EPFO Interest Rate: पीएफ धारकों की बल्ले-बल्ले! सरकार ने 8.25% ब्याज दर को दी मंजूरी, इसी महीने खाते में आएगा पैसा

EPFO Interest Rate: देश के 7 करोड़ से ज्यादा नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) जमा पर 8.25 फीसदी की ब्याज दर को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, यह ब्याज इसी महीने यानी जून 2026 के अंत तक अंशधारकों के खातों में क्रेडिट किया जा सकता है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) द्वारा तय की गई ब्याज दर को वित्त मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद ही खातों में डालता है, जो कि अब मिल चुकी है।

वित्त मंत्रालय से मिली फाइनल हरी झंडी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने ईपीएफओ (EPFO) के शीर्ष निर्णय लेने वाले निकाय ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज’ द्वारा तय की गई 8.25% ब्याज दर पर अपनी सहमति दे दी है।

इससे पहले, 2 मार्च 2026 को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में हुई CBT की बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दर को 8.25% पर रखने का फैसला लिया गया था। इसके बाद प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा गया था, क्योंकि भारत सरकार ही ईपीएफ की गारंटर होती है।

नए इकोसिस्टम से तुरंत क्रेडिट होगा ब्याज

श्रम मंत्रालय के निर्देश पर ईपीएफओ इसी महीने 2025-26 के लिए तय ब्याज राशि अंशधारकों के खातों में ट्रांसफर करने की तैयारी में है। राहत की बात यह है कि EPFO द्वारा विकसित किए गए नए इकोसिस्टम के तहत, जैसे ही ब्याज ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू होगी, पैसा तुरंत सब्सक्राइबर्स के खातों में दिखने लगेगा।

EPFO Interest Rate: पीएफ धारकों की बल्ले-बल्ले! सरकार ने 8.25% ब्याज दर को दी मंजूरी, इसी महीने खाते में आएगा पैसा

लगातार तीसरे साल 8.25% ब्याज बरकरार

यह लगातार तीसरा साल है जब ईपीएफओ ने अपनी ब्याज दर को 8.25% पर बरकरार रखा है:

पिछले साल फरवरी, 2025 में भी EPFO ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 8.25% ब्याज दर को बनाए रखा था।

साल 2024 में ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए इसे 8.15% से मामूली बढ़ाकर 8.25% किया था।

मार्च 2022 में, EPFO ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ब्याज दर को घटाकर 8.10% कर दिया था, जो 1977-78 (जब दर 8% थी) के बाद से सबसे कम थी। इसके बाद से दरों में सुधार हुआ और अब यह लगातार तीसरे साल 8.25% पर बनी हुई है।

El Nino Fear Impact: अल नीनो के डर से यहां किसानों ने पानी बचाने के लिए धान उगाने की टेक्नीक ही बदली! इससे हो रही बचत समझिए

El Nino Impact on Rice Farming: प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Niño) के पैर पसारने और कम बारिश की आशंका के बीच आंध्र प्रदेश के किसानों ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। सूखे और पानी की किल्लत के डर से यहां के किसानों ने पानी बचाने के लिए धान उगाने की अपनी पारंपरिक तकनीक से अलग हट कर काम करना शुरू किया है। किसान अब पारंपरिक रूप से धान के खेतों को पानी से लबालब भरने के बजाय आधुनिक और कम पानी लेने वाली तकनीकों को अपना रहे हैं, जिससे लाखों लीटर पानी की बचत हो रही है।

पीटीआई की रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के जेआर पुरम गांव के एक ऐसे ही किसान की कहानी बताई गई है। 52 वर्षीय किसान मज्जी सत्यम के एक ऐसे ही के पास 5 एकड़ जमीन और दो बोरवेल हैं। वे जीवनभर अपने पिता के सिखाए पारंपरिक तरीके से ही धान उगाते रहे हैं। यानी पहले नर्सरी में पौधे तैयार करना फिर उन्हें पानी से लबालब भरे खेतों में ट्रांसप्लांट (रोपाई) करना और कटाई तक खेतों में पानी जमा रखना।

इस खरीफ सीजन में अल नीनो के कारण कम बारिश की आशंका को देखते हुए सत्यम ने अपनी तकनीक बदल दी है। सत्यम ने पीटीआई को बताया कि, ‘पिछले साल मई में ही बारिश आ गई थी। इस साल अभी तक नहीं आई है। मैंने सुना है कि अल नीनो के कारण इस बार बारिश कम होगी। इसलिए मैंने DSR आजमाने का फैसला किया है।’

क्या है DSR तकनीक?

DSR यानी डायरेक्ट सीडेड राइस (Direct Seeded Rice – धान की सीधी बुआई)। इस तकनीक में नर्सरी तैयार करने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती। इसमें बीज सीधे मुख्य खेत में बोए जाते हैं। इसमें न तो रोपाई की जरूरत पड़ती है, न ही खेतों में पानी जमा रखने या कीचड़ बनाने की आवश्यकता होती है। कम मानसून की मार झेलने वाले किसानों के लिए यह तकनीक एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरी है।

एक एकड़ में बचता है 12 लाख लीटर पानी

पारंपरिक धान की खेती में अत्यधिक पानी की खपत होती है। इसके मुकाबले डीओएसआर (DSR) और एडब्ल्यूडी (AWD – अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग) तकनीकें पानी की जरूरतों को काफी कम कर देती हैं। AWD एक ऐसी तकनीक है जिसमें खेतों को लगातार पानी में डुबोकर रखने के बजाय चक्रों में पानी दिया और सुखाया जाता है।

