EV Scooter खरीदने से पहले जान लें, कौन-सी बैटरी है सबसे बेहतर? रेंज, चार्जिंग और लाइफ में कितना फर्क और कैसे करें चेक

electric scooter battery guide

भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। लेकिन जब लोग नया EV खरीदने जाते हैं तो अक्सर उनकी नजर सिर्फ रेंज और कीमत पर होती है, जबकि सबसे अहम हिस्सा उसकी बैटरी होती है। बैटरी ही तय करती है कि स्कूटर कितनी दूर चलेगा, कितनी जल्दी चार्ज होगा और लंबे समय में उसका रखरखाव कितना महंगा पड़ेगा।

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अगर आप नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो पहले यह जानना जरूरी है कि बाजार में कौन-कौन सी बैटरियां उपलब्ध हैं और उनके फायदे-नुकसान क्या हैं।

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अगर आप रोजाना शहर में सफर करते हैं और लंबी अवधि के लिए बेहतर रेंज, तेज चार्जिंग और कम रखरखाव चाहते हैं, तो लिथियम-आयन बैटरी वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। वहीं कम बजट वाले खरीदार लेड-एसिड या जेल सेल बैटरी वाले मॉडल चुन सकते हैं, लेकिन उन्हें वजन, रेंज और मेंटेनेंस से जुड़ी सीमाओं को ध्यान में रखना चाहिए। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक का मानना है कि आने वाले वर्षों में सॉलिड-स्टेट बैटरियां EV बाजार में बड़ा बदलाव ला सकती हैं, लेकिन फिलहाल भारतीय बाजार में लिथियम-आयन तकनीक ही सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय विकल्प बनी हुई है।

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बैटरी देखना क्यों है जरूरी 

दो इलेक्ट्रिक स्कूटर देखने में लगभग एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन चलाने पर उनका अनुभव बिल्कुल अलग होता है। एक स्कूटर बेहतरीन परफॉर्मेंस देता है, उसकी बैटरी लंबे समय तक चलती है और वह रोज़ाना इस्तेमाल के लिए भरोसेमंद लगता है, जबकि दूसरे को बार-बार चार्ज करना पड़ता है और वह जल्दी ही कमज़ोर पड़ने लगता है। यह अंतर पहली नज़र में शायद ही नज़र आए, लेकिन लंबे समय में मिलने वाली संतुष्टि पर इसका गहरा असर पड़ता है।

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बैटरी तकनीक चुपचाप तय करती है कि आप कितनी दूरी तय करेंगे, कितनी बार रिचार्ज करेंगे और समय के साथ हर राइड कितनी भरोसेमंद लगेगी। जब खरीदार विकल्पों की तुलना करते हैं, तो कई लोग पूछते हैं कि बिना किसी अतिरिक्त असुविधा के इलेक्ट्रिक स्कूटर के लिए कौन सी बैटरी सबसे अच्छी है । लिथियम-आयन तकनीक इसका सबसे स्पष्ट जवाब देती है, जो रेंज, दक्षता और टिकाऊपन का प्रभावी संतुलन प्रदान करती है।

1. लिथियम-आयन बैटरी 

आज अधिकांश आधुनिक इलेक्ट्रिक स्कूटर लिथियम-आयन बैटरी के साथ आते हैं। यह बैटरी हल्की होती है, तेजी से चार्ज होती है और एक बार चार्ज करने पर ज्यादा रेंज देती है।

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फायदे- 

  • ज्यादा रेंज
  • फास्ट चार्जिंग
  • कम वजन
  • कम रखरखाव
  • बेहतर परफॉर्मेंस

batteries

यही वजह है कि भारत में बिकने वाले ज्यादातर प्रीमियम EV स्कूटर इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।

 

2. लेड-एसिड बैटरी : सस्ती लेकिन भारी

लेड-एसिड बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे पुरानी तकनीकों में से एक है। इसकी कीमत कम होती है, लेकिन यह वजन में भारी होती है और इसकी लाइफ भी अपेक्षाकृत कम होती है।

 

फायदे

  • कम कीमत
  • आसानी से उपलब्ध

कमियां

  • ज्यादा वजन
  • कम रेंज
  • अधिक रखरखाव
  • धीमी चार्जिंग
  • 3. निकेल मेटल हाइड्राइड (NiMH) बैटरी

 

यह बैटरी लेड-एसिड की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है। हालांकि इलेक्ट्रिक स्कूटरों में इसका इस्तेमाल सीमित है।

 

फायदे

  • लंबी लाइफ
  • बेहतर सुरक्षा
  • पर्यावरण के लिए बेहतर

 

कमियां 

लिथियम-आयन जितनी दक्ष नहीं

कम लोकप्रिय
 

4. सॉलिड-स्टेट बैटरी: भविष्य की तकनीक

सॉलिड-स्टेट बैटरियों को EV इंडस्ट्री का भविष्य माना जा रहा है। इनमें पारंपरिक तरल इलेक्ट्रोलाइट की जगह ठोस सामग्री का उपयोग किया जाता है।

