Stocks to Watch: एक्सपायरीज की बाढ़; HDFC Bank, SIS और Yes Bank समेत इन स्टॉक्स पर खास वजहों से रहेगी नजर

Stocks to Watch: कच्चे तेल की नरमी और वैश्विक बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच आज गिफ्ट निफ्टी से घरेलू मार्केट में सुस्त शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 22.00 प्वाइंट्स यानी 0.09% की मामूली बढ़त के साथ 23,976.00 पर है। चूंकि आज निफ्टी के साथ-साथ बैंक निफ्टी समेत एनएसई के अन्य इंडेक्स के डेरिवेटिव्स और स्टॉक्स के F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) की भी मंथली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 30 जून को सेंसेक्स (Sensex) 372.10 प्वाइंट्स यानी 0.48% की गिरावट के साथ 76,728.37 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 109.75 प्वाइंट्स यानी 0.46% की फिसलन के साथ 23,946.25 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: इन स्टॉक्स पर रहेगी नजर

आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट

सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज, हेक्सागॉन न्यूट्रिशन, मैजेस्टिक रिसर्च सर्विसेज एंड सॉल्यूशंस और सुपरहाउस आज कारोबारी नतीजे पेश करेंगी।

HDFC Bank

एचडीएफसी बैंक के बोर्ड ने 30 जून से एडिशनल डायरेक्टर (इंडिपेंडेंट डायरेक्टर) के तौर पर राजीव कुमार की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। उन्हें आरबीआई की मंजूरी मिलने पर बैंक का पार्ट-टाइम चेयरमैन भी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा बोर्ड ने एक्सिस बैंक के सीएफओ पुनीत शर्मा को 1 सितंबर, 2026 से एचडीएफसी बैंक का चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर-डेज़िनेट और 1 दिसंबर से चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर बनाने की मंजूरी दी।

Axis Bank

एक्सिस बैंक के सीएफओ पुनीत शर्मा ने 31 अगस्त से प्रभावी इस्तीफा दे दिया है।

Bandhan Bank

राजीव मंत्री ने नए मौकों की तलाश के लिए बंधन बैंक के सीएफओ पद से इस्तीफा दे दिया है, जो 25 सितंबर से लागू होगा।

Engineers India

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अतुल गुप्ता (डायरेक्टर-कमर्शियल) को इंजीनियर्स इंडिया का चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। उन्होंने 29 जून से कंपनी के सीएमडी का पदभार संभाल लिया है।

SIS

एसआईएस के बोर्ड ने ₹120 करोड़ तक के शेयर बायबैक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अगस्त 2017 में कंपनी की लिस्टिंग के बाद से यह उसका पांचवां बायबैक होगा।

Crest Ventures

क्रेस्ट वेंचर्स ने अपनी पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी सतलज हाउसिंग (SHPL) के जरिए प्रफुल्ल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के साथ एक डेवलपमेंट एग्रीमेंट रजिस्टर किया है। यह सोसाइटी मुंबई के दादर में एक बड़े क्लस्टर रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

Yes Bank

यस बैंक के बोर्ड ने इक्विटी सिक्योरिटीज जारी करके ₹7,500 करोड़ तक और डेट सिक्योरिटीज जारी करके ₹8,500 करोड़ तक जुटाने की मंज़ूरी दे दी है।

RITES, Container Corporation of India

राइट्स ने कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CONCOR) के साथ एक एमओयू किया है। इसके तहत वे CONCOR के टर्मिनल और एस्टैब्लिशमेंट्स के विकास और सुधार के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (PMC) सेवाओं पर मिलकर काम करेंगे, जिसमें कॉन्सेप्ट से लेकर कमीशनिंग तक के प्रोजेक्ट शामिल होंगे।

Sterling and Wilson Renewable Energy

स्टर्लिंग एंड विल्सन रिन्यूएबल एनर्जी ने मिस्र और MENA क्षेत्र के प्रमुख कॉन्ट्रैक्टर में से एक हसन अल्लाम कंस्ट्रक्शन के साथ 50:50 के जॉइंट वेंचर में मिस्र के मिन्या गवर्नरेट में वेस्ट मिन्या सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए लगभग $5 करोड़ का ऑर्डर हासिल किया है।

Afcons Infrastructure

एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए हर शेयर पर ₹2 के फाइनल डिविडेंड को मंजूरी दी है जिसकी रिकॉर्ड डेट 23 जुलाई है।

Juniper Hotels

जुनिपर होटल्स के सीएफओ तरुण जेटली ने नए मौकों की तलाश में इस्तीफा दे दिया है। जो 15 जुलाई से प्रभावी होगा।

Jagsonpal Pharmaceuticals

जगसोनपाल फार्मा ने ₹20.8 करोड़ में मुंबई की एक फार्मा कंपनी इक्विटास हेल्थकेयर में 85% इक्विटी हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक डेफिनिटिव एग्रीमेंट किया है।

SJVN

एसजेवीएन ने गुजरात ऊर्जा विकास निगम (GUVNL) के साथ पावर पर्चेज एग्रीमेंट्स (PPAs) किया है। ये एग्रीमेंट्स हिमाचल प्रदेश में कंपनी की आने वाले समय में आने वाली पनबिजली परियोजनाओं—66 MW धौलासिध HEP, 210 MW लुहरी स्टेज-I HEP और 382 MW सुन्नी डैम HEP—से बिजली की सप्लाई के लिए हैं।

