Battery stocks : 7% उछाल के साथ वायदा का टॉप गेनर बना एक्साइड, अमारा राजा में भी तेजी, जानिए वजह

Battery stocks : बैटरी शेयरों में आज जोरदार तेजी दिख रही है। एक्साइड (Exide Industries) सात फीसदी से ज्यादा के उछाल के साथ वायदा का टॉप गेनर में शामिल है। फिलहाल 1.20 बजे के आसपास यह शेयर 26.80 रुपए 6.87 फीसदी की बढ़त के साथ 418 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा थे। आज का इसका दिन का हाई 422.70 रुपए और दिन का लो 391.30 रुपए है। इसी तरह अमारा राजा (Amara Raja Energy & Mobility) में भी आज अच्छी खरीदारी देखने को मिली है। फिलहाल यह शेयर 24.10 रुपए यानी 2.87 फीसदी की तेजी लेकर 865 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है। आज का इसका इंट्राडे हाई 874.60 रुपए है। इन शेयरों में तेजी की क्या है वजह है? आइए जानते हैं।

क्यों दौड़े एक्साइड और अमारा राजा?

लेड की कीमतों में लगातार गिरावट हो रही है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे इन कंपनियों को फयदा हो सकता है। लेड की कीमतें 2026 की शुरुआत के बाद के निचले स्तर पर दिख रही हैं। लेड की कीमतों में आई गिरावट पर नजर डालें तो इसमें जनवरी 2026 से 11% की गिरावट हुई है। वहीं, 1 महीने में इसके भाव 9 फीसदी तक टूटे हैं।

एक्साइड और अमारा राजा को कितना फायदा?

एक्साइड की बात करें तो कंपनी की मटीरियल कॉस्ट में लेड की हिस्सेदारी 70 फीसदी है। वहीं, प्रोडक्शन कॉस्ट में लेड की हिस्सेदारी 50-55 फीसदी है। वहीं, अमारा राजा की बात करें तो इसके मटीरियल कॉस्ट में लेड की हिस्सेदारी 65-70 फीसदी और प्रोडक्शन कॉस्ट में लेड की हिस्सेदारी 45-50 फीसदी है। ऐसे में लेड की कीमतों में गिरावट से इन दोनों कंपनियों को उत्पादन लागत में काफी कमी हो सकती है। इससे इनके मुनाफे और मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। एक्साइड और अमारा राजा पर बाजार के फोकस की वजह ये है कि कंपनियां अमूमन देर से दाम बढ़ाती हैं। लेड के दाम में 10 फीसदी गिरावट से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट 6-7 फीसदी घटती है।

इन शेयरों की चाल पर एक नजर

एक्साइड (Exide Industries) शेयरों पर नजर डालें तो 1 हफ्ते में इसमें 7.02 फीसदी की और 1 महीने में 2.70 फीसदी की तेजी आई है। 3 महीने में यह 39.47 फीसदी भागा है। इस साल अब तक इसमें 15.17 फीसदी की बढ़त हुई है। 1साल में इसने 9 फीसदी और 3 साल में 76.32 फीसदी रिटर्न दिया है।

अमारा राजा (Amara Raja Energy & Mobility) के शेयरों में 1 हफ्ते में 3.56 फीसदी की तेजी आई है। वहीं, 1 महीने में इसमें 0.14 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली है। 3 महीने में यह शेयर 18.88 फीसदी भागा है। वहीं, इस साल अब तक इसमें 4.90 फीसदी की कमजोरी आई है। 1 साल में यह शेयर 9.5 फीसदी टूटा है। वहीं, 3 साल में इसमें 26.83 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।

 

 

Market View : 24200 की बाधा पर होने पर 24600 तक जा सकता है निफ्टी, इन दो शेयरों में हो सकती है बंपर कमाई

Q1 FY27 car sales: Maruti, Tata record highest growth among top 6 carmakers

Q1 FY2027 car sales

India’s passenger vehicle market made a strong start to FY2027, with all six leading carmakers recording higher retail registrations than in the April-June quarter last year. Maruti Suzuki remained the market leader with nearly 5 lakh registrations, while Tata Motors recorded the highest year-on-year growth among the top six manufacturers. Mahindra, Hyundai, Toyota and Kia also ended the quarter with higher retail volumes than last year.

  1. Maruti Suzuki closes in on the 5 lakh registration mark this quarter
  2. Hyundai only carmaker to record single-digit growth
CarmakerQ1 FY2027Q1 FY2026YoY (%)
Maruti Suzuki4,98,6323,91,73527.3
Tata Motors1,74,2991,24,98439.5
Mahindra1,65,4021,44,79714.2
Hyundai1,40,5521,28,5639.3
Toyota84,47475,35612.1
Kia75,12261,45122.2

Maruti remains on top; Tata records strongest growth

Maruti Suzuki retained a comfortable lead over the rest of the market with 4,98,632 retail registrations during Q1 FY2027, up 27.3 percent year on year.  The company added over 1.06 lakh registrations compared to the same period last year. Growth was driven by both its small car and SUV portfolios, which recorded 2,69,786 and 2,18,885 units respectively during the quarter. Maruti Suzuki also said bookings for its CNG models have increased by around 40 percent in recent weeks.

