EPFO Alert: PF फंड का क्लेम और e-नॉमिनेशन के लिए तुरंत अपडेट करें प्रोफाइल फोटो, नहीं तो हो सकती है परेशानी

EPFO Alert: अगर आप कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सदस्य हैं, तो आपके लिए एक जरूरी खबर है। EPFO ने अपने सदस्यों को सलाह दी है कि वे यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (Unified Member Portal) पर अपनी प्रोफाइल फोटो अपडेट कर लें। यह फोटो ई-नॉमिनेशन (e-nomination) की प्रक्रिया पूरी करने और ऑनलाइन PF फंड के क्लेम के दौरान पहचान वेरीफाई करने में अहम भूमिका निभाती है। प्रोफाइल फोटो अपडेट नहीं होने पर आपको कुछ सर्विस का लाभ लेने में देरी या परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

यह प्रोफाइल फोटो पीएफ सदस्यों की एक विजुअल पहचान के रूप में काम करती है। इससे विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं के दौरान ईपीएफओ को खाताधारक की पहचान वेरिफाई करने में मदद मिलती है। हालांकि सभी ईपीएफओ लेन-देन के लिए फोटो अपलोड करना अनिवार्य नहीं है। लेकिन ई-नॉमिनेशन जैसी कुछ खास सेवाओं के लिए यह बेहद जरूरी है। प्रोफाइल फोटो अपडेट रहने से पीएफ दावों की प्रोसेसिंग के दौरान होने वाली देरी से बचा जा सकता है।

e-Nomination के लिए क्यों जरूरी है प्रोफाइल फोटो?

EPFO के मुताबिक, सदस्यों को अपनी प्रोफाइल में हाल ही की पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करनी चाहिए। यह e-Nomination पूरा करने के लिए जरूरी है। e-Nomination के जरिए सदस्य अपने परिवार के किसी सदस्य या पात्र व्यक्ति को नामांकित कर सकते हैं। ताकि सदस्य की मृत्यु होने पर EPF, Employees Pension Scheme (EPS) और Employees’ Deposit Linked Insurance (EDLI) का लाभ आसानी से नामित व्यक्ति को मिल सके।

PF क्लेम के निपटारे में मिलती है मदद

यदि सदस्य की प्रोफाइल पूरी तरह अपडेट रहती है, तो EPFO को ऑनलाइन पहचान सत्यापित करने में आसानी होती है। इससे PF से जुड़े दावों के निपटारे में कम समय लगता है और कागजी प्रक्रिया भी घट जाती है। वैध e-Nomination होने पर नामित व्यक्ति को क्लेम सेटलमेंट में भी कम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

इन जानकारियों को भी रखें अपडेट

EPFO ने सदस्यों को सलाह दी गई है कि प्रोफाइल फोटो के अलावा आधार, PAN, बैंक खाता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी भी पोर्टल पर सही तरीके से लिंक और वैरीफाई रखें। इससे e-Nomination, ऑनलाइन PF निकासी, पेंशन संबंधी सेवाओं और अन्य डिजिटल सुविधाओं का लाभ बिना किसी बाधा के लिया जा सकता है। साथ ही अपने पहचान प्रमाण दस्तावेजों को भी अपडेट रखें। इन सभी जानकारियों को अपडेट रखने से ई-नॉमिनेशन, ऑनलाइन पीएफ निकासी (PF Withdrawal) और पेंशन से जुड़ी डिजिटल सेवाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के तेजी से मिलता है।

EPFO पोर्टल पर प्रोफाइल फोटो अपडेट करने के आसान स्टेप्स

EPFO सदस्य इन आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपनी प्रोफाइल फोटो अपडेट कर सकते हैं:-

पोर्टल पर लॉग इन करें: सबसे पहले ईपीएफओ यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (EPFO Unified Member Portal) पर जाएं। फिर अपने यूएएन (UAN), पासवर्ड और कैप्चा कोड का उपयोग करके लॉग इन करें।

प्रोफाइल सेक्शन में जाएं: डैशबोर्ड पर जाने के बाद ‘Profile’ या ‘View’ सेक्शन पर नेविगेट करें और प्रोफाइल फोटो अपलोड/अपडेट करने के विकल्प को चुनें।

फोटो का चयन करें: एक हालिया पासपोर्ट साइज फोटो चुनें जो पोर्टल की तय फाइल साइज और फॉर्मेट की शर्तों को पूरा करती हो।

अपलोड और सेव करें: चुनी गई फोटो को अपलोड करें और बदलावों को सेव (Save) कर दें।

वेरीफाई करें: आगे की ई-नॉमिनेशन प्रक्रिया या ऑनलाइन क्लेम फाइल करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि अपडेट की गई फोटो आपके प्रोफाइल पर सही तरीके से दिख रही है या नहीं।

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ITR 2026: सैलरी स्लैब के हिसाब से न्यू टैक्स रिजीम में सीधे बचा सकते हैं करीब 1.5 लाख रुपये का टैक्स! ये रहा पूरा कैलकुलेशन

Income Tax Return 2026: हर साल जब इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने का सीजन शुरू होता है तो टैक्स पेयर्स के सामने सबसे पहला और बड़ा सवाल यही होता है कि ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनें या न्यू टैक्स रिजीम के साथ जाएं। हर कोई अपने हिसाब से टैक्स की देनदारी को कैलकुलेट कर रहा हैं। लेकिन कुछ थंब रूल ऐसे सामने आए हैं जो टैक्स की देनदारी का मामला काफी हद तक साफ कर दे रहे हैं। पर इंडिविजुअल टैक्स पेयर्स को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सैलरी पर्सन टू पर्सन वैरी करती है और कोई एक रूल आपकी टैक्स देनदारी का पूरा असल खाका नहीं खींच सकता।

इसके लिए आपको एक्सपर्ट अडवाइस की हमेशा जरूरत पड़ती है। एक बात और ध्यान देने वाली है कि अब न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट विकल्प है। यानी अगर आप आईटीआर फाइल करते समय कोई विकल्प नहीं चुनते हैं तो आपका रिटर्न अपने आप न्यू टैक्स रिजीम के तहत प्रोसेस किया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक्टिव रूप से ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनना अब भी फायदेमंद है? इसके पीछे के गणित को समझने की कोशिश करते हैं।

क्या कहता है टैक्स का गणित?

ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए की गई एक तुलनात्मक गणना के मुताबिक न्यू टैक्स रिजीम कई सैलरी स्लैब में भारी बचत दे रही है। इस कैलकुलेशन में 60 वर्ष से कम उम्र के एक ऐसे सैलरडी पर्सन को आधार बनाया गया है जो ओल्ड रिजीम के तहत कुल 4.25 लाख रुपये के डिडक्शन (छूट) का दावा करता है। इसमें नीचे दिए गए डिडक्शन शामिल हैं:-

धारा 80C के तहत: 150000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80C / 2025 के अधिनियम की धारा 123)

धारा 80D के तहत: 25000 रुपये (1961 के अधिनियम की धारा 80D / 2025 के अधिनियम की धारा 126)

HRA (हाउस रेंट अलाउंस): 200000 रुपये

स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction): 50000 रुपये

इसके मुकाबले न्यू टैक्स रिजीम में केवल 75000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन शामिल किया गया है। इस गणना में लागू सरचार्ज और 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस को भी जोड़ा गया है।

विभिन्न सैलरी लेवल पर टैक्स लायबिलिटी

25 लाख रुपये की सैलरी पर: ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत 452400 रुपये का टैक्स बनता है जबकि न्यू टैक्स रिजीम में यह बिल सिर्फ 319800 रुपये आता है। यानी न्यू टैक्स रिजीम चुनने पर सीधे 132600 रुपये की बचत होती है।

50 लाख रुपये की सैलरी पर: यहां भी दोनों रिजीम के टैक्स का अंतर 132600 रुपये ही रहता है और न्यू टैक्स रिजीम जीतती है।

75 लाख और 1 करोड़ रुपये की सैलरी पर: इस लेवल पर 10 फीसदी का सरचार्ज भी लागू हो जाता है। इसके बावजूद न्यू टैक्स रिजीम में टैक्सपेयर्स को करीब 1.46 लाख रुपये की सीधी बचत मिलती है।

तो क्या ओल्ड टैक्स रिजीम पूरी तरह खत्म हो चुकी है?

