझे इतना गंभीर IBS क्यों हो रहा है।” उन्होंने दावा किया, “पता चला कि यह सिर्फ़ स्ट्रेस (तनाव) की वजह से था और नौकरी छोड़ने के तुरंत बाद ही सारे लक्षण गायब हो गए। मैं अब पहले से कहीं ज़्यादा सेहतमंद हूं।”

उनके पोस्ट किए गए वीडियो की शुरुआत एक टेक्स्ट के साथ होती है, जिसमें लिखा है, “मैंने 33 साल की उम्र में वेट्रेस का काम करने के लिए मोटी सैलरी वाली नौकरी छोड़ दी… और अगर इसका मतलब यह है कि मुझे फिर कभी स्ट्रेस से जुड़ा IBS का कोई लक्षण नहीं होगा, तो मैं सचमुच अपनी बाकी ज़िंदगी यह फ़र्श पोंछने को तैयार हूं। सेहत ही असली दौलत है। क्लिप में उन्हें चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान के साथ फ़र्श पोंछते हुए दिखाया गया है।

एक व्यक्ति ने पोस्ट किया, “हमें अपने लिए जो कुछ भी स्वीकार करना सिखाया गया है, वह बिल्कुल अजीब और बेतुका है।” एक और व्यक्ति ने कमेंट किया, “तुम वही करो जो तुम्हें पसंद है! जॉब टाइटल से कोई फ़र्क नहीं पड़ता – बस तुम खुश और स्वस्थ रहो!” कॉर्निश ने जवाब दिया, “मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं।”

एक और व्यक्ति ने कहा, “मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं! मैंने पिछले साल इमरजेंसी डिपार्टमेंट में नर्स की अपनी फुल-टाइम नौकरी छोड़ दी थी, और अब मैं लैशेज और बोटोक्स का काम करती हूं, और मैं पहले से 10 गुना ज़्यादा खुश और सेहतमंद महसूस करती हूं।” हालांकि कई लोगों ने उसकी पोस्ट से सहमति जताई, लेकिन कुछ लोगों का तर्क था कि वेट्रेस की नौकरी लंबे समय के लिए आर्थिक रूप से सही विकल्प नहीं है।

एक व्यक्ति ने लिखा, “मैंने पिछली गर्मियों में वेट्रेस के तौर पर काम किया था। मुझे कम से कम वेतन मिलता था, काम कम होने पर बिना पैसे के घर भेज दिया जाता था, और काम के दौरान कई पुरुषों ने मेरे साथ छेड़छाड़ की। मुझे नहीं लगता कि तनाव कम करने के लिए यह उतना आसान है जितना आप कहती हैं।

कम वेतन वाले और ग्राहकों से सीधे जुड़े काम भी बहुत तनावपूर्ण और असुरक्षित होते हैं, और वेट्रेस की नौकरी से कौन अपना होम लोन और बिल चुका सकता है? खासकर तब जब परिवार भी हो। मुद्दा यह नहीं है कि आपके पास कौन सी नौकरी है। मुद्दा है कैपिटलिज़्म (पूंजीवाद) और यह सोच कि इंसान कोई सामान है। बस गुज़ारा करने के लिए भी हमें बहुत ज़्यादा घंटे काम करना पड़ता है।”

PM Modi ने जापानी PM सनाए तकाइची को बताया ‘छोटी बहन’, भारत-जापान के बीच AI और सेमीकंडक्टर समेत कई बड़े समझौते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची (Sanae Takaichi) को अपनी छोटी बहन बताया। उन्होंने कहा कि तकाइची की पहली भारत यात्रा पर उनका स्वागत करते हुए मुझे खुशी हो रही है। वे जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं और एक दूरदर्शी और लोकप्रिय नेता भी हैं। वे जापान की नारा प्रीफेक्चर से आती हैं जो भारत-जापान के सांचा बौद्ध विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। ALSO READ: संसद के मानसून सत्र में मोदी-शाह की जोड़ी फिर रचेगी इतिहास?

