IT Sector की रौनक पर Sensex में 300 अंकों की तेजी, 3 वजहों से 24150 के पार Nifty

Share Market Rally: एशियाई बाजारों में मिले-जुले रुझान के बीच डॉलर इंडेक्स की नरमी से घरेलू स्टॉक मार्केट में रौनक दिख रही है। शुरुआती कारोबार में ही घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेस सेंसेक्स और निफ्टी 50 उछल पड़े। सेंसेक्स 300 प्वाइंट्स से अधिक ऊपर चढ़ गया तो निफ्टी 50 भी 24150 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट को सपोर्ट मिला। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 मजबूत हुए हैं। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:23 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 246.45 प्वाइंट्स यानी 0.32% की बढ़त के साथ 77,431.88 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 66.00 प्वाइंट्स यानी 0.27% के उछाल के साथ 24,144.50 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 328.87 प्वाइंट्स उछलकर 77,514.30 और निफ्टी 88.90 प्वाइंट्स चढ़कर 24,167.40 तक पहुंच गया था।

Share Market Rally: इन वजहों से मिला सपोर्ट

डॉलर इंडेक्स में नरमी

गुरुवार को अमेरिकी डॉलर एक महीने के निचले स्तर के आस-पास आ गया जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला। अमेरिका महंगाई के नरम आंकड़ों से इस बात की संभावना बढ़ी कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने को लेकर जल्दबाजी नहीं करेगा। इससे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स नरम होकर 100.46 पर आ गया। डॉलर की कमजोरी से विदेशी निवेशकों का भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश बढ़ सकता है।

India VIX में गिरावट

मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में गिरावट से मार्केट को सपोर्ट मिला है। फिलहाल यह 1.45% की गिरावट के साथ 13.08 पर है। इसके अधिक होने का मतलब मार्केट में वोलैटिलिटी हाई होने की आशंका है तो इसके कम होने का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है।

IT Stocks से मार्केट को सपोर्ट

आईटी सेक्टर की रौनक से मार्केट को अच्छा सपोर्ट मिला है जिसका निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के अलावा फिलहाल किसी भी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स में 1% या इससे अधिक की उठा-पटक नहीं है। आज मार्केट को आईटी सेक्टर ही चला रहा है। बैंकिंग सेक्टर में हल्की बढ़त है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

सोने के भाव में आया बड़ा ट्विस्ट! अमेरिका-ईरान तनाव और फेड रेट के फेर में फंसा गोल्ड, आगे की चाल पर एक्सपर्ट्स ने ये कहा

Gold Prices Outlook: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। एक तरफ जहां वैश्विक अनिश्चितता के समय सोने को हमेशा ‘सुरक्षित निवेश’ माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका ने इसकी रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

टाटा म्यूचुअल फंड और Augmont के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का एक शानदार मौका साबित हो सकती है। आइए समझते हैं कि सोने की कीमतों में गिरावट की असली वजह क्या है और आगे इसकी चाल कैसी रहेगी।

क्यों दबाव में हैं सोने की कीमतें? समझें बड़ी वजहें

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए शांति समझौते (MOU) को ‘खत्म’ घोषित कर दिया, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया। इसके बाद ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले का दावा किया। इन घटनाक्रमों के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 5% से ज्यादा उछल गईं, जिससे ग्लोबल लेवल पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

ब्याज दरों का सोने पर सीधा असर

जब महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा रखने या उन्हें और बढ़ाने की संभावना बढ़ जाती है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक सोने के बजाय बॉन्ड्स जैसे ब्याज देने वाले एसेट्स में पैसा लगाना पसंद करते हैं। यही वजह है कि डॉलर की मजबूती और हाई बॉन्ड यील्ड के कारण सोने की कीमतें फिलहाल दबाव में हैं।

US Fed का अगला कदम रहेगा सबसे बड़ा ट्रिगर

ऑगमोंट की रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अमेरिकी फेड की मीटिंग के मिनट्स से साफ है कि समिति के सदस्य आर्थिक दृष्टिकोण को लेकर बंटे हुए हैं। हालांकि फिलहाल दरों को स्थिर रखने पर सहमति है, लेकिन कुछ सदस्य दरें बढ़ाने के पक्ष में हैं।

CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार अब सितंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की 68% संभावना और जनवरी 2027 तक बढ़ोतरी की 87% संभावना मानकर चल रहा है। इन उम्मीदों से डॉलर मजबूत हो रहा है, जो शॉर्ट-टर्म में सोने के लिए नकारात्मक है।

क्या हैं सोने के नए टार्गेट?

डॉ. रेनिशा चैनानी के अनुसार, सोने ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना $4,080 का टार्गेट हासिल कर लिया है। अब आगे की चाल मिडिल ईस्ट के हालातों पर निर्भर करेगी:

तेजी का परिदृश्य: अगर सोना $4,090, भारतीय बाजार में लगभग ₹144000 के ऊपर टिका रहता है, तो यह $4,160 यानी ₹147000 की तरफ बढ़ सकता है।

मंदी का परिदृश्य: अगर कीमतें फिसलकर $4,040 (₹1,43,000) के नीचे आती हैं, तो गिरावट बढ़कर $3,950 (₹1,41,000) के स्तर तक जा सकती है।