बल्क और ब्लॉक डील्स

Indo Tech Transformers

आईआईएफएल एसेट मैनेजमेंट ने प्रमोटर शिर्डी साई इलेक्ट्रिकल्स से प्रति शेयर ₹2,985 के भाव पर इंडो टेक ट्रांसफॉर्मर्स के 2 लाख शेयर (1.88% हिस्सेदारी) ₹59.7 करोड़ में खरीदे हैं।

Bliss GVS Pharma

इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर मैटेउस (Mateus) ने एरियन इन्वेस्टमेंट से प्रति शेयर ₹490 के भाव पर ब्लिस GVS फार्मा के 11.5 लाख शेयर (1.08% हिस्सेदारी) ₹56.35 करोड़ में खरीदे हैं।

Goodluck India

सेजवन-फ्लैगशिप ग्रोथ OE फंड ने प्रति शेयर ₹1420 के भाव पर गर्ग परिवार की कंपनी गुडलक इंडिया के अतिरिक्त 2.5 लाख शेयर (0.75% हिस्सेदारी) ₹35.5 करोड़ में खरीदे हैं। हालांकि प्रमोटर मनीष गर्ग ने कंपनी के 2.9 लाख शेयर (0.87% हिस्सेदारी) ₹1,420.81 के भाव पर ₹41.2 करोड़ में बेचे हैं। सेजवन के पास फ्लैगशिप ग्रोथ OE फंड समेत अपनी दो स्कीमों के जरिए मार्च 2026 तक गुडलक इंडिया में 2.46% हिस्सेदारी थी।

Multi Commodity Exchange of India

यूटीआई म्यूचुअल फंड ने मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX के 14.65 लाख शेयर (0.57% हिस्सेदारी) ₹425.01 करोड़ में प्रति शेयर ₹2,899.23 के भाव पर खरीदा है।

Pondy Oxides & Chemicals

प्रमोटर मंजू बंसल ने प्रति शेयर ₹1,270.27 के भाव पर पोंडी ऑक्साइड्स एंड केमिकल्स के 9 लाख शेयर (2.94% हिस्सेदारी) ₹114.32 करोड़ में बेच दिए। दूसरी तरफ ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड ने पोंडी ऑक्साइड्स एंड केमिकल्स के 4.72 लाख शेयर (1.54% हिस्सेदारी) ₹59.94 करोड़ में प्रति शेयर ₹1,270 के भाव पर खरीदे।

Ramco Systems

ओरेगन पब्लिक एम्प्लॉइज रिटायरमेंट सिस्टम ने रामको सिस्टम्स के 1.9 लाख शेयर (0.5% हिस्सेदारी) ₹14.73 करोड़ में प्रति शेयर ₹772.4 के भाव पर खरीदे। वहीं जेन सिक्योरिटीज ने ₹18.78 करोड़ में 2.39 लाख शेयर (0.63% हिस्सेदारी) प्रति शेयर ₹785.4 के भाव पर बेचे।

Shankara Building Products

प्रमोटर ‘द बालीगंज फैमिली ट्रस्ट’ (The Ballygunge Family Trust) ने प्रति शेयर ₹123.54 के भाव पर शंकर बिल्डिंग प्रोडक्ट्स के 1.36 लाख शेयर (0.56% हिस्सेदारी) ₹1.68 करोड़ में खरीदी है।

एक्स-डेट

आज बजाज फिनसर्व, बजाज होल्डिंग्स एंड इन्वेस्टमेंट, बजाज फाइनेंस, महाराष्ट्र स्कूटर्स और वेल्सपन कॉर्प के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे तो पटेल इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स के बायबैक की भी आज एक्स-डेट है।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

₹10000 की मंथली SIP से बने ₹1.78 करोड़! टाटा के इस फंड ने 22 साल में बदल दी निवेशकों की किस्मत

Tata Value Fund 22 Years Completion: अगर आप म्यूचुअल फंड में लॉन्ग-टर्म निवेश की ताकत को समझना चाहते हैं, तो टाटा एसेट मैनेजमेंट का ‘टाटा वैल्यू फंड’ इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। 29 जून 2026 को इस ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम ने अपनी लॉन्चिंग के शानदार 22 साल पूरे कर लिए हैं। इस फंड को 29 जून 2004 को लॉन्च किया गया था।

फंड के जून 2026 के प्रोडक्ट नोट के मुताबिक, जिन निवेशकों ने इस स्कीम की शुरुआत से ही इसमें भरोसा जताया, वे आज करोड़पति बन चुके हैं। आइए समझते हैं कि इस वैल्यू फंड ने निवेशकों को कैसा रिटर्न दिया है और इसका मौजूदा पोर्टफोलियो कैसा है।

SIP रिटर्न का जादू: ₹26.3 लाख का निवेश बना ₹1.78 करोड़

टाटा वैल्यू फंड के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, स्कीम की शुरुआत से लेकर अब तक के रिटर्न इस प्रकार हैं:

मंथली SIP का कमाल: अगर किसी निवेशक ने जून 2004 में ₹10000 प्रति महीने की SIP शुरू की होती, तो 31 मई 2026 तक उसका कुल निवेश ₹26.3 लाख होता। आज इसकी वैल्यू बढ़कर करीब ₹1.78 करोड़ हो चुकी है। इस लिहाज से फंड ने शुरुआत से अब तक 15.07% का सालाना एसआईपी रिटर्न दिया है।

लंप सम निवेश की ताकत: अगर किसी निवेशक ने लॉन्चिंग के समय इस फंड में सिर्फ ₹10000 एकमुश्त डाले होते, तो आज वह रकम बढ़कर करीब ₹3.39 लाख हो चुकी होती। यह 17.44% का कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्शाता है।

बेंचमार्क के मुकाबले कैसा रहा प्रदर्शन?