डॉ. रेड्डीज फाउंडेशन के निदेशक (ग्रामीण आजीविका और जलवायु कार्रवाई) सुमन सारस्वतीभटला ने बचत के आंकड़े बताते हुए कहा कि ड्राय डीएसआर पारंपरिक तरीकों की तुलना में प्रति एकड़ लगभग 11 से 12 लाख लीटर पानी बचाता है।

इसी तरह वेट डीएसआर प्रति एकड़ लगभग 4 से 5.5 लाख लीटर पानी की बचत करता है। AWD पारंपरिक खेती के मुकाबले लगभग 3 से 5 लाख लीटर पानी बचाता है। दोनों तकनीकों के सही ढंग से काम करने के लिए खेत के ऊपरी 30-40 सेंटीमीटर हिस्से में मिट्टी की नमी का लगातार बने रहना बेहद महत्वपूर्ण है, जो यह तय करता है कि किसानों को कब और कैसे बुआई करनी है।

3000 करोड़ लीटर पानी की हुई रिकॉर्ड बचत

सत्यम अकेले ऐसे किसान नहीं हैं। श्रीकाकुलम और विजयनगरम जिलों के 1500 से अधिक गांवों में करीब 10 लाख एकड़ धान के क्षेत्र में किसानों को एक्शन फॉर क्लाइमेट एंड एनवायरनमेंट (ACE) कार्यक्रम के तहत पानी की अधिक खपत वाली पारंपरिक खेती से दूर ले जाया जा रहा है। यह पहल फार्मा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के सीएसआर (CSR) फंड के सहयोग से संचालित डॉ. रेड्डीज फाउंडेशन द्वारा की जा रही है।

पिछले साल इन दोनों जिलों के किसानों ने 3667 एकड़ में DSR और 21963 एकड़ में AWD तकनीक को अपनाया था। इस वजह से 3000 करोड़ लीटर से अधिक पानी की बचत हुई और 50000 टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन में कमी आई। अल नीनो के दोबारा पूर्वानुमान को देखते हुए इस साल इन आंकड़ों में और बड़ी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

इसी गांव के एक अन्य 50 वर्षीय किसान आर सन्यास राव पिछले साल से ही 5 एकड़ में वेट डीएसआर का सफल प्रयोग कर रहे हैं। इससे उनकी मजदूरी की लागत घट गई और नर्सरी व रोपाई का झंझट खत्म हो गया। इस साल वे दो एकड़ में ड्राय डीएसआर और तीन एकड़ में मक्के की खेती कर रहे हैं।

सरकारी कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र भी किसानों को धान का रकबा घटाने, कम समय वाली फसलों या दालों और अनाजों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं। सत्यम का कहना है कि अगर अल नीनो गंभीर हुआ, तो हम सिर्फ घर के खाने के लिए ही धान उगाएंगे।

बदल गया बुआई का कैलेंडर और बढ़ाई गई मिट्टी की सेहत

चक्रवात और बारिश पर निर्भर रहने वाले इस बेल्ट (श्रीकाकुलम) में बुआई का पारंपरिक समय पहले ही बदल चुका है। पहले जहां धान जून के अंत में बोया जाता था, वहीं पिछले 3-4 वर्षों में यह जुलाई में शिफ्ट हो गया है और मुख्य रोपाई अगस्त तक चली जाती है। इस खाली समय का उपयोग करने के लिए फाउंडेशन किसानों को खरीफ शुरू होने से पहले (मई-जून की अवधि में) कम समय वाली कवर फसलें जैसे उड़द, मूंग और तिल उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

इसके अलावा पटसन और नेपियर जैसी हरी खाद वाली फसलें मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद करती हैं। पिछले साल 2372 एकड़ में कवर फसलें और 1508 एकड़ में एग्रो-फॉरेस्ट्री (नारियल के बगीचों में इमारती लकड़ी और फलों के पौधे लगाना) की गई थी।

मिट्टी की जांच और डिजिटल सलाह

श्रीकाकुलम की मिट्टी के स्वास्थ्य में भी गिरावट देखी जा रही है। फाउंडेशन ने जनवरी 2025 में हैदराबाद में अपनी अत्याधुनिक सुविधा शुरू की है। इसके माध्यम से किसानों को त्वरित मिट्टी जांच रिपोर्ट और फसल संबंधी सलाह दी जा रही है। पिछले साल 5000 से अधिक सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किए गए। इनमें पाया गया कि मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन का स्तर बहुत कम है।

ये भी पढ़ें- EL Nino Impact: यूपी से महाराष्ट्र तक उन 12 राज्यों की लिस्ट जहां असर डालेगा अल-नीनो, IMD के जून एंड फोरकास्ट में क्या आएगा?

सल्फर, जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी है जबकि पोटाश की मात्रा अधिक है। इस साल अल नीनो के प्रभाव और उर्वरकों की कमी को देखते हुए विशिष्ट पोषक तत्व प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों से बल्क एसएमएस, पोस्टर और किसान बैठकों के माध्यम से किसानों को आदत या सुविधा के बजाय मिट्टी की जरूरत के हिसाब से सटीक खाद डालने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

11,000mAh बैटरी के साथ आ रहा Honor का ये दमदार फोन, लॉन्च से पहले लीक हुए स्पसिफिकेशन्स

