Government School के 1,500 बच्चों ने अपने हक़ के लिए उठाई आवाज़ | Gen Alpha Protest

स्कूल में पढ़ाई होनी चाहिए, आंदोलन नहीं।
लेकिन जब बच्चों को साफ़ पानी, शौचालय, पंखे और शिक्षक जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़क पर उतरना पड़े,
तो सवाल बच्चों पर नहीं, सिस्टम पर उठता है।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से शुरू हुई यह आवाज़ अब बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और देश के कई हिस्सों तक पहुँच रही है।
क्या आपको लगता है कि बच्चों को अपने अधिकारों के लिए इस तरह प्रदर्शन करना पड़ना चाहिए?
अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।

Fatehpur school student protest 2026, government school teacher shortage India, student-led protests in Indian schools, children protesting for education in India

Government School के 1,500 बच्चों ने अपने हक़ के लिए उठाई आवाज़ | Gen Alpha Protest#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

Follow us for more:

Facebook: https://www.facebook.com/thebetterindia.hindi
Instagram: https://www.instagram.com/thebetterindia.hindi/
Twitter: https://twitter.com/TbiHindi
LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/the-better-india-hindi/

Website: https://hindi.thebetterindia.com/

इन 10 म्यूचुअल फंडों ने SIP के निवेशकों को बीते 5 साल में दिए सबसे ज्यादा रिटर्न, देखें पूरी लिस्ट

शेयरों की तरह जोरदार रिटर्न के लिए म्यूचु्अल फंड की सही स्कीम का चुनाव जरूरी है। कुछ फंडों का रिटर्न हमेशा कैटेगरी के औसत रिटर्न से काफी ज्यादा होता है। एनालिसिस के नतीजे बताते हैं कि कुछ फंडों ने सिप के निवेशकों को सालाना 20 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिए हैं। खास बात यह है कि स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स रिटर्न देने में सबसे आगे हैं।

बीते पांच सालों में स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स का जलवा

सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले 10 फंडों में 9 फंड स्मॉलकैप और मिडकैप कैटेगरी के हैं। इनमें 4 स्मॉलकैप स्कीम हैं। पांच मिडकैप स्कीम हैं। SBI Children Fund सिर्फ एक अपवाद है, जो फ्लेक्सीकैप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करता है।

इससे यह संकेत मिलता है कि बीते 5 सालों में जिन निवेशकों ने ज्यादा रिस्क लिया, उन्हें ज्यादा रिटर्न मिला। इस दौरान स्मॉलकैप कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा। स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों ने सिप के निवेशकों को लार्जकैप फंडों के मुकाबले ज्यादा रिटर्न दिए।

एक्टिव लार्जकैप फंड्स की चमक पड़ी फीकी

सिप इनवेस्टर्स को सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंडों में एक भी एक्टिवली मैनेज्ड लार्जकैप फंड शामिल नहीं है। पिछले पांच सालों में लार्जकैप स्कीम में सबसे अच्छा प्रदर्शन Invesco India Largecap Fund का रहा है। इसका सालाना सिप रिटर्न 14.27 फीसदी रहा है। यह 64 लार्जकैप फंड्स में 10वें नंबर पर है। लार्जकैप कैटेगरी में टॉप 9 पोजीशन पर इंडेक्स फंड और ईटीएफ रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि लार्जकैप कैटेगरी में पैसिव फंड्स एक्टिव फंड मैनेजर्स को चुनौती दे रहे हैं।

जोरदार रिटर्न देने वाले फंड्स में उतार-चढ़ाव भी ज्यादा

बीते पांच सालों में स्मॉलकैप और मिडकैप रिटर्न देने में सबसे आगे रहे हैं। लेकिन, म्यूचुअल फंड्स की इन दोनों कैटेगरी में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखा है। उनका शानदार प्रदर्शन फेवरेबल मार्केट साइकिल में दिखा है। इस ट्रेंड के अगले पांच सालों में रिपीट होने की गारंटी नहीं है।

top 10 fund

रिस्क लेने की कपैसिटी के आधार पर फंड का सेलेक्शन्

एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी फंड के पिछले रिटर्न को देखकर निवेश का फैसला ठीक नहीं है। इनवेस्टर को यह देखने की जरूरत है कि वह कितना रिस्क ले सकता है। किसी फंड का लंबी अवधि में लगातार अच्छा प्रदर्शन कुछ सालों में बेहतर प्रदर्शन के मुकाबले ज्यादा मायने रखता है।

