EPF Interest Credit: 15 जुलाई तक PF खाताधारकों के अकाउंट में आएगा ब्याज, जानें ₹10, 50 लाख और 1 करोड़ के बैलेंस पर कितनी होगी कमाई

EPFO Credit FY26 Interest Update: अगर आप भी अपने पीएफ खाते में ब्याज का पैसा ट्रांसफर होने का इंतजार कर रहे हैं, तो आपके लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज का पैसा 15 जुलाई तक देश के करीब 34 करोड़ खाताधारकों के अकाउंट में क्रेडिट करने जा रहा है।

आमतौर पर पीएफ का ब्याज अक्टूबर या नवंबर के महीने में आता था, लेकिन इस बार नए सेंट्रलाइज्ड आईटी सिस्टम की बदौलत यह काम काफी पहले होने जा रहा है। इस बार कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक की ब्याज राशि बांटी जा रही है। वित्त मंत्रालय ने पिछले महीने ही 8.25% की ब्याज दर को मंजूरी दी है, जो लगातार तीसरे साल भी बरकरार है। आइए जानते हैं कि आपके पीएफ बैलेंस के हिसाब से आपको कितने रुपये का फायदा होने वाला है।

बैलेंस का गणित: ₹10 लाख, 50 लाख और 1 करोड़ पर कितना मिलेगा ब्याज?

8.25% की ब्याज दर सुनने में तो अच्छी लगती है, लेकिन असल में आपके खाते में कितने रुपये आएंगे? इसे आसानी से समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:

बैलेंस का गणित: ₹10 लाख, 50 लाख और 1 करोड़ पर कितना मिलेगा ब्याज?

ध्यान दें: यह गणना इस अनुमान पर आधारित है कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पीएफ बैलेंस में कोई बदलाव नहीं हुआ है। असल में पीएफ ब्याज की गणना हर महीने के रनिंग बैलेंस पर की जाती है, जो आपके मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन या विड्रॉल के हिसाब से बदल सकती है।

बिना किसी रिस्क के बंपर और टैक्स-फ्री कमाई

इस कैलकुलेशन से साफ है कि पीएफ पर मिलने वाला फायदा बेहद शानदार है। उदाहरण के लिए, जिस कर्मचारी के खाते में ₹50 लाख का कॉर्पस है, उसे बिना किसी मार्केट रिस्क और बिना एक भी रुपया निकाले सीधे ₹4 लाख से ज्यादा की कमाई होगी। वहीं, ₹1 करोड़ का बैलेंस रखने वालों को ₹8.25 लाख का ब्याज मिलेगा, जो कई लोगों की शुरुआती सालाना सैलरी से भी कहीं ज्यादा है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह सुरक्षित और सरकारी गारंटी वाला निवेश है।

KYC अपडेट रखें, वरना फंस सकता है पैसा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपका केवाईसी डिटेल्स जैसे पैन या बैंक अकाउंट की जानकारी पुरानी या अधूरी है, तो उसे तुरंत ठीक कर लें। पीएफ ब्याज का पैसा अटकने या क्लेम रिजेक्ट होने की सबसे बड़ी वजह अधूरा केवाईसी ही होती है। आप ईपीएफओ पोर्टल या उमंग ऐप के जरिए इसे चेक कर सकते हैं।

स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: कैसे चेक करें अपना ईपीएफ बैलेंस?

यह जांचने के लिए कि आपके खाते में ब्याज का पैसा आया है या नहीं, आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक्टिवेट होना चाहिए। इसके बाद इन स्टेप्स को फॉलो करें:

स्टेप 1: सबसे पहले ईपीएफओ के ‘Member Passbook’ पोर्टल पर जाएं।

स्टेप 2: अपना UAN, पासवर्ड और कैप्चा कोड दर्ज करके लॉग इन करें।

स्टेप 3: आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा, उसे दर्ज कर अपनी पहचान वेरिफाई करें।

स्टेप 4: इसके बाद ‘View Passbook’ के विकल्प को चुनें। यहां आपको अपना लेटेस्ट पीएफ बैलेंस और वित्त वर्ष 2025-26 का क्रेडिट हुआ ब्याज दिख जाएगा।

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भारत में सरकारी नौकरी आज भी सुरक्षित करियर और अच्छी सैलरी की वजह से लोगों की पहली पसंद मानी जाती है। खासकर अगर आपकी नौकरी सरकारी बैंक में हो तो अलग ही बात होती है। हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एक स्केल-3 मैनेजर की बताई जा रही सैलरी स्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे इस डाक्युमेंट में सालाना करीब 35.24 लाख रुपये की ग्रॉस सैलरी दिखाई गई है, लेकिन कई लोगों का कहना है कि इसकी पूरी तस्वीर कुछ अलग है। इसे देखने के बाद लोग सरकारी बैंक कर्मचारियों की सैलरी और उससे जुड़ी सुविधाओं को लेकर अलग-अलग राय दे रहे हैं।

यूजर ने पोस्ट किया सैलरी स्लिप

एक्स (X) पर शेयर की गई पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया, “लोग अक्सर कहते हैं कि एसबीआई कर्मचारियों की जिंदगी पूरी तरह से सेटल होती है, लेकिन इस स्केल-3 मैनेजर की सैलरी स्लिप देखने के बाद आपकी सोच बदल सकती है।” पोस्ट करने वाले यूजर ने दावा किया कि, संबंधित कर्मचारी ने करीब आठ साल पहले एसबीआई में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) के रूप में नौकरी शुरू की थी। बाद में पदोन्नति मिलने के बाद वह स्केल-3 मैनेजर बन गया। पोस्ट के साथ शेयर किए गए वित्त वर्ष 2025-26 के फॉर्म-16 के अनुसार, उसकी कुल वार्षिक ग्रॉस सैलरी 35,24,315.88 रुपये बताई गई है।

व्यक्ति ने कही ये बात

पोस्ट शेयर करने वाले व्यक्ति ने ये भी साफ किया कि ग्रॉस सैलरी को कर्मचारी की हर महीने मिलने वाली आय नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस रकम में लीव फेयर कंसेशन (LFC) एनकैशमेंट और लीव एनकैशमेंट शामिल हैं, जो सैलरी के बार-बार मिलने वाले हिस्से के बजाय एक बार या कभी-कभी मिलने वाले फायदे हैं। पोस्ट में आगे लिखा गया, “इसके अलावा, हर महीने आयकर, एनपीएस (NPS), ईपीएफ (EPF), होम लोन की ईएमआई, कार लोन और टू-व्हीलर लोन जैसी कई मदों में कटौती होती है। इसलिए फॉर्म-16 में दिखाई गई ग्रॉस सैलरी और हर महीने बैंक खाते में आने वाली वास्तविक रकम में काफी अंतर हो सकता है।”