 

फायदे

  • ज्यादा सुरक्षा
  • लंबी रेंज
  • तेज चार्जिंग
  • बेहतर ऊर्जा क्षमता

कमियां

  • अभी बाजार में सीमित उपलब्धता
  • अपेक्षाकृत महंगी तकनीक
  • 5. जेल सेल बैटरी: कम रखरखाव वाला विकल्प

 

जेल सेल बैटरी लेड-एसिड तकनीक का उन्नत संस्करण है। इसमें इलेक्ट्रोलाइट जेल के रूप में होता है, जिससे रखरखाव की जरूरत कम हो जाती है।

फायदे

  • कम मेंटेनेंस
  • बेहतर स्थिरता

कमियां

  • वजन अधिक
  • रेंज सीमित
  • आखिर किस बैटरी वाला EV खरीदना चाहिए?

 EV स्कूटर/बाइक की बैटरी चेक कैसे करें?

  • वाहन के मोबाइल ऐप में Battery Health या Battery Status देखें।
  • फुल चार्ज पर मिलने वाली रेंज को नोट करें।
  • यदि पहले 100 किमी रेंज मिलती थी और अब 70-80 किमी ही मिल रही है, तो बैटरी डिग्रेड हो सकती है।
  • अधिकृत सर्विस सेंटर में Battery Diagnostic Test करवाएं।

घर में कैसे करें चेक 

  •  चार्ज जल्दी खत्म होना
  • चार्जिंग में असामान्य समय लगना
  • अचानक रेंज कम होना
  • बैटरी ओवरहीट होना
  • डैशबोर्ड पर बैटरी चेतावनी आना

सेकेंड-हैंड EV खरीदते समय क्या चेक करें?

  • Battery SOH 85% से अधिक हो तो अच्छा माना जाता है।
  • बैटरी वारंटी कितनी बची है, यह देखें।
  • DC Fast Charging का अत्यधिक उपयोग हुआ है या नहीं, पूछें।
  • अधिकृत सर्विस सेंटर से बैटरी हेल्थ रिपोर्ट लें।
  • टेस्ट ड्राइव में वास्तविक रेंज जांचें  Edited by : Sudhir Sharma

Electric scooter खरीदने से पहले जान लें कौन-सी बैटरी है सबसे बेहतर? रेंज, चार्जिंग और लाइफ में कितना फर्क और कैसे करें चेक

electric scooter battery guide

भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। लेकिन जब लोग नया EV खरीदने जाते हैं तो अक्सर उनकी नजर सिर्फ रेंज और कीमत पर होती है, जबकि सबसे अहम हिस्सा उसकी बैटरी होती है। बैटरी ही तय करती है कि स्कूटर कितनी दूर चलेगा, कितनी जल्दी चार्ज होगा और लंबे समय में उसका रखरखाव कितना महंगा पड़ेगा।

ALSO READ: Electric Scooter खरीदने से पहले 14 जरूरी बातें जो आपके लिए जानना जरूरी

अगर आप नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो पहले यह जानना जरूरी है कि बाजार में कौन-कौन सी बैटरियां उपलब्ध हैं और उनके फायदे-नुकसान क्या हैं।

ALSO READ: Electric Scooters : भारत के 10 सबसे शानदार इलेक्ट्रिक स्कूटर्स, दमदार रेंज, स्मार्ट फीचर्स और किफायती कीमत का बेहतरीन कॉम्बिनेशन

अगर आप रोजाना शहर में सफर करते हैं और लंबी अवधि के लिए बेहतर रेंज, तेज चार्जिंग और कम रखरखाव चाहते हैं, तो लिथियम-आयन बैटरी वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। वहीं कम बजट वाले खरीदार लेड-एसिड या जेल सेल बैटरी वाले मॉडल चुन सकते हैं, लेकिन उन्हें वजन, रेंज और मेंटेनेंस से जुड़ी सीमाओं को ध्यान में रखना चाहिए। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक का मानना है कि आने वाले वर्षों में सॉलिड-स्टेट बैटरियां EV बाजार में बड़ा बदलाव ला सकती हैं, लेकिन फिलहाल भारतीय बाजार में लिथियम-आयन तकनीक ही सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय विकल्प बनी हुई है।

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बैटरी देखना क्यों है जरूरी 

दो इलेक्ट्रिक स्कूटर देखने में लगभग एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन चलाने पर उनका अनुभव बिल्कुल अलग होता है। एक स्कूटर बेहतरीन परफॉर्मेंस देता है, उसकी बैटरी लंबे समय तक चलती है और वह रोज़ाना इस्तेमाल के लिए भरोसेमंद लगता है, जबकि दूसरे को बार-बार चार्ज करना पड़ता है और वह जल्दी ही कमज़ोर पड़ने लगता है। यह अंतर पहली नज़र में शायद ही नज़र आए, लेकिन लंबे समय में मिलने वाली संतुष्टि पर इसका गहरा असर पड़ता है।

