IND vs ENG: रवि बिश्नोई की वजह से भारत हारा मैच? इंग्लैंड से हार के बाद ईशान किशन ने बताई हार की असली वजह

India vs England: भारत और इंग्लैंड के बीच मैनचेस्टर के ओल्डट्रैफर्ड में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में भारत को 4 विकेट से हाल मिली है। जीत के साथ इंग्लैंड की टीम 5 मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 मैच में एक समय ऐसा लग रहा था कि भारत आसानी से मुकाबला जीत जाएगा। इंग्लैंड को आखिरी चार ओवर में 49 रन की जरूरत थी, लेकिन रवि बिश्नोई के एक ओवर ने मैच का रुख बदल दिया। रवि बिश्नोई के एक ओवर में 29 रन बने, जिसमें दो फ्री-हिट पर जैकब बेथेल ने शानदार छक्के लगाए। इसी ओवर ने इंग्लैंड की जीत की राह आसान कर दी। इंग्लैंड ये मैच 19 ओवर में ही जीत गया।

मैच के बाद क्या कहा

मैच के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने माना कि, एक ओवर में ज्यादा रन बनने के बाद मुकाबले का रुख बदल गया। लेकिन उन्होंने किसी भी खिलाड़ी को हार का जिम्मेदार नहीं ठहराया और कहा कि जीत-हार पूरी टीम की जिम्मेदारी होती है। ईशान किशन ने भी माना कि मैच कुछ अहम गेंदों में भारत के हाथ से निकल गया। लेकिन उन्होंने किसी एक खिलाड़ी को हार का जिम्मेदार नहीं ठहराया। ईशान ने कहा कि टी20 क्रिकेट में कुछ गेंदें ही पूरे मैच का रुख बदल देती हैं और इस मुकाबले में भी ऐसा ही देखने को मिला।

जैकब बेथेल की तारीफ की

मैच के बाद ईशान किशन ने रिपोर्टर्स से कहा, “हमें पूरे मैच के दौरान लग रहा था कि मुकाबला हमारे कंट्रोल में है। लेकिन फ्री-हिट पर मिले रन से बल्लेबाज का दबाव कम हो गया और मैच का रुख बदलने लगा।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि हमारी गेंदबाजी काफी अच्छी रही। हमने अपनी योजनाओं के मुताबिक गेंदबाजी की, लेकिन जैकब बेथेल को भी पूरा श्रेय देना होगा। उसने धैर्य के साथ बल्लेबाजी की, लंबे समय तक क्रीज पर टिका रहा और सही समय पर सही गेंदबाजों पर आक्रमण किया।”

फ्री-हिट नहीं देना था

उन्होंने आगे कहा, “हम और बेहतर गेंदबाजी कर सकते थे। शायद हमें वे फ्री-हिट वाली गेंदें नहीं देनी चाहिए थीं, जिन पर दो छक्के लगे। बिना किसी अतिरिक्त मेहनत के विपक्षी टीम को 12 रन और दो अतिरिक्त मौके मिल गए। टी20 जैसे छोटे फॉर्मेट में ऐसे छोटे-छोटे पल ही मैच का नतीजा बदल देते हैं। उम्मीद है कि अगले मैच में हम ऐसी गलतियों से बचेंगे।”

हम यह मैच नहीं जीत सके

हाल के टी20 मैचों में भारत को उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले हैं। लेकिन ईशान किशन ने कहा कि, टीम अच्छा क्रिकेट खेल रही है और गलतियों से सीखकर अगले मैचों में बेहतर प्रदर्शन करेगी। ईशान किशन ने कहा, “हम यह मैच नहीं जीत सके, लेकिन मुझे लगता है कि हम अच्छा क्रिकेट खेल रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि हर मुकाबले के बाद हम यह समझें कि किन क्षेत्रों में हमें और सुधार करने की जरूरत है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारी सबसे बड़ी ताकत ये है कि पूरी टीम एकजुट है और हर खिलाड़ी खुद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है। लगातार जीत न मिलना टीम के आत्मविश्वास पर असर डाल सकता है, लेकिन हमारी टीम में अनुभवी और समझदार खिलाड़ी हैं। हम जानते हैं कि कहां सुधार करना है और एक टीम के रूप में आगे बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे।”

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इंजन खराब होने से लेकर वारंटी खत्म होने तक… E20 Petrol पर सरकार ने इन बड़े दावों की बताई सच्चाई

सोशल मीडिया पर इन दिनों E20 Petrol को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। E20 पेट्रोल को लेकर पानी, इंजन डैमेज, माइलेज और वारंटी से जुड़े कई दावे भी किए जा रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से फैल रहा है कि इसका इस्तेमाल करने पर वाहन का बीमा क्लेम या कंपनी की वारंटी खत्म हो सकती है। इस दावे के वायरल होने के बाद केंद्र सरकार ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की और लोगों से ऐसी भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करने की अपील की।

