Antarctica Blood Falls Red Water Mystery: अंटार्कटिका महाद्वीप की जमी हुई सुन्न कर देने वाली बर्फ के बीच एक ऐसी जगह भी है, जहां से पानी नहीं, बल्कि खौफनाक ‘खून’ जैसी लाल धार बहती है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो सफेद बर्फ का सीना चीरकर कोई गहरा जख्म उबल रहा हो। साल 1911 में जब इंसानों ने पहली बार इस रहस्यमयी ‘खूनी झरने’ को देखा, तो उनके होश उड़ गए।
आखिर माइनस डिग्री तापमान में जहां सब कुछ जम जाता है, वहां यह लाल खौफनाक पानी कैसे और क्यों बह रहा है? 100 से भी ज्यादा सालों तक वैज्ञानिक इस डरावने राज को सुलझाने के लिए भटकते रहे, लेकिन अब जाकर बर्फ की गहराइयों में छिपा वो असली सच सामने आ गया है जिसने सबको चौंका दिया है।
‘अंटार्कटिक साइंस’ जर्नल में छपी एक बेहद चौंकाने वाली नई रिसर्च ने इस खूनी पहेली के आखिरी हिस्से को बेपर्दा कर दिया है। वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला है कि टेलर ग्लेशियर के नीचे सदियों से कैद यह हैरान करने वाला लाल पानी आखिर किस अदृश्य ताकत के दबाव में आकर अचानक सतह पर उबलने लगता है। क्या यह कुदरत का कोई खौफनाक करिश्मा है या इसके पीछे कोई गहरा वैज्ञानिक खेल? आइए इस रहस्य की परतों को खोलते हुए समझते हैं इस अद्भुत घटना के पीछे की पूरी कहानी।
क्या है अंटार्कटिका का ‘खूनी झरना’?
यह अनोखा झरना पूर्वी अंटार्कटिका के मैकमर्डो ड्राई वैली (McMurdo Dry Valleys) में टेलर ग्लेशियर के किनारे पर स्थित है, जो पृथ्वी के सबसे ठंडे और सूखे क्षेत्रों में से एक है। इस रहस्यमयी झरने को सबसे पहले साल 1911 में ब्रिटिश टेरा नोवा अभियान के दौरान ऑस्ट्रेलियाई भूवैज्ञानिक थॉमस ग्रिफ़िथ टेलर ने देखा था, जिनके नाम पर इस ग्लेशियर का नाम रखा गया।
शुरुआती दौर में खोजकर्ताओं का मानना था कि पानी का यह गाढ़ा लाल रंग किसी खास तरह के लाल शैवाल के कारण है। लेकिन दशकों के वैज्ञानिक शोध के बाद यह साफ हो गया कि यह रंग ग्लेशियर के नीचे बहने वाले आयरन-युक्त नमकीन पानी की वजह से है।
क्यों लाल होता है इस झरने का पानी?
ग्लेशियर के नीचे छिपा यह पानी आम पानी नहीं है, बल्कि यह एक प्राचीन और अत्यधिक नमकीन घोल। करीब 15 लाख साल पहले जब ग्लेशियर आगे बढ़ रहे थे, तब समुद्र का यह पानी लगभग 400 मीटर गहरी बर्फ के नीचे कैद हो गया था।
जमने से रोकता है नमक: पानी में नमक की भारी मात्रा होने के कारण यह बेहद कम तापमान (-10°C से भी नीचे) में भी बर्फ नहीं बनता और लिक्विड फॉर्म में रहता है।
ऑक्सीजन से रिएक्शन: इस प्राचीन पानी में आयरन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। जैसे ही यह आयरन-युक्त पानी ग्लेशियर की दरारों से बाहर निकलकर हवा के संपर्क में आता है, तो हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ इसका रिएक्शन हो जाता है। आसान भाषा में कहें तो जैसे लोहे में जंग लगने पर वह लाल-भूरा हो जाता है, ठीक वैसे ही यह पानी हवा लगते ही गहरे लाल रंग में बदल जाता है।
नई रिसर्च में क्या आया सामने?
अब तक वैज्ञानिक यह तो जानते थे कि पानी लाल क्यों है, लेकिन यह पानी इतनी भारी बर्फ को चीरकर अचानक बाहर कैसे आता है, यह एक पहेली थी। इस नई स्टडी ने पहेली के इसी आखिरी हिस्से को सुलझाया है।
वैज्ञानिकों ने साल 2018 में इस झरने से पानी निकलने की घटना का मिलान ग्लेशियर में हुए बदलावों से किया। उन्होंने पाया कि जब झरने से लाल पानी बाहर निकला, ठीक उसी समय ग्लेशियर की सतह में लगभग 15 मिलीमीटर की मामूली गिरावट आई थी और ग्लेशियर की रफ्तार भी कुछ समय के लिए धीमी हो गई थी। इससे यह साबित होता है कि ग्लेशियर की बर्फ में होने वाली मामूली हलचल से नीचे का दबाव कम होता है और वह दबा हुआ पानी नेटवर्क चैनलों के जरिए ऊपर चढ़कर सतह पर आ जाता है।
क्यों खास है यह नई खोज?
