Stock Market Holiday: आज 26 जून को मुहर्रम पर BSE और NSE में छुट्टी, शेयरों में नहीं होगी ट्रेडिंग

आज शुक्रवार, 26 जून को शेयरों में ट्रेडिंग नहीं हो सकेगी क्योंकि शेयर बाजारों में छुट्टी है। कारण है- मुहर्रम। इस मौके पर BSE और NSE दोनों पर इक्विटी में ट्रेडिंग बंद रहने वाली है। दोनों स्टॉक एक्सचेंजों की हॉलिडे लिस्ट में यह छुट्टी मौजूद है। NSE में शुक्रवार को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में सुबह के सेशन में ट्रेडिंग बंद रहेगी लेकिन शाम के सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) में ट्रेडिंग चालू रहेगी। वहीं इक्विटीज, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स, न्यू डेट सेगमेंट्स, म्यूचुअल फंड्स, सिक्योरिटी लेंडिंग एंड बॉरोइंग स्कीम्स, निगोशिएटेड ट्रेड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स और इंट्रेस्ट रेट डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स में छुट्टी है।

BSE पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, 26 जून को BSE में इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट, करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स, NDS-RST, ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट्स के लिए ट्रेडिंग हॉलिडे है। वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स (EGR) में शाम का सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) ओपन रहने वाला है।

बता दें कि घरेलू शेयर बाजार में हर शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है लेकिन इसके अलावा सार्वजनिक अवकाशों और कुछ दूसरे खास मौकों पर भी मार्केट बंद रहता है।

बाकी बचे साल में शनिवार-रविवार के अलावा और कब बाजार रहेगा बंद

14 सितंबर: गणेश चतुर्थी

2 अक्टूबर: महात्मा गांधी जयंती

20 अक्टूबर: दशहरा

10 नवंबर: दिवाली-बलिप्रतिपदा

24 नवंबर: प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव

25 दिसंबर: क्रिसमस

शनिवार/रविवार को पड़ रही छुट्टियां

15 अगस्त: स्वतंत्रता दिवस

8 नवंबर: दिवाली लक्ष्मी पूजन

दिवाली के मौके पर मुहूर्त ट्रेडिंग रविवार, 8 नवंबर 2026 को होगी। मुहूर्त ट्रेडिंग का समय बाद में घोषित किया जाएगा।

ITR Filing 2026: विदेशी शेयर, बैंक अकाउंट या आय छिपाई तो लग सकता है ₹10 लाख तक का जुर्माना

कई लोगों को नौकरी के दौरान विदेश में काम करने का मौका मिलता है। कुछ समय बाद वे देश लौट आते हैं। लेकिन, विदेश में पोस्टिंग के दौरान वे वहां एसेट्स खरीद लेते हैं। इनकम टैक्स का नियम कहता है कि अगर किसी टैक्सपेयर का विदेश में एसेट्स है या किसी तरह की इनकम है तो उसे उसकी जानकारी इनकम टैक्स में रिटर्न में देनी होगी। अगर किसी व्यक्ति ने विदेशी कंपनी के शेयरों या म्यूचुअल फंड्स में निवेश किया है तो भी उसे अपने रिटर्न में इस बारे में बताना होगा।

अब विदेश में एसेट्स या इनकम छुपाना मुश्किल

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स की विदेश में एसेट्स और किसी तरह की इनकम पर करीबी नजर रखता है। डिपार्टमेंट को सीधे दूसरे देशों की सरकार और वहां के वित्तीय संस्थानों से इस बारे में जानकारी मिलती है। इसलिए विदेश में एसेट्स या विदेशी एसेट्स से होने वाली इनकम को अब छुपाना मुश्किल हो गया है। ऐसा करने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट बड़ी कार्रवाई कर सकता है।

विदेशी कंपनी के ईसॉप्स या शेयरों की भी देनी होगी जानकारी

एसबीएचएस एंड एसोसिएट्स के फाउंडिंग पार्टनर हिमांग सिंगला ने कहा, “अगर एंप्लॉयीज के पास विदेशी कंपनी के ईसॉप्स, आरएसयू या शेयर हैं तो उसे इसकी जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देनी होगी। साथ ही अगर इंडिया के बाहर से किसी तरह की इनकम होती है तो उसके बारे में भी रिटर्न में बताना होगा।” इनकम टैक्स के नियमों के तहत ऐसा करना अब अनिवार्य है।