Tata Motors recorded the highest growth among the six largest carmakers, led by incremental volumes from the Sierra and sustained demand for the Punch and Nexon. Its registrations rose 39.5 percent to 1,74,299 units. During the quarter, the company refreshed its entry-level hatchback range with the Tiago and Tiago EV facelifts, while also expanding its EV portfolio with the launch of the Sierra EV.

Mahindra remained the third-largest passenger vehicle manufacturer with 1,65,402 retail registrations, up 14.2 percent year on year. The company continued to benefit from steady demand for its Scorpio, Thar and XUV range, while its electric vehicle portfolio also helped growth.

Hyundai records slowest gains; Toyota and Kia post double-digit growth

Hyundai remained the fourth-largest passenger vehicle manufacturer with 1,40,552 retail registrations, up 9.3 percent year on year. Although the company reported higher volumes than a year ago, it recorded the slowest growth among the six largest carmakers during the quarter, amid relatively lower product activity than its rivals.

Toyota and Kia also reported double-digit growth during the quarter. Toyota recorded 84,474 retail registrations, up 12.1 percent, while Kia’s registrations increased 22.2 percent to 75,122 units.

स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथि विशेष: एक ज्योति जो आज भी भारत का पथ आलोकित कर रही है

The image shows a young ascetic and a photograph of Swami Vivekananda in saffron robes

Vivekananda Mahasamadhi Diwas: कुछ तिथियां केवल इतिहास का हिस्सा नहीं होतीं, वे राष्ट्र की चेतना को झकझोरने वाली स्मृतियां बन जाती हैं। 4 जुलाई ऐसी ही एक तिथि है। वर्ष 1902 के इसी दिन बेलूर मठ में एक युवा संन्यासी ने ध्यानावस्था में अपनी अंतिम सांस ली और महासमाधि को प्राप्त हुए।ALSO READ: पुण्यतिथि विशेष: स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और खास बातें

उनकी आयु मात्र उन्तालीस वर्ष थी, किंतु उस अल्प जीवन में उन्होंने जो वैचारिक ज्योति प्रज्वलित की, वह आज भी भारत के पथ को आलोकित कर रही है। इसलिए स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिवस है।

 

यह स्वयं से पूछने का दिन है कि क्या हम उस भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिसका स्वप्न स्वामी जी ने देखा था। महापुरुषों का जाना शून्य अवश्य छोड़ता है, किंतु यदि उनके विचार जीवित रहें तो वह शून्य निराशा नहीं बनता, प्रेरणा बन जाता है। स्वामी विवेकानंद भी ऐसे ही युगपुरुष थे।

उनका शरीर 4 जुलाई 1902 को शांत हुआ, पर उनकी वाणी, उनका आत्मविश्वास और उनका राष्ट्रदर्शन आज भी करोड़ों भारतीयों के मन में धड़कता है। यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि दुःख का नहीं, संकल्प का दिवस है।

 

अपने जीवन के अंतिम दिन भी उन्होंने विश्राम को नहीं, बल्कि कर्म को चुना। उन्होंने शिष्यों के साथ वेद, संस्कृत और शिक्षा पर चर्चा की, मठ के भावी कार्यों पर विचार किया और भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति अपना अटूट विश्वास व्यक्त किया। इसके बाद संध्या के समय ध्यान में लीन होकर उन्होंने महासमाधि ग्रहण की। यह दृश्य केवल एक संन्यासी के जीवन का अंत नहीं था, यह कर्म, ज्ञान और अध्यात्म के अद्भुत समन्वय का अंतिम संदेश था। 

 

उन्होंने अपने जीवन से मानो यह कह दिया कि मनुष्य का मूल्य उसके जीवन की अवधि से नहीं, बल्कि उसके जीवन की दिशा से निर्धारित होता है। आज जब उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें स्मरण करते हैं, तो सबसे पहले उनके उस आग्रह को याद करना चाहिए कि भारत का पुनर्निर्माण केवल भवनों, उद्योगों और योजनाओं से नहीं होगा, वह जागृत मनुष्य से होगा।

उनका विश्वास था कि यदि प्रत्येक भारतीय अपने भीतर निहित शक्ति को पहचान ले, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने बार-बार कहा कि प्रत्येक आत्मा दिव्य है। यही विचार भारतीय आत्मविश्वास का सबसे बड़ा आधार है।

 

आज का भारत निस्संदेह अनेक उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ रहा है। विज्ञान, अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, चिकित्सा, नवाचार और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

यह गर्व का विषय है। किंतु स्वामी विवेकानंद शायद आज भी यही प्रश्न पूछते, क्या हमारी संवेदनाएं भी उतनी ही विकसित हुई हैं, जितनी हमारी तकनीक? क्या हमारी प्रगति के केंद्र में मनुष्य है? क्या समाज में बढ़ती कटुता, वैमनस्य और असहिष्णुता उस भारत की पहचान हो सकती है जिसकी कल्पना उन्होंने की थी?

