बिना चेतावनी एक ईमेल में गई नौकरी! वायरल पोस्ट ने छेड़ी जॉब सिक्योरिटी पर बहस

सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट ने एक बार फिर कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी की सुरक्षा (Job Security) को लेकर बहस तेज कर दी है। पोस्ट में दावा किया गया कि एक कर्मचारी को अचानक ईमेल भेजकर नौकरी से हटा दिया गया, जिसके बाद इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। इस घटना ने न केवल कंपनियों के कर्मचारियों के प्रति रवैये पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी चर्चा शुरू कर दी कि क्या मौजूदा समय में बिना पूर्व सूचना या स्पष्ट संवाद के कर्मचारियों को नौकरी से निकालना एक सामान्य कॉर्पोरेट प्रथा बनती जा रही है। कई यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी जॉब मार्केट में ऐसी घटनाएं पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही हैं।

वहीं कुछ लोगों का मानना है कि कंपनियों और कर्मचारियों के बीच बेहतर संवाद और पारदर्शिता की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। इस वायरल पोस्ट ने रोजगार की स्थिरता और कॉर्पोरेट संस्कृति पर नई बहस को जन्म दे दिया है।

वायरल पोस्ट में क्या था?

X यूजर @coolcoder ने कथित तौर पर कर्मचारी हर्ष राणा को भेजे गए ईमेल का स्क्रीनशॉट साझा किया। पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा, “बिना किसी चेतावनी या फीडबैक के नौकरी से निकाल दिया गया। क्या अब यह सामान्य बात हो गई है?” देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई और हजारों यूजर्स ने अपनी राय रखनी शुरू कर दी।

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ईमेल में क्या लिखा था?

स्क्रीनशॉट के अनुसार, कंपनी ने ईमेल में बताया कि प्रोसेस रैंप-डाउन होने के कारण कर्मचारी को मौजूदा भूमिका से हटाया जा रहा है। ईमेल में 7 अगस्त 2026 को अंतिम कार्य दिवस (Last Working Day) बताया गया और कंपनी की सभी एसेट्स जमा कराने के साथ फुल एंड फाइनल (F&F) प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया।

फीडबैक या चेतावनी का नहीं था जिक्र

ईमेल में कहीं भी कर्मचारी के प्रदर्शन, किसी गलती या पहले दी गई चेतावनी का उल्लेख नहीं था। यही वजह रही कि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या कर्मचारी को निर्णय से पहले अपनी बात रखने या सुधार का कोई अवसर दिया गया था।

सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कई यूजर्स ने कॉर्पोरेट कंपनियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कुछ लोगों का कहना था कि कंपनियां मुनाफे को कर्मचारियों से ज्यादा महत्व देती हैं। वहीं कुछ ने पूछा कि क्या कर्मचारी को अचानक नौकरी जाने के बदले तीन महीने का वेतन या कोई मुआवजा मिलेगा।

‘आज के जॉब मार्केट में यह आम बात है’

कई यूजर्स ने अनुमान लगाया कि मामला कर्मचारी के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट या काम खत्म होने से जुड़ा हो सकता है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि मौजूदा रोजगार बाजार में बिना पूर्व सूचना के छंटनी अब असामान्य नहीं रही और ऐसे मामले लगातार देखने को मिल रहे हैं।

कॉर्पोरेट जॉब में क्या है सबसे बड़ा खतरा? पुणे के प्रोफेशनल का पोस्ट हो रहा वायरल

सोशल मीडिया पर इन दिनों कॉर्पोरेट जॉब को लेकर किया गया पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। इस पोर्ट में पुणे के एक प्रोफेशनल ने बताया कि कॉर्पोरेट जॉब सबसे बड़ी चुनौती क्या होती हैं। प्रोफेशनल ने बताया कि, कॉर्पोरेट नौकरी में सबसे बड़ी चिंता तब होनी चाहिए, जब आपके पास धीरे-धीरे काम कम होने लगे और टीम के लोग आपको काम देना बंद कर दें। उनके मुताबिक, अगर आपको नई जिम्मेदारियां और कुछ नया सीखने का मौका नहीं मिल रहा है, तो यह आपके करियर के लिए अच्छा संकेत नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पोस्ट पर कई लोगों ने अपना रिएक्शन दिया है।

काम ना होना चिंता की बात

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो निहार पाटिल ने शेयर किया है। निहार पिछले पांच साल से अधिक समय से कॉर्पोरेट सेक्टर में काम कर रहे हैं। वीडियो की शुरुआत में उन्होंने कहा, “कॉर्पोरेट नौकरी में सबसे डराने वाली चीज काम का दबाव नहीं होता। असली चिंता तब होती है, जब कोई आप पर निर्भर नहीं रहता और आपके पास करने के लिए कोई काम नहीं बचता।”

 

उन्होंने कहा, “काम न होने से बेहतर है कि आपके पास काम हो। क्योंकि काम के दौरान ही आप नई चीजें सीखते हैं, समस्याओं का समाधान करना सीखते हैं, गलतियों से अनुभव हासिल करते हैं और लोगों का भरोसा जीतते हैं। यही चीजें आपके करियर को आगे बढ़ाती हैं।”

