Max Healthcare Share Price: 6% उछलकर निफ्टी का टॉप गेनर बना शेयर, सिटी हुआ बुलिश, दिया ‌₹1,240 का टारगेट प्राइस

Max Healthcare Share Price: हेल्थकेयर सेक्टर की दिग्गज कंपनी मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट (Max Healthcare) के शेयर गुरुवार 18 जून को 6 फीसदी की तेजी देखने को मिली और यह निफ्टी 50 पर टॉप गेनर बना। दोपहर के ट्रेड में मैक्स हेल्थकेयर का स्टॉक 1,088 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जिससे हॉस्पिटल ऑपरेटर की वैल्यू लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपये हो गई। यह रैली बड़े मार्केट से काफी आगे निकल गई, उस समय निफ्टी 50 0.12 फीसदी की तेजी दिखा रहा था।

बता दें कि सिटी ने पिछले साल स्टॉक में करेक्शन के बाद एक फेवरेबल रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल पर जोर दिया और अगले कई सालों में मजबूत अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान लगाया। सिटी ने मैक्स हेल्थकेयर स्टॉक पर 1,240 रुपये प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ अपनी ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी। ब्रोकरेज ने कहा कि पिछले साल स्टॉक में लगभग 18 फीसदी की गिरावट आई है, जिससे वैल्यूएशन हिस्टोरिकल एवरेज पर वापस आ गए हैं।

सिटी के मुताबिक, वैल्यूएशन करेक्शन से स्टॉक का अट्रैक्शन बेहतर हुआ है, ऐसे समय में जब कंपनी मीडियम-टर्म में मज़बूत ग्रोथ प्रोफाइल दे रही है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि मैक्स हेल्थकेयर FY26 और FY30 के बीच 20 परसेंट EBITDA कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देगी, जिसे कैपेसिटी बढ़ाने और इसके हॉस्पिटल नेटवर्क में ग्रोथ से सपोर्ट मिलेगा।

सिटी को FY27 में लगभग 15 फीसदी रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद है और कहा कि FY28 में ग्रोथ और तेज़ हो सकती है क्योंकि एक्सपेंशन के काम ज़्यादा असरदार तरीके से होने लगेंगे। हालांकि, ब्रोकरेज ने एग्ज़िक्यूशन में देरी को एक बड़ा रिस्क बताया है जो ग्रोथ की रफ़्तार पर असर डाल सकता है।

मैक्स हेल्थकेयर के अपने फिस्कल चौथी तिमाही के रिज़ल्ट बताने के कुछ हफ़्ते बाद ब्रोकरेज की यह पॉज़िटिव कमेंट्री आई है। कंपनी ने Q4 FY26 के लिए नेट प्रॉफ़िट में साल-दर-साल 3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 387 करोड़ रुपये पोस्ट किया, जबकि रेवेन्यू 10 फीसदी बढ़कर 2,664 करोड़ रुपये हो गया।

रेवेन्यू ग्रोथ मुख्य रूप से ज़्यादा पेशेंट थ्रूपुट की वजह से हुई, जिसमें एक साल पहले की तुलना में ऑक्यूपाइड बेड डेज़ में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। पूरे नेटवर्क में बेड ऑक्यूपेंसी 75 फीसदी पर स्थिर रही, जो हेल्थकेयर सर्विसेज़ की लगातार डिमांड को दिखाता है।

हालांकि, एनालिस्ट्स ने अर्निंग्स परफॉर्मेंस को मिला-जुला माना। वॉल्यूम ग्रोथ अच्छी रही, लेकिन एग्रेसिव हायरिंग और चल रही कैपेसिटी बढ़ाने की वजह से मार्जिन पर दबाव आया। नतीजों के बाद स्टॉक में गिरावट आई थी क्योंकि अर्निंग्स एनालिस्ट्स के अनुमान से कम रही थीं।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ के एनालिस्ट्स ने अर्निंग्स मिस का कारण ज़्यादातर ज़्यादा टैक्स रेट बताया था, हालांकि ब्रोकरेज ने कहा कि ऑपरेटिंग ट्रेंड्स मोटे तौर पर स्थिर रहे।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

India-UK FTA : यूनाइटेड स्पिरिट्स,तिलकनगर और शराब बनाने वाली दूसरी कंपनियों के शेयरों को लगे पंख, USL पर जेपी मॉर्गन भी बुलिश

India-UK FTA : UK के साथ FTA लागू होने की खबर से यूनाइटेड स्पिरिट्स बाजार के फोकस में बना हुआ है। आज यह शेयर करीब 4 फीसदी चढ़कर वायदा के टाप गेनर्स में शामिल है। कंपनी पर आज जेपी मॉर्गन ने भी रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट से भी स्टॉक को सपोर्ट मिला है। इस बीच ISWAI (इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने कहा कि UK से स्कॉच व्हिस्की के इंपोर्ट पर टैरिफ घटने (जिसमें भारत में ब्लेंडिंग और बॉटलिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली बल्क स्कॉच भी शामिल है) से स्पिरिट्स सप्लाई चेन में वैल्यू ग्रोथ और प्रीमियम इंटरनेशनल ब्रांड्स तक कंज्यूमर्स की पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।

