Silver Demand: सोना महंगा होने से चांदी खरीद रहे ग्राहक? इंडस्ट्री बोली- त्योहार और शादी सीजन में बढ़ सकती है डिमांड

Silver Demand: चांदी की मांग में आने वाले महीनों में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। Silver Emporium के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल मेहता का कहना है कि अगस्त से अक्टूबर के बीच आने वाला त्योहार और शादी का सीजन देश की सालाना चांदी खरीद का करीब आधा हिस्सा तय करता है।

उनके मुताबिक, पिछले कुछ समय की कमजोरी के बाद मांग में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। हालांकि यह रिकवरी कितनी मजबूत होगी, यह काफी हद तक चांदी की कीमतों में स्थिरता पर निर्भर करेगा। हाल के महीनों में चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है, जिसकी वजह से कई ग्राहक नई खरीदारी को लेकर सतर्क बने हुए हैं।

बढ़ी है रिटेल मांग

हाल के हफ्तों में चांदी के डिनर सेट, गिफ्टिंग आइटम और शादी-ब्याह से जुड़े प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी है। हालांकि इस खरीदारी का बड़ा हिस्सा पूरी तरह नई मांग नहीं है। कई ग्राहक अपनी पुरानी चांदी देकर नए सामान खरीद रहे हैं।

मेहता के मुताबिक, पिछले दो महीनों की तुलना में बिक्री की मात्रा करीब 30% बढ़ी है। इसके बावजूद कुल कारोबार अभी भी पिछले साल के मुकाबले 25-30% कम बना हुआ है।

महंगे सोने से चांदी को फायदा

सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों का फायदा अब चांदी को मिलता दिख रहा है। कई ग्राहक सोने की बजाय चांदी के गहनों की तरफ रुख कर रहे हैं क्योंकि यह सस्ता विकल्प है। यही वजह है कि कई गोल्ड ज्वेलर्स भी अब चांदी के कारोबार में तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

राहुल मेहता के मुताबिक, पिछले छह महीनों में नए सिल्वर स्टोर खोलने की दिलचस्पी 300% से 400% तक बढ़ी है। इनमें से कई नए स्टोर ऐसे ग्राहकों को ध्यान में रखकर खोले जा रहे हैं, जो महंगे सोने की वजह से चांदी की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।

सप्लाई को लेकर चिंता नहीं

चांदी की सप्लाई को लेकर फिलहाल कोई बड़ी चिंता नहीं है। राहुल मेहता का कहना है कि आयात पर कुछ प्रतिबंधों के बावजूद बाजार में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

इसके अलावा रिसाइक्लिंग भी बढ़ी है। बड़ी संख्या में ग्राहक पुरानी चांदी एक्सचेंज कर रहे हैं, जिससे बाजार में सप्लाई बनी हुई है। उनके मुताबिक, बाजार में चांदी की कोई कमी नहीं है और जरूरत हिसाब से कच्चा माल मौजूद है।

निवेशकों का रुख अभी भी कमजोर

हालांकि निवेशकों की तरफ से मांग अभी कमजोर बनी हुई है। यही वजह है कि बाजार में प्रीमियम में कोई बड़ी तेजी नहीं दिख रही है।

कई निवेशक अभी भी चांदी की कीमतों की दिशा को लेकर असमंजस में हैं। वे कीमतों में ज्यादा स्थिरता आने का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद ही निवेश मांग में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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Siya Goyal: केतन अग्रवाल से शादी के लिए तैयार नहीं थी सिया गोयल, परिवार का था दबाव;’; पुणे कारोबारी हत्याकांड में पुलिस का बड़ा दावा

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले पर घूमने गए  युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस जांच ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस का दावा है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी। वह अपने परिवार के दबाव में यह रिश्ता स्वीकार की थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि यही तनाव इस कथित साजिश की एक अहम वजह हो सकता है।

पहले हादसा माना गया था मामला

जांच में सामने आया कि 18 जून को ‘ट्रेकिंग’ के दौरान सिया (20) और उसके प्रेमी चेतन (22) ने 26 वर्षीय केतन को खाई में कथित तौर पर धक्का देकर मार डाला। वह लोहागढ़ किले में एक चट्टान से गिर गए थे। उस समय दुर्घटनावश हुई मौत मानकर मामला दर्ज किया गया था। सिया ने भी केतन के परिजनों को बताया था कि ट्रेकिंग के दौरान उनका पैर फिसल गया था, जिससे वह खाई में जा गिरे।

शुरुआत में इसे एक दुर्घटना माना गया था। सिया ने परिजनों को बताया था कि ट्रेकिंग के दौरान केतन का पैर फिसल गया और वह खाई में गिर गया। हालांकि बाद में पुलिस जांच में कई संदिग्ध तथ्य सामने आए, जिसके बाद मामले को हत्या के एंगल से देखा जाने लगा।

