सोमालिया तट पर हथियारों से लदा जहाज हाईजैक, क्रू में भारतीय नागरिक शामिल, अबतक क्या-क्या पता चला?

सोमालिया के पुंटलैंड तट के पास समुद्री डाकुओं ने तुर्की के हथियारों से लदे एक कार्गो शिप का अपहरण कर लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हाईजैक हुए जहाज पर 10 क्रू मेंबर्स मौजूद हैं। इनमें 6 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। एक सोमाली अधिकारी के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक समुद्री डाकुओं ने जहाज को अपने कब्जे में लेकर तटीय इलाके की ओर मोड़ दिया है।

किस जहाज का हुआ अपहरण और क्या था उस पर लदा?

हाईजैक हुए जहाज का नाम एम/वी लुटुफ है। इस पर कैमरून का झंडा लगा हुआ है। इस जहाज का स्वामित्व पोलर मूवमेंट शिपिंग के पास है। सोमाली अधिकारी के मुताबिक जहाज को पुंटलैंड के ईल जिले में मरराया से करीब 3.5 समुद्री मील दूर से अगवा किया गया। यह जहाज मोगादिशु में स्थित एक सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए तुर्की के हथियार, संचार उपकरण और सैटेलाइट उपकरण ले जा रहा था।

क्रू में 6 भारतीय शामिल

रिपोर्ट के मुताबिक हाइजैक जहाज पर कुल 10 लोग सवार हैं। 6 भारतीय नागरिक, 1 तुर्की का नागरिक, 1 जॉर्जिया का नागरिक, 2 सर्बियाई सुरक्षा गार्ड शामिल हैं। इस घटना के बाद तुर्की के अधिकारियों की ओर से तुरंत कोई बयान नहीं आया है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) की तरफ से भी फिलहाल इस घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

8 समुद्री डाकू शामिल, हमले के बाद एयरस्ट्राइक में 4 की मौत

सोमाली अधिकारी के अनुसार जहाज पर कब्जा करने में 8 समुद्री डाकू शामिल थे। ऐसा माना जा रहा है कि यह समूह 26 अप्रैल को एम/वी स्वॉर्ड के अपहरण में शामिल गुट से जुड़ा हुआ है। डाकू इस जहाज को पुंटलैंड के डांगोरोयो जिले में गरमाल के पास तट की ओर ले गए। अपहरण के बाद तुर्की के स्वामित्व वाले दो जहाज हाईजैक किए गए पोत के करीब पहुंचे जबकि तुर्की के हेलीकॉप्टरों और ड्रोन ने क्षेत्र की निगरानी की।

मंगलवार को एक छोटी नाव में सवार दो लोग जहाज के पास पहुंचे और उन्होंने जहाज पर खाट (सोमालिया में चबाया जाने वाला एक प्रकार का नशीला पदार्थ) पहुंचाया। नाव के वापस किनारे लौटने के बाद एक एयरस्ट्राइक हुई, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई और 2 अन्य घायल हो गए।

अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह हवाई हमला किसने किया था और मारे गए लोग सीधे तौर पर अपहरण की साजिश में शामिल थे या नहीं। जहाज ‘एम/वी लुटुफ’, उसके क्रू मेंबर्स और उस पर लदे हथियारों की मौजूदा स्थिति अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सकी है।

अदन की खाड़ी में एक और टैंकर पर हमला, समुद्री डकैती की बढ़ी चिंताएं

सोमालिया तट पर समुद्री डकैती के दोबारा उभरने से अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में चिंताएं बढ़ गई हैं। इस घटना के तुरंत बाद गुरुवार को अदन की खाड़ी में एक और घटना सामने आई, जहां अमेरिकी प्रतिबंधों वाले एक टैंकर ‘सीमुल’ पर 6 हथियारबंद लोग सवार हो गए और उसे जबरन सोमालिया की ओर मोड़ने पर मजबूर कर दिया। ईयू के मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर इंडियन ओशन ने पुष्टि की है कि 6 सशस्त्र लोगों ने टैंकर पर कब्जा कर लिया है। सीमुल को पिछले साल अमेरिका ने ईरान के ‘शैडो Fleet’ का हिस्सा बताते हुए प्रतिबंधित किया था।

सोमालिया तट पर 2011 में अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गश्त के बाद समुद्री डकैती में भारी कमी आई थी। लेकिन इस साल अप्रैल के बाद से एक बार फिर हमलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है और कई जहाजों को बंधक बनाए जाने की खबरें आ रही हैं।

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पहला सेट हारने के बाद लक्ष्य सेन ने की जोरदार वापसी, विश्व चैंपियनशिप में जीत से आगाज

स्टार भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने मंगलवार को पहला गेम गंवाने के बाद जोरदार वापसी करते हुए ऑस्ट्रिया के कॉलिन्स वैलेंटाइन फिलिमोन को तीन गेम तक चले कड़े मुकाबले में हराकर बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के पुरुष एकल के दूसरे दौर में प्रवेश किया।

