फाइनल राउंड तक पहुंचा उम्मीदवार, फिर कंपनी ने ऐसा किया जिसकी उम्मीद नहीं थी

एक अच्छी नौकरी की तलाश में उम्मीदवार कई चरणों से गुजरते हैं और हर सफल राउंड के बाद उनकी उम्मीदें बढ़ने लगती हैं। ऐसा ही कुछ एक सीनियर एग्जीक्यूटिव पद के उम्मीदवार के साथ हुआ, जिसे लंबी इंटरव्यू प्रक्रिया के बाद लगा कि अब उसका चयन लगभग तय है। कंपनी की ओर से मिले सकारात्मक संकेतों और भरोसे भरी बातचीत ने उसकी उम्मीदों को और मजबूत कर दिया था। लेकिन अंतिम चरण के बाद कहानी अचानक बदल गई। जिस कंपनी से जल्द जवाब मिलने की उम्मीद थी, वहां से कोई संदेश नहीं आया।

न ऑफर की जानकारी मिली और न ही प्रक्रिया आगे बढ़ने को लेकर कोई अपडेट। इस अनुभव ने हायरिंग प्रक्रिया में उम्मीदवारों के साथ होने वाले व्यवहार और ‘घोस्टिंग’ की समस्या पर नई बहस छेड़ दी है।

5 घंटे के फाइनल इंटरव्यू के बाद भी नहीं मिला अपडेट

उम्मीदवार ने यह अनुभव Reddit पर साझा किया और पूछा कि क्या सीनियर लेवल की भर्ती प्रक्रिया में ऐसा व्यवहार सामान्य है। उसने बताया कि वो एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी में Senior Director पद के लिए इंटरव्यू देने गया था।

फाइनल राउंड के लिए उसने करीब 5 घंटे कंपनी के ऑफिस में बिताए। इस दौरान उसने लीडरशिप टीम के सामने प्रेजेंटेशन दिया और कई बड़े अधिकारियों से मुलाकात की।

रिक्रूटर के भरोसे से बढ़ी उम्मीदें

उम्मीदवार के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया के दौरान रिक्रूटर का रवैया काफी सकारात्मक था। रिक्रूटर ने उसे भरोसा दिलाया कि कंपनी उसकी जरूरतों के हिसाब से भूमिका तैयार करने की कोशिश करेगी। उम्मीदवार ने बताया कि क्योंकि वो शहर बदलना नहीं चाहता था, इसलिए रिक्रूटर ने दूसरे ऑफिस से रिपोर्टिंग जैसी संभावनाओं पर भी चर्चा की थी।

‘आपकी पसंद के हिसाब से बनाएंगे भूमिका’

उम्मीदवार का कहना है कि रिक्रूटर ने ये भी कहा था कि भूमिका को उसके पसंदीदा काम के अनुसार तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा जल्दी निर्णय लेने का संकेत भी दिया गया था।

इन बातों के बाद उम्मीदवार को लगा कि चयन लगभग तय है। उसने इंटरव्यू से जुड़ी यात्रा खर्च की जानकारी भी तुरंत जमा कर दी।

धन्यवाद मेल का भी नहीं आया जवाब

इंटरव्यू के चार दिन बाद उम्मीदवार ने कंपनी को धन्यवाद मेल भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसी बीच उसने देखा कि कंपनी ने उसी पद की वैकेंसी दोबारा ऑनलाइन डाल दी।

दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी न तो उसे रिजेक्शन मिला, न प्रक्रिया में देरी की जानकारी दी गई और न ही कोई अपडेट आया।

उम्मीदवार ने पूछा- क्या यह सामान्य है?

अपनी पोस्ट में उम्मीदवार ने सवाल किया कि क्या सीनियर लेवल की भर्ती में पहले इतना भरोसा दिलाकर बाद में पूरी तरह संपर्क खत्म कर देना आम बात है।

उसने इसे “उम्मीदें बढ़ाने के बाद अचानक गायब हो जाना” बताया और Reddit यूजर्स से अपने अनुभव साझा करने को कहा।

रिक्रूटर और हायरिंग मैनेजर की भूमिका अलग होती है

Reddit पर कई लोगों ने कहा कि रिक्रूटर का सकारात्मक व्यवहार हमेशा नौकरी पक्की होने का संकेत नहीं होता। उनके अनुसार, रिक्रूटर का काम उम्मीदवारों को प्रक्रिया में बनाए रखना होता है, जबकि अंतिम फैसला हायरिंग मैनेजर और कंपनी के अधिकारियों का होता है।

कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि कई बार बजट में बदलाव, कंपनी की अंदरूनी मंजूरी या संगठनात्मक बदलाव के कारण भर्ती रुक सकती है।

खर्च की वापसी और नौकरी को अलग रखें

कुछ लोगों ने उम्मीदवार को सलाह दी कि यात्रा खर्च की वापसी को नौकरी के फैसले से अलग रखें। उनके अनुसार, उम्मीदवार को खर्च के लिए अलग से स्पष्ट ईमेल भेजकर भुगतान की समय सीमा मांगनी चाहिए।