ऐसा सभी टैक्स पेयर्स के केस में नहीं कहा जा सकता। ओल्ड टैक्स रिजीम न्यू टैक्स रिजीम को केवल तभी टक्कर दे पाती है जब आपके डिडक्शंस (कटौतियां) इस सामान्य बास्केट से काफी ज्यादा हों। अगर आपके पास बड़े डिडक्शंस हैं जैसे:-

  • धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की छूट।
  • मेट्रो शहरों में रहने के कारण मिलने वाला ज्यादा HRA
  • धारा 80CCD(1B) के तहत NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में योगदान।
  • सीनियर सिटीजन माता-पिता के लिए चुकाया गया बड़ा 80D हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम।

अदर आप इन सभी को मिला देते हैं और आपका कुल डिडक्शन ब्रेक-ईवन थ्रेशोल्ड को पार कर जाता है तो ओल्ड रिजीम बेहतर हो सकती है। मौजूदा स्लैब के तहत अधिकांश इनकम लेवल के लिए यह ब्रेक-ईवन पॉइंट करीब 8 लाख रुपये के कुल डिडक्शन पर बैठता है। यानी भारी होम लोन और फुल HRA क्लेम करने वाला व्यक्ति इस लिमिट तक पहुंच सकता है लेकिन जो व्यक्ति सिर्फ 80C और एक सामान्य हेल्थ पॉलिसी के भरोसे है वह न्यू रिजीम का मुकाबला नहीं कर पाएगा।

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ग्रांट थॉर्नटन भारत की टैक्स पार्टनर ऋचा साहनी का कहना है कि पुराने और नए टैक्स रिजीम के बीच चयन कोई ऐसा फैसला नहीं है जो हर किसी पर फिट बैठे। हालांकि न्यू रिजीम कम टैक्स रेट्स और अधिक सरलता की पेशकश करती है लेकिन ओल्ड रिजीम उन खास कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए बेहतर परिणाम दे सकती है जो बड़े पैमाने पर डिडक्शंस और एग्जेंप्शन (छूट) का लाभ उठाते हैं। इसलिए टैक्सपेयर्स को केवल हेडलाइन टैक्स रेट्स पर भरोसा करने के बजाय अपना फैसला लेने से पहले एक पर्सनलाइज्ड टैक्स कैलकुलेशन जरूर करनी चाहिए।

सालाना रिजीम बदलने की फ्लेक्सिबिलिटी

सैलरीड करदाताओं के लिए एक अच्छी बात यह है कि वे किसी एक रिजीम में लॉक नहीं होते हैं। ऋचा साहनी के मुताबिक, सैलरीड टैक्सपेयर्स के पास हर साल दोनों रिजीम के बीच चयन करने की फ्लेक्सिबिलिटी होती है। वे अपनी इनकम प्रोफाइल, डिडक्शंस और एग्जेंप्शंस के आधार पर सालाना अपनी स्थिति का मूल्यांकन कर सकते हैं और जो अधिक फायदेमंद हो, उसे चुन सकते हैं।

इस सालाना बदलाव का व्यावहारिक महत्व भी है। आपके एम्प्लॉयर (कंपनी) ने TDS काटने के लिए किस रिजीम का इस्तेमाल किया था उससे आपका आईटीआर बाउंड नहीं होता है। अगर कंपनी ने न्यू टैक्स रिजीम के हिसाब से टीडीएस काटा है लेकिन कैलकुलेशन के बाद आपके लिए ओल्ड रिजीम ज्यादा फायदेमंद निकलती है तो आप आईटीआर फाइल करते समय ओल्ड रिजीम चुन सकते हैं और बची हुई रकम को रिफंड के रूप में क्लेम कर सकते हैं।

बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम वाले टैक्सपेयर्स को ओल्ड रिजीम में वापस जाने का केवल एक ही मौका (Form 10-IEA के जरिए) मिलता है, इसलिए उन्हें अपना विकल्प चुनते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

फाइल करने से पहले क्या करें?

रिटर्न दाखिल करने से पहले इनकम टैक्स पोर्टल पर मौजूद कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें, जिसमें मुश्किल से 10 मिनट का समय लगता है। थंब रूल यह है कि अगर आपके डिडक्शंस कम हैं तो बिना किसी उलझन के न्यू टैक्स रिजीम चुनें और यदि डिडक्शंस ज्यादा हैं तो दोनों रिजीम में टैक्स कैलकुलेट करके तुलना कर लें। चूंकि ये दोनों रिजीम आने वाले भविष्य में एक साथ रहेंगी, इसलिए यह कोई वन-टाइम फैसला नहीं है बल्कि इसे अपनी सालाना आदत बना लें।

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ITR Filing 2026: 1.7 करोड़ लोगों ने भरा इनकम टैक्स रिटर्न, 31 जुलाई की डेडलाइन चूके तो क्या होगा?

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की रफ्तार तेज हो गई है। आयकर विभाग के मुताबिक, असेसमेंट ईयर 2026-27 (वित्त वर्ष 2025-26 की आय) के लिए अब तक 1.7 करोड़ से ज्यादा टैक्सपेयर्स अपना ITR दाखिल कर चुके हैं। सिर्फ शुक्रवार को ही 10 लाख से ज्यादा रिटर्न फाइल किए गए।

विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लोगों से समय रहते रिटर्न भरने की अपील भी की है, ताकि आखिरी समय की परेशानी से बचा जा सके।

ITR डेडलाइन 31 जुलाई है

वित्त वर्ष 2025-26 की आय के लिए ITR-1 (सहज) और ITR-2 दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। अगर आपका अकाउंट ऑडिट के दायरे में नहीं आता है, तो आपको इसी तारीख तक रिटर्न फाइल करना होगा।

ITR-1 कौन भर सकता है?

ITR-1 यानी सहज फॉर्म ज्यादातर इंडिविजुअल के लिए होता है। इनमें ये लोग शामिल हैं…

  • सालाना कमाई ₹50 लाख तक हो।
  • कमाई आय का जरिया सैलरी हो।
  • एक मकान से आय हो।
  • कृषि आय ₹5,000 तक हो।

ITR-2 कौन भरता है?

ITR-2 उन इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए है, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय नहीं है, लेकिन उन्हें कैपिटल गेन जैसी आय होती है।

31 जुलाई की डेडलाइन चूकने पर क्या होगा?