भारतीय निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

भारतीय निवेशकों के लिए एक राहत की बात यह है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी घरेलू बाजार में सोने की गिरावट को रोकने में मदद करेगी। रुपया कमजोर होने से आयातित सोना महंगा हो जाता है, जिससे स्थानीय कीमतों को सपोर्ट मिलता है।

टाटा म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव बना रहे, लेकिन लंबी अवधि के लिए सोने का आउटलुक बेहद पॉजिटिव है। फंड हाउस ने सलाह दी है कि ‘निवेशकों को हर गिरावट पर सोना खरीदना चाहिए।’ शॉर्ट-टर्म के उतार-चढ़ाव से पैनिक होने के बजाय, इस करेक्शन को धीरे-धीरे अपने पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने के मौके के रूप में देखना चाहिए।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

Gold price today: MCX पर सोने का भाव 1% से ज्यादा टूटा, अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

Gold price today: बुधवार, 24 जून को MCX पर सोने का रेट 1% से ज़्यादा गिर गया, जिसकी वजह मज़बूत US डॉलर था। US फ़ेडरल रिज़र्व के मॉनेटरी सख्ती की उम्मीदों से डॉलर इंडेक्स 1 साल से ज़्यादा के हाई पर पहुंच गया।

MCX गोल्ड अगस्त फ़्यूचर्स सुबह 10.40 बजे के आस-पास 1.39% गिरकर ₹1, 44,499 प्रति 10 ग्राम पर थे, जबकि MCX सिल्वर जुलाई फ़्यूचर्स 0.71% गिरकर ₹2,24,227 प्रति kg पर थे।

डॉलर इंडेक्स बढ़कर 101.52 पर पहुंच गया, जो एक साल से ज़्यादा समय में इसका सबसे ऊंचा लेवल है, जिससे विदेशी करेंसी में खरीदारों के लिए डॉलर वाला सोना महंगा हो गया। डॉलर इंडेक्स 17 जून से 100 के निशान से ऊपर है क्योंकि बाज़ार को उम्मीद है कि US फ़ेडरल रिज़र्व इस साल के आखिर तक महंगाई की वजह से रेट बढ़ाएगा।

न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, CME FedWatch Tool इस साल US Fed के रेट बढ़ने की उम्मीदें बढ़ा रहा है। ट्रेडर्स को अब इस साल तीन बार इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद दिख रही है।अब, Fed का पसंदीदा इन्फ्लेशन गेज, U.S. पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) डेटा, जो गुरुवार को आने वाला है, US Fed मॉनेटरी पॉलिसी पर आगे के संकेतों के लिए फोकस में है।

US-ईरान शांति बातचीत में प्रगति के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बीच, इन्फ्लेशन का खतरा कम होने के बावजूद मार्केट US Fed रेट बढ़ोतरी को डिस्काउंट कर रहा है।

कामा ज्वेलरी के एमडी कॉलिन शाह का कहना है कि अभी, पीली धातु एक टेंशन वाले माहौल में ट्रेड कर रही है, और लगभग पूरे H1 में आर्थिक उथल-पुथल और USD टर्म्स में ~15% के करेक्शन के बाद, सोने का परफॉर्मेंस H2 में धीरे-धीरे पटरी पर आने की उम्मीद है, बशर्ते कोई पक्का शांति समझौता हो।

पारंपरिक रूप से, अगस्त से अक्टूबर के दौरान सोने की कीमतों में बढ़त देखी जाती है, क्योंकि त्योहारों का मौसम होता है, साथ ही पश्चिम में छुट्टियों का मौसम भी होता है। हालांकि, इस उम्मीद के बीच, यह देखना और इंतज़ार करना ज़रूरी है कि स्थिति कैसे बदलती है।

भारतीय ज्वेलरी एक्सपोर्ट के सावधानी से आशावादी रहने की उम्मीद है। हालांकि इस सेक्टर पर सोने की ऊंची कीमतों का दबाव पड़ सकता है, जिससे इंटरनेशनल और घरेलू दोनों मार्केट में डिमांड में कुछ कमी आ सकती है, भारत की ताकत नए FTA के ज़रिए मार्केट के डायवर्सिफिकेशन में दिखेगी जो मेनस्ट्रीम एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन में डिमांड रिवाइवल के साथ-साथ रिकवरी मोमेंटम को सपोर्ट करेगी। ग्राहकों के कंजर्वेटिव लेकिन उत्साहित खरीदारी व्यवहार को देखते हुए, हम हल्के स्टडेड ज्वेलरी की डिमांड में बढ़ोतरी देखेंगे।

इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी ने कहा, “सोना सात महीने के निचले स्तर की ओर गिर गया क्योंकि सख्त Fed पॉलिसी की उम्मीदें अंतरिम US-ईरान शांति समझौते से मिले सपोर्ट से ज़्यादा थीं, जिससे इन्फ्लेशन की चिंताओं को कम करने में मदद मिली। US टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में भारी गिरावट के कारण भी पीली धातु पर दबाव पड़ा, जिससे इन्वेस्टर्स ने अपने पोर्टफोलियो में कहीं और हुए नुकसान की भरपाई के लिए बुलियन पोजीशन कम कर दीं।”

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन ने कहा कि आज के सेशन में सोने को $4,089 और $4,040 पर सपोर्ट है, जबकि रेजिस्टेंस $4,185 और $4,220 प्रति ट्रॉय औंस पर है, और चांदी को $60 और $58.40 पर सपोर्ट है, जबकि रेजिस्टेंस $63.60 और $65.20 प्रति ट्रॉय औंस पर है।

जैन ने कहा कि MCX पर सोने को ₹1,45,200 और ₹1,44,000 पर सपोर्ट और ₹1,47,200 और ₹1,48,100 पर रेजिस्टेंस है, जबकि चांदी को ₹2,21,000 और ₹2,16,600 पर सपोर्ट और ₹2,28,800 और ₹2,31,200 पर रेजिस्टेंस है।

Gold Silver Prices: सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, ETF भी टूटा; ये 5 कारण हैं जिम्मेदार

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price: अपने रिकॉर्ड स्तर से 28% टूटा गोल्ड! खत्म हो गई तेजी या फिर लौट सकती है चमक?

