विपक्ष की याचिका पर नहीं हुई सुनवाई

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को रद्द करने के लिए विपक्ष के 11 नेताओं की ओर से दायर याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इस याचिका में एक दर्जन से ज्यादा खामियां बताईं। उन्हें ठीक करने के बाद ही सुनवाई हो पाएगी। गौरतलब है कि चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने रविवार को कहा था कि विपक्ष सोमवार को याचिका दायर करता है तो उस पर मंगलवार को सुनवाई हो सकती है।

विपक्ष ने सोमवार को याचिका दायर भी की लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने उसमें 14 खामियां बताई हैं। यह याचिका मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और एसआईआर में बड़े पैमाने पर नाम हटाने और गड़बड़ियों के आरोपों से जुड़ी है। इस याचिका में खामियों के कारण मंगलवार को इस पर सुनवाई नहीं हो सकी। यह याचिका 10 पार्टियों के 11 नेताओं की ओर से दायर की गई है। कांग्रेस से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम याचिकाकर्ता के रूप में है। इनके अलावा अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले, संजय राउत, एमए बेबी, डी राजा आदि नेता भी याचिकाकर्ता हैं।

बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की मुताबिक याचिका के साथ जमा किए गए दस्तावेजों में भी खामियां हैं। इसमें नौ याचिकाकर्ताओं की वकालतनामा नहीं है। मल्लिकार्जुन खड़गे की आईडी की तस्वीर साफ नहीं है। इतना ही नहीं कोर्ट फीस भी 220 रुपए कम जमा किए गए हैं। सोमवार, 12 अक्टूबर को दायर याचिका में भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है। गौरतलब है कि राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं ने चीफ जस्टिस से मुलाकात का समय मांगा था। लेकिन उन्होंने इनकार किया, जिसके बाद विपक्ष ने याचिका दायर करने का फैसला किया। सोमवार को विपक्षी नेता पैदल मार्च करते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे थे।

Amit Shah: ‘2029 में भी हार के लिए रहें तैयार…’SIR पर राहुल गांधी को अमित शाह की दो टूक

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को उपचुनावों में कांग्रेस की हार को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, राहुल गांधी को हार के लिए मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपनी पार्टी की कमियों पर ध्यान देना चाहिए। शाह ने ये भी दावा किया कि कांग्रेस पिछले 41 साल से गुजरात में कोई चुनाव नहीं जीत पाई है, जबकि वहां के मतदाता लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर भरोसा जता रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री का ये बयान उपचुनाव और गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी के प्रदर्शन पर बात करते हुए यह बयान दिया। वहीं, राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेता चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध जारी रखे हुए हैं। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

शाह ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि गुजरात में कांग्रेस को पिछले 41 साल से चुनावी जीत नहीं मिली है। शाह ने कहा, “मैं यह बात साफ करना चाहता हूं और खास तौर पर राहुल गांधी को बताना चाहता हूं कि कांग्रेस ने पिछले 41 साल में गुजरात में एक भी चुनाव नहीं जीता है। पार्टी ने आखिरी बार 1985 में जीत हासिल की थी। इसके बाद से उसे लगातार हार का सामना करना पड़ा है।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस की लगातार चुनावी हार का कारण मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) है, जबकि यह प्रक्रिया 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद शुरू हुई थी।

हार का ठीकरा SIR पर फोड़े

शाह ने कहा कि, “राहुल गांधी को ये सोचना चाहिए कि क्या गुजरात में कांग्रेस की हार के लिए SIR जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव में हार का ठीकरा SIR पर फोड़ने के बजाय अपनी कमियों पर विचार करना चाहिए।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को 2029 के लोकसभा चुनाव में भी हार का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। शाह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार गलत जानकारी फैलाते हैं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध करके घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

2029 में भी मिलेगा हार

अमित शाह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस के विरोध पर राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि, राहुल गांधी लगातार झूठ बोल रहे हैं। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को 2029 के लोकसभा चुनाव में चौथी बार हार का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए।