Honor जल्द ही अपना फ्लैगशिप स्मार्टफोन X80 Pro Max चीन में लॉन्च करने वाला है। यह कंपनी की मिड-रेंज X80 लाइनअप का नया मॉडल होगा। टेक कंपनी ने हाल ही में कन्फर्म किया है कि इस हैंडसेट में 11,000mAh की बैटरी होगी, जो इस लाइनअप में सबसे बड़ी बैटरी बताई जा रही है। वहीं, लॉन्च से कुछ दिन पहले ही, Honor X80 Pro Max को China Telecom की वेबसाइट पर लिस्ट किया गया है, जिससे इसके खास स्पेसिफिकेशन्स, फीचर्स, चार कलर ऑप्शन और स्टोरेज कॉन्फिगरेशन का पता चला है। यह स्मार्टफोन Qualcomm Snapdragon 6 सीरीज के ऑक्टा-कोर चिपसेट के साथ आ सकता है और इसमें 12GB तक RAM मिलने की उम्मीद है। इसका वजन लगभग 203 ग्राम बताया जा रहा है।

Honor X80 Pro Max के स्पेसिफिकेशन्स और स्टोरेज ऑप्शन (अनुमानित)

China Telecom की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, आने वाला Honor X80 Pro Max 6GB + 128GB, 8GB + 128GB, 8GB + 256GB, 8GB + 512GB और 12GB + 512GB RAM और स्टोरेज कॉन्फिगरेशन में उपलब्ध होगा। इसके अलावा, Honor X80 Pro Max को China Telecom की वेबसाइट पर Qualcomm के ऑक्टा-कोर Snapdragon 6 Gen 5 चिपसेट के साथ लिस्ट किया गया है, जो पहले आई लीक जानकारी से मेल खाता है। उम्मीद है कि यह चिपसेट 2.6GHz की पीक क्लॉक स्पीड देगा।

लिस्टिंग से यह भी पता चलता है कि स्मार्टफोन में 6.8-इंच का डिस्प्ले होगा। साथ ही सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 8MP का फ्रंट कैमरा भी मिल सकता है। इसके अलावा, यह हैंडसेट Honor के Android 16-बेस्ड MagicOS 10 के साथ आ सकता है। इसका साइज 162.2×77×8.08mm और वजन लगभग 203g बताया गया है। इस हैंडसेट में डुअल-बैंड WiFi, ब्लूटूथ और NFC के साथ-साथ USB Type-C पोर्ट भी हो सकता है।

बता दें कि स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी ने पहले ही कन्फर्म कर दिया है कि Honor X80 Pro Max को चीन में 22 जून को शाम 7 बजे (लोकल टाइम) यानी शाम 4:30 बजे (IST) लॉन्च किया जाएगा। कंपनी ने यह भी कन्फर्म किया है कि इस हैंडसेट में 11,000mAh की बैटरी होगी, जो 90W वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 27W वायर्ड रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करेगा। डिस्प्ले की बात करें तो इसमें 10,000 nits तक की पीक ब्राइटनेस मिलने की उम्मीद है।

फोन में पीछे की तरफ 50MP का सिंगल कैमरा और LED फ्लैश दिया जाएगा, जिसे एक सर्कुलर कैमरा आइलैंड में रखा गया है। Honor ने हाल ही में यह भी बताया है कि Honor X80 Pro Max चीन में Lightning Red, Moonlight White, Mystic Black और Vibrant Orange जैसे कलर ऑप्शन में लॉन्च होगा। डिजाइन की बात करें तो इसमें सेंटर में होल-पंच डिस्प्ले कटआउट मिलेगा और फोन के दाईं तरफ पावर बटन और वॉल्यूम कंट्रोल दिए जाएंगे।

यह भी पढे़ं: JBL ने लॉन्च किए नए Live 780NC और 680NC हेडफोन, 80 घंटे बैटरी लाइफ के साथ दमदार एंट्री

NSE IPO: एएसई में हिस्सेदारी वाली कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी, न्यू इंडिया 14% उछला

एनएसई में हिस्सेदारी रखने वाले बैंकों और कंपनियों के शेयरों में 18 जून को पंख लग गए। एनएसई ने 17 जून को आईपीओ के लिए सेबी के पास पेपर्स फाइल कर दिए हैं। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) होगा। मौजूदा शेयरहोल्डर्स अपने करीब 14.89 करोड़ शेयर ओएफएस में बेचेंगे।

कई शेयरहोल्डर्स ओएफएस में बेचेंगे हिस्सेदारी

एनएसई के कई शेयरहोल्डर्स ओएफएस में अपने शेयर बचेंगे। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी शामिल हैं। इन सभी के शेयरों में 18 जून को तेजी देखने को मिली। सबसे ज्यादा 14 फीसदी का उछाल न्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयरों में आया।

एसबीआई 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एनएसई के 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा। एमएस स्ट्रेटेजिक (मॉरीशस) 1.6 करोड़ शेयर बेचेगी। LIC की एनएसई में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है। वह ओएफएस में शेयर नहीं बेचेगी। इस खबर से 18 जून को एलआईसी के शेयरों में भी उछाल दिखा। यह शेयर 2.97 फीसदी चढ़कर 430.55 रुपये पर बंद हुआ।

ये कंपनियां भी ओएफएस में बेचेंगी शेयर

कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड एनएसई के ओएफएस में 1.19 करोड़ शेयर बेचेगा। Aranda Investments (Mauritius) 1.12 करोड़ शेयर बेचेगी। बैंक ऑफ बड़ौदा 1.1 करोड़ शेयर बेचेगा। स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन 1.09 करोड़ शेयर बेचेगा। जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन 1.07 करोड़ शेयर बेचेगी। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी 1.05 करोड़ शेयर बेचेगी।

स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन की 4.44 फीसदी हिस्सेदारी

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एनएसई में 3.23 फीसदी हिस्सेदारी है। इसकी सब्सिडियरी कंपनी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की 4.33 फीसदी हिस्सेदारी है। स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की एनएसई में 4.44 फीसदी हिस्सेदारी है।