सरकार ने इन बड़े दावों की बताई सच्चाई

सरकार ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। संबंधित बीमा कंपनियों और वाहन निर्माता कंपनियों ने भी स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन के उपयोग से न तो वाहन का बीमा प्रभावित होता है और न ही कंपनी की वारंटी पर कोई असर पड़ता है। सरकार की ओर से साझा की गई जानकारी में कहा गया कि बीमा कंपनियों और वाहन निर्माता कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि E20 फ्यूल का इस्तेमाल करने से भारत में किसी भी वाहन के बीमा या कंपनी की वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ता। इसलिए इस तरह की अफवाहों पर भरोसा करने की जरूरत नहीं है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन ने स्पष्ट किया है कि जिन गाड़ियों को E20 ईंधन के लिए तैयार किया गया है और जो तय मानकों को पूरा करती हैं, उनकी कंपनी वारंटी पहले की तरह जारी रहेगी। यानी E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इससे पहले भी सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही कई गलत जानकारियों पर विस्तार से जवाब दिया था। सरकार ने एक विस्तृत जानकारी जारी कर इंजन की सुरक्षा, ईंधन की खपत, वाहन की वारंटी, माइलेज और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर जैसे मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि E20 कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाता है। मंत्रालय के अनुसार, यह योजना वैज्ञानिक अध्ययनों, तय सुरक्षा मानकों और कई देशों के अनुभव को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। मंत्रालय ने बताया कि इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल दुनिया के कई देशों में लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। अमेरिका, ब्राज़ील, कनाडा, थाईलैंड, जापान और कई यूरोपीय देशों में भी यह ईंधन पहले से उपयोग में है। मंत्रालय के अनुसार, E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहन के प्रदर्शन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता और माइलेज में भी केवल मामूली बदलाव देखने को मिलता है।

सरकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम देश की तेल आयात पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। फिलहाल भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव और वैश्विक परिस्थितियों का सीधा असर देश पर पड़ता है। ऐसे में इथेनॉल के बढ़ते इस्तेमाल से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और आयात का बोझ कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Elon Musk अब नहीं रहे ट्रिलेनियर, Tesla-SpaceX की बिकवाली से लगा करंट, एक्सपर्ट ने किया सतर्क

दुनिया के पहले और इकलौते ट्रिलेनियर यानी $1 लाख करोड़ से अधिक दौलत वाले शख्स एलॉन मस्क (Elon Musk) को टेस्ला (Tesla) और स्पेसएक्स (SpaceX) के शेयरों की गिरावट से तगड़ा शॉक लगा। इनकी गिरावट से मस्क की दौलत से हजारों करोड़ डॉलर साफ हो गए। अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह गिरावट अस्थायी है या फिर एआई और स्पेस से जुड़ी हाई-ग्रोथ कंपनियों को लेकर मार्केट की सोच में बड़े बदलाव का संकेत। टेस्ला का शेयर दिसंबर 2025 में एक साल के हाई $498.83 से करीब 21% टूटकर करीब $393 पर है। वहीं अब तक के सबसे बड़ा आईपीओ लाने के बाद 12 जून को नास्डाक पर लिस्ट हुई स्पेसएक्स $225.64 के रिकॉर्ड हाई से करीब 30% टूटकर अब $157-158 के करीब आ चुका है। इस गिरावट के कारण एलन मस्क की नेटवर्थ स्पेसएक्स की लिस्टिंग के तुरंत बाद अपने $1.45 ट्रिलियन के रिकॉर्ड हाई से घटकर $1 ट्रिलियन से नीचे आ गई है।

प्रॉफिट बुकिंग है या गहरी गिरावट?

वेस्टेड फाइनेंस के सीईओ और फाउंडर विक्रम शाह का मानना है कि टेस्ला और स्पेसएक्स की गिरावट की दोनों वजहें हैं- प्रॉफिट बुकिंग और गहरी गिरावट। शेयरों की तेज रैली के बाद निवेशकों ने पैसा निकाला शुरू किया तो इस पर दबाव पड़ा। इसके अलावा मार्केट ने अब एआई और स्पेस इकॉनमी से जुड़ी कंपनियों का वैल्यूएशन फिर से करना शुरू किया है। ऐसे में यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि वैल्यूएशन आखिर कहां स्थिर होंगे।

विक्रम शाह के मुताबिक टेस्ला और स्पेसएक्स के सिर्फ शेयर ही टूटे हैं, बिजनेस के स्तर पर अभी भी ज्यादा कुछ नहीं टूटा है। उन्होंने जिक्र किया कि टेस्ला ने अभी हाल में अपना सबसे मजबूत तिमाही डिलीवरी आंकड़ा पेश किया है, फिर भी शेयर टूटे हैं। इससे संकेत मिल रहा है कि निवेशक अभी कंपनी के इलेक्ट्रिक वेईकल बिजनेस की बजाय उसके लंबे समय के ऑटोनॉमस ड्राइविंग और रोबोटैक्सी विजन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। स्पेसएक्स की स्थिति भी ऐसी ही है। स्टारलिंक लगातार प्रॉफिटेबल तरीके से बढ़ रहा है और कंपनी का लॉन्च बिजनेस भी विस्तार कर रहा है, लेकिन पोस्ट-लिस्टिंग शुरुआती तेजी के बाद शेयरों पर दबाव आया है।

क्या करना चाहिए भारतीय निवेशकों को?