लक्ष्य ने 45 मिनट तक चले मुकाबले में फिलिमोन को 16-21, 21-8, 21-4 से हराया।दूसरे दौर में लक्ष्य का सामना अमेरिका के गैरेट टैन से होगा जिन्होंने स्विट्जरलैंड के टोबियास कुएंजी को 21-4, 21-15 से हराया।लक्ष्य ने धीमी शुरुआत की और उनके कम रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वी ने पहले गेम में उन्हें लगातार दबाव में रखा। स्टार भारतीय खिलाड़ी लय हासिल करने के लिए जूझता दिखा। दोनों खिलाड़ी एक समय लगभग बराबरी पर चल रहे थे लेकिन लक्ष्य के लचर खेल और सहज गलतियों का फायदा उठाते हुए फिलिमोन ने लगातार छह अंक जुटाकर 17-12 की बढ़त बना ली।

 लक्ष्य ने कुछ अंक जुटाकर वापसी की कोशिश की लेकिन ऑस्ट्रियाई खिलाड़ी ने धैर्य बरकरार रखते पहला गेम अपने नाम कर लिया।दूसरे गेम में दोनों खिलाड़ी 7-7 की बराबरी पर थे जिसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने आक्रामक खेल के दम पर 11-8 की बढ़त हासिल कर ली।

इसके बाद लक्ष्य ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए लगातार 10 अंक जुटाए और प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं देते हुए दूसरा गेम जीतकर स्कोर 1-1 कर दिया। इस दौरान फिलिमोन की लय भी टूटती नजर आई।इसके बाद लक्ष्य को रोकना मुश्किल हो गया। उन्होंने अपना आक्रामक खेल जारी रखा और फिलिमोन से लगातार सहज गलतियां कराईं। भारतीय खिलाड़ी ने 15-1 की बढ़त के साथ मैच पर पूरी तरह पकड़ बना ली और आसानी से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

इससे पहले त्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की गैरवरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ने महिला युगल में लॉरेन लैम और एलिसन क्विन ली की अमेरिका की 16वीं वरीय जोड़ी को सीधे गेम में हराकर प्री क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।त्रीसा और गायत्री ने दूसरे दौर में महज 38 मिनट में विरोधी जोड़ी को 21-15, 21-12 से हराकर अगले दौर में जगह बनाई।

भारतीय जोड़ी ने शुरुआत से ही आक्रामक रवैया अपनाते हुए आत्मविश्वास के साथ खेल शुरू किया। त्रीसा ने अपने दमदार स्मैश से अंक जुटाए जबकि गायत्री ने शटल को खेल में बनाए रखने के साथ सटीक ड्रॉप शॉट लगाए और दोनों ने पहला गेम आसानी से अपने नाम किया।दूसरे गेम में भी भारतीय जोड़ी ने इसी अंदाज में शुरुआत की और ब्रेक तक 11-4 की बढ़त बना ली।

भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल जारी रखा और उनकी प्रतिद्वंद्वियों की कुछ सहज गलतियों का भी उन्हें फायदा मिला।कविप्रिया सेल्वम और सिमरन सिंघी को दूसरे दौर में हार का सामना करना पड़ा। उन्हें गैब्रिएला स्टोएवा और स्टेफनी स्टोएवा की बुल्गारिया की नौवीं वरीय जोड़ी ने 32 मिनट में सीधे गेम में 21-7, 21-14 से हराया।मिश्रित युगल में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। रोहन कपूर और रुत्विका शिवानी गड्डे तथा असित सूर्या और अमृता प्रमुथेश की जोड़ियां पहले दौर में ही बाहर हो गईं।

 रोहन और रुत्विका की जोड़ी को जोनाथन बिंग सान लाई और क्रिस्टल लाई की कनाडा की जोड़ी के खिलाफ कड़े मुकाबले में 22-20, 19-21, 17-21 से हार मिली।असित और अमृता को एमरे सोनमेज और यासेमेन बेक्टास की तुर्किये की जोड़ी के खिलाफ कड़े मुकाबले में 21-16, 29-30, 22-24 से हार का सामना करना पड़ा।

भारत की एक अन्य मिश्रित युगल जोड़ी ध्रुव कपिला और तनिषा क्रास्टो अभी प्रतियोगिता में बनी हुई है। इस 15वीं वरीय जोड़ी को पहले दौर में बाई मिली थी और वह दूसरे दौर में मकाऊ के इओक चोंग लियोंग और वेंग ची एनजी से भिड़ेगी।उभरती हुई भारतीय महिला एकल खिलाड़ी उन्नति हुड्डा ने भी दूसरे दौर में जगह बना ली। उन्होंने 40 मिनट चले मुकाबले में म्यांमार की थेट हतार थुजार को 22-20, 21-16 से हराया।उन्नति का अगले दौर में सामना कनाडा की 13वीं वरीय मिशेल ली से होगा।