इससे पहले किए गए रडार सर्वे में टेलर ग्लेशियर के नीचे दबाव वाले चैनलों का पता चला था, जिससे यह समझना आसान हुआ था कि दुनिया के सबसे ठंडे ग्लेशियर के अंदर पानी तरल रूप में कैसे बह सकता है। अब यह नई खोज सीधे तौर पर ग्लेशियर की मूवमेंट और पानी के बाहर आने के संबंध को प्रमाणित करती है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्लेशियरों के नीचे पानी कैसे व्यवहार करता है।
दुनिया के पहले और इकलौते ट्रिलेनियर यानी $1 लाख करोड़ से अधिक दौलत वाले शख्स एलॉन मस्क (Elon Musk) को टेस्ला (Tesla) और स्पेसएक्स (SpaceX) के शेयरों की गिरावट से तगड़ा शॉक लगा। इनकी गिरावट से मस्क की दौलत से हजारों करोड़ डॉलर साफ हो गए। अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह गिरावट अस्थायी है या फिर एआई और स्पेस से जुड़ी हाई-ग्रोथ कंपनियों को लेकर मार्केट की सोच में बड़े बदलाव का संकेत। टेस्ला का शेयर दिसंबर 2025 में एक साल के हाई $498.83 से करीब 21% टूटकर करीब $393 पर है। वहीं अब तक के सबसे बड़ा आईपीओ लाने के बाद 12 जून को नास्डाक पर लिस्ट हुई स्पेसएक्स $225.64 के रिकॉर्ड हाई से करीब 30% टूटकर अब $157-158 के करीब आ चुका है। इस गिरावट के कारण एलन मस्क की नेटवर्थ स्पेसएक्स की लिस्टिंग के तुरंत बाद अपने $1.45 ट्रिलियन के रिकॉर्ड हाई से घटकर $1 ट्रिलियन से नीचे आ गई है।
प्रॉफिट बुकिंग है या गहरी गिरावट?
वेस्टेड फाइनेंस के सीईओ और फाउंडर विक्रम शाह का मानना है कि टेस्ला और स्पेसएक्स की गिरावट की दोनों वजहें हैं- प्रॉफिट बुकिंग और गहरी गिरावट। शेयरों की तेज रैली के बाद निवेशकों ने पैसा निकाला शुरू किया तो इस पर दबाव पड़ा। इसके अलावा मार्केट ने अब एआई और स्पेस इकॉनमी से जुड़ी कंपनियों का वैल्यूएशन फिर से करना शुरू किया है। ऐसे में यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि वैल्यूएशन आखिर कहां स्थिर होंगे।
विक्रम शाह के मुताबिक टेस्ला और स्पेसएक्स के सिर्फ शेयर ही टूटे हैं, बिजनेस के स्तर पर अभी भी ज्यादा कुछ नहीं टूटा है। उन्होंने जिक्र किया कि टेस्ला ने अभी हाल में अपना सबसे मजबूत तिमाही डिलीवरी आंकड़ा पेश किया है, फिर भी शेयर टूटे हैं। इससे संकेत मिल रहा है कि निवेशक अभी कंपनी के इलेक्ट्रिक वेईकल बिजनेस की बजाय उसके लंबे समय के ऑटोनॉमस ड्राइविंग और रोबोटैक्सी विजन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। स्पेसएक्स की स्थिति भी ऐसी ही है। स्टारलिंक लगातार प्रॉफिटेबल तरीके से बढ़ रहा है और कंपनी का लॉन्च बिजनेस भी विस्तार कर रहा है, लेकिन पोस्ट-लिस्टिंग शुरुआती तेजी के बाद शेयरों पर दबाव आया है।
क्या करना चाहिए भारतीय निवेशकों को?
विक्रम शाह के मुताबिक टेस्ला और स्पेसएक्स की गिरावट खरीदें या बेचें, फैसले जितना साधारण नहीं है बल्कि उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि पोर्टफोलियो एलोकेशन और निवेश के लॉन्ग-टर्म गोल्स पर फोकस करना चाहिए। उनका कहना है कि एआई और स्पेस में 5–10 साल के लिए निवेश कर रहे हैं तो कुछ हफ्तों की गिरावट से ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने निवेशकों को यह भी देखने की सलाह दी है कि कहीं इन शेयरों में उनका एक्सपोजर पहले की तेजी के कारण जरूरत से ज्यादा तो नहीं हो गया है। साथ ही उन्होंने भारतीय निवेशकों को बिना सोचे-समझे नई लिस्ट हुई हाई-वैल्यू अमेरिकी कंपनियों में निवेश करने से सावधान किया। उनका मानना है कि अमेरिकी स्टॉक्स में निवेश इतना छोटा होना चाहिए कि शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव से पूरा पोर्टफोलियो प्रभावित न हो।
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The most affordable model in Renault’s India line-up, the Kwid has undergone a minor lifecycle update for 2026. This brings with it a few styling tweaks over the pre-facelift model, but focusing primarily on the integration of the French brand’s latest logo. However, if you’re in the market for a new Renault Kwid, which variant should be you pick? Let’s find out.
2026 Renault Kwid powertrain options
Powertrain specifications
2026 Renault Kwid
Engine
1.0-litre naturally aspirated three-cylinder
Power
69hp
Torque
92.5Nm
Transmission
5-speed MT / 5-speed AMT
Drive configuration
Front-wheel drive
Fuel capacity
28 litres
The updated Kwid continues with the same three-cylinder petrol engine as its predecessor. This 1.0-litre naturally aspirated mill churns out 69hp at 5,500rpm and 92.5Nm at 4,250rpm. Customers get to choose from a 5-speed manual gearbox and a 5-speed automated manual transmission. Since the powertrain is also the same as in the pre-facelift car, the performance and fuel efficiency of the 2026 Kwid will be familiar too.
There only two trim levels of the 2026 Renault Kwid on sale. The most affordable is the Evolution trim, whose manual and AMT variants are priced at Rs 4.53 lakh and Rs 4.90 lakh, respectively. The fully loaded Climber trim’s manual variant is priced at Rs 5.15 lakh, while the AMT variant costs Rs 5.61 lakh. Depending on the variant, prices have dropped by between Rs 10,000 and Rs 32,000 over the pre-facelift Kwid.
2026 Renault Kwid: Which variant should you buy?
The top-end Climber AMT variant offers everyday convenience and more safety features
While the Kwid’s Climber MT variant costs Rs 1.08 lakh more than its Evolution counterpart, it offers more in the way of safety and everyday convenience tech. Not only does it get six airbags (instead of just two on the Evolution) and a rearview camera, but it also comes with a manually adjustable IRVM that will be handy when driving at night. The Climber also gets power windows for all occupants, steering-mounted audio controls, powered ORVMs and a rear parcel tray. Moreover, its upgraded exterior makes for a nicer-looking car overall. Paying extra for the AMT further adds hill-start assist and the general user-friendliness of an automatic gearbox.
