Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : GIFT Nifty में बढ़त को देखते हुए,भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स 25 जून को बढ़त के साथ शुरुआत करने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं। शुरुआती कारोबार में GIFT Nifty 24,081.50 के आसपास ट्रेड कर रहा था। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

24 जून को भारतीय इक्विटी इंडेक्स में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। IT,रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी के दम पर निफ्टी ने 24,000 का स्तर फिर से हासिल कर लिया। मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के संकेतों के बाद तेल सप्लाई में रुकावट की चिंताएं कम हुईं,जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 790.54 अंक या 1.04 प्रतिशत बढ़कर 76,991.22 पर और निफ्टी 197.55 अंक या 0.83 प्रतिशत बढ़कर 24,021.65 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07.40 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 87 अंक यानी 0.36 फीसदी की बढ़त के साथ 24,108.50 के आसपास कारोबार कर रहा था।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 3.55 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। वहीं,स्ट्रेट टाइम्स 0.15 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंगसेंग 1.43 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। ताइवान के बाजार में 1.13 फीसदी की बढ़त है। कोस्पी 4.62 फीसदी ऊपर दिख रहा है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.14 फीसदी की गिरावट नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

बुधवार को नैस्डैक और S&P 500 गिरावट के साथ बंद हुए। इसकी वजह टेक शेयरों में आई गिरावट थी। हालांकि,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एयरलाइंस और ट्रैवल से जुड़े शेयरों को फायदा हुआ और डाओ जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 182.06 अंक या 0.35% बढ़कर 51,848.90 पर पहुंच गया,जबकि S&P 500 में 7.24 अंक या 0.10% की गिरावट आई और यह 7,358.22 पर बंद हुआ। वहीं,नैस्डैक कम्पोजिट 110.40 अंक या 0.43% गिरकर 25,476.64 पर बंद हुआ।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, बढ़त पर खुल सकते है भारतीय बाजार

डॉलर इंडेक्स

गुरुवार को डॉलर तेजी से ऊपर चढ़ते हुए चार्ट रेजिस्टेंस के स्तर को पार कर गया। यह लगभग एक साल की अपनी सबसे बड़ी मासिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। ट्रेडर्स को उम्मीद है कि मज़बूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों को सहारा देगी,साथ ही वे महंगाई के अहम आंकड़ों का भी इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 101.58 के स्तर पर नजर आ रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड एक बेसिस पॉइंट बढ़कर 4.40% हो गई है। जबकि 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड मामूली रूप से बढ़कर 4.14% हो गई है।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसीज में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। इंडोनेशियाई रुपया सबसे ज्यादा कमजोर दिख रहा है। इसमें 0.52 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके बाद दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। चीनी रेनमिनबी पर भी दबाव बना हुआ है और इसमें 0.27 प्रतिशत की गिरावट आई है। जबकि ताइवान डॉलर 0.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है।

उधर मलेशियाई रिंगित 0.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे कारोबार कर रहा है। इसके बाद फिलीपीन पेसो का नंबर है, जिसमें 0.12 प्रतिशत की मजबूती आई है। थाई बाहत में 0.07 प्रतिशत की बढ़त हुई है। जबकि, जापानी येन और सिंगापुर डॉलर में 0.03 प्रतिशत और 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त है।

कच्चे तेल में नरमी

गुरुवार को तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है और यह युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुच गया है। ईरान के साथ US इज़राइल युद्ध को खत्म करने के शुरुआती समझौते के बाद,फंसे हुए टैंकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बाहर निकल गए हैं,जिससे तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंताएं कम हुईं है,इसका असर तेल कीमतों पर देखने को मिल रहा है। WTI क्रूड में 0.91 फीसदी की और ब्रेंट क्रूड में 1.03 फीसदी की गिरावट आई है।

गोल्ड

गुरुवार को सोने की कीमतों में और गिरावट आई है और ये सात महीने से ज्यादा के निचले स्तर के आस-पास ही बना हुआ है। कोमेक्स पर गोल्ड में 0.38 फीसदी की गिरावट दिख रही है। वहीं,चांदी 0.39 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है।

विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर एक नजर

24 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1,843 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बने रहे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और ₹3,637 करोड़ के शेयर खरीदे,जिससे घरेलू बाजार को सहारा मिला।

वेनेजुएला में भूकंप से तबाही, 10 PHOTOS:राजधानी कराकस समेत कई इलाकों में इमारतों-मकानों को नुकसान पहुंचा

वेनेजुएला में गुरुवार सुबह आए भूकंप के बाद देशभर से तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं। राजधानी कराकस समेत कई इलाकों में इमारतों और मकानों को नुकसान पहुंचा है। 10 हजार से एक लाख मौतों तक की आशंका जताई जा रही है। देखिए वेनेजुएला में भूकंप और तबाही से जुड़ी 12 फोटोज…

How Skoda Peaq has evolved from 2022 Vision 7S concept

Skoda Peaq vs Vision 7S

The Skoda Vision 7S concept was first revealed in August 2022, and nearly four years later, its production version has finally arrived as the Peaq. Over that fairly long period, the electric SUV’s exterior and interior design have undergone several changes, and in this feature, we take a closer look at how it has evolved from concept to production. Before diving into the design changes, let’s first talk about the names.

