क्या देशभर में चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन? जिंद-सोनीपत रूट के बाद अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी ये जानकारी

देश में पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन के सफल परिचालन के बाद अब इसे दूसरे रेल रूट्स पर भी चलाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिंद-सोनीपत रूट पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के बाद अब इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेल मंत्री ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि दूसरे रेल रूट्स पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का फैसला संसाधनों की उपलब्धता, ऑपरेशनल फिजिबिलिटी और दूसरी जरूरी चीजों पर निर्भर करेगा।

संसद में सांसदों ने पूछे थे हाइड्रोजन तकनीक से जुड़े कई सवाल

आपको बता दें कि राज्यसभा में अलग अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने रेलवे की इस नई तकनीक को लेकर कई सवाल उठाए थे। सांसदों ने इसके विकास पर हुए कुल खर्च, देश भर में स्वीकृत और प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं का ब्योरा, इन परियोजनाओं के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की उपलब्धता, लागत और ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन के लिए विकसित की जा रही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी को लेकर रेल मंत्री से जवाब मांगा था।

जिंद-सोनीपत रूट पर दर्ज हुई कॉमर्शियल सर्विस की सक्सेस

सांसदों के सवालों का लिखित जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च सदन को बताया कि 17 जुलाई 2026 को जिंद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत की गई थी। 17 जुलाई से लेकर 3 अगस्त तक 89 किलोमीटर लंबे जिंद-सोनीपत सेक्शन पर इस ट्रेन ने कुल 2492 किलोमीटर की दूरी तय की है। रेल मंत्री ने अपने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे में हाइड्रोजन संचालित ट्रेन तकनीक के इस्तेमाल को प्रदर्शित करने के लिए इस हाइड्रोजन ट्रेन को पायलट आधार पर विकसित किया गया है।

जींद में बना डेडिकेटेड प्लांट और सेफ्टी प्रोटोकॉल

रेल मंत्री ने बताया कि इस ट्रेनसेट को हाइड्रोजन उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा के जींद में एक डेडिकेटेड हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। सुरक्षा मानकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही हाइड्रोजन स्टोरेज फैसिलिटी तैयार की गई है, जिससे निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो सके।

पर्यावरण को फायदा: जीरो कार्बन उत्सर्जन

इस तकनीक के फायदों के बारे में बताते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि हाइड्रोजन ट्रेनसेट शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन सुनिश्चित करता है, जिसमें बाई-प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ जलवाष्प (Water Vapour) ही निकलती है। उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेनसेट फ्यूल सेल तकनीक पर काम करता है। इसमें ट्रैक्शन पावर जेनरेशन के लिए कोई मूविंग पार्ट या पारंपरिक इंजन नहीं होता है। इस वजह से इसके मूवमेंट में शोर भी नहीं होता और ध्वनि प्रदूषण कम होता है। यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे को हाइड्रोजन तकनीक के क्षेत्र में मजबूती से स्थापित करता है।

141 करोड़ रुपये थी इस प्रोजेक्ट की लागत

इस प्रोजेक्ट पर आए खर्च का ब्योरा देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट को कुल 141 करोड़ रुपये के खर्च से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेनसेट और इसका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रायोगिक तौर पर तैयार किया गया है, इसलिए इस चरण में स्थापित ट्रैक्शन सिस्टम के साथ हाइड्रोजन चालित ट्रेनों की लागत की सीधी तुलना करना उचित नहीं है। रेल मंत्री ने इस ट्रेन की प्रमुख विशेषताओं के बारे में भी बताया है। यह ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और विकास पर आधारित है। ब्रॉड-गेज प्लेटफॉर्म पर 10 डिब्बों के साथ यह दुनिया की सबसे लंबी और 2400 किलोवाट क्षमता वाली सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट है। इसमें 1200 किलोवाट के दो ड्राइविंग पावर कार लगे हैं, जो मिलकर 2400 किलोवाट बिजली पैदा करते हैं, और इसके साथ आठ पैसेंजर कोच जोड़े गए हैं।

क्या अन्य रूटों पर भी चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?

फिलहाल भारतीय रेलवे सिर्फ जिंद-सोनीपत सर्किट पर ही पायलट आधार पर इस हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन तकनीक का संचालन कर रहा है। देश के दूसरे हिस्सों में इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दोहराया कि अन्य रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का निर्णय भविष्य में संसाधनों की उपलब्धता, परिचालन संबंधी व्यावहारिकताओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा।

माता–पिता को वेक्सीन के रखरखाव से जूझते देखकर आया आइडिया, 3 किशोरों ने नमक से चलने वाला फ्रिज बनाकर जीता 12500 डॉलर का इनाम

भारत प्रतिभा की खान है। ये बाद मध्य प्रदेश के तीन किशोरों ने अपनी नई खोज से फिर साबित कर दी है। इंदौर के ध्रुव चौधरी, मिथ्रन लधानिया और मृदुल जैन ने फार्मेसी के क्षेत्र में काम करने वाले अपने माता-पिता को वैक्सीन के रखरखाव से जूझते देखा। बिजली की कमी और मौसम की मार के बीच वैक्सीन को ठंडा रखना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन इन किशोरों ने हार नहीं मानी और इस समस्या का ऐसा हल खोजा जिसने न सिर्फ उन्हें अंतररष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया, बल्कि 12,500 डॉलर की पुरस्कार राशि भी जीतने का मौका दिया।