सोशल मीडिया पर किया कमेंट

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच नई बहस शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “फॉर्म-16 देखने में भले ही शानदार लगता हो, लेकिन हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी असली स्थिति बताती है। ग्रॉस सैलरी के बड़े आंकड़े हमेशा बैंक कर्मचारियों की वास्तविक कमाई नहीं दिखाते।” दूसरे यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा, “यही सबसे बड़ी बात है। हम अक्सर सिर्फ बड़े आंकड़े देखकर राय बना लेते हैं, जबकि टैक्स, कटौतियां, जिम्मेदारियां और आखिर में हाथ में आने वाली रकम को नजरअंदाज कर देते हैं।”

एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “आठ साल की नौकरी के बाद स्केल-3 पर करीब 2 लाख रुपये इन-हैंड सैलरी मिल रही है। मेरे हिसाब से यह काफी अच्छा पैकेज है। इतने ही अनुभव वाले कई क्लास-ए गजेटेड अधिकारियों से भी यह बेहतर माना जा सकता है।”

EPF Interest Credit: बड़ी खुशखबरी! EPFO ने 8 करोड़ PF खाते में ब्याज जमा करने का दिया आदेश; इन 4 तरीकों से करें चेक

EPF Interest Rate: करीब 8 करोड़ EPF खाताधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज देने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसके साथ ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को सदस्यों के खातों में ब्याज की रकम जमा करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

EPFO ने अपने हालिया सर्कुलर में कहा है कि केंद्र सरकार ने Employees’ Provident Fund Scheme, 1952 के पैरा 60(1) के तहत 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दे दी है। अब सभी संबंधित कार्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द यह ब्याज सदस्यों के EPF खातों में जमा करें।

इस बार जल्दी आएगा ब्याज

इस बार EPFO ने अपने डेटाबेस का कंसालिडेशन (Database Consolidation) किया है। साथ ही सॉफ्टवेयर सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है।

इसी वजह से ब्याज जमा करने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा तेज और आसान रहने की उम्मीद है। पहले सभी खातों में ब्याज जमा होने में एक से दो महीने तक लग जाते थे। लेकिन इस बार प्रक्रिया काफी तेज हो सकती है।

लंबे समय से इंतजार कर रहे थे सदस्य

EPF सदस्य काफी समय से अपने खातों में ब्याज आने का इंतजार कर रहे थे। दरअसल, मार्च 2026 में EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दी थी। इसके बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा गया।

नियमों के मुताबिक, CBT की मंजूरी के बाद प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के पास जाता है। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही ब्याज खातों में जमा किया जाता है।

लगातार तीसरे साल नहीं बदली ब्याज दर

वित्त मंत्रालय ने जून 2026 में 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दे दी थी। इसके साथ ही लगातार तीसरे साल EPF पर ब्याज दर 8.25% ही रखी गई है। अब औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद EPFO ने ब्याज की रकम खातों में जमा करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

यानी अगर आपका भी EPF खाता है, तो आने वाले दिनों में आपके खाते में वित्त वर्ष 2025-26 का 8.25% ब्याज दिखाई देने लगेगा।

EPF खाते में ब्याज आया या नहीं? ऐसे करें चेक

अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके EPF खाते में 8.25% ब्याज जमा हुआ है या नहीं, तो इन आसान तरीकों से चेक कर सकते हैं।

1. EPFO Member Passbook से चेक करें

  • EPFO Member Passbook पोर्टल पर जाएं।
  • अपना UAN और पासवर्ड डालकर लॉग इन करें।
  • अपना EPF खाता चुनें।
  • पासबुक खोलें।
  • यहां Interest Update या नई एंट्री में जमा हुआ ब्याज दिखाई देगा।

2. UMANG ऐप से चेक करें

  • मोबाइल में UMANG ऐप खोलें।
  • EPFO सेक्शन में जाएं।
  • View Passbook पर टैप करें।
  • UAN और OTP की मदद से लॉग इन करें।
  • पासबुक में ब्याज की एंट्री चेक करें।

3. SMS से बैलेंस जानें

  • अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर यह SMS भेजें:
  • EPFOHO UAN ENG
  • अगर हिंदी में जानकारी चाहिए, तो ENG की जगह HIN लिखें।
  • कुछ ही देर में EPF बैलेंस और ब्याज की जानकारी SMS के जरिए मिल जाएगी।

4. मिस्ड कॉल देकर चेक करें

  • अपने UAN से जुड़े रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल दें।
  • कुछ सेकंड में SMS आएगा।
  • इसमें EPF बैलेंस और खाते की जानकारी मिल जाएगी।

EPF Scheme 2026: बीमारी समेत 6 कारणों से कर सकेंगे आंशिक निकासी, जानिए कितना मिलेगा पैसा

EPF Scheme 2026: सैलरी अधिक लें या पीएफ खाते में ज्यादा पैसे, फैसले से पहले करें ये कैलकुलेशन, नहीं तो लगेगा तगड़ा शॉक

EPF Scheme 2026: नए लेबर कोड के तहत एंप्लॉयीज को अपना पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन एक लेवल तक कम करने की सहूलियत मिल रही है ताकि वह अपनी मंथली टेक-होम सैलरी बढ़ा सकें। हालांकि इससे सैलरी तुरंत अधिक मिल तो जाएगी लेकिन लॉन्ग टर्म में रिटायरमेंट के बनाया जा रहा पैसा काफी कम हो सकता है। ऐसे में आखिरी फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि क्या जितनी सैलरी अधिक मिलेगी, वह सही तरीके से निवेश करेंगे या खर्च हो जाएगा। वित्तीय जानकारों के मुताबिक बस इसी से तय होगा कि एंप्लॉयीज को सैलरी अधिक लेनी चाहिए या पीएफ खाते में अधिक पैसा जाते देने रहना चाहिए।

नए नियमों से कैसे बढ़ जाएगी टेक-होम सैलरी?