विदेश में इनकम डिसक्लोज नहीं करने पर 10 लाख तक की पेनाल्टी

विदेश में एसेट्स और इनकम डिसक्लोज नहीं करने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकता है। वह टैक्सपेयर के खिलाप ब्लैक मनी से जुड़े कानून के तहत कार्रवाई कर सकता है। टैक्सपेयर पर 10 लाख रुपये तक पेनाल्टी लगाई जा सकती है। कुछ गंभीर मामलों में कानूनी प्रक्रिया तक का सामना करना पड़ सकता है।

विदेश में बैंक अकाउंट है तो भी उसकी जानकारी रिटर्न में देनी होगी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दौरान टैक्सपेयर्स के लिए विदेश में बैंक अकाउंट की डिटेल, रियल एस्टेट में निवेश, शेयर या म्यूचुअल फंड्स में निवेश या किसी दूसरे तरह के इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश के बारे में बताना जरूरी है।

फॉरेन इनकम बताना भूल गए तो फाइल कर सकते हैं रिवाइज्ड रिटर्न

अगर टैक्सपेयर विदेश में अपने एसेट्स या इनकम की जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न में बताना भूल जाता है या वह गलत इनकम बता देता है तो उसके पास रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने का विकल्प है। उसे अगले साल 31 मार्च तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करना होगा। ऐसा करने पर वह इनकम टैक्स की कार्रवाई से बच सकता है।

Bajaj Auto Share Buyback: आज, 24 जून रिकॉर्ड डेट, वापस खरीदे जाएंगे ₹5633 करोड़ के शेयर; लेकिन किस भाव पर?

टूव्हीलर और थ्रीव्हीलर मेकर Bajaj Auto Ltd शेयर बायबैक कर रही है। रिकॉर्ड डेट आज यानि 24 जून है। रिकॉर्ड डेट से पहले के क्लोजिंग डे पर जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, वे बायबैक में हिस्सा लेने के पात्र होंगे। लेकिन याद रहे कि आज शेयर खरीदने वाले पात्र नहीं होंगे। बायबैक के तहत कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स से ₹10 प्रति शेयर फेस वैल्यू वाले 46.94 लाख इक्विटी शेयर वापस खरीदेगी। शेयरों की यह संख्या कंपनी के कुल इक्विटी शेयरों का 1.68% है।

शेयर बायबैक की कीमत ₹12,000 प्रति शेयर तय की गई है। इस तरह बजाज ऑटो शेयर बायबैक के लिए कुल ₹5,633 करोड़ (₹5,632,80,00,000) खर्च करेगी। इस रकम में अन्य खर्च, ब्रोकरेज फीस और लागू टैक्स शामिल नहीं हैं।

कंपनी ने इस बायबैक की घोषणा 6 मई को तिमाही और सालाना नतीजे जारी करने के साथ की। इससे पहले बजाज ऑटो ने साल 2024 में शेयर बायबैक किया था। उस वक्त कंपनी ने शेयरहोल्डर्स से कुल इक्विटी शेयरों का 1.41% हिस्सा ₹10,000 प्रति शेयर की कीमत पर वापस खरीदा था।

टेंडरिंग विंडो की अवधि

बायबैक के तहत टेंडरिंग की अवधि 1 जुलाई, 2026 को शुरू होगी और 7 जुलाई, 2026 तक चलेगी। Bajaj Auto के प्रमोटर्स, प्रमोटर ग्रुप की कंपनियों और कंपनी का कंट्रोल रखने वाले लोगों ने संकेत दिया है कि वे बायबैक में हिस्सा नहीं लेंगे। नतीजतन, एंटाइटेलमेंट रेश्यो की गणना करते समय उनकी होल्डिंग्स को शामिल नहीं किया जाएगा।

