सऊदी अरब के दो एयरपोर्ट्स पर हूती विद्रोहियों ने ड्रोन और मिसाइल से हमले किए। इसमें 3 लोगों की मौत हो गई है। साथ ही 36 लोग घायल हुए हैं। सऊदी अरब की जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन (GACA) ने बुधवार को यह जानकारी दी। अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 6 और 7 अक्टूबर को निशाना बनाया गया। हूती विद्रोहियों ने दोनों हमलों की जिम्मेदारी ली है। वहीं, सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने यमन में हूतियों के 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। विदेशी नागरिकों ने हमले में जान गवाईं अबहा एयरपोर्ट पर हमले में मोरक्को और अल्जीरिया की दो महिला नागरिकों की मौत हुई। साथ ही यहां 28 लोग घायल हुए, जिनमें सऊदी, बांग्लादेशी और फिलीपींस के नागरिक शामिल हैं। वहीं, किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक सूडानी नागरिक की मौत हुई। यहां 8 लोग घायल हुए, जिनमें 5 सऊदी नागरिक, 2 मिस्र के निवासी और एक पाकिस्तानी निवासी शामिल हैं। GACA ने बताया कि सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। साथ ही अधिकारी सुविधाओं की सुरक्षा की जांच कर रहे हैं और यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं। हूतियों ने अरामको रिफाइनरी पर हमले का भी दावा किया इससे पहले हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सऊदी अरब में कई जगहों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने की जिम्मेदारी ली थी। इसमें रबीघ में स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी अरामको पर हमला भी शामिल है। सरी ने टेलीग्राम पर जारी बयान में कहा कि संगठन ने बड़ी संख्या में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए तीन बड़े सैन्य अभियान चलाए। सरी ने दावा किया कि ये हमले यमन पर सऊदी अरब के हमलों के जवाब में किए गए। उनके मुताबिक, इससे पहले के 24 घंटों में सऊदी अरब ने यमन पर 60 हवाई और मिसाइल हमले किए थे। सऊदी ने यमन में मिसाइल लॉन्च करने वाला ठिकाना नष्ट किया इस बीच, यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने दावा किया कि उसने रियाद पर हमले के लिए इस्तेमाल किए गए एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म को नष्ट कर दिया है। गठबंधन के प्रवक्ता कर्नल तुर्की अल-मालिकी ने कहा कि यह कार्रवाई यमन की राजधानी सना में की गई। उनके मुताबिक, वहां सऊदी अरब पर एक और हमले की तैयारी चल रही थी और हमला जल्द किया जा सकता था।
National Gandhi Museum: महात्मा गांधी से जुड़े पत्रों, हस्तलिखित दस्तावेजों और उनके निजी इस्तेमाल की वस्तुओं की हालिया नीलामी को लेकर नेशनल गांधी म्यूजियम ने चिंता जताई है। म्यूजियम के डायरेक्टर ए. अन्नामलाई ने कहा है कि गांधी के ऐसे दस्तावेज और व्यक्तिगत सामान केवल किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि भारत की साझा ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने इन दुर्लभ सामग्रियों के मालिकों से इन्हें नीलाम करने के बजाय राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय को सौंपने की अपील की है, ताकि इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
19 अगस्त को हुई एक नीलामी में गांधी से जुड़े 86 दुर्लभ आइटम शामिल थे। इनमें उनके करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को लिखी गई गांधी की 688 हस्तलिखित टिप्पणियों का संग्रह भी था। करीब दो सालों में लिखे गए इस संग्रह का शीर्षक ‘A Thought for the Day’ था। यह संग्रह 16.20 करोड़ रुपये में बिका और किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के नीलामी में बिकने का विश्व रिकॉर्ड बना।
‘यह खबर बेहद दुखद और पीड़ादायक’
नेशनल गांधी म्यूजियम के डायरेक्टर ए. अन्नामलाई ने शनिवार को जारी बयान में इस नीलामी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले महात्मा गांधी द्वारा लिखे गए लेटर और उनके इस्तेमाल की गई कुछ वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय नीलामी में रखा गया। रिपोर्टों के मुताबिक, इन वस्तुओं की बिक्री से मालिक को 16 करोड़ रुपये से अधिक मिले।
अन्नामलाई ने इसे ‘बेहद दुखद और पीड़ादायक खबर’ बताया। उन्होंने कहा कि गांधी के कई पत्र भले ही किताबों में प्रकाशित हो चुके हैं। लेकिन मूल पत्रों और उनके हाथ से लिखी पांडुलिपियों को सुरक्षित रखना देश की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।
तीसरी-चौथी पीढ़ी के पास पहुंच चुके हैं कई दस्तावेज
म्यूजियम डायरेक्टर के मुताबिक, गांधी से जुड़े कई पत्र और वस्तुएं अब उन लोगों के पास हैं जो मूल मालिकों की तीसरी या चौथी पीढ़ी से आते हैं। संभव है कि उन्हें इन सामग्रियों के ऐतिहासिक महत्व की पूरी जानकारी न हो या वे यह न जानते हों कि इन्हें किस तरह सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
ऐसे में कुछ लोग इन दुर्लभ वस्तुओं को नीलामी के जरिए बेचने का रास्ता अपना रहे हैं। अन्नामलाई ने कहा कि गांधी के पत्र, पांडुलिपियां और उनके निजी इस्तेमाल की वस्तुएं सिर्फ निजी संग्रह की चीजें नहीं हैं, बल्कि भारत के साझा इतिहास का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि इन सामग्रियों को इस तरह संरक्षित किया जाना चाहिए कि भारत ही नहीं। बल्कि दुनियाभर के लोग इन्हें देख सकें, उनका अध्ययन कर सकें और महात्मा गांधी के विचारों को समझ सकें।
राष्ट्रीय गांधी म्यूजियम ने की खास अपील
अन्नामलाई ने उन सभी लोगों से अपील की, जिनके पास गांधी के पत्र, उनके हाथ से लिखी पांडुलिपियां या उनके द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुएं हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें बेचने या नीलाम करने के बजाय राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय, दिल्ली को सौंपा जाए। उनका कहना है कि म्यूजियम इन दुर्लभ और मूल्यवान सामग्रियों को सुरक्षित तरीके से संरक्षित कर सकता है। उन्हें वर्तमान तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपयोगी बना सकता है।
नीलामी में क्या-क्या बिका?