पुलिस का दावा- शादी नहीं करना चाहती थी सिया

ANI के मुताबिक पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ, डिजिटल सबूतों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि सिया गोयल इस शादी को लेकर सहज नहीं थी। उसने पहले भी विवाह को एक साल के लिए टालने की इच्छा जताई थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, सिया खुद को शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं मानती थी। लेकिन परिवार की अपेक्षाओं और दबाव के कारण वह रिश्ते को आगे बढ़ा रही थी।

CCTV फुटेज से खुला राज

जांच में बड़ा सुराग किले परिसर के सीसीटीवी कैमरों से मिला। पुलिस ने फुटेज में देखा कि केतन और सिया के पीछे कुछ दूरी पर एक संदिग्ध व्यक्ति चल रहा था। बाद में उसकी पहचान चेतन चौधरी (Chetan Chaudhary) के रूप में हुई, जिसे पुलिस सिया का कथित प्रेमी बता रही है।

गर्मी में हूडी पहनकर घूम रहा था युवक

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध युवक ने शॉर्ट्स और हूडी पहन रखी थी। उसने हूडी को इस तरह नीचे खींच रखा था कि उसका चेहरा दिखाई न दे। उसके ऊपर हेडसेट भी लगा हुआ था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, एक अन्य फुटेज में सिया अचानक पीछे मुड़कर देखती है। उसी समय हूडी पहने युवक नीचे बैठ जाता है। इस गतिविधि ने पुलिस का संदेह और बढ़ा दिया।

फरवरी में हुई थी सगाई, नवंबर में होनी थी शादी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि केतन और सिया की सगाई फरवरी में हुई थी। दोनों की शादी नवंबर में राजस्थान के उदयपुर में एक भव्य समारोह में होने वाली थी। इसके लिए पैलेस वेन्यू भी बुक किया जा चुका था।

तीन बार कर चुकी थी मारने की कोशिश

पुलिस का दावा है कि सिया लगातार केतन को लोहागढ़ किले ले जाने के लिए दबाव डाल रही थी। जांच के अनुसार वह उसे 31 मई, 4 जून, 14 जून और 18 जून को वहां लेकर गई थी। अधिकारियों का आरोप है कि 14 जून को भी केतन को खाई में धक्का देने की कोशिश की गई थी। लेकिन वह एक झाड़ी पकड़कर बच गया था। इसके बाद 18 जून को कथित तौर पर दोबारा साजिश को अंजाम दिया गया।

जांच जारी, पुलिस जुटा रही सबूत

फिलहाल पुलिस सिया गोयल और चेतन चौधरी से पूछताछ कर रही है। दोनों का मोबाइल डेटा, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूतों  की जांच में जुटी हुई है। हालांकि मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

मामले ने खड़े किए कई सवाल

इस चर्चित मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पारिवारिक दबाव में होने वाली शादियां युवाओं पर मानसिक तनाव बढ़ा रही हैं। वहीं, पुलिस का दावा है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला एक सुनियोजित हत्या की साजिश का उदाहरण बन सकता है।

मामले की जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य और परिस्थितियां सामने आईं जिन्होंने इस कथित हादसे पर सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद हमने मामले की गहन पड़ताल शुरू की। जब किले के टिकट काउंटर पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई तो उसमें केतन और सिया एक साथ किले की ओर जाते दिखाई दिए जिससे जांच को एक महत्वपूर्ण दिशा मिली।” फुटेज को बारीकी से खंगालने पर पुलिस की नजर एक ऐसे शख्स पर पड़ी, जो केतन और सिया से कुछ मीटर पीछे चल रहा था।

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अधिकारी ने कहा, “उस व्यक्ति ने शॉर्ट्स और ‘हुडी’ पहन रखी थी। हुडी’ का अगला हिस्सा इतना नीचे कर रखा था कि उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था। इसके अलावा उसने हुडी के ऊपर हेडसेट भी लगा रखा था। एक अन्य फुटेज में हमने देखा कि सिया अचानक पीछे मुड़कर देखती है और उसी समय हुडी पहने वह व्यक्ति भी अचानक बैठ जाता है। यह संयोग बेहद संदिग्ध लगा। अधिकारी ने बताया कि बाद में पुलिस ने 18 जून को उस समय के तापमान का पता लगाया जो करीब 33 डिग्री सेल्सियस था और यह बात खटकी कि इतनी गर्मी में कोई व्यक्ति आखिर ‘हुडी’ पहनकर क्यों घूम रहा था।

