बच्चे की परवरिश पर 1.39 करोड़ रुपये का दावा कर फंसे इन्फ्लुएंसर, लोगों ने लगा दी क्लास

क्या भारत में एक बच्चे की परवरिश पर करोड़ों रुपये खर्च हो सकते हैं? सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इसी सवाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक कंटेंट क्रिएटर ने बच्चे की परवरिश का अनुमानित खर्च बताते हुए दावा किया कि माता-पिता को जन्म से लेकर 18 साल की उम्र तक बड़ी रकम खर्च करनी पड़ सकती है। हालांकि, उनके आंकड़ों से ज्यादा लोगों का ध्यान उस तुलना ने खींचा, जिसमें उन्होंने पैरेंटहुड की तुलना एक लग्जरी कार खरीदने से कर दी।

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ यूजर्स ने इसे व्यावहारिक गणना बताया, जबकि कई लोगों ने इस सोच को गलत और भावनाओं से परे करार दिया। आखिर इस वीडियो में ऐसा क्या कहा गया कि इंटरनेट पर बहस छिड़ गई और लोग दो हिस्सों में बंट गए? जानिए पूरा मामला।

क्यों चुना ‘Child-Free’ रहने का फैसला?

करीब 2.88 लाख फॉलोअर्स वाले विख्यात ने बताया कि उन्होंने खुद माता-पिता न बनने का फैसला किया है। उनका कहना है कि उन्होंने बच्चे की परवरिश से जुड़े संभावित खर्चों का आकलन किया और इसी आधार पर अपनी सोच लोगों के सामने रखी।

गर्भावस्था से शुरू किया पूरा हिसाब

विख्यात ने सबसे पहले गर्भावस्था और डिलीवरी के खर्च का अनुमान लगाया। डॉक्टर की फीस, जांच, दवाइयां, मैटरनिटी कपड़े और निजी अस्पताल में डिलीवरी को मिलाकर उन्होंने करीब 3 लाख रुपये का खर्च बताया। इसके बाद उन्होंने बच्चे के शुरुआती दो साल में डायपर, दूध, टीकाकरण, खिलौने, किताबें, स्ट्रोलर, पालना और अन्य जरूरी सामान पर करीब 6 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया।

पढ़ाई बनी सबसे महंगी जिम्मेदारी

उनके अनुसार बच्चे की शिक्षा सबसे बड़ा खर्च है। प्री-स्कूल से लेकर स्कूल फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और स्कूल एक्टिविटीज को जोड़ते हुए उन्होंने करीब 33 लाख रुपये का अनुमान लगाया। उनका कहना था कि यह आंकड़ा दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के औसत खर्च के निचले स्तर को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

खाने से गैजेट्स तक, हर चीज का लगाया हिसाब

विख्यात ने 2 से 18 साल की उम्र तक खाने पर 15 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया। इसके अलावा ट्यूशन पर 9 लाख, इलाज और हेल्थकेयर पर 5.4 लाख, मनोरंजन पर 9 लाख, कपड़ों पर 7.2 लाख, गैजेट्स पर 4 लाख, खेल और अन्य गतिविधियों पर 8 लाख और ट्रांसपोर्ट पर भी करीब 8 लाख रुपये जोड़े।

बड़े घर का किराया भी जोड़ा

उन्होंने दावा किया कि बच्चे के लिए अतिरिक्त कमरे की जरूरत पड़ने पर बड़े घर का किराया भी बड़ा खर्च बन जाता है। इसी वजह से उन्होंने 18 साल में अतिरिक्त किराए के रूप में 32.4 लाख रुपये का अनुमान शामिल किया। विख्यात का कहना था कि इस हिसाब में कॉलेज की पढ़ाई, महंगाई और निवेश से मिलने वाले संभावित रिटर्न को शामिल नहीं किया गया है। यानी वास्तविक खर्च इससे भी ज्यादा हो सकता है।

BMW से तुलना ने भड़का दिया इंटरनेट

अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने कहा कि बच्चे की परवरिश पर इतना पैसा खर्च करने के बजाय कोई व्यक्ति लगभग उसी रकम में BMW M4 Competition जैसी लग्जरी स्पोर्ट्स कार खरीद सकता है। यही तुलना लोगों को पसंद नहीं आई और वीडियो देखते ही सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।

किसी ने कहा ‘गलत तुलना’, तो किसी ने बताया ‘बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया’

वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने उनके खर्च के अनुमान पर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने कहा कि बच्चे की परवरिश का खर्च हर परिवार के लिए अलग होता है और 1.39 करोड़ का आंकड़ा वास्तविकता से काफी दूर है। एक यूजर ने लिखा कि उसने अपने घर में छोटे बच्चे की परवरिश देखी है और इतना खर्च कभी नहीं हुआ।

‘बच्चे की मुस्कान की कोई कीमत नहीं’

कई लोगों ने इस बहस में भावनात्मक पक्ष भी रखा। एक यूजर ने लिखा कि उसके छह महीने के बेटे की एक मुस्कान किसी भी रकम से ज्यादा कीमती है और बच्चों की परवरिश को सिर्फ पैसों के तराजू में नहीं तौला जा सकता।

सोशल मीडिया पर जमकर हुई आलोचना

कई यूजर्स ने इन्फ्लुएंसर की सोच की आलोचना करते हुए कहा कि बच्चों की तुलना किसी लग्जरी कार से करना गलत है। कुछ लोगों ने इसे “बेकार तुलना” बताया, तो कुछ ने ऐसे कंटेंट पर सवाल उठाते हुए कहा कि पैरेंटहुड सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि भावनाओं, जिम्मेदारियों और खुशियों का भी नाम है।

बड़ा धमाका! अब यूपी के भाजपा नेता की बेटी ने किया CJP का समर्थन, जानिए कौन हैं यशस्विनी राजे सिंह?