ALSO READ: Boss Scam Alert: WhatsApp पर आए ऐसा मैसेज तो भूलकर भी न खोलें फाइल, खाली हो सकता है बैंक अकाउंट

बैटरी तकनीक चुपचाप तय करती है कि आप कितनी दूरी तय करेंगे, कितनी बार रिचार्ज करेंगे और समय के साथ हर राइड कितनी भरोसेमंद लगेगी। जब खरीदार विकल्पों की तुलना करते हैं, तो कई लोग पूछते हैं कि बिना किसी अतिरिक्त असुविधा के इलेक्ट्रिक स्कूटर के लिए कौन सी बैटरी सबसे अच्छी है । लिथियम-आयन तकनीक इसका सबसे स्पष्ट जवाब देती है, जो रेंज, दक्षता और टिकाऊपन का प्रभावी संतुलन प्रदान करती है।

1. लिथियम-आयन बैटरी 

आज अधिकांश आधुनिक इलेक्ट्रिक स्कूटर लिथियम-आयन बैटरी के साथ आते हैं। यह बैटरी हल्की होती है, तेजी से चार्ज होती है और एक बार चार्ज करने पर ज्यादा रेंज देती है।

ALSO READ: EV स्कूटर कैसे चुने, खरीदने से पहले इन बातों की करें जांच, वरना पड़ेगा पछताना

फायदे- 

  • ज्यादा रेंज
  • फास्ट चार्जिंग
  • कम वजन
  • कम रखरखाव
  • बेहतर परफॉर्मेंस

batteries

यही वजह है कि भारत में बिकने वाले ज्यादातर प्रीमियम EV स्कूटर इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।

 

2. लेड-एसिड बैटरी : सस्ती लेकिन भारी

लेड-एसिड बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे पुरानी तकनीकों में से एक है। इसकी कीमत कम होती है, लेकिन यह वजन में भारी होती है और इसकी लाइफ भी अपेक्षाकृत कम होती है।

 

फायदे

  • कम कीमत
  • आसानी से उपलब्ध

कमियां

  • ज्यादा वजन
  • कम रेंज
  • अधिक रखरखाव
  • धीमी चार्जिंग
  • 3. निकेल मेटल हाइड्राइड (NiMH) बैटरी

 

यह बैटरी लेड-एसिड की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है। हालांकि इलेक्ट्रिक स्कूटरों में इसका इस्तेमाल सीमित है।

 

फायदे

  • लंबी लाइफ
  • बेहतर सुरक्षा
  • पर्यावरण के लिए बेहतर

 

कमियां 

लिथियम-आयन जितनी दक्ष नहीं

कम लोकप्रिय
 

4. सॉलिड-स्टेट बैटरी: भविष्य की तकनीक

सॉलिड-स्टेट बैटरियों को EV इंडस्ट्री का भविष्य माना जा रहा है। इनमें पारंपरिक तरल इलेक्ट्रोलाइट की जगह ठोस सामग्री का उपयोग किया जाता है।

 

फायदे

  • ज्यादा सुरक्षा
  • लंबी रेंज
  • तेज चार्जिंग
  • बेहतर ऊर्जा क्षमता

कमियां

  • अभी बाजार में सीमित उपलब्धता
  • अपेक्षाकृत महंगी तकनीक
  • 5. जेल सेल बैटरी: कम रखरखाव वाला विकल्प

 

जेल सेल बैटरी लेड-एसिड तकनीक का उन्नत संस्करण है। इसमें इलेक्ट्रोलाइट जेल के रूप में होता है, जिससे रखरखाव की जरूरत कम हो जाती है।

फायदे

  • कम मेंटेनेंस
  • बेहतर स्थिरता

कमियां

  • वजन अधिक
  • रेंज सीमित
  • आखिर किस बैटरी वाला EV खरीदना चाहिए?

 EV स्कूटर/बाइक की बैटरी चेक कैसे करें?

  • वाहन के मोबाइल ऐप में Battery Health या Battery Status देखें।
  • फुल चार्ज पर मिलने वाली रेंज को नोट करें।
  • यदि पहले 100 किमी रेंज मिलती थी और अब 70-80 किमी ही मिल रही है, तो बैटरी डिग्रेड हो सकती है।
  • अधिकृत सर्विस सेंटर में Battery Diagnostic Test करवाएं।

घर में कैसे करें चेक 

  •  चार्ज जल्दी खत्म होना
  • चार्जिंग में असामान्य समय लगना
  • अचानक रेंज कम होना
  • बैटरी ओवरहीट होना
  • डैशबोर्ड पर बैटरी चेतावनी आना

सेकेंड-हैंड EV खरीदते समय क्या चेक करें?