Public Provident Fund Calculator: बच्चों के सुरक्षित और अमीर भविष्य के लिए लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग करना हर माता-पिता का सपना होता है। इस मामले में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) आज भी देश की सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित सरकारी बचत योजनाओं में से एक है। जोखिम न होने और गारंटीड रिटर्न मिलने की वजह से इसके जरिए बच्चों की उच्च शिक्षा, विदेश में पढ़ाई, शादी या उनके लिए एक बड़ा वेल्थ फंड आसानी से तैयार किया जा सकता है।
कोई भी माता-पिता या कानूनी अभिभावक किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में जाकर अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर PPF खाता खोल सकते हैं। जब बच्चा 18 साल का हो जाता है, तो इस खाते का स्टेटस ‘मेजर’ में बदल दिया जाता है। आइए बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि अगर आप अपने बच्चे के लिए हर महीने ₹5000 निवेश करते हैं, तो कंपाउंडिंग की ताकत से 60 की उम्र तक वह कितने करोड़ का मालिक बन जाएगा।
उम्र का खेल: जितनी जल्दी शुरुआत, उतना बड़ा फंड
पीपीएफ में फिलहाल 7.1% की सालाना ब्याज दर मिल रही है। आप अपने बच्चे की किस उम्र में यह निवेश शुरू करते हैं, इसका उसके 60 साल (रिटायरमेंट) की उम्र में मिलने वाले कुल फंड पर बहुत बड़ा असर पड़ता है।
नीचे दिए गए आंकड़ों से समझिए कि बच्चे की अलग-अलग उम्र में ₹5000 मंथली निवेश करने पर 60 साल की उम्र में कितना पैसा मिलेगा:
10 साल की उम्र में शुरू करने पर (50 साल का निवेश): कुल जमा राशि ₹30 लाख होगी। इस पर ₹2.40 करोड़ से ज्यादा का सिर्फ ब्याज मिलेगा। 60 की उम्र में कुल मैच्योरिटी वैल्यू ₹2.70 करोड़ से अधिक होगी।
12 साल की उम्र में शुरू करने पर (48 साल का निवेश): कुल जमा राशि ₹28.80 लाख होगी। इस पर ₹2.05 करोड़ से ज्यादा का ब्याज मिलेगा। 60 की उम्र में कुल मैच्योरिटी वैल्यू ₹2.34 करोड़ से अधिक होगी।
15 साल की उम्र में शुरू करने पर (45 साल का निवेश): कुल जमा राशि ₹27 लाख होगी। इस पर ₹1.62 करोड़ से ज्यादा का ब्याज मिलेगा। 60 की उम्र में कुल मैच्योरिटी वैल्यू ₹1.89 करोड़ से अधिक होगी।
18 साल की उम्र में शुरू करने पर (42 साल का निवेश): कुल जमा राशि ₹25.20 लाख होगी। इस पर ₹1.27 करोड़ से ज्यादा का ब्याज मिलेगा। 60 की उम्र में कुल मैच्योरिटी वैल्यू ₹1.52 करोड़ से अधिक होगी।
सिर्फ 8 साल की देरी और ₹1.25 करोड़ का फटका!
ऊपर दी गई कैलकुलेशन से साफ है कि निवेश की शुरुआत करने में की गई थोड़ी सी भी देरी आपके बच्चे के अंतिम फंड को कितना छोटा कर सकती है। अगर आप बच्चे के 10 साल के होने पर निवेश शुरू करते हैं, तो फंड ₹2.70 करोड़ बनता है। लेकिन अगर आप सिर्फ 8 साल की देरी करके उसके 18 साल के होने पर शुरुआत करते हैं, तो यह फंड घटकर ₹1.52 करोड़ रह जाता है। यानी सिर्फ 8 साल की देरी की वजह से आपके बच्चे को ₹1.25 करोड़ से ज्यादा का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
The Mahindra BE6 and Hyundai Creta Electric may occupy the same segment, but they have been engineered with very different priorities. The Creta Electric focuses on maximising efficiency, while the BE6 combines a significantly more powerful motor with a larger battery pack to deliver stronger performance and longer overall range. Our instrumented tests reveal how the two electric SUVs compare in the real world.
Real World Efficiency and Range
The Mahindra BE6 and Hyundai Creta Electric arrive at their range figures in different ways. While the BE6 relies on a larger battery pack to maximise outright range, the Creta Electric focuses on getting the most out of every kilowatt hour.
Real World Efficiency & Range
Test
Mahindra BE6
Hyundai Creta Electric
Winner
City efficiency (km/kWh)
5.55
9.45
Creta Electric
City range (km)
439
486
Creta Electric
Highway efficiency (km/kWh)
5.81
7.36
Creta Electric
Highway range (km)
459
379
BE6
Combined efficiency (km/kWh)
5.68
8.65
Creta Electric
Combined range (km)
449
432
BE6
The Creta Electric is clearly the more efficient SUV in urban conditions, returning an impressive 9.45km/kWh and an estimated 486km of city range. The BE6 manages 439km, highlighting the Hyundai’s focus on extracting maximum distance from its battery in stop start traffic.
On the highway, the Creta Electric continues to post the better efficiency figure at 7.36km/kWh. However, the BE6’s larger battery enables it to cover 459km on a charge compared to the Hyundai’s 379km, giving it a clear advantage on longer journeys.
Across our combined cycle, the Mahindra records a range of 449km, 17km ahead of the Creta Electric’s 432km. The results underline the different engineering approaches adopted by the two manufacturers. Hyundai prioritises energy efficiency, while Mahindra leverages a larger battery to deliver greater overall range.
Performance comparison
The performance figures also help explain the differences in efficiency. The BE6’s rear mounted electric motor produces substantially more power than the Creta Electric, resulting in quicker acceleration across every test.