Yashasvini Raje Singh Support CJP

Yashasvini Raje Singh Support CJP: नीट धांधली को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के शांत होते ही एक बड़े राजनीतिक भूचाल ने दस्तक दे दी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हुए प्रदर्शन का सत्तारूढ़ भाजपा के ही एक बड़े नेता की बेटी ने खुलकर समर्थन किया है। पेशे से कंटेंट क्रिएटर यशस्विनी राजे सिंह ने न सिर्फ अपनी ही सरकार के नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का भी सरेआम मजाक उड़ाया है।

 

यूपी के फतेहपुर सदर से पूर्व बीजेपी विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी ने सीजेपी का समर्थन करते हुए सीधे केंद्र सरकार की नीतियों पर हमला बोला है। 'अल जजीरा' को दिए इंटरव्यू में यशस्विनी ने प्रह्लाद जोशी को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाए जाने के फैसले पर तीखा तंज कसते हुए इसे 'एक बेहद भद्दा मजाक' करार दिया। ALSO READ: धमकी के बाद छिपकर रहे थे दीपके के माता-पिता, CJP नए आंदोलन की तैयारी में

 

पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को बताया 'शहादत का ड्रामा'

नीट परीक्षा विवाद के बाद 25 जुलाई को जब धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया, तो यशस्विनी ने उनके पत्र की धज्जियां उड़ा दीं। यशस्विनी ने कहा कि इस्तीफे की भाषा देखकर बिल्कुल नहीं लगता कि धर्मेंद्र प्रधान को अपने किए पर जरा भी पछतावा है या वे अपनी गलती मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि पत्र की भाषा ऐसी है जैसे कोई खुद को 'शहीद' साबित करने की कोशिश कर रहा हो। 
 

गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा था कि वे छात्रों के नुकसान को रोकने और 'राष्ट्रविरोधी ताकतों' से देश को बचाने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। ALSO READ: CJP Effect! शिक्षकों की कमी, टूटी बेंचों और खराब शौचालयों को लेकर कई राज्यों में सड़कों पर उतरे स्कूली छात्र

परिवार और पिता की राजनीति से पूरी तरह बनाई दूरी

बीजेपी नेता की बेटी होने के बावजूद यशस्विनी का यह रुख हर किसी को हैरान कर रहा है। हालांकि, यशस्विनी ने साफ किया कि वे पिछले साढ़े तीन सालों से अपने परिवार से अलग रह रही हैं। वे अपने पिता से राजनीति पर कोई बात नहीं करतीं और सालों से उनके निर्वाचन क्षेत्र भी नहीं गई हैं। यशस्विनी के मुताबिक, इसी आजादी और दूरी की वजह से वे बिना किसी पाखंड या डर के अपनी बात बेबाकी से रख पाती हैं।

कौन हैं यशस्विनी?

यशस्विनी राजे सिंह पेशे से एक कंटेंट क्रिएटर हैं। वे उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सदर विधानसभा सीट से भाजपा के पूर्व विधायक विक्रम सिंह की बेटी हैं। सिंह भाजपा के टिकट पर दो बार विधायक रह चुके हैं। यशस्विनी पिछले साढ़े तीन साल से अपने परिवार से अलग रहकर स्वतंत्र जीवन जी रही हैं और उन्होंने CJP के तहत जंतर-मंतर पर हुए नीट आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया है। ALSO READ: NEET विवाद, CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी, छात्रों के उत्पीड़न का लगाया आरोप

 

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी भाजपा नेताओं, यहां तक कि वर्तमान सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन राहड़ ने भी सीजेपी प्रोटेस्ट का समर्थन किया था। अर्चिता ने इंस्टाग्राम पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जश्न मनाते हुए स्टोरी पोस्ट की और लिखा- “पूरा भाजपा परिवार और मेरे संबंधी डीपी (धर्मेंद्र प्रधान) के साथ हैं, लेकिन मैं छात्रों के साथ हूं।

 

जब उनकी पोस्ट हटाने को लेकर दबाव बनाने के दावे सोशल मीडिया पर चले, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया कि वे अपनी पोस्ट डिलीट नहीं करेंगी। इनके साथ ही असम सरकार में कैबिनेट मंत्री और एनडीए के सहयोगी दल असम गण परिषद के वरिष्ठ नेता केशव महंता की बेटी दिबिसा महंता ने भी सीजेपी का समर्थन किया था। 

15 महीने में मिलीं 3 प्रमोशन! युवा कर्मचारी ने बताए ऑफिस में सम्मान पाने के 3 सीक्रेट

ऑफिस में पहचान और सम्मान हासिल करना हर कर्मचारी का सपना होता है, लेकिन इसके लिए सिर्फ लंबा अनुभव या बड़ा पद जरूरी नहीं होता। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कंटेंट क्रिएटर मारीज ने ऐसी ही कुछ छोटी-छोटी आदतों के बारे में बताया है, जो किसी भी प्रोफेशनल की छवि को बेहतर बना सकती हैं। मारीज के अनुसार, सही तरीके से बातचीत करना, जिम्मेदारी को समझना और अपने काम में भरोसा दिखाना ही असली अंतर पैदा करता है।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे कुछ व्यवहारिक बदलावों ने उन्हें कम समय में आगे बढ़ने में मदद की। उनका वीडियो युवाओं के बीच तेजी से पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इसमें करियर ग्रोथ और ऑफिस में सम्मान पाने से जुड़े आसान लेकिन असरदार टिप्स बताए गए हैं।

