बच्चों को वसीयत में देनी चाहिए प्रॉपर्टी या जीवनकाल में कर देना चाहिए गिफ्ट? एक्सपर्ट से जानिए किसमें है ज्यादा फायदा

अपनी जीवनभर की कमाई और संपत्ति को बच्चों के नाम ट्रांसफर करना हर माता-पिता का एक बड़ा फैसला होता है। अक्सर विरासत या वसीयत से जुड़े फैसले माता-पिता के न रहने के बाद ही परिवार में चर्चा का विषय बनते हैं। लेकिन ऐसे में अक्सर प्रॉपर्टी को लेकर इसके दावेदारों, भाई-बहनों में विवाद और मतभेद पैदा होते भी हम देखते हैं। ऐसे में यह सवाल बहुत जरूरी हो जाता है कि क्या बच्चों को संपत्ति वसीयत के जरिए देनी चाहिए या अपने जीवनकाल में ही गिफ्ट (कर देनी चाहिए?

कानूनी और फाइनेंस एक्सपर्ट के मुताबिक अपने जीवनकाल में ही सरप्लस प्रॉपर्टी को गिफ्ट कर देना एक समझदारी भरा विकल्प हो सकता है। इससे माता-पिता अपने जीवनकाल में ही अपने इरादों को स्पष्ट कर सकते हैं, बच्चों की आशंकाओं को दूर कर सकते हैं और किसी भी मतभेद को समय रहते सुलझा सकते हैं।

…लेकिन सबसे पहले अपनी फाइनेंशियल सिक्यॉरिटी सुनिश्चित करें

अपने जीवनकाल में बच्चों को प्रॉपर्टी या धन गिफ्ट करने की योजना बनाते समय वरिष्ठ नागरिकों को सबसे पहले ये बुनियादी बात समझनी चाहिए कि देने से ज्यादा जरूरी उनके लिए ये सवाल है कि वो खुद के लिए कितना बचाकर रखें। एक्सपर्ट्स की साफ राय है कि माता-पिता को सबसे पहले अपना जीवनस्तर बनाए रखने, नियमित खर्चों को पूरा करने,भविष्य के स्वास्थ्य और इलाज संबंधी जरूरतों के लिए पर्याप्त फंड और प्रॉपर्टी अलग रख लेनी चाहिए। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ होने वाले अचानक के खर्चों और इमर्जेंसी के लिए एक बफर रखना बेहद जरूरी है। ऐसा इसलिए ताकि संपत्ति गिफ्ट करने के बाद उन्हें फाइनेंशियली अपने बच्चों पर निर्भर न होना पड़े।

दिल्ली हाई कोर्ट की वकील विनीता सेजवाल का कहना है कि लाइफटाइम गिफ्टिंग प्लान की नींव गिफ्ट देने वाले के अपने वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने पर टिकी होती है। वरिष्ठ नागरिकों को अपने जीवनस्तर को बनाए रखने,नियमित खर्चों को पूरा करने और भविष्य की चिकित्सीय व स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए पर्याप्त धनराशि अलग रखनी चाहिए। साथ ही अप्रत्याशित परिस्थितियों के लिए पर्याप्त रिजर्व भी रखना चाहिए।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके लिए कोई तय मानक फॉर्मूला नहीं हो सकता। यह कैलकुलेशन वरिष्ठ नागरिक की आय, कुल संपत्ति, उनकी देनदारियों और वित्तीय जरूरतों पर निर्भर करती है। सिर्फ वही संपत्ति या धन बच्चों को गिफ्ट करने के लिए माना जाना चाहिए जो इन सभी जरूरतों को पूरा करने के बाद वास्तव में सरप्लस हो।

जीवनकाल में गिफ्ट देने से उत्तराधिकार क्यों आसान हो जाता है?

अपने जीवनकाल में संपत्ति ट्रांसफर करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि माता-पिता अपनी उपस्थिति में ही अपने फैसलों की वजह बता सकते हैं। यह बात तब और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है जब बच्चों को अलग-अलग मूल्य या अलग-अलग प्रकार की संपत्तियां दी जा रही हों।

दिल्ली हाई कोर्ट की वकील गुडीपति गायत्री कश्यप के मुताबिक,’मौत के बाद पूरी संपत्ति को बंटवारे के लिए छोड़ने की तुलना में जीवनकाल में गिफ्ट देना उत्तराधिकार का एक बहुत अधिक प्रभावी तरीका हो सकता है। यह माता-पिता को अपने इरादों को स्पष्ट करने, बच्चों के बीच की चिंताओं को दूर करने और अपनी मौजूदगी में मतभेदों को सुलझाने का मौका देता है।”

अक्सर माता-पिता के निधन के बाद विवाद सिर्फ कानूनी हक तक सीमित नहीं रहते बल्कि इस बात पर भी बहस होती है कि माता-पिता की सेवा किसने ज्यादा की, उन्हें किसने पैसा ज्यादा दिया, या किसी एक बच्चे को ज्यादा तरजीह दी गई या नहीं। इसीलिए ट्रांसपेरेंसी बहुत जरूरी है। अगर माता-पिता असमान रूप से गिफ्ट दे रहे हैं तो उन्हें इसके पीछे के कारणों को स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही यह गिफ्टिंग प्लान वसीयत सहित अन्य व्यापक उत्तराधिकार योजनाओं से मेल खाता होना चाहिए।

कैश, शेयर्स या प्रॉपर्टी: क्या गिफ्ट करना ज्यादा बेहतर?

