Mahakavya Shri Ramayan Katha: भाव, भक्ति और मर्यादा के साथ बड़े पर्दे पर लौटी देव शर्मा-अंजलि अरोड़ा स्टारर ‘रामायण’

Mahakavya Shri Ramayan Katha: कुछ कहानियां हमें विरासत में मिलती हैं। ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ कुछ ऐसी है। रामायण सिर्फ एक महाकाव्य नहीं, बल्कि भारतीय समाज और संस्कृति का ऐसा हिस्सा है, जिसकी कहानियां पीढ़ियों से घरों, मंदिरों, रामलीलाओं और परिवारों के बीच आगे बढ़ती रही है।

निर्देशक अभिषेक सिंह रामायण को किसी ऐसी कहानी के तौर पर पेश करने की कोशिश नहीं करते, जिसे नए सिरे से बदलने की जरूरत हो। फिल्म को उसी भरोसे, प्यार, आस्था, त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और भक्ति की भावना के साथ बनाया गया है, जो इसे लेकर हर भारतीय अनुभव करता है।

फिल्म की खास बात यह है कि यह ऑरिजनल रामायण के इमोशन को बरकरार रखते हुए आज के दर्शक से कनेक्ट करने की कोशिश करती है। कथा की मूल पहचान को बदले बिना फिल्म के कई प्रसंगों में ऐसे भाव उभरते हैं, जिनसे वर्तमान पीढ़ी भी आसानी से जुड़ सकती है।

‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ का फोकस सिर्फ रॉयल सीन्स या बड़े पैमाने पर कहानी दिखाने के बजाय उन रिश्तों पर अधिक है, जो रामायण की आत्मा हैं। श्री राम और माता सीता का प्रेम, लक्ष्मण की अपने बड़े भाई के प्रति अटूट निष्ठा, हनुमान की श्री राम के प्रति पूर्ण भक्ति और राम की मर्यादा के सामने रावण का अहंकार — यही फिल्म की नींव हैं।

देव शर्मा ने श्री राम के किरदार को काफी संयम और गरिमा के साथ निभाया है। उनके एक्सप्रेशन सिर्फ वीरता दिखाने तक सीमित नहीं , बल्कि श्री राम के धैर्य, करुणा और मर्यादा को भी सामने लाते हैं। उनके किरदार में एक ठहराव दिखाई देता है। अंजलि अरोड़ा के किरदार को लेकर दर्शकों शक था, लेकिन माता सीता उन्होंने शानदार तरीके से निभाया हैं। फिल्म सीता के किरदार को सिर्फ राम की कहानी का हिस्सा बनाकर नहीं रखती, बल्कि उनके विश्वास, आत्मसम्मान और आंतरिक शक्ति को भी महत्व देती है।

शील वर्मा लक्ष्मण के रूप में राम परिवार की कहानी में एक महत्वपूर्ण इमोशनल परत जोड़ते हैं। श्री राम और माता सीता के प्रति उनका समर्पण और अपने बड़े भाई के साथ उनका रिश्ता फिल्म की यात्रा में लगातार महत्वपूर्ण बना रहता है। वहीं निर्भय वाधवा हनुमान के किरदार में ऊर्जा और भक्ति लेकर आते हैं। हनुमान की मौजूदगी वाले हिस्सों में उनका उत्साह कहानी को अलग गति देता है। जबकि राजनेश दुग्गल रावण के रूप में जच रहे हैं।

फिल्म का संगीत सुनने में अच्छा लगता है। संगीत कहानी के माहौल के साथ सटीक बैठता है। ‘सिया राम’ को जावेद अली ने अपनी आवाज दी है। वहीं फरहाद बिवंडीवाला की आवाज में ‘राम जी की सेना’ फिल्म में ऊर्जा और उत्साह लेकर आता है। कैलाश खेर का ‘हे हनुमान’ हनुमान से जुड़े सीन्स में भक्ति और जोश को बढ़ाता है। इसके अलावा शान, शाहिद मल्ल्या और वैशाली सामंत जैसे गायकों की आवाजें भी साउंडट्रैक का हिस्सा हैं।

