Rare Earth Magnet Scheme: ₹7280 करोड़ की सरकारी योजना, L&T और कोल इंडिया समेत 20 कंपनियों ने बोली लगाई

Rare Earth Magnet Scheme: सरकार की ₹7,280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग योजना को कंपनियों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। Larsen & Toubro (L&T), Coal India, ReNew, Attero Recycling और Lohum Magnets & Energy Solutions समेत 20 कंपनियों ने इस योजना के लिए बोली लगाई है।

भारी उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। तकनीकी बोलियां 13 अगस्त को खोली गईं। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 12 अगस्त थी।

कौन-कौन सी कंपनियां दौड़ में हैं?

इस योजना में भारतीय कंपनियों के साथ विदेशी कंपनियों ने भी हिस्सा लिया है। इनमें NEO Performance Materials (Singapore) और जापान की Proterial की भारतीय इकाई Proterial India भी शामिल हैं।

इसके अलावा 20 Microns, N.A.N. Magnetech, PrNd Metal and Magnets, Prozeal Green Energy और Ramp Metals & Minerals जैसी कंपनियों ने भी बोली लगाई है।

सरकार की योजना क्या है?

सरकार इस योजना के तहत भारत में हर साल 6,000 मीट्रिक टन सिंटर्ड NdFeB रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने की क्षमता चाहती है। इस बंटवारा 5 कंपनियों के बीच किया जाएगा। हर कंपनी को अधिकतम 1,200 मीट्रिक टन सालाना क्षमता मिल सकती है।

केंद्रीय कैबिनेट ने नवंबर 2025 में इस योजना को मंजूरी दी थी। योजना की अवधि 7 साल होगी। इसमें पहले 2 साल फैक्ट्री लगाने के लिए होंगे। इसके बाद 5 साल तक बिक्री के आधार पर इंसेंटिव मिलेगा।

रेयर अर्थ मैग्नेट इतने अहम क्यों हैं?

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल, विंड टरबाइन, हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और डिफेंस सिस्टम में होता है। सरकार का लक्ष्य भारत में NdPr ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करना है।

चीन पर निर्भरता घटाने की तैयारी

इस सेक्टर में चीन का दबदबा है। भारत अभी रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। साल 2025 में चीन के एक्सपोर्ट प्रतिबंधों से सप्लाई प्रभावित हुई थी। इससे कई उद्योगों में कमी देखने को मिली। सरकार अब घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना और सप्लाई को सुरक्षित बनाना चाहती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पटियाला में किराए का घर देखने गए दंपति पर पिटबुल का हमला, पत्नी की सर्जरी, CCTV वीडियो वायरल

पटियाला में किराए का घर देखने गए दंपति पर पिटबुल का हमला, पत्नी की सर्जरी,  CCTV वीडियो वायरल

pitbull

पंजाब के पटियाला में किराए का घर देखने गए एक दंपती पर पालतू पिटबुल ने अचानक हमला कर दिया। हमले में पति-पत्नी दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना का कथित CCTV वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें आसपास के लोग डंडों की मदद से कुत्ते को दंपति से दूर करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। घटना मंगलवार शाम की बताई जा रही है। एक निजी बैंक में मैनेजर अंकित सभरवाल अपनी पत्नी शिफाली सभरवाल, जो चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं, के साथ प्रॉपर्टी डीलर के जरिए घुमन नगर में किराए का मकान देखने पहुंचे थे।

 

गेट खुलते ही पिटबुल ने किया हमला

अंकित के मुताबिक, जैसे ही मकान का गेट खोला गया, अचानक एक पिटबुल बाहर निकल आया और शिफाली पर हमला कर दिया। कुत्ते ने उनके हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों को बुरी तरह नोंच डाला, जिससे गहरे घाव हो गए। शिफाली के परिवार ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनके हाथ और पैरों की प्लास्टिक सर्जरी की गई। फिलहाल वह निजी अस्पताल में उपचाराधीन हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं।

 