ध्रुव, मिथ्रन और मृदुल ने एक ऐसा फ्रिज बनाया जो बिजली से नहीं नमक से चलता है। उन्होंने इसे ‘थर्मावॉल्ट’ नाम दिया, यह एक इंसुलेटेड कूलिंग बॉक्स है जिसे किसी आउटलेट, बैटरी और बर्फ की जरूरत नहीं होती। यह नमक से चलता है। इस खोज के लिए तीनों ने 2025 का अर्थ प्राइज जीता, यह पर्यावरण प्रोजेक्ट पर काम करने वाले किशोरों को दिया जाता है। चौधरी, लधानिया और जैन ने एशिया क्षेत्र से यह पुरस्कार जीता। इस उपलब्धि के साथ $12,500 मिले, जिसका इस्तेमाल इन्होंने थर्मावॉल्ट की 200 यूनिट बनाने और उन्हें टेस्टिंग के लिए 120 हॉस्पिटल में भेजने का प्लान बनाया।

ध्रुव, मिथ्रन और मृदुल ने कोविउ-19 के समय इस आइडिया पर काम करना शुरू किया। तीनों लड़के अपने माता-पिता से एक ही दिक्कत सुकर परेशान थे। उनका कहना था, वैक्सीन तैयार थीं, लेकिन जिन ग्रामीण इलाकों में बिजली नहीं थी, उनके पास उन्हें सही तापमान पर लंबे समय तक रखने का कोई तरीका नहीं था। इलाज होने और उसे पहुंचा पाने के बीच के इस अंतर को ही टीनएजर्स ने पाटने का फैसला किया।

सही नमक की खोज कैसे हुई

थर्मावॉल्ट के पीछे विज्ञान का बहुत साधारण सिद्धांत है। कुछ नमक, पानी में घुलने पर, आयन नाम के चार्ज्ड पार्टिकल्स में अलग हो जाते हैं। इस अलगाव में एनर्जी लगती है, और नमक अपने आस-पास से वह एनर्जी खींचता है, इस प्रोसेस में अपने आस-पास का पानी ठंडा करता है। चौधरी, लधानिया और जैन ने इंटरनेट की दुनिया को खंगाला। उन्होंने लगभग 150 नमक की एक लिस्ट, फिर इसे लगभग 20 तक सीमित किया और टेस्ट करने लायक बनाया। उन्होंने प्रयोग करने के लिए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) में लैब स्पेस लिया।

किसी भी नमक ने पानी को काफी ठंडा नहीं किया। नौवीं क्लास की साइंस की टेक्स्टबुक में चुपचाप पड़े दो कंपाउंड थे बेरियम हाइड्रॉक्साइड ऑक्टाहाइड्रेट और अमोनियम क्लोराइड उनके काम आए। बिजनेस इनसाइडर के मुताबिक, चौधरी ने कहा, “हमने सबसे अच्छा नमक ढूंढने के लिए पूरा इंटरनेट खंगाला, लेकिन हम बस अपनी नौवीं क्लास की साइंस की टेक्स्टबुक पर वापस आ गए।”

अमोनियम क्लोराइड अकेले 2 से 6 डिग्री सेल्सियस (लगभग 35 से 43 डिग्री फ़ारेनहाइट) के बीच टेम्परेचर बनाए रखता था, यह रेंज कई वैक्सीन के लिए सही है। बेरियम हाइड्रॉक्साइड ऑक्टाहाइड्रेट मिलाने से मिक्सचर सबजीरो टेम्परेचर पर पहुंच गया, जो वैक्सीन के लिए और ऑर्गन ट्रांसपोर्ट के लिए भी काम का था। फ़ॉर्मूला मिलने के तीन महीने बाद, उनके पास एक वर्किंग प्रोटोटाइप था और वे इंदौर के आस-पास के हॉस्पिटल में इसकी टेस्टिंग कर रहे थे।

थर्मावॉल्ट के अंदर असल में क्या है

डिवाइस खुद डिजाइन में सिंपल था। इंसुलेटेड प्लास्टिक के बाहरी शेल के अंदर कॉपर की लाइनिंग थी, जहां वैक्सीन या ऑर्गन रखे जाएंगे। प्लास्टिक और कॉपर के बीच, किशोरों ने पानी में नमक घोलकर बनाया गया एक कूलिंग सॉल्यूशन डाला।

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नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में आयोजित 7वें अंतर्राष्ट्रीय नवकरणीय ऊर्जा सम्मेलन में भाग लेते हुए कहा कि मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक देश के 500 गीगा वॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य नवकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण तथा हरित औद्योगिक विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। म.प्र. आज देश के अग्रणी राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में शामिल होने के लिए एयरपोर्ट से दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के माध्यम से शिवाजी स्टेडियम तक यात्रा कर स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का संदेश दिया। दिल्ली मेट्रो अपने संचालन में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का उपयोग करती है, इसलिए मुख्यमंत्री ने हरित ऊर्जा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में मेट्रो से यात्रा की।