 

विवेकानंद ने धर्म को कभी विभाजन का माध्यम नहीं माना। उनके लिए धर्म का अर्थ था मनुष्य के भीतर निहित श्रेष्ठता का जागरण। उन्होंने सेवा को साधना बनाया और करुणा को आध्यात्मिकता का सर्वोच्च रूप बताया। वे कहते थे कि जिस समाज में भूख, अशिक्षा और अभाव हो, वहां सबसे बड़ी पूजा पीड़ित मनुष्य की सेवा है।

इसलिए उनकी पुण्यतिथि पर यदि हम केवल औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित रह जाएं और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति अपने दायित्व को भूल जाएं, तो यह उनके विचारों के साथ न्याय नहीं होगा। उनके अंतिम वर्षों में एक चिंता बार-बार दिखाई देती है।

 

भारत का भविष्य उसके युवाओं के हाथों में है। वे चाहते थे कि युवा केवल रोजगार की तलाश करने वाले न बनें, बल्कि राष्ट्र के चरित्र- निर्माता बनें आत्मविश्वास, अनुशासन, निःस्वार्थ सेवा और निर्भीकता यही उनके संदेश का सार था। आज जब युवा पीढ़ी अभूतपूर्व अवसरों और जटिल चुनौतियों के बीच खड़ी है, तब विवेकानंद जी की वाणी पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होती है। उनका विश्वास था कि शक्तिशाली राष्ट्र वही बनता है, जिसके नागरिक चरित्रवान हों। 

 

पुण्यतिथि का वास्तविक अर्थ यही है कि हम महापुरुष के अधूरे कार्यों को अपना दायित्व मानें। यदि हम केवल पुष्प अर्पित कर लौट आएं, तो स्मरण अधूरा रह जाएगा। किंतु यदि हम अपने जीवन में ईमानदारी, सेवा, आत्मानुशासन और राष्ट्रहित को स्थान दें, तो वही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। महापुरुषों को सबसे अधिक सम्मान शब्दों से नहीं, आचरण से मिलता है।

 

आज समाज अनेक प्रकार के विभाजनों, स्वार्थों और तात्कालिक हितों से जूझ रहा है। ऐसे समय में विवेकानंद का संदेश हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र केवल संविधान या सीमाओं से नहीं बनता, वह अपने नागरिकों के चरित्र, विश्वास और पारस्परिक सम्मान से बनता है

 

यदि समाज का नैतिक आधार कमजोर पड़ जाए, तो आर्थिक समृद्धि भी लंबे समय तक टिक नहीं सकती। इसलिए उन्होंने शक्ति और करुणा, आधुनिकता और आध्यात्मिकता, विज्ञान और संस्कार इन सभी के संतुलन पर बल दिया। 4 जुलाई हमें यह भी सिखाती है कि मृत्यु महापुरुषों की यात्रा का अंत नहीं होती।

दीपक बुझ सकता है, पर उसकी लौ असंख्य दीपों में जीवित रहती है। स्वामी विवेकानंद की लौ आज भी हर उस शिक्षक में जलती है जो शिक्षा को संस्कार से जोड़ता है, हर उस युवा में जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानता, हर उस सैनिक, किसान, वैज्ञानिक, चिकित्सक और श्रमिक में जो अपने कर्म को राष्ट्रसेवा का माध्यम मानता है। वे हर उस भारतीय में जीवित हैं जो अपने अधिकारों से पहले अपने कर्तव्यों का स्मरण करता है।

 

स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि हमें शोकाकुल नहीं, उत्तरदायी बनाती है। यह हमें स्मरण कराती है कि भारत का भविष्य केवल सरकारों या नीतियों से नहीं बनेगा, वह तब बनेगा जब प्रत्येक भारतीय अपने भीतर सोई हुई चेतना को जगाएगा। जिस दिन सेवा हमारे स्वभाव का हिस्सा होगी, चरित्र हमारी पहचान होगा और राष्ट्रहित हमारे निर्णयों का आधार बनेगा, उसी दिन विवेकानंद के स्वप्नों का भारत साकार होने लगेगा। 

 

4 जुलाई इसलिए केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक मौन प्रश्न है, जो हर भारतीय से पूछती है, क्या हमने उस ज्योति से कुछ प्रकाश लिया, जिसे स्वामी विवेकानंद अपने पीछे छोड़ गए थे? यदि इस प्रश्न का उत्तर हमारे कर्मों में दिखाई दे, तभी उनकी पुण्यतिथि का वास्तविक अर्थ सिद्ध होगा और वही उनके प्रति हमारी सबसे सच्ची श्रद्धांजलि होगी।ALSO READ: Vivekananda Quotes: दुनिया को एक नई दिशा दे सकते हैं स्वामी विवेकानंद के ये 10 अनमोल विचार

(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)

पाकिस्तान में ढहाए गुरुद्वारे का होगा पुनर्निर्माण:प्रांतीय मंत्री ने अफसरों से मांगी रिपोर्ट; जमीन के मालिकाना हक की होगी जांच