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Bajaj Auto का शेयर 3 महीनों में 14 प्रतिशत चढ़ा

Bajaj Auto के शेयर की कीमत BSE पर 23 जून को 10015.45 रुपये पर बंद हुई। कंपनी का मार्केट कैप 2.79 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर 3 महीनों में 14 प्रतिशत और एक साल में 20 प्रतिशत मजबूत हुआ है। 3 साल में शेयर की कीमत 117 प्रतिशत चढ़ी है। मार्च 2026 तिमाही के अंत तक कंपनी में प्रमोटर्स के पास 55.01% हिस्सेदारी थी। बजाज ऑटो के अब लगभग 3 लाख खुदरा शेयरधारक हैं। पिछले दो सालों में कंपनी में म्यूचुअल फंड्स की शेयरहोल्डिंग 5.32% से बढ़कर 7.17% हो गई है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Index funds vs Active funds: इंडेक्स फंड या एक्टिव फंड… 10 साल में ₹1 लाख से किसने बनाया ज्यादा पैसा?

Index funds vs Active funds: म्यूचुअल फंड में निवेश लंबी अवधि में पैसा बढ़ाने का सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। लेकिन, कौन सा फंड ज्यादा बेहतर रिटर्न देता है? अब मान लीजिए कि दो दोस्त हैं। 10 साल पहले दोनों ने म्यूचुअल फंड में ₹1-1 लाख लगाए। पहले ने ज्यादा सोच-विचार नहीं किया और Nifty 50 Index Fund में पैसा लगा दिया। दूसरे को भरोसा था कि एक अच्छा फंड मैनेजर बाजार से बेहतर रिटर्न दिला सकता है, इसलिए उसने एक एक्टिव इक्विटी फंड चुना।

10 साल बाद पहले निवेशक का ₹1 लाख बढ़कर करीब ₹3.15 लाख हो गया। लेकिन दूसरे निवेशक के लिए नतीजा इस बात पर निर्भर करता है कि उसने कौन-सा फंड चुना था।

अगर उसने सही लार्ज कैप फंड चुना होता, तो उसकी रकम करीब ₹3.83 लाख हो सकती थी। लेकिन अगर फंड का चुनाव गलत हो जाता, तो वही ₹1 लाख सिर्फ ₹2.60 लाख तक पहुंचता। यानी इंडेक्स फंड से भी कम रिटर्न मिलता।

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फ्लेक्सी कैप फंड में और बड़ा अंतर

फ्लेक्सी कैप फंड्स में यह अंतर और ज्यादा बड़ा दिखता है। पिछले 10 साल में कुछ फ्लेक्सी कैप फंड्स ने ₹1 लाख को बढ़ाकर करीब ₹5.99 लाख कर दिया। वहीं कुछ फंड्स में यही रकम सिर्फ ₹2.53 लाख तक पहुंची।

यही इंडेक्स फंड और एक्टिव फंड के बीच सबसे बड़ा फर्क है। इंडेक्स फंड का मकसद बाजार जितना रिटर्न देना होता है, इसलिए इसमें रिटर्न का अंदाजा लगाना आसान होता है। दूसरी तरफ एक्टिव फंड में ज्यादा कमाई का मौका भी होता है और कमजोर रिटर्न का जोखिम भी।

एक्टिव फंड ज्यादा रिटर्न कैसे दे सकते हैं?

Arthasadhana Investments की संस्थापक और QPFP®️ Namrata Singh कहती हैं कि एक्टिव फंड्स में बाजार से बेहतर रिटर्न देने की क्षमता होती है। खासकर उन कैटेगरी में, जहां फंड मैनेजर को अलग-अलग सेक्टर और अलग-अलग आकार की कंपनियों में निवेश करने की आजादी होती है।

इंडेक्स फंड एक तय सूची के हिसाब से निवेश करते हैं। लेकिन एक्टिव फंड में फंड मैनेजर अपने हिसाब से फैसले ले सकता है। उसे अगर लगता है कि किसी सेक्टर में तेजी आने वाली है, तो वह वहां निवेश बढ़ा सकता है। अगर कोई सेक्टर महंगा लग रहा है, तो वहां निवेश कम कर सकता है। फ्लेक्सी कैप फंड्स में तो फंड मैनेजर लार्ज, मिड और स्मॉल कैप कंपनियों के बीच भी आसानी से पैसा शिफ्ट कर सकता है।