इस खबर के चलते 18 जून को शराब बनाने वाली सभी बड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़त देखने को मिली। इंडस्ट्री बॉडी ने भी भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) लागू होने का स्वागत किया है। इस इंडस्ट्री की जानकारी रखने वाले लोगों के उम्मीद है कि इस समझौते से स्कॉच व्हिस्की के इंपोर्ट पर टैरिफ कम होगा और घरेलू स्पिरिट्स मार्केट में प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ेगी।

आज के कारोबारी सेशन में तेजी दिखाने वाली कंपनियों में यूनाइटेड स्पिरिट्स 3.98% बढ़कर ₹1,361.50 पर,तिलकनगर इंडस्ट्रीज 3.3% बढ़कर ₹443 पर, एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रुअरीज 2.1% बढ़कर ₹843.95 पर,पिकाडिली एग्रो 1.5% बढ़कर ₹588 पर और रैडिको खेतान 1.3% बढ़कर ₹3,619 पर जाते दिखे हैं।

JPMorgan की एक पॉजिटिव टिप्पणी से यूनाइटेड स्पिरिट्स को लेकर निवेशकों का भरोसा और बढ़ा है। ब्रोकरेज ने इस स्टॉक पर “ओवरवेट” रेटिंग बनाए रखी है और इसका टारगेट प्राइस 1,510 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी का FY27 का ग्रोथ आउटलुक काफी अ्चछा बना हुआ है। ब्रोकरेज को डबल-डिजिट P&A ग्रोथ की उम्मीद है। उसका मानना है कि मैकडॉवेल्स रिफ्रेश जैसे प्रोडक्ट को नया रूप देने की पहल का कंपनी को फायदा मिलेगा। वोदका में इनोवेशन,टकीला में नई कैटेगरी बनाने और UK FTA से कंपनी का फायदा होगा।

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जेपी मॉर्गन ने यह भी कहा कि कंपनी के लिए साल की दूसरी छमाही बेहतर रह सकती है, क्योंकि महाराष्ट्र का असर अब खत्म हो रहा है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि धीरे-धीरे मार्जिन में सुधार आएगा,इससे कंपनी की कमाई बढ़ाने में मदद मिलेगी। हालांकि पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स की बढ़ी लागत की वजह से ग्रॉस मार्जिन पर कुछ समय के लिए दबाव बना रह रह सकता। ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि ब्रांड की पहचान मजबूत करने की कोशिशों को बढ़ावा देने के लिए विज्ञापन और प्रमोशन पर ज्यादा खर्च हो सकता है।

उधर भारत-UK ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने पर इंडस्ट्री बॉडीज़ की अच्छी प्रतिक्रिया के बाद इस सेक्टर को लेकर अच्छा माहौल बना है। इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISWAI) ने कहा कि यह एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच व्यापार को मज़बूत करेगा,इंडस्ट्री की ग्रोथ में मदद करेगा और भारत के अल्कोहलिक बेवरेज सेक्टर के लिए नए मौके पैदा करेगा।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

CA की छुट्टी… AI ने भरा इनकम टैक्स रिटर्न! ‘Claude’ के इस वायरल प्रॉम्प्ट पर छिड़ी बहस

ITR Filing with AI: टेक्नोलॉजी और AI का दायरा अब केवल कंटेंट लिखने या कोडिंग करने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब सीधे आपके टैक्स और फाइनेंस से जुड़े जटिल कामों में भी एंट्री कर चुका है। आजकल देश में टैक्स सीजन चल रहा है और इस दौरान कुछ भारतीय प्रोफेशनल्स ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के लिए AI टूल्स का सहारा लेकर सबको चौंका दिया है।

सोशल मीडिया पर कुछ प्रोफेशनल्स ने इसके जबरदस्त अनुभव साझा किए हैं। एक डेटा सिक्योरिटी एनालिस्ट ने एंथ्रोपिक (Anthropic) के एआई टूल ‘क्लॉड’ (Claude) का इस्तेमाल करने के बाद अपना एक्सपीरियंस बताते हुए कहा कि इसे यूज करते वक्त ऐसा महसूस हुआ, ‘जैसे कोई चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) मेरे बगल में ही बैठा हो’।

NRI एग्जीक्यूटिव बोले: ‘चीजें रटने के बजाय मैंने सीखी पूरी प्रक्रिया’

अमेजन के सीनियर एग्जीक्यूटिव अखिल सूद, जो फिलहाल वाशिंगटन में रहते हैं, उन्होंने पहली बार भारत में अपना ITR फाइल करने के लिए AI असिस्टेंट का इस्तेमाल किया। उनके लिए यह प्रयोग केवल ऑटोमेशन तक सीमित नहीं था, बल्कि टैक्स जैसे उलझाऊ प्रोसेस को स्पष्टता से समझना था।

अखिल सूद ने लिंक्डइन पर अपना अनुभव साझा करते हुए लिखा, ‘एक एनआरआई के रूप में टैक्स फाइलिंग हमेशा से ही जरूरत से ज्यादा जटिल लगती रही है। पहले मुझे किसी सीए को ढूंढने, डॉक्यूमेंट्स भेजने, उनके जवाब का इंतजार करने और ऐसी टैक्स शब्दावली को समझने में घंटों बिताने पड़ते थे, जिससे मैं परिचित नहीं था।’

