बांग्‍लादेश से निर्वासित लेखिका तस्‍लीमा नसरीन 19 साल बाद लौटीं कोलकाता, क्‍या है कोलकाता आने की वजह?

बांग्लादेश से निर्वासित प्रसिद्ध लेखिका तस्लीमा नसरीन 19 साल बाद 1 अगस्त को कोलकाता कट्टरपंथ के खिलाफ एक साहित्यिक कार्यक्रम में शामिल होने और अपनी कविताएं सुनाने पहुंची हैं। कोलकाता पहुंचने पर तस्लीमा नसरीन काफी खुश दिखीं। 1 अगस्त को वह सालों बाद सार्वजनिक कार्यक्रम में शिरकत करेंगी।
 
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन 'सिटी ऑफ जॉय' यानी कोलकाता पहुंची हैं। तस्लीमा नसरीन कोलकाता के रवींद्र सदन में 1 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए पहुंची हैं। बता दें कि बांग्लादेश से सालों के निर्वासन के बाद नसरीन 2004 और 2007 के बीच कोलकाता में रहीं। बांग्लादेश में धर्म, महिलाओं के अधिकारों और धर्मनिरपेक्षता पर उनकी लेखनी के कारण उन्हें धमकियां मिल रही थीं, जिससे वहां उनका रहना नामुमकिन हो गया था। इसके बाद उन्हें कोलकाता छोड़ना पड़ा था।
 
क्या बोलीं तस्लीमा : तस्लीमा नसरीन ने कोलकाता पहुंचने पर कहा कि यह उनके लिए घरवापसी जैसा है। वह 1 अगस्त को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ मंच साझा करेंगी। तस्लीमा नसरीन ने कहा कि खुशी और दर्द दोनों के साथ मैं कोलकाता लौटी हूं। तस्लीमा 1 अगस्त को सीएम शुभेंदु अधिकारी के अलावा लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय के साथ मंच साझा करेंगी। वह 2007 के बाद पहली बार कोलकाता में सार्वजनिक तौर पर दिखाई देंगी। 2003 में उनकी किताब द्विखंडित पर बंगाल सरकार ने पाबंदी लगा दी थी। उन पर तक मुस्लिम समुदाय की भावनाएं आहत करने का आरोप लगा था।  

रील बनाने जूते पहनकर ‘रथ’ पर चढ़ा मुस्लिम युवक, कोर्ट ने दी रोजाना मंदिर सफाई की सजा

Ulto rath yatra

Ulto Rath Yatra controversy: सोशल मीडिया पर व्यूज और लाइक्स हासिल करने का भूत किस तरह कानूनी मुसीबत बन सकता है, इसका ताजा उदाहरण पूर्व बर्धमान जिले के कालना से सामने आया है। 'उल्टो रथ यात्रा' के दो दिन बाद, एक मुस्लिम युवक द्वारा जूते पहनकर रथ पर चढ़कर रील (Reel) बनाने और उसे फेसबुक पर अपलोड करने के मामले में अदालत ने एक ऐतिहासिक और सुधारात्मक रुख अपनाया है।

 

धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपी युवक को अदालत ने जमानत तो दे दी, लेकिन इसके साथ ही एक ऐसी शर्त रखी है जो समाज में मिसाल और चर्चा का विषय बन गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना पूर्व बर्धमान जिले के समुद्रगढ़ निवासी बाबूलाल शेख से जुड़ी है। 'उल्टो रथ यात्रा' के समापन के बाद कालना क्षेत्र में खड़े एक धार्मिक रथ की सीढ़ियों पर आरोपी जूते पहनकर चढ़ गया और वहां डांस करते हुए वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल होते ही स्थानीय श्रद्धालुओं और निवासियों में भारी रोष फैल गया। 

  • धार्मिक समिति की शिकायत : 'पश्चिम नसरतपुर हरेकृष्ण नामहट्ट संघ' के सचिव जितेन मोंडल के नेतृत्व में समिति ने नदानघाट पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
  • पुलिस कार्रवाई : एफआईआर के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाबूलाल शेख को गिरफ्तार कर लिया।
  • लागू कानूनी धाराएं : आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य/दुश्मनी फैलाने और जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से संबंधित गंभीर प्रावधानों में मामला दर्ज किया गया।

