626 शव, 2,400 लापता… नेपाल में बाढ़ से हाहाकार, भारत-चीन समेत कई देश मदद को आगे आए

Nepal Flood: नेपाल की भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर खोज, बचाव और राहत अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में अब तक 626 शव बरामद किए जा चुके हैं और करीब 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, 187 से ज्यादा विदेशी नागरिकों समेत 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया गया है। इसके अलावा, रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन में आपातकालीन अभियान जारी हैं, और नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के लिए खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है।

626 शव बरामद, 2,400 लापता

भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है और बड़े पैमाने पर आपातकालीन राहत कार्य शुरू करने पड़े हैं।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, 626 शव बरामद किए गए हैं, जबकि लगभग 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, अब तक 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, जिनमें 187 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में तलाशी, बचाव और इमरजेंसी मेडिकल ऑपरेशन जारी हैं। अधिकारी अभी भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं और प्रभावित इलाकों में लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाई जा रही है।

नेपाल ने खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है

नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के बीच खास अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है।

सुरंग से बचाव कार्यों के लिए भारत से 11 सदस्यों वाली एक तकनीकी टीम भेजी गई है। चीन से भी सुरंग से बचाव के लिए एक और खास टीम के आने की उम्मीद है।

भारत ने नेपाल की मदद के लिए 57 टन से ज्यादा राहत सामग्री भी भेजी है। चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से भी जरूरी सामान आ रहा है।

इस मदद से तुरंत बचाव और राहत कार्यों में सहायता मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अधिकारी आपदा के बड़े पैमाने से निपट रहे हैं।

विदेशी नागरिकों के लिए इमरजेंसी कंट्रोल रूम

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बाढ़ से प्रभावित विदेशी नागरिकों की मदद के लिए एक खास इमरजेंसी कंट्रोल रूम बनाया है। यह कंट्रोल रूम परिवारों के साथ तालमेल बिठाएगा, पहचान की प्रक्रियाओं में मदद करेगा और स्वदेश वापसी से जुड़ी प्रक्रियाओं को संभालेगा।

बता दें कि बाढ़ से बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। ऐसे में उनके परिवारों और संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क और तालमेल बनाना राहत और बचाव अभियान का एक अहम हिस्सा बन गया है।

नुकसान का आकलन जारी

नेपाल सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन शुरू कर दिया है। यह आकलन मुख्य बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है, जिसमें पुल, सड़कें और पनबिजली परियोजनाएं शामिल हैं।

वहीं, बाढ़ से हुई भारी तबाही को देखते हुए, नेपाल को उम्मीद है कि लंबी अवधि में पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय मदद भी अहम भूमिका निभाएगी। इसलिए नेपाल सरकार न केवल तत्काल बचाव और राहत कार्यों के लिए, बल्कि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए भी मदद मांग रही है।

नेपाल ने विदेशी मदद ठुकराने की खबरों को गलत बताया

नेपाल सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि उसने अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार कर दिया था। सरकार ने फिर से कहा है कि आपदा के बाद बचाव, राहत और पुनर्निर्माण के कामों के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की बहुत जरूरत है।

अधिकारियों ने आम लोगों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से यह भी अपील की है कि वे सिर्फ आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई जानकारी पर ही भरोसा करें और बिना पुष्टि किए गए आंकड़ों को न तो छापें और न ही प्रसारित करें।

ध्यान दें कि राहत और पुनर्निर्माण के कामों में मदद के लिए सीधे प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में QR कोड या ऑनलाइन लिंक के जरिए योगदान दिया जा सकता है।

नेपाल पर्यटकों के लिए खुला है

बाढ़ से हुई तबाही के बीच, अधिकारियों ने साफ किया है कि नेपाल विदेशी यात्रियों और पर्यटकों के लिए खुला है और वहां कामकाज जारी है, खासकर उन इलाकों में जो बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं।

यह जानकारी ऐसे समय में दी गई है जब भोटे कोशी नदी की बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य जारी हैं।

वहीं, अधिकारी लापता लोगों की तलाश, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और प्रभावित समुदायों तक राहत पहुंचाने पर ध्यान दे रहे हैं, साथ ही बुनियादी ढांचे को हुए बड़े नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।

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Nepal Flood Update: ‘चीन में फंसे हैं 400 से अधिक भारतीय, 320 अब भी लापता’; नेपाल त्रासदी पर विदेश मंत्रालय ने क्या बताया?

Nepal Flood Update: नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (28 अगस्त) को बताया कि करीब 400 अन्य भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारत काठमांडू को राहत एवं बचाव प्रयासों में हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन की तरफ फंसे 96 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से सड़क मार्ग से नेपाल पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि 21 भारतीय शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली पहुंचे। ये लोग एक दिन पहले नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से काठमांडू पहुंचे थे।

तमिलनाडु के इन निवासियों का राष्ट्रीय राजधानी के हवाई अड्डे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार (28 अगस्त) को बताया कि नेपाल-चीन सीमा के चीनी हिस्से में फंसे 400 से ज्यादा भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित सैकड़ों अन्य लोगों से संपर्क करने की कोशिशें जारी हैं। नेपाल के अधिकारियों द्वारा शेयर की गई ताजा जानकारी के अनुसार, बुधवार को अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 547 हो गई है।

320 भारतीयों की तलाश जारी

जायसवाल ने कहा, “जहां तक उन भारतीयों की संख्या का सवाल है, जिनसे हम संपर्क नहीं कर पा रहे हैं या जो लापता हैं, इस समय यह संख्या 320 है।” उन्होंने कहा, “भारतीय मूल के करीब 100 लोग ऐसे भी हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। ये भारतीय मूल के लोग हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए हो सकते हैं, लेकिन उनके पास अन्य देशों की नागरिकता है।” जायसवाल ने कहा कि करीब 400 भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं, लेकिन वे सुरक्षित हैं।

उन्होंने कहा, “वे अपने परिवारों के संपर्क में हैं। हमारे दूतावास ने भी उनमें से कई लोगों से संपर्क किया है। उनके परिवार के कई सदस्यों ने भी बीजिंग स्थित हमारे दूतावास द्वारा संचालित हेल्पलाइन नंबरों के जरिए हमसे संपर्क किया है।” जायसवाल ने कहा, “हमारा दूतावास चीन में स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है। इस बात पर काम कर रहा है कि वहां फंसे इन लोगों को किस तरह निकाला जा सकता है।”

