सीएम डॉ. मोहन यादव ने बताईं एमपी की विशेषताएं, कहा- जो एक बार यहां आता है, यहीं का होकर रह जाता है

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 24 जून को निजी होटल में “विकसित मध्यप्रदेश” विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि समय तभी बदलता है, जब संकल्प बड़ा होता है। सभी भारतीयों के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का समय बदला है। विश्व के कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से प्रधानमंत्री मोदी को विभूषित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत @2047 और अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन डॉलर पहुंचाने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार का यह प्रयास होगा कि इसमें से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का योगदान मध्यप्रदेश का हो। मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी के सेवा, सुशासन और जन कल्याण के संकल्पों को पूर्ण करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। 

 

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश की गिनती देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में हो रही है। हम विरासत भी और विकास भी के पथ पर लगातार अग्रसर हो रहे है। उन्होंने कहा कि आज वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस है। उन्होंने रानी दुर्गावती का स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेशवासी रानी दुर्गावती के बलिदान को सदैव याद रखेंगे। मध्यप्रदेश की विशेषता है कि एक बार जो मध्यप्रदेश आता है, यहीं का होकर रह जाता है। प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में नए उद्योग स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार करने लिए पारदर्शी और उद्योगमित्र नीतियां लागू की हैं। मध्यप्रदेश की इन्हीं विशेषताओं के कारण निवेशक उद्योग लगाने के लिए राज्य में आ रहे हैं। देश के मध्य में स्थित होने के कारण उन्हें कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का विशेष लाभ भी मिलेगा। प्रदेश सरकार ने चारों दिशाओं में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए अधोसंरचना विकास पर विशेष बल दिया है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 का आयोजन किया गया, जिसमें अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ और एमओयू साइन हुए। यह प्रसन्नता का विषय है कि 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को राज्य सरकार धरातल पर ला चुकी है। मध्यप्रदेश की छवि कृषि प्रधान राज्य के साथ उद्योग मित्र राज्य की भी बनी है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025 को उद्योग और रोजगार को समर्पित किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय युवा प्रतिभाओं ने दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियों में शीर्ष पदों पर पहुंचकर भारत का मान बढ़ाया है। स्पेस टेक्नोलॉजी में भारतीय वैज्ञानिकों ने नए कीर्तिमान गढ़े हैं। राज्य सरकार ने भी अपनी स्पेस-टेक पॉलिसी लॉन्च की है। मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

8th Pay Commission: अब DA और DR को लेकर सरकारी कर्मचारियों ने कर दी ये बड़ी मांग, ऐसा हुआ तो मिलेगा बड़ा फायदा

8th Pay Commission Update: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लॉयीज फेडरेशन (AIDEF) ने वेतन आयोग को एक नया सप्लीमेंट्री मेमोरेंडम सौंपा है। इस ज्ञापन में फेडरेशन ने सेवारत कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों के महंगाई राहत (DR) की गणना करने के मौजूदा फॉर्मूले की समीक्षा करने और एक नया फॉर्मूला लागू करने की पुरजोर मांग की है।

AIDEF का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था कर्मचारियों और रिटायर्ड लोगों के खर्चों और महंगाई के वास्तविक बोझ को सही तरीके से नहीं दर्शाती है। आइए डिटेल में समझते हैं कि कर्मचारियों की मांग क्या है और इससे उनकी सैलरी और पेंशन पर क्या असर पड़ सकता है।

अभी कैसे होती है DA और DR की गणना?

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, केंद्रीय कर्मचारियों के DA और पेंशनर्स के DR में होने वाले संसोधन ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स के 12 महीने के औसत के आधार पर तय किए जाते हैं। इस इंडेक्स को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि महंगाई के खिलाफ कर्मचारियों की क्रय शक्ति को सुरक्षित रखा जा सके।

मौजूदा फॉर्मूले पर क्यों उठे सवाल?