ट्रम्प बोले- लेविट को मुझसे ज्यादा अपने बच्चे पसंद:व्हाइट हाउस में उनकी जगह लेना मुश्किल; लेविट का प्रेस सेक्रेटरी के पद से इस्तीफा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के पद छोड़ने पर मजाक किया। उन्होंने कहा, “मुझे पता चला है कि कैरोलिन लेविट मुझे पसंद करने से ज्यादा अपने बच्चों को पसंद करती हैं। मैं इसे लेकर बहुत चिंतित हूं।” ट्रम्प ने साथ ही कहा कि लेविट की जगह लेना आसान नहीं होगा। लेविट अगस्त के आखिर में व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी की नौकरी छोड़ेंगी। उन्होंने अपने दो छोटे बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए यह फैसला लिया है। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज रिपोर्टर से पूछा- आप उनकी जगह लेंगी? लेविट के जाने के बाद अगली प्रेस सेक्रेटरी कौन होगी, इसका अभी ऐलान नहीं हुआ है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्टर एलेक्सिस मैकएडम्स ने ट्रम्प से इसी बारे में सवाल किया। ट्रम्प ने मैकएडम्स की ओर देखकर कहा, “आप?” फिर उन्होंने पूछा, “आप उनकी जगह क्यों नहीं लेतीं?” ट्रम्प ने मैकएडम्स की तारीफ करते हुए कहा कि वह यह काम अच्छी तरह कर सकती हैं। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि वह वास्तव में उन्हें अगली प्रेस सेक्रेटरी बनाने पर विचार कर रहे हैं या यह सिर्फ मजाक था। लेविट ने क्यों छोड़ी नौकरी? लेविट ने इसी हफ्ते पद छोड़ने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार और दो छोटे बच्चों को ज्यादा समय देना चाहती हैं। उन्होंने 1 मई 2026 को अपने दूसरे बच्चे को जन्म दिया था। इसके बाद वह मातृत्व अवकाश पर गई थीं और 16 जुलाई को प्रेस ब्रीफिंग में वापस लौटी थीं। ट्रम्प ने उनके फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद भी लेविट उनकी टीम से जुड़ी रहेंगी और बाहरी सलाहकार के तौर पर काम करेंगी। लेविट की जगह लेना क्यों मुश्किल होगा? लेविट करीब 20 महीने तक ट्रम्प प्रशासन का मीडिया के सामने प्रमुख चेहरा रहीं। प्रेस ब्रीफिंग में वह ट्रम्प की नीतियों और फैसलों का बचाव करती थीं और मुश्किल सवालों पर प्रशासन का पक्ष रखती थीं। उनके जाने के बाद व्हाइट हाउस को ऐसा चेहरा तलाशना होगा, जो रोजाना पत्रकारों के सवालों का जवाब दे सके और ट्रम्प प्रशासन की नीतियों को मजबूती से सामने रख सके। फिलहाल उनके उत्तराधिकारी के नाम का ऐलान नहीं हुआ है। इस्तीफे को लेकर अटकलें भी सामने आईं लेविट के पद छोड़ने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उनके फैसले को जुलाई में तुर्किये की राजधानी अंकारा में ट्रम्प से जुड़े एक सुरक्षा मामले से जोड़ने की कोशिश की। दक्षिण अफ्रीका में ईरानी दूतावास ने दावा किया था कि सुरक्षा खतरे के कारण ट्रम्प को एक विमान से दूसरे विमान में भेजा गया और लेविट पीछे रह गईं। व्हाइट हाउस ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि लेविट उस विमान में थीं ही नहीं। ट्रम्प ने भी कहा था कि सुरक्षा अधिकारियों ने ईरान से जुड़े संभावित खतरे के कारण विमान बदलने की सलाह दी थी। लेविट ने कहा है कि उनके पद छोड़ने की वजह उनका परिवार है। व्हाइट हाउस ने अभी तक उनकी जगह लेने वाले नए प्रेस सेक्रेटरी का नाम घोषित नहीं किया है।

ट्रम्प बोले- लेविट को मुझसे ज्यादा अपने बच्चे पसंद:व्हाइट हाउस में उनकी जगह लेना मुश्किल; लेविट का प्रेस सेक्रेटरी के पद से इस्तीफा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के पद छोड़ने पर मजाक किया। उन्होंने कहा, “मुझे पता चला है कि कैरोलिन लेविट मुझे पसंद करने से ज्यादा अपने बच्चों को पसंद करती हैं। मैं इसे लेकर बहुत चिंतित हूं।” ट्रम्प ने साथ ही कहा कि लेविट की जगह लेना आसान नहीं होगा। लेविट अगस्त के आखिर में व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी की नौकरी छोड़ेंगी। उन्होंने अपने दो छोटे बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए यह फैसला लिया है। लेविट ने क्यों छोड़ी नौकरी? लेविट ने इसी हफ्ते पद छोड़ने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार और दो छोटे बच्चों को ज्यादा समय देना चाहती हैं। उन्होंने 1 मई 2026 को अपने दूसरे बच्चे को जन्म दिया था। इसके बाद वह मातृत्व अवकाश पर गई थीं और 16 जुलाई को प्रेस ब्रीफिंग में वापस लौटी थीं। ट्रम्प ने उनके फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद भी लेविट उनकी टीम से जुड़ी रहेंगी और बाहरी सलाहकार के तौर पर काम करेंगी। 26 साल की उम्र में व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी बनीं कैरोलिन लेविट का जन्म 24 अगस्त 1997 को न्यू हैम्पशायर के एटकिंसन में हुआ। उनका परिवार राजनीति के बजाय छोटे कारोबार से जुड़ा था। पिता यूज्ड ट्रक का कारोबार करते थे और परिवार आइसक्रीम स्टैंड चलाता था। लेविट ने स्कूल-कॉलेज में सॉफ्टबॉल खेला और कम्युनिकेशन व पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई की। कॉलेज के दौरान फॉक्स न्यूज में इंटर्नशिप की। इसके बाद ट्रम्प के पहले कार्यकाल में व्हाइट हाउस में काम किया और रिपब्लिकन सांसद एलिस स्टेफनिक की कम्युनिकेशन डायरेक्टर बनीं। 2022 में न्यू हैम्पशायर से कांग्रेस चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। 2024 में ट्रम्प के चुनाव अभियान की प्रेस सेक्रेटरी बनीं। जनवरी 2025 में 26 साल की उम्र में व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी बनकर इस पद पर पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति बनीं। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज रिपोर्टर से पूछा- आप उनकी जगह लेंगी? लेविट के जाने के बाद अगली प्रेस सेक्रेटरी कौन होगी, इसका अभी ऐलान नहीं हुआ है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्टर एलेक्सिस मैकएडम्स ने ट्रम्प से इसी बारे में सवाल किया। ट्रम्प ने मैकएडम्स की ओर देखकर कहा, “आप?” फिर उन्होंने पूछा, “आप उनकी जगह क्यों नहीं लेतीं?” ट्रम्प ने मैकएडम्स की तारीफ करते हुए कहा कि वह यह काम अच्छी तरह कर सकती हैं। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि वह वास्तव में उन्हें अगली प्रेस सेक्रेटरी बनाने पर विचार कर रहे हैं या यह सिर्फ मजाक था। लेविट को इस्तीफे को लेकर अटकलें भी सामने आईं लेविट के पद छोड़ने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उनके फैसले को जुलाई में तुर्किये की राजधानी अंकारा में ट्रम्प से जुड़े एक सुरक्षा मामले से जोड़ने की कोशिश की। दक्षिण अफ्रीका में ईरानी दूतावास ने दावा किया था कि सुरक्षा खतरे के कारण ट्रम्प को एक विमान से दूसरे विमान में भेजा गया और लेविट पीछे रह गईं। व्हाइट हाउस ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि लेविट उस विमान में थीं ही नहीं। ट्रम्प ने भी कहा था कि सुरक्षा अधिकारियों ने ईरान से जुड़े संभावित खतरे के कारण विमान बदलने की सलाह दी थी। ————————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने PAK-सऊदी-तुर्किये के रक्षा समझौते पर खुशी जताई:बोले- तीनों देश मजबूती से अपनी रक्षा कर सकेंगे; एक पर हमला हुआ तो मिलकर जवाब देंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस डील से तीनों देश मिलकर अपनी रक्षा ज्यादा मजबूती से कर सकेंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