मैनेजर के सवाल का जवाब देने से पहले करें ये छोटा सा काम

मारीज के मुताबिक, जब कोई मैनेजर सवाल पूछे तो तुरंत जवाब देने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि जवाब देने से पहले सिर्फ दो सेकंड का छोटा ब्रेक लें। उनके अनुसार, यह छोटा सा ठहराव व्यक्ति को ज्यादा आत्मविश्वासी, शांत और समझदार दिखाता है। बिना सोचे तुरंत बोलने से गलतियां होने की संभावना बढ़ सकती है।

काम मिलने पर तुरंत हांकहने से बचें

उनकी दूसरी सलाह है कि कोई नया काम मिलने पर तुरंत “हां” बोलने के बजाय पहले उसे दोहराकर समझ लें। जैसे- काम क्या है, उसकी डेडलाइन क्या है और आखिर में किस तरह का रिजल्ट चाहिए। इससे मैनेजर को भरोसा होता है कि कर्मचारी ने जिम्मेदारी को सही तरीके से समझ लिया है।

काम पूरा करके गायब न हों, अपनी वैल्यू दिखाएं

मारीज का तीसरा और सबसे अहम सुझाव है कि काम खत्म करने के बाद सिर्फ रिपोर्ट जमा करके चुप न हो जाएं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी को यह भी बताना चाहिए कि इस काम से उसने क्या सीखा, कौन-सी नई स्किल हासिल की या आगे इसे और बेहतर कैसे किया जा सकता है। इससे मैनेजर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

सम्मान पद से नहीं, भरोसे से मिलता है

मारीज ने वीडियो के अंत में कहा कि ऑफिस में असली सम्मान उस व्यक्ति को मिलता है जिस पर लोग भरोसा कर सकें। उनका मानना है कि रोजमर्रा के छोटे-छोटे व्यवहार ही किसी कर्मचारी की पहचान बनाते हैं। सोशल मीडिया यूजर्स भी उनकी इन बातों को पसंद कर रहे हैं और कई लोग इन्हें नए कर्मचारियों के लिए उपयोगी सलाह बता रहे हैं।

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Apoorva Mukhija: टीवी सीरियल में हमला हो गया हो? अपूर्वा मुखीजा ने शिवांगी जोशी को जमकर किया रोस्ट

Apoorva Mukhija: टीवी शो ‘बड़े अच्छे लगते हैं 4’ में हर्षद चोपड़ा और शिवांगी जोशी की केमिस्ट्री ने लोगों का दिल जीत लिया था। अब, रियलिटी शो ‘लॉक अप: सच या सज़ा’ में उनकी बॉन्डिंग को देखकर फैंस के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वे एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। जहां कुछ लोगों का मानना ​​है कि उनके बीच दोस्ती से बढ़कर कुछ है, वहीं कुछ का कहना है कि वे अभी भी “अपने किरदारों में ही खोए हुए हैं” और असल ज़िंदगी में जैसे हैं, वैसे नहीं दिख रहे हैं। हाल ही में आए एपिसोड में अपूर्वा मुखिजा ने भी कुछ ऐसा ही कहा। उन्होंने कहा कि वे “किसी डेली सोप में फंसे हुए” लग रहे थे, और कई फैंस उनकी इस बात से सहमत भी दिखे।

लॉक अप के नवीनतम एपिसोड में, घरवालों को एक टास्क में एक-दूसरे के खिलाफ कॉम्पीटीशन करके नामांकन से बचने का मौका मिला। शिवंगी ने हर्षद का सामना किया और जीत हासिल करके खुद को एलिमिनेशन से बचा लिया। इसके बाद, उन्हें हर्षद से माफी मांगते और उसे हराने पर रोते हुए देखा गया। इस सीन को देखते हुए अपूर्वा ने कमेंट किया, “क्या हो गया आपको? आप दोनों किसी टीवी सीरियल में फंस गए हो क्या? यह एक खेल है, और फिर तो साफ दिख रहा है कि आप दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं।”

अपना बचाव करते हुए शिवांगी ने कहा, “मैं ऐसी ही हूं और मैं खुद को ऐसे ही जाहिर करती हूं। मुझे पता है कि यह एक गेम है, लेकिन मैं एक संवेदनशील इंसान हूं। उसके साथ मेरा एक अलग रिश्ता है और मैं बहुत इमोशनल हूं। मुझे बुरा लगा, और शायद आपने ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब सूफी भी हार गई थी, तब मेरी आंखों में आंसू थे।”

यह पल तेजी से वायरल हो गया और कई फ़ैन्स अपूर्वा के साथ खड़े नजर आए। एक यूज़र ने कमेंट किया, “टीवी सीरियल अपने पीक पर है।” दूसरे ने लिखा, “इसे फिर से करो, अपूर्वा।” तीसरे ने कमेंट किया, “अपूर्वा हम सभी का प्रतिनिधित्व कर रही है।” एक और फ़ैन ने लिखा, “रेबेल किड ने शिवांगी और हर्षद की ज़बरदस्त क्लास लगाई,” जबकि एक ने बस इतना कहा, “अपूर्वा तो बस अपूर्वा ही है।”

अपूर्वा एक हफ़्ते के लिए ‘लॉक अप’ में एक इन्फ़ॉर्मर के तौर पर आई थीं। इस कंटेंट क्रिएटर और एक्टर ने घर में आते ही हंगामा मचा दिया। उन्होंने शिवांगी को बताया कि शिल्पा शिंदे ने कथित तौर पर उनके अफ़ेयर्स के बारे में बात करके उन्हें ‘स्लट-शेम’ किया था, जिसके बाद शिवांगी और शिल्पा के बीच ज़बरदस्त झगड़ा हुआ। उन्होंने दूसरे कंटेस्टेंट्स के सामने राम कपूर के गेमप्ले का भी पर्दाफ़ाश किया और उन्हें ‘मैनिपुलेटर’ (दूसरों को अपने हिसाब से चलाने वाला) कहा।

