RBI ने एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन केकी मिस्त्री का कार्यकाल 18 सितंबर तक बढ़ाया

आरबीआई ने एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में केकी मिस्त्री का कार्यकाल तीन महीने बढ़ाने की इजाजत दे दी है। एचडीएफसी बैंक ने 18 जून को यह जानकारी दी। मिस्त्री इस साल 18 सितंबर या तब तक अपने पद पर रहेंगे जब तक बैंक में रेगुलर पार्ट-टाइम चेयरमैन की नियुक्ति नहीं हो जाती। इनमें से जो पहले होगा, वह लागू माना जाएगा।

5 अगस्त को बैंक की एजीएम होगी

मनीकंट्रोल ने पहले खबर दी थी कि अंतरिम चेयरमैन के रूप में केकी मिस्त्री का कार्यकाल 90 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है। एचडीएफसी बैंक ने एक्सचेंजों को बताया था कि उसकी 32वीं एनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) इस साल 5 अगस्त को होगी। बैंक ने कहा था कि डिविडेंड का पेमेंट 6 अगस्त या उसके बाद कर दिया जाएगा।

नए चेयरमैन की तलाश हो रही है

HDFC Bank में नए नॉन-एग्जिक्यूटिव पार्ट-टाइम चेयरमैन की तलाश चल रही है। मनीकंट्रोल ने यह खबर भी दी थी कि आरबीआई ने बैंक को केकी मिस्त्री का कार्यकाल खत्म होने से पहले नए चेयरमैन की तलाश का काम तेज करने को कहा है। मिस्त्री का कार्यकाल 18 जून को खत्म हो रहा है।

चेयरमैन का पद खाली होने से काम पर असर

मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि आरबीआई को उम्मीद है कि नए चेयरमैन की तलाश का काम जून खत्म होने से पहले पूरा हो जाएगा। सूत्रों ने बताया कि आरबीआई का मानना है कि चेयरमैन का पद खाली होने से बैंक से से जुड़े अहम फैसलों में देरी हो सकती है।

आरबीआई बैंक के निरंतर संपर्क में है

केंद्रीय बैंक नए चेयरमैन की तलाश के काम की प्रगति पर नजर रखने के लिए निरंतर एचडीएफसी बैंक के बोर्ड के संपर्क में बना हुआ है। 18 मार्च को मिस्त्री को तब बैंक का पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया था, जब अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि पिछले दो सालों में बैंक में कामकाज के कुछ तरीकों से वह सहमत नहीं हैं।

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शेयर तेजी के साथ बंद 

एचडीएफसी बैंक देश का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है। इसका शेयर 18 जून को 1.49 फीसदी उछाल के साथ 798.55 रुपये पर बंद हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

₹89600 का भारी नुकसान! 30 की बजाय 45 की उम्र में SIP शुरू की तो लगेगा 546% का झटका, यूं डूबेगा ₹5 करोड़ का सपना

Investment Tips: जब बात वेल्थ क्रिएशन यानी अमीर बनने की आती है, तो पर्सनल फाइनेंस का एक सीधा और अचूक नियम काम करता है। आप हर महीने कितनी बड़ी रकम निवेश कर रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा मायने यह रखता है कि आप कितने लंबे समय तक निवेशित रहते हैं।

अक्सर युवा यह सोचकर निवेश टालते रहते हैं कि जब हाथ में बड़ी सैलरी आएगी या जब वे फाइनेंशियली पूरी तरह सेटल हो जाएंगे, तब शुरुआत करेंगे। लेकिन एक्सपर्ट्स कड़े शब्दों में आगाह करते हैं कि शुरुआत में की गई यह छोटी सी देरी भी आपके लॉन्ग-टर्म गोल्स पर बहुत भारी पड़ सकती है। सीधे शब्दों में कहें तो कंपाउंडिंग की ताकत का पूरा फायदा उठाने के लिए आपका जल्द से जल्द शुरुआत करना बेहद जरूरी है।

अगर आपका लक्ष्य 60 साल की उम्र तक ₹5 करोड़ का बड़ा फंड तैयार करना है, तो 30 साल की उम्र और 45 साल की उम्र में निवेश शुरू करने के बीच का अंतर आपको चौंका देगा।

उम्र 30 बनाम 45: रिटर्न पर 546% का आ जाएगा अंतर

अगर आप 60 साल की उम्र में ₹5 करोड़ का फंड चाहते हैं, तो उम्र के हिसाब से आपका गणित कुछ ऐसा होगा:

30 साल की उम्र में शुरुआत: अगर आप 30 साल की उम्र से निवेश शुरू करते हैं, तो आपको हर महीने केवल ₹16400 रुपये की SIP करनी होगी।

