पाकिस्तानी सेना के वीडियो में भारतीय संसद पर हमला:एयरबेस-विमान तबाह करने का दावा; यूजर्स बोले– हकीकत में जीत नहीं पाए, इसलिए AI वीडियो बनाया

पाकिस्तानी सेना ने मई 2025 में भारत के साथ हुए संघर्ष को लेकर एक नया वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में भारत की संसद पर हमला होते हुए दिखाया गया है। साथ ही, इसमें दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारत के 32 एयरफोर्स बेस पर हमला किया, 8 भारतीय विमान गिराए और 2 S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट किए।वीडियो में ज्यादातर घटनाओं को AI, ग्राफिक्स और एनीमेशन के जरिए दिखाया गया है वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर इसका मजाक बनने लगा। एक यूजर्स ने कहा कि वे हकीकत में नहीं जीत पाए तो AI का सहारा लेना पड़ा। वहीं दूसरे ने सवाल किया कि अगर इतनी बड़ी जीत हुई है तो सैटेलाइट तस्वीरें कहां हैं, क्यों सिर्फ ग्राफिक्स पर निर्भर रहना पड़ रहा है। 32 एयरबेस पर हमले का सबूत नहीं पाकिस्तान ने 32 भारतीय एयरबेस को निशाना बनाने का दावा तो किया है, लेकिन वीडियो में इसके समर्थन में सैटेलाइट तस्वीरें या हमले के पहले और बाद की तस्वीरें नहीं दिखाई गई हैं। रनवे के नुकसान या नष्ट हुए हैंगर की ऐसी तस्वीरें भी नहीं हैं। इसके उलट, मई 2025 में पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर हुए भारतीय हमलों के बाद सैटेलाइट तस्वीरों से नुकसान की पुष्टि हुई थी। वॉशिंगटन पोस्ट ने 2 दर्जन से ज्यादा सैटेलाइट तस्वीरों और हमले के बाद के वीडियो का विश्लेषण किया था। इसमें पाकिस्तान के कम से कम 6 एयरफील्ड पर नुकसान मिला था। इनमें 3 बड़े हैंगर, 2 रनवे और पाकिस्तान एयरफोर्स की 2 मोबाइल इमारतों को नुकसान शामिल था। नूर खान, भोलारी, शाहबाज, सुक्कुर और मुशफ जैसे ठिकानों पर भी नुकसान दिखाई दिया था। भोलारी में एक एयरक्राफ्ट हैंगर में बड़ा छेद मिला था, जबकि शाहबाज में हैंगर और कंट्रोल टावर को नुकसान पहुंचा था। भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट करने का पुराना दावा दोहराया पाकिस्तान एयरफोर्स ने नए वीडियो में भारत के 2 S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट करने का दावा भी दोहराया है। मई 2025 के संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने भारत का एक S-400 सिस्टम नष्ट कर दिया है। भारत ने इसे खारिज किया था। PIB की फैक्ट चेक यूनिट ने S-400 को नुकसान पहुंचने या नष्ट होने की खबरों को बेबुनियाद बताया था। रक्षा मंत्रालय ने भी पाकिस्तान पर S-400 और भारतीय एयरफील्ड को लेकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया था। इसके कुछ दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के आदमपुर एयरफोर्स स्टेशन का दौरा किया था। वहां S-400 सिस्टम के सामने उनकी तस्वीरें जारी की गई थीं। पावर ग्रिड और साइबर हमले का भी दावा वीडियो में भारत के नेशनल पावर ग्रिड, ईंधन सप्लाई और सैन्य सैटेलाइट सिस्टम को नुकसान पहुंचाने का भी दावा किया गया है। साथ ही साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का बड़ा अभियान चलाने की बात कही गई है। इन दावों के साथ भी सबूत नहीं दिए गए हैं। सिर्फ कंप्यूटर एनीमेशन को ऐसे हमलों का सबूत भी नहीं माना जा सकता। वीडियो में INS विक्रांत जैसे बड़े राष्ट्रीय ठिकाने पर मिसाइल हमले भी दिखाए गए हैं।लेकिन यह साबित नहीं करता कि वहां वास्तव में हमला हुआ था। यही बात वीडियो में दिखाए गए दूसरे धमाकों, गिरते विमानों और तबाह होते सैन्य ठिकानों पर भी लागू होती है। ————— यह खबर भी पढ़ें… रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान: तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे सऊदी अरब और तुर्किये से हुए रक्षा समझौते की आड़ में पाकिस्तान हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

बांग्लादेशी PM तारिक रहमान के दिल्ली आने पर सस्पेंस:BRICS समिट के लिए भारत का न्योता; शेख हसीना के वापस भेजने की शर्त पर विवाद