Gold Price: 2025 में 65% की जोरदार तेजी के बाद 2026 अब तक सोने के लिए खास नहीं रहा है। साल की पहली छमाही में सोना करीब 4% टूट चुका है। जनवरी 2026 के आखिर में सोने ने 5,602 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था।

लेकिन इसके बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा, बाजार में मुनाफावसूली शुरू हुई और सोने में तेज गिरावट आ गई। जून में इसका भाव करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया। यह रिकॉर्ड स्तर से करीब 28% नीचे था। फिलहाल सोना करीब 4,144 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है।

ईरान-अमेरिका समझौते के बाद क्या बदला?

इस समय बाजार की नजर अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते पर है। होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल की कीमतों में नरमी आई है। समझौते की खबर के बाद तेल करीब 15% सस्ता हो चुका है। हालांकि निवेशकों के मन में अब भी सवाल है कि यह समझौता कितने समय तक टिकेगा और क्षेत्र में तनाव सचमुच कम होगा या नहीं।

तेल सस्ता होने पर भी क्यों नहीं बढ़ रहा सोना?

यही सबसे बड़ा सवाल है। आमतौर पर तेल सस्ता होने और तनाव कम होने से सोने को सहारा मिलता है। लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग है। फिलहाल सोने की चाल तेल नहीं, बल्कि अमेरिकी ब्याज दरें तय कर रही हैं।

सोने की कीमत पर एक साथ कई चीजें असर डालती हैं। इनमें महंगाई, ब्याज दरें, डॉलर और वैश्विक घटनाक्रम शामिल हैं। इस समय सबसे ज्यादा असर ब्याज दरों का दिख रहा है।

अमेरिकी फेड बना सबसे बड़ी चुनौती

17 जून को हुई अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के बाद संकेत मिले कि 2026 में कम से कम एक बार और ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने भी साफ किया कि महंगाई को काबू में रखना उनकी प्राथमिकता है। इससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ गई है।

ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए अच्छी खबर नहीं मानी जातीं। वजह यह है कि सोना कोई ब्याज नहीं देता। ऐसे में निवेशकों का रुझान दूसरे विकल्पों की तरफ बढ़ सकता है।

डॉलर भी डाल रहा दबाव

2026 में डॉलर इंडेक्स करीब 2.6% मजबूत हुआ है। दूसरी तरफ सोना करीब 4% गिरा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इसका असर मांग पर पड़ता है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।

एक्सपर्ट्स की गोल्ड पर राय

LKP Securities में वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी & करेंसी रिसर्च एनालिस्ट) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में एक बार ब्याज दर बढ़ाने के संकेत मिलने के बाद सोने पर दबाव बढ़ गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और सोने जैसी ऐसी एसेट्स की चमक कुछ कम हुई है, जो कोई ब्याज नहीं देतीं। फेड के सख्त रुख के बाद बुलियन बाजार में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली भी देखने को मिली है।

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि निवेशकों को अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी नजर रखनी चाहिए। बातचीत में किसी भी तरह की प्रगति या रुकावट कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकता है।

क्या खत्म हो गई तेजी?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में महंगाई काबू में आती है और फेड ब्याज दरें घटाने की तरफ बढ़ता है, तो सोने में फिर तेजी लौट सकती है। दूसरी तरफ अगर महंगाई ऊंची बनी रहती है, तब भी सोना निवेशकों के लिए बचाव का एक अहम विकल्प बना रह सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक पिछले कई सालों से लगातार सोना खरीद रहे हैं। उनका भरोसा अभी भी बना हुआ है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में सही समय पकड़ने की कोशिश करने के बजाय पोर्टफोलियो की 5% से 10% रकम सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं में रखना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है।

Gold Price Today: सोना एक हफ्ते में ₹3000 तक हुआ सस्ता, चांदी ₹10000 लुढ़की

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

लगातार पांचवे दिन Sensex मजबूत, ₹3 लाख करोड़ बढ़ी दौलत, Indigo-Trent रहे टॉप गेनर

Share Market Rally: कच्चे तेल की फिसलन पर घरेलू स्टॉक मार्केट में आज लगातार पांचवे दिन रौनक रही। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो इंट्रा-डे में सेंसेक्स 300 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24200 के एकदम करीब पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर मिडकैप और स्मॉलकैप स्पेस में भी अच्छी रौनक रही और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 आधे फीसदी से थोड़ी ही कम बढ़त रही।