45 साल की उम्र में शुरुआत: अगर आप यही फैसला टालते रहते हैं और 45 साल की उम्र में शुरुआत करते हैं, तो उसी ₹5 करोड़ के लक्ष्य के लिए आपको हर महीने ₹1.06 लाख की SIP करनी होगी।

यानी सिर्फ 15 साल की देरी करने की वजह से आपको हर महीने ₹89600 रुपये ज्यादा जेब से निकालने होंगे। यह आपके मंथली कमिटमेंट में सीधे 546 फीसदी यानी करीब 6.5 गुना का बड़ा उछाल है।

30 साल के युवाओं के लिए सही एसेट एलोकेशन स्ट्रेटेजी

एक्सपर्ट्स के अनुसार, 30 साल के निवेशक को रिटर्न के पीछे भागने से पहले अपनी फाइनेंशियल नींव मजबूत करनी चाहिए। इसके लिए तीन कदम जरूरी हैं:

इमरजेंसी फंड: सबसे पहले कम से कम 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाएं।

इंश्योरेंस: पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस जरूर लें।

लॉन्ग टर्म SIP: ये बेसिक्स पूरे होने के बाद ही रिटायरमेंट के लिए लंबी अवधि की SIP शुरू करें।

चूंकि रिटायरमेंट में 30 साल का लंबा वक्त है, इसलिए शुरुआती सालों में इक्विटी को मुख्य ग्रोथ एसेट बनाना चाहिए। वहीं स्थिरता के लिए डेट फंड, प्रोविडेंट फंड (EPF/PPF), एनपीएस और गोल्ड का सहारा लिया जा सकता है। जैसे-जैसे आप रिटायरमेंट के करीब पहुंचें, पोर्टफोलियो को वेल्थ क्रिएशन से शिफ्ट करके कैपिटल प्रोटेक्शन की तरफ ले जाना चाहिए।

रिटायरमेंट गोल्स के लिए इक्विटी क्यों है बेहद जरूरी?

लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट गोल्स के लिए फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स अकेले टैक्स के बाद महंगाई को मात नहीं दे पाते। इसलिए इक्विटी का रोल बहुत अहम हो जाता है। हालांकि, इक्विटी को शॉर्ट-टर्म प्रोडक्ट नहीं समझना चाहिए। 30 साल के निवेशक को हर 6 महीने या 1 साल में इक्विटी के प्रदर्शन को जज नहीं करना चाहिए, बल्कि एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाकर समय-समय पर उसका रिव्यू करना चाहिए।

युवा निवेशक भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां

मार्केट करेक्शन में SIP रोकना: कई युवा मार्केट में गिरावट आते ही डरकर अपनी SIP रोक देते हैं। यह लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग के पूरे मकसद को खत्म कर देता है। मार्केट करेक्शन तो आपको सस्ते में ज्यादा म्यूचुअल फंड यूनिट्स बटोरने का मौका देता है।

लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन: सैलरी बढ़ने के साथ अगर आप अपनी SIP नहीं बढ़ाते, तो आप एक बड़ा मौका खो रहे हैं। इसका आसान समाधान है 10% की एनुअल स्टेप-अप SIP अपनाएं, जिससे हर साल आपकी निवेश राशि अपने आप बढ़ती रहे।

शॉर्ट-टर्म खर्चों के लिए फंड निकालना: लोग गैजेट्स खरीदने, गाड़ी अपग्रेड करने या वेकेशन पर जाने के लिए अपने रिटायरमेंट फंड को बीच में ही निकाल लेते हैं। यह गलती कभी न करें।

‘बाय एंड फॉर्गेट’ की मानसिकता: निवेश करके भूल जाना सही रणनीति नहीं है। एसेट एलोकेशन, टैक्स एफिशिएंसी और परफॉर्मेंस कंसिस्टेंसी के लिए पोर्टफोलियो का पीरियोडिक रिव्यू बेहद जरूरी है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bajaj Auto Buyback: ₹5633 करोड़ का शेयर बायबैक, 19% मिलेगा प्रीमियम; रिकॉर्ड डेट भी हुई तय

Bajaj Auto Buyback: दोपहिया और तिपहिया गाड़ी बनाने वाली Bajaj Auto ने अपने 5,633 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक के लिए 24 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट तय कर दी है। रिकॉर्ड डेट वही तारीख होती है, जिसके आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन-से शेयरधारक बायबैक ऑफर में हिस्सा लेने के पात्र होंगे।

कंपनी ने कहा है कि उसकी बायबैक कमेटी ने 24 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट के तौर पर मंजूरी दी है। इस तारीख तक जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, वे बायबैक में हिस्सा ले सकेंगे।

कितने शेयर वापस खरीदेगी कंपनी?

