‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ सीजन 7 का ट्रेलर जारी, 23 अक्टूबर से होगा प्रसारण

जियोहॉटस्टार ने लोकप्रिय एनिमेटेड सीरीज ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ के सातवें सीजन का ट्रेलर जारी कर दिया है। ग्राफिक इंडिया द्वारा निर्मित इस सीजन का प्रीमियर 23 अक्टूबर 2026 को होगा।

नए सीजन में लंका का युद्ध निर्णायक मोड़ पर पहुंचता है, जहां हनुमान रावण का अंत करने वाले एक विशेष अस्त्र की तलाश में निकलते हैं। इस दौरान उनकी यात्रा युद्धभूमि से आगे समय के विभिन्न पड़ावों तक पहुंचती है, जहां उन्हें भगवान राम के अतीत के अनजाने पहलुओं और अपनी दिव्यता की वास्तविक शक्ति से जुड़े रहस्यों का पता चलता है।

सीजन में रावण अपने सबसे शक्तिशाली रूप में नजर आएगा। एक्शन, आस्था, भावनाओं और मित्रता से भरपूर यह कहानी हनुमान की अब तक की सबसे चुनौतीपूर्ण लड़ाई और उनकी असीम शक्ति के नए पहलुओं को सामने लाएगी।

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शरद केलकर एक बार फिर रावण के किरदार को अपनी आवाज देंगे। उन्होंने कहा कि सीरीज का सातवां सीजन हनुमान की यात्रा को नई दिशा में ले जाएगा और दर्शकों को उनकी दिव्यता तथा अपार शक्ति के ऐसे पहलुओं से परिचित कराएगा, जिन्हें उन्होंने पहले नहीं देखा होगा।

ग्राफिक इंडिया के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शरद देवराजन ने कहा कि जियोहॉटस्टार के साथ साझेदारी ने इस पौराणिक दुनिया का विस्तार करने का अवसर दिया है। सातवें सीजन में हनुमान की यात्रा को युद्धभूमि से आगे समय के विभिन्न पड़ावों तक ले जाते हुए कहानी का अब तक का सबसे अप्रत्याशित अध्याय प्रस्तुत किया गया है।

शरद देवराजन, जीवन जे. कांग और चारुवी अग्रवाल द्वारा निर्मित इस सीजन का निर्देशन जीवन जे. कांग और नवीन जॉन ने किया है। इसकी पटकथा शरद देवराजन, जीवन जे. कांग, सरवत चड्ढा और शिवांगी सिंह ने लिखी है।

‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ सीजन 7 का प्रीमियर 23 अक्टूबर से विशेष रूप से जियोहॉटस्टार पर होगा।

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Ramayana Part 1 Advance Booking: दुनिया भर में 5 नवंबर को रिलीज होगी ‘रामायणम् पार्ट 1’, दशहरा पर खुलेगी एडवांस बुकिंग

Ramayana Part 1 Advance Booking: नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायणम् पार्ट वन’ के मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट को लेकर बनी उलझन को दूर कर दिया है। यह फिल्म 5 नवंबर 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में सभी प्रीमियम फॉर्मेट में रिलीज होगी। इस बात की घोषणा रविवार 11 अक्टूबर को इंस्टाग्राम पर की गई।

लीड एक्टर्स वाला एक नया पोस्टर शेयर करते हुए मेकर्स ने लिखा, “नवरात्रि के शुभ अवसर पर हम एक नए युग की शुरुआत का जश्न मना रहे हैं। यह राम के युग का आरंभ है। नमित मल्होत्रा ​​की ‘रामायणम् पार्ट 1’ 5 नवंबर से दुनिया भर के सिनेमाघरों में। सभी प्रीमियम फॉर्मेट में। दशहरा पर एडवांस बुकिंग शुरू होगी।

यह ऐलान फिल्म की रिलीज डेट को लेकर चल रही उलझन के बीच हुआ है। सोनी पिक्चर्स द्वारा जारी किए गए इंटरनेशनल ट्रेलर में शुरुआत में दुनिया भर में रिलीज की तारीख 6 नवंबर बताई गई थी। वहीं प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ​​ने कहा था कि फिल्म को भारत में दिवाली पर रिलीज करने का प्लान है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फिल्म 5 नवंबर को भारतीय सिनेमाघरों में आ सकती है और 4 नवंबर को इसके पेड प्रीव्यू हो सकते हैं। हालांकि मेकर्स की हालिया घोषणा से यह कन्फर्म हो गया है कि फिल्म दुनिया भर में 5 नवंबर को रिलीज होगी। उन्होंने यह भी बताया है कि दशहरा पर इसकी एडवांस बुकिंग शुरू हो जाएगी।