जैगल कंपनी टैक्सप्लानर के को-फाउंडर और सीईओ सुधीर कौशिक का कहना है कि ईपीएफ खाते में में 12% ही जमा होगा लेकिन असली मुद्दा यह है कि यह 12% सैलरी के किस हिस्से पर लागू होता है। पहले के फ्रेमवर्क कई कंपनियां पीएफ को या तो एक्चुअल बेसिक सैलरी पर काटते थे या हर महीने स्टैटुअरी वेज सीलिंग ₹15,000 थी, जिससे कम से कम हर महीने पीएफ खाते में ₹1,800 जाता ही था। अब नए लेबर कोड फ्रेमवर्क में 12% का अनिवार्य कॉन्ट्रिब्यूशन अभी भी सिर्फ स्टैटुअर वेज सीलिंग तक ही लागू है। इस सीमा से ऊपर सैलरी पर कॉन्ट्रिब्यूशन आमतौर पर वालंटरी होता है और यह एंप्लॉयर-एंप्लॉयीज की आपसी सहमति से तय होता है। ऐसे में जहां एंप्लॉयीज हायर सैलरी बैस पर पीफ खाते में पैसे डाल रहे हैं, वहां एंप्लॉयर-एंप्लॉयी मिलकर इसे हर महीने ₹1800 तक सीमित रख सकते हैं और टेक-होम सैलरी बढ़ा सकते हैं।

किसके लिए सैलरी बढ़ाने का विकल्प शानदार नहीं

अगर पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करने का विकल्प चुनते हैं तो टेक-होम सैलरी बढ़ जाएगी लेकिन रिटायरमेंट कॉर्पस कम हो जाएगा। प्रोमोर फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर और नेटवर्क एफपी की को-फाउंडर निशा सांघवी का कहना है कि कुछ खास एंप्लॉयीज के लिए सैलरी बढ़वाने का विकल्प आकर्षक नहीं है-

जो एंप्लॉयीज अपने रिटायरमेंट की मुख्य बचत को लेकर ईपीएफ पर निर्भर हैं।

जिनकी कंपनियां पूरी बैसिक सैलरी का 12% हिस्सा पीएफ खाते में डालती हैं क्योंकि कम पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन चुनने पर कंपनियां भी स्टैटुअरली लिमिट से ऊपर कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर सकती हैं और एंप्लॉयर-फंडेड रिटायर बेनेफिट खत्म हो जाएगा।

40 वर्ष से अधिक की उम्र के एंप्लॉयीज क्योंकि उनकी कमाई की उम्र कम रह जाती है तो पीएफ खाते में जमा घटती है तो असर बहुत बड़ा होता है।

जिनकी बचत की आदत नहीं या कोई इमरजेंसी फंड नहीं है।

मार्केट के उतार-चढ़ाव से घबराने वाले निवेशक। ईपीएफ पर अभी भी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है, जो अधिकतर सब्सक्राइबर्स के लिए टैक्स-एफिसिएंट बना हुआ है और इतना अधिक ब्याज देने वाला सुरक्षित फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स मुश्किल है।

कितना पड़ेगा असर?

अब बात करते हैं टेक-होम सैलरी अधिक करने का रिटायरमेंट कॉर्पस पर असर की। इसे लेकर निशा सांघवी का कहना है कि मान लीजिए किसी एंप्लॉयी की बेसिक सैलरी ₹50 हजार है और 12% के हिसाब से हर महीने ईपीएफ खाते में ₹6 हजार जमा होता है। नए नियमों के तहत सिर्फ ₹1800 जमा करना अनिवार्य है तो इसे चुनने पर हर महीने सैलरी ₹4200 बढ़ जाएगी लेकिन अगर यही ईपीएफ खाते में जाता है तो 8.25% की दर से 25 साल में लगभग ₹41-₹42 लाख का फंड तैयार कर देता। निशा का कहना है कि अगर कंपनी ने भी अपना वालंटरी कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर दिया तो रिटायरमेंट कॉर्पस को झटका लगभग दोगुना बढ़कर लगभग ₹80 लाख से अधिक हो सकता है। इसके अलावा टैक्स का एंगल है भी है। टेक-होम सैलरी बढ़ती है तो उस हिसाब से टैक्स देनदारी भी बढ़ सकती है, जब ईपीएफ में रखा पैसा अधिकतर टैक्स-फ्री ही होता है।

तो किसके लिए बेहतर है पीएफ खाते में जमा कम करना?

निशा के मुताबिक कुछ ही मामलों में पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन में कटौती करना सही हो सकता है। जैसे कि अगर किसी एंप्लॉयीज को 12-14% की अधिक दर से लोन की किश्त भरनी है तो इसका प्रीपेमेंट ईपीएफ के 8.25% की दर से ब्याज हासिल करने से बेहतर है। इसके अलावा ऐसे एंप्लॉयीज के लिए भी ईपीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करना बेहतर है, जो टेक-होम सैलरी को बेहतर तरीके से निवेश कर सकें।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

₹4000 तक बढ़ेगी टेक-होम सैलरी, लेकिन रिटायरमेंट पर होगा ₹80 लाख का भारी नुकसान! एक्सपर्ट से समझिए नए EPF नियम का पूरा गणित

New EPF Rules Take Home Salary vs Retirement: नए लेबर कोड के तहत मिलने वाली फ्लैक्सिबिलिटी के कारण अब कई कंपनियों में कर्मचारियों को भविष्य निधि (EPF) में अपना योगदान घटाकर न्यूनतम वैधानिक सीमा पर लाने का विकल्प मिल सकता है। ऐसा करने से आपकी हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी तो तुरंत बढ़ जाएगी, लेकिन वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि यह तात्कालिक खुशी आपके रिटायरमेंट के बड़े फंड को भारी चपत लगा सकती है।

यह फैसला पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप हर महीने बचने वाले एक्स्ट्रा पैसे का क्या करेंगे? उसे अनुशासन के साथ सही जगह निवेश करेंगे या सिर्फ खर्च कर देंगे? आइए एक्सपर्ट्स के हवाले से समझते हैं कि पीएफ में कटौती करने का यह नया नियम क्या है और इसके दूरगामी वित्तीय परिणाम क्या हो सकते हैं।

क्या बदल गया है ईपीएफ का नया फ्रेमवर्क?