अंकित ने बताया कि पत्नी को बचाने की कोशिश के दौरान उन्हें भी पैरों और पीठ पर कुत्ते के काटने से गहरी चोटें आईं। उन्होंने कहा कि उनके शरीर पर कई जगह टांके आए हैं। अंकित ने कहा, “मुझे पूरे शरीर पर टांके लगे हैं। मेरी पत्नी के हाथ और पैरों की सर्जरी हुई है। मैं न्याय चाहता हूं। मालिक के कहने के बावजूद कुत्ता नहीं रुका। सर्जरी के बाद मेरी पत्नी डॉक्टरों की निगरानी में है।”

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CCTV में दंपती पर हमला करता दिखा कुत्ता

 

सोशल मीडिया पर सामने आए कथित CCTV फुटेज में पिटबुल दंपती पर हमला करता दिखाई दे रहा है। आसपास के लोग कुत्ते को भगाने और दंपती को बचाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में दंपती कुत्ते से बचने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। इसी दौरान एक महिला घर से डंडा लेकर आती है और कुत्ते को रोकने का प्रयास करती है, लेकिन वह सफल नहीं होती। इसके बाद दो-तीन अन्य लोग भी डंडे लेकर मौके पर पहुंचते हैं और किसी तरह घायल दंपती को कुत्ते से दूर खींचकर ले जाते हैं।

 

पुलिस ने लिया मामले का संज्ञान

 

अंकित ने बताया कि घटना की जानकारी पुलिस को दे दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पालतू कुत्ते को खुले में घूमने देने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने भी मामले का संज्ञान लिया। DSP जंगजीत रंधावा ने बताया कि पुलिस ने वीडियो की पुष्टि की और पीड़ित परिवार से संपर्क किया।

 

DSP के मुताबिक, शिफाली की मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया कि पालतू जानवर के काटने या किसी व्यक्ति को घायल करने के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 291 के तहत FIR दर्ज की जा सकती है।

 

खतरनाक नस्ल के कुत्तों पर कार्रवाई की तैयारी

 

DSP रंधावा ने कहा कि खतरनाक नस्ल के कुत्तों को लेकर अदालत के आदेशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि 15 अगस्त के बाद पुलिस अभियान चलाकर ऐसे मामलों की जांच और सत्यापन कर सकती है। पटियाला के मेयर कुंदन गोगिया ने भी कहा कि शहर में आक्रामक नस्ल के कुत्तों को पालतू जानवर के रूप में रखने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। इस मुद्दे पर नगर निगम की हाउस बैठक में चर्चा की जाएगी और विशेष प्रस्ताव लाने पर विचार किया जाएगा।

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पटियाला में बढ़े डॉग अटैक के मामले

इस घटना ने शहर में लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पटियाला में हाल के दिनों में कुत्तों के हमले की कई घटनाएं सामने आई हैं। 9 अगस्त को गुरु नानक नगर इलाके में एक लड़की पर आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया था। पुलिस का कहना है कि इस मामले में भी मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Study Abroad India: सरकार ने संसद में दिया जवाब, अब विदेशी यूनिवर्सिटी करेंगी भारत का रुख और भारत से विदेश पढ़ने जा रहे छात्र घटे

Study Abroad India: हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र विदेश पढ़ने जाते हैं। लेकिन, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (BoI) द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि पढ़ाई के मकसद से विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। यह क्रम लगातार दूसरे साल बना रहा है। 2025 में विदेश जाते समय 6,19,264 भारतीयों ने पढ़ाई या शिक्षा को अपनी यात्रा का मकसद बताया। यह 2024 में 7,60,060 और 2023 में 8,94,758 से कम था। यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी।

एक तरफ, विदेश में पढ़ाई करने जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में कमी आई है। वहीं, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका (USA) के फॉरेन हायर एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन्स (FHEIs) को 16 लेटर ऑफ इंटेंट (LoIs) जारी किए हैं। यूजीसी ने कर्नाटक में छह, महाराष्ट्र में छह, दिल्ली एनसीआर में तीन और तमिलनाडु में एक एफएचईआई को एनओआई जारी किए हैं। महाराष्ट्र के छह एलओआई में से, चार एफएचईआई (यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल, यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन और इलिनोइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) को मुंबई में एकेडमिक ऑपरेशन शुरू करने के लिए लेटर ऑफ अप्रूवल दिया गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्प्टन और यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स ने पहले ही गुरुग्राम और बेंगलुरु में अपने कैंपस बना लिए हैं।