उन्होंने आगे बताया कि इस AI टूल ने न केवल उनके सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी समझाया कि फॉर्म में हर एक फील्ड क्यों है, उसमें क्या जानकारी भरी जानी चाहिए, इनकम की अलग-अलग कैटेगरी कैसे काम करती हैं और सबमिट करने से पहले किन बातों को वेरीफाई करना जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘बिना सोचे-समझे फॉर्म भरने के बजाय, मुझे ऐसा लगा कि मैं वास्तव में इस पूरी प्रक्रिया को सीख रहा हूं।’ इसके अलावा एआई ने टैक्स पोर्टल पर आने वाली दिक्कतों को पहचानने और ग्रीवांस दर्ज करने के तरीके भी सुझाए।

बेंगलुरु के सिक्योरिटी स्पेशलिस्ट ने शेयर किया पूरा ‘AI Prompt’

इस मामले में एक और एडवांस केस बेंगलुरु के इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी स्पेशलिस्ट उद्देश्य कुमार का सामने आया। उन्होंने केवल गाइडेंस ही नहीं ली, बल्कि Claude के डेस्कटॉप ऐप के जरिए पूरी फाइलिंग प्रोसेस को प्रैक्टिकली एग्जीक्यूट कराया।

उद्देश्य के मुताबिक, इस AI टूल ने खुद उनके Form 16 का विश्लेषण किया, उसकी तुलना Annual Information Statement (AIS) से की, डेटा में अंतर को पकड़ा, साल के बीच में नौकरी बदलने के मामले को अच्छे से संभाला, पोर्टल के एरर्स और सेशन टाइमआउट की समस्या को सुलझाया और अंत में रिटर्न को सफलतापूर्वक सबमिट भी कर दिया।

उद्देश्य कुमार ने उस सटीक AI Prompt यानी कमांड को भी शेयर किया, जिसका इस्तेमाल उन्होंने क्लॉड के ‘Chrome MCP’ (मॉडल कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल) के जरिए किया था।

डेटा प्राइवेसी को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

जैसे ही उद्देश्य ने यह पोस्ट शेयर की, सोशल मीडिया यूजर्स ने डेटा की सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एक लिंक्डइन यूजर ने लिखा, ‘आपने अपने दस्तावेज किसी ऐसे सीए के साथ साझा नहीं किए जो शायद उनका दुरुपयोग करना न जानता हो बल्कि आपने उन्हें एक एआई कंपनी के साथ साझा किया है जिसके पास ऐसा करने की पूरी तकनीकी क्षमता है।’ एक अन्य यूजर ने डर जताया कि यह सारा डेटा एआई मॉडल को ट्रेन करने के काम आ सकता है, जिससे भविष्य में प्राइवेसी लीक होने का खतरा है।

इन चिंताओं पर उद्देश्य कुमार ने सफाई देते हुए कहा, ‘आमतौर पर लोग अपना पैन और फॉर्म 16 व्हाट्सएप पर सीए के साथ शेयर कर देते हैं या क्रेडेंशियल्स अनजान पोर्टल्स पर डाल देते हैं। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। क्लॉड मेरे अपने ब्राउजर के अंदर चल रहा था और इस पूरी प्रक्रिया में ‘ह्यूमन-इन-द-लूप’ यानी मैं खुद हर कदम पर नजर रख रहा था।’

क्या कहती है कंपनी की पॉलिसी?

एंथ्रोपिक की पॉलिसी के अनुसार, यूजर्स का डेटा पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड होता है और जब तक यूजर खुद सहमति न दे, तब तक उनके डेटा का इस्तेमाल मॉडल को ट्रेन करने के लिए नहीं किया जाता है।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी: ‘असिस्टेंट’ मानें, ‘रिप्लेसमेंट’ नहीं

टैक्स और तकनीकी जानकारों का मानना है कि एआई का इस्तेमाल रिसर्च या काम को तेज करने के लिए एक सहायक के रूप में तो बेहतरीन है, लेकिन इस पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता। एआई में भ्रम या गलत जानकारी बना देना की समस्या होती है। इसलिए, अंतिम रूप से रिटर्न सबमिट करने से पहले किसी योग्य प्रोफेशनल या सीए से डेटा को री-वेरीफाई करवाना हमेशा सुरक्षित रहता है।

आखिर क्यों AI की तरफ आकर्षित हो रहे हैं लोग?

  • कम माथापच्ची: डॉक्यूमेंट्स शेयर करने, सीए के फॉलो-अप और लंबे इंतजार की पूरी प्रक्रिया एक सिंगल गाइडेड सेशन में सिमट जाती है।
  • सीखने का मौका: केवल फॉर्म भरने के बजाय लोग टैक्स कंप्लायंस की बारीकियों को लाइव सीख पा रहे हैं।
  • कम लागत: साधारण टैक्सपेयर्स जैसे- ITR-1 भरने वाले के लिए यह एक बेहद किफायती और आत्मनिर्भर विकल्प बनता जा रहा है।
  • महत्वपूर्ण समय: यह बदलाव ऐसे समय में देखा जा रहा है जब इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के तहत भारत का टैक्स फ्रेमवर्क एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है, जिसका उद्देश्य फॉर्म की नंबरिंग, डिस्क्लोजर और कंप्लायंस को और ज्यादा सरल बनाना है।

ममता बनर्जी के साथ साये की तरह रहने वाले पुलिस वालों को हटाया, क्या है इनसाइड स्टोरी?