 

ताकाइची ने संयुक्त प्रेस बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपनी ‘सुंदर छोटी बहन’ कहा। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने आपसी रिश्ते को भाई-बहन की तरह आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

भारत और जापान में MoC पर हस्ताक्षर

हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची की मौजूदगी में भारत और जापान के बीच सहयोग ज्ञापन (MoC) पर हस्ताक्षर किए गए। भारत और जापान ने आर्थिक सुरक्षा का संयुक्त रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मैटेरियल्स और सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा।

इंडिया-जापान बायोगैस इनिशिएटिव के तहत देश में 1000 बायोगैस और ऑर्गेनिक खाद प्लांट लगाए जाएंगे, जिससे गोबरधन योजना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। दोनों नेताओं ने बैटरी, ग्रीन हाइड्रोजन, न्यूक्लियर एनर्जी, निवेश, रक्षा, स्टार्टअप, रिसर्च और इंडो-पैसिफिक सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। ALSO READ: अमरनाथ यात्रा 2026: जम्मू से रवाना हुआ पहला जत्था, कल होंगे बाबा बर्फानी के दर्शन, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

 

इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री ताकाइची और मेरा विश्वास है कि टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप हमारे सहयोग का सबसे मजबूत स्तंभ बनेगी। इसी विजन को साकार करने के लिए,  आज AI के क्षेत्र में हमने एक संयुक्त बयान जारी किया है। जापान की सटीक तकनीक और भारत की सॉफ़्टवेयर क्षमता का संगम वैश्विक AI विकास को नई गति और शक्ति देगा। डिफेंस के क्षेत्र में आज हमने भारत और जापान के पहले सह-विकास परियोजना पर एग्रीमेंट किया है।

उन्होंने कहा कि कुछ ही दिन पहले G7 समिट में मैंने कहा था कि वैश्विक उथल-पुथल के आज के माहौल में आपसी विश्वास हमारी सबसे बड़ा रणनीतिक संपत्ति है। मुझे गर्व है कि भारत-जापान की साझेदारी इस कसौटी पर खरी उतरती है। आज भारत और जापान दोनों ही विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से हैं। एक आज़ाद, समृद्ध और नियमों पर आधारित इंडो पैसिफिक हमारी साझा प्राथमिकता है।

 

पीएम तकाइची को गार्ड ऑफ ऑनर

भारत यात्रा पर आईं जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची का नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया और उन्हें भव्य 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके साथ मौजूद थे।

राम मंदिर ट्रस्ट में कौन-कौन शामिल हैं? जानिए सभी सदस्यों के नाम और उनके अधिकार

Ayodhya Ram Mandir

Sri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और उसके प्रबंधन की देखरेख के लिए 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' देश की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है। हाल के दिनों में मंदिर प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर आई कुछ खबरों के बाद यह ट्रस्ट एक बार फिर सुर्खियों में है।

 

आइए एक 'Explainer' के जरिए समझते हैं कि इस ट्रस्ट का गठन कैसे हुआ, इसमें कौन-कौन शामिल हैं, पदेन (Ex-officio) सदस्यों की क्या भूमिका है, और इसके शीर्ष अधिकारियों का कद क्या है।

1. ट्रस्ट का गठन कब और क्यों हुआ?

इस ट्रस्ट की नींव देश की सर्वोच्च अदालत के ऐतिहासिक फैसले पर टिकी है। 9 नवंबर 2019 को अयोध्या के बाबरी मस्जिद-राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था।

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश (पृष्ठ 926, भाग Q) : कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह फैसले के तीन महीने के भीतर 'अयोध्या में कुछ निश्चित क्षेत्र के अधिग्रहण अधिनियम 1993' के तहत एक योजना तैयार करे। इसी योजना के तहत मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए ट्रस्टियों के एक बोर्ड (Trust) के गठन का प्रावधान किया गया।
 