सिर्फ 13000 रुपये का ड्रॉ खेल दुबई में मुफ्त में अपार्टमेंट जीत गई ये भारतीय महिला! पहले तो इन्हें भी लगा स्कैम है पर ये तो सच निकला

दुबई में शुरू हुए एक खास योजना ने एक भारतीय महिला की किस्मत बदल दी। केरल की रहने वाली 27 वर्षीय आयशा अमीर इस योजना के तहत अपार्टमेंट जीतने वाली पहली विजेता बनी हैं। महज 500 दिरहम की खरीदारी के बाद ड्रॉ में हिस्सा लेने वाली आयशा को जब घर जीतने की खबर मिली तो पहले उन्हें इस पर यकीन ही नहीं हुआ। ये अभियान दुबई मेंखरीदारी करने वाले लोगों को आकर्षक इनाम देने के लिए शुरू किया गया है, जिसमें प्रतिभागियों को घर जीतने का मौका मिलता है। घर जीतने के बाद उनकी कहानी लोगों के बीच काफी चर्चा में है।

प्राइज ड्रॉ में कैसे ले सकते हैं हिस्सा

खलीज टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुबई में रहने वाली भारतीय प्रवासी आयशा अमीर को लग्जरी रियल एस्टेट कंपनी बिंगहट्टी का बनाया हुआ एक स्टूडियो अपार्टमेंट मिला है। ये हाउसिंग गिवअवे दुबई फेस्टिवल्स एंड रिटेल एस्टैब्लिशमेंट (DFRE) द्वारा दुबई चैंबर्स के साथ पार्टनरशिप में ऑर्गनाइज किए गए एक बड़े प्रमोशनल प्रोग्राम का हिस्सा है। इस इनिशिएटिव के तहत ग्राहक भाग लेने वाले स्टोर्स पर कम से कम 500 दिरहम (करीब 13,000 रुपये) की खरीदारी करके प्राइज ड्रॉ में हिस्सा ले सकते हैं। इसके लिए खरीदारों को निर्धारित क्यूआर कोड स्कैन करना होता है और फिर कैंपेन प्लेटफॉर्म पर अपनी खरीदारी की रसीद अपलोड करनी होती है। इसके बाद वे ड्रॉ के लिए पात्र हो जाते हैं।

पहले लगा कोई स्कैम है

अमीर ने बताया कि उन्होंने खरीदारी के दौरान प्रमोशनल मटीरियल देखने के बाद इस ड्रॉ में हिस्सा लेने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले उनके पति का ध्यान इस योजना की ओर गया था। उनके पति ने एक शॉपिंग सेंटर के अंदर और सोशल मीडिया पर इसके ऐड देखे थे, जिसके बाद दोनों ने इसमें भाग लेने का निर्णय लिया। खलीज टाइम्स से बातचीत में उन्होंने उस पल को याद किया जब आयोजकों ने उन्हें उनकी जीत की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी सारी जानकारी भर दी थी और फिर शुक्रवार को मुझे एक कॉल आया, जिसमें बताया गया कि मैंने यह घर जीत लिया है।”

उन्होंने आगे कहा, “शुरुआत में मुझे लगा कि यह कोई स्कैम हो सकती है, लेकिन बाद में उन्होंने मुझे सभी जरूरी जानकारियों के साथ एक ईमेल भेजा, तब मुझे यकीन हुआ।”

घर खरीदने की बना रहे थे योजना

ये जीत अमीर और उनके पति के लिए ऐसे समय आई, जब दोनों अपने लिए घर खरीदने की योजना बना रहे थे। पिछले साल शादी करने वाले इस दंपति ने बताया कि वे अपनी प्रॉपर्टी खरीदने पर विचार कर रहे थे, लेकिन इस साल की शुरुआत में क्षेत्र की अनिश्चित परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने अपने इस फैसले को कुछ समय के लिए टाल दिया था। अपने इनाम की पुष्टि मिलने के बाद भी उन्होंने माना कि इस बात पर यकीन करना उनके लिए आसान नहीं था।

उन्होंने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं ऐसी कोई चीज जीत पाऊंगी। हम अक्सर दूसरे लोगों को इनाम जीतते हुए देखते हैं और उनके लिए खुश होते हैं, लेकिन मन में यही लगता है कि ऐसा हमारे साथ कभी नहीं होगा। लेकिन जब यह सच में आपके साथ होता है, तब एहसास होता है कि किस्मत आपका साथ दे सकती है और दुबई में ऐसे मौके वास्तव में लोगों की जिंदगी बदल सकते हैं।”