गुजरात में बीजेपी का बेहतरीन प्रदर्शन

गुजरात में बीजेपी के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि पार्टी ने नगर पालिकाओं और नगर निगम के चुनावों में शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने बताया कि दो नगर पालिकाओं और एक नगर निगम की कुल 104 सीटों में से बीजेपी ने 90 सीटों पर कब्जा किया। वहीं, गांधीनगर नगर निगम में पार्टी को 44 में से 38 सीटों पर जीत मिली। गांधीनगर शाह के संसदीय क्षेत्र में आता है। शाह ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी ने सभी 32 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन किसी भी सीट पर उसके उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा सके। उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजों से साफ पता चलता है कि गुजरात के लोगों का रुझान बीजेपी की ओर है और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन कर रहे हैं।

पीएम मोदी के साथ खड़े हैं लोग

अमित शाह ने कहा कि, गुजरात में बीजेपी की बड़ी जीत से पता चलता है कि वहां के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं। उन्होंने बताया कि पिछले चुनाव के मुकाबले गांधीनगर नगर निगम में बीजेपी का वोट शेयर 10 प्रतिशत बढ़ा है।

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एक दिन लगे या दो साल, पीछे नहीं हटेंगे, आंदोलन जारी रहेगा : राहुल

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया रोकने की मांग को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा और इसमें चाहे एक दिन लगे या दो साल, वह पीछे नहीं हटेंगे।

श्री गांधी ने मंगलवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आंदोलन को लेकर उनकी दृढ़ता में कोई कमी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने में कल, परसों, तीन महीने, छह महीने, एक साल या दो साल लग सकते हैं, लेकिन वह उसी ऊर्जा, ताकत और एकजुटता के साथ संघर्ष जारी रखेंगे। उनका कहना था कि उनकी इस लड़ाई में पूरा विपक्ष एकजुट है और सब मिलकर इस लड़ाई को लड़ते रहेंगे। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने मंगलवार को अपने आवास पर इंडिया गठबंधन के नेताओं को चाय पर बुलाने के दौरान आगे के आंदोलन की रणनीति पर विचार-विमर्श के बाद कहा कि उनका आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन रुकने वाला नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर की प्रक्रिया को खत्म करने की अपनी मांग पर उन्होंने कहा कि मांग पूरा होने तक वह रुकेंगे नहीं। उनकी मांगें पूरी होने में चाहे कल, परसों, तीन महीने, छह महीने, एक साल या दो साल लग जाएं, संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जिस ऊर्जा, ताकत और एकजुटता के साथ पिछले कुछ दिनों में सभी दलों ने काम किया है उसी भावना के साथ आगे भी मिलकर लड़ाई जारी रखेंगे और लोकतंत्र की बहाली के अपने अंतिम लक्ष्य तक पहुंचेंगे।

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कांग्रेस नेता ने कहा कि यह अलग-अलग या समानांतर विरोध प्रदर्शन नहीं हैं बल्कि एक ही आंदोलन है जिसका एकमात्र उद्देश्य लोकतंत्र को बहाल करना है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र को नष्ट कर दिया गया है, चुनाव व्यवस्था को कमजोर किया गया है और संविधान को तार-तार कर दिया गया है। इंडिया गठबंधन देश में वास्तविक लोकतांत्रिक शासन की बहाली के लिए मिलकर संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का एक मंच था लेकिन सरकार ने अब वहां विरोध प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी है। विपक्ष इस फैसले को चुनौती देगा।