30,000 करोड़ का हो सकता है एनएसई का आईपीओ

एनएसई के मौजूदा शेयरहोल्डर्स एक्सचेंज के 6 फीसदी शेयर बेचेंगे। एनएसई का आईपीओ 30,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा। अभी सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड ह्यूंडई के नाम है। उसने 2024 में भारत में 27,000 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था। इससे पहले एलआईसी का आईपीओ सबसे बड़ा था। करीब 21000 करोड़ का यह आईपीओ 2022 में आया था।

हिस्सेदारी बेचने वाली कंपनियों को जबर्दस्त प्रॉफिट

एक्सपर्ट्स का कहना है कि एनएसई में हिस्सेदारी वाली कंपनियों के शेयरों में 18 जून को तेजी इस वजह से आई, क्योंकि इन शेयरों को अपने शेयर बेचने से निवेश पर जबर्दस्त प्रॉफिट होने जा रहा है। उदाहरण के लिए एसबीआई को एनएसई में अपने 2 करोड़ रुपये के निवेश पर करीब 5000 करोड़ का प्रॉफिट हो रहा है।

Delhi: दिल्ली के लुटियंस ज़ोन में ₹1,260 करोड़ में बिका बंगला! दिग्गज कारोबारी को 4 गुना हुआ फायदा

Delhi Subhash Chandra News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पॉश लुटियंस जोन इलाके में ₹1,260 करोड़ में एक बंगला बिका है। एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने लुटियंस एरिया में स्थित अपना बंगला 1,260 करोड़ रुपये में एक अज्ञात कारोबारी को बेच दिया है। इसे हाल के सबसे महंगे रियल एस्टेट डील में से एक माना जा रहा है। करीब तीन एकड़ में फैला यह बंगला कनॉट प्लेस और इंडिया गेट के पास भगवान दास रोड पर स्थित है।

सूत्रों ने न्यूज एजेंसी ‘पीटीआई’ को बताया कि इस प्रॉपर्टी को दिल्ली स्थित एक कारोबारी परिवार ने खरीदा है। हालांकि, इस खरीदार की पहचान उजागर नहीं की गई है। यह बंगला उसी सड़क पर स्थित है जहां अरबपति कारोबारी गौतम अदाणी की अगुवाई वाले ग्रुप ने साल 2020 में लगभग 400 करोड़ रुपये में एक प्रॉपर्टी खरीदी थी।

चार गुना बढ़ी बंगले की कीमत

सूत्रों ने कहा कि 1,260 करोड़ रुपये का यह सौदा दिसंबर के पहले सप्ताह तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। इस बीच, चंद्रा की अगुवाई वाले जी ग्रुप के प्रवक्ता ने इस लेन-देन पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। चंद्रा ने यह प्रॉपर्टी साल 2015 में 304 करोड़ रुपये में खरीदी थी।

इसका मतलब है कि इस प्रॉपर्टी कीमत पिछले एक दशक में चार गुना से अधिक हो गया है। लुटियंस एरिया भारत के सबसे महंगे रियल एस्टेट क्षेत्रों में से एक है। यहां करीब 3,000 हाई प्रोफाइल बंगले हैं। इनमें से लगभग 600 संपत्तियां निजी स्वामित्व में हैं, जो देश के सबसे अमीर लोगों के पास हैं।

लुटियंस जोन क्यों है खास?

दिल्ली का Lutyens Zone देश के सबसे प्रतिष्ठित और महंगे आवासीय इलाकों में गिना जाता है। यह एरिया लंबे समय से सत्ता, प्रतिष्ठा और ताकत का प्रतीक माना जाता रहा है। इस इलाके में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, जज, राजनयिक और चुनिंदा कारोबारी रहते हैं। सख्त निर्माण नियमों और सीमित भूमि उपलब्धता के कारण यहां संपत्तियों की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं।

लग्जरी रियल एस्टेट में तेजी

कोरोना वायरल (कोविड-19) महामारी के बाद दिल्ली के लुटियंस जोन और हरियाणा के गुरुग्राम की गोल्फ कोर्स रोड (Golf Course Road) पर कई बड़े रियल एस्टेट सौदे देखने को मिले हैं। विशेष रूप से गुरुग्राम में लग्जरी हाउसिंग की मांग तेजी से बढ़ी है। DLF की अल्ट्रा-लक्जरी प्रोजेक्ट्स The Camellias और The Dahlias में अपार्टमेंट्स की कीमतें रिकॉर्ड लेवल तक पहुंच चुकी हैं। इससे यह इलाका देश के सबसे महंगे आवासीय बाजारों में शामिल हो गया है।

कौन हैं सुभाष चंद्रा?

सुभाष चंद्रा एक प्रसिद्ध उद्योगपति, मीडिया उद्यमी और टेलीविजन क्षेत्र के दिग्गज व्यक्तियों में से एक हैं। उन्हें अक्सर ‘भारतीय निजी सैटेलाइट टेलीविजन के जनक’ कहा जाता है। उन्होंने 1992 में Zee TV की स्थापना की, जो भारत का पहला निजी सैटेलाइट टीवी चैनल था। चंद्रा का जन्म 30 नवंबर 1950 को हरियाणा के आदमपुर (हिसार) में हुआ था।

उन्होंने कम उम्र में पारिवारिक व्यापार से शुरुआत की और बाद में Essel Group की स्थापना की। इस ग्रुप ने पैकेजिंग, मनोरंजन, मीडिया, केबल टीवी और डीटीएच सेवाओं जैसे कई सेक्टर में कारोबार फैलाया।