वहीं, कुछ यूजर्स ने सुझाव दिया कि उम्मीदवार को कंपनी के अधिकारियों से संपर्क बनाए रखना चाहिए, क्योंकि भविष्य में दूसरे अवसर मिल सकते हैं।

हायरिंग प्रक्रिया में बढ़ रही है ‘घोस्टिंग’ की समस्या

ये मामला एक बार फिर दिखाता है कि लंबी भर्ती प्रक्रिया और सकारात्मक संकेतों के बावजूद अंतिम फैसला हमेशा निश्चित नहीं होता। उम्मीदवारों के लिए जरूरी है कि वे ऑफर लेटर मिलने तक दूसरी संभावनाओं को खुला रखें और केवल मौखिक आश्वासनों पर निर्भर न रहें।

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‘जॉब मिलने की थी पूरी उम्मीद, फिर कंपनी ने…’ सोशल मीडिया पर वायरल हुई उम्मीदवार की पोस्ट

नई नौकरी की तलाश के दौरान उम्मीदवारों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में नई नौकरी की तलाश कर रही एक उम्मीदवार ने इंटरव्यू से जुड़ा अपना अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने बताया कि, इंटरव्यू के दौरान सब कुछ ठीक चल रहा था और उन्हें लगा कि जल्द ही नौकरी मिल जाएगी। लेकिन बाद में काफी इंतजार और कई बार संपर्क करने के बावजूद कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं आया। LinkedIn पर शेयर किया गया ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर ये एक्सपीरिएंश श्रुति राय ने LinkedIn पर शेयर किया, जहां उन्होंने इसे “अब तक का सबसे बुरा अनुभव” बताया।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

श्रुति राय ने पोस्ट में कहा, “अब तक का सबसे बुरा अनुभव। मैंने हाल ही में एक एजेंसी में इंटरव्यू दिया, जहां मैं पहले काम कर चुकी थी। इंटरव्यू शुरू होने से पहले ही मैंने अपनी सैलरी की उम्मीदें साफ तौर पर बता दी थीं। मैंने उनसे ये भी कहा था कि अगर मेरी अपेक्षाएं उनके बजट में फिट नहीं बैठतीं, तो मैं किसी का समय बर्बाद नहीं करना चाहूँगी। इसके बावजूद उन्होंने इंटरव्यू की प्रक्रिया जारी रखने पर जोर दिया।”

क्या यहीं है हायरिंग का सही तरीका

उन्होंने कहा, “इंटरव्यू खुद अजीब लगा। मेरे अनुभव, मेरे काम या मेरे द्वारा लीड किए गए कैंपेन को समझने की कोशिश करने के बजाय, ऐसा लगा कि इंटरव्यू लेने वाला किसी सार्थक बातचीत के बजाय अपनी बात साबित करने में ज्यादा दिलचस्पी रखता था। मेरे हर जवाब पर एक नया सवाल खड़ा कर दिया जाता था, मानो उम्मीदवार को असहज करना ही मकसद हो। अगर यही हायरिंग का तरीका है, तो मुझे सच में लगता है कि ये अब पुराना हो चुका है। इंटरव्यू का उद्देश्य किसी की काबिलियत को परखना होना चाहिए, न कि बेवजह पावर डायनामिक बनाना।”

मुझे रिजेक्ट होने से कोई परेशानी नहीं

राय ने बताया कि उन्हें पूरा भरोसा था कि जल्द ही नौकरी का ऑफर मिल जाएगा। इसी वजह से उन्होंने एक दूसरे नौकरी के अवसर को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया। लेकिन जब उन्होंने तय समय के बाद कंपनी से संपर्क किया, तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, “मुझे रिजेक्ट होने से कोई परेशानी नहीं है, अगर फैसला यही है तो। कंपनियों को किसी दूसरे उम्मीदवार को चुनने का पूरा अधिकार है। लेकिन परेशानी इस बात से है कि उम्मीदवार से समय देने की उम्मीद की जाती है, जबकि उसके समय की कोई कद्र नहीं की जाती।

उन्होंने आगे लिखा, “अगर आप आगे नहीं बढ़ना चाहते, तो साफ बता दीजिए। अगर आपके प्लान बदल गए हैं, तो इसकी जानकारी दे दीजिए। उम्मीदवार भी इंसान होते हैं, कोई ऐसी जगह नहीं जहां आप बिना कुछ बताए चीजें लंबित छोड़ दें।”

उन्होंने आगे लिखा, “मुझे सच में उम्मीद है कि कंपनियां समझेंगी कि उनकी हायरिंग प्रक्रिया भी उनके कार्य संस्कृति को उतना ही दिखाती है, जितना किसी उम्मीदवार का इंटरव्यू उसकी काबिलियत को दिखाता है। P.S. इस वजह से मैंने एक और अच्छा मौका खो दिया, और यही बात मुझे सबसे ज्यादा परेशान करती है।”