श्री गांधी ने कहा कि सरकार यह तय नहीं कर सकती कि भारतीय जनता अपनी आवाज उठाने के लिए संघर्ष नहीं करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पूरे मामले का मुख्य सूत्रधार, गृह मंत्री अमित शाह को इसे लागू करने वाला और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित अन्य लोगों को इसमें शामिल बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें समझना चाहिए कि अब उनके चारों ओर शिकंजा कस रहा है। भारतीय संविधान को नष्ट करके वे बच नहीं सकते। उनका कहना था कि सोमवार को दिल्ली में लोगों ने केवल राजनीतिक दलों को एकजुट होकर खड़े नहीं देखा बल्कि यह भारत की जनता की आवाज थी। उन्होंने दिल्ली और देश के लोगों का समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह लड़ाई विपक्षी दलों के बारे में नहीं बल्कि भारत की जनता और उसके भविष्य के बारे में है।

श्री गांधी ने कहा कि जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने के लिए वे अंत तक लड़ेंगे और इस मामले में जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्री मोदी, श्री शाह, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और छिपी बैठी एक महिला सहित अन्य कई लोग शामिल हैं। श्री गांधी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय और देश की न्यायिक व्यवस्था के प्रति पूरा सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका की इस मामले में अहम भूमिका है और उन्हें उम्मीद है कि वह अपनी भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन के सभी दल इसके लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।

श्री गांधी ने कहा कि इस लड़ाई में कोई भी परिस्थिति बने या कोई संस्था अपनी भूमिका निभाए अथवा नहीं, उनका राजनीतिक प्रतिरोध और जनता का प्रतिरोध जारी रहेगा और अंततः इसकी जीत होगी।

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कोलकाता में पुलिस और केंद्रीय बलों ने ममता-टीएमसी के विरोध मार्च को रोका

कोलकाता में मंगलवार को ममता तृणमूल कांग्रेस (ममता टीएमसी) द्वारा आयोजित विरोध मार्च को अनधिकृत करार देते हुए पुलिस और केंद्रीय बलों ने रोक दिया।

प्रदर्शनकारियों ने हालांकि उसी जगह पर एक बैठक कर अपना विरोध जारी रखा। यह मार्च राजाबाजार से पार्क सर्कस तक निकाला जाना था, ताकि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली पुलिस द्वारा पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जा सके।

प्रदर्शनकारियों ने चुनावी अनियमितताओं के आरोपों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चिंताओं के चलते मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की। पुलिस की यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की उस चेतावनी के बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि दुर्गा पूजा के दौरान राज्य में कोई अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बलों को तैनात किया जा सकता है।

मंगलवार दोपहर जब मार्च शुरू हुआ, तो पुलिसकर्मियों और केंद्रीय बलों की एक बड़ी टुकड़ी ने राजाबाजार इलाके में बैरिकेड्स लगा दिए, जिससे प्रदर्शनकारी तय रास्ते पर आगे नहीं बढ़ पाए। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे श्री कुणाल घोष, सुश्री डोला सेन और श्री शोवनदेव चट्टोपाध्याय ने मार्च रोके जाने के बाद समर्थकों को संबोधित किया। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रैली में शामिल नहीं हुईं।

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श्री घोष ने राज्य सरकार और केंद्र पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात करके और रैली के खिलाफ चेतावनी जारी करके डर का माहौल बनाने का आरोप लगाया। श्री घोष ने कहा प्रतिबंधों से प्रदर्शनकारी उकसावे में नहीं आए। हमें एक राजनीतिक संदेश भेजना था और वह अपने लक्षित लोगों तक पहुंच गया।

उन्होंने सीईसी को निशाना बनाने वाले प्रदर्शनकारियों के नारों पर जताई गई आपत्तियों पर भी सवाल उठाए और अधिकारियों पर राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए पुलिस और केंद्रीय बलों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। सुश्री डोला सेन ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी व्यवस्था ने पिछले पांच महीनों में उनकी पार्टी द्वारा आयोजित बैठकों और रैलियों के लिए बार-बार अनुमति देने से इनकार किया है, जिससे उन्हें अदालतों का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने छात्रों और युवाओं से जुड़े विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की आलोचना की। सुश्री सेन ने कहा राज्य सरकार की योजना प्रदर्शनकारियों को उकसाने और फिर उन्हें गिरफ्तार करने या घायल करने की थी। हम उनके जाल में नहीं फंसे।

