Landslide in Uttarakhand: उत्तराखंड में बारिश का कहर, भूस्खलन से केदारनाथ-बद्रीनाथ मार्ग प्रभावित

Landslide in Uttarakhand: उत्तराखंड के कई इलाकों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन जैसी घटनाएं हुईं, जिससे ट्रैफिक तो बाधित हुआ ही साथ ही देहरादून सहित कई जिलों में मौसम अलर्ट जारी कर दिया गया। वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी दी है। बता दें कि लगातार बारिश और पहाड़ों से गिरते मलबे के कारण कई प्रमुख सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई है, जिनमें चमोली जिले का बद्रीनाथ नेशनल हाईवे और रुद्रप्रयाग जिले का केदारनाथ यात्रा मार्ग शामिल है।

इस भूस्खलन के कारण केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भारी मात्रा में मलबा और पत्थर जमा हो गए, जिससे अधिकारियों को कुछ समय के लिए आवाजाही को नियंत्रित करना पड़ा। मलबे को हटाने और तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ता बहाल करने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के जवानों और स्थानीय अधिकारियों को तैनात किया गया।

इसके अलावा, चमोली जिले में भी बद्रीनाथ नेशनल हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ, जब अस्थिर पहाड़ियों से पत्थर और मलबा गिर गया। इसके बाद सड़क साफ करने वाली टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और रास्ता खोलने का काम शुरू किया, ताकि राज्य के इस महत्वपूर्ण धार्मिक और परिवहन मार्ग पर आवागमन फिर से सुचारू हो सके।

बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन प्रभावित

बारिश की इस नई शुरुआत ने उत्तराखंड के कई हिस्सों में जनजीवन को प्रभावित किया है। प्रशासन ने नदियों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और संवेदनशील बस्तियों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है।

मानसून से जुड़ी आपदाओं की आशंका के बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को देहरादून में राज्य-स्तरीय प्री-मानसून मॉक ड्रिल का जायजा लिया और अधिकारियों को आपदा से निपटने की तैयारियों को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने आपात स्थिति से निपटने के लिए तेज प्रतिक्रिया प्रणाली, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया।

समीक्षा बैठक के दौरान धामी ने कहा, “आपदा प्रबंधन सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।” उन्होंने अधिकारियों से तैयारी, जोखिम कम करने और बचाव कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।

मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

वहीं, IMD ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भारी बारिश जारी रह सकती है, जिससे पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने और अचानक बाढ़ आने का खतरा बढ़ सकता है।

जिसको देखते हुए अधिकारियों ने केदारनाथ, बद्रीनाथ और चार धाम के अन्य तीर्थस्थलों की यात्रा करने वाले लोगों और तीर्थयात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की जानकारी और सड़कों की स्थिति के बारे में पता कर लें।

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JEE-NEET Exam: बदलने वाला है जेईई-नीट में दाखिले का तरीका, 12वीं के नंबरों को मिल सकता है 50% वेटेज

JEE-NEET Exam: जेईई और नीट परीक्षा के लिए तैयारी करने वाले छात्रों को सरकार के इस फैसले से काफी राहत मिल सकती है। सरकार देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत आने वाले समय में जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षा की मेरिट लिस्ट में 12वीं कक्षा के नंबरों की निर्णायक भूमिका हो सकती है। बोर्ड के नंबरों को मेडिकल और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 50% वेटेज दिया जा सकता है। समझा जा रहा है, इस कदम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर प्रदर्शन का दबाव कम होगा और स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो सकेगी।

केंद्र सरकार ने पिछले साल शिक्षा मंत्रालय के तहत 9 सदस्यों की एक समिति का गठन किया था। इसे कोचिंग पर लगातार बढ़ती निर्भरता और डमी स्कूलों के चलन पर निगरानी के लिए किया गया था। ये समिति अब जेईई-नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षा के जरिए मेडिकल-इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश की व्यवस्था में संभावित सुधारों की समीक्षा कर रही है। इस समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्र सरकार अंतिम निर्णय लेगी। उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में यह रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाएगी।

अभी जहां, मेडिकल में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स को नीट यूजी परीक्षा देनी होती है। वहीं, इंजीनियरिंग के लिए स्टूडेंट्स जेईई देते हैं। इन एंट्रेंस एग्जाम में मिले स्कोर और कट-ऑफ मार्क्स के आधार पर पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। हालांकि, छात्रों को मेडिकल-इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने के लिए मिनिमम क्वालिफाइंग क्राइटेरिया भी पूरा करना होता है।