जयशंकर ने की हाईलेवल मीटिंग

इस बीच, जयशंकर ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की और नेपाल की स्थिति की समीक्षा की। बैठक के दौरान लापता भारतीयों की स्थिति का पता लगाने पर विशेष ध्यान दिया गया। काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूत भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, “नेपाल में जारी राहत और बचाव प्रयासों पर चर्चा की। काठमांडू और बीजिंग स्थित हमारे दूतावासों ने भारतीय नागरिकों की स्थिति और उनके सुरक्षित होने के संबंध में ताजा जानकारी दी।”

मौत का आंकड़ा 547 पहुंचा

नेपाल में कई और शव बरामद किए जाने के साथ ही भीषण बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 547 हो गई। इस बीच, तलाश और बचाव अभियान सतर्कता के साथ जारी है, क्योंकि भोटेकोशी नदी इलाके में जलस्तर बढ़ने से दोबारा इस आपदा का खतरा मंडरा रहा है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने कहा कि इस सप्ताह की शुरुआत में जिस स्थान पर भीषण बाढ़ आई थी वहां जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

एनडीआरआरएमए ने अपने ताजा नोटिस में कहा, “बुधवार को जिस स्थान पर अचानक बाढ़ आई थी, उसी जगह पर अब कीचड़-युक्त पानी का स्तर बढ़ जाने से उस क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।” मध्य नेपाल के रसुवा और अन्य इलाकों में बुधवार को आई जबरदस्त बाढ़ के बाद यह चेतावनी जारी की गई है। बुधवार को आई बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है। बस्तियों, सड़कों, पुलों और पनबिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।

लोगों को सतर्क रहने की अपील

NDRRMA ने तलाश और बचाव कार्यों में शामिल लोगों के साथ-साथ अलग-अलग वजहों से भोटेकोशी और त्रिशूली इलाकों में रह रहे लोगों से अपील की है कि वे अत्यधिक सतर्क रहें। साथ ही किसी भी तरह का खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षित जगहों पर चले जाएं।

नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि इस हिमालयी देश के आठ जिलों से 547 शव बरामद किए गए हैं। जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। पुलिस के अनुसार, नवलपरासी पूर्व से 134, चितवन से 221, गोरखा से 44 और नुवाकोट से 38 शव बरामद किए गए।

इसी तरह, धादिंग से 40, तनाहू से 29, नवलपरासी पश्चिम से 28 और रसुवा से 13 शव बरामद किए गए हैं। चीनी अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में पांच लोगों की मौत हो गई है। नेपाल के रसुवा और आसपास के जिलों में बुधवार सुबह अचानक बाढ़ आने के बाद से कम से कम 977 लोग लापता हैं। इनमें 86 सुरक्षाकर्मी, 517 विदेशी पर्यटक और 127 नेपाली यात्री शामिल हैं।

अब तक प्रभावित इलाकों से 1,545 घायल व्यक्तियों और फंसे हुए लोगों को बचाया जा चुका है। इनमें से 84 लोगों का काठमांडू के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज हो रहा है, जहां परिजन बड़ी बेसब्री से अपनों की तलाश कर रहे हैं। नेपाल पुलिस ने तिब्बत की तरफ एक बांध के फिर से टूटने की सूचना मिलने के बाद अलर्ट जारी किया है।

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नेपाल पर्यटन बोर्ड ने शुक्रवार को बताया कि इस त्रासदी के बाद बाढ़-प्रभावित अलग-अलग इलाकों से कम से कम 121 विदेशी पर्यटकों को बचाया गया है, जिनमें 85 भारतीय शामिल हैं। पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, बचाए गए पर्यटकों में दक्षिण कोरिया के 9 और चीन के 16 नागरिक शामिल हैं। पुलिस बयान के अनुसार, इस त्रासदी के बाद तीसरे दिन भी तलाश और बचाव अभियान जारी रहा। अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं।

जयशंकर ने 21 भारतीय तीर्थयात्रियों का किया स्वागत, बोले- नेपाल में फंसे लोगों को निकालना पहली प्राथमिकता

S. Jaishankar: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों के एक समूह का स्वागत किया, जिन्हें नेपाल में आई बाढ़ से बचाया गया था। तीर्थयात्रियों से मिलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जयशंकर ने कहा, “मैंने अभी भारतीयों के एक समूह का स्वागत किया है जो कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर गए थे। उन्हें नेपाली सेना ने बचाया और काठमांडू पहुंचाया। इसके बाद, हमारे दूतावास ने उनकी वापसी का इंतजाम किया। मैं उनसे मिलने, इस बात पर खुशी जाहिर करने कि वे सुरक्षित हैं, और उनके अनुभवों के बारे में जानने के लिए यहां आया था।”

तीर्थयात्रियों को सुरक्षित बचाने के लिए नेपाल सरकार और वहां की सेना का आभार जताते हुए जयशंकर ने कहा कि सरकार प्रभावित इलाकों में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से संपर्क करने पर ध्यान दे रही है।

उन्होंने कहा, “हम वहां मौजूद सभी भारतीयों से संपर्क करने पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। हमारा मानना ​​है कि 315 से ज्यादा भारतीयों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। अलग-अलग जगहों से लगभग 85 भारतीयों को बचाया गया है, जिनमें अभी आए 21 तीर्थयात्रियों का यह समूह भी शामिल है।”

मंत्री ने कहा कि बचाए गए तीर्थयात्री नेपाल सेना के बहुत आभारी हैं, क्योंकि उन्होंने बहुत मुश्किल इलाके में यह बचाव अभियान चलाया।

बचाव और राहत कार्यों में मदद करना पहली प्राथमिकता

जयशंकर ने कहा कि भारत की पहली प्राथमिकता नेपाल के अपने बचाव और राहत कार्यों में मदद करना है और साथ ही प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीय नागरिकों का पता लगाकर उन्हें वापस लाना है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह उन्होंने नेपाल के विदेश मंत्री से बात की थी और भारत ने कई तरह की मदद की पेशकश की है, जिस पर काठमांडू अभी विचार कर रहा है।

विदेश मंत्री ने कहा, “हमने उन्हें कई तरह की मदद की पेशकश की है; वे उस पर विचार कर रहे हैं। उन्हें जो भी सही लगेगा, वे अपनी जरूरतों के हिसाब से उसे चुन लेंगे।”

जयशंकर ने तुरंत उठाए जाने वाले कदमों के बारे में कहा कि भारत एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में मदद के लिए टनलिंग एक्सपर्ट्स की एक टीम भेजने की तैयारी कर रहा है, जहां लोगों के टनल के अंदर फंसे होने की आशंका है।