भारत 12-13 सितंबर को BRICS समिट की मेजबानी करने जा रहा है। समिट में कई देशों के नेता दिल्ली पहुंचेंगे। लेकिन पड़ोसी देश बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के के आने पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। बांग्लादेश BRICS का सदस्य नहीं है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को खास मेहमान के तौर पर समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने का न्योता दिया है। हालांकि, दोनों देशों के रिश्तों में शेख हसीना का मुद्दा बड़ी अड़चन बना हुआ है। भारत ने तारिक रहमान को द्विपक्षीय यात्रा के लिए भी न्योता दिया था। इसके जवाब में ढाका ने शर्त रखी कि पहले भारत में रह रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजा जाए।ट तारिक की अगस्त में भारत यात्रा टली थी प्रधानमंत्री तारिक रहमान इससे पहले अगस्त में भारत दौरे पर आने वाले थे। लेकिन ढाका की शर्त थी कि भारत शेख हसीना को वापस भेजे। इसके बाद ही पीएम के भारत दौरे की तैयारियां आगे बढ़ेंगी। बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक, भारत की ओर से इस मुद्दे पर कुछ अच्छे संकेत मिले थे। लेकिन ढाका चाहता था कि भारत का रुख और स्पष्ट हो। तारिक के अगस्त के तीसरे हफ्ते में भारत आने की खबरें आई थीं। लेकिन स्पष्ट जवाब न मिलने की वजह से यह यात्रा टल गई थी। बांग्लादेश हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। उन्हें ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश देने के लिए मौत की सजा दी है। बाकी मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। ICT ने उन्हें 5 मामलों में आरोपी बनाया था। ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड बताया था। इसी के चलते बांग्लादेश लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। इस पर भारत ने कहा था कि वह बांग्लादेश के अनुरोध की कानूनी प्रक्रिया के तहत समीक्षा कर रहा है। हसीना की दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद तनाव बढ़ा दरअसल 5 अगस्त को शेख हसीना ने दिल्ली में वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें उन्होंने अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी पर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए और बांग्लादेश की राजनीति पर भी अपनी बात रखी। इस पर बांग्लादेश सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए हसीना का सार्वजनिक रूप से राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकता है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस बारे में भारत को पहले आगाह किया गया था लेकिन फिर भी भारत ने उन्हें यह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति दी। गौरतलब है कि भारत ने शेख हसीना का प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकने से इनकार कर दिया था। भारत ने कहा था कि उनका कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था आयोजित कर रही है। इससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। भारत से तनाव के बीच पाकिस्तान-तुर्किये के करीब बांग्लादेश हसीना के मुद्दे पर भारत से तनाव के बीच बांग्लादेश अपनी विदेश नीति में दूसरे विकल्पों पर भी जोर दे रहा है। ढाका पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के साथ रणनीतिक और रक्षा संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इसे हसीना के बाद बांग्लादेश की बदलती विदेश नीति के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। बांग्लादेश ने मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट में शामिल होने में भी आधिकारिक रुचि दिखाई है। यह सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच बना नया आपसी रक्षा समझौता है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने संसद में कहा कि अगर बांग्लादेश को इस समझौते में शामिल होने का न्योता मिलता है तो वह इसे सकारात्मक तरीके से देखेगा। उन्होंने इसे मुस्लिम देशों की आत्मरक्षा से जुड़ा कदम बताया। पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी के बीच हुआ मक्का एग्रीमेंट के जरूरी पॉइंट्स देखें… पीएम रहमान की पार्टी उनकी भारत यात्रा के खिलाफ BRICS क्या है? BRICS 11 प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का एक समूह है। इनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं। इसका मकसद इन देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना है। इसमें शुरुआत में 4 देश थे, जिसे BRIC कहा जाता था। यह नाम 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने दिया था। भारत 2026 में BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है। 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने जा रही है। —————- यह खबर भी पढे़ं… जर्मनी में कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी पहली बार सत्ता के करीब जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने सक्सोनी-आनहाल्ट के राज्य चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है। एग्जिट पोल के मुताबिक, AfD को करीब 44% वोट मिले हैं और वह सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। पूरी खबर पढ़ें…

आज का एक्सप्लेनर:CIA डायरेक्टर से लेकर ट्रम्प के दामाद तक, मॉस्को क्यों जा रहे; क्या रूस-यूक्रेन जंग खत्म होने वाली है