यूजर्स ने किया कमेंट

एक यूजर ने लिखा, “मैं पूरी तरह सहमत हूं। यही सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात होती है। मुझे समझ नहीं आता कि इतने सारे उम्मीदवारों को जानबूझकर तनाव और बेचैनी में रखने के बाद लोग चैन से कैसे रह लेते हैं।” एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “आपने बिल्कुल सही कहा। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है। उन लोगों ने मुझसे काफी बातचीत की, लेकिन आखिर में बिना किसी जवाब के गायब हो गए।” एक और यूजर ने कहा, “यह वाकई मुश्किल होता है। मेरे साथ भी ऐसा हो चुका है। एक बार तो मुझसे मेरी खुद की जॉब डिस्क्रिप्शन तक लिखवाई गई और उसके बाद मुझे कोई जवाब नहीं मिला। फिर भी आगे बढ़ना ही पड़ता है। आप यह कर सकते हैं।”

एक महीने में भेजे 500 रिज्यूमे, नहीं आया एक भी कॉल, फ्रेशर्स की मुश्किलें आईं सामने

भारत में इंजीनियरिंग करने के बाद अच्छी नौकरी पाना आज कई युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी परेशानी को दिखाती है बेंगलुरु के एक बीटेक ग्रेजुएट की कहानी, जिसने नौकरी की तलाश में एक महीने के भीतर 500 से ज्यादा आवेदन भेजे, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उसे एक भी इंटरव्यू कॉल नहीं मिला। इस युवा इंजीनियर ने लिंक्डइन, अलग-अलग जॉब पोर्टल और कंपनियों की करियर वेबसाइटों पर लगातार प्रयास किया, लेकिन हर जगह से निराशा हाथ लगी।

उसका कहना है कि वो किसी बड़ी सैलरी या नामी कंपनी की तलाश में नहीं है, बल्कि सिर्फ एक ऐसा मौका चाहता है जहां वह काम सीख सके और अपने करियर की शुरुआत कर सके। उसकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर हजारों फ्रेशर्स की परेशानियों को उजागर कर दिया है।

बड़ी सैलरी नहीं, बस शुरुआत का एक मौका चाहिए

युवा इंजीनियर ने कहा कि उसका लक्ष्य किसी बड़ी कंपनी में भारी पैकेज हासिल करना नहीं है। वह सिर्फ ऐसा अवसर चाहता है जहां वह काम सीख सके, इंडस्ट्री का अनुभव हासिल कर सके और अपने करियर की मजबूत शुरुआत कर सके।

उसने लिखा कि वह किसी भी अच्छे टेक रोल, यहां तक कि शुरुआती दौर के स्टार्टअप में भी काम करने के लिए तैयार है, जहां उसे सीखने और योगदान देने का मौका मिले।

जब ऑनलाइन आवेदन भी बेअसर हुए तो रेडिट से मांगी मदद

लगातार कोशिशों के बाद जब कोई रास्ता नजर नहीं आया, तो इंजीनियर ने रेडिट पर अपनी परेशानी साझा की। उसने नौकरी देने वालों, स्टार्टअप फाउंडर्स और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से मदद की अपील की।

उसकी पोस्ट का शीर्षक था  “एक महीने में 500+ नौकरियों के लिए आवेदन किया, लेकिन एक भी इंटरव्यू नहीं मिला।”

पोस्ट वायरल होते ही कई फ्रेशर्स ने अपनी-अपनी परेशानियां साझा करनी शुरू कर दीं।

फ्रेशर्स की सबसे बड़ी चुनौती

कई यूजर्स ने कहा कि आज के समय में सिर्फ ऑनलाइन आवेदन करना काफी नहीं रह गया है। एक यूजर ने सलाह दी कि उम्मीदवारों को सीधे कंपनी के फाउंडर्स, एचआर या कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश करनी चाहिए।

हालांकि, कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने भी ऐसा करके देखा, लेकिन 100 से ज्यादा एचआर को मैसेज करने के बाद भी उन्हें इंटरव्यू का मौका नहीं मिला।

स्किल्स हैं, फिर भी दरवाजे बंद हैं

एक कमेंट में एक टेक उम्मीदवार ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उसके पास इंटर्नशिप अनुभव और कई आधुनिक टेक्नोलॉजी की जानकारी होने के बावजूद नौकरी पाना मुश्किल हो रहा है। उसने बताया कि वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एजेंट ऑर्केस्ट्रेशन, ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर, लैंगचेन और लैंगग्राफ जैसी तकनीकों पर काम कर चुका है, फिर भी कंपनियों तक पहुंच बनाना चुनौती बनी हुई है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने कहा कि मौजूदा जॉब मार्केट में फ्रेशर्स के लिए प्रतिस्पर्धा बेहद बढ़ गई है, जबकि कुछ ने उम्मीदवारों को नेटवर्किंग और सीधे संपर्क जैसे तरीकों पर ध्यान देने की सलाह दी।

वहीं कुछ लोगों ने उम्मीद भी दिखाई। एक यूजर ने बताया कि उसे एक जॉब प्लेटफॉर्म के जरिए इंटरव्यू मिला और पूरी प्रक्रिया में करीब एक महीना लगा।

नौकरी बाजार की नई हकीकत

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिर्फ डिग्री और तकनीकी ज्ञान आज के जॉब मार्केट में पर्याप्त हैं? बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट नौकरी की तलाश में हैं, लेकिन कंपनियां अनुभव, प्रोजेक्ट्स और नेटवर्किंग को भी तेजी से महत्व दे रही हैं।

