चाइनामैन स्पिनर कुलदीप यादव हो सकते हैं कोलंबो टेस्ट से बाहर

पिछले साल कुलदीप यादव इंग्लैंड के दौरे पर पांचो मैच में बैंच पर बैठे थे इसके बाद उनको वेस्टइंडीज के खिलाफ मौका मिना जो उन्होंने भुनाया। घरेलू जमीन पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी उनका प्रदर्शन औसत से ऊपर ही था। लेकिन करीब एक साल बाद लाल गेंद की क्रिकेट में उनकी वापसी वैसी नहीं हुई है जैसे कि होनी चाहिए थी। इस कारण उनका 23 अगस्त से शुरु हो रहे कोलंबो टेस्ट से ड्रॉप होना लगभग तय है।

गॉल स्टेडियम में पांचवें दिन की पिच स्पिन गेंदबाजी के लिए अच्छी थी और कुलदीप यादव इसका फायदा उठा सकते थे। लेकिन उन्होंने 11 ओवर में 38 रन देकर एक भी विकेट नहीं लिया।इससे साफ दिखा कि भारतीय कप्तान शुभमन गिल की नजर में कुलदीप तीसरे स्पिन गेंदबाज थे। उनसे पहले रविंद्र जडेजा और मानव सुथार ने गेंदबाजी की। दोनों ने मिलकर 46.4 ओवर किए और 14 विकेट लिए।

कुलदीप के खराब प्रदर्शन के लिए कप्तान या टीम प्रबंधन को दोष देना आसान है कि उन्होंने इस गेंदबाज पर पर्याप्त भरोसा नहीं दिखाया। कुलदीप को मिले 11 ओवरों में भी वह ऐसा प्रदर्शन नहीं कर पाए जिससे उन्हें ज्यादा गेंदबाजी दी जाती।पहली पारी में भी कुलदीप को अपना एकमात्र विकेट कमिंदु मेंडिस का मिला जिसमें शुभमन गिल के शानदार कैच का बड़ा योगदान था।

श्रीलंका के खिलाफ खेले गए अभ्यास मैच में भी वह बेअसर ही थे। उन्होंने पहली पारी में श्रीलंका एकादश के खिलाफ 18 ओवर में 76 रन देकर सिर्फ 2 विकेट ही लिए थे। उनके इस प्रदर्शन से कप्तान केएल राहुल ने उनको दूसरी पारी के लिए गेंद ही नहीं थमाई। हालांकि इसकी आलोचना हुई लेकिन राहुल अपनी जगह पर सही भी थे।

क्यों नहीं मिल रहे कुलदीप को विकेट

एक विचार यह भी है कि कुलदीप को हवा में गेंद की गति थोड़ी तेज रखनी चाहिए, ताकि पिच से उन्हें अधिक मदद मिल सके। वह आम तौर पर 82-85 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते हैं और कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के इस गेंदबाज को ‘स्पीडोमीटर’ पर कुछ पायदान ऊपर जाते हुए 90 किमी प्रति घंटे के आसपास पहुंचना चाहिए।

9 साल में कुलदीप ने खेले हैं सिर्फ 19 टेस्ट मैच

कुलदीप के लिए यह चिंता की बात इस कारण भी है क्योंकि बीते 9 सालों में वह सिर्फ 19 टेस्ट खेल पाए हैं। कुलदीप ने 2017 में धर्मशाला पर पदार्पण किया था। उन्होंने यही पर 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें और अंतिम टेस्ट के पहले दिन कुलदीप ने शीर्ष क्रम के पांच खिलाड़ियों को आउट किया और मैन ऑफ द मैच का पुरुस्कार पाया। कुलदीप ने इस श्रृंखला में 19 विकेट झटके।यह ही एकमात्र ऐसी सीरीज रही जिसमें उन्होंने 4 मैच लगातार खेले। बीते कुछ वर्षों में टेस्ट में मौके कम मिले थे, फिर उनकी फॉर्म में गिरावट आयी और घुटने की सर्जरी भी हुई। इसके बाद कुलदीप ने फॉर्म में आने के लिए कुछ तकनीकी बदलाव भी किया।

17 पेनल्टी कॉर्नर और एक भी गोल नहीं, रोमांचक रहा भारत-इंग्लैंड का ड्रॉ मैच

Savita Punia

नीदरलैंड के एमस्टेलवीन में खेले गए FIH महिला हॉकी विश्व कप 2026 के पूल डी के अपने आखिरी मैच में, भारतीय टीम ने इंग्लैंड के हमलों को रोकने के लिए ज़बरदस्त बचाव किया और मैच 0-0 से ड्रॉ कराया।हॉकी विश्व कप के दूसरे दौर में जगह पक्की करने के लिए भारत को हार से बचना था। उन्होंने काफ़ी संघर्ष के बाद यह काम कर दिखाया। शुअर्ड मरिने की टीम ने दुनिया की नंबर 4 और ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट चीन के साथ मैच 2-2 से ड्रॉ कराया था और उसके बाद दक्षिण अफ़्रीका को 6-1 से बुरी तरह हराया था।