‘Gandhi: From the Collection of Anand T Hingorani’ नाम से आयोजित नीलामी में गांधी से जुड़े कुल 86 लॉट शामिल थे। इनमें पत्र, पांडुलिपियां, तस्वीरें और व्यक्तिगत वस्तुएं शामिल थीं। सबसे अधिक कीमत गांधी की 688 हस्तलिखित टिप्पणियों के संग्रह को मिली। इसमें सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, निर्भयता, धार्मिक समानता, अस्पृश्यता उन्मूलन, प्रार्थना, रामनाम, सेवा, श्रम, भूख, कर्तव्य, स्वराज, नैतिक जिम्मेदारी, मौन, अंतरात्मा, अनासक्ति, आत्मबोध और ईश्वर की खोज जैसे विषयों पर उनके विचार दर्ज थे। यह संग्रह 16.20 करोड़ रुपये में बिका।
इसके अलावा गांधी के ईश्वर और भगवद्गीता से जुड़े विचारों पर आधारित तीन पांडुलिपियों और पत्रों का सेट ‘Message on God’ नाम से पेश किया गया, जिसे 1.68 करोड़ रुपये में बेचा गया। गांधी का ‘पेटी चरखा’ (बॉक्स स्पिनिंग व्हील) भी नीलामी में शामिल था। इसके साथ कताई के आध्यात्मिक अनुशासन पर लिखे दो पत्र थे। इसकी अनुमानित कीमत 50 से 70 लाख रुपये थी, लेकिन यह 1.02 करोड़ रुपये में बिका।
इसके अलावा गांधी की हस्ताक्षरित एक तस्वीर (जिसमें वह लिखते हुए दिखाई दे रहे हैं) 78 लाख रुपये में बिकी। आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़े गांधी के पत्रों, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड का एक सेट 57.60 लाख रुपये में बेचा गया।
हिंगोरानी परिवार ने पीढ़ियों तक संभालकर रखा था संग्रह
नीलाम की गई सामग्री को हिंगोरानी परिवार ने कई पीढ़ियों से संभालकर रखा था। यह संग्रह गांधी और आनंद टी. हिंगोरानी के लंबे और करीबी संबंधों के माध्यम से गांधी के व्यक्तित्व और विचारों की एक निजी झलक प्रस्तुत करता है। नीलामी में खरीदार की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। हालांकि नीलामी कराने वाली संस्था ने बताया कि खरीदार भारत का ही है और यह महत्वपूर्ण पांडुलिपि देश में ही रहेगी।
राष्ट्रीय गांधी म्यूजियम की अपील के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि महात्मा गांधी जैसी ऐतिहासिक शख्सियत से जुड़े मूल दस्तावेजों और निजी वस्तुओं को निजी संपत्ति मानकर बाजार में बेचा जाना चाहिए या उन्हें राष्ट्रीय विरासत के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए।
नीलामी से जुड़ी मुख्य बातें
कुल बिक्री: सैफरनआर्ट (Saffronart) नीलामी घर द्वारा ‘गांधी: फ्रॉम द कलेक्शन ऑफ आनंद टी. हिंगोरानी’ शीर्षक से 86 वस्तुओं की नीलामी की गई।
सबसे महंगी वस्तु: गांधीजी द्वारा अपने निकट सहयोगी आनंद टी. हिंगोरानी को दो वर्षों में लिखे गए 688 हस्तलिखित विचारों का संग्रह ‘अ थॉट फॉर द डे’ 16.20 करोड़ रुपये में बिका। यह किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज़ के लिए एक विश्व रिकॉर्ड है।
अन्य प्रमुख वस्तुएं
‘मेसेज ऑन गॉड’ (ईश्वर और भगवद गीता पर विचार): 1.68 करोड़ रुपये
गांधीजी का पेटी चरखा (दो पत्रों के साथ): 1.02 करोड़ रुपये
लिखने के दौरान की हस्ताक्षरित तस्वीर: 78 लाख रुपये
आर्थिक स्वतंत्रता पर पत्र, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड: 57.60 लाख रुपये
कौन है खरीददार?