कोर्ट का फैसला : सख्त कानूनी धाराओं के बीच सुधारात्मक न्याय

आरोपी बाबूलाल शेख को कालना के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने, पश्चाताप व्यक्त करने (कान पकड़कर माफी मांगने) और जांच में सहयोग करने की दलीलें दी गईं। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए आरोपी को सशर्त जमानत दे दी।

कोर्ट द्वारा तय की गई मुख्य शर्तें

  • मंदिर एवं सड़क की रोजाना सफाई : जांच पूरी होने तक आरोपी को रोजाना मंदिर परिसर और उससे सटी मुख्य सड़क की सफाई करनी होगी।
  • रथ की सीढ़ियों की धुलाई : रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी को पुलिस बल की मौजूदगी में रथ की सीढ़ियों को पानी से धोकर साफ करने का आदेश दिया गया।
  • जांच अधिकारी के समक्ष हाजिरी : आरोपी को हफ्ते में कम से कम एक बार जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना होगा और विवेचना में पूर्ण सहयोग करना होगा।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय दंड प्रक्रिया (और अब BNS प्रक्रिया) में ऐसे कई अवसर आए हैं जहां अदालतों ने केवल जेल भेजने के बजाय 'सुधारात्मक न्याय' (Restorative Justice) का मॉडल अपनाया है। कोर्ट के इस फैसले से समाज में यह संदेश जाता है कि कानून का उद्देश्य केवल सजा देना ही नहीं, बल्कि गलती का अहसास कराना और सामाजिक समरसता को दोबारा कायम करना भी है।

रील संस्कृति पर सबक

सोशल मीडिया के लिए धार्मिक स्थलों की पवित्रता या सांस्कृतिक प्रतीकों का अनादर करने वालों के लिए यह एक सख्त चेतावनी है। सोशल मीडिया की क्षणिक प्रसिद्धि के लिए कानून और धार्मिक आस्था से खिलवाड़ भारी पड़ सकता है। हालांकि, कोर्ट के इस विवेकपूर्ण फैसले ने जहां एक तरफ सख्त संदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ पश्चाताप कर रहे युवक को समाज में सुधार का अवसर भी प्रदान किया है।

धामी सरकार का बड़ा फैसला, उत्तराखंड में लागू हुआ एस्मा, 6 महीने हड़ताल पर रहेगी रोक

Big decision by Uttarakhand government, ESMA invoked in state

Chief Minister Pushkar Singh Dhami : उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अगले 6 महीने के लिए एस्मा (ESMA यानी अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम) लागू किया है, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह आदेश जनहित और जरूरी सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए जारी किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इस संबंध में कार्मिक विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है।

 

उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अगले 6 महीने के लिए एस्मा (ESMA यानी अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम) लागू किया है, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह आदेश जनहित और जरूरी सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए जारी किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इस संबंध में कार्मिक विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है।

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प्रदेश में इस समय कई कर्मचारी संगठन विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। इससे आवश्यक सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका है। साथ ही इसका सीधा असर आमजन पर पड़ सकता है। प्रदेश में विभिन्न विभागों के कर्मचारी संगठन मांगों को लेकर हड़ताल व आंदोलन करते हैं।

कर्मचारी संगठनों के आंदोलन को देखते हुए इस फैसले को अहम माना जा रहा है। चुनावी वर्ष होने के कारण कर्मचारी संगठनों की ओर से आंदोलन की तैयारी की जा रही है। कर्मचारी आठवें वेतनमान के लागू होने से पहले एसीपी की पुरानी व्यवस्था लागू करने को दबाव बनाए हुए हैं।

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सरकारी तर्क है कि यदि इस महत्वपूर्ण समय में विभागीय कर्मचारियों की हड़तालें होती हैं, तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा और राज्य की प्रगति बाधित होगी। इसीलिए अगले छह महीने तक हड़ताल पर रोक को प्रशासनिक स्थिरता और सेवा निरंतरता सुनिश्चित करने का आवश्यक कदम बताया गया है।

दतिया उपचुनाव के नतीजों से तय होगा नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक भविष्य?