दिलचस्प बात यह रही कि पूरे मैच में 17 पेनल्टी कॉरनर हुए जिसमें इंग्लैंड को 11 बार और भारत को 6 बार गोल करने का मौका मिला लेकिन दोनों टीमों में से एक भी टीम इसे भुना नहीं पाई।भारत ने पहले हाफ में दबदबा बनाते हुए कई मौके बनाए और पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए लेकिन ब्रेक के बाद टीम अपनी लय बरकरार नहीं रख सकी। इंग्लैंड ने दबाव बढ़ाते हुए 11 पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए लेकिन सविता पूनिया और बिछू देवी ने मजबूती से डटकर गोल नहीं होने दिया।

गोलकीपर सविता और बिच्छू की बदौलत मजबूत हुई रक्षण पंक्ति

सविता ने इस मुकाबले को ‘नॉकआउट मैच’ बताते हुए कहा कि भारत का रक्षात्मक प्रदर्शन अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर था।इस विश्व कप में 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली सबसे अनुभवी महिला खिलाड़ी सविता ने कहा, ‘‘हमें पहले से पता था कि यह कठिन मुकाबला होगा। हमने पहले हाफ में दबदबा बनाया और कई पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए। हमें आक्रामक हॉकी जारी रखनी होगी और इन मौकों को गोल में बदलना होगा। हमारे लिए यह नॉकआउट मैच जैसा था और दबाव था, लेकिन एक टीम के रूप में हमने अच्छा खेला।’’उन्होंने कहा, ‘‘आज हमारा डिफेंस अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर था।’’

सविता ने बिछू की विशेष रूप से तारीफ की जिन्होंने इंग्लैंड द्वारा विजयी गोल की तलाश में अपना गोलकीपर हटाने के बाद अंतिम 30 सेकेंड में महत्वपूर्ण बचाव किया।उन्होंने कहा, ‘‘आखिरी 30 सेकेंड में बिछू का बचाव मेरे देखे सर्वश्रेष्ठ बचावों में से एक था। मैंने उसे कई बार गले लगाया है। हम एक-दूसरे की ताकत हैं।’’

बिछू ने कहा कि इंग्लैंड के गोलकीपर को हटाने के बाद वह उसके आखिरी हमले के लिए तैयार थीं।उन्होंने कहा, ‘‘जब उन्होंने आखिरी मिनटों में गोलकीपर को हटा दिया तो मुझे लगा कि वे पूरी तरह से दबाव बनाएंगे। मैं इसके लिए तैयार थी और सिर्फ गेंद पर नजर रख रही थी। मैं डिफेंस के प्रदर्शन से बहुत खुश हूं।’’

सविता ने कहा कि एक सीनियर खिलाड़ी के तौर पर उनकी भूमिका युवा खिलाड़ियों को विश्व कप के दबाव से निपटने में मदद करना भी है।उन्होंने कहा, ‘‘मैं उनसे कहती रहती हूं कि आपसे गलतियां होंगी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कि आप अच्छी तरह वापसी करें। एक मेंटर और वरिष्ठ खिलाड़ी के तौर पर मैं हमेशा उन्हें सहज महसूस कराने की कोशिश करती हूं। मैं उनके प्रदर्शन से बहुत खुश हूं।’’


ग्रोइन की चोट के कारण सैम करन पूरे इंग्लिश समर से हुए बाहर

इंग्लैंड के हरफनमौला खिलाड़ी सैम करेन ग्रोइन की चोट के कारण बाकी गर्मियों से बाहर हो गए हैं। सरे के एक बयान ने पुष्टि की करेन की चोट का आकलन किया गया है और शुक्रवार (21 अगस्त) को उनकी कमर की सर्जरी की जाएगी।

नवीनतम झटके ने टेस्ट क्रिकेट में वापसी के लिए उनकी बोली को रोक दिया है, एक प्रारूप जो उन्होंने आखिरी बार 2021 में खेला था। बेन स्टोक्स की सेवानिवृत्ति के बाद, करेन को जो रूट की अगुवाई वाली टीम में एक विकल्प के रूप में माना जा रहा था, चयनकर्ता मार्कस नॉर्थ ने कहा कि 28 वर्षीय खिलाड़ी ने टीम को “एक निश्चित संतुलन” प्रदान किया।

हालाँकि, उन्होंने यह भी बताया था कि करेन को अपने उच्च कार्यभार के कारण कुछ दिक्कतें हो रही हैं और परिणामस्वरूप उन्हें पहले दो पाकिस्तान टेस्ट के लिए नहीं चुना गया है। नॉर्थ ने इस महीने की शुरुआत में कहा था, “मुझे लगता है कि उसे इन पहले दो टेस्ट मैचों में शामिल करना अनुचित होगा। वह ऐसा व्यक्ति है जिसके साथ हमारा बैकरूम स्टाफ और मेडिकल टीम आने वाले हफ्तों में काम करेगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह संभावित रूप से तीसरे टेस्ट में एक विकल्प बन सके। वह ऐसा व्यक्ति है जिसे हम वास्तव में बहुत महत्व देते हैं, और हम भविष्य में एक ऑलराउंडर के रूप में हमारे लिए भूमिका निभाते हुए देखते हैं।”