Performance
Test
Mahindra BE6
Hyundai Creta Electric
Winner
0-100kph (sec)
7.14
8.04
BE6
20-80kph (sec)
4.03
4.55
BE6
40-100kph (sec)
4.48
5.23
BE6
Quarter mile (sec)
15.36
16.06
BE6
While a more powerful powertrain typically demands more energy, the larger battery pack ensures the BE6 still delivers the longer overall range. The Creta Electric, meanwhile, demonstrates just how efficiently its powertrain has been tuned, extracting more kilometres from every kilowatt hour without prioritising outright performance.
Regenerative braking
The Mahindra consistently delivers stronger regenerative braking, particularly in the higher settings where it sheds speed over a shorter distance than the Creta Electric. The difference is most noticeable in one pedal mode and High regeneration, while the Mid setting is almost identical between the two SUVs. Hyundai’s gentler calibration may feel more natural to drivers transitioning from an ICE car, whereas the BE6’s stronger regeneration is likely to appeal to those who prefer one pedal driving.
Regenerative Braking (80-20kph)
Mode
Mahindra BE6
Hyundai Creta Electric
Winner
One Pedal / i-Pedal
99.24m / 6.75s
106.42m / 7.75s
BE6
High
122.11m / 8.80s
138.70m / 10.32s
BE6
Mid
190.02m / 13.64s
190.43m / 14.05s
BE6
Low
299.47m / 21.23s
318.83m / 23.67s
BE6
Verdict
The Mahindra BE6 and Hyundai Creta Electric represent two distinct approaches to electric SUV engineering, and our tests show that both succeed in their respective goals.
The Hyundai Creta Electric is the efficiency benchmark, extracting more kilometres from every kWh in city, highway and combined driving. Its exceptional city range and smoother regenerative braking make it particularly well suited to buyers whose driving is predominantly urban.
The Mahindra BE6, on the other hand, takes a more performance-oriented approach. Its substantially more powerful motor delivers noticeably quicker acceleration, while the larger battery pack enables it to offer superior highway and overall driving range. It also features stronger regenerative braking, lending itself to a more engaging one pedal driving experience.
Ultimately, there is no outright winner here. If your priority is extracting the maximum distance from every unit of energy, the Creta Electric has the edge. However, if you value stronger performance, longer highway range and a more involving driving experience, the BE6 makes a compelling case.
With the mid-size electric SUV space getting highly competitive over time, the Mahindra BE 6 comes as a popular option with its futuristic looks, large battery and powerful motor. With the Sierra EV’s arrival, Tata is aiming squarely for the BE 6. From dimensions and powertrains to features and price, we compare both eSUVs’ top-spec versions on paper to determine the better value proposition. Here, we’ve chosen the Empowered A trim of the Sierra EV and the Pack Three trim of the BE 6.
According to our mid-size eSUV specification comparison, the Sierra EV and the Mahindra BE 6 were among the largest models. While the Sierra EV is taller and has a larger frunk, the BE 6 is longer, wider, has a longer wheelbase, and slightly more ground clearance and boot. Overall, the BE 6 is larger, albeit marginally.
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Battery and range
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Battery and range
Sierra EV
Mahindra BE 6
Battery size (kWh)
75
79
Motor setup
RWD | AWD
RWD
Power (hp)
209 | 140 (front) 240 (rear)
286
Torque (Nm)
315 | 504
380
ARAI range (km)
665 | 624
683
In top-specification guise, the Sierra EV and Mahindra BE 6 feature among the largest battery packs in the segment, with the latter being slightly bigger. But the Sierra more than makes up for it by being the only eSUV to have an AWD version. There’s also a single-motor RWD version offered on the Empowered A trim of the Sierra EV. While the BE 6’s single motor produces more power than the front and rear motors on the Sierra EV, the Sierra EV delivers 124Nm of additional torque in AWD guise. However, the BE 6 gets higher claimed range figures in comparison to the Sierra EV.
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Charging times
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Charging times
Sierra EV
Mahindra BE 6
Battery size (kWh)
75
79
AC charging output support (kW)
7.2
7.2, 11.2
DC charging output support (kW)
110, 120
180
AC charging time (hours)
8.9 | 10.5 (10-100%)
11.7, 8 (0-100%)
DC charging time (minutes)
25 | 26 (20-80%)
20 (20-80%)
As far as charging is concerned, the BE 6 supports faster AC and DC charging speeds compared to the Sierra EV. Only their DC charging speeds are comparable, with the Sierra EV’s time being up to 6 minutes slower than the BE 6’s.
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Exterior features
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Exterior features
Sierra EV
Mahindra BE 6
Headlights
Auto LED
Auto LED
Tail-lights
LED
LED
DRLs
Yes
Yes
Welcome/goodbye animation
Yes
Yes
Fog lamps
Front and rear
Front
Puddle lamps
Yes
No
Sequential indicators
Yes
Yes
Flush door handles
Yes
Yes
Rear spoiler
Yes
Yes
Power-adjustable and folding ORVMs
Yes
Yes
Rain-sensing wipers
Yes
Yes
Rear wiper/washer
Yes
No
Shark-fin antenna
Yes
No
Colours
Monotone
Monotone
Wheels
19-inch
19-inch
On the outside, both the Sierra EV and BE 6 come with LED lighting, welcome and goodbye animations, sequential turn indicators, and the largest-in-segment 19-inch alloys. But the Sierra EV comes with rear fog lamps, puddle lamps, a rear wiper/ washer, and a shark fin antenna. However, the BE 6 gets motorised opening for the front flush door handles, while the Sierra EV’s flush door handles are manually operated.