सेक्टरवाइज आईटी सेक्टर ने मार्केट पर काफी दबाव बनाने की काफी कोशिश की और इसका निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक कमजोर हुआ। हालांकि फार्मा, पीएसयू बैंक और रियल्टी सेक्टर ने इसे संभाल लिया जिनके निफ्टी इंडेक्स आधे-आधे फीसदी से अधिक मजबूत हुए। निफ्टी प्राइवेट बैंक भी आधा फीसदी मजबूत हुआ।

ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में ₹3 लाख करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ। इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज सेंसेक्स (Sensex) 254.36 प्वाइंट्स यानी 0.33% के उछाल के साथ 77,409.98 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 82.30 प्वाइंट्स यानी 0.34% की बढ़त के साथ 24,168.00 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स आज 336.71 प्वाइंट्स उछलकर 77,492.33 और निफ्टी 103.55 प्वाइंट्स चढ़कर 24,189.25 तक पहुंच गया।

₹3.10 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 17 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,74,58,056.752 करोड़ था। आज यानी 18 जून 2026 को यह उछलकर ₹4,77,68,135.83 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹3,10,079.078 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 20 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज 20 स्टॉक्स आज ग्रीन बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज इंडिगो, ट्रेंट और बीईएल में रही। वहीं दूसरी तरफ आज सेंसेक्स पर सबसे अधिक गिरावट इंफोसिस, टेक महिंद्रा और मारुति में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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162 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4419 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2419 शेयर मजबूत हुए तो 1814 में गिरावट रही जबकि 186 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 162 शेयर एक साल के हाई और 46 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 7 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 7 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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US Fed ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, लेकिन एक खास सिग्नल पर ट्रंप ने कहा- यकीन करना मुश्किल 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

महंगा वैल्यूशन, फिर भी 8 बार मिला Nifty से ज्यादा रिटर्न, अब इन स्टॉक्स पर फिदा जेफरीज

Expensive Valuations but Attractive to Invest: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का मानना है कि महंगा वैल्यूएशन होने का मतलब ये नहीं कि निवेश पर अच्छा रिटर्न नहीं मिलेगा। यह बात पिछले 15 वर्षों में आठ बार सही साबित हुई है। जेफरीज ने 18 जून को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आठ बार ऐसा हुआ, जब किसी सेक्टर के शेयर महंगे यानी एक्सपेंसिव वैल्यूएशन वाले दिखने लगे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अगले दो से तीन वर्षों में शानदार रिटर्न दिए। जेफरीज का मानना है कि अब पावर सेक्टर भी ऐसे चरण में प्रवेश कर रहा है, खासतौर से प्राइवेट पावर कंपनियों के मामले में।

15 साल में 8 बार Expensive Valuations के बावजूद तगड़ा रिटर्न

Defence- सितंबर 2022 से जुलाई 2024

स्वदेशी मुहिम पर जोर के बाद डिफेंस स्टॉक्स की वैल्यू सितंबर 2022 तक 10 साल के औसत वैल्यूएशन से 40% अधिक हो गए थे।

इसके बावजूद जुलाई 2024 तक इस सेक्टर ने निफ्टी की तुलना में 229 पर्सेंटेज प्वाइंट्स अधिक रिटर्न दिया।

मजबूत ऑर्डर बुक, इंपोर्ट सब्सटीट्यूशन और 33% EPS CAGR से ऊंचे वैल्यूएशन को सपोर्ट मिला।

NBFCs-अक्टूबर 2021 से फरवरी 2026

जेफरीज की रिपोर्ट्स के मुताबिक अक्टूबर 2021 तक एनबीएफसी स्टॉक्स की वैल्यू 10 साल के औसत वैल्यू से करीब 78% अधिक हो गई।

फिर भी क्रेडिट सर्किल में विस्तार, एसेट क्वालिटी में सुधार और डिजिटल मॉडल में विस्तार से 23% EPS CAGR से इसे सपोर्ट मिला और निफ्टी की तुलना में 40 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बेहतर परफॉर्म किया।

Cement-जून 2014 से मई 2017

जून 2014 तक सीमेंट स्ट़ॉक्स अपने 10 साल के औसत से 74% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे थे।

इसके बावजूद मई 2017 तक इसने निफ्टी के मुकाबले 47 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बेहतर रिटर्न दिया।

कंस्ट्रक्शन और इंफ्रा साइकिल में तेजी की उम्मीदों से इस रैली को सपोर्ट मिला।

FMCG-दिसंबर 2014 से दिसंबर 2019

दिसंबर 2024 तक एफएमसीजी कंपनियां अपने 10 साल के औसत से 44% प्रीमियम पर थे लेकिन इसके बावजूद इस सेक्टर ने दिसंबर 2019 तक 96 पर्सेंटेज प्वाइंट्स अधिक रिटर्न दिया।

इसे इकॉनमी के फॉर्मलाइजेशन यानी औपचारिकीकरण, जीएसटी और 12% EPS CAGR से सपोर्ट मिला।

Retail-दिसंबर 2014 से सितंबर 2019

दिसंबर 2014 तक रिटेल सेक्टर का वैल्यूएशन अपने 10 साल के औसत से 41% प्रीमियम पर पहुंच गया।

इसके बावजूद सेक्टर ने सितंबर 2019 तक निफ्टी की तुलना में 159 पर्सेंटेज प्वाइंट्स अधिक रिटर्न दिया।

इस दौरान फॉर्मलाइजेशन, प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मजबूत मांग और उपभोक्ता खर्च में बढ़ोतरी से 20% EPS CAGR को सपोर्ट मिला।