जीवनकाल में संपत्ति देने के लिए कोई एक एसेट क्लास सबसे बेहतर नहीं कहा जा सकता। यह फैसला लिक्विडिटी की जरूरत, टैक्स के नियमों और इस बात पर निर्भर करता है कि क्या वरिष्ठ नागरिक को खुद उस संपत्ति से आय या व्यक्तिगत उपयोग की जरूरत है या नहीं। कैश ट्रांसफर करने में सबसे आसान है और जिसे मिलता है उसे तुरंत लिक्विडिटी मिल जाती है। लिस्टेड शेयर्स और म्यूचुअल फंड को भी ट्रांसफर करना और इनके डॉक्युमंट्स तैयार करना आसान होता है। प्रॉपर्टी, जमीन और सोना की बात करें तो अगर आपका उद्देश्य ऐसी संपत्तियों को पास ऑन करना है जिनका मूल्य समय के साथ बढ़ता है तो इन्हें चुना जा सकता है।

हालांकि, अचल संपत्ति मामले में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत होती है क्योंकि यह लिक्विड नहीं होती और न ही इसे आसानी से बांटा जा सकता है। इसके अलावा अचल संपत्ति के ट्रांसफर में वैल्युएशन, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का खर्च आता है।

गांधी लॉ एसोसिएट्स के पार्टनर राहिल पटेल कहते हैं कि वरिष्ठ नागरिकों को अपने जीवनकाल में धन या संपत्ति तभी ट्रांसफर करनी चाहिए जब वे अपने अपेक्षित रहने के खर्चों, स्वास्थ्य सेवा, आपात स्थितियों और दीर्घायु जोखिमों को आराम से पूरा करने के लिए पर्याप्त संपत्तियों को सुरक्षित कर लें। प्राथमिकता वित्तीय स्वतंत्रता होनी चाहिए, न कि संपत्ति देने के बाद बच्चों पर निर्भर हो जाना।

सही कानूनी डॉक्युमेंटेशन है बेहद जरूरी

जीवनकाल में दिए जाने वाले किसी भी गिफ्ट को महज एक अनौपचारिक पारिवारिक समझ नहीं मानना चाहिए। खासकर जब बड़ी संपत्ति शामिल हो, तो उसका सही डॉक्युमेंटेशन होना जरूरी है। राहिल पटेल के अनुसार, अचल संपत्ति (मकान, जमीन आदि) के मामले में एक रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड की जरूरत होती है। इसके लिए राज्य के नियमों के अनुसार स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क देना पड़ सकता है।

दस्तावेजीकरण तब और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है जब बच्चों के बीच संपत्ति का असमान रूप से बांटी जा रही हो। सही लिखापढ़ी न होने पर भविष्य में जबरदस्ती संपत्ति लेने, दबाव डालकर प्रॉपर्टी ट्रांसफर कराने जैसे आरोप लग सकते हैं और मामला विवादित हो सकता है।

जीवनकाल में संपत्ति गिफ्ट करने का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी सारी धन-दौलत बांट दें। इसका सही उद्देश्य यह है कि जब माता-पिता खुद वित्तीय रूप से सुरक्षित हों और अपने इरादों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में सक्षम हों तब वे अपनी सरप्लस प्रॉपर्टी को प्लान बनाकर ट्रांसफर कर दें। जरूरत के हिसाब से फाइनेंशियल रिजर्व, ट्रांसपेरेंसी और सही लीगल डॉक्यूमेंटेशन के साथ किया गया ट्रांसफर अगली पीढ़ी को बिना किसी पारिवारिक कलह के प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने का एक सुरक्षित रास्ता बनाता है।

 

 

टैक्स बचाते-बचाते कहीं आप तो नहीं कर रहे ये 3 बड़ी गलतियां? समझें स्मार्ट सेविंग का गणित

अयोध्या कचहरी लॉकअप से शातिर चोर फरार, गार्द को चकमा देकर भागा दीपक; दो पुराने फरार बंदियों का भी नहीं मिला सुराग

अयोध्या कचहरी लॉकअप से शातिर चोर फरार, गार्द को चकमा देकर भागा दीपक; दो पुराने फरार बंदियों का भी नहीं मिला सुराग

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धार्मिक नगरी अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए गुरुवार दोपहर कचहरी परिसर से एक बंदी पुलिस कस्टडी से फरार हो गया। चोरी के आरोप में जिला कारागार में बंद दीपक कुमार उर्फ दीपू को कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया था, जहाँ से वह पुलिसकर्मियों को चकमा देकर रफूचक्कर हो गया। घटना के बाद कचहरी परिसर में हड़कंप मच गया है।

​बाथरूम जाने के दौरान दिया झांसा

 

दर्शननगर (थाना कोतवाली अयोध्या) निवासी दीपक कुमार को गत 10 जून को कैंट पुलिस ने मोबाइल टावर का तार चोरी करने के आरोप में जेल भेजा था। गुरुवार को पेशी के बाद जब पुलिसकर्मी उसे न्यायालय कक्ष से वापस लाकअप ले जा रहे थे, तभी गार्द के कुछ पुलिसकर्मी बाथरूम चले गए। इसी ढिलाई का फायदा उठाकर दीपक शेष पुलिसकर्मियों को चकमा देकर गायब हो गया।

 