AIDEF का कहना है कि मौजूदा फॉर्मूले में कई कमियां हैं और यह अब सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स द्वारा झेली जा रही जमीनी महंगाई से मेल नहीं खाता:

कम आय वाले कर्मचारियों पर ज्यादा बोझ: साल 2022-23 में संसोधित किए गए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स बास्केट में खाद्य और पेय पदार्थों को केवल 36.75% वेटेज दिया गया है। जबकि, कम वेतन पाने वाले कर्मचारी और पेंशनभोगी अपनी आय का एक बहुत बड़ा हिस्सा भोजन, दवाओं, शिक्षा और मकान किराए जैसी जरूरी चीजों पर खर्च करते हैं। इनके लिए वास्तविक महंगाई आधिकारिक इंडेक्स से कहीं अधिक है।

पेंशनभोगियों की अलग जरूरतें: रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ नागरिकों का एक बड़ा मासिक खर्च स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, दवाओं, चिकित्सा उपचार और तीमारदारी पर होता है। यदि इन जरूरी सेवाओं की कीमतें आम महंगाई से ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं, तो मौजूदा DR संसोधन उनकी क्रय शक्ति को बचाने में नाकाम साबित होता है।

कर्मचारी संगठन ने क्या दिए हैं सुझाव?

फेडरेशन ने इन कमियों को दूर करने के लिए वेतन आयोग के सामने कुछ बड़े प्रस्ताव रखे हैं:

कर्मचारी-विशिष्ट इंडेक्स: एक ऐसा नया कॉस्ट-ऑफ-लिविंग इंडेक्स तैयार किया जाए, जो विशेष रूप से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के खर्च करने के पैटर्न को सटीक रूप से कैप्चर करता हो।

बुजुर्गों की देखभाल को प्राथमिकता: भविष्य के वेतन और पेंशन संसोधन में बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े खर्चों को अधिक मान्यता दी जानी चाहिए।

फिटमेंट फैक्टर में बदलाव: बदलते खर्चों के तरीकों को ध्यान में रखते हुए उस फिटमेंट फैक्टर को तय किया जाए, जिसके आधार पर सैलरी और पेंशन में अंतिम बढ़ोतरी निर्धारित होती है।

आगे क्या होगा?

8वां वेतन आयोग इस समय विभिन्न कर्मचारी संगठनों और पेंशनभोगी निकायों से मिलने वाले ज्ञापनों और प्रस्तावों की गहन जांच कर रहा है। आयोग की अंतिम सिफारिशें ही आने वाले समय में देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन ढांचे, भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों का भविष्य तय करेंगी।

Gold Price Outlook: अगले 6 महीने में 36% बढ़ेगा सोने का भाव! UBS ने गिरावट के बाद भी जताया भरोसा

Gold Price Outlook: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। हालांकि वैश्विक ब्रोकरेज UBS का मानना है कि यह कमजोरी अस्थायी है। कंपनी का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी गोल्ड का प्राइस 4046 डॉलर के करीब है। यानी UBS के मुताबिक, मौजूदा स्तर से सोने में करीब 36% की तेजी देखने को मिल सकती है।

UBS का कहना है कि मजबूत निवेश मांग, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और आगे चलकर डॉलर में संभावित कमजोरी सोने को सहारा दे सकती है।

जनवरी के रिकॉर्ड हाई से 28% नीचे

UBS की रिपोर्ट के मुताबिक, जून की शुरुआत तक सोना जनवरी में बने अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 28% नीचे आ चुका था। ब्रोकरेज का कहना है कि हाल के महीनों में ऊंची ऊर्जा कीमतों, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंकाओं ने सोने पर दबाव डाला है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतें बढ़ीं, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और अमेरिकी रियल यील्ड में भी तेजी आई। इन दोनों वजहों ने सोने की चमक कुछ समय के लिए फीकी कर दी।

मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों का असर

UBS का कहना है कि जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने जैसे ऐसे निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं, जिन पर कोई ब्याज नहीं मिलता। वहीं डॉलर मजबूत होने से दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा पड़ता है, जिससे वैश्विक मांग पर असर पड़ता है।

पिछले कुछ समय से बाजार में यही स्थिति देखने को मिली है। इसी वजह से सोना दबाव में रहा और इसकी कीमतों में गिरावट आई।

फिर भी सोने पर भरोसा क्यों?

