Venezuela Earthquake: वेनेजुएला में गुरुवार सुबह 38 सेकंड्स के अंतराल में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंपों की वजह से तबाही मच गई है। हादसे में 10,000 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका है। बड़ी संख्या में लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। भूकंप के समय एक बेसबॉल मैच में हड़कंप मच गया। खिलाड़ी और दर्शक मैदान छोड़ भाग गए। ALSO READ: भूकंप के भयानक झटकों से थर्राया वेनेजुएला, भारी तबाही, 10000 से ज्यादा की मौत!
बेसबॉल मैच के दौरान ही भूकंपों से कांपी धरती
बताया जा रहा है कि भूकंप के समय वेनेजुएला की राजधानी काराकस (Caracas) में एक बेसबॉल मैच चल रहा था। अचानक आए भूकंपों की वजह से पूरा स्टेडियम हिल गया और सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि दर्शक भी घबरा गए। भूकंपों के झटके से डरकर खिलाड़ी और दर्शक स्टेडियम छोड़कर भाग निकले। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल यह हो गया।
वेनेजुएला में इमरजेंसी
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश को संबोधित करते हुए बताया कि 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंपों के बाद करीब 20 आफ्टरशॉक्स भी आए। देश में हालात काफी गंभीर बने हुए हैं, इसे देखते हुए रोड्रिगेज ने आपातकाल की घोषणा कर दी है। वेनेजुएला में स्कूल-कॉलेज फिलहाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। रेलवे सेवाओं को रोक दिया गया है।
रोड्रिगेज ने लोगों से घरों के बाहर रहने और एम्बुलेंस के लिए रास्ता देने की अपील की है। नुकसान की वजह से काराकस एयरपोर्ट बंद कर दिया गया है। देश में कई जगह इंटरनेट कनेक्टिविटी भी प्रभावित हुई है।
Water Donation on Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण और कठिन एकादशियों में से एक मानी जाती है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली इस एकादशी में बिना पानी पिए यानी निर्जल व्रत रखने का विधान है। माना जाता है कि प्यासे लोगों को जल और शर्बत पिलाना महान पुण्य का कार्य है, जिससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस भीषण गर्मी के मौसम में शर्बत बांटना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हैं।ALSO READ: निर्जला एकादशी: साल की सबसे बड़ी एकादशी कब है? सिर्फ एक व्रत से पाएं सभी 24 एकादशियों का पुण्य फल
आइए जानते हैं कि निर्जला एकादशी पर शर्बत क्यों बांटा जाता है और इसके क्या फायदे हैं:
शर्बत बांटने का धार्मिक और सामाजिक कारण
1. 'प्यासे को पानी पिलाना' सबसे बड़ा पुण्य
सनातन धर्म में दान का बहुत महत्व है, और गर्मी के महीने में किसी प्यासे को शीतल जल या शर्बत पिलाना सबसे बड़ा पुण्य है, जो कि महादान माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शर्बत और पानी का दान करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
2. सेवा की भावना
निर्जला एकादशी का व्रत रखने वाले लोग खुद तो पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करते, लेकिन वे दूसरों की सेवा के लिए सड़कों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर स्टॉल या प्याऊ लगाकर राहगीरों को ठंडा शर्बत पिलाते हैं। यह त्याग और निःस्वार्थ सेवा की भावना को दर्शाता है।
शर्बत बांटने और पीने के फायदे
इस दिन बांटे जाने वाले शर्बत- जैसे बेल का शर्बत, चंदन का शर्बत, गुलाब या सौंफ का शर्बत के कई शारीरिक और मानसिक फायदे होते हैं:
शर्बत बांटने का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों में जलदान को सबसे श्रेष्ठ दानों में से एक माना गया है। प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाना पुण्यदायक कर्म माना जाता है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए शीतल पेय का दान किया जाता है। यह सेवा दया, करुणा और परोपकार की भावना को बढ़ाती है।
1. भीषण गर्मी से राहत