दतिया विधानसभा उपचुनाव की वोटिंग के बाद सियासी गलियारों में नतीजों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। 2023 के मुकाबले 9 प्रतिशत कम मतदान के बाद चुनाव नतीजों को लेकर संशय और बढ़ गया है। अगर वोटिंग के परसेंट को देखे तो  पिछले 4 चुनाव में उपचुनाव में सबसे कम है, यानि नरोत्तम मिश्रा के 2008 में दतिया आने के बाद उपचुनाव में सबसे कम मतदान होने को लेकर भी अब भाजपा के अंदरखाने कई सवाल उठ रहे है। पूरे उपचुनाव के दौरान जिस तरह से  नरोत्तम मिश्रा समर्थकों पर पार्टी के लिए काम नहीं करने और वोटिंग के दिन जिस तरह से  नरोत्तम मिश्रा समर्थक नेताओं के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की, उससे एक बात पूरी तरह साफ है कि उपचुनाव के नतीजे  का असर पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी से कही अधिक नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों पर पड़ेगा।  

 

दरअसल दतिया उपचुनाव के नतीजे सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं होंगे, बल्कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। उपचुनाव के नतीजों से नरोत्तम  मिश्रा की  संगठनात्मक ताकत, जनाधार और पार्टी में उनकी भविष्य की भूमिका का भी फैसला करेंगे। 2023 में दतिया विधानसभा सीट हारने के बाद इस बार भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया और आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद जिस तरह से  पहले नरोत्तम  मिश्रा समर्थकों ने दतिया में  बवाल काटा और फिर नरोत्तम मिश्रा मंच पर रोए, उससे उपचुनाव में उनकी भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। नरोत्तम मिश्रा पूरे उपचुनाव के दौरान दावा करते रहे है कि वह पूरी तरह पार्टी के साथ है लेकिन कई  अहम मौकों जैसे बसई में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभा से  उनका गैरहाजिर रहने के भी कई अलग मायने निकाले जारहे है। 

 

दतिया में भाजपा अगर जीतती है?- यदि भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी दतिया उपचुनाव जीतते हैं तो सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह जाएगा कि टिकट न मिलने के बावजूद नरोत्तम मिश्रा ने संगठन को एकजुट रखा। टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों के विरोध और नाराजगी के बावजूद नरोत्तम  मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के साथ खड़े होकर प्रचार किया था। इससे नरोत्तम मिश्रा की भविष्य की राजनीति विशेषकर संगठन में नई भूमिका को लेकर सियासी दरवाजे खुल जाएंगे। भविष्य में उन्हें प्रदेश संगठन, चुनाव प्रबंधन या राष्ट्रीय स्तर पर अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके साथ ही 2028 के विधानसभा चुनाव या 2029 के लोकसभा चुनाव में उनको नई सीट से चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। 

 

दतिया में अगर भाजपा हारती है?- यदि भाजपा यह उपचुनाव हार जाती है तो इसका पूरा ठीकरा नरोत्तम मिश्रा पर फूटना पूरी तरह तय है। चुनाव के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए वह भी उनके खिलाफ जा सकती है।  भाजपा की हार के बाद सवाल सिर्फ उम्मीदवार पर नहीं, बल्कि पूरे स्थानीय नेतृत्व पर उठेंगे। भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह जिसको नरोत्तम मिश्रा का समर्थक माना जाता है, उस पर कार्रवाई पूरी तरह से तय है।  उपचुनाव में भाजपा की हार नरोत्तम मिश्रा की सियासी करियर पर एक ग्रहण का काम करेगी और उनकी पार्टी में पूछ-पऱख कम होगी और उनके सियासी पुर्नवास की राह कठिन हो जाएगी।दतिया उपचुनाव का परिणाम नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक करियर का अंतिम फैसला नहीं होगा, लेकिन यह उनके अगले चरण की दिशा जरूर तय कर सकता है।

 

दरअसल दतिया उपचुनाव भाजपा नेतृत्व के लिए भी एक लिटमस टेस्ट है। यदि नया उम्मीदवार जीतता है तो पार्टी इसे संगठन की जीत बताएगी। वहीं यदि भाजपा हार होती है तो टिकट चयन और स्थानीय रणनीति पर सवाल उठने के साथ दतिया में नए सिरे पार्टी संगठन की जमावट देखने को मिलेगी।

 

 