नितेश तिवारी के निर्देशन और नमित मल्होत्रा ​​के प्रोडक्शन में बनी ‘रामायणम् पार्ट वन’ इस साल की सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली भारतीय फिल्मों में से एक है। ‘रामायणम्’ में रणबीर कपूर भगवान राम के रोल में, साई पल्लवी सीता के रोल में, यश रावण के रोल में, सनी देओल हनुमान के रोल में और रवि दुबे लक्ष्मण के रोल में नजर आएंगे।

नमित मल्होत्रा ​​के प्राइम फोकस स्टूडियोज ने DNEG और यश के मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स के साथ मिलकर इस फिल्म को बनाया है और इसे दो हिस्सों वाली एपिक फिल्म के तौर पर प्लान किया गया है। ‘रामायणम्’ का पहला पार्ट इस साल दुनिया भर में रिलीज़ होगा, जबकि दूसरा पार्ट 2027 की दिवाली पर आएगा। ये फिल्में हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में रिलीज होंगी। फिल्म IMAX में भी रिलीज होगी। सोनी पिक्चर्स भारत को छोड़कर दुनिया भर में इसे डिस्ट्रीब्यूट करेगा, जबकि धर्मा प्रोडक्शन्स हिंदी भाषी मार्केट में इसके डिस्ट्रीब्यूशन का काम संभालेगा।

Tanushree Dutta: ‘जाते-जाते भी चैन छीन ले गया…’, तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर की मौत के बाद उनके ऊपर काले जादू किए जाने का बड़ा दावा किया

Tanushree Dutta: तनुश्री दत्ता ने एक अन्य वीडियो में 8 अक्टूबर को नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी आलोचना की। इस नए वीडियो में तनुश्री ने उनकी मौत के बाद भी पाटेकर पर उनके विचारों पर सवाल उठाने के लिए ट्रोल्स की आलोचना की और पूछा कि लोग हर साल रावण का पुतला क्यों जलाते हैं।

दत्ता ने साझा किया- जो लोग मेरी ट्रोलिंग कर रहे हैं वो क्यों कर रहे हैं मुझे समझा नहीं आ राहा, जिस इंसान ने मेरी जिंदगी खराब कर दी, मैंने ईविल डेड बोल दिया तो इतना हंगामा होगा।” नाना पाटेकर ने अपनी मौत के बाद भी उन्हें कैसे मुश्किल स्थिति में छोड़ इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “ये जाते-जाते भी मुझे ट्रोल करके गया मुझे परेशानी देकर गया, कुछ आत्माएं इतनी काली होती हैं।”

उन लोगों से सवाल करते हुए जिन्होंने पाटेकर की मौत के बाद भी उनकी आलोचना की और रावण का उदाहरण लिया, उन्होंने कहा, “मेरे धर्म ने सिखाया है के शैतान जीते जी शैतान है और मरने के बाद भी शैतान है।” उन्होंने आगे कहा, “तेरवी तक रहे प्रेतलोक में फिर नरक में।”

नाना पाटेकर ने उन्हें कैसे परेशान किया तनुश्री ने कहा-“मेरी जिंदगी को नर्क बनाने की कोशिश की नाना पाटेकर ने और उसके गुंडों ने। उन्होंने और भी मजबूत दावे करते हुए कहा, “ये अपने हाथों को मरा है। क्योंकि जैसे सुशांत सिंह राजपूत-दिशा सालियान का केस निकल आया है, तो बहुत सारे लोग एक्सपोज हुए हैं और बहुत ही गहरी जांच चल रही है। तो दूर-दूर से भी किसका कनेक्शन है तो उसका आज नहीं तो कल नाम आने वाला है।”तो मुझे थोड़ा शक है ये सच में मारा गया है या भागने की कोई तरकीब है।”

तनुश्री ने अपने वीडियो में यह भी दावा किया कि नाना पाटेकर और उनके सहयोगियों ने उन पर काला जादू करने की कोशिश की थी और उन्हें धीमा जहर देने के लिए नौकरानी को भी भेजा था।

नाना पाटेकर के निधन के बारे में

जाने-माने अभिनेता नाना पाटेकर (75 वर्ष) का 8 अक्टूबर को कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। खबरों के अनुसार उन्हें गोवा स्थित अपने घर पर सीने में तेज दर्द हुआ, जिसके बाद एक मेडिकल टीम उनके फ्लैट पर भेजी गई। पहुंचने पर वे बेहोश पाए गए। उन्हें वहीं कार्डियक मसाज दी गई और फिर डोना पाउला के एक प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाया गया। काफी कोशिश के बाद भी वह बच नहीं सके।