नीलामी घर ने पुष्टि की है कि खरीदार भारत का ही निवासी है, इसलिए ये दस्तावेज देश में ही रहेंगे। हालांकि खरीददार के नाम का खुलासा नहीं हुआ है।
संग्रहालय का पक्ष और अपील
संरक्षण पर चिंता: गांधी म्यूजियम के निदेशक ए. अन्नामलाई ने कहा कि मूल मालिकों की तीसरी या चौथी पीढ़ी के पास ये वस्तुएं हैं, जो अक्सर इनके ऐतिहासिक महत्व या सही संरक्षण तकनीकों को समझे बिना इन्हें बेच देते हैं।
राष्ट्रीय धरोहर: उन्होंने जोर देकर कहा कि गांधीजी के पत्र, पांडुलिपियाँ और वस्तुएं साझा राष्ट्रीय संपत्ति हैं, जिन्हें आम जनता के अध्ययन और सीखने के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
सार्वजनिक अपील: अन्नामलाई ने निजी संग्रहकर्ताओं और वंशजों से अपील की है कि वे इन ऐतिहासिक वस्तुओं को नीलाम करने के बजाय नई दिल्ली स्थित ‘राष्ट्रीय गांधी म्यूजियम’ को सौंपें ताकि इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
Gandhi Museum: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कई पत्रों, पांडुलिपियों और निजी वस्तुओं की नीलामी के कुछ दिन बाद नेशनल गांधी म्यूजियम के डायरेक्टर ए. अन्नामलाई ने कहा कि ऐसी वस्तुएं केवल निजी संपत्ति नहीं हैं। बल्कि भारत की साझा विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने इन वस्तुओं को अपने पास रखने वालों से इन्हें संरक्षण के लिए संस्थान को सौंपने की अपील की है। 19 अगस्त को ‘सैफरनार्ट’ (Saffronart) की नीलामी में कुल 86 चीजें नीलाम की गईं। इनमें गांधीजी के हाथ से लिखे 688 विचारों का संग्रह भी शामिल था।
‘ए थॉट फॉर द डे’ शीर्षक वाला यह संग्रह गांधी ने अपने करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को करीब दो वर्षों की अवधि में लिखा था। इसे 16.20 करोड़ रुपये में बेचा गया, जो नीलामी में बिके किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए विश्व रिकॉर्ड है। अन्नामलाई ने शनिवार को जारी एक बयान में इस खबर को बेहद दुखद और पीड़ादायक बताया।
उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “कुछ दिन पहले महात्मा गांधी द्वारा लिखे गए कुछ पत्रों और उनके इस्तेमाल की गई कुछ वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय नीलामी के लिए रखा गया था। खबरों के अनुसार, इससे मालिक को 16 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली। यह बेहद दुखद और पीड़ादायक खबर है।”
कई किताबों में प्रकाशित हो चुके हैं गांधी जी के लेटर
नेशनल गांधी म्यूजियम के डायरेक्टर ए. अन्नामलाई ने कहा कि गांधी के कई पत्र पहले ही किताबों में प्रकाशित हो चुके हैं। लेकिन मूल पत्रों और उनके हस्तलिखित दस्तावेजों का संरक्षण करना हमारी ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। करीब दो साल की अवधि में उनके करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को लिखे गए इस संग्रह को 16.20 करोड़ रुपये में बेचा गया। यह नीलामी में बिकने वाले किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए एक विश्व रिकॉर्ड है।
शनिवार को जारी एक बयान में अन्नामलाई ने इस खबर को बेहद दुखद और पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा, “कुछ दिन पहले महात्मा गांधी के लिखे कुछ पत्र और उनके इस्तेमाल की कुछ चीजें अंतरराष्ट्रीय नीलामी के लिए रखी गई थीं। खबर है कि नीलामी से मालिक को 16 करोड़ रुपये से अधिक मिले। यह बेहद दुखद और पीड़ादायक खबर है।”
गांधी म्यूज़ियम के डायरेक्टर ने कहा कि भले ही गांधीजी के कई पत्र पहले ही किताबों में छप चुके हैं। किन असली पत्रों और उनके हाथ से लिखी पांडुलिपियों को सुरक्षित रखना हमारी ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज जिनके पास ऐसे पत्र और सामान हैं, वे मूल मालिकों की तीसरी या चौथी पीढ़ी के लोग हैं। शायद उनके ऐतिहासिक महत्व को पूरी तरह नहीं समझते हैं।
गांधीजी के सामान वापस करने की मांग
अन्नामलाई ने उन सभी लोगों से अपील की है (जिनके पास गांधीजी के पत्र, हाथ से लिखी पांडुलिपियां या उनके इस्तेमाल की गई चीजें हैं) कि वे उन्हें बेचें या नीलाम न करें। बल्कि आगे आएं और उन्हें दिल्ली के नेशनल गांधी म्यूजियम को सौंप दें, ताकि हमारी राष्ट्रीय धरोहर की ये कीमती चीजें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखी जा सकें।
86 सामान की हुई नीलामी
‘गांधी: फ्रॉम द कलेक्शन ऑफ आनंद टी हिंगोरानी’ नाम की इस नीलामी में गांधीजी से जुड़ी 86 चीजें शामिल थीं। नीलाम करने वाली संस्था के अनुसार, सबसे ज्यादा कीमत पर बिकी पांडुलिपि में सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, निर्भयता, धार्मिक समानता, अस्पृश्यता निवारण, प्रार्थना, रामनाम, सेवा, श्रम, भूख, कर्तव्य, स्वराज, नैतिक जिम्मेदारी, मौन, अंतरात्मा की आवाज़, अनासक्ति और ईश्वर की खोज जैसे विषयों पर बात की गई है।
अन्य चीजों में ईश्वर और भगवद गीता पर गांधीजी के विचारों से जुड़ी तीन पांडुलिपियों और पत्रों का एक सेट शामिल था। इसका शीर्षक “मैसेज ऑन गॉड” (ईश्वर पर संदेश) था। यह 1.68 करोड़ रुपये में बिका।
नीलामी में शामिल निजी चीजों में गांधीजी का ‘पेटी चरखा’ (बॉक्स वाला चरखा) और सूत कातने के आध्यात्मिक अनुशासन पर लिखे दो पत्र भी शामिल थे। इनकी अनुमानित कीमत 50-70 लाख रुपये थी। यह 1.02 करोड़ रुपये में बिका।
गांधीजी की लिखते हुए एक हस्ताक्षरित तस्वीर 78 लाख रुपये में बिकी और आर्थिक आजादी पर गांधीजी के पत्रों, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड का एक सेट 57.60 लाख रुपये में बिका। हिंगोरानी परिवार द्वारा पीढ़ियों से सहेजकर रखे गए इस संग्रह से हिंगोरानी के साथ गांधीजी के लंबे समय के रिश्ते के जरिए उनके बारे में एक निजी नजरिया मिलता है। हालांकि खरीदार की पहचान उजागर नहीं की गई है।