Bajaj Auto के बोर्ड ने 6 मई 2026 को बायबैक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद 18 जून 2026 को शेयरधारकों से भी मंजूरी मिल गई। बायबैक के तहत कंपनी 10 रुपये फेस वैल्यू वाले अधिकतम 46.94 लाख इक्विटी शेयर वापस खरीदेगी। इसके लिए कंपनी ने 12,000 रुपये प्रति शेयर का भाव तय किया है। निवेशकों को भुगतान कैश में किया जाएगा।

कंपनी का कुल बायबैक साइज 5,633 करोड़ रुपये तक होगा। हालांकि, इसमें ब्रोकरेज, टैक्स, फाइलिंग फीस, कानूनी सलाह, पब्लिकेशन और अन्य संबंधित खर्च शामिल नहीं हैं।

Bajaj Auto का बायबैक कैसे होगा?

Bajaj Auto अपने शेयर टेंडर ऑफर रूट के जरिए वापस खरीदेगी। भारत में फिलहाल शेयर बायबैक का यही सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है। टेंडर ऑफर रूट में कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों से पहले से तय कीमत पर शेयर खरीदती है। इस मामले में यह कीमत 12,000 रुपये प्रति शेयर है।

अगर आपके पास रिकॉर्ड डेट तक Bajaj Auto के शेयर हैं और आप पात्र निवेशकों की सूची में शामिल होते हैं, तो आप अपने शेयर कंपनी को बेचने के लिए ऑफर कर सकते हैं।

2024 के बायबैक से क्या अलग है?

Bajaj Auto ने इससे पहले 2024 में भी बायबैक किया था। उस समय कंपनी ने अपने कुल इक्विटी शेयरों का 1.41% हिस्सा 10,000 रुपये प्रति शेयर के भाव पर वापस खरीदा था।

मौजूदा बायबैक भी टेंडर ऑफर रूट के जरिए ही किया जा रहा है। हालांकि, इस बार कंपनी 12,000 रुपये प्रति शेयर का भाव दे रही है, जो पिछले बायबैक प्राइस से ज्यादा है।

कंपनी में किसके पास कितनी हिस्सेदारी?

Bajaj Auto के पास अब करीब 3 लाख रिटेल शेयरधारक हैं। रिटेल निवेशक वे होते हैं जिनकी अधिकृत शेयर पूंजी 2 लाख रुपये तक होती है। दिसंबर 2023 के अंत में कंपनी के पास 1.87 लाख रिटेल निवेशक थे। यानी पिछले ढाई साल में रिटेल निवेशकों की संख्या काफी बढ़ी है। हालांकि, उनकी हिस्सेदारी में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। दिसंबर 2023 में रिटेल निवेशकों के पास 5.43% हिस्सेदारी थी, जो अब बढ़कर 5.62% हो गई है।

मार्च 2026 तिमाही के अंत तक कंपनी के प्रमोटरों के पास 55% हिस्सेदारी थी। वहीं, म्यूचुअल फंड्स का भरोसा भी कंपनी पर बढ़ा है। पिछले दो साल में उनकी हिस्सेदारी 5.32% से बढ़कर 7.17% हो गई है।

शेयर का क्या रहा हाल?

Bajaj Auto का शेयर गुरुवार को मामूली बढ़त के साथ 10,088.50 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी ने बायबैक के लिए 12,000 रुपये प्रति शेयर का भाव तय किया है, जो मौजूदा बाजार कीमत से करीब 1,912 रुपये या लगभग 19% ज्यादा है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP vs PPF: 30 साल तक हर महीने ₹5000 निवेश, किसमें बनेगा ज्यादा फंड? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP vs PPF: अगर लंबी अवधि के निवेश की बात करें, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) सबसे लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हैं। दोनों का इस्तेमाल घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई, शादी, रिटायरमेंट या लंबी अवधि में संपत्ति बनाने जैसे बड़े वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

हालांकि, निवेश का फैसला करते समय सिर्फ रिटर्न नहीं देखना चाहिए। अपनी कमाई, जोखिम लेने की क्षमता और भविष्य के लक्ष्यों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई व्यक्ति 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये निवेश करे तो PPF और SIP में से कौन ज्यादा बड़ा फंड बना सकता है।

PPF में 30 साल तक 5,000 रुपये का निवेश

अगर PPF पर 7.1% सालाना ब्याज दर बनी रहती है और आप 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये निवेश करते हैं, तो मैच्योरिटी पर आपका कुल फंड करीब 61.80 लाख रुपये हो सकता है।