घोषणा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2020 को संसद में इस ट्रस्ट के गठन का आधिकारिक ऐलान किया था। शुरुआत में इसके 15 सदस्यों में से 12 को भारत सरकार द्वारा नामित किया गया था, और 3 अन्य सदस्यों का चयन पहली बैठक में हुआ। ALSO READ: अयोध्या कांड में जीजा-साले निकले महाचोर, दान चोरी में अब होगी ED और IT की एंट्री

2. वर्तमान में ट्रस्ट में कौन-कौन शामिल हैं? (14 सदस्यों की सूची)

ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वर्तमान में इसमें 14 प्रमुख सदस्य सूचीबद्ध हैं:

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3. पदेन (Ex-officio) सदस्य क्यों महत्वपूर्ण हैं?

पदेन सदस्य ट्रस्ट के भीतर 'सरकार की आंख और कान' माने जाते हैं। वे सरकार और ट्रस्ट के बीच सीधे संपर्क (Liaison) का काम करते हैं। ट्रस्ट की वित्तीय सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी इन्हीं अधिकारियों पर होती है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी पर बागेश्वर बाबा का विस्फोटक दावा, कहा- अगर उनकी पर्ची खोल दी तो….

प्रमुख नौकरशाहों का प्रोफाइल:

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नृपेंद्र मिश्रा (निर्माण समिति अध्यक्ष) : यूपी कैडर के पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और पीएम नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव (Principal Secretary)। नृपेंद्र मिश्रा का प्रशासनिक कद बहुत बड़ा रहा है। वे 1990-91 में मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव भी रह चुके हैं। 2014 में उनकी प्रधान सचिव के रूप में नियुक्ति के लिए मोदी सरकार ने ट्राई (TRAI) अधिनियम के नियमों को बदलने के लिए एक विशेष अध्यादेश भी जारी किया था। मंदिर निर्माण कार्य की पूरी देखरेख उन्हीं के जिम्मे रही है। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

 

प्रशांत लोखंडे (IAS) : 2001 बैच के AGMUT कैडर के अधिकारी हैं। वर्तमान में वे सीबीएसई (CBSE) के अध्यक्ष होने के साथ-साथ गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव भी हैं। वे ट्रस्ट में केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के मुख्य संपर्क व्यक्ति हैं। (उनसे पहले यह भूमिका वर्तमान चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार संभाल रहे थे)।

 

संजय प्रसाद (IAS) : 1995 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के सबसे प्रभावशाली नौकरशाहों में से एक हैं। वर्तमान में वे यूपी के मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रमुख भूमिकाओं के साथ-साथ गृह, सूचना, सतर्कता (Vigilance) और प्रोटोकॉल जैसे बेहद महत्वपूर्ण विभाग संभाल रहे हैं।

4. अधिकार, विवाद और हालिया बयान

हाल ही में जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दान की चोरी या वित्तीय गबन के आरोपों पर चर्चा हुई, तो ट्रस्ट की ओर से केवल निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने ही मीडिया के सामने आकर पक्ष रखा था, जो ट्रस्ट में उनके ऊंचे प्रशासनिक कद को दिखाता है।

 

जून 2026 में मीडिया में उनके उस बयान की भी काफी चर्चा हुई थी जिसमें उन्होंने कहा था कि “पूरे राम मंदिर प्रबंधन को बदलने की जरूरत है।” जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और सरकार की छवि को किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम उठाए जाने के संकेत मिलते रहे हैं।

 

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट केवल एक धार्मिक निकाय नहीं है, बल्कि इसमें देश के शीर्ष स्तर के नौकरशाह और कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत मंदिर का संचालन पूरी तरह संप्रभु और जवाबदेह तरीके से हो।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

दतिया विधानसभा उपचुनाव की तारीखों का एलान, जानें क्या है सीट के सियासी समीकरण?