‘रामायणम्’ में कैकेयी और मंथरा के रूप में नजर आएंगी लारा दत्ता और शीबा चड्ढा

फिल्म ‘रामायणम्’ के निर्माताओं ने रानी कैकेयी के रूप में लारा दत्ता और मंथरा के रूप में शीबा चड्ढा के कैरेक्टर पोस्टर जारी किए हैं। ये दोनों किरदार रामायण की कहानी के अहम मोड़ से जुड़े हैं, जिनके फैसलों और संवादों से भगवान राम के जीवन की दिशा बदल जाती है।

निर्माताओं की ओर से जारी पोस्टरों में लारा दत्ता को रानी कैकेयी के शाही अंदाज में दिखाया गया है। पारंपरिक पोशाक और आभूषणों से सुसज्जित उनका लुक अयोध्या की रानी की भव्यता को दर्शाता है। वहीं, शीबा चड्ढा मंथरा के किरदार में एक अलग अंदाज में नजर आ रही हैं।

फिल्म की कहानी में कैकेयी की दो इच्छाएं राजा दशरथ और भगवान राम के जीवन में निर्णायक बदलाव लाती हैं। वहीं, मंथरा की सलाह कैकेयी के फैसले को प्रभावित करती है, जिसके परिणामस्वरूप राम को वनवास जाना पड़ता है और अयोध्या की राजनीति एवं राजपरिवार का भविष्य बदल जाता है।

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निर्माताओं ने सोशल मीडिया पर पोस्टर साझा करते हुए कैकेयी की इच्छाओं को राम के भाग्य में बदलाव और मंथरा की बातों को घटनाओं की दिशा बदलने वाली कड़ी के रूप में पेश किया है।

इससे पहले फिल्म में राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे अरुण गोविल का पोस्टर जारी किया गया था। टेलीविजन पर भगवान राम की भूमिका से लोकप्रिय हुए अरुण गोविल अब इस फिल्म में अयोध्या के राजा दशरथ के किरदार में नजर आएंगे।

नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही ‘रामायणम्’ में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे हैं।

नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज ने डीएनईजी और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के साथ मिलकर इस फिल्म का निर्माण किया है। दो भागों में बन रही यह फिल्म हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में रिलीज होगी। फिल्म का पहला भाग दिवाली 2026 और दूसरा भाग दिवाली 2027 में दुनियाभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की योजना है। फिल्म को आईमैक्स प्रारूप में भी रिलीज किया जाएगा।

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‘रामायणम्’ में अरुण गोविल बने राजा दशरथ, मेकर्स ने जारी किया नया पोस्टर

बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायणम्’ के मेकर्स ने फिल्म से अरुण गोविल का नया सोलो पोस्टर जारी किया है, जिसमें वह अयोध्या के राजा और भगवान राम के पिता राजा दशरथ के किरदार में नजर आ रहे हैं। अरुण गोविल के इस लुक ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। खास बात यह है कि अरुण गोविल को आज भी टेलीविजन पर भगवान राम की प्रतिष्ठित भूमिका निभाने के लिए याद किया जाता है।

अरुण गोविल ने भगवान राम की भूमिका के जरिए कई पीढ़ियों के दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। अब ‘रामायणम्’ में उन्हें उसी महागाथा के एक महत्वपूर्ण किरदार, राजा दशरथ के रूप में देखना अपने आप में खास अनुभव होगा। फिल्म में उनका शामिल होना इसकी कास्टिंग को एक अलग आयाम देता है, क्योंकि राम के किरदार को प्रतिष्ठित बनाने वाले अभिनेता अब उनके पिता की भूमिका निभा रहे हैं।

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मेकर्स ने सोशल मीडिया पर पोस्टर साझा करते हुए लिखा, “एक समय उन्होंने एक पूरी पीढ़ी के लिए राम का किरदार जिंदा किया था। अब वह अयोध्या के राजा के रूप में रामायणम् की दुनिया में वापसी कर रहे हैं। अरुण गोविल बतौर राजा दशरथ।”

पोस्टर में अरुण गोविल शाही अंदाज में राजा दशरथ के रूप में नजर आ रहे हैं। उनके परिधान और लुक में अयोध्या के राजा के व्यक्तित्व, गरिमा और प्रभाव को उभारने की कोशिश की गई है। यह लुक इसलिए भी खास है क्योंकि दर्शकों ने उन्हें लंबे समय तक भगवान राम के रूप में देखा है और अब वह उसी किरदार के पिता की भूमिका में दिखाई देंगे।