भारतीय छात्रों की विदेश में पढ़ाई करने की संख्या कम होने के साथ ही कई प्रतिष्ठित भारतीय संस्थानों ने अपने ओवरसीज कैंपस खोले हैं। विदेश में कैंपस खोलने वाले संस्थानों में आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान शामिल हैं। आईआईटी मद्रास, आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद ने क्रमशः 2023 में जांजीबार, 2024 में अबू धाबी और 2025 में दुबई में अपने विदेशी परिसर स्थापित किए हैं। आईआईएम अहमदाबाद ने मध्य-पूर्व, एशिया और अफ्रीका के छात्रों के लिए सितंबर 2025 में दुबई परिसर में एक साल का पूर्णकालिक एमबीए कार्यक्रम और एक सामान्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम में 35 छात्र हैं।

इधर, बीओआई द्वारा जारी विदेश पढ़ने जाने वाले छात्रों का पांच साल का डेटा महामारी के बाद तेजी से बढ़ोतरी और फिर लगातार गिरावट दिखाता है। 2021 में, 4,45,580 भारतीयों ने पढ़ाई या शिक्षा को अपना घोषित मकसद बताकर विदेश यात्रा की। 2022 में यह संख्या बढ़कर 7,52,100 हो गई और फिर 2023 में और बढ़कर 8,94,758 हो गई। तब से, यह संख्या 2024 में घटकर 7,60,060 और 2025 में 6,19,264 हो गई है।

कोविड के बाद 2022 में पढ़ाई के लिए विदेश जाने वाले भारतीयों की संख्या में लगभग 69% की बढ़ोतरी हुई। 2023 में यह और 19% बढ़ी। लेकिन 2024 में दिशा बदल गई। पिछले साल की तुलना में यह संख्या लगभग 15% कम हो गई। 2025 में यह गिरावट और बढ़ गई। विदेश पढ़ने जाने वाले छात्रों की संख्या में लगभग 18.5% की कमी आई। 2025 में विदेश जाने वाले स्टूडेंट की संख्या 2023 के मुकाबले लगभग 2.76 लाख कम थी। वहीं, यह 2021 के मुकाबले अभी भी लगभग 1.74 लाख ज़्यादा थी।

पांच साल के इस क्रम को सरकार ने दो फेज में बांटा

पहला रिकवरी और एक्सपेंशन फेज। छात्र मोबिलिटी 2021 में 4.46 लाख से बढ़कर 2022 में 7.52 लाख हो गई और फिर 2023 में 8.9 लाख को पार कर गई। दूसरा चरण 2024 में शुरू हुआ। यह संख्या आठ लाख से नीचे आ गई और फिर 2025 में और गिरकर 6.19 लाख हो गई। सरकार ने इस क्रम को किसी एक वजह से नहीं जोड़ा है। शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि विदेश में पढ़ाई करने का फैसला अफोर्डेबिलिटी, फाइनेंस तक पहुंच, विदेशी समाजों के संपर्क में आना और पढ़ाई की किसी खास ब्रांच के लिए एप्टीट्यूड जैसे फैक्टर्स पर निर्भर करता है।

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Dhoot Transmission IPO Allotment: 75 गुना सब्सक्राइब हुआ, जानिए लेटेस्ट GMP और अलॉटमेंट चेक करने का पूरा प्रोसेस

Dhoot Transmission IPO Allotment: धूत ट्रांसमिशन के IPO की बोली 12 अगस्त 2026 को बंद हो गई। तीन दिन की बोली में इस इश्यू को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। IPO करीब 75 गुना सब्सक्राइब हुआ। अब निवेशकों की नजर अलॉटमेंट पर है, जो आज यानी 13 अगस्त को फाइनल हो सकता है।

GMP क्या संकेत दे रहा है?