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे राजनीतिक संकट के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने उनके पुराने सुरक्षा अधिकारियों (PSO) को हटाकर नई टीम तैनात की, लेकिन ममता बनर्जी ने नए सुरक्षाकर्मियों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

टीएमसी के मुताबिक, ममता बनर्जी के साथ करीब 20 साल से जुड़े सुरक्षा अधिकारी अचानक हटा दिए गए हैं। इसके बाद उनके कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर फिलहाल कोई आधिकारिक सरकारी सुरक्षा तैनात नहीं है। पार्टी का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दो निजी गार्ड लगाए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी के पांच पीएसओ उस समय से उनके साथ थे जब वह केंद्र सरकार में रेल मंत्री थीं। बाद में 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद इन अधिकारियों को राज्य पुलिस व्यवस्था में शामिल कर लिया गया था। हाल ही में उन्हें उनकी मूल यूनिट में वापस भेजने के निर्देश दिए गए, जबकि कोलकाता पुलिस ने उनकी जगह तीन नए सुरक्षाकर्मी भेजे। ममता ने इन नए अधिकारियों को स्वीकार नहीं किया।

मामला तब चर्चा में आया जब टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ममता बनर्जी के पुराने सुरक्षा अधिकारी हटा दिए गए हैं और उनके घर के बाहर कोई सुरक्षा तैनात नहीं है। उन्होंने कहा कि वह पूरी रात अपने वाहन के साथ घर के बाहर मौजूद रहेंगे, ताकि कोई अनधिकृत व्यक्ति परिसर में प्रवेश न कर सके।

टीएमसी ने इस कदम को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह ममता बनर्जी को अलग-थलग करने और उनकी सुरक्षा को खतरे में डालने की सोची-समझी कोशिश है।

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि किसी पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा राजनीति का नहीं, बल्कि सरकार की संस्थागत जिम्मेदारी का विषय है।

वहीं टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि इतने वरिष्ठ नेता को बिना जानकारी दिए लंबे समय से जुड़े सुरक्षाकर्मियों को हटाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु से पुराने सुरक्षा इंतजाम बहाल करने और ममता के दो पुराने पीएसओ को वापस लाने की मांग की।

टीएमसी का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा समर्थित नई सत्ता व्यवस्था आने के बाद से ममता बनर्जी के आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे कम की गई है। पहले हरिश चटर्जी स्ट्रीट पर लगे बैरिकेड हटाए गए और अब उनके पुराने सुरक्षाकर्मियों को भी हटा दिया गया है।

इसके अलावा, ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर की सुरक्षा भी सरकार बदलने के बाद वापस ले ली गई थी।

फिलहाल इस मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन टीएमसी इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताकर भाजपा और राज्य प्रशासन पर लगातार निशाना साध रही है।

Cotton Production: USDA ने जारी की रिपोर्ट, 2026-27 के ग्लोबल उत्पादन अनुमान पर है कायम

यूएसडीए (USDA) ने अपनी जून की वर्ल्ड एग्रीकल्चर सप्लाई एंड डिमांड एस्टीमेट (WASDE) रिपोर्ट में वर्ष 2026-27 के लिए वैश्विक कपास उत्पादन लगभग 116 मिलियन गांठ अनुमानित है। इसके मुकाबले खपत में बढ़ोतरी (लगभग 121.7 मिलियन गांठ) होने के आसार हैं, जो इसे 6 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा सकती है। मांग में वृद्धि और कम शुरुआती स्टॉक के कारण वैश्विक अंतिम स्टॉक में गिरावट का अनुमान लगाया गया है।

USDA को चीन में मांग बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि कॉटन की मांग बांग्लादेश, पाकिस्तान में गिरी। साउथ कोरिया में कॉटन की मांग गिरी। कॉटन की ग्लोबल खपत मई में 121.69 मिलियन बेल्स (अनुमान) रहा जबकि जून में 121.76 मिलियन बेल्स (अनुमान) रहा।

कॉटन के ओपनिंग स्टॉक पर USDA ने कहा कि मई 2026-27 में 77.27 मिलियन बेल्स (अनुमान) रखा है। जबकि जून के लिए 76.63मिलियन बेल्स (अनुमान) रखा है। जबकि कॉटन के क्लोजिंग स्टॉक पर USDA ने जून के लिए 71.13 मिलियन बेल्स (अनुमान) रखा है।

भारत में कॉटन उत्पादन अनुमान

USDA ने मई का उत्पादन अनुमान कायम रखा है। 2026-27 में 24 मिलियन बेल्स उत्पादन संभव है। 2026-27 में 26 मिलियन बेल्स की खपत संभव है। 1.50 मिलियन बेल्स के एक्सपोर्ट की भी उम्मीद है। 2026-27 में 2.50 मिलियन इंपोर्ट की संभावना है।

15 जुलाई से UK FTA लागू

भारत-UK के बीच FTA 15 जुलाई से लागू होगा । भारत के 99% सामान पर UK में कोई टैक्स नहीं लगेगा । टेक्सटाइल, गारमेंट, केमिकल और बेस मेटल पर जीरो ड्यूटी होगी। अभी टेक्सटाइल, गारमेंट पर करीब 12% ड्यूटी लगती है। केमिकल पर 8% और बेस मेटल पर 10% ड्यूटी है। प्रोसेस फूड पर इंपोर्ट ड्यूटी 70% से घटकर जीरो होगी। मरीन प्रोडक्ट पर UK में इपोर्ट डूयटी 20% से घटकर जीरो होगी। UK के 91% एक्सपोर्ट पर भारत में ड्यूटी में रियायत मिलेगी। UK की व्हीस्की पर भारत में इंपोर्ट ड्यूटी 150% से घटकर 40% पर रहा। UK कार पर भारत में इंपोर्ट ड्यूटी 100% से घटकर 10% तक आएगी। कई चरणों में UK कार पर इंपोर्ट ड्यूटी में कमी आएगी।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Mumbai Water Crisis: मुंबई को पानी सप्लाई करने वाले वॉटर रिजर्वायर में अब सिर्फ 10% स्टॉक! इन चीजों पर तो पड़ने लगा फौरन असर