CJP Effect! शिक्षकों की कमी, टूटी बेंचों और खराब शौचालयों को लेकर कई राज्यों में सड़कों पर उतरे स्कूली छात्र

कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) द्वारा आयोजित छात्रों के विरोध प्रदर्शन भले ही केंद्रीय राजनीति में बड़े बदलावों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के साथ चर्चा में आए हों, लेकिन इसका जमीनी और सबसे व्यापक असर अब पूरे भारत के सरकारी स्कूलों में महसूस किया जा रहा है। इनमें सबसे उल्लेखनीय और सकारात्मक दृश्य यह है कि अब स्कूली बच्चे खुद अपने बुनियादी अधिकारों के लिए निडर होकर खड़े हो रहे हैं और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के कई हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो दिखाती हैं कि कैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और बिहार के छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। वे पंखे, बेंच जैसी बुनियादी सुविधाओं और कक्षाओं में भारी शिक्षकों की कमी के खिलाफ मुखर होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

1. राजस्थान: शिक्षकों की भारी कमी पर छात्रों का फूटा गुस्सा
राजस्थान के जालोर जिले के मेंगलवा गाँव से एक ऐसा ही बड़ा विरोध प्रदर्शन सामने आया है, जहाँ एक सरकारी स्कूल के छात्रों ने शिक्षकों की भारी कमी को लेकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

धरना और प्रशासनिक कार्रवाई: छात्रों ने कई घंटों तक स्कूल के बाहर धरना दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुँचना पड़ा। अधिकारियों ने छात्रों को समझा-बुझाकर शांत कराया और तुरंत चार नए शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश जारी किया। साथ ही, अगले 10 दिनों के भीतर बाकी बची तीन रिक्तियों को भी भरने का लिखित आश्वासन दिया।

छात्रों के मन की बात: एक छात्र ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा: “शिक्षा विभाग और सरकार से हमारी माँग है कि वे हमारी बात सुनें। यहाँ एक भी द्वितीय श्रेणी का शिक्षक नहीं है और प्रथम श्रेणी के भी केवल एक ही शिक्षक हैं—एक इतिहास के और दूसरे हिंदी के। इतिहास के शिक्षक के पास प्रधानाचार्य का भी प्रभार है, जिससे प्रशासनिक काम के बोझ के कारण पढ़ाई के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। हमारी माँग है कि कक्षा 1 से 3 और एल1 व एल2 के लिए भी शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है, तो हम स्कूल पर ताला लगा देंगे।”

2. बिहार (गया): पंखे, हैंडपंप और टूटी बेंचों के खिलाफ मोर्चा
बिहार के गया जिले में एक सरकारी स्कूल के छात्रों ने पंखे, हैंडपंप और बैठने के लिए बेंच न होने के कारण भारी धरना-प्रदर्शन किया।

जिलाधिकारी (डीएम) को आना पड़ा मैदान में: शुरुआत में जिला प्रशासन ने छात्रों को शांत करने के लिए एक कनिष्ठ अधिकारी को भेजा, लेकिन छात्रों ने विरोध खत्म करने से साफ इनकार कर दिया और सीधे जिलाधिकारी (डीएम) से मिलने की मांग पर अड़े रहे। छात्रों के इस कड़े रुख के बाद अंततः डीएम को खुद स्कूल पहुंचकर उनकी समस्याएं सुननी पड़ीं।
 
3. महाराष्ट्र (डहानू): अस्वच्छ शौचालय और बदहाल बुनियादी ढांचा
महाराष्ट्र के डहानू में छात्रों ने अपने स्कूलों में अस्वच्छ शौचालयों, असुरक्षित माहौल और बुनियादी ढांचे की कमी के खिलाफ बहादुरी से आवाज उठाई।

छात्रों का आरोप है कि स्कूलों में पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी केवल सरकारी निरीक्षणों के दौरान ही उपलब्ध कराई जाती है, बाकी दिनों में उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

4. उत्तर प्रदेश (फतेहपुर): सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्रों का प्रदर्शन
अभी कुछ ही दिन पहले, सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्रों ने बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर स्कूल परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दबाव के चलते अंततः स्कूल प्रशासन को लिखित आश्वासन देना पड़ा कि छात्रों की सभी मांगें जल्द पूरी की जाएंगी।