  • Battery SOH 85% से अधिक हो तो अच्छा माना जाता है।
  • बैटरी वारंटी कितनी बची है, यह देखें।
  • DC Fast Charging का अत्यधिक उपयोग हुआ है या नहीं, पूछें।
  • अधिकृत सर्विस सेंटर से बैटरी हेल्थ रिपोर्ट लें।
  • टेस्ट ड्राइव में वास्तविक रेंज जांचें  Edited by : Sudhir Sharma

Gold Silver Rates Today: सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी भी 4000 रुपये लुढ़की

दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने और चांदी में 24 जून को गिरावट आई। सोना 1,200 रुपये गिरकर 1.48 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी 4000 रुपये फिसली। सोने में गिरावट की वजह डॉलर में मजबूती और शेयर बाजारों में बेहतर हो रहा सेंटिमेंट है। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सिल्वर में लगातार दूसरे दिन कमजोरी दिखी। यह 4000 रुपये गिरकर 2,31,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।

चांदी का भाव अप्रैल के शुरुआती लेवल पर पहुंचा

एनालिस्ट्स का कहना है कि इस गिरावट से चांदी की कीमतें अप्रैल की शुरुआत के अपने लेवल के करीब पहुंच गई हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि सोने में कमजोरी बुधवार को भी जारी रही। इसकी वजह अमेरिकी डॉलर में मजबूती है। अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी सख्त होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में बड़ी गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में नरमी देखने को मिली। यह 1.3 फीसदी यानी 52 डॉलर गिरकर 4,050 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अमेरिका में डॉलर इंडेक्स 101 लेवल के पार पहुंच गया है। डॉलर में मजबूती आने पर सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। इसकी वजह यह है कि डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। डॉलर इंडेक्स मई 2025 के बाद अपने सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया है।

सोने पर शॉर्ट टर्म में दबाव जारी रह सकता है

कमोडिटी के जानकारों का मानना है कि सोने पर अभी दबाव दिख सकता है। अगर बीच में कीमतों में तेजी आती है तो मुनाफावसूली की वजह से वह जारी नहीं रह पाएगी। हालांकि, अमेरिका-ईरान में डील की खबर से बुलियन में रिकवरी दिख सकती है। फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला था।

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फाइनेंशियल मार्केट्स में दिख रहा एडजस्टमेंट

एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा कि जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने से फाइनेंशियल मार्केट्स में लिक्विडिटी आधारित एडजस्टमेंट दिख रहा है। ग्लोबल एआई और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में मुनाफावसूली देखने को मिली है। उधर, फेडरल रिजर्व का रुख भी बदला दिख रहा है।

सिया गोयल का वो खौफनाक कबूलनामा और बेकरी-ड्राई फ्रूट्स वाले इश्क की इनसाइड स्टोरी!

Siya Goyal Confession

Siya Goyal Confession: एक रसूखदार बिजनेसमैन का बेगुनाह बेटा और प्यार के नाम पर रचा गया मौत का एक ऐसा चक्रव्यूह जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। केतन अग्रवाल की मौत को शुरुआत में महज एक हादसा समझने की भूल हर किसी ने की थी, लेकिन अब मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी के 'कन्फेशन' (कबूलनामे) ने इस केस में वो राज उगले हैं, जिन्हें सुनकर पुलिस के भी रोंगटे खड़े हो गए। सिया ने पुलिस को बताया कि अगर केतन से शादी हो जाती, तो हमारे रिश्ते खत्म हो जाते।

कैसे शुरू हुई चेतन-सिया की लव स्टोरी

सिया गोयल पुणे में अपनी एक बेकरी चलाती थी, जबकि चेतन चौधरी ड्राई फ्रूट्स (मेवे) का थोक कारोबार करता था। बिजनेस के सिलसिले में दोनों की बातचीत शुरू हो चुकी थी, लेकिन दोस्ती को मोहब्बत का नाम मिला पिछले साल की एक दिवाली पार्टी में। दिवाली पार्टी की मुलाकात के बाद दोनों इस कदर एक-दूसरे के प्यार में अंधे हो चुके थे कि दिन-रात फोन पर बातें होने लगीं। ALSO READ: हत्या के पहले किसने गायब किया केतन का पासपोर्ट, 17 करोड़ में बुक किया था महल, पिता बोले सिया से क्यों मारा बेटे को?

क्यों नहीं भागकर की शादी?

पुलिस की पूछताछ में चेतन चौधरी ने कबूला कि वे दोनों साथ रहना चाहते थे। लेकिन सिया समाज में अपने परिवार की 'इज्जत' खराब नहीं करना चाहती थी। वह भागकर शादी करने के खिलाफ थी। उसे परिवार को बदनाम भी नहीं करना था और प्रेमी चेतन को छोड़ना भी नहीं था— इसी बीमार मानसिकता ने केतन अग्रवाल की मौत का रास्ता तैयार किया।

केतन का 'वो' अनसुना 'डर'

फरवरी 2026 में 26 साल के करोड़पति बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की सगाई सिया गोयल से बहुत धूमधाम से हुई। केतन के चचेरे मामा नरेंद्र मित्तल ने दूर की रिश्तेदारी देखकर यह रिश्ता तय कराया था। केतन इस शादी से बेहद खुश था, सोशल मीडिया पर सगाई और प्री-वेडिंग के कई वीडियो इसकी गवाही देते हैं। ALSO READ: पुणे में इंदौर से भी ज्यादा खौफनाक हत्या, सिया ने ही बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर की थी मंगेतर केतन की हत्या