मध्यप्रदेश की हाईप्रोफाइल विधानसभा सीट दतिया पर चुनाव आयोग ने उपचुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है। चुनाव आयोग की ओर से जारी अधिसूचना में दतिया में 30 जुलाई को मतदान होगा। वहीं 3 अगस्त को चुनाव नतीजें आएंगे। गौरतलब है कि दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट से दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एफडी धोखाधड़ी मामले में तीन साल की सजा मिलने के बाद उनकी सदस्यता खत्म हो गई थी और सीट रिक्त घोषित हो गई थी।

दतिया में नरोत्तम मिश्रा के सामने कौन?-दतिया में भाजपा की ओर से पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की उम्मीदवारी करीब-करीब तय है और उन्होंने चुनाव की तारीखों के एलान से पहले ही अपना चुनाव प्रचार शुरु कर दिया  है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती से मात खाने वाले भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोतत्तम मिश्रा जिस अंदाज में दतिया में सक्रिय रहे, उससे यह करीब तय है कि नरोतम मिश्रा ही भाजपा के उम्मीदवार होंगे।

वहीं नरोत्तम मिश्रा के ओर से कांग्रेस की तरफ से कौन चुनावी मैदान में होगा, यह बड़ा सवाल है। कांग्रेस के संभावित चेहरे में सबसे बड़ा नाम अवधेश नायक का है। भाजपा से कांग्रेस में गए अवधेश नायक को 2023 के विधानसभा चुनाव में पहले कांग्रेस ने अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया था लेकिन टिकट के एलान के बाद जिस तरह से दतिया से भोपाल तक स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं और राजेंद्र भारती के समर्थकों ने हंगामा किया था, उससे पार्टी को अपना फैसले बदलने को मजबूर होना प़ड़ा था और अवधेश नायक की जगह राजेंद्र भारती को चुनावी मैदान में उतार गया। वहीं अब जब जब दतिया में उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है तो अवधेश नायक कांग्रेस की तरफ से सबसे मजबूत दावेदार है।

नरोत्तम मिश्रा की अग्निपरीक्षा- दतिया विधानसभा सीट पर नरोत्तम मिश्रा के सामने सबसे बड़ी चुनौती जातीय समीकरण साधना है। जातीय समीकरण की बात करें तो यहां पर ब्राह्मण समुदाय अहम प्रभाव रखते हैं,विधानसभा सीट पर 35 हजार से अधिक ब्राह्मण मतदाता हैं जो चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा करते है। ऐसे में अगर कांग्रेस अवधेश नायक को चुनावी मैदान में उतारती तो वह भी नरोत्तम मिश्रा की तरह ब्राह्मण समुदाय से आते है, तो चुनाव में वोट का बंटवारा तय है।

नरोत्तम मिश्रा के सामने सबसे बड़ी चुनौती कुशवाह वोटरों को साधने की है। दतिया विधानसभा सीट पर कुशवाह वोटरों की संख्या 30 हजार से उपर है। बताया जाता है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कुशवाह वर्ग की नाराजगी का खामियाजा ही नरोत्तम मिश्रा को उठाना पड़ा था और वह चुनाव हार गए थे। चुनाव के बाद कुशवाह वर्ग को साधने के लिए नरोत्तम मिश्रा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कुशवाह वर्ग से आने वाले रघुवीर कुशवाह को भाजपा जिला अध्यक्ष बनवाया। दतिया में इसके साथ यादव और जाटव समुदाय के वोटरों को रिझाना भी बड़ी चुनौती है।

राजेंद्र भारती की सदस्यता क्यों हुई खत्म?-कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को जिस मामले में सजा मिली है वह पूरा मामला 27 साल पुराना  साल 1998 का है,जब राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पिता के नाम पर संचालित एक संस्थान की 10 लाख रुपये की एफडी कराई थी, जिस पर तत्कालीन ब्याज दर 13.5 प्रतिशत थी। बाद में जब बैंक ने ब्याज दरें कम कर दीं, तब राजेंद्र भारती ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक के तत्कालीन लिपिक रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर दस्तावेजों में काट-छाँट की और एफडी की समय सीमा को बढ़ाकर 15 साल कर दिया, जिससे पुरानी ब्याज दर का लाभ मिलता रहे।