बुनियादी समानता और शिक्षा का अधिकार: एक बड़ा सवाल
इन चारों राज्यों में छात्रों की माँगें काफी हद तक एक जैसी और बेहद बुनियादी हैं: सुचारू कक्षाएँ, स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित माहौल, पर्याप्त शिक्षक और पीने योग्य शुद्ध पानी।

इन विरोध प्रदर्शनों ने एक पुरानी और गंभीर विषमता को फिर से केंद्र में ला खड़ा किया है: आसानी से मिलने वाली ये बुनियादी सुविधाएं जो शिक्षा का न्यूनतम स्तर होनी चाहिए, उनके लिए आज भी सरकारी स्कूलों के बच्चों को सड़कों पर उतरने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है? बदलाव की यह बयार यह साबित करती है कि अब देश का युवा और छात्र अपनी शिक्षा और अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक हो रहा है।

SEOC Sachet Portal : आपदा के समय गुजरात की मजबूत सुरक्षा ढाल बना स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर

State Emergency Operations Center served as robust security shield for Gujarat during disaster

State Emergency Operation Center : आपदा कभी पूर्व सूचना देकर नहीं आती, लेकिन गुजरात सरकार ने आधुनिक तकनीक, रियल-टाइम समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के आधार पर ऐसा मजबूत आपदा प्रबंधन ढांचा विकसित किया है, जो संकट के समय लाखों नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। गांधीनगर स्थित स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) राज्य के प्रमुख कमांड एंड कंट्रोल हब के रूप में 24 घंटे कार्यरत रहकर भूकंप, चक्रवात, बाढ़ सहित प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान पूरे प्रशासनिक तंत्र का समन्वय करता है।

 

कच्छ भूकंप के बाद विकसित हुआ आधुनिक ढांचा

वर्ष 2001 के कच्छ भूकंप से मिले अनुभवों के आधार पर गुजरात सरकार ने विश्वस्तरीय आपदा प्रबंधन प्रणाली विकसित की है। आज SEOC राज्य के आपदा प्रबंधन का केंद्रबिंदु बन चुका है, जहां से राज्यभर के सभी जिला एवं तहसील स्तर के कंट्रोल रूम के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जाता है।

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पूरे राज्य में त्रि-स्तरीय नेटवर्क

गुजरात का आपदा प्रबंधन केवल एक कंट्रोल रूम तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में सुव्यवस्थित नेटवर्क के माध्यम से संचालित होता है। इसमें गांधीनगर स्थित स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के अलावा सभी 33 जिलों में डिस्ट्रिक्ट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (DEOC), 248 तहसील इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (TEOC) तथा पांच क्षेत्रीय इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर (ERC) कार्यरत हैं। ये सभी केंद्र गुजरात स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (GSWAN) की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से जुड़े हुए हैं।

 

'सचेत' पोर्टल से करोड़ों लोगों को समय पर चेतावनी

राज्य सरकार ने SEOC Sachet Portal और मास एसएमएस प्रणाली के माध्यम से अब तक प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को 2864 करोड़ से अधिक अलर्ट संदेश भेजे हैं। इसके अलावा 6 करोड़ से अधिक मोबाइल एप उपयोगकर्ताओं और 5.3 लाख से अधिक वेब एक्सेस के जरिए नागरिकों को आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

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आपदा के दौरान यदि सामान्य संचार व्यवस्था बाधित हो जाए, तब भी सैटेलाइट फोन, GSWAN हॉटलाइन, लैंडलाइन, ई-मेल, व्हाट्सएप, सोशल मीडिया, पुलिस वायरलेस तथा हैम रेडियो जैसी वैकल्पिक संचार व्यवस्थाएं लगातार सक्रिय रहती हैं।

 

विशेषज्ञ संस्थानों के साथ रियल-टाइम समन्वय

SEOC भारतीय मौसम विभाग (IMD), इंस्टीट्यूट ऑफ सिस्मोलॉजिकल रिसर्च (ISR), ISRO, INCOIS, कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज सहित विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों के साथ रियल-टाइम समन्वय बनाए रखता है। इससे भूकंप, चक्रवात, बाढ़, सुनामी, सूखा, हीटवेव, महामारी तथा औद्योगिक दुर्घटनाओं जैसी परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेना संभव हो पाता है।