कहानी का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि केतन को कहीं न कहीं कुछ अजीब होने का अहसास था। वह अक्सर ट्रेकिंग के दौरान सिया के व्यवहार को लेकर थोड़ा चिंतित रहता था। उसने कई बार अपने पिता विशाल अग्रवाल से पूछा था कि पापा, क्या आपने सिया का बैकग्राउंड सही से चेक किया है? लेकिन दूर के रिश्तेदार और मामा का भरोसा होने के कारण परिवार ने इस शक को गंभीरता से नहीं लिया।

इंस्टाग्राम पर 'घड़ियाली आंसू'

18 जून को सिया गोयल का जन्मदिन था। केतन किसी बड़े आलीशान रिजॉर्ट में पार्टी करना चाहता था, लेकिन सिया ने जिद की कि वे लोहागढ़ किले में बर्थडे स्पेशल ट्रेकिंग पर जाएंगे। वहां पहले से ही हूडी पहनकर चेहरा छिपाए चेतन चौधरी उनका पीछा कर रहा था। जैसे ही वे 400 फीट ऊंची सुनसान पहाड़ी पर पहुंचे, सिया और चेतन ने मिलकर केतन को गहरी खाई में धकेल दिया।

कत्ल करने के तुरंत बाद सिया ने रोने-बिलखने का ऐसा नाटक किया कि पुलिस ने इसे पैर फिसलने का हादसा मान लिया। शातिर सिया ने इंस्टाग्राम पर केतन की फोटो के साथ स्टोरी लगाई और लिखा- “तुम मुझे अकेले छोड़कर क्यों चले गए? जबकि मैं तुमसे दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करती थी…” इस एक पोस्ट ने केतन के टूट चुके परिवार को भी कुछ समय के लिए गुमराह कर दिया।

इस तरह हुआ सिया के झूठ के खुलासा

केतन के अंतिम संस्कार के बाद जब सिया उनके घर पहुंची, तो केतन की बहन को उसकी बातों और हाव-भाव पर गहरा शक हुआ। बहन ने जब हादसे की जगह को लेकर कुछ तीखे सवाल किए, तो सिया सकपका गई और उलटे-सीधे जवाब देने लगी। बहन की सूझबूझ से परिवार तुरंत पुलिस के पास पहुंचा। जब पुलिस ने सिया के मोबाइल का डिलीटेड डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स खंगाले, तो उसमें चेतन चौधरी का नाम और कत्ल की पूरी प्लानिंग का चिट्ठा सामने आ गया। कोर्ट सिया और चेतन को क्या सजा देगा यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल दोनों आशिक सलाखों के पीछे हैं। 

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Stock in Focus: आईटी कंपनी HCLTech की Nokia और Neste से AI डील, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: आईटी कंपनी HCLTech ने AI बेस्ड सर्विसेज को मजबूत करने के लिए दो बड़े समझौतों का ऐलान किया है। कंपनी ने टेलीकॉम इक्विपमेंट बनाने वाली Nokia और फिनलैंड की रिन्यूएबल फ्यूल कंपनी Neste के साथ साझेदारी की है। इन समझौतों का फोकस AI, नेटवर्क ऑटोमेशन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने पर रहेगा।

Nokia के साथ बनाएगी स्मार्ट नेटवर्क

HCLTech ने Nokia के साथ अपनी मौजूदा साझेदारी का विस्तार किया है। दोनों कंपनियां AI बेस्ड नेटवर्क ऑटोमेशन को बढ़ावा देंगी। इसका मकसद टेलीकॉम कंपनियों को ज्यादा स्मार्ट और ऑटोमेटेड नेटवर्क उपलब्ध कराना है।

इस समझौते के तहत HCLTech, Nokia के SMO Marketplace में चार AI बेस्ड rApps जोड़ेगी। इनमें Anomaly Detector नेटवर्क की गड़बड़ियां पकड़ने का काम करेगा। Energy Optimizer कम ट्रैफिक के दौरान बिजली की खपत घटाने में मदद करेगा।

mMIMO Interference Mitigation सिग्नल क्वालिटी बेहतर करेगा। वहीं Traffic Balancer नेटवर्क पर दबाव और लेटेंसी कम करने का काम करेगा। दोनों कंपनियां मिलकर 5G और भविष्य की नेटवर्क तकनीकों के लिए नए rApps भी विकसित करेंगी।

HCLTech के कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट हरी सदरहल्ली ने कहा कि यह साझेदारी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को AI बेस्ड नेटवर्क ऑटोमेशन अपनाने में मदद करेगी। साथ ही वे सेल्फ-ड्राइविंग नेटवर्क्स की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेंगे।