यह व्रत मई-जून के महीने में आता है जब उत्तर और मध्य भारत में पारा 40∘C से ऊपर होता है। ऐसे में राहगीरों और मजदूरों को ठंडा शर्बत पिलाने से उनके शरीर में पानी की कमी नहीं होती और वे हीट स्ट्रोक/ लू लगने से बच जाते हैं।
अक्सर गर्मियों में पेट में जलन या एसिडिटी की समस्या बढ़ जाती है। एकादशी पर बांटे जाने वाले पारंपरिक शर्बत- जैसे नींबू-पुदीना या सौंफ का पानी पेट को ठंडक पहुंचाते हैं और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं।
4. सामाजिक समरसता और भाईचारा
जब सड़कों पर बिना किसी भेदभाव के हर जाति, वर्ग और धर्म के व्यक्ति को शर्बत पिलाया जाता है, तो इससे समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारा बढ़ता है।
एक छोटा सा सुझाव: यदि आप भी इस निर्जला एकादशी पर शर्बत बांटने की सोच रहे हैं, तो कोशिश करें कि शर्बत में बहुत ज्यादा कृत्रिम रंग या अत्यधिक चीनी न हो। इसकी जगह नींबू-पानी, गुड़ का पना, सौंफ का शर्बत या बेल का रस बांटना सेहत के लिए और भी ज्यादा फायदेमंद होगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी के दिन जलदान का विशेष महत्व है। इस दिन शर्बत, ठंडा पानी और मीठे पेय पदार्थों का वितरण करने से प्यासे लोगों को राहत मिलती है और दान करने वाले को पुण्य फल प्राप्त होता है। गर्मी के मौसम में यह सेवा मानवता और परोपकार का प्रतीक भी मानी जाती है। निर्जला एकादशी पर शर्बत बांटना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मानव सेवा और जनकल्याण का सुंदर संदेश भी है।
निर्जला एकादशी (FAQS)
Q. सामाजिक सेवा का माध्यम
A. निर्जला एकादशी पर शर्बत वितरण से समाज में सहयोग और सेवा की भावना मजबूत होती है तथा जरूरतमंद लोगों को राहत मिलती है।
Q. निर्जला एकादशी पर कौन-कौन से शर्बत बांटे जाते हैं?
A. नींबू, बेल, गुलाब या सौंफ का शर्बत शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में सहायक होता है। अत: इस दिन निम्न शर्बत बांटे जाते हैं।
* बेल का शर्बत
* नींबू शर्बत
* गुलाब शर्बत
* सौंफ का शर्बत
* आम पना
* ठंडा मीठा जल
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: निर्जला एकादशी 2026: बिना पानी पिए क्यों रखा जाता है यह कठिन व्रत? जानिए भीमसेन से जुड़ी अद्भुत कथा
With its Pulsar NS400Z, Bajaj offered you one of the strongest VFM propositions in the entry-level performance bike segment. Now that the NS400Z has been downsized to 349cc, has the experience been diluted or does it retain its signature strengths?
Design and Features – 7/10
In terms of appearance, quality and features, nothing has changed on the 349cc Pulsar NS400Z. While this design can’t shirk its age off, it is still pleasing to look at, and overall quality is quite decent for the price you pay, although in some areas (like the dated-looking display, rudimentary rear brake pedal and the clicky switchgear) you can tell that this bike was built to meet a target price.
While old, the Pulsar’s design is quite striking.
That being said, what is nice to see is that the upgrades the biggest Pulsar received last year (sintered brake pads, radial tyres, 4 riding modes and a software-based bi-directional quickshifter in Sport mode) continue onto the 349cc version as well.
Performance and Fuel Economy – 8/10
Speaking of the motor, the Pulsar NS400Z’s 373cc capacity was downsized to 349cc by reducing the stroke from 60mm to 56.1mm, while retaining the 89mm bore. Barring some essential changes necessary for the downsizing process to the engine’s head, the mill retains everything from before, including its compression ratio. The end result is that the Pulsar’s peak output has dropped from 43hp and 35Nm of torque to 40.6hp and 33.2Nm, and the motor has also become noticeably more peaky than before.