Capital Goods- सितंबर 2022 से जून 2024

सितंबर 2022 तक 10 साल के औसत की तुलना में 28% प्रीमियम पर होने के बावजूद जून 2024 तक इसने 90 पर्सेंटेज प्वाइंट्स अधिक रिटर्न दिया।

इसे कोविड के बाद इंवेस्टमेंट साइकिल में रिकवरी से सपोर्ट मिला।

मजबूत ऑर्डर इनफ्लो और बेहतर मार्जिन पर इस दौरान EPS CAGR 26% रहा।

Hospital Stocks- दिसंबर 2021 से अक्टूबर 2025

कोविड के बाद अस्पताल दिसंबर 2021 तक हॉस्पिटल्स के वैल्यूएशन 10 साल के औसत के मुकाबले 44% प्रीमियम पर पहुंच गए थे।

इसके बावजूद हॉस्पिटल सेक्टर ने अक्टूबर 2025 तक 85 पर्सेंटेज प्वाइंट्स का आउटपरफॉरमेंस किया।

इंश्योरेंस कवरेज के विस्तार, ऑपरेटिंग लीवरेज में बढ़ोतरी और प्रति बेड आय (एवरेज रेवेन्यू पर ऑपरेटिंग बेड- ARPOB) में सुधार से EPS CAGR 23% रहा।

Hotel Stocks- दिसंबर 2021 से दिसंबर 2024

दिसंबर 2021 तक होटल स्टॉक्स अपने 10 साल के औसत से करीब 20% महंगे हो गए।

इसके बावजूद दिसंबर 2024 तक निफ्टी की तुलना में इसने करीब 290 पर्सेंटेज प्वाइंट्स अधिक रिटर्न दिया।

इसे कोविड के मांग में रिकवरी, प्रीमियमाइजेशन और विस्तार के मजबूत संभावनाओं से सपोर्ट मिला।

अब पावर स्टॉक्स पर दांव क्यों?

अब ऐसा ही रुझान ब्रोकरेज फर्म को पावर सेक्टर पर भी दिख रहा है और इस सेक्टर में जेएसडब्ल्यू एनर्जी, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस, प्रीमियर एनर्जीज और सीमेंस एनर्जी को अपनी टॉप पसंद बताया है। जेफरीज के मुताबिक इसे बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की घटती लागत, स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड की बेहतर होती बैलेंस शीट, डेटा सेंटर के विस्तार, प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती भागीदारी और ईवी के तेज विस्तार से सपोर्ट मिलेगा।

US Fed ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, लेकिन एक खास सिग्नल पर ट्रंप ने कहा- यकीन करना मुश्किल

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

IT Sector का भारी दबाव, Sensex-Nifty कभी लाल तो कभी हरा, इन 5 वजहों से दोनों तरफ भाग रहा मार्केट

Stock Market moving up and down: कच्चे तेल की नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन में कमी के बावजूद घरेलू स्टॉक मार्केट में खास जोश नहीं दिख रहा। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में ग्रीन और रेड जोन में झूल रहे। ब्रोडर लेवल पर भी मिला-जुला रुझान है और निफ्टी मिडकैप 100 में फिलहाल मामूली बढ़त है तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक की बढ़त है। फिलहाल 10:14 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 120.12 प्वाइंट्स यानी 0.16% की बढ़त के साथ 77,275.74 और और निफ्टी (Nifty) भी 43.20 प्वाइंट्स यानी 0.18% के उछाल के साथ 24,128.90 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 111.23 प्वाइंट्स फिसलकर 77,044.39 और 164.70 की बढ़त के साथ 77,320.32 तक पहुंचा तो निफ्टी भी 26.85 प्वाइंट्स गिरकर 24,058.85 और 53.95 प्वाइंट्स चढ़कर 24,085.70 तक पहुंचा।

Stock Market in pressure: ये है वजह

अमेरिका में ब्याज दरें स्थिर लेकिन आगे बढ़ाने के संकेत

अमेरिकी फेड के नए चेयरमैन केविन वार्श ने अपनी अगुवाई में पहली बार तय हुई मौद्रिक नीतियों में दरों को स्थिर रखा है। हालांकि फेडरल रिजर्व ने इस साल दरों में बढ़ोतरी के संकेत भी दिए हैं। इसके चलते ही मार्केट में उठा-पटक दिख रही है।

IT Sector का दबाव

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत दिया जिससे दुनिया भर में टेक स्टॉक्स को लेकर निवेशकों का रुझान फीका पड़ा। भारतीय मार्केट में भी इसने आईटी शेयरों को तोड़ दिया और निफ्टी आईटी डेढ़ फीसदी से अधिक फिसल गया। अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची होने पर आमतौर पर टेक्नोलॉजी स्टॉक्स पर दबाव आता है क्योंकि इससे भविष्य की कमाई का वर्तमान मूल्य घट जाता है और वैश्विक कंपनियों के खर्च में भी कमी आ सकती है और यही वैश्विक कंपनियां भारतीय आईटी सेवा कंपनियों की प्रमुख ग्राहक हैं। वहीं दूसरी तरफ मेटल, पीएसयू बैंक, फार्मा और एफएमसीजी जैसे अहम सेक्टर मार्केट को ऊपर खींचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इनके निफ्टी इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की बढ़त है।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स में गिरावट से मार्केट को सपोर्ट मिला। फिलहाल यह 1.66% की गिरावट के साथ 12.97 पर है। इसके अधिक होने का मतलब मार्केट में वोलैटिलिटी का बढ़ना और नीचे आने का मतलब होता है वोलैटिलिटी का कम होना।