ट्रम्प ने PAK-सऊदी-तुर्किये के रक्षा समझौते पर खुशी जताई:बोले- तीनों देश मजबूती से अपनी रक्षा कर सकेंगे; एक पर हमला हुआ तो मिलकर जवाब देंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस डील से तीनों देश मिलकर अपनी रक्षा ज्यादा मजबूती से कर सकेंगे। ट्रम्प ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मुझे बहुत खुशी है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने आखिरकार मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। इससे पता चलता है कि मिडिल-ईस्ट एकजुट हो रहा है और देश अब ज्यादा मजबूती से अपनी रक्षा कर सकेंगे।” ट्रम्प ने तीनों देशों के नेताओं को बधाई देते हुए डील को “बड़ा, साहसी और अहम पहला कदम” बताया। 7 अगस्त को मक्का समझौते पर साइन हुए इस समझौते पर 7 अगस्त को मक्का में हस्ताक्षर हुए थे। समझौते पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए। एर्दोगन ने कहा है कि आगे दूसरे देश भी इस रक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने खास तौर पर मिस्र के जुड़ने की संभावना बताई है। डील का मकसद तीनों देशों के बीच सैन्य और सुरक्षा सहयोग बढ़ाना है। यानी किसी एक देश पर हमला होने पर बाकी दोनों देश उसके साथ खड़े होंगे। एक पर हमला हुआ तो बाकी दो देश साथ देंगे इस समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब या तुर्किये में से किसी एक देश पर हमला हुआ तो इसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यानी जिस देश पर हमला होगा, उसे बाकी दोनों देशों का साथ मिलेगा। कैसे मदद करेंगे तीनों देश? भारत की भी इस डील पर नजर भारत ने कहा है कि वह इस समझौते के असर की समीक्षा कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत इसे अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के नजरिए से देख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपने हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। ———————- ये खबर भी पढ़ें… दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास घटाएगा अमेरिका:ट्रम्प बोले- इससे नॉर्थ कोरिया को गलत मैसेज जाता है, किम जोंग उन से मेरे अच्छे रिश्ते अमेरिका ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले सैन्य अभ्यासों को कम करने का ऐलान किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को अभ्यासों में कटौती करने का आदेश दिया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

कभी ‘फ्रेजाइल फाइव’ में था भारत, 12 साल में इस कैटेगरी से निकलकर बना सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था: PM मोदी

भारत को कभी ‘फ्रेजाइल फाइव’ में गिना जाता था। लेकिन पिछले 12 वर्षों में देश ‘फ्रेजाइल फाइव’ से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था में बदल गया है। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कही। ‘फ्रेजाइल फाइव’ वैश्विक वित्तीय और आर्थिक जगत में इस्तेमाल किया जाने वाला एक शब्द है, जिसका अर्थ है ”5 नाजुक या कमजोर अर्थव्यवस्थाएं।” इनमें भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्किये को रखा गया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1947 में आजादी के बाद भारत के बड़े सपने थे, लेकिन प्रगति अक्सर उस गति से कम रही, जिसे हासिल करने की देश की आकांक्षा थी। आज भारत अभूतपूर्व गति और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और अब कोई भी ताकत 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प को नहीं रोक सकती। भारत का 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने का बड़ा सपना है, जो 140 करोड़ भारतीयों की ताकत और संकल्प से साकार होगा।