विक्रम शाह के मुताबिक टेस्ला और स्पेसएक्स की गिरावट खरीदें या बेचें, फैसले जितना साधारण नहीं है बल्कि उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि पोर्टफोलियो एलोकेशन और निवेश के लॉन्ग-टर्म गोल्स पर फोकस करना चाहिए। उनका कहना है कि एआई और स्पेस में 5–10 साल के लिए निवेश कर रहे हैं तो कुछ हफ्तों की गिरावट से ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने निवेशकों को यह भी देखने की सलाह दी है कि कहीं इन शेयरों में उनका एक्सपोजर पहले की तेजी के कारण जरूरत से ज्यादा तो नहीं हो गया है। साथ ही उन्होंने भारतीय निवेशकों को बिना सोचे-समझे नई लिस्ट हुई हाई-वैल्यू अमेरिकी कंपनियों में निवेश करने से सावधान किया। उनका मानना है कि अमेरिकी स्टॉक्स में निवेश इतना छोटा होना चाहिए कि शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव से पूरा पोर्टफोलियो प्रभावित न हो।

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भारत के इंजीनियरों से ज्यादा पैसे और इज्जत कमाते हैं ऑस्ट्रेलिया के प्लंबर! वहां रहने वाले ऐडी खानेजा ने बताई गजब की बात

सोशल मीडिया पर एक भारतीय युवक का वीडियो इन दिनों खूब चर्चा में है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले इस युवक ने वहां प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और बढ़ई जैसे स्किल्ड प्रोफेशन को मिलने वाली कमाई और सम्मान पर अपनी राय साझा की है। उनका कहना है कि इन कामों को वहां सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि सम्मानजनक करियर माना जाता है। उनके वीडियो ने भारत में स्किल्ड ट्रेड्स को लेकर लोगों की सोच पर नई बहस छेड़ दी है।

‘यहां प्लंबर बनना भी लोगों का सपना है’

वीडियो में युवक बताते हैं कि भारत में अक्सर पढ़ाई में कमजोर बच्चों को ताना दिया जाता है कि वे बड़े होकर प्लंबर, बढ़ई या इलेक्ट्रिशियन बनेंगे। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में स्थिति बिल्कुल अलग है। वहां कई युवा खुद इन पेशों को चुनना चाहते हैं क्योंकि इनमें अच्छी कमाई और बेहतर भविष्य मिलता है।

15 मिनट के काम के मिले हजारों रुपये

उन्होंने एक निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके घर का ताला खराब हो गया था। इसे ठीक करने के लिए उन्होंने एक बढ़ई को बुलाया। बढ़ई ने सिर्फ 15 मिनट में काम पूरा किया और इसके लिए 150 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर फीस ली। उनका कहना था कि ऐसे कामों की वहां अच्छी कीमत दी जाती है।

सैलरी सुनकर रह जाएंगे हैरान

युवक के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में एक कंस्ट्रक्शन मैनेजर सालाना करीब 2 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक कमा सकता है। वहीं प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन भी आसानी से 1.2 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर या उससे अधिक की कमाई कर लेते हैं।

‘अब बेटे को इंजीनियर नहीं, बढ़ई बनाना चाहूंगा’

वीडियो में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब वह शायद पहले भारतीय पिता होंगे जो अपने बच्चे से इंजीनियर या डॉक्टर बनने के बजाय बढ़ई का काम सीखने को कहेंगे। उनका मानना है कि इससे अच्छी कमाई भी होगी और रोजमर्रा के छोटे-मोटे कामों के लिए दूसरों पर निर्भर भी नहीं रहना पड़ेगा।

सिर्फ पैसे नहीं, सम्मान भी मिलता है

उनका कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में हाथ से काम करने वाले लोगों को काफी सम्मान दिया जाता है। प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और बढ़ई जैसे पेशों को वहां किसी भी दूसरे प्रोफेशन की तरह सम्मानजनक माना जाता है। उनके मुताबिक, भारत में अभी भी इन कामों को उतनी इज्जत नहीं मिलती।

लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई। कुछ यूजर्स ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में न्यूनतम वेतन और स्किल ट्रेनिंग सिस्टम की वजह से इन नौकरियों की अच्छी कमाई होती है। वहीं कुछ लोगों का मानना था कि आज भी इंजीनियरिंग और दूसरे प्रोफेशन में कमाई की संभावनाएं अधिक हैं। इस वीडियो ने एक बार फिर स्किल-बेस्ड प्रोफेशन और उनके सम्मान को लेकर बहस छेड़ दी है।

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Khamenei Funeral News: ‘मुझे लगा था लोग उनसे नफरत करते हैं…’; खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ देख ट्रंप के उड़े होश

Khamenei Funeral News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि ईरान के लोग खामेनेई को पसंद नहीं करते। लेकिन अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की मौजूदगी देखकर वे चौंक गए। एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें ईरान के अंदर बिल्कुल अलग प्रतिक्रिया की उम्मीद थी। एक्सियोस (Axios) से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह तेहरान में अंतिम संस्कार की रस्मों पर बारीकी से नजर रखे हुए थे।

अंतिम संस्कार के वीडियो के बारे में पूछे जाने पर न्यूज वेबसाइट Axios से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “मैं हैरान था। मुझे लगा था कि लोग उससे नफरत करते हैं।” यह टिप्पणी तब आई जब खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्मों के लिए तेहरान में लाखों लोग जमा हुए। खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में मारे गए थे। अंतिम संस्कार का कार्यक्रम पूरे सप्ताह चलेगा। अंत में मशहद में उन्हें दफनाया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह भी संभव है कि लोगों के आंसू नकली हों।

‘हम चाहें तो सभी नेताओं को निशाना बना सकते थे’

ट्रंप ने दावा किया कि खामेनेई के अंतिम संस्कार में ईरान के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। अमेरिका चाहे तो उन्हें निशाना बना सकता था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया क्योंकि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत जारी रखना चाहता है। उनके मुताबिक, “वे सभी एक जगह मौजूद हैं। एक ही वार में हम सबको खत्म कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि फिर बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचेगा।”

‘ईरान समझौता करना चाहता है’