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे को बिना आधिकारिक मंजूरी के अवैध रूप से गिराए जाने का मामला गरमाने के बाद सिख समुदाय में भारी आक्रोश है। विरोध के बाद प्रांतीय सरकार ने मामले का संज्ञान लिया है। सरकार ने ऐतिहासिक ‘गुरुद्वारा सिंह सभा’ को तुरंत दोबारा बनाने (पुनर्निर्माण करने) का आदेश जारी किया है, साथ ही जमीन के मालिकाना हक की कानूनी जांच शुरू कर दी है। यह पूरा मामला लाहौर से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित फारूखाबाद का है। पंजाब सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, 125 साल से भी अधिक पुराने ऐतिहासिक ‘गुरुद्वारा सिंह सभा’ को एक स्थानीय व्यवसायी (बिजनेसमैन) ने ढहा दिया। आरोप है कि इसके लिए संबंधित विभागों से कोई जरूरी ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ या आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी।
सिख समुदाय के लोगों ने किया प्रदर्शन इस अवैध तोड़-फोड़ की जानकारी मिलते ही सिख समुदाय के लोगों ने भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सिखों के कड़े विरोध के बाद यह गंभीर मामला सरकार के उच्च अधिकारियों और प्रांतीय मंत्रियों के संज्ञान में आया। मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने किया मुआयना घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रांतीय मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने खुद मौके का मुआयना किया और पीड़ित सिख समुदाय के सदस्यों से बातचीत की। स्थिति का जायजा लेने के बाद उन्होंने घोषणा की कि इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे की मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम तुरंत शुरू कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को इस मामले पर जल्द से जल्द एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। औकाफ विभाग यानी Evacuee Trust Property Board द्वारा साझा की गई शुरुआती जानकारी में भी यह पुष्टि हुई है कि गुरुद्वारे को बिना किसी कानूनी मंजूरी के गिराया गया था। इसके साथ ही, मंत्री ने जमीन के मालिकाना हक की जांच के आदेश भी दिए हैं, क्योंकि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह संपत्ति औकाफ विभाग के पास रजिस्टर्ड नहीं थी। मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने और उनके ऐतिहासिक पूजा स्थलों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी धार्मिक स्थल के साथ इस तरह की अवैध हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दूसरी ओर, सरकार के इस फैसले पर साइट के आसपास काम करने वाले स्थानीय व्यापारियों ने आपत्ति जताई है। व्यापारियों का कहना है कि यह जगह पिछले लगभग आठ दशकों (80 सालों) से खाली पड़ी थी। इस लंबे समय के दौरान कई गरीब परिवार वहां आकर बस गए और कई लोगों ने अपनी दुकानें खोल लीं।

स्थानीय व्यापारियों ने सरकार से अपील की स्थानीय व्यापारियों ने सरकार से अपील की है कि अगर गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण के लिए वहां से अतिक्रमण हटाया जाता है, तो बेघर होने वाले परिवारों को रहने के लिए दूसरी जगह दी जाए और उनके रोजगार व रोजी-रोटी का पूरा प्रबंध किया जाए।
गुरुद्वारा तोड़ने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई इस घटना ने पाकिस्तान में रह रहे सिख समुदाय के बीच ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि बिना इजाजत तोड़-फोड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और धर्मस्थल को उसका पुराना स्वरूप वापस दिया जाएगा।

Ambuja Cements Share Price: बर्नस्टीन ने इस सीमेंट स्टॉक की रेटिंग को किया अपग्रेड, जानें क्या है टारगेट प्राइस

Ambuja Cements Share Price: बर्नस्टीन ने गुरुवार, 2 जुलाई को अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड (Ambuja Cements Ltd) को उसकी पिछली रेटिंग “मार्केट परफॉर्म” से “आउटपरफॉर्म” में अपग्रेड किया। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि भारत के दो सबसे बड़े सीमेंट प्रोड्यूसर के बीच वैल्यूएशन का अंतर अब टिकाऊ नहीं रहा। अपग्रेड के बावजूद, बर्नस्टीन ने अंबुजा सीमेंट्स पर अपना प्राइस टारगेट ₹542 प्रति शेयर से घटाकर ₹486 कर दिया, जिसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से 16% की बढ़त की संभावना है।

ब्रोकरेज ने कहा कि अंबुजा, अल्ट्राटेक सीमेंट के मुकाबले भारी डिस्काउंट पर ट्रेड कर रही है, भले ही यह कैपेसिटी के हिसाब से देश की दूसरी सबसे बड़ी सीमेंट प्रोड्यूसर बन गई है।

बर्नस्टीन के अनुसार, अल्ट्राटेक की एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹3.6 लाख करोड़ है और इसकी सीमेंट कैपेसिटी 206 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है, जबकि श्री सीमेंट की एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹90,000 करोड़ है और इसकी कैपेसिटी 69 MTPA है। इसकी तुलना में, अंबुजा की एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹1.2 लाख करोड़ है, जबकि इसकी कैपेसिटी 109 MTPA है।

ब्रोकरेज ने कहा कि अंबुजा की वैल्यू अभी लगभग एक नया ग्रीनफील्ड सीमेंट प्लांट बनाने की लागत के बराबर है, जो कंपनी के स्केल या कमाई की क्षमता को नहीं दिखाता है। बर्नस्टीन को उम्मीद है कि अंबुजा की चल रही कैपेसिटी बढ़ाने और ऑपरेशनल सुधारों से आगे चलकर अल्ट्राटेक और श्री सीमेंट दोनों के साथ प्रति टन EBITDA का अंतर कम करने में मदद मिलेगी।

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि आने वाले सालों में मजबूत एग्जीक्यूशन से री-रेटिंग को बढ़ावा मिलना चाहिए क्योंकि कंपनी बड़ी कंपनियों के साथ प्रॉफिट का अंतर कम कर रही है।

अंबुजा सीमेंट्स पर 46 एनालिस्ट की कवरेज है, जिनमें से 33 ने स्टॉक पर “बाय” रेटिंग दी है, 10 ने “होल्ड” कहा है, जबकि तीन अन्य ने “सेल” रेटिंग दी है।