 

मध्यप्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों का दिया प्रेजेंटेशन-नई दिल्ली में आयोजित 7वें अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी-2026 में मध्यप्रदेश ने स्वच्छ एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों और भविष्य की कार्य योजना का प्रभावी प्रेजेंटेशन दिया। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमार स्वामी तथा भूटान के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री एच.ई. ल्योनपो जेम त्शेरिंग तथा श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री अनुरा करुणाथिलका, अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा म.प्र.  मनु श्रीवास्तव सहित देश-विदेश के ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूर्ण प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में निवेश-अनुकूल नीतियों, सुदृढ़ आधारभूत संरचना और पर्याप्त प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता से मध्यप्रदेश देश के अग्रणी ग्रीन एनर्जी हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, हरित प्रौद्योगिकी, नवाचार, निवेश और अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। यह आयोजन स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने तथा सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में मध्यप्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता 438 मेगावॉट से बढ़कर 11,000 मेगावाट हो गई है, जो लगभग 25 गुना वृद्धि है। पिछले 2 वर्षों में राज्य सरकार ने नवकरणीय ऊर्जा, पंप्ड हाइड्रो ऊर्जा भंडारण तथा बायोमास नीतियां लागू कर निवेश और नवाचार को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि 750 मेगावाट रीवा अल्ट्रा मेगा सौर परियोजना ने देश में पहली बार सौर ऊर्जा का टैरिफ कोयला आधारित विद्युत से भी कम स्थापित किया। इस परियोजना को वर्ल्ड बैंक ग्रुप प्रेसिडेन्ट्स अवार्ड फॉर एक्सीलेंस प्राप्त हुआ तथा इसकी केस स्टडी हावर्ड युनिवर्सिटी में पढ़ाई जाती है। वहीं 1,500 मेगावाट आगर-शाजापुर-नीमच सौर परियोजना में 2.14 रूपये प्रति यूनिट का रिकॉर्ड न्यूनतम सौर टैरिफ प्राप्त हुआ है और इससे भारतीय रेलवे को 8 राज्यों में हरित ऊर्जा उपलब्ध कराई जा रही है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 278 मेगावॉट क्षमता की देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना का लोकार्पण 25 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया। इसके साथ ही 'सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना' के अंतर्गत लगभग 14,900 मेगावॉट क्षमता के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें किसानों और एमएसएमई क्षेत्र की उल्लेखनीय भागीदारी रही है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड स्थिरता को मजबूत करने के लिए राज्य में बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। मुरैना की 440 मेगावाट सौर ऊर्जा एवं 880 मेगावाट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना प्रदेश की पहली ऐसी परियोजना है, जिसमें प्रतिस्पर्धी दर पर विद्युत क्रय अनुबंध किए गए हैं। साथ ही 4 घंटे, 6 घंटे और 24 घंटे की सौर-सह-ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर भी कार्य प्रगति पर है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रूफटॉप सोलर योजना अंतर्गत 1,300 शासकीय भवनों पर 48 मेगावाट क्षमता विकसित की जा रही है, जबकि प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश के लगभग 1.5 लाख घरों में 566 मेगावॉट क्षमता के रूफटॉप सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों, हरित ऊर्जा की अपार संभावनाओं और औद्योगिक क्षमताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनेगा।

 

केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा तथा शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश जल्द ही 300 GW स्थापित गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता का आंकड़ा पार करेगा तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना से 50 लाख से अधिक परिवार रूफटॉप सोलर का लाभ ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों ने नवकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और सभी राज्यों से सस्टेनेबल डेवलपमेंट, ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण संरक्षण तथा स्वच्छ ऊर्जा के व्यापक उपयोग पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

 

प्रेजेंटेशन के मुख्य बिन्दु

4 घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण : ऐसी परियोजनाएँ जो सौर ऊर्जा को संग्रहित कर सायंकालीन पीक मांग के समय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करती हैं तथा ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाती हैं।

6 घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण : ये परियोजनाएँ अधिक अवधि तक ऊर्जा आपूर्ति प्रदान कर नवकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण, मांग प्रबंधन एवं ग्रिड स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा एवं भंडारण परियोजनाएँ : सौर ऊर्जा एवं दीर्घावधि ऊर्जा भंडारण के संयोजन से विकसित ये परियोजनाएँ चौबीसों घंटे स्वच्छ एवं विश्वसनीय विद्युत उपलब्ध कराने में सक्षम हैं, जिससे उद्योगों, वितरण कंपनियों तथा डेटा सेंटर जैसे उच्च मांग वाले उपभोक्ताओं को ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त होगी।