बात वीएफएक्स की करें तो कुछ बड़े सीन्स में और बेहतर काम किया जा सकता था। खास कर युद्ध वाले सीन या लंका से जुड़े सीन थोड़े फीके लगते हैं। फिर भी यह कमी फिल्म की कहानी से जुड़ाव को पूरी तरह कमजोर नहीं करती है। अयोध्या से वनवास, सीता हरण, हनुमान के आगमन, लंका की ओर बढ़ती कहानी रावण के अंत तक की जर्नी दिखाती है।

शायद फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह अपने दर्शकों को अच्छी तरह समझती है। महाकाव्य श्री रामायण कथा रामायण को किसी चौंकाने वाले या पूरी तरह अलग रूप में पेश करने की कोशिश नहीं करती। यह आस्था और उन मूल्यों को केंद्र में रखती है, जिनके कारण यह कथा आज भी लोगों के जीवन का हिस्सा बनी हुई है। फिल्म को हम 3.5 रेटिंग देते हैं।

फिल्म का निर्देशन अभिषेक सिंह ने किया है और इसका निर्माण प्रकाश महोबिया और संजय बुंदेला ने महोबिया फिल्म्स प्रोडक्शन के बैनर तले किया है। फिल्म को एजे फिल्म एंटरटेनमेंट वर्ल्ड और अजय कनोजिया प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि हनी कुलदीप अग्रवाल और मोनिका सेन सह-निर्माता हैं।

Ramayana Poster: ‘रामायणम्’ का नया पोस्टर हुआ रिलीज, राम-सीता का दिखा मनमोहक अंदाज

Ramayana Poster: ‘रामायणम्’ के मेकर्स ने एक नया पोस्टर जारी किया है, जिसमें रणबीर कपूर राम के रोल में और साई पल्लवी सीता के रोल में नजर आ रहे हैं। यह बहुत प्यारा है। नया पोस्टर उनके रिश्ते के सॉफ्ट पल को खूबसूरती से दिखा रहा है। सोशल मीडिया पर पोस्टर तेजी से रिलीज हो रहा है।

‘रामायणम्’ का पोस्टर रिलीज

पोस्टर में राम और सीता को सेफ्रॉन कपड़ों में नदी के किनारे बैठे हुए दिखाया गया है। ये पल उनके वनवास के समय का है। राम प्यार से सीता के बाल ठीक करते हुए दिख रहे हैं, जबकि सीता शरमाते हुए मुस्कुरा रही हैं। यह एक बहुत ही साधारण पल है, लेकिन यही बात इस पोस्टर को खास बनाती है। मेकर्स ने “सिया राम के मजबूत रिश्के” का जश्न मनाते हुए इसे शेयर किया।

‘रामायणम्’ का पहला गाना आज रिलीज होगा!

लेकिन सिर्फ पोस्टर ही नहीं आ रहा है। इसके रिलीज होने के बाद मेकर्स ‘रामायण’ का पहला गाना ‘जय जय राम’ लॉन्च करेंगे। इस गाने को एआर रहमान ने कंपोज किया है और इसके बोल डॉ. कुमार विश्वास ने लिखे हैं। इस गाने में भारतीय संगीत की दो सबसे बड़ी आवाजें – श्रेया घोषाल और अरिजीत सिंह – शामिल हैं।

मेकर्स ने बड़ी घोषणा की

मेकर्स ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि फिल्म का म्यूजिकल सफर आधिकारिक तौर पर गणेश चतुर्थी पर शुरू होगा, जिसमें ‘सिया राम’ पोस्टर का अनावरण किया जाएगा और उसके बाद पहला गाना ‘जय जय राम’ रिलीज किया जाएगा। नोट में लिखा था, “हर शुभ शुरुआत एक प्रार्थना के साथ होती है। इस गणेश चतुर्थी पर ‘रामायणम्’ का म्यूजिकल सफर सुबह 7:30 बजे (IST) हमारे ‘सिया राम’ पोस्टर के अनावरण के साथ शुरू होगा। इसके तुरंत बाद हमारा पहला म्यूजिकल तोहफा ‘जय जय राम’ आएगा। संगीत एआर रहमान बोल- डॉ. कुमार विश्वास, गायक- श्रेया घोषाल और अरिजीत सिंह।” इसके साथ ही मेकर्स ने कैप्शन में लिखा- “गणपति बप्पा के आशीर्वाद से हम कल ‘रामायणम्’ का म्यूजिकल सफर शुरू कर रहे हैं।”

‘रामायणम्’ के बारे में

नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित ‘रामायणम्’ को इस महाकाव्य के दो-भाग वाले रूपांतरण के रूप में बनाया जा रहा है। रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं, साई पल्लवी सीता के रूप में हैं, यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं, रवि दुबे लक्ष्मण का किरदार निभा रहे हैं, और सनी देओल हनुमान के रूप में नजर आएंगे। इसके साथ ही मेकर्स ने कैप्शन में लिखा- “गणपति बप्पा के आशीर्वाद से हम कल ‘रामायणम्’ का म्यूजिकल सफर शुरू कर रहे हैं।”

यूपी का राजनीतिक भविष्यफल!

