युवराज सिंह ने किया छात्रों का समर्थन पर दी यह हिदायत, इंस्टा पर डाली पोस्ट

भारत को दो विश्वकप जिता चुके युवराज सिंह ने नीट पेपर लीक के विवाद से उत्पन्न हुए छात्र आंदोलन पर अपनी राय रखी। उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि हर स्त्री पुरुष और विद्यार्थी को अपना सपना पूरा करने के लिए एक शांतिपूर्ण वातावरण में समय व्यत्तीत करने का हक है। आपकी भलाई भारत की बुनियाद है। इस कारण हर मसले को बैठकर शांति से सुलझाया जा सकता है।

पिता भी थे क्रिकेटर

युवराज भारत के लिए 40 टेस्ट, 304 वनडे और 58 ट्वंटी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेल चुके हैं, जिनमें उन्होंने क्रमश: 1900, 8701 और 1177 रन बनाए हैं। युवराज ने अपना आखिरी ट्वंटी-20 मैच फरवरी 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ और वनडे जून 2017 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था।

उम्दा बल्लेबाज युवराज ने गेंदबाजी में हाथ आजमाए। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 9, वनडे मैचों में 111, टी-20 में 28 और आईपीएल में 36 विकेट लिए। संन्यास के बाद कैंसर के खिलाफ जंग लड़ने वाले युवराज कैंसर पीड़ितों समय समय पर मदद भी करते हैं।

12 दिसंबर 1981 को चंडीगढ़ शहर में जन्‍मे युवराज सिंह के पिता योगराज भी भारतीय टीम के लिए खेल चुके हैं। बचपन में स्केटिंग का शौक रखने वाले युवराज को क्रिकेट खेलने की प्रेरणा अपने पिता से ही मिली। उन्‍होंने बेहद कड़ाई से युवराज को इस खेल में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवराज के लिए घर में ही पिच बनवा दी थी। युवराज ने बचपन में एक पंजाबी फिल्‍म 'मेहंदी शगणा दी' में भी काम किया था।

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उनके करियर का मुख्य आकर्षण केंद्र स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में 6 छक्के लगाना और एकदिवसीय विश्वकप 2011 का मैन ऑफ द टूर्नामेंट पाना रहा। इसके अलावा वह अभी टीम में मौजूद अभिषेक शर्मा और शुभमन गिल की कोचिंग कर रहे हैं।

BCCI का बड़ा एक्शन: जानबूझकर नो-बॉल या खतरनाक बीमर फेंकी तो पूरे मैच से सस्पेंड होंगे गेंदबाज

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने 2026-27 घरेलू क्रिकेट सीजन शुरू होने से पहले खेल के नियमों में कई बड़े बदलाव किए हैं। सबसे अहम फैसला उन गेंदबाजों के लिए है जो जानबूझकर फ्रंट-फुट नो-बॉल फेंकते हैं। अब ऐसी गलती सिर्फ एक पारी तक सीमित सजा नहीं लाएगी, बल्कि दोषी गेंदबाज पूरे मैच में गेंदबाजी नहीं कर सकेगा।

 

बीसीसीआई ने ये संशोधित नियम सभी राज्य क्रिकेट संघों को भेज दिए हैं। इन बदलावों को अगले महीने शुरू होने वाली दलीप ट्रॉफी से लागू किया जाएगा। साथ ही अंपायरों और मैच रेफरी के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि नए नियमों को सही तरीके से लागू किया जा सके।

 

 

जानबूझकर नो-बॉल पर अब मैच भर की सजा

 

नए नियम के तहत यदि कोई गेंदबाज जानबूझकर फ्रंट-फुट नो-बॉल फेंकता है या ऐसी गेंद डालता है जो पिच पर ही नहीं गिरती, तो उसे पूरे मैच के बाकी हिस्से में गेंदबाजी करने की अनुमति नहीं मिलेगी।

 