Mumbai Water Crisis: मुंबई में पीने के पानी की सप्लाई करने वाले सात प्रमुख जलाशयों (वॉटर रिजर्वायर) में पानी का स्टॉक घटकर कुल उपयोगी क्षमता का सिर्फ 10.01 प्रतिशत रह गया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने में हो रही देरी के बीच मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने पानी की भारी किल्लत से निपटने के लिए बड़े और कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पानी की इस भारी कमी का सीधा और फौरन असर मुंबई के कई सेक्टरों पर दिखने लगा है। इसमें कंस्ट्रक्शन से लेकर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और स्विमिंग पूल्स तक शामिल हैं।

जलाशयों में पानी की ताजा स्थिति (बुधवार तक के आंकड़े)

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएमसी के हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को सातों झीलों में कुल उपयोगी भंडारण क्षमता का केवल 10.01 प्रतिशत यानी 144918 मिलियन लीटर पानी उपलब्ध था। हालांकि, यह स्टॉक पिछले दो वर्षों की इसी अवधि की तुलना में थोड़ा बेहतर है। पिछले साल इसी दिन 141510 मिलियन लीटर (9.78%) पानी था। 2024 में यह आंकड़ा 77851 मिलियन लीटर (5.38%) दर्ज किया गया था।

आपको बता दें कि मुंबई को रोजाना करीब 4000 मिलियन लीटर पीने के पानी की सप्लाई करने वाली सातों झीलों की कुल उपयोगी भंडारण क्षमता 14.47 लाख मिलियन लीटर है। वर्तमान में विभिन्न झीलों में पानी की स्थिति इस प्रकार है:-

भातसा (ठाणे जिला- सबसे बड़ा स्रोत): 66,627 मिलियन लीटर (उपयोगी क्षमता का 9.29%)

मोदक सागर: 37,933 मिलियन लीटर (29.42%)

मिडल वैतरणा: 20,008 मिलियन लीटर (10.34%)

विहार (मुंबई के भीतर): 42.11% क्षमता

तुलसी (मुंबई के भीतर): 23.06% क्षमता

(नोट: सातों झीलों में भातसा, अपर वैतरणा, मिडल वैतरणा, मोदक सागर, तानसा, विहार और तुलसी शामिल हैं।)

इन चीजों पर पड़ा फौरन और सीधा असर

पानी के गिरते स्तर को देखते हुए मंगलवार को एक समीक्षा बैठक बुलाई गई। इसके बाद बीएमसी ने पीने के पानी को सुरक्षित रखने के लिए कई बड़े प्रतिबंधों की घोषणा की है। बीएमसी ने निर्माण स्थलों के लिए नए पानी के कनेक्शन जारी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही मौजूदा साइटों को दी जाने वाली सप्लाई में भी कटौती की गई है।

मुंबई में चल रहे सभी स्विमिंग पूल्स और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स के लिए पानी की सप्लाई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। बीएमसी ने औद्योगिक, कमर्शियल और खेल प्रतिष्ठानों को दी जाने वाली पानी की सप्लाई में 20 प्रतिशत की कटौती लागू कर दी है। ये कटौती 17 जून से प्रभावी हो गई है। इसके पहले 15 मई से ही पूरे शहर में 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू है।

सेंट्रल रेलवे, वेस्टर्न रेलवे, आरसीएफ, एचपीसीएल, बीपीसीएल, नेवी, एमआईडीसी और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी जैसे बड़े प्रतिष्ठानों को सलाह दी गई है कि वे अपने परिचालन और माध्यमिक कार्यों के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी का दोबारा उपयोग करें।

रियल एस्टेट और होम डिलीवरी पर संकट के बादल

बीएमसी द्वारा कंस्ट्रक्शन साइट्स के पानी पर रोक लगाने से मुंबई के रियल एस्टेट मार्केट में हड़कंप मच गया है। इससे नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की मंजूरियों और उनकी लॉन्चिंग पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। इससे इस साल पूरे होने वाले हजारों घरों की डिलीवरी समय पर होने को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म ‘एनरॉक’ की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मुंबई में लगभग 1.43 लाख घर बनकर तैयार होने वाले हैं। अगर पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) की बात करें, तो करीब 2.07 लाख घर निर्माण के अंतिम चरण में हैं। एमएमआर में वर्तमान में लगभग 6.86 लाख आवास इकाइयां निर्माणाधीन हैं। इनमें से 75% से अधिक (लगभग 5.15 लाख इकाइयां) अकेले मुंबई में स्थित हैं।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी: रुक सकती है रफ्तार