UBS का कहना है कि सोने की तेजी के पीछे मौजूद बड़े कारण अब भी बरकरार हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, साल की पहली तिमाही में सोने की मांग मजबूत रही। इसके अलावा दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं।

ब्रोकरेज का मानना है कि बढ़ता वैश्विक कर्ज, अमेरिका का लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा और केंद्रीय बैंकों की रिजर्व डायवर्सिफिकेशन रणनीति आने वाले वर्षों में सोने को सहारा देती रहेगी।

भारत में कितना बढ़ेगा भाव

UBS का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अभी सोना करीब 4,046 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। यानी यहां से लगभग 36% की तेजी की संभावना जताई गई है।

भारत में सोने का भाव फिलहाल करीब ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी ही तेजी आती है, तो घरेलू कीमतें ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच सकती हैं। हालांकि रुपये-डॉलर की चाल, आयात शुल्क और घरेलू मांग भी कीमतों को प्रभावित करेंगे।

आगे क्या रहेगा नजरिया?

UBS को उम्मीद है कि साल के आगे चलकर अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आ सकती है। अगर ऐसा होता है तो सोने की कीमतों को नया सहारा मिल सकता है। इसके अलावा राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक जोखिम भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर खींच सकते हैं।

ब्रोकरेज का कहना है कि हालिया गिरावट लंबी अवधि की तस्वीर को नहीं बदलती। यह सिर्फ थोड़े वक्त के दबाव का असर है। UBS अब भी निवेशकों को पोर्टफोलियो में सोने को जोखिम कम करने वाले निवेश के रूप में रखने की सलाह देता है।

Gold Price Today: दो हफ्ते के निचले स्तर पर सोना, एक्सपर्ट्स ने बताया अब क्या करें निवेशक?

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Skoda Peaq interior image gallery

Skoda Peaq

The Skoda Peaq’s interior features a 13.6-inch portrait touchscreen, a 10-inch digital driver’s display and a dual-tone dashboard with physical climate controls. The three-row electric SUV is available with up to seven seats and offers 299 litres of boot space with all three rows in use, expanding to 935 litres with the third row folded – the largest luggage capacity of any Skoda model. A 37-litre frunk provides additional storage, while other highlights include a 16-speaker Sonos audio system, dual wireless phone chargers, AGR-certified ergonomic front seats and a panoramic roof. An augmented-reality head-up display is available as an option.

World Drug Free Day 2026: विश्व नशा मुक्ति दिवस क्यों मनाना है जरूरी, जानें खास तथ्य

Scenes related to staying away from drugs and awareness, resolution and drug-free society on International Anti-Drug Day

International Day Against Drug Abuse: हर साल 26 जून को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस (International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 1987 में हुई थी। यह दिन सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि एक वैश्विक अलार्म है। आज के समय में नशा सिर्फ एक व्यक्ति की बुरी आदत नहीं, बल्कि पूरे समाज, अर्थव्यवस्था और युवा पीढ़ी को खोखला करने वाली एक गंभीर महामारी बन चुका है। 

 

आइए जानते हैं कि इस दिन को मनाना क्यों बेहद जरूरी है और इससे जुड़े कुछ चौंकाने वाले तथ्य क्या हैं? 

 

इसे मनाना क्यों जरूरी है?

1. युवा पीढ़ी और परिवारों को बचाना

नशा सबसे पहले किसी घर के चिराग को बुझाता है। आज स्कूल और कॉलेज के छात्र अनजाने में या दोस्तों के दबाव में आकर ड्रग्स, स्मैक, और सिंथेटिक नशों के जाल में फंस रहे हैं। यह दिन समाज को जागरूक करता है ताकि माता-पिता और शिक्षक बच्चों में बदल रहे व्यवहार को पहचान सकें और उन्हें समय पर बचा सकें।

 