गौरतलब है कि यह प्रदर्शन एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ जारी विरोध और श्री कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच हो रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में हुए विरोध-प्रदर्शन में सुश्री बनर्जी के शामिल होने और पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबरों के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। पार्क सर्कस की ओर बढ़ने से रोके जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने राजाबाज़ार में अपना कार्यक्रम जारी रखा और रोके गए मार्च को वहीं एक सभा में बदल दिया।

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चुनाव हारकर भी तेलंगाना के मंत्री बने मोहम्मद अजहरुद्दीन ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा (Video)

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और वर्तमान में तेलंगाना राज्य में कांग्रेस के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने भी केंद्रीय पार्टी लाइन पकड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा है और S.I.R (Special Intensive revision) को धोखाधड़ी बताया है।यह बातचीत उन्होंने प्रदर्शन के दौरान कही जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

गौरतलब है कि 3 साल पहले मोहम्मद अजहरुद्दीन तेलंगाना में घरेलू पिच पर भी नहीं जीत सके। तेलंगाना की हाई प्रोफाइल जुबली हिल्स सीट पर  उनकी स्थिती मजबूत मानी जा रही थी। लेकिन वह इस सीट पर तब हार गए जब पूरे राज्य में कॉंग्रेस की आँधी चल रही थी।हार के बाद भी कांग्रेस आलाकमान ने मशहूर  और मुस्लिम चेहरा होने के कारण अल्पसंख्यक मंत्रालय थमा दिया।

कांग्रेस की आंधी में भी चुनाव हारे अजहर

इस सीट पर भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन को कुल 26 राउंड की वोटिंग के बाद  62,343 वोट मिले। वहीं भारत राष्ट्र समिति के प्रतिद्वंदी मगांथी गोपीनाथ को 78282 वोट मिले थे। इस कारण मोहम्मद अजहरुद्दीन 15,939 वोटों से हार गए थे। तीसरे स्थान पर भारतीय जनता पार्टी के लंकाला दीपक रेड्डी रहे थे जिन्हें कुल 25,083 वोट हासिल हुए थे। साल 2018 में भी मगांथी गोपीनाथ की इस सीट पर जीत हुई थी लेकिन मोहम्मद अजहरुद्दीन को जीत का दावेदार बताया जा रहा था।

साल 2009 में कॉंग्रेस पार्टी से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले मोहम्मद अजहरुद्दीन ने इस ही साल लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की मुरादाबद सीट पर जीत अर्जित की थी।इसके बाद साल 2014 में वह राजस्थान के टोंक सवाई माधोपुर से लोकसभा चुनाव में  उतरे थे लेकिन यहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। भारतीय जनता पार्टी के  प्रत्याशी सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने उनको मात दी थी।

शानदार करियर का फिक्सिंग के आरोप ने किया अंत

भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ियों में से एक अजहर ने भारत का 99 टेस्टों और 334 वनडे में प्रतिनिधित्व किया था। वह 1992, 1996 और 1999 के विश्व कप में भारत के कप्तान रहे थे।अजहर ने अपने करियर में 99 टेस्टों में 22 शतकों की मदद से 6215 रन और 334 वनडे में 7 शतकों की मदद से 9378 रन बनाए थे। वह भारत के सफल कप्तानों में शुमार थे। उन्होंने 47 टेस्टों में भारत का नेतृत्व किया और 14 मैच जीते जबकि वनडे में उन्होंने 174 मैचों में भारत का नेतृत्व किया और 90 मैच जीते।

अपने शानदार करियर के दौरान अजहर का नाम मैच फिक्सिंग में आया था जिसके बाद बीसीसीआई ने उनपर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि 2012 में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने उनपर लगा प्रतिबंध हटा दिया।