While ‘Vision’ denoted that it was a concept car, ‘7S’ gave away that it was a 7-seater vehicle. The name Peaq, derived from the English word peak, was revealed in January 2026, symbolising the top of the range. Notably, Skoda has used an E-start, Q-end naming strategy for its electric SUVs – Enyaq, Elroq and Epiq – but the Peaq is the first model to break this. With that aside, it’s time to look at the exterior design evolution from concept to production version.

Skoda Peaq vs Vision 7S: Exterior differences

The Vision 7S was the first Skoda model to showcase the brand’s Modern Solid design language, and much of that design has carried over to the production-spec Peaq. The black Tech Deck panel, which houses sensors such as cameras, radar and lidar, has been retained, although the segmented LED elements above it are now spaced slightly further apart. The T-shaped headlamps have also remained largely unchanged.

Skoda Peaq exterior
Skoda Vision 7S exterior
 

Most of the changes are concentrated lower down on the front bumper. The concept’s multi-slot grille design has been replaced by a more conventional layout on the production model. Interestingly, it bears some resemblance to the design seen on the Tata Curvv EV. The prominent bonnet lines have also been retained, although they are spaced slightly wider than before. The ‘SKODA’ lettering continues as well, featuring an integrated hook accent over the letter ‘S’. The use of body cladding has been reduced on the production model, while the silver-painted faux skid plate seen on the concept has been dropped altogether.

The side profile gives the clearest indication of just how large the Peaq is. When unveiling the Vision 7S concept, the carmaker had stated that the production model would become not only its largest EV but also the largest Skoda overall. It measures 4,874mm in length, 1,867mm in width and 1,664mm in height and has a 2,965mm wheelbase.

Skoda Peaq exterior
Skoda Vision 7S exterior
 

The camera-based mirrors of the Vision 7S have made way for conventional outside rearview mirrors (ORVMs), while the flush-fitting door handles now sit horizontally and pop out when required. The glass area appears to have grown slightly as well. More significant changes include the switch from the concept’s rear-hinged suicide doors, frameless windows and pillar-less design to a more conventional setup with a B-pillar.

The wheel arches now feature a gloss-black finish, replacing the unpainted cladding used on the concept. Wheel designs have also changed. Interestingly, the Peaq uses the brand’s old winged-arrow logo on the wheel hub caps, whereas the Vision 7S featured the SKODA lettering. A horizontal black trim piece on the C-pillar gives the Peaq a more upright appearance in profile, replacing the more sloping, coupe-style design of the Vision 7S.

Skoda Peaq exterior
Skoda Vision 7S exterior
 

At the rear, the double-ridged roof spoiler is still present but is less pronounced than before, and a shark-fin antenna has been added. The tailgate now carries ‘Peaq’ lettering on the left side and the variant name on the right. The T-shaped tail-lamps have been retained, mirroring the design of the headlamps. Lower down, the concept’s multi-slot bumper design has been replaced by a cleaner and more conventional treatment. The silver-finished faux skid plate has also made way for a gloss-black trim piece on the lower section of the bumper. Let’s now have a look at the interior.

Skoda Peaq vs Vision 7S: Interior

Some of the biggest differences between the Vision 7S and the production-spec Peaq are found inside. The concept’s oval-shaped steering wheel has been replaced by a more conventional unit. The driver’s display has grown from 8.8 inches to 10 inches, while the rotating central touchscreen has shrunk slightly from 14.6 inches to 13.6 inches. Like in the Vision 7S, the central screen can rotate, a feature seen on some BYD EVs too.

Skoda Peaq interior
Skoda Vision 7S interior
 

The Vision 7S allowed the driver to move the dashboard closer or further away, but this is no longer available. Speaking of the dashboard, its layout hasn’t changed much. The centre console has also been redesigned and loses the rotary controls seen on the concept, although the Peaq retains a few physical buttons. Traditional cabin materials have replaced the unpainted recycled-material panels with white flakes used in the Vision 7S. The floating-style seats are gone too, making way for traditional seats. The headrests have been redesigned with a more familiar shape.  

Skoda Peaq interior
Skoda Vision 7S interior
 

The central partition in the second row, which housed a child seat that Skoda claimed was the safest place in the car, is absent. In its place is a conventional three-seat bench. Perhaps one of the most noticeable changes is the removal of the screens integrated into the doors. These were a standout feature of the Vision 7S and were even displayed during the 2025 Auto Expo.