Neste के साथ बढ़ाएगी ऑपरेशनल एफिशिएंसी

HCLTech को फिनलैंड की रिन्यूएबल फ्यूल कंपनी Neste ने अपने प्रदर्शन सुधार कार्यक्रम के लिए रणनीतिक साझेदार चुना है। इस समझौते के तहत HCLTech, Neste के आईटी सिस्टम को सरल बनाने पर काम करेगी। कंपनी अलग-अलग आईटी सेवाओं को कंसॉलिडेट करेगी। साथ ही ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने और तकनीकी ढांचा मजबूत करने में मदद करेगी।

Neste की CFO ईवा सिपिला ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी की आईटी क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। इससे प्रदर्शन सुधार कार्यक्रम को भी गति मिलेगी। HCLTech के चीफ ग्रोथ ऑफिसर अजय बहल ने कहा कि यह समझौता Neste को ज्यादा कुशल और मजबूत तकनीकी ढांचा तैयार करने में मदद करेगा।

HCLTech का शेयर मंगलवार को 0.41% बढ़कर ₹1,114 पर बंद हुआ। हालांकि, साल 2026 में अब तक शेयर करीब 32% टूट चुका है।

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Alka Yagnik: पद्म भूषण लेने पहुंची अलका याग्निक, इस रेयर हियरिंग डिसऑर्डर से जूझ रहीं सिंगर

Alka Yagnik: बॉलीवुड की जानी-मानी सिंगर अलका याग्निक को पिछले काफी समय से मीडिया की नजरों से दूर थी। दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में 23 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अलका याग्निक को पद्म भूषण दिया। सिंगर को मंच तक पहुंचने के लिए अटेंडेंट का सहारा लेना पड़ा था। वहीं फैंस अलका याग्निक की हेल्थ को लेकर फैंस काफी चिंतित हो गए। अलका याग्निक की नई झलक देखने के बाद सोशल मीडिया पर उनके हेल्थ और पर्सनल लाइफ को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वहीं पद्म भूषण मिलने के बाद अल्का ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।

अल्का को है ये रेयर बिमारी

साल 2024 में अलका याग्निक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपने प्रशंसकों को एक बड़ी जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि वह एक रेयर हियरिंग डिसऑर्डर से जूझ रही हैं, जिसे सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस (एसएनएचएल) कहा जाता है। सिंगर ने बताया, कि ये कंडीशन एक वायरल अटैक के बाद अचानक डेवलप हुई और इससे उनकी सुनने की क्षमता पर बहुत बुरा असर पड़ा। अचानक ये सुनने के बाद वो काफी इमोशनल हो गई थी।

 

सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस क्या है

सेंसोरिन्यूरल हियरिंग लॉस तब होता है जब कान के अंदर या ऑडिटरी नर्व डैमेज हो जाती है, जिससे दिमाग के लिए आवाजों को प्रोसेस करना मुश्किल हो जाता है। ये परेशानी बढ़ती उम्र, इन्फेक्शन, चोट या किसी वायरल बीमारी के कारण भी हो सकती है। अलका याग्निक के मामले में डॉक्टरों ने इस समस्या की वजह एक वायरल इन्फेक्शन को बताया था। एक्सपर्ट के अनुसार, इस तरह की स्थिति में समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी होता है, क्योंकि देर से इलाज से ठीक होने की उम्मीद पर असर पड़ सकता है।

आखिरी बार इस प्रोजेक्ट का थी हिस्सा

हियरिंग डिसऑर्डर का असर अलका याग्निक के संगीत करियर पर भी पड़ा है। कई संगीतकार अब भी उनके साथ काम करने की इच्छा रखते हैं, लेकिन वह अभी तक पूरी तरह से रिकॉर्डिंग की दुनिया में वापसी नहीं कर पाई हैं। अलका याग्निक का आखिरी रिकॉर्ड किया गया गीत फिल्म अमर सिंह चमकीला का “नरम कालजा” था, जिसे प्रसिद्ध संगीतकार ए. आर. रहमान ने तैयार किया था। इसके बाद से उनकी आवाज किसी नए गाने या संगीत प्रोजेक्ट में सुनाई नहीं दी है, जिससे उनके प्रशंसक उनकी वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

Share Bazaar में आई बड़ी तेजी, Sensex 791 अंक उछला, Nifty भी 24000 के पार

Indian stock market witnessed big jump on third trading day of week

Share Market Update News : भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन यानी बुधवार को सुस्ती के साथ शुरुआत हुई, लेकिन घंटेभर के कारोबार के बाद ही अचानक बाजी पलट गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स तूफानी तेजी के साथ भागते हुए नजर आने लगे। एक दिन की गिरावट के बाद आज शेयर बाजार ने जबरदस्‍त रिकवरी की। कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्‍स 791 अंक उछल गया, वहीं एनएसई का निफ्टी 24000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्‍तर को पार कर गया।

बीएसई सेंसेक्स 790.54 अंक (+1.04 प्रतिशत) की मजबूत छलांग के साथ 76991.22 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 197.56 अंक (0.83 फीसदी) की बढ़त के साथ 24021.65 पर टिका रहा। इस दौरान निवेशकों को करीब 2 लाख करोड़ रुपए का फायदा मिला। इस बार कच्चे तेल की कम कीमतों और ब्लू-चिप शेयरों (खासकर IT और प्राइवेट बैंकों) में खरीदारी से बाजार को सहारा मिला।