अगर आप तय समय तक ITR दाखिल नहीं करते हैं, तो आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

1. लेट फीस : आयकर कानून की धारा 234F के तहत देरी से ITR भरने पर ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है। अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख तक है, तो यह फीस ₹1,000 तक सीमित रहती है।

2. ब्याज भी : अगर आपके ऊपर टैक्स बकाया है, तो धारा 234A के तहत हर महीने या उसके हिस्से के लिए 1% ब्याज देना पड़ सकता है।

3. रिफंड में देरी : अगर आपको इनकम टैक्स रिफंड मिलना है, तो देर से ITR भरने पर उसका प्रोसेस भी देर से होगा। यानी आपका पैसा मिलने में ज्यादा समय लग सकता है।

4. टैक्स बेनिफिट नहीं : देर से रिटर्न दाखिल करने पर कुछ मामलों में नुकसान (Loss) को अगले सालों में कैरी फॉरवर्ड करने जैसी टैक्स सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता।

आखिरी समय का इंतजार न करें

हर साल डेडलाइन के करीब पोर्टल पर ट्रैफिक काफी बढ़ जाता है। ऐसे में तकनीकी दिक्कतें भी आ सकती हैं। इसलिए बेहतर होगा कि जरूरी दस्तावेज जुटाकर समय रहते ITR दाखिल कर दें। इससे लेट फीस, ब्याज और दूसरी परेशानियों से बचा जा सकता है।

Income Tax Return: रिटर्न फाइल करने में नहीं करें देर, PhonePe और जियो फाइनेंस 24 रुपये में दे रही सुविधा

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Income Tax Return: रिटर्न फाइल करने में नहीं करें देर, PhonePe और जियो फाइनेंस 24 रुपये में दे रही सुविधा

इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की डेडलाइन करीब आ रही है। 31 जुलाई तक आईटीआर फाइल नहीं करने के कई नुकसान हैं। आपको पेनाल्टी देकर रिटर्न फाइल करना होगा। साथ ही कई बेनेफिट्स भी आपको नहीं मिलेंगे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटर्न फाइल करने के लिए अंतिम तारीख का इंतजार करना ठीक नहीं है। अगर आपने अब तक रिटर्न फाइल नहीं किया है और किसी तरह की दिक्कत आ रही है तो आप फिनटेक प्लेटफॉर्म्स की टैक्स फाइलिंग सर्विसेज का इस्तेमाल कर सकते हैं।

खुद फाइल कर सकते हैं या एक्सपर्ट की मदद ले सकते हैं

PhonePe और JioFinance जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म्स ने इन-ऐप टैक्स फाइलिंग सर्विसेज शुरू की हैं। इसके लिए उन्हें TaxBuddy से समझौता किया है। इससे फिनटेक के प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध फाइनेंशियल सेवाओं का दायरा बढ़ गया है। दोनों कंपनियां डू-इट-योरसेल्फ (DIY) और एक्सपर्ट एसिस्टेड आईटीआर फाइलिंग ऑप्शंस ऑफर कर रही हैं। खास बात यह है कि सेल्फ-फाइलिंग प्लान मात्र 24 रुपये की फीस से शुरू हो रहे हैं।

इनकम के कई स्रोत वाले टैक्सपेयर्स के लिए भी सुविधा

फिनटेक की यह सेवाएं सैलरीड इंडिविजुअल्स और ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए है, जिनकी इनकम के कई स्रोत हैं। इनमें बिनजेस इनकम, कैपिटल गेंस, क्रिप्टो करेंसी ट्रांजेक्शंस, फॉरेन इनकम और नॉन-रेजिडेंट (NRI) रिटर्न फाइलिंग शामिल हैं। टैक्स फाइलिंग सॉल्यूशंस टैक्सबडी की तरफ से दी जा रही हैं। यह एक रजिस्टर्ड ई-रिटर्न इंटरमीडियरी (ERI) है। इसकी सर्विसेज फिनटेक के ऐप पर उपलब्ध हैं। टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने के लिए किसी दूसरे पोर्टल पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।

ऐप पर टैक्स फाइलिंग से जुड़े कई फीचर्स उपलब्ध

JioFinance ने कहा है कि उसके टैक्स फाइलिंग मॉड्यूल में कई फीचर्स हैं। इनमें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पोर्टल से ऑटोमेटेड डेटा रिट्राइवल, टैक्स प्लानिंग टूल्स, टैक्स रीजीम कंपैरिजन, डिडक्शन एस्टिमेशन और रिफंड ट्रैकिंग शामिल हैं। कंपनी ने बताया है कि टैक्सपेयर्स के डेटा की प्रोसेसिंग टैक्सबडी के रेगुलेटेड फ्रेमवर्क के तहत होगा। इसका मकसद सिर्फ रिटर्न फाइल करना होगा।

टैक्स-फालिंग प्लान बहुत कम फीस पर हो रहे शुरू

फोनपे ने कहा कि उसका नया फीचर यूजर्स को आईटीआर फाइल करने की सुविधा के साथ ही मंथली जीएसटी कंप्लायंस को मैनेज करने की सुविधा देता है। यह सब फिनटेक के ऐप पर उपलब्ध है। सेल्फ-फाइलिंग के अलावा एक्सपर्ट-एसिस्टेड फाइलिंग का ऑप्शन भी उपलब्ध है। दोनों फिनटेक के सेल्फ फाइलिंग प्लान 24 रुपये से शुरू हो रहे हैं। लेकिन जियोफाइनेंस ने डिटेल प्राइसिंग स्ट्रक्चर पेश किया है।

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एनआरआई के रिटर्न फाइलिंग वाले प्लान भी उपलब्ध

सैलरीड टैक्सपेयर्स 24 रुपये से 499 रुपये की फीस चुकाकर खुद रिटर्न फाइल कर सकते हैं। कैपिटल गेंस, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस, क्रिप्टोकरेंसीज ट्रांजेक्शंस वाले टैक्सपेयर्स के लिए शुरुआती प्लान 99 रुपये का है। एक्सपर्ट एसिस्टेड प्लान की शुरुआत सैलरीड क्लास के लिए 649 रुपये से हो रही है। बिजनेस इनकम सहित एनआरआई जैसे टैक्सपेयर्स के लिए 2,924 रुपये तक का प्लान उपलब्ध है।

Maruti Grand Vitara gets offers of up to Rs 95,000 in July 2026

Maruti Grand Vitara in a showroom

Maruti Suzuki is offering attractive offers across its premium Nexa range in July 2026. Depending on the model and variant, these include cash discounts, exchange or scrappage offers, corporate benefits and loyalty bonuses. Exchange and scrappage benefits cannot be claimed together. The loyalty bonus is available only to existing Maruti customers, and it can be combined only with the exchange bonus. Corporate benefits are exclusively offered to eligible organisations and approved finance partners.

Disclaimer: Discounts may vary by city and are subject to stock availability. Please check with your local dealer for the exact figures.

Maruti Invicto discounts in July 2026

Up to Rs 2.10 lakh

Maruti Invicto

Every Maruti Invicto trim gets benefits of up to Rs 2.10 lakh this month, which is slightly lower than in June. These offers include a cash discount of up to Rs 50,000, exchange benefits of up to Rs 1 lakh, a Rs 50,000 loyalty bonus and a Rs 10,000 corporate benefit. The Invicto MPV is Maruti’s version of the Toyota Innova Hycross, and it is priced between Rs 24.97 lakh and Rs 28.60 lakh.