Russian Attack on ArcelorMittal Ukraine: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। भारतीय मूल के अरबपति लक्ष्मी मित्तल के स्वामित्व वाले ‘आर्सेलरमित्तल’ (ArcelorMittal) के यूक्रेन स्थित विशाल स्टील प्लांट पर रूस ने भीषण मिसाइल हमला किया है। यह हमला यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के गृहनगर क्रिवी रिह (Kryvyi Rih) में स्थित प्लांट पर हुआ, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई और 14 कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए।
रॉयटर्स के अनुसार, इस हमले से देश के सबसे बड़े स्टील प्लांट की पावर-जनरेशन और ब्लास्ट-फर्नेस इकाइयों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे प्लांट का उत्पादन आंशिक रूप से रोकना पड़ा है।
ब्लास्ट-फर्नेस और पावर यूनिट तबाह, उत्पादन ठप
कंपनी ने मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर जारी एक बयान में पुष्टि की कि रात के समय हुए इस मिसाइल हमले ने प्लांट के मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया। आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह ने कहा कि पावर जनरेशन और ब्लास्ट-फर्नेस सेक्टर की प्रमुख सुविधाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिसके कारण विनिर्माण प्रक्रियाओं को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।
यह प्लांट यूक्रेन के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक परिसरों में से एक है। ऊर्जा आपूर्ति और ब्लास्ट-फर्नेस को नुकसान पहुंचने से देश के स्टील उद्योग को बड़ा झटका लगा है।
राष्ट्रपति जेलेंस्की का गृहनगर बना निशाना, दागे 62 मिसाइलें
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि रूसी सेना नागरिक और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार निशाना बना रही है। जेलेंस्की के मुताबिक, पिछले केवल एक हफ्ते में ही रूस ने यूक्रेन के शहरों पर 1,550 से अधिक अटैक ड्रोन, करीब 1,560 गाइडेड एरियल बम और 62 मिसाइलें दागी हैं। क्रिवी रिह के अलावा कीव और अन्य शहरों में हुए हमलों में भी कई नागरिक घायल हुए हैं और इमारतों में आग लग गई।
रूस ने कीव और क्रिवी रिह के सैन्य-औद्योगिक ठिकानों को बनाया निशाना
रूसी रक्षा मंत्रालय ने हमले की पुष्टि करते हुए अपनी दलील दी कि उसने क्रिवी रिह के मेटलर्जिकल प्लांट और कीव में स्थित सैन्य-औद्योगिक सुविधाओं को ही निशाना बनाया था। इसके साथ ही मॉस्को ने दावा किया कि उसने अपनी सीमा की ओर आ रहे 822 यूक्रेनी ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया है।
जवाब में यूक्रेन का रूस पर भीषण ड्रोन हमला
यूक्रेन ने भी रूस के अंदर गहराई तक जाकर लंबी दूरी के ड्रोनों से करारा पलटवार किया है। मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव के अनुसार, युद्ध की शुरुआत के बाद से यूक्रेन द्वारा किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला था, जिसमें 83 वर्षीय एक बुजुर्ग की मौत हो गई। पोडॉल्स्क में रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेलर ‘वाइल्डबेरीज’ (Wildberries) के एक बड़े गोदाम पर ड्रोन गिरा, जिससे वहां धुएं का विशाल गुबार उठता देखा गया।
बेलगोरोड शहर के पास एक बस पर हुए ड्रोन हमले में 1 व्यक्ति की मौत हुई, जबकि रोस्तोव (Rostov) क्षेत्र में यूक्रेन ने रूस की मिसाइल ईंधन उत्पादन इकाई को निशाना बनाने का दावा किया।
नाटो क्षेत्र में घुसा संदिग्ध रूसी ड्रोन, स्पेनिश लड़ाकू विमान ने मार गिराया
युद्ध का यह तनाव अब नाटो (NATO) देशों की सीमा तक पहुंच गया है। रोमानिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मोलदोवा की दिशा से एक ड्रोन रोमानियाई हवाई क्षेत्र में घुस आया।
नाटो के एयर-पुलिसिंग मिशन पर तैनात स्पेनिश वायुसेना के F-18 फाइटर जेट ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस ड्रोन को मार गिराया। नाटो प्रवक्ता के अनुसार यह एक संदिग्ध रूसी ड्रोन था। चालू वर्ष में रोमानियाई सीमा पर इस तरह की यह चौथी घटना है।
फ्रंटलाइन पर युद्ध की गति धीमी पड़ने और शांति वार्ताओं के अधर में लटके होने के कारण, अब रूस और यूक्रेन दोनों ही एक-दूसरे के ऊर्जा, औद्योगिक और आर्थिक ठिकानों को मिसाइल व ड्रोनों से नष्ट करने की रणनीति अपना रहे हैं। लक्ष्मी मित्तल के प्लांट पर हुआ यह हमला इस बात का प्रमाण है कि यह युद्ध अब वैश्विक और क्षेत्रीय व्यापार परिसंपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है।
US-Iran War Update: जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरानी मिसाइल हमले के एक दिन बाद अमेरिका ने गुरुवार (30 जुलाई) तड़के ईरान के कई ठिकानों पर एयरस्ट्राइक शुरू कर दिए। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद की गई। उन्होंने कहा था कि ईरान को बहुत कड़ा जवाब दिया जाएगा। अमेरिका की न्यूज वेबसाइट Axios ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिकी सेना ने गुरुवार सुबह ईरान में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए।
इसके कुछ ही देर बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन हमलों की पुष्टि की। CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई मंगलवार को जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए ईरानी मिसाइल हमलों के जवाब में की गई है। अमेरिकी सेना ने इसे मध्य-पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों के खिलाफ सशक्त और निर्णायक प्रतिक्रिया बताया।
ट्रंप ने ईरान को दी घमकी
इससे पहले बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘व्हाइट हाउस’ के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था कि अब जवाब देने की बारी अमेरिका की है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने मिसाइल लॉन्च को गलती बताया है। अमेरिका से जवाबी कार्रवाई नहीं करने का अनुरोध किया है।
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “अब हमारी बारी है। हम उन पर बहुत जोरदार हमला करेंगे। उन्हें पता है कि यह आने वाला है।” पिछले शुक्रवार से अमेरिका ने ईरान पर हमलों में पांच दिन का विराम लिया था। इससे पहले लगातार 13 रातों तक ईरानी ठिकानों पर अमेरिकी हमले किए गए थे।