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अनुभव मैनेजर पकड़ लेते हैं मौके

नम्रता सिंह का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार में हालात लगातार बदलते रहते हैं। कभी कोई सेक्टर आगे निकल जाता है तो कभी दूसरा। ऐसे में अनुभवी फंड मैनेजर कई बार ऐसे मौके पकड़ लेते हैं, जो अभी इंडेक्स में पूरी तरह दिखाई नहीं देते।

यही वजह है कि इस अध्ययन में सबसे बेहतर फ्लेक्सी कैप फंड ने ₹1 लाख को करीब ₹6 लाख में बदल दिया। यह Nifty 50 Index Fund के रिटर्न से लगभग दोगुना है।

लेकिन जोखिम भी उतना ही बड़ा है

लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी है। जिस फ्लेक्सी कैप फंड का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, उसने 10 साल में ₹1 लाख को सिर्फ ₹2.53 लाख बनाया। वहीं सबसे कमजोर लार्ज कैप फंड की वैल्यू ₹2.60 लाख तक पहुंची। दोनों ही मामलों में रिटर्न Nifty 50 Index Fund से कम रहा। यानी एक्टिव फंड में सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कौन-सा फंड चुना है।

नम्रता सिंह कहती हैं कि सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशकों को यह भी देखना चाहिए कि फंड पैसा कैसे निवेश करता है, जोखिम को कैसे संभालता है और लंबे समय में उसका प्रदर्शन कितना स्थिर रहा है।

फिर भी कई लोग इंडेक्स फंड क्यों चुनते हैं?

कई निवेशक फंड मैनेजर चुनने की झंझट में नहीं पड़ना चाहते। वे यह सोचकर निवेश करते हैं कि बाजार जितना रिटर्न मिल जाए, वही काफी है। ऐसे निवेशकों के लिए इंडेक्स फंड एक आसान विकल्प बन जाते हैं। ये बाजार को हराने की कोशिश नहीं करते। इनका मकसद सिर्फ Nifty 50 जैसे किसी इंडेक्स के प्रदर्शन को दोहराना होता है।

इसके अलावा इंडेक्स फंड का खर्च भी आमतौर पर कम होता है और निवेशक को एक ही फंड के जरिए कई बड़ी कंपनियों में निवेश का मौका मिल जाता है।

नम्रता सिंह के मुताबिक, जो निवेशक सरल और नियम-आधारित निवेश पसंद करते हैं और फंड मैनेजर पर निर्भर नहीं रहना चाहते, उनके लिए इंडेक्स फंड अच्छा विकल्प हो सकते हैं। वहीं जो लोग थोड़ा ज्यादा जोखिम लेकर बेहतर रिटर्न की तलाश में हैं, वे अच्छे एक्टिव फंड्स पर विचार कर सकते हैं।

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Dividend Stocks: 5 लाख खुदरा निवेशकों को स्पेशल डिविडेंड देने की तैयारी, ऐलान पर बढ़ी इस FMCG स्टॉक की चमक

Dividend Stocks: दिग्गज एफएमसीजी कंपनी नेस्ले इंडिया के बोर्ड की अगले महीने 3 जुलाई को बैठक होने वाली है, जिसमें स्पेशल डिविडेंड के प्रस्ताव पर विचार होगा। इसके अलावा डिविडेंड का प्रस्ताव भी है। इससे कंपनी के 4 लाख से अधिक खुदरा निवेशकों के चेहरे खिल उठे और शेयर भी चमक गए। हालांकि शेयरों की तेजी का कुछ निवेशकों ने फायदा उठाया तो भाव नरम पड़े लेकिन अब भी यह ग्रीन जोन में है। फिलहाल बीएसई पर यह 0.37% की बढ़त के साथ ₹1420.60 (Nestle India Share Price) पर है। इंट्रा-डे में यह 1.02% उछलकर ₹1,429.85 तक पहुंच गया था।

Nestle India की क्या है योजना?

