Kwick Forensic Solutions IPO Listing: निवेशकों को जबरदस्त मुनाफा, शेयर 66% के बंपर प्रीमियम पर लिस्ट

क्विक फोरेंसिक सॉल्यूशंस के IPO में पैसा लगाने वालों की चांदी हो गई है। 3 सितंबर को कंपनी के शेयर BSE SME पर 66.66 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़त के साथ 150 रुपये पर लिस्ट हुए। तुरंत ही शेयर ने 5 प्रतिशत का उछाल देखा और 157.50 रुपये पर अपर सर्किट लग गया। IPO के लिए फाइनल इश्यू प्राइस 90 रुपये प्रति शेयर था। कंपनी का 50.77 करोड़ का पब्लिक इश्यू 289 गुना भरा था।

क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 224.32 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 318.53 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 313.18 गुना सब्सक्राइब हुआ था। कंपनी ने IPO से पहले एंकर इनवेस्टर्स से 14.43 करोड़ रुपये जुटाए थे।

क्विक फोरेंसिक सॉल्यूशंस पूरे भारत में फोरेंसिक साइंस, सबूतों के मैनेजमेंट, साइबर और डिजिटल फोरेंसिक्स, DNA फोरेंसिक्स और लॉ इनफोर्समेंट सॉल्यूशंस मुहैया कराने का काम करती है। कंपनी फोरेंसिक प्रोडक्ट्स और सर्विसेज के एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो की पेशकश करती है। इनमें फिंगरप्रिंट और फिजिकल एविडेंस किट, एविडेंस कलेक्शन किट्स, मोबाइल क्राइम सीन इनवेस्टिगेशन व्हीकल्स, डिजिटल फोरेंसिक टूलस, DNA फोरेंसिक सॉल्यूशंस, हैंडहेल्ड फोरेंसिक डिवाइसेज और फोरेंसिक उपकरणों को किराए पर देने जैसी सर्विसेज शामिल हैं। यह प्रोडक्ट का डेमो, ऑपरेटिंग ट्रेनिंग, इंस्टॉलेशन और डिलीवरी के बाद टेक्निकल सपोर्ट भी देती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rhetan TMT की कर्ज लेने की क्षमता ₹300 करोड़ तक बढ़ाने का प्लान, शेयरों में दिखी तेजी

TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT ने अपनी उधार लेने की सीमा बढ़ाने की तैयारी की है। कंपनी ने 16 सितंबर 2026 को होने वाली AGM में उधार लेने की सीमा ₹200 करोड़ से बढ़ाकर ₹300 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा है।

कारोबार बढ़ाने के लिए बढ़ेगी उधारी की सीमा

कंपनी के मुताबिक, यह प्रस्तावित बढ़ोतरी कारोबार के विस्तार और भविष्य की फंडिंग जरूरतों के लिए की जा रही है। इससे कंपनी को ज्यादा फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी। सामान्य कामकाज के लिए लिए जाने वाले अस्थायी बैंक लोन इस सीमा में शामिल नहीं होंगे।

Rhetan TMT का कहना है कि पिछले पांच साल में उसका प्रॉफिट 140% CAGR से बढ़ा है। उधारी की सीमा बढ़ने से कंपनी को अपनी ग्रोथ योजनाओं के लिए फंड जुटाने में मदद मिल सकती है।

1 MW का कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट शुरू

Rhetan TMT ने गुजरात के काडी स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1 MW का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट भी शुरू कर दिया है। इससे कंपनी अपनी बिजली जरूरतों का एक हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी से पूरा करेगी।

कंपनी की कुल लागत में एनर्जी की हिस्सेदारी करीब 20% है। ऐसे में कैप्टिव सोलर पावर से लंबे समय में बिजली खर्च पर बेहतर नियंत्रण और ऑपरेशनल क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

हाई-ग्रेड TMT प्रोडक्ट्स पर भी फोकस

कंपनी को Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के लिए BIS सर्टिफिकेशन भी मिल चुका है। इससे कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ज्यादा वैल्यू वाले प्रोजेक्ट्स की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि सोलर पावर प्रोजेक्ट कंपनी की एनर्जी इकोनॉमिक्स को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। कंपनी अब मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, लागत पर नियंत्रण और प्रोडक्ट रेंज मजबूत करने पर फोकस कर रही है।

