Women’s Asia Cup 2026: एशिया कप में कैसा है भारत का शेड्यूल, इस दिन पाकिस्तान से भिड़ेगी टीम इंडिया

IND vs PAK: विमेंस एशिया कप 2026 का 10वां सीजन दुबई में खेला जा रहा है। विमेंस एशिया कप 2026 के ग्रुप स्टेज में भारतीय टीम अपने पहले मैच के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत का सामना आज थाईलैंड से दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में होगा। वहीं दोनों टीमों के बीच ये मुकाबला रात 8 बजे शुरू होगा। हरमनप्रीत कौर की अगुआई में भारतीय टीम जीत के इरादे से मैदान पर उतरेगी। वहीं फैंस को भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले का इंतजार है। भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में डाला गया है। आइए जानते हैं किस दिन होगा भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला

कब होगा भारत का मुकाबला

विमेंस एशिया कप टूर्नामेंट के सभी मुकाबले दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किए जाएंगे। इस बार कुल आठ टीमें खिताब के लिए मैदान में हैं, जिन्हें दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप स्टेज के बाद दोनों ग्रुप की शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी। इस बार भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखा गया है, ऐसे में 5 सितंबर को होने वाला दोनों टीमों का मुकाबला टूर्नामेंट के सबसे चर्चित मैचों में शामिल रहेगा। वहीं मेजबान यूएई की कोशिश अपने घरेलू मैदान और परिस्थितियों का फायदा उठाकर बेहतर प्रदर्शन करने की होगी। टीम श्रीलंका और बांग्लादेश जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ कड़ी चुनौती पेश करना चाहेगी।

भारत के मुकाबले

  • भारत बनाम थाईलैंड- 30 अगस्त, दुबई
  • हांगकांग, चीन बनाम भारत- सितंबर 3, दुबई
  • भारत बनाम पाकिस्तान- 5 सितंबर, दुबई
  • पहला सेमी-फाइनल- 10 सितंबर, दुबई
  • दूसरा सेमी-फाइनल- 11 सितंबर, दुबई
  • फाइनल- 13 सितंबर, दुबई

एशिया कप में रहा है भारत का दबदबा

श्रीलंका इस बार विमेंस एशिया कप में अपने खिताब का बचाव करने उतरी है। टीम ने 2024 में पहली बार यह ट्रॉफी अपने नाम की थी। हालांकि, टूर्नामेंट के रिकॉर्ड को देखें तो भारत का दबदबा सबसे ज्यादा रहा है। भारतीय टीम ने अब तक खेले गए नौ एशिया कप में से सात बार खिताब जीता है, जबकि बाकी दो मौकों पर उसे उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा। बांग्लादेश भी विमेंस एशिया कप का खिताब जीत चुकी है और उसने 2018 में ट्रॉफी अपने नाम की थी। थाईलैंड, इंडोनेशिया और हांगकांग, चीन ने ACC विमेंस प्रीमियर कप 2026 में शानदार खेल दिखाकर विमेंस एशिया कप में जगह बनाई है।

Nepal Flood: ‘शायद इस बार फोन उठ जाए…’ नेपाल बाढ़ में लापता स्वाति के परिवार ने नहीं छोड़ी उम्मीद

नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। इस तबाही में से अबतक कुल 691 लोगों को मौत हो चुकी है। वहीं 3000 हजार से ज्यादा लोग लापता है। इनके परिवार के लोगों इनकी तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद टोरंटो में रहने वाली 50 वर्षीय इंजीनियर स्वाति बागरेचा भी लापता हैं। स्वाति बागरेचा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गई थी। 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से उनका परिवार उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। मोबाइल फोन की घंटी बजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिल रहा है। स्वाति के परिवार ने उनकी तलाश के लिए भारतीय और कनाडाई दूतावास से मदद मांगी है।