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए उत्सुक है। उनके अनुसार, दोनों देशों ने अंतिम संस्कार की अवधि तक बातचीत और सैन्य कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोकने पर सहमति बनाई है। उन्होंने कहा, “वे समझौता करने के लिए बेताब हैं। हमने अंतिम संस्कार के लिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया क्योंकि हम ऐसा करना उचित समझते हैं।”

तेहरान में उमड़ा जनसैलाब

4 जुलाई से शुरू हुए अंतिम संस्कार में तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। श्रद्धांजलि देने आए लोगों ने खामेनेई की तस्वीरें हाथों में ली थी। इस दौरान अमेरिका तथा इजरायल के खिलाफ नारे लगाए। उनके ताबूत को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा गया।

9 जुलाई को होगा अंतिम संस्कार

अंतिम संस्कार की रस्में ईरान के कई शहरों में जारी रहेंगी। इसके बाद 9 जुलाई को खामेनेई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। भारत में सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि आयतुल्ला हकीम इलाही के अनुसार, सुरक्षा कारणों और संभावित हमलों के खतरे को देखते हुए मोजतबा खामेनेई के अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना कम है।

खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत से कौन गया?

केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में शुक्रवार को हिस्सा लिया। दोनों ने भारत सरकार एवं देश की जनता की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पिछले तीन दशक से ईरान का नेतृत्व कर रहे खामेनेई की 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के पहले दिन मृत्यु हो गई थी।

विदेश राज्य मंत्री मार्गेरिटा ने X पर प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय के हैंडल को टैग करते हुए पोस्ट किया, “माननीय बिहार के राज्यपाल और मैंने तेहरान में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारत सरकार और देश की जनता की ओर से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।”

उन्होंने समारोह की कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं। बिहार लोकभवन ने X पर एक पोस्ट में कहा कि राज्यपाल ने पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति भी गहरी संवेदना व्यक्त की। बिहार के लोकभवन ने राज्यपाल हसनैन के हैंडल को टैग करते हुए कहा, “विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा के साथ आज तेहरान में अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालिया संघर्ष में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति भी गहरी संवेदना व्यक्त की।”

लोकभवन ने समारोह की कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं। भारत स्थित ईरानी दूतावास ने भी X पर एक पोस्ट जारी करके हसनैन और मार्गेरिटा के श्रद्धांजलि अर्पित करने का वीडियो शेयर किया। यह श्रद्धांजलि उस सभागार में दी गई, जहां खामेनेई के लिए शोक समारोह आयोजित किया गया था।

विपक्षी नेता भी पहुंचे तेहरान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व किया। साथ ही पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती और भारत से गए सिख, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धर्मगुरुओं ने भी दिवंगत ईरानी नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से उनकी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में पूछा गया कि खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया, क्योंकि इसमें कई लोग शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा, “जहां तक भारत सरकार का सवाल है, हमने इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। हमारी ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा आज तेहरान में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।”

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विदेश मंत्रालय ने दो जुलाई को जारी अपने बयान में कहा था, “इस कार्यक्रम में भारत का उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संबंधों तथा लोगों के बीच संपर्क के महत्व को रेखांकित करता है, जो राजनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है।” खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम पांच, छह और सात जुलाई को तेहरान और कोम में आयोजित किए जाएंगे। जबकि उन्हें नौ जुलाई को मशहद शहर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

ONGC New Chairman: नियुक्ति के लिए सरकार ने बढ़ाई मैक्सिमम एज लिमिट, अब 5 साल तक का हो सकता है टर्म

सरकार ने सरकारी कंपनी ONGC के अगले चेयरमैन की नियुक्ति के लिए योग्यता शर्तों में ढील दी है। इसके तहत अधिकतम उम्र सीमा को बढ़ाकर 59 साल कर दिया गया है। साथ ही अब चुने गए उम्मीदवार को 3 साल का फिक्स्ड टर्म दिया जाएगा, जिसे और 2 साल बढ़ाया जा सकता है। इससे ONGC चेयरमैन बनने के लिए योग्य उम्मीदवारों का दायरा बढ़ गया है। ONGC भारत की सबसे बड़ी तेल और गैस उत्पादक कंपनी है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सरकारी कंपनियों में नियुक्तियों के लिए सरकार की एजेंसी ‘पब्लिक एंटरप्राइजेज सिलेक्शन बोर्ड (PESB)’ ने ONGC के चेयरमैन पद के लिए आवेदन मंगाए हैं। यह पद 7 दिसंबर को खाली हो जाएगा। 6 दिसंबर 2026 को मौजूदा चेयरमैन अरुण कुमार सिंह का बढ़ा हुआ कार्यकाल खत्म होने वाला है। नई नियुक्ति के लिए संशोधित उम्र सीमा सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSEs) में बोर्ड-लेवल की ज्यादातर नियुक्तियों के लिए अपनाए जाने वाले नियमों से अलग है।

कैसे होगा सिलेक्शन और कब तक कर सकते हैं आवेदन

ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के विज्ञापन के अनुसार, उम्मीदवारों की उम्र पद खाली होने की तारीख यानि 7 दिसंबर, 2026 को 59 साल या उससे ज्यादा नहीं होनी चाहिए। चुने गए उम्मीदवार को शुरू में 3 साल के लिए नियुक्त किया जाएगा और परफॉर्मेंस रिव्यू के बाद उनके कार्यकाल को 2 साल और बढ़ाया जा सकता है। विज्ञापन में कहा गया है, “60 साल की उम्र के बाद कोई भी नौकरी या कार्यकाल का विस्तार कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर होगा।” कैंडिडेट का सिलेक्शन सामान्य PESB सिलेक्शन प्रोसेस के बजाय पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से गठित एक सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी द्वारा किया जाएगा।