अंबुजा सीमेंट्स के शेयर अभी गुरुवार को 1.7% बढ़कर ₹426.5 पर ट्रेड कर रहे हैं। स्टॉक अपने 52-हफ़्ते के हाई ₹624 से 32% नीचे है। 2027 में अब तक स्टॉक 24% नीचे आ चुका है।

Dividend Stocks: महिंद्रा ग्रुप की 5 कंपनियां देंगी ₹110 तक का डिविडेंड, नहीं हैं शेयरहोल्डर तो आज, 2 जुलाई को आखिरी मौका

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Revolt RVX launched at Rs 1.30 lakh

Revolt RVX launched at Rs 1.30 lakh

Revolt Motors has expanded its electric motorcycle line-up with the launch of the new RVX at an introductory price of Rs 1.30 lakh (ex-showroom, India). Positioned as the brand’s new performance-focused offering aimed at a younger audience, the RVX gets a new mid-drive motor, a removable battery and a claimed IDC range of 160km.

  1. 3.24kWh removable battery 
  2. 160km claimed IDC range
  3. Priced between RV BlazeX and RV400 

Revolt RVX: What’s new?

The RVX gets a mid-mounted motor with 5.3kW of peak output

Powering the RVX is a new mid-drive permanent magnet synchronous motor (PMSM) rated at 4kW, with a peak output of 5.3kW. Revolt claims the motorcycle produces up to 230Nm of torque at the rear wheel, accelerates from 0-40kph in 3.9 seconds and has a top speed of 90kph in Boost mode.

The motor draws power from a 3.24kWh removable NMC battery pack, which is claimed to deliver an IDC-certified range of 160km on a single charge. Using a fast charger, the battery can be charged from 0 to 80 percent in 80 minutes.

The RVX is suspended on a USD fork and a rear monoshock. It gets a new 3.5-inch IP67-rated PMVA display with Bluetooth connectivity, telematics and over-the-air updates. The RVX also offers four riding modes: Boost, Sport, City and Eco.

Other features include geofencing, call and message notifications, hill-hold assist, reverse mode, walk assist, an immobiliser and vehicle locator. The RVX will be available in Pearl Black, Electric Blue and Eclipse Red colours.

The RVX has been launched at an introductory price of Rs 1.30 lakh (ex-showroom, inclusive of applicable PM E-DRIVE incentives) and will be sold through Revolt’s network of over 200 dealerships across India. In Delhi, the company says the motorcycle can be purchased at an effective ex-showroom price of Rs 94,990 after applicable incentives under the state’s EV policy.

At Rs 1.30 lakh, the RVX is priced very close to the recently launched Oben Rorr EVO, which starts at Rs 1.25 lakh (ex-showroom). Within Revolt’s own line-up, the RVX sits above the RV BlazeX (Rs 1.20 lakh), at par with the RV400 BRZ (Rs 1.30 lakh) and below the RV400 (Rs 1.40 lakh). The RV1 and RV1+ remain the brand’s entry-level offerings.

FIFA WorldCup की सबसे शानदार वापसी, 2 गोल खाकर बेल्जियम ने किए अंतिम 39 मिनट में 3 गोल

 

बेल्जियम ने FIFA World Cup के इतिहास में सबसे शानदार वापसी करते हुए 86वें मिनट के बाद तीन गोल कर सेनेगल पर 3-2 से जीत दर्ज करते हुए टूर्नामेंट के राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई। जिसमें 125वें मिनट में रिकॉर्ड-तोड़ पेनल्टी भी शामिल थी।

ल्यूमेन फील्ड में गुरुवार सुबह खेले गये फीफा विश्वकप के राउंड ऑफ 32 में बेल्जियम आखिरी समय में शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए सेनेगल पर 3-2 से जीत दर्ज की। मैच के ज़्यादातर समय 2-0 से पीछे रहने के बाद बेल्जियम बाहर होने की कगार पर था, लेकिन उन्होंने अद्भुत वापसी की। उन्होंने एक लगभग हारी हुई बाजी को पलटते हुए टूर्नामेंट की सबसे यादगार नॉकआउट जीतों में से एक में बदल दिया। सब्स्टीट्यूट रोमेलु लुकाकू ने 86वें मिनट में गोल करके वापसी की शुरुआत की और तीन मिनट बाद कप्तान यूरी टिएलेमैन्स ने हेडर से बराबरी का गोल करके मैच को अतिरिक्त समय में पहुंचा दिया।

मैच के ज़्यादातर समय दबदबा बनाने के बाद सेनेगल की शानदार जीत तय लग रही थी। हबीब डियारा ने 25वें मिनट में गोल करके खाता खोला और लगातार हमले के दबाव का फायदा उठाते हुए बेल्जियम को पीछे कर दिया। अफ्रीकी टीम ने 51वें मिनट में अपनी पकड़ और मज़बूत की, जब इस्माइला सार ने शानदार फिनिशिंग के साथ बढ़त को दोगुना कर दिया, जिससे बेल्जियम के जल्दी बाहर होने का खतरा मंडराने लगा।

मैच में बेल्जियम अधिकतर समय सेनेगल के अनुशासित रक्षापंक्ति को तोड़ने के लिए संघर्ष करता रहा, लेकिन लुकाकू के मैदान पर आने से मैच का रुख बदल गया। स्ट्राइकर के 86वें मिनट में करीब से किए गए गोल ने बेल्जियम का हौसला बढ़ाया, और कुछ ही देर बाद टिएलेमैन्स ने लिएंड्रो ट्रॉसार्ड के क्रॉस पर शानदार हेडर से गोल करके स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया और सेनेगल के समर्थकों को हैरान कर दिया।