Skoda Peaq powertrains and India launch details

The Peaq is available in three trims: 60, 90 and 90x. The entry-level 60 trim gets a 63kWh battery and a single rear-mounted electric motor producing 204hp. It has a claimed range of 459km. The 90 uses a larger 91kWh battery and a more powerful rear-wheel-drive motor that develops 286hp. Its claimed range stands at 647km. At the top of the range is the 90x, which combines the same 91kWh battery with a dual-motor setup for all-wheel drive. It produces 299hp and offers a claimed range of 613km.

Skoda is currently evaluating the Peaq for India, where it has no EVs on sale. Speaking about the EV earlier, Skoda Auto India’s brand director Ashish Gupta said, “Yes, it is on my radar. We have to look at the specifications of the car, and we need to bring in a premium car, not a bare-bones car at a high price. So that is what we are working on. My ambition is to have our global portfolio in India next year.”

क्षेत्रीय तनाव के बीच पकिस्तान बढ़ा सकता है रक्षा खर्च

pakistan defence budget

शकूर रहीम

जून 2026 में पाकिस्तान की सरकार ने सांसदों के सामने बजट का ड्राफ्ट पेश किया। बजट प्रस्ताव के अनुसार, पाकिस्तान रक्षा क्षेत्र पर अपना खर्च 18 प्रतिशत बढ़ाकर 3000 अरब रुपये (3 ट्रिलियन) करने जा रहा है। ALSO READ: UN महासचिव ने AI कंपनियों से मांगा बिजली, पानी और जमीन का हिसाब

 

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने कहा कि यह बढ़ोतरी क्षेत्र में मौजूद अनिश्चितताओं के कारण देश को मजबूत बनाने के उद्देश्य से की गई है। विश्लेषक मानते हैं कि इस फैसले के पीछे दक्षिण एशिया में तेजी से बदलती सैन्य तकनीकें और उभरते सुरक्षा खतरे, प्रमुख कारण हैं।

 

इस्लामाबाद स्थित रक्षा विश्लेषक मारिया सुल्तान डीडब्ल्यू से कहती हैं, “भविष्य के संघर्ष अब केवल दो विरोधियों के बीच सीमित नहीं रहेंगे। ये कई देशों से आने वाले हथियारों और तकनीकों से तय होंगे, जो जमीन, हवा, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्रों में एक साथ लड़े जाएंगे।” ALSO READ: भविष्य की सैन्य ताकत के लिए भारत का स्वदेशी ड्रोन पर जोर

 

कैसे बदल रहे हैं दक्षिण एशिया में सुरक्षा के समीकरण

मारिया सुल्तान ने डीडब्ल्यू को बताया कि यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के साथ ही पिछले साल परमाणु हथियार से लैस पड़ोसी देशों भारत-पाकिस्तान के बीच हुए टकराव ने सैन्य योजनाकारों के सोचने के तरीके में बदलाव किया है।

 

नई दिल्ली ने भारत के नियंत्रण वाले कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए जानलेवा हमले का जबाव, मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' से दिया। पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर भारतीय हिंदू पर्यटक थे।

 

भारत ने दावा किया था कि पाकिस्तान स्थित संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने इस हमले को अंजाम दिया। संयुक्त राष्ट्र ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। नई दिल्ली ने इस समूह को समर्थन देने का आरोप भी इस्लामाबाद पर लगाया। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इस आरोप से इनकार किया।

 

भारत और पाकिस्तान दोनों ही पूरे कश्मीर पर अपना दावा करते हैं। हालांकि दोनों देशों का नियंत्रण इसके कुछ हिस्से पर ही है। इसी वजह से मुस्लिम-बहुल यह इलाका भारत और पाकिस्तान के बीच भू-राजनीतिक टकराव का संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। ALSO READ: ब्रेक्जिट के 10 साल: ब्रिटेन को भारी पड़ा अलग होने का फैसला

 

पहलगाम हमले के बाद हुई झड़पों ने दक्षिण एशिया में रणनीतिक स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं और परमाणु हथियार रखने वाले विरोधी देशों के बीच परमाणु प्रतिरोध (न्यूक्लियर डेटरेंस) की सीमाओं पर बहस छेड़ दी।

 

इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक सनोबर इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक कमर चीमा कहते हैं, “इस टकराव से यह साबित हो गया कि परमाणु हथियार जरूरी नहीं कि परमाणु युद्ध की नौबत आने से पहले होने वाले पारंपरिक संघर्ष को रोक सकें।”

 