आज के ‘जजमेंट डे’ पर ‘लॉक अप’ से एक कंटेस्टेंट बाहर हो जाएगा। इस एपिसोड में शिल्पा शिंदे और हिना खान के बीच ‘बिग बॉस’ वाली मशहूर दुश्मनी भी फिर से देखने को मिलेगी, क्योंकि हिना, उर्फी जावेद के साथ ‘जनता की आवाज़’ बनकर शो में एंट्री करेंगी। फराह खान और रितेश देशमुख द्वारा होस्ट किया जाने वाला ‘लॉक अप’ शो शनिवार से गुरुवार रात 8 बजे नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होता है।

Apoorva Makhija: ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के विवादित एपिसोड के बाद सुसाइड करना चाहती थीं अपूर्वा मखीजा

Apoorva Makhija: कंटेंट क्रिएटर अपूर्वा मखीजा ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद के नतीजों को याद करते हुए भावुक हो गईं। इन्फ्लुएंसर ने बताया कि उस मुश्किल दौर में उन्हें सुसाइड के विचार आए थे और उन्होंने साथी कंटेंट क्रिएटर सूफी मोतीवाला का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने उस समय उनका साथ दिया जब उन्हें सबसे ज़्यादा सहारे की जरूरत थी।

रियलिटी शो ‘लॉक अप सीजन 2’ में सूफी मोतीवाला के साथ खुलकर बातचीत के दौरान, अपूर्वा ने माना कि अगर सूफी उनके साथ नहीं होते, तो वह उस विवाद का सामना नहीं कर पातीं। लंबे समय बाद सूफी से मिलकर अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए अपूर्वा ने कहा, “मैंने तुम्हें सच में बहुत याद किया। ऐसा दोबारा मत करना। मुझे रोना आ रहा है। जब भी कोई मुझसे तुम्हारे बारे में पूछता है और कहता है, ‘तुम उसकी दोस्त कैसे बनी थीं? वह तो बहुत मतलबी है,’ तो मैं उनसे कहती हूं… अगर ‘लेटेंट फियास्को’ (विवाद) के समय सूफी मेरे साथ नहीं होते, तो मैं सुसाइड कर लेती।”

सूफी मोतीवाला ने अपूर्वा की बात सुनकर जवाब दिया, “ऐसा मत कहो। अपूर्वा ने फिर से कहा कि उस समय उनका साथ कितना जरूरी था। उन्होंने कहा, “मैं उस दौर से गुजर नहीं पाती। तुम ही अकेले इंसान थे जो मेरे साथ थे। मैं किसी को डेट नहीं कर रही थी। पर्सनल तौर पर, मेरी जिंदगी में, एक दोस्त के तौर पर।”

अपनी दोस्ती को याद करते हुए, सूफी मोतीवाला ने माना कि साथ बिताया गया वह समय उनकी ज़िंदगी के सबसे खुशनुमा दौर में से एक था। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो भाई, वह एक साल मेरी ज़िंदगी का सबसे पसंदीदा साल था, जब हम दोस्त थे। मुझे आखिरकार लगा कि बॉम्बे में मेरा भी एक सोशल सर्कल है। मुझे लगा कि कोई है, जिसके पास मैं जब चाहूं जा सकता हूं। सच कहूं तो मुझे तुम्हारी बहुत याद आई।”

इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे से माफी मांगी और बातचीत खत्म हुई। अपूर्वा ने कहा कि मुझे भी सच में बहुत अफसोस है। मुझे पता है कि छोटी-छोटी बातें भी बहुत दुख पहुंचा सकती हैं। जब तुम्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब मैं तुम्हारे लिए वह सुरक्षित माहौल नहीं बना पाई, इसके लिए मुझे माफ करना।

‘इधर एक नहीं मिल रही और भाई पैकेज डील लेकर घूम रहा है’, यूपी में एक ही लड़के से तीन बहनों के शादी करने पर यूजर्स ने किए अजीबोगरीब कमेंट्स

उत्तर प्रदेश के अमरोहा की तीन सगी बहनों ने एक मंदिर में एक ही व्यक्ति से शादी की। इस अनोखी शादी ने इंटरनेट पर लोगों को हैरान कर दिया है। बहनों का कहना है कि उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि वे शादी के बाद एक-दूसरे से अलग होने के बारे में सोच भी नहीं सकती थीं।

सरोज (20), सावित्री (19) और संतोष (18) नाम की इन बहनों ने 17 जुलाई को चामुंडा माता मंदिर में विकास नाम के व्यक्ति से शादी की, जो उनका वीडियो शूट किया करता था। उनकी शादी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जो तेज़ी से वायरल हो गया और लोगों ने इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी-किसी ने आलोचना की तो किसी ने हैरानी जताई।

शादी की रस्म के क्लिप में, विकास हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की रस्में निभाते हुए दिखे। साड़ी पहने और सिर पर घूंघट डाले तीनों बहनें दूल्हे के बगल में एक लाइन में बैठी थीं। विकास ने तीनों बहनों की मांग में सिंदूर भरा और उनके साथ सात फेरे लिए। खास बात यह है कि इस रस्म के दौरान पंडित के अलावा, दोनों में से किसी भी पक्ष का कोई परिवार का सदस्य या दोस्त मौजूद नहीं था।