ये भी पढ़ें- SP Split Buzz: ‘सहानुभूति रखें और तरस खाएं इन पर…’; सपा सांसदों में फूट के ओपी राजभर के दावों पर राजीव राय का पलटवार

इसके अलावा राजनीति में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। 2016 से 2022 तक वह हरियाणा से राज्यसभा सांसद रहे। व्यवसाय और मीडिया में उनके योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। इनमें 2011 का International Emmy Directorate Award भी शामिल है।

SIP vs PPF: 30 साल तक हर महीने ₹5000 निवेश, किसमें बनेगा ज्यादा फंड? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP vs PPF: अगर लंबी अवधि के निवेश की बात करें, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) सबसे लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हैं। दोनों का इस्तेमाल घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई, शादी, रिटायरमेंट या लंबी अवधि में संपत्ति बनाने जैसे बड़े वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

हालांकि, निवेश का फैसला करते समय सिर्फ रिटर्न नहीं देखना चाहिए। अपनी कमाई, जोखिम लेने की क्षमता और भविष्य के लक्ष्यों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई व्यक्ति 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये निवेश करे तो PPF और SIP में से कौन ज्यादा बड़ा फंड बना सकता है।

PPF में 30 साल तक 5,000 रुपये का निवेश

अगर PPF पर 7.1% सालाना ब्याज दर बनी रहती है और आप 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये निवेश करते हैं, तो मैच्योरिटी पर आपका कुल फंड करीब 61.80 लाख रुपये हो सकता है।

इस दौरान आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। वहीं, ब्याज के रूप में करीब 43.80 लाख रुपये मिल सकते हैं। यानी निवेश से कहीं ज्यादा रकम सिर्फ ब्याज से जुड़ सकती है। हालांकि, इस कैलकुलेशन में महंगाई का असर शामिल नहीं है।

chart pfss

SIP में 30 साल तक 5,000 रुपये का निवेश

वहीं, अगर आप 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये की SIP करते हैं और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपका कुल फंड करीब 1.41 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। आमतौर पर माना जाता है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड 12% रिटर्न देते हैं। लेकिन, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।

इस दौरान आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। वहीं, करीब 1.23 करोड़ रुपये का फायदा रिटर्न के रूप में मिल सकता है। इस तरह कुल फंड 1.41 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है।

महंगाई को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

निवेश की योजना बनाते समय महंगाई को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। आज के 1 करोड़ रुपये की कीमत 30 साल बाद उतनी नहीं रहेगी। अगर SIP पर 12% रिटर्न मिले और महंगाई दर 6% मान ली जाए, तो 30 साल बाद आपके फंड की वास्तविक कीमत करीब 40.84 लाख रुपये रह जाएगी।

इसमें 18 लाख रुपये का निवेश और लगभग 22.84 लाख रुपये का वास्तविक रिटर्न शामिल होगा। यही वजह है कि निवेश का आकलन करते समय सिर्फ कुल फंड नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक खरीद क्षमता भी देखनी चाहिए।

SIP को क्यों पसंद करते हैं निवेशक?

  • SIP लंबी अवधि में वेल्थ बनाने का आसान तरीका माना जाता है। इसमें आप छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं।
  • म्यूचुअल फंड में SIP छह महीने से लेकर किसी भी अवधि के लिए शुरू की जा सकती है। इसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
  • SIP में ज्यादा रिटर्न की संभावना है। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स ने अच्छे रिटर्न दिए हैं। हालांकि, रिटर्न पूरी तरह बाजार पर निर्भर करता है।
  • SIP निवेश की आदत भी बनती है। बैंक से ऑटो-डेबिट सेट करने के बाद हर महीने तय रकम अपने आप निवेश हो जाती है।
  • SIP में रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का लाभ मिलता है। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान अलग-अलग कीमतों पर यूनिट्स खरीदने से लंबी अवधि में औसत खरीद लागत संतुलित रहती है।

इसके अलावा SIP में Systematic Withdrawal Plan (SWP) की सुविधा भी मिलती है। इसके जरिए निवेशक जरूरत पड़ने पर हर महीने एक तय रकम निकाल सकते हैं। इससे पूरे निवेश को एक साथ तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।

Personal Loan 3 (1)

PPF को क्यों चुनते हैं निवेशक?

  • PPF लंबे समय से सुरक्षित निवेश का पर्याय माना जाता है। यह केंद्र सरकार की गारंटी वाली बचत योजना है। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता।
  • PPF की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुरक्षा है। फिलहाल इस पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। सरकार हर तिमाही ब्याज दर की समीक्षा करती है।
  • टैक्स बचत के लिहाज से भी PPF काफी आकर्षक है। यह EEE कैटेगरी का निवेश है। यानी निवेश की रकम, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों टैक्स फ्री होती हैं।
  • पुराने टैक्स रिजीम में PPF में सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट भी मिलती है।
  • PPF खाते पर लोन की सुविधा भी उपलब्ध है। खाता खुलने के एक साल बाद जमा राशि के आधार पर लोन लिया जा सकता है। आमतौर पर खाते में मौजूद बैलेंस का 25% तक लोन मिलता है।

निकासी के मामले में भी कुछ सुविधाएं हैं। PPF में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। हालांकि, पांच साल बाद कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी की जा सकती है। मैच्योरिटी के बाद खाते को पांच-पांच साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

आखिर किसे चुनना चाहिए?