25 अगस्त को अमेरिकी इंटेलिजेंस के मुखिया जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को की सीक्रेट विजिट की। 10 दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के 2 भरोसेमंद दूत- जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी मॉस्को पहुंचे और रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिले। आखिर अमेरिकी अधिकारी एक के बाद एक मॉस्को क्यों जा रहे, बंद कमरों में क्या बात हो रही और क्या रूस-यूक्रेन जंग खत्म होने वाली है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बीते दिनों ट्रम्प के किन अधिकारियों ने रूस का दौरा किया? जवाब: पिछले 2 हफ्तों में ट्रम्प के 3 बड़े अधिकारी मॉस्को पहुंचे… जेरेड और स्टीव के दौरे से पहले रूस ने कीव पर 72 घंटे के लिए हमले रोकने का ऐलान किया था। यूक्रेन ने भी मॉस्को पर ड्रोन-मिसाइल हमले न करने की बात कही है। सवाल-2: CIA डायरेक्टर रास्ते बदल-बदलकर क्यों पहुंचे मॉस्को, हुआ क्या? जवाब: CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ का मॉस्को दौर काफी सीक्रेट रहा। वे सामान्य प्लेन से सीधे मॉस्को नहीं पहुंचे, बल्कि उन्होंने अमेरिकी एयरफोर्स के C-17 ग्लोबमास्टर एयरक्राफ्ट से सफर किया। फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि रैटक्लिफ के C-17 ने अमेरिका के मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज से लातविया के रीगा के लिए उड़ान भरी। फिर वे 25 अगस्त को मॉस्को के व्नुकोवो एयरपोर्ट पहुंचे। सिर्फ 8 घंटे मॉस्को में रहे। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि रैटक्लिफ ने रूसी इंटेलिजेंस SVR के मुखिया सर्गेई नारिश्किन और घरेलू सुरक्षा एजेंसी FSB के चीफ अलेक्जेंडर बोर्तनिकोव से बात की। बाद में पुतिन को इसकी जानकारी दी गई। अमेरिकी न्यूज आउटलेट एक्सियोस, न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सूत्रों के हवाले से लिखा… सवाल-3: ट्रम्प के दामाद और दोस्त ने पुतिन से क्या बात की? जवाब: गाजा-इजराइल और रूस-यूक्रेन जंग को अमेरिका की ओर से ट्रम्प के 2 भरोसेमंद दूत संभाल रहे हैं। एक तो हैं- ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर और दूसरे उनके 30 साल पुराने दोस्त स्टीव विटकॉफ हैं। जेरेड ट्रम्प की बेटी इवांका के पति और बिजनेसमैन हैं। वहीं स्टीव उनके रियल एस्टेट बिजनेस में पार्टनर हैं। जेरेड और स्टीव की जोड़ी मौजूदा डिप्लोमेसी की दुनिया में काफी मशहूर है। 5 सितंबर को ये जोड़ी मॉस्को पहुंची। एयरपोर्ट पर रूसी राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रीव ने उनकी अगवानी की। इसके बाद दोनों क्रेमलिन गए, जहां वे पुतिन से मिले। 3 घंटे 10 मिनट मीटिंग चली और फिर डिनर भी हुआ। रूसी राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने इस मीटिंग को पॉजिटिव, भरोसेमंद और नतीजा देने वाली बताया। बैठक में आर्थिक मुद्दों और रूस-अमेरिका के जॉइंट प्रोजेक्ट्स पर भी बात हुई। जेरेड और स्टीव के दौरे से पहले ट्रम्प ने कहा था कि दोनों जंग खत्म करने का नया प्रस्ताव लेकर जा रहे हैं और यह अच्छा मौका है कि हम यह कर पाएं। लेकिन दिमित्री पेस्कोव ने मीटिंग में कोई नई बात या चर्चा होने से इनकार किया। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि आने वाले हफ्तों में बड़ी बैठकें हो सकती हैं, जिनके अच्छे नतीजे होंगे। सवाल-4: अगर ट्रम्प, पुतिन और जेलेंस्की साथ बैठे तो क्या बात हो सकती है? जवाब: ऐसी चर्चा पहली बार नहीं हो रही है कि ट्रम्प, पुतिन और जेलेंस्की बातचीत की मेज पर एक साथ आएं। पहले भी ट्रम्प और जेलेंस्की इसके लिए राजी थे, लेकिन पुतिन इसे टालते रहे। अब रैटक्लिफ ने फिर से ये पेशकश की है। ऐसे में अगर तीनों के बीच बैठक हुई तो 4 बड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है… सवाल-5: तो क्या जल्द ही रूस-यूक्रेन जंग रुकने वाली है? जवाब: खुद ईरान जंग में उलझा अमेरिका 8 महीने बाद फिर से रूस-यूक्रेन जंग रोकने के लिए लामबंदी कर रहा है। जेरेड और स्टीव पहली बार कीव भी जा रहे हैं, जो अब तक सिर्फ मॉस्को जाते रहे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जंग खत्म हो सकती है। पिछले महीने जेलेंस्की ने उम्मीद जताई थी कि सितंबर में बहुत कुछ बदल सकता है। अमेरिकी और रूसी अधिकारियों ने भी संभावना जताई है कि आने वाले दिनों पर सकारात्मक नतीजे मिल सकते हैं। 4 एक्सपर्ट्स से जानिए… ******* रिसर्च सहयोग- आदित्य रवि ———– ये भी खबर पढ़िए… क्या बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होकर सऊदी-पाक-तुर्किये के साथ लड़ेगा; भारत के तीन तरफ से घिरने का खतरा हाल ही में सऊदी, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच मक्का में एक डिफेंस एग्रीमेंट हुआ। इसमें NATO की तरह करार है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। अब इसमें कुछ और इस्लामिक देशों के शामिल होने की अटकलें लग रही हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम है भारत का पड़ोसी- बांग्लादेश। पूरी खबर पढ़िए…

8 मुस्लिम देशों ने इजराइली मंत्रियों की निंदा की:गाजा खाली कराने को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, कहा- इससे शांति प्रयासों को खतरा

8 मुस्लिम बहुल देशों ने रविवार को इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर के बयानों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना बनाने की बात कही थी। सऊदी अरब, जॉर्डन, UAE, तुर्किये, कतर, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि ऐसे बयान और भड़काऊ प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। ये फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए सीधा खतरा हैं। मंत्रियों ने चेतावनी दी कि अगर गाजा के लोगों को जबरन हटाया गया, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। इससे शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

8 मुस्लिम देशों ने इजराइली मंत्रियों की निंदा की:गाजा खाली कराने को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, कहा- इससे शांति को खतरा