फोन पर रिंग जा रहा है

PTI के मुताबिक, टोरंटो में रहने वाली 50 वर्षीय इंजीनियर स्वाति बागरेचा के परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ के बाद से स्वाति का कोई पता नहीं चल पाया है। परिवार उनके फोन की हर घंटी का इंतजार कर रहा है, इस उम्मीद में कि शायद उनकी कोई खबर मिल जाए। लेकिन फोन का जवाब न मिलने से चिंता और बढ़ती जा रही है। PTI ने स्वाति के भाई डॉ. प्रशांत बागरेचा ने बताया, “उनका मोबाइल फोन अभी भी बज रहा है, लेकिन वह हमारी कॉल रिसीव नहीं कर रही हैं। हम उनकी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं।”

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं

दिल्ली की रहने वाली स्वाति 8 अगस्त को ईशा फाउंडेशन के 77 लोगों के एक समूह के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं। परिवार के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे उनसे आखिरी बार संपर्क हुआ था। इसी दिन नेपाल में अचानक भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति बन गई थी। इसके बाद से स्वाति से संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार के मुताबिक, स्वाति 26 अगस्त को इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए नेपाल-तिब्बत सीमा पर पहुंची थीं। इसके बाद उनसे परिवार की कोई बात नहीं हो सकी। वहीं, उनकी 14 साल की बेटी अनुष्का फिलहाल अपनी बड़ी बहन के साथ मुंबई में रह रही है।

परिवार ने मदद की अपील की

26 अगस्त को नेपाल के रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे बाढ़ आ गई। बाढ़ का पानी आगे चलकर त्रिशूली और गंडक नदी तंत्र तक पहुंच गया और कई निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए। प्रशांत के मुताबिक, मोबाइल की लोकेशन से जानकारी मिली कि स्वाति का फोन चीन की सीमा के पास किसी इलाके में सक्रिय था। हालांकि, फोन को ट्रैक करने में परेशानी आ रही है क्योंकि उसका मोबाइल नंबर टोरंटो में रजिस्टर्ड है। स्वाति के परिवार ने उनकी तलाश में मदद के लिए नेपाल में भारतीय और कनाडाई दूतावास से संपर्क किया है। परिवार ने दोनों देशों के अधिकारियों से स्वाति को सुरक्षित ढूंढने और उन्हें वापस लाने में मदद करने की अपील की है।

शिवराज सिंह चौहान ने परिवार से की बात

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय विधायक मुकेश टंडन के प्रयासों के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी स्वाति के परिवार से बातचीत की। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि स्वाति की तलाश के लिए जरूरी राजनयिक और प्रशासनिक स्तर पर हर संभव कोशिश की जाएगी। साथ ही, उनकी सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर मदद पहुंचाने का आश्वासन भी दिया गया।

Nepal Flood Update: नेपाल में फिर विनाशकारी त्रासदी का खतरा! भोटे कोशी नदी में बाढ़ का बहाव बढ़ा, रसुवा में हाई अलर्ट

Nepal-Tibet Flood Update: पड़ोसी देश नेपाल में हालिया भीषण बाढ़ की त्रासदी के बीच एक बार फिर भोटे कोशी नदी को लेकर चिंता बढ़ गई है। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने रविवार (20 अगस्त) सुबह बताया कि रसुवा में भोटेकोशी नदी में बाढ़ का बहाव फिर बढ़ गया है। ऐसे में नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की गई है। NDRRMA के अनुसार, रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय को सूचना मिली है कि भोटे कोशी नदी में बढ़े हुए बाढ़ प्रवाह की आवाज सुनाई दे रही है। इसके बाद नदी के आसपास के इलाकों में विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग में हाई अलर्ट

NDRRMA ने खास तौर पर रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से नदी के किनारे जाने से बचने और किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में सुरक्षित स्थान की ओर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने रविवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “रसुवा के जिला प्रशासन कार्यालय को जानकारी मिली है कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का बहाव तेज होने की आवाज सुनी गई है। इसलिए, हम रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग तक नदी के आस-पास के इलाकों में सावधानी बरतने का अनुरोध करते हैं। जैसे ही और जानकारी मिलेगी, हम आगे की अपडेट देंगे।”

यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब नेपाल में कुछ दिन पहले आई विनाशकारी बाढ़ में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। फिलहाल, राहत एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है। रविवार को बचाव अभियान का पांचवां दिन है। नेपाल-चीन सीमा के इलाकों में भयानक अचानक आई बाढ़ और मलबे के बहाव से हुई तबाही के बाद टीमें बचे हुए लोगों और लापता लोगों की तलाश कर रही हैं।

आगे की जानकारी का इंतजार

NDRRMA ने कहा है कि जैसे-जैसे अतिरिक्त जानकारी प्राप्त होगी, लोगों को आगे अपडेट किया जाएगा। हालांकि, नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने बाद में कहा कि भोटे कोशी क्षेत्र में बड़े स्तर की बाढ़ का तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन नदी के आसपास सावधानी बरतना जरूरी है। फिलहाल प्रशासन की अपील है कि नदी किनारे रहने वाले लोग किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और आधिकारिक चेतावनियों पर नजर बनाए रखें।

मरने वालों की संख्या 691 हुई

अधिकारियों से मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, नेपाल और चीन के तिब्बत इलाके में मरने वालों की कुल संख्या 691 हो गई है। जबकि 3,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। अधिकारियों ने 675 मौतों और 2,498 लोगों के लापता होने की सूचना दी है। जबकि चीनी अधिकारियों ने तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 16 मौतों और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। अब तक नेपाल में 3,700 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है। यह भयानक आपदा 26 अगस्त को आई थी। पहाड़ी सीमावर्ती इलाके में मलबे का भारी बहाव और अचानक आई बाढ़ ने घरों, सड़कों, पुलों और अन्य चीजों को नष्ट कर दिया था।

बचाव अभियान जारी

खराब मौसम के कारण कुछ समय के लिए रोके जाने के बाद नेपाली अधिकारियों ने खोज और बचाव अभियान फिर से शुरू किया। बचे हुए लोगों को निकालने और अलग-थलग पड़े समुदायों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। बचाव दल कई अहम जगहों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिनमें रसुवा में अपर त्रिशूली-1 पनबिजली परियोजना भी शामिल है, जहां अधिकारियों का मानना ​​है कि 100 से ज्यादा लोग कीचड़ से भरी सुरंग के अंदर फंसे हो सकते हैं।

चीनी तरफ बुरी तरह क्षतिग्रस्त ग्यिरोंग सीमा क्रॉसिंग के आसपास भी खोज अभियान जारी है। इस बीच, भारत ने भोजन, दवाइयों और कंबल जैसी राहत सामग्री भेजी है। उन इलाकों में संपर्क बहाल करने में मदद के लिए तकनीकी टीमें और पहले से तैयार पुल (प्री-फैब्रिकेटेड ब्रिज) देने की भी पेशकश की है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर बह गया है।

ये भी पढ़ें- Mohan Bhagwat New York Visit: ‘अगर कोई हिंदू नहीं चाहता कि भारत में मुस्लिम रहें, तो…’; न्यूयॉर्क में क्या बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत?

Mohan Bhagwat New York Visit: ‘अगर कोई हिंदू नहीं चाहता कि भारत में मुस्लिम रहें, तो…’; न्यूयॉर्क में क्या बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत?