पिछले 22 सालों में इस फंड ने देश के प्रमुख इंडेक्स को कड़ी टक्कर दी है:

  • Tata Value Fund (लम्प-सम): 17.44% CAGR
  • Nifty 500 TRI: 15.50% CAGR
  • Nifty 50 TRI: 14.74% CAGR

फंड साइज और कहां हो रहा है आपका पैसा निवेश?

31 मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, टाटा वैल्यू फंड कुल ₹8345.8 करोड़ के एसेट्स (AUM) का प्रबंधन कर रहा है और इसके पोर्टफोलियो में 44 स्टॉक्स शामिल हैं। फंड का झुकाव बड़े शेयरों यानी Large-Caps की तरफ ज्यादा है:

  • लार्ज-कैप: 62% एलोकेशन
  • मिड-कैप: 26% एलोकेशन
  • स्मॉल-कैप: 10% एलोकेशन

फंड इस समय बेंचमार्क के मुकाबले फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑयल एंड गैस, पावर और FMCG सेक्टर पर ज्यादा भरोसा जता रहा है। इसके अलावा रिन्यूएबल एनर्जी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों में भी हिस्सेदारी बढ़ाई जा रही है।

पोर्टफोलियो में नए शेयरों की एंट्री और किसकी हुई छुट्टी?

मार्च से मई 2026 के बीच फंड मैनेजर ने अपने पोर्टफोलियो में कई बड़े बदलाव किए हैं:

इन शेयरों की हुई एंट्री: प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स, एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी, अडाणी पावर, अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस, डिक्सन टेक्नोलॉजीज और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स।

इन शेयरों से बनाया फासला: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, विप्रो और एसीसी।

फंड मैनेजर: इस फंड की कमान सोनम उदासी के हाथों में है, जो अप्रैल 2016 से लगातार इस स्कीम को मैनेज कर रहे हैं।

शॉर्ट-टर्म पर बाजार के उतार-चढ़ाव का असर

लंबी अवधि के शानदार ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद, हालिया मार्केट वोलेटिलिटी के कारण इसका शॉर्ट-टर्म रिटर्न मिला-जुला रहा है। 31 मई 2026 को समाप्त हुए एक साल की अवधि में इस स्कीम ने 0.05% का मामूली निगेटिव रिटर्न दिया है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी-500 TRI ने 0.28% का रिटर्न दिया है।

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फंड हाउस का मानना है कि मौजूदा बाजार उन कंपनियों को पसंद कर रहा है जहां अर्निंग विजिबिलिटी साफ है। ऐसे में पोर्टफोलियो का फोकस ‘क्वालिटी और कंसिस्टेंट कंपाउंडिंग’ पर है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं और इसमें कोई गारंटीड रिटर्न नहीं मिलता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अब पैसे लगाने लायक हो गया शेयर बाजार? JPMorgan ने कहा- टैक्स और नीतिगत बदलावों से सुधरा माहौल

भारतीय स्टॉक मार्केट में निवेश करने वालों के लिए अच्छी खबर है। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक JPMorgan का मानना है कि सरकार के टैक्स और नीतिगत बदलावों की वजह से अब इक्विटी में निवेश पहले से ज्यादा आकर्षक हो गया है। यही कारण है कि पिछले दो साल में बाजार की रिटर्न ज्यादा दमदार नहीं रहने के बावजूद घरेलू निवेशकों का पैसा लगातार शेयर बाजार में आ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG), डेट म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स से जुड़े टैक्स नियमों में हुए बदलावों से इक्विटी की स्थिति मजबूत हुई है। इससे लोगों का रुझान धीरे-धीरे पारंपरिक बचत की जगह वित्तीय निवेश की ओर बढ़ रहा है।

टैक्स नियमों से इक्विटी को फायदा कैसे?

JPMorgan के मुताबिक, फिलहाल इक्विटी पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। वहीं, डेट म्यूचुअल फंड पर इंडेक्सेशन का फायदा खत्म हो चुका है। कुछ इंश्योरेंस पॉलिसियों की मैच्योरिटी रकम पर भी टैक्स लागू हो गया है।

ब्रोकरेज का कहना है कि इन बदलावों से दूसरे निवेश विकल्पों के मुकाबले इक्विटी ज्यादा आकर्षक बन गई है।

SIP से लगातार आ रहा पैसा

रिपोर्ट का कहना है कि घरेलू निवेशकों की सबसे बड़ी ताकत अब सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) बन गया है। पिछले दो साल में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी घटाई। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों ने SIP के जरिए लगातार निवेश जारी रखा। इससे बाजार को मजबूत सहारा मिला।

JPMorgan का मानना है कि यह सिर्फ बाजार की चाल से जुड़ा निवेश नहीं है, बल्कि लोगों की बचत की आदत में स्थायी बदलाव का संकेत है। मतलब कि अब लोग तेजी की गिरावट की परवाह किए बगैर निवेश जारी रख रहे हैं।

घरेलू निवेशक सबसे बड़ा सहारा

ब्रोकरेज का कहना है कि घरेलू निवेशकों का लगातार निवेश भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा सहारा बन गया है। इससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर काफी हद तक संतुलित हो जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में भी घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा वित्तीय निवेश और इक्विटी की ओर जा सकता है।

किन बातों का है जोखिम?