ईरान में कई जगह धमाकों की खबर
अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने देश के कई हिस्सों में विस्फोट होने की जानकारी दी। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, बुशेहर प्रांत में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। यह वही इलाका है जहां ईरान का एकमात्र परमाणु प्लांट स्थित है। इसके अलावा दक्षिणी क्षेत्रों से भी विस्फोटों की खबरें सामने आईं। ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी ने भी अमेरिकी हमलों के बाद देश के कई हिस्सों में विस्फोट होने की जानकारी दी।
बाद में IRIB ने बताया कि खुजेस्तान प्रांत के अबादान क्षेत्र में भी अमेरिकी बलों ने हमला किया। इसके अलावा होर्मोज़गान प्रांत के बंदर अब्बास और अबू मूसा, किश तथा क़ेश्म द्वीपों पर भी विस्फोटों की सूचना मिली। वहीं, ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सीरिक शहर पर किसी हमले की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से हालात पर करीबी नजर रखी जा रही है।
इराक में अमेरिका एवं सऊदी के हमले में 20 लोगों की मौत, 32 घायल
इस बीच, इराक में अमेरिका और सऊदी अरब के जॉइंट हवाई हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और 32 अन्य घायल हो गए। इन हमलों में ईरान से जुड़े लॉजिस्टिक्स और हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस घटना के बाद बगदाद में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई गई है। दूसरी ओर, तेहरान ने जॉर्डन में मौजूद अमरीकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमले करने का दावा किया है।
इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस (PMF) ने टेलीग्राम पर एक बयान जारी कर पुष्टि की कि अमेरिका और सऊदी अरब के हमलों में कम से कम 20 जवान शहीद हुए हैं और 32 घायल हैं। समूह के अनुसार, ये हमले बगदाद, वासित, निनवे, बसरा, किरकुक, कर्बला और दियाला समेत सात प्रांतों में स्थित उनके सैन्य ठिकानों पर हुए। इससे उनके मुख्यालयों, वाहनों और हथियारों को भारी नुकसान पहुंचा है।
पीएमएफ का कहना है कि राहत कार्य जारी होने के कारण मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है। इससे पहले पीएमएफ की 30वीं ब्रिगेड ने बताया कि स्थानीय समयानुसार तड़के करीब 3:20 बजे उत्तरी इराक के निनवे प्रांत में सात हमले किए गए, जिनमें 10 लोगों की मौत हुई और छह अन्य घायल हो गए।
इराक में हड़कंप
इराक के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, हमलों की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री अली फलीह अल-जैदी ने बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी मंत्रिस्तरीय परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई। अमेरिकी और सऊदी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान समर्थित लड़ाकों द्वारा अमेरिकी सैनिकों और सऊदी ऑयल प्लांटों पर किए गए लगातार हमलों के जवाब में की गई है।
एक बयान में यह भी बताया गया कि इस साल फरवरी से अप्रैल के बीच ईरान समर्थित गुटों ने अमरीकी ठिकानों पर 600 से अधिक बार हमला करने की कोशिश की थी। बयान में आगाह किया गया कि आगे की सैन्य कार्रवाई से बचने के लिए आईआरजीसी और उसके सहयोगी समूह तुरंत हमले रोक दें। पीएमएफ के कई बड़े गुटों के रिश्ते ईरान की आईआरजीसी के साथ बेहद मजबूत हैं और वे उसके क्षेत्रीय नेटवर्क का हिस्सा हैं।
ये समूह मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना और उसके सहयोगियों पर लगातार हमले करते रहे हैं। इन हवाई हमलों के कुछ ही घंटे बाद ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की घोषणा कर दी गई। आईआरजीसी की एयरोस्पेस फ़ोर्स ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी एयर बेस और सेंटकॉम मुख्यालय पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है।
बुधवार तड़के जारी बयान में आईआरजीसी ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सेना के आक्रामक रुख का करारा जवाब है। आईआरजीसी ने कहा कि उसके जांबाज सैनिकों ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को मिसाइलों से निशाना बनाया है। जब तक ईरान के खिलाफ अमेरिका की धमकियां और गैर-कानूनी गतिविधियां बंद नहीं होंगी, तब तक उनका यह प्रतिरोध जारी रहेगा।
रूस की मुख्य सुरक्षा एजेंसी ‘फेडरल सिक्योरिटी सर्विस’ (FSS) ने मैसेजिंग एप टेलीग्राम के फाउंडर पावेल दुरोव के खिलाफ ‘आतंकवाद को बढ़ावा देने’ के आरोप तय किए हैं। इसके साथ ही रूस ने उन्हें इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में भी डाल दिया है। FSS ने आरोप लगाया है कि टेलीग्राम का एडमिनिस्ट्रेशन उन चैनल्स, चैट्स और बोट्स को हटाने में नाकाम रहा है, जिनका इस्तेमाल यूक्रेनी इंटेलिजेंस एजेंसियां और चरमपंथी संगठन रूस में तोड़फोड़, साइबर फ्रॉड और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद टेलीग्राम प्रशासन ने इन्हें हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पावेल दुरोव पर नया केस दर्ज होने के बाद अब रूस में टेलीग्राम के भविष्य और इसकी सेवाओं पर पूरी तरह बैन लगने की आशंका बढ़ गई है। इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में नाम शामिल FSS ने कानूनी कार्रवाई करते हुए पावेल दुरोव को अंतरराष्ट्रीय भगोड़ा घोषित किया है। उनका नाम इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में डाल दिया गया है। पावेल दुरोव का जन्म रूस में ही हुआ था, लेकिन वे लंबे समय से देश से बाहर रह रहे हैं। उन्होंने 2021 में फ्रांस की नागरिकता हासिल की थी और इस समय वे दुबई से अपनी कंपनी और एप का संचालन कर रहे हैं। टेलीग्राम पर पहले से पाबंदियां, फिर भी लोकप्रिय रूस में टेलीग्राम सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग एप्स में से एक है। रूसी सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एप पर पहले ही कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसके बावजूद आम लोगों से लेकर सरकारी और मिलिट्री से जुड़े लोग भी इस एप का उपयोग करते हैं। नॉलेज बॉक्स क्या है फेडरल सिक्योरिटी सर्विस? FSS रूस की मुख्य आंतरिक सुरक्षा और खुफिया एजेंसी है। यह पूर्ववर्ती सोवियत संघ की एजेंसी KGB की उत्तराधिकारी मानी जाती है। इसका मुख्य काम देश के भीतर आतंकवाद रोकना, सीमाओं की सुरक्षा करना और साइबर सुरक्षा की निगरानी करना है। कौन हैं पावेल दुरोव? 1984 में रूस में जन्मे दुरोव को ‘रूस का मार्क जुकरबर्ग’ कहा जाता है। उन्होंने टेलीग्राम से पहले रूस का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म VK बनाया था। डेटा प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर रूसी सरकार से हुए विवाद के बाद उन्होंने 2014 में रूस छोड़ दिया था।