​सघन तलाशी अभियान, CCTV खंगाल रही पुलिस

बंदी के भागने की सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी नगर (CO City) श्रीयश त्रिपाठी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने कचहरी परिसर की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया:

 

​स्थानीय दबिश: आरोपी के गृहक्षेत्र दर्शननगर में पुलिस टीम भेजी गई है।

 

​नाकाबंदी: शहर के प्रमुख रास्तों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

 

​सीसीटीवी निगरानी: कचहरी परिसर व आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

 

​सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

अयोध्या कचहरी और जिला कारागार की सुरक्षा पर यह पहली बार सवाल नहीं उठा है। इससे पहले भी जेल व कस्टडी से दो बंदी फरार हो चुके हैं, जिनका पुलिस आज तक कोई सुराग नहीं लगा सकी है। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

योगी सरकार की ओडीओपी योजना से बदली राजन की तकदीर, टेराकोटा ने दिलाई नई पहचान

योगी सरकार की ओडीओपी योजना से बदली राजन की तकदीर, टेराकोटा ने दिलाई नई पहचान

 

Yogi Government ODOP Scheme

Yogi Government ODOP Scheme: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के संकल्प के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार की ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना इसी विजन का प्रमुख आधार बनकर उभरी है। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित गोरखपुर के रहने वाले टेराकोटा शिल्पकार राजन प्रजापति की सफलता की कहानी एक सशक्त उदाहरण है कि सरकार की योजनाएं और युवाओं का कौशल मिलकर किस प्रकार आर्थिक उन्नति का माध्यम बन सकते हैं। 

लगभग डेढ़ करोड़ का वार्षिक कारोबार करने वाले सफल उद्यमी बने राजन

गोरखपुर के औरंगाबाद, लंगड़ी गुलरिहा गांव के निवासी राजन प्रजापति बताते हैं कि उन्होंने अपने पुश्तैनी टेराकोटा शिल्प को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढालकर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। कभी सीमित आय और संसाधनों के बीच संघर्ष करने वाले राजन आज लगभग डेढ़ करोड़ रुपए का वार्षिक कारोबार करने वाले सफल उद्यमी बन चुके हैं। उनकी इकाई में 25 से अधिक कारीगरों को नियमित रोजगार भी मिला है, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं।

योगी सरकार की ओडीओपी योजना बनी परिवर्तन का माध्यम

राजन प्रजापति बताते हैं कि योगी सरकार की महत्वाकांक्षी ओडीओपी योजना उनके लिए परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बनी। योजना के तहत आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार तक पहुंच मिलने से उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। इलेक्ट्रिक चाक और आधुनिक मशीनों के उपयोग से उनका कारोबार तेजी से बढ़ा और आज उनके उत्पाद देश के अनेक बड़े शहरों में भेजे जा रहे हैं।

टेराकोटा उत्पादों को जीआई टैग मिलने से मिली राष्ट्रीय पहचान

गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों को जीआई टैग मिलने से उनकी पहचान राष्ट्रीय सीमाओं से निकलकर वैश्विक बाजार तक पहुंची है। सरकार द्वारा स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने की नीति ने कारीगरों और उद्यमियों को नया आत्मविश्वास दिया है। यही कारण है कि त्योहारों के मौसम में उनकी इकाई से 18 से 24 ट्रक तक उत्पाद विभिन्न राज्यों में भेजे जाते हैं। राजन प्रजापति की सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए भी प्रेरणा है। उनकी कार्यशाला प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित हो चुकी है, जहां युवाओं को टेराकोटा शिल्प की बारीकियां सिखाई जाती हैं। यह पहल न केवल पारंपरिक कला को संरक्षित कर रही है, बल्कि युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर भी प्रेरित कर रही है।

‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ युवाओं को दिला रहा नई पहचान 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ स्थानीय प्रतिभाओं, पारंपरिक उत्पादों और युवा उद्यमियों को नई पहचान देने पर आधारित है। राजन प्रजापति जैसे सफल उद्यमी इस बात के प्रमाण हैं कि सही नीति, तकनीक और बाजार का सहयोग मिलने पर उत्तर प्रदेश का युवा न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा कर सकता है।

ओडीओपी योजना से स्थानीय उत्पादों को मिल रहा वैश्विक मंच  

उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना का उद्देश्य प्रत्येक जिले के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों को प्रोत्साहित करना, कारीगरों और उद्यमियों की आय बढ़ाना तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है। योजना के तहत प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, वित्तीय सहयोग, आधुनिक उपकरण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ओडीओपी योजना के माध्यम से प्रदेश के अनेक पारंपरिक उत्पाद नई पहचान हासिल कर रहे हैं। गोरखपुर का टेराकोटा शिल्प भी इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने स्थानीय कला को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ रोजगार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है।

अमेरिकन वॉरशिप जॉर्ज वॉशिंगटन की अरब सागर में एंट्री:250 दिन से तैनात अब्राहम लिंकन की जगह ली, ईरान के करीब अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बढ़ी