2. अपराध और अवैध तस्करी पर लगाम लगाना

नशीली दवाओं का अवैध कारोबार आतंकवाद, हथियारों की तस्करी और संगठित अपराधों को फंडिंग देता है। जब तक ड्रग्स की डिमांड कम नहीं होगी, तब तक इसका अवैध नेटवर्क नहीं टूटेगा। यह दिन सरकारों को सख्त कानून बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।

 

3. 'नशेड़ी' नहीं, 'मरीज' के रूप में देखना

इस दिन का एक बड़ा मकसद समाज की सोच को बदलना भी है। जो लोग नशे की लत का शिकार हो चुके हैं, वे अपराधी नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार हैं। उन्हें डांट या बहिष्कार की नहीं, बल्कि सही इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास की जरूरत होती है।

 

नशा और तस्करी से जुड़े कुछ खास तथ्य

संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC) की रिपोर्ट्स और वैश्विक अध्ययनों के अनुसार, दुनिया में नशे की स्थिति बेहद चिंताजनक है:

 

तथ्य का विषय वैश्विक और राष्ट्रीय आंकड़े

प्रभावित आबादी: दुनिया भर में 29 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं।

 

गंभीर बीमारी: इनमें से लगभग 4 करोड़ लोग 'ड्रग यूज डिसऑर्डर' (गंभीर लत और मानसिक बीमारी) से पीड़ित हैं, जिन्हें तुरंत इलाज की जरूरत है।

 

भारत की स्थिति: एम्स (AIIMS) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं, और 3 करोड़ से अधिक लोग भांग, गांजा, और ओपियोइड्स (अफीम, हेरोइन) जैसे खतरनाक नशों के आदी हैं।

 

सिंथेटिक ड्रग्स का खतरा: पिछले कुछ सालों में प्रयोगशालाओं में बनने वाले केमिकल ड्रग्स (जैसे मेथम्फेटामाइन और फेंटानिल) का चलन तेजी से बढ़ा है, जो पारंपरिक नशों से 50 गुना ज्यादा जानलेवा हैं।

 

इस दिन हम क्या योगदान दे सकते हैं?

नशे के खिलाफ यह लड़ाई अकेले सरकार या पुलिस की नहीं है। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हम तीन छोटे कदम उठा सकते हैं:

 

बातचीत करें: अपने बच्चों और दोस्तों से खुलकर बात करें। उन्हें मानसिक तनाव या डिप्रेशन के वक्त नशे का सहारा लेने के बजाय अपनों से बात करने की सलाह दें।

 

लक्षणों को पहचानें: अगर कोई अचानक गुमसुम रहने लगे, आंखों के नीचे काले घेरे आ जाएं, चोरी करने लगे या उसका वजन तेजी से घटे, तो यह नशे के लक्षण हो सकते हैं।

 

मदद लें: सरकार द्वारा जारी नशामुक्ति हेल्पलाइन नंबर 14446 (भारत सरकार का टोल-फ्री नंबर) पर कॉल करके मुफ्त काउंसलिंग और मदद ली जा सकती है।

 

याद रखें: नशा कुछ पल का भ्रम और पूरी जिंदगी का दर्द है। इस अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस पर खुद को और अपने समाज को इस धीमे जहर से मुक्त कराने का संकल्प लें।

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Google Pixel 11 Pro Fold के स्पेसिफिकेशन्स लीक, जानें कब होगा लॉन्च और अनुमानित कीमत

Google Pixel 11 Pro Fold: उम्मीद है कि Google अगस्त 2026 में Pixel 11 सीरीज के साथ अपना अगला फोल्डेबल स्मार्टफोन, Pixel 11 Pro Fold लॉन्च करेगा। ऑनलाइन सामने आ रही कई लीक खबरों के अनुसार, इस फ्लैगशिप डिवाइस में AI फीचर्स, परफॉर्मेंस और कैमरा सॉफ्टवेयर में सुधार हो सकता है, जबकि इसका डिजाइन पहले जैसा ही रह सकता है। अब आइए जानते हैं इस फोन के अनुमानित फीचर्स के बारे में।