समय के साथ खिखना जरुरी

उन्होंने आगे कहा, “अगर आप बिना नई जिम्मेदारियां संभाले या नई स्किल्स सीखे सिर्फ हर महीने सैलरी मिलने से संतुष्ट हैं, तो यह भविष्य में परेशानी बन सकता है। हर बीतते महीने के साथ आपकी सीखने की कमी बढ़ती जाती है, जबकि कोई दूसरा व्यक्ति लगातार आगे निकल रहा होता है। कॉर्पोरेट दुनिया तेजी से बदल रही है और टेक्नोलॉजी उससे भी ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रही है।” निहार ने कहा कि अगर ऑफिस में खाली समय मिले, तो उसका इस्तेमाल नई स्किल्स सीखने, सर्टिफिकेशन करने और नई जिम्मेदारियां लेने में करना चाहिए। उनके मुताबिक, लगातार सीखने वाले लोग ही अपने करियर में आगे बढ़ते हैं।

हर महीने सैलरी से खुश है

उन्होंने कहा, “अगर काम का दबाव सही तरीके से संभाला जाए, तो यह एक अच्छी बात है। इसका मतलब है कि आप अभी भी सीख रहे हैं और अपने काम में अहम भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन जिस दिन आपका करियर जरूरत से ज्यादा आरामदायक लगने लगे, उस दिन खुद से यह सवाल जरूर पूछिए कि क्या मैं वास्तव में आगे बढ़ रहा हूं या सिर्फ हर महीने सैलरी ले रहा हूं?” कैप्शन में उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य अनहेल्दी वर्क कल्चर या बर्नआउट को बढ़ावा देना नहीं है।

उन्होंने लिखा, “मेरा सिर्फ इतना कहना है कि आराम को करियर ग्रोथ समझने की गलती न करें। अगर काम का दबाव सही तरीके से संभाला जाए, तो यह इस बात का संकेत होता है कि आप लगातार सीख रहे हैं, टीम में योगदान दे रहे हैं और अपनी वैल्यू बढ़ा रहे हैं।”

लोगों ने किया ये कमेंट

वीडियो पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी और निहार पाटिल की बात से सहमति जताई। एक यूजर ने लिखा, “अगर आपके पास कोई काम नहीं है, तो यह एक बड़ा वॉर्निंग साइन हो सकता है। ऐसी स्थिति में कभी भी नौकरी जाने का खतरा रहता है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “काम न मिलना अपने आप में एक बड़ा रेड फ्लैग है।” एक और यूजर ने कहा, “अगर ऑफिस में आपके पास कोई जिम्मेदारी नहीं है, तो यह संकेत है कि कभी भी नौकरी जा सकती है।”

एक इंजीनियर को मिले 20+ जॉब ऑफर, Adobe से Amazon तक कंपनियों की लगी लाइन! जानें सफलता का राज

एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सफलता की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। उन्होंने बताया कि अपने करियर सफर के दौरान उन्हें दुनिया की कई नामी प्रोडक्ट बेस्ड कंपनियों से 20 से ज्यादा जॉब ऑफर मिले। यह उपलब्धि हासिल करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत, सीखने और असफलताओं से आगे बढ़ने का रास्ता चुना। उनकी LinkedIn पोस्ट में सिर्फ ऑफर्स की संख्या नहीं, बल्कि उस संघर्ष और तैयारी की झलक भी दिखाई गई है, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

बड़ी टेक कंपनियों से मिले इन ऑफर्स ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया और कई यूजर्स ने उनकी मेहनत की जमकर तारीफ की। आखिर कैसे उन्होंने यह सफलता हासिल की और कौन-कौन सी बड़ी कंपनियों से मिले ऑफर? जानिए पूरी कहानी।

Adobe, Amazon और Tesla जैसी कंपनियों से मिले ऑफर

LinkedIn यूजर निशचय अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में बताया कि जॉब सर्च के दौरान उन्हें कई बड़ी कंपनियों से ऑफर मिले। इनमें Adobe, Tesla, Salesforce, Amazon, JioHotstar, eBay, CRED, Twilio, Autodesk और कई अन्य प्रतिष्ठित कंपनियां शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें एक इंटरनेशनल जॉब ऑफर भी मिला है।

कहा- यह सिर्फ कंपनियों के नाम की कहानी नहीं है

निशचय ने अपनी पोस्ट में साफ किया कि उनका मकसद सिर्फ बड़ी कंपनियों के नाम दिखाना नहीं है, बल्कि उस मेहनत और सफर को साझा करना है, जिसने उन्हें यहां तक पहुंचाया। उन्होंने लिखा कि यह कहानी कंपनी के लोगो की नहीं, बल्कि उस यात्रा की है जिसके पीछे लगातार मेहनत छिपी है।

रातों की मेहनत और कई असफल इंटरव्यू का नतीजा

इंजीनियर ने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कई रातें सीखने में बिताईं। वीकेंड पर भी तैयारी की, कई इंटरव्यू में असफलता मिली और लंबे समय तक कोडिंग व डिबगिंग करते रहे।उन्होंने कहा कि कई बार आत्मविश्वास डगमगाया, लेकिन लगातार सीखने और आगे बढ़ने की आदत ने उन्हें सफलता दिलाई।

परिवार और टीम को दिया सफलता का श्रेय

निशचय ने अपने परिवार, मैनेजर्स, साथियों, रिक्रूटर्स और इंटरव्यू लेने वालों का आभार जताया। उन्होंने अपनी सफलता के लिए भगवान हनुमान का भी धन्यवाद किया और कहा कि हर चुनौती और अवसर ने उन्हें बेहतर इंजीनियर बनने में मदद की।