 

NDRF और SDRF की टीमें हमेशा तैयार

राज्य में जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों के लिए NDRF की 17 टीमें और SDRF की 32 टीमें तैनात रहती हैं। इसके अलावा आवश्यकता होने पर भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के साथ भी सीधा समन्वय किया जाता है।

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24 घंटे उपलब्ध हेल्पलाइन

आपदा के समय नागरिकों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य स्तर पर 1070 तथा जिला स्तर पर 1077 हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे संचालित किए जाते हैं।

 

गुजरात की प्रमुख उपलब्धियां

गुजरात देश का पहला राज्य है, जिसने वर्ष 2003 में अलग डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू कर गुजरात स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (GSDMA) की स्थापना की। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए GSDMA को संयुक्त राष्ट्र का प्रतिष्ठित सासाकावा अवॉर्ड भी प्राप्त हो चुका है।

 

'जीरो कैजुअल्टी' नीति की सफलता

हाल के वर्षों में आए बिपरजॉय और ताउते जैसे भीषण चक्रवातों के दौरान गुजरात सरकार ने समय रहते लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर जनहानि को न्यूनतम रखने में सफलता हासिल की। इसके अलावा समुद्री तटों पर आधुनिक साइक्लोन शेल्टर, अर्ली वार्निंग सिस्टम तथा 'आपदा मित्र' योजना के तहत हजारों स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देकर सामुदायिक आपदा प्रबंधन को भी मजबूत बनाया गया है।

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गुजरात की सुरक्षा ढाल

आधुनिक तकनीक, त्वरित संचार व्यवस्था, विभिन्न एजेंसियों के बीच रियल-टाइम समन्वय और प्रशिक्षित राहत एवं बचाव दलों के कारण गुजरात का स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) आज देश के लिए आपदा प्रबंधन का एक उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। राज्य सरकार की 'जीरो कैजुअल्टी' नीति को सफल बनाने में SEOC महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आपदा के समय लाखों नागरिकों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर रहा है।

PM मोदी के खिलाफ मॉर्फ्ड पोस्ट पर बड़ा एक्शन! Meta India प्रमुख समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स पर FIR

FIR on Meta chief on morfed video against PM Modi

छात्र प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ किए गए) कंटेंट और आपत्तिजनक पोस्ट साझा किए जाने के मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। साइबर क्राइम पुलिस ने मामले में Meta India के प्रमुख, कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। ALSO READ: पुजारी बनकर संसद पहुंचे पप्पू यादव, राहुल गांधी ने दानपात्र में डाले पैसे; 'चढ़ावा चोरी' पर विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का AI से मॉर्फ्ड वीडियो बनाने के मामले में हैदराबाद पुलिस ने मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास और कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ एक केस दर्ज किया है। पीएम मोदी ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान वीडियो शेयर किया था, जिसको बाद में कुछ लोगों ने AI की मदद से एडिट किया है और गलत जानकारी सर्कुलेट की।

 

पुलिस का कहना है कि जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित मॉर्फ्ड सामग्री किसने तैयार की, किसने उसे प्रसारित किया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसके प्रसार को रोकने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं। ALSO READ: 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' प्रियंका गांधी समेत विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर इस्तीफे की मांग

 

क्या है पूरा मामला?

जांच एजेंसियों के अनुसार, NEET प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी कथित रूप से मॉर्फ्ड तस्वीरें, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री तेजी से वायरल हुई थी। शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की प्रारंभिक जांच की, जिसके आधार पर संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की गई। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि विवादित कंटेंट के प्रसार में किन-किन सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका रही और क्या किसी प्लेटफॉर्म ने कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई करने में लापरवाही बरती।

 

किन पहलुओं की होगी जांच?

 

साइबर क्राइम अधिकारियों के अनुसार जांच में कई बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं—

  • कथित मॉर्फ्ड कंटेंट का मूल स्रोत कौन था।
  • कंटेंट किस नेटवर्क के माध्यम से वायरल हुआ।
  • संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका क्या रही।
  • लागू कानूनों और आईटी नियमों का पालन हुआ या नहीं।
  • डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई।

 

पुलिस का क्या कहना है?