टैक्सस्पैनर(Taxspanner) के को-फाउंडर और सीईओ सुधीर कौशिक के मुताबिक, ईपीएफ योगदान का मूल सिद्धांत अभी भी 12 प्रतिशत ही है, लेकिन असली पेंच उस ‘वेतन आधार’ का है जिस पर यह 12% लागू होता है।

पहले का नियम: कई कंपनियां या तो वास्तविक बेसिक सैलरी पर 12% पीएफ काटती थीं या इसे ₹15000 प्रति माह की वैधानिक सीमा पर सीमित रखती थीं, जिससे न्यूनतम अनिवार्य पीएफ योगदान ₹1800 प्रति माह होता था।

नया नियम: नए लेबर कोड के तहत, केवल वैधानिक वेतन सीमा (₹15000) तक ही 12% का अनिवार्य योगदान लागू रहेगा। इस सीमा से अधिक वेतन पर पीएफ काटना पूरी तरह स्वैच्छिक होगा, जो कंपनी और कर्मचारी की आपसी सहमति पर निर्भर करेगा।

इसका मतलब है कि अगर आप वर्तमान में अपनी पूरी बेसिक सैलरी पर अधिक पीएफ कटवा रहे हैं, तो आप और आपकी कंपनी आपसी सहमति से इसे घटाकर केवल अनिवार्य ₹1800 प्रति माह के स्तर पर ला सकते हैं। इससे आपकी मंथली टेक-होम सैलरी तो बढ़ जाएगी, लेकिन रिटायरमेंट फंड छोटा हो जाएगा।

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किन्हें पीएफ योगदान घटाने की गलती ‘बिल्कुल नहीं’ करनी चाहिए?

प्रोमोर फिनटेक की को-फाउंडर और डायरेक्टर निशा संघवी के अनुसार, यह विकल्प ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए सही नहीं है। इन 5 तरह के लोगों को पीएफ कम करने से बचना चाहिए:

जिनकी मुख्य बचत सिर्फ ईपीएफ है: अधिकांश वेतनभोगियों के लिए पीएफ ही एकमात्र ऐसी बचत है जो हर महीने ऑटोमैटिक होती है। बिना निवेश अनुशासन के, हाथ में आने वाला एक्स्ट्रा पैसा सिर्फ खर्चों में उड़ जाएगा।

कंपनी का मैचिंग कॉन्ट्रिब्यूशन खोने का डर: अगर कंपनी आपकी पूरी बेसिक सैलरी पर 12% योगदान दे रही है और आपने अपना स्वैच्छिक हिस्सा घटा लिया, तो मुमकिन है कि कंपनी भी वैधानिक सीमा से ऊपर अपना योगदान बंद कर दे। यानी आप कंपनी की तरफ से मिलने वाला फ्री रिटायरमेंट बेनिफिट खो देंगे।

40 और 50 की उम्र वाले कर्मचारी: जिनके पास नौकरी के कम साल बचे हैं, उन्हें कंपाउंडिंग का फायदा कम मिलता है। इसलिए योगदान घटाने से उनके रिटायरमेंट फंड पर बहुत बड़ा और बुरा असर पड़ेगा।

रूढ़िवादी या सेफ इन्वेस्टर्स: वित्तीय वर्ष 2026 के लिए ईपीएफ 8.25% की सरकारी गारंटीड ब्याज दर दे रहा है, जो पूरी तरह टैक्स-फ्री है। इतनी सुरक्षा के साथ इतना बढ़िया रिटर्न किसी अन्य फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट में मिलना नामुमकिन है।

टेक-होम सैलरी बढ़ाने का लॉन्ग-टर्म नुकसान

एक्सपर्ट निशा संघवी ने एक आसान उदाहरण से इसके वित्तीय नुकसान को समझाया है:

मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹50000 है। अभी 12% के हिसाब से उसका पीएफ योगदान ₹6000 प्रति माह जाता है।

नए नियमों के तहत अगर वह न्यूनतम अनिवार्य सीमा चुनता है, तो उसका पीएफ केवल ₹1800 कटेगा, जिससे उसकी टेक-होम सैलरी में हर महीने ₹4200 बढ़ जाएंगे।

कंपाउंडिंग का नुकसान: अगर यह ₹4200 पीएफ खाते में ही रहते और 8.25% की दर से बढ़ते, तो 25 सालों में यह रकम करीब ₹41 से ₹42 लाख बन जाती।

डबल झटका: अगर आपकी देखा-देखी आपकी कंपनी ने भी एक्स्ट्रा हिस्से पर अपना मैचिंग कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर दिया, तो आपके रिटायरमेंट कॉर्पस में सीधे ₹80 लाख से ज्यादा का बड़ा नुकसान होगा।

इसके अलावा, जो एक्स्ट्रा पैसा आपकी टेक-होम सैलरी में जुड़ेगा, वह आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से पूरी तरह टैक्स के दायरे में आएगा, जबकि पीएफ में रहने पर यह टैक्स-फ्री कंपाउंड होता। यहां आपको बता दें कि सालाना ₹2.5 लाख से अधिक के कर्मचारी योगदान के ब्याज पर ही टैक्स लगता है।

किन्हें चुनना चाहिए कम पीएफ का विकल्प?

यह विकल्प केवल दो ही परिस्थितियों में फायदेमंद हो सकता है:

महंगे लोन चुकाने के लिए: अगर आप 12 से 14 प्रतिशत की भारी ब्याज दर वाला पर्सनल या क्रेडिट कार्ड लोन चुका रहे हैं, तो पीएफ घटाकर लोन का प्री-पेमेंट करना 8.25% के पीएफ रिटर्न से बेहतर परिणाम देगा।

अनुशासित इक्विटी निवेशक: जो लोग हाथ में आने वाले इस अतिरिक्त पैसे को बिना चूके हर महीने लंबी अवधि के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में डाइवर्ट करने का पक्का अनुशासन रखते हैं।

एक्सपर्ट की सलाह है कि कोई भी फैसला लेने से पहले अपनी कंपनी की ईपीएफ पॉलिसी जांचें। अगर अतिरिक्त पैसा केवल रोजमर्रा के सामान्य खर्चों या लाइफस्टाइल को अपग्रेड करने में जाने वाला है, तो पीएफ योगदान को बिल्कुल न छुएं। आज की थोड़ी सी नकदी का आराम, कल के बुढ़ापे के बड़े फंड को दांव पर लगाने जैसा है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

EPF Scheme 2026: 1 साल के अंदर छोड़ दी नौकरी तो क्या निकाल सकते हैं PF का पूरा पैसा? समझिए एलिजिबल मेंबर बैलेंस और टैक्स का पूरा नियम

EPF Scheme 2026: केंद्र सरकार ने नई कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना, 2026 को नोटिफाई कर दिया है। इसके तहत ईपीएफ खातों से आंशिक निकासी को लेकर एक आसान और नया फ्रेमवर्क पेश किया गया है। आपको बता दें कि सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत नोटिफाई की गई यह नई स्कीम छह दशक पुरानी ईपीएफ योजना, 1952 की जगह लागू हुई है।

नए नियमों में पीएफ सदस्यों को अपनी अलग-अलग जरूरतों के लिए अपने एलिजिबल बैलेंस का 100 प्रतिशत तक हिस्सा निकालने की इजाजत है। इसके अलावा एक नया नियम भी जोड़ा गया है। इस नियम के तहत अब हर सदस्य को अपने ईपीएफ खाते में एक न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना अनिवार्य होगा।

क्या बदल रहा है निकासी का नियम?