यूपी का राजनीतिक भविष्यफल!

क्या आप उत्तर प्रदेश से हैं? किसी राजनीतिक दल से आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टिकटार्थी हैं? अगर हां, तो आपको किसी विरहन की तरह भादों की रातें भारी लगेंगी। 

 

क्वार में आसमान साफ होने तक आपकी स्थिति कुछ हद तक साफ होगी। फिर भी मुकम्मल तौर पर कुछ कहना मुश्किल है। इसलिए देवताओं की परिक्रमा करते रहिए। अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा भी देते रहिए।

 

त्रेता में बारिश के बाद ही लंका कांड हुआ था। भगवान श्रीराम उत्तर प्रदेश के अयोध्या से ही थे। अब कलयुग में इस बार उत्तर प्रदेश में क्या होगा, कहना संभव नहीं। सब कुछ रामजी की मर्जी पर है। अपने मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी से वह खुश हैं या नाराज, यह वक्त बताएगा।

 

हर दौर की तरह इस बार भी विभीषणों की चांदी रहेगी। इन दिनों विभीषण कुछ ज्यादा ही हैं, इसलिए मिलेंगे भी खूब। 

लेकिन ध्यान रखिए—ये त्रेता वाले विभीषण नहीं, कलयुग के विभीषण हैं। इनकी निष्ठा संदिग्ध रहेगी। ये विपक्ष यानी रावण का साथ छोड़कर आपके साथ आएं, यह जरूरी नहीं। मौका मिला तो आपको ही मरवाने की भूमिका में भी नजर आ सकते हैं। इसलिए इनसे दोस्ती करते समय सावधानी जरूरी है।

 

सावन-भादों में बारिश अच्छी हुई है और सिलसिला अभी जारी है। इससे मौसमी नेताओं यानी ‘मेंढकों’  की खुशी का ठिकाना नहीं। इनकी टर्र-टर्र अभी और बढ़ेगी। हालांकि इस पर बहुत ध्यान देने की जरूरत नहीं, क्योंकि टर्राना मेंढकों का स्वभाव है और मौसम बदलते ही इनकी आवाज भी बदल जाएगी।

 

भादों मौसम के बदलाव का प्रतीक है। कुछ दिनों में मानसून की वापसी शुरू होगी। उत्तर प्रदेश में भी राजनीतिक मौसम बदलेगा या नहीं, फिलहाल मुकम्मल तौर पर कुछ कहना मुश्किल है।

 

ग्लोबल वार्मिंग ने मौसम को जितना अप्रत्याशित बनाया है, उससे कहीं ज्यादा चुनावी राजनीति ने सियासी मौसम को। देश के सबसे बड़े सूबे में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बढ़ता चुनावी तापमान आने वाले दिनों को और अस्थिर बनाएगा। 

 

इसलिए थोड़ा दिल थामकर इंतजार करिए। आने वाले दिनों में कई चेहरे बदलेंगे, कई मौसम बदलेंगे और कई भविष्यफल गलत साबित होंगे। लेकिन तब तक एक काम जरूर कर लीजिए—SIR के बाद यह जरूर देख लीजिए कि आप मतदाता हैं भी या नहीं!