नेस्ले ने 19 जून को एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी कि 3 जुलाई को बोर्ड की बैठक होनी है जिसमें 2026 के स्पेशल डिविडेंड के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इसके लिए रिकॉर्ड डेट वही है, जो वित्त वर्ष 2026 के फाइनल डिविडेंड के लिए फिक्स की गई है। कंपनी हर शेयर पर ₹5 का फाइनल डिविडेंड बांट रही है, जिसकी रिकॉर्ड डेट 10 जुलाई फिक्स की गई है। इसका पेमेंट 30 जुलाई 2026 को या इसके बाद किया जाएगा। एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने यह भी जानकारी दी कि इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2027 के कारोबारी नतीजे को लेकर बोर्ड की बैठक 22 जुलाई को होगी।

नेस्ले इंडिया में किसकी कितनी हिस्सेदारी?

बीएसई पर मौजूद मार्च 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के हिसाब से कंपनी में 62.76% हिस्सेदारी प्रमोटर्स की है तो पब्लिक शेयरहोल्डिंग 37.24% है। पब्लिक शेयरहोल्डर्स में 4.24% होल्डिंग 51 म्यूचुअल फंड्स की है लेकिन इनमें से किसी की भी होल्डिंग 1% या इससे अधिक नहीं है। एलआईसी के पास इसके 11.84 करोड़ से अधिक शेयर हैं जोकि कंपनी की 6.14% होल्डिंग के बराबर है। देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी को मिलाकर 30 इंश्योरेंस कंपनियों की नेस्ले इंडिया में 7.37% होल्डिंग है तो विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 9.74% है। ₹2 लाख तक के निवेश वाले निवेशकों यानी रिटेल शेयरहोल्डर्स की बात करें तो 4,68,638 निवेशकों के पास कंपनी के 15,64,58,392 शेयर हैं जोकि कंपनी की 8.11% होल्डिंग के बराबर है। एचएनआई की होल्डिंग 3.96% है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

नेस्ले इंडिया के शेयर पिछले साल 14 अगस्त, 2025 को बीएसई पर ₹1085.00 के भाव पर थे जोकि इसके लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 9 महीने में यह 38.12% उछलकर पिछले महीने 11 मई, 2026 को ₹1498.60 पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ITR Filing 2026: रिटर्न फाइल करने के बाद रिवाइज कर रहे हजारों टैक्सपेयर, जानिए क्या है इसकी वजह

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने के बाद उसे रिवाइज्ड करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। इसकी वजह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की बढ़ती डेटा निगरानी है। विभाग के पास अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा वित्तीय जानकारी पहुंच रही है। ऐसे में कई लोगों को रिटर्न भरने के बाद पता चलता है कि उनकी कुछ कमाई या लेनदेन रिकॉर्ड में बाद में जुड़ गए हैं। इसके बाद उन्हें रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करनी पड़ती है।

क्यों बढ़ रहे हैं रिवाइज्ड रिटर्न?

इसकी सबसे बड़ी वजह एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) है। AIS एक ऐसा दस्तावेज है, जिसमें आपकी कमाई और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी एक जगह दिखाई देती है। इसमें सैलरी, ब्याज, डिविडेंड, म्यूचुअल फंड और शेयरों के सौदे, प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री, विदेशी धन भेजने और बड़े खर्च जैसी जानकारी शामिल होती है।

समस्या यह है कि AIS एक बार में पूरी तरह तैयार नहीं होता। बैंक, कंपनियां और दूसरी संस्थाएं समय-समय पर डेटा अपडेट करती रहती हैं। ऐसे में जो लोग जल्दी ITR भर देते हैं, उन्हें बाद में AIS में नई एंट्री दिखाई दे सकती है। इसके बाद रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करना जरूरी हो जाता है।

आज इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़े पैमाने डेटा जुटा रहा है। ऐसे में रिटर्न भरते समय छूटी हुई जानकारी बाद में सामने आ जाती है।