एनरॉक के मुताबिक इस फैसले का तत्काल असर चल रहे निर्माण कार्यों के बजाय प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग और अप्रूवल पर अधिक महसूस होगा। निर्माण कार्य के लिए साइटें मुख्य रूप से भूजल और गैर-पेय स्रोतों पर निर्भर रहती हैं, जबकि बीएमसी के पानी का उपयोग मुख्य रूप से वहां काम करने वाले मजदूरों के कल्याण और पीने के लिए किया जाता है। इस पाबंदी से कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने की स्थिति और मजदूरों की उत्पादकता प्रभावित होगी, जो पहले से ही वैश्विक संघर्षों के कारण पैदा हुई अनिश्चितता और लेबर शॉर्टेज से जूझ रहे हैं।

यह पाबंदी मुंबई के कुछ खास माइक्रो-मार्केट्स के लिए स्थानीय जोखिम पैदा कर सकती है। इनमें दक्षिण मुंबई, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC), अंधेरी, बोरीवली और मुलुंड शामिल हैं। अगर मानसून की स्थिति और बिगड़ती है और एमएमआर के अन्य नगर निगम भी बीएमसी की राह पर चलते हैं तो पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण जारी सप्लाई चेन व्यवधानों के बीच साल 2026 में होम डिलीवरी पर गंभीर दबाव आ सकता है। यह स्थिति महामारी के दौर की याद दिला सकती है जब योजनाबद्ध घरों में से केवल 46% की ही वास्तविक डिलीवरी हो पाई थी।

नारेडको (NAREDCO) महाराष्ट्र के अध्यक्ष कमलेश ठाकुर ने भी चिंता जताते हुए कहा कि कंक्रीटिंग, क्योरिंग, प्लास्टरिंग और फिनिशिंग जैसे निर्माण कार्य पूरी तरह से पानी की विश्वसनीय आपूर्ति पर निर्भर होते हैं। लंबे समय तक होने वाला व्यवधान प्रोजेक्ट्स के शेड्यूल को प्रभावित कर सकता है, निर्माण लागत बढ़ा सकता है और घरों व इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी में देरी कर सकता है।

मानसून में देरी और अल नीनो का साया

मुंबई में आमतौर पर मानसून 10 जून के आसपास दस्तक दे देता है, लेकिन इस साल इसकी शुरुआत में देरी हुई है। पिछले साल मानसून मई में ही समय से काफी पहले आ गया था। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस बार अल नीनो (El Niño) की स्थिति विकसित होने की संभावना जताई है, जिससे मानसून की रफ्तार और इसके वितरण को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, मौसम विभाग के नवीनतम पूर्वानुमान के मुताबिक अगले कुछ दिनों में मानसून मुंबई पहुंच सकता है जिससे बीएमसी और मुंबईकरों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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UP ने पहली बार 2 लाख करोड़ रुपये के निर्यात का आंकड़ा पार किया, 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बड़ा कदम

उत्तर प्रदेश ने आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने पहली बार 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निर्यात (Export) किया है, जिससे 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के उसके लक्ष्य को मजबूती मिली है। DGCIS के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का निर्यात बढ़कर 2,01,241 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह पिछले साल के 1,86,060 करोड़ रुपये के मुकाबले 8.16 फीसदी ज्यादा है।

खास बात यह है कि यूपी की निर्यात वृद्धि देश के औसत 5.45 फीसदी से काफी बेहतर रही। इससे पता चलता है कि राज्य में मैन्युफैक्चरिंग (प्रोडक्शन), उद्योग और वैश्विक बाजारों तक पहुंच लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक के बाद उत्तर प्रदेश देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य है।

इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के यूपी चैप्टर के चेयरमैन मुकेश सिंह ने कहा कि निर्यात में बढ़ोतरी राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। इससे रोजगार बढ़ेंगे, निवेश आएगा, MSME (छोटे और मध्यम उद्योग) मजबूत होंगे और यूपी के उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर निर्यात लगातार बढ़ता रहा तो यूपी के 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी मदद मिलेगी। ज्यादा निर्यात का मतलब है कि राज्य में बने उत्पादों की मांग बढ़ेगी, फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ेगा, नए रोजगार पैदा होंगे और विदेशी मुद्रा की आमद भी बढ़ेगी। इसका फायदा छोटे उद्योगों, कारीगरों और किसानों तक पहुंचेगा, जो निर्यात से जुड़े कारोबार का हिस्सा हैं।

योगी आदित्यनाथ सरकार भी राज्य की अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दे रही है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP), डिफेंस कॉरिडोर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, डेटा सेंटर और जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं से निर्यात को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

यूपी सरकार के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा कि 2 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए निर्यात को और तेजी से बढ़ाना होगा। सरकार आने वाले वर्षों में निर्यात को 3 लाख करोड़ रुपये से ऊपर ले जाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए नए निर्यात केंद्र बनाए जाएंगे, लॉजिस्टिक्स सुविधाएं बेहतर की जाएंगी, एयर कार्गो नेटवर्क का विस्तार होगा और निर्यातकों के लिए प्रक्रियाएं आसान बनाई जाएंगी।

FICCI यूपी चैप्टर के चेयरमैन मनोज गुप्ता और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल का कहना है कि निर्यात के आंकड़ों में सुधार और बेहतर रिपोर्टिंग व्यवस्था ने भी कई राज्यों की वृद्धि दर बढ़ाने में भूमिका निभाई है।