‘रामायणम्’ में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे।

नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज ने डीएनईजी और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के साथ मिलकर किया है। दो भागों में बनने वाली यह महागाथा का पहला भाग 05 नवंबर 2026 और दूसरा भाग दिवाली 2027 में दुनियाभर में रिलीज होगा। फिल्म हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में रिलीज की जाएगी तथा इसे दुनियाभर में आईमैक्स फॉर्मेट में भी प्रदर्शित किया जाएगा।

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Dussehra 2026: कब मनाया जाएगा इस साल दशहरा? जानें तारीख, समय, विजय मुहूर्त और महत्व

Dussehra 2026: दशहरा का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह भगवान राम की रावण पर जीत के साथ-साथ देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत से भी जुड़ा है।इसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व इस साल मंगलवार, 20 अक्टूबर, 2026 को मनाया जाएगा। द्रिक पंचांग के अनुसार, अश्विन शुक्ल दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे शुरू होगी और 21 अक्टूबर, 2026 को दोपहर 2:11 बजे खत्म होगी।

दशहरा 2026 की तारीख और समय

दशहरा/विजयादशमी : मंगलवार, 20 अक्टूबर, 2026

दशमी तिथि शुरू : 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे

दशमी तिथि खत्म : 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे

विजय मुहूर्त : शहर के हिसाब से अलग-अलग

नई दिल्ली विजय मुहूर्त : दोपहर 1:59 बजे से दोपहर 2:45 बजे

मुंबई विजय मुहूर्त : दोपहर 2:19 बजे से दोपहर 3:06 बजे

कोलकाता बंगाल विजयदशमी : बुधवार, 21 अक्टूबर

कोलकाता अपरान्ह पूजा : दोपहर 12:30 बजे से दोपहर 2:49 बजे

क्यों अलग-अलग होती है दशहरा की तारीख?

भारत के ज़्यादातर हिस्सों में, विजयदशमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। हालांकि, बंगाल में, बिजॉय दशमी बुधवार, 21 अक्टूबर को इलाके के दुर्गा पूजा कैलेंडर के हिसाब से मनाई जाएगी। 20 अक्टूबर और 21 अक्टूबर के बीच अंतर मुख्य रूप से क्षेत्रीय परंपराओं और स्थानीय पंचांग की गणना की वजह से है।

दशहरा 2026 पर विजय मुहूर्त क्या है?

विजय मुहूर्त को पारंपरिक रूप से दशहरा से जुड़े कुछ रीति-रिवाजों और औपचारिकताओं के लिए एक शुभ समय माना जाता है।

नई दिल्ली : 20 अक्टूबर को दोपहर 1:59 PM–2:45 PM

मुंबई : 20 अक्टूबर को दोपहर 2:19 PM–3:06 PM

कोलकाता : 20 अक्टूबर को दोपहर 1:17 PM–2:03 PM

दशहरा क्यों मनाया जाता है?

पूरे भारत में दशहरा के कई धार्मिक और सांस्कृतिक मतलब हैं।

भगवान राम की रावण पर जीत : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयदशमी भगवान राम की राक्षस राज रावण पर जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस घटना को अधर्म पर धर्म की जीत के तौर पर याद किया जाता है। इसलिए दशहरा के मौके पर पारंपरिक तौर पर मेघनाद और कुंभकर्ण के साथ रावण के बड़े पुतले जलाए जाते हैं।

देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत : विजयदशमी देवी दुर्गा की महिषासुर, भैंसे जैसे राक्षस पर जीत से भी जुड़ी है। पूर्वी भारत, खासकर बंगाल, ओडिशा और असम में, यह दिन दुर्गा पूजा के खत्म होने और देवी दुर्गा की विदाई से जुड़ा है।

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ढलते सूरज में जगत सेठों की नई बिसात !

बेसिक, छोटा सा सवाल है नरेंद्र मोदी, अमित शाह की उम्र लंबी है या रिलायंस-अडानी कॉरपोरेट की? चुनाव छोड़े, और सोचे मोदी-शाह के शासन का सूरज जनता की निगाहों में ढलता हुआ है या नहीं? मोदी कितने कितने साल और राज करेंगे? अब किन-किनको कितना और बरबाद या बना सकते है? और क्या भविष्य मोदी-शाह, उनके चंगू-मंगूओं के कटघरे में खड़े होने के अवसर लिए हुए नहीं है? मगर इनके साथ क्या मुकेश अंबानी, गौतम अडानी का भी दिन ढलता हुआ है? नहीं। मैं इन इस दो सेठों के ऐसे अवसर कम मानता हूं। क्योंकि भारत की सत्ता, कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका याकि पूरे सिस्टम को खरीदने की सेठों की ताकत असीम है। हिंदूओं का इतिहास है कि उसके हर काल में, हर राज में वणिकों के जगत सेठों ने दरबारों को नचाए रखा है।