सैम करेन आखिरी बार द हंड्रेड में दिखे थे, जहां उन्होंने एमआई लंदन का नेतृत्व किया था। इससे पहले उन्होंने भारत के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज में हिस्सा लिया था। संयोग से, वह कमर की चोट के कारण आईपीएल 2026 से चूक गए। मार्च में, उन्होंने इसे एक ऐसी चोट बताया था जिससे वह “थोड़ा-बहुत जूझ रहे थे” और स्वीकार किया था कि यह “धीरे-धीरे काफी खराब हो गई है”।

आईपीएल के अंत में, राजस्थान रॉयल्स के क्रिकेट निदेशक, कुमार संगकारा ने लीग से करेन की अनुपस्थिति पर सवाल उठाया था, और इसे “निराशाजनक” बताया था कि उन्होंने आईपीएल सीज़न की समाप्ति की चोट के बावजूद उन्हें सरे के लिए मैच खेलते हुए देखा था।

करेन के साथ, विल जैक भी गुरुवार को काउंटी चैंपियनशिप की बहाली के लिए सरे की टीम से गायब थे। जैक इस समय अपने अपेंडिक्स को हटाने के ऑपरेशन से उबर रहे हैं। उनकी रिकवरी पर नजर रखी जाएगी और सितंबर में श्रीलंका सीरीज से पहले उनकी उपलब्धता पर फैसला लिया जाएगा। सरे वर्तमान में डिवीजन वन काउंटी चैम्पियनशिप अंक तालिका में सातवें स्थान पर है। इस सप्ताह, उन्होंने जैक्स और डैन लॉरेंस द्वारा छोड़े गए अंतर को भरने के लिए महिपाल लोमरोर को बुलाया, जो कि करेन की अनुपस्थिति के साथ अब और बढ़ गया है।

BWF World Championship में भारत की बेटियों ने किया बड़ा उलटफेर, 7वीं रैंक की जोड़ी को हराया

Treesa Jolly Gayatri Gopichand

त्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की भारतीय महिला युगल जोड़ी ने बृहस्पतिवार को जापान की सातवीं वरीयता प्राप्त रिन इवानागा और की नाकानिशी को सीधे गेम में हराकर विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।भारत की गैर वरीयता प्राप्त जोड़ी ने एकतरफा मुकाबले में रिन और नाकानिशी की विश्व में सातवें नंबर की जोड़ी को 21-16 21-12 से हराया।

हाल में अर्जुन पुरस्कार पाने वाली त्रीसा और गायत्री ने शुरू से अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी प्रतिद्वंद्वी टीम को कोई मौका नहीं दिया। यह भारतीय जोड़ी 2022 और 2023 में लगातार दो वर्ष ऑल इंग्लैंड ओपन के सेमीफाइनल में पहुंची थीं।इस साल की शुरुआत में त्रीसा के टखने में चोट लगने के कारण यह जोड़ी कुछ टूर्नामेंट में नहीं खेल पाई थी। उन्होंने इंडोनेशिया ओपन में वापसी की और इस महीने की शुरुआत में फिलीपीन इंटरनेशनल चैलेंज जीता।

भारत ने इंग्लैंड को 118 रनों से हराया, लॉर्ड्स गैलरी पर फिर दिखा गांगुली का जश्न (Video)

sourav ganguly

साल 2002 में नेटवेस्ट फाइनल में जीत के बाद सौरव गांगुली लॉर्ड्स की बालकनी में अपने जज्बात काबू में नहीं रख पाए थे और अपनी शर्ट उतार कर बालकनी में लहरा दी थी। 24 साल बाद वैसा ही जश्न  लॉर्ड्स की बालकनी में फिर दिखा लेकिन इस बार गांगुली नहीं बल्कि पूरी भारतीय टीम ने ऐसा कारनामा किया।

दरअसल भारत की मिक्स्ड डिसएबिलिटी क्रिकेट टीम ने लॉर्ड्स के मैदान पर मेजबान इंग्लैंड को 118 रनों से हरा दिया और बालकनी में पहुंचकर गांगुली के अंदाज में जश्न मनया। इस जश्न की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

दोनों टीमों के बीच में 7 मैचों की सीरीज हुई जिसमें अंतिम मुकाबले लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान पर खेला जाना था। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 206 रन बनाए। इसके जवाब में इंग्लैंड की पूरी पारी महज 88 रनों के मामूली स्कोर पर आउट हो गई।भले ही लॉर्ड्स में भारतीय टीम जीती हो लेकिन इस सीरीज को इंग्लैंड ने 4-3 से जीता।