कई मोर्चों पर युद्ध का जोखिम

चीमा के अनुसार भारत के लगातार सैन्य आधुनिकीकरण और आधुनिक युद्ध में ड्रोन, साइबर क्षमताओं तथा सटीक निशाना साधने वाले हथियारों (प्रिसिजन-गाइडेड वेपंस) की क्षमता से पाकिस्तान के सैन्य योजनाकारों को अपनी सुरक्षा रणनीति और सैन्य तैयारियों पर नए सिरे से विचार करना पड़ रहा है।

 

यह चुनौती केवल भारत के साथ पाकिस्तान की पूर्वी सीमा तक ही सीमित नहीं है। इस्लामाबाद पड़ोसी अफगानिस्तान के साथ भी संघर्ष में उलझा हुआ है, खासकर उसके पश्चिमी प्रांतों खैबर पख्तूनख्वाह और बलोचिस्तान में।

 

फरवरी में इस्लामाबाद ने काबुल के साथ ‘खुली जंग' का एलान किया। यह घोषणा पाकिस्तान के भीतर आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर उग्रवादी हमलों में बढ़ोतरी के बाद की गई थी। पाकिस्तान ने कई बार काबुल पर आरोप लगाया है कि वह अफगानिस्तान की धरती से पाकिस्तान पर हमला करने वाले उग्रवादी समूहों को रोकने में नाकाम रहा है। हालांकि, काबुल इन आरोपों को खारिज करता आया है। ALSO READ: क्यों हो रहा है स्वीडन में किशोरों को जेल भेजने पर विचार?

 

भारत की तुलना में पाकिस्तान का रक्षा बजट कितना कम

खर्च में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) के 7 अरब डॉलर के प्रोग्राम की शर्तों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। इस प्रोग्राम ने पाकिस्तान को 2022-23 के आर्थिक संकट के बाद डिफॉल्ट से बचने और मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता बहाल करने में मदद की थी।

 

सरकार का मकसद टैक्स में सुधार, टैरिफ रेशनलाइजेशन और एक्सपोर्ट व निवेश को बढ़ावा देने वाले उपायों के जरिए पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को स्थिरता से विकास की ओर ले जाना है। आईएमएफ ने पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ परामर्श बैठकें की थीं। इन चर्चाओं में देश की राजकोषीय रूपरेखा (फिस्कल फ्रेमवर्क) और राजस्व संबंधी अनुमान (रेवेन्यू असम्प्शन्स) कार्यक्रम से संबंधित बातचीत केंद्र में रहीं।

 

जून में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान की इकोनॉमी बढ़कर लगभग 452 अरब डॉलर हो गई। वहीं, भारत की आबादी, पाकिस्तान की तुलना में लगभग 5.7 गुना अधिक है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान के नौ गुना से भी अधिक बड़ी है। भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर आंका गया है।

 

दोनों एटमी देशों के रक्षा बजट में भी इसी तरह का बड़ा अंतर देखा जा सकता है। भारत का सालाना रक्षा खर्च लगभग 86 अरब डॉलर है, जो पाकिस्तान के खर्च से लगभग आठ गुना अधिक है। 

 

पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी इसे स्वीकार करते हैं। उन्होंने पिछले साल अमेरिकी मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में कहा, “हमारे पास खर्च करने के लिए असीमित पैसा नहीं है। पाकिस्तान का रक्षा बजट उसके पड़ोसी देश के बजट का बहुत छोटा हिस्सा है।”

 

आर्थिक दबाव और सुरक्षा प्राथमिकताओं के बीच संतुलन चुनौती

कॉलमनिस्ट और आर्थिक मामलों के जानकार खुर्रम हुसैन ने बताया कि पाकिस्तान ने हमेशा से ही रक्षा खर्च को प्राथमिकता दी है, यहां तक कि आर्थिक तंगी के समय में भी। वह कहते हैं, “मौजूदा आईएमएफ प्रोग्राम के तहत सरकार के लिए संतुलन बनाना एक नाजुक काम है। मगर आईएमएफ भी जमीनी हकीकत को समझता है। मुझे लगता है कि वे जानते हैं कि रक्षा खर्च पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है इसलिए वे दूसरे सेक्टर में ज्यादा सुधारों पर जोर देते हैं।”

 

कुछ अर्थशास्त्रियों और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर राज्यों से वित्तीय बोझ का ज्यादा हिस्सा उठाने की उम्मीद की जाती है, तो विकास से जुड़ी प्राथमिकताओं पर इसका दबाव पड़ सकता है।

 

इस्लामाबाद स्थित अर्थशास्त्री फारूख सलीम कहते हैं, “पाकिस्तान ने हमेशा उन सुरक्षा जरूरतों के लिए धन का इंतजाम किया है जिन्हें वह बहुत जरूरी मानता है। ज्यादा मुश्किल सवाल यह है कि क्या उन फैसलों को बनाए रखने के लिए महत्तवपूर्ण राजनीतिक सहमति तब भी बनी रहेगी, जब प्रांतों को इसके नतीजों या 'ट्रेड-ऑफ' का असर सीधे तौर पर महसूस होने लगेगा।”

 

पाकिस्तान सांसदों को इस महीने के अंत तक रक्षा बजट में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर मतदान करना है।  एक जुलाई से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत होनी है। सरकार चाहती है इसके पहले इस प्रस्ताव को संसद की मंजूरी मिल जाए।

भूकंप के 2 तेज झटकों से थर्राया वेनेजुएला, भारी तबाही, 10000 से ज्यादा की मौत!