एनआरईडी  की भूमिका : नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्य प्रदेश शासन राज्य में नवकरणीय ऊर्जा नीति निर्माण, निवेश प्रोत्साहन, परियोजना विकास तथा ऊर्जा संक्रमण से संबंधित कार्यक्रमों के समन्वय हेतु प्रमुख विभाग है। विभाग प्रदेश को स्वच्छ, सुरक्षित एवं सतत ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए कार्यरत है।

रूम्सल की भूमिका : रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड, मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड एवं सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) का संयुक्त उपक्रम है। रूम्सल राज्य में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा, फ्लोटिंग सोलर, हाइब्रिड नवकरणीय ऊर्जा तथा बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विकास एवं क्रियान्वयन हेतु नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है। रूम्सल द्वारा विकसित नवाचार आधारित परियोजनाएँ मध्य प्रदेश को देश में ऊर्जा भंडारण एवं चौबीसों घंटे नवकरणीय ऊर्जा आपूर्ति के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर रही हैं।

23731 करोड़ की गोबरधन स्कीम को मिली मंजूरी, जानिए इससे किसानों के लिए इनकम के कौन-कौन से नए रास्ते खुलेंगे

GOBARdhan Scheme Explained: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के लिए भारत की नेशनल यूनिफाइड स्कीम गोबरधन (GOBARdhan – National Circular Bioenergy Scheme) को हरी झंडी दे दी है। सरकार ने इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय योजना के लिए 23731 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में जैविक संसाधनों यानी पराली, गोबर और दूसरे कचरे को साफ-सुथरी ऊर्जा, ग्रामीण समृद्धि और आर्थिक विकास में बदलना है। इस योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक लागू किया जाएगा। योजनी के माध्यम से ग्रामीण इलाके के कचरे को ही भारत की तरक्की का ईंधन बनाने की तैयार है। सरकार की कोशिश रहेगी कि इस स्कीम से गांव क्लीन एनर्जी प्रोडकेशन के केंद्र बनेंगे और देश की ऊर्जा सुरक्षा में सीधे भागीदार बनेंगे।

किसानों की आमदनी के खुलेंगे कई नए रास्ते

गोवर्धन योजना देश के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए कमाई के नए मौके लेकर आएगी। अक्सर किसानों के लिए सिरदर्द बनने वाली पराली (फसल अवशेष) और मवेशियों का गोबर अब उनकी अतिरिक्त कमाई का जरिया बनेंगे। इस योजना के माध्यम से किसान, ग्रामीण उद्यमी और सहकारी समितियां (कोऑपरेटिव्स) कचरा और बायोमास जुटाने का काम करके अच्छी इनकम कर सकेंगे। इसके अलावा सीबीजी प्लांट में गैस बनने के बाद निकलने वाली जैविक खाद के उत्पादन और बिक्री से भी किसानों को बड़ा फायदा होगा। इससे न सिर्फ केमिकल फर्टिलाइजर्स पर उनकी निर्भरता और खेती की लागत घटेगी बल्कि जैविक खाद बेचकर कमाई का एक नया रास्ता भी खुलेगा।

सीबीजी उत्पादन में 10 गुना तक होगी बढ़ोतरी

सरकार की इस पहल का लक्ष्य देश में घरेलू स्तर पर CBG के उत्पादन को करीब 10 गुना तक बढ़ाना है। इससे भारत की आयातित फॉसिल फ्यूल (पेट्रोल-डीजल और गैस) पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा बेहद मजबूत होगी। केमिकली सीबीजी पूरी तरह से प्राकृतिक गैस जैसी होती है और इसे मौजूदा गैस पाइपलाइन नेटवर्क में आसानी से मिलाया जा सकता है। यह योजना पूरे सीबीजी सेक्टर को एक राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए तैयार की गई है।

गोवर्धन योजना के 6 मेन ग्रोथ इंजन क्या हैं?

योजना को सुचारू और सफल बनाने के लिए सरकार ने छह मेन ग्रोथ इंजन निर्धारित किए हैं-

1 – निश्चित सीबीजी खरीद की गारंटी: उत्पादकों को अपनी तैयार गैस बेचने में कोई दिक्कत न आए इसके लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के माध्यम से खरीद तय की गई है। सीएनजी और पीएनजी में सीबीजी मिलावट का लक्ष्य 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत रखा गया है।

2 – स्टेबल प्राइसिंग प्रेमवर्क: सीबीजी उत्पादकों को आर्थिक स्थिरता देने के लिए 2110 रुपये प्रति MMBTU की दर से एक स्थिर मूल्य तय किया गया है। यह कम से कम 10 साल के लिए फिक्स रहेगा। इससे उत्पादकों को लंबे समय तक बेहतर कमाई की गारंटी मिलेगी।

3 – कैपिटल असिस्टेंस: नए सीबीजी प्रोजेक्ट्स को हर दिन 1 टन क्षमता (1 TPD) पर 2 करोड़ रुपये तक की सरकारी मदद दी जाएगी। यह मदद प्लांट की मशीनों के अलावा बायोमास इकट्ठा करने और जैविक खाद बनाने से जुड़े उपकरणों के लिए भी मिलेगी।

4 – पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास: सीबीजी प्लांटों को मुख्य गैस पाइपलाइनों और सिटी गैस नेटवर्क से जोड़ने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च घटेगा और बिक्री आसान होगी।