नए नियमों के तहत ईपीएफ सदस्य आंशिक निकासी के लिए डेजिगनेटेड पोर्टल से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यहां जानना जरूरी है कि ये विड्रॉल एक जरूरी शर्त के अधीन होगा। योजना के नियमों के मुताबिक कमिश्नर निर्दिष्ट पोर्टल पर किसी सदस्य के आवेदन पर आंशिक निकासी को मंजूरी दे सकता है, जो कि सदस्य के खाते में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की आवश्यकता के अधीन होगा। नई योजना में इस मिनिमम बैलेंस को पहली बार परिभाषित किया गया है।

क्या होता है Eligible Member Balance और Minimum Balance?

नोटिफिकेशन के मुताबिक मिनिमम बैलेंस का गणित कुछ इस तरह तय किया गया है। न्यूनतम बैलेंस का मतलब उस राशि से है जो सदस्य के खाते में जमा कुल योगदान (जिसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों का हिस्सा और उस पर मिलने वाला ब्याज शामिल है) के 25 प्रतिशत के बराबर हो। किसी भी आंशिक निकासी का लाभ देने के बाद यह राशि सदस्य के खाते में अनिवार्य रूप से बची रहनी चाहिए। आसान शब्दों में कहें तो आपकी अब तक की कुल ईपीएफ बचत (आपका योगदान + कंपनी का योगदान + ब्याज) का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा विड्रॉल के बाद भी आपके खाते में ब्लॉक रहेगा।

इस अनिवार्य 25 प्रतिशत मिनिमम बैलेंस को घटाने के बाद जो रकम बचती है उसे एलिजिबल मेंबर बैलेंस कहा जाता है। कोई भी कर्मचारी सिर्फ इसी एलिजिबल मेंबर बैलेंस को ही खाते से निकाल सकता है।

1 साल के अंदर नौकरी छोड़ने पर क्या हैं नियम?

यह योजना उन कर्मचारियों को बड़ी राहत देती है जो अपनी नौकरी शुरू करने के 12 महीने पूरे होने से पहले ही काम छोड़ देते हैं। नए नियमों के मुताबिक कोई सदस्य 1 साल के अंदर भी नौकरी छोड़ देता है तो भी वह अपने पीएफ के पार्शियल विड्रॉल का हकदार होगा। हालांकि ऐसा सदस्य सिर्फ विड्रॉल की तारीख तक उपलब्ध अपने एलिजिबल मेंबर बैलेंस की सीमा तक ही पैसा निकाल सकेगा।

कब और किन जरूरतों के लिए निकाल सकते हैं 100% एलिजिबल बैलेंस?

ईपीएफ की कुल 12 महीने की सदस्यता पूरी करने के बाद, सदस्य अपनी अलग अलग व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों के लिए अपने एलिजिबल मेंबर बैलेंस का 100 प्रतिशत तक हिस्सा निकाल सकते हैं। इन जरूरतों में नीचे दी गई बातें शामिल हैं-

खुद या परिवार का इलाज

खुद या परिवार में शिक्षा

खुद या परिवार में शादी

घर या फ्लैट खरीदना

घर बनाने के लिए जमीन खरीदना

घर का निर्माण करना

होम लोन चुकाना

मौजूदा घर का रेनोवेशन/सुधार करना

इसके अलावा विशेष परिस्थितियों में भी 12 महीने की सदस्यता पूरी होने के बाद 100% एलिजिबल मेंबर बैलेंस निकालने की अनुमति दी जा सकती है।

कितनी बार निकाला जा सकता है पैसा?

नई योजना में इस बात की भी सीमा तय की गई है कि कोई सदस्य अपनी पूरी सदस्यता के दौरान अलग-अलग उद्देश्यों के लिए कितनी बार पैसा निकाल सकता है-

शिक्षा के लिए: पूरी सदस्यता के दौरान अधिकतम 10 बार विड्रॉल

शादी के लिए: पूरी सदस्यता के दौरान अधिकतम 5 बार विड्रॉल

घर/आवास संबंधी काम के लिए: अधिकतम 5 बार विड्रॉल।

विशेष परिस्थितियों में: एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 2 बार विड्रॉल।

क्यों जरूरी है मिनिमम बैलेंस का यह नया नियम?

इससे पहले लागू ईपीएफ निकासी के नियम अलग-अलग उद्देश्यों और अलग-अलग शर्तों से जुड़े होते थे जिसके कारण कई मामलों में सदस्य अपने खाते का अधिकांश बैलेंस निकाल लेते थे। नया फ्रेमवर्क एलिजिबल मेंबर बैलेंस की एक समान अवधारणा को लागू करके पूरे विड्रॉल प्रोसेस निकासी प्रक्रिया को स्टैंडराइज करता है। इसके साथ ही यह नियम यह भी सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा हमेशा इन्वेस्टेड रहे ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रहे।

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ITR 2026: अपने इनकम टैक्स रिटर्न पर चाहिए मैक्सिमम रिफंड तो आईटीआर फाइल करते समय अपनाएं ये 5 शानदार तरीके

Income Tax Return Best Strategies: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन आते ही टैक्सपेयर्स के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि वे अपना टैक्स रिफंड कैसे बढ़ाएं। टैक्स रिफंड को अधिकतम करना सिर्फ आखिरी समय में डिडक्शन ढूंढने तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी शुरुआत इस बात से होती है कि आपका टैक्स रिटर्न आपकी इनकम, निवेश और पहले से भुगतान किए गए टैक्स को बिल्कुल सही-सही दर्शाता हो।

क्या होता है इनकम टैक्स रिफंड?