गांगुली ने नेटवेस्ट ट्रॉफी एकदिवसीय टूर्नामेंट के फाइनल में भारत की जीत का जश्न मनाने के लिए अपनी शर्ट उतार दी थी और यह आज तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे नाटकीय क्षणों में से एक है।दिलचस्प बात यह है कि इंग्लैंड ने लॉर्ड्स में अपनी जीत उसी दिन दर्ज की जिस दिन उसने 2019 में एकदिवसीय विश्व कप फाइनल में स्कोर बराबर रहने के बाद बाउंड्री काउंट-बैक के आधार पर न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत हासिल की थी।

Belonging: राजनीति, प्‍यार और निजी जिंदगी तक, गांधी परिवार में हुईं हत्‍याओं के बाद कैसे बदल गई सोनिया गांधी की जिंदगी

Belonging: राजनीति, प्‍यार और निजी जिंदगी तक, गांधी परिवार में हुईं हत्‍याओं के बाद कैसे बदल गई सोनिया गांधी की जिंदगी

Sonia Gandhi

भारत में विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा सोनिया गांधी की जिंदगी पर आधारित उनकी किताब Belonging 10 नवंबर को प्रकाशित होगी, लेकिन इसके पहले ही इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में जमकर हलचल है। सोनिया की इस किताब में उनकी राजनीति से लेकर उनकी जिंदगी, उनका संघर्ष और और निजी जीवन का भी जिक्र है। इसमें इटली से भारत तक के उनके सफ़र का ज़िक्र किया गया है। यह किताब प्यार, नुकसान और उन राजनीतिक फैसलों की निजी कहानी बताती है।

इसके साथ ही किताब उनके जीवन के साथ-साथ भारत में करीब छह दशकों के दौरान हुए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को देखने का एक अलग नजरिया भी देती है। अल्फ्रेड ए. नॉफ़ द्वारा रिलीज़ की जाने वाली 544 पन्नों की इस किताब को एक “खुलासा करने वाली” यादों की किताब बताया जा रहा है, जो युद्ध के बाद के इटली से भारत तक के उनके जीवन का सफ़र बताती है और एक बेहद निजी और राजनीतिक कहानी सुनाती है।

पेंगुइन रैंडम हाउस की वेबसाइट पर इसके बारे में कहा गया है कि यह “एक हैरान करने वाली यादों की किताब है जो प्यार, परिवार का एक बेहद दिलचस्प तरीके से जिक्र करती है। इसमें कहा गया है कि किताब में इटली में गांधी के शुरुआती सालों और राजीव गांधी से उनकी शादी से लेकर उनके संघर्षों तक का ज़िक्र होगा।

हिंदी, साड़ी और गांधी परिवार : जानकारी अनुसार, यह किताब इंग्लैंड के कैम्ब्रिज से शुरू होती है, जहां “1965 में उन्नीस साल की छात्रा सोनिया माइनो को पहली नज़र में ही प्यार हो जाता है”- भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पोते राजीव गांधी से। इसमें बताया गया है कि किताब में उनकी प्रभावशाली सास, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से उनकी मुलाकात का ज़िक्र है और दिखाया गया है कि कैसे राजीव के साथ रहते हुए सोनिया का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह हिंदी बोलना, साड़ी पहनना और भारतीय खाने का मज़ा लेना सीखती हैं।

राजीव की हत्‍या और संजय की प्‍लैन क्रैश में मौत : बता दें कि इस किताब में उन दुखद घटनाओं का भी ज़िक्र है जो राजीव गांधी के भाई संजय की प्लेन क्रैश में मौत और 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद गांधी परिवार पर गुज़रीं। अपनी माँ की मौत के बाद और सोनिया के डर के बावजूद, राजीव प्रधानमंत्री बने, और सात साल बाद राजीव की भी चुनाव प्रचार के दौरान एक आत्मघाती हमलावर द्वारा हत्या कर दी गई। इसमें यह भी बताया गया है कि सोनिया ने कई सालों तक राजनीति में आने के दबाव का विरोध किया, लेकिन बाद में वह इंडियन नेशनल कांग्रेस की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहीं। एक अहम चुनाव के बाद जब पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री बनाने का फैसला किया, तो उन्होंने इस पद को ठुकराने का ‘हैरान करने वाला फैसला’ लिया और इसके बजाय उस गठबंधन में अपनी पार्टी का नेतृत्व किया जिसने एक दशक तक देश पर शासन किया।

2004 में PM की कुर्सी ठुकराई थी : बता दें कि 2004 में कांग्रेस ने 14 सहयोगी दलों के साथ UPA बनाया। चुनाव के बाद लेफ्ट समेत कई दलों के समर्थन से UPA को 335 सांसदों का समर्थन मिला। सहयोगियों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने 18 मई 2004 को पद ठुकरा दिया। इसके बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

परदे के पीछे बागडोर : NDA ने सोनिया के विदेशी नागरिक का मुद्दा उठाकर उनके पीएम बनने का विरोध किया। इसके कारण सोनिया ने पीएम पद ठुकरा दिया और मनमोहन सिंह को पीएम बनाने का प्रस्ताव रखा। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें। हालांकि, कहा जाता है कि पर्दे के पीछे रहकर सरकार की बागडोर सोनिया के हाथों में ही थी।