ग्रे मार्केट में Dhoot Transmission का GMP ₹279 चल रहा है। IPO का ऊपरी प्राइस बैंड ₹871 प्रति शेयर है। यानी मौजूदा GMP के हिसाब से शेयर करीब 32% लिस्टिंग गेन का संकेत दे रहा है।

हालांकि, GMP सिर्फ बाजार का अनुमान होता है। इसकी कोई गारंटी नहीं होती।

Dhoot Transmission का बिजनेस

Dhoot Transmission ऑटोमोटिव वायरिंग हार्नेस और केबल बनाने वाली कंपनी है। यह पैसेंजर व्हीकल, कमर्शियल वहीकल, इलेक्ट्रिक वाहन और ऑफ-हाईवे सेगमेंट के लिए प्रोडक्ट्स सप्लाई करती है। कंपनी का कारोबार भारत के साथ कई विदेशी बाजारों तक फैला है। इसके ग्राहकों की लिस्ट में बजाज ऑटो, TVS मोटर और रॉयल एनफील्ड जैसे बड़े ऑटोमोबाइल निर्माता भी शामिल हैं।

अलॉटमेंट कब आएगा?

T+3 लिस्टिंग नियम के तहत IPO की लिस्टिंग बोली बंद होने के तीन वर्किंग डे के भीतर होनी होती है। ऐसे में Dhoot Transmission की लिस्टिंग 17 अगस्त तक हो सकती है। इससे पहले 13 अगस्त को अलॉटमेंट फाइनल होने की उम्मीद है।

BSE पर ऐसे चेक करें अलॉटमेंट

अगर आपने IPO में आवेदन किया है, तो BSE की वेबसाइट पर स्टेटस देख सकते हैं।

  • BSE के IPO अलॉटमेंट पेज पर जाएं।
  • Issue Type में Equity चुनें।
  • एप्लिकेशन नंबर या PAN दर्ज करें।
  • CAPTCHA भरें।
  • Submit पर क्लिक करें।
  • इसके बाद स्क्रीन पर आपका अलॉटमेंट स्टेटस दिखाई देगा।

KFin Tech पर ऐसे देखें स्टेटस

Dhoot Transmission IPO के रजिस्ट्रार KFin Technologies की वेबसाइट से भी स्टेटस चेक किया जा सकता है।

  • KFin Tech के IPO स्टेटस पेज पर जाएं।
  • Dhoot Transmission Limited चुनें।
  • एप्लिकेशन नंबर, डिमैट अकाउंट नंबर या PAN में से कोई एक दर्ज करें।
  • CAPTCHA भरें।
  • Submit पर क्लिक करें।

इसके बाद आपको पता चल जाएगा कि IPO में शेयर अलॉट हुए हैं या नहीं।

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भारत से सीमा विवाद के बीच नेपाल का बड़ा कबूलनामा! क्या गायब हो गए 210 साल पुरानी सुगौली संधि के असली कागज?

India-Nepal Sugauli Treaty: भारत और नेपाल के बीच जारी सीमा विवाद के बीच नेपाल सरकार की ओर से एक हैरान करने वाला कबूलनामा सामने आया है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में स्वीकार किया है कि सरकार को इस बात की पक्की जानकारी नहीं है कि उसके पास 1816 की ऐतिहासिक सुगौली संधि और 1950 की नेपाल-भारत संधि के मूल दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। ब्रिटिश भारत के साथ नेपाल की सीमा तय करने वाली यह संधि दोनों देशों के सीमांकन का मुख्य आधार रही है।

नेपाल की प्रतिनिधि सभा में एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि सरकार के पास 1816 की संधि से जुड़े दस्तावेजों के रिकॉर्ड तो मौजूद हैं, लेकिन उनमें से कोई आधिकारिक मूल संधि पत्र है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती।

नेपाल की संसद में विदेश मंत्री बोले- नेशनल आर्काइव्स में हैं रिकॉर्ड, पर मूल दस्तावेज स्पष्ट नहीं

विदेश मंत्री खनाल ने स्पष्ट किया कि वैसे तो देश के नेशनल आर्काइव्स में कुछ कागजात संरक्षित हैं लेकिन तमाम सरकारी विभागों में की गई व्यापक खोजबीन के बाद भी हस्ताक्षर युक्त स्पष्ट और मूल संधि पत्र का पता नहीं चल सका है। संसद में बोलते हुए खनाल ने कहा कि नेपाल सरकार के पास इस बात की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि हमारे पास आधिकारिक संधि दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। रिकॉर्ड दिखाते हैं कि कुछ संधियों से संबंधित दस्तावेज नेशनल आर्काइव्स में रखे गए हैं। लेकिन क्या वे वास्तव में आधिकारिक और मूल संधियां हैं, इसे लेकर हमारे पास स्पष्ट जानकारी नहीं है।