विज्ञापन के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन 21 जुलाई को बंद हो जाएंगे, जबकि तय तरीकों से आवेदन भेजने की आखिरी तारीख 30 जुलाई है। जिम्मेदारियों की बात करें तो चेयरमैन ONGC के ओवरऑल मैनेजमेंट और स्ट्रैटेजिक डायरेक्शन के लिए जिम्मेदार होंगे। इसमें रेवेन्यू और मुनाफे में बढ़ोतरी करना, ONGC के एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन बिजनेस का नेतृत्व करना, अधिग्रहणों और जॉइंट वेंचर्स के जरिए नए एनर्जी और पेट्रोकेमिकल सेक्टर्स में विस्तार की देखरेख करना और पूरी कंपनी में टेक्नोलॉजी को अपनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना शामिल है।

Telegram को सरकार से नोटिस, पायरटेड कंटेंट रोके नहीं तो लिया जाएगा एक्शन

अरुण कुमार सिंह की नियुक्ति के टाइम भी दी गई थी छूट

सरकार ने 2022 में ONGC के मौजूदा चेयरमैन और CEO अरुण कुमार सिंह की नियुक्ति के समय भी इसी तरह की छूट दी थी। पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा बनाई गई एक सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी ने उन्हें अगस्त 2022 में उस वक्त चुना था, जब वह 60 साल के होने वाले थे। इस तरह वह इस उम्र में किसी बड़ी सरकारी कंपनी (ब्लू-चिप कंपनी) के चेयरमैन बनने वाले पहले एग्जीक्यूटिव बने। सिंह अक्टूबर 2022 में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पद से रिटायर हुए थे। सरकार द्वारा योग्यता के नियमों में ढील देने के बाद 6 दिसंबर 2022 को उन्होंने ONGC में कार्यभार संभाला।

पिछले साल, केंद्र सरकार ने उन्हें एक साल का खास एक्सटेंशन दिया, जिससे वह 6 दिसंबर 2026 तक ONGC के चेयरमैन बने रह सकें। सरकार ने पिछले साल ही रेगुलर चेयरमैन की तलाश शुरू कर दी थी। PESB ने अप्रैल 2025 में आवेदन मंगाए थे और ऑयल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रंजीत रथ समेत एक दर्जन से ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। हालांकि, कोई इंटरव्यू नहीं हुआ और बिना किसी आधिकारिक स्पष्टीकरण के सिलेक्शन प्रोसेस बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई।

E20 Petrol: एथेनॉल वाले पेट्रोल को लेकर मचे बवाल के बीच मारुति की 1.5 करोड़ पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग से क्या पता चला?

E20 Petrol Row: देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर लोगों के बीच मौजूद चिंताओं और बहस के बीच ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनी मारुति सुजुकी ने एक बड़ा और राहत देने वाला दावा किया है। नई दिल्ली में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन औ राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाहन उद्योग के दिग्गजों ने E-20 फ्यूल को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की एक रिलीज के मुताबिक इस उच्च स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में मारुति सुजुकी के कॉरपोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने कंपनी के सर्विस डेटा के आधार पर एथेनॉल वाले पेट्रोल से इंजन खराब होने के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

मारुति सुजुकी की 1.5 करोड़ पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग से क्या पता चला?

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मारुति सुजुकी के राहुल भारती ने एक बेहद महत्वपूर्ण आंकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी ने कुल 2.84 करोड़ कारों की सर्विसिंग की थी। इन गाड़ियों में से 1.5 करोड़ से अधिक कारें तीन साल से ज्यादा पुरानी थीं। यानी वे तकनीकी रूप से ई20 सर्टिफाइड नहीं थीं।

भारती ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग के बावजूद फील्ड से ई20 फ्यूल की वजह से इंजन में जंग, सामान्य टूट-फूट या गाड़ी के किसी भी पार्ट/कंपोनेंट की लाइफ खराब होने की एक भी शिकायत या समस्या सामने नहीं आई है। उन्होंने भरोसा दिया कि ई10 के लिए डिजाइन किए गए वाहनों का ई20 ईंधन के साथ सभी मापदंडों पर परीक्षण किया जा चुका है और इसमें चिंता की कोई बात नहीं है।

माइलेज पर कितना पड़ता है असर? मारुति ने समझाया पूरा गणित

माइलेज में गिरावट के दावों पर मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने स्पष्ट गणित समझाया। उन्होंने कहा कि ई10 पेट्रोल की तुलना में ई20 पेट्रोल की कैलोरीफिक वैल्यू लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत कम होती है। माइलेज पर इसका असर भी केवल इसी सीमा तक सीमित है। जैसे कि अगर कोई कार 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है तो ई20 की वजह से उसका माइलेज केवल 0.6 किलोमीटर प्रति लीटर ही कम होगा।

इसकी तुलना में टायर का प्रेशर, ड्राइविंग का तरीका, सही गियर का इस्तेमाल, अचानक एक्सीलरेट करना, बार-बार ब्रेक लगाना और गाड़ी का रखरखाव जैसी वजहें माइलेज में इससे कहीं ज्यादा बड़ा अंतर पैदा करते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि माइलेज में होने वाले इस मामूली नुकसान की भरपाई बेहतर एक्सीलरेशन, बेहतर एंटी-नॉकिंग और शुद्ध पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल से होने वाले बेहद कम प्रदूषण से पूरी हो जाती है।

क्या बाजार में उपलब्ध हैं रेट्रोफिटमेंट किट?