किताब के बारे में प्रकाशक का कहना है कि यह किताब आज़ादी के बाद के इतिहास, मौजूदा राजनीतिक संघर्षों और 60 सालों में हुए आर्थिक और सामाजिक बदलावों के ज़रिए “भारत को एक अनोखे नज़रिए से” दिखाती है, साथ ही सोनिया गांधी की निजी खुशियों और मुश्किलों की एक करीबी तस्वीर भी पेश करती है। अल्फ्रेड ए. नॉफ़, नॉफ़ डबलडे पब्लिशिंग ग्रुप का एक इम्प्रिंट है, जो पेंगुइन रैंडम हाउस का एक डिवीज़न है।

पाक बल्लेबाजों ने लोकतांत्रिक तरीके से दिए इन दो अंग्रेज पेसर्स को 5-5 विकेट

ENGvsPAK हेडिंगले में खेले जा रहे पहले टेस्ट में पाकिस्तानी बल्लेबाज 48.1 ओवर में 170 रनों पर सिमट गए। लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि सिर्फ दो गेंदबाजों ने ही पाकिस्तानी पारी को ऑलआउट कर दिया। ओली रोबिन्सन ने 18 ओवर में 51 रन देकर 5 विकेट लिए वहीं जॉश टंग ने 9.1 ओवर में 46 रन देकर 5 विकेट लिए। जोफ्रा आर्चर और गस एटिंकसन को कोई भी विकेट नहीं मिला।

दोनों ही गेंदबाजों ने इस लम्हे को याद करने के लिए गेंद को बीच में से काट लिया। खेल के पहले दिन का आकर्षण रॉबिंसन का श्रृंखला की पहली गेंद पर विकेट लेना रहा। उन्होंने तीन मैचों की श्रृंखला की पहली ही गेंद पर अराउंड द विकेट से स्विंग होती हुई गेंद से अज़ान अवैस को आउट कर दिया।

इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज की पहली गेंद पर किसी टीम द्वारा विकेट लेने का यह पहला मौका है। इंग्लैंड 1880 से टेस्ट मैचों की मेजबानी कर रहा है। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में ऐसा पहले केवल 11 बार ही हुआ है। जिमी एंडरसन ऐसा करने वाले इंग्लैंड के पहले गेंदबाज थे। उन्होंने 2019-20 में दक्षिण अफ्रीका में खेली गई सीरीज में डीन एल्गर को आउट किया था।

इससे पहले बारिश के कारण सुबह का खेल प्रभावित होने के बाद करीब तीन घंटे के लंबे सत्र में पाकिस्तान चाय तक सात विकेट पर 150 रन बनाकर संकट में था। मैच में केवल 9.4 ओवर हुए थे कि बारिश के कारण दो घंटे का खेल रोकना पड़ा।

दो विकेट गिरने के बाद अब्दुल्ला शफीक और इमाम-उल-हक ने संभलकर बल्लेबाजी की। दोनों ने धीरे-धीरे लय हासिल की और रन गति बढ़ाई। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 91 रन जोड़े।

लेकिन इमाम जोश टंग की बाहर जाती गेंद पर शॉट खेलने के प्रयास में दूसरी स्लिप में कैच दे बैठे। वह 42 रन बनाकर आउट हुए और पवेलियन लौटते समय खुद से नाराज नजर आए।फिर 97 रन पर दो विकेट के बाद पाकिस्तान ने 53 रन के भीतर पांच विकेट गंवा दिए।

शफीक ने 82 गेंदों पर अपना 13वां अर्धशतक पूरा किया, लेकिन इसके बाद सऊद शकील को रॉबिन्सन की गेंद पर अंपायर ने पगबाधा आउट दे दिया। शकील ने रिव्यू लेने में भी समय लिया और अंपायर क्रिस गैफनी ने उन्हें टाइम आउट करार दिया। हालांकि वीडियो रिप्ले में गेंद लेग स्टंप के ऊपरी हिस्से से बाहर जाती हुई दिखाई दी।

इसके तुरंत बाद शफीक भी 61 रन बनाकर रॉबिन्सन की गेंद पर बोल्ड हो गए। उस समय इंग्लैंड के विकेटकीपर जेमी स्मिथ बल्लेबाज के करीब खड़े होकर अतिरिक्त दबाव बना रहे थे।चाय से ठीक पहले अंत के पांच मिनट में जोश टंग ने कप्तान सलमान आगा और अली उस्मान को लगातार दो गेंदों पर आउट कर दिया। इसके तुरंत बाद चाय की घोषणा कर दी गई।चाय के बाद इंग्लैंड को पाकिस्तानी पारी समेटने में ज्यादा वक्त नहीं लगा।

FIH Hockey World Cup में भारत ने पाकिस्तान को 5-3 से हराया

पाकिस्तान के खिलाफ पिछले एक दशक से चले आ रहे अजेय अभियान को जारी रखते हुए भारत ने एफआईएच विश्व कप के अहम मुकाबले में बुधवार को चिर प्रतिद्वंद्वी को 5-3 से हराकर दूसरे दौर में प्रवेश कर लिया जबकि इस हार के साथ पाकिस्तान की पहले दौर से रवानगी तय हो गई।