सचमुच  भारत में राजा, प्रधानमंत्री कोई बना हो, गांधी से ले कर, गरीबों की मसीहा इंदिरा गांधी व झोली ले कर चल देने की बाते करने वाले नरेंद्र मोदी आदि सभी जीडी बिडला, धीरूभाई अंबानी, गौतम अडानी के कृतज्ञ व कृपानिधान दोनों रहे है।

पर भारत के धन्नासेठ इतने मूर्ख कभी नहीं रहे जो अस्त होती सत्ता, ढलते सूरज के साथ अपनी भी रात बना डाले। तभी मामूली बात नहीं जो गौतम अडानी ने कांग्रेसी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से घंटों बात की। कांग्रेस को मैसेज दिया। अब मुकेश अंबानी के मौजूदा समय के नंबर एक दरबार प्रबंधक परिमल नाथवानी ने अपने बेटे धनराज नाथवानी को अखिलेश यादव से राज्यसभा उम्मीदवार बनवाया है।

मतलब विपक्ष की  धुरी में राहुल-प्रियंका-खडगे के प्रिय डीके शिवकुमार, विपक्ष की तय संभावना हेमंत सोरेन, तेजस्वी यादव ( ध्यान रहे झारखंड में दोनों के विधायकों के वोट ले कर ही खुद परिमल झारखंड से सासंद बने है) और अखिलेश यादव का जूनियर परिमल का उम्मीदवार बनना भी बहुत कुछ बताता है।

निश्चित ही गौतम अडानी हो या मुकेश अंबानी-परिमल नाथवानी ने मोदी और शाह को बता कर विपक्ष की बिसात में एंट्री ली है। सोचने वाले भले सोचे कि मोदी-शाह ने खुद ही समय बदलता देख वैसे ही अंबानी-अडानी से विपक्ष में विभीषण पैदा करने की बिसात बिछाई है जैसे 2024 में तुरत-फुरत चंद्रबाबू नायडु को मैनेज करने की बनी था। ताजा चाले भी मोदी-शाह की 2029 की शतरंज का हिस्सा है।

लेकिन समय बड़ा बलवान। समय कहां चैन लेने दे रहा है? मई 2025 के आपरेशन सिंदूर से 2 अक्टूबर 2026 के 16 महिने के एक-एक दिन का हिसाब लिखाए क्या उससे रावण के अंतिम समय के महिनों ( राम-रावण युद्ध कितने महिनों चला था?) जैसी पटकथा दीवाल पर नहीं लिखी दिखती है? सोलह महीनों के लबोलुआब रामायण के उन अंतिम अंक वाले हैं जहाँ अंहकार, निर्णयों से रावणी सत्ता का चरित्र अपने आप प्रकट होता हुआ था। समय का यह सत्य ध्यान रखना चाहिए कि इतिहास अंततः व्यक्तियों की घोषणाओं, हवाबाजी, झूठ से नहीं बल्कि समाज पर वास्तविक असर, नैतिक मूल्यों, निर्णयों से संस्थागत प्रभावों व परिणामों से निष्कर्ष दर्ज कराए हुए होता है।

सोचे, मोदी-शाह के असर में न्यायपालिका के चीफ जस्टीस के एक शब्द  कॉकरोच से क्या गुल खिला?  एक ज्ञानेश कुमार से चुनाव आयोग संस्था की कैसी गंदी तस्वीर बनी?  आपरेशन सिंदूर से भारतीय सेना को लेकर वैश्विक नजरिया कैसा बदला? सभी वैश्विक सूंचकाकों, वित्तिय निवेशकों, कूटनीति में मोदी भारत की कैसी छिछोलेदारी हो रही है? शेयर बाजार से लेकर, आंकड़ों, मीडिया, वैश्विक नैरेटिव में भारत की अब कैसी तस्वीर है? इन सबके बावजूद भी क्या कोई समझदार मानेगा कि अंबानी-अडानी मोदी की बिसात के अभी भी मोहरे है न कि वे जगतसेठ जो मोदी के बाद के भविष्य के घोड़ों पर दांव के बिना अब रह ही नहीं सकते? और अपनी नई बिसात बिछा बदलती हवा में नए घोड़े, नए दांव चले?