Delhi Lakshmi Yojana: हर महीने खाते में आएंगे ₹2,500! 2 मिनट में समझें अप्लाई करने का पूरा प्रोसेस

Delhi Laxmi Yojna Registration Process: दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ की शुरुआत की है। योजना के तहत परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला सदस्य को ₹2,500 प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाएगी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लक्ष्मी योजना का आधिकारिक पोर्टल लॉन्च कर दिया है, जिस पर आवेदन मिलने भी शुरू हो चुके हैं। योजना शुरू होने के महज दो दिनों के भीतर ही 1.47 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। सरकार ने इसके लिए ₹5,100 करोड़ का बजट आवंटित किया है। आइए आपको बताते हैं इस योजना का लाभ उठाने के लिए कौन पात्र है, किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी और ऑनलाइन आवेदन कैसे करना है।

एक साथ खाते में नहीं आएंगे ₹2,500

दिल्ली लक्ष्मी योजना एक अनोखी हाइब्रिड कैश-ट्रांसफर और सेविंग्स स्कीम है, जिसमें महिलाओं के लिए दो विकल्प दिए गए हैं:

विकल्प 1 (कैश + एफडी): ₹1,000 की राशि सीधे लाभार्थी महिला के बैंक खाते में भेजी जाएगी, जबकि शेष ₹1,500 की राशि को सरकार द्वारा ‘फिक्स्ड डिपॉजिट’ (FD) में निवेश किया जाएगा।

विकल्प 2 (पूरी एफडी): लाभार्थी चाहें तो पूरे ₹2,500 को फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने का विकल्प चुन सकती हैं।

इस FD पर 3 साल का लॉक-इन पीरियड लागू होगा, जिस पर राज्य सरकार सॉवरेन गारंटी प्रदान करेगी।

कौन कर सकता है आवेदन?

योजना का लाभ लेने के लिए महिला आवेदकों को ये शर्तें पूरी करनी होंगी:

  • परिवार की प्रमुख: आवेदक महिला परिवार की सबसे वरिष्ठ सदस्य होनी चाहिए।
  • आयु सीमा: महिला की उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • पारिवारिक आय: परिवार की कुल वार्षिक आय ₹2.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • दिल्ली का निवासी होना: आवेदक, उसका पति या उसके माता-पिता कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली के निवासी हों।
  • वोटर आईडी: आवेदक दिल्ली की पंजीकृत मतदाता होनी चाहिए।
  • बिजली खपत: पिछले 1 वर्ष के दौरान परिवार की वार्षिक बिजली खपत 2,400 यूनिट से अधिक नहीं होनी चाहिए।

किन्हें नहीं मिलेगा लाभ?

  1. जो परिवार इनकम टैक्स पेयर हैं या जीएसटी (GST) फाइल करते हैं।
  2. परिवार में कोई सदस्य सरकारी नौकरी, सार्वजनिक उपक्रम (PSU) या लोकल बॉडी में स्थायी/संविदा कर्मचारी है।
  3. जिनके पास चार पहिया वाहन है।
  4. आवेदक महिला के 3 से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए।
  5. आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

पहचान व पते का प्रमाण: वोटर आईडी कार्ड (दिल्ली) और आधार कार्ड।

पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर: आवेदक की स्पष्ट फोटो और सिग्नेचर।

सांसद या विधायक का सिफारिश पत्र: क्षेत्र के सांसद (MP) या विधायक (MLA) का हस्ताक्षरित सिफारिश/समर्थन पत्र।

पते/बिजली खपत का प्रमाण: बिजली का बिल या गैस कनेक्शन का बिल।

उम्र का प्रमाण (कोई भी एक): जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, वोटर आईडी या आधार कार्ड।

बैंक खाता विवरण: डीबीटी के माध्यम से राशि प्राप्त करने के लिए बैंक पासबुक की कॉपी।