JPMorgan ने यह भी कहा कि उसकी यह उम्मीद घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी पर टिकी है। अगर लंबे समय तक हर महीने SIP निवेश 250 अरब रुपये (25,000 करोड़ रुपये) से नीचे रहता है, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

इसके अलावा, अगर किसी नियामकीय बदलाव की वजह से डेरिवेटिव कारोबार में 20% से ज्यादा गिरावट आती है, तो इसका असर पूरे शेयर बाजार की गतिविधियों पर पड़ सकता है।

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SIP ने संभाल लिया भारतीय मार्केट, दो वजहों से शेयरों में आया ताबड़तोड़ निवेश, लेकिन जेपीमॉर्गन ने जारी किया यह अलर्ट

टैक्स और पॉलिसी में कई बदलाव ने भारतीय स्टॉक मार्केट में निवेश को अधिक आकर्षक बना दिया है। यह दावा जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट में किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो वर्षों में शेयर बाजार से सुस्त रिटर्न के बावजूद इन बदलावों के चलते घरेलू शेयर मार्केट में निवेश की रफ्तार यानी इनफ्लो के लगातार मजबूत बने रहने की संभावना है। जेपीमॉर्गन के मुताबिक लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स, डेट म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर टैक्स में हालिया बदलावों ने रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो को ऐसा बना दिया कि इक्विटी में निवेश अधिक आकर्षक हो गया।

पॉलिसी और टैक्स से इक्विटी मार्केट को मिल रहा सपोर्ट

जेपी मॉर्गन ने अपनी इक्विटी स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में कहा कि पॉलिसी और टैक्स से इक्विटी मार्केट को सपोर्ट मिल रहा है। इक्विटी पर 12.5% ​​LTCG टैक्स लगता है, और इंडेक्सेशन हटाने, इंश्योरेंस पॉलिसी से मिलने वाले पैसे पर टैक्स और डेट म्यूचुअल फंड के लिए स्लैब-रेट टैक्स से इक्विटी की चमक बढ़ी। ब्रोकरेज फर्म का मानना ​​है कि इन स्ट्रक्चरल बदलाव और SIP के जरिए खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से इक्विटी मार्केट में घरेलू निवेश लगातार मजबूत बना रहेगा।

जेपीमॉर्गन का कहना है कि वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में अपना निवेश कम किया लेकिन फिर भी घरेलू निवेशक डटे रहे। इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स ने भले ही बहुत ज्यादा रिटर्न नहीं दिया, लेकिन रिटेल निवेशकों ने एसआईपी के जरिए निवेश जारी रखा। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इससे बाजार में लॉन्ग टर्म बदलाव का संकेत मिल रहा है।

SIP से मिला सपोर्ट लेकिन इस बात को लेकर किया अलर्ट

जेपीमॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में एसआईपी के बढ़ते महत्व पर जोर दिया, जो इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश आने का मुख्य जरिया बन गए हैं। जेपीमॉर्गन के मुताबिक हर महीने एसआईपी में निवेश का लगातार बढ़ना दिखाता है कि घरों की बचत का अधिकतर हिस्सा अब फाइनेंशियल एसेट्स में जा रहा है और आने वाले वर्षों में भी इस रुझान के बने रहने की उम्मीद है। हालांकि जेपीमॉर्गन ने चेतावनी दी है कि अगर लंबे समय तक एसआईपी में मासिक निवेश ₹25 हजार करोड़ से कम रहता है, तो निवेशकों के नजरिए पर दबाव पड़ सकता है।

एक और रिस्क रेगुलेटरी बदलावों से जुड़ा है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इन बदलावों से डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग वॉल्यूम में 20% से अधिक की गिरावट आ सकती है और इसका असर मार्केट की एक्टिविटीज पर पड़ सकता है।

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शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में हुआ है भारी नुकसान? तब भी क्यों जरूरी है ITR फाइल करना, जानें टैक्स छूट का यह सीक्रेट फॉर्मूला

ITR Filing Rules: क्या शेयर बाजार में मुनाफे की बजाय नुकसान होने पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना चाहिए? अक्सर देखा जाता है कि जिन निवेशकों को किसी फाइनेंशियल ईयर के दौरान इक्विटी या म्यूचुअल फंड में घाटा होता है, वे मान लेते हैं कि उन्हें ITR फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। खासकर तब, जब उनकी कोई अन्य टैक्स योग्य आय न हो।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स की मानें तो घाटे वाले साल में आईटीआर फाइल न करना लंबे समय में आपको बहुत भारी पड़ सकता है। अगर आप तय समय सीमा के भीतर अपना रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आप अपने इस कैपिटल लॉस को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड का अधिकार खो देते हैं।

इसका सीधा असर यह होगा कि भविष्य में जब आपको प्रॉफिट होगा, तब आप इस घाटे को उस मुनाफे से एडजस्ट नहीं कर पाएंगे और आपको ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नुकसान के बावजूद आईटीआर भरना क्यों फायदेमंद है।

लॉस कैरी फॉरवर्ड करने का क्या है नियम?