नीट और जेईई में बड़े बदलाव की तैयारी

यह प्रस्ताव पूरे देश में परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर बार-बार उठ रही चिंताओं के बाद आया है। मूल्यांकन की गलतियों और कथित पेपर लीक ने मौजूदा प्रवेश व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अब ऐसे तरीकों की जांच की जा रही है, जिनसे निष्पक्षता में सुधार हो सके और लोगों का भरोसा मजबूत हो सके। न्यूज एजेंसी पीटीआई को सूत्रों के हवाले से ये जानकारी मिली है। सूत्रों ने बताया, “जिन बदलावों पर विचार किया जा रहा है, उनमें एडमिशन या मेरिट लिस्ट तैयार करने में बोर्ड के नंबरों को 50% वेटेज देना, कोचिंग सेंटरों पर छात्रों की निर्भरता कम करने के लिए प्रवेश परीक्षाओं के सिलेबस को स्कूल के सिलेबस से बेहतर तरीके से जोड़ना, परीक्षा के लिए कई मौके देना और धीरे-धीरे कंप्यूटर आधारित ऑन-डिमांड टेस्ट की तरफ बढ़ना शामिल है।

सूत्रों ने कहा कि प्रस्ताव सिर्फ एक परीक्षा पर निर्भरता कम करने की कोशिश करता है। छात्रों को शैक्षिक प्रदर्शन के आकलन से फायदा हो सकता है। प्रवेश के दौरान बोर्ड परीक्ष के रिजल्ट भी उतने ही महत्वपूर्ण हो सकते हैं। प्रवेश परीक्षा का रोल अहम बना रहेगा, लेकिन उनका ओवरऑल असर तुलना में कम हो सकता है।

अभी क्या है प्रवेश व्यवस्था

अभी, मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रोग्राम में प्रवेश मुख्य रूप से प्रवेश परीक्षा के स्कोर के आधार पर होता है। छात्रों को बोर्ड एग्जाम में क्वालिफाइंग मार्क्स लाने होते हैं। वे बोर्ड मार्क्स अभी फाइनल एडमिशन मेरिट के बजाय एलिजिबिलिटी तय करते हैं। प्रस्तावित बदलाव इस लंबे समय से चले आ रहे एडमिशन फ्रेमवर्क को बदल सकते हैं। अगर इसे लागू किया जाता है, तो एकेडमिक कंसिस्टेंसी और एंट्रेंस परफॉर्मेंस, दोनों ही सिलेक्शन पर असर डालेंगे।

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PNB Q1 Update: सरकारी बैंक का ग्लोबल बिजनेस 10% बढ़ा, डिपॉजिट और लोन में भी उछाल

PNB Q1 Update: सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने गुरुवार (2 जुलाई) को जून तिमाही का बिजनेस अपडेट जारी किया। बैंक का ग्लोबल बिजनेस 30 जून 2026 तक सालाना आधार पर 10.32% बढ़कर 29,99,876 करोड़ रुपये पहुंच गया। बैंक ने कहा कि यह बढ़ोतरी डिपॉजिट और एडवांस (लोन) में लगातार ग्रोथ से हुई है।

डिपॉजिट और लोन दोनों में बढ़ोतरी

30 जून 2026 तक बैंक का ग्लोबल डिपॉजिट 16,70,180 करोड़ रुपये रहा। वहीं, ग्लोबल एडवांस बढ़कर 12,05,763 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। घरेलू कारोबार की बात करें तो डोमेस्टिक डिपॉजिट 12,75,036 करोड़ रुपये और डोमेस्टिक एडवांस 11,92,950 करोड़ रुपये रहा।

घरेलू कारोबार भी बढ़ा

बैंक का डोमेस्टिक बिजनेस बढ़कर 28,75,943 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, ग्लोबल क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेश्यो 30 जून 2026 तक 73.92% रहा।

मार्च 2026 के मुकाबले भी बैंक का कारोबार बढ़ा है। इस दौरान ग्लोबल बिजनेस में 1.02% और डोमेस्टिक बिजनेस में 1.19% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, ग्लोबल डिपॉजिट और एडवांस क्रमशः 1.28% और 1.31% बढ़े।

सालाना आधार पर कैसी रही ग्रोथ?