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर ग्रहण और भद्रा के साथ रहेगा पंचक का साया, जानें त्योहार पर पंचक का क्या होगा असर

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों की हमेशा रक्षा करने का वचन देते हैं और राखी बांधने पर उन्हें उपहार देते हैं। यह पर्व हर साल सावन की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस पर्व और इस दिन का विशेष स्थान है। इसके अलावा इस साल रक्षा बंधन पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं।

इस साल रक्षा बंधन पर साल 2026 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण लग रहा है। सावन पूर्णिमा पर भद्रा का साया रहेगा और साथ ही पंचक भी रहेगा। यह तीनों ही ऐसी बातें हैं, जिनमें शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। राखी बांधते समय भद्रा, ग्रहण और पंचक का विचार किया जाता है। ऐसे में लोगों के मन में राखी के त्योहार को लेकर भ्रम हो रहा है कि भद्रा और पंचक के दौरान राखी बांधने को लेकर क्या नियम और मान्यताएं हैं :

भद्रा का विचार : शास्त्रों में भद्रा के समय राखी बांधना पूरी तरह वर्जित माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण को उसकी बहन सूर्पणखा ने भद्रा काल में ही राखी बांधी थी, जिसके कारण उसके पूरे कुल का नाश हो गया। इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद ही राखी बांधी जाती है।

पंचक का विचार : पंचक के दौरान राखी बांधने पर कोई प्रतिबंध या दोष नहीं होता है। पंचक का प्रभाव मुख्य रूप से नए घर के निर्माण, छत ढालने, लकड़ी इकट्ठा करने, दक्षिण दिशा की यात्रा करने या अंतिम संस्कार जैसे कार्यों पर लागू होता है। रक्षाबंधन जैसे शुभ और धार्मिक त्यौहार पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। इस बार पंचक का आरंभ गुरुवार से हो रहा है। गुरुवार से जो पंचक आरंभ होता है उसे सामान्य माना जाता है।

राखी बांधने का सही नियम :

यदि रक्षाबंधन पर भद्रा का साया है, तो भद्रा काल बीतने का इंतजार करें।

पंचक चल रहा हो तब भी आप भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में आराम से राखी बांध सकते हैं।

रक्षाबंधन पर पंचक और भद्रा का समय

27 अगस्त को पंचक दोपहर 1 बजकर 36 मिनट पर लग जाएगा। 28 तारीख को रक्षाबंधन है और पंचक पूरे पांच दिन रहता है। पंचक 1 सितंबर को सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगा।

27 अगस्त को भद्रा पूर्णिमा तिथि आरंभ होने के साथ ही लग जाएगी और रात 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। इसलिए रक्षाबंधन 27 की बजाय 28 अगस्त को मनाया जाएगा। 28 को सूर्योदय के साथ पूर्णिमा तिथि 9 बजकर 49 मिनट तक ही है जो भद्रा मुक्त है।

रक्षाबंधन के दिन शतभिषा नक्षत्र रहेगा। इसलिए इस दिन राखी बांधने को कोई दोष नहीं लगेगा। रक्षाबंधन शतभिषा नक्षत्र में होगा। इसलिए आप बेफिक्र होकर राखी बांध सकते हैं।

रक्षाबंधन पर रहेगा चंद्र ग्रहण?

इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण 28 अगस्त को लगने जा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि चंद्रग्रहण के दिन क्या राखी बांध सकते हैं। चंद्रग्रहण का सूतक काल ग्रहण आरंभ होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। लेकिन, यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा। इसलिए रक्षाबंधन का पर्व आप बिना किसी के चिंता का मना सकते हैं।

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Raksha Bandhan 2026 Bhadra timing: इस बार रक्षा बंधन पर नहीं होगा भद्रा का साया, जानें कौन हैं भद्रा और इसमें क्यों नहीं बांधनी चाहिए राखी

Raksha Bandhan 2026 Bhadra timing: हिंदू धर्म में पूरे दिन में कुछ विशेष समय को अशुभ माना जाता है। इस समय में कोई शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। ऐसा ही एक समय है भद्रा का। हिंदू पौराणिक कथाओं और पंचांग का एक विशेष भाग है। इस समय में रक्षा बंधन का पर्व भी नहीं मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में राखी भी नहीं बांधनी चाहिए। इस साल रक्षा बंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनको तिलक लगाकर मुंह मीठा कराती हैं। साथ ही, उनकी शुभ और मंगल की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन को हमेशा रक्षा करने का वचन देते हैं और भेंट देकर विदा करते हैं।

इस बार भद्रा का साया नहीं

इस बार रक्षा बंधन पर भद्रा का साया नहीं रहीं हेगा। भद्रा रक्षा बंधन के दिन सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए भद्रा की अड़चन के बिना पूरे दिन राखी का त्योहार मनाया जा सकेगा।

कौन है भद्रा?