जॉब तलाशने वालों को दी खास सलाह

उन्होंने नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों को सलाह दी कि वे अपनी शुरुआत की तुलना किसी और की सफलता के अगले पड़ाव से न करें। उनका कहना था कि हर व्यक्ति की अपनी यात्रा होती है। लगातार सीखते रहना, नई चीजें बनाना, आवेदन करते रहना और खुद पर भरोसा रखना जरूरी है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए मजेदार रिएक्शन

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने निशचय की जमकर तारीफ की। कुछ लोगों ने उनकी सफलता को लेकर मजेदार कमेंट भी किए। एक यूजर ने मजाक में लिखा कि वह ऑफर लेटर ऐसे जमा कर रहे हैं जैसे पोकेमॉन कार्ड इकट्ठा किए जाते हैं। वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि वह सफलता की “समस्या” से जूझ रहे हैं। कई लोगों ने उनकी उपलब्धि को प्रेरणादायक बताया और कहा कि ऐसी सफलता हर टेक प्रोफेशनल का सपना होती है।

वायरल पोस्ट ने बढ़ाई चर्चा

निशचय की कहानी LinkedIn से आगे बढ़कर अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच गई। लोगों ने उनकी मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयास को सराहा। कई यूजर्स ने इसे टेक इंडस्ट्री में सफलता पाने वालों के लिए प्रेरणा बताया।

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पानी पर तैरेंगे सोलर पैनल! जानिए क्या है प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना और किसे मिलेगा फायदा

Pradhan Mantri Surya Sarovar Yojana – PM-SSY: देश में रीन्यूबल एनर्जी को बढ़ावा देने और जल निकायों का सही इस्तेमाल करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को अपनी मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के साथ फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (FSPV) यानी पानी पर तैरने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स को डेवलप करना है। सरकार ने इस योजना के लिए कुल 5070 करोड़ रुपये के बजट की व्यवस्था की है।

क्या है योजना का लक्ष्य और क्षमता?

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के तहत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के साथ 5000 मेगावाट (MW) क्षमता की फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं को विकसित करने का लक्ष्य बनाया गया है। इन परियोजनाओं के साथ कम से कम दो घंटे की न्यूनतम भंडारण क्षमता वाली एनर्जी स्टोरेज सिस्टम होगी। यानी कुल 10,000 MWh की स्टोरेज क्षमता जोड़ी जाएगी। इन परियोजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान मंजूरी दी जाएगी जबकि वित्तीय सहायता का भुगतान वित्तीय वर्ष 2032-33 तक जारी रहेगा। अभी भारत में फ्लोटिंग सोलर पीवी क्षमता केवल सिर्फ 700 मेगावाट है। इस योजना से इसमें 5000 मेगावाट की बड़ी वृद्धि होगी।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी द्वारा हाल ही में किए गए एक आकलन के मुताबिक देश में जलाशयों और दूसरे इनलैंड वॉटर बॉडीज में करीब 102,18 GWp फ्लोटिंग सोलर की क्षमता का अनुमान लगाया गया है।

कितना मिलेगा वित्तीय अनुदान?

योजना को सफल बनाने और इससे जुड़े जोखिम कम करने के लिए सरकार वित्तीय मदद भी देगी। एलिजिबल फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं को सफलतापूर्वक चालू होने के बाद 1 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अलावा परियोजना विकास के जोखिमों को कम करने के लिए जरूरी फिजिबिलिटी स्टडीज, बाथिमेट्री और हाइड्रोग्राफी एनालिसिस, पर्यावरणीय स्टडी और दूसरी तैयारियों के लिए प्रति प्रोजेक्ट 50 लाख रुपये तक अनुदान दिया जाएगा।

किसे और क्या-क्या मिलेगा फायदा?

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के फायदे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलेंगे। ये परियोजनाएं मौजूदा जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का पूरा फायदा उठाने का मौका देंगी। इससे लैंड रिसोर्स के लिए होने वाली मारामारी खत्म होगी। ऊर्जा भंडारण प्रणाली के इंटिग्रेशन से पावर ग्रिड की विश्वसनीयता को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इस योजना से सालाना लगभग 10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी। परियोजना वैल्यू चेन में करीब 16000 से 17000 फुल टाइम जॉब के मौके क्रिएट होंगे। आपको बता दें कि यह योजना फ्लोटेशन सिस्टम के साथ-साथ सोलर पीवी सेल्स, मॉड्यूल्स और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम जैसे पूरे वैल्यू चेन के घरेलू निर्माण को भी बढ़ावा देगी।

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नौकरी से छंटनी हुई तो इस शख्स को मिल गया जीवन बदलने का मौका, AI की मदद से मिल गई 1.5 करोड़ की जॉब! जानिए कैसे

एक ही कंपनी में दस साल बिताने के बाद नौकरी छूटने से किसी का भी आत्मविश्वास डगमगा सकता है। एक प्रोफेशनल के लिए, उसके बाद के महीने अनिश्चितता, बार-बार रिजेक्शन और ऐसे इंटरव्यू से भरे रहे जिनसे कोई नतीजा नहीं निकला।

हार मानने के बजाय, उन्होंने अपनी तैयारी का तरीका बदल दिया। इंटरव्यू की प्रैक्टिस करने और अपने जवाबों को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके, उन्हें आखिरकार एक नई नौकरी मिल गई, जिसमें सालाना लगभग 1.5 करोड़ रुपये का पैकेज मिलता है।