Rhetan TMT का शेयर बुधवार को 9.94% की तेजी के साथ 21.02 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 1.67 हजार करोड़ रुपये है।

Zerodha संभालेगी IPO का काम! SEBI ने मर्चेंट बैंकर बनने का रास्ता किया साफ

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock to Buy: यह शेयर आपको कर देगा मालामाल, UBS ने दी है खरीदने की सलाह

आप किसी दमदार शेयर की तलाश में हैं तो आप कोल इंडिया के शेयर में निवेश कर सकते हैं। विदेशी ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने इस शेयर को खरीदने की सलाह दी है। उसने इस शेयर के लिए 550 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर 32 फीसदी से ज्यादा चढ़ सकता है।

HSBC ने शेयर पर दी है होल्ड रेटिंग

एचएसबीसी ने भी कोल इंडिया के शेयरों पर ‘होल्ड’ की रेटिंग दी है। उसने इस शेयर के लिए 440 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि पावर की डिमांड स्ट्रॉन्ग है। उधर, हाइड्रो पावर जेनरेशन कमजोर है। कोयले की इनवेंट्री घटकर तीन साल के निचले स्तर पर आ गई है। कोयले की कीमतें चढ़ रही हैं। इसका मतलब है कि आगे कोयले की मांग स्ट्रॉन्ग रहेगी।

25 एनालिस्ट्स में से 14 की खरीदने की सलाह

मॉर्गन स्टेनली ने इस शेयर पर ‘इक्वलवेट’ रेटिंग दी है। कोल इंडिया के शेयरों को कवर करने वाले 25 एनालिस्ट्स में से 14 ने इसे खरीदने की सलाह दी है। 6 ने इसे होल्ड करने की सलाह दी है। 5 ने इसे बेचने की सलाह दी है। कोल इंडिया देश की सबसे बड़ी माइनिंग कंपनी है। इसे शेयरों में 2 सितंबर को तेजी दिखी। कारोबार के अंत में शेयर 3.66 फीसदी चढ़कर 416 रुपये पर बंद हुआ।

2 सितंबर को शेयरों में जोरदार तेजी 

कोल इंडिया के शेयरों में ऐसे दिन तेजी दिखी, जब बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव था। 2 सितंबर को निफ्टी 50 कारोबार खत्म होने पर 0.59 फीसदी यानी 141 अंक गिरकर 23,914 पर आ गया। कई हफ्ते बाद यह 24,000 के नीचे आया है। सेंसेक्स 0.49 फीसदी यानी 373 अंक गिरकर 76,570 पर रहा।

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81.5 करोड़ टन प्रोडक्शन का टारगेट

अप्रैल से अगस्त के दौरान कोल इंडिया का प्रोडक्शन साल दर साल आधार पर 4.5 फीसदी घटकर 26.75 करोड़ टन रहा। कंपनी ने FY27 के लिए 81.5 करोड़ टन उत्पादन का टारगेट रखा है। बीते एक साल में कोल इंडिया का शेयर 9.52 फीसदी चढ़ा है। इस दौरान निफ्टी और सेंसेक्स का रिटर्न निगेटिव रहा है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Milky Mist Share Price: रॉकेट की तरह भागा शेयर, IPO में निवेश किया होता तो 15 दिन में 78% कमाया होता

Milky Mist Share Price: मिल्की मिस्ट डेयरी फूड के शेयरों में 2 सितंबर को भी जबर्दस्त तेजी दिखी। 1 सितंबर को 10 फीसदी उछाल के बाद इस शेयर में अपर सर्किट लगा था। सिर्फ दो दिन में यह शेयर करीब 20 फीसदी उछला है। 2 सितंबर को कारोबार के अंत में यह शेयर 7.57 फीसदी चढ़कर 249.60 रुपये पर बंद हुआ।