इस दौरान आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। वहीं, ब्याज के रूप में करीब 43.80 लाख रुपये मिल सकते हैं। यानी निवेश से कहीं ज्यादा रकम सिर्फ ब्याज से जुड़ सकती है। हालांकि, इस कैलकुलेशन में महंगाई का असर शामिल नहीं है।

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SIP में 30 साल तक 5,000 रुपये का निवेश

वहीं, अगर आप 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये की SIP करते हैं और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपका कुल फंड करीब 1.41 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। आमतौर पर माना जाता है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड 12% रिटर्न देते हैं। लेकिन, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।

इस दौरान आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। वहीं, करीब 1.23 करोड़ रुपये का फायदा रिटर्न के रूप में मिल सकता है। इस तरह कुल फंड 1.41 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है।

महंगाई को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

निवेश की योजना बनाते समय महंगाई को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। आज के 1 करोड़ रुपये की कीमत 30 साल बाद उतनी नहीं रहेगी। अगर SIP पर 12% रिटर्न मिले और महंगाई दर 6% मान ली जाए, तो 30 साल बाद आपके फंड की वास्तविक कीमत करीब 40.84 लाख रुपये रह जाएगी।

इसमें 18 लाख रुपये का निवेश और लगभग 22.84 लाख रुपये का वास्तविक रिटर्न शामिल होगा। यही वजह है कि निवेश का आकलन करते समय सिर्फ कुल फंड नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक खरीद क्षमता भी देखनी चाहिए।

SIP को क्यों पसंद करते हैं निवेशक?

  • SIP लंबी अवधि में वेल्थ बनाने का आसान तरीका माना जाता है। इसमें आप छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं।
  • म्यूचुअल फंड में SIP छह महीने से लेकर किसी भी अवधि के लिए शुरू की जा सकती है। इसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
  • SIP में ज्यादा रिटर्न की संभावना है। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स ने अच्छे रिटर्न दिए हैं। हालांकि, रिटर्न पूरी तरह बाजार पर निर्भर करता है।
  • SIP निवेश की आदत भी बनती है। बैंक से ऑटो-डेबिट सेट करने के बाद हर महीने तय रकम अपने आप निवेश हो जाती है।
  • SIP में रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का लाभ मिलता है। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान अलग-अलग कीमतों पर यूनिट्स खरीदने से लंबी अवधि में औसत खरीद लागत संतुलित रहती है।

इसके अलावा SIP में Systematic Withdrawal Plan (SWP) की सुविधा भी मिलती है। इसके जरिए निवेशक जरूरत पड़ने पर हर महीने एक तय रकम निकाल सकते हैं। इससे पूरे निवेश को एक साथ तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।

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PPF को क्यों चुनते हैं निवेशक?

  • PPF लंबे समय से सुरक्षित निवेश का पर्याय माना जाता है। यह केंद्र सरकार की गारंटी वाली बचत योजना है। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता।
  • PPF की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुरक्षा है। फिलहाल इस पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। सरकार हर तिमाही ब्याज दर की समीक्षा करती है।
  • टैक्स बचत के लिहाज से भी PPF काफी आकर्षक है। यह EEE कैटेगरी का निवेश है। यानी निवेश की रकम, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों टैक्स फ्री होती हैं।
  • पुराने टैक्स रिजीम में PPF में सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट भी मिलती है।
  • PPF खाते पर लोन की सुविधा भी उपलब्ध है। खाता खुलने के एक साल बाद जमा राशि के आधार पर लोन लिया जा सकता है। आमतौर पर खाते में मौजूद बैलेंस का 25% तक लोन मिलता है।

निकासी के मामले में भी कुछ सुविधाएं हैं। PPF में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। हालांकि, पांच साल बाद कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी की जा सकती है। मैच्योरिटी के बाद खाते को पांच-पांच साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

आखिर किसे चुनना चाहिए?