कितने अपार्टमेंट दिए जाएंगे

इस कैंपेन में कुल 12 अपार्टमेंट विजेताओं को दिए जाएंगे। 30 अगस्त तक हर सप्ताह नए विजेताओं के नाम घोषित किए जाएंगे और अंत में आखिरी विजेता की भी घोषणा की जाएगी। ऑर्गनाइजर के मुताबिक, इस प्रोग्राम में रिटेल सेक्टर से काफी लोगों ने हिस्सा लिया है। DFRE में रिटेल कैलेंडर और प्रमोशन के एक्टिंग वाइस प्रेसिडेंट मोहम्मद फेरस अरायकत ने कहा कि 4,000 से ज्यादा आउटलेट्स पर काम करने वाले लगभग 1,000 ब्रांड्स इस इनिशिएटिव में शामिल हुए हैं।

बेहद आसान है हिस्सा लेना

एंट्री प्रक्रिया के बारे में बताते हुए मोहम्मद फेरस अरायकत ने कहा, “इसमें हिस्सा लेना बेहद आसान है। आपको सिर्फ 500 दिरहम की खरीदारी करनी है, क्यूआर कोड स्कैन करना है, अपनी रसीद अपलोड करनी है और इसके बाद आपका नाम ड्रॉ में शामिल हो जाता है।” उन्होंने कहा कि इस अभियान का मकसद सिर्फ इनाम देना नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ना और समुदाय का सम्मान करना भी है। उन्होंने कहा, “दुबई हमेशा पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरता है और आगे भी ऐसा ही करता रहेगा। इस तरह की पहलें समुदाय की भावना को बढ़ावा देती हैं और लोगों के योगदान का जश्न मनाने का एक तरीका हैं।”

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Gold Silver Price Outlook: ‘गिरावट पर खरीदें सोना-चांदी, नया रिकॉर्ड हाई कर रहा इंतजार’, स्विस एशिया कैपिटल की सलाह

Gold Silver Price Outlook: हाल में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। इससे बहुत से निवेशक घबरा गए हैं। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि इसे खतरे की घंटी नहीं, बल्कि खरीदारी का मौका मानना चाहिए। Swiss Asia Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) जुएर्ग कीनर का मानना है कि मौजूदा कमजोरी के बावजूद दोनों कीमती धातुएं आगे चलकर नए रिकॉर्ड स्तर छू सकती हैं।

पिछले कुछ समय से सोना और चांदी दबाव में रहे हैं। इसकी बड़ी वजह ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। हालांकि कीनर का कहना है कि लॉन्ग टर्म में सोना और चांदी में तेजी आने के कई कारण हैं। उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर ऐसी गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका होती है। हम हमेशा गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ाने में भरोसा रखते हैं।’

चांदी की सप्लाई अब भी तंग

कीनर के मुताबिक, कीमती धातुओं का भंडार अभी भी काफी कम है। खासकर चांदी में सप्लाई की समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि एशियाई और पश्चिमी बाजारों के बीच कीमतों का बड़ा अंतर इस बात का संकेत है कि फिजिकल सप्लाई अभी भी तंग बनी हुई है।

उनका कहना है कि बाजार फिलहाल ओवरसोल्ड स्थिति में है और सप्लाई भी सीमित है। ऐसे में कीमतों को लंबे समय तक नीचे बनाए रखना आसान नहीं होगा।

महंगाई फिर बन सकती है बड़ा फैक्टर

हाल के महीनों में निवेशकों का ध्यान ब्याज दरों पर ज्यादा रहा है। लेकिन कीनर का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई फिर से बाजार का बड़ा मुद्दा बन सकती है। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो सोना और चांदी जैसे ऐसे एसेट्स की मांग बढ़ सकती है। इन पर भले ही ब्याज नहीं मिलता, लेकिन इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है।

उनका यह भी मानना है कि दुनिया भर की सरकारें और केंद्रीय बैंक कमजोर आर्थिक वृद्धि से जूझ रही अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देते रहेंगे। इससे भी कीमती धातुओं को फायदा मिल सकता है। कीनर ने कहा कि यही अगली बड़ी तेजी की वजह बन सकती है और कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर तक जा सकती हैं।

माइनिंग-इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी बुलिश

कीनर सिर्फ सोने-चांदी पर ही नहीं, बल्कि माइनिंग कंपनियों के शेयरों को लेकर भी सकारात्मक हैं। उनका कहना है कि मजबूत कैश फ्लो होने के बावजूद कई माइनिंग शेयरों में बड़ी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों के लिए अवसर बने हैं।

उन्होंने कॉपर, एल्युमीनियम और जिंक जैसी इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी भरोसा जताया। उनके मुताबिक, इन धातुओं में भी सप्लाई और मांग का संतुलन बिगड़ा हुआ है और भंडार कम हैं। इसलिए बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम नजर आती है।

कच्चे तेल पर क्या है राय?