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Mahalaxmi Rajyog: कर्क राशि में सूर्य-गुरु बनाएंगे नवपंचम और महालक्ष्मी राजयोग, 3 राशि वालों की लगेगी लॉटरी

Mahalaxmi Rajyog: सूर्य और गुरु ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में शुभ और पावरफुल ग्रह के रूप में जाना जाता है। ये दोनों ग्रह जातक के जीवन में प्रतिष्ठा, पद, यश और सम्मान का कारक होते हैं। इन दोनों ग्रहों की युति भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस माह की 16 जुलाई को यह दोनों ग्रह कर्क राशि में साथ आने वाले हैं। देवगुरु बृहस्पति पहले से ही कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं, जबकि सूर्य देव 16 जुलाई को मिथुन राशि से निकल कर कर्क राशि में प्रवेश करने वाले हैं। जब ये दोनों ग्रह एक साथ आते हैं, तो शुभ राजयोग का निर्माण होता है। कर्क राशि में इन दोनों ग्रहों के संयोग से नवपंचम योग और महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण होगा। यह योग तीन राशियों के लिए अत्यंत शुभ फलदायी साबित होगा। इनके जीवन में धन लाभ के साथ-साथ हर कार्य में सफलता मिलने के संकेत हैं।

मेष राशि : सूर्य और गुरु का यह संयोग मेष राशि के जातकों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा। सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी और हर क्षेत्र में सफलता के योग बनेंगे। अचानक धन लाभ के हो सकता है। कार्यक्षेत्र में तरक्की और प्रमोशन के संकेत हैं। लंबे समय से अटका पैसा वापस मिलने के आसार हैं।

मिथुन राशि : महालक्ष्मी राजयोग के प्रभाव से मिथुन राशि के लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मां लक्ष्मी की कृपा से आय के नए स्रोत बन सकते हैं। पैतृक संपत्ति से लाभ मिल सकता है और लंबे समय से रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। व्यापार करने वाले लोगों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रहेगा।

कर्क राशि : कर्क राशि के जातकों के लिए यह राजयोग जीवन में कई सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा। जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें अच्छे अवसर मिल सकते हैं। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। निवेश के लिए यह समय अनुकूल है और इससे अच्छा लाभ मिल सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

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Viral Post: 500 जॉब एप्लिकेशन के बाद भी नहीं आया इंटरव्यू कॉल…खर्च चलाने के लिए रैपिडो चला रहा कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट

आज के समय में नए ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी पाना पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद भी कई युवाओं को लंबे समय तक अच्छी नौकरी नहीं मिल रही। कई जगह आवेदन करने के बावजूद अबतक इंटरव्यू का मौका नहीं मिला। इसके बाद कुछ युवाओं को अपने खर्च पूरे करने के लिए अस्थायी या छोटे-मोटे काम करने पड़ रहे हैं। हाल ही में एक ऐसी ही कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

एक X यूजर ने रैपिडो राइडर से हुई अपनी मुलाकात शेयर किया। राइडर ने बताया कि उसने इस साल कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन पूरा किया है, लेकिन अब तक उसे पहली नौकरी नहीं मिल सकी। ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है और कई लोग इसे आज के समय में फ्रेशर्स के सामने मौजूद रोजगार की चुनौतियों की सच्ची तस्वीर बता रहे हैं।

युवक ने किया पोस्ट

यह कहानी X यूजर नीरज ने शेयर किया है। उन्होंने बताया कि, “रैपिडो की सवारी के दौरान उनकी नजर राइडर के हेलमेट पर लगे एक कॉलेज के स्टिकर पर पड़ी। इसके बाद ट्रैफिक सिग्नल पर रुकने के दौरान उन्होंने उससे 10 मिनट तक बातचीत शुरू की। बातचीत में राइडर ने बताया कि उसने इस साल कंप्यूटर साइंस में फर्स्ट डिवीजन के साथ ग्रेजुएशन किया है।” पोस्ट में आगे कहा, “पढ़ाई पूरी होने के दो महीने बाद भी नौकरी नहीं मिलने के कारण वह रोज सुबह 6 बजे से रैपिडो चलाकर अपना खर्च चला रहा है। युवक ने यह भी बताया कि वह 500 से ज्यादा कंपनियों में नौकरी के लिए आवेदन कर चुका है, लेकिन अब तक उसे किसी भी कंपनी से इंटरव्यू का कॉल नहीं आया।”

घर वालों को नहीं पता

नीरज ने अपनी पोस्ट में लिखा कि युवक ने बताया, “उसके माता-पिता अब भी यही समझते हैं कि वह घर पर रहकर इंटरव्यू की तैयारी कर रहा है। उसने उन्हें यह नहीं बताया कि वह रैपिडो चला रहा है, क्योंकि उसे समझ नहीं आ रहा कि अपनी स्थिति उनके सामने कैसे रखे।” नीरज के मुताबिक, “युवक ने बिना किसी शिकायत के सिर्फ इतना कहा कि फिलहाल नौकरी का बाजार ऐसा ही है और फिर वह अपनी राइड पूरी करने में लग गया।” पोस्ट के आखिर में नीरज ने लिखा कि, “उन्हें लगता है ये सिर्फ एक युवक की कहानी नहीं है, बल्कि आज के समय में कई फ्रेश ग्रेजुएट्स इसी तरह की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।”