Shardiya Navratri 2026 Date: अक्टूबर में इस दिन से शुरू होगी मां दुर्गा की अराधना, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त और शारदीय नवरात्रि का पूरा कैलेंडर

Shardiya Navratri 2026 Date: शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक मनाई जाती है। यह पर्व मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस पर्व के 10वें दिन दुर्गा विसर्जन करते हैं और शाम के समय में रावण के पुतलों का दहन करके दशहरा का त्योहार मनाते हैं। इस पर्व को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। माता के भक्त नवरात्रि पर्व के नौ दिन उपवास करते हैं और कड़े नियमों का पालन करते हैं। इस पर्व की शुरुआत प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ होती है। आइए जानें इस साल शारदीय नवरात्रि कब से शुरू हो रही है ? अक्टूबर नवरात्रि के कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है?

शारदीय नवरात्रि 2026 कब से है?

इस साल 10 अक्टूबर रविवार को आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि रात 9:19 बजे से शुरू हो रही है और अगले दिन 11 अक्टूबर रविवार को रात 9:30 बजे तक खत्म होगी। प्रतिपदा तिथि में सूर्योदय 11 अक्टूबर को प्राप्त हो रहा है, इस आधार पर अक्टूबर नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर रविवार से होगा।

कलश स्थापना का मुहूर्त

अक्टूबर नवरात्रि के पहले दिन 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए 2 शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं। एक सुबह में और दूसरा दोपहर के समय।

पहला मुहूर्त : सुबह 6:19 बजे से लेकर सुबह 10:12 बजे तक

दूसरा मुहूर्त : 11:44 बजे से लेकर दोपहर 12:31 बजे तक

प्रतिपदा के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:40 ए एम से 05:30 ए एम तक है, वहीं उस दिन का निशिता मुहूर्त रात 11:43 बजे से लेकर मध्य रात्रि 12:33 ए एम तक है।

अक्टूबर नवरात्रि कैलेंडर 2026

नवरात्रि का पहला दिन: 11 अक्टूबर, रविवार- प्रतिपदा तिथि, कलश स्थापना, मां शैलपुत्री पूजा

नवरात्रि का दूसरा दिन: 12 अक्टूबर, सोमवार- द्वितीया तिथि, मां ब्रह्मचारिणी पूजा

नवरात्रि का तीसरा दिन: 13 अक्टूबर, मंगलवार- तृतीया तिथि, मां चंद्रघण्टा पूजा

नवरात्रि का चौथा दिन: 14 अक्टूबर, बुधवार- चतुर्थी तिथि, मरं कूष्माण्डा पूजा

नवरात्रि का पांचवा दिन: 15 अक्टूबर, गुरुवार- पंचमी तिथि, देवी स्कन्दमाता पूजा

नवरात्रि का छठा दिन: 16 अक्टूबर, शुक्रवार- षष्ठी तिथि, मां कात्यायनी पूजा

नवरात्रि का सातवां दिन: 17 अक्टूबर, शनिवार- सप्तमी तिथि, मां कालरात्रि पूजा

नवरात्रि का आठवां दिन: 18 अक्टूबर, रविवार- सप्तमी तिथि

नवरात्रि का नौवां दिन: 19 अक्टूबर, सोमवार- दुर्गा अष्टमी और महानवमी, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा, कन्या पूजा, नवरात्रि हवन

नवरात्रि का पारण: 20 अक्टूबर, मंगलवार

दशहरा कब है?

नवरात्रि 9 दिनों की होती है। इसके अगले दिन विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है, जिसे दशहरा भी कहते हैं। इसमें विजय मुहूर्त में शस्त्र पूजा करते हैं। शाम को प्रदोष काल में रावण के पुतले का दहन होता है। इस साल दशहरा 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को है।

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Ramayana: मेकर्स ने देर रात रिलीज किए ‘रामायणम्’ के नए पोस्टर, रणबीर कपूर-यश को देख इंप्रेस हुए यूजर्स

Ramayana: नमित मल्होत्रा ​​और नितेश तिवारी ने ‘रामायणम् पार्ट वन’ के लिए शनिवार को मुंबई में एक इवेंट रखा। आधी रात के बाद उन्होंने फिल्म के नए पोस्टर जारी किए, जिनमें मुख्य कलाकार रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश और रवि दुबे नजर आए। फैन्स नए पोस्टर्स से बहुत इंप्रेस लग रहे हैं। यूजर्स को ये पोस्टर टीम द्वारा अब तक जारी किए गए सभी लुक से ये पोस्टर से बेहतर लगे हैं।