अतिरिक्त समय में और भी रोमांच देखने को मिला क्योंकि दोनों टीमें निर्णायक गोल की तलाश में थीं। बेल्जियम जीत के बहुत करीब पहुंच गया था जब डोडी लुकेबाकियो ने अतिरिक्त समय के दूसरे हाफ के अंत में क्रॉसबार पर शॉट मारा, जबकि सेनेगल ने काउंटर-अटैक में कुछ मौके बनाए लेकिन फिर से बढ़त हासिल करने में नाकाम रहे।

निर्णायक पल आखिरी सेकंड में आया। लंबे VR Review के बाद, रेफरी हेक्टर मार्टिनेज ने बेल्जियम को पेनल्टी दी। उन्होंने फैसला सुनाया कि शेख कमारा ने पेनल्टी एरिया के अंदर टिएलेमैन्स को फाउल किया था, जब वे एक लो क्रॉस को क्लियर करने की कोशिश कर रहे थे। इस फैसले के बाद सेनेगल के खिलाड़ियों ने जोरदार विरोध किया, जिससे स्पॉट-किक लेने में काफी देर हो गई।

मैच का सारा दारोमदार अपने कंधों पर होने के बावजूद, टिएलेमैन्स ने संयम बनाए रखा और गोलकीपर मोरी डियाव को छकाते हुए 125वें मिनट में पेनल्टी को गोलपोस्ट के ऊपरी-दाएं कोने में पहुंचाकर एक अद्भुत वापसी पूरी की। आधिकारिक तौर पर 124 मिनट और 44 सेकंड पर हुए इस गोल ने फीफा विश्वकप कप के इतिहास में मैच जिताने वाले सबसे देर से किए गए गोल का रिकॉर्ड बनाया। इस रोमांचक जीत ने बेल्जियम को राउंड ऑफ़ 16 में पहुंचा दिया है, जहां वे सिएटल लौटकर अमेरिका का सामना करेंगे।

सेनेगल के लिए, उनके शानदार प्रदर्शन का अंत दिल तोड़ने वाला रहा। 80 मिनट से ज़्यादा समय तक मैच पर पकड़ बनाए रखने और दो गोल की बढ़त के साथ जीत पक्की लग रही थी, लेकिन बेल्जियम ने मैच के आखिर में अविश्वसनीय वापसी करते हुए फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर अब तक की सबसे बेहतरीन वापसी की कहानियों में से एक लिख दी।

Land Rover introduces new Discovery Landmark Edition

Land Rover Discovery Landmark front quarter static

Land Rover has added a new variant to the Discovery SUV range. Called the Landmark edition, it will be positioned as a mid-level variant, slotting between the base S and top-end Tempest editions. Additionally, the SUV maker has also refreshed the Discovery lineup with new colours and feature updates. While JLR has listed the edition on its India website, it has not yet announced its price. 

Land Rover Discovery Landmark Edition: What’s new?

Compared to the rest of the Discovery lineup, the Landmark Edition gets mainly cosmetic differences. It gets an exclusive new Tasman Blue paint job in a metallic finish. The brand says the colour “draws inspiration from the original Clearwater Blue heritage paint dating back to Discovery’s inception in 1989.” There’s also a grey “Graphite Atlas” finish for the grille, front fender vents and Discovery branding at the front and rear, while the front and rear skidplates are done in “Carpathian Grey”.

Additionally, it gets a unique mountain logo on the scuff plate, centre console, circular B-pillar insert and puddle lamp projectors. The interior features brushed aluminium accents with Landmark branding, while the door pads and dashboard feature a faux suede (Tech Velour) trim. Landmark versions get a panoramic sunroof and a centre console refrigerator.  

Tempest versions get a new paint job

The top-end Tempest variant of the Discovery gets a new exclusive Borasco Grey paint job, and irrespective of the colour chosen, all Tempest variants get matte protective film as standard. Additionally, all Discovery models get a new ‘Dark Agate Grey’ finish for the 21-inch alloy wheels and a driver attention monitoring system.

Updated Land Rover Discovery: Powertrain 

The Discovery continues to be powered by a single 3.0-litre diesel engine, delivering 350hp and 700Nm of torque. Power is sent to all wheels via an 8-speed automatic transmission. There’s also Land Rover’s Terrain Response 2 onboard, providing a range of terrain and driving modes. Land Rover says the Discovery has a water wading capacity of 900mm and a towing capacity of 3,500kg. 

NEET UG 2026 Bonus Marks Rules: नीट यूजी में फिजिक्स के बाद जुलॉजी के सवाल पर बढ़ा बवाल, फाइनल आंसर की से ‘ड्रॉप’ हो सकते हैं दो सवाल

NEET UG 2026 Bonus Marks Rules: 21 जून 2026 को नीट यूजी री-एग्जाम में हिस्सा लेने वाले परीक्षार्थी अब रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन रिजल्ट से पहले एनटीए इस परीक्षा की फाइनल आंसर की जारी करेगा। फाइनल आंसर की से जुड़ी एक खबर, जो परीक्षार्थियों को राहत पहुंचा सकती है। खबरों की मानें, तो फिजिक्स के बाद नीट यूजी 2026 री-एग्जाम में जुलॉजी के पेपर में पूछे गए एक सवाल को लेकर बवाल मच गया है। विषय विशेषज्ञों ने दावा किया है कि इस सवाल के लिए दिए गए एमसीक्यू के चारों विकल्प गलत हैं। इसके बाद से नीट यूजी 2026 री-एग्जाम की फाइनल आंसर की से दो सवाल ‘ड्रॉप’ होने की अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं।