AI ने उनके इंटरव्यू की तैयारी का तरीका बदल दिया

इस प्रोफेशनल ने Reddit पर “kml3141” यूज़रनेम से अपना अनुभव शेयर किया। उन्होंने बताया कि एक ही कंपनी में 10 साल काम करने और तीन प्रमोशन पाने के बाद फरवरी के आखिर में उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। यह फैसला एक झटके जैसा था, और अगले पांच महीने नौकरी की मुश्किल तलाश में बीते। उन्होंने कई इंटरव्यू दिए लेकिन उन्हें बार-बार निराशा का सामना करना पड़ा।

कुछ पद रद्द कर दिए गए, कुछ को होल्ड पर डाल दिया गया, जबकि कुछ पद आखिरकार कंपनी के अंदर के लोगों से ही भर दिए गए। अपने चांस बेहतर करने के लिए, उन्होंने इंटरव्यू की तैयारी में AI का इस्तेमाल करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि वे AI टूल्स में जॉब डिस्क्रिप्शन पेस्ट करते थे और उन लोगों के बारे में भी जानकारी शेयर करते थे जो उनका इंटरव्यू लेने वाले थे।

इसके बाद AI ने उन्हें इंटरव्यू में पूछे जा सकने वाले संभावित सवालों का अंदाजा लगाने, इंटरव्यू लेने वालों के बारे में जानकारी जुटाने और STAR मेथड का इस्तेमाल करके जवाब तैयार करने में मदद की। उन्होंने यह भी बताया कि AI की मदद से वे इंटरव्यू के दौरान बहुत ज़्यादा बातें करने के बजाय अपने जवाब छोटे और काम की बात पर केंद्रित रख पाए।

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Layoffs

आखिरकार मेहनत रंग लाई

कई महीनों की खोज के बाद, उन्हें एजेंसी इंडस्ट्री से बाहर की एक कंपनी से नौकरी का ऑफर मिला। इस नई नौकरी में सालाना सैलरी $155,000 (लगभग ₹1.5 करोड़) है, साथ ही 15% सालाना बोनस और पहले दिन से ही एम्प्लॉई बेनिफिट्स भी मिलेंगे। इसमें फ्लेक्सिबल वर्किंग अरेंजमेंट्स के साथ हाइब्रिड वर्क मॉडल की सुविधा भी है।

हालांकि उन्होंने सैलरी पर बातचीत (नेगोशिएशन) करने के बारे में सोचा था, लेकिन उन्होंने ऑफर स्वीकार करने का फैसला किया क्योंकि यह उनकी पिछली नौकरी की कमाई से ज़्यादा था। पीछे मुड़कर देखने पर, Reddit यूज़र ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें धैर्य रखने और लगातार अप्लाई करते रहने का महत्व सिखाया, भले ही कोई नौकरी पहुंच से बाहर लग रही हो।

उनकी पोस्ट को दूसरे Reddit यूज़र्स से भी काफी सपोर्ट मिला। एक यूज़र ने पूछा, “बधाई हो! आपने इंटरव्यू की तैयारी कैसे की? आजकल वे ज़्यादातर व्यवहार और स्थिति-आधारित (बिहेवियरल और सिनेरियो-बेस्ड) इंटरव्यू पर ज़ोर देते हैं।”एक और यूज़र ने लिखा, “बधाई हो! यहां दूसरों का हौसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद।”

एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “अरे OP, इस बड़ी कामयाबी के लिए बधाई। अगर आपको कोई दिक्कत न हो, तो क्या मैं आपसे DM में उन प्रॉम्प्ट्स के बारे में कुछ मदद ले सकता हूं जिनका आपने इस्तेमाल किया था? ये इंटरव्यू की तैयारी में मेरे काम आ सकते हैं। मुझे आपसे कुछ मेंटरशिप चाहिए।”

एक और यूज़र ने बताया, “मैंने एक एजेंसी के लिए काम किया था और मैं दोबारा ऐसा कभी नहीं करूंगा। आपकी नई नौकरी के लिए शुभकामनाएं! अब इस बात पर ध्यान दें कि आपके पास एक बड़ा इमरजेंसी फंड हो और आप अपना कोई भी बकाया कर्ज़ चुका दें।”

 ‘इन-हैंड सैलरी कितनी मिलेगी?’ बस इतना पूछा और कंपनी ने कर दिया रिजेक्ट, सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस

नौकरी की तलाश में हर उम्मीदवार चाहता है कि उसे कंपनी, काम और सैलरी से जुड़ी पूरी जानकारी पहले से मिल जाए। लेकिन एक शख्स के लिए सिर्फ सैलरी के बारे में सवाल पूछना ही परेशानी का कारण बन गया। उसने जॉब ऑफर मिलने के बाद जब अपनी इन-हैंड सैलरी जाननी चाही, तो कंपनी के जवाब ने उसे हैरान कर दिया। इस पूरे मामले को उम्मीदवार ने Reddit पर शेयर किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर नौकरी में पारदर्शिता और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

कई लोगों ने कहा कि किसी भी जॉब को स्वीकार करने से पहले वेतन, कटौती और मिलने वाली रकम की जानकारी लेना एक सामान्य प्रक्रिया है। वहीं, कुछ यूजर्स ने कंपनी के रवैये पर सवाल उठाए और इसे नौकरी देने वालों की सोच से जोड़कर देखा।

