एक लोकेशन ने खड़ा कर दिया विवाद! गुरुग्राम में Rapido राइड का वीडियो वायरल

गुरुग्राम में Rapido राइड के बाद यात्री और बाइक राइडर के बीच हुआ विवाद अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। वायरल वीडियो में महिला यात्री और राइडर के बीच ड्रॉप लोकेशन को लेकर बहस होती दिखाई दे रही है। महिला का आरोप है कि उसे तय जगह पर नहीं छोड़ा गया, जबकि राइडर का कहना है कि उसने ऐप में दिख रही लोकेशन के अनुसार ही ट्रिप पूरी की। इस घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं में सही लोकेशन पिन, यात्री की सुविधा और राइडर की जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भी इस मामले पर अपनी अलग-अलग राय दे रहे हैं और यह बहस तेज हो गई है कि ऐसी स्थिति में गलती आखिर किसकी मानी जाए।

ड्रॉप पॉइंट को लेकर शुरू हुआ विवाद

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला यात्री राइडर पर आरोप लगाती है कि उसे गलत जगह उतारा गया। महिला का कहना था कि उसकी असली मंजिल परिसर के अंदर थी, लेकिन राइडर उसे बेसमेंट के रास्ते ले जाकर किसी दूसरी जगह छोड़ गया। गुस्से में महिला ने सवाल किया कि जब उसे सही जगह जाना था तो राइडर वहां तक क्यों नहीं पहुंचा।

राइडर ने दी अपनी सफाई

वहीं Rapido राइडर ने अपनी गलती मानने से इनकार करते हुए कहा कि उसने वही किया जो ऐप में लोकेशन दिखाई गई थी। उसका कहना था कि उसने स्क्रीन पर दिख रहे डेस्टिनेशन के हिसाब से ही यात्री को वहां छोड़ा। राइडर ने सफाई देते हुए कहा कि वह ऐप की बताई हुई लोकेशन को फॉलो कर रहा था और उसी के आधार पर ट्रिप पूरी की।

वीडियो बनाने वाला शख्स भी बहस में कूदा

इस दौरान एक अन्य व्यक्ति वीडियो रिकॉर्ड करता हुआ नजर आया, जिसने बीच में आकर महिला से किराया देने के लिए कहा। उसकी बार-बार दखलअंदाजी से माहौल और तनावपूर्ण हो गया। महिला ने उसे बीच में बोलने से रोकने की कोशिश की, लेकिन बहस लगातार बढ़ती चली गई।

आखिर में महिला ने किया पेमेंट

काफी देर तक चली बहस के बाद महिला ने अपना फोन निकाला और Rapido राइडर के QR कोड को स्कैन कर किराया चुका दिया। हालांकि, पेमेंट करने के बाद भी उसने राइडर और वीडियो बना रहे व्यक्ति से अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद महिला वहां से चली गई, लेकिन यह मामला सोशल मीडिया पर ऐप की लोकेशन और राइडर की जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ गया है।

सोशल मीडिया पर लोग दे रहे अलग-अलग राय

वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोग राइडर के पक्ष में नजर आए और बोले कि अगर ऐप में गलत लोकेशन पिन थी तो पूरी जिम्मेदारी राइडर की नहीं हो सकती। वहीं कुछ यूजर्स का मानना है कि राइडर को यात्री से पुष्टि करके ही अंतिम ड्रॉप करना चाहिए था।

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Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल के नए रेट लागू, देखें आपके शहर में क्या है भाव

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 29 जुलाई 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को चीन से मिला ‌₹6,000 ‌करोड़ का फंड:अमेरिका विदेशी फंडिंग पर उठा सवाल, जांच शुरू करने की मांग