आठ साल बाद विश्व कप खेल रही पाकिस्तानी टीम पहले क्वार्टर में ही दो गोल गंवाने के बाद दबाव में आ गई थी । दूसरे क्वार्टर में दो गोल करके उसने वापसी की कोशिश की लेकिन पिछले दो ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुकी भारतीय टीम अपेक्षा के अनुरूप उस पर भारी पड़ी।

भारत के लिये कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने (पांचवां और 21वां) पेनल्टी कॉर्नर पर दो गोल किये जबकि अभिषेक (11वां और 24वां) ने दो शानदार फील्ड गोल दागे । हार्दिक सिंह ने 34 वें मिनट में पेनल्टी स्ट्रोक पर गोल किया।पाकिस्तान के लिये हन्नान शाहिद (22वां और 46वां) ने दो फील्ड गोल किये जबकि सूफियान शेख (24वां ) ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला।पूल डी से इंग्लैंड और भारत ने दूसरे दौर के लिये क्वालीफाई कर लिया । इंग्लैंड से पहले दौर में हारने वाली भारतीय टीम दूसरे दौर में कोई अंक लेकर नहीं जायेगी।

भारत और पाकिस्तान विश्व कप में 16 साल बाद आमने सामने थे और पिछली बार दिल्ली में 2010 विश्व कप में भी भारत ने पाकिस्तान को 4-1 से हराया था । वेगनेर स्टेडियम पर दोनों टीमों की टक्कर 1973 में हुई थी जब भारत ने पाकिस्तान को सेमीफाइनल में एक गोल से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।

पाकिस्तान के लिये यह मैच करो या मरो का था जिसे इंग्लैंड ने 4 -1 से हराया था जबकि वेल्स के खिलाफ मैच ड्रॉ रहा था।भारत ने पहले ही मिनट से आक्रामक खेल दिखाया और शुरूआती पंद्रह मिनट में पूरा खेल पाकिस्तान के सर्कल में हुआ । भारत ने पहले क्वार्टर में चार पेनल्टी कॉर्नर बनाये जिनमें से दूसरे पर पांचवें मिनट में हरमनप्रीत ने गोल करके बढत बना ली । इससे पहले सुखजीत ने बायें फ्लैंक से गेंद सर्कल पर अभिषेक को सौंपी लेकिन पाकिस्तानी गोलकीपर अली रजा ने अच्छा बचाव किया।भारत को अगले मिनट तीसरा पेनल्टी कॉर्नर मिला और इस बार पाकिस्तान के गोलकीपर ने हरमनप्रीत की फ्लिक को भांपकर गोल नहीं होने दिया।

अपना पहला विश्व कप खेल रहे आदित्य लालागे जबर्दस्त ड्रिबलिंग का प्रदर्शन करते हुए गेंद लेकर डी के भीतर घुसे लेकिन शानदार मूव को फिनिशिंग टच नहीं दे सके।शानदार फॉर्म में दिख रहे अभिषेक ने भारत को बढत दिलाई। हरमनप्रीत से हवा में गेंद लेकर अभिषेक ने बेहतरीन नियंत्रण का प्रदर्शन करते हुए गोल पर निशाना साधा जबकि पाकिस्तान का पूरा डिफेंस उन्हें घेरे हुए था । गेंद पाकिस्तानी डिफेंडर की स्टिक से लगकर गोल के भीतर गई।

भारत को 13वें मिनट में चौथा पेनल्टी कॉर्नर मिला जिस पर हरमनप्रीत चूक गए । पहले क्वार्टर में भारत ने दो गोल की बढत बना ली थी।पाकिस्तान ने मैच का पहला मूव 18वें मिनट में बनाया लेकिन भारतीय डिफेंस को भेद नहीं सके। अगले मिनट पलटवार पर भारत ने पेनल्टी कॉर्नर बनाया जिस पर वैरिएशन में कामयाबी मिली।

हरमनप्रीत ने सीधे शॉट लेने की बजाय पीछे खड़े राजिंदर को गेंद सौंपी जिनके शॉट को पाकिस्तानी गोलकीपर ने बचा लिया लेकिन गेंद लौटकर हरमनप्रीत के पास आई जिनके दमदार शॉट पर गेंद सीधे गोल के भीतर जाकर रूकी। इससे पहले दीर्घा में किसी दर्शक को गेंद लगने से कुछ सेकंड खेल रोकना पड़ा।

तीन गोल गंवाने के बाद पाकिस्तानी टीम हरकत में आई और 22वें मिनट में इसका नतीजा पहले गोल के रूप में मिला। हन्नान शाहिद को डी के भीतर गेंद मिली जिनका पहला शॉट भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा ने बचा लिया लेकिन रिबाउंड पर उसे रोक नहीं सके।