2 LPA की नौकरी, लेकिन सवाल पूछते ही बदल गया रवैया

उम्मीदवार ने बताया कि उसने Indeed के जरिए एक कंपनी में आवेदन किया था। कुछ समय बाद एक छोटी कंपनी के प्रतिनिधि ने उससे संपर्क किया और बताया कि इस पद के लिए 2 LPA का पैकेज ऑफर किया जा रहा है। जब उम्मीदवार ने नौकरी में रुचि दिखाई, तो उसने सिर्फ इतना पूछा कि कटौती के बाद हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी कितनी होगी।

‘अगर सिर्फ सैलरी चिंता है तो हमारी कंपनी सही नहीं’

उम्मीदवार के सवाल का जवाब देने के बजाय रिक्रूटर ने कहा कि अगर सैलरी ही आपकी मुख्य चिंता है, तो शायद यह कंपनी आपके लिए सही जगह नहीं है। इसके बाद कंपनी ने उम्मीदवार को शुभकामनाएं देते हुए बातचीत खत्म कर दी। अचानक मिले इस जवाब से उम्मीदवार हैरान रह गया।

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कैंडिडेट ने कहा- सवाल पूछना गलत नहीं था

उम्मीदवार ने दोबारा जवाब देते हुए कहा कि उसका सवाल सिर्फ पैसों को लेकर नहीं था, बल्कि वह ऑफर को सही तरीके से समझना चाहता था। उसने लिखा कि नौकरी करने का एक बड़ा कारण कमाई भी होती है, इसलिए सैलरी से जुड़ी जानकारी लेना एक सामान्य और जरूरी सवाल है। उसने यह भी कहा कि अगर संभावित कर्मचारियों के साथ कंपनी का रवैया ऐसा है, तो कंपनी के लिए भी शुभकामनाएं।

सोशल मीडिया ने कहा- ‘अच्छा हुआ वहां नौकरी नहीं मिली’

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स उम्मीदवार के समर्थन में आ गए। लोगों ने कहा कि किसी भी नौकरी को स्वीकार करने से पहले इन-हैंड सैलरी, कटौती और अन्य शर्तों की जानकारी लेना बिल्कुल जायज है। एक यूजर ने लिखा कि 2 LPA का पैकेज काफी कम है और ऐसी जगह काम करने से बच जाना बेहतर है।

कंपनी के रवैये पर उठे सवाल

कई लोगों ने कहा कि अगर कोई कंपनी शुरुआती बातचीत में ही सैलरी से जुड़े सवालों पर ऐसा व्यवहार करती है, तो भविष्य में कर्मचारियों के साथ उसका रवैया कैसा होगा, यह सोचने वाली बात है। एक यूजर ने मजाक में कहा कि अगर बाद में कर्मचारी वेतन बढ़ाने की मांग करता, तो शायद कंपनी उसे यह कहकर मना कर देती कि “हम यहां अनुभव के लिए काम करते हैं।”

जॉब मार्केट में पारदर्शिता की मांग

इस घटना ने एक बार फिर नौकरी में पारदर्शिता को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। उम्मीदवारों का कहना है कि सैलरी, इन-हैंड पेमेंट और कंपनी की नीतियों के बारे में पहले से स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि दोनों पक्ष सही फैसला ले सकें।

किसिंग वीडियो वायरल होने के बाद बदला पूरा मामला, सोशल मीडिया ने पूछ लिया ये सवाल

कौन हैं जगदीश अफले? IIT बॉम्बे से पढ़े इंजीनियर को राम मंदिर ट्रस्ट का सचिव नियुक्त किया गया

Jagdish Aphale: राम मंदिर में दान में मिले सामान की कथित चोरी के विवाद के बीच, बुधवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जगदीश अफले को अपना पहला सेक्रेटरी नियुक्त किया है। News 18 के अनुसार, अफले रोजाना के कामकाज की देखरेख करेंगे। हालांकि, अफले की नियुक्ति पर 2 सितंबर को ट्रस्ट की एग्जीक्यूटिव मीटिंग में औपचारिक रूप से मुहर लगाई जाएगी।

राम मंदिर ट्रस्ट ने बनाया पहला सेक्रेटरी पद

राम मंदिर में कथित चांदी चोरी मामले को लेकर मचे राजनीतिक विवाद के बीच ट्रस्ट ने सचिव का नया पद बनाया है। यह पद सीईओ (CEO) के पद से अलग होगा। सीईओ पद के लिए जहां ट्रस्ट ने पहले सार्वजनिक रूप से आवेदन मांगे थे और इसके लिए एक तय जॉब डिस्क्रिप्शन जारी किया गया था, वहीं सचिव की नियुक्ति ट्रस्ट की कार्यकारिणी समिति के फैसले के आधार पर की गई है।

जगदीश अफले कौन हैं?