उनके अनुसार, भारत बेली ब्रिज भी भेजेगा, जिन्हें उन इलाकों में तेज़ी से जोड़ा और लगाया जा सकता है जहां बाढ़ की वजह से कनेक्टिविटी खराब हो गई है। इन पुलों को लगाने में मदद के लिए एक टीम भी साथ जाएगी।

जयशंकर ने कहा कि जरूरत पड़ने पर नेपाल मेडिकल टीमें भी भेजी जा सकती हैं। भारत ने नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के कर्मियों को तैनात करने की भी पेशकश की है, अगर नेपाल सरकार ऐसी मदद मांगती है।

उन्होंने कहा, “अगर उन्हें NDRF के लोगों की जरूरत होगी, तो हम उन्हें भेज देंगे। हमने उन्हें यह विकल्प दिया है।”

आज नेपाल के लिए रवाना होगी भारत की तीसरी राहत उड़ान

भारत बाढ़ से प्रभावित नेपाल को मानवीय सहायता भी भेज रहा है। जयशंकर ने कहा कि राहत सामग्री लेकर दो विमान पहले ही भेजे जा चुके हैं, जबकि तीसरी राहत उड़ान शुक्रवार को रवाना होगी।

यह सहायता नेपाल की आपातकालीन प्रतिक्रिया में मदद करने के भारत के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, क्योंकि अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान जारी हैं।

जयशंकर ने कहा, “अभी हमारे लिए यही सबसे बड़ी प्राथमिकता है – इस स्थिति से कैसे निपटा जाए, नेपाल में राहत कार्यों में कैसे मदद की जाए, और बचाव कार्य तथा हमारे लोगों और अन्य देशों के नागरिकों की वापसी में कैसे सहायता की जाए।”

भारत मदद के लिए आगे

जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि मुख्य बचाव अभियान नेपाल के अधिकारियों और सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे हैं, और भारत जहां भी जरूरत हो, मदद दे रहा है।

उन्होंने कहा, “बचाव कार्य नेपाल के अधिकारियों और नेपाल के सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे हैं। इसलिए, 21 लोगों का जो समूह अभी भारत पहुंचा है, उन्हें भी नेपाल की सेना ने ही बचाया था। हमारी तरफ से नेपाल सरकार को जो भी मदद दी जा सकती है, हम वह दे रहे हैं।”

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चीन में 5.1 तीव्रता के भूकंप के बाद नेपाल में फिर हाई अलर्ट, तिब्बत में टूटा डैम, त्रिशूली से फिर भाग रहे लोग

Nepal Flood: नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को देश में बाढ़ को लेकर एक नया अलर्ट जारी किया है। साथ ही त्रिशूली से लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि बुधवार को आई भयानक भोटेकोशी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 475 हो गई है।

पुलिस के एक अधिकारी ने ANI को बताया कि इलाके में सड़कों के पुनर्निर्माण समेत सभी तरह के काम रोक दिए गए हैं।

नेपाल पुलिस के अधिकारी पी. चौधरी ने कहा, “पानी का स्तर बढ़ने वाला है, इसलिए सभी को रोका जा रहा है। ऑपरेशन में लगी सभी गाड़ियां वापस लौट रही हैं। वे सभी वापस आ रहे हैं। वहां से सभी लोगों को निकालकर सुरक्षित जगह पर ले जाया जा रहा है। सारा काम रोक दिया गया है। अभी और भी भयानक बाढ़ आने की आशंका है। इसीलिए सभी को अलर्ट पर रखा जा रहा है।”

चीन के सिचुआन में आया भूकंप

वहीं, आज चीन के सिचुआन में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके बाद नेपाल में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया। नेपाल पुलिस ने बताया कि नेपाल के त्रिशूली इलाके से लोगों को फिर से सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया, क्योंकि ऊपर से पानी के तेज बहाव के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

CGTN की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर ने बताया कि भूकंप के झटके दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत के लॉन्गचांग शहर में महसूस किए गए।

अलर्ट जारी करते हुए नेपाल पुलिस ने कहा कि तिब्बत की तरफ एक बांध फिर से टूट गया है।

नेपाल पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए दी जानकारी

नेपाल पुलिस ने X पर पोस्ट कर बताया, “सूचना मिली है कि तिब्बत की तरफ पानी का बांध फिर से टूट गया है। इसलिए सभी सुरक्षा कर्मियों, राहत और बचाव कार्य में लगे लोगों और आम जनता से तुरंत सतर्क रहने और सुरक्षित जगह पर जाने की अपील की जाती है। साथ ही, आसपास के लोगों को भी इसकी जानकारी दें।”

नेपाल के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में विपक्ष के नेता भीष्म राज आंगदेम्बे ने कहा कि भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद नेपाल की सेना बचाव कार्य जारी रखे हुए है।

उन्होंने त्रिशूली में पत्रकारों से कहा, “यहां की भौगोलिक बनावट के कारण मौसम की स्थिति बचाव कार्यों के लिए अनुकूल नहीं है, फिर भी हमारी सेना और हमारी सभी हेलीकॉप्टर टीमें इस काम में पूरी तरह से जुटी हुई हैं। ऊपरी इलाकों की स्थिति को देखते हुए हम तुरंत कार्रवाई कर रहे हैं – संघीय, प्रांतीय और स्थानीय सरकारें सभी मिलकर काम कर रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, इस ऑपरेशन में सेना के दो हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टर भी तैनात किए गए हैं। हम अपने पास मौजूद हर संसाधन का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम सभी को जानकारी दे रहे हैं और हमारी सुरक्षा एजेंसियां ​​लोगों से सुरक्षित रहने की अपील करते हुए एडवाइजरी जारी कर रही हैं।

बता दें कि त्रिशूली से रासुका तक बन रही सड़क का काम कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। सभी JCB मशीनों को वापस बुला लिया गया है और सड़क बनाने का सारा काम बंद कर दिया गया है।

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Nepal flash floods: नेपाल पर फिर मंडराया विनाशकारी बाढ़ का खतरा! तिब्बत में झील का बांध टूटा, नेपाली पुलिस ने जारी किया अलर्ट

Nepal flash floods alert: पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर विनाशकारी बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इस सप्ताह के शुरु में नेपाल में जो स्थान अचानक आई बाढ़ की चपेट में आया था वहां जलस्तर बढ़ने के बाद नेपाल प्रशासन ने एक बार फिर बाढ़ की चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी शुक्रवार (28 अगस्त) को जारी की गई। अधिकारियों ने इलाके के लोगों और बचाव कर्मियों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है। नेपाल के त्रिशूली में पुलिस अधिकारी पी. चौधरी ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि बचाव कार्य रोक दिए गए हैं