कीनर का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों को 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से बाजार को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक भंडार अभी भी कम हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन भंडारों को फिर से भरने की जरूरत होगी, जिससे तेल की कीमतों को सहारा मिल सकता है।

Gold-Silver Ratio: गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़ा, क्या अब सोने में निवेश करना चाहिए? जानिए एक्सपर्ट से

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viral video: लद्दाख में मोबाइल फोन पर अचानक दिखाने लगा चीन का समय? वीडियो हुआ वायरल, जानिए क्या है मामला

Ladakh mobile showing China time: लद्दाख से हाल ही में सामने आए एक वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। लद्दाख के वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास स्थित सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मोबाइल फोन पर अचानक इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) की जगह चीन का स्टैंडर्ड टाइम (Beijing Time) दिखने लगा, जो भारतीय समय से 2 घंटे और 30 मिनट आगे है। एक वीडियो में दावा किया गया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के नजदीक यात्रा कर रहे कुछ लोगों के मोबाइल फोन अचानक भारतीय समय (IST) से बदलकर China Standard Time (CST) दिखाने लगे।

कथित वायरल वीडियो में फोन की स्क्रीन पर समय क्षेत्र बदलने का नोटिफिकेशन दिखाई देता है। इसमें बताया गया है कि डिवाइस का समय चीन के टाइम जोन के अनुसार सेट हो गया है। बताया जा रहा है कि यह घटना सीमा के बेहद करीब वाले इलाके में हुई।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में कई बार पड़ोसी देशों के मोबाइल नेटवर्क सिग्नल स्थानीय नेटवर्क से ज्यादा मजबूत हो सकते हैं। यदि फोन में ऑटोमैटिक टाइम और टाइम जोन सेटिंग्स एक्टिव हों, तो डिवाइस विदेशी नेटवर्क की जानकारी के आधार पर समय बदल सकता है।

हालांकि, इस कथित घटना को लेकर कोई आधिकारिक सुरक्षा चिंता नहीं जताई गई है। लेकिन इसने सीमा क्षेत्रों में दूरसंचार नेटवर्क और कनेक्टिविटी से जुड़ी चुनौतियों पर बहस को फिर से तेज कर दिया है।

आखिर क्यों बदल गया मोबाइल का टाइम? जानिए इसके पीछे का टेक्निकल सच

पहली नजर में यह हैरान करने वाली घटना लगती है। लेकिन तकनीकी विशेषज्ञ इसे नेटवर्क और टाइम जोन सिंक्रोनाइजेशन से जोड़कर देखते हैं। दरअसल, अधिकांश स्मार्टफोन में “Automatic Date & Time” और “Automatic Time Zone” फीचर ऑन रहता है। फोन जिस मोबाइल नेटवर्क से जुड़ता है, उसी नेटवर्क से समय और टाइम जोन की जानकारी भी प्राप्त करता है। यदि सीमा के पास किसी विदेशी टेलीकॉम नेटवर्क का सिग्नल ज्यादा मजबूत मिल जाए, तो फोन उसी के आधार पर टाइम जोन अपडेट कर सकता है।

भारत-चीन सीमा के कुछ इलाकों में भारतीय मोबाइल नेटवर्क कमजोर पड़ जाता है। जबकि दूसरी तरफ से आने वाले सिग्नल फोन तक पहुंच सकते हैं। ऐसी स्थिति पहले भी अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में देखी गई थी। यहां लोगों के मोबाइल पर “Welcome to China” जैसे संदेशमैसेज और बीजिंग समय दिखाई देने की खबरें सामने आई थीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई हैकिंग या साइबर हमला नहीं है। बल्कि फोन का नेटवर्क-आधारित ऑटोमैटिक टाइम अपडेट सिस्टम है। यदि यूजर ऑटोमैटिक टाइम ज़ोन बंद कर दे और टाइम मैन्युअली सेट कर दे, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।

क्या है अन्य कारण?

शक्तिशाली चीनी मोबाइल टावर: चीनी सेना (PLA) ने सीमा के उस पार एलएसी (LAC) के बिल्कुल नजदीक बेहद शक्तिशाली 5G मोबाइल टावर स्थापित किए हैं।

नेटवर्क ओवरलैपिंग: इन चीनी टावरों के सिग्नल इतने मजबूत हैं कि वे भारतीय सीमा के भीतर तक आ जाते हैं। जब भारतीय नागरिकों के फोन का ‘ऑटोमैटिक टाइम जोन’ (Automatic Time Zone) ऑन होता है, तो उनका फोन भारत के कमजोर सिग्नल की बजाय चीन के मजबूत नेटवर्क सिग्नल को पकड़ लेता है। नेटवर्क बदलते ही फोन का समय अपने आप चीन के समय (GMT+8) के अनुसार बदल जाता है।

स्थानीय लोगों की क्या हैं चिंताएं?