पहले ऐसे मामलों में गेंदबाज को केवल उसी पारी में गेंदबाजी से रोका जाता था। अब फैसला मैदान पर मौजूद दोनों अंपायर करेंगे कि नो-बॉल जानबूझकर डाली गई थी या नहीं। इसी तरह यदि कोई गेंदबाज जानबूझकर खतरनाक बीमर फेंकता है, तो उस पर भी यही सख्त कार्रवाई लागू होगी।

 

 

अब आखिरी ओवर बीच में नहीं रुकेगा

 

बीसीसीआई ने दिन के खेल की समाप्ति से जुड़े नियम में भी बदलाव किया है।

 

पहले यदि दिन के अंतिम निर्धारित ओवर में विकेट गिर जाता था, तो अंपायर उसी समय स्टंप्स घोषित कर सकते थे। नए नियम के अनुसार अब ऐसा नहीं होगा। अंतिम ओवर की सभी छह वैध गेंदें पूरी होने के बाद ही दिन का खेल समाप्त माना जाएगा।

 

इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई टीम नए बल्लेबाज को क्रीज पर आने से बचाने के लिए नियम का फायदा न उठा सके।

 

 

अब आखिरी पारी घोषित या फॉरफिट नहीं कर सकेंगी टीमें

 

बीसीसीआई ने अंतिम पारी से जुड़ा एक और अहम नियम बदला है।

 

अब किसी भी टीम को मैच की अंतिम पारी में डिक्लेयर करने या फॉरफिट करने की अनुमति नहीं होगी। बोर्ड का मानना है कि पहले इस प्रावधान का कुछ मामलों में कृत्रिम परिणाम हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, जिससे खेल की निष्पक्षता प्रभावित होती थी।

 

विकेटकीपर और कोच के लिए भी बदले नियम

 

घरेलू वनडे क्रिकेट में अब ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान टीम के हेड कोच मैदान पर जाकर खिलाड़ियों से बातचीत कर सकेंगे। माना जा रहा है कि भविष्य में इसी तरह का नियम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी लागू हो सकता है।

 

वहीं विकेटकीपर्स को भी थोड़ी राहत मिली है। अब उन्हें सिर्फ गेंद छोड़े जाने के क्षण पर ही अपने दस्ताने पूरी तरह स्टंप्स के पीछे रखने होंगे। पहले गेंदबाज के रन-अप शुरू होते ही यह नियम लागू हो जाता था, जिससे कई बार तकनीकी कारणों से नो-बॉल या अन्य विवाद पैदा हो जाते थे।

 

दलीप ट्रॉफी से पहले होगी अधिकारियों की ट्रेनिंग

 

घरेलू सीजन की शुरुआत अगस्त में दलीप ट्रॉफी से होगी। उससे पहले सभी राज्य क्रिकेट संघ अंपायरों और मैच रेफरी को नए नियमों की जानकारी दे रहे हैं।

 

बीसीसीआई अधिकारियों का मानना है कि सीजन शुरू होने से पहले पर्याप्त समय है, इसलिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए सभी मैच अधिकारियों को नए नियमों से पूरी तरह परिचित कराया जाएगा।

 

क्या बदलेंगे ये नियम?

 

इन संशोधनों का मकसद सिर्फ सख्ती बढ़ाना नहीं, बल्कि घरेलू क्रिकेट को अधिक निष्पक्ष, सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी बनाना है। जानबूझकर की जाने वाली गलतियों पर कड़ी सजा, अंतिम ओवर और अंतिम पारी से जुड़े बदलाव, साथ ही तकनीकी नियमों में सुधार भविष्य में भारतीय घरेलू क्रिकेट को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

 

जब टूट चुकी थीं पीवी सिंधु, तब विराट कोहली ने कही ऐसी बात जिसने बदल बदल दिया सब कुछ

कभी-कभी एक बातचीत पूरी जिंदगी बदल देती है।

पीवी सिंधु के लिए भी ऐसा ही हुआ। दो साल से ज्यादा समय तक ट्रॉफी का इंतजार, लगातार चोटें, पेरिस ओलंपिक में निराशा और आलोचनाओं के बीच सिंधु एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई थीं, जहां उन्हें सिर्फ एक सलाह नहीं, बल्कि एक नई सोच की जरूरत थी। यह नई दिशा उन्हें भारतीय क्रिकेट के दिग्गज विराट कोहली से मिली।