अगर आपकी पहली प्राथमिकता सुरक्षा है और आप गारंटीड रिटर्न चाहते हैं, तो PPF बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाना है और आप बाजार से जुड़े जोखिम उठा सकते हैं, तो SIP ज्यादा आकर्षक साबित हो सकती है।

यही वजह है कि कई वित्तीय सलाहकार दोनों में संतुलित निवेश की सलाह देते हैं। इससे एक तरफ PPF की सुरक्षा मिलती है, तो दूसरी तरफ SIP के जरिए ज्यादा रिटर्न और वेल्थ क्रिएशन की संभावना भी बनी रहती है।

ITR Filing 2026: कब तक भरना है ITR, देरी पर कितना लगेगा जुर्माना; जानिए हर एक डिटेल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

लगातार पांचवे दिन Sensex मजबूत, ₹3 लाख करोड़ बढ़ी दौलत, Indigo-Trent रहे टॉप गेनर

Share Market Rally: कच्चे तेल की फिसलन पर घरेलू स्टॉक मार्केट में आज लगातार पांचवे दिन रौनक रही। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो इंट्रा-डे में सेंसेक्स 300 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24200 के एकदम करीब पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर मिडकैप और स्मॉलकैप स्पेस में भी अच्छी रौनक रही और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 आधे फीसदी से थोड़ी ही कम बढ़त रही।

सेक्टरवाइज आईटी सेक्टर ने मार्केट पर काफी दबाव बनाने की काफी कोशिश की और इसका निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक कमजोर हुआ। हालांकि फार्मा, पीएसयू बैंक और रियल्टी सेक्टर ने इसे संभाल लिया जिनके निफ्टी इंडेक्स आधे-आधे फीसदी से अधिक मजबूत हुए। निफ्टी प्राइवेट बैंक भी आधा फीसदी मजबूत हुआ।

ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में ₹3 लाख करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ। इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज सेंसेक्स (Sensex) 254.36 प्वाइंट्स यानी 0.33% के उछाल के साथ 77,409.98 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 82.30 प्वाइंट्स यानी 0.34% की बढ़त के साथ 24,168.00 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स आज 336.71 प्वाइंट्स उछलकर 77,492.33 और निफ्टी 103.55 प्वाइंट्स चढ़कर 24,189.25 तक पहुंच गया।

₹3.10 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 17 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,74,58,056.752 करोड़ था। आज यानी 18 जून 2026 को यह उछलकर ₹4,77,68,135.83 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹3,10,079.078 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 20 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज 20 स्टॉक्स आज ग्रीन बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज इंडिगो, ट्रेंट और बीईएल में रही। वहीं दूसरी तरफ आज सेंसेक्स पर सबसे अधिक गिरावट इंफोसिस, टेक महिंद्रा और मारुति में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

sensex 190

162 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4419 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2419 शेयर मजबूत हुए तो 1814 में गिरावट रही जबकि 186 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 162 शेयर एक साल के हाई और 46 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 7 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 7 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

bse 19

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

US Fed ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, लेकिन एक खास सिग्नल पर ट्रंप ने कहा- यकीन करना मुश्किल 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

New Honda City vs Skoda Slavia: 2026 में कौन सी सेडान कार है बेस्ट? जानें फीचर्स से लेकर माइलेज तक पूरी डिटेल

New Honda City vs Skoda Slavia: आज के समय में सेडान कारों की लोकप्रियता भले ही पहले जैसी नहीं रही, लेकिन मिड-साइज सेडान सेगमेंट आज भी भारत में SUV के मुकाबले एक प्रीमियम और आरामदायक विकल्प के तौर पर मौजूद है। इस सेगमेंट में Honda City और Skoda Slavia जैसी कारें खासतौर पर काफी पसंद की जाती हैं। दोनों ही मॉडल्स मॉडर्न डिजाइन, बेहतर केबिन क्वालिटी और प्रीमियम फीचर्स के साथ आते हैं, लेकिन इनकी ड्राइविंग फील और टारगेट ऑडियंस अलग है।

अब चलिए इन दोनों लोकप्रिय सेडान की कीमत, इंजन ऑप्शन, माइलेज, फीचर्स और बूट स्पेस के आधार पर तुलना करते हैं, और बताते हैं कि आपके लिए कौन सी कार सही रहेगी।

New Honda City vs Skoda Slavia: कीमत

Skoda Slavia इस मुकाबले में ज्यादा किफायती विकल्प है, जिसकी कीमत ₹10 लाख से ₹17.99 लाख (एक्स-शोरूम) के बीच है। इसकी तुलना में, नई Honda City की कीमत ₹12 लाख से ₹21 लाख (एक्स-शोरूम) के बीच है। Slavia दोनों ही रेंज (बेसिक और टॉप-एंड) में सस्ती है, लेकिन City अपने प्रीमियम दाम को मजबूत हाइब्रिड विकल्प और कई तरह के फीचर्स के साथ सही साबित करती है। जो ग्राहक ज्यादा वैल्यू चाहते हैं, उन्हें Slavia ज्यादा आकर्षक लग सकती है, जबकि जो लोग फ्यूल बचाना चाहते हैं और ज्यादा फीचर्स चाहते हैं, वे City चुन सकते हैं।

बता दें कि Honda ने हाल ही में City को अपडेट किया है, वहीं उम्मीद है कि Skoda बड़े बदलावों के साथ Slavia का फेसलिफ्ट वर्जन लॉन्च करेगी।