इस वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे कि चुशुल, डेमचोक और न्योमा में भारतीय दूरसंचार नेटवर्क (जैसे जियो, एयरटेल या बीएसएनएल) के सिग्नल काफी कमजोर हैं। इसके कारण चीनी नेटवर्क आसानी से हावी हो जाता है। यह न सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है। बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी संवेदनशील है।

भारत-चीन सीमा के कई दुर्गम इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। जब स्थानीय नेटवर्क कमजोर होता है, तब फोन दूर स्थित लेकिन अधिक शक्तिशाली विदेशी नेटवर्क से जुड़ने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में डिवाइस समय, नेटवर्क पहचान और अन्य सूचनाएं उसी नेटवर्क से लेने लगता है।

2018 में अरुणाचल प्रदेश के किबिथू और काहो जैसे सीमावर्ती इलाकों में भी ऐसी घटनाएं सामने आई थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, वहां भारतीय मोबाइल फोन चीनी नेटवर्क से जुड़ गए थे और फोन की घड़ी अपने-आप बीजिंग समय पर पहुंच गई थी।

टेलीकॉम विशेषज्ञों की राय

टेलीकॉम विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि सीमा क्षेत्रों में मजबूत और स्थिर भारतीय नेटवर्क की कितनी आवश्यकता है। पहाड़ी भूगोल, कम आबादी और कठिन मौसम के कारण कई क्षेत्रों में टावर स्थापित करना चुनौतीपूर्ण होता है। जबकि दूसरी ओर चीन ने सीमा के पास दूरसंचार ढांचे का तेजी से विस्तार किया है।

हालांकि, लद्दाख वायरल वीडियो की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। लेकिन तकनीकी दृष्टि से ऐसा होना संभव माना जाता है। यही वजह है कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। लद्दाख में मोबाइल फोन पर चीन का समय दिखने का वायरल वीडियो केवल एक तकनीकी घटना नहीं। बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में दूरसंचार ढांचे की चुनौतियों को भी उजागर करता है।

Vaibhav Sooryavanshi: वैभव सूर्यवंशी का 10 साल का भाई आशीर्वाद भी क्रिकेट में मचा रहा तबाही, धुंआधार तूफानी शतक ठोक डाला

युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के बाद अब उनके छोटे भाई आशीर्वाद सूर्यवंशी इन दिनों सुर्खियों में हैं। आशीर्वाद सूर्यवंशी अपनी बल्लेबाजी से लगातार लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। महज 10 साल के आशीर्वाद सूर्यवंशी लगातार शानदार बल्लेबाजी कर रहे हैं। आशीर्वाद ने एक स्थानीय मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 119 गेंदों पर 168 रन की बेहतरीन पारी खेली। अपनी इस तूफानी पारी में उन्होंने 19 चौके और 6 छक्के लगाए। लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण आशीर्वाद को भी भविष्य का प्रतिभाशाली क्रिकेटर माना जा रहा है। वहीं आशीर्वाद की इस पारी के बाद उनके बड़े भाई वैभव सूर्यवंशी ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए उन्हें बधाई दी है।

इससे पहले भी लगा चुके हैं शतक

आशीर्वाद सूर्यवंशी हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बेहतरीन पारी की जानकारी शेयर किया। उनके दमदार प्रदर्शन की बदौलत ऋषभ 11 ने समस्तीपुर में खेले गए एक स्थानीय मुकाबले में वैशाली 11 को हराया। इससे पहले भी आशीर्वाद ने समस्तीपुर में आयोजित एक प्रैक्टिस मैच में ताजपुर क्रिकेट अकादमी की ओर से खेलते हुए 87 गेंदों में 103 रन की शानदार शतकीय पारी खेली थी। उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन ने क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

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पिता ने दी बधाई

आशीर्वाद के पिता संजीव सूर्यवंशी ने कहा कि मेहनत और सही मार्गदर्शन के दम पर उनका बेटा आने वाले वर्षों में बड़े स्तर का क्रिकेटर बन सकता है। आशीर्वाद की हालिया सेंचुरी के बाद उनके पिता संजीव ने भी सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, “मेरे छोटे बेटे आशीर्वाद सूर्यवंशी ने आज प्रैक्टिस मैच में अपना पहला शतक लगाया है। मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं कि उस पर अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें।” फिलहाल आशीर्वाद बिहार में क्रिकेट की नियमित ट्रेनिंग ले रहे हैं और अपने खेल को निखारने में जुटे हैं।