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सेंसेक्‍स के शेयरों में सबसे ज्‍यादा फायदे में इंडिगो, ट्रेंट, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस और आईसीआईसीआई बैंक रहे। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने मंगलवार को 17.86 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। इससे बाजार के सेंटीमेंट को सहारा मिला। बाजार की इस बुलिश रैली (तेजी) में फाइनेंशियल (वित्तीय) और आईटी सेक्टर के शेयरों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Oil prices) की कीमतें गिरकर 77 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी (Rate-hike) की चिंताओं को शांत कर दिया है, जिससे बाजार को बड़ी राहत मिली है।

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इससे पहले यानी मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला। बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से आईटी शेयरों में आई तेज बिकवाली के कारण हुई। टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक के शेयरों में सबसे ज्‍यादा गिरावट आई।

कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्स 893.39 अंक यानी 1.16 प्रतिशत लुढ़ककर 76200.68 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 278.80 अंक यानी 1.16 प्रतिशत टूटकर 23824.10 के स्तर पर आ गया। सबसे ज़्यादा नुकसान इंफोसिस को हुआ जिसमें 3.39 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
Edited By : Chetan Gour

S&P का भारत के बारे में बड़ा बयान, कहा-भले ही यह AI की रेस जीत नहीं सकता, फिर भी इसकी ग्रोथ काफी तेज है

एसएंडपी ने इंडिया के बारे में बड़ी बात कही है। उसने कहा है कि इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बूम के बेनेफिशियरी के रूप में अभी नहीं उभरा है। लेकिन, इसका इकोनॉमिक ग्रोथ आउटलुक स्ट्रॉन्ग घरेलू मांग की वजह से ठोस बना हुआ है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स में चीफ एपीएसी इकोनॉमिस्ट लुइस कुइज्स ने यह बात कही है।

सेमीकंडक्टर और चिप बनाने वाले देशों में जा रहा निवेश

उन्होंने कहा कि अभी एआई-से जुड़ा ज्यादातर निवश उन इकोनॉमीज में जा रहा है, जिनकी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और चिप सप्लाई चेन में सीधी भूमिका है। इनमें ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देश हैं, जिनकी इकोनॉमी को लेकर बीते कुछ महीनों में सबसे ज्यादा अपग्रेड देखने को मिला है।

एआई से जुड़ी इकोनॉमी की ग्रोथ में ज्यादा अपग्रेड दिखा है

उन्होंने कहा कि जब हम पिछले डेढ़ साल के अपने अनुमान पर नजर डालते हैं तो हम पाते हैं कि इनमें ऐसी इकोनॉमीज हैं जो इस पूरी एआई स्टोरी से जुड़ी हैं। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन से जुड़ी दूसरी इकोनॉमीज में भी इसी तरह का ट्रेंड देख रही है। इनमें मलेशिया, चीन और जापान शामिल हैं।

भारत को मजबूत घरेलू मांग का मिल रहा बड़ा फायदा

जो देश चिप मैन्युफैक्चरिंग में ज्यादा एक्विट नहीं हैं, उनमें भी ग्रोथ दिख रही है, लेकिन यह ग्रोथ उतनी नहीं है जितनी चिप बनाने वाले देशों की है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इंडिया पिछड़ रहा है। इंडियन इकोनॉमी को उसके मजबूत घरेलू मांग का फायदा मिल रहा है। यह भारत की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है।

एसएंडपी ने इंडिया की ग्रोथ 6.6 फीसदी रहने की उम्मीद जताई

एसएंडपी को इंडिया की ग्रोथ करीब 6.6 फीसदी रहने की उम्मीद है। यह ग्रोथ के आरबीआई के अनुमान के करीब है। हालांकि, कुइज्स का मानना है कि एआई बूम अपेक्षाकृत कमजोर बुनियाद पर खड़ा है। एआई को लेकर ज्यादा उम्मीद का आधार कुछ मुट्ठीभर अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों का बड़ा निवेश है। ये कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स में बड़ा निवेश कर रही हैं।

एआई का फायदा उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला तो कई देशों को होगी दिक्कत

उन्होंने कहा कि अगर इन कंपनियों को एआई पर अपने इनवेस्टमेंट का फायदा मिलने में दिक्कत आती है तो इसका असर पूरे सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर दिखेगा। इसका असर उनक इकोनॉमीज पर भी दिखेगा जिन्हें एआई ट्रेड से फायदा हुआ है। इधर, इंडिया की ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले फैक्टर्स काफी डायवर्सिफायड हैं। घरेलू खपत से इकोनॉमी को लगातार सपोर्ट मिल रहा है।

9th Fail इम्तियाज़ अली कैसे बने India’s Best Storyteller | Imtiaz Ali | Main Vaapas Aaunga