उन्होंने कहा, ”जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला राष्ट्र एक विकसित देश बनने का लक्ष्य निर्धारित करता है, तो यह दुनिया को एक शक्तिशाली संदेश देता है और इससे दुनिया का भारत को देखने का नजरिया भी बदल रहा है।” यह भी कहा कि कोई भी देश तब महान बनता है जब वह अपनी उपलब्धियां हासिल करता है। भारत को अब छोटे सपनों के साथ आगे बढ़ने के बजाय बड़े सपने देखने होंगे और ऊंचे संकल्प लेने होंगे। बड़े सपने सोच का विस्तार करते हैं और संकल्प दृढ़ होने पर कठिनाइयों व आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप सामने आता है।

रक्षा उत्पादन 4 गुना, डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़ा

पिछले 12 वर्षों में अपनी सरकार की उपलब्धियों पर रोशनी डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि रक्षा उत्पादन 4 गुना बढ़ गया है, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग 7 गुना बढ़ गई है, आधुनिक रेलवे कोच के उत्पादन में 21 गुना वृद्धि हुई है, इंटरनेट यूजर्स की संख्या 4 गुना बढ़ गई है और डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़ा है। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के करोड़ों नागरिकों ने, चाहे वे दलित हों, पीड़ित हों, वंचित हों, आदिवासी हों, गांव या शहर में रहने वाले हों, गरीब या मध्यम वर्ग के हों और देश के किसी भी हिस्से से आते हों, एक संकल्प और समर्पण के साथ देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए योगदान दिया है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि इतने कम समय में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं।

80th Independence Day: कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स की तैयारी करने वाले छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग, PM मोदी ने किया ऐलान

दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प पर जोर देते हुए कहा कि भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना है। दुनिया में बहुत कुछ सस्ता और जल्दी मिल सकता है, लेकिन इससे देश की अपनी क्षमता विकसित नहीं होती। अपने हितों की सुरक्षा भारत को खुद करनी होगी और इसी उद्देश्य से ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों को आगे बढ़ाया जा रहा है। पीएम ने यह भी कहा कि देश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत ने पहले ही 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स में उत्पादन शुरू कर दिया है, और आने वाले वर्षों में 5 से 8 और प्लांट स्थापित होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट-ईरान को पता था तुर्किये में कहां रुकेंगे ट्रम्प:बिल्डिंग के फ्लोर की भी जानकारी; कल ट्रम्प ने कहा था- ईरान के डर से प्लेन बदला