Maruti Grand Vitara discounts in July 2026

Up to Rs 95,000

The Maruti Grand Vitara gets benefits of up to Rs 95,000 in July. The Sigma petrol MT variant attracts the highest discounts of up to Rs 95,000, while the Delta petrol gets benefits of up to Rs 85,000. Buyers of the Zeta petrol and Alpha petrol variants get a Rs 25,000 cash discount along with a complimentary 5-year extended warranty (it cannot be exchanged for cash, and is non-transferable).

The strong hybrid variants are available with zero road tax benefit, a complimentary 5-year extended warranty, up to Rs 50,000 exchange bonus, Rs 30,000 upgrade loyalty bonus and a Rs 10,000 corporate benefit. The Delta CNG and Zeta CNG variants also come with total benefits of up to Rs 90,000.  The Grand Vitara is priced between Rs 10.76 lakh and Rs 19.72 lakh.

Maruti Jimny discounts in July 2026

Up to Rs 45,000

Maruti Jimny

Like last month, a cash discount of Rs 45,000 is available with all Maruti Jimny variants. The compact off-roader is priced between Rs 12.39 lakh and Rs 14.52 lakh.

Maruti XL6 discounts in July 2026

Up to Rs 45,000

Next, the Maruti XL6 gets offers going up to Rs 45,000 on both petrol and CNG variants. Thes comprise a cash discount of up to Rs 20,000 and a scrappage bonus of up to Rs 25,000. The XL6 is the 6-seat, more premium version of the Ertiga (sold via Arena outlets) and it is priced from Rs 11.57 lakh to Rs 14.52 lakh.

Maruti Baleno discounts in July 2026

Up to Rs 40,000

Maruti Baleno

The Maruti Baleno is on sale with benefits of up to Rs 40,000 on petrol-manual variants and AMT variants. Meanwhile, the CNG variants attract benefits of up to Rs 35,000. The Baleno premium hatchback starts at Rs 5.99 lakh and goes up to Rs 9.17 lakh.

Maruti Fronx discounts in July 2026

Up to Rs 25,000

Lastly, the Maruti Fronx gets benefits of up to Rs 25,000 in July. The turbo-petrol variants are available with a Rs 10,000 cash discount and a Rs 15,000 scrappage bonus. Meanwhile, the naturally-aspirated petrol and CNG variants do not get a cash discount but are offered with a scrappage bonus of up to Rs 15,000. The Fronx price starts at Rs 6.85 lakh and tops out at Rs 11.84 lakh.

Ex-showroom prices mentioned above are as on July 8, 2026.

New Tax Regime : न्यू टैक्स रिजीम चुनने से पहले सैलरी की इन 8 बातों का रखें ध्यान, वरना बढ़ सकती है टैक्स देनदारी

New Tax Regime : नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को अपनाने वाले नौकरीपेशा लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है। इसकी वजह कम टैक्स रेट और आसान नियम हैं।

लेकिन सिर्फ कम टैक्स स्लैब देखकर फैसला करना सही नहीं है। आपकी सैलरी का स्ट्रक्चर, टैक्स बचाने वाले निवेश, छूट (Exemptions) और वित्तीय जिम्मेदारियां तय करती हैं कि आपके लिए कौन-सी टैक्स व्यवस्था बेहतर रहेगी।

आइए जानते हैं कि नई टैक्स रिजीम को चुनने से पहले आपको किन 8 बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. HRA का फायदा मिलेगा या नहीं?

अगर आप किराए के घर में रहते हैं और House Rent Allowance (HRA) का फायदा लेते हैं, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। नई टैक्स व्यवस्था में HRA की छूट नहीं मिलती।

2. LTA का इस्तेमाल करते हैं?

अगर आप नियमित रूप से Leave Travel Allowance (LTA) का क्लेम करते हैं, तो नई टैक्स व्यवस्था चुनने पर यह टैक्स छूट खत्म हो जाएगी।

3. 80C में निवेश

अगर आप EPF, PPF, ELSS, लाइफ इंश्योरेंस, टैक्स सेविंग FD, बच्चों की ट्यूशन फीस, होम लोन या फिर सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश करते हैं, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था में इन पर टैक्स छूट मिलती है। नई व्यवस्था में यह लाभ नहीं मिलता।

4. NPS का नियम अलग है

अगर आपके NPS में कंपनी भी योगदान देती है, तो उसके योगदान पर मिलने वाली टैक्स छूट नई टैक्स व्यवस्था में भी जारी रहती है। लेकिन आपके अपने योगदान पर अतिरिक्त छूट नहीं मिलती।

5. होम लोन है तो हिसाब जरूर लगाएं

अगर आपने खुद रहने के लिए घर खरीदा है और उस पर होम लोन चल रहा है, तो पुरानी व्यवस्था में मूलधन और ब्याज दोनों पर टैक्स छूट मिल सकती है। नई व्यवस्था में यह फायदा नहीं मिलता।

5. सैलरी अलाउंस भी देखें

बच्चों की शिक्षा, हॉस्टल, ट्रांसपोर्ट जैसे कई अलाउंस पुरानी व्यवस्था में टैक्स बचाने में मदद करते हैं। नई व्यवस्था में इनमें से ज्यादातर छूट खत्म हो जाती हैं।

6. Flexible Benefit Plan (FBP)

कई कंपनियां भोजन, फोन, इंटरनेट, किताबें, प्रोफेशनल सब्सक्रिप्शन और दूसरे खर्चों का रीइंबर्समेंट देती हैं। इनका टैक्स नियम हर मामले में अलग हो सकता है। इसलिए अपनी सैलरी स्ट्रक्चर को ध्यान से समझें।

7. प्रोफेशनल टैक्स

कुछ राज्यों में कर्मचारियों से प्रोफेशनल टैक्स लिया जाता है। पुरानी टैक्स व्यवस्था में इसकी कटौती का लाभ मिलता है, जबकि नई व्यवस्था में आमतौर पर यह सुविधा नहीं होती।

8. रिटायरमेंट बेनिफिट

EPF, NPS और सुपरएन्युएशन फंड में कंपनी के योगदान पर तय सीमा तक टैक्स राहत मिलती है। अगर यह सीमा पार होती है, तो अतिरिक्त रकम पर टैक्स देना पड़ सकता है। यह नियम दोनों व्यवस्थाओं में लागू होता है।

किसके लिए कौन-सी व्यवस्था बेहतर?

अगर आप HRA लेते हैं, होम लोन चुका रहे हैं, 80C में अच्छा निवेश करते हैं, LTA और दूसरी टैक्स छूट का फायदा उठाते हैं, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था अब भी ज्यादा फायदेमंद हो सकती है।

वहीं, अगर आपकी सैलरी सीधी-सादी है, HRA नहीं मिलता, होम लोन नहीं है और टैक्स बचाने वाले निवेश कम हैं, तो नई टैक्स व्यवस्था बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Agniveer Bharti 2026: अग्निवीरों को मिल सकती है बड़ी राहत! 25% नहीं, अब 50% से 75% तक को स्थायी नौकरी देने की तैयारी

Agniveer Bharti 2026: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच की चार साल की सेवा अवधि इस साल पूरी होने वाली है। इससे पहले भारतीय सशस्त्र बल अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने की मौजूदा 25% सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नौसेना 75% तक और सेना तथा वायुसेना करीब 50% अग्निवीरों को नियमित सेवा में रखने का प्रस्ताव दे सकती हैं। हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, भारतीय सशस्त्र बलों में अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों के भविष्य को लेकर बड़ा बदलाव जल्द ही संभव है। मौजूदा नियमों के अनुसार, चार साल की सेवा पूरी करने के बाद प्रत्येक बैच के केवल 25% अग्निवीरों को मेरिट और संगठन की जरूरत के आधार पर नियमित सैनिक, नाविक या एयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाता है।

हालांकि, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार अब तीनों सेनाएं इस सीमा को बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। यह प्रस्ताव अभी रक्षा मामलों के विभाग (DMA) और तीनों सेनाओं के बीच चर्चा के चरण में है। सरकार या सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

क्या हो सकता है नया प्रस्ताव?