जून तिमाही में कंपनी का शानदार प्रदर्शन

Milky Mist Dairy Food के शेयरों में 1 सितंबर को आई तेजी की वजह जून तिमाही में इसका प्रदर्शन है। जून तिमाही में कंपनी का स्टैंडएलोन नेट प्रॉफिट 1,000 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है। कंपनी का रेवेन्यू भी इस दौरान 45 फीसदी बढ़कर 973 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 673 करोड़ रुपये था।

कंपनी वैल्यू-एडेड मिल्क प्रोडक्ट्स बनाती है

यह कंपनी वैल्यू-ऐडेड मिल्क प्रोडक्ट्स के बिजनेस में है। इनमें पनीर, चीज, दही, बटर, घी और आइसक्रीम शामिल हैं। कंपनी ने रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट फूड्स के बिजनेस में भी एंट्री ली है। कंपनी का प्रदर्शन FY24 से ही जोरदार रहा है। इसके रेवेन्यू का सीएजीआर 31 फीसदी रहा है।

पिछले महीने आया था कंपनी का आईपीओ

मिल्की मिस्ट का आईपीओ पिछले महीने आया था। कंपनी ने 140 रुपये के भाव पर इनवेस्टर्स को आईपीओ में शेयर इश्यू किए थे। कंपनी के शेयर 18 अगस्त को 25 फीसदी प्रीमियम के साथ 165 रुपये पर लिस्ट हुए थे। इस इश्यू को निवेशकों का शानदार रिस्पॉन्स मिला था। यह आईपीओ 55 गुना सब्सक्राइब हुआ था। अगर आईपीओ में आपको शेयर मिला होता तो आज आपका मुनाफा 78 फीसदी होता।

बाजार के कमजोर सेटीमेंट में भी चढ़ा शेयर 

मिल्की मिस्ट के शेयरों में तब जोरदार तेजी दिखी है, जब शेयर बाजार का सेंटिमेंट कमजोर है। 2 सितंबर को भी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव दिखा। निफ्टी 0.59 फीसदी यानी 141 अंक गिरकर 23,914 पर आ गया। सेंसेक्स भी 0.49 फीसदी यानी 373 फीसदी गिरकर 76,570 पर आ गया। कई सत्रों के बाद निफ्टी 24,000 के नीचे आया है।

Zerodha संभालेगी IPO का काम! SEBI ने मर्चेंट बैंकर बनने का रास्ता किया साफ

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए जीरोधा (Zerodha) के एप्लीकेशन का रास्ता साफ कर दिया। मनीकंट्रोल को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। हालांकि सेबी के साथ औपचारिक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है। जीरोधा की जीरोधा कॉरपोरेट एडवाइजर्स ने इसका एप्लीकेशन 27 अप्रैल 2026 को फाइल किया था। सेबी ने ऐसे समय में एप्लीकेशन को मंजूरी दी है, जब मर्चेंट बैंकिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म्स देश में बढ़ते प्राइमरी कैपिटल मार्केट का फायदा उठाने के लिए इसमें दिलचस्पी बढ़ा रहे हैं।

Merchant Banker बनने से क्या मिलेगा Zerodha को?

मर्चेंट बैंकर का लाइसेंस मिलने के बाद जीरोधा अपने मौजूदा ब्रोकिंग बिजनेस से आगे बढ़कर इंवेस्टमेंट बैंकिंग सेक्टर में एंट्री कर सकेगी। इसके तहत कंपनी कई तरह के काम कर सकेगी, जैसे कि कंपनियों के IPO और FPO (फॉलो-ऑप पब्लिक ऑफर) मैनेज करने के साथ-साथ राइट्स इश्यू और कैपिटल मार्केट के दूसरे ट्रांजैक्शंस में कंपनियों का काम करना। इस कदम से जीरोधा की इंवेस्टमेंट बैंकिंग में एंट्री होगी।