अभिषेक ने जबर्दस्त कौशल का प्रदर्शन करते हुए अगले ही मिनट पाकिस्तानी डिफेंस को फिर दबाव में ला दिया। जुगराज से मिले लांग पास पर डी के भीतर बेहतरीन ड्रिबल करते हुए गेंद लेकर गए अभिषेक ने निशाना साधा और गेंद पाकिस्तानी डिफेंडर की स्टिक से टकराकर भीतर गई। पाकिस्तान को मैच का पहला पेनल्टी कॉर्नर 24वें मिनट में मिला जिस पर सूफियान ने गोल दागा।

अगले ही मिनट सुमित की गलती पर पाकिस्तान को एक और पेनल्टी कार्नर मिला लेकिन इस बार सुमित ने ही बचाव करके पाकिस्तान को तीसरा गोल नहीं करने दिया। सुखजीत को ब्रेक से ठीक पहले ग्रीनकार्ड मिला जिससे भारत दो मिनट तक दस खिलाड़ियों के साथ खेला।

भारत ने आक्रामक शुरूआत की लेकिन दूसरे क्वार्टर में पाकिस्तान ने दो गोल करके वापसी की कोशिश की । ब्रेक के समय स्कोर 4 -2 था।

भारत के लिये पांचवां गोल पेनल्टी स्ट्रोक पर हार्दिक सिंह ने किया । आदित्य लालागे को पाकिस्तानी डिफेंडर ने अरशद लियाकत ने बाधा पहुंचाई जिसका खामियाजा उन्हें पेनल्टी स्ट्रोक गंवाकर भुगतना पड़ा । पाकिस्तानी टीम ने दबाव में कई गलतियां की और तीन मिनट बाद फिर पेनल्टी कॉर्नर गंवाया।

हरमनप्रीत मैदान पर नहीं थे और अमित रोहिदास की स्लैप हिट गोलकीपर ने रोक दी । भारत के पास 41वें मिनट में गोल करने का सुनहरा मौका था जब सुखजीत लंबे पास पर गेंद लेकर भीतर गए और सामने सिर्फ पाकिस्तानी गोलकीपर था लेकिन वह सही निशाना नहीं लगा सके।

 अगले मिनट पाकिस्तान को पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन सूफियान की ड्रैग फ्लिक को रोहिदास ने रोक लिया । गेंद भीतर ही थी जिसे भारतीय डिफेंस ने मुस्तैदी से बाहर निकाल दिया । आखिरी क्वार्टर की शुरूआत में ही हार्दिक ने मिडफील्ड में गेंद गंवाई और भारत के खाली पड़े डिफेंस का फायदा उठाते हुए हन्नान ने आसान गोल दागा।

भारत को 49वें मिनट में फिर मौका मिला जब अभिषेक ने गेंद छीनकर दिलप्रीत को सौंपी लेकिन वह उस पर कब्जा बरकरार नहीं रख पाये । इसके दो मिनट बाद सर्कल के भीतर सुखजीत से मिले पास पर अभिषेक निशाना नहीं साध सके।

आदित्य लालागे को 56वें मिनट में पीला कार्ड मिलने से भारत को आखिरी मिनटों में दस खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा । पाकिस्तान को आखिरी सीटी बजने से दो मिनट पहले पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन वैरिएशन नाकाम रहा। 

BWF World Championship में पहली बार हुआ गोल्डन प्वाइंट, पर मेजबान भारत के खिलाफ

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इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में चल रही बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में यह पहला मौका है, जब कोई गेम गोल्डन पॉइंट तक पहुंचा है। अशित सूर्या और अमृता प्रमुतेश की भारतीय जोड़ी एमरे सोनमेज़ और यास्मीन बेक्तास से 71 मिनट चले रोमांचक मुकाबले में 21-16, 29-30, 22-24 से हार गयी।पहला गेम आसानी से जीतने के बावजूद, भारतीय जोड़ी दूसरा गेम गोल्डन पॉइंट में हार गयी और निर्णायक गेम में मैच अपने नाम नहीं कर सकी।

क्या होता है गोल्डन प्वाइंट?

इस वर्ल्ड चैंपियनशिप में यह पहला मौका है, जब कोई गेम गोल्डन पॉइंट तक पहुंचा है। दूसरे गेम में भारतीय जोड़ी तुर्की की जोड़ी को कड़ी टक्कर दे रही थी और दोनों जोड़ियां बारी-बारी से पॉइंट जीत रही थीं। जब कोई भी जोड़ी गेम जीतने के लिए जरूरी दो पॉइंट की बढ़त नहीं बना पायी, तो गोल्डन पॉइंट का नियम लागू हुआ। गोल्डन पॉइंट तुरंत उस गेम के विजेता (30-29) का फैसला करता है, और दो पॉइंट की बढ़त वाले सामान्य नियम को दरकिनार कर देता है।

तुर्की की जोड़ी गोल्डन पॉइंट में सफल रही और दूसरा गेम जीतकर मैच में वापसी की। आखिरकार उन्होंने निर्णायक गेम 24-22 से जीता। गोल्डन पॉइंट का एक मशहूर उदाहरण है ऑल इंग्लैंड 2021 फ़ाइनल में विक्टर एक्सेलसन के ख़िलाफ़ ली जी जिया की जीत। उन्होंने पहला गेम 30-29 से जीता और फिर निर्णायक गेम 21-9 से जीतकर खिताब अपने नाम किया था।