एशियाई बाजारों से मिला-जुला रुझान

घरेलू मार्केट पर आज एशियाई बाजारों के मिले-जुले रुझानों का भी असर दिख रहा है। एक तरफ जापान का निक्केई 225 करीब 2% उछल पड़ा तो दक्षिण कोरिया का कोस्पी तो 2% चढ़कर 9,040.52 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। ताइवान के ताइवान वेटेड में करीब 1% की बढ़त है। वहीं दूसरी तरफ इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट में 1% से अधिक और चीन के शंघाई कंपोजिट में आधे फीसदी की गिरावट है।

Sensex की एक्सपायरी

आज सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में दोनों तरफ मूवमेंट दिख रहा है।

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US Fed ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, लेकिन एक खास सिग्नल पर ट्रंप ने कहा- यकीन करना मुश्किल 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Today Prediction: गिफ्ट निफ्टी ने दिए पॉजिटिव शुरुआत के संकेत, US-ईरान डील, फेड पॉलिसी से लेकर क्रूड ऑयल तक जानें बाजार को किन से मिलेगा सपोर्ट

Stock Market Today Prediction: गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के पॉजिटिव खुलने के संकेत मिल रहे है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स नए साइन किए गए अंतरिम US-ईरान एग्रीमेंट और घरेलू इक्विटीज़ के लगातार चौथे सेशन में अपनी जीत का सिलसिला जारी रखने के बाद जारी विदेशी फंड फ्लो के असर का भी आकलन करेंगे।

GIFT निफ्टी सुबह करीब 8:31 बजे 24,100 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले निफ्टी फ्यूचर्स क्लोज से 147.50 पॉइंट्स या 0.61 फीसदी ऊपर ट्रेड कर रहा था, जो घरेलू इक्विटीज़ के लिए पॉजिटिव शुरुआत का संकेत देता है।

यह सिग्नल बुधवार को सेंसेक्स के 347.14 पॉइंट्स और निफ्टी के 96.55 पॉइंट्स बढ़ने के बाद आया है, बेंचमार्क इंडेक्स ने अपनी हालिया रैली को जारी रखा क्योंकि जियोपॉलिटिकल चिंताएं कम होने और कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने सेंटिमेंट को सपोर्ट करना जारी रखा। निफ्टी कई महीनों में पहली बार 24,050 के निशान से ऊपर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 77,150 के ऊपर सेटल हुआ।

गुरुवार सुबह ग्लोबल संकेत मिले-जुले थे, लेकिन ज्यादा एशियाई मार्केट में तेजी के साथ कारोबार होता दिखाई दिया। इन्वेस्टर्स US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी अधिकारियों के बीच साइन किए गए अंतरिम शांति समझौते के असर का अंदाजा लगा रहे थे। यह समझौता दोनों देशों के बीच सीजफायर को बढ़ाता है और उम्मीद है कि इससे होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद मिलेगी, जबकि परमानेंट सेटलमेंट पर बातचीत जारी रहेगी।

जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स थोड़ा बदला। जापान का निक्केई एक नए रिकॉर्ड हाई पर चढ़ गया और पहली बार 71,000 का आंकड़ा पार कर गया, जिसे सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े स्टॉक्स में बढ़त का सपोर्ट मिला, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी लगभग 1 फीसदी बढ़ा।

US Fed ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव

हालांकि, फेडरल रिजर्व द्वारा इंटरेस्ट रेट्स में कोई बदलाव नहीं करने के बाद वॉल स्ट्रीट रात भर नीचे बंद हुआ, लेकिन यह संकेत दिया कि पॉलिसीमेकर्स को इस साल के आखिर में रेट्स बढ़ने की संभावना अभी भी दिख रही है। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.98 परसेंट गिरा, S&P 500 1.21 परसेंट गिरा और नैस्डैक कंपोजिट 1.34 परसेंट गिरा।

फेड ने उम्मीद के मुताबिक रेट्स को 3.50-3.75 फीसदी की रेंज में बिना किसी बदलाव के रखा। हालांकि, अपडेटेड अनुमानों से पता चला है कि कई पॉलिसीमेकर्स 2026 के आखिर तक कम से कम एक बार रेट बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। नए फेड चेयर केविन वार्श ने महंगाई पर फोकस बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

US इक्विटीज़ में सतर्क रिएक्शन के बावजूद, तेल की कीमतों में तेज गिरावट से उभरते बाजारों में सेंटिमेंट को सपोर्ट मिला है। US और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौते पर साइन करने के बाद ब्रेंट क्रूड 1.4 फीसदी और गिरकर लगभग $78.4 प्रति बैरल पर आ गया, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और ईरानी तेल एक्सपोर्ट पर US बैन हटाना शामिल है। US क्रूड $76 प्रति बैरल से नीचे ट्रेड कर रहा था।

पिछले हफ़्ते क्रूड की कीमतों में गिरावट भारतीय बाजारों के लिए एक बड़ी राहत रही है, जिससे महंगाई, करंट अकाउंट डेफिसिट और कॉर्पोरेट इनपुट कॉस्ट को लेकर चिंताएं कम हुई हैं। पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में निफ्टी और सेंसेक्स में क्रमशः लगभग 4 परसेंट और 4.5 परसेंट की बढ़त हुई है।