Pixel 11 Pro Fold के अनुमानित स्पेसिफिकेशन्स

Pixel 11 Pro Fold में मौजूदा Pixel 10 Pro Fold की तरह ही 8-इंच की फोल्डिंग डिस्प्ले और 6.4-इंच की बाहरी स्क्रीन मिल सकती है। हालांकि, Google इसमें बड़े डिजाइन बदलाव नहीं करेगा, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी कैमरा मॉड्यूल में छोटे सुधार कर सकती है और फोन की मोटाई को कम करने की कोशिश कर सकती है।

माना जा रहा है कि यह फ्लैगशिप फोन Green और Black कलर ऑप्शन में आएगा और इसमें प्रीमियम एल्युमीनियम फ्रेम और ग्लास की बनावट होगी।

यह उम्मीद की जा रही है कि यह स्मार्टफोन अगस्त 2026 में Pixel 11, Pixel 11 Pro और Pixel 11 Pro XL के साथ लॉन्च हो सकता है। इस फोन में एक बड़ा अपग्रेड Gemini Intelligence सिस्टम हो सकता है, जो Android 17 के साथ आने की संभावना है। इसके अलावा, इस फोल्डेबल डिवाइस में AI-पावर्ड फोटोग्राफी फीचर्स भी मिल सकते हैं, जिसमें एक नया 100x जूम मोड शामिल हो सकता है, जो मशीन लर्निंग की मदद से तस्वीरों की क्वालिटी को बेहतर बनाएगा।

प्रोसेसर की बात करें तो, इस डिवाइस में कंपनी का आने वाला Tensor G6 चिपसेट हो सकता है। यह चिप 2nm मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस पर बनी हो सकती है।

कैमरे की बात करें तो, Pixel 11 Pro Fold में 48MP का प्राइमरी सेंसर, 10.5MP का अल्ट्रा-वाइड लेंस और 10.8MP का 5x टेलीफोटो सेंसर हो सकता है। सेल्फी के लिए, इस स्मार्टफोन में 10MP का फ्रंट कैमरा मिल सकता है।

बैटरी की बात करें तो, इस स्मार्टफोन में लगभग 5,015mAh की बैटरी हो सकती है, जो 30W वायर्ड और 15W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट कर सकती है।

Pixel 11 Pro Fold की भारत में अनुमानित कीमत

Google ने इस स्मार्टफोन की कीमत का खुलासा नहीं किया है। हालांकि, ग्लोबल लेवल पर इसकी शुरुआती कीमत लगभग $1,799 हो सकती है। वहीं, भारत में इस डिवाइस की कीमत 1.59 लाख रुपये से 1.82 लाख रुपये के बीच हो सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह जानकारी लीक पर आधारित है, इसलिए इसे पूरी तरह सच न मानें।

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नरक से निकले 12 मजदूर : डेढ़ साल तक सूखी रोटी, मारपीट और कैद, घर वापसी पर छलक पड़े आंसू

story of workers rescued from a factory in Muzaffarnagar

Muzaffarnagar Uttar Pradesh News : जब पुलिस की टीम फैक्‍टरी के भीतर पहुंची तो वहां मौजूद मजदूरों की आंखों में डर, थकान और बेबसी साफ दिखाई दे रही थी। ये वे लोग थे जो बेहतर भविष्य और परिवार की खुशहाली का सपना लेकर घर से निकले थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि रोजगार का यह वादा उन्हें एक ऐसी कैद में पहुंचा देगा, जहां इंसानियत भी शर्मसार हो जाएगी। मुजफ्फरनगर के तितावी क्षेत्र स्थित एक फैक्‍टरी से मुक्त कराए गए इन मजदूरों की कहानी सूदखोर महाजन की याद दिलाती है, आधुनिक युग में यह बंधुआ मजदूरी और मानव शोषण की काली तस्वीरें दिखाती है। 

 

बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और राजस्थान से आए 12 मजदूरों की जिंदगी पिछले डेढ़ साल से किसी जेल से कम नहीं थी। उन्हें हर महीने वेतन, रहने और खाने की सुविधा का लालच देकर मुजफ्फरनगर की एक फैक्‍टरी में लाया गया था लेकिन यहां पहुंचते ही उनकी दुनिया बदल गई।