जीरोधा ने ब्रोकिंग बिजनेस के बाहर तेजी से बढ़ाया कारोबार

पिछले कुछ वर्षों में जीरोधा ने अपने ट्रेडिशनल ब्रोकिंग बिजनेस से आगे बढ़कर कई फाइनेंशियल सर्विसेज शुरू की जैसे कि एसेट मैनेजमेंट, जीरोधा कैपिटल के जरिए लेंडिंग, और अपने प्रोप्रॉयटरी फंड के जरिए इंवेस्टमेंट्स। इसके अलावा इसे गिफ्ट सिटी में ब्रोकर-डीलर के रूप में काम करने के लिए IFSCA (इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी) से रजिस्ट्रेशन मिल चुका है, जिससे यह भारतीय निवेशकों को विदेशी निवेश की सुविधा दे सकती है। अब यह मर्चेंट बैंकिंग में भी एंट्री करने वाली है। 31 अगस्त, 2026 तक सेबी के पास कुल 248 रजिस्टर्ट मर्चेंट बैंकर्स थे तो सेबी के एप्लीकेशन स्टेटस डेटा के मुताबिक 10 मर्चेंट बैंकिंग रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन पर काम चल रहा है।

मर्चेंट बैंकिंग के लिए नियम हुए और सख्त

जीरोधा के मर्चेंट बैंकिंग में आने से पहले सेबी ने मर्चेंट बैंकर्स के लिए नियम सख्त किए थे। सेबी ने कैटेगरी I मर्चेंट बैंकर्स की मिनिमम नेटवर्थ ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹50 करोड़ तो कैटेगरी II मर्चेंट बैंकर्स के लिए मिनिमम ₹10 करोड़ की नेटवर्थ तय की है। इसमें सिर्फ पहली कैटेगरी वाले ही मर्चेंट बैंकर्स मेनबोर्ड सेगमेंट के आईपीओ को मैनेज कर सकते हैं। नए नियमों में लिक्विड नेटवर्थ से जुड़ी शर्तें भी रखी गई हैं और मर्चेंट बैंकर्स की कुल अंडरराइटिंग ऑब्लिगेशंस को लिक्विड नेटवर्थ के 20 गुना तक सीमित किया गया है। मौजूदा मर्चेंट बैंकर्स के लिए इन बढ़ी हुई जरूरतों को धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है तो जीरोधा जैसी नई कंपनियों को शुरुआत से ही नए नियमों के मुताबिक जरूरी नेटवर्थ बनाए रखना होगा।

ESDS Software Solution IPO का अलॉटमेंट आज, 2 सितंबर को; 143 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद अब अच्छी लिस्टिंग की उम्मीद

ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन का ₹720 करोड़ का IPO 1 सितंबर को बंद हो चुका है। इसे कुल 142.88 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। अब आज, 2 सितंबर को इसका अलॉटमेंट फाइनल हो रहा है। इसके बाद शेयरों की लिस्टिंग 4 सितंबर को NSE और BSE पर होने वाली है। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर 58.74 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

जिन लोगों ने ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन के IPO में पैसे लगाए हैं, वे इसकी रजिस्ट्रार MUFG Intime India Pvt.Ltd. और स्टॉक एक्सचेंज BSE की वेबसाइट के जरिए अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसकी प्रोसेस इस तरह है…

BSE पर कैसे करें चेक

  • https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं।
  • इश्यू का टाइप ‘इक्विटी’ चुनें।
  • ड्रॉपडाउन मेन्यू से ESDS Software Solution IPO चुनें।
  • एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल एंटर करें।
  • ‘कैप्चा’ डालें।
  • ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।

MUFG Intime की वेबसाइट से कैसे करें चेक

  • https://in.mpms.mufg.com/Initial_Offer/public-issues.html पर जाएं।
  • कंपनी नेम में ESDS Software Solution सिलेक्ट करें।
  • PAN या एप्लीकेशन नंबर या DP/क्लाइंट ID या अकाउंट नंबर/IFSC में से एक को सिलेक्ट कर डिटेल डालें।
  • Submit पर क्लिक करें।