ईरानी एजेंट्स को पता था कि 7 जुलाई को तुर्की के अंकारा में हुए NATO समिट में ट्रम्प किस बिल्डिंग में रुके हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस ने यह आकलन किया है। ईरान को यह भी पता था कि ट्रम्प बिल्डिंग के किस फ्लोर पर रुके हैं। इसी जानकारी के बाद ट्रम्प को तुर्की से दूसरे विमान में ले जाया गया। मंगलवार को ट्रम्प ने भी ईरान के डर से विमान बदलने की बात मानी थी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से नाटो समिट में हिस्सा लेने गए थे, उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया। ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन में दाखिल हुए एयरफोर्स वन के पीछे एक केटरिंग ट्रक नजर आ रही है ट्रम्प के खिलाफ खास खतरे की जानकारी मिली रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रम्प को ले जाने वाले किसी भी विमान पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से हमला किया जा सकता था। अमेरिकी इंटेलिजेंस को पता चला कि नाटो शिखर सम्मेलन के आसपास एक व्यक्ति कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा गया था। इसके बाद सीक्रेट सर्विस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने ट्रम्प को तुर्की से निकालने के लिए ऑपरेशन तैयार किया। कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं। तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।” ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अधिकारी बोले- मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझाएंगे:कहा- उनके बीच अच्छे संबंध; 5 दिन पहले अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल पास हुआ था
अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े 100% टैरिफ के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
8 जुलाई को बदला गया विमान यह खतरा 8 जुलाई को सामने आया, जब ट्रम्प नाटो शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन अंकारा से रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह पुराने एयरफोर्स वन विमान से तुर्की से निकलेंगे, जिसे उन्होंने “पुराने समय की याद के लिए” बताया था। कैमरों के सामने ट्रम्प को उसी विमान में सवार होते देखा गया। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में उन्हें गुप्त रूप से एयरपोर्ट के कैटरिंग कंटेनर के जरिए उस विमान से निकाला गया और छोटे सैन्य विमान में ले जाया गया। पुराना एयरफोर्स वन विमान ट्रम्प के साथ व्हाइट हाउस के अधिकारियों, सुरक्षा कर्मचारियों और पत्रकारों को लेकर रवाना हुआ। इस तरह वह विमान एक डिकॉय के तौर पर काम कर रहा था। इसके बाद ट्रम्प ब्रिटेन में रुके। वहां उन्होंने गुप्त रूप से दोबारा उस विमान में सवारी की और बाद में कतर से मिले बोइंग 747-8 विमान में लौटे। ट्रम्प ने कहा- मुझे दूसरे विमान में भेजना चाहते थे ट्रम्प ने मंगलवार को पुष्टि की कि उन्हें दूसरे विमान में ले जाया गया था। उन्होंने बताया कि सीक्रेट सर्विस और सेना ने उनसे कहा था कि वे चाहते हैं कि ट्रम्प किसी दूसरे विमान से जाएं। द एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा, “वे चाहते थे कि मैं दूसरी फ्लाइट, दूसरे विमान से जाऊं।” उन्होंने कहा, “शायद बाहर कोई खतरा था। मैंने इसके बारे में ज्यादा नहीं पूछा। मुझे बहुत धमकियां मिलती हैं।” ट्रम्प ने खतरे को कम करके बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि जिस विमान से वह वास्तव में गए थे, वह शायद ज्यादा खतरे में था। डिकॉय ऑपरेशन को असामान्य क्यों माना गया खतरनाक जगहों की यात्राओं के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी गुप्त यात्रा योजनाओं और डिकॉय विमानों का इस्तेमाल कर चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2023 में गुप्त रूप से कीव की यात्रा की थी। वह पहले पोलैंड गए और वहां से रात में गुप्त ट्रेन के जरिए यूक्रेन पहुंचे। दो पत्रकार उनके साथ थे और यात्रा शुरू होने के बाद उन्होंने इस दौरे की जानकारी दर्ज की थी। ट्रम्प ने 2019 में अफगानिस्तान की गुप्त थैंक्सगिविंग यात्रा भी की थी। अधिकारियों ने एक डिकॉय विमान और अलग प्रेस पूल का इस्तेमाल किया था, ताकि यह impression बना रहे कि ट्रम्प छुट्टियां अपने मार-ए-लागो एस्टेट में मना रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और बिल क्लिंटन ने भी सुरक्षा कारणों से गुप्त यात्राएं की थीं या यात्रा के दौरान भ्रम पैदा करने वाली व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया था। ट्रम्प के मामले में असामान्य बात यह थी कि वह तत्काल खतरे वाले इलाके से निकलने के बाद भी यह धोखा जारी रहा। उनके साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल को नहीं बताया गया कि राष्ट्रपति उस विमान में नहीं थे, जिसे वे राष्ट्रपति को ले जाने वाला विमान समझ रहे थे। “रेवेन रॉक” किताब के लेखक गैरेट एम ग्राफ ने एपी से कहा कि राष्ट्रपति पहले भी बिना पहचान वाले या डिकॉय विमानों से यात्रा कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के ठिकाने को लेकर लंबे समय तक जानकारी छिपाए जाने को अभूतपूर्व बताया। ईरान पहले भी ट्रम्प को निशाना बना चुका है ट्रम्प पहले भी ईरान से जुड़ी धमकियों और साजिशों का निशाना बन चुके हैं। 2024 में पेंसिलवेनिया के बटलर में चुनावी रैली के दौरान एक संभावित हमलावर की गोली उन्हें छूकर निकल गई थी। उसी साल बाद में फ्लोरिडा के उनके गोल्फ कोर्स में एक हथियारबंद व्यक्ति ने भी उन्हें निशाना बनाया था। हत्या के ये दोनों प्रयास ईरान से जुड़ी धमकियों से अलग थे। इसके अलावा, ट्रम्प की हत्या के लिए सुपारी देने की साजिश के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया था। इस साजिश का पता बाइडेन प्रशासन के दौरान चला था। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि यह साजिश ईरानी एजेंट्स के एक प्रॉक्सी के जरिए काम करने से जुड़ी थी। द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ताजा खुफिया जानकारी ट्रम्प के अंकारा में रहने के दौरान मिले एक खास खतरे से जुड़ी थी।

रिपोर्ट-ईरान को पता था तुर्किये में कहां रुकेंगे ट्रम्प:बिल्डिंग के फ्लोर की भी जानकारी; कल ट्रम्प ने कहा था- ईरान के डर से प्लेन बदला