टैक्स रिकॉर्ड्स बदलते रहते हैं

AIS और टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी (TIS) अब स्थिर दस्तावेज नहीं हैं। इनमें रिटर्न दाखिल होने के बाद भी बदलाव हो सकता है। यानी आपने जिस दिन ITR भरी, उसके बाद भी आपके रिकॉर्ड में नई जानकारी जुड़ सकती है। यही वजह है कि कई बार रिटर्न सही भरने के बावजूद बाद में बदलाव की जरूरत पड़ जाती है।

इसके अलावा इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब डेटा एनालिटिक्स और फेसलेस स्क्रूटनी का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है। सिस्टम अपने आप आंकड़ों का मिलान करता है। अगर कोई अंतर दिखाई देता है, तो उसे आसानी से पकड़ा जा सकता है।

पहले छोटी-मोटी गड़बड़ियां नजरअंदाज हो जाती थीं। अब ऐसा नहीं है। ऐसे में कई टैक्सपेयर नोटिस आने का इंतजार करने के बजाय खुद ही रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करना बेहतर समझते हैं।

AY 2026-27 के लिए डेडलाइन?

  • असेसमेंट ईयर 2026-27 के रिटर्न अभी भी Income Tax Act, 1961 के तहत दाखिल किए जाएंगे। यह बात तब भी लागू रहेगी, जब 1 अप्रैल 2026 से नया Income Tax Act, 2025 लागू हो चुका होगा।
  • मौजूदा नियमों के अनुसार Section 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक दाखिल की जा सकती है। हालांकि असेसमेंट पूरा होने के बाद यह सुविधा नहीं मिलेगी।
  • फाइनेंस बिल 2026 में इस डेडलाइन को बढ़ाकर 31 मार्च 2027 करने का प्रस्ताव रखा गया है। लेकिन दिसंबर 2026 के बाद रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर शुल्क देना पड़ सकता है।
  • अगर यह समय सीमा भी निकल जाती है, तो Section 139(8A) के तहत Updated Return दाखिल करने का विकल्प मिलता है। यह सुविधा 48 महीने तक उपलब्ध रहती है। हालांकि इसमें अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है।

पहली बार में सही ITR भरना क्यों जरूरी?

बार-बार रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से बेहतर है कि पहली बार में ही सही रिटर्न भरी जाए। ITR दाखिल करने से पहले AIS, TIS और Form 26AS का मिलान अपने रिकॉर्ड से जरूर करना चाहिए। इसमें Form 16, बैंक स्टेटमेंट, ब्रोकर स्टेटमेंट, ब्याज के सर्टिफिकेट और कैपिटल गेन स्टेटमेंट जैसे दस्तावेज शामिल हैं।

अगर AIS में कोई गलत जानकारी दिखाई देती है, तो ‘Report Incorrect Information’ सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

जिन लोगों की कमाई के कई स्रोत हैं, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए। शेयर बाजार में निवेश करने वाले, म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले, विदेशी लेनदेन करने वाले या कैपिटल गेन कमाने वाले लोगों को ITR भरने से पहले सभी दस्तावेजों का मिलान जरूर कर लेना चाहिए।

थोड़ी-सी सावधानी बाद में रिवाइज्ड रिटर्न भरने की जरूरत को कम कर सकती है। साथ ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच या नोटिस का जोखिम भी घट सकता है।

ITR Filing 2026: टैक्सपेयर्स के लिए बड़ा अपडेट! AY 2026-27 के लिए ITR-3 यूटिलिटी लाइव

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

बाजार की गिरावट में छुपा है अमीरी का सीक्रेट! कब गिरेगा बाजार यह सोचना छोड़ें, SIP के इन 4 सीक्रेट्स से बुढ़ापे में बरसेंगे नोट

The Secret behind SIP Success: शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले हर निवेशक के मन में एक सवाल हमेशा घूमता रहता है ‘क्या मुझे अभी निवेश करना चाहिए या मार्केट के गिरने का इंतजार करना चाहिए?’ यह चिंता जायज भी है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति यह नहीं चाहता कि उसके निवेश करते ही बाजार में गिरावट आ जाए।