Venezuela Earthquake

वेनेजुएला में भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह दो शक्तिशाली भूकंप आए। 7.2 और 7.5 की तीव्रता वाले भूकंप से भारी तबाही हुई। कई इमारते ध्वस्त हो गई और 10,000 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका है।

 

कराकस समेत कई इलाकों में इमारतों और मकानों को नुकसान पहुंचा है। बताया जा रहा है कि कराकस एयरपोर्ट की छत का कुछ हिस्सा गिर गया। इससे धूल का बड़ा गुबार उठता दिखाई दिया। भूकंप के बाद कार्यवाहक राष्‍ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने वेनेजुएला में आपातकाल की घोषणा कर दी गई है। राहत और बचाव कार्य जारी है।

 

पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था। इसका केंद्र राजधानी कराकस से करीब 160 किमी पश्चिम में जमीन से 13 किमी नीचे था। कुछ सेकेंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा भूकंप आया। इसका केंद्र मोरोन शहर के दक्षिण-पश्चिम में जमीन से 10 किमी नीचे था।

 

समाचार एजेंसी रायटर्स ने भूकंप की वजह से वेनेजुएला में 10,000 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका जताई है।

कैसे आता है भूकंप?

हमारी धरती मुख्य तौर पर 4 परतों से बनी हुई है- इनर कोर, आउटर कोर, मैन्टलऔर क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत वर्गों में बंटी हुई है जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं। लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं तो भूकंप आ जाता है। ये प्लेट्स क्षैतिज और उर्ध्वाधर दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इसके बाद वे अपनी जगह तलाशती हैं और ऐसे में एक प्लेट, दूसरी के नीचे आ जाती है।

 

कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?

भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। भूकंप की तरंगों को रिक्टर स्केल 1 से 9 तक के आधार पर मापता है। रिक्टर स्केल पैमाने को सन् 1935 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी में कार्यरत वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से खोजा था।

 

इस स्केल के अंतर्गत प्रति स्केल भूकंप की तीव्रता 10 गुना बढ़ जाती है और भूकंप के दौरान जो ऊर्जा निकलती है, वह प्रति स्केल 32 गुना बढ़ जाती है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि 3 रिक्टर स्केल पर भूकंप की जो तीव्रता थी, वह 4 स्केल पर 3 रिक्टर स्केल का 10 गुना बढ़ जाएगी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 8 रिक्टर पैमाने पर आया भूकंप 60 लाख टन विस्फोटक से निकलने वाली ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।

edited by : Nrapendra Gupta

Crude Oil Price:वेस्ट एशिया युद्ध से पहले के लेवल के करीब आया कच्चे तेल का भाव, $73 के नीचे फिसला

Crude Oil Price: क्रूड की कीमतों ने वेस्ट एशिया युद्ध के दौरान हुई सारी बढ़त खत्म कर दी। ब्रेंट क्रूड अब उसी लेवल पर वापस आ गया है, जिस पर यह 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध से पहले था।

ब्रेंट क्रूड 27 फरवरी, 2026 के बाद पहली बार $73 प्रति बैरल से नीचे फिसला है। यह 30 अप्रैल को $126 प्रति बैरल के हाई लेवल पर पहुंचा था और उस लेवल से 42% नीचे है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 1.1% से ज़्यादा गिरकर लगभग $72.8 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 1.2% गिरकर लगभग $69.4 प्रति बैरल पर आ गया। ।

बढ़ती सप्लाई और ईरान शांति समझौते में प्रगति के संकेतों से तेल की कीमतों में गिरावट जारी है। मार्केट के खास हिस्सों में अचानक सप्लाई भर गई है, और खरीदार वेस्ट एशिया और अफ्रीका जैसे इलाकों से आए ऑफर्स से भर गए हैं।

युद्ध खत्म करने के लिए शुरुआती बातचीत के बाद US और ईरान दोनों ने प्रगति का संकेत दिया है, हालांकि दोनों पक्षों के दावे कई बार अलग-अलग रहे हैं और न्यूक्लियर मुद्दों और लेबनान में सीजफायर जैसे टॉपिक पर आगे की बातचीत में रुकावटें आ रही हैं। एक पक्के समझौते को लेकर शुरुआती उम्मीद के कारण टैंकरों में सैटेलाइट सिग्नल चालू करके होर्मुज स्ट्रेट को खुलेआम पार करने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