एक साल पहले की तुलना में डोमेस्टिक डिपॉजिट में 12.85% और डोमेस्टिक एडवांस में 11.74% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, बैंक ने कहा कि ये आंकड़े अस्थायी (Provisional) हैं। स्टैच्यूटरी सेंट्रल ऑडिटर्स के रिव्यू के बाद इनमें बदलाव हो सकता है।

किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?

पिछले महीने PNB के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO अशोक चंद्र ने कहा था कि बैंक आगे भी रिटेल, एग्रीकल्चर और MSME (RAM) लोन पर खास ध्यान देगा। इसके साथ ही CASA (करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट) डिपॉजिट बढ़ाने, डिजिटलीकरण और ग्राहक सेवा पर भी फोकस रहेगा।

उन्होंने कहा कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर मजबूत बैलेंस शीट और पर्याप्त पूंजी के दम पर देश की बढ़ती कर्ज जरूरतों को पूरा करने की अच्छी स्थिति में है।

RAM पोर्टफोलियो और CASA में सुधार

31 मार्च 2026 तक बैंक का RAM (Retail, Agriculture and MSME) पोर्टफोलियो बढ़कर 6.76 लाख करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 6.03 लाख करोड़ रुपये था। यानी इसमें 12% की बढ़ोतरी हुई। घरेलू एडवांस में RAM सेगमेंट की हिस्सेदारी 56.6% रही।

वहीं, CASA रेश्यो 31 मार्च 2026 तक 37% था। बैंक के करंट अकाउंट डिपॉजिट 79,294 करोड़ रुपये और सेविंग अकाउंट डिपॉजिट 5.30 लाख करोड़ रुपये रहे।

शाखाओं का विस्तार जारी रहेगा

अशोक चंद्र ने कहा कि बैंक आने वाले समय में भी अपनी शाखाओं का विस्तार जारी रखेगा। ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं देना बैंक की प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने कहा कि PNB विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में भी अपनी अहम भूमिका निभाएगा। फिलहाल देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक PNB के पास 10,324 शाखाओं का नेटवर्क है।

गुरुवार को PNB का शेयर 0.51% की गिरावट के साथ 106.95 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 14.75% गिरा है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vedanta Oil and Gas share: वेदांता ऑयल के शेयरों की बुलेट जैसी रफ्तार, जानिए क्या है एनालिस्ट्स की राय

Vedanta Oil and Gas share: वेदांता ऑयल एंड गैस के शेयरों में 2 जुलाई को 17 फीसदी उछाल आया। शेयरों में लगातार दूसरे दिन तेजी दिखी। एक दिन पहले शेयर का भाव 20 फीसदी चढ़ा था, जिसके बाद अपर सर्किट लग गया था। बीते दो दिनों में यह शेयर करीब 37 फीसदी चढ़ चुका है।

15 जून को लिस्ट हुआ था शेयर

गुरुवार को वेदांता ऑयल एंड गैस का शेयर एनएसई पर 45.69 रुपये पर पहुंच गया। 15 जून को यह शेयर एनएसई पर 38 रुपये और बीएसई पर 39 रुपये पर लिस्ट हुआ था। गुरुवार को 45 रुपये की कीमत का मतलब है कि यह शेयर एनएसई में अपने लिस्टिंग प्राइस से 20 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है।

ग्रोथ के लिए कंपनी का बड़ा प्लान

ब्रोकरेज फर्म यस सिक्योरिटीज के एनालिस्ट्स का कहना है कि कंपनी ने एनालिस्ट मीट में प्रोडक्शन बढ़ाने, रिजर्व को बढ़ाने और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी बढ़ाने के बारे में विस्तार से बताया। कंपनी का मानना है कि पूरे राजस्थान, कोस्टल एसेट्स, उत्तरपूर्व भारत और डीपवाटर में कंपनी के लिए ग्रोथ की काभी संभावनाएं हैं। इसे ऑयल रिकवरी प्रोग्राम पर सरकार के बढ़ते फोकस का भी फायदा मिलेगा।

ऑपरेटिंग खर्च बढ़ाने पर फोकस

पीएल कैपिटल के एनालिस्ट्स का कहना है कि वेदांता् ऑयल FY29 तक उत्पादन बढ़ाकर दोगुना करना चाहती है। कंपनी का फोकस ऑपरेटिंग खर्च घटाने पर भी है। FY26 में यह 16.5 डॉलर प्रति बैरल था। कंपनी इसे घटाकर 10-13 डॉलर प्रति बैरल तक लाना चाहती है। एनालिस्ट्स का कहना है कि कंपनी ने एसेट-लेवल रोडमैप के बारे में बताया है। शॉर्ट टर्म में कई फैक्टर्स कंपनी को प्रोडक्शन बढ़ाने में हेल्पफुल हो सकते हैं।