5 – क्रेडिट गारंटी सपोर्ट: एमएसएमई, महिला उद्यमियों और नए डेवलपर्स को बैंकों से आसानी से सस्ता लोन दिलाने के लिए एक विशेष क्रेडिट गारंटी मैकेनिज्म बनाया गया है।

6- इकोसिस्टम चैलेंज फंड: जिला स्तर पर योजना को बेहतर ढंग से लागू करने, कचरा इकट्ठा करने के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और नई तकनीक को अपनाने के लिए यह फंड बनाया गया है।

पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम

पिछले कुछ सालों में सतत (SATAT) पहल और दूसरी योजनाओं के तहत देश में 200 से अधिक सीबीजी प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। अब नई यूनिफाइड ‘गोवर्धन’ योजना पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित की जाएगी। इससे फैसले जल्दी होंगे और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। यह योजना वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन करके ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करेगी। सरकार का दावा है कि कृषि अवशेषों, गोबर और नगरपालिका के जैविक कचरे का सही इस्तेमाल करके यह योजना वेस्ट-टू-वेल्थ और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी

15 अगस्त 2026: स्कूल या कॉलेज में भाषण देना है? चुनें ये 5 दमदार टॉपिक्स

The image shows a school student delivering a speech from a podium, with the Tricolour in the background and the Red Fort, India Gate, and Qutub Minar visible on the other side.

15 अगस्त आने वाला है। इस बार भारत अपना 80वां स्वतं‍त्रता दिवस मनाने जा रहा है। स्कूल और कॉलेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो गई है। यदि आप भी अपने स्कूल या कॉलेज में भाषण प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं तो यहाँ 15 अगस्त को स्कूल या कॉलेज में भाषण देने के लिए 5 प्रासंगिक और प्रभावशाली टॉपिक्स दिए गए हैं।

 

1. “विकसित भारत @2047: हमारी सोच, हमारी ज़िम्मेदारी”

विषय: 2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा।

प्रमुख बातें: स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के भारत को साकार करने में आज की युवा पीढ़ी का योगदान, शिक्षा, तकनीक और स्वच्छता में हमारी व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी।

किसके लिए उपयुक्त: कॉलेज छात्र या सीनियर स्कूल छात्र।

 

2.”आज़ादी का वास्तविक अर्थ: अधिकार या कर्तव्य?”

विषय: सिर्फ़ मौलिक अधिकार माँगना ही आज़ादी नहीं है, बल्कि नागरिक कर्तव्यों का पालन करना भी स्वतंत्रता को बनाए रखने का आधार है।

प्रमुख बातें: यातायात नियमों का पालन, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनना।

किसके लिए उपयुक्त: स्कूल और कॉलेज दोनों के विद्यार्थियों के लिए।

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3.”डिजिटल क्रांति से आत्मनिर्भर भारत: युवाओं की भूमिका”

विषय: आधुनिक दौर में भारत का तकनीकी और आर्थिक रूप से सशक्त होना।

प्रमुख बातें: यूपीआई (UPI), लोकल फ़ॉर वोकल, स्टार्ट-अप कल्चर और साइंस/तकनीक के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान।

किसके लिए उपयुक्त: कॉलेज या टेक-ओरिएंटेड छात्रों के लिए।

 

4.”गुमनाम नायकों को नमन: स्वतंत्रता संग्राम के अनदेखे पन्ने”

विषय: भगत सिंह, गांधीजी या नेहरू जी के अलावा उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों की गाथा जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया।

प्रमुख बातें: जनजातीय नायक (जैसे बिरसा मुंडा), महिला क्रांतिकारी और स्थानीय वीरों के योगदान को याद करना।

किसके लिए उपयुक्त: स्कूल के छात्रों (मिडिल और हाई स्कूल) के लिए।

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5.”विविधता में एकता: भारत की सबसे बड़ी ताक़त”

विषय: विभिन्न भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों के बावजूद देश का एक सूत्र में बँधे रहना।

प्रमुख बातें: समाज में भाईचारा, सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने वाला पारंपरिक और सदाबहार विषय।

किसके लिए उपयुक्त: किसी भी वर्ग/कक्षा के छात्रों के लिए।

 

भाषण की शुरुआत और अंत के लिए सुझाव:

शुरुआत: किसी देशभक्ति शायरी या जोशीले नारे से करें (जैसे: “कुछ नशा तिरंगे की आन का है, कुछ नशा मातृभूमि की शान का है…”)।

अंत: हमेशा भविष्य के सकारात्मक दृष्टिकोण और “जय हिंद, जय भारत!” के नारे के साथ करें।

स्पेसएक्स का 4000 किलो वजनी रॉकेट चांद से टकराया:8,690 kmph की रफ्तार से अंतरिक्ष में घूम रहा था; NASA ने कहा- धरती को खतरा नहीं

इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का एक बेकाबू रॉकेट चांद की सतह से टकरा गया है। 4 हजार किलो वजनी और करीब 5 मंजिला इमारत जितना बड़ा यह रॉकेट करीब 8,690 किमी/घंटा की रफ्तार से टकराया। नासा ने कहा कि इस टक्कर से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है। हालांकि इस टक्कर की पुष्टि तस्वीरों के आने के बाद होगी। यह बेकाबू टुकड़ा स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा है। इसे जनवरी 2025 में फ्लोरिडा से अमेरिका और जापान के दो लूनर लैंडर को अंतरिक्ष में भेजने के लिए लॉन्च किया गया था। मिशन पूरा होने के बाद रॉकेट का यह हिस्सा अंतरिक्ष में तैरता रह गया। पिछले 18 महीनों के दौरान पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण की वजह से इसका रास्ता धीरे-धीरे बदल गया। खगोलविदों ने डेटा का अध्ययन करके पहले ही अनुमान लगा लिया था कि यह रॉकेट भटककर सीधे चांद की ओर जा रहा है और उससे टकराएगा। आइंस्टीन क्रेटर के पास टक्कर हुई, दूरबीन से भी देखना मुश्किल यह टक्कर चांद के ‘आइंस्टीन क्रेटर’ के पास हुई। यह क्षेत्र चांद के उस हिस्से में है जहां दिन का उजाला रहता है और जो पृथ्वी से दिखाई देता है। हालांकि, वैज्ञानिकों के मुताबिक इसे आम टेलिस्कोप से देखना नामुमकिन था, क्योंकि टक्कर के वक्त बनी रोशनी बेहद हल्की थी। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के खगोलविद डॉ. मैट बोथवेल का कहना है कि टक्कर के कारण चांद की धूल का एक बड़ा गुबार उठा होगा, जो 100 किलोमीटर तक ऊपर गया होगा और कई मिनटों तक रहा होगा। तस्वीरों के लिए इंतजार करना होगा, ऑर्बिटर जारी करेंगे डेटा फिलहाल जब यह हादसा हुआ, तब चांद का चक्कर लगा रहा कोई भी स्पेसक्राफ्ट सही पोजिशन में नहीं था, इसलिए लाइव तस्वीरें नहीं मिल पाई हैं। दक्षिण कोरिया का ‘दानुरी’ ऑर्बिटर और नासा का ‘लूनर रिकोनिसेंस ऑर्बिटर’ (LRO) आने वाले दिनों में टक्कर वाली जगह के ऊपर से गुजरेंगे और तस्वीरें लेंगे। वैज्ञानिक पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करके चांद की सतह पर बने नए निशान की पहचान करेंगे। चांद पर पहले से मौजूद है 190 टन कचरा इस टक्कर के बाद चांद पर इंसानों की छोड़ी गई या दुर्घटनाग्रस्त हुई चीजों की संख्या बढ़कर लगभग 3,000 हो गई है। इनका कुल वजन करीब 190 टन हो चुका है। सितंबर 1959 में सोवियत संघ का ‘लूना 2’ चांद की सतह पर पहुंचने वाला पहला मानव निर्मित ऑब्जेक्ट था। इसके अलावा नासा के अकेले अपोलो प्रोग्राम से जुड़ी 796 चीजें चांद पर मौजूद हैं। चांद पर कोई वायुमंडल या पर्यावरण नहीं है, इसलिए इस कचरे से वहां किसी ईकोसिस्टम को नुकसान नहीं पहुंचता। हालांकि, वैज्ञानिक चिंतित हैं कि भविष्य में बढ़ते लूनर ट्रैफिक के कारण ऐतिहासिक अपोलो लैंडिंग साइट्स को नुकसान न पहुंचे और नए स्पेसक्राफ्ट्स के टकराने का जोखिम न बढ़े। NASA और वैज्ञानिकों को इस टक्कर से क्या फायदा होगा? साइंस म्यूजियम की स्पेस हेड लिब्बी जैक्सन के अनुसार, यह वैज्ञानिकों के लिए काफी रोमांचक प्रयोग है क्योंकि रॉकेट की स्पीड, वजन और आकार का डेटा पहले से मौजूद था। आमतौर पर जब कोई प्राकृतिक उल्कापिंड चांद से टकराता है, तो वैज्ञानिकों के पास उसका शुरुआती डेटा नहीं होता। इस टक्कर से बने नए गड्ढे और उड़ी हुई धूल की परत का अध्ययन करके वैज्ञानिक यह समझ सकेंगे कि अरबों साल पहले चांद और हमारे सौर मंडल का निर्माण कैसे हुआ था। इधर ऊपरी हिस्सा टकराया, उधर 18वीं बार उड़ने को तैयार बूस्टर स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का निचला हिस्सा रीयूजेबल होता है। इसे बूस्टर कहते हैं और लैंडिंग करके धरती पर वापस आ जाता है। जिस जनवरी 2025 वाले मिशन का ऊपरी हिस्सा भटककर चांद से टकराया, उसी रॉकेट के निचले बूस्टर को 10 अगस्त को 18वीं बार लॉन्च किया जाएगा। नॉलेज पार्ट: जानें क्या है स्पेस डैब्रिस और आइंस्टीन क्रेटर… इंसान द्वारा अंतरिक्ष में भेजे गए रॉकेट्स के छूटे हुए टुकड़े, निष्क्रिय सैटेलाइट्स और मलबे को स्पेस डैब्रिस कहा जाता है। वहीं चंद्रमा के पश्चिमी किनारे पर स्थित एक बड़ा गड्ढा है, जिसका व्यास करीब 170 किलोमीटर है। इसे आइंस्टीन क्रेटर नाम दिया गया है। —————————————- ये खबर भी पढ़े… हजारों वॉट्सएप अकाउंट अचानक बंद, मैसेज आया- अंडर रीव्यू:बिना वार्निंग सभी फीचर्स ब्लॉक, कंपनी बोली- कभी-कभी गलती हो जाती है मैसेजिंग एप वॉट्सएप ने भारत समेत कुछ अन्य देशों में हजारों यूजर्स के अकाउंट 24 घंटे के लिए रीव्यू में डाल दिए हैं। इस दौरान एप के सभी मैसेजिंग और कॉलिंग फीचर्स को ब्लॉक कर दिया गया। पूरी खबर पढ़े…