मजदूरों के अनुसार, उनसे दिन-रात काम कराया जाता था, जबकि खाने के नाम पर सिर्फ एक बार सूखी रोटी और नमक दिया जाता था। इन लोगों को न मेहनत की कमाई मिलती, न आजादी और न ही इंसानों जैसा व्यवहार।सबसे दर्दनाक बात यह रही कि जो मजदूर घर जाने की बात करता या अपनी मेहनत की कमाई मांगता, उसे लोहे की रॉड और डंडों से पीटा जाता था।

बीमार पड़ने पर इलाज तो दूर, उन्हें आराम तक नहीं करने दिया जाता था। कुछ नाबालिग बच्चों के भी इस अमानवीय व्यवस्था का हिस्सा होने की बात सामने आई है लेकिन उम्मीद की एक किरण तब जगी, जब एक श्रमिक किसी तरह वहां से निकल भागा।

आखिरकार एक श्रमिक हिम्मत जुटाकर किसी तरह फैक्‍टरी से निकलने में सफल हुआ और पुलिस तक पहुंच गया। उसकी सूचना पर पुलिस, श्रम विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर फैक्‍टरी में बंधक बनाकर रखे गए सभी 12 मजदूरों को मुक्त कराया। कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश जारी है।

 

पुलिस, श्रम विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने फैक्‍टरी पर छापा मारकर सभी मजदूरों को मुक्त कराया। जब इन श्रमिकों के गले में फूलों की मालाएं डाली गईं तो उनकी आंखों में खुशी और राहत के आंसू थे। लंबे समय बाद उन्हें अपने परिवारों से मिलने और सामान्य जीवन में लौटने की उम्मीद दिखाई दे रही थी। श्रमिकों के लिए यह सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं थी, बल्कि उन लोगों के लिए नई शुरुआत थी जिन्होंने महीनों तक दर्द, भूख और अत्याचार सहा था।

 

मुक्त कराए गए एक श्रमिक ने भावुक होते हुए बताया कि उसे अपने परिवार की याद तो हर दिन आती थी, लेकिन बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। फैक्‍टरी से भागने की कोशिश करने वालों पर पालतू पिटबुल कुत्ता छोड़ दिया जाता था। डर और अत्याचार का ऐसा माहौल था कि मजदूरों ने अपनी किस्मत को ही कैद मान लिया था।

 

इन मजदूरों के लिए आज़ादी सिर्फ फैक्‍टरी से बाहर निकलना नहीं है, बल्कि अपने परिवारों के पास लौटना, अपने बच्चों को गले लगाना और फिर से सम्मान के साथ जिंदगी जीने का अवसर है। यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिक दौर में भी बंधुआ मजदूरी जैसी अमानवीय प्रथाएं किस तरह लोगों की जिंदगी को निगल रही हैं।

 

आज ये 12 मजदूर आज़ाद हैं, लेकिन उनकी आंखों में कैद के दिनों की दहशत अभी भी बाकी है। फिर भी, उनके चेहरों पर लौटती मुस्कान इस बात का संकेत है कि उम्मीद और इंसानियत की जीत आखिरकार हुई, साथ ही उनकी मुक्ति इस बात का संदेश भी देती है कि अन्याय कितना भी बड़ा क्यों न हो, साहस और संवेदनशील कार्रवाई उसके खिलाफ सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
Edited By : Chetan Gour

Jyeshtha Purnima 2026: जून में इस दिन होगी ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा, जानें सही तारीख, समय और शुभ मुहूर्त

Jyeshtha Purnima 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं। मुख्य रूप से यह तिथि माता लक्ष्मी को समर्पित है और माना जाता है कि इस दिन मां अपने भक्तों का हाल जानने के लिए स्वयं धरती पर आती हैं। इस दिन चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व है। पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपने पूरे स्वरूप में सभी 16 कलाओं से युक्त होते हैं। इसलिए पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने से चंद्र दोष में राहत मिलती है। पूर्णिमा तिथि पर सत्यनारायण की कथा कहना या सुनना बहुत शुभ माना जाता है।

इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक माह लगा था, जिसकी पूर्णिमा 31 मई 2026 को थी। इस वजह से बहुत से भक्त भ्रम में हैं कि अब जो पूर्णिमा आ रही है, वो किस माह की है। इन सभी जातकों की जानकारी के लिए बता दें, वो ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा थी और अब जो आएगी वो शुद्ध ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा होगी। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसी दिन देश के कुछ हिस्सों में वट पूर्णिमा का व्रत किया जाता है। इसी दिन कबीर दास जयंती और बटुक भैरव जयंती भी मनाई जाती है। आइए जानें इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा किस दिन होगी?

ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि और समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि का समय कुछ इस प्रकार है :

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : 29 जून 2026 को सुबह 03:06 बजे से

पूर्णिमा तिथि समाप्त : 30 जून 2026 को सुबह 05:26 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार : 29 जून 2026 (सोमवार) को ही मुख्य पर्व और व्रत रखा जाएगा।

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 के शुभ मुहूर्त

इस विशेष दिन पर पूजा और शुभ कार्यों के लिए निम्नलिखित मुहूर्त बेहद उत्तम रहेंगे:

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:06 बजे से 04:46 बजे तक (स्नान के लिए सर्वोत्तम)

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:57 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:22 बजे से शाम 07:42 बजे तक

अमृत काल (रात्रि): रात 08:53 बजे से रात 10:40 बजे तक

चंद्रोदय का समय

पूर्णिमा के दिन चंद्र देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है।

चंद्रोदय का समय : 29 जून 2026 को शाम 07:16 बजे होगा।

भद्रा का समय

इस दिन भद्रा का साया भी रहेगा, जिसमें शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं:

भद्रा प्रारंभ : 29 जून को सुबह 05:26 बजे से

भद्रा समाप्त : शाम 04:16 बजे तक

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर जरूर करें ये 3 काम

  • ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
  • इस दिन गर्मी से राहत देने वाली वस्तुएं जैसे- छाता, तरबूज, पानी से भरा घड़ा, पंखा और अन्न-वस्त्र का दान करना अनंत पुण्यदायी माना जाता है।
  • शाम के समय चंद्रोदय के बाद तांबे या चांदी के पात्र में जल, दूध, और थोड़े से अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद “ॐ सोमाय नमः” या “ॐ क्षीरोदार्णव सम्भवाय अत्रिममुद्भव। सोमन्गृहाण सद्भावं गृहाणार्ग्यं नमो नमः।। मंत्र का जाप करें।

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Trent Share Price : ट्रेंट का 10 गुना ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार, AGM में पॉजिटिव ग्रोथ कमेंट्री के दम पर जोर से दौड़ा शेयर

Trent Share Price : ट्रेंट के शेयर में आज 4 फीसदी की तेजी है। दरअसल ट्रेंट के AGM में नोएल टाटा की पॉजिटिव कमेंट्री से शेयर में रौनक है। नोएल टाटा ने ट्रेंट की ग्रोथ के लिए खास रोडमैप रखा है। यह नोएल टाटा की आखिरी ट्रेंट AGM थी। आज पेश कंपनी के आगे के रोडमैप में कारोबार में 10 गुना ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार रखा गया है। इसमें ये भी कहा गया है कि सिर्फ वेस्टसाइड ( Westside) और जूडियो (Zudio) के भरोसे लक्ष्य हासिल नहीं होगा। हर साल 50 वेस्टसाइड और 200-250 जूडियो और 25-40 स्टार स्टोर बढ़ाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