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1 जुलाई को T2T से बाहर आया शेयर

वेदांता एल्युमीनियम, वेदांता आयरन एंड स्टील, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता पावर के शेयर 15 जून को स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हुए थे। पहले 10 कारोबारी दिनों के लिए इन्हें टी2टी सेगमेंट में डाला गया था। T2T सेगमेंट में शामिल शेयरों में हर ट्रांजेक्शन पर डिलीवरी जरूरी होती है। इन शेयरों में इंट्रा-डे बाइंग और सेलिंग की इजाजत नहीं होती है। शेयर की कीमत चढ़ने या उतरने की स्थिति में 5 फीसदी पर ही सर्किट लग जाता है। 1 जुलाई को ये शेयर टी2टी से बाहर आ गए।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

देश में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिलने वाले फ्री राशन का चावल बदल गया, इसे लेकर हो गया फाइनल फैसला

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत मुफ्त राशन पाने वाले देश के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने राशन में दिए जाने वाले चावल की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए एक बड़े सुधार को मंजूरी दे दी है। लगभग तीन दशकों में पहली बार सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आपूर्ति किए जाने वाले चावल के क्वालिटी स्पेसिफिकेशन्स में संशोधन किया है। इस फैसले के बाद अब लाभार्थियों को उनके मौजूदा कोटे में बिना किसी कटौती के, बहुत कम टूटे हुए दानों वाला बेहतर और उच्च गुणवत्ता का चावल दिया जाएगा।

चावल के नियमों में क्या हुआ बदलाव?

मंजूर की गई नई नीति के तहत राशन के चावल में टूटे हुए दानों के प्रतिशत को भारी मात्रा में घटा दिया गया है। पीएमजीकेएवाई के तहत मिलने वाले कच्चे चावल में अब टूटे हुए दानों की मात्रा अधिकतम 10% तक ही हो सकेगी। अब तक इसके लिए अधिकतम 25% की सीमा तय थी। उबले हुए चावल में अब टूटे हुए दानों की मात्रा अधिकतम 5% तक ही होगी जबकि पहले इसकी मौजूदा सीमा 16% तक निर्धारित थी।

खरीफ सीजन 2027-28 तक चरणबद्ध तरीके से होगा लागू

बेहतर गुणवत्ता वाले इस चावल की खरीद तुरंत शुरू कर दी जाएगी। सभी धान खरीद वाले राज्यों में इसे खरीफ विपणन सीजन (KMS) 2027-28 तक चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। इसी तरह लाभार्थियों के बीच इस सुधारे गए चावल का वितरण भी चरणबद्ध तरीके से होगा ताकि सभी राज्यों में यह बदलाव सुचारू रूप से लागू हो सके।

80 करोड़ लाभार्थियों को क्या होगा फायदा?

सरकार का दावा है कि इस फैसले से 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मिलने वाले अनाज की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा। लाभार्थियों को ऐसा चावल मिलेगा जिसके दाने साबुत और बेहतर होंगे, दिखने में अच्छे होंगे और जिन्हें उपभोक्ता आसानी से पसंद कर सकेंगे। मिलिंग के दौरान निकलने वाले टूटे हुए चावल को अलग कर दिया जाएगा और उसका इस्तेमाल दूसरे उत्पादक और औद्योगिक काम में किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सिर्फ बेस्ट कैटिगरी का खाने योग्य चावल ही गरीबों तक पहुंचे।

सरकार को सालाना 2161 करोड़ की होगी बचत

सरकार के दावे के मुताबिक इस नीतिगत सुधार से राशन प्रबंधन की परिचालन दक्षता बढ़ेगी और सरकार को भारी वित्तीय बचत होगी। टूटे हुए चावल की नीलामी सीधे मिलर्स के परिसरों से की जाएगी। इससे परिवहन, भंडारण, और हैंडलिंग की लागत कम होगी। टूटे चावल को एचडीपीई बैगों में स्टोर किया जाएगा, जिससे जूट के बोरों की आवश्यकता कम होगी। इन सब बदलावों से लॉजिस्टिक्स, स्टोरेज और पैकेजिंग की लागत घटने से सरकार को सालाना लगभग 2161 करोड़ रुपये की बचत होगी। इसके साथ ही टूटे चावल की बिक्री से अतिरिक्त राजस्व भी जेनरेट होगा। इससे खाद्य सब्सिडी का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।