इस IPO के लिए प्राइस बैंड ₹408-₹429 प्रति शेयर था। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 274.97 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 202.87 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 41.68 गुना भरा। कंपनी AI-इनेबल्ड क्लाउड, मैनेज्ड सर्विसेज, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस मुहैया कराती है। कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर-एज-अ-सर्विस (IaaS), मैनेज्ड सर्विसेज और सॉफ्टवेयर-एज-अ-सर्विस (SaaS) जैसी एंड-टू-एंड सर्विसेज देती है।

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ESDS Software Solution की वित्तीय सेहत

कंपनी ने IPO से पहले एंकर इनवेस्टर्स से ₹216 करोड़ जुटाए। कंपनी का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 28 प्रतिशत बढ़कर 480.65 करोड़ रुपये हो गया। शुद्ध मुनाफा 117 प्रतिशत की बढ़त के साथ 120.82 करोड़ रुपये रहा। इस बीच कंपनी पर 42.92 करोड़ रुपये की उधारी थी। एक साल पहले रेवेन्यू 376.64 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 55.61 करोड़ रुपये था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

BSE मैनेजमेंट के इस बयान से शेयर धड़ाम, जानिए क्या है यह पूरा मामला

बीएसई के शेयरों में 2 सितंबर को बड़ी गिरावट आई। दिन के उच्च स्तर से शेयर 4 फीसदी से ज्यादा गिर गए। इसकी वजह बीएसई का एक बयान है। इस बयान के बाद ही शेयर में तेज गिरावट आई। स्टॉक एक्सचेंज ने कहा है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (कैश) की शुरुआत के बाद वॉल्यूम में गिरावट आई है।

CAS की वजह से घटा है पार्टिसिपेशन 

BSE के मैनेजमेंट ने जी बिजनेस से बातचीत में कहा, “CAS की वजह से एचएफटी, प्रॉपरायटरी अकाउंट्स, रिटेल ट्रेडर्स का पार्टिसिपेशन घटा है। सीएएस के बाद पार्टिसिपेशन बढ़ना जरूरी है।” बीएसई का शेयर 2 सितंबर को एक समय 3,252 रुपये के लेवल पर पहुंच गया था। 12 बजे शेयर का प्राइस 3 फीसदी गिरकर 3,144.80 रुपये पर चल रहा था।

NSE के शेयरों की लिस्टिंग का भी असर

बीएसई मैनेजमेंट के यह बताने का असर भी उसके शेयरों पर पड़ा कि NSE के शेयरों को खुद के प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करने की इजाजत मिल सकती है। खबरों के मुताबिक, BSE पर लिस्ट होने के बाद NSE के शेयरों में अपने ही एक्सचेंज पर ‘permitted to trade’ कैटेगरी के जरिए ट्रेडिंग हो सकती है।

अर्निंग्स में 1-2 फीसदी कमी आ सकती है

पीएल कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एनएसई के इस कदम से FY27 में बीएसई के अर्निंग्स पर करीब 1-2 फीसदी का असर पड़ सकता है। यह अनुमान एक एनालिसिस पर आधारित है, जिसमें यह माना गया है कि कैश मार्केट की हिस्सेदारी और नहीं बढ़ेगी।

दो ब्रोकरेज फर्मों ने आउटलुक घटाया

विदेशी ब्रोकरेज फर्मों नुवामा और जेफरीज ने बीएसई के शेयरों पर अपने आउटलुक को घटाया है। PL Capital ने बीसई के शेयरों के लिए 12 महीने के टारगेट प्राइस को 4,850 रुपये से घटाकर 4,025 रुपये कर दिया है। हालांकि, इस शेयर पर उसने ‘buy’ की अपनी रेटिंग बनाए रखी है।

3 अगस्त को हुई थी CAS की शुरुआत

CAS यानी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की शुरुआत 3 अगस्त को हुई थी। यह कारोबार के आखिर में होने वाला एक संक्षिप्त ऑक्शन है, जिसमें शेयर के क्लोजिंग प्राइस को तय करने के लिए बाय (Buy) और सेल (Sell) ऑर्डर्स को मैच कराया जाता है। शेयर के क्लोजिंग प्राइस को तय करने के लिए दूसरे एशियाई बाजारों में भी इस सिस्टम का इस्तेमाल होता है। इसमें चीन, ताइवान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाजार शामिल हैं।