हसनपुर के धौरिया गांव की रहने वालीं और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर, इन तीनों महिलाओं ने बताया कि वे हमेशा साथ रही हैं और अलग-अलग पुरुषों से शादी करने की बात से ही वे बहुत परेशान थीं। उनमें से सबसे बड़ी सरोज ने ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ को बताया, “जब हमें एहसास हुआ कि शादी हमें अलग कर देगी, तो हमने अपनी जान देने के बारे में भी सोचा। बाद में, हमने तय किया कि मरने के बजाय हम साथ रहेंगी और एक ही पुरुष से शादी करेंगी। हम सभी बालिग हैं और हमने यह फ़ैसला अपनी मर्ज़ी से लिया है।”

बहनों ने बताया कि विकास पिछले छह महीनों से उनके कैमरामैन के तौर पर काम कर रहा था और सोशल मीडिया के लिए बनाए जाने वाले वीडियो में अक्सर उनके पति का किरदार निभाता था। वहीं, विकास ने कहा कि बहनों के बीच के गहरे लगाव को समझने के बाद ही उसने यह प्रस्ताव स्वीकार किया।

उन्होंने कहा, “वे बार-बार मुझसे कहती थीं कि शादी के बाद वे अलग-अलग नहीं रहना चाहतीं। मैंने उनकी भावनाओं का सम्मान किया और उनसे शादी करने के लिए हामी भरी क्योंकि मैं चाहता था कि वे साथ रहें। हमने यह फ़ैसला आपसी सहमति से लिया है और उम्मीद करते हैं कि लोग हमारी पसंद का सम्मान करेंगे।”

उनकी शादी का वीडियो ऑनलाइन सामने आते ही इसने खूब सुर्खियां बटोरीं। कुछ लोगों ने इस घटना पर मजाक उड़ाया, तो कुछ ने उनकी आलोचना की। एक यूजर ने मजाक में कहा, “लड़के ऐसे होते हैं – इधर एक नहीं मिल रही, और भाई पैकेज डील लेकर घूम रहा है!”

एक अन्य व्यक्ति लिखा- “सिर्फ रील्स के लिए, इन चारों के अलावा, और कोई कहां है इसमें? एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “अरे तो करने दो ना, उनकी मर्जी है, उनके निजे जिंदगी में आपको इतना इंटरेस्ट क्यों हो रहा है?” एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “जीवनसाथी चुनने का व्यक्तिगत अधिकार और निजी पसंद को जीवित रखना चाहिए।” किसी अन्य ने लिखा की, “अगर यह सहमति से है तो क्यों नहीं, लेकिन इसके लिए एक अनुबंध की आवश्यकता होगी।” वहीं, एक व्यक्ति ने बताया, “हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार, हिंदुओं के लिए बहुविवाह अवैध है।”

VIDEO: ‘मेरी सैलरी बताने लायक नहीं’ वेंडर की महीने की 1.5 लाख कमाई सुन हैरान रह गई कंटेंट क्रिएटर

सोशल मीडिया पर एक स्ट्रीट फूड बेचने वाले का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में स्ट्रीट फूड बेचने के महीने की कमाई जानकर हर कोई हैरान है। एक कंटेंट क्रिएटर ने जब वेंडर से उसकी महीने की इनकम के बारे में पूछा, तो जवाब सुनकर वह खुद भी हैरान रह गई। सड़क किनारे मैगी और छोले-कुलचे बेचने वाले इस शख्स ने दावा किया कि वह हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये कमाता है। इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और छोटे कारोबार से होने वाली कमाई को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई।

इंस्टाग्राम पर ये वीडियो कंटेंट क्रिएटर कोमल नेगी ने शेयर किया है। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, “रेहड़ी लगाने से क्या हो जाएगा? अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो यह वीडियो देखने के बाद अपनी सोच जरूर बदलें।”

महीने में लाखों कमाता है ये वेंडर

वीडियो में कंटेंट क्रिएटर कोमल नेगी एक सड़क किनारे लगे फूड स्टॉल पर पहुंचती हैं, जहां एक व्यक्ति मैगी और छोले-कुलचे बेचता है। बातचीत के दौरान जब वह उससे उसकी महीने की इनकम के बारे में पूछती हैं, तो दुकानदार बताता है कि वह हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये की कमाई कर लेता है। उसका जवाब सुनकर कंटेंट क्रिएटर भी हैरान रह जाती हैं। वेंडर की कमाई सुनकर कोमल नेगी जोर से हंस पड़ती हैं और कहती हैं, “अब मेरी सैलरी बताने लायक ही नहीं है।” दोनों के बीच हुई ये छोटी-सी बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई।

 

लोगों ने किया कमेंट

वीडियो पर लोगों ने अलग-अलग तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। एक यूजर ने मजाक में लिखा, “क्या वह मुझे नौकरी पर रखेगा?” वहीं दूसरे ने कहा, “न इनकम टैक्स, न किराया।”एक कमेंट में लिखा गया, “कोई भी काम छोटा नहीं होता। शुरुआत में मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है, लेकिन बाद में सब ठीक हो जाता है। ठेला लगाने में शर्म की कोई बात नहीं है। आज के समय में सबसे जरूरी चीज कमाई है।” एक अन्य यूजर ने वेंडर की सोने जैसी दिखने वाली चेन की ओर इशारा करते हुए लिखा, “चेन दिख रही है, ब्रो।” एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, “यह सच है कि सड़क किनारे ठेला लगाने वाले जितने गरीब दिखते हैं, उतने होते नहीं हैं।” लोग इस वीडियो को काफी शेयर भी कर रहे हैं।

CM मोहन यादव ने असंभव को किया संभव, UCC को कैबिनेट ने दी मंजूरी, जानें लिव-इन के लिए क्या हैं शर्तें?