अगर आपकी पहली प्राथमिकता सुरक्षा है और आप गारंटीड रिटर्न चाहते हैं, तो PPF बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाना है और आप बाजार से जुड़े जोखिम उठा सकते हैं, तो SIP ज्यादा आकर्षक साबित हो सकती है।

यही वजह है कि कई वित्तीय सलाहकार दोनों में संतुलित निवेश की सलाह देते हैं। इससे एक तरफ PPF की सुरक्षा मिलती है, तो दूसरी तरफ SIP के जरिए ज्यादा रिटर्न और वेल्थ क्रिएशन की संभावना भी बनी रहती है।

ITR Filing 2026: कब तक भरना है ITR, देरी पर कितना लगेगा जुर्माना; जानिए हर एक डिटेल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

लगातार पांचवे दिन Sensex मजबूत, ₹3 लाख करोड़ बढ़ी दौलत, Indigo-Trent रहे टॉप गेनर

Share Market Rally: कच्चे तेल की फिसलन पर घरेलू स्टॉक मार्केट में आज लगातार पांचवे दिन रौनक रही। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो इंट्रा-डे में सेंसेक्स 300 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24200 के एकदम करीब पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर मिडकैप और स्मॉलकैप स्पेस में भी अच्छी रौनक रही और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 आधे फीसदी से थोड़ी ही कम बढ़त रही।

सेक्टरवाइज आईटी सेक्टर ने मार्केट पर काफी दबाव बनाने की काफी कोशिश की और इसका निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक कमजोर हुआ। हालांकि फार्मा, पीएसयू बैंक और रियल्टी सेक्टर ने इसे संभाल लिया जिनके निफ्टी इंडेक्स आधे-आधे फीसदी से अधिक मजबूत हुए। निफ्टी प्राइवेट बैंक भी आधा फीसदी मजबूत हुआ।

ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में ₹3 लाख करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ। इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज सेंसेक्स (Sensex) 254.36 प्वाइंट्स यानी 0.33% के उछाल के साथ 77,409.98 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 82.30 प्वाइंट्स यानी 0.34% की बढ़त के साथ 24,168.00 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स आज 336.71 प्वाइंट्स उछलकर 77,492.33 और निफ्टी 103.55 प्वाइंट्स चढ़कर 24,189.25 तक पहुंच गया।

₹3.10 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 17 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,74,58,056.752 करोड़ था। आज यानी 18 जून 2026 को यह उछलकर ₹4,77,68,135.83 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹3,10,079.078 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 20 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज 20 स्टॉक्स आज ग्रीन बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज इंडिगो, ट्रेंट और बीईएल में रही। वहीं दूसरी तरफ आज सेंसेक्स पर सबसे अधिक गिरावट इंफोसिस, टेक महिंद्रा और मारुति में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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162 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4419 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2419 शेयर मजबूत हुए तो 1814 में गिरावट रही जबकि 186 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 162 शेयर एक साल के हाई और 46 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 7 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 7 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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US Fed ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, लेकिन एक खास सिग्नल पर ट्रंप ने कहा- यकीन करना मुश्किल 

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ITR Filing 2026: कब तक भरना है ITR, देरी पर कितना लगेगा जुर्माना; जानिए हर एक डिटेल

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग का सीजन शुरू हो चुका है। टैक्सपेयर्स लगातार AY 2026-27 की डेडलाइन सर्च कर रहे हैं। असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27, फाइनेंशियल ईयर (FY) 2025-26 की कमाई से जुड़ा है। ऐसे में हर टैक्सपेयर के लिए यह जानना जरूरी है कि उसे कब तक ITR फाइल करना है। तय समयसीमा चूकने पर लेट फीस, ब्याज और दूसरी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

AY 2026-27 के लिए ITR फाइलिंग की डेडलाइन

इनकम टैक्स विभाग ने अलग-अलग तरह के टैक्सपेयर्स के लिए अलग-अलग डेडलाइन तय की हैं।

टैक्सपेयर की कैटेगरीआखिरी तारीख
ITR-1 या ITR-2 भरने वाले व्यक्ति और HUF (ऑडिट नहीं)31 जुलाई 2026
ITR-3 या ITR-4 भरने वाले बिजनेस और प्रोफेशनल टैक्सपेयर (ऑडिट नहीं)31 अगस्त 2026
जिनके खातों का ऑडिट जरूरी है31 अक्टूबर 2026
ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों के दायरे में आने वाले टैक्सपेयर30 नवंबर 2026
बिलेटेड रिटर्न31 दिसंबर 2026
रिवाइज्ड रिटर्न31 मार्च 2027

इस बार एक अहम बदलाव भी हुआ है। ITR-3 और ITR-4 भरने वाले नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स को अब 31 जुलाई की जगह 31 अगस्त 2026 तक रिटर्न दाखिल करने का समय मिलेगा।

डेडलाइन छूट गई तो क्या होगा?