इस मामले का खुलासा साल 2011 में हुआ जब बैंक के तत्कालीन प्रशासक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की मांग की। हालांकि पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने पर मामला जिला न्यायालय और फिर उच्च न्यायालय तक पहुँचा। बाद में राजेंद्र भारती की मांग को पूरे मामले को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर किए है। गुरुवार को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने बैंक एफडी हेराफेरी और जालसाजी के  मामले में 3 साल की सजा सुनाई है।  कोर्ट ने कांग्रेस विधायक को दो धराओं में 3–3 साल और एक धारा में 2 साल की सजा सुनाई है। हलांकि कोर्ट ने कांग्रेस विधायक को जमानत भी दे दी थी। कोर्ट के फैसले के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता खत्म कर दी और अब दतिया में उपचुनाव होने जा रहा है।
 

Microsoft Layoff News: पिछले साल 15000 की छंटनी के बाद अब फिर तैयारी, माइक्रोसॉफ्ट के इन एंप्लॉयीज पर तलवार

Microsoft Layoff News: माइक्रोसॉफ्ट बड़े पैमाने पर एक बार फिर छंटनी की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट अपने वर्कफोर्स से करीब 2.5% एंप्लॉयीज के छुट्टी की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से किए गए दावे के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट इसके बारे में अगले हफ्ते तक ऐलान कर सकती है। बता दें कि पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी कंपनियों ने ताबड़तोड़ छंटनी शुरू की है। टेक, मीडिया और फाइनेंस सेक्टर में इसकी एक नई लहर शुरू हुई है क्योंकि ये कंपनियां अपना लागत कम कर रही हैं और साथ ही एआई इंफ्रा में भारी निवेश भी कर रही हैं।

Microsoft Layoff: किन एंप्लॉयीज पर पड़ेगा असर?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट में जो छंटनी होनी है, उसमें हजारों एंप्लॉयीज की छुट्टी होगी। इसकी मार सेल्स और कंसल्टिंग के साथ-साथ Xbox गेमिंग डिविजन पर भी पड़ेगी। एसईसी फाइलिंग के मुताबिक पिछले साल 30 जून 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट के करीब 2.28 लाख फुल-टाइम एंप्लॉयीज थे।

पिछले साल दो बार में 15000 की छुट्टी

इस महीने की शुरुआत में आई ब्लूमबर्ग न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार Xbox ने वैश्विक स्तर पर पार्ट्स की कमी के चलते दुनिया भर में अपने गेमिंग कंसोल की कीमतें बढ़ा दी। कंपनी ने बड़े पैमाने पर एंप्लॉयीज की छंटनी करने के साथ-साथ मार्केटिंग और अन्य चीजों पर खर्च में भारी कटौती की योजना बनाई। एक और मीडिया रिपोर्ट में सामने आया था कि माइक्रोसॉफ्ट अपने Xbox गेमिंग यूनिट को अलग करने (स्पिन ऑफ) या इसे पूरी तरह अपनी सब्सिडरी कंपनी के तौर पर रीस्ट्रक्चर करने पर विचार कर रही है। पिछले साल जुलाई 2025 में कंपनी ने कहा था कि वह अपने करीब 4% एंप्लॉयीज की छुट्टी करेगी। बता दें कि पिछले साल मई 2025 में कंपनी ने 6 हजार एंप्लॉयीज की छंटनी की थी, जिसके बाद जुलाई में भी करीब 9 हजार एंप्लॉयीज की छंटनी का ऐलान और हुआ। अब एक बार फिर इसमें छंटनी की तैयारी हो रही है।

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Delhi-Dehradun Expressway Viral Video: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का तीन महीने पहले उद्घाटन हुआ था। एक्सप्रेसवे का एक वीडियो वायरल हो रहा है।  वीडियो में देखें एक्सप्रेसवे का क्या हाल हुआ?