हालांकि उद्योग जगत का मानना है कि यूपी के सामने अभी कुछ चुनौतियां भी हैं। राज्य के पास समुद्री बंदरगाह नहीं हैं, जिससे माल ढुलाई की लागत तटीय राज्यों की तुलना में अधिक पड़ती है। इसके अलावा, यूपी के छोटे उद्योगों की वैश्विक बाजारों में पहुंच अभी सीमित है और हाई-टेक व इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात भी अन्य बड़े औद्योगिक राज्यों के मुकाबले कम है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ राज्यों में निर्यात में दिखी असाधारण बढ़ोतरी का कारण रिपोर्टिंग सिस्टम और कस्टम वर्गीकरण में बदलाव भी रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश की वृद्धि कई अलग-अलग क्षेत्रों में वास्तविक निर्यात बढ़ने का नतीजा है, जिससे उसने देश के प्रमुख निर्यातक राज्यों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है।

अब निर्यात को आर्थिक विकास का अहम आधार मानते हुए उत्तर प्रदेश अपने उत्पादों की विविधता बढ़ाने, उद्योगों को और प्रतिस्पर्धी बनाने तथा वैश्विक बाजारों से बेहतर जुड़ाव पर जोर देगा। उद्योग जगत का मानना है कि यदि राज्य आने वाले वर्षों में निर्यात में लगातार दो अंकों की वृद्धि बनाए रखता है, तो 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का सपना हकीकत बन सकता है।

Rakesh Bedi: सुपरडुपर हिट फिल्म ‘धुरंधर’ की स्क्रिप्ट PMO से आई थी? राकेश बेदी ने ऐसी अफवाहों पर किया मजेदार रिएक्ट

Rakesh Bedi: जबरदस्त एक्शन और खूनखराबे के बावजूद, रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ ने दर्शकों का दि जीत लिया। इनमें से कई पल ऑनलाइन वायरल भी हुए। अब एक्टर राकेश बेदी ने बताया है कि कॉमेडी का आइडिया उन्हीं का था। उन्होंने यह भी कहा कि डायरेक्टर आदित्य धर शुरू में इस स्पाई थ्रिलर में कॉमेडी शामिल करने को लेकर हिचकिचा रहे थे। एक्टर ने उन लंबे समय से चल रहे दावों पर भी बात की जिनमें कहा जाता रहा है कि ‘धुरंधर’ की स्क्रिप्ट प्रधानमंत्री कार्यालय से आई थी।

बुधवार को राकेश ने नई दिल्ली में ‘अमृत रत्न 2026’ समिट में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने ब्लॉकबस्टर ‘धुरंधर’ फ़्रैंचाइज़ी में अपनी भूमिका के बारे में बात की। बातचीत के दौरान, एक्टर ने बताया कि आदित्य शुरू में इस स्पाई थ्रिलर में कॉमेडी वाले पल शामिल करने को लेकर हिचकिचा रहे थे।

इस अनुभवी एक्टर को ‘धुरंधर’ फ़्रैंचाइज़ी में अपनी परफ़ॉर्मेंस से नई लोकप्रियता मिली है। एक्टर ने एक भारतीय एजेंट, जमील जमाली का किरदार निभाया, जो पाकिस्तान के पॉलिटिकल सिस्टम में घुसपैठ करने के बाद वहां राजनेता बन जाता है। यह बात कि वह असल में एक भारतीय एजेंट था, फ़िल्म के क्लाइमेक्स तक छिपी रखी गई, जिससे यह कहानी के सबसे बड़े सरप्राइज़ में से एक बन गया। राकेश मानते हैं कि उन्हें शुरू से ही इस किरदार के अंजाम और ट्विस्ट के बारे में पता था।

पीछे मुड़कर देखते हुए राकेश ने कहा, “जब मैंने स्क्रिप्ट दो-तीन बार पढ़ी, तो मुझे एहसास हुआ कि यह बहुत तनावपूर्ण फ़िल्म है – न सिर्फ़ तनावपूर्ण, बल्कि बहुत गंभीर भी। फिर मुझे लगा कि एक एक्टर के तौर पर – क्योंकि मेरा झुकाव स्वाभाविक रूप से कॉमेडी की तरफ़ है और मेरा दिमाग़ मज़ाक-मस्ती की ओर ज़्यादा जाता है – मैं कुछ ऐसे पल देख पा रहा था जहां हम थोड़ा कॉमिक रिलीफ (हल्का-फुल्का मज़ाक) डाल सकते थे। इसलिए मैंने आदित्य से कहा, ‘मुझे कुछ ऐसी जगहें दिख रही हैं जहां हम थोड़ा ह्यूमर जोड़ सकते हैं। क्या मैं कोशिश करूं?’ उन्होंने जवाब दिया, ‘राकेश जी, अभी कुछ कहना मुश्किल है। देखते हैं कि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं और इस पर काम करते हैं, चीज़ें कैसे आगे बढ़ती हैं।’ शुरू में तो वे थोड़े हिचकिचा रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे हम आगे बढ़े, उन्हें भी मज़ा आने लगा और मुझे भी मज़ा आने लगा।”

बातचीत के दौरान, राकेश से पूछा गया कि उन्होंने फिल्म में कॉमेडी जोड़ने के लिए कहां से सुझाव दिए, जिसके बाद उन्होंने अपना डॉयलॉग सुनाया, “तुम्हारे अंडकोष बहुत सफेद हैं”, जो धुरंधर फिल्म के एक सीन में बत्तखों के संदर्भ में बोला गया था।

इसके बाद, राकेश ने उन दावों का खंडन किया कि धुरंधर की पटकथा प्रधानमंत्री कार्यालय से आई थी। अभिनेता ने कहा, “अब ये लाइन कोई नहीं लिख सकता। जब ये फिल्म हिट हुई तो कुछ लोगों ने कहा धुरंधर की स्क्रिप्ट जो है वो पीएमओ से लिख कर आती है। मैंने कहा बताओ पीएमओ में कौन सा ऐसा आदमी है जो ये लाइन लिख सकता है। ऐसा सोच भी नहीं सकता कोई।” फिल्म हिट हो गई, कुछ लोगों ने दावा किया कि धुरंधर की स्क्रिप्ट सीधे प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ) से आई थी। मैंने कहा, ‘मुझे बताओ, पीएमओ में कौन इस तरह की पंक्ति लिख सकता है?’