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर शिप USS जॉर्ज वॉशिंगटन ने पश्चिम एशिया में ऑपरेशन शुरू कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। जॉर्ज वॉशिंगटन अरब सागर क्षेत्र में USS अब्राहम लिंकन की जगह पहुंचा है। अब्राहम लिंकन लगातार 250 दिनों से ज्यादा समय से इस इलाके में तैनात था। जॉर्ज वॉशिंगटन इससे पहले साउथ चाइना सी में तैनात था USS जॉर्ज वॉशिंगटन इससे पहले साउथ चाइना सी में तैनात था। हाल ही में उसने वियतनाम के दा नांग में पोर्ट कॉल भी पूरा किया है। यह पहली बार नहीं है, जब यह एयरक्राफ्ट कैरियर अरब सागर में पहुंचा है। 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में भी इसने फारस की खाड़ी में कई ऑपरेशन किए थे। इनमें इराक के कुवैत पर हमले के दौरान की गई तैनाती, 1994 का ऑपरेशन विजिलेंट वॉरियर, 1998 का ऑपरेशन डेजर्ट थंडर और 2002 में अफगान युद्ध के दौरान ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम शामिल हैं। दावा- वॉरशिप अब्राहम लिंकन से नौसैनिकों ने कूदने की कोशिश की थी अमेरिकी वॉरशिप USS अब्राहम लिंकन पर तैनात अमेरिकी नौसैनिक मानसिक और शारीरिक तनाव से गुजर रहे हैं। नेवी टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जहाज पर तैनात 6 अमेरिकी सैन्यकर्मियों ने जहाज से समुद्र में कूदने की कोशिश की थी। USS अब्राहम लिंकन करीब 9 महीने से समुद्र में है। ये वॉरशिप ईरान जंग के दौरान बिना किसी पोर्ट पर रुके समुद्र में चल रहा है। इस पर करीब 5,000 अमेरिकी मरीन तैनात हैं।
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केन-बेतवा लिंक परियोजना: अफवाहों का गुबार बनाम जमीनी हकीकत, जानिए दावों के पीछे का सच

केन-बेतवा लिंक परियोजना: अफवाहों का गुबार बनाम जमीनी हकीकत, जानिए दावों के पीछे का सच

छतरपुर। बुंदेलखंड की जीवन रेखा कही जाने वाली महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना हाल के दिनों में एक बार फिर राजनीतिक चर्चा और विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में आ गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और स्थानीय नेताओं के बयानों के बाद इस परियोजना से जुड़े पुनर्वास, मुआवजे और विस्थापन को लेकर कई तरह के गंभीर दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, मध्य प्रदेश शासन और स्थानीय प्रशासन के आधिकारिक आंकड़े इन राजनीतिक दावों से बिल्कुल अलग एक बेहद संवेदनशील और पारदर्शी सच्चाई बयां करते हैं।

इस विशेष रिपोर्ट में हम परियोजना को लेकर फैलाए जा रहे प्रमुख दावों और उनके पीछे की वास्तविक सच्चाई का विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं: 

 

आबादी और विस्थापन के आंकड़ों का सच-

आरोप: विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक वीडियो में यह दावा किया जा रहा है कि इस परियोजना के कारण चारों बांधों (मझगवां, रूंझ, केन-बेतवा और नेगुवा) से लगभग 50,000 की आबादी प्रभावित हो रही है।


वास्तविक तथ्य: प्रशासन के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार यह दावा पूरी तरह भ्रामक है। वास्तव में, चारों परियोजनाओं से प्रभावित होने वाली कुल आबादी लगभग 23,000 ही है। इसका वास्तविक ग्रामवार विवरण इस प्रकार है:


मझगवां परियोजना: इसके डूब क्षेत्र से केवल 1 पूर्ण और 7 आंशिक गांव प्रभावित हैं, जिससे 1,450 परिवारों की कुल 5,640 आबादी प्रभावित हो रही है।


रूंझ परियोजना: डूब क्षेत्र से केवल 1 पूर्ण और 1 आंशिक गांव के 730 परिवारों की 1,906 आबादी प्रभावित है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना (पन्ना व छतरपुर): डूब क्षेत्र से 7 पूर्ण और 2 आंशिक गांव प्रभावित हैं, जबकि क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए 14 गांवों की भूमि अर्जित की गई है, जिससे कुल 5,039 परिवारों की 15,661 आबादी प्रभावित हो रही है।


नेगुवा लघु परियोजना: इस परियोजना से विस्थापन पूरी तरह शून्य है और प्रभावितों की संख्या पूरी तरह निरंक (Zero) है। 

 

रिकॉर्ड-तोड़ विशेष पुनर्वास पैकेज और 96% भुगतान-केन-बेतवा परियोजना के तहत प्रभावित 22 गांवों के कुल 5,039 विस्थापित परिवारों के पात्र हितग्राहियों के लिए ₹12.50 लाख प्रति परिवार की दर से कुल ₹604.745 करोड़ का विशेष पुनर्वास पैकेज स्वीकृत किया गया है। संवेदनशीलता की बड़ी मिसाल यह है कि इस स्वीकृत राशि का 96 प्रतिशत भुगतान पहले ही हितग्राहियों को किया जा चुका है। यह मुआवजा वितरण करीब डेढ़ वर्ष पूर्व ही पूरा कर लिया गया था।
 

इसके साथ ही, छतरपुर जिले के ग्राम करीदिया में 179 प्लॉट, ग्राम राईपुरा में 154 प्लॉट और ग्राम सलैया में 70 प्लॉटों का आवंटन करके कॉलोनी के रूप में पुनर्वास की भव्य व्यवस्था की जा रही है, जहां विद्युत और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं दी जा रही हैं। 

 