Meeting of Madhya Pradesh Cabinet was held under chairmanship of Chief Minister Dr Mohan Yadav

– जगदीशपुर में हुई मध्यप्रदेश कैबिनेट की ऐतिहासिक मीटिंग

– तीन तलाक-हलाला से जुड़े मामले अब अपराध की श्रेणी में

– अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होगी समान नागरिक संहिता

– प्रदेश के मुखिया ने कैबिनेट के बाद खुद दी यूसीसी की जानकारी 

Chief Minister Dr. Mohan Yadav : मध्यप्रदेश के लिए 19 जुलाई का दिन ऐतिहासिक रहा। अब राज्य में किसी के लिए कोई विशेष कानून नहीं होगा। सभी धर्मों के लोग एक ही कानून के तहत जीवन-यापन करेंगे। चाहे लिव-इन हो या जीवन से जुड़ा कोई भी मामला, सब एक ही नियम से तय होगा। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने असंभव को संभव कर दिया है। उनकी अध्यक्षता में जगदीशपुर में हुई कैबिनेट ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने को सहमति दे दी है। 

 

समान नागरिक संहिता को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से कहा कि भारत के संविधान में बताए गए एक समानता, बराबरी, न्याय और धर्मनिरपेक्षता के विज़न को साकार करने की दिशा में एक खास कदम है। इसे मध्य प्रदेश के निवासियों के लिए , चाहे उनका धर्म कोई भी हो, शादी, तलाक, वैवाहिक झगड़ों से जुड़े भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक समान पर्सनल सिविल कानून लागू करने के मकसद से बनाया गया है।

इस कोड का मुख्य मकसद महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें सशक्त बनाना है, ताकि शादी, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े अलग-अलग पर्सनल कानूनों के तहत उनके साथ होने वाले पुराने भेदभाव को खत्म किया जा सके।

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उन्होंने कहा कि इन अलग-अलग और कभी-कभी बिना लिखित नियमों वाली प्रथाओं में सुधार करके और एक समान व निष्पक्ष ढांचा बनाकर, यह कोड पर्सनल सिविल कानून को आधुनिक बनाता है, ताकि पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार मिल सकें। साथ ही, यह धार्मिक रीति-रिवाजों, समारोहों और पारंपरिक प्रथाओं की भी साफ तौर पर सुरक्षा करता है, बशर्ते वे सार्वजनिक नैतिकता और नीति के अनुरूप हों।

 

धर्मनिरपेक्षता के विजन के मद्देनजर बड़ा कदम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत के संविधान के भाग-4 में राज्य के नीति-निदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 में यह उपबंध किया गया है कि राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। इसके उ‌द्देश्य के परिप्रेक्ष्य में राज्य में विवाह, विवाह-विच्छेद, उत्तराधिकार तथा सहवासी-संबंध और उनसे संबंधित विषयों के विनियमन के लिए “मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता, 2026” का प्रारूप तैयार किया गया है।

प्रस्तावित संहिता का उ‌द्देश्य विभिन्न व्यक्तिगत विधियों के अंतर्गत समान प्रकृति के नागरिक विषयों में प्रचलित भिन्नताओं को एक समेकित विधिक ढांचे में विनियमित करना तथा समानता, लैंगिक न्याय, गरिमा और विधि के शासन के संवैधानिक मूल्यों को प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के निवासियों के लिए एक समान पर्सनल सिविल कानून लागू करने के उद्देश्य से 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) का एक ऐतिहासिक ड्राफ्ट तैयार किया है।

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यह प्रस्तावित कोड भारत के संविधान में निहित एकसमानता, बराबरी, न्याय और धर्मनिरपेक्षता के विज़न को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस संहिता का मुख्य मकसद पर्सनल कानूनों के तहत महिलाओं के साथ होने वाले पुराने भेदभाव को खत्म करना, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें सशक्त बनाना है।

पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार देने के साथ-साथ यह कोड उन धार्मिक रीति-रिवाजों और पारंपरिक प्रथाओं की साफ तौर पर सुरक्षा करता है जो सार्वजनिक नैतिकता और नीति के अनुरूप हैं। यह कोड उत्तराखंड (2024), गुजरात (2026) और असम (2026) के यूनिफॉर्म सिविल कोड के गहन अध्ययन और उनके मार्गदर्शन से तैयार किया गया है।

 

सीएम डॉ. यादव ने बताईं संहिता की मुख्य विशेषताएं

1- अनुसूचित जनजातियों को संरक्षण: संवैधानिक सुरक्षा-कवच का सम्मान करते हुए यह कानून संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366 (खंड 25) के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों जैसे भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया और भारिया पर लागू नहीं होगा।

इसके अलावा, जिन समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा संविधान के भाग XXI के तहत की गई है, उन्हें भी इस कोड से विशेष रूप से बाहर रखा गया है। कोड का परिभाषा वाला हिस्सा इसके अधिकार क्षेत्र को तय करता है। उत्तराधिकार से जुड़े जिन शब्दों की परिभाषा इसमें नहीं है, उनके लिए 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925' के अर्थ मान्य होंगे।

 

2- विवाह और तलाक से जुड़े बड़े सुधार

बहुविवाह-तीन तलाक पर पूर्ण रोक: यह कोड सभी समुदायों में केवल एक ही शादी (मोनोगैमी) को अनिवार्य बनाता है। कोई भी व्यक्ति एक समय में केवल एक ही जीवित जीवनसाथी के साथ शादीशुदा रह सकता है। विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है। अमान्य सहमति और प्रतिबंधित रिश्तों (जब तक परंपरा की अनुमति न हो) के बीच विवाह पर रोक लगाई गई है।

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मौखिक तलाक या अनौपचारिक पंचायत के फैसलों को पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित किया गया है। अब विवाह का समापन केवल कानून में बताए गए स्पष्ट और वैधानिक आधारों पर ही हो सकता है। मौजूदा व्यवस्था के विपरीत, अब महिलाओं को भी यह अधिकार दिया गया है कि यदि उनके पति ने शादी के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती किया है, तो पत्नी शादी को रद्द घोषित करने की मांग कर सकती है।