 

जापान ओपन 2026 का खिताब जीतने के बाद सिंधु ने खुलासा किया कि उनके करियर के सबसे मुश्किल दौर में विराट कोहली से हुई एक मुलाकात ने उन्हें फिर से अपने खेल से प्यार करना सिखाया।

जब पीवी सिंधु ने विराट कोहली को किया फोन…

 

लगातार चोटों और खराब प्रदर्शन से जूझ रहीं सिंधु मानसिक रूप से बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही थीं। स्ट्रेस फ्रैक्चर के बाद वापसी आसान नहीं थी। पेरिस ओलंपिक में शुरुआती हार ने आत्मविश्वास को और झटका दिया। ऐसे समय में उन्होंने विराट कोहली को संदेश भेजा।

 

सिंधु ने बताया कि विराट ने कुछ ही मिनटों में जवाब दिया और अगले ही दिन बेंगलुरु में उनसे मुलाकात की। उनके साथ पति वेंकट दत्ता साई भी मौजूद थे, जिन्होंने पूरे कमबैक के दौरान उनका साथ दिया और नई सपोर्ट टीम तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।

 

सिंधु ने कहा कि उस बातचीत की बातें वह कभी सार्वजनिक नहीं करेंगी, लेकिन विराट के हर शब्द ने उनकी सोच बदल दी।

 

 

 

विराट की सलाह: ट्रॉफी नहीं, खेल से प्यार करो

 

सिंधु को लगा था कि शायद उन्हें तकनीक, फिटनेस या रणनीति पर सलाह मिलेगी, लेकिन विराट कोहली ने बिल्कुल अलग बात कही। उन्होंने सिंधु से कहा कि ट्रॉफी के पीछे भागना छोड़ो और उस खुशी को दोबारा खोजो, जिसकी वजह से तुमने बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। यही बात सिंधु के दिल को छू गई।

 

उन्होंने कहा कि अब वह सुबह 5:30 बजे सिर्फ मेडल या ट्रॉफी के लिए नहीं उठतीं, बल्कि इसलिए क्योंकि उन्हें फिर से अपने खेल से प्यार हो गया है।

PV Sindhu

 

सिर्फ मानसिक नहीं, खेल में भी आया बड़ा बदलाव

 

सिंधु की वापसी सिर्फ सोच बदलने तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अपने खेल पर भी पूरी तरह काम किया।

 

कोच इरवांश्या, स्ट्रेंथ ट्रेनर वेन लोम्बार्ड और अपनी टीम के साथ उन्होंने फिटनेस पर मेहनत की। करीब 3.5 किलो वजन कम किया, नेट गेम बेहतर बनाया, लंबी रैलियों में धैर्य सीखा और सिर्फ स्मैश पर निर्भर रहने की बजाय ड्रॉप, हाफ स्मैश और क्लियर जैसे शॉट्स को हथियार बनाया।

 

अब उनकी तैयारी में डेटा एनालिटिक्स और एआई आधारित मॉनिटरिंग भी शामिल है, जिससे शरीर पर पड़ने वाले दबाव, रिकवरी और मूवमेंट का लगातार विश्लेषण किया जाता है।

 

जापान ओपन में इतिहास, सूखा भी खत्म

 

नई सोच और नई तैयारी का असर जापान ओपन के फाइनल में साफ दिखाई दिया।

 

सिंधु ने मेजबान जापान की स्टार खिलाड़ी अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से हराकर पहली बार जापान ओपन का खिताब अपने नाम किया।

 

इसके साथ ही वह:

 

  • जापान ओपन जीतने वाली पहली भारतीय शटलर बनीं।
  • BWF सुपर 750 खिताब जीतने वाली सबसे उम्रदराज महिला खिलाड़ी बनीं।
  • दो साल से ज्यादा समय से चला आ रहा उनका टाइटल सूखा भी खत्म हुआ।