पुणे के रहने वाले जगदीश अफले, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे (IIT) के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने सिविल इंजीनियर के तौर पर ट्रेनिंग ली है। उनके पास इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में BTech और MTech की डिग्री है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर अफले ने अयोध्या राम मंदिर के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह उस मुख्य इंजीनियरिंग टीम का हिस्सा थे, जिसने नींव के काम से लेकर सुपरस्ट्रक्चर तक के प्रोजेक्ट को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बताया जाता है कि अफले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी हैं और कई सालों से संगठन से जुड़े हुए हैं।

रिटायरमेंट के बाद भारत लौटने से पहले, अफले ने कई मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ काम किया है। अपने करियर के दौरान उन्होंने यूरोप और अमेरिका में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं हैं।

अब जगदीश अफले अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन को रिपोर्ट करेंगे और ट्रस्ट में एक पदाधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।

राम मंदिर दान चोरी मामले में ताजा अपडेट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए IGP किरण एस. की अगुवाई में चार सदस्यों वाली SIT के गठन का संज्ञान लिया और उत्तर प्रदेश सरकार से जांच टीम में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने को कहा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि “सुधारात्मक कदम उठाने होंगे” और “पारदर्शिता सुनिश्चित करने” के लिए कदम उठाए जाएंगे। बेंच ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को दो हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया। राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि SIT में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाएगा।

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Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें? जानिए EMI, रेंट रेश्यो और रिटर्न का पूरा गणित

Buying vs Renting Real Estate Guide: बड़े शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु या पुणे में घर खरीदना लोगों का सपना होता है। कई लोग इसे ‘इमोशनल ओनरशिप’ से जोड़कर देखते हैं, तो कुछ लोग इसे केवल ‘फाइनेंशियल रिटर्न’ के नजरिए से देखते हैं।

लेकिन क्या मेट्रो शहरों में आज की तारीख में घर खरीदना फायदे का सौदा है, या फिर किराये पर रहकर पैसों को शेयर बाजार या अन्य ऑप्शन में निवेश करना ज्यादा समझदारी है? आइए इसे EMI-to-Rent Ratio, रेंटल यील्ड और रियल-लाइफ कैलकुलेशन से समझते हैं।

किराए पर रहना vs घर खरीदना: गणित क्या कहता है?

इसे समझने के लिए ₹1 करोड़ की कीमत वाले 2BHK फ्लैट का उदाहरण लेते हैं:

सिनेरियो A: अगर आप घर खरीदते हैं

प्रॉपर्टी की कीमत: ₹1 करोड़

डाउन पेमेंट (20%): ₹20 लाख (अपनी बचत से)

होम लोन (80%): ₹80 लाख (8.5% ब्याज दर पर 20 साल के लिए)

मासिक EMI: लगभग ₹69,400 प्रति महीना

अन्य खर्च: मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन कॉस्ट (₹6-8 लाख एक्स्ट्रा)।

20 साल में कुल भुगतान: ₹80 लाख के लोन पर आप 20 साल में लगभग ₹86.5 लाख केवल ब्याज देंगे। यानी कुल भुगतान ₹1.66 करोड़ होगा (प्रिंसिपल + इंटरेस्ट)।

सिनेरियो B: अगर आप किराये पर रहते हैं और बाकी पैसा इन्वेस्ट करते हैं

मासिक किराया: भारत के मेट्रो शहरों में औसतन रेंटल यील्ड 2.5% से 3% होती है। यानी ₹1 करोड़ के मकान का मासिक किराया लगभग ₹22,000 से ₹25,000 होगा।

बचत (EMI vs Rent Diff): EMI (₹69,400) और Rent (₹25,000) के बीच का अंतर = ₹44,400 प्रति महीना।

डाउन पेमेंट की बचत: डाउन पेमेंट के ₹20 लाख भी आपके पास निवेश के लिए बचते हैं।

कंपाउंडिंग का जादू: अगर आप ₹20 लाख जो डाउन पेमेंट की बचत से हुआ है उसे म्यूचुअल फंड में 12% सालाना रिटर्न पर 20 साल के लिए इन्वेस्ट करते हैं, तो यह रकम बढ़कर लगभग ₹1.93 करोड़ हो जाती है।

साथ ही अगर आप हर महीने बची हुई ₹44,400 की SIP (12% रिटर्न के साथ) 20 साल तक करते हैं, तो इससे लगभग ₹4.43 करोड़ का फंड तैयार होता है। 20 साल बाद आपकी कुल वेल्थ ₹6.36 करोड़ होगी जो टैक्स और सालाना रेंट हाइक एडजस्ट करने के बाद भी एक बड़ा कॉर्पस आपके पास होगा।

EMI-to-Rent Ratio: क्या कहता है यह फॉर्मूला?

EMI-to-Rent Ratio यह तय करने का एक आसान तरीका है कि आपको घर खरीदना चाहिए या किराये पर रहना चाहिए:

EMI-to-Rent Ratio= मंथली Rent/ मंथली EMI

अनुपात 1 से 1.5 के बीच: अगर आपकी EMI और रेंट लगभग बराबर हैं, तो घर खरीदना ज्यादा बेहतर विकल्प है।

अनुपात 2.5 से अधिक: बड़े शहरों में अक्सर EMI (₹70,000) किराए (₹25,000) से 2.8 गुना अधिक होती है। जब अनुपात इतना ज्यादा हो, तो वित्तीय दृष्टि से किराये पर रहना और सरप्लस पैसे को इन्वेस्ट करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें?

Renting vs Buying: घर खरीदें या किराये पर रहें? जानिए EMI, रेंट रेश्यो और रिटर्न का पूरा गणित

इमोशनल ओनरशिप बनाम फाइनेंशियल प्रैक्टिकैलिटी

भारत में घर सिर्फ एक एसेट नहीं है, बल्कि एक सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ये रहे खुद के घर के फायदे:

  • सुरक्षा का अहसास: आपको कोई मकान मालिक खाली करने को नहीं कह सकता।
  • अपने हिसाब से बदलाव: आप इंटीरियर, रेनोवेशन या बदलाव अपनी पसंद से कर सकते हैं।
  • रिटायरमेंट एसेट: बुढ़ापे में रहने के लिए सिर पर पक्की छत रहती है।

किराये के घर के फायदे

  • जॉब फ्लेक्सिबिलिटी: अगर आपकी नौकरी बेंगलुरु से गुड़गांव शिफ्ट होती है, तो आप बिना किसी परेशानी के मूव कर सकते हैं।
  • बेहतर लोकेशन: जितने किराए में आप किसी प्रीमियम लोकेशन पर रह सकते हैं, उतना महंगा घर खरीदना आपकी क्षमता से बाहर हो सकता है।

आपके लिए क्या सही है?