कई राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट रहा सफल

कैबिनेट से मंजूरी मिलने से पहले इस योजना को देश के कई राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर परख लिया गया है। हरियाणा, आंध्र प्रदेश, पंजाब, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में इसका सफल क्रियान्वयन किया गया। इससे साबित हुआ कि बड़े पैमाने पर इस बेहतर क्वालिटी के चावल का उत्पादन व्यावहारिक रूप से संभव है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत तैयार किए गए इस बेहतर चावल की आपूर्ति भी अब लाभार्थियों को की जाएगी।

राशन प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाएगा QR-Code

राशन वितरण प्रणाली में किसी भी तरह की गड़बड़ी या लीकेज को रोकने के लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा। चावल के बोरों पर क्यूआर-कोड टैगिंग की जाएगी। इस क्यूआर-कोड की मदद से पूरी सप्लाई चेन में चावल के मूवमेंट को शुरू से अंत तक ट्रैक किया जा सकेगा। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और इन्वेंट्री मैनेजमेंट को मजबूती मिलेगी। सरकार का कहना है कि उसने हर पात्र परिवार के लिए खाद्य सुरक्षा निश्चित करने के बाद अब गुणवत्ता के साथ खाद्य सुरक्षा हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। दावा किया जा रहा है कि इस ऐतिहासिक फैसले से गरीब परिवारों को सम्मान के साथ बेहतर गुणवत्ता का अनाज मिल सकेगा।

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क्या क्रूड ऑयल की कीमतें अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं?

क्रूड ऑयल की कीमतों में बीते कुछ हफ्तों में तेज गिरावट आई है। यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव गिरकर 68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इसकी वजह अमेरिका-ईरान में डील है। इस डील की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल गया है, जिससे ऑयल टैंकर्स की आवाजाही शुरू हो गई है। इससे क्रू़ड की सप्लाई बढ़ी है और कीमतें गिरी हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड में गिरावट सीमित रह सकती है। इसकी वजह यह है कि दुनिया के कई देशों का स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व काफी घट गया है। अब फोकस इस रिजर्व को फिर से पहले के लेवल पर पहुंचाने पर होगा। इससे क्रूड की कीमतों में ज्यादा गिरावट का अनुमान नहीं है।

चॉइस ब्रोकिंग में टेक्निकल रिसर्च के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर माकदा के मुताबिक, तकनीकी रूप से क्रूड की कीमतों के बॉटम यानी सबसे निचले स्तर के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, “चार्ट अभी पॉजिटिव रिवर्सल या शॉर्ट कवरिंग का संकेत नहीं दे रहा है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि मार्केट को क्रूड का बॉटम मिल गया है।”

उन्होंने कहा कि क्रू़ड ऑयल में बीते महीनों में उछाल की मुख्य वजह इसकी सप्लाई में कमी थी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल टैंकर्स की आवाजाही नहीं होने की वजह से क्रूड ऑयल की कमी हो गई थी। अब स्थिति बदल गई है। उन्होंने कहा कि WTI Crude के लिए अगला सपोर्ट 65 डॉलर प्रति बैरल पर है। इस लेवल के टूटने पर बेयरिश मोमेंटम दिख सकता है।

क्रूड की कीमतों की दिशा को लेकर एक्सपर्ट्स की एक राय नहीं है। ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के भाविक पटेल ने कहा कि अभी क्रूड की कीमतों के बॉटम के बारे में कुछ कहना मुश्किल है। हालांकि, कीमत गिरकर अमेरिका-ईरान की लड़ाई के पहले के स्तर पर आ गई है। लेकिन, क्रूड की सप्लाई सामान्य होने को लेकर बाजार की उम्मीद ज्यादा आशावादी लगती है।

माकदा का कहना है कि अमेरिका-ईरान में लड़ाई की वजह से क्रूड की ग्लोबल इनवेंट्री में काफी कमी आई है। OECD कमर्शियल फ्यूल इनवेंट्रीज गिरकर 2003 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। यूएस स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) भी 1983 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है।

Adani Enterprises QIP: अदाणी एंटरप्राइजेज ने लॉन्च किया QIP, 3034 रुपये का फ्लोर प्राइस तय

Adani Enterprises QIP: अदाणी एंटरप्राइजेज ने 2 जुलाई को क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) लॉन्च करने का ऐलान किया। कंपनी ने इसके लिए 3,034.68 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। यह फ्लोर प्राइस कंपनी के मौजूदा बाजार भाव 3,165 रुपये प्रति शेयर से करीब 4% कम है।