ऑनलाइन आवेदन का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

पात्र महिलाएं घर बैठे नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके रजिस्ट्रेशन कर सकती हैं:

स्टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट https://dly.delhi.gov.in पर जाएं और ‘Apply for Scheme’ के बाद ‘Register Now’ पर क्लिक करें।

स्टेप 2: अपनी व्यक्तिगत जानकारी और बेसिक विवरण दर्ज करें।

स्टेप 3: परिवार के सभी सदस्यों का ब्योरा सही-सही भरें।

स्टेप 4: पैसे ट्रांसफर के लिए अपना चालू बैंक खाता दर्ज करें।

स्टेप 5: मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेजों को निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करें।

स्टेप 6: फॉर्म का प्रीव्यू ध्यान से जांचें और फाइनल सबमिट करें।

स्टेप 7: क्षेत्रीय MP या MLA द्वारा हस्ताक्षरित अनुशंसा की प्रति अपलोड करें।

स्टेप 8: आवेदन पूरा होने के बाद पावती रसीद डाउनलोड करके भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।

Stocks to Watch: 31 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: गुरुवार 31 जुलाई को शेयर बाजार में कई बड़े स्टॉक्स पर निवेशकों की नजर रहेगी। तिमाही नतीजों की रिपोर्ट के बाद इन कंपनियों के शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है। कुछ कंपनियों ने मजबूत नतीजे पेश किए हैं, जबकि कुछ का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर रहा। आइए जानते हैं शुक्रवार के कारोबार में किन 12 स्टॉक्स पर फोकस रहेगा।

Tata Steel

स्टील सेक्टर की दिग्गज कंपनी टाटा स्टील का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 11.6% बढ़कर ₹2,318.4 करोड़ रहा। यह बाजार के अनुमान से थोड़ा कम रहा। हालांकि, रेवेन्यू 14.3% बढ़कर ₹60,794.3 करोड़ पहुंचा और अनुमान से बेहतर रहा।

LIC Housing Finance

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 9.9% बढ़कर ₹1,499 करोड़ पहुंच गया। हालांकि, कंपनी की मुख्य कमाई का पैमाना नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सिर्फ 0.6% बढ़कर ₹2,087 करोड़ रहा।

Thermax

इंजीनियरिंग कंपनी थरमैक्स का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 83.4% गिर गया। हालांकि, इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू बढ़ा। इसके बावजूद प्रॉफिटेबिलिटी पर भारी दबाव रहा, जिससे मुनाफे में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

Indegene

लाइफ साइंसेज और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी कंपनी इंडीजीन का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा ₹116 करोड़ पर स्थिर रहा। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 39.7% बढ़कर ₹1,063 करोड़ पहुंच गया। कारोबार तेजी से बढ़ा, लेकिन मुनाफे पर दबाव रहने से कमाई में बढ़ोतरी नहीं हो सकी।

Mazagon Dock Shipbuilders

डिफेंस सेक्टर की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए। कंपनी का शुद्ध मुनाफा 21.5% बढ़कर ₹549.4 करोड़ हो गया। वहीं, ऑपरेशंस से रेवेन्यू 12.1% बढ़कर ₹2,943 करोड़ पहुंच गया।

Nucleus Software Exports

बैंकिंग और फिनटेक सॉफ्टवेयर कंपनी न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट्स का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 32.2% घटकर ₹23.87 करोड़ रह गया। कंपनी का रेवेन्यू 3.35% गिरकर ₹210.43 करोड़ रहा। बढ़ते ऑपरेटिंग खर्च की वजह से मुनाफे और प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव देखने को मिला।

JBM Auto

ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर की कंपनी जेबीएम ऑटो का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 14.7% बढ़ा। कंपनी को इलेक्ट्रिक व्हीकल और ऑटो कंपोनेंट्स कारोबार में अच्छी ग्रोथ का फायदा मिला।

RailTel Corporation of India

रेलवे सेक्टर की सरकारी टेलीकॉम कंपनी रेलटेल का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा ₹66 करोड़ पर स्थिर रहा। हालांकि, रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में दोहरे अंक की बढ़त दर्ज की गई।