साइबर क्राइम विभाग का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी, भ्रामक या मॉर्फ्ड सामग्री का प्रसार कानून के दायरे में आता है और ऐसे मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट या संदिग्ध सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।

 

मॉर्फ्ड वीडियो क्या होते हैं? 

मॉर्फ्ड वीडियो, असल में ऐसे वीडियो होते हैं जिनमें किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या हाव-भाव डिजिटल तकनीक, AI या वीडियो या एडिटिंग सॉफ्टवेयर के जरिए बदले जाते हैं। इन वीडियो का मकसद होता है कि लोगों को ऐसा लगे कि वह व्यक्ति कुछ ऐसा कह या कर रहा है, जो असल में उसने कहा ही नहीं था।

‘अमित शाह संसद से गायब क्यों?’ प्रियंका गांधी समेत विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर इस्तीफे की मांग

opposition protest in parliament

प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्ष के सांसदों ने 20 जुलाई को CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 'पुलिस कार्रवाई' को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथ में एक बड़ा पोस्टर था जिस पर लिखा था 'अमित शाह संसद से गायब क्यों'? ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

संसद में एंटी पेपर लिक कानून पास होने के बाद भी छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल पर विपक्ष सांसदों की नाराजगी कम नहीं हुई है। उन्होंने अमित शाह से छात्रों पर की गई बर्बरता का जवाब मांगा।

 

कांग्रेस ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' ये सवाल न सिर्फ विपक्ष बल्कि पूरा देश पूछ रहा है। छात्रों पर की गई बर्बरता के बारे में गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते तो नरेंद्र मोदी तत्काल उन्हें गृह मंत्री के पद से बर्खास्त करें। इसी मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया।


इससे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने भी एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि नरेंद्र मोदी जी 10 दिन पहले, आपकी सरकार ने युवाओं का लाठी-डंडे-Pellet Gun से दमन किया। जब छात्रों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया तो अब आप बदले की भावना से उनपर FIR करवा रहें हैं, जबरन हिरासत में ले रहें हैं। ALSO READ: PM Modi के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामले में नोएडा में मुकदमा दर्ज, युवती और परिजन फरार, केस दिल्ली ट्रांसफर

 

उन्होंने कहा कि युवाओं ने आंदोलन इस शर्त पर वापिस लिया कि उन पर कार्रवाई नहीं होगी, अब आपकी सरकारें अपनी ही जुबान से पलट गईं है। युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स ब्लॉक करवा रही है, बच्चियों को Dox किया जा रहा है। अहंकार इतना है कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद सदन में कदम तक नहीं रखा, अकाउंटेबिलिटी के स्टेटमेंट से डरते रहे। अब ये सब फेस-सेविंग, इमेज प्रोटेक्शन के हथकंडे नहीं चलेंगे, युवा आपका सच जान चुका है। थोड़ी सी भी शर्म बची है तो अमित शाह का इस्तीफा लीजिए।

भिवंडी में बड़ा हादसा: चार मंजिला इमारत ढही, 6 की मौत; मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका

bhivandi building collapsed

महाराष्ट्र के पावरलूम शहर भिवंडी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आ रही है। भिवंडी के बालाजी नगर (नारपोली) इलाके के भंडारी कंपाउंड में स्थित एक चार मंजिला पुरानी कोहिनूर इमारत गुरुवार रात करीब 11:30 बजे अचानक भरभराकर ढह गई। इस भीषण हादसे में 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 7 से 8 लोगों के अभी भी मलबे के नीचे दबे होने की आशंका जताई जा रही है। ALSO READ: Top News 31 July: ITR भरने की आखिरी तारीख आज, 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, भिवंडी हादसा समेत 5 बड़ी खबरें

 

पहले ही दी गई थी चेतावनी, चल रहा था मरम्मत का काम

 

स्थानीय प्रशासन और महानगर पालिका (BNCMC) के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह चार मंजिला कोहिनूर इमारत बेहद जर्जर हो चुकी थी और इसे पहले ही 'सी' श्रेणी में रखा गया था। पालिक द्वारा इमारत को खाली करने के सख्त आदेश दिए जा चुके थे, जिसके चलते ज्यादातर परिवार पहले ही इसे छोड़कर जा चुके थे।

 