इस इश्यू के लिए SBI Capital Markets, Jefferies India, ICICI Securities और IIFL Capital Services को बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) बनाया गया है। QIP का अंतिम इश्यू प्राइस इनसे चर्चा के बाद तय होगा।

IHC करेगी $11 अरब का निवेश

इस बीच, अदाणी ग्रुप के लिए एक और बड़ी खबर आई है। अबू धाबी की International Holding Company (IHC) ओडिशा में अदाणी ग्रुप के साथ मिलकर 11.5 अरब डॉलर (करीब 98,000 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। राज्य सरकार के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।

अगर यह प्रोजेक्ट तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो यह भारत के मेटल सेक्टर का अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश हो सकता है।

50-50 की हिस्सेदारी वाला जॉइंट वेंचर

दोनों कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत IHC और अदाणी ग्रुप की 50-50% हिस्सेदारी होगी।

इस जॉइंट वेंचर के तहत एल्युमिना रिफाइनरी, एल्युमिनियम स्मेल्टर, कैप्टिव पावर प्लांट और डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनाया जाएगा। इसके साथ ओडिशा का सबसे बड़ा एल्युमिनियम कॉम्प्लेक्स भी बनेगा। इसकी उत्पादन क्षमता भी काफी ज्यादा होगी।

  • 40 लाख टन (4 MTPA) एल्युमिना
  • 20 लाख टन (2 MTPA) एल्युमिनियम
  • 10 लाख टन (1 MTPA) डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम प्रोडक्ट्स

53,500 लोगों को मिलेगा रोजगार

इस प्रोजेक्ट से बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा होंगे। राज्य सरकार के अधिकारी के मुताबिक, कुल 53,500 लोगों को रोजगार मिलेगा। इनमें 35,000 नौकरियां निर्माण के दौरान मिलेंगी। प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद 18,500 लोगों को स्थायी रोजगार मिलेगा।

अभी एल्युमिनियम कारोबार में नहीं है अदाणी ग्रुप

अदाणी ग्रुप अभी एल्युमिनियम बनाने के कारोबार में नहीं है। हालांकि, कंपनी पहले ही ओडिशा में एल्युमिना रिफाइनरी और एल्युमिनियम प्रोजेक्ट लगाने की योजना का ऐलान कर चुकी है।

वहीं, अदाणी एंटरप्राइजेज के पास गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट कॉपर स्मेल्टर है। इसे बनाने में करीब 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया गया है।

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iPhone Ultra की एंट्री तय? लॉन्च से पहले डिजाइन, कैमरा और कीमत हुई लीक

Apple के पहले फोल्डेबल iPhone को लेकर कई सालों से चर्चा हो रही है और अब ऐसा लगता है कि यह इंतजार जल्द ही खत्म हो सकता है। हालांकि क्यूपर्टिनो की इस टेक कंपनी ने अभी तक इस डिवाइस के बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन नई लीक और रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कंपनी अगले तीन महीनों में iPhone 18 Pro लाइनअप के साथ लंबे समय से चर्चा में रहे iPhone Ultra को लॉन्च कर सकती है। अब आइए जानते हैं इसके लॉन्च टाइमलाइन, स्पेसिफिकेशन्स, डिजाइन, कैमरा अपग्रेड, कीमत और लेटेस्ट लीक की पूरी जानकारी।

Apple iPhone Ultra: अनुमानित स्पेसिफिकेशन्स और डिजाइन

हाल की लीक पर यकीन करें तो, iPhone Ultra में अंदर की तरफ 7.8-इंच का फोल्डेबल OLED डिस्प्ले और बाहर की तरफ 5.5-इंच की स्क्रीन हो सकती है। उम्मीद है कि US की यह टेक कंपनी इस डिवाइस में अपनी अगली जनरेशन का A20 Pro चिपसेट इस्तेमाल करेगी, जिसके साथ बेहतर कनेक्टिविटी के लिए 12GB LPDDR5X RAM और Apple का अपना C2 मॉडेम दिया जाएगा।

जाने-माने लीकर ‘Jam Online’ की ओर से हाल ही में शेयर किए गए डमी यूनिट्स से पता चलता है कि Apple इसे खोलने पर काफी चौड़ा डिजाइन दे सकता है, जिससे यूजर्स को पतली किताब जैसे फोल्डेबल के बजाय iPad mini जैसा एक्सपीरियंस मिल सकता है।