  • भारतीय नौसेना लगभग 75% अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने का प्रस्ताव दे सकती है।
  • भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना करीब 50% अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने की सिफारिश कर सकती हैं।
  • चार वर्षों की सेवा के दौरान अग्निवीर आधुनिक हथियार प्रणालियों, नई तकनीकों और फील्ड ऑपरेशन का अनुभव हासिल करते हैं।
  • सैन्य योजनाकारों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षित जवानों को अधिक संख्या में बनाए रखने से सेना की परिचालन क्षमता मजबूत हो सकती है।

स्पेशल यूनिटों में ज्यादा मौका

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि कुल रिटेंशन सीमा नहीं भी बढ़ती है, तब भी कुछ विशेष सैन्य यूनिट्स जैसे सेना की नई भैरव बटालियन में अनुभवी अग्निवीरों की संख्या अधिक रखी जा सकती है,। जबकि अन्य यूनिटों में चार साल के कार्यकाल वाले अग्निवीरों की तैनाती जारी रहेगी। फिलहाल अग्निपथ योजना के नियमों के अनुसार, प्रत्येक बैच के केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को मेरिट और संगठन की आवश्यकता के आधार पर नियमित सैनिक, नाविक या एयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाता है।

भर्ती भी बढ़ेगी

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले ट्रेनिंग के दौरान करीब 70,000 अग्निवीरों ने सेना में हिस्सा लिया। अगले भर्ती में लगभग 90,000 पदों पर भर्तियां निकाली जा सकती हैं। इसके अलावा सेना अगले दो वर्षों में करीब 1.8 लाख कर्मियों की कमी को भी अग्निवीर भर्ती के जरिए पूरा करने की योजना बना रही है। अग्निवीरों की स्थायी भर्ती बढ़ाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। यह फिलहाल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर विचाराधीन प्रस्ताव है।

सेवा निधि पैकेज क्या है और कितना मिलता है? (Seva Nidhi Package)

4 साल की सेवा पूरी होने के बाद, जो 75% अग्निवीर बाहर आएंगे (या जो परमानेंट भी होंगे), उन्हें एकमुश्त सेवा निधि पैकेज दिया जाता है। यह फंड इस तरह तैयार होता है:-

  • अग्निवीर का कुल 4 साल का योगदान: लगभग ₹5.02 लाख
  • सरकार का बराबर का योगदान: लगभग ₹5.02 लाख
  • कुल जमा राशि (ब्याज सहित): लगभग ₹11.71 लाख

सबसे बड़ा फायदा: यह ₹11.71 लाख का सेवा निधि पैकेज पूरी तरह से टैक्स-फ्री (Income Tax Free) होता है। इस पर कोई आयकर नहीं देना पड़ता।

अतिरिक्त भत्ते (Allowances): इस फिक्स सैलरी के अलावा अग्निवीरों को उनकी पोस्टिंग के हिसाब से रिस्क एंड हार्डशिप भत्ता (Risk & Hardship Allowance), राशन भत्ता, यूनिफॉर्म भत्ता और यात्रा भत्ता (Travel Allowance) भी मिलता है।

परमानेंट होने पर मिलने वाले फायदे (Permanent Salary & Benefits)

चार साल पूरे होने के बाद, बैच के 25% अग्निवीरों (जिसके बढ़ने की संभावना पर सेना विचार कर रही है) को भारतीय सेना के रेगुलर कैडर में शामिल किया जाएगा। परमानेंट होने के बाद उन्हें निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:-

नियमित सैलरी और रैंक: परमानेंट होते ही वे भारतीय सेना के फुल-टाइम सैनिक बन जाएंगे। उनका पे-स्केल (Pay Scale) रेगुलर सैनिकों जैसा हो जाएगा, जिसमें बेसिक पे, डीए (DA), एचआरए (HRA) और अन्य सभी मिलिट्री अलाउंस शामिल होंगे।

पेंशन का अधिकार (Pension Benefits): 4 साल की कॉन्ट्रैक्ट अवधि के दौरान पेंशन नहीं मिलती। लेकिन परमानेंट कैडर में चुने जाने के बाद, जब वे अपनी अगली 15 साल की न्यूनतम सेवा पूरी करके रिटायर होंगे, तो वे पूरी लाइफटाइम पेंशन और ग्रेच्युटी (Gratuity) के हकदार होंगे।

मेडिकल और कैंटीन की सुविधा: परमानेंट होने के बाद उन्हें और उनके परिवार को ECHS (भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना) के तहत आजीवन मुफ्त इलाज और CSD कैंटीन की पूरी सुविधाएं मिलेंगी।

प्रमोशन और सर्विस: वे सेना में नियमित रूप से प्रमोशन (जैसे लांस नायक, नायक, हवलदार, जेसीओ) पा सकेंगे और उनके पास आगे अधिकारी (Officer) बनने के लिए विभागीय परीक्षाएं देने का मौका भी होगा।

अन्य लाभ (Other Security Benefits)

4 साल की सर्विस के दौरान सभी अग्निवीरों को ये सुरक्षा कवर भी दिए जाते हैं:-

लाइफ इंश्योरेंस: ₹48 लाख का गैर-अंशदायी (Non-contributory) जीवन बीमा कवर।

शहादत पर मुआवजा: ड्यूटी के दौरान शहीद होने पर परिवार को ₹44 लाख की अनुग्रह राशि (Ex-gratia), बचे हुए कार्यकाल की पूरी सैलरी और सेवा निधि पैकेज समेत कुल ₹1 करोड़ से अधिक की आर्थिक मदद मिलती है।

दिव्यांगता मुआवजा (Disability): सेवा के दौरान चोट लगने या दिव्यांग होने पर ₹44 लाख (100% दिव्यांगता पर), ₹25 लाख (75% पर) और ₹15 लाख (50% दिव्यांगता पर) एकमुश्त दिए जाते हैं।

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10 most affordable cars on sale in India

10 most affordable cars in India

The entry-level segment has long been the backbone of the Indian car market. In recent years, though, the prices of entry-level cars have climbed sharply due to factors such as premiumisation and compliance with stricter safety and emissions norms, hurting the segment’s sales and even nudging some buyers towards used cars. That said, the GST revision implemented in September 2025 brought major relief, lowering the tax rate and creating room for demand to recover.

If you are in the market for a brand-new car under Rs 10 lakh, we have compiled 10 of the most affordable options currently available in India. It’s no surprise that Maruti continues to dominate this space, with as many as five models in the list.