 

फाइनल में कई बार यामागुची ने वापसी की कोशिश की, लेकिन इस बार सिंधु घबराईं नहीं। उन्होंने धैर्य और आत्मविश्वास के साथ मुकाबला खत्म किया

 

'अब जवाब देने की जरूरत नहीं, खुद पर भरोसा काफी है'

 

सिंधु ने कहा कि इस पूरे दौर में उन्होंने कभी खुद से यह नहीं पूछा कि उनका करियर खत्म हो गया है या नहीं। हालांकि चोटों के दौरान कई बार मन में सवाल जरूर आते थे कि क्या वह पहले जैसी वापसी कर पाएंगी।

 

लेकिन अब उनका विश्वास पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।

 

उनके शब्दों में, यह खिताब सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि इस बात का सबूत है कि उनकी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।

 

जीत सिर्फ जापान ओपन की नहीं, खुद पर भरोसे की भी थी

पीवी सिंधु की यह वापसी सिर्फ एक बैडमिंटन खिलाड़ी की सफलता नहीं है। यह उस जज्बे की कहानी है, जिसमें चोटें थीं, आलोचनाएं थीं, निराशा थी, लेकिन हार मानने का विकल्प नहीं था।

 

विराट कोहली की एक साधारण-सी सलाह—“खेल में फिर से खुशी ढूंढो”—ने सिंधु को ट्रॉफी से पहले खुद से दोबारा मिलाया।

 

और शायद यही वजह है कि जापान ओपन की ट्रॉफी उनके हाथों में आने से पहले उनकी सबसे बड़ी जीत उनके भीतर हो चुकी थी।

नए T20I कोच VVS लक्ष्मण के साथ जिम्बाब्वे पहुंची टीम इंडिया (Video)

पूर्व भारतीय बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने अपने करियर में एक भी T-20I अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है लेकिन वह इस बार 3 मैचों की टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए युवा भारतीय टीम के साथ जिम्बाब्वे पहुंचे।गौरतलब है कि टी-20 विश्व विजेता टीम भारत का इस छोटे प्रारुप में सफर बहुत खास नहीं रहा है। टीम को लगातार 6 टी-20 मैच गंवाने पड़े थे इसमें से 2 मैच आयरलैंड और 4 इंग्लैंड के खिलाफ आए थे।

लेकिन फिलहाल युवा टीम के साथ वह जिम्बाब्वे पहुंच चुके हैं। इससे पहले भी लक्ष्मण ने टी-20 टीम की कोचिंग दक्षिण अफ्रीका दौरे पर की थी। इस दौरे पर टीम के नियमित कोच गौतम गंभीर टीम के साथ नहीं जा रहे हैं।

गौरतलब है कि चयनकर्ताओं ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए कड़े फैसले लेना जारी रखा है और इसी क्रम में विश्व कप जीतने वाली टीम के बल्लेबाज संजू सैमसन को इस महीने के आखिर में जिम्बाब्वे में होने वाली तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच की श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में शामिल नहीं किया है।

भारतीय टीम 23, 25 और 27 जुलाई को हरारे में जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन टी20 मैच खेलेगी।चयनकर्ताओं ने पहली बार तेज गेंदबाजों यश ठाकुर और अशोक शर्मा को टीम में जगह दी है। आईपीएल 2026 में अशोक ने गुजरात टाइटन्स की ओर से कुछ मुकाबलों में प्रभावित किया था।हाल में अफगानिस्तान के खिलाफ एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करने वाले बाएं हाथ के स्पिनर हर्ष दुबे को भी पहली बार 15 सदस्यीय टी20 टीम में जगह मिली है।

सैमसन की जगह विकेटकीपर-बल्लेबाज प्रभसिमरन सिंह को टीम में शामिल किया गया। प्रभसिमरन ने आईपीएल 2026 में पंजाब किंग्स के लिए शानदार प्रदर्शन किया था और यह दाएं हाथ का बल्लेबाज हांगझोऊ में हुए 2023 एशियाई खेलों के लिए भी भारतीय टीम का हिस्सा था।