कैमरा की बात करें तो, लीक्स से संकेत मिलता है कि iPhone बनाने वाली कंपनी इस डिवाइस में डुअल 48MP का रियर कैमरा दे सकती है, जबकि कवर डिस्प्ले और अंदर की फोल्डिंग स्क्रीन, दोनों पर ही खास सेल्फी कैमरे दिए जा सकते हैं। अन्य फीचर्स में USB Type-C पोर्ट, स्टीरियो स्पीकर और पावर बटन के नीचे लगा ‘कैमरा कंट्रोल’ बटन शामिल हो सकता है।

भारत में Apple iPhone Ultra की लॉन्च डेट और कीमत (अनुमानित)

ब्लूमबर्ग के मार्क गुरमन के अनुसार, Apple का एनुअल सितंबर हार्डवेयर इवेंट 9 सितंबर, 2026 को हो सकता है। चूंकि US में लेबर डे 7 सितंबर को पड़ता है, इसलिए गुरमन का मानना ​​है कि Apple के मुख्य इवेंट के लिए 9 सितंबर का समय सबसे सही रहेगा। इसी इवेंट में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के साथ iPhone Ultra को भी आधिकारिक तौर पर पेश किया जा सकता है।

मौजूदा लीक्स के मुताबिक, फोल्डेबल iPhone भारत में ₹1,99,990 से ₹2,29,990 के बीच लॉन्च हो सकता है। अगर यह कीमत सही साबित होती है, तो यह Apple के अब तक के सबसे महंगे स्मार्टफोन्स में से एक होगा।

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UP RERA ने 1278 करोड़ के 10 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, नोएडा, लखनऊ, गाजियाबाद और आगरा में नए घर, दुकानें खरीदनी हैं तो इनपर रखें नजर

New Housing projects in UP: उत्तर प्रदेश में अपना घर या दुकान खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने राज्य के चार प्रमुख जिलों में 10 नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक इन सभी प्रोजेक्ट्स में कुल मिलाकर लगभग 1278 करोड़ रुपये का अनुमानित इन्वेस्टमेंट होगा। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में हुई अथॉरिटी की बैठक में इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इन नए प्रोजेक्ट्स के माध्यम से लखनऊ, नोएडा (गौतम बुद्ध नगर), आगरा और गाजियाबाद में करीब 4498 आवासीय और व्यावसायिक यूनिट्स का विकास किया जाएगा।

लखनऊ: सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स और 2284 यूनिट्स को मिली मंजूरी

मंजूर किए गए प्रोजेक्ट्स और यूनिट्स की संख्या के मामले में राजधानी लखनऊ सबसे आगे है। लखनऊ में करीब 438.29 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश वाले 6 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इन 6 प्रोजेक्ट्स में 5 आवासीय और 1 मिक्स्ड-यूज प्रोजेक्ट शामिल है। इनके जरिए कुल 2284 यूनिट्स डेवलप की जाएंगी।

गौतम बुद्ध नगर (नोएडा): निवेश के मामले में अव्वल, बनेंगे शॉप्स और स्टूडियो स्पेस

निवेश के मामले में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) सूची में सबसे ऊपर रहा है। यहां 496.27 करोड़ रुपये की लागत वाले 2 कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को रेरा से मंजूरी मिली है। इन प्रोजेक्ट्स के तहत कुल 981 कमर्शियल यूनिट्स विकसित की जाएंगी। इनमें दुकानें और स्टूडियो स्पेस शामिल होंगे।

आगरा और गाजियाबाद में भी रियल एस्टेट को रफ्तार

आगरा और गाजियाबाद जिलों के लिए भी नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दिखाई गई है। आगरा में 223.04 करोड़ रुपये के एक आवासीय प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। इसके तहत शहर में 761 हाउसिंग यूनिट्स (आवास) का विकास किया जाएगा। गाजियाबाद में 120.88 करोड़ रुपये के निवेश वाले एक कमर्शियल प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है। इसके तहत 472 कमर्शियल यूनिट्स बनाने की योजना है।

रोजगार के नए अवसर और समय पर पूरा करने की निगरानी

यूपी रेरा ने कहा कि ये प्रोजेक्ट्स आवासीय, व्यावसायिक और मिक्स्ड-यूज विकास से जुड़े हैं। इनसे राज्य में सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इनकी मदद से घरों और आधुनिक कमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग को भी पूरा किया जा सकेगा। अथॉरिटी ने साफ किया है कि इन सभी प्रोजेक्ट्स की कड़ी निगरानी की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट यानी रेरा अधिनियम के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे हों। इन निवेशों से निर्माण कार्य के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही कंस्ट्रक्शन मैटेरियल, इंजीनियरिंग सर्विसेज, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स में भी मांग बढ़ेगी।