तेल की बढ़ती उपलब्धता ने अंगोला से लेकर संयुक्त अरब अमीरात तक फिजिकल बैरल की कीमत कम कर दी है। ब्रेंट का प्रॉम्प्ट स्प्रेड – मार्केट का एक बहुत ज़्यादा देखा जाने वाला मेट्रिक – युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार बुधवार को एक बेयरिश कॉन्टैंगो स्ट्रक्चर में बदल गया।

US से ईरान से पहले से लोड किए गए तेल की खरीद की इजाज़त देने के लिए एक टेम्पररी छूट से भी सप्लाई और बढ़ने वाली है। फिर भी, फाइनेंसिंग और इंश्योरेंस से जुड़ी मुश्किलें बनी हुई हैं, जिनसे बिक्री कम होने की संभावना है।

युद्ध शुरू होने के बाद तेल सप्लाई की समस्या को हल करने में मिली ज़्यादातर सफलता उन इन्वेंट्री की कीमत पर मिली है जिन्हें US सहित फिर से भरना होगा। पिछले हफ़्ते कुशिंग, ओक्लाहोमा में स्टॉकपाइल लगभग 19 मिलियन बैरल तक गिर गया, जो उस लेवल से नीचे है जिसे ऑपरेशनल ज़रूरत माना जाता है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Katha: निर्जला एकादशी व्रत आज, व्रत के संपूर्ण फल के लिए पूजा में जरूर पढ़ें ये व्रत कथा

Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Katha: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के भक्त बिना और जल के श्री हरि की भक्ति में लीन रहते हैं। हर साल निर्जला एकादशी का यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की संपूर्ण विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए और कथा कहनी या सुननी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे दिन व्रत करने के बावजूद एकादशी व्रत की कथा नहीं सुनने पर व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है। इसलिए श्री हरि के सभी भक्तों के लिए निर्जला एकादशी की ये व्रत कथा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

निर्जला एकादशी व्रत तारख और मुहूर्त

इस साल ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जून को शाम 6:12 बजे से लेकर 25 जून को रात 8:09 बजे तक है। 25 जून को प्रात:काल में स्नान आदि करके व्रत और पूजा का संकल्प करें। निर्जला एकादशी पर विष्णु पूजा शुभ-उत्तम मुहूर्त 05:25 ए एम से 07:10 ए एम के बीच कर सकते हैं।

निर्जला एकादशी व्रत कथा

निर्जला एकादशीकी व्रत कथा के अनुसार, एक बार भीम ने व्यास जी से कहा कि उनकी मां कुंती और अन्य 4 भाई व्रत, स्नान, दान, पुण्य आदि करते हैं, लेकिन वे उपवास नहीं करते हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो उनको मोक्ष कैसे प्राप्त होगा? उन्होंने जब वेद व्यास जी को अपनी चिंता बताई तो व्रत न रखने का कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि वे बिना भोजन के नहीं रख सकते हैं क्योंकि उनको भूख बहुत लगती है।

इस पर व्यास जी ने कहा कि तुमको हर मास की दोनों एकादशी का व्रत रखना चाहिए। तब भीम ने कहा कि उनके पेट में वृक नामक आग है, जो भोजन से ही शांत होती है। उसे शांत करने के लिए दिनभर में कई बार भोजन करना पड़ता है। ऐसे व्रत रखना कैसे संभव है?

उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर व्यास जी से निवेदन किया कि आप कोई ऐसा व्रत बता दें, जिसे सालभर में एक बार ही करना हो और उससे सभी पाप खत्म हो जाएं। व्यास जी ने कहा कि साल भर में 24 एकादशी व्रत होते हैं, जिसमें भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। ये बातें सुनकर भीम और चिंतित हो गए कि वे बिना भोजन 24 एकादशी व्रत कैसे करेंगे। क्या वे पाप मुक्त नहीं हो पाएंगे, उनको मोक्ष नहीं मिलेगा? उन्होंने व्यास जी से मुक्ति का मार्ग पूछा, लेकिन यह भी कहा कि वे साल की सभी एकादशी का उपवास नहीं कर सकते हैं। कोई एक ऐसा व्रत बताएं, जो एक ही बार करने से मोक्ष की प्राप्ति हो।