8 मुस्लिम बहुल देशों ने रविवार को इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर के बयानों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना बनाने की बात कही थी। सऊदी अरब, जॉर्डन, UAE, तुर्किये, कतर, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि ऐसे बयान और भड़काऊ प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। ये फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए सीधा खतरा हैं। मंत्रियों ने चेतावनी दी कि अगर गाजा के लोगों को जबरन हटाया गया, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। इससे शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है। काट्ज ने कहा था- अमेरिका तैयार हुआ तो गाजा खाली करा देंगे इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने 2 सितंबर बुधवार को कहा था कि अगर अमेरिका मंजूरी देता है तो हम गाजा से फिलिस्तीनियों को बाहर निकाल देंगे। उन्होंने आगे बताया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिलहाल इस योजला को फ्रीज किया है। इजराइल अमेरिका के फैसले का इंतजार कर रहा है कि इन लोगों को कहां भेजा जाएगा। ट्रम्प ने फरवरी 2025 में पहली बार गाजा की करीब 23 लाख आबादी को दूसरी जगह बसाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि काट्ज ने यह भी माना था कि फिलहाल कोई भी देश इतनी बड़ी संख्या में गाजा के लोगों को अपने यहां लेने के लिए तैयार नहीं है। इजिप्ट के विरोध के बाद प्रस्ताव पर पीछे हटे ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में कहा था कि गाजा के करीब 20 लाख फिलिस्तीनियों को वहां से चले जाना चाहिए। ट्रम्प ने गाजा को फिर से बसाने और उसे भूमध्यसागर के किनारे एक लग्जरी रिसॉर्ट में बदलने की बात कही थी। ट्रम्प के इस प्रस्ताव का कई देशों ने विरोध किया था। इनमें मिस्र भी शामिल था। मिस्र, इजराइल के अलावा गाजा से सीमा साझा करने वाला इकलौता देश है। फिलिस्तीनियों ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। उनका कहना था कि अगर उन्हें उनकी जमीन से जबरन हटाया गया तो यह उन्हें 1948 की याद दिलाएगा, जब इजराइल के बनने के दौरान बड़ी संख्या में फिलिस्तीनियों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। फिलिस्तीनी इस घटना को ‘नकबा’ यानी तबाही कहते हैं। बाद में अक्टूबर में गाजा में युद्धविराम का ऐलान करते हुए ट्रम्प ने इलाके के लिए 20 बिंदुओं वाली योजना पेश की। इसमें फिलिस्तीनियों को गाजा से जबरन हटाने की बात नहीं थी। दावा- 80% लोग गाजा छोड़ने को तैयार इजराइल के कट्टरपंथी नेता इतामार बेन ग्वीर ने गुरुवार को गाजा की ज्यादातर फिलिस्तीनी आबादी को इलाके से बाहर निकालने की योजना पेश की थी। उन्होंने इसे स्वैच्छिक पलायन बताया था। काट्ज ने भी दावा किया कि गाजा के 80% लोग वहां से जाना चाहते हैं, लेकिन हमास उन्हें ऐसा करने से रोक रहा है। इस योजना में एक अलग सरकारी मंत्रालय बनाने की बात भी शामिल है। बेन ग्वीर ने कहा था कि अगर अक्टूबर के आखिर में होने वाले चुनाव के बाद उनकी गठबंधन सरकार सत्ता में रहती है तो वे इस योजना को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। नेतन्याहू बोले- इजराइली सेना पीछे नहीं हटेगी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि “हम इस इलाके को नियंत्रित कर रहे हैं। हम पीछे नहीं हट रहे हैं। हम यलो लाइन पर बने रहेंगे।” यलो लाइन गाजा के उन इलाकों को अलग करती है, जो हमास और इजराइली सेना के नियंत्रण में हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम गाजा पट्टी के 60% हिस्से को नियंत्रित करते हैं और हम रुकने वाले नहीं हैं, क्योंकि हम उन आतंकियों को खत्म कर रहे हैं जो हर दिन हमें धमकी देते हैं। हमास के हमले और गाजा में मौतों का आंकड़ा हमास के हमले के बाद इजराइली हमलों के कारण गाजा की बड़ी आबादी पहले ही अपने ही इलाके में विस्थापित हो चुकी है। इजराइली आंकड़ों के अनुसार, हमले में 1,221 लोग मारे गए थे। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसके बाद इजराइल के हमलों में 73,470 लोगों की मौत हुई है। उसके मुताबिक युद्धविराम के बाद भी 1,330 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। ————– यह खबर भी पढ़ें… नेतन्याहू बोले- ईरान ने बेटे की हत्या की कोशिश की:हमें मिली सिक्योरिटी ऐशोआराम के लिए नहीं; ट्रम्प के बेटे को भी मिल चुकी धमकी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उनके परिवार को निशाना बनाया और उनके दो बेटों में से एक की हत्या की कोशिश की थी। पूरी खबर पढ़ें…

रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए:दुनिया में गेहूं-मक्का महंगा होने का खतरा; रूस का अनाज निर्यात 71% घटा

रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। इनमें अनाज ले जाने वाले जहाज, तेल टैंकर और दूसरे मालवाहक पोत शामिल हैं।लगातार हमलों से ब्लैक सी का समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। जहाज मालिक इस रूट पर जाने से बच रहे हैं और माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। इसका असर दुनिया की खाद्य सप्लाई पर पड़ने का खतरा है। गेहूं और मक्का की कीमतों में तेजी आ सकती है। रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के करीब 30% गेहूं निर्यात का हिस्सा रखते हैं। दोनों देशों का ज्यादातर अनाज ब्लैक सी के रास्ते दूसरे देशों तक पहुंचता है। रूस का अनाज निर्यात 71% घटा अगस्त में रूस का कुल अनाज निर्यात पिछले साल के 59 लाख टन से घटकर 17 लाख टन रह गया। यानी करीब 71% की गिरावट आई। रूस का गेहूं निर्यात भी 50 लाख टन से घटकर 13 लाख टन रह गया। रूसी गेहूं खरीदने वाले देशों की संख्या 43 से घटकर 16 रह गई है। वहीं, रूस से अनाज भेजने वाले बंदरगाहों की संख्या 47 से घटकर 10 रह गई। देश के सबसे बड़े बंदरगाह नोवोरोसिस्क से शिपमेंट 24.9 लाख टन से घटकर 10.4 लाख टन रह गया। पिछले साल के मुकाबले गेहूं 30% महंगा हुआ बंदरगाहों और जहाजों पर हमले बढ़ने से अनाज का समुद्री कारोबार प्रभावित हुआ है। दोनों देशों के गोदामों में अनाज मौजूद है, लेकिन उसे खरीदार देशों तक पहुंचाने में मुश्किल आ रही है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिख रहा है। गेहूं की कीमतें पिछले एक साल में करीब 30% बढ़ चुकी हैं। यूक्रेन ने सड़क-रेल से निर्यात बढ़ाया, लेकिन सप्लाई कम ब्लैक सी का समुद्री रास्ता प्रभावित होने के बाद यूक्रेन सड़क और रेल नेटवर्क के जरिए अनाज दूसरे देशों तक भेज रहा है। हालांकि इन रास्तों की क्षमता ब्लैक सी के बंदरगाहों की तुलना में काफी कम है। डेन्यूब नदी के रास्ते भी सीमित मात्रा में अनाज भेजा जा रहा है। लेकिन जलस्तर और परिवहन क्षमता की वजह से यह विकल्प समुद्री रास्ते की पूरी भरपाई नहीं कर पा रहा है। मक्का की ग्लोबल सप्लाई पर भी असर का खतरा ब्लैक सी में बढ़ते तनाव का असर सिर्फ गेहूं पर नहीं, मक्का की सप्लाई पर भी पड़ सकता है। 2025-26 में यूक्रेन ने 2.3 करोड़ टन मक्का निर्यात किया था। यह दुनिया के कुल मक्का निर्यात का करीब 12% था। अगर मौजूदा हालात लंबे समय तक जारी रहे तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में मक्का की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। ब्लैक सी क्यों है इतना अहम? ब्लैक सी दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। रूस और यूक्रेन से गेहूं, मक्का और सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के दूसरे देशों तक पहुंचता है। दोनों देश मिलकर वैश्विक गेहूं निर्यात का करीब 30% हिस्सा रखते हैं। इसलिए ब्लैक सी में सैन्य तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजार पर पड़ सकता है। 2022 में भी बढ़ी थीं खाद्य कीमतें 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ब्लैक सी से अनाज निर्यात बाधित हुआ था। उस समय दुनिया भर में खाद्य कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई थी। बाद में संयुक्त राष्ट्र और तुर्किये की मध्यस्थता से ब्लैक सी ग्रेन डील लागू हुई। इससे लाखों टन अनाज अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सका। अब ब्लैक सी में फिर जहाजों और बंदरगाहों पर हमले बढ़ने से वैश्विक खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। अगर समुद्री रास्ता लंबे समय तक प्रभावित रहा तो गेहूं, मक्का और खाद्य तेल की कीमतों में नई तेजी आ सकती है। इसका असर उन देशों पर ज्यादा पड़ सकता है जो रूस और यूक्रेन से होने वाले अनाज निर्यात पर निर्भर हैं। ——————– ये खबर भी पढ़ें… रूबियो बोले- भारत-ईरान के बीच ट्रेड डील पर बातचीत नहीं:तेहरान की मदद करने वालों पर बैन लगाएंगे; मोदी-पजशकियान मुलाकात पर सवाल पूछा था अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई ट्रेड डील हुई है। उनसे पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की मुलाकात को लेकर सवाल किया गया था। पूरी खबर पढ़ें…

आज का एक्सप्लेनर:आसिम मुनीर ने गुपचुप ‘तख्तापलट’ कर दिया; कैसे पाकिस्तान में सबसे ताकतवर बने, आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं

पाकिस्तान में 5वीं बार सेना के जनरल ने ‘तख्तापलट’ कर दिया है। फर्क बस इतना है कि इस बार ये टैकों के जरिए नहीं, संसद के रास्ते हुआ है। नए कानून से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स बन गए हैं। इससे जुड़े 5 जरूरी सवालों के जवाब, आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: आसिम मुनीर को कौन-सी नई ताकतें मिल गई हैं?
जवाब: नवंबर 2022 में आसिम मुनीर पाकिस्तान के 17वें आर्मी चीफ बने थे। उनका कार्यकाल खत्म होने से 6 महीने पहले, यानी मई 2025 में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च कर दिया। पाकिस्तान ने जीत का झूठा दावा किया और आसिम मुनीर को ‘हीरो’ बताया। इसके बाद आसिम मुनीर की ताकत बढ़ती चली गई… 20 मई 2025 को मुनीर फील्ड मार्शल बने। ये पाकिस्तानी सेना की सबसे ऊंची रैंक होती है। आम बोलचाल में इसे ‘फाइव स्टार जनरल’ कहते हैं। इससे पहले पाकिस्तान में सिर्फ जनरल अयूब खान इस रैंक तक पहुंचे थे। नवंबर 2025 को पाकिस्तानी संविधान के आर्टिकल 243 में 27वां संशोधन करके सेना में नया चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, CDF का पद बनाया गया। मुनीर देश के पहले CDF बने। वो 2030 तक इस पद पर रहेंगे। संशोधन के जरिए इसे बढ़ाया भी जा सकता है। 20 अगस्त 2026 को पाकिस्तानी संसद में 2 नए कानून पारित हुए, जिससे CDF को 5 बड़ी शक्तियां मिल गई हैं। डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026 के तहत 3 ताकतें… नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2026 के तहत 2 ताकतें… यानी आसिम मुनीर तीनों सेनाओं के प्रमुख हैं, न्यूक्लियर हथियारों से जुड़े फैसले लेने की भी ताकत है। सैन्य अफसरों से जुड़ा हर फैसला भी निर्णायक रूप से वही लेंगे और सबसे बड़ी बात- मुनीर पर कोई मुकदमा नहीं चल सकता। सवाल-2: मदरसे में पढ़े मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स कैसे बन गए?
जवाब: मुनीर के पिता सैयद सरवर मुनीर 1947 में पंजाब के जालंधर से पलायन कर पाकिस्तान पहुंचे थे। वो रावलपिंडी के मशहूर एफजी टेक्निकल स्कूल के हेडमास्टर बने। साथ ही मस्जिद में इमामत करते और इस्लामिक उपदेश देते। गहरे धार्मिक झुकाव वाले इस घर में 1968 में आसिम मुनीर का जन्म हुआ। पाकिस्तानी जर्नलिस्ट एजाज सैयद के मुताबिक, घर वाले चाहते थे कि आसिम कुरआन हिफ्ज करे। मुनीर सातवीं तक मदरसे में पढ़े और कुरआन रटी। फिर कुछ दिन एफजी टेक्निकल स्कूल पढ़ने गए। इसके बाद रावलपिंडी के सर सैयद कॉलेज गए, जहां से पूर्व आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने पढ़ाई की थी। क्रिकेट के शौकीन मुनीर कॉलेज के दिनों में तेज गेंदबाज थे। स्कूल के बाद मुनीर ने जापान के फूजी स्कूल, क्वेटा के कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और मलेशिया के आर्म्ड फोर्सेज कॉलेज से पढ़ाई की। उसके बाद इस्लामाबाद की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी और स्ट्रेटेजिक सिक्योरिटी मैनेजमेंट में मास्टर्स किया। 1986 में मिलिट्री करियर शुरू हुआ, सऊदी में दोबारा कुरआन रटी 25 अप्रैल 1986 को मुनीर को पाकिस्तान आर्मी में के फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में पहली तैनाती मिली। जब मुनीर लेफ्टिनेंट कर्नल बने, तो उन्हें सऊदी अरब में पाकिस्तानी दूतावास में तैनाती मिली। वहां मुनीर को महसूस हुआ कि वे कुरआन भूल रहे हैं। ऐसे में लगातार 3 साल वह छुट्टियों में घर नहीं गए और इस दौरान दोबारा कुरआन रटी। इसके बाद आसिम सियाचिन ग्लेशियर में भी रहे। आसिम का काफी वक्त पाकिस्तान के कब्जाए कश्मीर यानी PoK में भी गुजरा। फिर 2014 में मेजर जनरल, 2016 में पाकिस्तान के मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल और सितंबर 2018 में लेफ्टिनेंट जनरल की पोस्ट तक पहुंचे। सिर्फ 8 महीने ISI चीफ रहे मुनीर, पीएम इमरान से झगड़ा भारी पड़ा 25 अक्टूबर 2018 को मुनीर ISI के डीजी बने। 8 ही महीने बाद जून 2019 में उन्हें हटाकर लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को नया ISI डीजी बनाया गया। इसकी वजह थी- मुनीर का इमरान खान से झगड़ा। मुनीर ने इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी के करप्शन के एक मामले को उजागर कर दिया था। इसलिए इमरान खान के कहने पर तब के आर्मी चीफ बाजवा ने मुनीर को ISI से बाहर का रास्ता दिखाया था। इमरान पीएम पद से हटाए गए, तो मुनीर नए आर्मी चीफ बने मुनीर नवंबर 2022 तक करीब एक साल क्वार्टरमास्टर जनरल रहे। ये भी ISI चीफ के मुकाबले काफी छोटा पद होता है। हालांकि 2022 की शुरुआत में इस्लामाबाद का सियासी माहौल बदलने लगा। 10 अप्रैल को इमरान अविश्वास प्रस्ताव लाकर पीएम पद से हटाए गए। अगले ही दिन नवाज शरीफ के गुट वाली मुस्लिम लीग के नेता और नवाज के छोटे भाई शहबाज शरीफ पीएम बन गए। मुनीर शहबाज के करीबी थे। माना जाता है कि इमरान को सत्ता से हटाने के हथकंडों में मुनीर ने अंदरखाने साथ दिया। मुनीर को भी इसका ‘रिटर्न गिफ्ट’ मिला। 29 नवंबर को बाजवा को हटाकर मुनीर को नया आर्मी चीफ बना दिया गया। मुनीर पहले आर्मी चीफ बने, जो पाकिस्तान की दोनों खुफिया एजेंसियों- ISI और मिलिट्री इंटेलिजेंस के चीफ रहे थे। अब मुनीर पहले ऐसे आर्मी चीफ हैं, जिनके पास एक साथ 3 पद हैं- आर्मी चीफ के अलावा फील्ड मार्शल का मिलिट्री ओहदा और नया नवेला सबसे ताकतवर पद- CDF। सवाल-3: आसिम मुनीर आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं?
जवाब: आसिम मुनीर खुद को ऐसे शासक के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं, जिसके लिए कोई खतरा या चुनौती न पैदा हो सके। मुनीर ने अपने लिए ये शील्ड 3 तरह से बनाई है…. 1. मुनीर के आगे बेबस मौजूदा सरकार 2. चुनाव के जरिए आसिम को हटाना मुश्किल 3. सरकार के जरिए कोर्ट पर भी सेना कंट्रोल सवाल-4: पाकिस्तान के पुराने सैन्य तानाशाहों के साथ क्या हुआ था?
जवाब: पिछले सैन्य तानाशाहों ने इस्तीफा दिया, गिरफ्तार हुए या सबकुछ छोड़कर भागना पड़ा…. 1. जनरल अयूब खान: 27 अक्टूबर 1958 को राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा का तख्तापलट किया। मिर्जा को इंग्लैंड भागना पड़ा और अयूब खुद राष्ट्रपति बने। 1965 की जंग में भारत से हार के बाद अयूब खान के बुरे दिन शुरू हो गए। मार्च 1969 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 2. जनरल याह्या खान: जनरल याह्या खान मार्शल लॉ लगाकर राष्ट्रपति बने। 1971 में भारत-पाकिस्तान जंग में पाकिस्तान की हार हुई और बांग्लादेश का जन्म हुआ। भारी बेइज्जती के बाद दिसंबर 1971 में याह्या को इस्तीफा देना पड़ा। नई सरकार ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया। 1980 में उनकी गुमनाम मौत हुई। 3. जनरल जिया-उल-हक: सेना प्रमुख जिया ने साल 1977 में पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो का तख्तापलट किया। बाद में भुट्टो पर एक मर्डर केस चलाकर 1979 में उन्हें फांसी दे दी।
जिया ने पाकिस्तान में सबसे लंबे समय तक राज किया। 17 अगस्त 1988 को एक प्लेन क्रैश में उनकी मौत हो गई। 4. जनरल परवेज मुशर्रफ: 12 अक्टूबर 1999 को मुशर्रफ, पीएम नवाज शरीफ का तख्तापलट कर राष्ट्रपति बन बैठे। नवाज को जेल में डाल दिया। बाद में वे सऊदी अरब भाग गए। मुशर्रफ के खिलाफ विरोध हुए, उन्होंने इमरजेंसी भी लगाई, आखिरकार अगस्त 2008 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। वे दुबई और फिर लंदन भाग गए। 2019 में उन्हें देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा मिली। फरवरी 2023 में दुबई में उनकी मौत हो गई। सवाल-5: क्या मुनीर की सत्ता कायम होने से भारत को कोई खतरा है?
जवाब: मुनीर का रुख पूरी तरह एंटी इंडिया है… 7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये में एक डिफेंस डील हुई। इसके तहत किसी एक देश पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान को इस पैक्ट का पहला जनरल सेक्रेटरी जनरल बनाया गया है। ताकतें बढ़ने से आसिम मुनीर को अपने एंटी इंडिया एजेंडे पर काम करना आसान हो जाएगा। ये भारत के लिए चिंता का सबब हो सकता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:पाकिस्तान पर हमला हुआ तो लड़ने आएंगे सऊदी-तुर्किये, आखिर क्या है मक्का एग्रीमेंट; भारत कैसे काउंटर करेगा पाकिस्तान पर हमला हुआ, तो सऊदी और तुर्किये भी साथ लड़ने आएंगे। 7 अगस्त 2026 को मक्का में तीनों देशों में बीच एक खास रक्षा समझौता हुआ है। अब किसी एक पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