लेकिन कड़वा सच यह है कि बड़े-बड़े दिग्गज फंड मैनेजर भी मार्केट की टाइमिंग का सही अंदाजा नहीं लगा पाते। ऐसे में आम निवेशकों के लिए सबसे बेहतरीन और परखा हुआ फॉर्मूला है- सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी। 4 आसान पॉइंट्स में समझिए लॉंग टर्म में वेल्थ क्रिएशन का असली सीक्रेट।

1. मार्केट की टाइमिंग नहीं, टाइम मायने रखता है

ज्यादातर लोग सही एंट्री पॉइंट की तलाश में सालों खराब कर देते हैं। छोटे समय में बाजार उतार-चढ़ाव भरा हो सकता है। लेकिन जब आप अपने निवेश का नजरिया 10, 15 या 20 साल का कर देते हैं, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। लंबे समय में अर्थव्यवस्था बढ़ती है, कंपनियां बड़ी होती हैं और बाजार हर बड़े झटके से उबरकर नया हाई बनाता है। इसलिए बाजार कब ऊपर-नीचे हो रहा है, यह देखने के बजाय यह मायने रखता है कि आप कितने लंबे समय तक टिके रहते हैं।

2. मंदी ही है वो समय, जहां भविष्य का मुनाफा बनता है

जब बाजार ऊपर जाता है, तो हर किसी को अपनी एसआईपी का पोर्टफोलियो देखना अच्छा लगता है। लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब बाजार में बड़ी गिरावट आती है। समझदार निवेशक जानते हैं कि मंदी का समय एसआईपी के लिए ‘सेल’ की तरह होता है।

जब बाजार गिरता है, तो आपकी तय रकम जैसे- ₹5000 महीना में आपको उस म्यूचुअल फंड की ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। और जब बाजार दोबारा रिकवर होता है, तो यही मंदी के समय खरीदी गई ज्यादा यूनिट्स आपके रिटर्न को रॉकेट बना देती हैं।

3. इंसानी इमोशन और डर हो जाते हैं दूर

मार्केट की खबरों, हेडलाइंस और लोगों की बातों को सुनकर निवेशक अक्सर डर में गलत फैसले ले लेते हैं। एसआईपी इस डर को निवेश से पूरी तरह बाहर कर देती है। चूंकि हर महीने एक निश्चित तारीख को आपका पैसा खुद-ब-खुद कट जाता है, इसलिए आपको यह सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ती कि आज मार्केट तेज है या मंदा। यह ऊंचे बाजार में कम यूनिट्स और गिरे हुए बाजार में ज्यादा यूनिट्स खरीदकर आपके निवेश की लागत को खुद ही एवरेज कर देता है।

4. निवेशक का अपना बर्ताव ही है उसका सबसे बड़ा दुश्मन

वेल्थ क्रिएशन के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा बाजार का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि खुद निवेशक का व्यवहार होता है। जब बाजार गिरता है और चारों तरफ नकारात्मक खबरें होती हैं, तो कई लोग घबराकर अपनी एसआईपी रोक देते हैं या घाटे में म्यूचुअल फंड बेच देते हैं। ऐसा करके वे ‘मंहगे में खरीदने और सस्ते में बेचने’ के जाल में फंस जाते हैं। एसआईपी में सफल वही होता है जो बाजार के सबसे खराब दौर में भी बिना डरे अपनी किस्त चालू रखता है।

EPF से पैसा निकालने की ये भूल मत करें, नहीं तो लगेगा तगड़ा फटका; देख लें एक्सपर्ट का ये पूरा कैलकुलेशन

एसआईपी आपको बाजार के उतार-चढ़ाव से नहीं बचा सकती और न ही यह रातों-रात अमीर बनने की गारंटी देती है। लेकिन यह आपको बिना ज्यादा परेशान हुए, हर महीने अनुशासित तरीके से बचत करने की आदत डालती है। निवेश में कामयाबी एक दिन में सही फैसला लेने से नहीं, बल्कि हर महीने सही फैसले को सालों तक दोहराने से मिलती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PhonePe के यूजर्स के लिए बड़ी खबर, इनएक्टिव वॉलेट पर चुकानी पड़ेगी फीस