हालांकि, हादसे के वक्त इमारत के भीतर कुछ लोग और एक परिवार अंदर रहकर मरम्मत का काम करवा रहा था। रात के वक्त अचानक इमारत का 'बी' विंग ढह गया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई।

 

युद्धस्तर पर राहत और बचाव जारी

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग (Fire Brigade) और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं।

 

बचाव कार्य: एनडीआरएफ की टीम ने अब तक कड़ी मशक्कत के बाद एक महिला को सुरक्षित मलबे से बाहर निकाल लिया है, जिसे तुरंत इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेज दिया गया है।

 

आश्रय स्थल: बीएनसीएमसी के मेयर नारायण चौधरी ने बताया कि सुरक्षित बचाए गए अन्य लोगों को फिलहाल पास के गायत्री मंदिर-गीता हॉल में ठहराया गया है। मलबे में फंसे बाकी लोगों को बाहर निकालने के लिए अत्याधुनिक उपकरणों की मदद ली जा रही है।

 

प्रशासनिक बयान और अपील

 

भिवंडी पश्चिम के विधायक महेश चौगुले ने मौके का जायजा लेते हुए बताया कि पालिक की पूरी टीम राहत कार्य में जुटी हुई है और मलबे को हटाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। प्रशासन ने घटनास्थल के आसपास कड़ा सुरक्षा घेरा बना दिया है और आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा न डालें।

Top News 31 July: ITR भरने की आखिरी तारीख आज, 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, भिवंडी हादसा समेत 5 बड़ी खबरें

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Top News 31 July : आज इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख है। मौसम विभाग ने 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। भिवंडी में 4 मंजिला इमारत गिरी। संसद में एंटी पेपर लिक बिल पास होने के बाद पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर जारी किया वीडियो मैसेज। प्रियंका गांधी की  IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर की गई टिप्पणी पर बवाल। 31 जुलाई की बड़ी खबरें : 

 

ITR भरने की आज आखिरी तारीख

आईटीआर भरने की आज आखिरी तारीख है। अगर आपने अभी तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो जल्द कर लें। समय पर आईटीआर भरने से आपका टैक्स रिकॉर्ड सही रहता है, ज्यादा कटा हुआ टैक्स वापस (रिफंड) मिल सकता है और बाद में जुर्माने जैसी परेशानी से बचा जा सकता है। ALSO READ: ITR Filing 2026 Deadline: 31 जुलाई से पहले ऐसे भरें आयकर रिटर्न, पेनल्टी से बचें

 

IMD का 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दो सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र और एक पश्चिमी विक्षोभ आने वाले दिनों में कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश करा सकते हैं। देश के 17 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। ALSO READ: IMD का बड़ा अलर्ट: 17 राज्यों में भारी बारिश का खतरा, क्या है बाढ़ प्रभावित गुजरात-असम का हाल?

 

भिवंडी में 4 मंजिला इमारत गिरी

महाराष्‍ट्र के भिवंडी में देर रात एक निर्माणाधिन 4 मंजिला इमारत का एक हिस्सा गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई। NDRF समेत कई टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी।

 

एंटी पेपर लीक बिल पास होने पर क्या बोले पीएम मोदी?

संसद में पेपर लीक विरोधी विधेयक पारित होने का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर अपने संदेश में कहा कि सरकार देश की परीक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगी। उन्होंने दोहराया कि पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। परीक्षा प्रणाली को और मजबूत करने के लिए आने वाले समय में कई और कदम उठाए जाएंगे। ALSO READ: Anti Paper Leak Bill 2026 : पेपर लीक विरोधी बिल पास होने पर इंस्टाग्राम पर PM मोदी का संदेश, पेपर लीक गैंग पर होगी सख्त कार्रवाई

 

प्रियंका गांधी की ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर बवाल

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर की गई कथित ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 200 से अधिक शिक्षाविदों ने कड़ी आपत्ति जताई है। 214 शिक्षाविदों के हस्ताक्षर वाले एक खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद के प्रति अनुचित बताया गया है। ALSO READ: Priyanka Gandhi Remark : प्रियंका गांधी की 'गौमूत्र एक्सपर्ट' टिप्पणी पर 214 शिक्षाविदों का खुला पत्र, IIT मद्रास निदेशक के समर्थन में उठी आवाज