Mohan Bhagwat New York Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार (29 अगस्त) को न्यूयॉर्क में ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ (एक दुनिया: एक मानवता) नाम के धर्म गुरुओं के एक सम्मेलन को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने अलग-अलग धर्मों के बीच एकता और सद्भाव की अपील की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में कोई मुस्लिम न रहे, ऐसा सोचने वाला हिंदू नहीं हो सकता। भागवत ने कहा कि आज धर्मों की पहचान मुख्य रूप से रीति-रिवाजों से होती है। उन्होंने कहा, “धार्मिक अनुशासन का पालन करने और दिव्यता की राह पर चलने के लिए रीति-रिवाजों का अनुशासन भी जरूरी है। लेकिन धर्म का मकसद क्या है? यह हमें सच्चाई की ओर ले जाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं ऐसे समाज में काम कर रहा हूं जो पारंपरिक रूप से कहता है कि धर्म भले ही अलग-अलग हों, लेकिन मानवता एक है। सच्चाई एक है और मानवता उसी सच्चाई का नतीजा है।” भागवत ने कहा, “हिंदुत्व का मतलब मुस्लिम को बाहर (देश से) करना नहीं है। मुस्लिम नहीं होने चाहिए ऐसा सोचना हिंदुत्व नहीं हो सकता। धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है।” भागवत ने कहा कि अगर आप खुद को हिंदू कहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं।

भागवत ने अपने संबोधन में समाज को प्राचीन परंपराओं के बारे में शिक्षित करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं विदेशी आक्रमणों के बावजूद बची हुई हैं। इन परंपराओं ने लोगों को ‘एक दुनिया, एक मानवता’ का पाठ पढ़ाया है।

‘इंसानों के बीच कोई फर्क नहीं होता’

मोहन भागवत ने कहा, “असल में मैंने 2018 में दिल्ली में एक लेक्चर सीरीज के दौरान यह बात कही थी। वहां मुस्लिम भाई भी मौजूद थे। उन्होंने मुझसे सवाल पूछा, “आप एक हिंदू संगठन हैं, आप हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं, तो हम मुसलमानों का क्या होगा? क्या आप हमें बाहर निकाल देंगे?” मैंने उनसे कहा, “नहीं…, हिंदुत्व यह नहीं है। अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह जाएगा।” अगर आप खुद को हिंदू कहलाना चाहते हैं, तो आपको यह मानना ​​होगा कि सभी रास्ते एक ही मंजिल तक ले जाते हैं। और हर इंसान की अपनी गरिमा होती है। इंसानों के बीच कोई फर्क नहीं होता।”

RSS चीफ ने आगे कहा, “मैं कोई धार्मिक विद्वान नहीं हूं, न ही आपकी तरह कोई धार्मिक अथॉरिटी हूं। लेकिन मैं एक ऐसे समाज में काम कर रहा हूं जो ट्रेडिशनली कहता है कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक है। सच एक है, और इंसानियत उस सच का उत्पाद है। इसलिए इंसानियत एक है। वह सच एक सच है, लेकिन उसे बताने वाले के हिसाब से कई तरीकों से बताया गया है। क्योंकि इंसान होने के नाते, हम उस सॉफ्टवेयर के कैदी हैं जो हमारे दिमाग में बनाया गया है।”

हिंदू धर्म पर मोहन भागवत का संदेश

अपने संबोधन के दौरान RSS प्रमुख ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि हिंदू जीवन शैली का पालन करने के कई रास्ते हैं। लेकिन वे सभी एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इंसानों के बीच कोई बुनियादी अंतर नहीं है। हर किसी को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।

भागवत ने यह भी कहा कि संगठन ने भारत में रहने वाले मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ बातचीत शुरू की है। उन्होंने कहा, “बातचीत पहला कदम है। सेवा एक और कदम है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह बातचीत के बाद ही हो। ये दोनों काम साथ-साथ होने चाहिए। हम सेवा कर रहे हैं। और जब हम सेवा करते हैं, तो कोई भेदभाव नहीं करते।”

उन्होंने आगे कहा, “यही वजह है कि प्रचार-प्रसार के मामले में हम काफी पीछे हैं। गलत नैरेटिव (धारणाओं) की वजह से एक गलत सोच बन गई है। लेकिन जब लोग असल में आकर और समझदारी के साथ हमारे काम को देखते हैं, तो वे गलत धारणाएं बहुत तेज़ी से खत्म हो सकती हैं।”

ये भी पढ़ें- UP News: रक्षाबंधन पर सीएम योगी का बेटियों को तोहफा! बताया कब मिलेगी 50,000 छात्राओं को फ्री स्कूटी

आधुनिक राजनीति पर भागवत के विचार!