NEET-UG Paper Leak: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में अब तक का सबसे मजबूत सबूत दिल्ली की एक अदालत में पेश किया गया है। दरअसल, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने अदालत को बताया कि लातूर के कोचिंग ऑपरेटर शिवराज मोटेगांवकर के मोबाइल फोन से मिले हाथ से लिखे 136 सवालों में से 111 सवाल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के मास्टर क्वेश्चन पेपर से मेल खाते हैं। जिससे इस दावे को और मजबूती मिलती है कि परीक्षा का पेपर टेस्ट से पहले ही लीक हो गया था।
बता दें कि शिवराज मोटेगांवकर महाराष्ट्र के लातूर में ‘रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस’ (RCC) नाम का कोचिंग इंस्टीट्यूट और ‘मोटेगांवकर सर की RCC’ नाम का यूट्यूब चैनल चलाते हैं, जिसके 1.6 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।
CBI ने लगाया आरोप
CBI का आरोप है कि मोटेगांवकर को 3 मई को होने वाली NEET-UG परीक्षा से कुछ दिन पहले, 23 अप्रैल को लीक हुए सवाल मिले थे। एजेंसी के मुताबिक, यह सब एक कथित चेन के जरिए हुआ जिसमें लातूर के बच्चों के डॉक्टर (पीडियाट्रिशियन) डॉ. मनोज शिरुरे और केमिस्ट्री के रिटायर्ड लेक्चरर व NTA पैनल के पूर्व सदस्य PV कुलकर्णी शामिल थे।
CBI का दावा है कि कुलकर्णी के पास कथित तौर पर प्रश्न पत्रों तक पहुंच थी और इन्हीं के जरिए सवाल बाहर आए। जांच एजेंसी के अनुसार, यह पेपर लीक 5 लाख रुपये के बदले किया गया था।
फिलहाल, इस मामले में मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया गया है और ये आरोप CBI की उन दलीलों का हिस्सा हैं जो कोर्ट में उनकी जमानत का विरोध करते हुए पेश की गई हैं।
CBI ने यह भी कहा है कि लीक हुए प्रश्न पत्र की PDF कॉपी टेलीग्राम के जरिए कथित तौर पर 10 लाख रुपये में बेची गई थी। जांचकर्ताओं ने दावा किया कि परीक्षा से कुछ हफ्ते पहले कुछ अभ्यर्थियों के बीच 150 पेज का “गेस पेपर” भी बांटा गया था, जिसमें 410 सवाल थे। इनमें से लगभग 120 सवाल परीक्षा के केमिस्ट्री सेक्शन के सवालों से मेल खाते पाए गए, जिससे पता चलता है कि उम्मीदवारों के पास पेपर का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही मौजूद था।
जांच महाराष्ट्र तक कैसे पहुंची
महाराष्ट्र से जुड़ा मामला तब सामने आया जब जांच करने वालों ने परीक्षा से पहले सामने आए तथाकथित “गेस पेपर” के सर्कुलेशन की जांच शुरू की।
शुरुआती जांच में पता चला था कि सर्कुलेट किए गए मटीरियल में 100 से ज्यादा सवाल असली NEET-UG पेपर से मेल खाते थे, जिसके बाद अधिकारियों ने राजस्थान और उत्तराखंड से आगे बढ़कर जांच का दायरा बढ़ाया। इसके बाद जांच महाराष्ट्र तक फैल गई, जहां जांच करने वालों ने लातूर के ट्यूटर और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की कथित भूमिका की जांच की।
NEET पेपर लीक विवाद कब शुरू हुआ?
बता दें कि NEET पेपर लीक विवाद तब शुरू हुआ, जब राजस्थान में छात्रों के बीच घूम रहे एक कथित “गेस पेपर” (अनुमानित प्रश्न-पत्र) और असली प्रश्न-पत्र में बहुत ज्यादा समानता पाई गई। बाद में जांचकर्ताओं को पता चला कि 100 से ज्यादा सवाल एक जैसे थे, जिसके बाद राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, जांचकर्ताओं को एक संगठित नेटवर्क का पता चला जिसमें राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में फैले प्रश्न-पत्र तैयार करने वाले, बिचौलिए, कोचिंग चलाने वाले और उम्मीदवार शामिल थे। इसके बाद मामला CBI को सौंप दिया गया।
इस कथित लीक के कारण नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को 3 मई की परीक्षा रद्द करनी पड़ी और 21 जून को देश भर में दोबारा परीक्षा कराने का आदेश देना पड़ा, जिससे 20 लाख से ज्यादा उम्मीदवार प्रभावित हुए।
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Instagram Ad Row: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ‘पेड’ विज्ञापनों में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े वीडियो और अन्य विवादित कंटेंट को लेकर मेटा (Meta) को कड़े शब्दों में नोटिस जारी किया है। सूत्रों ने कहा कि सरकार ने यह नोटिस शनिवार 4 जुलाई की शाम को जारी किया। इस नोटिस में दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंपनी को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले इंस्टाग्राम विज्ञापनों को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि मेटा, इंस्टाग्राम और फेसबुक की पैरेंट कंपनी है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापन और कंटेंट, जो बच्चों के यौन शोषण संबंधी कंटेंट तक पहुंच उपलब्ध कराते हैं या उसे बढ़ावा देते हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए। साथ ही कंपनी से 7 दिनों के भीतर डिटेल्स जवाब भी मांगा गया है। सूत्रों ने पीटीआई को बताया, “इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्टाग्राम को उन सभी विज्ञापनों और सामाग्रियों को हटाने का आदेश दिया है जो बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार को बढ़ावा देते हैं या उन तक पहुंच आसान बनाते हैं।”
क्या है आरोप?
यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देश के एक दिन बाद उठाया गया है। इसमें उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों से मेटा को तलब करने को कहा था। यह मामला इंस्टाग्राम विज्ञापनों से जुड़ा है, जिन पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने का आरोप है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय ने मेटा को भेजे नोटिस में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के विज्ञापनों के आरोपों पर स्पष्टीकरण और मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
7 दिन में देना होगा जवाब
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा से सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा है। कैलिफोर्निया मुख्यालय वाली दिग्गज टेक कंपनी मेटा के पास फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का स्वामित्व है। मंत्रालय का यह ताजा कदम BBC की एक रिपोर्ट के बाद आया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि मेटा का ‘रिकमेंडेशन एल्गोरिदम’ बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट वाले वीडियो को बढ़ावा दे रहा था। इससे सुरक्षा उपायों में गंभीर कमियां उजागर हुईं।
BBC की जांच में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इस तरह के विज्ञापन भी देखे गए। जबकि मेटा की विज्ञापन नीतियां स्पष्ट रूप से अश्लील कंटेंट पर रोक लगाती हैं। यह आरोप है कि इंस्टाग्राम ने ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों वाले ‘पेड’ विज्ञापन दिखाए। ये यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर ले जाते थे, जहां कथित तौर पर ऐसा कंटेंट बेचा जा रहा था।
सरकार क्या चाहती है?
मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के अनुसार, सरकार यह जानना चाहेगी कि ऐसे विज्ञापनों को कैसे मंजूरी दी गई आरोपों के सामने आने के बाद मेटा ने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। साथ ही कंपनी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वह क्या सुरक्षा उपाय करने की योजना बना रही है। सूत्रों ने कहा कि अगर आरोप बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले ‘पेड’ विज्ञापनों से संबंधित हैं, तो एक मध्यस्थ होने के बावजूद मेटा किसी तीसरे पक्ष के कंटेंट के तर्क या बचाव का सहारा नहीं ले सकती।
सूत्रों में से एक ने कहा, “अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो उन्हें उन विज्ञापनों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा जिनसे प्लेटफॉर्म को रेवेन्यू मिलता है।” उसने कहा कि जहां मंत्रालय मामले के तकनीकी और नियामक पहलुओं की समीक्षा करेगा। वहीं, अगर किसी एजेंसी, प्राधिकरण या व्यक्ति को लगता है कि कानून के तहत अपराध हुआ है, तो वे विज्ञापनदाता या प्लेटफॉर्म के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
सरकार ने ‘बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई
भारत सरकार ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट के मामले में ‘बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई है। इसके तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को ऐसे कंटेंट का तुरंत पता लगाने, उसे हटाने और उसकी रिपोर्ट करने के साथ-साथ डिजिटल परिवेश में बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत उपाय करने की जरूरत है। सरकार ने समय-समय पर उन वेबसाइट को भी ब्लॉक किया है जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट होते हैं। यह कार्रवाई इंटरपोल से मिली लिस्ट के आधार पर की गई है, जो भारत की नेशनल नोडल एजेंसी CBI को मिलती है।
Meta पर बढ़ा दबाव
सरकार के इस नोटिस के बाद Meta पर अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को और मजबूत करने का दबाव बढ़ गया है। यदि कंपनी तय समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं देती या निर्देशों का पालन नहीं करती, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
क्या है CSEAM?
Child Sexual Exploitation and Abuse Material (CSEAM) वह अवैध कंटेंट होता है। इनमें बच्चों के यौन शोषण या उत्पीड़न से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो या अन्य डिजिटल कंटेंट शामिल होते हैं। भारत में ऐसे कंटेंट का निर्माण, प्रसार, प्रचार या शेयर करना गंभीर अपराध है। केंद्र सरकार ने साफ संकेत दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार चाहती है कि सभी डिजिटल कंपनियां अपनी जिम्मेदारी निभाएं। ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करें।
मेटा को दूसरी बार भेजा गया है नोटिस
इस सप्ताह दूसरी बार मेटा जांच के दायरे में आया है। इससे पहले बुधवार को भारत सरकार ने मेटा को एक नोटिस जारी करके व्हाट्सऐप पर प्रस्तावित ‘यूजरनेम फीचर’ के बारे में सवाल पूछा था। सरकार को चिंता है कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, ‘फिशिंग’ डिजिटल अरेस्ट घोटाला और किसी और का रूप धारण किए जाने वाले हमले काफी बढ़ सकते हैं।
सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार की संतुष्टि के अनुसार बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को रोक दिया जाए। सूत्रों का कहना है कि व्हाट्सऐप ‘यूजरनेम फीचर’ को पेश करने में देरी करेगा।