लॉन्ग टर्म लक्ष्य के तहत जूडियो के 5000 स्टोर और स्टॉर को भी इसी स्केल तक पहुंचने का इरादा है। इस रोडमैप में ये भी कहा गया है कि बर्न्ट टोस्ट (Burnt Toast) और Samoh में 2-3 साल और इनक्यूबेशन की जरूरत है। फैशन LFL ग्रोथ में नरमी है लेकिन लो-डबल डिजिट ग्रोथ का लक्ष्य रखा गया है। Trent का मार्केट शेयर सिर्फ 2% है। लेकिन इसके लिए ग्रोथ के बड़े मौके मौजूद हैं। कंपनी ने 2500 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इसे वेयरहाउस,IT, AI और स्टोर विस्तार पर खर्च किया जाएगा। स्टार बिजनेस पर कंपनी का भरोसा कायम है। ग्रोसरी रिटेल में मजबूत संभावनाएं दिख रही हैं। वेस्टसाइड ई-कॉमर्स रेवेन्यू 300 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

बताते चलें कि 69 साल के नोएल टाटा ने यह भी कहा की है कि वे ट्रेंट लिमिटेड के चेयरमैन का पद छोड़ने जा रहे। इसके साथ ही,टाटा ग्रुप की मुख्य रिटेल कंपनी के हेड के तौर पर उनका लगभग 30 साल का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। टाटा ग्रुप की गवर्नेंस पॉलिसी के मुताबिक एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल होती है,जबकि नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर 70 साल की उम्र में रिटायर होते हैं। नोएल टाटा की चेयरमैनशिप में FY26 में ट्रेंट का रेवेन्यू बढ़कर 19,701 करोड़ रुपये हो गया।

कंपनी की 2023 की शेयरहोल्डर्स मीटिंग में ट्रेंट को दस गुना बड़ा बनाने का रखा गया था। तब से कंपनी की रेवेन्यू और मुनाफे की ग्रोथ रेट 2.5 गुना से ज्यादा बढ़ गई है। इस पर नोएल टाटा ने कहा “मुझे पूरा भरोसा है कि हम जल्द ही उस मुकाम तक पहुंच जाएंगे जिसका मैंने ज़िक्र किया था।”

ट्रेंट पर ब्रोकरेज की राय

ट्रेंट पर ब्रोकरेज का नजरिया भी बुलिश है। HSBC ने इस स्टॉक को Buy रेटिंग देते हुए 3460 रुपए प्रति शेयर का टारगेट दिया है। वहीं, मोतीलाल ओसवाल ने इसे Buy रेटिंग देते हुए 3500 रुपए प्रति शेयर का टारगेट दिया है। मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि कुछ स्टोर्स में सेल्स घटी है। LFL में रिकवरी दिख रही है। आगे डबल डिजिट LFL ग्रोथ संभव है। आगे जाकर मार्जिन में उछाल LFL ग्रोथ पर निर्भर करेगी।

ट्रेंट की चाल पर एक नजर

एनएसई पर आज यह शेयर 104.10 रुपए यानी 3.31 फीसदी की तेजी लेकर 3247 रुपए पर बंद हुआ है। आज का इसका दिन का हाई 3,309.20 रुपए और दिन का लो 3,140.00 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 4,174.00 रुपए और 52 वीक लो 2,183.67 रुपए है। स्टॉक का ट्रेडिंग वॉल्यूम 3,950,989 शेयर और मार्केट कैप 173,140 करोड़ रुपए है।

1 हफ्ते में यह शेयर 4.65 रुपए और 1 महीने में 13.36 फीसदी भागा है। इस साल अब तक इसमें 13.82 फीसदी की तेजी आई है। वहीं, 1 साल में इसमें 19.60 फीसदी की कमजोरी आई है। जबकि, 3 साल में यह शेयर 182.36 फीसदी भागा है।

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Morgan Midsummer Coupe front quarter static

Morgan Motors has unveiled the limited-run Midsummer Coupe. Essentially the coupe version of the Midsummer Roadster, the model has been developed in collaboration with design firm Pininfarina. The arrival of the Midsummer Coupe marks Morgan Motors’ return to hard top models since the Aero 8 was discontinued in 2015. While design cues of the Roadster are retained, the Coupe uniquely gets a glass roof. The glass roof is split into two via a pinstripe that runs the length of the vehicle. Only 9 examples of the Midsummer Coupe would be built. Powering the Coupe is a BMW-sourced straight-six engine churning out 340hp. Swipe to check out the Midsummer Coupe from all angles.