CAS का मतलब क्या है

CAS की व्यवस्था शुरू होने से पहले शेयर के क्लोजिंग प्राइस का निर्धारण अंतिम 30 मिनट में लगातार होने वाली ट्रेडिंग में ट्रेड्स के औसत प्राइस के आधार पर होता था। रेगुलेटर्स का कहना है कि दुनिया के कई बाजारों में लागू सिस्टम को ध्यान में रख CAS को लागू किया। कैस लागू होने के बाद बाजार और प्रमुख सूचकांकों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

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CAS से पहले क्या था सिस्टम

करीब 20 मिनट के ऑक्शन प्रोसेस में लिक्विडिटी काफी कम रही है और इसमें ज्यादातर संस्थानों की हिस्सेदारी रही है। एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, डेली कैश मार्केट टर्नओवर में CAS ट्रेड्स की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम है। कम पार्टिसिपेशन का मतलब अपेक्षाकृत छोटे बाय और सेल ऑर्डर्स से है।

Mahanadi Coalfields IPO: एक और सरकारी कंपनी ने जमा किया ड्राफ्ट, कोल इंडिया बेचेगी 10% हिस्सा

सरकारी कंपनी कोल इंडिया के 100 प्रतिशत मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी, महानदी कोलफील्ड्स ने IPO के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा किया है। इस इश्यू में केवल ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा, जिसमें कोल इंडिया अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी या 66.18 करोड़ शेयरों को बिक्री के लिए रखेगी। IPO में नए शेयर जारी नहीं होंगे, लिहाजा महानदी कोलफील्ड्स को इस ऑफरिंग से कोई पैसा नहीं मिलेगा। शेयरों को बेचने से होने वाली पूरी कमाई कोल इंडिया के पास जाएगी।

महानदी कोलफील्ड्स मुख्य रूप से ओडिशा में काम करती है और इसने वित्त वर्ष 2026 में भारत के कुल घरेलू कोयला उत्पादन में 21 प्रतिशत का योगदान दिया। कोल इंडिया के उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 28.4 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारत के कुल कोयला उत्पादन में कोल इंडिया का योगदान लगभग 74 प्रतिशत था।

महानदी कोलफील्ड्स के शेयरों को BSE और NSE दोनों पर लिस्ट करने का प्रस्ताव है। SBI कैपिटल मार्केट्स, एक्सिस कैपिटल, BOB कैपिटल मार्केट्स, IDBI कैपिटल मार्केट्स एंड सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल सर्विसेज को इस इश्यू के लिए बुक-रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है। महानदी कोलफील्ड्स का वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध मुनाफा 1.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 10,678 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 2.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 30,550 करोड़ रुपये हो गया।

मार्च और अप्रैल में ये 2 सब्सिडियरी हुई थीं लिस्ट

कोल इंडिया की वर्तमान में 8 सहायक कंपनियां- ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, MCL, और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDIL) हैं।

इससे पहले भारत कोकिंग कोल लिमिटेड जनवरी 2026 में स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हुई थी। इसका पब्लिक इश्यू 1,068.78 करोड़ रुपये का था। सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड मार्च, 2026 में NSE और BSE पर लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,841.45 करोड़ रुपये का था।

2030 तक CIL की सभी सहायक कंपनियां लिस्ट कराने का है प्लान

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने कोयला मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि 2030 तक कोल इंडिया लिमिटेड की सभी सहायक कंपनियां स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हो जाएं। इस कदम का उद्देश्य निगरानी को सुव्यवस्थित करना, पारदर्शिता बढ़ाना और संपत्तियों के मोनेटाइजेशन के जरिए वैल्यू अनलॉक करना है।

Priority Jewels IPO: 100.45 गुना के बंपर सब्सक्रिप्शन के बाद आज, 2 सितंबर को अलॉटमेंट; कैसी रहेगी लिस्टिंग?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Priority Jewels IPO: 100.45 गुना के बंपर सब्सक्रिप्शन के बाद आज, 2 सितंबर को अलॉटमेंट; कैसी रहेगी लिस्टिंग?