इनकम टैक्स रिफंड तब जारी किया जाता है जब किसी वित्तीय वर्ष के दौरान टैक्सपेयर द्वारा चुकाया गया टैक्स, उसकी वास्तविक टैक्स देनदारी से अधिक हो जाता है। यह एक्स्ट्रा टैक्स सोर्स पर टैक्स कटौती (TDS), सोर्स पर टैक्स कलेक्शन (TCS) या एडवांस टैक्स के रूप में जमा हो सकता है। टैक्सपेयर्स अपना आईटीआर दाखिल करके इस एक्स्ट्रा टैक्स अमाउंट को क्लेम कर सकते हैं। आपको बता दें कि रिटर्न फाइल करने के बाद रिफंड का स्टेटस इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल और दूसरे ऑप्शन की मदद से ऑनलाइन ट्रैक भी किया जा सकता है।

क्लियरटैक्स की टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन के मुताबिक टैक्सपेयर्स को अपने लिए लागू सभी उपलब्ध छूटों और कटौतियों को क्लोजली रिव्यू करना चाहिए। दोनों टैक्स रिजीम के फायदों की तुलना करनी चाहिए और यह वेरिफाई करना चाहिए कि टैक्स डॉक्युमेंट्स में दी गई जानकारी ऑफिशियल रिकॉर्ड से मैच करती हो। आपकी छोटी सी गलती भी रिफंड में देरी कर सकती है या नोटिस का कारण बन सकती है।

मैक्सिमम रिफंड पाने की 5 शानदार स्ट्रैटिजी

अपने इनकम टैक्स रिफंड को अधिकतम करने के लिए टैक्सपेयर्स को नीचे दिए गए तरीकों को अपनाना चाहिए:

1- दोनों टैक्स रिजीम (Old vs New) की तुलना करें

रिटर्न फाइल करने से पहले पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाओं के तहत अपनी टैक्स देनदारी की तुलना करें। उस रिजीम का चयन करें जिसमें आपका टैक्स आउटगो सबसे कम हो। अगर वित्त वर्ष के दौरान आपका अधिक टीडीएस कट चुका है तो सही रिजीम चुनकर आप अपना रिफंड काफी हद तक बढ़ा सकते हैं।

2- ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत डिडक्शंस का पूरा लाभ उठाएं

अगर आप ओल्ड टैक्स रिजीम चुनते हैं तो आप अलग-अलग कटौतियों के माध्यम से अपनी टैक्स योग्य इनकम को कम कर सकते हैं। इसके लिए नीचे दी गई जानकारी को देखें-

सेक्शन 80C: पीपीएफ, ईएलएसएस, ईपीएफ, एनएससी, जीवन बीमा प्रीमियम और 5 साल की टैक्स-सेविंग एफडी में निवेश करके आप ₹1.5 लाख तक की कटौती का दावा कर सकते हैं।

सेक्शन 80D: हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम के माध्यम से ₹25000 से ₹50000 तक की अतिरिक्त टैक्स बचत का दावा किया जा सकता है। यह क्लेम इंश्योर्ड शख्स और परिवार के सदस्यों की उम्र पर निर्भर करता है।

सेक्शन 24(b) और HRA: सैलरीड कर्मचारी निर्धारित शर्तों के अधीन हाउस रेंट अलाउंस (HRA) छूट का दावा कर सकते हैं। साथ ही खुद के घर के होम लोन के ब्याज पर ₹2 लाख तक की कटौती पा सकते हैं।

3- नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का अतिरिक्त फायदा

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में योगदान करने वाले लोग सेक्शन 80C की सीमा के ऊपर और अतिरिक्त सेक्शन 80CCD(1B) के तहत ₹50000 तक की एक्स्ट्रा कटौती का दावा कर सकते हैं। सेक्शन 80CCD(2) के तहत एंप्लॉयर के योगदान पर भी टैक्स लाभ मिलता है। यह कटौती दोनों टैक्स रिजीम (पुरानी और नई) में उपलब्ध है। इसके तहत एंप्लॉयर की कैटेगिरी के आधार पर ओल्ड रिजीम में वेतन के 10 प्रतिशत तक और न्यू रिजीम में 14 प्रतिशत तक के एंप्लॉयर योगदान पर दावा किया जा सकता है।

4- स्टैंडर्ड डिडक्शन और टैक्स रिबेट

सैलरीड टैक्सपेयर्स टैक्स योग्य इनकम की गणना करते समय ऑटोमेटिकली स्टैंडर्ड डिडक्शन के हकदार होते हैं। यह कटौती ओल्ड रिजीम के तहत ₹50000 और न्यू रिजीम के तहत ₹75000 है। इसके अलावा पात्र टैक्सपेयर्स सेक्शन 87A के तहत रिबेट का लाभ उठा सकते हैं जिससे अगर टैक्स योग्य आय निर्धारित सीमा के भीतर रहती है तो टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है।

इसके अलावा फैमिली पेंशन प्राप्तकर्ताओं को सेक्शन 57(iia) के तहत कटौती मिलती है। यह कटौती ओल्ड रिजीम में ₹15000 तक और न्यू रिजीम में ₹25000 तक उपलब्ध है, जो टैक्स योग्य आय को कम करके रिफंड की पात्रता में सुधार करती है।

5- रिफंड क्लेम करने के लिए अपनाएं ये जरूरी स्टेप्स

रिफंड का दावा करने के लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है, भले ही टैक्सपेयर के लिए सामान्य रूप से रिटर्न दाखिल करना जरूरी न हो। रिफंड प्रक्रिया को तेज करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

सही ITR फॉर्म चुनें: इनकम के सोर्स, आवासीय स्थिति और टैक्सपेयर की श्रेणी के आधार पर सही फॉर्म चुनें। गलत फॉर्म चुनने से रिपोर्टिंग में त्रुटियां हो सकती हैं और रिफंड अटक सकता है।

आय की सटीक गणना: अपनी आय के सभी स्रोतों, लागू कटौतियों और छूटों को सही ढंग से घोषित करें।

TDS डिटेल वेरिफाई करें: रिटर्न में पहले से भरे हुए टीडीएस डिटेल का फॉर्म 16, फॉर्म 16A या अन्य संबंधित रिकॉर्ड से मिलान जरूर करें ताकि कोई विसंगति न रहे।

सही बैंक खाते का डिटेल दें: अपने एक्टिव बैंक खाते की सही जानकारी दर्ज करें क्योंकि रिफंड सीधे रिटर्न से लिंक बैंक खाते में ही क्रेडिट किया जाता है। गलत जानकारी देने से ट्रांसफर फेल हो सकता है।

तुरंत ई-वेरिफिकेशन पूरा करें: रिटर्न दाखिल करने के बाद जितनी जल्दी हो सके इसे ई-वेरीफाई करें। वेरिफिकेशन के बाद ही रिटर्न प्रोसेस होता है और समय पर वेरिफिकेशन से रिफंड जल्दी जारी होने में मदद मिलती है।

EPS 2026 लागू होने के बाद क्या प्राइवेट सेक्टर के एंप्लॉयीज की पेंशन बढ़ जाएगी?