RSS प्रमुख ने आधुनिक राजनीति के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि राजनीति काफी हद तक जनमत पर निर्भर करती है। खासकर लोकतंत्र में कोई भी राजनेता आसानी से इसके खिलाफ नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि घटनाओं के होने से पहले ही राजनीति को बदलें और उसे सही दिशा में प्रभावित करें। हम युद्ध रोकना चाहते हैं। हम ये सभी काम करना चाहते हैं। इसलिए किसी न किसी समय हमें राजनीति को प्रभावित करना ही होगा।” हालांकि, भागवत ने संकेत दिया कि राजनीति के कारण धार्मिक सद्भाव नहीं बन पा रहा है।

नेपाल बाढ़, लोगों को 7:30 बजे खतरे का पता चला:9:15 पर सरकारी SMS आया; अलर्ट में 2 घंटे देरी, वरना सैकड़ों जानें बच जातीं

नेपाल में 26 अगस्त की सुबह आई बाढ़ के बाद अलर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, चीन की ओर से रसुवा जिला प्रशासन को बाढ़ की सूचना सुबह 9 बजे मिली थी। इसके बाद सुबह 9.15 बजे नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले छह लाख लोगों को SMS अलर्ट भेजा गया। प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि उसे जिला प्रशासन से सुबह 8.40 बजे ही बाढ़ की सूचना मिल गई थी। लोगों को SMS अलर्ट सुबह 9.35 बजे भेजा गया था। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्हें दोस्तों और रिश्तेदारों से सुबह 7.30 बजे ही बाढ़ की चेतावनी मिल गई थी। शनिवार तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 691 पहुंच गई है। तीन हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। इनमें 275 भारतीय शामिल हैं। अब तक 7,514 लोगों को रेस्क्यू किया गया है, जिनमें 163 विदेशी भी हैं। प्रत्यक्षदर्शी बोले- सुबह 7.30 बजे जानकारी मिल गई थी त्रिशूली निवासी 36 साल के रमेश रिजाल के मुताबिक, चीन बॉर्डर के पास रहने वाले उनके एक दोस्त ने सुबह 7.30 बजे फोन कर भयानक बाढ़ आने की जानकारी दी थी। रिजाल ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। वे बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी करते रहे। सुबह 9.20 बजे उन्होंने अपने नए घर के निर्माण का वीडियो भी बनाया। इसके बाद अफरातफरी मचने पर परिवार के साथ सुरक्षित जगह चले गए। त्रिभुवन सेकेंडरी को-एजुकेशनल स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बताया कि एक सहकर्मी को नदी के ऊपरी इलाके से बाढ़ की सूचना मिली थी। इसके बाद उन्होंने स्कूल की घंटी लगातार बजाने का निर्देश दिया। स्कूल में करीब 1,600 स्टूडेंट्स हैं। दवाड़ी के मुताबिक, उनकी आंखों के सामने स्कूल बाढ़ में बह गया, हालांकि बच्चे सुरक्षित बचा लिए गए। बाद में उन्हें हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया। भूकंप जैसे झटकों के 13 मिनट बाद नदी का डेटा सिस्टम बंद मौसम विभाग के मुताबिक, 26 अगस्त को सुबह 8.37 बजे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 4.4 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके आए थे। इसके 13 मिनट बाद सुबह 8.50 बजे भोटे कोशी नदी का जलस्तर मापने वाले डेटा रिसीविंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद तिब्बत के ल्हेंदे खोला नदी में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ गिरा था। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है। 9.36 बजे पानी बाजार की ओर बढ़ा, 2 मिनट में सब बह गया त्रिशूली बाजार में कबाड़ का कारोबार करने वाले बिहार मूल के जलेश्वर साहनी ने बाढ़ की तबाही की तस्वीरें खींचीं। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 9.15 बजे रासुवागढ़ी में मौजूद उनके भाई ने फोन कर विशाल बाढ़ के आने की सूचना दी। इसके बाद साहनी परिवार के साथ पहाड़ी पर चले गए। साहनी ने सुबह 9.36 बजे एक तस्वीर ली, जिसमें बाढ़ का पानी त्रिशूली बाजार की ओर बढ़ता दिख रहा था। इसके महज दो मिनट बाद 9.38 बजे ली गई दूसरी तस्वीर में पूरा त्रिशूली बाजार बाढ़ में बह चुका था। यानी तबाही की रफ्तार इतनी तेज थी कि दो मिनट में पूरा मंजर बदल गया। विपक्ष ने चीन के सैटेलाइट सिस्टम पर उठाए सवाल नेपाली कांग्रेस के उपनेता अभिषेक प्रताप शाह ने कहा कि चीन का सैटेलाइट सिस्टम ग्लेशियरों की निगरानी करता है। इसलिए चीन को खतरे की सूचना समय रहते देनी चाहिए थी। इसी को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि बाढ़ की चेतावनी स्थानीय प्रशासन और लोगों तक सही समय पर क्यों नहीं पहुंची। ———————————- यह खबर भी पढ़ें… नेपाल- भोटेकोशी नदी में पानी बढ़ा, फिर बाढ़ का खतरा:रसुवा सहित 3 जिलों में अलर्ट नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नेपाल डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट अथॉरिटी ने रविवार सुबह बताया कि भोटेकोशी नदी में पानी का बहाव तेज होने की जानकारी मिली है। इसके बाद जिला प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में अलर्ट जारी किया गया है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…