राहुल भारती ने साफ किया कि वाहनों को ई20 कंप्लायंस की तय सीमा से कहीं अधिक सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में बाजार में पुरानी गाड़ियों को ई20 के अनुकूल बनाने के लिए कोई भी रेट्रोफिटमेंट किट नहीं बेची जा रही है। इस तरह के समाधान फिलहाल सिर्फ रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के स्तर तक ही सीमित हैं।

टोयोटा और हीरो मोटोकॉर्प ने भी जताई सहमती

प्रेस कॉन्फ्रेंस में टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने कहा कि ऑटोमोटिव उद्योग सबसे कड़े रेग्युलेटेड क्षेत्रों में से एक है। वाहनों को बाजार में उतारने से पहले और बाद में वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा कड़े परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।

भारत यूएनईसीई (UNECE) का हिस्सा है, इसलिए यहां के टेस्टिंग प्रोटोकॉल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ई20 को लागू करने का निर्णय पुरानी गाड़ियों पर कड़े परीक्षणों के बाद ही लिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में शुरू किए गए E85 डिस्पेंसिंग स्टेशन विशेष रूप से केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए हैं जो भविष्य की नीति की दिशा तय करते हैं।

वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी टू-व्हीलर निर्माताओं में से एक हीरो मोटोकॉर्प के चीफ बिजनेस ऑफिसर आशुतोष वर्मा ने भी मारुति के दावों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपने व्यापक सर्विस डेटा का विश्लेषण किया है और पाया है कि ई20 ईंधन पर चलने वाले वाहनों में पहले के ईंधन की तुलना में किसी भी तरह के नुकसान या खराबी की कोई अधिक घटना सामने नहीं आई है।

वैज्ञानिक सबूतों और वैश्विक मानकों पर आधारित है ई20 प्रोग्राम

इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) की पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर वर्तिका शुक्ला ने बताया कि एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम को सभी हितधारकों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसे वैज्ञानिक सबूतों और वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए व्यापक परीक्षणों का पूरा समर्थन प्राप्त है जो वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है। वर्तमान में ई20 ईंधन बीआईएस मानक और बीएस-VI (BS-VI) उत्सर्जन मानदंडों के पूरी तरह अनुरूप है और देश के सभी रिटेल आउटलेट्स पर समान रूप से उपलब्ध है।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में टीवीएस मोटर कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रसाद कृष्णन, हुंडई मोटर इंडिया के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट पुनीत आनंद और बजाज ऑटो लिमिटेड के सर्कल हेड (सेल्स- नॉर्थ एंड ईस्ट) मनप्रीत सिंह बिंद्रा सहित पूरे पैनल ने ई20 कार्यक्रम पर सामूहिक विश्वास जताया और उपभोक्ताओं के हर सवाल का पारदर्शिता से जवाब देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

Viral Video: मनाली की वादियों में बदली जिंदगी! पहाड़ों में शिफ्ट होते ही हर महीने ₹30,000 की बचत, कॉरपोरेट कपल का वीडियो वायरल

Viral News: दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम या बेंगलुरु जैसे महंगे शहरों की भागदौड़ छोड़कर एक कॉरपोरेट कपल ने जब हिमाचल प्रदेश के मनाली में बसने का फैसला किया, तो उनका मकसद पैसे बचाना नहीं बल्कि सुकून भरी जिंदगी जीना था। लेकिन इस फैसले ने उनकी जिंदगी के साथ-साथ बैंक बैलेंस भी बदल दिया। अब यह कपल हर महीने 30,000 रुपये से ज्यादा की बचत कर रहा है। अंजलि और नमन ने इंस्टाग्राम पर @anjali.aur.naman नाम से अपने अकाउंट के जरिए अपनी जिंदगी में हए बदलाव को लेकर जानकारी दी है।

दोनों रिमोट कॉरपोरेट जॉब करते हैं। उन्होंने बताया कि वे शहर छोड़कर मनाली इसलिए आए ताकि प्रकृति के बीच शांत और संतुलित जीवन जी सकें। उनका कहना है कि पैसे बचाना उनका उद्देश्य नहीं था। लेकिन यह अपने आप होने लगा।

किराए में हुई सबसे बड़ी बचत

शहरों में जहां वे हर महीने ₹45,000 किराया देते थे। वहीं, मनाली में उन्हें सिर्फ ₹28,000 में बेहतर घर मिल गया। यानी केवल किराए में ही ₹17,000 की मासिक बचत होने लगी। रिमोट वर्क की वजह से रोज ऑफिस जाने की जरूरत नहीं रही। इससे हर महीने करीब ₹3,000 का यात्रा खर्च बचने लगा।

कपल ने क्या कहा?