आपको बता दें कि 1814-1816 के एंग्लो-नेपाल युद्ध के बाद नेपाल साम्राज्य और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच 1816 में सुगौली की संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि ने नेपाल के क्षेत्र को काफी हद तक कम कर दिया था और इसकी आधुनिक सीमाओं की रूपरेखा तय की थी।

लिपुलेख दर्रे पर भारत-चीन व्यापार और नए विवाद की वजह

नेपाल सरकार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत और चीन के बीच व्यापार फिर से शुरू होने को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। नेपाल ने इस व्यापार मार्ग का विरोध करते हुए दावा किया है कि लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा उसके क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।

मौजूदा सीमा विवाद मुख्य रूप से काली (या महाकाली) नदी की व्याख्या पर केंद्रित है, जिसे 1816 की सुगौली संधि ने नेपाल की पश्चिमी सीमा के रूप में स्थापित किया था। नेपाल का तर्क है कि इस नदी का उद्गम लिंपियाधुरा से होता है। इस व्याख्या के आधार पर लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा नदी के पूर्व में स्थित हैं और इसलिए वे नेपाल का हिस्सा हैं।

भारत ने नेपाल के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि यह पूरा क्षेत्र लंबे समय से उसके प्रशासनिक नियंत्रण में रहा है। भारत ने अपने रुख के समर्थन में ऐतिहासिक रिकॉर्ड और नक्शों का भी हवाला दिया है।

गायब दस्तावेजों की पुरानी पहेली: 1950 की संधि के कागजात भी नदारद

मूल संधियों के गायब होने या न मिलने की यह अनिश्चितता नई नहीं है। साल 2016 में भी नेपाल को तब मुश्किलों का सामना करना पड़ा था जब दोनों देशों के बीच बने प्रबुद्ध व्यक्ति समूह द्वारा 1950 की नेपाल-भारत शांति और मित्रता संधि की समीक्षा या उसे बदलने पर विचार किया जा रहा था। उस समय भी नेपाल सरकार 1950 की संधि की मूल प्रति खोजने में असमर्थ रही थी।

द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद हुई एक संसदीय जांच में सरकारी दफ्तरों, अभिलेखागारों, संग्रहालयों और दूसरे भंडारों में काफी तलाशी ली गई थी, लेकिन सुगौली संधि और 1950 की संधि की मूल प्रतियां नहीं मिल सकी थीं।

इसके बाद साल 2019 में तत्कालीन विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली ने भी स्वीकार किया था कि नेपाल के पास दोनों समझौतों की प्रतियां (कॉपी) तो हैं लेकिन वे मूल प्रतियां हैं या नहीं, यह स्थापित नहीं किया जा सका है। तब ज्ञावली ने कहा था कि हमारे पास दोनों संधियां मौजूद हैं, लेकिन हमें फोरेंसिक रूप से यह सत्यापित करना होगा कि ये प्रतियां ओरिजनल हैं या नहीं।

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Gold Silver Rates Today: दिल्ली में सोने में 7 सत्रों से जारी तेजी थमी, चांदी ₹6000 फिसली

Gold Silver Rates Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में बीते सात सत्रों से सोने में जारी तेजी पर गुरुवार को ब्रेक लग गया। सोने का भाव 2,800 रुपये गिरकर 1,57,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी में 6000 रुपये की गिरावट आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में गिरावट आई।

विदेश में सोने और चांदी में गिरावट 

दिल्ली सर्राफा बाजार में गुरुवार को चांदी 6000 रुपये गिरकर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुलियन में कमजोरी का असर भारत में इनकी कीमतों पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.43 फीसदी की कमजोरी के साथ 4,389.67 डॉलर प्रति औंस था। स्पॉट सिल्वर भी हल्की कमजोरी के साथ 65.03 डॉलर प्रति औंस था।