The downsized 349cc motor has lost some low- and mid-range shove.
In the real world, the reworked 349cc engine in the Pulsar NS400Z feels a little more mellow than the 373cc motor in the low- and mid-range, but past 7,000rpm, there’s good performance to be had. Of the four riding modes (Sport, Road, Rain and Off-road), we preferred using Road by and large because it had the most consistent and predictable throttle response (helpful in stop-and-go traffic) and the performance drop compared to Sport mode wasn’t a big one. Some oddities that continue from before are that only Sport mode allows the use of the bidirectional quickshifter, and while each riding mode has different ABS intervention, you can’t turn the rear ABS off in any of the four modes.
Depending on the sort of rider you are, the Pulsar’s newfound mellow nature will be a good or bad thing. If you’re someone used to faster machines or even the older 373cc version, this engine may come across as a bit too calm. On the other hand, if you’re a newer rider looking to move up from a 150-250cc machine, there is surely enough performance to keep you interested for quite a while, and in fact, the mellow nature of this engine will be more welcoming and forgiving for newbie riders.
Ride and Handling – 8/10
Even so, it can be seriously quick, both in a straight line as well as when the road goes squiggly. A short 1346mm wheelbase and a light 176kg kerb weight mean that the Pulsar changes direction quickly without too much effort and you can take corners at seriously quick speeds. The one detractor when riding through the twisties is that the Pulsar scrapes its footpegs and bellypan a little too easily.
The Pulsar’s riding position strikes a good balance between sportiness and comfort.
Of course, this isn’t a big complaint considering how comfortable the Pulsar’s seating position is, and this would make for a capable and sporty long-distance machine. On open highways, the 349cc motor is capable of sustaining 100-120kph rather easily without any intrusive vibrations at any of the touch points – this is a similar trait to the downsized Triumph 400s, but in contrast to the downsized KTM 390s.
You also need to be aware that while the Pulsar NS400Z is a reasonably comfortable machine that is in the spectrum of sporty naked bikes, over bad roads though, you will feel more of the road surface, although it’s far from being harsh or uncomfortable.
The Pulsar’s suspension is set up to be conducive to sporty riding.
Price and Verdict – 8/10
While the 349cc Pulsar NS400Z has changed in one fundamental way to its 373cc predecessor, it still retains its core strength of being fantastic value for money at Rs 1.82 lakh (ex-showroom, Delhi). There is simply nothing to match up to it in terms of sheer speed and associated giggles under your helmet at this price point. Also, had Bajaj not downsized the NS400Z, it would have cost roughly Rs 30,000 more, which would have eroded its biggest USP, thereby significantly hampering its very existence.
Sure, this bike and platform now seriously feel their age, and the final layer of finesse and polish seen on more premium bikes from other brands is lacking here. However, if you are on a tight budget and want the maximum bang for your buck in terms of sheer performance as well as some bragging rights, the Bajaj Pulsar NS400Z is still top dog.
NEET UG 2026 Re-Exam Answer Key: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) यूजी री-एग्जाम 21 जून को पूरे देश और विदेश के चुनिंदा केंद्रों में आयोजित किया गया था। परीक्षा दे चुके उम्मीदवारों को अब प्रोविजनल आंसर की जारी होने का इंतजार है। इससे 03 मई 2026 को हुई परीक्षा के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 06 मई को उत्तर कुंजी (Answer Key) जारी कर दी थी। इस ट्रेंड को देखते हुए कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 28 जून को नीट यूजी 2026 री-एग्जाम की आंसर की जारी होने के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि एनटीए की ओर से इस बारे में कोई अपडेट नहीं आया है।
परीक्षा में शामिल उम्मीदवार नीट एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर आंसर की चेक कर सकेंगे। आंसर की चेक करने के लिए छात्रों को एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड जैसे लॉगिन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल करके साइट पर लॉग इन करना होगा। एनटीए ने उन छात्रों के लिए ऑब्जेक्शन विंडो भी खोल दी है जो आंसर को चैलेंज करना चाहते हैं। प्रोविजनल आंसर की के साथ, एनटीए ओएमआर रिस्पॉन्स शीट और रिकॉर्ड किए गए रिस्पॉन्स का एक्सेस भी दे सकता है।
एनटीए की ओर से जारी आधिकारिक अस्थायी उत्तर कुंजी में उन सभी जरूरी प्रश्न पत्र कोड के हल होंगे जो मेडिकल रीटेस्ट के दौरान बांटे गए थे। आइए जानें नीट यूजी 2026 री-एग्जाम आंसर की को कैसे डाउनलोड कर सकेंगे?