पोस्ट पर लोगों ने किया रिएक्ट

इस पोस्ट पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी रिएक्शन दिए। एक यूजर ने कहा, “3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में भी युवाओं को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।” वहीं, एक अन्य यूजर ने सिर्फ “OMG” लिखकर अपनी हैरानी जताई। कई लोगों ने यह भी कहा कि आजकल बहुत से नए ग्रेजुएट्स नौकरी की तलाश के साथ-साथ गिग वर्क या पार्ट-टाइम काम करने को मजबूर हैं। उनका मानना है कि मौजूदा समय में फ्रेशर्स के लिए नौकरी हासिल करना पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो गया है।

ये 5 सरकारी ऐप आपकी जिंदगी बना देंगे आसान, नो पेपरवर्क सिर्फ घर बैठे निपटाएं गाड़ी, टैक्स और PF के ये सारे काम

सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए अब फॉर्म भरने या लंबी लाइनों में खड़े होने की जरूरत नहीं है। पहले जिन कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे वे अब आपके स्मार्टफोन के जरिए चुटकियों में हो सकते हैं। चाहे आपको पेमेंट करनी हो, जरूरी डॉक्युमेंट्स देखने हों, पीएफ खाते की जांच करनी हो या फिर अपने हेल्थ रिकॉर्ड को संभालना हो, सरकारी सिस्टम में मौजूद कुछ ऐप ऐसे हैं जो समय और मेहनत दोनों की बचत कर सकते हैं। यहां ऐसे ही 5 सरकारी ऐप्स के बारे में जानकारी दी गई है जिन्हें आपको अपने स्मार्टफोन में जरूर रखना चाहिए।

1- DigiLocker: सारे जरूरी डॉक्युमेंट रहेंगे एक जगह सुरक्षित

डिजीलॉकर आपको अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों जैसे कि ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC), शैक्षणिक प्रमाणपत्र (Academic Certificates) और बीमा के कागजात के डिजिटल वर्जन को स्टोर और एक्सेस करने की सुविधा देता है। डिजीलॉकर के जरिए जारी किए गए दस्तावेज कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य हैं। ऐसे में आपको कई तरह के डॉक्युमेंट्स की फिजिकल कॉपी ले जाने की जरूरत नहीं होती है। ये ऐप खासकर छात्रों, नौकरी की तलाश कर रहे लोगों और अक्सर यात्रा करने वालों के लिए बेहद उपयोगी है।

2- BHIM: UPI भुगतान करने का सबसे आसान तरीका

अगर आप एक बेहद सरल और सीधा UPI ऐप इस्तेमाल करना चाहते हैं तो भीम ऐप आपके लिए ही है। यह ऐप आपको पैसे भेजने और पेमेंट लेने, क्यूआर कोड स्कैन करने, मर्चेंट्स को भुगतान करने और एक साथ कई बैंक खातों को मैनेज करने की सुविधा देता है। यह पूरी तरह से यूपीआई नेटवर्क पर काम करता है इसलिए इसके जरिए किसी भी समय पेमेंट किया जा सकता है।

3- UMANG: सैकड़ों सरकारी सेवाएं एक ऐप पर

अलग-अलग सरकारी विभागों के लिए अलग-अलग ऐप्स डाउनलोड करने के बजाय उमंग ऐप आपको कई सारी सेवाएं एक ही जगह पर उपलब्ध कराता है। इस सिंगल ऐप के जरिए आप ईपीएफओ सेवाओं, पेंशन से जुड़ी जानकारी, यूटिलिटी बिलों के भुगतान, गैस बुकिंग और पासपोर्ट सेवाओं सहित बहुत कुछ एक्सेस कर सकते हैं। अगर आपको नियमित रूप से सरकारी विभागों से जुड़े काम रहते हैं तो यह ऐप आपका काफी समय बचा सकता है।

4- ABHA: आपके हेल्थ रिकॉर्ड्स को मैनेज करना हुआ आसान

आभा ऐप आपको सरकार के डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत एक यूनीक डिजिटल हेल्थ आईडी बनाने की अनुमति देता है। इसके जरिए आपकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को एक्सेस करना काफी आसान हो जाएगा क्योंकि इस ऐप से जुड़े अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच आपकी मेडिकल जानकारी डिजिटल रूप से शेयर की जा सकेगी। यह विशेष रूप से उन मरीजों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जिनका लगातार इलाज चल रहा है और वे कई अस्पतालों में जाते हैं।

5- mAadhaar: आधार सेवाओं तक तुरंत पहुंच

एमआधार ऐप आपको अपने फोन में अपने आधार कार्ड का डिजिटल वर्जन रखने की सुविधा देता है। इस ऐप के माध्यम से आप आधार से जुड़ी विभिन्न सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं, अपनी कुछ जानकारियों को अपडेट कर सकते हैं और एनरोलमेंट सेंटर्स का पता लगा सकते हैं। जहां कहीं भी पहचान सत्यापन की आवश्यकता होती है, आप अपने इस डिजिटल आधार का उपयोग कर सकते हैं।

ये सभी ऐप्स अलग-अलग उद्देश्यों को पूरा करते हैं लेकिन कुल मिलाकर ये उन सभी सेवाओं को कवर करते हैं जिनकी लोगों को सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इन्हें डाउनलोड करके आप अपना समय, कागजी कार्रवाई और सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्करों से बच सकते हैं।

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1- क्या डिजीलॉकर में स्टोर किए गए दस्तावेज कानूनी रूप से मान्य हैं?