वीडियो में अंजलि कहती हैं, “हमने बिना कोशिश किए ही हर महीने 30,000 रुपये से ज्यादा बचाना शुरू कर दिया। हाय, हम अंजलि और नमन हैं। मनाली में रहने वाला एक कॉर्पोरेट कपल जो रिमोट वर्क करता है। हम यहां पैसे बचाने के लिए नहीं आए थे। बल्कि अपनी कॉर्पोरेट नौकरी करते हुए ‘स्लो ट्रैवल’ (आराम से यात्रा) का अनुभव करने आए थे।”

इसके बाद वह बताती हैं कि हिमालय के इस शहर में बसने के बाद उनके खर्च कैसे बदले। सबसे बड़ी बचत किराए में हुई, जो शहर में 45,000 रुपये से घटकर मनाली में 28,000 रुपये हो गया। इससे उनके रहने का मासिक खर्च 17,000 रुपये कम हो गया।

रिमोट वर्क से किराए का खर्च समाप्त

रिमोट वर्क की वजह से रोजाना आने-जाने का खर्च भी खत्म हो गया। इससे हर महीने लगभग 3,000 रुपये की बचत हुई। इसके अलावा ऑफिस डिनर, कॉफी के लिए बाहर जाना और स्नैक ब्रेक जैसे आम खर्च भी तेजी से कम हुए। इससे उनके महीने के बजट में 7,500 रुपये की और कमी आई।

हालांकि, सबसे बड़ी हैरानी की बात वीकेंड पर घूमने-फिरने के खर्च का खत्म होना था। शहर में रहते हुए यह कपल तेज-तर्रार शहरी जिंदगी से दूर छोटी-छोटी यात्राओं पर हर महीने लगभग 5,000 से 6,000 रुपये खर्च करता था। मनाली आने के बाद उन्हें ऐसे ब्रेक की योजना बनाने की जरूरत महसूस नहीं हुई, क्योंकि प्रकृति और शांत माहौल उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं।

‘पैसे बचाने नहीं, जिंदगी बदलने आए थे’

अंजलि का कहना है, “हमने रिमोट वर्क इसलिए नहीं चुना कि पैसे बचेंगे। बल्कि इसलिए चुना क्योंकि हम अलग तरीके से जीना चाहते थे। बचत तो बस एक बोनस बन गई।”

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सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग महानगरों में बढ़ते खर्च, रिमोट वर्क के फायदे और छोटे शहरों में बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर चर्चा कर रहे हैं। कई लोग अब यह मानने लगे हैं कि अगर नौकरी रिमोट हो, तो छोटे शहरों में रहकर बेहतर जीवन और बड़ी बचत दोनों संभव हैं।

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Ram Mandir Chanda Chori: चढ़ावे के सोने को बना दिया बिस्कुट और फिर… राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सनसनीखेज खुलासा

Ram Mandir Chanda Chori Case: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इस बात की जांच कर रही है कि क्या मंदिर से कथित तौर पर चोरी किए गए सोने के आभूषणों को पहचान मिटाने के लिए उसे गलाकर सोने के बिस्किट (Gold Biscuits) में बदल दिया गया। फिलहाल, SIT इस पूरे मामले की कई पहलुओं से जांच कर रही है। यह अभी संदेह और जांच का विषय है कि कथित तौर पर चोरी किए गए सोने को वास्तव में गलाकर बिस्किट बनाया गया था या नहीं।

अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। ‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं को शक है कि आरोपियों ने चोरी किए गए सोने और चांदी के गहनों को पिघला दिया होगा ताकि उनकी पहचान मिटाई जा सके। कई बार छापेमारी और तलाशी के बाद भी सोने-चांदी के गायब गहने नहीं मिले, जिसके बाद जांच की दिशा में तेजी आई है।

मंदिर के इंचार्ज से पूछताछ तेज

जांच के सिलसिले में राम मंदिर गए SIT अधिकारियों ने मंदिर के इंचार्ज KD बाबू से गहनों और अन्य कीमती चढ़ावे के रखरखाव, उनकी इन्वेंट्री, स्टोरेज और देखभाल के बारे में पूछताछ की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच टीम ने गहनों और अन्य कीमती दान का रिकॉर्ड मांगा है। साथ ही सरकारी कंपनी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का रिकॉर्ड भी मांगा है।

जांचकर्ताओं ने अभी तक के जांच में पाया है कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की तिमाही बैठकों में ज्यादातर ध्यान कैश दान और रेवेन्यू पर होता था। जबकि सोने, चांदी और अन्य कीमती चढ़ावे की डिटेल्स इन्वेंट्री बनाए रखने या उसकी समीक्षा करने पर बहुत कम ध्यान दिया जाता था। ‘इंडिया टुडे’ ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।

आभूषण नहीं मिले, इसलिए SIT ने बदली जांच की दिशा

जांच एजेंसियों को लगातार छापेमारी और तलाशी के बावजूद कथित तौर पर गायब सोने-चांदी के आभूषण नहीं मिले। इसके बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को शक है कि आरोपियों ने आभूषणों को पिघलाकर उनकी पहचान खत्म कर दी, जिससे उन्हें बरामद करना मुश्किल हो जाए।

मंदिर प्रशासन से मांगे गए रिकॉर्ड

जांच के दौरान SIT ने राम मंदिर पहुंचकर मंदिर प्रभारी केडी बाबू से पूछताछ की। अधिकारियों ने आभूषणों के रखरखाव, स्टोरेज, इन्वेंट्री और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए कीमती दान से जुड़े सभी रिकॉर्ड मांगे। इसके साथ ही सरकारी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का ब्यौरा भी जांच के दायरे में लिया गया है।

7 जून को सामने आया थआ मामला

राम मंदिर में कथित दान गबन का मामला 7 जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया। प्रारंभिक जांच के आधार पर 25 जून को FIR दर्ज की गई। मंदिर में दान गिनने के काम से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

चंपत राय ने खुद को बताया व्हिसलब्लोअर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि कथित गड़बड़ी का सबसे पहले पता उन्होंने ही लगाया था। उन्होंने दावा किया कि चोरी पकड़ने के लिए उन्होंने मंदिर परिसर में सीक्रेट CCTV कैमरे लगवाए थे। उन्हीं कैमरों की फुटेज से कथित चोरी का खुलासा हुआ।