उज्बेकिस्तान में मोदी ने छात्रों से बात की:स्टूडेंट्स ने पीएम की कविताओं को हिंदी में सुनाया; मोदी बोले- भावनाएं बिल्कुल मेरे दिल जैसी थीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे में ताशकंद के महात्मा गांधी सेंटर का दौरा किया। यहां उज्बेक छात्रों ने हिंदी में मोदी की लिखी कविताएं सुनाईं। अपनी कविताएं छात्रों से सुनकर मोदी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि हिंदी छात्रों की मातृभाषा नहीं है, फिर भी उन्होंने कविताओं की भावनाओं को बिल्कुल वैसे ही समझकर पेश किया, जैसी भावनाएं उनके दिल में थीं। मोदी ने उज्बेकिस्तान में भारत, महात्मा गांधी और तमिल संस्कृति में बढ़ती रुचि का भी जिक्र किया। उन्होंने तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद करने का सुझाव दिया। मोदी की यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्ते कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक पहुंचे। दोनों देशों के बीच 11 समझौतों, एमओयू और सहमतियों का आदान-प्रदान भी हुआ। उज्बेकिस्तान में भारतीय संस्कृति का प्रभाव कार्यक्रम में भारत और भारतीय संस्कृति का अध्ययन करने वाले एक उज्बेक इंडोलॉजिस्ट ने कहा कि शायद दुनिया में बहुत कम ऐसे देश होंगे, जहां लोगों में भारत को लेकर इतना प्यार है। उन्होंने बताया कि यहां लगभग हर नागरिक ‘नमस्ते’ शब्द से परिचित है। भारतीय कला, नृत्य, संगीत, दर्शन और योग में भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में हो अनुवाद PM मोदी ने तमिल साहित्य और ‘तिरुक्कुरल’ का भी जिक्र किया। उन्होंने संस्थान की 80वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद करने की दिशा में काम किया जा सकता है। मोदी ने कहा भारतीय दर्शन और विचारों को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की प्राचीन भाषाओं में मौजूद दार्शनिक विचार यह बताते हैं कि सभ्यता की शुरुआत से ही मानव सोच कितनी गहरी रही है। क्या है तिरुक्कुरल? तिरुक्कुरल, जिसे ‘कुरल’ भी कहा जाता है, तमिल साहित्य की एक प्रसिद्ध रचना है। इसमें नैतिकता, अच्छे आचरण और जीवन से जुड़ी व्यावहारिक सीख दी गई है। इसे कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर ने लिखा था। माना जाता है कि इसकी रचना दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से पांचवीं शताब्दी ईस्वी के बीच हुई। यह रचना धर्म या किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है और इसे पूरी मानवता के लिए उपयोगी विचारों के लिए जाना जाता है। भारत-उज्बेकिस्तान रिश्तों को मिली नई मजबूती PM मोदी की 29 से 30 अगस्त तक की दो दिवसीय उज्बेकिस्तान यात्रा से दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिली है। भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने रिश्तों को ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ से बढ़ाकर ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ कर दिया है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 11 समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत और व्यापक बनाना है। PM मोदी की यह यात्रा उज्बेक राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर हुई। ————– यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब की पहली रक्षा बैठक आज:इस्तांबुल में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री मिलेंगे; सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे
पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पहली बैठक सोमवार को इस्तांबुल में होगी। बैठक में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री के साथ सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे। पूरी खबर पढ़ें…