अगर आप तय तारीख तक ITR फाइल नहीं कर पाते हैं तो भी रिटर्न दाखिल करने का मौका खत्म नहीं होता। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न भर सकते हैं। हालांकि, इसके कुछ नुकसान हो सकते हैं।

सबसे पहले आपको लेट फाइलिंग फीस देनी पड़ सकती है। अगर कोई टैक्स बकाया है तो उस पर ब्याज भी लगेगा। कुछ नुकसान (Losses) को अगले सालों में कैरी फॉरवर्ड करने की सहूलियत भी नहीं मिलेगी। कई मामलों में टैक्स रिफंड मिलने में भी देरी हो जाती है।

समय पर ITR भरने के फायदे

समय पर ITR फाइल करना सिर्फ नियमों का पालन भर नहीं है, बल्कि इसके कई व्यावहारिक फायदे भी हैं। समय पर रिटर्न भरने से टैक्स रिफंड जल्दी मिलता है।

अगर आपको भविष्य में होम लोन, पर्सनल लोन या किसी अन्य तरह की क्रेडिट सुविधा लेनी है तो ITR अहम दस्तावेज माना जाता है। वीजा और इमिग्रेशन से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी ITR काम आता है। समय पर फाइलिंग करने से टैक्स विभाग की ओर से नोटिस या पेनाल्टी का जोखिम भी कम हो जाता है।

ITR भरने से पहले ये बातें जरूर जांच लें

रिटर्न फाइल करने से पहले कुछ जरूरी चीजों को चेक कर लेना चाहिए ताकि बाद में कोई गलती न हो।

सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपने सही ITR फॉर्म चुना है। इसके बाद Form 26AS, AIS और प्री-फिल्ड डेटा का मिलान करें। अपनी आय के सभी स्रोतों की सही जानकारी दें और बैंक अकाउंट डिटेल्स को दोबारा जांच लें।

सिर्फ उन्हीं डिडक्शन और छूट का दावा करें जिनके लिए आप वास्तव में पात्र हैं। रिटर्न जमा करने से पहले पूरी जानकारी ध्यान से पढ़ें और फाइलिंग के बाद ई-वेरिफिकेशन करना बिल्कुल न भूलें।

लेट फाइलिंग पर कितना जुर्माना?

डेडलाइन चूकने पर सेक्शन 234F के तहत लेट फाइलिंग फीस लग सकती है। अगर आपकी कुल सालाना आय 5 लाख रुपये से ज्यादा है तो अधिकतम 5,000 रुपये तक की फीस देनी पड़ सकती है। वहीं, अगर आपकी कुल आय 5 लाख रुपये या उससे कम है तो अधिकतम 1,000 रुपये की फीस लग सकती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह फीस तब भी देनी होगी, जब आप बाद में तय समयसीमा के भीतर बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर दें।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trading Strategy : निफ्टी-बैंक निफ्टी के लॉन्ग सौदों में बने रहें, सपोर्ट के पास आने पर और पोजीशन जोड़ें

Trading Strategy : बैंकिंग शेयरों के दम पर बाजार में लगातार पांचवें दिन तेजी का मोमेंटम बना हुआ। निफ्टी हल्की बढ़त के साथ 24100 के ऊपर टिका हुआ है। HDFC BANK, ICICI BANK ने बाजार में जोश भरा है। बैंक निफ्टी में 300 अंकों से ज्यादा का उछाल देखने को मिला है। मिडकैप और स्मॉलकैप में भी रौनक है। वहीं, वोलैटीलिटी इंडेक्स INDIA VIX 3% फिसलकर 13 पर आ गया है।

आज सरकारी बैंक,रियल्टी और कैपिटल मार्केट शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी है। तीनों सेक्टर इंडेक्स करीब एक फीसदी चढ़े हैं। कैपिटल मार्केट इंडेक्स में 5% से ज्यादा की तेजी के साथ CDSL वायदा के टॉप गेनर्स में शामिल है। हालांकि एक्सेंचर के नतीजों से पहले IT शेयरों में आज तेज बिकवाली आई है। साथ ही मेटल और तेल-गैस शेयरों में हल्का दबाव है।

बाजार: रेंज वाला दिन

बाजार की आगे की चाल पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी रेंज में है,लेकिन सपोर्ट और रजिस्टेंस के बीच ही घूम रहा है। ठीक खरीदारी के जोन से आज फिर रिकवरी आई। बैंक निफ्टी में पहला एग्रेसिव टारगेट 58,000 लगभग हिट हुआ है। इसके बाद अगला एग्रेसिव टारगेट 60,000 का है। मिडकैप और स्मॉलकैप में फिर अच्छी तेजी आई है। सिर्फ लार्जकैप IT शेयरों में एक बार फिर रैली फेल होती दिखी है। चुनिंदा कैपिटल मार्केट शेयरों में तेजी है।

बाजार: अब आगे क्या?