एंप्लॉयीज पेशन स्कीम (ईपीएस), 2026 लागू हो गई है। इसे ईपीएस,1971 और ईपीएस,1995 की जगह लागू किया गया है। ईपीएस, 2026 को सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत लागू किया गया है। नई स्कीम में पुरानी स्कीम के प्रावधान को बनाए रखा गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नई स्कीम में न्यूनतम पेंशन का अमाउंट बढ़ाया गया है।

न्यूनतम पेंशन का अमाउंट 1000 रुपये बना रहेगा

सरकार ने ईपीएस, 2026 में पेंशन का न्यूनतम अमाउंट नहीं बढ़ाया है। इसका मतलब है कि इसे प्रति माह 1,000 रुपये बनाए रखा गया है। पेंशन कैलकुलेशन के फॉर्मूला, एंप्लॉयी और एंप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन में भी बदलाव नहीं किया गया है। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों का ईपीएफ में कंट्रिब्यूशन के नियम पहले की तरह बने रहेंगे।

ईपीएस में एंप्लॉयर के कंट्रब्यूशन में कोई फर्क नहीं आया है

सरकार ने ईपीएस,2026 को जो नोटिफिकेशन जारी किया है, उसके ईपीएस के कंट्रिब्यूशन में किसी तरह का फर्क नहीं आया है। एंप्लॉयर पहले की तरह एंप्लॉयी के ईपीएस में कंट्रिब्यूशन करता रहेगा। सरकार का कंट्रिब्यूशन 1.16 फीसदी बना रहेगा।

पेंशन क्लेम का सेटलमेंट अनिवार्य रूप से 20 दिन में करना होगा

एंप्लॉयीज की सुविधा के लिए ईपीएस, 2026 में कुछ खास बदलाव किए गए हैं। जैसे-पेंशन क्लेम का सेटलमेंट 20 दिन में करना अनिवार्य है। अगर ईपीएफओ तय समयसीमा के अंदर क्लेम का सेटलमेंट नहीं करता है तो उसे सालाना 12 फीसदी के रेट से इंटरेस्ट का पेमेंट करना होगा। यह पैसा पीएफ कमिश्नर की सैलरी से कटेगा।

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पेंशन से संबंधित ज्यादातर प्रोसिजर ऑनलाइन उपलब्ध 

ईपीएस, 2026 में डिजिटल कंप्लायंस और ऑनलाइन प्रोसेसिंग पर जोर दिया गया है। इसका मतलब है कि एंप्लॉयर्स और सब्सक्राइबर्स पेंशन से संबंधित ज्यादातर प्रोसिजर ऑनलाइन कर सकेंगे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईपीएस, 2026 के नोटिफिकेशन को देखने से ऐसा लगता है कि इसमें सिर्फ एडमिनिस्ट्रेटिव बदलाव किए गए हैं। इसका मतलब है कि एंप्लॉयीज से जुड़े ज्यादातर नियम पहले की तरह बने रहेंगे।

PF, क्रेडिट कार्ड, पासपोर्ट फीस, Aadhaar अपडेट, LPG रेट, ITR डेडलाइन… 1 जुलाई से बदल गईं ये चीजें

Rules Changing From July 1 2026:  1 जुलाई से देश में कई जरूरी फाइनेंशियल और और नीतिगत बदलाव लागू हो गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर इनकम टैक्स, सैलरीड क्लास, पेंशन पाने वालों, बैंक कस्टमर और विदेश यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ने जा रहा है। एलपीजी सिलेंडर की कीमतों और पासपोर्ट फीस से लेकर ईपीएफओ सेवाओं, आधार नियमों और क्रेडिट कार्ड के फायदों में कई बड़े अपडेट किए गए हैं। आइए आपको इन बड़े बदलावों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं ताकि आप किसी तरह की असुविधा से बचें और बजट को बेहतर तरीके से प्लान कर पाएं।

1- कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर हुआ सस्ता, घरेलू दाम स्थिर

सरकार ने 1 जुलाई से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। इससे होटलों, रेस्तरां और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिली है। इस कटौती के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹3113.50 से घटकर ₹2930 हो गई है। हालांकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह कटौती 2026 की पहली छमाही के दौरान कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में हुई कई तेज वृद्धियों के बाद आई है।

2- FY 2025-26 के लिए ITR फाइलिंग की डेडलाइन

करदाताओं को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की समय-सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए ITR-1 और ITR-2 फॉर्म भरने वाले व्यक्तिगत करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। ऐसे करदाता जो ITR-3 और ITR-4 दाखिल करते हैं और जिन पर टैक्स ऑडिट की आवश्यकता लागू नहीं होती है, उनके पास अपना रिटर्न जमा करने के लिए 31 अगस्त 2026 तक का समय है। तय समय-सीमा चूकने पर जुर्माना लग सकता है, टैक्स रिजीम को चुनने पर रोक लग सकती है और नुकसान को आगेल कैरी फॉरवर्ड करने की सर्विस से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

3- EPFO 3.0: UPI आधारित पीएफ विड्रॉल की सुगबुगाहट

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से बहुप्रतीक्षित EPFO 3.0 प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया जा रहा है। इसके तहत ईपीएफ सब्सक्राइबर्स को यूपीआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से तुरंत पैसे निकालने की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

4- पासपोर्ट फीस में हुआ भारी इजाफा

सरकार ने पासपोर्ट नियम, 1980 में संशोधन करके पासपोर्ट आवेदन शुल्क में बदलाव किया है। ये बदलाव भी 1 जुलाई से प्रभावी हो गया है। अब 36 पन्नों के नए सामान्य पासपोर्ट की फीस 1500 से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दी गई है। इसी कैटेगरी में तत्काल शुल्क को 3500 से बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया गया है। 60 पन्नों के पासपोर्ट और खोए या कटे-फटे पासपोर्ट को बदलने की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। वरिष्ठ नागरिकों और 8 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नए आवेदनों पर 10 प्रतिशत की छूट मिलती रहेगी।

5- आधार (Aadhaar) में ईमेल अपडेट करना हुआ फ्री

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधिकारिक आधार मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकृत ईमेल पते को अपडेट करने पर लगने वाले ₹75 के शुल्क को माफ कर दिया है। यह मुफ्त सुविधा 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी।

6- मिस-सेलिंग पर RBI की सख्ती, टेलीमार्केटिंग का समय तय

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों द्वारा वित्तीय उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री को रोकने और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम पेश किए हैं। अगर किसी ग्राहक को उचित सहमति के बिना या भ्रामक तरीकों से उत्पाद बेचे जाते हैं तो वे रिफंड और मुआवजे के हकदार होंगे। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे टेलीमार्केटिंग और प्रमोशनल कॉल्स को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही सीमित रखें।