आपको घर तब खरीदना चाहिए जब आपके पास इनकम का परमानेंट सोर्स हो, आप अगले 10-15 साल उसी शहर में बसना चाहते हैं, आपके पास डाउन पेमेंट का पर्याप्त फंड है, और आपके लिए मानसिक शांति वित्तीय रिटर्न से ज्यादा मायने रखती है।

वहीं आपको किराये पर तब रहना चाहिए जब आपकी उम्र 20-35 साल के बीच है, करियर में ग्रोथ और सिटी चेंज की संभावना है, और आप बचे हुए पैसों (EMI और रेंट के अंतर) को अनुशासित तरीके से शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

700 बार रिजेक्ट हुआ, फिर भी नहीं मानी हार… आज 22 LPA की नौकरी कर रहा है ये युवक

कैरियर में बदलाव का फैसला अक्सर आसान नहीं होता। इसके साथ अनिश्चितता, नई चुनौतियां और खुद को फिर से साबित करने का दबाव भी जुड़ा होता है। कई लोग सुरक्षित रास्ता चुनते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपने सपनों के लिए जोखिम उठाने से पीछे नहीं हटते। नई स्किल्स सीखना, लगातार मेहनत करना और असफलताओं के बावजूद आगे बढ़ते रहना ही उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। हाल ही में ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा। एक 24 वर्षीय युवक ने अपने संघर्ष, करियर बदलने के फैसले और सफलता तक पहुंचने के सफर को साझा किया।

उसकी कहानी बताती है कि सही दिशा में लगातार प्रयास, धैर्य और सीखने की इच्छा हो तो सीमित संसाधन या अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी सफलता की राह में स्थायी बाधा नहीं बनती। यही वजह है कि आज उसकी यह कहानी हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

CAT की तैयारी छोड़ चुना अलग रास्ता

2022 में BBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद युवक CAT परीक्षा की तैयारी कर रहा था। लेकिन उसे लगा कि अच्छे बिजनेस स्कूल में दाखिला पाने के लिए कई साल लग सकते हैं। इसलिए उसने इंतजार करने के बजाय नया रास्ता चुनने का फैसला किया।

बिना इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के सीखी Data Science

युवक ने Data Science में करियर बनाने का फैसला किया, जबकि उसके पास न इंजीनियरिंग की डिग्री थी और न ही कोडिंग का अनुभव। उसने करीब डेढ़ साल तक YouTube और Udemy की मदद से SQL, Python और अन्य जरूरी स्किल्स सीखी।

उसके मुताबिक, यह दौर बेहद कठिन था। जहां उसके दोस्त नौकरी कर रहे थे या विदेश पढ़ाई के लिए जा रहे थे, वहीं वह रोज घंटों बैठकर कोडिंग सीख रहा था।

अकेलापन, तनाव और Panic Attacks ने बढ़ाई मुश्किलें

सिर्फ पढ़ाई ही चुनौती नहीं थी। गैर-तकनीकी बैकग्राउंड होने की वजह से लोगों की आलोचना, परिवार और दोस्तों का कम समर्थन और भविष्य की चिंता उसे लगातार परेशान करती रही। उसने बताया कि कई बार रात में घबराहट और Panic Attacks तक आते थे।

700 से ज्यादा आवेदन, फिर मिली पहली नौकरी

नई स्किल्स सीखने के बाद भी नौकरी मिलना आसान नहीं था। अधिकांश HR इंटरव्यू से पहले ही उसका रिज्यूमे रिजेक्ट कर देते थे क्योंकि उसके पास टेक्निकल डिग्री और अनुभव नहीं था। करीब 700 से अधिक आवेदन करने के बाद उसे पहली नौकरी मिली, जहां उसकी सैलरी 25 हजार रुपये प्रति माह थी।

पहली नौकरी भी छूटी, दो महीने की सैलरी भी नहीं मिली

सिर्फ तीन महीने बाद स्टार्टअप में काम खत्म होने की वजह से उसकी नौकरी चली गई। इतना ही नहीं, कंपनी ने आखिरी दो महीने का वेतन भी नहीं दिया। उसने यह बात घरवालों से भी छिपाकर रखी और अगले ही दिन फिर से नौकरी की तलाश शुरू कर दी।

दूसरी नौकरी से मिली नई उड़ान

करीब चार महीने बाद उसे 6 LPA की नौकरी मिली। यहां काम करते हुए उसने लगातार नई स्किल्स सीखीं और लगभग 1.7 साल बाद बेहतर अवसर की तलाश में नौकरी बदली।

इस मेहनत का नतीजा यह रहा कि आज वह एक अमेरिकी MNC में 22 LPA के पैकेज पर काम कर रहा है।