हमारी रणनीति वही रहेगी जो कुछ समय से है। निफ्टी और बैंक निफ्टी के लॉन्ग सौदों में बने रहें। मंथ एंड कॉल्स में बने रहें और सपोर्ट में पोजीशन जोड़ें। हर रैली पर अपना SL ऊपर लेते रहें। जरूरी नहीं कि आपको दोनों तरफ के हर मूव पकड़ने हैं। धीरे-धीरे करेंसी भी सुधर रही है। इंडिया VIX भी अब कम्फर्ट जोन में आ चुका है। PCR अभी भी ओवरबॉट नहीं है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अब भी काफी मौके हैं।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 24,000-24,050 पर सपोर्ट और 24,200-24,250 पर रेजिस्टेंस है। बैंक निफ्टी पर रणनीति साझा करते हुए अनुज सिंघल ने कहा कि अब अपने ट्रेलिंग SL को 57,500 पर ले आएं। 58,000 के ऊपर टिका तो 58,500 और 59,000 अगले लक्ष्य होंगे। पूरी सीरीज के लिए 60,000 का एग्रेसिव लक्ष्य बरकरार है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Max Healthcare Share Price: 6% उछलकर निफ्टी का टॉप गेनर बना शेयर, सिटी हुआ बुलिश, दिया ‌₹1,240 का टारगेट प्राइस

Max Healthcare Share Price: हेल्थकेयर सेक्टर की दिग्गज कंपनी मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट (Max Healthcare) के शेयर गुरुवार 18 जून को 6 फीसदी की तेजी देखने को मिली और यह निफ्टी 50 पर टॉप गेनर बना। दोपहर के ट्रेड में मैक्स हेल्थकेयर का स्टॉक 1,088 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जिससे हॉस्पिटल ऑपरेटर की वैल्यू लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपये हो गई। यह रैली बड़े मार्केट से काफी आगे निकल गई, उस समय निफ्टी 50 0.12 फीसदी की तेजी दिखा रहा था।

बता दें कि सिटी ने पिछले साल स्टॉक में करेक्शन के बाद एक फेवरेबल रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल पर जोर दिया और अगले कई सालों में मजबूत अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान लगाया। सिटी ने मैक्स हेल्थकेयर स्टॉक पर 1,240 रुपये प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ अपनी ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी। ब्रोकरेज ने कहा कि पिछले साल स्टॉक में लगभग 18 फीसदी की गिरावट आई है, जिससे वैल्यूएशन हिस्टोरिकल एवरेज पर वापस आ गए हैं।

सिटी के मुताबिक, वैल्यूएशन करेक्शन से स्टॉक का अट्रैक्शन बेहतर हुआ है, ऐसे समय में जब कंपनी मीडियम-टर्म में मज़बूत ग्रोथ प्रोफाइल दे रही है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि मैक्स हेल्थकेयर FY26 और FY30 के बीच 20 परसेंट EBITDA कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देगी, जिसे कैपेसिटी बढ़ाने और इसके हॉस्पिटल नेटवर्क में ग्रोथ से सपोर्ट मिलेगा।

सिटी को FY27 में लगभग 15 फीसदी रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद है और कहा कि FY28 में ग्रोथ और तेज़ हो सकती है क्योंकि एक्सपेंशन के काम ज़्यादा असरदार तरीके से होने लगेंगे। हालांकि, ब्रोकरेज ने एग्ज़िक्यूशन में देरी को एक बड़ा रिस्क बताया है जो ग्रोथ की रफ़्तार पर असर डाल सकता है।

मैक्स हेल्थकेयर के अपने फिस्कल चौथी तिमाही के रिज़ल्ट बताने के कुछ हफ़्ते बाद ब्रोकरेज की यह पॉज़िटिव कमेंट्री आई है। कंपनी ने Q4 FY26 के लिए नेट प्रॉफ़िट में साल-दर-साल 3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 387 करोड़ रुपये पोस्ट किया, जबकि रेवेन्यू 10 फीसदी बढ़कर 2,664 करोड़ रुपये हो गया।

रेवेन्यू ग्रोथ मुख्य रूप से ज़्यादा पेशेंट थ्रूपुट की वजह से हुई, जिसमें एक साल पहले की तुलना में ऑक्यूपाइड बेड डेज़ में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। पूरे नेटवर्क में बेड ऑक्यूपेंसी 75 फीसदी पर स्थिर रही, जो हेल्थकेयर सर्विसेज़ की लगातार डिमांड को दिखाता है।