इंग्लैंड में चल रही पांच मैच की टी20 श्रृंखला के दूसरे मैच में सैमसन की जगह वैभव सूर्यवंशी को भारतीय टीम में चुना गया। सैमसन आयरलैंड के खिलाफ दोनों टी20 और इंग्लैंड के खिलाफ पहले मैच में नाकाम रहे थे। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज को टी20 विश्व कप में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया था। सैमसन के अलावा प्रसिद्ध कृष्णा, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, वाशिंगटन सुंदर और रवि बिश्नोई को भी टीम में शामिल नहीं किया गया।

निचले क्रम के बल्लेबाज रिंकू सिंह और तेज गेंदबाज मयंक यादव की टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में वापसी हुई है।मयंक 2024 के बाद पहली बार टीम में लौटे हैं।

भारतीय टीम :श्रेयस अय्यर (कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, ईशान किशन , शिवम दुबे, सूर्यांश शेडगे, रिंकू सिंह, हर्ष दुबे, वरूण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, अशोक शर्मा, मयंक यादव, प्रभसिमरन सिंह

खुद की खराब फिटनेस से बचने के लिए गिल ने गेंदबाजों की खराब फिटनेस गिनाई

Shubhman Gill

भारतीय कप्तान शुभमन गिल की फिटनेस पहले भी और इस सीरीज में संदेह के घेरे में रही है। पहले एकदिवसीय मैच में उन्होंने नाबाद 80 रन जरूर बनाए थे लेकिन उन्हें हैमस्ट्रिंग की चोट के कारण ड्रेसिंग रुम जाना पड़ा। लॉर्ड्स में कल इंग्लैंड के खिलाफ अर्धशतकीय पारी के दौरान चौका मारते हुए यह चोट फिर उभर गई और कुछ ही ओवर बाद वह पगबाधा आउट हो गए। हालांकि फिलहाल उनका ध्यान गेंदबाजों की फिटनेस पर है।  

भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने कहा कि इस मैच के पावरप्ले में हमारी गेंदबाजी अच्छी नहीं रही और इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने इसका फायदा उठाया और हमें वापसी का मौका नहीं दिया।

“इंग्लैंड के खिलाफ मिली 27 रनों की हार के बाद शुभमन गिल ने कहा कि 45वें ओवर तक हम पूरी तरह मुकाबले में थे। लेकिन आख़िरी तीन ओवरों में हमने बहुत ज़्यादा रन दे दिए और वहीं से मैच हमारे हाथ से निकल गया। हमारी योजना थी कि 40 ओवर तक विकेट बचाकर रखें, ताकि अंत में लक्ष्य का पीछा कर सकें। साथ ही हम यह भी नहीं चाहते थे कि रन रेट बहुत ज़्यादा बढ़ जाए। पावरप्ले के बाद हमारी कोशिश थी कि 6 से 6.5 रन प्रति ओवर की रफ़्तार से बल्लेबाजी करें और आख़िरी 10 ओवरों में 10 रन प्रति ओवर के हिसाब से लक्ष्य हासिल करें।

उन्होंने कहा कि सकारात्मक बात यह रही कि लगभग सभी बल्लेबाजो ने रन बनाए। लेकिन इस मैच में हमने पहले पावरप्ले में अच्छी गेंदबाज़ी नहीं की। इंग्लैंड ने वहीं मौक़े का पूरा फ़ायदा उठाया और हमें वापसी का मौका नहीं दिया। डेथ ओवरों में उन्होंने बुहत अधिक रन बना लिए। रोहित और विराट ने वर्षों से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। आज रोहित ने जिस तरह बल्लेबाजी की, उससे मैं बहुत खुश हूं। आखिर में पिच धीमी हो गई थी और बल्लेबाजी आसान नहीं थी, लेकिन उन्हें खेलते देखना किसी आनंद से कम नहीं था।”