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल-चीन सीमा के पास पहले आई प्राकृतिक आपदा से जमा हुए मलबे के कारण बनी एक झील का पानी शुक्रवार (28 अगस्त) को बढ़कर बहने लगा। इसके बाद नेपाली अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में मौजूद रेस्क्यू टीमों और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया।

नेपाल पुलिस ने तत्काल अलर्ट जारी करते हुए बताया कि उसे सूचना मिली है कि तिब्बत की ओर पानी रोकने वाला एक नेचुरल बैरियर (Natural Barrier) टूट गया है। इस खबर के बाद पहले से बाढ़ की मार झेल रहे इलाकों में एक बार फिर खतरे की स्थिति बन गई है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने कहा कि उसी स्थान पर जलस्तर बढ़ने से इलाके में एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।

कीचड़ वाले पानी का स्तर बढ़ा

यह चेतावनी बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद जारी की गई है। इस बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है और बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। प्राधिकरण ने एक नए नोटिस में कहा, “जिस जगह पर अचानक बाढ़ आई थी वहां कीचड़ वाले पानी का स्तर बढ़ गया है और इलाके में फिर से बाढ़ आने का खतरा है।”

NDRRMA ने खोज एवं बचाव अभियान में शामिल लोगों और अलग-अलग वजहों से भोटेकोशी एवं त्रिशूली इलाकों में रह रहे लोगों से कहा है कि वे बहुत सतर्क रहें। साथ ही किसी भी तरह का खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षित जगहों पर चले जाएं। तिब्बत की तरफ एक बांध के फिर से टूटने की खबर मिलने के बाद नेपाल पुलिस ने भी अलर्ट जारी किया है।

तिब्बत की ओर एक बांध फिर से टूटा

नेपाल पुलिस ने Xपर एक पोस्ट में कहा, “ऐसी सूचना है कि तिब्बत की ओर एक बांध फिर से टूट गया है।” नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने गुरुवार को नेपाल-चीन सीमा के पास एक नयी झील बनने के बाद भोटेकोशी नदी के निचले इलाकों में बाढ़ के नए खतरे की चेतावनी दी थी।

चीनी अधिकारियों ने नेपाल को बताया था कि झील में लगभग 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया है और अगले तीन दिनों में इसमें 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी आ सकता है, जिससे बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। यह झील छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी है। ये नदियां तिब्बत से निकलती हैं और भोटे कोशी नदी की सहायक नदियों के तौर पर नेपाल में बहती हैं।

दो दिन पहले तबाही, अब फिर नया खतरा!

यह नया संकट उस विनाशकारी घटना के महज दो दिन बाद सामने आया है, जब हिमालयी सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर के बड़े हिस्से के ढहने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। उस आपदा के दौरान बड़ी मात्रा में चट्टान, मिट्टी, बर्फ और अन्य मलबा जमा हो गया था। इसी मलबे के कारण ऊपरी इलाके में एक झील जैसी संरचना बन गई। लगातार पानी जमा होने के कारण शुक्रवार को यह झील ओवरफ्लो होने लगी। इससे उन इलाकों पर फिर से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, जो बुधवार की फ्लैश फ्लड में पहले ही बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं।

25 लाख घन मीटर से ज्यादा हुआ झील में पानी

रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार तक झील में पानी की मात्रा 25 लाख घन मीटर से अधिक हो चुकी थी। इससे एक दिन पहले इंजीनियरिंग टीम ने झील में करीब 15 से 20 लाख घन मीटर पानी होने का अनुमान लगाया था। यानी बहुत कम समय में झील में पानी की मात्रा तेजी से बढ़ी, जिससे अधिकारियों की चिंता और बढ़ गई। अगर इस तरह बनी झील का प्राकृतिक या मलबे से बना बांध अचानक टूटता है, तो बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर तेजी से पहुंच सकता है। इससे पहले से प्रभावित इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।

रेस्क्यू ऑपरेशन भी करना पड़ा अस्थायी रूप से बंद

झील से जुड़े इस नए खतरे के कारण प्रभावित क्षेत्र में चल रहा बचाव अभियान भी कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। सुरक्षा को देखते हुए रेस्क्यू कर्मियों को जोखिम वाले क्षेत्रों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लोगों को संभावित बाढ़ की चपेट में आने से बचाना और स्थिति पर लगातार नजर रखना है।

नेपाल को चीन से मिली झील टूटने की सूचना

हालांकि, नेपाली अधिकारियों ने शुरुआत में यह स्पष्ट किया कि झील के पूरी तरह टूटने या फटने की सूचना की नेपाल की तरफ से स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई थी। रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय के सहायक मुख्य जिला अधिकारी और सूचना अधिकारी द्रुबा प्रसाद अधिकारी के मुताबिक, नेपाली अधिकारियों को चीनी अधिकारियों की ओर से इस संबंध में जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि चीन की ओर से सूचना मिली है कि एक झील टूट सकती है। लेकिन नेपाली पक्ष अभी तक इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर पाया है।

प्रभावित क्षेत्र में बढ़ी चिंता

लगातार दो प्राकृतिक आपदाओं के बाद सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों और राहत-बचाव एजेंसियों के सामने चुनौती और बढ़ गई है। पहले बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी थे। लेकिन अब मलबे से बनी झील के ओवरफ्लो होने की खबर ने एक और संभावित बाढ़ की आशंका पैदा कर दी है। अधिकारियों की नजर झील में पानी के स्तर और प्राकृतिक अवरोध की स्थिति पर बनी हुई है।

स्थिति बिगड़ने की स्थिति में संवेदनशील इलाकों से लोगों को और अधिक सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी की जा रही है। यानी दो दिन पहले आई तबाही के बाद नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में संकट अभी टला नहीं है। मलबे से बनी झील में तेजी से बढ़ता पानी और उसके ओवरफ्लो होने की स्थिति ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

Nepal Flood Video: नेपाल बाढ़ की तबाही के बीच हैवानियत! मृत महिला के बाल खींचकर कानोंर से उड़ाईं सोने की बालियां, ये शर्मनाक काम करने वाले कौन थे?