Swiggy

ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी का जून तिमाही में घाटा घटकर ₹791 करोड़ रह गया। पिछले साल समान तिमाही में कंपनी को ₹1,197 करोड़ का घाटा हुआ था। रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रदर्शन बाजार के अनुमान के मुताबिक रहा।

Chambal Fertilisers and Chemicals

उर्वरक सेक्टर की कंपनी चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 4.6% घटकर ₹544 करोड़ रह गया। हालांकि, इस दौरान कंपनी की ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार देखने को मिला।

Torrent Pharmaceuticals

फार्मा सेक्टर की कंपनी टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए। कंपनी का शुद्ध मुनाफा 3.3% बढ़कर ₹566 करोड़ पहुंच गया। वहीं, रेवेन्यू 54.8% उछलकर ₹4,921 करोड़ रहा। घरेलू कारोबार और अमेरिकी बाजार में अच्छी मांग का फायदा मिला।

Rainbow Children’s Medicare

हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनी रेनबो चिल्ड्रन्स मेडिकेयर का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 13.2% बढ़कर ₹60.57 करोड़ हो गया। इस दौरान रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी मजबूत दोहरे अंक की बढ़त दर्ज की गई।

Q1 Earnings (31 जुलाई)

अलग अलग सेक्टरों की कई कंपनियां शुक्रवार, 31 जुलाई को जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें Aadhar Housing Finance, Aarti Drugs, Aditya Birla Capital, ABB India, Bajaj Holdings & Investment, Concord Biotech, CORONA Remedies, Dixon Technologies (India) और GAIL (India) समेत कई कंपनियां शामिल हैं।

Tata Steel Q1 Results: टाटा की कंपनी को ₹2318 करोड़ मुनाफा, रेवेन्यू उम्मीद से बेहतर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Children Of God: शिर्डी में ‘चिल्ड्रेन ऑफ गॉड’ का ट्रेलर- म्यूजिक हुआ लॉन्च, इस दिन होगी रिलीज

Children Of God: साईं बाबा की पावन नगरी शिरडी में आगामी हिंदी फिल्म ‘चिल्ड्रेन ऑफ गॉड’ का ट्रेलर और म्यूजिक लॉन्च हुआ। यह फिल्म समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और समानता का संदेश देती है। कहानियों में उल्लेख मिलता है कि साईं बाबा किन्नरों को ईश्वर का विशेष आशीर्वाद मानते थे और समाज से हमेशा उनके कल्याण की भावना से सोचने और उन्हें सम्मान देने की प्रेरणा देते थे। उसी मानवीय विचारधारा को आगे बढ़ाने का प्रयास फिल्म चिल्ड्रेन ऑफ गॉड के माध्यम से किया गया है।

इस इवेंट में फिल्म निर्माता एवं अभिनेता ऑशिम खेत्रपाल, निर्देशक आशीष सक्सेना, आरती खेत्रपाल, राधिका खेत्रपाल तथा श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिर्डी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री गोरक्षा गाडिलकर तथा साईं बाबा शांति पुरस्कार की अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिकार संजना जॉन के साथ फिल्म की पूरी टीम उपस्थित रही।

कार्यक्रम का सबसे इमोशनल पल तब देखने को मिला जब विश्व भ्रमण कर शिर्डी पहुंची पवित्र मशाल को ऑशिम खेत्रपाल ने मीडिया और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में प्रज्ज्वलित किया। इसके बाद उपस्थित पत्रकारों और अतिथियों को भी इस ऐतिहासिक मशाल को स्पर्श करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

म्यूजिक ने इवेंट को और भी खास बना दिया। आरती खेत्रपाल ने लाइव भजन प्रस्तुत कर सभी को भाव-विभोर कर दिया, जबकि राधिका खेत्रपाल ने अपनी मनमोहक ओडिसी डांस प्रस्तुति से वहां मौजूद मीडिया, गेस्ट का दिल जीत लिया। दोनों प्रस्तुतियों को सभी ने खड़े होकर सराहा। इसके बाद फिल्म ‘चिल्ड्रेन ऑफ गॉड’ का ट्रेलर और म्यूजिक आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया।