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Interior features
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Interior features
Sierra EV
Mahindra BE 6
Infotainment screen
12.3-inch
12.3-inch
Driver’s display
10.25-inch
12.3-inch
Passenger display
12.3-inch
No
Head-up display
Yes
Yes
In-built navigation
Yes
No
Infotainment-based gaming console
Yes
No
In-car payments
Yes
No
Powered driver’s seat
6-way
6-way
Front seat thigh support
Yes
No
Driver seat memory and welcome function
Yes
Yes
Powered front passenger seat
4-way
No
Cooled front seats
Yes
Yes
Reclining rear seats
Yes
Yes
Boss mode
Yes
No
Wireless Android Auto, Apple CarPlay
Yes
Yes
Audio system
12-speaker JBL Black
16-speaker Harman Kardon
Dolby Atmos
Yes
Yes
Sunroof
Openable panoramic
Fixed-glass panoramic
Rear AC vents
Yes
Yes
Climate control
Dual-zone
Dual-zone
Seat upholstery
Leatherette
Leatherette
Wireless phone charger
Yes
Yes
Ambient lighting
Yes
Yes
Front centre armrest
Yes
Yes
Rear centre armrest
Yes
Yes
USB ports
4x Type-C
4x Type-C
NFC-based key card
Yes
No
Powered tailgate
Yes
Yes
Air purifier
Yes
Yes
Connected car tech
Yes
Yes
Rear sunshades
Yes
No
OTA updates
Yes
Yes
While the BE 6 gets the larger digital driver’s display and more speakers than the Sierra EV, the latter, however, pips the former by offering an additional passenger display, built-in navigation, a powered front passenger seat, boss mode, and rear window sunshades. While the panoramic sunroof in the Sierra EV is openable, the BE 6 gets a fixed glass roof.
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Driving tech
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Driving tech
Sierra EV
BE 6
Boost mode
Yes
No
Drive modes
Normal, Eco, Sport
Default, Range, Everyday, Race
Terrain modes
Normal, Grass, Snow, Mud-ruts, Gravel, Sand, Rock Crawl, Custom
Snow
Off-road assist
Yes
No
Cruise Control
Adaptive
Adaptive
Drift mode
Yes
No
While drive modes and adaptive cruise control are present on both eSUVs, the Sierra EV’s AWD allows more adjustability to your drive. The BE 6 offers only snow mode, while the Sierra EV betters it with Normal, Grass, Snow, Mud-ruts, Gravel, Sand, Rock Crawl, and Custom terrain modes. Additionally, the Sierra EV also offers a drift mode and boost mode, with the latter surging power on demand.
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Safety
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Safety
Sierra EV
BE 6
Airbags
6
6
ABS and EBD
Yes
Yes
ADAS
Level 2+
Level 2+
Automatic parking assist
Yes
Yes
Camera setup
540-degree
360-degree
Parking sensors
Front and rear
Front and rear
Electric parking brake
Yes
Yes
Disc brakes
All-wheels
All-wheels
TPMS
Yes
Yes
IRVM
Auto-dimming
Auto-dimming
Hill-hold control
Yes
Yes
ESC
Yes
Yes
When it comes to safety features, the Sierra EV and BE 6 come loaded. Not only do both eSUVs cover the basics like 6 airbags, hill hold control, and ESC, but they are the segment’s only SUVs with Level 2+ ADAS and automatic parking assist. The latter feature also enables you to park/unpark your vehicle via your smartphone. But the Sierra EV nudges ahead minutely with additional cameras for the under-bonnet area on top of its 360-degree camera setup.
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Price and verdict
Tata Sierra EV vs Mahindra BE 6: Price and verdict
Sierra EV AWD
Mahindra BE 6
Ex-showroom price (Rs lakh)
24.79 – 25.99
26.90
The Sierra EV is up to Rs 2.11 lakh cheaper than the BE 6 in top-spec guise, depending on the chosen variant. Between the two, it is the Sierra EV we recommend. While the BE 6 has larger dimensions and a higher claimed range, the Sierra EV brings more features and an AWD system, all while being more affordable at the same time, making it the better value proposition.
Mutual Fund SIP SWP Calculator: रिटायरमेंट के बाद ठाठ से जिंदगी जीना और हर महीने लाखों की पेंशन पाना कोई मुश्किल काम नहीं है, बस आपको निवेश का सही और स्मार्ट तरीका पता होना चाहिए। आम निवेशक एक तय रकम की एसआईपी (SIP) शुरू करके उसे सालों-साल चलाते हैं, जिससे वे एक अच्छा फंड तो बना लेते हैं, लेकिन ‘स्मार्ट निवेशक’ अपनी बढ़ती आमदनी के साथ हर साल अपने निवेश को भी बढ़ाते हैं।
अगर आप 30 साल की उम्र में रोजाना महज ₹200 बचाकर ₹6000 की मंथली म्यूचुअल फंड एसआईपी शुरू करते हैं, तो रिटायरमेंट के समय आपके पास ₹9 करोड़ से ज्यादा का भारी-भरकम फंड हो सकता है। इसके बाद एक खास ट्रिक के जरिए आप इसी फंड से ताउम्र ₹6 लाख महीना की पेंशन भी पा सकते हैं। आइए आसानी से समझते हैं इस ‘SIP + SWP’ कैलकुलेटर का पूरा गणित।
स्टेप-अप एसआईपी का जादू: ऐसे बनेगा ₹9 करोड़ का फंड
इस जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए आपको ‘स्टेप-अप एसआईपी’ का इस्तेमाल करना होगा। इसका मतलब है कि आपको हर साल अपनी एसआईपी की रकम में अपनी इनकम के हिसाब से थोड़ी बढ़ोतरी करनी होगी। एसबीआई सिक्योरिटीज के म्यूचुअल फंड कैलकुलेटर के मुताबिक इसका गणित इस प्रकार है:
शुरुआती मंथली निवेश: ₹6000 प्रति माह
सालाना स्टेप-अप: 10%, यानी हर साल आपको एसआईपी की रकम में 10% की बढ़ोतरी करनी है। जैसे पहले साल ₹6000, तो दूसरे साल ₹6600 मंथली।
निवेश की अवधि: 30 वर्ष, मान लेते हैं आपकी उम्र 30 साल है और आप 60 की उम्र तक निवेश करते हैं।
अनुमानित सालाना रिटर्न: 15%, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लंबी अवधि में इतना रिटर्न मिलना मुमकिन है।
30 साल बाद कुल मैच्योरिटी फंड: करीब ₹9.01 करोड़
वहीं अगर आप बिना स्टेप-अप के सीधे ₹6000 की सिंपल एसआईपी 30 साल तक चलाते, तो 15% रिटर्न के हिसाब से केवल ₹4.20 करोड़ ही जमा हो पाते। यानी सिर्फ 10% सालाना निवेश बढ़ाकर आपने अपने फंड को दोगुने से भी ज्यादा कर लिया।
पेंशन के लिए अपनाएं SWP फॉर्मूला: हर महीने मिलेंगे ₹6 लाख
जब आप 60 वर्ष की उम्र में ₹9 करोड़ का फंड जमा कर लेते हैं, तो अब आपको म्यूचुअल फंड से पैसे निकालने के लिए सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) का सहारा लेना होगा। सीनियर सिटीजंस और रिटायर्ड लोगों के लिए SWP रेगुलर इनकम का सबसे बेहतरीन जरिया है।
SWP कैलकुलेटर का गणित
एसडब्ल्यूपी में कुल निवेश: ₹9 करोड़
पेंशन की अवधि: 25 वर्ष, 60 साल से लेकर 85 साल की उम्र तक
SWP पर अनुमानित रिटर्न: 7% (सुरक्षित या कंजर्वेटिव फंड्स के लिहाज से)
मंथली फिक्स्ड पेंशन: ₹6 लाख प्रति माह
बचा हुआ इमरजेंसी फंड: हर महीने ₹6 लाख की पेंशन निकालने के बाद भी 25 साल पूरे होने पर आपके पास ₹2.64 करोड़ का फंड अलग से बच जाएगा। इस रकम का इस्तेमाल बुढ़ापे में किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी के लिए किया जा सकता है।
30 साल बाद आखिर ₹6 लाख की पेंशन क्यों है जरूरी?