3 मैचों की ODI सीरीज में नाबाद रहे जो रूट, 260 गेंदो में बनाए 249 रन

भारत के खिलाफ जो रूट इतनी बेहतरीन तरीके से खेले कि वह 3 मैचों में एक भी बार आउट नहीं हुए और कुल 260 गेंदों में 249 रन बनाए। दूसरे मैच में जो रुट ने एकदिवसीय प्रारुप में टेस्ट क्रिकेट का मुजायरा पेश किया था वहीं तीसरे मैच में उन्होंने 170 की स्ट्राइक रेट से 48 गेंदो में 74 रनों की पारी खेली। इस पारी में उन्होंने कुल 9 चौके लगाए थे। यही कारण रहा कि उन्हें मैन ऑफ द सीरीज का पुरुस्कार मिला।

दूसरे मैच में 99 रनों पर नाबाद जो रूट शतक से महरूम रह गए लेकिन लगातार 2 एकदिवसीय मैच में वह अपनी टीम की इज्जत बचा गए वह भी बिना आउट हुए। इस पारी के लिए उनको मैन ऑफ द मैच का अवार्ड दिया गया। पहले मैच में उन्होंने 79 रनों की नाबाद पारी खेली थी।

यही नहीं वह लगातार 6 पारियों में हर पारी में 50 प्लस का स्कोर बनाने वाले बल्लेबाज भी बन गए हैं। इसके अलावा उन्होंने इंग्लैंड की ओर से सबसे ज्यादा मैन ऑफ द सीरीज जीतने का रिकॉर्ड भी बना लिया है। उन्होंने कल 13वीं बार मैन ऑफ द सीरीज का अवार्ड पाया है।

भारतीय गेंदबाजों ने इन तीन मैचों में उनके खिलाफ करीब 43.2 ओवर गेंदबाजी की। लेकिन इन 260 गेंदों में एक बार भी जो रूट को परेशानी में नहीं डाल पाए। पहले दो एकदिवसीय मैचों में उन्होंने दूसरे छोर पर विकेट के पतन के बीच बल्लेबाजी की जबकि तीसरे एकदिवसीय मैच में उन पर दबाव कम था और कुछ टी-20 के दर्शनीय शॉट्स लगाए।

27 रनों से जीता इंग्लैंड, भारत के खिलाफ 2-1 से जीती सीरीज

ENGvsIND इंग्लैंड ने लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान पर भारत के खिलाफ 27 रनों से जीत पाकर 3 मैचों की सीरीज को 2-1 से अपने नाम कर लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 3 विकेट खोकर 387 रन बनाए। जिसके जवाब में भारत की टीम रोहित शर्मा के शतक के बावजूद 360 रनों पर रुक गई। 

360 रनों का पीछा करते हुए भारत शुरुआत में धीमे खेली लेकिन रोहित शर्मा ने 110 गेंदो में 138 रनों की शानदार पारी खेली। खेल में कई बार ऐसे मौके आए जब लगा टीम इंडिया इंग्लैंड से भी तेज खेली लेकिन अंतिम 10 ओवरों में टीम विकेट गंवाते चली गई और सैम करन ने अपने अंतिम स्पैल में 4 विकेट निकाले। 


लॉर्ड्स पर ODI शतक जमाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने रोहित शर्मा

Rohit Sharma

लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान पर एकदिवसीय शतक जमाने वाले रोहित शर्मा पहले बल्लेबाज बन गए हैं। यह उपलब्धि रोहित शर्मा ने आदिल रशीद को चौका मारकर पाई। यह इस साल भी रोहित शर्मा का पहला शतक है। गौरतलब है कि रोहित शर्मा खराब फॉर्म से जूझ रहे थे और इंग्लैंड के पहले दो एकदिवसीय मैच में फ्लॉप रहे थे। जिसके बाद उनकी संन्यास की अटकलें लगनी शुरु हो गई थी। हालांकि आज उन्होंने बेहतरीन पारी खेली। 