इस अवसर पर श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिर्डी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री गोरक्षा गाडिलकर ने कहा- साईं बाबा के सामाजिक कल्याण से जुड़े विचारों की आज समाज को पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है। बाबा हमेशा हर व्यक्ति को समान दृष्टि से देखने और मानवता का संदेश देते थे। मुझे विश्वास है कि ऑशिम खेत्रपाल की यह फिल्म ‘चिल्ड्रेन ऑफ गॉड’ समाज में सकारात्मक जागरूकता लेकर आएगी।

फिल्म के निर्माता एवं अभिनेता ऑशिम खेत्रपाल ने कहा,”चिल्ड्रेन ऑफ गॉड केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि मानवता, सम्मान और स्वीकार्यता की भावना को समर्पित एक सच्ची कहानी है। हम चाहते हैं कि समाज किसी व्यक्ति को उसकी पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि उसके इंसान होने के आधार पर स्वीकार करे। शिर्डी में साईं बाबा के आशीर्वाद के साथ इस फिल्म का शुभारंभ होना हमारे लिए अत्यंत सौभाग्य और भावनात्मक क्षण है।”

‘चिल्ड्रेन ऑफ गॉड’ एक सच्ची घटना से प्रेरित फिल्म है। यह अमित नाम के एक ऐसे युवक की कहानी है, जिसे बचपन से ही अपनी पहचान के कारण मजाक, इग्नोरेंस और अपमान का सामना करना पड़ता है। घर छोड़ने के बाद वह ट्रांसजेंडर समुदाय के बीच अपना नया परिवार और नई पहचान पाता है तथा ‘अमिता’ के रूप में स्वयं को स्वीकार करता है। अनेक संघर्षों और विश्वासघातों के बीच उसकी मुलाकात आशिम नाम के एक ऐसे मार्गदर्शक से होती है, जो उसे यह विश्वास दिलाता है कि पहचान समाज नहीं, बल्कि इंसान स्वयं तय करता है। यह फिल्म साहस, आत्मसम्मान, संघर्ष और स्वीकार्यता की एक भावनात्मक यात्रा है।

फिल्म में ऑशिम खेत्रपाल, आकाश वर्मा, राधिका खेत्रपाल, सार्थक कपूर, प्रिंस राजीव, एन.के. सिंह, भाव्या सिंह, राज चौधरी, रनेशा अग्रवाल, अभिषेक सिन्हा, शोभना खत्री और अन्नू शर्मा प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। ‘चिल्ड्रेन ऑफ गॉड’ 11 सितंबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

फ्रांस बना पहला EU देश, जहां 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन, जानें दुनिया में क्या हैं उम्र के नियम

France Social Media Ban: फ्रांस यूरोपीय संघ (EU) का पहला देश बन गया है, जिसने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन को मंजूरी दे दी है। इस कानून के तहत बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी। यह नियम इस साल सितंबर से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और जनवरी 2027 से पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।

दुनियाभर में सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की उम्र सीमा क्या है? News18 की पूरी जानकारी

फ्रांस में सोशल मीडिया बैन

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के समर्थन से लागू किए जा रहे इस नियम के तहत, फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने की तैयारी की है। इसे युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए डिजिटल दुनिया में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस बैन की खास संरचनात्मक, कानूनी और ऑपरेशनल डिटेल्स इस प्रकार हैं:

सितंबर 2026 (पहला चरण): सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 15 साल से कम उम्र के बच्चों के नए अकाउंट बनाने पर रोक लगानी होगी। सभी नए रजिस्ट्रेशन पर अनिवार्य रूप से उम्र की पुष्टि (age-verification) करने वाले कंट्रोल लागू होंगे।

जनवरी 2027 (दूसरा चरण): यह पाबंदी पहले से मौजूद सभी अकाउंट्स पर भी लागू होगी। सोशल मीडिया कंपनियों को 15 साल से कम उम्र के यूजर्स के सभी एक्टिव अकाउंट्स को हटाना या पूरी तरह से सस्पेंड करना होगा।

TikTok, Instagram, Snapchat और YouTube पर सख्ती

TikTok, Instagram, Snapchat और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म को उम्र की पुष्टि करने के लिए सख्त नियम लागू करने होंगे। इन टूल्स की जांच और मंजूरी फ्रांस के प्राइवेसी और डेटा रेगुलेटर द्वारा की जाएगी।