लोगों के लिए शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। शहरी क्षेत्रों में 'MP ई-नगर पालिका पोर्टल' और ग्रामीण क्षेत्रों में SDM, नगरपालिका या पंचायत के ज़रिए यह प्रक्रिया पूरी होगी। रजिस्ट्रेशन न होने से शादी अमान्य नहीं होगी, लेकिन रजिस्ट्रार द्वारा बिना ठोस लिखित कारण के आवेदन खारिज करने पर जुर्माने का प्रावधान है। तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा शादी करने के लिए 'निकाह हलाला' जैसी अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली शर्तों को मानना, बढ़ावा देना या मजबूर करना एक दंडनीय आपराधिक अपराध माना जाएगा।

 

3- बच्चों के अधिकार और कस्टडी

'अवैध' शब्द की समाप्ति: संहिता ने एक प्रगतिशील कदम उठाते हुए कानूनी ढांचे से 'अवैध' (illegitimate) शब्द को पूरी तरह हटा दिया है। विवाहित या अविवाहित माता-पिता के बच्चों, जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) से पैदा हुए सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा प्राप्त होगा। कस्टडी से जुड़े किसी भी विवाद में माता-पिता के अधिकारों के मुकाबले “बच्चे का हित और सर्वांगीण भलाई” ही अदालत के फैसले का मुख्य और अनिवार्य आधार होगी।

 

4- उत्तराधिकार का एकसमान और जेंडर-न्यूट्रल ढांचा

लिंग-तटस्थ अधिकार: बेटों और बेटियों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान अधिकार दिए गए हैं, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। मृतक की संपत्ति में विधवाओं और विधुरों के साथ भी समान व्यवहार होगा। जीवित माता और पिता दोनों को क्लास-1 का उत्तराधिकारी माना गया है, और वे मृतक बच्चे की संपत्ति में जीवनसाथी और बच्चों के साथ बराबर का हिस्सा पाएंगे।

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बिना वसीयत मरे व्यक्ति की संपत्ति को तीन वर्गों (क्लास-1, क्लास-2 और अन्य रिश्तेदार) में क्रमिक तरीके से बांटा जाएगा। पिछली पीढ़ियों के लिए एक 'यूनिट सिस्टम' और 'सर्वाइवरशिप का अधिकार' लागू किया गया है। यदि कोई व्यक्ति संपत्ति के मालिक की हत्या या उसमें मदद का दोषी है, तो वह विरासत से हमेशा के लिए अयोग्य हो जाएगा। यदि किसी का कोई कानूनी वारिस नहीं है, तो 'एस्चीट' सिद्धांत के तहत संपत्ति राज्य को हस्तांतरित हो जाएगी।

 

5- वसीयत (Will) की पूर्ण स्वतंत्रता

– एक नई धर्मनिरपेक्ष प्रणाली के तहत अब कोई भी स्वस्थ दिमाग का वयस्क अपनी 100% संपत्ति (स्वयं-अर्जित और पैतृक दोनों) वसीयत के माध्यम से किसी को भी दे सकता है। इससे पुरानी 'अनिवार्य उत्तराधिकार' की सीमाएं (जैसे इस्लामी कानून में एक-तिहाई की सीमा) समाप्त हो गई हैं। यह प्रक्रिया 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925' के तहत संचालित होगी।

 

6- लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य विनियमन (Live-in Relationship)

अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास “लिव-इन रिलेशनशिप का बयान” जमा करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। पार्टनर्स की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। वे प्रतिबंधित श्रेणी में न हों, पहले से विवाहित न हों और उनकी सहमति स्वतंत्र होनी चाहिए। यदि कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो लिव-इन के शुरू होने और खत्म होने की जानकारी उनके माता-पिता-अभिभावकों को भेजी जाएगी। रजिस्ट्रार यह रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भी भेजेगा।

 

7- महिला पार्टनर और बच्चों को सुरक्षा

लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें पूर्ण उत्तराधिकार मिलेगा। यदि पुरुष पार्टनर महिला को छोड़ देता है, तो वह सक्षम अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह ही भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) का दावा कर सकती है।

बिना रजिस्ट्रेशन एक महीने से ज्यादा साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या 10,000 जुर्माना हो सकता है। गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल और 25,000 जुर्माना तथा रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान न देने पर 6 महीने तक की जेल और 25,000 का जुर्माना हो सकता है।

India’s Got Latent 2 कंटेस्टेंट साक्षी झा बनीं इंटरनेट का निशाना, समय रैना ने ट्रोलर्स को दी नसीहत

कॉमेडियन और कंटेंट क्रिएटर समय रैना एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गए हैं। इस बार मामला उनके किसी कॉमेडी एक्ट का नहीं, बल्कि India’s Got Latent की कंटेस्टेंट साक्षी झा को लेकर दिए गए उनके रिएक्शन से जुड़ा है। सक्शी के एक बयान के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें भारी आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। कई यूजर्स ने उनके विचारों पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने ऑनलाइन कमेंट्स की भाषा और बढ़ती नफरत को लेकर चिंता जताई।

इसी बीच समय रैना ने सामने आकर लोगों से अपील की कि मजाक और मीम्स तक बात ठीक है, लेकिन किसी व्यक्ति को लगातार निशाना बनाना सही नहीं है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई है, जहां लोग आलोचना, अभिव्यक्ति की आजादी और ऑनलाइन व्यवहार की सीमाओं पर अपनी राय रख रहे हैं।