उत्तर: हां, डिजीलॉकर के माध्यम से जारी या सत्यापित किए गए दस्तावेज सरकारी नियमों के तहत कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य हैं और कई संगठनों द्वारा स्वीकार किए जाते हैं।

Q2- क्या भीम ऐप अन्य UPI ऐप्स से अलग है?

उत्तर: भीम ऐप भी अन्य पेमेंट ऐप्स की तरह ही UPI नेटवर्क का उपयोग करता है। इसका प्राइम फोकस सिर्फ पैसे भेजने और पेमेंट रिसीव करने पर है।

Q3- क्या उमंग ऐप सरकारी दफ्तरों के चक्करों को पूरी तरह खत्म कर सकता है?

उत्तर: कई सेवाओं के लिए इसका उत्तर हां है। हालांकि, कुछ प्रक्रियाओं में अभी भी भौतिक सत्यापन या मूल दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता हो सकती है।

Jai Moondra: भारत को हराने वाला खिलाड़ी ढूंढ रहा फुल-टाइम नौकरी! जय मूंदड़ा की कहानी हुई वायरल

आयरलैंड के तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा ने भारत के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज में शानदार गेंदबाजी कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। दोनों मुकाबलों में शानदार गेंदबाजी करते हुए कुल 5 विकेट चटका कर प्लेयर ऑफ द सीरीज का अवॉर्ड भी अपने नाम किया। उनकी सटीक और कसी हुई गेंदबाजी ने पूरी सीरीज में भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और आयरलैंड की ऐतिहासिक जीत में बड़ी भूमिका निभाई। वहीं इसी बीच जय मूंदड़ा अपनी शानदार गेंदबाजी के अलाला किसी और वजह से भी चर्चा में हैं। जय मूंदड़ा आईटी सेक्टर में नौकरी की तलाश कर रहे हैं।

भारत के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करने वाले जय मूंदड़ा सिर्फ क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि आईटी सेक्टर से भी जुड़े हैं। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, वह अभी भी फुल-टाइम नौकरी की तलाश में हैं।

2025 में छोड़ दी नौकरी

राजस्थान के टोंक के रहने वाले जय मूंदड़ा साल 2021 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री की पढ़ाई के लिए आयरलैंड गए थे। आयरलैंड की राष्ट्रीय टीम से खेलने के बावजूद उनके पास अब भी भारतीय पासपोर्ट है। आयरलैंड जाने के बाद जय मूंदड़ा ने सितंबर 2022 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री पूरी की। पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने इंटेल में प्रोडक्ट डेवलपमेंट इंजीनियर के रूप में काम शुरू किया। लेकिन, जून 2025 में उन्होंने ये नौकरी छोड़ दी। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, इसके बाद से उन्होंने किसी नई कंपनी में काम शुरू नहीं किया है।

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नए नौकरी की तलाश में जय मूंदड़ा

29 वर्षीय जय मूंदड़ा फिलहाल इंजीनियरिंग क्षेत्र में नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल पर आयरलैंड और यूरोप में अवसरों के लिए OpenToWork का बैज भी दिखाई देता है। करीब छह महीने पहले जय मूंदड़ा ने लिंक्डइन पर आयरलैंड और यूरोप में टेक्नोलॉजी से जुड़ी नौकरियों की एक पोस्ट में रुचि दिखाई थी। वहीं लगभग एक महीने पहले उन्होंने एक अन्य पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए खुद को इंटेल का पूर्व कर्मचारी बताया और कहा कि वह नए नौकरी के अवसर की तलाश में हैं।

लोगों ने किया कमेंट

भारत को हराने के बाद आयरलैंड के गेंदबाज जय मूंदड़ा की लिंक्डइन प्रोफाइल पर लगा OpenToWork बैज भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने इस बात पर हैरानी जताई कि एक तरफ वह नई नौकरी की तलाश में हैं और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ मैच जिताऊ प्रदर्शन कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “ये एक कॉर्पोरेट नौकरी है जिसने उन्हें दूसरा मौका दिया। मेहनत करने वाले की इज्जत करनी चाहिए। वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा, “वह भारत नहीं, बल्कि आयरलैंड के लिए खेल रहे हैं। इसलिए गुजारा चलाने के लिए उन्हें नौकरी भी करनी पड़ती है।”