Nepal Flood News: नेपाल में आई अचानक और विनाशकारी बाढ़ के बीच एक दिल दहला देने वाली और इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। लोग नेपाल में कुदरत के इस कहर के बीच अभी भी अपनी जान और अपनों को बचाने के लिए जूझ रहे हैं लेकिन इस त्रासदी के बीच दो पुरुषों ने संवेदनहीनता और हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। नेपाल में नारायणी नदी में बहकर आई एक मृत महिला के शव से सोने की बालियां चुराने का शर्मनाक मामला सामने आया है। नेपाल पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए इस घिनौनी वारदात को अंजाम देने वाले दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

वायरल वीडियो में दिखा हैवानियत का मंजर, मूकदर्शक बने रहे लोग

इस दर्दनाक और शर्मनाक घटना का खुलासा एक 41 सेकंड के वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद हुआ। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दो शख्स बाढ़ के पानी में तैरती हुई महिला की लाश को लकड़ी के तख्तों की मदद से किनारे की ओर खींचते हैं।

इसके बाद दोनों आरोपियों ने महिला के शव को पानी से बाहर निकालने के नाम पर उसके बाल खींचे और फिर बेरहमी से उसके दोनों कानों से सोने की बालियां निकालकर अलग रख लीं। हैरान करने वाली बात यह भी रही कि जब यह घिनौना काम हो रहा था तब वहां मौजूद कई दूसरे लोग इसमें हस्तक्षेप करने या रोकने के बजाय अपने फोन से इस घटना का वीडियो बनाते रहे।

चितवन पुलिस ने की आरोपियों की पहचान, पोखरा बस पार्क के पास से हुए गिरफ्तार

शर्मनाक हरकत का यह वीडियो सामने आने के बाद नेपाल पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू की। वीडियो के आधार पर नेपाल पुलिस ने दोनों आरोपियों की पहचान 25 वर्षीय मदन गुरुंग और 38 वर्षीय उमेश चौधरी के रूप में की।

हमारी सहयोगी वेबसाइट News18 की रिपोर्ट में नेपाली मीडिया पोर्टल खबरहब के हवाले से बताया गया है कि पुलिस ने दोनों संदिग्धों को गुरुवार को भरतपुर महानगरपालिका-1 स्थित पोखरा बस पार्क के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने सख्त लहजे में चेतावनी जारी की है कि ऐसे कठिन समय में बाढ़ पीड़ितों को निशाना बनाने वाली लूटपाट या किसी भी तरह की अमानवीय गतिविधि के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नेपाल में बाढ़ का कहर: 469 लोगों की मौत, सैकड़ों अभी भी लापता

यह शर्मनाक घटना ऐसे समय में हुई है जब नेपाल हिमालयी सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ की चपेट में है। बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा पर ल्हेन्दे नदी के पास बर्फ और चट्टानों के ढहने से भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में पानी, मलबे और पत्थरों का भयंकर सैलाब आ गया था। इस तबाही की वजह से नेपाल में अब तक कम से कम 469 लोगों की जान जा चुकी है जबकि चीन की तरफ 3 लोगों की मौत हुई है। सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। इस आपदा का सबसे बड़ा असर रसुवा और धाडिंग जिलों में देखने को मिला।

बाढ़ का पानी नीचे बहते हुए नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व तक पहुंच गया। सड़कें और पुल बह जाने और कम्युनेकेशन के साथ बिजली सेवाएं ठप होने से राहत और बचाव टीमों को कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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खतरा अभी टला नहीं, नदियों के आसपास बना हुआ है जोखिम

नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग ने चेतावनी जारी की है कि खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक नदी में रुकावट आने की वजह से बनी झील से पानी अभी पूरी तरह से बाहर नहीं निकला है। इस वजह से भोटे कोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में अभी भी लगातार खतरा मंडरा रहा है और वहां अलर्ट जारी है।

Nepal Flood update: नेपाल में बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हुई, 290 भारतीय नागरिक अभी भी लापता, चीन ने फिर जारी किया अलर्ट

Nepal-Tibet flash flood updates: मध्य नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार (28 अगस्त) को बढ़कर 469 हो गई। आपदा के बाद तीसरे दिन भी तलाश एवं बचाव अभियान जारी रहने के बीच और शव बरामद किए गए। नेपाल पुलिस ने एक बयान में कहा कि आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, चितवन से 178, नवलपरासी पूर्व से 110, गोरखा से 44, नुवाकोट से 37 और धादिंग जिले से 33 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह तनाहू से 28, नवलपरासी पश्चिम से 27 और रसुवा से 12 शव बरामद किए गए हैं।

अब तक प्रभावित इलाकों से 1,545 घायलों और फंसे हुए लोगों को निकाला जा चुका है। इनमें से 84 लोगों का काठमांडू के विभिन्न अस्पतालों में इलाज हो रहा है। बयान के अनुसार, इस त्रासदी के बाद तीसरे दिन भी तलाश और बचाव अभियान जारी रहा। अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों का मलबा तेजी से नीचे आ गया जिससे बुधवार को पानी, कीचड़ और मलबे का सैलाब मध्य नेपाल से होकर नीचे की ओर बह निकला। इस आपदा ने कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई तथा कई मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए। इसके कारण जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा।

नेपाल पुलिस के एक बयान में कहा गया कि प्रभावित इलाकों से अब तक 50 विदेशियों समेत 796 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए बचाया गया है। जबकि अन्य 796 लोगों को सड़क मार्ग से सुरक्षित निकाला गया है।

290 भारतीय नागरिक अभी भी लापता

अधिकारियों के सामने एक और चुनौती आ गई है, क्योंकि मलबे की रुकावट के पीछे बढ़ता जलस्तर अचानक पानी के तेज बहाव का खतरा पैदा कर रहा है। इस स्थिति ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। नेपाल पुलिस ने बताया कि 28 पुलिसकर्मी अभी भी संपर्क से बाहर हैं। जबकि प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्यों के लिए 8,386 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, अब तक 1,545 लोग घायल हुए हैं या उन्हें बचाया गया है। मिली लाशों में से 110 नवाल्परासी ईस्ट में मिलीं, जो किसी एक जिले में मिली सबसे ज्यादा संख्या है। चितवन में 108 मौतें दर्ज की गई। जबकि गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, धाडिंग में 33, तनहुन में 28 और नवाल्परासी वेस्ट में 27 लाशें मिलीं। रासुवा में 12 लाशें मिलीं।

पुलिस अपडेट में कुछ प्रभावित जिलों में घायल और बचाए गए लोगों की जानकारी भी दी गई। घायल और बचाए गए लोगों की कैटेगरी में रासुवा में 644, नुवाकोट में 898 और धाडिंग में तीन लोग शामिल थे। इस बीच, नेपाल पुलिस के अपडेट के अनुसार, काठमांडू घाटी के अलग-अलग अस्पतालों में 84 घायल लोगों का इलाज चल रहा था या उन्हें छुट्टी दे दी गई थी।