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब की पहली रक्षा बैठक आज:इस्तांबुल में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री मिलेंगे; सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पहली बैठक सोमवार को इस्तांबुल में होगी। बैठक में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री के साथ सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे। पाकिस्तान की ओर से उपप्रधानमंत्री मोहम्मद इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ और सेना प्रमुख एवं चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर हिस्सा लेंगे। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस समझौते को तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। बैठक का एजेंडा फिलहाल साफ नहीं मक्का रक्षा समझौते के तहत बनी रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति की पहली बैठक का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान से जुड़े हालात, रक्षा सहयोग और आपसी सुरक्षा रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए आपसी तालमेल मजबूत करने पर भी विचार किया जा सकता है। बांग्लादेश ने भी दिखाई रुचि मक्का समझौते के तहत भविष्य में अन्य देशों के जुड़ने की संभावना है। बांग्लादेश पहले ही इस समझौते में रुचि दिखा चुका है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के मुताबिक, इस्तांबुल बैठक में उसकी भागीदारी तुर्किये और सऊदी अरब के साथ मजबूत संबंधों के साथ क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। चार देशों की अलग बैठक भी होगी मक्का रक्षा समझौते की बैठक के अलावा तुर्किये, पाकिस्तान, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों की एक अलग बैठक भी प्रस्तावित है। यह चार देशों का समूह क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से मार्च में बनाया गया था। इस समूह की पिछली बैठक 5 अगस्त को जॉर्डन की राजधानी अम्मान में हुई थी। उस दौरान नेताओं ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद और आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया था। चुनौतियों का सामना कर रहे हैं तीनों देश मक्का रक्षा समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब तीनों देश अपनी-अपनी सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ रहा है। पाकिस्तान का अफगानिस्तान के साथ सीमा विवाद चल रहा है, जबकि सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के हमलों का खतरा बना रहता है। वहीं, तुर्किये लंबे समय से कुर्द उग्रवादी समूहों के खिलाफ अभियान चला रहा है और इजराइल के साथ उसके संबंध भी तनावपूर्ण हैं। ऐसे हालात में तीनों देशों ने सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए यह समझौता किया है। खबर अपडेट हो रही है…

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब की पहली रक्षा बैठक आज:इस्तांबुल में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री मिलेंगे; सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पहली बैठक सोमवार को इस्तांबुल में होगी। बैठक में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री के साथ सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे। पाकिस्तान की ओर से उपप्रधानमंत्री मोहम्मद इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ और सेना प्रमुख एवं चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर हिस्सा लेंगे। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस समझौते को तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। बैठक का एजेंडा फिलहाल साफ नहीं मक्का रक्षा समझौते के तहत बनी रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति की पहली बैठक का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान से जुड़े हालात, रक्षा सहयोग और आपसी सुरक्षा रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए आपसी तालमेल मजबूत करने पर भी विचार किया जा सकता है। बांग्लादेश ने भी दिखाई रुचि मक्का समझौते के तहत भविष्य में अन्य देशों के जुड़ने की संभावना है। बांग्लादेश पहले ही इस समझौते में रुचि दिखा चुका है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के मुताबिक, इस्तांबुल बैठक में उसकी भागीदारी तुर्किये और सऊदी अरब के साथ मजबूत संबंधों के साथ क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये की सैन्य ताकत एक साथ इस समझौते के तहत तीनों देशों की अलग-अलग ताकत एक साथ आएगी। चार देशों की अलग बैठक भी होगी मक्का रक्षा समझौते की बैठक के अलावा तुर्किये, पाकिस्तान, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों की एक अलग बैठक भी प्रस्तावित है। यह चार देशों का समूह क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से मार्च में बनाया गया था। इस समूह की पिछली बैठक 5 अगस्त को जॉर्डन की राजधानी अम्मान में हुई थी। उस दौरान नेताओं ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद और आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया था। चुनौतियों का सामना कर रहे हैं तीनों देश मक्का रक्षा समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब तीनों देश अपनी-अपनी सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ रहा है। पाकिस्तान का अफगानिस्तान के साथ सीमा विवाद चल रहा है, जबकि सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के हमलों का खतरा बना रहता है। वहीं, तुर्किये लंबे समय से कुर्द उग्रवादी समूहों के खिलाफ अभियान चला रहा है और इजराइल के साथ उसके संबंध भी तनावपूर्ण हैं। ऐसे हालात में तीनों देशों ने सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए यह समझौता किया है। ये खबर भी पढ़ें… तुर्किये जा रही फेरी बोट समुद्र में पलटी:7 की मौत, 24 लापता; 270 यात्री सवार थे, बोट के ऊपर चढ़कर जान बचाई मेडिटेरियन सी में तुर्किये जा रही फेरी बोट रविवार को समुद्र में पलट गई। यह फेरी यूरोपीय देश साइप्रस के उत्तरी तट से 270 से ज्यादा यात्रियों के साथ रवाना हुई थी। पूरी खबर पढ़ें