इस पर व्यास जी ने कहा कि ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का व्रत एक मात्र ऐसा व्रत है, जो साल में एक बार पड़ता है, इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। इस व्रत में न जल पीना है और न ही अन्न ग्रहण करना है। यदि गलती से भी जल ग्रहण कर लिया तो व्रत टूट जाएगा, निष्फल हो जाएगा, उसका कोई पुण्य लाभ नहीं मिलेगा। निर्जला एकादशी को सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक अन्न और जल ग्रहण नहीं करते हैं। द्वादशी को सूर्योदय के बाद दान-पुण्य करें और पारण करके व्रत को पूरा करें। जो यह व्रत इस नियम और विधि से करता है, उसे साल की सभी 24 एकादशी व्रतों का पुण्य मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

यह सुनकर भीम प्रसन्न हो गए कि साल में केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके मोक्ष पाया जा सकता है। जब निर्जला एकादशी का व्रत आया तो भीम ने विधि विधान से व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की। द्वादशी को दान के बाद पारण किया और व्रत पूरा किया। इससे उन पर श्रीहरि की कृपा हुई और उनके पाप मिट गए, उनको स्वर्ग की प्राप्ति हुई।

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वेनेजुएला में 7.1 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंप आए:राजधानी कराकस में इमारतें गिरीं, एयरपोर्ट की छत का हिस्सा ढहा; 126 साल में सबसे बड़ा भूकंप

वेनेजुएला में बुधवार दोपहर दो शक्तिशाली भूकंप आए। पहला भूकंप 7.1 तीव्रता का था। इसका केंद्र कराकस से करीब 160 किमी पश्चिम में और गहराई 13 किमी थी। कुछ मिनट बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा भूकंप आया। दूसरे भूकंप का केंद्र मोरोन शहर के दक्षिण-पश्चिम में और गहराई 10 किमी थी। राजधानी कराकस समेत कई इलाकों में इमारतों और मकानों को नुकसान पहुंचा। स्थानीय मीडिया के अनुसार कराकस एयरपोर्ट की छत का कुछ हिस्सा गिर गया। मलबा गिरने से धूल का बड़ा गुबार उठता दिखाई दिया। यह पिछले 126 साल का सबसे बड़ा भूकंप है, इससे पहले 1900 में 7.7 का तीव्रता का भूकंप आया था। US जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, भूकंप में बड़ी जनहानि हो सकती है। एजेंसी के अनुसार, 10,000 से ज्यादा लोगों की मौत की 44% संभावना है और 1,00,000 से ज्यादा लोगों की मौत की 30% संभावना है। भूकंप से जुड़ी 2 तस्वीरें… US एजेंसी बोली- 10,000 मौतों की 44% संभावना USGS का कहना है कि बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हो सकता है और आफ्टरशॉक की भी संभावना है। US Geological Survey (USGS) का कहना है कि बुधवार शाम वेनेज़ुएला की राजधानी और आस-पास के इलाकों में लगातार आए भूकंपों के कारण बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान होने की आशंका है। USGS का कहना है कि यह आपदा बड़े पैमाने पर हो सकती है और इसके बाद तेज झटकों वाले आफ्टरशॉक भी आ सकते हैं। एजेंसी के अनुसार, 10,000 से ज्यादा लोगों की मौत की 44% संभावना है और 1,00,000 से ज्यादा लोगों की मौत की 30% संभावना है। साथ ही, जमीन पर भूस्खलन और लिक्विफैक्शन का भी काफी खतरा है। लिक्विफैक्शन एक ऐसी घटना है जो भूकंप के दौरान ढीली मिट्टी या तलछट को प्रभावित करती है। वेनेजुएला भूकंप से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Rashifal Today: आज के दिन बजट पर दें ज्यादा ध्यान, क्या कहता हैं आपका राशिफल

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार, हर इंसान की जन्मतिथि का अपना खास महत्व होता है। ये न सिर्फ उनके स्वभाव और व्यक्तित्व को बताता है, बल्कि उनके भविष्य के बारे में भी संकेत देती है। आज के दिन सभी मूलांकों के लिए वित्तीय अनुशासन, सही बजट और भविष्य की योजना बनाना बेहद जरूरी रहेगा। जल्दबाजी में खर्च करने से बचना और सोच-समझकर निवेश करना आने वाले समय में लाभदायक साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कैसा होगा मूलांक 1 से 9 तक के लोगों का दिन