10. Tata Tigor

Starts at Rs 5.55 lakh

With prices starting at Rs 5.55 lakh, the Tata Tigor is the cheapest sedan in India and the only one on this list. While the Tigor has been around for quite a while, Tata has introduced multiple updates for the compact sedan over its lifecycle to keep it fresh. The Tigor is powered by a 1.2-litre 3-cylinder engine, which can be had in an 86hp petrol or a 75.5hp CNG guise. Both fuel types offer 5-speed manual and 5-speed AMT options.

Tata Tigor price and mileage
PriceRs 5.55 lakh-Rs 8.84 lakh
Mileage (ARAI)MT: 19.2kpl | AMT: 19.6kpl | CNG: 26.49km/kg

9. Hyundai Grand i10 Nios

Starts at Rs 5.55 lakh

Prices for the Hyundai Grand i10 Nios start at Rs 5.55 lakh and go up to Rs 8.03 lakh for the top-end Asta AMT, making it the most expensive automatic variant on this list; the hatchback is also the entry point to Hyundai’s vast line-up in India. Under the hood, the Grand i10 Nios gets a 1.2-litre naturally aspirated petrol engine producing 83hp and 114Nm; gearbox options include a 5-speed manual or an AMT. The hatchback is also available with a CNG option, which starts at Rs 7.22 lakh.

Hyundai Grand i10 Nios price and mileage
PriceRs 5.55 lakh-Rs 8.03 lakh
Mileage (ARAI)MT: 16kpl | AMT: 18kpl

8. Maruti Suzuki Eeco

Starts at Rs 5.21 lakh

The Maruti Eeco is the only van on this list and a dependable vehicle with a versatile use case. It comes with a 1.2-litre 4-cylinder engine that puts out 81hp and 105Nm and is offered only with a manual transmission. Fun fact: the Eeco is the most affordable rear-wheel-drive car on sale in India.

Maruti Suzuki Eeco price and mileage
PriceRs 5.21 lakh-Rs 6.36 lakh
Mileage (ARAI)MT : 19.71kpl | CNG : 26.78km/kg

7. Citroen C3

Starts at Rs 4.99 lakh

The Citroen C3 is the entry point to the French carmaker’s line-up in India. Prices for the C3 start from Rs 4.99 lakh for the base 82hp 1.2-litre 3-cylinder naturally aspirated engine. Higher C3 variants offer a stronger 110hp 1.2-litre turbo-petrol engine option, priced at Rs 7.5 lakh for the manual and Rs 9.6 lakh for the torque-converter automatic. The latter makes the C3 the most powerful car on this list, and it is quite a fun little hatchback with peppy performance and tidy handling.

Citroen C3 price and mileage

PriceRs 4.99 lakh-Rs 9.60 lakh
Mileage (ARAI)1.2 MT: 19.3kpl | 1.2 turbo AT: 18.3kpl

6. Maruti Suzuki Wagon R

Starts at Rs 4.99 lakh

The Maruti Wagon R, one of India’s bestselling cars and the longest surviving nameplates, comes with two petrol engine choices: a 1.0-litre 3-cylinder mill producing 68hp and 89Nm and a 1.2-litre 4-cylinder unit delivering 83hp and 113Nm. Prices for the Wagon R start at Rs 4.99 lakh, and for those seeking convenience, an AMT option is available from Rs 5.97 lakh onwards, making it a practical and affordable Maruti car.

Maruti Suzuki Wagon R price and mileage

PriceRs 4.99 lakh-Rs 6.84 lakh
Mileage (ARAI)1.0 MT / AMT: 24.35kpl / 25.19kpl | 1.2 MT / AMT: 23.56kpl / 24.43kpl | CNG : 34.05km/kg

5. Maruti Suzuki Celerio

Starts at Rs 4.70 lakh

The Maruti Suzuki Celerio is known for offering extremely fuel-efficient petrol and CNG powertrains. It is equipped with a 1.0-litre 3-cylinder engine producing 67hp and 89Nm. The Celerio has a starting price of Rs 4.7 lakh; prices for its AMT option start from Rs 5.61 lakh. The compact dimensions of the Celerio, coupled with its stellar fuel efficiency figures, make it an ideal urban runabout.

Maruti Suzuki Celerio price and mileage

PriceRs 4.70 lakh-Rs 6.73 lakh
Mileage (ARAI)MT: 24.97kpl | AMT: 26.68kpl | CNG : 34.43km/kg

4. Tata Tiago

Starts at Rs 4.69 lakh

Updated for 2026 and beyond, the Tiago remains the cheapest Tata car you can buy. As part of the update, the hatchback underwent a major revamp inside and out, and it packs more features, too. Under the bonnet, the Tiago comes with the same 1.2-litre 3-cylinder engine in 86hp petrol and 75.5hp CNG versions, both of which are available with 5-speed manual and 5-speed AMT options. The latter makes the Tiago the only car on this list to offer a CNG AMT powertrain. With a strengthened bodyshell and 6 airbags as standard, the Tiago also scores high on safety.

Tata Tiago price and mileage

PriceRs 4.69 lakh-Rs 8.55 lakh
Mileage (ARAI)*MT: 19.01kpl | AMT: 19kpl | CNG: 26.49km/kg | CNG AMT: 28.06km/kg

*Pre-update Tiago mileage figures.

3. Renault Kwid

Starts at Rs 4.3 lakh

A direct Maruti Alto K10 rival, the Renault Kwid is priced from Rs 4.53 lakh. The Kwid scores well on features, and the Climber variant even brings some rugged appeal. The budget hatchback is powered by a 1.0-litre 3-cylinder petrol engine that produces 69hp and 92.5Nm; it gets both MT and AMT gearbox options. However, unlike Maruti, which offers factory-fitted CNG kits, the Kwid gets it as dealer-level fitment.

Renault Kwid price and mileage

PriceRs 4.53 lakh-Rs 5.61 lakh
Mileage (ARAI)MT: 21.7kpl | AMT: 22.5kpl

2. Maruti Suzuki Alto K10

Starts at Rs 3.70 lakh

The Maruti Alto K10 prices start from Rs 3.7 lakh. Even as one of the most budget-friendly cars in India, it comes equipped with six airbags as standard and impresses with its frugality and drivability. The Maruti Alto K10 is powered by a 1.0-litre 3-cylinder petrol engine that produces 67hp and 89Nm. Maruti also offers an AMT gearbox option for the Alto K10, starting at Rs 4.95 lakh. There is a CNG variant available, too, priced from Rs 4.82 lakh.

Maruti Suzuki Alto K10 price and mileage

PriceRs 3.70 lakh-Rs 5.45 lakh
Mileage (ARAI)MT : 24.39kpl | AMT: 24.9kpl | CNG: 33.40km/kg

1. Maruti Suzuki S-Presso

Starts at Rs 3.5 lakh

The most affordable car on sale in India is the Maruti S-Presso. Though the carmaker terms it as a ‘mini SUV’, it’s a high-riding hatchback at best. However, the upright stance and shape mean it has a roomy cabin that scores well in terms of practicality. Under the hood is a 1.0-litre 3-cylinder petrol engine that produces 67hp and 89Nm; it is available with MT and AMT gearbox options, as well as a factory-fitted CNG kit. Automatic variants of the S-Presso are priced from Rs 4.75 lakh. 

Maruti Suzuki S-Presso price and mileage

PriceRs 3.5 lakh-Rs 5.25 lakh
Mileage (ARAI)MT: 24.12kpl | AMT: 25.3kpl | CNG: 32.73km/kg

All prices are ex-showroom, India.