प्रोजेक्ट्स को दी गई इस मंजूरी पर यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने कहा कि अथॉरिटी रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट्स को समय पर मंजूरी मिलने और उनकी प्रभावी निगरानी से प्रमोटर्स और घर खरीदारों दोनों के लिए अधिक भरोसे का माहौल तैयार हो रहा है।

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Chaturmas 2026: जानें कब से लग रहा है चातुर्मास, सही तारीख, महत्व और नियम क्या हैं? इस दिन रुक जाएंगे मांगलिक कार्य

Chaturmas 2026: हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस अवधि में शादी, गृह प्रवेश, मुंडन और जनेऊ संस्कार जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। लेकिन, इस समय को पूजा, जप और आत्मिक शुद्धि के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। यह चार महीने की वह अवधि है जब भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में आ जाता है।

चातुर्मास का अर्थ है चार महीने का समय। इसलिए चातुर्मास के अंतर्गत हिंदू कैलेंडर के चार पवित्र महीने श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक आते हैं। इसकी शुरुआत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से होती है, जिसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। वहीं, इसका समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी देवउठनी एकादशी के दिन होता है। आइए जानें इस साल कब से कब तक रहेगा चातुर्मास

चातुर्मास 2026 की सही तारीख

द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में चातुर्मास की अवधि निम्नलिखित है:

चातुर्मास प्रारंभ : 25 जुलाई 2026 (शनिवार) – देवशयनी एकादशी के दिन से।

चातुर्मास समापन : 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) – देवउठनी एकादशी के दिन।

कुल अवधि : लगभग 119 दिन।

चातुर्मास का महत्व

चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु इस समय योग निद्रा में रहते हैं, इसलिए यह समय सांसारिक कार्यों से ध्यान हटाकर ईश्वर भक्ति, ध्यान, जप और तपस्या में लगाने के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस अवधि में विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश और नए व्यापार की शुरुआत जैसे सभी शुभ और मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाती है।

वैज्ञानिक और प्राकृतिक दृष्टि से यह समय मानसून (वर्षा ऋतु) का होता है। इस मौसम में संक्रमण का खतरा अधिक होता है और पाचन क्रिया कमजोर पड़ जाती है। इसलिए इस दौरान संयमित जीवनशैली और खानपान का पालन किया जाता है।

चातुर्मास के मुख्य नियम

चातुर्मास के दौरान खानपान, आचरण और दैनिक दिनचर्या को लेकर शास्त्रों में कड़े नियम बताए गए हैं:

चातुर्मास में ये काम बिलकुल न करें

  • शादी-ब्याह, सगाई या कोई भी बड़ा शुभ कार्य न करें।
  • लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और नशीले पदार्थों का सेवन पूरी तरह से त्याग दें।
  • अगर आपका स्वास्थ्य अनुमति दे, तो इस दौरान विलासिता को त्यागकर जमीन पर सोना चाहिए।
  • झूठ बोलना, निंदा करना, किसी का अपमान करना और क्रोध करने से बचें। ब्रह्मचर्य का पालन करें।

ये काम करेंगे तो होगा मंगल ही मंगल

  • रोजाना सुबह-शाम भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना करें। सत्यनारायण कथा सुनना और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है।
  • इस समय जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, छाता और जूते-चप्पल दान करने का बड़ा महत्व है।
  • चातुर्मास के दौरान आने वाली सभी एकादशी तिथियों का व्रत रखना बहुत शुभ माना जाता है। बहुत से लोग एक समय भोजन (एकभुक्त) का नियम भी लेते हैं।

चातुर्मास में खानपान के नियम

  • सावन में हरी पत्तेदार सब्जियां (साग, पालक आदि) नहीं खानी चाहिए।
  • भाद्रपद में दही या कढ़ी आदि दही से बनी चीजों का सेवन वर्जित होता है।
  • आश्विन में दूध और दूध से बने उत्पादों का त्याग करना चाहिए।
  • कार्तिक में प्याज, लहसुन के साथ-साथ उड़द, मसूर और चना दाल और राई का सेवन नहीं करना चाहिए।

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