नेपाल बाढ़, लोगों को 7:30 बजे खतरे का पता चला:9:35 पर सरकारी SMS आया; अलर्ट में 2 घंटे देरी, वरना सैकड़ों जानें बच जातीं

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद अब अलर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, रसुवा जिला प्रशासन को चीन की तरफ से बाढ़ की सूचना सुबह 9 बजे मिली थी। इसके बाद सुबह 9.15 बजे नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले करीब छह लाख लोगों को SMS अलर्ट भेजा गया। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि उसे जिला प्रशासन से सुबह 8.40 बजे ही बाढ़ की सूचना मिल गई थी। लोगों को SMS अलर्ट सुबह 9.35 बजे भेजा गया था। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्हें दोस्तों और रिश्तेदारों से सुबह 7.30 बजे ही बाढ़ की चेतावनी मिल गई थी। अलर्ट की टाइमिंग को लेकर इन अलग-अलग दावों के बीच सिस्टम की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।शनिवार तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 682 पहुंच गई, जबकि 3 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। इनमें 275 भारतीय शामिल हैं। अब तक 7,514 लोगों को रेस्क्यू किया गया है, जिनमें 163 विदेशी भी हैं। प्रत्यक्षदर्शी बोले- सुबह 7.30 बजे ही मिल गई थी जानकारी त्रिशूली निवासी 36 साल के रमेश रिजाल के मुताबिक, चीन बॉर्डर के पास रहने वाले उनके एक दोस्त ने सुबह 7.30 बजे फोन कर भयानक बाढ़ आने की जानकारी दी थी। रिजाल ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी करते रहे। सुबह 9.20 बजे उन्होंने अपने नए घर के निर्माण का वीडियो भी बनाया। इसके बाद अफरा-तफरी मचने पर वे परिवार के साथ सुरक्षित जगह चले गए। त्रिभुवन सेकेंडरी को-एजुकेशनल स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बताया कि एक सहकर्मी को नदी के ऊपरी इलाके से बाढ़ की सूचना मिली थी। इसके बाद उन्होंने स्कूल की घंटी लगातार बजाने का निर्देश दिया। स्कूल में करीब 1,600 स्टूडेंट्स हैं। दवाड़ी के मुताबिक, उनकी आंखों के सामने स्कूल बाढ़ में बह गया, हालांकि बच्चे सुरक्षित बचा लिए गए। बाद में उन्हें हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया। भूकंप के 13 मिनट बाद नदी का डेटा सिस्टम बंद मौसम विभाग के मुताबिक, 26 अगस्त को सुबह 8.37 बजे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके 13 मिनट बाद सुबह 8.50 बजे भोटे कोशी नदी का जलस्तर मापने वाला डेटा रिसीविंग सिस्टम काम करना बंद कर गया। भूकंप के बाद तिब्बत के ल्हेंदे खोला नदी में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ गिरा था। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है। 9.36 बजे पानी बाजार की ओर बढ़ा, 2 मिनट में सब बह गया त्रिशूली बाजार में कबाड़ का कारोबार करने वाले बिहार मूल के जलेश्वर साहनी ने बाढ़ की तबाही की तस्वीरें खींचीं। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 9.15 बजे रासुवागढ़ी में मौजूद उनके भाई ने फोन कर विशाल बाढ़ के आने की सूचना दी। इसके बाद साहनी परिवार के साथ पहाड़ी पर चले गए। साहनी ने सुबह 9.36 बजे एक तस्वीर ली, जिसमें बाढ़ का पानी त्रिशूली बाजार की ओर बढ़ता दिख रहा था। इसके महज दो मिनट बाद 9.38 बजे ली गई दूसरी तस्वीर में पूरा त्रिशूली बाजार बाढ़ में बह चुका था। यानी तबाही की रफ्तार इतनी तेज थी कि दो मिनट में पूरा मंजर बदल गया। विपक्ष ने चीन के सैटेलाइट सिस्टम पर उठाए सवाल नेपाली कांग्रेस के उपनेता अभिषेक प्रताप शाह ने कहा कि चीन का सैटेलाइट सिस्टम ग्लेशियरों की निगरानी करता है। इसलिए चीन को खतरे की सूचना समय रहते देनी चाहिए थी। इसी को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि बाढ़ की चेतावनी स्थानीय प्रशासन और लोगों तक सही समय पर क्यों नहीं पहुंची। ———————————- यह खबर भी पढ़ें… नेपाल- भोटेकोशी नदी में पानी बढ़ा, फिर बाढ़ का खतरा:रसुवा सहित 3 जिलों में अलर्ट नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नेपाल डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट अथॉरिटी ने रविवार सुबह बताया कि भोटेकोशी नदी में पानी का बहाव तेज होने की जानकारी मिली है। इसके बाद जिला प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में अलर्ट जारी किया गया है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…

नेपाल- भोटेकोशी नदी में पानी बढ़ा, फिर बाढ़ का खतरा:रसुवा सहित 3 जिलों में अलर्ट; अब तक 682 मौतें, 275 भारतीयों समेत 3000 लापता

नेपाल में फिर से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। रसुवा जिला प्रशासन को रविवार सुबह भोटेकोशी नदी में बहाव बढ़ने की आवाज सुनाई देने की जानकारी मिली है। इसके बाद रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में अलर्ट जारी किया गया है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों से सावधान रहने को कहा गया है। इससे पहले 26 अगस्त को नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशुली नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी। बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट सहित 8 जिलों में तबाही मचाई। अब तक 675 शव बरामद हुए हैं, जबकि 7 शव तिब्बत में मिले हैं। 3 हजार से ज्यादा लोग बाढ़ के बाद से लापता हैं। इनमें 275 भारतीय हैं। नेपाल पुलिस ने शनिवार को अज्ञात मृतकों की तस्वीरें और डिटेल्स अपनी वेबसाइट पर जारी की हैं, ताकि परिजन उनकी पहचान कर सकें। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि शवों को दफनाने से पहले DNA सैंपल और पहचान से जुड़े सबूत सुरक्षित रखे जाएंगे। भारत सरकार के मुताबिक, नेपाल से 108 भारतीयों का रेस्क्यू हो चुका है। वहीं 275 भारतीय और 128 भारतीय मूल के लोग अब भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। पिछले दो दिनों में 598 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 900 भारतीय अभी चीन में सुरक्षित हैं। बाढ़ के बाद तबाही का मंजर, 3 तस्वीरें… खबर से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