चीन ने जारी किया अलर्ट

चीन ने तिब्बत-नेपाल सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद ‘लेवल-चार’ का अलर्ट जारी किया है। चेतावनी दी है कि दो नदियों के संगम के पास बनी एक नई बैरियर झील (Barrier Lake) के टूटने का खतरा काफी बढ़ गया है जिससे निचले इलाकों में भीषण बाढ़ आ सकती है। बैरियर लेक वह झील होती है जो किसी प्राकृतिक रुकावट के कारण नदी या जलधारा का रास्ता बंद हो जाने से बनती है।

चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने गुरुवार रात तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू की और छोचेन खोला तथा पुरेपु त्संगपो नदियों के संगम के पास बनी इस बैरियर झील से पैदा हुए खतरे को लेकर आगाह किया। ये दोनों नदियां तिब्बत से निकलती हैं। यह नेपाल में भोटे कोशी नदी की धारा का हिस्सा हैं।

चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, गुरुवार सुबह तक झील में अनुमानित 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था। पूर्वानुमान के मुताबिक, लगातार हो रही बारिश के कारण अगले तीन दिन में झील में पानी का प्रवाह करीब 30 लाख घन मीटर तक पहुंच सकता है जिससे इसके टूटने का खतरा और बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में बाढ़ का पानी नीचे की ओर तेजी से बह सकता है और चीन-नेपाल सीमा पर स्थित गिरोंग पोर्ट तथा आसपास के निचले इलाकों में भारी तबाही मचा सकता है।

इसके मद्देनजर जल संसाधन मंत्रालय ने स्थानीय अधिकारियों को बैरियर झील और बारिश की स्थिति पर कड़ी नजर रखने, मौसम और जल प्रवाह के पूर्वानुमान तथा जोखिम के आकलन को बेहतर बनाने एवं निचले इलाकों में संभावित रूप से प्रभावित होने वाले लोगों की सटीक पहचान करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, चीन ने नेपाल सीमा के पास तिब्बत के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए उपग्रहों और ड्रोनों को तैनात किया है।

‘झील टूटने से एक और बड़ी आपदा आ सकती है’

चीनी अधिकारियों को आशंका है कि झील टूटने से एक और बड़ी आपदा आ सकती है। ‘शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, चीन की सरकारी इंजीनियरिंग और बचाव कंपनी ‘चीन अन्नोंग’ की आठ सदस्यीय अग्रिम टीम संचार और खोज उपकरणों के साथ बृहस्पतिवार को गिरोंग काउंटी पहुंची। टीम नदी के ऊपरी हिस्से में बने अवरोध से संबंधित आंकड़े जुटाएगी।

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मौके पर मौजूद बचावकर्मियों के मुताबिक, पोर्ट से करीब तीन किलोमीटर दूर नदी के ऊपरी हिस्से में जमा मलबे को सुरक्षित रूप से हटाने से पहले अवरोधक झील के खतरे को टालना जरूरी है। फायर कर्मियों ने झील की पूरी परिधि के आसपास कई बिंदु चिह्नित करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया है। इन बिंदुओं के निर्देशांक के आधार पर झील के जल क्षेत्र का आकलन किया जा सकेगा। ड्रोन से मिले दृश्यों में पता चला कि बुधवार रात की तुलना में झील का जलस्तर बढ़ गया।

नेपाल में भूकंप जैसे आया पानी का बवंडर और उसी के साथ बहने लगा 24 साल का मजदूर बिबेक कुमाल! जीवन और मौत के बीच ऐसे हुआ मुकाबला

Nepal Flash Flood: नेपाल में बुधवार को हिमालयी क्षेत्र और तिब्बत सीमा के पास आई अचानक और भीषण बाढ़ हाल के कुछ सालों की की सबसे भयावह आपदा बन चुकी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लगभग 1500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक लापता लोगों में करीब 300 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं। इस फ्लैश फ्लड ने सड़कों और बेसिक इंफ्रा को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है जिससे राहत और बचाव टीमों को कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस बीच इस फ्लड का शिकार हुए लोगों की ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं जो दहला रही हैं।

आम के पेड़ ने बचाई बिबेक की जिंदगी, देखते ही देखते गायब हो गया मकान

बाढ़ के इस तांडव से सुरक्षित बचे 24 साल के मजदूर बिबेक कुमाल की कहानी चमत्कार से कम नहीं है। जब यह आफत आई तब बिबेक बिदुर इलाके में मजदूरी कर रहे थे। हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्ट पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में रॉयटर्स के हवाले से बताया है कि बिबेक एक नए बने मकान के बाहर शौचालय के लिए गड्ढा खोद रहे थे तभी उन्हें अचानक एक फुफकार जैसी तेज आवाज सुनाई दी। उनके ऊपर काम कर रहे चार साथियों ने उन्हें तुरंत बाहर निकलकर भागने के लिए चिल्लाया।

बिबेक गड्ढे से बाहर तो निकल गए लेकिन पानी की हाहाकारी धारा ने उन्हें तुरंत अपनी चपेट में ले लिया। काठमांडू के एक अस्पताल में इलाज करा रहे बिबेक ने कहा कि, ‘मैंने भागना शुरू किया तभी पानी की एक विशाल दीवार ऐसे गरजती हुई नीचे आई मानो भूकंप आ गया हो।’ बाढ़ का पानी, कीचड़ और मलबा उन्हें अपने साथ बहाकर ले जाने लगा। लेकिन तभी अचानक किस्मत से वे एक आम के पेड़ में जाकर अटक गए।

बिबेक ने कहा कि ‘सौभाग्य से मैं एक आम के पेड़ में अटक गया। अगर वह आम का पेड़ न होता तो मैं बहकर मौत के मुंह में चला जाता।’ बिबेक ने बताया कि जब वे पेड़ को पकड़े हुए थे तब उन्होंने अपनी आंखों के सामने उस पूरे मकान को गायब होते देखा जहां वे काम कर रहे थे। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। पानी के तेज बहाव और एक बड़े पत्थर की चपेट में आने से उनके दाहिने पैर में काफी चोटें आई हैं।

कीचड़ की दीवार में बह गई पत्नी, हेलीकॉप्टर से बचाए गए केशव प्रसाद

ऐसी ही कुछ कहानी 68 साल के केशव प्रसाद बराल की है। बाढ़ आने पर उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। उन्होंने रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने अपने घर की तरफ कीचड़ का एक विशाल गुबार आते देखा। उन्होंने कहा कि कीचड़ का एक बहुत बड़ा सैलाब सीधा हमारी ओर आ रहा था। जैसे-जैसे यह करीब आ रहा था, इसकी ऊंचाई और बढ़ती जा रही थी।