विकसित देशों में जन्मदर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। बहुत से लोग कहते हैं कि वे एक बच्चे का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं। वहीं, एक छोटा-सा वर्ग अति धनी लोगों का है, जो तकनीक और लगभग असीम संसाधनों के दम पर ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों में कहीं स्पर्म डोनेशन से 100 से ज्यादा बच्चे, कहीं 200 बच्चों की इच्छा तो कहीं 300 बच्चे पैदा करने के दावे सामने आए हैं। इस ट्रेंड को ‘किडमैक्सिंग’ कहा जा रहा है। यानी बच्चों की संख्या का ही ताकत, विरासत, प्रभाव और भविष्य पर कब्जे का प्रतीक बन जाना। यह कहानी असमानता का सबसे ठोस रूप भी दिखाती है। एक ओर लोग आईवीएफ के लिए कर्ज लेते हैं। दूसरी तरफ अरबपति दो करोड़ रु. या इससे ज्यादा खर्च कर सरोगेसी और डोनर एग्स से ‘ऑर्डर’ की तरह बच्चे बनवा रहे हैं। इसमें सबसे चर्चित नामों में इलॉन मस्क हैं। उनके 14 बच्चे हैं। टेलीग्राम के संस्थापक पावेल डुरोव का दावा है कि उनके स्पर्म डोनेशन से 100 से ज्यादा बच्चे पैदा हुए हैं। अमेरिकी बीमा उद्योगपति ग्रेग लिंडबर्ग ने ‘बेबी प्रोजेक्ट’ चलाया। इसमें मॉडल्स को धोखे से एग डोनेशन के लिए फंसाने के आरोप भी लगे। उनके 12 बच्चों की बात सामने आई है। वहीं, यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने एक समय अपने डीएनए को ‘फैलाने’ की सनक तक जाहिर की थी। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की आर्ली रसेल कहती हैं, ‘अरबपति एक साथ कई सरोगेट्स के जरिए ‘बैच’ में बच्चे पैदा करवा सकते हैं। आईवीएफ तकनीक अब सिर्फ संतान पाने का जरिया नहीं है। यह लिंग चयन, बीमारी और कुछ जीन संबंधी गुणों को चुनने का औजार बन चुकी है। इसका खर्च अरबपति ही उठा सकते हैं।’ मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि जैसे पुराने समय के राजा अपनी वंशावली को शक्ति का स्रोत मानते थे, वैसे ही आज के कुछ टेक-किंग्स अपने खून को भविष्य की पूंजी मान रहे हैं। फर्क बस इतना है कि अब तलवार की जगह तकनीक है। नतीजा: ‘परिवार’ की भावना और सोच ही खतरे में पड़ी अमेरिकी लेखिका अन्ना लोई सुसमैन के अनुसार, अरबपतियों की इस सनक की शिकार कुछ महिलाएं और बच्चे हैं। सरोगेट माताओं के शोषण, सहमति उल्लंघन, बच्चों की देखभाल पर सवाल उठे हैं। कई मामलों में बच्चे ननों के भरोसे, दूसरे देशों में पले-बढ़े, जबकि पिता के लिए वे सिर्फ आंकड़े बनकर रह गए। समाजशास्त्री इवा इलूज चेतावनी देती हैं, ‘अगर इस पर सख्ती और नैतिक चर्चा नहीं हुई, तो परिवार की नींव ही हिल जाएगी।’
Sharmila Tagore: दिग्गज एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर और क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी मंसूर अली खान पटौदी की शादी 43 साल तक चली, जिसके बाद 2011 में मंसूर का निधन हो गया। हाल ही में हुई एक बातचीत में शर्मिला ने अपनी शादी के बारे में बात की और बताया कि शादी के बंधन में बंधने से पहले एक दूसरे को जानने के लिए वे साथ रहते थे।
‘मोजो स्टोरी’ पर पत्रकार बरखा दत्त से बात करते हुए शर्मिला ने कहा, “शादी से पहले हम साथ रहते थे क्योंकि यह ज़्यादा सुविधाजनक था। टाइगर अक्सर नहाने के लिए ‘क्रिकेट क्लब ऑफ़ इंडिया’ जाते थे, क्योंकि मैं घर ठीक से नहीं संभाल पाती थी। घर में कोई भी चीज ठीक से काम नहीं करती थी। मैं घर संभालने में बहुत खराब थी। मैंने समय के साथ यह सब सीखा है। अब मुझे अपना घर बहुत पसंद है और मैं उसका बहुत ध्यान रखती हूं।”
कुछ समय तक साथ रहने के बाद शर्मिला और पटौदी ने शादी कर ली, लेकिन उन्हें लोगों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। अलग-अलग धर्मों की वजह से उनकी शादी को लेकर काफी नकारात्मक बातें हुईं और लोगों ने तरह-तरह की राय बनाई। इस बारे में बात करते हुए शर्मिला ने बताया कि फिल्ममेकर यश चोपड़ा ने भी चिंता जताई थी।
एक्ट्रेस ने कहा कि “हमें इसका ज़्यादा असर महसूस नहीं हुआ क्योंकि मैं काम कर रही थी और टाइगर क्रिकेट खेल रहे थे। लेकिन मेरे माता-पिता और टाइगर की मां को दबाव महसूस हुआ क्योंकि बहुत कुछ कहा जा रहा था। मीडिया को लग रहा था कि हमारी शादी 15 महीने से ज़्यादा नहीं चलेगी। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि यह शादी बुरी तरह नाकाम रहेगी। यश चोपड़ा ने मुझसे कहा था, ‘ये नवाब लोग बहुत शक करने वाले होते हैं, इसलिए तुम्हें बहुत सावधान रहना होगा।’ वे अच्छे दोस्त थे और सच में मेरी चिंता करते थे।”
शर्मिला ने यह भी बताया कि उनकी शादी की तैयारियों के दौरान उन्हें धमकियां मिली थीं। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता को टेलीग्राम मिले थे, जिनमें लिखा था, ‘गोलियां चलेंगी।’ उन्होंने आगे बताया कि सुरक्षा कारणों से आखिरी समय में उनकी शादी की जगह बदलनी पड़ी थी।
शर्मिला और मंसूर 1960 के दशक में कॉमन दोस्तों के ज़रिए मिले थे। एक-दूसरे को डेट करने के दौरान, मंसूर ने शर्मिला को लंदन से एयर कंडीशनर और गुलाब भेजे थे, जो काफी मशहूर हुआ था। शर्मिला ने 2023 में ‘द कपिल शर्मा शो’ पर अपनी लव स्टोरी के बारे में बात की थी।
उन्होंने कहा, “उनका सेंस ऑफ़ ह्यूमर बहुत अलग था। वे अपने ही जोक्स पर हंसते थे क्योंकि हमें वे समझ नहीं आते थे। मुझे लगता है कि जब मेरे बच्चे यह सुनेंगे तो वे मुझे मार डालेंगे। यह सब क्या हो रहा है… पापा के बारे में तुम क्या कह रही हो? यह पहली नज़र का प्यार नहीं था। लेकिन यह प्यार था। मुझे बस यह महसूस हुआ कि वे कभी जान-बूझकर मुझे दुख नहीं पहुंचाएंगे। मुझे लगा कि मैं उन पर भरोसा कर सकती हूं। यही आधार था। क्या यही सबसे ज़रूरी बात नहीं है?”
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