वर्षाकाल में विस्थापन के आरोपों का खंडन-आरोप है कि मानसून और वर्षा ऋतु के दौरान प्रभावित परिवारों को उचित वैकल्पिक व्यवस्था के बिना जबरन उनके घरों से बेघर किया गया। जबकि वास्तविक तथ्य यह है कि, वर्षाकाल में लोगों को बेघर करने का आरोप पूरी तरह निराधार है, क्योंकि पन्ना जिले के 08 प्रभावित गांवों का पुनर्व्यवस्थापन वर्षाकाल शुरू होने से बहुत पहले ही सुरक्षित तरीके से संपन्न कर लिया गया था। वर्तमान में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए ऐसी कोई भी दमनकारी कार्रवाई नहीं की जा रही है। विस्थापित परिवारों ने स्वेच्छा से इस विशेष एकमुश्त पुनर्वास पैकेज का विकल्प चुना है। 

 

पर्यावरण, बाघ और वन संरक्षण के कड़े इंतजाम


आरोप: परियोजना के कारण 21 आदिवासी बहुल गांवों के साथ लगभग 40 लाख वृक्षों और पन्ना टाइगर रिजर्व के 100 से अधिक बाघों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
 

वास्तविक तथ्य: परियोजना का क्रियान्वयन शुरू करने से पहले कड़े नियमों के तहत 'इनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट' (EIA) के अंतर्गत पर्यावरण मंजूरी प्राप्त की गई है। पन्ना टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए एक 'इंटीग्रेटेड लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान' तैयार किया गया है। भारत सरकार की शर्तों के अनुसार वन विभाग द्वारा 'कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट प्लान' और 'वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट प्लान' पर कड़ाई से काम किया जा रहा है। साथ ही, स्टेज-2 वन स्वीकृति के कड़े नियमों के तहत एफ.आर.एल (FRL) से 10 मीटर नीचे तक वृक्षों की कटाई नहीं की गई है। इसके अलावा, प्रभावित वन क्षेत्र में वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत पात्र परिवारों की संख्या शून्य (निरंक) पाई गई है। 

 

सुप्रीम कोर्ट और NGT में कोई रोक नहीं

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि परियोजना से जुड़े कानूनी विषयों पर सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में प्रकरण लंबित हैं, जिससे काम पर रोक लग सकती है।


वास्तविक तथ्य: परियोजना क्षेत्र के लिए 6017 हेक्टेयर वन भूमि की स्टेज-1, स्टेज-2 और वाइल्ड लाइफ स्वीकृतियों की सभी शर्तों का पूर्ण पालन किया जा रहा है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट या एनजीटी में परियोजना से संबंधित कोई भी अदालती मामला प्रचलन में या लंबित नहीं है।

 

पुलिस कार्रवाई और महिलाओं के उत्पीड़न के दावों की सच्चाई

वीडियो में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन स्थल पर 2000 से 5000 पुलिस बल तैनात किया गया, तथा रात्रि 2:00 बजे पुलिस ने 50 महिलाओं को लगभग 10 किलोमीटर तक दौड़ाकर खदेड़ा।
 

वास्तविक तथ्य: प्रशासन ने महिलाओं को रात में प्रताड़ित करने या दौड़ाने के आरोपों को पूरी तरह असत्य और भ्रामक करार दिया है। हकीकत यह है कि दौधन बांध निर्माण स्थल पर असामाजिक तत्वों द्वारा पथराव करने और सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ कर शासकीय कार्य को जबरन रोकने की कोशिश की गई थी। इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा केवल न्यूनतम आवश्यक पुलिस बल की मदद ली गई थी और उपद्रवियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं।

 

संवेदनशीलता: मुख्यमंत्री का अतिरिक्त बजट और प्रशासन का ऐतिहासिक फैसला

इस विवाद के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पन्ना जिले के लिए ₹202.50 करोड़ का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया है। इसी प्रकार, छतरपुर के नवागत कलेक्टर मृणाल मीणा ने 11 अगस्त 2026 को ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्रभावित 14 गांवों में दोबारा सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं ताकि कोई भी वास्तविक पात्र व्यक्ति मुआवजे से वंचित न रहे। इसके साथ ही, 5 गांवों के 59 लोगों के लिए ₹7.37 करोड़ की अतिरिक्त राशि भी स्वीकृत कर दी गई है। 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके बालिगों (कट-ऑफ तिथि मार्च 2024) को भी लाभ देने के लिए 313 हितग्राहियों के विशेष पैकेज के भुगतान की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। 

 

दावों के पीछे का असली खेल: राजनीतिक महत्वाकांक्षा 

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे आंदोलन के पीछे कुछ लोगों की व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छिपी हुई हैं। आंदोलन का मुख्य चेहरा बने अमित भटनागर (एनजीओ जय किसान संगठन के संचालक) आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर बिजावर विधानसभा सीट से 2018 (1.34% वोट) और 2023 (2.49% वोट) का चुनाव बुरी तरह हार चुके हैं। उनकी सहयोगी दिव्या अहिरवार (25 वर्षीय) भी 'आप' की ही पार्षद हैं।

 

विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस में अपना वजूद तैयार करने और राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए अमित भटनागर द्वारा आदिवासियों को ढाल बनाया जा रहा है। वास्तव में आंदोलन स्थल पर स्थानीय आदिवासियों की संख्या काफी कम है। इसमें वे लोग अधिक शामिल हैं जो पूर्व में अन्य परियोजनाओं (मझगवां और रूंझ बांध) में ₹5 लाख तक का मुआवजा उठा चुके हैं। इन्हें संवेदनशीलता दिखाते हुए राज्य सरकार ने 10.07.2026 को केन-बेतवा की तर्ज पर ही ₹12.50 लाख प्रति परिवार का विशेष पैकेज स्वीकृत कर दिया है, जिसका भुगतान वर्तमान में प्रक्रियाधीन है। इसके बावजूद, उनके परिवारों की बढ़ी हुई बालिग सदस्य संख्या के आधार पर और अधिक मुआवजा दिलाने का झूठा आश्वासन देकर उन्हें भड़काया जा रहा है।

 

केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के विकास की नई इबारत लिखने को तैयार है। पारदर्शी कानूनी प्रक्रियाओं, बाजार मूल्य से अधिक मुआवजे और संवेदनशील पुनर्वास नीतियों के बावजूद, राजनीतिक रोटियां सेंकने और आगामी चुनावों में खुद को स्थापित करने के लिए कुछ राजनीतिक चेहरों द्वारा इसे विवाद का मुद्दा बनाया जा रहा है।

Don 3 Row: रणवीर सिंह के पिता IMPPA से मिले, फरहान अख्तर के 45 करोड़ रुपये के दावे के मामले में दी अर्जी

Don 3 Row: ‘डॉन 3’ से रणवीर सिंह के बाहर होने को लेकर चल रहे विवाद के बीच मंगलवार को एक्टर के पिता जगजीत सिंह भवनानी ने इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) से मुलाकात की। खबरों के मुताबिक, सिंह के पिता ने इस विवाद में फरहान अख्तर की कंपनी ‘एक्सेल एंटरटेनमेंट’ के 45 करोड़ रुपये के दावे के खिलाफ एसोसिएशन में एक अर्जी दी है।

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के अनुसार, चूंकि सिंह के पिता ने अर्जी दाखिल कर दी है, इसलिए IMPPA की लीगल टीम दस्तावेजों की जांच करेगी और फिर ऐसा समाधान निकालेगी जो दोनों पक्षों के लिए उचित हो। IMPPA के प्रेसिडेंट अभय सिन्हा ने भी पुष्टि की कि मीटिंग ‘अच्छी तरह’ से हुई और कहा कि एसोसिएशन रणवीर की अपील की समीक्षा करने के बाद ही अगला कदम उठाएगी।

‘डॉन 3’ का क्या हुआ?

फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनने वाली ‘डॉन 3’ का ऐलान अगस्त 2023 में किया गया था। रणवीर सिंह को वह मशहूर रोल निभाना था जिसे पहले शाहरुख खान ने निभाया था। इस ऐलान के साथ एक प्रोमोशनल वीडियो भी जारी किया गया था जिसमें रणवीर को नए डॉन के तौर पर दिखाया गया था।

हालांकि, ‘धुरंधर’ की सफलता के बाद रणवीर इस प्रोजेक्ट से हट गए। कई ऑनलाइन रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेकर्स के साथ क्रिएटिव मतभेदों के कारण सिंह ने फिल्म छोड़ दी। कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि रणवीर प्रोडक्शन में बार-बार हो रही देरी और फाइनल स्क्रिप्ट तैयार न होने से खुश नहीं थे।

शुरू में जो कास्टिंग में एक आम बदलाव लग रहा था, वह बाद में कानूनी मामला बन गया। अख्तर के एक्सेल एंटरटेनमेंट ने 45 करोड़ रुपये के मुआवज़े की मांग की और फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने एक्टर के खिलाफ असहयोग का निर्देश जारी किया, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

Gold Price Today: अमेरिका के एक ऐलान से रॉकेट बना सोना! $4500 के पार पहुंची कीमतें, जानिए क्या अब और बढ़ेगा भाव

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में सोने की कीमतों (Gold Prices) में जोरदार उछाल देखने को मिल रहा है। जून की शुरुआत के बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4500 डॉलर प्रति औंस के पार बना हुआ है। COMEX गोल्ड 19 अगस्त को $4,571.80 प्रति औंस के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि गुरुवार को इसमें मामूली 0.05 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह $4,542.90 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था।

घरेलू बाजार की बात करें तो शुक्रवार (14:58 IST) को घरेलू MCX पर सोने की हाजिर कीमत करीब 156571 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रही। वहीं 5 अक्टूबर के कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.07 फीसदी की बढ़त के साथ 158729 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले बुधवार (19 अगस्त) को पीएम फिक्सिंग (PM Fixing) में LBMA स्पॉट गोल्ड की कीमत $4,460.70 प्रति औंस दर्ज की गई थी।

अमेरिकी खजाने के एक फैसले से क्यों आई तेजी?