लेफ्ट के नए नेता निकल रहे हैं

जैसा हर राजनीतिक आंदोलन में होता है इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन से भी नए नेता निकल रहे हैं। इससे ठीक पहले हुए इंडिया अगेंस्ट करप्शन के आंदोलन से अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सहित आम आदमी पार्टी का पूरा नेतृत्व निकला। आप के अलावा दूसरी पार्टियों को भी नए नेता मिले। जेपी के आंदोलन से तो समाजवादी नेताओं की एक पूरी पीढ़ी निकली थी। मुलायम सिंह से लेकर लालू प्रसाद, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान आदि का नेतृत्व उसी समय स्थापित हुआ।

इस बार के आंदोलन से भी नया नेतृत्व निकल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी के नेता कितने स्थापित होंगे यह नहीं कहा जा सकता है क्योंकि उनमें प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के अलावा कोई और योग्यता नहीं दिख रही है। लेकिन लेफ्ट पार्टियों को जरूर नए नेता मिल रहे हैं। ध्यान रहे लगातार चुनावी हार और पश्चिम बंगाल, केरल व त्रिपुरा तीनों राज्यों की सरकार से बाहर होने के बाद लेफ्ट के सामने बड़ा संकट है। तभी यह प्रदर्शन उनके लिए वरदान की तरह साबित हो रहा है।

सीपीआई माले के छात्र संगठन आइसा की नेता नेहा बोरा अखिल भारतीय स्तर पर लेफ्ट का चेहरा बनी हैं। उनका एक लड़ाकू चेहरा आज कल हर जगह दिख रहा है लेकिन इससे पहले जून और जुलाई के प्रदर्शन के दौरान उन्होंने 20 दिन तक भूख हड़ताल की थी। उनको असली वैधता और ताकत उस भूख हड़ताल से मिली। तभी बिहार से लेकर झारखंड तक हर जगह छात्र अपने को नेहा बोरा के साथ जोड़ रहे हैं। इसी तरह सीपीएम के छात्र संगठन एसएफआई की पुझाक्कल पवित्रा का चेहरा उभरा है। एसएफआई का झंडा लेकर भागते हुए उनकी तस्वीर वायरल हुई है। सीपीआई का अभी स्ट्रगल है। कन्हैया कुमार के धोखे के बाद पार्टी का छात्र संगठन एआईएसएफ अभी तक सदमे से नहीं उबर पाया है।

विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च

नई दिल्ली। राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में नए नए तरीके आजमा रहे हैं। सोमवार को उन्होंने एक नई मिसाल कायम की। एक दर्जन विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ राहुल ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। विपक्षी नेताओं के मार्च को सुप्रीम कोर्ट से आधा किलोमीटर दूर रोक दिया गया। वहां से विपक्ष के चुनिंदा नेता सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर की। यह याचिका 10 विपक्षी राजनीतिक दलों के 11 नेताओं की ओर से दायर की गई है।

इससे पहले राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्ष के अन्य नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। जब विपक्ष के नेता सुप्रीम कोर्ट के अंदर गए तो वहां राहुल गांधी की लीगल टीम पहले से मौजूद थी। लीगल टीम ने याचिका तैयार कर रखी थी, जिसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं।

गौरतलब है कि कांग्रेस नेताओं ने रविवार को चिट्ठी लिख कर चीफ जस्टिस से मिलने का समय मांगा था। विपक्ष उनको ज्ञापन देना चाहता था। लेकिन चीफ जस्टिस ने मिलने का समय देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने हितों के टकराव, शक्तियों के पृथक्करण और मामला न्यायालय के विचाराधीन होने के हवाले मिलने का समय देने से इनकार किया था। इसके बाद विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का फैसला किया। राहुल ने इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कहा कि उनका मार्च शिवजी की बारात की तरह है, जिसमें जो चाहे वह शामिल हो सकता है। इसके बाद राहुल कांस्टीट्यूशन क्लब पहुंचे, जहां से विपक्ष ने मार्च शुरू किया।