23 हजार की सैलरी और 6 दिन काम, हैदराबाद की इंजीनियर का सोशल मीडिया पर छलका दर्द

इन दिनों सोशल मीडिया पर हैदराबाद की एक युवा सिविल इंजीनियर की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है।हैदराबाद की एक युवा सिविल इंजीनियर ने छह दिन काम करने वाली नौकरी को लेकर अपना अनुभव शेयर किया है। उन्होंने बताया कि लगातार लंबे समय तक काम करने से वह मानसिक रूप से काफी थक गई हैं। उन्होंने कहा कि अब वह अच्छी वर्क-लाइफ बैलेंस वाली नौकरी के लिए कम वेतन पर भी काम करने को तैयार हैं। उनकी इस पोस्ट पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय और एक्सपीरिएंश भी शेयर किए। उनके इस पोस्ट पर कई लोगों ने अपने एक्सपीरिएंश भी शेयर किए और उन्हें बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस वाली नई नौकरी तलाशने की सलाह दी।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

अपनी Reddit पोस्ट में 25 वर्षीय इंजीनियर ने बताया कि, उन्होंने साल 2023 में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी और फिलहाल हैदराबाद की एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने की खुशी जरूर है, लेकिन हफ्ते में छह दिन काम करने के कारण उनकी पर्सनल जिंदगी काफी प्रभावित हुई है। पोस्ट पर आए यूजर्स के सवालों का जवाब देते हुए इंजीनियर ने बताया कि उनकी मौजूदा मासिक सैलरी 23,000 रुपए है। उन्होंने ये जानकारी कमेंट सेक्शन में शेयर की।

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6 दिन के काम से थक जाती हूं

उन्होंने लिखा, “मैं 6 दिन के वर्क वीक से दिमागी तौर पर थक गई हूं।” उन्होंने बताया कि जब तक वह घर पहुंचती हैं, तब तक उनके पास घर के कामों, अपने परिवार के साथ समय बिताने या बस आराम करने के लिए बहुत कम एनर्जी बचती है। “जब तक मैं घर पहुंचती हूं, मुझमें घर के बेसिक काम करने, अपने परिवार के साथ समय बिताने या अपनी शाम का मजा लेने की भी एनर्जी नहीं बचती। संडे ज्यादातर हफ्ते की थकान से उबरने में बीतता है और इससे पहले कि मुझे पता चले, फिर से सोमवार आ जाता है।”

दूसरी नौकरी की तलाश में

इंजीनियर ने कहा कि वह अब दूसरी नौकरी की तलाश कर रही हैं और अगर उन्हें हफ्ते में पांच दिन काम करने वाली नौकरी का ऑफर मिलता है, तो वह सैलरी में कटौती भी स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “हम इंसान हैं, मशीन नहीं जो किसी का एम्पायर बढ़ाएं। यह कब रुकेगा? लगभग सभी देश हफ्ते में 5 दिन काम करने का नियम अपना रहे हैं।”

लोगों ने किया कमेंट

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद कई लोगों ने उनकी कम सैलरी और काम के दबाव को लेकर चिंता जताई। कई यूजर्स ने उनसे उनकी आर्थिक स्थिति और खर्चों के बारे में भी सवाल पूछे। एक यूजर ने लिखा, “मुझे तुम पर बहुत गर्व है, दोस्त। इस देश ने तुम्हें फेल कर दिया है। तुम इससे कहीं ज्यादा डिजर्व करते हो। प्लीज इसे समझो। या तो किसी भी तरह स्विच करो या यह देश छोड़ दो। कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है।”

एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “मुझे तुम पर बहुत गर्व है OP, प्लीज नई नौकरियों के लिए अप्लाई करो और बेहतर मौके के लिए प्रार्थना करो। हफ्ते में 6 दिन के लिए 23k बहुत ज्यादा है। मैं प्रार्थना करता हूं कि तुम्हें हर दिन काफी ताकत मिले और तुम हर रात अच्छी नींद सो सको। मैं बस तुम्हारे लिए प्रार्थना कर सकता हूं। ऑल द बेस्ट।” एक और यूजर ने लिखा, “मैं भी कुछ ऐसी ही स्थिति में हूं, IT में 6 दिन, आने वाले महीनों में अपस्किल करूंगा और नौकरी छोड़ दूंगा।”

दोस्त से उधार लिया पोल और तोड़ डाला नेशनल रिकॉर्ड! मृत पिता की पासपोर्ट साइज फोटो हाथों में ले सिंधुश्री ने सुनाई रुला देने वाली कहानी

खेलों की दुनिया से अक्सर ऐसी कहानियां सामने आती हैं जो न सिर्फ आपको हैरान करती हैं बल्कि आपकी आंखों में आंसू भी ले आती हैं। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाली सफलता पाई है कर्नाटक की 25 वर्षीय एथलीट जी सिंधुश्री ने। राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय चैंपियनशिप में सिंधुश्री ने न केवल महिलाओं के पोल वॉल्ट में एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया बल्कि गोल्ड मेडल जीतकर एशियाई खेलों का टिकट भी पक्का कर लिया है। इस ऐतिहासिक कामयाबी के पीछे छिपी है बेहद तंगहाली, संघर्ष और एक बेटी के आंसुओं की वह कहानी जिसने वहां मौजूद हर शख्स को रुला दिया।