प्रायोरिटी ज्यूल्स का ₹91.50 करोड़ का IPO 100.45 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ बंद हो गया है। अब 2 सितंबर को अलॉटमेंट फाइनल होने की उम्मीद है। इसके बाद कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर 4 सितंबर को हो सकती है। IPO में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 39.87 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 166.49 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 106.76 गुना भरा।

जिन लोगों ने प्रायोरिटी ज्यूल्स के IPO में पैसे लगाए हैं, वे इसकी रजिस्ट्रार MUFG Intime India Pvt.Ltd. और स्टॉक एक्सचेंज BSE की वेबसाइट के जरिए अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसकी प्रोसेस इस तरह है…

BSE पर कैसे करें चेक

  • https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं।
  • इश्यू का टाइप ‘इक्विटी’ चुनें।
  • ड्रॉपडाउन मेन्यू से Priority Jewels IPO चुनें।
  • एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल एंटर करें।
  • ‘कैप्चा’ डालें।
  • ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।

MUFG Intime की वेबसाइट से कैसे करें चेक

  • https://in.mpms.mufg.com/Initial_Offer/public-issues.html पर जाएं।
  • कंपनी नेम में Priority Jewels सिलेक्ट करें।
  • PAN या एप्लीकेशन नंबर या DP/क्लाइंट ID या अकाउंट नंबर/IFSC में से एक को सिलेक्ट कर डिटेल डालें।
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इस IPO में 45.75 लाख नए शेयर जारी हुए। फाइनल इश्यू प्राइस ₹200 प्रति शेयर रहा। कंपनी ने IPO की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से ₹27.45 करोड़ जुटाए। ग्रे मार्केट में प्रायोरिटी ज्यूल्स का शेयर 15.50 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

क्या-क्या बनाती है कंपनी

प्रायोरिटी ज्यूल्स हीरे जड़ी सोने और प्लेटिनम की फाइन ज्वेलरी डिजाइन करती है, बनाती है और बेचती है। यह रोज पहनी जाने वाली ज्वेलरी जैसे अंगूठी, झुमके, पेंडेंट, नेकलेस, ब्रेसलेट के साथ-साथ खास मौकों पर पहनी जाने वाली ज्वेलरी भी बेचती है। कंपनी भारत और दुनिया भर में स्वतंत्र ज्वेलर्स और ज्वेलरी चेन्स को अपने प्रोडक्ट बेचती है, जैसे कि कैरटलेन ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, कल्याण ज्वेलर्स, रिलायंस रिटेल, मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स, त्रिभुवनदास भीमजी झवेरी लिमिटेड, सेनको गोल्ड लिमिटेड।

प्रायोरिटी ज्यूल्स की 21 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में अच्छी मौजूदगी है। यह अमेरिका, UAE, हांगकांग और नॉर्वे सहित 13 देशों में अपने प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करती है। इसकी मुंबई में 2 ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी हैं।

IPO के पैसे कैसे इस्तेमाल करेगी Priority Jewels

कंपनी अपने पब्लिक इश्यू से हुई कमाई का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। प्रायोरिटी ज्यूल्स का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू ₹147.40 करोड़ रहा। शुद्ध मुनाफा ₹6.48 करोड़ दर्ज किया गया। इस बीच कंपनी पर ₹110.49 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 24 प्रतिशत बढ़कर ₹539 करोड़ और शुद्ध मुनाफा 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹17.65 करोड़ हो गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

एथर एनर्जी ने टेस्ला और BYD को पीछे छोड़ा, इस साल शेयर 130% उछला; आगे और तेजी की उम्मीद

Ather Energy Share Price: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी Ather Energy ने इस साल शेयर बाजार में Tesla, BYD और Xiaomi जैसी दिग्गज कंपनियों को भी पीछे छोड़ दिया है। कंपनी के शेयर 2026 में अब तक करीब 130% चढ़ चुके हैं। विश्लेषकों को बढ़ते मार्केट शेयर की वजह से स्टॉक में आगे भी तेजी की उम्मीद है।