बीते सात सत्रों मे सोने में आई थी ₹12400 की तेजी

इससे पहले सोना बीते 7 सत्रों से लगातार चढ़ रहा था। इससे इसकी कीमतें 4400 डॉलर प्रति औंस के पार चली गई थी। दिल्ली में भी बीते सात सत्रों में सोना 12,400 रुपये चढ़ा था। चांदी में भी इस दौरान अच्छी तेजी आई थी। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार तेजी के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक है। देश और विदेश में मुनाफावसूली का असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा है।

क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर रहने से महंगाई बढ़ने का डर

अमेरिका में 12 अगस्त को इनफ्लेशन के डेटा आए, जो उम्मीद के मुताबिक रहे। इससे फेडरल रिजर्व के सितंबर की पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की संभावना कम हुई है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। हालांकि, क्रूड की कीमतें अब भी हाई लेवल पर हैं। ब्रेंट क्रूड अब भी करीब 87 डॉलर प्रति बैरल पर है।

अमेरिका-ईरान के बीच समझौते के संकेत नहीं 

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर गतिरोध बना हुआ है। इससे क्रूड की कीमतें नीचे नहीं आ रही हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल टैंकर्स का आवागमन नाममात्र का हो रहा है। अगर क्रूड लंबे समय तक हाई लेवल पर बना रहता है तो महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा। फिर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की संभावना बढ़ जाएगी। इसका निगेटिव असर सोने पर पड़ेगा।

Sukhbir Singh Badal Attack: सुखबीर सिंह बादल पर हमला करने वाला आरोपी गिरफ्तार, CM फडणवीस ने दिए जांच के आदेश

Sukhbir Singh Badal Attack: शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर गुरुवार को नांदेड़ स्थित हजूर साहिब गुरुद्वारे में हमला किया गया। घटना के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक रोहन नीलाभ ने IANS को बताया कि आरोपी की पहचान निहंग जसपाल सिंह के रूप में हुई है और उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।

घटना के वक्त सुखबीर सिंह बादल की पत्नी और सांसद हरसिमरत कौर बादल भी मौके पर मौजूद थीं। हालांकि, उन्हें किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा और वह पूरी तरह सुरक्षित हैं।

गुरुद्वारे में हुआ दौरान हमला

सूत्रों के मुताबिक, सुखबीर सिंह बादल गुरुद्वारे में थे और मत्था टेकने के बाद लंगर की ओर जा रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ।

हमले में कथित तौर पर जसपाल सिंह ने कृपाण का इस्तेमाल किया, जो पिछले दो साल से गुरुद्वारे में काम कर रहा था। सूत्रों ने बताया कि हमलावर ने सुखबीर सिंह बादल के पेट में चाकू घोंपने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव कर उसे रोक दिया।

हालांकि, हमले के पीछे की वजह अभी साफ नहीं है। वहीं, आरोपी जसपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है और घटना से जुड़े हालात की जांच की जा रही है।

बता दें कि खतरे की आशंका को देखते हुए बादल को Z-प्लस कैटेगरी की कड़ी सुरक्षा मिली हुई है।

हमलावर के बारे में क्या पता चला?

आरोपी की पहचान 62 साल के जसपाल सिंह के तौर पर हुई है, जो मूल रूप से पुणे का रहने वाला है और वह पहले पुणे की अदालत में वकील के तौर पर काम कर चुका है। पिछले दो सालों से वह नांदेड़ के पास मुगत में माता साहिब गुरुद्वारे में सेवा कर रहा था।

आज, जब सुखबीर सिंह बादल माता साहिब गुरुद्वारे में मत्था टेककर बाहर निकले, तो जसपाल सिंह ने कथित तौर पर उन पर हमला कर दिया। हालांकि, मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया और पुलिस अभी उससे पूछताछ कर रही है।

फडणवीस ने जांच के आदेश दिए

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख पर हुए हमले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक से बात की और घटना के बारे में जानकारी मांगी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने घटना के पीछे के मकसद की जांच के भी आदेश दिए हैं।