सोने की कीमतों में इस तेज उछाल के पीछे यूएस ट्रेजरी का एक बड़ा फैसला है। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबी अवधि की प्रतिभूतियों की बायबैक बढ़ाने के कदम ने बॉन्ड यील्ड को नीचे धकेल दिया और अमेरिकी डॉलर को कमजोर कर दिया। इससे सोने की कीमतों को पुश मिल गया।

अमेरिकी ट्रेजरी के इस कदम से 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड गिरकर क्रमशः 4.64 प्रतिशत और 5.18 प्रतिशत पर आ गई। इसके अलावा शुरुआती कारोबार में डॉलर में 0.76 फीसदी की गिरावट आई, जिससे सोने जैसे डॉलर डॉमिनेटेड असेट्स की डिमांड को मजबूत समर्थन मिला। बोनांजा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के मुताबिक जैसे ही यील्ड गिरी और डॉलर कमजोर हुआ बिना ब्याज वाले एसेट यानी सोने के लिए माहौल अच्छा हो गया। बाजार ने इसे दीर्घकालिक ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी को रोकने और बॉन्ड मार्केट के लंबे सिरे पर लिक्विडिटी में सुधार के प्रयास के रूप में देखा। इसके बाद यील्ड गिरी और डॉलर कमजोर हुआ, जिसने सोने के लिए एक बहुत ही अनुकूल स्थिति बनाई।

सिर्फ ट्रेजरी का फैसला नहीं, ये फैक्टर भी दे रहे सहारा

हालांकि, सोने में आई इस तेजी के पीछे सिर्फ अमेरिकी ट्रेजरी का ऐलान ही एकमात्र कारण नहीं है। वीटी मार्केट्स के मार्केट एनालिस्ट रुचित ठाकुर के मुताबिक, ट्रेजरी का ऐलान एक दिन की तेजी को एक्सप्लेन तो करता है, लेकिन सिर्फ यही एक फैक्टर नहीं है। रुचित ठाकुर के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी रुख और मौद्रिक नीति को लेकर जताई जा रही उम्मीदें, लगातार बनी हुई जियोपॉलिटिरल अनिश्चितताएं और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार की जा रही मांग जैसे फैक्टर भी इसे सपोर्ट कर रहे हैं।

क्या निवेशकों को इस भाव पर खरीदना चाहिए सोना?

सोने के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद नए और पुराने निवेशकों के लिए विशेषज्ञों ने अहम सलाह दी है। वीटी मार्केट्स के रुचित ठाकुर का सुझाव है कि ऊंचे स्तरों पर तेजी का पीछा करना निवेशकों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। जो लोग पहले से सोने में निवेश कर चुके हैं, वो अपनी होल्डिंग को बनाए रखने पर विचार कर सकते हैं।

नए निवेशकों को एक बार में बड़ा दांव लगाने या तेज उछाल के तुरंत बाद अग्रेसिव इन्वेस्टमेंट करने की बजाय कीमतों में गिरावट आने पर धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए।

आगे क्या ट्रैक करें?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने की आगे की चाल तय करने के लिए निवेशकों को आने वाले दिनों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स, फेडरल रिजर्व के संकेतों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर बारीक नजर रखनी होगी।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Super 30 में बैकग्राउंड एक्टर से Operation Safed Sagar में लीड तक | Jamshedpur to Mumbai|Mihir Ahuja

Super 30 में बैकग्राउंड एक्टर से Operation Safed Sagar में लीड तक | Jamshedpur to Mumbai|Mihir Ahuja

माँ बचपन से कहती थीं – “Hero”
लेकिन Mumbai ने इस Hero को सालों तक सिर्फ “No” सुनाया।
19 साल की उम्र में Jamshedpur से Mumbai आए Mihir Ahuja ने सालों तक Auditions दिए। कई बार Audition देने का मौका तक नहीं मिला। फिर Covid के मुश्किल दौर में उनकी बहन ने उनका साथ दिया Audition tapes बनाने से लेकर हर मुश्किल दिन उनका हौसला बढ़ाने तक, वो उनके साथ खड़ी रहीं।

Super 30, Made in Heaven, Feels Like Ishq छोटे- छोटे किरदारों ने उन्हें The Archies और अब Operation Safed Sagar तक ले आया।
मिहिर की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, खुद पर भरोसा बनाए रखने की कहानी है।
क्योंकि हर Rejection आपकी कहानी का Full stop नहीं होता। वो बस अगले Scene से पहले का Pause होता है।

@mihirahuja_

Super 30 में बैकग्राउंड एक्टर से Operation Safed Sagar में लीड तक | Jamshedpur to Mumbai | Mihir Ahuja

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MPPSC Manoj Pal success story: 12वीं में 50% और 40 प्रतियोगी परीक्षाओं की असफलता भी नहीं तोड़ पाई मनोज का हौसला, आखिर फतह किया एमपीपीएससी

MPPSC Manoj Pal success story: मध्य प्रदेश में असिस्टेंट डायरेक्टर (फाइनेंस) बनने तक मनोज पाल का सफर ऐसी झकझोर देने वाली कहानी है, जो सिर्फ प्रेरणा नहीं देती। यह कहानी उनके दर्द और अथक परिश्रम को भी बयां करती है। नर्मदापुरम जिले के खपरिया गांव के रहने वाले मनोज ने लगभग 12 साल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। इस दौरान उन्हें बार-बार मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन 2024 वो सुनहरा साल था, जब उन्हें अपनी बरसों की मेहनत का फल मिला, जब उन्होंने मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (MPPSC) का स्टेट सर्विस एग्जाम पास कर लिया। उनके सफर में आर्थिक तंगी, परिवार का दबाव और कई नाकाम कोशिशें शामिल थीं। फिर भी, उन्होंने कभी अपनी किताबों का साथ नहीं छोड़ा।

12वीं कक्षा में 50% से असिस्टेंट डायरेक्ट (वित्त) तक

मनोज ने अपनी स्कूल की पढ़ाई अपने गांव में पूरी की और कक्षा 12 में लगभग 50% अंकों से पास हुए। घर में आर्थिक तंगी की वजह से उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल था। वह कॉलेज के लिए नर्मदापुरम चले गए और सरकारी परीक्षा की तैयारी करने के साथ ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपना गुजारा किया।