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नुकसान के बावजूद समय पर आईटीआर भरने से आपको अपने नुकसान को भविष्य के मुनाफे से एडजस्ट करने की कानूनी अनुमति मिलती है। एनए शाह एसोसिएट्स के टैक्स पार्टनर गोपाल बोहरा बताते हैं कि भले ही किसी टैक्सपेयर की कोई टैक्स देनदारी न बन रही हो और सिर्फ इक्विटी या म्यूचुअल फंड से कैपिटल लॉस हुआ हो, तब भी ड्यू डेट पर या उससे पहले आईटीआर फाइल करना बेहद फायदेमंद है।

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समय पर आईटीआर दाखिल करने से आप इस नुकसान को अगले 8 सालों तक कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं। भविष्य के सालों में जब भी आपको शेयरों या म्यूचुअल फंड से कमाई होगी, तो आप इस पुराने घाटे को उस मुनाफे से घटाकर अपनी टैक्स देनदारी को काफी कम या शून्य कर सकते हैं।

क्या इक्विटी, डेट म्यूचुअल फंड और गोल्ड ETF के नियम अलग हैं?

कई निवेशकों को लगता है कि यह नियम सिर्फ शेयरों के लिए है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि निवेश का माध्यम कोई भी हो, नियम सभी के लिए बिल्कुल एक समान हैं। चाहे आपका नुकसान इक्विटी शेयर्स से हुआ हो, इक्विटी म्यूचुअल फंड से हो, डेट म्यूचुअल फंड से हो या फिर गोल्ड ईटीएफ से, अगर आप इस अन-एडजस्टेड लॉस को आगे ले जाना चाहते हैं, तो आपको तय तारीख के भीतर ही आईटीआर भरना होगा। नियत तारीख चूकने पर घाटे को आगे ले जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।

इक्विटी के घाटे को क्या दूसरे एसेट्स के मुनाफे से एडजस्ट कर सकते हैं?

हां, नियमों के दायरे में रहकर आप इक्विटी के घाटे को दूसरे कैपिटल एसेट्स से हुए मुनाफे के खिलाफ एडजस्ट कर सकते हैं और अपना टैक्स बचा सकते हैं:

शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस(STCL): अगर आपको शेयरों से शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस हुआ है, तो इसे आप शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह के कैपिटल गेन्स से एडजस्ट कर सकते हैं। फिर चाहे वह मुनाफा शेयरों से हो, प्रॉपर्टी बेचने से हो, गोल्ड से हो या डेट म्यूचुअल फंड से।

लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस(LTCL): अगर आपको शेयरों में लंबी अवधि में घाटा हुआ है, तो नियम कड़े हैं। इसे केवल और केवल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के खिलाफ ही एडजस्ट किया जा सकता है।

निवेशकों को कौन सा ITR फॉर्म चुनना चाहिए?

सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी कमाई या नुकसान के स्रोत क्या हैं:

ITR-2: जो निवेशक शेयरों, म्यूचुअल फंड या अन्य कैपिटल एसेट्स से होने वाले केवल कैपिटल गेन्स या कैपिटल लॉस को रिपोर्ट कर रहे हैं, उन्हें आमतौर पर ITR-2 फॉर्म भरना होता है।

ITR-3: लेकिन, अगर आप शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेड करते हैं, जिसे टैक्स की भाषा में बिजनेस इनकम माना जाता है, तो आपको ITR-3 फॉर्म चुनना चाहिए।

कैपिटल लॉस रिपोर्ट करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

टैक्सपेयर्स को हमेशा यह याद रखना चाहिए कि केवल वही नुकसान आगे ले जाए जा सकते हैं जो समय सीमा के भीतर फाइल किए गए रिटर्न में दिखाए गए हों। इसके अलावा, अपने कॉन्ट्रैक्ट नोट्स, ब्रोकर स्टेटमेंट्स और कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट्स जैसे सभी जरूरी दस्तावेजों को संभालकर रखें, क्योंकि टैक्स अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर ये सबूत के तौर पर काम आते हैं।

गोपाल बोहरा सलाह देते हैं कि आईटीआर दाखिल करने से पहले निवेशकों को अपने AIS और TIS में दर्ज ट्रांजैक्शन का मिलान अपने ब्रोकर की रिपोर्ट से जरूर कर लेना चाहिए। आईटीआर में शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म नुकसान का सही खुलासा सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में टैक्स छूट का लाभ लेने में कोई रुकावट न आए।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

बिजनेस साइकिल फंड में निवेश करना चाहते हैं? पहले ये बातें ठीक तरह से समझ लीजिए

शेयर बाजार इकोनॉमी के अलग-अलग चरणों से गुजरता है। इस वजह से सेक्टर का प्रदर्शन भी बदलता रहता है। अगर किसी एक वक्त में फाइनेंशियल स्टॉक्स का प्रदर्शन अच्छा होता है तो दूसरे वक्त में मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी या हेल्थकेयर का प्रदर्शन अच्छा हो सकता है। एक इनवेस्टर के लिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि आगे किस सेक्टर का प्रदर्शन अच्छा रहने वाला है। इस समस्या का समाधान बिजनेस साइकिल फंड है।

बिजनेस साइकिल फंड म्यूचुअल फंड की एक कैटेगरी है। यह फंड इकोनॉमी और मार्केट की स्थितियों के हिसाब से निवेश के लिए सेक्टर बदलता रहता है। बिजनेस साइकिल फंड एक तरह की डायवर्सिफायड इक्विटी स्कीम है, जो उन सेक्टर्स में इनवेस्टमेंट का ऐलोकेशन करता है जनके प्रदर्शन आगे बेहतर रहने की उम्मीद होती है।