हमले के बाद बादल की हालत स्थिर

इस घटना के बाद सुखबीर सिंह बादल की हालत स्थिर है। बता दें कि यह हमला तब हुआ जब वह हजूर साहिब गुरुद्वारे में थे। उस समय उनकी पत्नी हरसिमरत कौर भी वहां मौजूद थीं, लेकिन उन पर कोई हमला नहीं हुआ और वह सुरक्षित हैं।

नांदेड़ के SP रोहन नीलाभ ने जसपाल सिंह की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। हालांकि, हमले के पीछे का मकसद अभी तक साफ नहीं हो पाया है।

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LG Electronics India Q1 Results: इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी को ₹652 करोड़ मुनाफा, 10 लाख से ज्यादा AC बेचे

LG Electronics India Q1 Results: इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी LG Electronics India ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 27.2% बढ़कर ₹652.8 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹513.2 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी 15.5% बढ़कर ₹7,233.3 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹6,262.9 करोड़ था। यानी कमाई और मुनाफा दोनों में अच्छी बढ़त दिखी।

ऑपरेटिंग कमाई भी मजबूत रही

LG Electronics India का EBITDA 26.2% बढ़कर ₹904.2 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹716.2 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 11.4% से बढ़कर 12.5% हो गया। यानी कंपनी पहले से बेहतर कमाई कर रही है।

AC की बिक्री ने बढ़ाया भरोसा

एयर कंडीशनर की मजबूत मांग कंपनी के लिए बड़ा सहारा बनी। साल 2026 की पहली तिमाही में LG ने 10 लाख से ज्यादा AC बेचे। अब कंपनी को पूरे साल में 20 लाख से ज्यादा यूनिट बेचने की उम्मीद है।

कंपनी के डायरेक्टर और को-चीफ सेल्स एंड मार्केटिंग ऑफिसर संजय चिटकारा ने कहा कि डीलरों के पास स्टॉक अब सामान्य स्तर पर है। रिटेलर भी त्योहारी सीजन की तैयारी में जुट गए हैं। अगर मांग ऐसे ही बनी रही, तो कंपनी अपने सालाना अनुमान से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।

LG Electronics India के शेयर

LG Electronics का शेयर गुरुवार को 1580 रुपये पर लगभग फ्लैट बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक ने 4.55% का रिटर्न दिया है। वहीं 1 साल के दौरान इसमें करीब 6% की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैप 1.07 लाख करोड़ रुपये है।

LG Electronics India का कारोबार

LG Electronics India, LG Electronics की सब्सिडियरी है। कंपनी भारत में टीवी, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर, IT प्रोडक्ट्स और व्हीकल सॉल्यूशंस बनाती और बेचती है। यह एक्सपोर्ट बढ़ाने की तैयारी भी कर रही है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sahana Systems को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का कॉन्ट्रैक्ट मिला, CEL के साथ 10 साल की डील

Sahana Systems Defence Deal: IT और डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी Sahana Systems Ltd की सब्सिडियरी Sahana Defence Ltd को बड़ा डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी ने भारत सरकार के मिनी रत्न Central Electronics Limited (CEL) के साथ लंबी अवधि का समझौता किया है। यह डील सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत हुई है।

समझौते के तहत उत्तर प्रदेश के साहिबाबाद में CEL के परिसर में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) इक्विपमेंट और वेपन पेरिफेरी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बनाई जाएगी और उसका संचालन भी किया जाएगा।

10 साल की होगी डील

यह कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती तौर पर 10 साल के लिए है। अगर सबकुछ ठीक रहा, तो कॉन्ट्रैक्ट 5 साल और बढ़ाया जा सकता है।

Sahana Defence इस फैसिलिटी को बनाने, चलाने, मेंटेनेंस करने, मार्केटिंग करने और यहां बने प्रोडक्ट्स को कमर्शियल स्तर पर बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालेगी।

क्या बनेगा इस फैसिलिटी में?

नई यूनिट में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और हथियारों से जुड़े पेरिफेरी इक्विपमेंट बनाए जाएंगे। इसका मकसद भारत में ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना और रणनीतिक तकनीकों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।

कंपनी का कहना है कि CEL के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाकर वह डिफेंस सेक्टर के लिए मजबूत मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म तैयार करेगी।

कंपनी ने क्या कहा?