कई लोगों को लग सकता है कि ₹6 लाख महीने की पेंशन बहुत ज्यादा है, लेकिन इसके पीछे महंगाई का बड़ा रोल है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ‘आज के समय में एक लोअर-मिडिल क्लास सीनियर सिटीजन के लिए ₹50000 का मंथली खर्च काफी होता है।
अगर हम स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सहित सालाना 8% की महंगाई दर को जोड़ें, तो आज के ₹50000 की वैल्यू 30 साल बाद बढ़कर करीब ₹5 लाख प्रति माह हो जाएगी। इसमें बुढ़ापे के अन्य मेडिकल खर्चों और फुटकर खर्चों को जोड़ दें, तो 30 साल बाद एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए ₹6 लाख की मंथली पेंशन बिल्कुल सही और आदर्श मानी जाएगी।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
USA Independance Day: भीषण गर्मी में अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ झुलस गई। अमेरिका के मध्य और पूर्वी हिस्सों में शुक्रवार को भीषण गर्मी की लहर ने 4 जुलाई यानी स्वतंत्रता दिवस को होने वाले जश्न बुरी तरह प्रभावित किया। राजधानी वॉशिंगटन समेत कई जगहों पर अधिकारियों को दर्जनों परेड, संगीत कार्यक्रम और आतिशबाजी के शो रद्द करने पड़े या टालने पड़े। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक गर्मी की इस लहर में वॉशिंगटन के नेशनल मॉल में आयोजित ग्रेट अमेरिकन स्टेट फेयर भी झुलस गया जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका के 250वीं वर्षगांठ के समारोहों का प्रमुख हिस्सा था।
46 डिग्री गर्मी ने किया जश्न फीका
शुक्रवार की देर रात नेशनल पार्क सर्विस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए वॉशिंगटन की इंडिपेंडेंस डे परेड रद्द करने का ऐलान किया था। यह परेड शनिवार अमेरिकी समयानुसार सुबह 10:30 बजे शुरू होनी थी। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि हीट इंडेक्स 115 डिग्री फ़ारेनहाइट (लगभग 46 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच सकता है। अमेरिका में गर्मियों का कहर हीटडोम के चलते है, जो एक हाई-प्रेशर सिस्टम है। इसमें गर्म हवा एक क्षेत्र में फंस जाती है और ह्यूमिडिटी बढ़ जाती है।
अमेरिका 4 जुलाई को ब्रिटेन से 1776 में आजादी के ऐलान पर हर साल स्वतंत्रता दिवस मनाता है। इस दिन अमेरिकी बापबेक्यू, परेड और आतिशबाजी जैसे कार्यक्रमों के लिए इकट्ठा होते हैं। हालांकि इस बार गर्मियों ने इसका जश्न फीका कर दिया और धड़ाधड़ प्रोग्राम कैंसल हो रहे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक फिलाडेल्फिया में अधिकारियों ने भीषण गर्मी के चलते शहर के जश्न के मुख्य कार्यक्रम ‘सैल्यूट टू इंडिपेंडेंस परेड’ को रद्द कर दिया। यह फैसला गुरुवार को तापमान के 103 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंचने के बाद लिया गया। इससे पहले इतना तापमान साल 1901 में था।
गर्मी के चलते अमेरिका में दूसरी जगहों पर भी कार्यक्रम रद्द हुए या टल गए। न्यू जर्सी के हैडन टाउनशिप ने भी अपनी सालाना 4 जुलाई की परेड रद्द कर दी तो अपस्टेट न्यूयॉर्क के वॉटरटाउन ने अपना इंडिपेंडेंस डे कॉन्सर्ट और आतिशबाजी का कार्यक्रम रद्द कर दिया। इसके अलावा बोस्टन में अधिकारियों ने नदी के किनारे होने वाले सालाना आतिशबाजी के जश्न में एंट्री का समय चार घंटे आगे बढ़ाकर दोपहर के बजाय शाम 4 बजे कर दिया।
अमेरिका में कैसी है हालत?