बिजनेस साइकिल फंड और थिमैटिक फंड्स में फर्क है। थिमैटिक फंड का फोकस किसी एक इंडस्ट्री या थीम पर होता है। लेकिन, बिजनेस साइकिल फंड के पास समय के साथ निवेश के लिए सेक्टर बदलने की आजादी होती है। बिजनेस साइकिल फंड का फंड मैनेजर इकोनॉमिक ग्रोथ ट्रेंड्स, इंटरेस्ट रेट्स, पॉलिसी डेवलपमेंट्स, कॉर्पोरेट अर्निंग्स और मार्केट वैल्यूएशन के आधार पर ऐलोकेशन का फैसला करता है।

बिजनेस साइकिल फंड सेक्टर रोटेशन के कॉन्सेप्ट का इस्तेमाल करता है। इसका मतलब है कि अलग-अलग समय में अलग-अलग सेक्टर के पास मार्केट लीडरशिप होती है। म्यूचुअलफंडइंडियाडॉटकॉम के मुताबिक, महिंद्रा मनुलाइफ बिजनेस साइकिल फंड ने 9 महीने, एक साल और 2 साल में अच्छा रिटर्न दिया है।

कोटक, आदित्य बिड़ला सन लाइफ और एक्सिस म्यूचुअल फंड एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के अपने बिजनेस साइकिल फंड हैं। ऐसे फंड को उन इनवेस्टर्स के लिए विकल्प के रूप में देखा जाता है जो इक्विटी में निवेश में डायवर्सिफिकेशन चाहते हैं। यह समझना जरूरी है कि इस फंड का प्रदर्शन भी इकोनॉमी की स्थितियों और फंड मैनेजर्स के फैसले पर निर्भर करता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिजनेस साइकिल फंड उन निवेशकों के लिए है, जिन्हें बाजार की समझ हैं। नए निवेशकों को इस फंड में सोचसमझकर निवेश करना चाहिए। अगर कोई निवेशक बिजनेस साइकिल फंड में निवेश करना चाहता है तो वह इस बारे में अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय ले सकता है।

क्या आप बहुत ज्यादा फंड में निवेश कर रहे हैं? जानिए इसके नुकसान

मेरे एक दोस्त ने एक दिन अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि वह हर साल म्यूचु्अल फंड में निवेश बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही उनके पोर्टफोलियो में फंड्स यानी स्कीम की संख्या भी बढ़ रही है। क्या ऐसा करना सही है? जब मैंने उनसे पूछा कि उनके पोर्टफोलियो में कितनी स्कीमें हैं तो वह गिनती करने लगे। दरअसल यह समस्या सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है।

डायवर्सिफिकेशन का सही मतलब कम लोग समझते हैं

ज्यादातर निवेशकों को लगता है कि डायवर्सिफिकेशन के लिए ज्यादा स्कीमों में निवेश करना जरूरी है। लेकिन, कम लोग यह समझते हैं कि डायवर्सिफिकेशन का मतलब ज्यादा फंडों में निवेश करना नहीं है। डायवर्सिफिकेशन का मतलब यह है कि आपके पोर्टफोलियो में अलग-अलग तरह के एसेट्स और स्कीमें होनी चाहिए। उन स्कीमों का पोर्टफोलियो एक जैसे शेयरों का नहीं होना चाहिए। उदाहरण के लिए एक से ज्यादा लार्जकैप फंड में निवेश करने का कोई मतलब नहीं है।

एक जैसी कई स्कीम में निवेश करना डायवर्सिफिकेशन नहीं है 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई इनवेस्टर डायवर्सिफिकेशन करना चाहता है तो वह अपने पोर्टफोलियो में एक लार्जकैप फंड, एक मिडकैप फंड, एक स्मॉलकैप फंड को शामिल कर सकता है। लार्जकैप, मिडकैप या स्मॉलकैप के एक से ज्यादा फंड में निवेश करने से डायवर्सिफिकेशन का मकसद पूरा नहीं होता है।

अलग-अलग एसेट में निवेश करने से रिस्क कम हो जाता है

डायवर्सिफिकेशन का मतलब अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करना है। इसका मतलब है कि पोर्टफोलियो में इक्विटी शामिल होना चाहिए। इक्विटी की हर कैटेगरी के फंड होने चाहिए। डेट यानी बॉन्ड्स जैसे फिक्स्ड रिटर्न इंस्ट्रूमेंट्स भी पोर्टफोलियो का हिस्सा होना चाहिए। साथ ही बुलियन भी होना चाहिए। बुलियन का मतलब सोने और चांदी से है। एक्सपर्ट्स गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ में निवेश की सलाह देते हैं।

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एक साथ सभी एसेट क्लास में नहीं आती है गिरावट 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि डायवर्सिफिकेशन का मकसद यह है कि किसी एसेट क्लास में गिरावट का असर पोर्टफोलियो पर कम से कम पड़े। आम तौर पर यह देखा जाता है कि सभी एसेट क्लास में एक साथ गिरावट नहीं आती है। कई बार इक्विटी में गिरावट आने पर गोल्ड में तेजी होती है। डेट में निवेश आपके पोर्टफोलियो को शेयरों में तेज गिरावट की स्थिति में नुकसान से बचाता है। इसलिए एक्सपर्ट्स पोर्टफोलियो में डेट को शामिल करने सलाह देते हैं।

Retirement Planning: आप रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू करना चाहते हैं? तो ये बातें जरूर जान लें

क्या रिटायरमेंट बाद के खर्च के लिए आपने पैसे जुटाने शुरू कर दिए हैं? अगर नहीं तो इसमें आपको देर नहीं करना चाहिए। लेकिन, इससे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपका रिटायरमेंट फंड कितना बड़ा होना चाहिए। यह सुनने में आसान लगता है लेकिन यह सवाल मुश्किल है। इसकी वजह यह है कि आज आपको अपने लिए जितना फंड पर्याप्त लगता है, उसकी वैल्यू 10-15 साल बाद काफी कम रह जाएगी।