Sahana Systems के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रतीक काकड़िया ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी के लिए बड़ा मील का पत्थर है। उनके मुताबिक, इससे डिफेंस कारोबार में लंबे समय तक रेवेन्यू की बेहतर दृश्यता मिलेगी और भविष्य की ग्रोथ को मजबूत आधार मिलेगा।

Sahana Systems क्या काम करती है?

साल 2013 में स्थापित Sahana Systems का मुख्यालय अहमदाबाद में है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, IoT, ब्लॉकचेन, बिजनेस इंटेलिजेंस और IT आउटसोर्सिंग जैसी तकनीकी सेवाएं देती है।

इसके अलावा कंपनी डिफेंसटेक, फिनटेक, हेल्थटेक और एडुटेक सेक्टर में भी काम करती है। Sahana Systems का दावा है कि वह सरकारी संस्थानों, रक्षा संगठनों और वित्तीय संस्थानों के साथ कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।

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पर्यावरण संरक्षण के साथ ही राष्ट्रभक्ति का भी संदेश देगी ‘वंदे मातरम वाटिका’

पर्यावरण संरक्षण के साथ ही राष्ट्रभक्ति का भी संदेश देगी ‘वंदे मातरम वाटिका’

Vande Mataram Vatika in UP

Vande Mataram Vatika: योगी सरकार के मार्गदर्शन में वन विभाग विशिष्ट वनों की स्थापना कर रहा है। प्रदेश में बीते दिनों कई विशिष्ट वन स्थापित किए जा चुके हैं। अब 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) पर सभी 75 जनपदों में वंदे मातरम् वाटिका स्थापित की जाएगी। यह वाटिका पर्यावरण संरक्षण के साथ ही राष्ट्रभक्ति का भी संदेश देगी। राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत हर जनपद में 150 पौधों का रोपण किया जाएगा। जनसहभागिता से इस वाटिका को बसाया जाएगा। 

हर जनपद में एक चयनित स्थल पर किया जाएगा 150 पौधों का रोपण

'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत 15 अगस्त को सभी जिलों में 'वंदे मातरम् वाटिका' स्थापित की जाएंगी। इसके लिए वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रत्येक जनपद में एक चयनित स्थान पर 150 पौधों का रोपण किया जाएगा, जो राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रकृति को समर्पित श्रद्धांजलि होगी। वन विभाग प्रत्येक जनपद में 'वंदे मातरम् वाटिका' विकसित करेगा। इसमें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप छायादार, फलदार और पर्यावरण संरक्षण में उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों के देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर तय की जाएगी, जिससे अभियान स्थायी हरित धरोहर का रूप ले सके। 

Vande Mataram Vatika in UP

लखनऊ के कुकरैल में अशोक चक्र की तीलियों के बाहर के क्षेत्र में लगाए जाएंगे पौधे

अवध वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी सितांशु पांडेय ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस पर कुकरैल पिकनिक स्पॉट में वंदे मातरम् वाटिका को विस्तार दिया जाएगा। यहां अशोक चक्र बनवाया गया है, इसकी 24 तीलियों के बाहर के क्षेत्र में अशोक के पौधे लगाए जाएंगे। पौधों की सुरक्षा के लिए इसके चारों तरफ फेंसिंग भी होगी। इसमें भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त/वर्तमान के अधिकारियों समेत समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से पौधरोपण कराया जाएगा।

भावी पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का संदेश देंगे पौधे

अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (सामाजिक वानिकी) दीपक कुमार ने बताया कि वंदे मातरम् वाटिका ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है। इस विशेष अभियान में आम नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित होगी। पौधरोपण कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, विद्यालयों/महाविद्यालयों/विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी, स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन, वंदे मातरम् फाउंडेशन/ट्रस्ट, स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार, एनसीसी/एनएसएस, युवक/महिला मंगल दल, भारतीय वन सेवा के वर्तमान/पूर्व अधिकारी और विभिन्न सरकारी विभाग सहभागी बनेंगे। स्वतंत्रता दिवस पर लगाए जाने वाले पौधे भावी पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का संदेश देंगे।