जब कीचड़ घर में दाखिल हुआ तो केशव ने अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उन्हें छत पर ले जाने की कोशिश की। लेकिन कीचड़ के प्रचंड बहाव ने उनकी पत्नी को खींच लिया और वे बह गईं। बाद में केशव प्रसाद को हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया गया लेकिन उनकी पत्नी अब भी कीचड़ के नीचे लापता हैं। शायद उनकी जान नहीं बच पाई है।

पीने को एक गिलास पानी तक नहीं बचा

बाढ़ प्रभावित एक और बस्ती में रहने वाली दीपिका (बदला हुआ नाम) ने भी इस तबाही का खौफनाक मंजर देखा। वे सुबह करीब 9:30 बजे अपने घर के बाहर बर्तन धो रही थीं। तभी उन्होंने त्रिशूली नदी के बाढ़ के पानी को तेज स्पीड से आते देखा। एनडीटीवी को उन्होंने बताया कि बाहर होने की वजह से वे तुरंत अपने परिवार को अलर्ट कर पाईं और उन्हें लेकर घर की छत पर भाग कर गईं।

त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक हुए इस इजाफे से उनके घर की पहली मंजिल पूरी तरह कीचड़ से भर गई। उनका परिवार तो बच गया लेकिन घर का सारा सामान और जमा पूंजी मलबे में दफन हो गई। दीपिका ने बताया कि उनके पास पीने के लिए एक गिलास पानी तक नहीं बचा है। उन्होंने अपने आंगन की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां पीने के पानी का मटका रखा हुआ करता था अब वहां कुछ नहीं है।

इसी तरह एक दूसरी पीड़िता कल्पना मल्ला ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपने पिता, मां, बहन और बहन के बच्चों को पानी के तेज बहाव में बहते देखा। कल्पना और उनका बेटा किसी तरह एक मकान की छत पर चढ़ने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि उनके पास बचने का कोई मौका ही नहीं था। इस बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया, लेकिन मैं और मेरा बेटा किसी तरह छत पर चढ़कर बच पाए।

सड़कों और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान, इसरो ने बताई वजह

बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों के लोग नेपाल सेना के ट्रेनिंग सेंटर के बाहर अपने लापता रिश्तेदारों की जानकारी पाने के लिए जमा हो रहे हैं। यहां से हेलीकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन का संचालन किया जा रहा है। पुलिस लापता लोगों के नाम दर्ज कर रही है। इस आपदा ने देश के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रभावित इलाके के छह बड़े हाइड्रोपावर स्टेशनों को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में आई इस विनाशकारी बाढ़ की मुख्य वजह ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में एक बड़े ग्लेशियर का ढहना हो सकता है। तबाही के पूरे पैमाने का आकलन अभी जारी है और मौतों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

Video: तिब्बत में ईशा फाउंडेशन के 80 श्रद्धालु भी लापता, इनके बारे में बात करते हुए भावुक हुए सद्गुरु! बोले- हमें भी जाने दो

Nepal flood videos: तिब्बत और नेपाल की सीमा पर आई भीषण बाढ़ पर आध्यात्मिक गुरु एवं ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने गहरा दुख जताते हुए स्थिति को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि जिस स्तर पर तबाही हुई है, उसे देखते हुए अभी नुकसान का सही आंकड़ा सामने आना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि उनके संगठन से जुड़ा कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया एक समूह बाढ़ की चपेट में आया, जिसमें 80 लोग शामिल थे। नेपाल में हुई त्रासदी पर बोलते हुए सद्गुरु भावुक हो गए। तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित गैर-लाभकारी संगठन ईशा फाउंडेशन ने दावा किया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं जो आव्रजन केंद्र पर थे।

सद्गुरु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट कर बताया कि वह खुद घटनास्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सभी फोन और टेलीकम्युनिकेशन सेवाएं बंद हैं। भूस्खलन की वजह से रास्ते भी बाधित हैं। ऐसे में प्रभावित इलाके में संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है। वह भारतीय, चीनी और अमेरिकी दूतावासों के जरिए वहां पहुंचने की अनुमति लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि राहत और बचाव के काम में मदद की जा सके।

सद्गुरु ने क्या बताया?

सद्गुरु ने कहा, “हमारे ग्रुप में से एक एस3 ग्रुप जिससे हम सागर में मिले थे। फिर दोबारा तब मिले जब हम ऊपर ट्रेकिंग कर रहे थे। वे नीचे आ रहे थे। इस ग्रुप में 80 लोग शामिल थे जिनमें 34 पुरुष और 46 महिलाएं थीं। इनमें से 22 लोग अमेरिका, 12 कनाडा, 11 ऑस्ट्रेलिया, 9 यूनाइटेड किंगडम, 4 जर्मनी, 3 फ्रांस, 3 नेपाल, 2 नीदरलैंड, 2 न्यूजीलैंड, 2 सिंगापुर और 2 स्पेन से थे। फिनलैंड, हंगरी, इजरायल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका से एक-एक व्यक्ति ग्रुप में शामिल था।”

सद्गुरु ने आगे बताया कि समूह जब वापसी के दौरान इमिग्रेशन सेंटर पहुंचा, तब तक सब कुछ सामान्य था। बुधवार सुबह करीब 9:05 बजे समूह के लीडर ने संदेश भेजकर बताया था कि वे इमिग्रेशन सेंटर पहुंच चुके हैं। इसके कुछ ही मिनट बाद करीब 9:14 बजे अचानक यह भयावह आपदा आई। इसके बाद समूह के सदस्यों से संपर्क टूट गया। सद्गुरु ने कहा कि उनके नेपाल के फोन नंबर भी सक्रिय नहीं हुए, जिससे चिंता और बढ़ गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईशा फाउंडेशन से जुड़े 77 तीर्थयात्री और तीन स्वयंसेवक लापता बताए जा रहे हैं।

शहर का एक हिस्सा पानी और मलबे में बह गया

उन्होंने कहा कि जिस जगह यह घटना हुई, वहां इमारतें और शहर का एक हिस्सा तक पानी और मलबे में बह गया। इसलिए फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि कितने लोग सुरक्षित हैं और कितने लापता हैं। उन्होंने बताया कि उनके समूह के साथ वॉलंटियर और एक डॉक्टर भी मौजूद थे। कई नेपाली गाइड भी यात्रा दल के साथ थे और उनके परिवार प्रभावित इलाके में रहते हैं। ऐसे में सिर्फ तीर्थयात्रियों की ही नहीं, बल्कि स्थानीय परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।समाचार

सद्गुरु ने कहा कि अलग-अलग रिपोर्टों में नेपाल की तरफ सैकड़ों लोगों के लापता होने की बात सामने आ रही है। जबकि तिब्बत की तरफ भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। मृतकों की संख्या 160 से अधिक हो चुकी है।

बाढ़ से पहले भूकंप आया था?