डिजिटल पेमेंट्स प्लेटफॉर्म फोनपे के यूजर्स के लिए बड़ी खबर है। कंपनी ने अपनी वॉलेट पॉलिसी में बदलाव किया है। अगर कोई यूजर लंबे समय तक अपने वॉलेट का इस्तेमाल नहीं करता है तो उसे इनएक्टिव मेंटेनेंस चार्ज चुकाना होगा। कंपनी ने इस बारे में एक ब्लॉग पोस्ट में बताया है।

हर तिमाही 100 रुपये की इनएक्टिव फीस

PhonePe की नई पॉलिसी में कहा गया है कि अगर कोई यूजर अपने वॉलेट के जरिए लगातार 365 दिन तक कोई फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन नहीं करता है तो उसके वॉलेट को इनएक्टिव कैटेगरी में डाल दिया जाएगा। इसके बाद उसे हर तिमाही 100 रुपये (जीएसटी सहित) इनएक्टिव मेंटेनेंस फीस चुकानी होगी।

बैंक अकाउंट के जरिए यूपीए ट्रांजेक्शन से काम नहीं चलेगा

कंपनी यह साफ कर दिया है कि सिर्फ फोनपे ऐप को ओपन करने या यूपीआई से लिंक्ड किसी बैंक अकाउंट से पेमेंट करने को वॉलेट एक्टिविटी नहीं मानी जाएगी। ब्लॉगपोस्ट में कहा गया है, “फोनपे अप्लिकेशन में लॉग-इन करने,यूपीआई ट्रांजेक्शन, ऑन-ऐप कैटेगरी पेमेंट/एप्लिकेशंस (रिचार्ज, बिल पेमेंट्स, क्रेडिट कार्ड्स, लोन, इंश्योरेंस) या किसी दूसरे नॉन-वॉलेट ट्रांजेक्शंस या वॉलेट के लिए केवायसी सब्मिशन को वॉलेट एक्टिविटी नहीं माना जाएगा।”

वॉलेट के जरिए करना होगा ट्रांजेक्शन 

फोनपे का कहना है कि वॉलेट एक्टिव बनाए रखने के लिए यूजर्स को सीधे अपने फोनपे वॉलेट के जरिए ट्रांजेक्शन करना होगा। कंपनी ने बताया है कि यूजर्स पर इनएक्टिविटी फीस लगाने से पहले उसे बताया जाएगा। फीस डिडक्ट करने से 15 दिन पहले उसे नोटिस भेजा जाएगा। हालांकि, नोटिस पीरियड में वॉलेट के जरिए पेमेंट कर यूजर्स इस फीस से बच सकते हैं। ऐसा करने के बाद वॉलेट को एक्टिव मार्क कर दिया जाएगा।

कंपनी ऐसे डिडक्ट करेगी इनएक्टिव फीस

वॉलेट में पर्याप्त फंड होने पर कंपनी इससे सीधे 100 रुपये का वॉलेट इनएक्टिविटी मेंटेनेंस फी डिडक्ट कर लेगी। अगर वॉलेट में 100 रुपये से कम का बैलेंस है तो सिर्फ मौजूद अमाउंट डिडक्ट होगा। निगेटिव बैलेंस क्रिएट बगैर बाकी को घटाकर जीरो कर दिया जाएगा। बड़ी संख्या में यूजर्स फोनपे वॉलेट का इस्तेमाल करते हैं।

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इनएक्टिव फीस से बचने का उपाय 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूजर्स को इनएक्टिव फीस से बचने के लिए कम से कम एक ट्रांजेक्शन अपने फोनपे वॉलेट से करने का ध्यान रखना होगा। ऐसा एक साल में सिर्फ एक बार करना पर्याप्त होगा। पहले भी डिजिटल पेमेंट कंपनियां इस तरह का चार्ज लगा चुकी है। 2021 में मोबीक्विक ने इनएक्टिव यूजर्स के लिए वॉलेट मेंटेनेंस चार्ज की शुरुआत की थी।