रिटायरमेंट बाद के खर्च का अंदाजा

कई लोग रिटायरमेंट बाद के खर्चों का सही अंदाजा नहीं लगा पाते। आज आप हर महीने जितना खर्च करते हैं, उतना रिटायरमेंट के बाद आपको खर्च करने की जरूरत नहीं रह जाएगी। कुछ खर्च आपके बजट से निकल जाएंगे तो कुछ नए खर्च आपके बजट में शामिल हो जाएंगे। उदाहरण के लिए घर की EMI चुकाने की जरूरत आपको नहीं रह जाएगी। लेकिन मेडिकल केयर पर होने वाला खर्च बढ़ जाएगा।

इनफ्लेशन से पैसे की वैल्यू घटती रहती है

इनफ्लेशन के असर से पैसे की वैल्यू लगातार घटती रहती है। इसे हम एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। मान लीजिए आज आपके परिवार का मंथली खर्च 45,000 रुपये है। 20 साल बाद आपको सेम लाइफ स्टाइल के लिए 1 लाख रुपये से ज्यादा मंथली खर्च करना पड़ेगा। इसकी वजह है कि हर साल इनफ्लेशन की वजह से पैसे की वैल्यू 6 फीसदी तक घटती जाती है।

कम से कम 25 साल के खर्च का इंतजाम जरूरी

दूसरा, लोगों को यह पता नहीं होता कि रिटायरमेंट बाद उन्हें कितने सालों तक खर्च करने की जरूरत पड़ेगी। व्यक्ति जितने लंबे समय तक जीवित रहेगा, उसे उतने लंबे समय तक पैसे खर्च करने की जरूरत पड़ेगी। अगर कोई व्यक्ति 60 साल में रिटायर करता है तो उसे कम से कम अगले 25 सालों तक के खर्च के बारे में सोचना चाहिए।

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निवेश के कई विकल्पों का कर सकते हैं इस्तेमाल 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटायरमेंट के लिए फंड तैयार करने के लिए निवेश के कई विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें पीपीएफ, एनपीएस, म्यूचुअल फंड की स्कीम आदि शामिल हैं। अगर आप नौकरी करते हैं तो आपके रिटायरमेंट प्लानिंग में ईपीएफ भी शामिल होगा। आप जितना जल्द रिटारमेंट के लिए निवेश शुरू करेंगे, आपके लिए उतना बड़ा फंड तैयार करने की गुंजाइश होगी। साथ ही लंबी अवधि में आपके पैसे पर कंपाउंडिंग का भी फायदा मिलेगा।

प्रॉपर्टी या म्यूचुअल फंड, लंबे समय में कौन आपको बनाएगा ज्यादा अमीर? 4 पॉइंट्स में समझिए कहां मिलेगा बंपर रिटर्न

Real Estate vs Mutual Funds: लॉंग टर्म के लिए निवेश कैसे करें? जमीन खरीदे या फिर म्यूचुअल फंड में पैसे लगाए। भारत के निवेशकों के बीच लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए सालों से यह बहस चली आ रही है। वैसे दशकों तक हमारे देश में प्रॉपर्टी यानी जमीन या मकान खरीदना ही अमीर बनने और सुरक्षित भविष्य का सबसे भरोसेमंद जरिया माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड्स एक बेहद जबरदस्त ऑप्शन के तौर पर उभरे हैं।

प्रॉपर्टी और म्यूचुअल फंड, दोनों ने ही निवेशकों को अमीर बनाया है। लेकिन जब बात लंबे समय के लिए निवेश की हो, तो आपके लिए कौन सा विकल्प सबसे बेहतर रहेगा? आइए समझते हैं दोनों का पूरा नफा-नुकसान।

1- रियल एस्टेट: क्यों आज भी प्रॉपर्टी पर फिदा हैं लोग?

रियल एस्टेट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एक ‘टैंजिबल एसेट’ है, यानी इसे आप देख सकते हैं, छू सकते हैं और खुद इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके अन्य बड़े फायदे इस प्रकार हैं:

किराए से रेगुलर इनकम: प्रॉपर्टी से आपको हर महीने रेंटल इनकम मिल सकती है, जो महंगाई के साथ बढ़ती जाती है।

बड़ी ग्रोथ की संभावना: अगर किसी इलाके में नया हाईवे, मेट्रो या कोई बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट आ रहा है, तो वहां की जमीन के दाम रातों-रात आसमान छू सकते हैं।

छिपी हुई लागत: प्रॉपर्टी खरीदते समय लोग अक्सर इसके अतिरिक्त खर्चों को भूल जाते हैं। स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन चार्ज, सालाना प्रॉपर्टी टैक्स और मेंटेनेंस का खर्च आपके कुल मुनाफे को काफी कम कर देता है। इसके अलावा, अगर होम लोन लिया है, तो ब्याज का भारी बोझ भी जोड़ना पड़ता है।

2- लिक्विडिटी: सबसे बड़ा और मुख्य अंतर

रियल एस्टेट और म्यूचुअल फंड के बीच सबसे बड़ा फर्क पैसे की जरूरत पड़ने पर दिखता है। प्रॉपर्टी को तुरंत बेचना नामुमकिन होता है। एक सही खरीदार ढूंढने, डील पक्की करने और कागजी कार्रवाई पूरी करने में हफ्तों या महीनों का समय लग जाता है। मंदी के दौर में तो यह इंतजार और लंबा हो सकता है।

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म्यूचुअल फंड्स में लिक्विडिटी का कोई झंझट नहीं होता। आप जब चाहें अपने फंड्स को ऑनलाइन रिडीम कर सकते हैं और कुछ ही दिनों में पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आ जाता है।

3- म्यूचुअल फंड्स क्यों बन रहे हैं आम लोगों की पहली पसंद?