शुरुआत में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बाढ़ से पहले भूकंप आया था। न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि बाद में वैज्ञानिक विश्लेषण में संकेत मिले कि आपदा की वजह हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से का खिसकना या ग्लेशियर से जुड़ी घटना हो सकती है। इसके बाद नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा। फिर देखते ही देखते तेज फ्लैश फ्लड ने तबाही मचा दी।

पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि रास्ते, पुल, मकान और दूसरी प्रॉपर्टी इसकी चपेट में आ गईं। राहत एवं बचाव दल के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई जगहों पर सड़कें टूटने और पानी का स्तर बढ़ने के कारण पहुंचना मुश्किल है।

लापता लोगों के परिजन परेशान

सद्गुरु ने कहा कि इस मुश्किल समय में सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों के परिवारों की है। उन्होंने बताया कि संबंधित देशों के दूतावासों को घटना की जानकारी दी गई है। प्रभावित परिवारों तक भी संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह और उनकी टीम हरसंभव तरीके से मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।

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उनका कहना है कि इस समय सबसे जरूरी काम है कि किसी भी तरह प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच बनाई जाए और वहां मौजूद लोगों की स्थिति का पता लगाया जाए। न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय जल्द ही राज्य सचिवालय में मंत्रियों और अधिकारियों के साथ नेपाल में फंसे तमिल लोगों को बचाने के लिए एक इमरजेंसी बैठक करेंगे।

Nepal-China Border Floods: नेपाल-चीन बॉर्डर पर अचानक आई बाढ़ में अब तक 160 लोगों की मौत, 133 भारतीय समेत 750 से अधिक लापता

Nepal-China Border Floods Update: तिब्बत की सीमा के पास मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार (27 अगस्त) सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। अचानक आई बाढ़ में करीब 160 लोगों की मौत हो गई तथा 133 भारतीय नागरिक समेत 750 से अधिक लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई। कई महत्वपूर्ण पुल बह गए। कम से कम एक दर्जन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट तबाह हो गईं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया। उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी।

अधिकारियों ने बताया कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए। नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानें खिसकने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी के जरिए त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आ गई। इसके बाद बाढ़ का पानी नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों में फैल गया तथा राजधानी काठमांडू से लगभग 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।

500 लोग लापता

नेपाल सरकार ने कहा कि करीब 500 लोग लापता हैं। जबकि चीन के सरकारी सीजीटीएन न्यूज चैनल ने बताया कि सीमा के चीनी हिस्से में तीन लोगों की मौत हुई और 265 लोग लापता हैं। प्रभावित इलाकों के वीडियो में कीचड़, चट्टानों और मलबे से भरा पानी तेज रफ्तार से सीमावर्ती क्षेत्र में बहता दिखाई दिया। तेज बहाव को इमारतों और वाहनों की ओर बढ़ते देख लोग भागते नजर आए।

सामने आए खौफनाक वीडियो

एक वीडियो में चार मंजिला इमारत को तेज बहाव में बहते देखा गया। जबकि एक अन्य वीडियो में रसुवा में एक कार बाढ़ के तेज पानी में बहती नजर आई। एक और वीडियो में पानी के जबरदस्त दबाव से एक लंबा पुल दो हिस्सों में टूटता दिखाई दिया। एक अन्य वीडियो में तेज बहाव के कारण पुल ढहते और बहते नजर आए। धादिंग जिले के एक वीडियो में बाढ़ का पानी एक पुल से टकराया, जिसके बाद वह ढहकर बह गया। एक अन्य वीडियो में कीचड़ भरा पानी तेजी से एक पुल को अपनी चपेट में लेता और करीब 30 सेकंड में उसे बहाकर ले जाता नजर आया।

133 भारतीय लापता

अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 100 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का इलाज काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि लापता हुए करीब 500 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं। इनमें से कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं। गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं, जो एक आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं। बाद में नेपाल सरकार ने कहा कि इस आव्रजन केंद्र के कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

तमिलनाडु के अधिकारियों ने बताया कि लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं। भारतीयों और अप्रवासी भारतीयों के अलावा लापता हुए बाकी पर्यटक दो दर्जन से ज्यादा देशों से हैं, जिनमें अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड शामिल हैं। इसके अलावा, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग जगहों पर 80 सुरक्षाकर्मी लापता हो गए हैं, जिनमें नेपाल सेना के 44 जवान भी शामिल हैं।

भारत ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से फोन पर बात की। उन्हें हालात से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय मदद का भरोसा दिलाया। नई दिल्ली ने पड़ोसी देश को राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए।

X पर एक पोस्ट में कहा गया है कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। भारतीय दूतावास ने X पर एक और पोस्ट में कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के शीघ्र बचाव और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। साथ ही, नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बचाव और राहत कार्यों को और मजबूत किया जा रहा है।

टोल-फ्री नंबर जारी

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री आपातकालीन नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर 0086 185 1428 4905 जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश और केरलम समेत कई अन्य भारतीय राज्यों ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि नेपाल में फंसे लोगों में उनके राज्य के निवासी भी हो सकते हैं।

19 पुल बह गए

‘काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क बह गई। सरकार ने बाद में बताया कि बुधवार को अचानक आई बाढ़ में 19 पुल बह गए। हालात का जायजा लेने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री शाह की अध्यक्षता में हुई एक आपात बैठक के बाद प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया।

खोज और बचाव अभियान जारी

सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, शाह ने जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई। साथ ही इन दुखद घटनाओं में घायल हुए लोगों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों को हर जरूरी मदद देने का निर्देश दिया। नेपाल सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए।

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नेपाल सेना के एक बयान के अनुसार, रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मैलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया। बयान में कहा गया कि आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस सेना का एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भेजा गया है। प्रधानमंत्री शाह ने बाढ़ प्रभावित देश में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए हरसंभव मानवीय सहायता की पेशकश करने और एकजुटता व्यक्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का देर शाम आभार व्यक्त किया।