Ather के शेयर में तेजी ने ग्लोबल निवेशकों का भी ध्यान खींचा है। सोमवार को BlackRock Global Funds ने ओपन मार्केट से कंपनी में 1% से कम हिस्सेदारी खरीदी है।

इसके उलट EV कंपनियों से जुड़े 104 शेयरों को ट्रैक करने वाला ब्लूमबर्ग इंडेक्स इस साल करीब 1% गिरा है। Tesla, BYD और Xiaomi जैसी बड़ी कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन का असर इस इंडेक्स पर पड़ा है।

पिछले महीने शेयर 36% से ज्यादा चढ़ा

Hero MotoCorp की हिस्सेदारी वाली Ather Energy इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसिंग करती है। कंपनी का अपना चार्जिंग नेटवर्क भी है। भारत में EV की बढ़ती मांग का कंपनी को फायदा मिल रहा है।

बेंगलुरु की कंपनी का शेयर पिछले महीने 36% से ज्यादा चढ़ा। मई 2025 में लिस्टिंग के बाद यह किसी एक महीने में कंपनी की सबसे बड़ी तेजी है। बाजार में कंपनी की ग्रोथ को लेकर भरोसा बढ़ा है।

FY28 तक 26% मार्केट शेयर का अनुमान

Emkay Global Financial Services का अनुमान है कि FY28 तक Ather Energy का मार्केट शेयर बढ़कर 26% हो सकता है। मार्च के अंत में कंपनी का मार्केट शेयर करीब 17% था।

ब्रोकरेज का मानना है कि नए प्रोडक्ट लॉन्च और कंपनी की इन-हाउस टेक्नोलॉजी से Ather को फायदा मिल सकता है। इससे कंपनी घरेलू प्रतिद्वंद्वी Ola Electric को कड़ी टक्कर दे सकती है। पिछले हफ्ते Ather ने Konarc इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च किया था। इसे कंपनी की अपनी EV आर्किटेक्चर पर बनाया गया है। यह मास मार्केट सेगमेंट के लिए तैयार किया गया है।

Konarc से दोगुना हो सकता है बाजार

Nomura Holdings के एनालिस्ट्स का कहना है कि Konarc की वजह से Ather का एड्रेसेबल मार्केट दोगुना हो सकता है। यानी कंपनी के पास पहले के मुकाबले ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचने का मौका होगा।

एनालिस्ट्स का कहना है कि भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का बाजार अब अहम मोड़ पर पहुंच रहा है। इस सेगमेंट में लंबी अवधि के लिए Ather को सबसे मजबूत विकल्पों में शामिल माना जा रहा है।

लिस्टिंग के बाद 440% चढ़ा शेयर

लिस्टिंग के बाद से Ather Energy का शेयर करीब 440% चढ़ चुका है। पिछले पांच साल में ₹2,500 करोड़ या उससे ज्यादा का IPO लाने वाली भारतीय कंपनियों में Ather Energy का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है।

तेजी के बावजूद एनालिस्ट्स अभी भी स्टॉक को लेकर बुलिश हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कंपनी को कवर करने वाले सभी 14 एनालिस्ट्स शेयर पर खरीदारी की सलाह दे रहे हैं।

Axis Capital ने Ather Energy का टारगेट प्राइस ₹2,100 रखा है। सोमवार के क्लोजिंग प्राइस के मुकाबले इसमें करीब 22% की तेजी की संभावना बताई गई है।

अगले 3-4 साल में शेयर दोगुना हो सकता है

Emkay के एनालिस्ट चिराग जैन का मानना है कि अगले तीन से चार साल में मौजूदा स्तर से भी Ather Energy का शेयर दोगुना हो सकता है।

उनका कहना है कि Ather सिर्फ फीचर्स हटाकर कीमत कम करने के पक्ष में नहीं है। कंपनी लागत कम करके कीमत घटाने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि ब्रांड और प्रोडक्ट क्वालिटी पर असर न पड़े।

एथर एनर्जी का शेयर मंगलवार को 1.07% की तेजी के साथ 1,736 रुपये पर बंद हुआ।

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