रांची JPSC-JSSC धांधली, वांगचुक की अपील पर देवेन्द्र ने तोड़ा अनशन, जानिए कौन हैं छात्र नेता महतो

Devendra Nath Mahato Protest

Devendra Nath Mahato Protest: राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और धांधली के खिलाफ पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर हुई बातचीत और उनकी अपील के बाद देवेंद्र ने अन्न-जल ग्रहण किया। हालांकि, अनशन समाप्त होने के बावजूद छात्रों का आंदोलन जारी है। इस बीच, खबर है कि सीजेपी नेता अभिजीत दीपके भी रांची पहुंचने वाले हैं। 

 

झारखंड की राजधानी रांची में राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षा प्रणालियों में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका है। बुधवार को लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से देवेंद्र महतो से बात की। वार्ता के दौरान वांगचुक ने आंदोलन के मुद्दों पर चर्चा की और देवेंद्र की लगातार गिरती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उनसे अनशन वापस लेने का आग्रह किया। 

 

सोनम वांगचुक की अपील और छात्रों के भारी दबाव के बाद देवेंद्र महतो ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। लगातार चार दिनों के उपवास के कारण उनकी स्थिति बिगड़ रही थी। रांची सदर अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल काफी घट गया था, साथ ही वे गंभीर डिहाइड्रेशन और थकान से जूझ रहे थे। ALSO READ: CJP Protest : हिंसा करने वालों पर दिल्ली पुलिस का एक्शन, रद्द हो सकते हैं पासपोर्ट, CCTV से हो रही पहचान, सीजेपी का कल देशभर में आंदोलन का ऐलान

विवाद का पूरा घटनाक्रम

इस पूरे आंदोलन की शुरुआत बीती 2 जुलाई को जेपीएससी 14वीं की प्रारंभिक परीक्षा (PT) का परिणाम आने के बाद हुई। मुख्य परीक्षा के लिए कुल 2204 अभ्यर्थियों को योग्य घोषित किया गया था और परीक्षा की तिथि 18 से 20 जुलाई तय की गई थी। लेकिन परिणाम जारी होते ही धांधली के आरोप लगने शुरू हो गए। रिजल्ट में कैटेगरी-वाइज कट-ऑफ जारी नहीं किया गया। इसके अलावा जारी परिणाम पत्र पर जेपीएससी अध्यक्ष, सचिव या किसी सदस्य के हस्ताक्षर नहीं थे।

क्या है छात्रों की मांग? 

सोशल मीडिया पर एक अभ्यर्थी की OMR शीट वायरल हुई, जिसमें केवल 48 प्रश्न हल करने के बावजूद उसे मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था। व्यापक विरोध के बाद मुख्य परीक्षा को तो रद्द कर दिया गया, लेकिन छात्र इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं। अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि पेपर लीक किए गए और सीटें बेची गईं। छात्रों ने सीआईडी (CID) जांच को नकारते हुए पूरे मामले की जांच ईडी (ED) या सीबीआई (CBI) से कराने की मांग की है। ALSO READ: बड़ा धमाका! अब यूपी के भाजपा नेता की बेटी ने किया CJP का समर्थन, जानिए कौन हैं यशस्विनी राजे सिंह?

आंदोलन का बढ़ता दायरा, दीपके भी जाएंगे रांची

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) से जुड़े देवेंद्र महतो ने 25 जुलाई को मोराबादी मैदान में गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना शुरू किया था। शुरुआती दिनों में कम संख्या के बावजूद सोशल मीडिया के जरिए छात्रों का भारी समर्थन मिला। खबर है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके भी आंदोलनकारियों को समर्थन देने के लिए रांची जाएंगे। 

कौन हैं छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो?