मीम बनाइए, लेकिन हद पार मत कीजिए

समय रैना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए लोगों से कहा कि किसी भी वायरल कंटेंट के पीछे एक इंसान होता है। उन्होंने यूजर्स से अपील की कि मीम्स और मजाक तक बात ठीक है, लेकिन किसी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि स्टेज पर आकर अपनी बात रखना आसान नहीं होता और लोगों को यह समझना चाहिए कि सामने वाला भी भावनाओं वाला इंसान है।

साक्षी झा के बयान पर हुआ था विवाद

दरअसल, India’s Got Latent के एक एपिसोड में साक्षी झा के कुछ कमेंट्स सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे। उनके विचारों को लेकर कई यूजर्स ने आलोचना की और कुछ लोगों ने उन्हें जमकर ट्रोल भी किया। जहां कुछ लोगों ने उनके बयान को गलत बताया, वहीं कई यूजर्स ने ऑनलाइन ट्रोलिंग और व्यक्तिगत हमलों की सीमा पर सवाल उठाए।

समय की अपील पर बंटी सोशल मीडिया की राय

समय रैना के बयान के बाद इंटरनेट पर एक नई बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों ने उनके संवेदनशील रवैये की तारीफ की और कहा कि किसी भी व्यक्ति को लगातार नफरत का सामना नहीं करना चाहिए। वहीं कुछ यूजर्स का मानना था कि सार्वजनिक मंच पर कही गई बातों की आलोचना होना भी जरूरी है और इसे सिर्फ ट्रोलिंग नहीं कहा जा सकता।

आलोचना और नफरत में फर्क होना चाहिए

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि किसी के विचारों से असहमति जताना गलत नहीं है, लेकिन व्यक्तिगत हमले और अपमान से बचना चाहिए। वहीं कुछ यूजर्स ने यह भी तर्क दिया कि अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक मंच पर बयान देता है तो उसे उसकी प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहना चाहिए।

विवाद के बीच छिड़ी बड़ी बहस

साक्षी झा और समय रैना से जुड़ा यह मामला अब सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंटरनेट पर अभिव्यक्ति की आजादी, आलोचना और ऑनलाइन व्यवहार की सीमाओं को लेकर बहस का मुद्दा बन गया है।

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कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू और उनकी पत्नी राधा ने शेयर किए 5 मनी रूल्स, आपके काम भी आएंगे

सेलिब्रिटीज कई बार रुपये-पैसे को लेकर अपनी सोच और आदतों के बारे में बताते हैं। हाल में कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू और उनकी पत्नी राधा ने कुछ मनी रूल्स शेयर किए हैं। उन्होंने बताया है कि 45 साल की उम्र में अपने दो बच्चों के साथ वे हर महीने अपने पैसे कैसे खर्च करते हैं। ये रूल्स आपको भी काम आ सकते हैं।

1. फिजूलखर्ची की जगह आर्थिक आजादी पर करें फोकस

अंकुर और उनकी पत्नी राधा का मानना है कि ब्रांड्स पर ज्यादा पैसे खर्च करना ठीक नहीं है। इसकी जगह हमें वेल्थ क्रिएशन और आर्थिक आजादी के बारे में सोचना चाहिए। कई लोग सिर्फ स्मार्ट और बेहतर दिखने के लिए काफी पैसे खर्च कर देते हैं। अंकुर ने कहा, “हम अमीर दिखने के लिए कभी पैसे खर्च नहीं करते। हम अमीर बनने और आर्थिक आजादी के लिए पैसे खर्च करते हैं।”

2. हेलदी फूड्स पर पैसे खर्च करने में कोई खराबी नहीं

दोनों का कहना है कि अगर आप हेल्दी फूड पर पैसे खर्च करते हैं तो इसमें कोई खराबी नहीं है। उन्होंने कहा, “खाने की सेहतमंद चीजों पर खर्च करने में हम कभी संकोच नहीं करते। हमारे शरीर में जो जाता है वह हमारा सबसे बड़ा वेल्थ है। हालांकि, हेल्दी फूड्स सस्ते नहीं हैं।”

3. तड़कभड़क की जगह ग्रोथ पर करें खर्च

कई लोग भौतिक चीजों पर काफी पैसे खर्च करते हैं। इसकी जगह अपनी ग्रोथ के लिए पैसे खर्च करना चाहिए। इसमें नई जगह घूमना जैसी चीजें शामिल हैं, जो आपको काफी कुछ सिखाती हैं। उन्होंने कहा, “हम चीजों से ज्यादा अनुभव के लिए खर्च करते हैं। चीजें आपको एक बार खुशी देती हैं और उनका कोई अंत नहीं है। पिछले साल हमने 116 दिन घूमने में बिताए।”

4. पहले इनवेस्ट करें फिर खर्च करें

ज्यादातर लोग पहले खर्च करते हैं, फिर जो पैसे बचते हैं उसका निवेश करते हैं। लेकिन, वारिकू परिवार पहले निवेश करता है और फिर खर्च करता है। वारिकू ने कहा, “जैसे ही सैलरी आती है, उसका बड़ा हिस्सा हम निवेश कर देते हैं। बाकी पैसा हम खर्च के लिए इस्तेमाल करते हैं। आज 30 तारीख है और हमारे अकाउंट में सिर्फ 9000 रुपये और 6000 रुपये बचे हैं।”

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5. पढ़ने और सीखने पर खर्च करने में कंजूसी नहीं

अगर आप नई किताबें खरीदने या नई चीजें सीखने पर खर्च करते हैं तो इसमें कोई खराबी नहीं है। वारिकू ने कहा, “रुचि पॉटरी, वाटरकलरिंग और टेनिस सीख रही हैं। हमारे बच्चे भी कई क्लासेज में जाते हैं।”