हालांकि इन फ़िल्मों की कहानी कहने के शानदार अंदाज़ की तारीफ़ हुई, लेकिन कई लोगों ने शिकायत की कि इनमें पिछली सरकारों की उपलब्धियों को कम करके दिखाया गया और BJP सरकार को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।

‘धुरंधर’ 5 दिसंबर, 2025 को और ‘धुरंधर 2’ इस साल 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी। इन दोनों फ़िल्मों में रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन, राकेश बेदी, गौरव गेरा और दानिश पंडोर ने काम किया है। पहली फ़िल्म ने दुनिया भर में ₹1307 करोड़ कमाए, जबकि इसके सीक्वल ने ₹1790 करोड़ से ज़्यादा की कमाई की है।

ये फ़िल्में जसकीरत सिंह रंगी (उर्फ़ हमज़ा अली मज़ारी) की कहानी बताती हैं, जिन्हें पाकिस्तान के लियारी में एक आतंकी गुट को खत्म करने के लिए भेजा जाता है। इस काम को पूरा करने के लिए वे बलोच गैंग में घुसपैठ करते हैं, लियारी के एक नेता की बेटी से शादी करते हैं और वहाँ के समाज का हिस्सा बन जाते हैं। अब ये दोनों फ़िल्में दुनिया भर में स्ट्रीम हो रही हैं।

BitCoin Crash: 8 ही महीने में 50% टूटा बिटकॉइन, इन 4 वजहों से क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार

BitCoin Crash: क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार अब भी मचा हुआ है। मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो बिटकॉइन रिकॉर्ड हाई से करीब 50% नीचे आ चुका है। बाकी भी क्रिप्टो की हालत अच्छी नहीं है और अधिकतर क्रिप्टो अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। बिटकॉइन की बात करें तो 7 अक्टूबर 2025 को $1.26 लाख के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के करीब आठ महीने में यह करीब 50% टूटकर $64 हजार के नीचे आ गया। सिर्फ यही नहीं, इस महीने तो यह $60 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी नीचे की तरफ तोड़ दिया था जो इसके लिए पिछले डेढ़ साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

BitCoin Crash: इन 4 वजहों से मचा हाहाकार

अमेरिकी नीतियों के सपोर्ट से बदलकर झटका देने वाले में बदलाव

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की क्रिप्टो समर्थक नीतियों ने बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसीज की चमक बढ़ा दी थी और संस्थागत निवेशकों ने जमकर पैसा डाला। हालांकि टैरिफ वार और अमेरिका की ईरान से जंग ने निवेशकों को डरा दिया और वे क्रिप्टो जैसे रिस्की एसेट्स से पैसे निकालकर सेफ एसेट्स में पैसे डालने लगे।

बिटकॉइन के सबसे बड़े निवेशकों में शुमार माइकल का बेयरेश रुझान

माइकल सायलर (Michael Saylor) ने साल 2020 में अपनी कंपनी स्ट्रैटेजी की नकदी का बड़ा हिस्सा बिटकॉइन में निवेश करना शुरू किया और स्ट्रैटेजी ने इसके बाद लगातार बिटकॉइन खरीदना जारी रखा और यह दुनिया के सबसे बड़े कॉरपोरेट बिटकॉइन होल्डर कंपनियों में शामिल हो गई। हालांकि ‘स्ट्रैटेजी’ ने साल 2022 के बाद से पहली बार अपनी होल्डिंग का कुछ हिस्सा बेचा तो हड़कंप मच गया। कुछ हफ्ते पहले उन्होंने $25 लाख के 32 बिटकॉइन बेचे तो बिटकॉइन टूटकर $72 हजार के नीचे आ गया था। इससे पहले स्ट्रैटेजी ने साल 2022 में 704 बिटकॉइन %$18 हजार के भाव पर बेचे थे।

SpaceX का जादू

हाल ही में स्पेसएक्स ने दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया था। एआई पर इसकी आक्रामक स्ट्रैटेजी ने निवेशकों को आकर्षित किया और इसके चलते अनुमान लगाया जा रहा है कि क्रिप्टो मार्केट का भी कुछ पैसा इसमें आया। स्पेसएक्स ने दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क (Elon Musk) को और अमीर बनाया और दुनिया के पहले और इकलौते ट्रिलेनियर बन गए।

BitCoin ETF से ताबड़तोड़ निकासी

पिछले महीने बिटकॉइन ईटीएफ से $200 करोड़ से अधिक यानी करीब ₹16 हजार करोड़ की निकासी ने क्रिप्टो मार्केट पर दबाव डाला।

SpaceX ने Elon Musk को बनाया ट्रिलेनियर, लेकिन अब लटकी यह तलवार

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि क्रिप्टो मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।