भीषण गर्मी के चलते अमेरिका में पावरग्रिड पर दबाव बढ़ा। अमेरिका के सबसे बड़े पावर ग्रिड ऑपरेटर पीजेएम ने इमरजेंसी कंवर्जेशन प्रोग्राम के ग्राहकों को बिजली बिजली की खपत कम करने को कहा है। पीजेएम मिड-अटलांटिक, दक्षिण और वाशिंगटन डीसी में 6.7 करोड़ लोगों को बिजली सप्लाई करती है। पीजेएम ने अब लोगों से बिजली कम खर्च करने का आग्रह किया है। न्यूयॉर्क में शुक्रवार देर दोपहर तक 17 हजार लोग बिना बिजली के थे। मांग बढ़ने पर कंपनी ने न्यूयॉर्क शहर और वेस्टचेस्टर काउंटी के ग्राहकों से बिजली बचाने की अपील की। न्यूयॉर्क शहर में गर्मी से गोंद पिघलने के कारण जूते मैनहट्टन की सड़कों पर चिपक रहे थे।
Anshula Kapoor Mehendi: फिल्ममेकर बोनी कपूर की बेटी और रियलिटी टीवी पर्सनैलिटी अंशुला कपूर 6 जुलाई को करण ठक्कर से शादी करने जा रही हैं। शादी से पहले, कपूर परिवार ने होने वाली दुल्हन के लिए एक छोटी सी मेहंदी सेरेमनी रखी, जिसकी झलक सोनम कपूर ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके फैन्स को दिखाई।
शनिवार को सोनम ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर अंशुल की मेहंदी सेरेमनी के कुछ पल शेयर किए, जिसमें उनके करीबी दोस्त और परिवार वाले शामिल हुए थे। शाम का एक खास अटरेक्शन होने वाले दूल्हे करण ठक्कर की सरप्राइज एंट्री थी। ढोल की थाप पर मशहूर गाने ‘मेहंदी लगा के रखना’ पर डांस करते हुए करण ने जश्न में शामिल होकर अंशुल को हैरान और खुश कर दिया।
समारोह के कई और वीडियो भी ऑनलाइन सामने आए। एक क्लिप में अंशुला ‘दिल धड़कने दो’ फिल्म के गाने पर डांस करती दिखीं, जबकि दूसरे वीडियो में वह परिवार के सदस्यों के साथ जश्न का मजा लेती नजर आईं। इस इवेंट में शामिल हुईं सोशल मीडिया पर्सनैलिटी ओरी ने सेलिब्रेशन की कई तस्वीरें शेयर कीं। एक तस्वीर में, कैमरे के लिए पोज़ देते हुए अंशूला ने गर्व से अपने कलीरे दिखाए। खुशी कपूर ने सिंपल ट्रेडिशनल कपड़े पहने, जबकि जाह्नवी कपूर ने सफेद इंडो-वेस्टर्न आउटफिट पहना। अर्जुन कपूर ने अपनी बहन अंशुला के साथ हरे रंग के कपड़े पहने, जिससे परिवार का सेलिब्रेशन और भी खास हो गया।
अंशुल की शादी के जश्न की शुरुआत 21 जून को उनके घर पर ‘माता की चौकी’ के साथ हुई। इस समारोह में महीप कपूर, शनाया कपूर, जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर समेत परिवार के सदस्य शामिल हुए, जो शानदार पारंपरिक कपड़ों में नजर आए। बाद में उन्होंने दक्षिण कोरिया के सियोल में अपने करीबी दोस्तों के साथ बैचलरेट पार्टी मनाई। अंशुल और करण 6 जुलाई को शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। इस तारीख की पुष्टि उनके पिता बोनी कपूर ने की है।
यह कपल 2022 में एक डेटिंग ऐप के जरिए मिला था। मार्च 2023 में, अंशुला ने करण के साथ अपने रिश्ते को इंस्टाग्राम पर ऑफिशियल किया। बाद में, पिछले साल अक्टूबर में, उन्होंने परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में एक छोटे से समारोह में सगाई की थी।
इवेंट की तस्वीरें शेयर करते हुए अंशुला ने लिखा, “02/10/2025। यह सिर्फ़ हमारी ‘गोर धना’ रस्म नहीं थी, बल्कि हर छोटी-छोटी चीज में प्यार झलक रहा था। ‘हमेशा और हमेशा के लिए’ (always and forever) — ये शब्द हमेशा से ‘रो’ (करण) के पसंदीदा रहे हैं, और आज ये शब्द सबसे प्यारे अंदाज़ में सच होते महसूस हुए। उनके प्यार ने मुझे यकीन दिलाया है कि परियों की कहानियां सिर्फ किताबों में नहीं होतीं, बल्कि ऐसे पलों में भी होती हैं। हंसी-मजाक, गले मिलने, दुआओं और उन लोगों से भरा कमरा जो हमारी दुनिया को पूरा महसूस कराते हैं। और फिर, मां का प्यार… जो चुपचाप हमें घेरे हुए था। उनके फूलों में, उनकी बातों में, उनकी सीट पर, और जिस तरह से उनकी मौजूदगी हर जगह महसूस की जा सकती थी।”
फिल्ममेकर बोनी कपूर की बेटी और रियलिटी टीवी पर्सनैलिटी अंशुला कपूर 6 जुलाई को करण ठक्कर से शादी करने जा रही हैं। शादी से पहले, कपूर परिवार ने होने वाली दुल्हन के लिए एक छोटी सी मेहंदी सेरेमनी रखी, जिसकी झलक सोनम कपूर ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके फैन्स को दिखाई।
शनिवार को सोनम ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर अंशुल की मेहंदी सेरेमनी के कुछ पल शेयर किए, जिसमें उनके करीबी दोस्त और परिवार वाले शामिल हुए थे। शाम का एक खास अटरेक्शन होने वाले दूल्हे करण ठक्कर की सरप्राइज एंट्री थी। ढोल की थाप पर मशहूर गाने ‘मेहंदी लगा के रखना’ पर डांस करते हुए करण ने जश्न में शामिल होकर अंशुल को हैरान और खुश कर दिया।
समारोह के कई और वीडियो भी ऑनलाइन सामने आए। एक क्लिप में अंशुला ‘दिल धड़कने दो’ फिल्म के गाने पर डांस करती दिखीं, जबकि दूसरे वीडियो में वह परिवार के सदस्यों के साथ जश्न का मजा लेती नजर आईं। इस इवेंट में शामिल हुईं सोशल मीडिया पर्सनैलिटी ओरी ने सेलिब्रेशन की कई तस्वीरें शेयर कीं। एक तस्वीर में, कैमरे के लिए पोज़ देते हुए अंशुला ने गर्व से अपने कलीरे दिखाए। खुशी कपूर ने सिंपल ट्रेडिशनल कपड़े पहने, जबकि जाह्नवी कपूर ने सफेद इंडो-वेस्टर्न आउटफिट पहना। अर्जुन कपूर ने अपनी बहन अंशुला के साथ हरे रंग के कपड़े पहने, जिससे परिवार का सेलिब्रेशन और भी खास हो गया।