ईरानी एजेंट्स को पता था कि 7 जुलाई को तुर्की के अंकारा में हुए NATO समिट में ट्रम्प किस बिल्डिंग में रुके हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस ने यह आकलन किया है। ईरान को यह भी पता था कि ट्रम्प बिल्डिंग के किस फ्लोर पर रुके हैं। इसी जानकारी के बाद ट्रम्प को तुर्की से दूसरे विमान में ले जाया गया। मंगलवार को ट्रम्प ने भी ईरान के डर से विमान बदलने की बात मानी थी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से नाटो समिट में हिस्सा लेने गए थे, उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया। ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन में दाखिल हुए एयरफोर्स वन के पीछे एक केटरिंग ट्रक नजर आ रही है ट्रम्प के खिलाफ खास खतरे की जानकारी मिली रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रम्प को ले जाने वाले किसी भी विमान पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से हमला किया जा सकता था। अमेरिकी इंटेलिजेंस को पता चला कि नाटो शिखर सम्मेलन के आसपास एक व्यक्ति कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा गया था। इसके बाद सीक्रेट सर्विस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने ट्रम्प को तुर्की से निकालने के लिए ऑपरेशन तैयार किया। कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं। तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।” ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अधिकारी बोले- मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझाएंगे:कहा- उनके बीच अच्छे संबंध; 5 दिन पहले अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल पास हुआ था
अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े 100% टैरिफ के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
8 जुलाई को बदला गया विमान यह खतरा 8 जुलाई को सामने आया, जब ट्रम्प नाटो शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन अंकारा से रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह पुराने एयरफोर्स वन विमान से तुर्की से निकलेंगे, जिसे उन्होंने “पुराने समय की याद के लिए” बताया था। कैमरों के सामने ट्रम्प को उसी विमान में सवार होते देखा गया। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में उन्हें गुप्त रूप से एयरपोर्ट के कैटरिंग कंटेनर के जरिए उस विमान से निकाला गया और छोटे सैन्य विमान में ले जाया गया। पुराना एयरफोर्स वन विमान ट्रम्प के साथ व्हाइट हाउस के अधिकारियों, सुरक्षा कर्मचारियों और पत्रकारों को लेकर रवाना हुआ। इस तरह वह विमान एक डिकॉय के तौर पर काम कर रहा था। इसके बाद ट्रम्प ब्रिटेन में रुके। वहां उन्होंने गुप्त रूप से दोबारा उस विमान में सवारी की और बाद में कतर से मिले बोइंग 747-8 विमान में लौटे। ट्रम्प ने कहा- मुझे दूसरे विमान में भेजना चाहते थे ट्रम्प ने मंगलवार को पुष्टि की कि उन्हें दूसरे विमान में ले जाया गया था। उन्होंने बताया कि सीक्रेट सर्विस और सेना ने उनसे कहा था कि वे चाहते हैं कि ट्रम्प किसी दूसरे विमान से जाएं। द एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा, “वे चाहते थे कि मैं दूसरी फ्लाइट, दूसरे विमान से जाऊं।” उन्होंने कहा, “शायद बाहर कोई खतरा था। मैंने इसके बारे में ज्यादा नहीं पूछा। मुझे बहुत धमकियां मिलती हैं।” ट्रम्प ने खतरे को कम करके बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि जिस विमान से वह वास्तव में गए थे, वह शायद ज्यादा खतरे में था। डिकॉय ऑपरेशन को असामान्य क्यों माना गया खतरनाक जगहों की यात्राओं के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी गुप्त यात्रा योजनाओं और डिकॉय विमानों का इस्तेमाल कर चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2023 में गुप्त रूप से कीव की यात्रा की थी। वह पहले पोलैंड गए और वहां से रात में गुप्त ट्रेन के जरिए यूक्रेन पहुंचे। दो पत्रकार उनके साथ थे और यात्रा शुरू होने के बाद उन्होंने इस दौरे की जानकारी दर्ज की थी। ट्रम्प ने 2019 में अफगानिस्तान की गुप्त थैंक्सगिविंग यात्रा भी की थी। अधिकारियों ने एक डिकॉय विमान और अलग प्रेस पूल का इस्तेमाल किया था, ताकि यह impression बना रहे कि ट्रम्प छुट्टियां अपने मार-ए-लागो एस्टेट में मना रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और बिल क्लिंटन ने भी सुरक्षा कारणों से गुप्त यात्राएं की थीं या यात्रा के दौरान भ्रम पैदा करने वाली व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया था। ट्रम्प के मामले में असामान्य बात यह थी कि वह तत्काल खतरे वाले इलाके से निकलने के बाद भी यह धोखा जारी रहा। उनके साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल को नहीं बताया गया कि राष्ट्रपति उस विमान में नहीं थे, जिसे वे राष्ट्रपति को ले जाने वाला विमान समझ रहे थे। “रेवेन रॉक” किताब के लेखक गैरेट एम ग्राफ ने एपी से कहा कि राष्ट्रपति पहले भी बिना पहचान वाले या डिकॉय विमानों से यात्रा कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के ठिकाने को लेकर लंबे समय तक जानकारी छिपाए जाने को अभूतपूर्व बताया। ईरान पहले भी ट्रम्प को निशाना बना चुका है ट्रम्प पहले भी ईरान से जुड़ी धमकियों और साजिशों का निशाना बन चुके हैं। 2024 में पेंसिलवेनिया के बटलर में चुनावी रैली के दौरान एक संभावित हमलावर की गोली उन्हें छूकर निकल गई थी। उसी साल बाद में फ्लोरिडा के उनके गोल्फ कोर्स में एक हथियारबंद व्यक्ति ने भी उन्हें निशाना बनाया था। हत्या के ये दोनों प्रयास ईरान से जुड़ी धमकियों से अलग थे। इसके अलावा, ट्रम्प की हत्या के लिए सुपारी देने की साजिश के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया था। इस साजिश का पता बाइडेन प्रशासन के दौरान चला था। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि यह साजिश ईरानी एजेंट्स के एक प्रॉक्सी के जरिए काम करने से जुड़ी थी। द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ताजा खुफिया जानकारी ट्रम्प के अंकारा में रहने के दौरान मिले एक खास खतरे से जुड़ी थी।

इमरान खान की मौत का दावा झूठा:पाकिस्तानी पत्रकार एक दिन बाद ही पलटा, PTI बोली- मिलने दो, नहीं तो सड़कों पर उतरेंगे