हालांकि, एनालिस्ट्स ने अर्निंग्स परफॉर्मेंस को मिला-जुला माना। वॉल्यूम ग्रोथ अच्छी रही, लेकिन एग्रेसिव हायरिंग और चल रही कैपेसिटी बढ़ाने की वजह से मार्जिन पर दबाव आया। नतीजों के बाद स्टॉक में गिरावट आई थी क्योंकि अर्निंग्स एनालिस्ट्स के अनुमान से कम रही थीं।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ के एनालिस्ट्स ने अर्निंग्स मिस का कारण ज़्यादातर ज़्यादा टैक्स रेट बताया था, हालांकि ब्रोकरेज ने कहा कि ऑपरेटिंग ट्रेंड्स मोटे तौर पर स्थिर रहे।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

India-UK FTA : यूनाइटेड स्पिरिट्स,तिलकनगर और शराब बनाने वाली दूसरी कंपनियों के शेयरों को लगे पंख, USL पर जेपी मॉर्गन भी बुलिश

India-UK FTA : UK के साथ FTA लागू होने की खबर से यूनाइटेड स्पिरिट्स बाजार के फोकस में बना हुआ है। आज यह शेयर करीब 4 फीसदी चढ़कर वायदा के टाप गेनर्स में शामिल है। कंपनी पर आज जेपी मॉर्गन ने भी रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट से भी स्टॉक को सपोर्ट मिला है। इस बीच ISWAI (इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने कहा कि UK से स्कॉच व्हिस्की के इंपोर्ट पर टैरिफ घटने (जिसमें भारत में ब्लेंडिंग और बॉटलिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली बल्क स्कॉच भी शामिल है) से स्पिरिट्स सप्लाई चेन में वैल्यू ग्रोथ और प्रीमियम इंटरनेशनल ब्रांड्स तक कंज्यूमर्स की पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।

इस खबर के चलते 18 जून को शराब बनाने वाली सभी बड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़त देखने को मिली। इंडस्ट्री बॉडी ने भी भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) लागू होने का स्वागत किया है। इस इंडस्ट्री की जानकारी रखने वाले लोगों के उम्मीद है कि इस समझौते से स्कॉच व्हिस्की के इंपोर्ट पर टैरिफ कम होगा और घरेलू स्पिरिट्स मार्केट में प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ेगी।

आज के कारोबारी सेशन में तेजी दिखाने वाली कंपनियों में यूनाइटेड स्पिरिट्स 3.98% बढ़कर ₹1,361.50 पर,तिलकनगर इंडस्ट्रीज 3.3% बढ़कर ₹443 पर, एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रुअरीज 2.1% बढ़कर ₹843.95 पर,पिकाडिली एग्रो 1.5% बढ़कर ₹588 पर और रैडिको खेतान 1.3% बढ़कर ₹3,619 पर जाते दिखे हैं।

JPMorgan की एक पॉजिटिव टिप्पणी से यूनाइटेड स्पिरिट्स को लेकर निवेशकों का भरोसा और बढ़ा है। ब्रोकरेज ने इस स्टॉक पर “ओवरवेट” रेटिंग बनाए रखी है और इसका टारगेट प्राइस 1,510 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी का FY27 का ग्रोथ आउटलुक काफी अ्चछा बना हुआ है। ब्रोकरेज को डबल-डिजिट P&A ग्रोथ की उम्मीद है। उसका मानना है कि मैकडॉवेल्स रिफ्रेश जैसे प्रोडक्ट को नया रूप देने की पहल का कंपनी को फायदा मिलेगा। वोदका में इनोवेशन,टकीला में नई कैटेगरी बनाने और UK FTA से कंपनी का फायदा होगा।

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जेपी मॉर्गन ने यह भी कहा कि कंपनी के लिए साल की दूसरी छमाही बेहतर रह सकती है, क्योंकि महाराष्ट्र का असर अब खत्म हो रहा है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि धीरे-धीरे मार्जिन में सुधार आएगा,इससे कंपनी की कमाई बढ़ाने में मदद मिलेगी। हालांकि पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स की बढ़ी लागत की वजह से ग्रॉस मार्जिन पर कुछ समय के लिए दबाव बना रह रह सकता। ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि ब्रांड की पहचान मजबूत करने की कोशिशों को बढ़ावा देने के लिए विज्ञापन और प्रमोशन पर ज्यादा खर्च हो सकता है।

उधर भारत-UK ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने पर इंडस्ट्री बॉडीज़ की अच्छी प्रतिक्रिया के बाद इस सेक्टर को लेकर अच्छा माहौल बना है। इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISWAI) ने कहा कि यह एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच व्यापार को मज़बूत करेगा,इंडस्ट्री की ग्रोथ में मदद करेगा और भारत के अल्कोहलिक बेवरेज सेक्टर के लिए नए मौके पैदा करेगा।

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