पौराणिक पहचान : धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भद्रा भगवान सूर्यदेव और माता छाया की पुत्री हैं, तथा भगवान शनिदेव की सगी बहन हैं।

स्वभाव : शनिदेव की तरह भद्रा का स्वभाव भी अत्यंत क्रोधी और उग्र माना जाता है। जन्म लेते ही वे यज्ञों और मांगलिक कार्यों में विघ्न डालने लगी थीं।

ज्योतिष/पंचांग में स्थान : उनके उग्र स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ब्रह्मा जी ने उन्हें पंचांग के 11 करणों में से 7वें करण (विष्टि करण) में स्थान दिया। भद्रा काल एक ऐसा समय होता है जब भद्रा का प्रभाव पृथ्वी पर रहता है।

भद्रा में राखी क्यों नहीं बांधनी चाहिए?

ज्योतिष शास्त्र और हिंदू मान्यताओं में भद्रा काल को अशुभ और किसी भी शुभ या नए कार्य के लिए वर्जित माना गया है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं :

अशुभ प्रभाव और अनिष्ट की आशंका : भद्रा के दौरान किए गए शुभ कार्यों का फल नहीं मिलता या वे कार्य निष्फल हो जाते हैं। भाई-बहन का रिश्ता अटूट रहे, इसलिए इस उग्र काल को छोड़कर शुभ मुहूर्त में ही रक्षासूत्र बांधा जाता है।

पौराणिक कथा : प्रचलित कथा के अनुसार, लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने रावण को भद्रा काल में ही राखी बांधी थी। इसके फलस्वरूप उसी वर्ष रावण के वंश और साम्राज्य का विनाश हो गया। इसी कारण से भद्रा के साये में राखी बांधने से बचा जाता है।

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Ramayana: ग्लोबल रिलीज के दो दिन बाद भारत में दिखाई जाएगी ‘रामायणम्’? प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ​​का बड़ा खुलासा

Ramayana: नितेश तिवारी की ‘रामायण’ का इंग्लिश ट्रेलर इस हफ्ते की शुरुआत में रिलीज हुआ, जबकि भारतीय भाषाओं में इसके ट्रेलर कुछ दिन पहले ही आ चुके थे। इंग्लिश-डब ट्रेलर में पहली बार फ़िल्म की रिलीज़ की सही तारीख बताई गई- 6 नवंबर। अब तक मेकर्स ने कहा था कि फ़िल्म दिवाली पर रिलीज़ होगी, लेकिन कोई पक्की तारीख नहीं बताई थी। हालांकि, प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ​​ने अब इशारा किया है कि फ़िल्म दुनिया भर में अलग-अलग समय पर रिलीज़ हो सकती है। रणबीर कपूर और यश स्टारर यह फ़िल्म अपनी ग्लोबल रिलीज़ के दो दिन बाद भारत में रिलीज़ हो सकती है।

रामायणम् की रिलीज डेट के बारे में जानकारी

मुंबई में दादा साहब फाल्के चित्रनगरी में अपने ‘प्राइम फोकस स्टूडियो – फेज़ 1’ के उद्घाटन के मौके पर नमित मल्होत्रा ​​ने NDTV से बात की। उन्होंने फिर से कहा, “यह (रामायण) भारत में दिवाली पर रिलीज़ होगी।” इस साल दिवाली 8 नवंबर को है, जो फिल्म की तय ग्लोबल रिलीज़ के दो दिन बाद है। जब उनसे इन दो तारीखों को लेकर कन्फ्यूजन के बारे में पूछा गया, तो नमित ने कहा, “हम इसे इंटरनेशनल लेवल पर (6 नवंबर को) रिलीज कर रहे हैं क्योंकि इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन शुक्रवार के हिसाब से काम करता है, जो 6 नवंबर है। लेकिन भारत में, अभी हम दिवाली पर रिलीज़ करने का प्लान बना रहे हैं।”

मौजूदा स्थिति के अनुसार, ‘रामायण पार्ट वन’ दुनिया भर में शुक्रवार, 6 नवंबर को रिलीज़ हो सकती है और इसके दो दिन बाद रविवार को भारत में बड़े पैमाने पर रिलीज़ हो सकती है, जिस दिन दिवाली भी है।