पीएम मोदी आज ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल जाएंगे:राष्ट्रपति मिर्जियोयेव से द्विपक्षीय बैठक, व्यापार और निवेश पर होगी बात

पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के उज्बेकिस्तान दौरे पर है। आज पीएम ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्केक रवाना होंगे। मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, 4 तस्वीरें किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। =========== ये खबर भी पढ़ें उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी को महिलाओं ने राखी बांधी, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में रवाना हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। दोनों नेता एक ही कार में एयरपोर्ट से होटल पहुंचे। पीएम मोदी ने यहां भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में दो दिन रहेंगे। वे राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। पढ़ें पूरी खबर

पीएम मोदी आज ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल जाएंगे:राष्ट्रपति मिर्जियोयेव से द्विपक्षीय बैठक, व्यापार और निवेश पर होगी बात

पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के उज्बेकिस्तान दौरे पर है। आज पीएम ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्केक रवाना होंगे। मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, 4 तस्वीरें किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। =========== ये खबर भी पढ़ें उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी को महिलाओं ने राखी बांधी, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में रवाना हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। दोनों नेता एक ही कार में एयरपोर्ट से होटल पहुंचे। पीएम मोदी ने यहां भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में दो दिन रहेंगे। वे राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। पढ़ें पूरी खबर

‘बेहद उदार’: नेपाल के राष्ट्रपति पौडेल ने की PM मोदी की तारीफ, बाढ़ में मदद के लिए भारत का जताया आभार

Nepal flood: नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शनिवार को भारत का धन्यवाद किया। उन्होंने 26 अगस्त को हिमालयी देश में आई भयानक अचानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और समर्थन के लिए आभार जताया। इस बाढ़ में 626 लोगों की मौत हुई है। नेपाल ने संकट के इस मुश्किल समय में मदद करने के लिए भारत के प्रयासों की भी तारीफ की। इस दौरान राष्ट्रपति पौडेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “बेहद उदार” बताया।

पौडेल ने मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया

X पर एक पोस्ट में, पौडेल ने आपदा के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की चिंता और भारत सरकार की मदद के लिए उनका आभार जताया।

उन्होंने लिखा, “नेपाल सरकार और यहां के लोगों की ओर से मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उनकी चिंता और संवेदना के लिए दिल से धन्यवाद करता हूं। साथ ही, नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत सरकार की ओर से दिए गए उदार समर्थन और सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त करता हूं।””

नेपाल के राष्ट्रपति ने आपदा में मारे गए भारतीय नागरिकों के प्रति भी शोक व्यक्त किया।

पौडेल ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “हम 26 अगस्त, 2026 की आपदा में भारतीयों की दुखद मौत पर भारत सरकार और वहां के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति भी व्यक्त करते हैं।”

नेपाल का कहना है कि भारत पुनर्निर्माण में मदद के लिए तैयार है

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने बताया कि भारत ने बाढ़ से हुई तबाही के बाद पुनर्निर्माण के लिए उदार मदद देने की बात कही है।

नेपाल ने इस भयानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और उसके तुरंत दिए गए समर्थन की भी तारीफ की है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में घरों और जरूरी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। अब नेपाल के सामने इन इलाकों को दोबारा बसाने और बुनियादी सुविधाओं को ठीक करने की बड़ी चुनौती है।

इस आपदा से भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं और पौडेल ने उनकी मौत पर शोक व्यक्त किया है।

बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई बाढ़

यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों के खिसकने (एवलांच) के कारण आई। इसके बाद पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव बुधवार को मध्य नेपाल से होते हुए नीचे की ओर बढ़ा, जिससे कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई।

यह भी पढ़ें: 626 शव, 2,400 लापता… नेपाल में बाढ़ से हाहाकार, भारत-चीन समेत कई देश मदद को आगे आए