राहुल गांधी के मार्च में देरी होने पर उनकी कानूनी टीम ने दोपहर में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के शाम साढ़े चार बजे बंद होने की समय सीमा के बाद याचिका दाखिल करने के लिए समय बढ़ाने की मांग कर रही है। आम तौर पर ऐसे मामलों में पक्षकार सुप्रीम कोर्ट की ई फाइलिंग सेवा का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो 24 घंटे उपलब्ध रहती है।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ याचिका दायर करने वालों में कांग्रेस से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं। उनके अलावा समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस से सौगत राय, राजद से तेजस्वी यादव, उद्धव ठाकरे की शिव सेना से संजय राउत, सीपीएम महासचिव एमए बेबी, सीपीआई महासचिव डी राजा, जेएमएम सांसद महुआ माझी, शरद पवार की एनसीपी से सुप्रिया सुले और मुस्लिम लीग से ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट तक मार्च में शामिल सपा के नेता अखिलेश यादव ने कहा, ‘आंदोलन और धरना जारी रहेगा। लोकतंत्र को बचाना हमारी जिम्मेदारी है। बीजेपी, चुनाव आयोग के साथ मिलकर संविधान और लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है। वह हमेशा सत्ता में बने रहना चाहती है। वे फर्जी वोटर लिस्ट बनाते हैं, फर्जी वोट डालते हैं और चुनाव के नतीजे तैयार करते हैं’। राजद के नेता तेजस्वी यादव ने कहा, ‘देश की जनता उन्हें नहीं भूलेगी। हम सभी लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए एकजुट हुए हैं। अब उन्हें सजा देने का समय आ गया है’।

राहुल का दावा, ज्ञानेश मैसेज करते हैं

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार उनको मैसेज करते हैं और कई बार उनसे बात करने की कोशिश की है। इतना ही नहीं राहुल ने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार अपराधी नहीं हैं। राहुल ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार अपराध नहीं हैं, उनसे सारे काम करवाए जाते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी राहुल ने ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बनने की सलाह दी थी।

राहुल ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें एक पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि, आप लोग चुनाव आयोग की बात करते हैं, आप सीधा ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हैं। क्या कभी उन्होंने आप से बात करने की कोशिश की? इस सवाल के जवाब में राहुल ने कहा, ‘हां उनके मैसेज आते हैं। ज्ञानेश कुमार यह प्रेस कॉन्फ्रेंस देख रहे हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं आप अपराधी नहीं है, आपसे बस करवाया गया है। सबसे आसान रास्ता है कि इस्तीफा दो और रास्ते से हट जाओ’।

राहुल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘दिल्ली को जेल बना दिया गया है। ये पुलिस वाले डिस्टर्ब हैं। ये कह रहे हैं कि हमसे युवाओं को क्यों पिटवाया जा रहा है। वे कह रहे हैं कि युवाओं को रोकने को कहा जा रहा है। आरएसएस के गुंडे महिलाओं को मार रहे हैं। एक तरफ हमसे कहा जा रहा है कि पैलेट गन चलाइए’। राहुल ने आगे कहा, ‘एक दिन हमें पुलिस ने रोका, जंतर मंतर पर पुलिस ने रोका, आज भी रोकेंगे। आपको लगता है कि क्या एक दिन की बात है। ये मत सोचिए कि पांच दिन पहले शुरू हुआ था। सालों से हमें रोका जा रहा है, अब दिख रहा है’।