रामायणम् के ट्रेलर पर नमित मल्होत्रा ​​की प्रतिक्रिया

रामायण के ट्रेलर ने ऑनलाइन काफी चर्चा बटोरी है और हर तरफ से इस पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस बारे में बात करते हुए नमित ने ANI को बताया, “ट्रेलर पिछले हफ्ते रिलीज हुआ था और मुझे लगता है कि इसने पांच दिनों में एक अरब से ज्यादा व्यूज हासिल कर लिए, जो भारत के लिए एक शानदार पल है। दुनिया भर के लोगों से हमें जो प्यार मिला है, मैं सच में उसकी सराहना करता हूं। अब हमारी कोशिश इसे दुनिया भर में ले जाने की है, जैसा कि हम सोनी पिक्चर्स के साथ अपनी साझेदारी के जरिए कर रहे हैं। हम यह सुनिश्चित करने की उम्मीद कर रहे हैं कि रामायण अब एक बड़ी ग्लोबल फिल्म के तौर पर रिलीज हो।”

रामायणम् के बारे में

नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी रामायण, वाल्मीकि के महाकाव्य का दो-भागों वाला रूपांतरण है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में हैं, यश रावण के रोल में हैं और साई पल्लवी सीता के किरदार में हैं। इनके अलावा, फिल्म में रवि दुबे, सनी देओल, अरुण गोविल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह, विवेक ओबेरॉय और कुणाल कपूर जैसे कई कलाकार शामिल हैं। पहला भाग इस साल नवंबर में रिलीज होगा, जबकि दूसरा भाग अगले साल दिवाली से पहले रिलीज होने वाला है।

‘रामायणम्’ के ट्रेलर ने 4 दिनों में पार किए 800 मिलियन से ज्यादा व्यूज, मार्वल की ‘एवेंजर्स डूम्सडे’ के पहुंचा करीब

रामायण भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी और भव्य फिल्मों में से एक है। दो भागों में बनने वाली इस मेगा फिल्म का उद्देश्य आधुनिक तकनीक, विश्वस्तरीय कहानी और शानदार स्टारकास्ट के साथ इस कालजयी महाकाव्य को पहले कभी न देखे गए स्तर पर दर्शकों के सामने पेश करना है।

दुनियाभर के दर्शक इस फिल्म की पहली झलक का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे और ट्रेलर रिलीज़ होते ही इसने सभी उम्मीदों से बढ़कर प्रभाव छोड़ा। ट्रेलर को दुनियाभर में जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और इसकी गूंज भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दी। व्यूअरशिप के मामले में रामायण का ट्रेलर अब मार्वल की स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे और एवेंजर्स: डूम्सडे जैसी वैश्विक फिल्मों के ट्रेलर्स के बराबर खड़ा नजर आ रहा है।

जी हां, रामायण ने वह उपलब्धि हासिल की है जो आज तक किसी भारतीय फिल्म ने नहीं की। मार्वल की स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे के ट्रेलर को 1.1 बिलियन और एवेंजर्स: डूम्सडे के ट्रेलर को 936 मिलियन व्यूज़ मिले हैं, वहीं रामायण के ट्रेलर ने रिलीज़ के सिर्फ चार दिनों में सभी प्लेटफॉर्म्स पर 800 मिलियन से अधिक व्यूज़ हासिल कर लिए हैं। फिल्म के बारे में अब तक बहुत कम जानकारी सामने आई है, लेकिन केवल ट्रेलर ने ही वैश्विक स्तर पर जबरदस्त प्रभाव छोड़ते हुए यह संकेत दे दिया है कि यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए तैयार है।

दुनिया की सबसे महान कहानियों में से एक रामायण को आधार बनाकर निर्देशक नितेश तिवारी इस महाकाव्य की भावनाओं और भव्यता को अभूतपूर्व स्तर पर बड़े पर्दे पर जीवंत करने जा रहे हैं। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। यश शक्तिशाली रावण की भूमिका निभा रहे हैं। वहीं सनी देओल अजेय हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में दिखाई देंगे।

नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज़ ने आठ बार ऑस्कर विजेता डीएनईजी और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के सहयोग से किया है। यह दो भागों में दुनियाभर के आईमैक्स सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। पहला भाग दिवाली 2026 में और दूसरा भाग दिवाली 2027 में सिनेमाघरों में आएगा।