वैभव को किया गया शामिल

वैभव सूर्यवंशी बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं वहीं आशीर्वाद सूर्यवंशी दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं, लेकिन दोनों की खेल शैली में कई समानताएं देखने को मिलती हैं। आशीर्वाद भी अपने बड़े भाई की तरह आक्रामक बल्लेबाजी पसंद करते हैं और मैदान पर तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं। वहीं आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद वैभव सूर्यवंशी को पहली बार भारतीय टी20 टीम में जगह मिली है। चयनकर्ताओं ने उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए टीम में शामिल किया है।

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आयरलैंड दौरे पर भारतीय टीम को दो मुकाबले खेलने है, पहला मुकाबला 26 जून को और दूसरा मुकाबला 28 जून को बेलफास्ट में खेला जाएगा। इसके बाद टीम इंडिया इंग्लैंड का रुख करेगी, जहां दोनों देशों के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली जाएगी। युवा बल्लेबाज वैभव के लिए यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का बड़ा मौका माना जा रहा है।

Indian Citizenship Proof: ‘मेरे भारतीय होने का आखिर सबूत क्या है?’; पासपोर्ट को लेकर MEA के बयान से छिड़ी बहस, सोशल मीडिया पर उठे सवाल

Indian Citizenship Proof: पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से दिए गए एक बयान ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है। MEA ने कहा है पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है। यह एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण…। फिलहाल MEA के बयान ने एक बार फिर यह सवाल राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है कि आखिर भारतीय नागरिकता का सबसे मजबूत और निर्विवाद सबूत क्या माना जाना चाहिए।

इस बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि यदि पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं, तो आखिर भारतीय नागरिक होने का सबूत क्या माना जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पहचान (Identity), निवास (Residence) और नागरिकता (Citizenship) तीन अलग-अलग कानूनी अवधारणाएं हैं।

लेकिन आम लोगों के लिए ये अक्सर एक-दूसरे से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। यही कारण है कि जब आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट जैसे डॉक्यूमेंट की कानूनी स्थिति पर चर्चा होती है, तो नागरिकता को लेकर भ्रम और बहस पैदा हो जाती है।

सोशल मीडिया यूजर्स के रिएक्शन

MEA के बयान के बाद कई यूजर्स ने इसे विरोधाभासी बताते हुए कहा कि भारतीय पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है। पासपोर्ट जारी करने से पहले दस्तावेजों की जांच और पुलिस सत्यापन भी किया जाता है। ऐसे में यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज पर्याप्त माना जाएगा?

एक यूजर ने X पर लिखा, “अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, आधार नहीं है और वोटर आईडी भी नहीं है, तो फिर भारतीय होने का सबूत आखिर क्या है?” वहीं, एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “लगता है अब नागरिकता साबित करने के लिए माथे पर अपनी मातृभाषा में टैटू बनवाना पड़ेगा।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “MEA के मुताबिक पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है और सिर्फ यात्रा करने के लिए जारी किया गया डॉक्यूमेंट है। तो भाई, इतनी जांच के बाद पासपोर्ट जारी करते वक्त उसमें नेशनैलिटी के आगे जो इंडियन लिखा होता है वो फिर क्या देख के या चेक करके लिखा होता है? गजबे है।”

वहीं, एक अन्य यूजर ने भी मजाकिया अंदाज में लिखा, “आधार नागरिकता के लिए पहचान पत्र नहीं है। पासपोर्ट नागरिकता के लिए पहचान पत्र नहीं है…। लेकिन इन दोनों के माध्यम से देश में हर दस्तावेज बना सकते है। हर दस्तावेज…। अजब सिस्टम की गजब कहानी!”

आधार और वोटर आईडी पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

पासपोर्ट को लेकर बहस ऐसे समय में सामने आई है जब अदालतें भी कई बार स्पष्ट कर चुकी हैं कि कुछ दस्तावेज पहचान और निवास का प्रमाण तो हो सकते हैं। लेकिन नागरिकता का नहीं…। सुप्रीम कोर्ट ने पहले आधार कार्ड को केवल पहचान का दस्तावेज माना था, लेकिन नागरिकता का नहीं। इसी तरह 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक कथित बांग्लादेशी नागरिक की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि आधार कार्ड और वोटर आईडी अपने आप में भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं।

पासपोर्ट पर क्या लिखा होता है?