‘रामायण’ के नए पोस्टर जारी

‘वर्ल्ड ऑफ रामायण’ के ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट्स ने एक पोस्टर जारी किया, जिसमें रणबीर कपूर राम के रूप में, साई पल्लवी सीता के रूप में और रवि दुबे लक्ष्मण के रूप में वनवास गेटअप में दिख रहे हैं। इसके साथ कैप्शन लिखा था, “हमेशा धर्म के साथ।” पोस्टर में तीनों सादे, पारंपरिक कपड़ों में वनवास के दौरान एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

इसके बिल्कुल उलट एक और पोस्टर है, जिसमें यश अपनी सुनहरी लंका में रावण के रूप में दिख रहे हैं। काले कपड़ों और सोने के गहनों से सजे वे अपने महल के सामने खड़े होकर डरावने और प्रभावशाली लग रहे हैं। इसे पोस्ट करते हुए ‘रामायण’ अकाउंट ने लिखा, “तीनों लोकों का स्वामी रावण।” उन्होंने यह भी लिखा- “हमारा सच… हमारा इतिहास।”

नए पोस्टर्स से फैन्स हुए इंप्रेस्ड

पोस्टर्स जारी करने में देरी के बावजूद फैन्स बहुत उत्साहित दिखे। X पर एक पोस्ट में लिखा था, “#Ramayana की नई तस्वीरें आ गई हैं, पोस्टर शानदार लग रहे हैं।” एक और यूजर ने लिखा, “पहला वाला पोस्टर तो बहुत पहले ही जारी कर देना चाहिए था यार।” वनवास वाले पोस्टर का ज़िक्र करते हुए एक X यूजर ने लिखा, “आखिरकार वो पोस्टर आ ही गया… बहुत सुंदर… ।”

एक X यूजर ने अपनी राय दी, “मुझे पता है कि पुरानी यादों (नॉस्टेल्जिया) की वजह से बहुत से लोगों को यह बात पसंद नहीं आएगी, लेकिन यह फिल्म युगो साको की ‘रामायण: द लीजेंड ऑफ प्रिंस राम’ और रामानंद सागर की ‘रामायण’ से कहीं बेहतर साबित होगी।” रेडिट पर कई लोग रणबीर, साई और रवि के पोस्टर को लेकर बंटे हुए दिखे, लेकिन वे यश के पोस्टर से प्रभावित थे। एक कमेंट में लिखा था, “अब तक का सबसे अच्छा पोस्टर। यश अच्छे लग रहे हैं और फिल्म का स्केल भी ज्यादा साफ तौर पर दिख रहा है।”

यश के पोस्टर के बारे में एक रेडिटर ने कहा- “शायद यहीं मुझे कुछ बड़े पैमाने पर काम होता दिख रहा है। साथ ही यश की पोस्टर पर मौजूदगी भी जबरदस्त है।” वहीं एक और यूजर ने लिखा, “वह खतरनाक लग रहे हैं और उनमें निश्चित रूप से सही तरह का औरा है!”

मिस्टरबीस्ट ने रामायण इवेंट में ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए

शनिवार को मशहूर अमेरिकी यूट्यूबर जिमी डोनाल्डसन, जिन्हें मिस्टरबीस्ट के नाम से जाना जाता है, रामायणम् के प्रमोशनल इवेंट में शामिल हुए। वहां उन्होंने ‘जय श्री राम’ का नारा लगाकर दर्शकों को हैरान कर दिया। जब दर्शकों में से किसी ने यही नारा लगाया तो रणबीर ने कंटेंट क्रिएटर को भी वह नारा दोहराने में मदद की। मिस्टरबीस्ट ने कहा, “बहुत मजा आया और फिल्म का ट्रेलर शानदार है, यह जबरदस्त लग रहा है।”

हे राम! मोदी-शाह ने लोकतंत्र का सब तो खा लिया!

यों रामजी को भी क्या याद करें! आखिर खुद रामजी को भी मोदी-शाह ने कम बेच नहीं खाया। उनके मंदिर तक को चोरों का अड्डा बनाया। रामजी भी सोचते होंगे इन दो इंसानों के अहंकार, भूख के नाश के लिए वे क्या अवतार धरें! या अभी इंतजार करें कि इनका और क्या-क्या खाना बाकी है? किस मर्यादा को इन्होने बख्शा है। मंदिर हो, सनातन धर्म की सत्यता, नैतिकता, चरित्र, मर्यादाओं को राक्षसों जैसे तहस-नहस किया है। लोकतंत्र, संसद, सरकार, जांच एजेंसियां, मीडिया, विश्वविद्यालयों, राज्यपाल, नौकरशाही, न्यायपालिका, लोकजीवन—सभी की ऐसी-तैसी की है। और पिछले दस महीनों से मां भारती की संतानों, इंसानों, नागरिकों, उनके वोटों को भी खा जा रहे हैं। ऐसा तो रावण राज में भी नहीं था। ज्ञात इतिहास के किसी भी लोकतंत्र में नहीं था।