अंशुल की शादी के जश्न की शुरुआत 21 जून को उनके घर पर ‘माता की चौकी’ के साथ हुई। इस समारोह में महीप कपूर, शनाया कपूर, जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर समेत परिवार के सदस्य शामिल हुए, जो शानदार पारंपरिक कपड़ों में नजर आए। बाद में उन्होंने दक्षिण कोरिया के सियोल में अपने करीबी दोस्तों के साथ बैचलरेट पार्टी मनाई। अंशुल और करण 6 जुलाई को शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। इस तारीख की पुष्टि उनके पिता बोनी कपूर ने की है।
यह कपल 2022 में एक डेटिंग ऐप के जरिए मिला था। मार्च 2023 में, अंशुला ने करण के साथ अपने रिश्ते को इंस्टाग्राम पर ऑफिशियल किया। बाद में, पिछले साल अक्टूबर में, उन्होंने परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में एक छोटे से समारोह में सगाई की थी।
इवेंट की तस्वीरें शेयर करते हुए अंशूला ने लिखा, “02/10/2025। यह सिर्फ़ हमारी ‘गोर धना’ रस्म नहीं थी, बल्कि हर छोटी-छोटी चीज में प्यार झलक रहा था। ‘हमेशा और हमेशा के लिए’ (always and forever) — ये शब्द हमेशा से ‘रो’ (करण) के पसंदीदा रहे हैं, और आज ये शब्द सबसे प्यारे अंदाज़ में सच होते महसूस हुए। उनके प्यार ने मुझे यकीन दिलाया है कि परियों की कहानियां सिर्फ किताबों में नहीं होतीं, बल्कि ऐसे पलों में भी होती हैं। हंसी-मजाक, गले मिलने, दुआओं और उन लोगों से भरा कमरा जो हमारी दुनिया को पूरा महसूस कराते हैं। और फिर, मां का प्यार… जो चुपचाप हमें घेरे हुए था। उनके फूलों में, उनकी बातों में, उनकी सीट पर, और जिस तरह से उनकी मौजूदगी हर जगह महसूस की जा सकती थी।”
Aastha Spintex IPO Listing: आस्था स्पिंटेक्स के आईपीओ को निवेशकों के अच्छे रिस्पांस के बाद अब इसके शेयरों के लिस्टिंग की तैयारी हो रही है। लिस्टिंग को लेकर ग्रे मार्केट से जो संकेत मिल रहे हैं, उसके मुताबिक इसके शेयरों की कल 6 जुलाई को बीएसई और एनएसई पर प्रीमियम एंट्री हो सकती है। ग्रे मार्केट में इसकी GMP इश्यू प्राइस के मुकाबले ₹3 यानी 2.21% है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय लिस्टिंग के दिन मार्केट सेंटिमेंट के साथ-साथ कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स ही शेयरों की चाल तय करते हैं। आईपीओ निवेशकों को इसके शेयर ₹136 के भाव पर जारी हुए हैं।
Aastha Spintex IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च
आस्था स्पिंटेक्स का ₹170 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 29 जून से 1 जुलाई तक खुला था। इसका प्राइस बैंड प्रति शेयर ₹125-₹136 था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था। ओवरऑल यह 5.05 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 3.59 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 8.29 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 2.54 गुना और एंप्लॉयीज का हिसा 5.43 गुना भरा था।
इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 1.25 करोड़ नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹111.51 करोड़ फाल्कन यार्न्स प्राइवेट लिमिटेड के अधिग्रहण के पेमेंट का कुछ हिस्सा भरने, ₹10 करोड़ फाल्कन यार्न्स के वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में खर्च होंगे।
Aastha Spintex के बारे में
कार्डेड, कॉम्बेड और कॉम्पैक्ट कॉम्बेड कॉटन यार्न और कॉटन बेल्स के मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग को लेकर आस्था स्पिंटेक्स एक जानी-मानी कंपनी है। कंपनी अपने कॉटन बेल्स का इस्तेमाल दो तरह से करती है- अपने खुद के कॉटन यार्न के प्रोडक्शन के लिए और दूसरी स्पिनिंग मिलों को बेचने या सप्लाई करने के लिए। इसके अलावा कंपनी की गुजरात के मोरबी जिले में एक सेमी-ऑटोमेटेड स्पिनिंग और जिनिंग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है। कंपनी टेक्सटाइल प्रोडक्शन के दौरान निकलने वाले कॉटन यार्न वेस्ट को रीसायकल करके दूसरे प्रोडक्ट भी बनाती है।
कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2023-25 के बीच इसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 21% की रफ्तार से बढ़कर ₹352.17 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन शुद्ध मुनाफा रॉकेट की स्पीड से बढ़ा जोकि वित्त वर्ष 2023 में ₹1.06 करोड़ और वित्त वर्ष 2024 में ₹16.29 करोड़ से वित्त वर्ष 2025 में ₹22.92 करोड़ पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2026 के 9 महीने यानी अप्रैल-दिसंबर 2025 में इसे ₹314.02 करोड़ का रेवेन्यू और ₹17.56 करोड़ का शुद्ध मुनाफा हासिल हुआ।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।