बहस के दौरान कई लोगों ने यह भी याद दिलाया कि भारतीय पासपोर्ट पर स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि यह भारत सरकार की संपत्ति (Property of the Government of India) है। सरकार के निर्देश पर इसे वापस लिया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पासपोर्ट जारी करने के लिए नागरिकता की जांच की जाती है। लेकिन इसका कानूनी उद्देश्य मुख्य रूप से यात्रा और अंतरराष्ट्रीय पहचान सुनिश्चित करना है।

फिर नागरिकता कैसे साबित होती है?

भारत में नागरिकता साबित करने के लिए कोई एक आधिकारिक ‘सिटिजनशिप कार्ड’ नहीं है। नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 और उससे संबंधित नियमों के आधार पर किया जाता है। परिस्थिति के अनुसार नीचे दिए गए निम्न दस्तावेज नागरिकता संबंधी दावे को मजबूत कर सकते हैं:-

  • जन्म प्रमाण पत्र
  • माता-पिता की नागरिकता संबंधी दस्तावेज
  • नागरिकता प्रमाण पत्र (यदि रजिस्ट्रेशन या प्राकृतिककरण के माध्यम से नागरिकता प्राप्त हुई हो)
  • सरकारी रिकॉर्ड और अन्य वैधानिक दस्तावेज
  • अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरण या अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करता है।

E-पासपोर्ट पर सरकार का जोर

इस बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सर्विस के आधुनिकीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, चिप से लैस ई-पासपोर्ट (e-Passport) का विस्तार तेजी से किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।

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इन ई-पासपोर्ट में सुरक्षा तकनीक, बेहतर प्रमाणीकरण सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे DigiLocker के साथ इंटीग्रेशन की सुविधा दी गई है। सरकार का दावा है कि इससे पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनेगी।

दावा-स्विट्जरलैंड में पाकिस्तानी आर्मी चीफ को मारने का प्लान था:पीस डील में शामिल होने गए थे, PAK की धमकी के बाद फैसला बदलना पड़ा

इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड में ईरान शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और उनके डेलिगेशन की हत्या की साजिश रची थी। यह दावा ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने एक पॉडकास्ट में किया है। पत्रकार के दावे के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने धमकी दी जिसके बाद इजराइल को अपना प्लान बदलना पड़ा। यह दावा उस समय से जुड़ा है जब पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में मौजूद थे। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ था। दावा- पाकिस्तान ने इजराइल को धमकी भरा मैसेज भेजा पॉडकास्ट के दौरान पॉलिटिकल कमेंटेटर मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में एस्कोबार ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को बेहद विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर मोसाद हमला करने की तैयारी कर रहा है। एस्कोबार ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में इजराइल को जगह नहीं मिली, इसलिए वह इस प्रक्रिया से खुश नहीं था। उनका यह भी कहना है कि लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान ने शांति समझौते की राह और मुश्किल बना दी। एस्कोबार ने आगे कहा इस साजिश की जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को चेतावनी भी भेजी थी। उनके मुताबिक यह मैसेज शायद ओमान के जरिए पहुंचाया गया था। इसमें पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि अगर पाकिस्तानी डेलिगेशन को कुछ हुआ तो इजराइल को नक्शे से मिटा दिया जाएगा। हालांकि यह दावा सामने आते ही पाकिस्तान की ओर से इसे खारिज कर दिया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने साजिश से इनकार किया एआरवाई न्यूज के चेयरमैन कमरान खान ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह आरोप पूरी तरह बकवास और निरर्थक है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असिम मुनीर का पूरा स्विट्जरलैंड दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार और बिना किसी परेशानी के पूरा हुआ। अधिकारी के मुताबिक दौरे के दौरान किसी भी समय कोई सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। न स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों ने और न ही अमेरिकी सुरक्षा टीमों ने किसी संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि लूसर्न में प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की सुरक्षा व्यवस्था पूरे समय सामान्य और पूरी तरह सक्रिय रही। किसी तरह की हत्या की साजिश या सुरक्षा खतरे की कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने इसे काल्पनिक कहानी बताया। पाकिस्तान आज भी इजराइल को देश नहीं मानता इजराइल और पाकिस्तान लंबे समय से एक-दूसरे को विरोधी मानते रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोई रणनीतिक साझेदारी नहीं है। पाकिस्तान आज भी इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्षेत्रीय युद्धविराम प्रयासों पर चर्चा के दौरान इजराइल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इजराइल को बुराई और मानवता के लिए अभिशाप बताया था। साथ ही उस पर लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया था। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न इस्लामी देश है। वहीं, इजराइल को भी परमाणु शक्ति माना जाता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इन बयानों पर इजराइली अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए सवाल उठाया था कि जब पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं, तो क्या इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म डी करंट के अनुसार, कई पत्रकारों ने इस कहानी को निराधार और तथ्यों से रहित बताया।