नीट यूजी 2026 री-एग्जाम आंसर की डाउनलोड करने के स्टेप्स
री-नीट 2026 आंसर की डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स दिए गए हैं:
ऑफिशियल नीट वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाएं।
होमपेज पर “NEET UG 2026 आंसर की” या “री-नीट 2026 आंसर की” वाले लिंक पर क्लिक करें।
अपने एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड/जन्म तिथि का इस्तेमाल करके लॉग इन करें।
आंसर की और आपके रिकॉर्ड किए गए जवाब/OMR शीट स्क्रीन पर दिखाई देंगे।
अगर ज़रूरत हो, तो अपना क्वेश्चन पेपर कोड चुनें और आंसर की PDF डाउनलोड करें।
एक कॉपी सेव करें और स्कोर का अंदाजा लगाने के लिए अपने जवाबों की तुलना ऑफिशियल जवाबों से करें।
नीट यूजी 2026 री-एग्जाम आंसर की पर आपत्ति उठाने के स्टेप्स
नीट यूजी 2026 री-एग्जाम आंसर की पर ऑब्जेक्शन उठाने के ये स्टेप्स हैं:
ऑफिशियल NTA नीट वेबसाइट पर जाएं और अपने एप्लीकेशन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल करके लॉग इन करें।
कैंडिडेट डैशबोर्ड पर मौजूद “चैलेंज आंसर की” लिंक पर क्लिक करें।
आप जिस सवाल को चैलेंज करना चाहते हैं, उसे चुनें और सही जवाब का ऑप्शन चुनें।
अपनी आपत्ति को सही ठहराने के लिए सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें।
चैलेंज फीस ऑनलाइन पे करें और डेडलाइन से पहले आपत्ति सबमिट करें।
ज्यादा अपडेट्स और नोटिफिकेशन्स के लिए ऑफिशियल वेबसाइट देखते रहें।
Gujarat News : गुजरात को वैश्विक स्तर पर पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार लगातार सक्रिय और प्रतिबद्ध नजर आ रही है। राज्य में स्थित सुप्रसिद्ध और स्थानीय आस्था के केंद्रों के रूप में पूजनीय तीर्थस्थलों का सुनियोजित विकास करने और वहां आने वाले लाखों भक्तों की सुख-सुविधाओं में वृद्धि करने के उद्देश्य से सरकार ने एक और बड़ा तथा जनहितैषी निर्णय लिया है। राज्य के गृह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और यात्राधाम विकास मंत्री हर्ष संघवी द्वारा पवित्र तीर्थस्थलों के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स और नए कार्यों को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस ठोस कदम से आने वाले दिनों में धार्मिक पर्यटन को बहुत गति मिलेगी।
दक्षिण गुजरात से लेकर सौराष्ट्र तक के 6 जिलों का समावेश
इस सैद्धांतिक मंजूरी के तहत गुजरात के भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण ६ प्रमुख जिलों के तीर्थस्थलों को शामिल किया गया है। इसमें दक्षिण गुजरात के वलसाड, सूरत और प्रकृति की गोद में बसे डांग जिले के पवित्र स्थानों को शामिल किया गया है।
इसके अलावा सौराष्ट्र के राजकोट और उसके आसपास के धार्मिक केंद्रों के साथ-साथ मध्य गुजरात के हेरिटेज सिटी अहमदाबाद और संस्कारी नगरी वडोदरा जिले में स्थित प्रख्यात तीर्थस्थलों को भी इस योजना से जोड़ा गया है। इन सभी निर्धारित जिलों में श्रद्धालुओं की संख्या और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचे का व्यापक विकास किया जाएगा।
3.28 करोड़ रुपए के बजट से होगा तीर्थस्थलों का कायाकल्प