New Honda City vs Skoda Slavia: इंजन

Honda अपनी नई City में 1.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन देना जारी रखेगी, जो 119hp की पावर और 145Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसे 6-स्पीड मैनुअल या CVT ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ पेश किया गया है। इसमें 1.5-लीटर स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड पावरट्रेन का ऑप्शन भी मिलता है, जो 124hp की पावर और 253Nm का टॉर्क देता है और इसे e-CVT ट्रांसमिशन के साथ जोड़ा गया है। दूसरी ओर, Skoda की सेडान में दो टर्बो-पेट्रोल इंजन मिलते हैं। 1.0-लीटर थ्री-सिलेंडर टर्बो इंजन 113hp की पावर और 178Nm का टॉर्क देता है, और यह 6-स्पीड मैनुअल या 8-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ उपलब्ध है। 1.5-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन 148hp की पावर और 250Nm का टॉर्क जनरेट करता है और इसे 7-स्पीड DSG ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है।

New Honda City vs Skoda Slavia: माइलेज

Honda City का पेट्रोल वेरिएंट मैनुअल में 17.77 km/l और CVT में 17.97 km/l का माइलेज देता है। वहीं इसका स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड वर्जन काफी ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट है, जो 27.26 km/l तक का माइलेज देने का दावा करता है।

दूसरी तरफ Skoda Slavia का 1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन मैनुअल में 20.32 km/l और ऑटोमैटिक में 18.73 km/l का माइलेज देता है। वहीं इसका 1.5-लीटर टर्बो-पेट्रोल DSG वर्जन 19.36 km/l का माइलेज ऑफर करता है।

New Honda City vs Skoda Slavia: फीचर्स

दोनों ही सेडान कारें अच्छे फीचर्स के साथ आती हैं। इनमें LED लाइटिंग, 10.1-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, वायरलेस Apple CarPlay और Android Auto, वायरलेस फोन चार्जिंग, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, क्रूज़ कंट्रोल, कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी, छह एयरबैग और सिंगल-पेन सनरूफ जैसे फीचर्स मिलते हैं। हालांकि, City इस मामले में थोड़ी आगे है क्योंकि इसके हाइब्रिड वेरिएंट में लेवल-2 ADAS, 360-डिग्री कैमरा, एडेप्टिव क्रूज कंट्रोल, ड्राइव मोड्स और इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक जैसे फीचर्स मिलते हैं। साथ ही, इसके हाइब्रिड मॉडल में रियर सनशेड और सभी पहियों पर डिस्क ब्रेक भी दिए गए हैं।

वहीं, Skoda Slavia इसका जवाब पावर्ड फ्रंट सीट्स, बड़े 8-इंच के पूरी तरह डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, फ्रंट फॉग लैंप्स और इसके स्पोर्टी Monte Carlo एडिशन जैसे फीचर्स के साथ देती है।

New Honda City vs Skoda Slavia: बूट स्पेस

सामान रखने की जगह (बूट स्पेस) की बात करें तो Slavia को Honda City के 506 लीटर के मुकाबले 521 लीटर बूट स्पेस के साथ थोड़ी बढ़त मिलती है। हालांकि, यह अंतर सिर्फ 15 लीटर का है, लेकिन जो खरीदार अक्सर ज्यादा सामान के साथ यात्रा करते हैं, उनके लिए यह एक अहम बात हो सकती है।

यह भी पढ़ें: Citroen eC3X भारत में लॉन्च, प्रीमियम फीचर्स और बैटरी सब्सक्रिप्शन मॉडल के साथ, जानें कीमत

UP School Summer Holidays Extended: यूपी के स्कूलों में छात्रों की मौज, गर्मी को देखते हुए ग्रीष्मावकाश बढ़ा और अब 25 जून से खुलेंगे स्कूल

UP School Summer Holidays Extended: उत्तर प्रदेश सरकार के एक फैसले से राज्य के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की मौज हो गई है। प्रदेश सरकार ने राज्य में जारी मौजूदा हीटवेव के हालात को देखते हुए बेसिक एजुकेशन काउंसिल और मान्यता प्राप्त संस्थानों के स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां 24 जून तक बढ़ा दी हैं। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लिया गया है, जिसमें सरकार ने राज्य भर में बढ़ते तापमान के बीच बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अच्छी शिक्षा को मुख्य प्राथमिकता बताया है।

प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के अतिरिक्त मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इस संबंध में एक आधिकारिक निर्देश जारी किया है। इस ऑर्डर के मुताबिक, अब हर साल 20 मई से 24 जून तक गर्मी की छुट्टियां रहेंगी और छात्रों की नियमित कक्षाएं 25 जून से शुरू होंगी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि गर्मी की छुट्टियों के बाद मंगलवार को स्कूल खुले थे, लेकिन नए ऑर्डर के साथ इसे बढ़ा दिया गया है और अब यह 25 जून को फिर से खुलेंगे।

22, 23 और 24 जून टीचर स्कूलों में उपस्थित रहेंगे 

बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ.राकेश कुमार ने बताया कि शिक्षक व शिक्षणोत्तर कर्मचारी विद्यालयों में उपस्थित रहेंगे। 25 जून से शिक्षण कार्य सुचारु रूप से संचालित होगा। शैक्षणिक गतिविधियों की तैयारियों के लिए 22, 23 और 24 जून को सभी शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को स्कूलों में उपस्थित रहना होगा। इस दौरान लेसन प्लान तैयार करने, मिड-डे मील की व्यवस्था, पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता, विद्यालय परिसर, रसोई और शौचालयों की साफ-सफाई, पेयजल की व्यवस्था तथा स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब को क्रियाशील रखने जैसे कार्य पूरे किए जाएंगे।

21 जून को स्कूलों में होगा सामूहिक योगाभ्यास 

आदेश में यह भी कहा गया है कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर विद्यालयों में सामूहिक योगाभ्यास आयोजित किया जाएगा।