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत की आशंका जताने वाला पाकिस्तानी पत्रकार दावे से पलट गया है। अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान ने मंगलवार रात 11 बजे एक वीडियो जारी कर इमरान की मौत की आशंका जाहिर की थी। वजाहत ने बुधवार दोपहर कहा कि इमरान की मौत की आशंका सेना के अफसरों की सूचनाओं के आधार पर किया गया एक आकलन था। इमरान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। पाकिस्तानी पत्रकार के दावे के बाद इमरान की बहनों ने भी सवाल उठाया कि उन्हें भाई से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने चेतावनी दी है कि अगर इमरान से मिलने नहीं दिया गया, तो समर्थक सड़कों पर उतर जाएंगे। पाकिस्तानी पत्रकार का वीडियो देखिए… पत्रकार वजाहत सईद खान ने इमरान की मौत का दावा करने वाले वीडियो में कहा था- रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय के कम से कम तीन वरिष्ठ अधिकारियों को डर है कि इमरान खान अब जिंदा नहीं हैं। बाद में उन्होंने कहा कि यह कोई पक्की खबर नहीं, बल्कि केवल सेना के अंदर की आशंकाओं के आधार पर एक आकलन था। इमरान की पार्टी बोली- सड़कों पर उतरेंगे पत्रकार के दावे के बाद इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने कहा है कि अगर उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई, तो 20 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं। पार्टी ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है। नवंबर 2025 में इमरान से मिली थीं बहनें इमरान खान की बहन उज्मा खान ने नवंबर 2025 में अडियाला जेल में उनसे मुलाकात की। जेल से बाहर आकर उज्मा ने बताया था कि भाई इमरान पूरी तरह ठीक हैं। दोनों के बीच करीब 20 मिनट तक मुलाकात हुई थी।

उन्होंने कहा था- इमरान खान की सेहत बिल्कुल ठीक है, लेकिन वे बेहद गुस्से में हैं। उन्हें मेंटली टॉर्चर किया जा रहा है और इस सब के लिए आसिम मुनीर जिम्मेदार हैं। उनकी बाहरी दुनिया तक कोई पहुंच नहीं है। प्रशासन ने नहीं मिलने दिया तो फैली थी अफवाह नवंबर 2025 की शुरुआत में ही इमरान खान से मिलने उनके समर्थक और परिवार वाले पहुंचे थे, लेकिन जेल प्रशासन ने उन्हें इजाजत नहीं दी। इसके बाद यह अफवाह फैल गई थी कि इमरान की मौत हो गई है और पाकिस्तान सरकार इसे छिपा रही है। इसके बाद पाकिस्तान में बड़ा प्रदर्शन किया गया था, जिसे देखते हुए रावलपिंडी से लेकर इस्लामाबाद तक हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था। पिछली बार मई 2024 में नजर आए थे इमरान इमरान खान पिछली बार 16 मई 2024 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि आम चुनाव से 5 दिन पहले मुझे अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया, जिससे मैं चुनाव से दूर रहूं। इमरान ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा- केजरीवाल को भी भारत में चुनाव के दौरान कैंपेन के लिए जमानत दी गई थी। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। भ्रष्टाचार मामले में उन्हें 14 साल की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसमें सरकारी गिफ्ट (तोशाखाना केस) बेचने और सरकारी सीक्रेट लीक करने जैसे आरोप शामिल हैं। इमरान पर आरोप है कि उन्होंने अल-कादिर ट्रस्ट के लिए पाकिस्तान सरकार की अरबों रुपए की जमीन को सस्ते में बेच दिया था। इस मामले में इमरान को 9 मई 2023 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पूरे मुल्क में फौज के कई अहम ठिकानों पर हमले हुए थे।​​​ पाकिस्तान के नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने अल-कादिर ट्रस्ट केस में दिसंबर 2023 में इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी और अन्य 6 व्यक्तियों पर मामला दर्ज किया था। हालांकि जब इमरान के खिलाफ ये केस दर्ज हुआ, उससे पहले से ही वे तोशाखाना केस में अडियाला जेल में बंद थे। ​​​​ 50 अरब का स्कैम है अल-कादिर ट्रस्ट केस
—————– यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने माना- ईरान के डर से प्लेन बदलना पड़ा:हमला होता तो एयरफोर्स वन पर होता; ट्रक में छिपकर दूसरे विमान तक पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मान लिया है कि उन्होंने पिछले महीने तुर्किये में ईरान के डर से प्लेन बदला था। उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से NATO समिट में हिस्सा लेने गए थे उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। पूरी खबर पढ़ें…

ट्रम्प ने माना- ईरान के डर से प्लेन बदलना पड़ा:हमला होता तो एयरफोर्स वन पर होता; ट्रक में छिपकर दूसरे विमान तक पहुंचे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मान लिया है कि उन्होंने पिछले महीने तुर्किए में ईरान के डर से प्लेन बदला था। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से NATO समिट में हिस्सा लेने गए थे उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया। ट्रम्प ने कहा- अगर कोई हमला होता तो उसी प्लेन को निशाना बनाया जाता। मैं वही करता हूं, जो सुरक्षा एजेंसियां कहती हैं। मुझे लगातार धमकियां मिलती रहती हैं।
कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं। तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।” ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। व्हाइट हाउस ने कहा- नए विमान की सुरक्षा में कोई कमी नहीं कतर से मिले वाले विमान की सुरक्षा पर सवालों के जवाब में व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीव चेउंग ने कहा कि इस विमान में ट्रम्प और उनके साथ मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा, अमेरिका के कई दुश्मन ट्रम्प को निशाना बनाना चाहते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए हम हर जरूरी तरीका अपनाते हैं। यानी व्हाइट हाउस ने यह नहीं माना कि नए विमान में सुरक्षा की कोई कमी थी। उसका कहना है कि ट्रम्प की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर अलग-अलग तरीके अपनाए जा सकते हैं। पेंटागन यानी अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस मामले पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अधिकारी बोले- मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझाएंगे:कहा- उनके बीच अच्छे संबंध; 5 दिन पहले अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल पास हुआ था
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