दोस्त से उधार लिया पोल और रच दिया इतिहास

सिंधुश्री के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह प्रतियोगिता के लिए एक सही पोल खरीद सकें। वित्तीय संकट के कारण वह अब तक छोटे पोल के साथ प्रतिस्पर्धा करने को मजबूर थीं। उन्होंने छोटे पोल के साथ ही अभ्यास किया और अपनी तकनीक सीखी, जिसके कारण फेडरेशन कप जैसे पिछले टूर्नामेंटों में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था क्योंकि ये पोल ढीले हो चुके थे। राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय चैंपियनशिप से ठीक दो हफ्ते पहले सिंधुश्री को उनके एक दोस्त से उधार में बड़ा पोल मिला। दोस्त से उधार मिले इसी पोल के सहारे कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के भद्रावती की रहने वाली इस अनजान खिलाड़ी ने वह कर दिखाया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी।

सिंधुश्री ने 4.25 मीटर की ऊंचाई पार कर तमिलनाडु की एथलीट बारनिका इलांगोवन के एक महीने पुराने 4.20 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ दिया और इतिहास रच दिया। उन्होंने चेन्नई में मई के महीने में ‘इंडियन एथलेटिक्स सीरीज 6’ के दौरान बनाए गए अपने पिछले व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (4 मीटर) में पूरे 25 सेंटीमीटर का सुधार किया।

हाथों में मृत पिता की तस्वीर थामे भावुक हो गईं सिंधुश्री

जीत के बाद जब सिंधुश्री मीडिया के सामने आईं, तो उनके हाथों में उनके दिवंगत पिता आर गणेश की एक तस्वीर थी। भावुक सिंधुश्री ने बताया कि ‘साल 2022 में मेरे पिता का हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया था। मैंने आज जो कुछ भी हासिल किया है, वह सब मेरे पिता की बदौलत है। हर सुबह वह मुझे दौड़ने के लिए ले जाते थे और वह चाहते थे कि मैं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए खेलूं। मैं एशियाई खेलों में हिस्सा लेकर उनके इस सपने को पूरा करने जा रही हूं।’ उन्होंने आगे कहा कि मेरा चयन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए भी हुआ था, लेकिन तब मेरे पिता मेरा खेल देखने के लिए वहां नहीं थे। यह सब एक सपने जैसा लग रहा है और यह केवल मेरे पिता की वजह से मुमकिन हो पाया है।

परिवार के खिलाफ जाकर पिता ने दिलाया था दाखिला

सिंधुश्री ने बताया कि उनके परिवार में दूर-दूर तक कोई भी खेलों में नहीं था। परिवार के बाकी सदस्य एक लड़की को खेलों में भेजने के बिल्कुल खिलाफ थे। लेकिन उनके पिता ने समाज और परिवार के सभी लोगों से लड़ाई लड़ी और उन्हीं की जिद के कारण साल 2016 में सिंधुश्री बेंगलुरु के साई हॉस्टल में शामिल हो सकीं, जहां से उनके खेल के सफर की शुरुआत हुई।

 

बेहद तंगहाली में जी रहा है परिवार, नौकरी की तलाश

इस एथलीट का जीवन भारी आर्थिक तंगहाली में बीत रहा है। उनके पिता आर गणेश एक इलेक्ट्रिशियन थे और उनकी मां सिलाई का काम करती हैं। चूंकि मां की कमाई छोटी बहन की पढ़ाई में खर्च हो जाती है इसलिए सिंधुश्री के दादाजी उन्हें वित्तीय रूप से थोड़ा बहुत सहयोग कर रहे हैं। सिंधुश्री ने बताया कि मेरे पास कोई स्पॉन्सर नहीं है, कोई नौकरी नहीं है और गुजारा करना बेहद मुश्किल हो रहा है। मैं नौकरी की तलाश कर रही थी, लेकिन प्रदर्शन अच्छा न होने के कारण नौकरी नहीं मिल पा रही थी। मुझे उम्मीद है कि इस रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के बाद मुझे नौकरी मिल जाएगी ताकि मैं अपने परिवार की मदद कर सकूं।

इससे पहले सिंधुश्री ने घरेलू स्तर पर सिर्फ एक बड़ा पदक जीता था, जब उन्होंने साल 2023 के नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में इसी मैदान पर 3।80 मीटर के प्रदर्शन के साथ सिल्वर मेडल जीता था।

400 मीटर की रनर से पोल वॉल्टर बनने का सफर

सिंधुश्री ने शुरुआत एक 400 मीटर धावक के रूप में की थी। लेकिन साल 2017 में एक स्थानीय कोच ने उन्हें पोल वॉल्ट में शिफ्ट होने की सलाह दी क्योंकि कोच का मानना था कि वह पोल वॉल्ट में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। सिंधुश्री के कोच विजीश एमएम ने उनकी इस सफलता पर कहा कि धैर्य ही सिंधुश्री की सबसे बड़ी ताकत है। कई सालों तक सही पोल न होने और आर्थिक दिक्कतों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। कोच को पूरा भरोसा है कि सही पोल और सही पोषण मिलने पर वह एशियाई खेलों में 4.30 मीटर से ऊपर कूदकर देश के लिए पदक ला सकती हैं। गौरतलब है कि साल 2022 के एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज मेडल का मार्क 4.30 मीटर था।