केंद्र पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा, ‘आप सोच रहे हो कि हमारे लिए मुश्किल है। पुलिस हमें मार रही है। जितना आप थक रहे हो, उतना पुलिस थक रही है। पुलिस कह रही है कि हम ज्ञानेश कुमार को क्यों बचा रहे हैं। पेशेंस और पर्सीवरेंस, लगे रहना है। हम करेंगे, वे रोकेंगे, हमें लगे रहना है। जितने दिन लगेंगे, एक महीने, दो महीने, साल…हम पीछे नहीं हटेंगे’। राहुल ने आगे कहा, ‘ये हिंदुस्तान की जनता की इन्पॉर्टेंस हैं। देश के हर युवा से कह रहा हूं कि ये आपके फ्यूचर, आपकी इज्जत की लड़ाई है। अगर आप नहीं आ सकते तो शाम को जब सुप्रीम कोर्ट के सामने होंगे, तब हमें सॉलिडेरिटी दिखाइए। जिस भी तरीके से ये कर सकते हैं, अपना एक्सप्रेशन करिए। बताइए कि जो हो रहा है, हम उसके खिलाफ हैं। हम ये नहीं होने देंगे’।

चीफ जस्टिस की इनकार वाली चिट्ठी सामने आई

नई दिल्ली। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने विपक्ष की ओर से मिलने का समय मांगने की चिट्ठी के जवाब में जो चिट्ठी लिखी थी, वह कांग्रेस पार्टी ने जारी कर दी है। हालांकि इससे पहले सुबह में चीफ जस्टिस ने इसके कंटेंट के बारे में बताने से मना कर दिया था और कहा था कि पत्रकारों को विपक्ष से पूछना चाहिए। इस चिट्ठी में चीफ जस्टिस ने कहा कि एसआईआर और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का मामला अदालत में विचाराधीन है इसलिए उनका विपक्षी नेताओं से मिलना मर्यादा के अनुकूल नहीं होगा।

चीफ जस्टिस ने दिल्ली में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर कहा कि ये उनका मुद्दा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और कोई भी आम नागरिक या निर्वाचित जनप्रतिनिधि याचिका दाखिल कर सकता है। विज्ञान भवन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस कार्यक्रम में चीफ जस्टिस पहुंचे थे, जहां उन्होंने मीडिया के कुछ सवालों का जवाब गिया।

इस बीच, उनकी वह चिट्ठी भी सामने आई, जो उन्होंने रविवार को ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं को मुलाकात से इनकार करने के लिए लिखा था। इसमें उन्होंने कहा कि विपक्ष जिन मुद्दों पर चर्चा करना चाहता है, वे पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में इन पर मीटिंग करना न्यायिक मर्यादा और नैतिकता के खिलाफ होगा। चीफ जस्टिस ने लिखा कि सुप्रीम कोर्ट को इन मुद्दों पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। लंबित मामलों पर विचार करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया अपनानी होगी।

चीफ जस्टिस ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि संविधान के अनुच्छेद 32 और न्यायिक समीक्षा की शक्तियों के तहत सुप्रीम कोर्ट नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर सुनवाई करने के लिए बाध्य है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष अगर सोमवार को याचिका दाखिल करे तो उसे मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। नागरिक कानून में तय प्रक्रिया के तहत अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए किसी भी समय अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

सीजेपी ने 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने सोमवार को भी जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी थी। सीजेपी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी थी। लेकिन दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। इससे पहले सीजेपी ने 20 जून से 25 जुलाई तक जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ था।

अब सीजेपी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उसने कहा कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन की तारीख नहीं मिली तो फिर आंदोलन करेंगे। सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास सोमवार को प्रदर्शन की अनुमति मांगने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। रांका ने कहा कि संगठन ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में पुलिस को चिट्ठी देकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी है। उन्होंने पुलिस को प्रदर्शन की तारीख तय करने का ऑप्शन भी दिया है।

रांका ने कहा कि किसी वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात नहीं हुई क्योंकि कोई वहां नहीं था। उन्होंने तंज करने के अंदाज में कहा, ‘ऐसा लग रहा था कि सीजेपी के पहुंचने के बाद पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन को खाली करा दिया गया है’। इसी बीच, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने हिरासत का वीडियो एडिट करके जारी किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में वकील से संपर्क करना कानूनी अधिकार है, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई। दीपके ने कहा कि उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।