Income Tax Return: अगर आपके फॉर्म 16 में टैक्स जीरो है तो भी न करें ये भूल! इन 4 बड़े फायदों के लिए जरूर फाइल करें ITR

नौकरीपेशा लोगों के बीच अक्सर यह आम धारणा होती है कि अगर उनके फॉर्म 16 में कोई टैक्स नहीं कटा है या फिर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती है तो उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक फॉर्म 16 में टैक्स लायबिलिटी निल होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको आईटीआर दाखिल करने से छूट मिल गई है। ऐसा न करना आपको भारी पड़ सकता है।

फॉर्म 16 नहीं है आपकी वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर

King Stubb & Kasiva, Advocates and Attorneys के पार्टनर आदित्य भट्टाचार्य का कहना है कि एक आम गलतफहमी यह है कि अगर फॉर्म 16 में कोई टीडीएस या देय टैक्स नहीं है तो आईटीआर फाइल करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, फॉर्म 16 सिर्फ इंप्लॉयर द्वारा भुगतान किए गए वेतन और काटे गए टैक्स (अगर कोई है तो) का एक रिकॉर्ड है। यह किसी व्यक्ति की पूरी वित्तीय तस्वीर को नहीं दर्शाता है। आईटीआर फाइल करने की अनिवार्यता इनकम टैक्स एक्ट के प्रावधानों, आपकी कुल आय और वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए वित्तीय लेनदेन पर निर्भर करती है।

इन 4 बड़े फायदों के लिए जरूर फाइल करें ITR

भले ही आपके फॉर्म 16 में टैक्स जीरो दिख रहा हो लेकिन नीचे दी गई स्थितियों और फायदों के लिए आपको आईटीआर जरूर दाखिल करना चाहिए-

1- टैक्स रिफंड का दावा करने के लिए

कई बार ऐसा होता है कि बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर टीडीएस काट लेते हैं या फिर नौकरी बदलने की स्थिति में पिछला इंप्लॉयर नौकरी छोड़ने से पहले टैक्स काट लेता है। भले ही वित्तीय वर्ष के अंत में आपकी कुल अंतिम टैक्स देनदारी शून्य ही क्यों न हो, लेकिन इस कटे हुए एक्स्ट्रा टैक्स को वापस पाने का एकमात्र जरिया आईटीआर है। बिना रिटर्न फाइल किए आप रिफंड क्लेम नहीं कर सकते।

2- वित्तीय घाटे को आगे बढ़ाने के लिए

अगर आप शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी से कोई कैपिटल लॉस उठाते हैं तो नियमों के तहत आप इस घाटे को भविष्य के मुनाफे के साथ एडजस्ट कर सकते हैं। यह लाभ आपको तभी मिलेगा जब आप निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना आईटीआर दाखिल करेंगे। डेडलाइन चूकने का मतलब है कि आप इस मूल्यवान टैक्स लाभ को हमेशा के लिए खो देंगे।

3- इन विशेष सरकारी शर्तों/नियमों को पूरा करने के लिए

टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार भले ही आपका अंतिम टैक्स शून्य हो लेकिन अगर आप वित्तीय वर्ष में निम्नलिखित में से किसी भी शर्त के दायरे में आते हैं तो आपके लिए आईटीआर फाइल करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता है:

  • एक या अधिक सेविंग्स बैंक अकाउंट्स में 50 लाख रुपये से अधिक जमा करना।
  • एक या अधिक करंट अकाउंट्स (चालू खातों) में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक जमा करना।
  • अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से अधिक खर्च करना।
  • एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल चुकाना।
  • अगर आप भारत के निवासी हैं और विदेशों में संपत्ति रखते हैं, किसी विदेशी संस्था में वित्तीय हित रखते हैं, विदेशी बैंक खाते में हस्ताक्षर करने का अधिकार रखते हैं या विदेशी संपत्तियों के लाभार्थी हैं।
  • वर्ष के दौरान कुल टीडीएस (TDS) या टीसीएस (TCS) 25000 रुपये या उससे अधिक हो (वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 50000 रुपये है)।
  • ऐसे प्रोफेशनल्स जिनकी कुल प्राप्तियां 10 लाख रुपये से अधिक हैं, भले ही उनकी टैक्स योग्य आय बुनियादी छूट सीमा से कम ही क्यों न हो।

4- लोन और वीजा के लिए पुख्ता इनकम प्रूफ

‘दिनेश आर्जव एंड एसोसिएट्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स’ की पार्टनर और एनआरआई टैक्स एक्सपर्ट प्रियल गोयल जैन कहती हैं कि कंप्लायंस के नजरिए से परे आपका आईटीआर चुपचाप आपके लिए दूसरी जगहों पर भी बहुत काम करता है। बैंक और वीजा कार्यालय अक्सर आय के प्रमाण के रूप में इसी दस्तावेज को मांगते हैं। इसलिए रिकॉर्ड में आईटीआर का होना बेहद फायदेमंद है, भले ही तकनीकी रूप से आपके लिए इसे फाइल करना जरूरी न रहा हो।

ऐसे में फॉर्म 16 में जीरो टैक्स देखकर आईटीआर न भरने की धारणा नुकसानदेह हो सकती है। ‘AQUILAW’ की लीड कंसलटेंट (टैक्स) – IDT डिंपल जोगानी के मुताबिक, फाइलिंग की आवश्यकता को नजरअंदाज करने से टैक्सपेयर्स न सिर्फ अपना रिफंड खो सकते हैं बल्कि नुकसान को कैरी फारवर्ड करने का मौका भी गंवा सकते हैं। अगर आयकर विभाग बाद में यह पाता है कि आपके लिए फाइलिंग अनिवार्य थी तो आपको स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भी मिल सकता है। मामले के तथ्यों के आधार पर लेट फाइलिंग फीस, ब्याज या अन्य परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने अब ऐसी गलतफहमियों की गुंजाइश को खत्म कर दिया है। इंप्लॉयर, बैंकों, म्यूचुअल फंडों, स्टॉक एक्सचेंजों और अन्य वित्तीय संस्थानों से मिलने वाली जानकारी अब टैक्सपेयर के एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) में दिखाई देती है। इसके जरिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके द्वारा किए गए वित्तीय लेनदेन की तुलना आपके रिटर्न में घोषित आय से आसानी से कर लेता है।

एक्सपर्ट्स की सलाह: सिर्फ फॉर्म 16 पर न रहें निर्भर

जैसे-जैसे टैक्स फाइलिंग का सीजन तेज हो रहा है विशेषज्ञ टैक्सपेयर्स को सलाह देते हैं कि वे ‘जीरो टीडीएस’ को ‘जीरो कंप्लायंस’ समझने की भूल न करें। सिर्फ फॉर्म 16 पर निर्भर रहने की बजाय, व्यक्तियों को अपनी आय के सभी स्रोतों की समीक्षा करनी चाहिए। अपने फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) की जांच करनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे आईटीआर फाइल करने की शर्तों के दायरे में आते हैं या नहीं।

ITR 2026: अपने इनकम टैक्स रिटर्न पर चाहिए मैक्सिमम रिफंड तो आईटीआर फाइल करते समय अपनाएं ये 5 शानदार तरीके

Income Tax Return Best Strategies: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन आते ही टैक्सपेयर्स के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि वे अपना टैक्स रिफंड कैसे बढ़ाएं। टैक्स रिफंड को अधिकतम करना सिर्फ आखिरी समय में डिडक्शन ढूंढने तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी शुरुआत इस बात से होती है कि आपका टैक्स रिटर्न आपकी इनकम, निवेश और पहले से भुगतान किए गए टैक्स को बिल्कुल सही-सही दर्शाता हो।

क्या होता है इनकम टैक्स रिफंड?