म्यूचुअल फंड्स ने निवेश की पूरी प्रक्रिया को बहुत आसान और सुलभ बना दिया है। जहां प्रॉपर्टी खरीदने के लिए आपको एक साथ लाखों-करोड़ों रुपयों का इंतजाम करना पड़ता है या बड़ा लोन लेना पड़ता है, वहीं म्यूचुअल फंड में आप SIP के जरिए हर महीने महज ₹500 जैसी छोटी रकम से भी शुरुआत कर सकते हैं।

प्रॉपर्टी में निवेश करते समय आपका पूरा पैसा एक ही जगह ब्लॉक हो जाता है। इसके विपरीत, म्यूचुअल फंड आपका पैसा अलग-अलग कंपनियों और सेक्टर्स में लगाते हैं। इस डायवर्सिफिकेशन से रिस्क काफी कम हो जाता है।

4- वेल्थ क्रिएशन का ट्रैक रिकॉर्ड: कहां हुई ज्यादा कमाई?

इसका कोई एक तय जवाब नहीं है क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने क्या और कब खरीदा है।

रियल एस्टेट का गणित: एक बेहतरीन लोकेशन पर ली गई प्रॉपर्टी आपको रेंटल और कैपिटल एप्रिसिएशन यानी कीमत बढ़ना दोनों से तगड़ा रिटर्न दे सकती है। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि भारी उम्मीदों के बावजूद किसी इलाके में प्रॉपर्टी के दाम सालों तक एक ही जगह थमे रहते हैं।

म्यूचुअल फंड का गणित: शेयर बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव का असर म्यूचुअल फंड पर जरूर पड़ता है। लेकिन जो निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव की परवाह किए बिना अपनी एसआईपी जारी रखते हैं, उन्हें लंबे समय में कंपाउंडिंग यानी ब्याज पर ब्याज का जबरदस्त फायदा मिलता है, जो वेल्थ को कई गुना बढ़ा देता है।

आपके लिए क्या हो सकता है बेस्ट?

अक्सर लोग सोचते हैं कि रियल एस्टेट या म्यूचुअल फंड में से किसी एक को ही चुनना होगा। लेकिन असलियत में कई सफल निवेशक दोनों में पैसा लगाते हैं। प्रॉपर्टी जहां आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता और रेंटल इनकम देती है, वहीं म्यूचुअल फंड आपको लिक्विडिटी, डायवर्सिफिकेशन और तेजी से बढ़ने का मौका देते हैं।

निवेश करने से पहले यह न पूछें कि कौन सा एसेट क्लास बेहतर है, बल्कि यह देखें कि आपके वित्तीय लक्ष्य, आपकी जेब और आपकी जरूरत के हिसाब से आपके लिए कौन सा विकल्प सही बैठता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Emcure Pharma: नमिता थापर की कंपनी से 12 साल बाद बेन कैपिटल का एग्जिट, ₹352 करोड़ में बेचा हिस्सा; खरीदार कौन

प्राइवेट इक्विटी फर्म बेन कैपिटल ने 25 जून को NSE पर एक ब्लॉक डील में एमक्योर फार्मा में 1 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी। खरीदार HDFC स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस, एक्सिस म्यूचुअल फंड और आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड जैसे इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर रहे। बेन कैपिटल ने 12 साल पहले पहली बार एमक्योर फार्मा में निवेश किया था। अब यह इस दवा कंपनी में बची हुई पूरी हिस्सेदारी बेचकर एग्जिट कर गई है।

बेन कैपिटल ने एमक्योर फार्मा के 19.4 लाख शेयर 352 करोड़ रुपये में बेचे। ब्लॉक डील के डेटा के मुताबिक, ये शेयर औसतन 1,817 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर बेचे गए। दूसरी ओर HDFC स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस ने 130 करोड़ रुपये में 7.1 लाख शेयर खरीदे। आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड ने 47.5 करोड़ रुपये में 2.6 लाख शेयर खरीदे।

एक्सिस म्यूचुअल फंड ने भी 50 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। अन्य इंस्टीट्यूशनल खरीदारों में HSBC म्यूचुअल फंड, गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली और BNP पारिबा शामिल थे, जिन्होंने 25-25 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

जुलाई 2024 में लिस्ट हुई थी Emcure Pharma

एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड का नाता शार्क टैंक इंडिया में जज के तौर पर दिख चुकीं नमिता थापर से है। वह इसमें होल टाइम डायरेक्टर हैं। नमिता के पिता सतीश रमनलाल मेहता कंपनी के फाउंडर, CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। एमक्योर फार्मा जुलाई 2024 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,952.03 करोड़ रुपये का रहा था। कंपनी का मार्केट कैप 35600 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 1881.90 रुपये है।

एमक्योर फार्मा का शेयर एक साल में 40 प्रतिशत और 6 महीनों में 30 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुआ है। 2 सप्ताह में 12 प्रतिशत चढ़ा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 77.87 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

एमक्योर फार्मा का जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 1,467.70 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 233.70 करोड़ रुपये था। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 5,243.19 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 732.96 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।