इस साल फॉर्म ने साथ नहीं दिया- 6 महीने इंतजार हुआ शतक का

रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले एकदविसीय मैच में 21 गेंदो में 11 रन बनाए थे।  दूसरे एकदिवसीय मैच में 47 गेंद में 1 चौका और छक्का मारने के बाद 26 रन बनाकर आउट हुए। उनका 5 रनों पर गस एटिंकसन ने कैच छोड़ा था।

अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच को छोड़ दे तो इस साल रोहित का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है।पहले मैच में वह 16 रन बनाकर रनआउट हो गए और दूसरे मैच में वह 39 गेंदों में 48 रन बनाकर बोल्ड हो गए।

इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में रोहित शर्मा फ्लॉप रहे और टीम को शुरुआत में बड़ा स्कोर नहीं दे सके। रोहित शर्मा 3 मैचों में 20 की औसत से 61 रन बना पाए। पूरी सीरीज में उन्होंने 9 चौके और 2 छक्के लगाए।पहले मैच में उन्होंने 29 गेंदो पर 26 रन, दूसरे मैच में उन्होंने 38 गेंदो में 24 रन और तीसरे मैच में 13 गेंदो में 11 रन बनाए।

डेकेट ने शतक लगाकर और बेथल ने 91 रन बनाकर बनाया भारतीय गेंदबाजी का कीमा

ENGvsIND बेन डकेट की 141 रन की शानदार पारी और जैकब बेथेल के साथ पहले विकेट के लिए 192 रन की साझेदारी के बूते इंग्लैंड ने रविवार को निर्णायक तीसरे एकदिवसीय मैच में तीन विकेट पर 387 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।तीन मैचों की यह श्रृंखला 1-1 की बराबरी पर है।

शतकवीर डकेट ने अनुभवहीन भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की जमकर धुनाई की और मैच पर पूरी तरह इंग्लैंड की पकड़ मजबूत कर दी।भारत को मैच से पहले ही बड़ा झटका लगा, जब तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह बाएं घुटने में लगी चोट के कारण मुकाबले से बाहर हो गए। उनकी अनुपस्थिति भारतीय टीम को भारी पड़ी और इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने इसका पूरा फायदा उठाया।

इस मैच में खेल रहे भारत के चार तेज गेंदबाजों प्रसिद्ध कृष्णा (10 ओवर में 69 रन देकर दो विकेट), अर्शदीप सिंह (10 ओवर में 72 रन), प्रिंस यादव (10 ओवर में 79 रन देकर एक विकेट) और गुरनूर बराड़ (10 ओवर में 97 रन) के संयुक्त खाते में महज 51 एकदिवसीय मैचों का अनुभव था। अनुभव और धार की कमी के कारण वे शानदार लय में बल्लेबाजी कर रही इंग्लैंड की टीम पर दबाव बनाने में नाकाम रहे।

डकेट और बेथेल (93 गेंदों में 91 रन) ने अपनी योजना और शानदार बल्लेबाजी से भारतीय गेंदबाजों को पूरी तरह बेअसर कर दिया। शुरुआती 10 ओवर के पावरप्ले में इंग्लैंड ने 58 रन बनाए, लेकिन 11वें से 30वें ओवर के बीच दोनों बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर खबर ली और तेजी से रन बटोरे।

दोनों की 192 रन की साझेदारी भारत के खिलाफ किसी भी विकेट के लिए इंग्लैंड की सर्वश्रेष्ठ साझेदारी बन गयी। डकेट ने इसके साथ ही ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर वनडे की सबसे बड़ी पारी के दिग्गज विवियन रिचर्ड्स (इंग्लैंड के खिलाफ 1979 में नाबाद 138 रन) के 47 साल पुराने रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया।