राज्य सरकार के पर्यटन और यात्राधाम विकास बोर्ड के समन्वय से इस पूरी योजना के लिए कुल 3.28 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। इस स्वीकृत राशि का उपयोग तीर्थस्थल परिसरों में पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था, पब्लिक यूटिलिटी, आधुनिक शौचालय, परिसर का सौंदर्यीकरण, एप्रोच रोड और भक्तों के लिए विश्राम गृह जैसी बुनियादी सुविधाएं तैयार करने के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही तीर्थस्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी कैमरे जैसी आधुनिक सुरक्षा प्रणाली भी विकसित की जाएगी।
निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के आदेश
संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ये सभी विकास कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर और पूरी गुणवत्ता के साथ पूरे होने अत्यंत अनिवार्य हैं। सरकार के इस योजनाबद्ध कदम के कारण आने वाले समय में तीर्थस्थलों का स्वरूप बदलेगा और वहां आने वाले दर्शनार्थियों की यात्रा अधिक सुखद और यादगार बनेगी। इन सुधारों और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण स्थानीय स्तर पर व्यापार-रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
Edited By : Chetan Gour
India’s First Private Gold Mine: भारतीय माइनिंग सेक्टर में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। आजादी के बाद देश में पहली बार किसी निजी कंपनी के स्वामित्व वाली सोने की खदान में कमर्शियल यानी व्यावसायिक कामकाज पूरी तरह शुरू हो गया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कुरनूल जिले के जोंनागिरी में इस महत्वाकांक्षी गोल्ड माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट का औपचारिक उद्घाटन किया।
इस खास मौके पर मुख्यमंत्री ने न सिर्फ पहली यूनिट की शुरुआत की, बल्कि इस प्रोजेक्ट के दूसरे फेज की आधारशिला भी रखी। इस खदान के शुरू होने से आंध्र प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा और यहां से सालाना कितना सोना निकलेगा, आइए इसकी पूरी डिटेल जानते हैं।
405 करोड़ का होगा निवेश
इस ऐतिहासिक गोल्ड माइन को शुरू करने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी और निवेश किया गया है। यह प्रोजेक्ट कुल 405 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसे जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (GMSI) द्वारा डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड की साझेदारी में चलाया जा रहा है।
इस ऐतिहासिक शुरुआत को देखते हुए आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने उद्घाटन से ठीक पहले ‘जोंनागिरी’ गांव का नाम बदलकर ‘स्वर्णगिरी’ करने को मंजूरी दे दी है।
राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 1500 एकड़ जमीन अलॉट की है, जिसके पहले फेज में 600 एकड़ पर माइनिंग शुरू हो चुकी है। खदान के कामकाज के लिए ‘हंद्री नीवा सुजला स्रवंती’ योजना के जरिए 18 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से पानी की सप्लाई की जा रही है।
कितना निकलेगा सोना? समझिए इसका पूरा गणित
इस खदान से सोने के उत्पादन को लेकर चरणबद्ध तरीके से लक्ष्य तय किए गए हैं:
पहले साल का लक्ष्य (2026-27): कमर्शियल ऑपरेशन के पहले पूरे साल के दौरान यहां से लगभग 400 किलोग्राम सोना निकालने का टारगेट रखा गया है।
आने वाले सालों का प्लान: इसके बाद सालाना उत्पादन को बढ़ाकर 1000 किलो तक ले जाया जाएगा।
दूसरे फेज के बाद धमाका: जिस दूसरी प्रोसेसिंग यूनिट का शिलान्यास किया गया है, उसके पूरी तरह चालू होने के बाद यहाँ से सालाना कुल उत्पादन क्षमता लगभग 2000 किलो सोने तक पहुंच सकती है।
किसे और क्या होगा फायदा?