24,100-24,200 ज़ोन में दिख सकता है निफ्टी

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, फेड के कड़े रुख के बावजूद भारतीय बाजारों में सावधानी से पॉजिटिव रुझान बने रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “व्हाइट हाउस के यह कन्फर्म करने के बाद कि अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने पीस डील मेमोरेंडम पर फॉर्मल साइन कर दिए हैं, इन्वेस्टर का सेंटिमेंट मजबूत हुआ है, जो अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया में एक बड़ा कदम है।”

पोनमुडी ने आगे कहा कि ब्रेंट क्रूड का $74-76 प्रति बैरल रेंज में बने रहना भारत के महंगाई के आउटलुक, इंपोर्ट बिल और बड़े मैक्रोइकोनॉमिक माहौल को अच्छी राहत दे रहा है।

टेक्निकल फ्रंट पर, पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी 24,000 के अहम निशान से ऊपर बने रहने के बाद पॉजिटिव स्ट्रक्चर बनाए हुए है। तुरंत रेजिस्टेंस 24,100-24,200 ज़ोन में दिख रहा है, जबकि सपोर्ट 24,000 और 23,900 के आसपास है। 24,200 से ऊपर लगातार बने रहने से 24,400 की ओर रैली का रास्ता खुल सकता है।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks to Watch: Sensex की एक्सपायरी; RVNL, Lemon Tree और Lupin समेत इन स्टॉक्स पर खास वजहों से रहेगी नजर

Stocks to Watch: अमेरिकी फेड के ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले और अमेरिका-ईरान के शांति समझौते पर दुनिया के अधिकतर बाजारों से मजबूत रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 121.00 प्वाइंट्स यानी 0.51% की बढ़त के साथ 24,076.50 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 17 जून को सेंसेक्स (Sensex) 347.14 प्वाइंट्स यानी 0.45% के उछाल के साथ 77,155.62 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 96.55 प्वाइंट्स यानी 0.40% की बढ़त के साथ 24,085.70 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: इन स्टॉक्स पर रहेगी नजर

Rail Vikas Nigam Ltd (RVNL)

रेल विकास निगम को ईस्ट कोस्ट रेलवे से भद्रक-विजयनगरम सेक्शन पर नेरगुंडी-बारंग और खुर्दा रोड-विजयनगरम के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के लिए EPC मोड पर पुल बनाने के लिए ₹967.92 करोड़ का काम मिला है।

HFCL

एचएफसीएल को उत्तर प्रदेश में भारतनेट फेज-III प्रोजेक्ट के लिए रेल विकास निगम से ₹2,666.09 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट में टेलीकॉम इक्विपमेंट और उससे जुड़े सामानों की सप्लाई, ऑप्टिकल फाइबर केबल टेलीकॉम नेटवर्क बनाना और 10 साल तक प्रोजेक्ट का रखरखाव करना शामिल है।

Bosch Home Comfort

प्रमोटर बॉश ग्लोबल सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज 18-19 जून को ऑफर-फॉर-सेल (OFS) के जरिए बॉश होम कम्फर्ट में 7.97% तक हिस्सेदारी (21.7 लाख शेयर) बेचेगी। कुल ऑफर साइज में 0.75% का ग्रीनशू ऑप्शन भी शामिल है। फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹1,150 तय किया गया है।

Lemon Tree Hotels

लेमन ट्री होटल्स ने राजस्थान के श्री गंगानगर में लेमन ट्री होटल खोलने का ऐलान किया है जिसके बाद राजस्थान में इसके होटलों की संख्या 23 हो गई है। इस होटल का मैनेजमेंट कंपनी की सब्सिडियरी कार्नेशन होटल्स करेगी।

Balkrishna Industries

बालकृष्ण इंडस्ट्रीज के बोर्ड ने Saroj Kumar Khuntia को कंपनी का चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है, जो 18 जून से प्रभावी होगा। वहीं मधुसूदन बजाज रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने पर कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर और KMP (की मैनेजेरियल पर्सनल) के पद से हट गए।

Lupin

लुपिन ने अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने ANDA (एब्रिविएटेड न्यू ड्रग एप्लीकेशन) को मंजूरी मिलने के बाद अमेरिका में 40mg और 80mg की एजिलसार्टन मेडोक्सोमिल टैबलेट लॉन्च करने का ऐलान किया है। यह एज़ुरिटी फार्मा की ‘एडार्बी’ (Edarbi) दवा का बायोइक्विवैलेंट है। इसका इस्तेमाल वयस्कों में हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए किया जाता है।

बल्क और ब्लॉक डील्स

Corona Remedies

प्राइवेट इक्विटी फर्म क्रिसकैपिटल की सहयोगी कंपनी सेपिया इन्वेस्टमेंट्स ने कोरोना रेमेडीज के 43.28 लाख शेयर (7.07% हिस्सेदारी) ₹748.9 करोड़ में बेच दी। इसके अलावा एंकर पार्टनर्स (Anchor Partners) ने भी कंपनी के 1.61 लाख शेयर (0.26% हिस्सेदारी) ₹28 करोड़ में बेच दी। ये ब्लॉक डील प्रति शेयर ₹1,730 के भाव पर हुईं। मार्च 2026 तक सेपिया इन्वेस्टमेंट्स की इस फार्मा कंपनी में 19.76% हिस्सेदारी (1.2 करोड़ शेयर) थी।