भारत को अक्षर पटेल (10 ओवर में 61 रन) के अलावा दूसरे विशेषज्ञ स्पिनर की कमी खली, ऐसे में कुलदीप यादव को मौका नहीं देने पर सवाल उठ रहे हैं।डकेट ने अपनी शानदार पारी में 18 चौके और एक छक्का लगाया, जबकि शुरुआत में अधिक सहज दिख रहे बेथेल ने 11 चौके और एक छक्का जड़ा। वह हालांकि प्रसिद्ध कृष्णा की गेंद पर बाउंड्री के पास रोहित शर्मा को कैच देकर शतक से चूक गए।

इसके बाद शानदार लय में चल रहे जो रूट ने 48 गेंदों में नाबाद 74 रन बनाए। यह इस श्रृंखला में उनका लगातार तीसरा अर्धशतक था, जिसकी मदद से इंग्लैंड का स्कोर 350 के पार पहुंचा। अंत में जोस बटलर ने भी सिर्फ 13 गेंदों में नाबाद 41 रन की विस्फोटक पारी खेली।

गुरनूर बराड़ के लिए यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का कठिन अनुभव साबित हुआ और उन्होंने अपने 10 ओवर में लगभग 100 रन लुटा दिए।पारी की शुरुआत में युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव को लॉर्ड्स के प्रसिद्ध ढलान (स्लोप) पर अपनी लेंथ नियंत्रित करने में दिक्कत हुई। बेथेल ने उनकी गेंद पर डीप मिडविकेट के ऊपर से छक्का लगाया और फिर मिडविकेट और मिड-ऑन के बीच शानदार चौका भी जड़ा।

लंबे समय बाद इस प्रारूप में वापसी कर रहे अर्शदीप सिंह भी अपनी लाइन पर नियंत्रण नहीं रख सके, जबकि प्रसिद्ध कृष्णा ने कई बार बेथेल को परेशान किया, लेकिन बीच-बीच में ढीली गेंदें भी फेंकीं, जिनका बल्लेबाजों ने पूरा फायदा उठाया।

बेथेल ने केवल 51 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और इंग्लैंड ने 16वें ओवर में ही 100 रन पूरे कर लिए। तब तक भारतीय गेंदबाज 15 चौके खा चुके थे और उनकी लाइन-लेंथ इतनी खराब रही कि दोनों सलामी बल्लेबाज आसानी से लय में आ गए। पूरी पारी में भारतीय गेंदबाजों ने 42 चौके और छह छक्के खाए।

इंग्लैंड ने लॉर्ड्स के मैदान पर बनाया सबसे बड़ा स्कोर, 387 रन ठोके भारत के खिलाफ

ENGvsIND इंग्लैंड ने लंदन के लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान में इतिहास रचते हुए भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ निर्धारित 50 ओवरों में 387 रन बनाए। इस पारी में बहुत सारे रिकॉर्ड बने। भारत के खिलाफ बेन डकेट और जैकब बेथल ने सर्वाधिक 193 रनों की साझेदारी की। यह लॉर्ड्स पर सबसे बड़ी सलामी साझेदारी थी। इसके अलावा बेन डकेट ने 140 रन बनाए जो इस मैदान पर किसी भी बल्लेबाज का एकदिवसीय प्रारुप में सर्वाधिक स्कोर है।

भारतीय गेंदबाजी के हाल बेहाल रहे। सिर्फ प्रसिद्ध कृष्णा को 2 विकेट मिले वहीं। प्रिंस यादव को 1 विकेट मिला। भारत को अगर यह मैच जीतना है तो एकदिवसीय प्रारुप में रिकॉर्ड रन चेज करना होगा। भारत के लिए सबसे महंगे गुरनूर बरार रहे जिन्होंने 10 ओवर में 97 रन दिए। 

इंग्लैंड ने पहले दस ओवर में 58 रन बनाए। 10 से 40 ओवर में 210 रन बनाए। और अंतिम 10 ओवर में 126 रन बनाए। इसमें से 62 रन अंतिम 3 ओवरों में आए।आज इंग्लैंड ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया। जसप्रीत बुमराह की कमी भारतीय गेंदबाजों को बहुत खली जो घुटने की चोट से बाहर रहे।