‘मुझे मेरे ही लोगों ने धोखा दिया’

पुलिस पूछताछ के दौरान चंपत राय ने कहा कि उनका दान के कथित गबन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “मुझे मेरे ही भरोसेमंद लोगों ने धोखा दिया। चोरी पकड़ने के लिए छिपे हुए कैमरे मैंने ही लगवाए थे।”

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर में दान और चढ़ावे की कथित चोरी की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच का आदेश दें। पणजी में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है, क्योंकि मंदिर में दान के मैनेजमेंट को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने BJP को भारत के मंदिरों पर आक्रमणकारियों द्वारा किए गए अतीत के कथित लूटपाट संबंधी उसके अक्सर दिए जाने वाले बयानों की भी याद दिलाई।

वेणुगोपाल ने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव के उन दावों का भी जिक्र किया, जिनमें कहा गया था कि मंदिर में दान किए गए एक किलोग्राम सोने का सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया था। इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “यह किसी आम आदमी का आरोप नहीं है। यह आरोप केंद्र सरकार के एक सेवानिवृत्त गृह सचिव ने लगाया है। अयोध्या राम मंदिर में जो कुछ हो रहा है, वह हम सभी के लिए बहुत दुखद है। यह देश के सभी आस्था रखने वालों के लिए दुखद है।”

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वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस के लोग आस्था के कारण ईश्वर में विश्वास करते हैं। लेकिन BJP के लोग ईश्वर में विश्वास नहीं करते और वे लोगों को बांटने और मंदिर को लूटने के मकसद से धर्म की बात करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या मंदिर में हुई चोरी के लिए विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पूरी तरह जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर को लूटने वालों को केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारें बचा रही हैं।

SBI Bank Holiday: कल 6 जुलाई, सोमवार को देश के कई राज्यों में बंद रहेंगे बैंक! जानिए RBI ने क्यों दी है छुट्टी

Bank Holiday on 6 July: अगर सोमवार, 6 जुलाई को आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। कल देश के कुछ राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की छुट्टियों की लिस्ट के मुताबिक, 6 जुलाई को कुछ चुनिंदा राज्यों में सरकारी और निजी बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। हालांकि, यह छुट्टी पूरे देश में लागू नहीं है। आइए जानते हैं कि कल किन राज्यों में बैंक बंद रहेंगे और कहां सामान्य रूप से काम होगा।

इन राज्यों में कल बंद रहेंगे बैंक

6 जुलाई 2026 को देश के दो प्रमुख राज्यों में विशेष क्षेत्रीय त्योहारों और महापुरुषों की जयंती के कारण बैंकों में अवकाश रहेगा:

पश्चिम बंगाल: देश के महान विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के विशेष अवसर पर कल पश्चिम बंगाल के सभी बैंक बंद रहेंगे।

मिजोरम: मिजोरम में कल ‘MHIP Day’ (मिजो ह्मेइछे इंसुइखौम पावल दिवस) मनाया जाएगा, जिसके चलते राज्य सरकार और आरबीआई के निर्देशानुसार वहां के सभी बैंकों में छुट्टी रहेगी।

क्या दिल्ली-मुंबई और अन्य शहरों में भी बंद रहेंगे बैंक?

नहीं, कल पूरे देश में छुट्टी नहीं है। दिल्ली, मुंबई, नोएडा, चेन्नई, बेंगलुरु, लखनऊ, पटना और उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र समेत देश के ज्यादातर राज्यों में बैंक अपने सामान्य समय पर खुलेंगे। यह छुट्टी केवल पश्चिम बंगाल और मिजोरम में ही है।

जुलाई 2026 में बैंक की छुट्टियां(RBI)

  1. 5 जुलाई (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (पूरे देश में)
  2. 6 जुलाई (सोमवार): MHIP डे / डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती (मिजोरम और पश्चिम बंगाल में बंद)
  3. 9 जुलाई (गुरुवार): बेहदेहिनखलाम (मेघालय में बंद)
  4. 11 जुलाई (शनिवार): दूसरा शनिवार (पूरे देश में)
  5. 12 जुलाई (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (पूरे देश में)
  6. 16 जुलाई (गुरुवार): रथ यात्रा / कांग / हरेला (ओडिशा, उत्तराखंड और मणिपुर में बंद)
  7. 17 जुलाई (शुक्रवार): यू तिरोत सिंह की पुण्यतिथि (मेघालय में बंद)
  8. 18 जुलाई (शनिवार): द्रुकपा त्शे-जी (सिक्किम में बंद)
  9. 19 जुलाई (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (पूरे देश में)
  10. 22 जुलाई (बुधवार): खारची पूजा (त्रिपुरा में बंद)
  11. 25 जुलाई (शनिवार): चौथा शनिवार (पूरे देश में)
  12. 26 जुलाई (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (पूरे देश में)

डिजिटल और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं रहेंगी चालू

बैंक की शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। डिजिटल बैंकिंग के इस दौर में सभी ऑनलाइन सेवाएं चौबीसों घंटे काम करेंगी:

  • UPI पेमेंट सामान्य रूप से काम करेंगे।
  • इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के जरिए आप पैसे ट्रांसफर कर सकेंगे।
  • एटीएम (ATM) से कैश निकालने और जमा करने की सुविधा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

अगर आपको चेक क्लीयरेंस, बैंक लॉकर या ड्राफ्ट जैसे ब्रांच से जुड़े जरूरी काम हैं, तो राज्यों की छुट्टियों की इस लिस्ट को ध्यान में रखकर ही अपनी योजना बनाएं।