झारखंड के छात्र आंदोलनों का एक प्रमुख चेहरा बन चुके देवेंद्र नाथ महतो का जीवन संघर्षों और सार्वजनिक मुद्दों से भरा रहा है। देवेंद्र रांची जिले के राहे प्रखंड स्थित कापीडीह गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता विशंभर महतो एक सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक हैं। देवेंद्र ने साल 2006 में मैट्रिक, 2008 में साइंस से इंटरमीडिएट, 2017 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक और बाद में कुरमाली भाषा में स्नातकोत्तर (PG) व B.Ed की डिग्री हासिल की। 

 

कॉलेज के दिनों से ही छात्र हित के मुद्दों पर मुखर रहे महतो ने 2015 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार की नियोजन नीति का विरोध किया। 2016 में छात्रवृत्ति में कटौती के खिलाफ सड़क पर उतरे।

 

छात्र आंदोलनों के कारण जेल में रहने के बावजूद उन्होंने रांची सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा और 1.48 लाख वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे। सिल्ली विधानसभा सीट से JLKM प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर 44 हजार वोट प्राप्त किए और पुनः तीसरे स्थान पर रहे। छात्रों की मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत रहने के कारण देवेंद्र महतो पर वर्तमान में 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

ग्लो झील ने रचा इतिहास! अरुणाचल प्रदेश को मिली पहली रामसर साइट

अरुणाचल प्रदेश के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य के लोहित जिले में ग्लो झील को भारत की 101वीं रामसर साइट का दर्जा मिला है। यह उपलब्धि राज्य के लिए बेहद खास मानी जा रही है और इससे अरुणाचल प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।

ग्लो झील (Glow Lake)

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अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित ग्लो झील को रामसर साइट घोषित किया गया है। यह राज्य की पहली वेटलैंड है, जिसे रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। यह उपलब्धि अरुणाचल प्रदेश के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रामसर साइट बनने का मतलब है कि यह झील पर्यावरण और जैव-विविधता के लिहाज से बेहद खास है। अब इस प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा और संरक्षण पर पहले से ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। इससे आने वाले समय में झील को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

 

रामसर साइट (Ramsar Site)

Glow Lake - A Unique Destination With Friendly Atmosphere

रामसर साइट उन वेटलैंड यानी आर्द्रभूमियों को कहा जाता है, जिनका पर्यावरण और बायोडाइवर्सिटी के लिए विशेष महत्व होता है। इन जगहों को इंटरनेशनल लेवल पर संरक्षण के लिए चुना जाता है। ऐसी जगहों पर कई दुर्लभ पौधे, पक्षी और वन्यजीव रहते हैं। साथ ही ये जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा पूरी दुनिया के लिए जरूरी मानी जाती है।

 

मीठे पानी की झील (Freshwater lake)

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ग्लो झील ऊंचाई पर मीठे पानी की झील है। इसमें पहाड़ों से निकलने वाली बारहमासी जलधाराओं का साफ पानी आता है। झील चारों ओर से घने जंगलों और प्राकृतिक हरियाली से घिरी हुई है, जिससे यहां का वातावरण बेहद शांत और सुंदर दिखाई देता है। इस इलाके में 150 से ज्यादा तरह के पेड़ और 49 प्रकार के ऑर्किड पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे पूर्वी हिमालय का एक बायोडाइवर्सिटी हॉटस्पॉट माना जाता है।

 

पर्यावरण के लिए जरूरी (Importance for Environment)

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ग्लो झील केवल एक खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी जरुरी है। यह झील पानी को सुरक्षित रखने, आसपास की नदियों में जल प्रवाह बनाए रखने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। इसके अलावा यह कार्बन को संग्रहित करने में भी भूमिका निभाती है, जिससे जलवायु परिवर्तन के इफेक्ट को कम करने में मदद मिलती है। साइंटिस्ट भी इस झील को महत्वपूर्ण मानते हैं।

 

लोगों और टूरिस्म को फायदा (Benefits for Local Communities and Tourism)

रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद इस एरिया में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे देश-विदेश से ज्यादा टूरिस्ट यहां आ सकते हैं, जिससे यहां के लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे। लोकल आदिवासी समुदाय अपनी संस्कृति और प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए टूरिस्म से जुड़ सकेंगे। इससे इलाके का डेवेलप भी होगा और लोगों की आजीविका भी बेहतर होगी।

संरक्षण और रिसर्च (Conservation and Research)

रामसर साइट बनने के बाद ग्लो झील के संरक्षण के लिए विशेष प्रबंधन योजनाएं तैयार की जाएंगी। इसके साथ ही इस क्षेत्र को बेहतर कानूनी सुरक्षा और इंटरनेशनल एक्सपर्ट की टेक्निकल सलाह भी मिल सकेगी। भविष्य में यहां साइंटिस्ट रिसर्च, पर्यावरण अध्ययन और बायोडाइवर्सिटी पर निगरानी के लिए फंड मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।

 

प्राकृतिक धरोहर की रक्षा (Protection of natural heritage)

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू (Pema Khandu) ने ग्लो झील को रामसर साइट का दर्जा मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह राज्य के लिए गर्व की बात है और इससे बायोडाइवर्सिटी कंजर्वेशन को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस उपलब्धि से पर्यावरण संरक्षण के साथ ही आने वाली जनरेशन भी राज्य की इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए प्रेरित होंगी।