अगर ऐसा हुआ तो नीट यूजी 2026 री-एग्जाम में शामिल सभी परीक्षार्थियों को सीधे 8 बोनस अंक मिलेंगे। बता दें, एनटीए ने 21 जून 2026 को हुई परीक्षा की अस्थायी आंसर की पर 28 जून तक आपत्तियां मांगी थी। एनटीए को तय समयसीमा में इस पर 10,000 से ज्यादा आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। एनटीए ने जहां परीक्षार्थियों की ओएमआर शीट का मूल्याकंन शुरू कर दिया है। वहीं, विषय विशेषज्ञों ने फिजिक्स के बाद जुलॉजी विषय के एक सवाल पर उंगली उठा दी है। विशेषज्ञों का दावा है कि प्रश्नपत्र में दिए गए चारों विकल्प एनसीईआरटी की किताब से मेल नहीं खाते हैं।

कोटा के नीट विशेषज्ञें ने किया दावा

नीट की प्रोविजनल आंसर की पर कोटा के नीट एक्सपर्ट्स ने आपत्ति जताई है। इनका कहना है कि पेपर कोड 470 में जुलॉजी सेक्शन के प्रश्न संख्या 167 के दिए गए चार विकल्प बिल्कुल गलत हैं।

क्या कहता है एनटीए का नियम ?

नीट परीक्षा में एनसीईआरटी की किताबों से सवाल पूछे जाते हैं। इसलिए अगर कोई सवाल या उसके विकल्प टेक्स्टबुक से बाहर के हों तो एनटीए को उसे हटाना ही पड़ता है। मौजूदा हालात में फिजिक्स और जुलॉजी के दो सवालों पर बवाल बढ़ने पर ये ड्रॉप होने के कयास लगाए जा रहे हैं। एनटीए बैकएंड पर ही रिजल्ट में 8 बोनस नंबर जोड़ने का फॉर्मूला तैयार कर रहा है, जिससे रिजल्ट जारी करते समय कोई तकनीकी गड़बड़ी न हो।

एनटीए का बोनस देने का फॉर्मूला

किसी सवाल पर बोनस नंबर देने के लिए एनटीए ने 4 बेहद स्पष्ट नियम बनाए हैं :

अगर कोई सवाल गलत है या सिलेबस से बाहर है तो उसे ड्रॉप कर दिया जाता है। इस स्थिति में सभी परीक्षार्थियों को 4 नंबर मिलते हैं, चाहे उन्होंने उस सवाल को किया हो या नहीं।

अगर किसी सवाल के दो उत्तर सही हैं तो सिर्फ उन्हीं छात्रों को नंबर मिलते हैं जिन्होंने उन दोनों सही विकल्पों में से किसी एक को चुना हो।

अगर सवाल के चारों विकल्प सही मान लिए जाएं तो उन सभी को नंबर मिलते हैं जिन्होंने सवाल हल करने की कोशिश की हो।

अगर चारों विकल्प गलत निकलते हैं तो यह सवाल भी ड्रॉप माना जाता है और सभी कैंडिडेट्स को बराबर 4 बोनस नंबर दे दिए जाते हैं।

इससे पहले फिजिक्स के 2 सवालों पर उठी थीं उंगलियां

जूलॉजी से पहले फिजिक्स के दो सवालों को पर छात्रों और विशेषज्ञों ने उंगली उठाई थी। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स (EM Waves) वाले सवाल के 2 ऑप्शंस सही बैठ रहे हैं। ऐसे में उन दोनों में से किसी भी एक विकल्प को चुनने वाले छात्रों को नंबर दिए जाएंगे। वहीं, वर्नियर कैलिपर्स वाले दूसरे सवाल के चारों ही विकल्प गलत पाए गए हैं। इस वजह से फिजिक्स का सवाल ड्रॉप होना तय माना जा रहा है और इसके बदले सबको नंबर मिलेंगे।

NEET UG Refund Portal 2026: एनटीए ने बढ़ाई नीट यूजी फीस रिफंड की आखिरी तारीख, बैंक डीटेल वेरिफाई करने की पूरी प्रक्रिया यहां जानें

संसद के मानसून सत्र में मोदी-शाह की जोड़ी फिर रचेगी इतिहास?

2014 में केंद्र में सत्ता में आई मोदी सरकार पिछले 12 सालों में बड़े फैसलों से संसदीय इतिहास के पन्नों में अगस्त माह को नए ढंग से दर्ज करती आई है। इस बार भी संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरु होने की संभावना है जो अगस्त तक चलेगा। संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार कई अहम विधयकों को सदन में पेश कर सकती है। पिछले बजट सत्र में परिसीमन बिल पर जिस तरह से सरकार को मुंह की खानी पड़ी थी उसके बाद अब मोदी सरकार संसद के मानसून सत्र को लेकर बेहद गंभीर नजर आ रही है।


मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के मानसून सत्र में कई अहम संवैधानिक संशोधन विधेयकों को सदन की पटल पर रखने की तैयारी में है। मानसून सत्र में सरकार का मुख्य ध्यान उन विधेयकों पर है जो पिछले बजट सत्र  में सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं होने के कारण पारित नहीं हो सके थे। ऐसे में यह सवाल अब सियासी गलियारों में चर्चा के केंद्र में है कि मोदी सरकार क्या इस बार फिर अगस्त महीने में देश में एक नया सियासी इतिहास रचेगी। 

 

परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण-सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा अब जोरों से  है कि मोदी सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव में नए परिसीमन और महिला आरक्षण के साथ जाना चाहती है। इसलिए सरकार मानसून सत्र में इससे जुड़ा विधेयक लाने की तैयारी में है। गौरतलब है कि पिछले बजट सत्र में सरकार को तब बड़ा झटका लगा था जब लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण को जल्द लागू करने से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक,सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत न होने के कारण गिर गया था। इसके साथ ही सरकार को परिसीमन विधेयक भी वापस लेना पड़ा था।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि मानसून सत्र में मोदी सरकार 132वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में परिसीमन को दोबारा पेश करने जा रही है। इस बार दक्षिण भारतीय राज्यों के कड़े विरोध और उनकी चिंताओं को देखते हुए बिल में कुछ बड़े बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन बना रहे। इसके पारित होने से साल 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा की सीटों में बड़ी वृद्धि का रास्ता साफ होगा।

 

पीएम-सीएम जेल में रहने पर हटाने संबंधी विधेयक- मोदी सरकार संसद के मानसून सत्र में  प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री रिमूवल बिल लाने जा रहा है। इस प्रस्तावित कानून के तहत यदि देश के प्रधानमंत्री, किसी राज्य के मुख्यमंत्री या केंद्र व राज्य सरकार के किसी मंत्री को किसी गंभीर अपराध (जैसे भ्रष्टाचार) के मामले में गिरफ्तार किया जाता है और वे लगातार 30 दिनों तक न्यायिक या पुलिस हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें स्वतः ही उनके पद से हटा दिया जाएगा। इस विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को अंतिम  मंजूरी दे सकती है, जिसके तुरंत बाद इसे 20 जुलाई से शुरू होने वाले सत्र में पेश किया जाएगा।

 

एक देश, एक चुनाव पर निर्णायक कदम- देश में लोकसभा और सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के संकल्प को पूरा करने के लिए सरकार 'समान चुनाव विधेयक' (129वां संविधान संशोधन) को इस सत्र में मुख्य एजेंडे के रूप में आगे बढ़ा सकती है। यह विधेयक फिलहाल संसदीय समिति के पास समीक्षा के अधीन है। माना जा रहा है कि सरकार इस मानसून सत्र के दौरान समिति की रिपोर्ट पटल पर रखवाकर इस पर व्यापक चर्चा कराएगी और इसे पारित कराने का पूरा प्रयास करेगी।

 

मानसून सत्र में मोदी सरकार की अग्निपरीक्षा- मानसून सत्र में सरकार को अगर इन अहम विधयकों को पास कराना होगा, तो उसके सामने पहली बड़ी चुनौती दो तिहाई बहुमत जुटाना है। लोकसभा में अभी सरकार के पास दो तिहाई बहुमत नहीं है, ऐसे में उसके सामने पहला लक्ष्य सदन में आवश्यक बहुमत का जुगाड़ करना है। पिछले दिनों लोकसभा में NDA की सदस्य संख्या में उस वक्त  इजाफा हुआ है जब टीएमसी  के 20 सांसद और उद्वव ठाकरे की पार्टी के  6 सांसद अपने पार्टी से बगावत कर NDA के साथ आ गए है। इन सांसदों  के आने के बाद भी अभी सरकार सदन में दो तिहाई  बहुमत के 360 के आंकड़े से बहुत दूर है।

ऐसे में सदन में बहुमत जुटाने के लिए बीजेपी की नजर अब एनसीपी, समाजवादी पार्टी और डीएमके जैसी क्षेत्रीय पार्टियों पर टिकी है। तृणमूल कांग्रेस के 20 और शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसदों द्वारा संसद में अलग गुट की मान्यता मांगने के मामले पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का फैसला इसी सत्र के दौरान आ सकता है। यदि इन बागी धड़ों को अलग गुट के रूप में मान्यता मिलती है, तो संसद में विपक्षी संख्याबल कमजोर होगा और सरकार के लिए दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा जुटाना बेहद आसान हो जाएगा। 

 

अगस्त और मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले- बीते 12 सालों में मोदी सरकार ने अगस्त महीने में ऐसे बड़े फैसले किए है जिसने देश के पूरे राजनीतिक और समाजिक परिदृश्य को  बदल दिया है। अगस्त 2019 मोदी सरकार ने तीन तलाक पर कानून बनाया था। 2019 दूसरी बार सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने संसद के अपने पहले सत्र में इस कानून को पास कराकर 1 अगस्त 2019 को मुस्लिम महिलाओं को एक नई आजादी दे दी थी।  इसके साथ ही मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर में धारा 370 को हटाने का ऐतिहासिक फैसला किया था वहीं 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में बनने वाले भव्य राम मंदिर की आधारशिला अपने हाथों से रख कर 5 अगस्त की तारीख को इतिहास में दर्ज के साथ 1980 से भाजपा के गठन के बाद देश की जनता से उसके सबसे बड़े चुनावी वादे को पूरा कर दिया था।