220 कार्य दिवसों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा

अधिकारियों ने बताया कि सरकारी आदेश में राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट के प्रावधानों का पालन करने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत हर शैक्षिक सत्र के दौरान कम से कम 220 कामकाजी दिनों और नियमित शिक्षण गतिविधियों को सुनिश्चित किया जाएगा। इस संबंध में सभी जिला मजिस्ट्रेट (DMs) को कोई भी लोकल छुट्टी घोषित करने से पहले इन कानूनी जरूरतों को ध्यान में रखने की सलाह दी गई है। सरकार ने स्कूलों को बिना रुकावट बिजली, पीने का पानी और दूसरी बेसिक सुविधाएं देने का भी निर्देश दिया है।

ICAI CA 2026 Result May Session: सीए मई 2026 में नूर सिंगला, रितिज सर्राफ और सोहन मांजरेकर ने किया टॉप, आधिकारिक वेबसाइट पर देखें अपना रिजल्ट

ITR Filing 2026: कब तक भरना है ITR, देरी पर कितना लगेगा जुर्माना; जानिए हर एक डिटेल

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग का सीजन शुरू हो चुका है। टैक्सपेयर्स लगातार AY 2026-27 की डेडलाइन सर्च कर रहे हैं। असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27, फाइनेंशियल ईयर (FY) 2025-26 की कमाई से जुड़ा है। ऐसे में हर टैक्सपेयर के लिए यह जानना जरूरी है कि उसे कब तक ITR फाइल करना है। तय समयसीमा चूकने पर लेट फीस, ब्याज और दूसरी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

AY 2026-27 के लिए ITR फाइलिंग की डेडलाइन

इनकम टैक्स विभाग ने अलग-अलग तरह के टैक्सपेयर्स के लिए अलग-अलग डेडलाइन तय की हैं।

टैक्सपेयर की कैटेगरीआखिरी तारीख
ITR-1 या ITR-2 भरने वाले व्यक्ति और HUF (ऑडिट नहीं)31 जुलाई 2026
ITR-3 या ITR-4 भरने वाले बिजनेस और प्रोफेशनल टैक्सपेयर (ऑडिट नहीं)31 अगस्त 2026
जिनके खातों का ऑडिट जरूरी है31 अक्टूबर 2026
ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों के दायरे में आने वाले टैक्सपेयर30 नवंबर 2026
बिलेटेड रिटर्न31 दिसंबर 2026
रिवाइज्ड रिटर्न31 मार्च 2027

इस बार एक अहम बदलाव भी हुआ है। ITR-3 और ITR-4 भरने वाले नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स को अब 31 जुलाई की जगह 31 अगस्त 2026 तक रिटर्न दाखिल करने का समय मिलेगा।

डेडलाइन छूट गई तो क्या होगा?

अगर आप तय तारीख तक ITR फाइल नहीं कर पाते हैं तो भी रिटर्न दाखिल करने का मौका खत्म नहीं होता। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न भर सकते हैं। हालांकि, इसके कुछ नुकसान हो सकते हैं।

सबसे पहले आपको लेट फाइलिंग फीस देनी पड़ सकती है। अगर कोई टैक्स बकाया है तो उस पर ब्याज भी लगेगा। कुछ नुकसान (Losses) को अगले सालों में कैरी फॉरवर्ड करने की सहूलियत भी नहीं मिलेगी। कई मामलों में टैक्स रिफंड मिलने में भी देरी हो जाती है।

समय पर ITR भरने के फायदे

समय पर ITR फाइल करना सिर्फ नियमों का पालन भर नहीं है, बल्कि इसके कई व्यावहारिक फायदे भी हैं। समय पर रिटर्न भरने से टैक्स रिफंड जल्दी मिलता है।

अगर आपको भविष्य में होम लोन, पर्सनल लोन या किसी अन्य तरह की क्रेडिट सुविधा लेनी है तो ITR अहम दस्तावेज माना जाता है। वीजा और इमिग्रेशन से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी ITR काम आता है। समय पर फाइलिंग करने से टैक्स विभाग की ओर से नोटिस या पेनाल्टी का जोखिम भी कम हो जाता है।

ITR भरने से पहले ये बातें जरूर जांच लें

रिटर्न फाइल करने से पहले कुछ जरूरी चीजों को चेक कर लेना चाहिए ताकि बाद में कोई गलती न हो।

सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपने सही ITR फॉर्म चुना है। इसके बाद Form 26AS, AIS और प्री-फिल्ड डेटा का मिलान करें। अपनी आय के सभी स्रोतों की सही जानकारी दें और बैंक अकाउंट डिटेल्स को दोबारा जांच लें।

सिर्फ उन्हीं डिडक्शन और छूट का दावा करें जिनके लिए आप वास्तव में पात्र हैं। रिटर्न जमा करने से पहले पूरी जानकारी ध्यान से पढ़ें और फाइलिंग के बाद ई-वेरिफिकेशन करना बिल्कुल न भूलें।

लेट फाइलिंग पर कितना जुर्माना?

डेडलाइन चूकने पर सेक्शन 234F के तहत लेट फाइलिंग फीस लग सकती है। अगर आपकी कुल सालाना आय 5 लाख रुपये से ज्यादा है तो अधिकतम 5,000 रुपये तक की फीस देनी पड़ सकती है। वहीं, अगर आपकी कुल आय 5 लाख रुपये या उससे कम है तो अधिकतम 1,000 रुपये की फीस लग सकती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह फीस तब भी देनी होगी, जब आप बाद में तय समयसीमा के भीतर बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर दें।

CA की छुट्टी… AI ने भरा इनकम टैक्स रिटर्न! ‘Claude’ के इस वायरल प्रॉम्प्ट पर छिड़ी बहस

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।