बता दें कि फ्रांस के डिजिटल मामलों का मंत्रालय उन कमर्शियल सोशल नेटवर्किंग सेवाओं की एक खास सूची बना रहा है जिन पर प्रतिबंध लागू होगा। इसमें ऐसे प्लेटफॉर्म पर ध्यान दिया जा रहा है जिनके एल्गोरिदम बहुत ज्यादा लत लगाने वाले हैं।

हालांकि, इस प्रतिबंध में साफ तौर पर नॉन-कमर्शियल डिजिटल रिसोर्स को शामिल नहीं किया गया है। 15 साल से कम उम्र के बच्चे अभी भी ऑनलाइन इनसाइक्लोपीडिया (जैसे Wikipedia), एजुकेशनल टूल्स और साइंटिफिक डायरेक्टरी का पूरा इस्तेमाल कर सकेंगे।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी और जांच की जिम्मेदारी फ्रांस के ऑडियोविजुअल और डिजिटल कम्युनिकेशन रेगुलेटर Arcom को दी जाएगी।

इस डिजिटल बैन के साथ-साथ, नए कानून में एक और बड़ा फैसला शामिल किया गया है। इसके तहत फ्रांस के सभी हाई स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की नीति तुरंत लागू की जाएगी।

क्यों लाया गया सोशल मीडिया बैन कानून?

यह कानूनी कदम फ्रांस की हेल्थ वॉचडॉग की एक विस्तृत रिपोर्ट के बाद उठाया गया है। इस रिपोर्ट में पता चला है कि 12 से 17 साल की उम्र के लगभग 90% बच्चे रोजाना स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, और इनमें से आधे से ज्यादा बच्चे दिन में पांच घंटे तक ऑनलाइन बिताते हैं।

ऐसे में कई फ्रांसीसी परिवारों ने बड़ी टेक कंपनियों पर एल्गोरिदम के जरिए बच्चों को ज्यादा समय तक ऑनलाइन रखने, गंभीर मानसिक तनाव, डिप्रेशन और युवाओं में खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी समस्याओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए मुकदम किए थे। साथ ही प्रोडक्ट की जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंताएं भी जताई थीं। जिसके बाद संसद में इस कानून को तेजी से आगे बढ़ाया गया।

दुनियाभर में सोशल मीडिया इस्तेमाल की उम्र सीमा

ऑस्ट्रेलिया

न्यूनतम उम्र: 16 साल

दिसंबर 2024 में सख्त कानून पास किया गया। इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म से 16 साल से कम उम्र के यूजर्स को हटाना होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर कंपनियों पर 5 करोड़ ऑस्ट्रेलियन डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

यूनाइटेड किंगडम

न्यूनतम उम्र: 16 साल

देशभर में लागू होने वाला प्रतिबंध जनवरी 2027 से लागू किए जाने की योजना है।

फ्रांस

न्यूनतम उम्र: 15 साल

फ्रांस ने कानून पास कर दिया है। इसके तहत सितंबर 2026 से नए अकाउंट और जनवरी 2027 से पुराने अकाउंट भी इस नियम के दायरे में आएंगे।

स्पेन

न्यूनतम उम्र: 16 साल

16 साल से कम उम्र के लोगों की पहुंच सीमित करने के लिए सरकार ने प्रस्तावित प्रतिबंधों की घोषणा की है।

ग्रीस और डेनमार्क

न्यूनतम उम्र: 15 साल / स्थानीय नियमों के अनुसार अलग-अलग

इन देशों की सरकारों ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध जैसे नियम लागू करने की योजनाएं पेश की हैं।

यूरोपीय संघ (EU)

न्यूनतम उम्र: 13 से 16 साल

EU में सोशल मीडिया उम्र सीमा डिजिटल सर्विसेज एक्ट और GDPR जैसे नियमों के तहत तय होती है। हर देश डिजिटल उम्र की अपनी सीमा खुद तय करता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)

न्यूनतम उम्र: 13 साल

यग COPPA (चिल्ड्रन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट) कानून के तहत नियंत्रित। इसके अनुसार, 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा इकट्ठा करने के लिए माता-पिता की सहमति जरूरी है।