इन स्किल्स ने दिलाई बड़ी सफलता

युवक के अनुसार Data Analyst बनने के लिए इन स्किल्स पर मजबूत पकड़ जरूरी है—

  • SQL
  • Python
  • Power BI
  • Tableau
  • Communication Skills

उसका कहना है कि इंटरव्यू में सिर्फ तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि अपने विचार स्पष्ट तरीके से रखना भी बेहद जरूरी होता है।

नौकरी पाने के लिए अपनाई ये खास रणनीति

उसने बताया कि केवल ऑनलाइन आवेदन करना काफी नहीं होता। उसने अपना रिज्यूमे ATS फ्रेंडली बनाया, हर जॉब पोस्ट के मुताबिक जरूरी Keywords जोड़े और LinkedIn पर संबंधित कंपनियों के कर्मचारियों से Referral भी मांगा। इसी रणनीति से उसे कई इंटरव्यू कॉल मिले।

अब खुद की कंपनी बनाने का सपना

24 वर्षीय युवक का अगला लक्ष्य अपनी खुद की कंपनी शुरू करना है, जो Data Science और Analytics Solutions उपलब्ध कराए। उसका मानना है कि लगातार सीखने और मेहनत करने से किसी भी बैकग्राउंड का व्यक्ति अपने करियर में बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।

पंजाबी युवती की कनाडा में हत्या:लिव-इन पार्टनर ने गला घोंटा, लुधियाना की रहने वाली; 5 साल पहले कर्ज लेकर विदेश गई थी

कनाडा के एडमिंटन शहर में पंजाबी युवती की लिव-इन पार्टनर ने हत्या कर दी। झगड़े के दौरान लिव-इन पार्टनर ने उसका गला घोंटा। कॉल के बाद मौके पर पहुंची पुलिस उसे अस्पताल लेकर गई। यहां उसकी मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी लिव-इन पार्टनर को गिरफ्तार कर लिया है। मृतका की पहचान दमनप्रीत कौर (23) के तौर पर हुई है। वह लुधियाना के समराला की रहने वाली थी। वहीं आरोपी रितेश (22) दिल्ली का रहने वाला है। उस पर सेकेंड डिग्री मर्डर के जार्ज लगाए गए हैं। परिवार ने 5 साल पहले कर्ज लेकर दमनप्रीत को कनाडा भेजा था। अब सिलसिलेवार पूरा मामला पढ़िए… पढ़ाई के दौरान युवक से हुई मुलाकात
दमनप्रीत कौर करीब 5 साल पहले स्टडी वीजा पर कनाडा गई थी। वहीं पढ़ाई के दौरान उसकी मुलाकात रितेश से हुई। दोनों के बीच दोस्ती हुई और बाद में वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। हालांकि, दोनों कब से साथ रह रहे थे, इसकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। 3 दिन इलाज के बाद अस्पताल में तोड़ा था दम
9 जुलाई की शाम 6 बजकर 44 मिनट पर एडमिंटन पुलिस को दक्षिण-पूर्वी शहर के सिल्वरबेरी इलाके में स्थित एक मकान से इमरजेंसी फोन आया। जब पुलिस और पैरामेडिकल टीम वहां पहुंची तो उन्हें दमनप्रीत बेहोशी की हालत में मिली पुलिस ने दमनप्रीत को तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां 12 जुलाई को उसने अंतिम सांस ली। 14 जुलाई को मेडिकल एग्जामिनर द्वारा की गई पोस्टमॉर्टम जांच में यह साफ हो गया कि दमनप्रीत की मौत प्राकृतिक नहीं बल्कि गला घोंटने के कारण हुई थी। 22 जुलाई को आरोपी को अरेस्ट कर चार्ज लगाए
एडमिंटर पुलिस सर्विस की होमिसाइड यूनिट ने 22 जुलाई को आरोपी रितेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि यह मामला घरेलू हिंसा या पार्टनर हिंसा (इंटिमेट पार्टनर होमीसाइड) का है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में किसी अन्य संदिग्ध की तलाश नहीं कर रहे हैं। कोर्ट की आगामी सुनवाइयों में आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी 23 जुलाई को साझा की। दोनों के बीच विवाद किस बात को लेकर हुआ, इसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। डेडबॉडी पंजाब लाई जाएगी
दमनप्रीत कौर एडमिंटन में रहती थी। वह पढ़ाई के बाद अब नौकरी कर रही थी। कनाडाई मीडिया के अनुसार, दमनप्रीत के शव को भारत में उनके परिवार के पास भेजने और अंतिम संस्कार के कागजी कार्यों का खर्च उठाने के लिए एक गो-फंड-मी अभियान भी शुरू किया गया है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। शव कब भारत पहुंचेगा, अभी इसकी कोई तारीख तय नहीं है। बताया जा रहा है कि रितेश भी पढ़ाई के बाद यहां जॉब कर रहा था। वहीं, अब तक भारत सरकार या भारतीय दूतावास की ओर से परिवार को किसी तरह की सहायता नहीं मिली है। ————– ये खबर भी पढ़ें… कनाडा में पंजाबी युवक की गोलियां मारकर हत्या, ऑफिस में घुसकर फायरिंग की कनाडा में ऑफिस में काम कर रहे पंजाबी युवक की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। हमलावर सरे के 76 एवेन्यू बिल्डिंग की दूसरी मंजिल में घुसे और लॉबी से निकल रहे युवक पर फायरिंग कर दी। फायरिंग के कारण आसपास बैठे लोग घबरा गए और उन्होंने तुरंत पुलिस को फोन किया। (पढ़ें पूरी खबर)