7- HDFC बैंक ने क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड और लाउंज नियमों को बदला

एचडीएफसी बैंक ने अपने रेगेलिया गोल्ड और डाइनर्स क्लब प्रिविलेज क्रेडिट कार्ड के लिए रिवॉर्ड पॉइंट स्ट्रक्चर और ट्रैवल बेनिफिट्स में बदलाव किया है। रिवॉर्ड कैलकुलेशन से जुड़े बदलाव पहले ही लागू किए जा चुके हैं जबकि एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस से जुड़ी संशोधित शर्तें 1 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। नए नियमों के मुताबिक रेगेलिया गोल्ड कार्डधारकों को कॉम्प्लीमेंट्री डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस का लाभ उठाने के लिए पिछली तिमाही में कम से कम 60000 रुपये खर्च करने होंगे।

8- SBI कार्ड ने लगाई रिवॉर्ड पॉइंट्स पर कैपिंग

एसबीआई कार्ड ने अपने दो वेरिएंट्स PhonePe SBI Card Purple और PhonePe SBI Card Select Black के नियमों में बदलाव की घोषणा की है। 1 जुलाई से प्रभावी नियमों के तहत कंपनी ग्राहकों द्वारा कमाए जाने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स पर मंथली कैप लगाएगी। इंश्योरेंस से जुड़े खर्चों और अन्य श्रेणियों के खर्चों के लिए अलग-अलग सीमाएं लागू होंगी। ऑनलाइन लेनदेन पर मिलने वाले अधिकतम रिवॉर्ड पॉइंट्स को भी कम कर दिया गया है।

PF Withdrawal Rules: क्या PF का पूरा पैसा निकाला जा सकता है? जानिए नियम और शर्तें

EPFO Rules: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को मुख्य रूप से रिटायरमेंट यानी बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य बचत के रूप में तैयार किया गया है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या वे जब चाहें अपने पीएफ खाते से 100% पैसा निकाल सकते हैं? खासकर ऐसे समय में जब EPFO 3.0 और डिजिटल सेवाओं के अपग्रेडेशन की चर्चाएं जोरों पर हैं, पीएफ विड्रॉल के नियमों को समझना बेहद जरूरी है।

अगर आप भी अपने पीएफ का पूरा पैसा निकालने की सोच रहे हैं, तो इसका सीधा जवाब है- नहीं, आप नौकरी के दौरान जब चाहें तब पूरा पैसा नहीं निकाल सकते। ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, एक्टिव नौकरी के दौरान पूरा फंड निकालने पर रोक है, लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में इसकी इजाजत मिलती है। आइए जानते हैं पीएफ विड्रॉल से जुड़े जरूरी नियम।

कब निकाल सकते हैं अपने पीएफ का 100% पैसा?

EPFO के मौजूदा नियमों के अनुसार, केवल दो मुख्य परिस्थितियों में ही आप अपने खाते से पूरा फंड निकाल सकते हैं:

1. रिटायरमेंट के समय: जब कर्मचारी की उम्र 58 वर्ष हो जाती है, तब वह फाइनल सेटलमेंट के लिए आवेदन कर सकता है और अपने खाते में जमा पूरा पैसा निकाल सकता है।

2. नौकरी छूटने या बेरोजगारी की स्थिति में: अगर आपकी नौकरी चली जाती है, तो आप बेरोजगारी के दौरान वित्तीय मदद के लिए पैसा निकाल सकते हैं।

1 महीना बेरोजगार रहने पर: आप अपने कुल पीएफ बैलेंस का 75% तक हिस्सा निकाल सकते हैं।

2 महीने या उससे अधिक बेरोजगार रहने पर: आप बचे हुए बाकी बचे हुए 25% के लिए भी क्लेम कर सकते हैं और इस तरह पूरा 100% फंड निकाल सकते हैं।

नौकरी बदलने पर क्या पैसा निकालना सही है?

कई कर्मचारियों को यह गलतफहमी होती है कि जब वे कंपनी बदलते हैं, तो उन्हें पुराना पीएफ का पैसा निकाल लेना चाहिए। लेकिन EPFO हमेशा यही सलाह देता है कि नौकरी बदलने पर पैसा निकालने के बजाय अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) का इस्तेमाल करके पीएफ को नई कंपनी में ट्रांसफर कर लें।

ऐसा करना क्यों जरूरी है?

  • ब्याज का नुकसान नहीं: फंड ट्रांसफर करने से आपके पैसे पर सालाना ब्याज मिलना जारी रहता है।
  • सर्विस रिकॉर्ड: आपकी नौकरी का रिकॉर्ड बिना टूटे लगातार चलता रहता है।
  • टैक्स का झंझट: बार-बार नौकरी बदलने पर पैसा निकालने से आपके रिटायरमेंट का फंड तो कम होता ही है, साथ ही कुछ मामलों में इस पर टैक्स भी देना पड़ सकता है।

नौकरी के दौरान केवल आंशिक विड्रॉल की अनुमति

भले ही नौकरी के दौरान पूरा पैसा निकालने पर पाबंदी हो, लेकिन ईपीएफओ अपने सदस्यों को कुछ खास और जरूरी जरूरतों के लिए एडवांस के रूप में आंशिक निकासी की अनुमति देता है। आप इन कामों के लिए नौकरी के दौरान पैसा निकाल सकते हैं:

  • उच्च शिक्षा और बच्चों या खुद की शादी के लिए।
  • घर खरीदने, जमीन खरीदने या मकान बनवाने के लिए।
  • होम लोन का पुनर्भुगतान करने के लिए।
  • खुद के या परिवार के गंभीर इलाज के लिए।

नोट: इन सभी श्रेणियों के लिए आपकी सर्विस की अवधि और विड्रॉल की लिमिट के नियम अलग-अलग होते हैं।

पैसा निकालने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

भले ही पीएफ का पैसा निकालने से आपको तुरंत कैश मिल जाता है, लेकिन ऐसा करने से आपके बुढ़ापे की सुरक्षा को नुकसान पहुंच सकता है। ईपीएफ एक बेहतरीन निवेश माध्यम है जहां आपको अनिवार्य बचत, नियोक्ता का योगदान और टैक्स-फ्री सालाना ब्याज का तगड़ा कॉम्बिनेशन मिलता है। इसलिए, जब तक कोई बेहद गंभीर इमरजेंसी न हो, अपने पीएफ कॉर्पस को हाथ न लगाएं और नौकरी बदलने पर इसे हमेशा ट्रांसफर ही करें।