कोरोना रेमेडीज की इस ब्लॉक डील में एबरडीन एशियन स्मॉलर कंपनीज इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट पीएलसी, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, फैक्ट्री म्यूचुअल इंश्योरेंस कंपनी, टीसीडब्ल्यू व्हाइट ओक इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी फंड, अशोका व्हाइटओक इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी एक्स-चाइना फंड, व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड, इनवेस्को म्यूचुअल फंड और कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड जैसे देशी-विदेशी निवेशकों ने हिस्सा लिया।

DOMS Industries

इटैलियन स्टेशनरी और विदेशी प्रमोटर FILA (Fabbrica Italiana Lapis ed Affini) ने डोम्स इंडस्ट्रीज में 7% इक्विटी हिस्सेदारी (42.48 लाख शेयर) ₹934.7 करोड़ में बेच दी। इनमें से 23.4 लाख शेयरों की बिक्री प्रति शेयर ₹2,200.55 और 19.08 लाख शेयरों की बिक्री प्रति शेयर ₹2,200.07 के भाव पर हुई। वहीं दूसरी तरफ एक्सिस म्यूचुअल फंड ने ₹79.56 करोड़ के अतिरिक्त 3.61 लाख शेयर और एसबीआई म्यूचुअल फंड ने ₹284.77 करोड़ के 12.94 लाख शेयर खरीदे। यह खरीदारी प्रति शेयर ₹2,200 के भाव पर हुई।

Finolex Industries

एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने पीवीसी पाइप बनाने वाली कंपनी फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज के प्रति शेयर ₹169.71 के भाव पर 42.7 लाख शेयर और ₹169.62 के भाव पर 37.77 लाख शेयर यानी 80.47 लाख शेयर (1.29% हिस्सेदारी) ₹136.54 करोड़ में बेच दी। मार्च 2026 तक एचडीएफसी लाइफ के पास कंपनी में 1.3% हिस्सेदारी (80.5 लाख शेयर) थी।

Baazar Style Retail

गर्ग ब्रदर्स ने बाजार स्टाइल रिटेल के 8.75 लाख शेयर (1.14% हिस्सेदारी) ₹28.76 करोड़ में प्रति शेयर ₹328.72 के भाव पर बेच दी। मार्च 2026 तक गर्ग ब्रदर्स के पास बाजार स्टाइल रिटेल में 1.38% हिस्सेदारी (10.51 लाख शेयर) थी।

लिस्टिंग

आज सुसान इलेक्ट्रिकल्स की बीएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

एक्स-डेट

आज एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज, टाटा टेक्नोलॉजीज, जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक, ईमुद्रा, जीएचसीएल, मोनिका अल्कोबेव, स्वास्तिक इन्वेस्टस्मार्ट और विमटा लैब्स के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे तो ओएसिसि सिक्योरिटीज के राइट्स की भी आज एक्स-डेट है।

F&O Ban

आज कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया में एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

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Gold Price Today: ₹4800 सस्ता हुआ सोना, ₹5300 टूटी चांदी; जानिए क्यों आई बड़ी गिरावट

Gold Price Today: घरेलू बाजार में बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मजबूत रुपये और वैश्विक बाजार में कमजोरी के बीच कारोबारियों ने कीमती धातुओं से दूरी बनाई। इससे सोना और चांदी दोनों सस्ते हो गए।

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, 24 कैरेट वाला सोना 4,800 रुपये टूटकर 1,54,400 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स समेत) पर आ गया। एक दिन पहले सोना 1,59,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

चांदी में भी बड़ी गिरावट

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट आई। चांदी 5,300 रुपये टूटकर 2,55,400 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समेत) पर आ गई।

मंगलवार को चांदी 2,60,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

क्यों गिरे सोने-चांदी के दाम?

एनालिस्टों के मुताबिक, लगातार दूसरे दिन घरेलू मांग कमजोर रही। वहीं शेयर बाजार में मजबूती के कारण निवेशकों का रुझान दूसरी एसेट की ओर बढ़ा है।

इसके अलावा निवेशक अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले समेत कई अहम आर्थिक घटनाओं से पहले सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसी वजह से सोने में खरीदारी कमजोर रही।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव

वैश्विक बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। स्पॉट गोल्ड मामूली गिरावट के साथ 4,327.54 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं स्पॉट सिल्वर 0.18% फिसलकर 69.89 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की मौद्रिक नीति बैठक के फैसले पर टिकी हुई है। इस वजह से फिलहाल सोने की कीमतें सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं।

अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी नजर

बाजार की नजर शुक्रवार को होने वाली अमेरिका और ईरान की प्रस्तावित बैठक पर भी है। एनालिस्टों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति होती है तो भू-राजनीतिक तनाव कम हो सकता है। इससे सोने और चांदी जैसी सुरक्षित माने वाले निवेश की मांग घट सकती है।

वहीं अगर बातचीत में कोई बाधा आती है या तनाव बढ़ता है, तो निवेशक फिर से सोने और चांदी की ओर रुख कर सकते हैं।

Gold Price: सोने में आएगी तूफानी तेजी! JP मॉर्गन ने कहा- 6 महीने में 40% बढ़ सकता है भाव

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