Hariyali Teej 2026: 14 या 15 अगस्त, इस साल कब है हरियाली तीज? पंडित जी से जानें इस व्रत के नियम और महत्व

Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज का व्रत हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य की कामना से किया जाने वाला यह महिलाओं का प्रमुख व्रत है। इस व्रत को अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर का आशीर्वाद पाने के लिए भी करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौराणिक काल में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। तब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर पाव्रती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। माता पार्वती की इसी घोर तपस्या के प्रतीक के रूप में हरियाली तीज का व्रत किया जाता है।

मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और मनचाहे जीवनसाथी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम ने न्यूज 18 को बताया, वर्ष 2026 में हरियाली तीज के दिन कई शुभ योग बनने से इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन शनिवार, सिद्ध योग और शिव योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। शुभ योगों में पूजा-अर्चना करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

हरियाली तीज 2026 तारीख और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 को शाम 6:47 बजे से प्रारंभ होगी और 15 अगस्त 2026 को शाम 5:29 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत और पूजन 15 अगस्त, शनिवार को किया जाएगा।

पूजा विधि

हरियाली तीज के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ और विशेष रूप से हरे रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें गंगाजल, अक्षत, रोली, चंदन, पुष्प, बेलपत्र, धतूरा, फल और मिठाई अर्पित करें। पूजन के दौरान शिव-पार्वती की कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है। शिव मंत्र और माता पार्वती के मंत्रों का जाप करें। परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करें। अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है।

हरियाली तीज व्रत के नियम

  • इस व्रत में सुहाग सामग्री का दान भी शुभ माना जाता है।
  • हरियाली तीज पर क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।
  • व्रत के दौरान सात्विक भोजन और पूजा-पाठ पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

हरियाली तीज का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था, इसलिए यह पर्व अटूट प्रेम, समर्पण और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में प्रत्येक पर्व का सीधा संबंध प्रकृति से है। सावन का महीना चारों ओर हरियाली लेकर आता है। यह पर्व प्रकृति, प्रेम, सौभाग्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश देता है।

रावण का यहां भगवान जैसा सम्मान! भारत के इन मंदिरों में होती है पूजा…अलग है यहां की कहानी

रावण का यहां भगवान जैसा सम्मान! भारत के इन मंदिरों में होती है पूजा…अलग है यहां की कहानी

नितेश तिवारी के निर्देशक में बनी फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ का पहला ट्रेलर रिलीज हो गया है। फैंस को फिल्म का ट्रेलर काफी पसंद आ रहा है। ये फिल्म दो पॉर्ट में रिलीज होने वाली है। पहला पॉर्ट दिवाली 2026 और दूसरा पॉर्ट दिवाली 2027 पर सिनेमाघरों में आएगा। राम और सीता की कहानी में रावण का नाम हमेशा विलेन के तौर पर रहा है। वहीं आपको ये जानकर हैरानी होगी की भारत में कई हिस्सों में ऐसे मंदिर मौजूद हैं, जहां रावण की पूजा होती है।

मान्यता है कि रावण ने शिव तांडव स्तोत्र की रचना की थी और वह वीणा वादन में भी निपुण थे। इसी वजह से देश के कुछ हिस्सों में रावण के मंदिर बने हुए हैं, जहां लोग उनकी श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं। आइए जानते हैं उन मंदिरों के बारे में

बिसरख, उत्तर प्रदेश: बिसरख (उत्तर प्रदेश) को कई लोग रावण का जन्मस्थान मानते हैं। इसी वजह से यहां दशहरे पर रावण के पुतले नहीं जलाए जाते। नवरात्रि के दौरान गांव के लोग विशेष पूजा-पाठ और यज्ञ कर रावण की आत्मा की शांति की कामना करते हैं। यहां स्थित प्राचीन विश्रवेश्वर महादेव मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस मंदिर में मौजूद दुर्लभ अष्टकोणीय शिवलिंग की स्थापना रावण के पिता महर्षि विश्रवा ने की थी, इसलिए यह स्थान रावण से जुड़ी आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

मंदसौर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश का मंदसौर रावण से जुड़ी मान्यताओं के कारण खास महत्व रखता है। ऐसा कहा जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका इसी क्षेत्र से था, इसलिए यहां रावण को दामाद के रूप में सम्मान दिया जाता है। स्थानीय लोग रावण को भगवान शिव का परम भक्त और महान विद्वान मानते हैं। शहर में रावण की करीब 35 फुट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित है। दशहरे के दिन यहां कई लोग रावण के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं और उसकी स्मृति में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