दो टीमों के हटने के बाद रिज़र्व लिस्ट से इन नये खिलाड़ियों को आख़िरी समय में एंट्री मिली थी। जब उन्हें इस कन्फर्मेशन के बारे में पता चला, तो वे एक स्टेट चैंपियनशिप खेल रहे थे। अशित ने कहा, “हम स्टेट चैंपियनशिप खेल रहे थे और अब हम यहां हैं। यह हमारे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।”

भारतीय जोड़ी ने कहा, “यह हमारे लिए एक स्प्रिंगबोर्ड (आगे बढ़ने का ज़रिया) का काम करेगा। हमें उम्मीद है कि हम इससे और बेहतर होंगे।”अशित ने कहा, “यह हमारे लिए एक कड़ा मुक़ाबला था। हमने पहला गेम जीता और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े। लेकिन हम सडन डेथ पॉइंट नहीं जीत पाये।” अमृता ने कहा कि यह अनुभव भविष्य के टूर्नामेंट में उनकी मदद करेगा। उन्होंने कहा, “हम यह सीखेंगे कि जब मौका मिले तो मैच पॉइंट कैसे जीतें। आख़िर तक मैच को खींचने का कोई फ़ायदा नहीं है।”


WTC Final की राह हुई आसान, शुभमन ने बोला कैसे भी करके खेलना है फाइनल

गॉल टेस्ट जीतने के बाद विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अंक तालिका में पांचवे स्थान पर ठहरी टीम इंडिया के लिए खुश खबरी लाया है। हालांकि टीम को अभी एक लंबा रस्ता तय करना है लेकिन विश्व टेस्ट चैंपियनशिप खेलने की उम्मीद की किरण बाकी है।

भारतीय कप्तान इस जीत से खुश थे क्योंकि इससे कुछ हद तक दबाव कम हुआ, हालांकि भारत विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में 53.33 प्रतिशत अंकों के साथ पांचवें स्थान पर बना हुआ है। भारत जल्द ही चौथे स्थान पर आ सकता है अगर कोलंबो टेस्ट वह जीत जाता है साथ ही ऑस्ट्रेलिया बांग्लादेश को दूसरे टेस्ट में हरा सकती है तो।

इस मैच से पहले भारत का जीत प्रतिशत 48 था और ऑस्ट्रेलिया का जीत प्रतिशत 83 था जो बांग्लादेश से हार के बाद 77 हो गया। हालांकि पिछले साल दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ घरेलू मैदान पर मिली 2-0 की हार ने भारत को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है।60 अंक प्रतिशत तक पहुंचने के लिए भारत को बाक़ी 8 टेस्ट में 66 और अंक चाहिए।

इसका मतलब है छह जीत और दो ड्रॉ (80 अंक) या सात जीत (84 अंक)। इनमें से पांच टेस्ट ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ होंगे, जिसके विरुद्ध भारत ने 2008 से अब तक घरेलू मैदान पर पिछली पांच सीरीज़ में 12-2 का रिकॉर्ड बनाया है।पिछले WTC चक्र में फ़ाइनलिस्ट टीमों का अंक प्रतिशत 69.44 (दक्षिण अफ़्रीका) और 67.54 (ऑस्ट्रेलिया) था।

6 जीत और दो हार भारत को 62.96 प्रतिशत तक ले जाएंगी, जबकि 7 जीत और 1 हार के साथ वह 68.52 प्रतिशत पर पहुंचेगा।यानी भारत के पास अब भी ग़लती की बहुत कम गुंजाइश बची है।

भारत की स्थिति पर एक नजर:

टेस्ट 10
जीत 5
हार 4
ड्रॉ 1
अंक प्रतिशत 53.15

आगामी सीरीज़:

श्रीलंका (विदेशी धरती पर) 1 टेस्ट
न्यूज़ीलैंड (विदेशी धरती पर) 2 टेस्ट
ऑस्ट्रेलिया (घरेलू धरती पर) 5 टेस्ट

त्रिकोणीय मुकाबले ने भारत को डाला मुश्किल में

न्यूजीलैंड अगर इंग्लैंड से 2-1 या 3-0 से टेस्ट सीरीज हार जाती तो भारत के फायदे की बात होती लेकिन न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 2-1 से सीरीज हराकर भारत की स्थिति थोड़ी और मुश्किल कर दी है। फिलहाल मुकाबला 3 टीमों ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच लग रहा है। भारत के लिए 8 में से जो 2 सबसे ज्यादा मुश्किल मुकाबले हैं वह न्यूजीलैंड के खिलाफ ही देखने को मिलेंगे। अन्य 6 में शायद भारत को उतनी मुश्किल ना हो क्योंकि श्रीलंका से भारत अभ्यास मैच और गॉल टेस्ट जीता है और ऑस्ट्रेलिया भारतीय धरती पर बोर्डर गावस्कर ट्रॉफी खेलेगी।