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज आपको अपने पैसों के प्रबंधन पर खास ध्यान देना होगा। भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए लंबी अवधि की वित्तीय योजना तैयार करें। बिना सोचे-समझे खर्च करने से बचें और अपने बजट का पालन करें। किसी भी नए निवेश से पहले पूरी जानकारी जरूर लें। सही योजना और अनुशासन आपको आगे आर्थिक मजबूती दे सकते हैं।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत है। अपने खर्च और निवेश की पूरी जानकारी रखें। बाजार में आने वाले बदलावों पर नजर बनाए रखें और जरूरत पड़ने पर अपनी वित्तीय योजना में बदलाव करें। सही जानकारी और समझदारी से लिए गए फैसले आपको आर्थिक रूप से मजबूत बनाएंगे।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन वित्तीय योजनाएं बनाने के लिए अच्छा है। अपने खर्चों पर नियंत्रण रखें और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बचत पर फोकस करें। छोटे-छोटे सही फैसले आगे चलकर बड़ा फायदा दे सकते हैं। अपने बजट के अनुसार चलें और दीर्घकालिक लाभ देने वाले निवेशों पर विचार करें।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो घर और परिवार से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं। इसलिए अपने बजट को व्यवस्थित रखें और अनावश्यक खर्चों से बचें। भावनाओं में आकर पैसे खर्च करने की बजाय व्यावहारिक फैसले लें। परिवार की जरूरतों को प्राथमिकता दें और सोच-समझकर निवेश करें।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 14 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक व्यवस्थित बजट तैयार करें और उसी के अनुसार चलें। नए वित्तीय अवसर मिल सकते हैं, लेकिन जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। योजनाबद्ध तरीके से किया गया निवेश भविष्य में अच्छा लाभ दे सकता है।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन आर्थिक रूप से सकारात्मक रह सकता है। अपने खर्चों की समीक्षा करें और केवल जरूरी चीजों पर ही पैसा खर्च करें। बचत और निवेश पर ध्यान देने से भविष्य में लाभ मिलेगा। आर्थिक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ें और सभी वित्तीय दस्तावेजों को व्यवस्थित रखें।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आपको अपने भविष्य की आर्थिक सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। फिजूलखर्ची से बचें और अपने लंबे समय के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर फैसले लें। किसी भी बड़े निवेश से पहले अच्छी तरह विचार करें। सही योजना आपको आर्थिक सफलता की ओर ले जाएगी।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन आर्थिक मामलों में शुभ माना जा रहा है। भविष्य को ध्यान में रखकर निवेश की योजना बनाएं। अपने खर्चों का रिकॉर्ड रखें और केवल जरूरी चीजों पर ध्यान दें। समझदारी से लिए गए फैसले लंबे समय तक लाभ पहुंचा सकते हैं।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। नए अवसरों की तलाश करें, लेकिन जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। अपने वित्तीय लक्ष्यों की समीक्षा करें और जरूरत के अनुसार उनमें बदलाव करें। धैर्य और समझदारी से किए गए प्रयास आपको भविष्य में आर्थिक मजबूती प्रदान करेंगे।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

यूरोप में गर्मी का प्रकोप, 44 डिग्री सेल्सियस पार पहुंचा तापमान, कई देशों में रिकॉर्ड टूटा, दर्जनों की मौत

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यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। लगातार पड़ रही प्रचंड गर्मी ने कई देशों में तापमान के पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि स्कूल बंद करने पड़े हैं, परिवहन सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और सरकारों ने स्वास्थ्य संबंधी आपात चेतावनियां जारी कर दी हैं। ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, स्पेन, बेल्जियम, नीदरलैंड और स्विट्जरलैंड समेत कई यूरोपीय देशों में बुधवार को तापमान सामान्य से 18 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों ने आने वाले दिनों में और अधिक गर्मी पड़ने की चेतावनी दी है।

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फ्रांस में टूटा 80 साल का रिकॉर्ड

फ्रांस में मौसम रिकॉर्ड शुरू होने के बाद का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। दक्षिण-पश्चिमी शहर पिसोस (Pissos) में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके बाद देश के 50 से अधिक विभागों में उच्चतम स्तर का मौसम अलर्ट जारी कर दिया गया। भीषण गर्मी के कारण बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव देखा जा रहा है। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक यह हाल के वर्षों की सबसे गंभीर शुरुआती गर्मियों की हीटवेव में से एक है और आने वाले दिनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। 

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गर्मी से बढ़ीं मौतें

फ्रांस में गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों, नहरों और अन्य जल स्रोतों में उतरने वाले लोगों में से कम से कम 48 लोगों की डूबने से मौत हो गई है। इसके अलावा भीषण गर्मी के दौरान पार्क किए गए वाहन में छोड़े जाने के कारण दो छोटे बच्चों की भी मौत हो गई।

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स्पेन में भी हीटवेव का असर

 

स्पेन में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। अत्यधिक गर्मी के चलते हीटस्ट्रोक से दो बुजुर्ग लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को दोपहर के समय घरों में रहने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी है। यूरोप के कई शहरों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं। रेल और सड़क परिवहन सेवाओं पर भी गर्मी का असर पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में बिजली कटौती और स्वास्थ्य आपात स्थितियों की खबरें सामने आई हैं। Edited by : Sudhir Sharma