बैजनाथ मंदिर, हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित बैजनाथ मंदिर का संबंध भी रावण से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं से जोड़ा जाता है। लोककथाओं के अनुसार, रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहां कठोर तपस्या की थी और अपनी भक्ति का अद्भुत प्रमाण दिया था। इसी कारण बैजनाथ में दशहरे पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। एक अन्य मान्यता के मुताबिक, भगवान शिव ने रावण को शिवलिंग लंका ले जाने की अनुमति दी थी, लेकिन शर्त थी कि उसे रास्ते में कहीं जमीन पर नहीं रखना होगा। बैजनाथ पहुंचने पर परिस्थितिवश शिवलिंग जमीन पर रख दिया गया और वह वहीं स्थापित हो गया। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

गढ़चिरौली, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में रहने वाले कुछ गोंड आदिवासी समुदाय रावण और उसके पुत्र मेघनाद को पूजनीय मानते हैं। फाल्गुन महीने में मनाए जाने वाले अपने पारंपरिक त्योहार के दौरान वे दोनों की विशेष पूजा करते हैं। समुदाय की अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण को महान शासक और सम्मानित व्यक्तित्व माना जाता है। इसी वजह से यहां उसकी याद में धार्मिक आयोजन किए जाते हैं और उसे श्रद्धा के साथ सम्मान दिया जाता है।

काकीनाडा, आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जो रावण की भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा से जुड़ा माना जाता है। यहां विशाल शिवलिंग के पास बना ये मंदिर स्थानीय मान्यताओं के कारण खास महत्व रखता है। कहा जाता है कि रावण ने स्वयं इस स्थान को भगवान शिव की आराधना के लिए चुना था। यही वजह है कि आंध्र प्रदेश में यह स्थान उन चुनिंदा जगहों में शामिल है, जहां रावण को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाता है।

डिस्केलमर- यहां पर दी गई जानकारी पौराणिक कथाओं और मान्याताओं पर निर्धारित है।

रामायणम्: पार्ट 1 का ट्रेलर रिलीज

नमित मल्होत्रा की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायणम्: पार्ट 1’ का आधिकारिक ट्रेलर गुरुवार को दुनिया भर में रिलीज़ कर दिया गया। हिंदी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल और मलयालम सहित पांच भारतीय भाषाओं में जारी ट्रेलर में राम और रावण के बीच होने वाले महायुद्ध की भव्य झलक दिखाई गई है।

नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी यह फिल्म प्राइम फोकस स्टूडियोज़, डीएनईजी और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के सहयोग से तैयार की गई है। फिल्म दिवाली 2026 पर विश्वभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। इसके वैश्विक वितरण की जिम्मेदारी सोनी पिक्चर्स संभालेगी, जबकि उत्तर भारत में इसका वितरण धर्मा प्रोडक्शंस करेगा।

फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और पैन इंडिया स्टार यश रावण की भूमिका में नजर आएंगे। कलाकारों की टोली में अरुण गोविल, लारा दत्ता, रवि दुबे, अजिंक्य देव, कुणाल कपूर और रकुल प्रीत सिंह भी शामिल हैं।

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फिल्म की कहानी भगवान विष्णु के राम अवतार, उनके वनवास और रावण के साथ होने वाले धर्म-अधर्म के संघर्ष पर आधारित है। निर्माताओं के अनुसार यह दो भागों में बनने वाली एक भव्य सिनेमाई प्रस्तुति है, जिसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति और विरासत को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाना है।

फिल्म की पटकथा श्रीधर राघवन ने लिखी है, जबकि संगीत ऑस्कर विजेता हांस ज़िमर और ए.आर. रहमान ने तैयार किया है। फिल्म में अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक का उपयोग किया गया है।

निर्माता नमित मल्होत्रा ने कहा कि रामायण केवल एक महागाथा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर भव्यता के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

निर्देशक नितेश तिवारी ने कहा कि रामायण विश्व की महानतम कहानियों में से एक है और इसे पूरी श्रद्धा, प्रामाणिकता तथा सम्मान के साथ पर्दे पर उतारना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी रही है।

Pic Credit : ANI