लोकतंत्र यानी मनुष्य व्यवस्था आखिर है क्या? यदि मनुष्य (नागरिक) को यह भी मालूम न हो, भरोसा न रहे कि देश विशेष में पैदा हुआ वह नेचुरली नागरिक, मतदाता है या नहीं तो वह क्या व्यवस्था हुई? बतौर मतदाता देश की सूची में वह नेचुरली है भी? और नहीं है तो क्यों, किसने काटा? किसके आदेश से वापस जुड़ता है या नहीं जुड़ता तो आखिर कैसी तो यह व्यवस्था है या लोकतंत्र है?

मगर मोदी-शाह ने अंधभक्तों की ऐसी फौज बनाई है जो मानती-सोचती है कि रावण जो करता था वही हिंदू राष्ट्र की राजनीति है, शासन का राजधर्म है।

तभी 1950 से अपनाए गए गणतंत्र का सब खा जाना है। कौम-नस्ल व सभ्यता का राक्षसी छप्पन भोग बनाना है।

सोचें, जून 2025 से तीस राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की मतदाता ड्राफ्ट सूची से तेरह करोड़ से अधिक नाम बाहर हुए हैं। अभियान इस सही दलील से शुरू हुआ कि लिस्ट से मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट आदि नाम हटने चाहिए। पर इसकी आड़ में प्रक्रिया क्या हुई? और प्रक्रिया का कर्ता कौन था? स्वाभाविक है भारत का चुनाव आयोग। चुनाव आयोग के कर्ता हैं तीन समान अधिकारों वाले चुनाव आयुक्त। कानून में दो टूक उल्लेखित है कि तीनों सदस्य अपनी बैठक में विचार करेंगे। यदि तीनों में किसी बात पर सर्वानुमति हुई तब प्रक्रिया, नियम बनेगा और उस अनुसार काम आगे बढ़ेगा।

बतौर मिसाल नए मतदाता के Form 6 का सत्य है। इसे तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (यानी एक सदस्य) ने अकेले की मनमानी में लागू किया। इसे लेकर मई में चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने बाकायदा फाइल पर लिखा कि नियमों में बदलाव किए बिना Form 6 इस तरह नहीं बदला जा सकता। संधू सहमत हुए। यानी तीन सदस्यीय आयोग में दो की राय सामने थी। फिर भी ECINet पर नया declaration आ गया। जुलाई में मामला सार्वजनिक हुआ। 13 अगस्त को संधू ने फाइल पर इसे “unauthorised and illegal” बताया और तुरंत हटाने को कहा ताकि young और first-time voters परेशान न हों। फिर भी Form ऑनलाइन मौजूद था। इस तरह मनमाने काम होने का चौदह दफा का रिकॉर्ड, आपत्तियां आज जगजाहिर है। हां, ज्ञानेश कुमार के साथी बाकी दोनों चुनाव आयुक्त—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने दस महीनों में कम-से-कम चौदह बार लिखित आपत्ति दर्ज की है। मां भारती की जमीन पर जन्म लेने वाले मनुष्यों, लोगों, नेचुरल नागरिकों के नाम कटने, जुड़ने यानी जिंदा या मृत की लिस्ट के मामलों में। मतलब ये मसले कि किसका नाम मतदाता सूची में जुड़े, किसका कटे, नए मतदाता का Form 6 कैसा हो और भारत की पूरी मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस को कौन नियंत्रित करे!

सोचें, मोदी-शाह के इस रावणी डिजिटल इंडिया पर। चुनाव आयोग वर्षों से कहता आया है कि मतदाता सूची स्थानीय स्तर पर वैधानिक Electoral Registration Officer यानी ERO बनाता और नियंत्रित करता है। मगर दोनों चुनाव आयुक्तों ने ECINet के जरिए electoral-roll database के “gradual centralisation” पर आपत्ति की। उनका सवाल था कि दिल्ली का आईटी सिस्टम जमीन पर कानून से अधिकार पाए ERO की शक्तियां क्यों सीमित कर रहा है? चिंता इतनी गंभीर हुई कि दोनों चुनाव आयुक्त देश के कैबिनेट सचिव तक पहुंचे।

लेकिन भारत राष्ट्र के कैबिनेट सचिव की भी औकात नहीं है जो वह सोचे, अपनी आत्मा को जगाए या कोई पूछताछ करें या जवाब दें।

नतीजतन आज क्या तस्वीर है? भारत के एक अरब मतदाताओं के मालिक नरेंद्र मोदी-अमित शाह है।