Imtiaz Ali, जिनकी फिल्में Jab We Met, Rockstar और Tamasha लोगों के दिलों में बस गईं, एक समय 9वीं में फेल हो गए थे।
इसी Failure ने उन्हें सिखाया और failure, Self-doubt और Curiosity ने उन्हें एक बेहतरीन Storyteller बना दिया।

@imtiazaliofficial

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साहस की मूर्ति को सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया नमन, कहा- अद्वितीय पराक्रम-साहस की मिसाल थीं वीरांगना रानी दुर्गावती

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 24 जून को वीरांगना रानी दुर्गावती के 463वें बलिदान दिवस पर जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम का आयोजन वीरांगना रानी दुर्गावती के समाधि स्थल नर्रई नाला पर आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम की शुरूआत में ग्राम नर्रई नाला स्थित वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती की समाधि स्थल पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने शहीद वीर नारायण की प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही गौंड समाज के आराध्य देवता बड़ा देव का पूजन-अर्चन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

 

कार्यक्रम में सीएम डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती, अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और साहस की प्रतिमूर्ति थीं। नारी शक्ति का पराक्रम मां दुर्गावती के व्यक्तित्व में नजर आता है। मुगलों को युद्धों में धूल चटाने वाली ऐसी वीरांगना रानी दुर्गावती का आज 463वां बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती ने गौंडवाना साम्राज्य में 52 गढ़ों पर शासन किया। पति की असमय मृत्यु के बाद 5 साल के बेटे को सिंहासन पर बैठाया और 15 साल तक जनता की सेवा के लिए और क्षेत्र की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। 

 

प्रदेश के लिए सम्मान और आदर की बात-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर लगभग 500 वर्ष पूर्व रानी दुर्गावती का जन्म हुआ, लेकिन आज पूरा देश और प्रदेश उन्हें आदर के साथ स्मरण करता है। हमारा सौभाग्य है कि प्रदेश सरकार के गठन के बाद मंत्रि-परिषद की पहली बैठक जबलपुर में रानी दुर्गावती को समर्पित कर आयोजित की गई थी। इसके बाद दूसरी कैबिनेट बैठक रानी दुर्गावती के गौंडवाना साम्राज्य की राजधानी संग्रामपुर में आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि जबलपुर एयरपोर्ट का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखने के लिए केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। 

 

नए संस्थान का जल्द होगा लोकार्पण-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती को समर्पित नवीन संस्थान जबलपुर में 100 करोड़ रुपये की लागत से मदन महल के पास तैयार हो रहा है, जिसका लोकार्पण बहुत जल्द किया जाएगा। इस संस्थान से प्रदेश की भावी पीढ़ी रानी दुर्गावती के गौरवशाली अतीत और कार्यों से परिचित होंगी। जबलपुर में रानी दुर्गावती के नाम पर एक चिड़ियाघर (जू) और वन्य प्राणी रेस्क्यू सेंटर बन रहा है। इसके साथ ही 35वीं बटालियन मंडला का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नायकों की वीरता और समृद्ध विरासत को सही रूप में प्रस्तुत करने के लिए 'विरासत से विकास' अभियान शुरू किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती का शासन काल, गौंड साम्राज्य का स्वर्णिम युग था। रानी दुर्गावती ने किसान कल्याण के लिए उस दौर में बीज संग्रह, फसल चक्रण और जल संचय के महत्वपूर्ण कार्य कराए थे। उनके प्रबंधन के परिणाम स्वरूप अनाज के भंडार भरे हुए थे।

 

किसानों के कल्याण के लिए ठोस निर्णय ले रही है सरकार-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए संकल्पित है और पूरा वर्ष किसानों को समर्पित करते हुए ठोस निर्णय ले रही है। अब किसान बंधुओं के लिए शून्य ब्याज दर पर 31 मार्च तक कर्ज चुकाने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। किसान जिस तारीख को लोन लेंगे, तब से एक वर्ष की समयावधि में कर्ज चुकाया जा सकेगा। राज्य सरकार 880 करोड़ रुपए का भुगतान वित्तीय संस्थाओं को करेगी। राज्य सरकार पर्यटन, उद्योगों और अधोसंरचना विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शासकीय परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करने पर सरकार किसानों को अब चार गुना मुआवजा देगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में संचालित रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना से कोदो-कुटकी पैदा करने वाले किसानों को लाभ मिल रहा है। प्रदेश की लाड़ली बहनों को हर माह जारी हो रहे 1500 रुपए से उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है। किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि का भी लाभ मिल रहा है। रानी दुर्गावती द्वारा किसानों के कल्याण के लिये चलाए गए कार्यक्रमों से प्रेरित होकर प्रदेश सरकार भी निरंतर कृषक हित में कार्य कर रही है। हमारी सरकार के पास किसान कल्याण और कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय कल्याण के लिए प्रधानमंत्री मोदी लगातार कार्य कर रहे हैं। देश में पहली बार जनजातीय वर्ग द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति पद को सुशोभित कर रही हैं। राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास के भाव से काम कर रही है। हमारी सरकार जो कहती है, वो करके दिखाती है।