इनकम टैक्स रिफंड तब जारी किया जाता है जब किसी वित्तीय वर्ष के दौरान टैक्सपेयर द्वारा चुकाया गया टैक्स, उसकी वास्तविक टैक्स देनदारी से अधिक हो जाता है। यह एक्स्ट्रा टैक्स सोर्स पर टैक्स कटौती (TDS), सोर्स पर टैक्स कलेक्शन (TCS) या एडवांस टैक्स के रूप में जमा हो सकता है। टैक्सपेयर्स अपना आईटीआर दाखिल करके इस एक्स्ट्रा टैक्स अमाउंट को क्लेम कर सकते हैं। आपको बता दें कि रिटर्न फाइल करने के बाद रिफंड का स्टेटस इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल और दूसरे ऑप्शन की मदद से ऑनलाइन ट्रैक भी किया जा सकता है।

क्लियरटैक्स की टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन के मुताबिक टैक्सपेयर्स को अपने लिए लागू सभी उपलब्ध छूटों और कटौतियों को क्लोजली रिव्यू करना चाहिए। दोनों टैक्स रिजीम के फायदों की तुलना करनी चाहिए और यह वेरिफाई करना चाहिए कि टैक्स डॉक्युमेंट्स में दी गई जानकारी ऑफिशियल रिकॉर्ड से मैच करती हो। आपकी छोटी सी गलती भी रिफंड में देरी कर सकती है या नोटिस का कारण बन सकती है।

मैक्सिमम रिफंड पाने की 5 शानदार स्ट्रैटिजी

अपने इनकम टैक्स रिफंड को अधिकतम करने के लिए टैक्सपेयर्स को नीचे दिए गए तरीकों को अपनाना चाहिए:

1- दोनों टैक्स रिजीम (Old vs New) की तुलना करें

रिटर्न फाइल करने से पहले पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाओं के तहत अपनी टैक्स देनदारी की तुलना करें। उस रिजीम का चयन करें जिसमें आपका टैक्स आउटगो सबसे कम हो। अगर वित्त वर्ष के दौरान आपका अधिक टीडीएस कट चुका है तो सही रिजीम चुनकर आप अपना रिफंड काफी हद तक बढ़ा सकते हैं।

2- ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत डिडक्शंस का पूरा लाभ उठाएं

अगर आप ओल्ड टैक्स रिजीम चुनते हैं तो आप अलग-अलग कटौतियों के माध्यम से अपनी टैक्स योग्य इनकम को कम कर सकते हैं। इसके लिए नीचे दी गई जानकारी को देखें-

सेक्शन 80C: पीपीएफ, ईएलएसएस, ईपीएफ, एनएससी, जीवन बीमा प्रीमियम और 5 साल की टैक्स-सेविंग एफडी में निवेश करके आप ₹1.5 लाख तक की कटौती का दावा कर सकते हैं।

सेक्शन 80D: हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम के माध्यम से ₹25000 से ₹50000 तक की अतिरिक्त टैक्स बचत का दावा किया जा सकता है। यह क्लेम इंश्योर्ड शख्स और परिवार के सदस्यों की उम्र पर निर्भर करता है।

सेक्शन 24(b) और HRA: सैलरीड कर्मचारी निर्धारित शर्तों के अधीन हाउस रेंट अलाउंस (HRA) छूट का दावा कर सकते हैं। साथ ही खुद के घर के होम लोन के ब्याज पर ₹2 लाख तक की कटौती पा सकते हैं।

3- नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का अतिरिक्त फायदा

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में योगदान करने वाले लोग सेक्शन 80C की सीमा के ऊपर और अतिरिक्त सेक्शन 80CCD(1B) के तहत ₹50000 तक की एक्स्ट्रा कटौती का दावा कर सकते हैं। सेक्शन 80CCD(2) के तहत एंप्लॉयर के योगदान पर भी टैक्स लाभ मिलता है। यह कटौती दोनों टैक्स रिजीम (पुरानी और नई) में उपलब्ध है। इसके तहत एंप्लॉयर की कैटेगिरी के आधार पर ओल्ड रिजीम में वेतन के 10 प्रतिशत तक और न्यू रिजीम में 14 प्रतिशत तक के एंप्लॉयर योगदान पर दावा किया जा सकता है।

4- स्टैंडर्ड डिडक्शन और टैक्स रिबेट

सैलरीड टैक्सपेयर्स टैक्स योग्य इनकम की गणना करते समय ऑटोमेटिकली स्टैंडर्ड डिडक्शन के हकदार होते हैं। यह कटौती ओल्ड रिजीम के तहत ₹50000 और न्यू रिजीम के तहत ₹75000 है। इसके अलावा पात्र टैक्सपेयर्स सेक्शन 87A के तहत रिबेट का लाभ उठा सकते हैं जिससे अगर टैक्स योग्य आय निर्धारित सीमा के भीतर रहती है तो टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है।

इसके अलावा फैमिली पेंशन प्राप्तकर्ताओं को सेक्शन 57(iia) के तहत कटौती मिलती है। यह कटौती ओल्ड रिजीम में ₹15000 तक और न्यू रिजीम में ₹25000 तक उपलब्ध है, जो टैक्स योग्य आय को कम करके रिफंड की पात्रता में सुधार करती है।

5- रिफंड क्लेम करने के लिए अपनाएं ये जरूरी स्टेप्स

रिफंड का दावा करने के लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है, भले ही टैक्सपेयर के लिए सामान्य रूप से रिटर्न दाखिल करना जरूरी न हो। रिफंड प्रक्रिया को तेज करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

सही ITR फॉर्म चुनें: इनकम के सोर्स, आवासीय स्थिति और टैक्सपेयर की श्रेणी के आधार पर सही फॉर्म चुनें। गलत फॉर्म चुनने से रिपोर्टिंग में त्रुटियां हो सकती हैं और रिफंड अटक सकता है।

आय की सटीक गणना: अपनी आय के सभी स्रोतों, लागू कटौतियों और छूटों को सही ढंग से घोषित करें।

TDS डिटेल वेरिफाई करें: रिटर्न में पहले से भरे हुए टीडीएस डिटेल का फॉर्म 16, फॉर्म 16A या अन्य संबंधित रिकॉर्ड से मिलान जरूर करें ताकि कोई विसंगति न रहे।

सही बैंक खाते का डिटेल दें: अपने एक्टिव बैंक खाते की सही जानकारी दर्ज करें क्योंकि रिफंड सीधे रिटर्न से लिंक बैंक खाते में ही क्रेडिट किया जाता है। गलत जानकारी देने से ट्रांसफर फेल हो सकता है।

तुरंत ई-वेरिफिकेशन पूरा करें: रिटर्न दाखिल करने के बाद जितनी जल्दी हो सके इसे ई-वेरीफाई करें। वेरिफिकेशन के बाद ही रिटर्न प्रोसेस होता है और समय पर वेरिफिकेशन से रिफंड जल्दी जारी होने में मदद मिलती है।