कोविड 19 महामारी के दौरान उनके जीवन का सबसे मुश्किल दौर आया, जब हालात की वजह से उनकी आय रुक गई। वह अपने गांव लौट आए और पढ़ाई जारी रखने के लिए मजदूरी करते हुए पैसों की कमी को पूरा किया। बाद में वे इंदौर चले गए और एक कोचिंग सेंटर में काम करते हुए अपनी तैयारी जारी रखी।

40 असफलताओं की लंबी लिस्ट

इन सालों में, मनोज ने लगभग 40 प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, जिनमें पुलिस कांस्टेबल, फॉरेस्ट गार्ड, पटवारी, ऑडिटर और एडमिनिस्ट्रेटर के पद शामिल थे। उन्होंने कई एमपीपीएससी भर्ती के अलावा एसएससी के एमटीएस, सीएचएसएल और सीजीएल परीक्षाएं भी दीं। इनमें से कई परीक्षाओं में उन्हें आंशिक सफलता मिली, लेकिन अंतिम चयन से दूर रहे।

मुश्किल रहा एमपीपीएससी का सफर

उनका एमपीपीएससी का सफर खास तौर पर मुश्किल था। वह 9 बार परीक्षा में बैठे, हर बार प्रीलिम्स पास किया और आठ बार मेन्स स्टेज तक पहुंचे। वे सात इंटरव्यू के लिए बैठे लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना सके।

डिसिप्लिन के आस-पास बना रूटीन

बार-बार फेल होने के बावजूद, पाल ने पढ़ाई का एक सख्त रूटीन बनाए रखा। वे सुबह 6 बजे लाइब्रेरी पहुंचते और घंटों पढ़ते, दिन में घर लौटकर खाना बनाते, खाते और फिर वापस चले जाते। वे अक्सर आधी रात या 1 बजे तक पढ़ते थे। उनकी तैयारी में रोजाना छह से आठ घंटे पढ़ाई, रेगुलर मॉक टेस्ट और अपनी गलतियों का डिटेल्ड एनालिसिस शामिल था। इसके अलावा, दोस्तों के साथ मुश्किल टॉपिक पर चर्चा और अपनी परीक्षा की रणनीति बनाने के लिए पिछले सालों के प्रश्नपत्र भी हल किए।

खुद पर भरोसा

मनोज का परिवार एक निम्न मध्यम वर्गीय किसान परिवार है। हालांकि उनके परिवार ने उनकी तैयारी में काफी मदद की, लेकिन लंबे समय तक बिना नौकरी के रहना एक बड़ी चिंता थी। उनका परिवार उनकी उम्र और जिम्मेदारियों को लेकर भी परेशान था, जिसमें उनकी बहनों की शादियां भी शामिल थीं। उन्होंने कहा कि गडरिया (गड़रिया) कम्युनिटी से होने का मतलब यह भी था कि उनके आस-पास के लोग उनसे ज्यादा उम्मीद नहीं करते थे। फिर भी, उन्होंने तैयारी जारी रखी।

वह चयन जिसने खत्म किया 12 साल का इंतजार

राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनके चयन से आखिरकार सालों की अनिश्चितता खत्म हुई। उनके परिवार के लिए, यह पल बहुत इमोशनल था। पाल ने अपनी सफलता का क्रेडिट अपने माता-पिता के आशीर्वाद, अपने परिवार के सपोर्ट और मां नर्मदा की कृपा को दिया। उनके परिवार का रिएक्शन उनके प्रयासों में उनके भरोसे को दिखाता है: “भगवान का न्याय देर से मिल सकता है, लेकिन उसे कभी नकारा नहीं जा सकता।”

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Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना ₹4300 चढ़ा, चांदी एक दिन में ₹10000 उछली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 20 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों को पंख लग गए। सोना 4,300 के उछाल के साथ 1,62,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने का तीन महीने का सबसे ज्यादा प्राइस है। चांदी में भी जोरदार तेजी दिखी। इसकी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमजोरी बताई जा रही है।

चांदी 10,000 रुपये के उछाल से 7 हफ्ते की उंचाई पर

20 अगस्त को चांदी में 10,000 रुपये की जोरदार तेजी आई। इससे इसका भाव 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। यह बीते सात हफ्तों में चांदी का सबसे ज्यादा भाव है। इससे पहले 3 जुलाई को चांदी की कीमतें इस लेवल पर थीं। लंबे समय बाद सोने और चांदी में अच्छी तेजी दिखी है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर से नरमी बुलियन को सपोर्ट 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “सोना गुरुवार को बीते दो महीनों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया। इसकी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमजोरी है।” उन्होंने कहा कि डॉलर इंडेक्स तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया है। डॉलर में कमजोरी से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में नरमी दिखी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में नरमी देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 0.95 फीसदी गिरकर 4,475 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर हल्की तेजी के साथ 67 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया।

बेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल के पार 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाया है। उधर, ईरान का कहना है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इस तनातनी की वजह से क्रूड की कीमतों में तेजी जारी है।

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क्रूड में तेजी जारी रहने से महंगाई बढ़ने का डर

अगर लंबे समय तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रहती हैं तो इससे महंगाई बढ़ने का खतरा होगा। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सहित दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इसका सोने की कीमतों पर निगेटिव असर पड़ेगा।