इस प्राइवेट गोल्ड माइन के शुरू होने से स्थानीय लोगों से लेकर राज्य सरकार तक, सबको बड़ा फायदा होने वाला है:
स्थानीय लोगों को रोजगार: इस माइनिंग प्रोजेक्ट के जरिए सीधे तौर पर लगभग 700 लोगों को रोजगार मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि इस वर्कफोर्स (कार्यबल) का लगभग 80% हिस्सा स्थानीय समुदायों से लिया जाएगा।
आंध्र सरकार की बंपर कमाई: सोने के उत्पादन से राज्य सरकार की तिजोरी में रॉयल्टी और वैधानिक शुल्कों के जरिए भारी राजस्व आएगा। 400 किलोग्राम के सालाना उत्पादन पर सरकार को करीब 57 करोड़ रुपये की कमाई होगी। वहीं, जब उत्पादन बढ़कर 900 किलोग्राम सालाना पहुंचेगा, तो यह कमाई 144 करोड़ रुपये प्रति वर्ष हो जाएगी।
क्या होती है प्राइमरी गोल्ड माइन?
यह देश की इकलौती ऑपरेशनल प्राइवेट ‘प्राइमरी गोल्ड माइन’ है। प्राइमरी गोल्ड माइन एक ऐसी ‘हार्ड-रॉक’ माइनिंग प्रक्रिया होती है, जिसमें सोना सीधे उसके मूल स्रोत यानी जमीन के भीतर चट्टानों और क्वार्ट्ज नसों से निकाला जाता है। माइनर्स पहले इन ठोस चट्टानों में ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग करते हैं, फिर इस अयस्क को सतह पर लाकर केमिकल और फिजिकल तरीकों से प्रोसेस करके शुद्ध सोना अलग करते हैं।
क्या यह भारत के लिए एक नए ‘कोलार’ (KGF) की शुरुआत है?
भूवैज्ञानिकों का मानना है कि कुरनूल का यह प्रोजेक्ट कोई इकलौता खजाना नहीं है। यह पूरा क्षेत्र एक बड़े खनिज बेल्ट के अंतर्गत आता है, जहां सोने का भारी भंडार होने की उम्मीद है। इसके अलावा अनंतपुर जिले के बोक्समपल्ली, रामागिरी और जवकूला जैसे कई अन्य साइट्स पर भी खोज जारी है।
इन प्राचीन भूवैज्ञानिक संरचनाओं की तुलना कर्नाटक की ऐतिहासिक ‘कोलार’ और ‘हुट्टी’ बेल्ट से की जा रही है, जो कभी दुनिया के सबसे अमीर गोल्ड फील्ड्स में गिने जाते थे। अगर आंध्र प्रदेश के इन क्षेत्रों से भी कर्नाटक जैसे नतीजे मिलते हैं, तो स्वर्णगिरी की यह शुरुआत राज्य को 2047 तक ‘स्वर्णांध्र प्रदेश’ बनाने के दृष्टिकोण में गेम-चेंजर साबित होगी।
अमेरिका के टेक्सास स्थित प्रेयरीलैंड ICE डिटेंशन सेंटर पर जुलाई 2025 में हुए हमले के मामले में 8 दोषियों को सजा सुनाई गई है। कथित लीडर और पुलिस अधिकारी को गोली मारने वाले बेंजामिन हानिल सॉन्ग को 100 साल जेल, जबकि अन्य आरोपियों को 30 से 70 साल तक की कैद दी गई। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के मुताबिक, दोषियों को दंगा करने, हथियार और विस्फोटकों का इस्तेमाल करने, आतंकवादियों को समर्थन देने, न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने और अल्वाराडो पुलिस अधिकारी की हत्या के प्रयास का दोषी पाया गया। DOJ ने कहा कि बेंजामिन हानिल सॉन्ग इस समूह का कथित नेता था। उसी ने 4 जुलाई 2025 को हुए हमले के दौरान एक पुलिस अधिकारी को गोली मारकर घायल किया था। न्याय विभाग ने इसे एंटीफा से जुड़े दोषियों की पहली बड़ी सजा बताया। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने फैसले को “कानून और व्यवस्था की जीत” बताया है। सितंबर 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एंटीफा को “घरेलू आतंकवादी संगठन” घोषित किया था। व्हाइट हाउस का आरोप है कि यह आंदोलन कई हिंसक प्रदर्शनों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई में शामिल रहा है। एंटीफा यानी ‘एंटी-फासिस्ट’ आंदोलन वामपंथी कार्यकर्ताओं का एक नेटवर्क माना जाता है। यह समूह फासीवाद विरोधी प्रदर्शनों और काउंटर-प्रोटेस्ट के लिए जाना जाता है। 2020 में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों के दौरान यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था।
आयुष सिंह मात्र 19 वर्ष की उम्र में ही चर्चा में आ गए हैं, क्योंकि बताया जा रहा है कि वे हर महीने करीब ₹1 करोड़ की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी यात्रा बेहद साधारण परिस्थितियों से शुरू हुई, जब 13 साल की उम्र में COVID-19 महामारी के दौरान उनके परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और खुद से मशीन लर्निंग जैसी उन्नत तकनीक सीखनी शुरू की। धीरे-धीरे उनकी रुचि और मेहनत ने उन्हें टेक्नोलॉजी की दुनिया में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया।
शुरुआती दौर में ही उन्होंने स्टार्टअप्स के साथ काम करना शुरू कर दिया, जिससे उनका अनुभव बढ़ता गया। कम उम्र में ही उनकी पहचान एक उभरते हुए टैलेंट के रूप में बनने लगी, और उनकी कहानी आज युवाओं के बीच प्रेरणा और चर्चा दोनों का विषय बनी हुई है।
टीनएज में ही स्टार्टअप्स की दुनिया में एंट्री
कुछ ही महीनों की मेहनत के बाद आयुष स्टार्टअप्स के साथ काम करने लगे। 14 साल की उम्र में ही उनके काम को MIT से भी सराहना मिली, जो इतनी कम उम्र में बेहद दुर्लभ माना जाता है। इसके बाद उन्होंने NLP सिस्टम पर काम किया और अमेरिका की एक कंपनी में योगदान दिया।
AI इंजीनियर से उद्यमी बनने तक का सफर
आयुष ने धीरे-धीरे खुद को डेटा साइंटिस्ट और MLOps इंजीनियर के रूप में स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने Antern नाम की कंपनी की शुरुआत की और Second Brain Labs की सह-स्थापना की, जहां AI इनोवेशन पर काम किया जाता है।
This 19 year old is earning 1cr just by selling ai courses on topmate
एक X पोस्ट के अनुसार, असली टर्निंग पॉइंट तब आया जब उन्हें अपनी स्किल्स को सही तरीके से पेश करना और बेचना सीखने को मिला। इसी रणनीति ने उनकी ग्रोथ को तेज कर दिया और उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए शिक्षा देना शुरू किया।
ऑनलाइन टीचिंग से बना बड़ा नेटवर्क
आयुष ने अपने सरल तरीके से AI जैसे कठिन विषयों को इंजीनियरों के लिए आसान बना दिया। इससे हजारों छात्रों ने उनसे सीखकर नौकरी पाई और उनका नेटवर्क तेजी से बढ़ता गया।
आज ₹1 करोड़ महीना और लगातार बढ़ती चर्चा
आज आयुष सिंह Topmate जैसे प्लेटफॉर्म से करीब ₹1 करोड़ महीना कमाते हैं। वे युवाओं को AI सिखाकर ग्लोबल लेवल पर प्रभाव बना रहे हैं। उनकी कहानी को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
कुछ लोगों ने उनकी मेहनत और सालों की सीख को सराहा, तो कुछ ने कोर्स बेचने की रणनीति पर सवाल उठाए। वहीं कई यूजर्स ने अपनी तुलना करते हुए हैरानी और मज़ाकिया प्रतिक्रियाएं भी दीं, जिससे यह कहानी और चर्चा में आ गई।