अमेरिका में यूनिवर्सिटीज को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर सवालों के बीच नया खुलासा हुआ है। इससे यूनिवर्सिटीज और ट्रम्प प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। शिक्षा विभाग के पोर्टल के मुताबिक, हार्वर्ड को विदेशी स्रोतों से रिकॉर्ड 43,100 करोड़ रु. मिले हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें से छह हजार करोड़ चीन से आए हैं। ट्रम्प प्रशासन की वीसा नीतियों और प्रवासियों पर सख्ती के बीच अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर विदेशी नागरिकों और पैसे पर अत्यधिक निर्भरता का आरोप लग रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौते की बात कही जा रही है। ट्रम्प प्रशासन से जांच शुरू करने की मांग उठी है। अन्य अमेरिकी यूनिवर्सिटीज भी राडार पर यह विवाद सिर्फ हार्वर्ड तक सीमित नहीं है। अमेरिका के वॉच-लिस्ट में शामिल शीर्ष पांच चीनी कंपनियों (जैसे हुआवेई और एयर चाइना) ने देश के अलग-अलग कॉलेजों को करीब 1,140 करोड़ रु. दिए हैं। इन्हें भी राडार पर लेकर जांच हो सकती है। लैब की जासूसी और सैन्य तकनीक चोरी का खतरा अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आ रहा विदेशी पैसा सिर्फ दान नहीं, बल्कि रणनीतिक घुसपैठ का जरिया बन चुका है। फंड के इस खेल से अमेरिका के सामने कई बड़े खतरे खड़े हो गए हैं। यूनिवर्सिटी लैब्स में विदेशी फंड के जरिए गोपनीय रिसर्च और डेटा चुराए जाने की आशंका जताई जा रही है। आरोप हैं कि चीनी सेना से जुड़ी संस्थाएं फंडिंग देकर अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल अपने हथियारों को तैयार करने में कर सकती हैं। हार्वर्ड और विदेशी संस्थाओं में 7,089 वित्तीय सौदे हुए हार्वर्ड ने विदेशी संस्थाओं के साथ 7,089 अलग-अलग वित्तीय सौदे किए हैं। इस रिकॉर्ड वित्तीय सौदे के कारण हार्वर्ड अमेरिका में विदेशी फंडिंग हासिल करने वाला शीर्ष संस्थान बना है। हार्वर्ड को चीनी सैन्य विकास से जुड़ी संस्थाओं से करीब 4 करोड़ रुपए और विदेशी टैलेंट प्रोग्राम से 4 करोड़ रु. मिले हैं। ट्रम्प ने कहा था- यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निशाने पर रहती है। पिछले साल (16 अप्रैल, 205) उन्होंने एक बयान में कहा था कि यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है और यह सिर्फ वोक कर्मचारियों की भर्ती कर रहा है। अब हार्वर्ड को दुनिया की सबसे बेहतर यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की किसी भी लिस्ट में नहीं गिना जाना चाहिए। हार्वर्ड एक मजाक है जो नफरत और मूर्खता सिखाता है। इसे अब सरकारी पैसा नहीं मिलना चाहिए। ट्रम्प ने इस बयान के एक दिन पहले ही हार्वर्ड की 18 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग रोकी थी और उसका टैक्स फ्री दर्जा खत्म करने की बात कही थी। ————-
ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की टैक्स छूट खत्म कर सकते हैं:₹18 हजार करोड़ की फंडिंग भी रोकी; ट्रम्प यूनिवर्सिटी पर कंट्रोल चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्स छूट खत्म करने की बात कही। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्ट छूट पर फिर से विचार किया जा सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को चीन से मिला ‌₹6,000 ‌करोड़ का फंड:अमेरिका विदेशी फंडिंग पर उठा सवाल, जांच शुरू करने की मांग

अमेरिका में यूनिवर्सिटीज को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर सवालों के बीच नया खुलासा हुआ है। इससे यूनिवर्सिटीज और ट्रम्प प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। शिक्षा विभाग के पोर्टल के मुताबिक, हार्वर्ड को विदेशी स्रोतों से रिकॉर्ड 43,100 करोड़ रु. मिले हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें से छह हजार करोड़ चीन से आए हैं। ट्रम्प प्रशासन की वीसा नीतियों और प्रवासियों पर सख्ती के बीच अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर विदेशी नागरिकों और पैसे पर अत्यधिक निर्भरता का आरोप लग रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौते की बात कही जा रही है। ट्रम्प प्रशासन से जांच शुरू करने की मांग उठी है। अन्य अमेरिकी यूनिवर्सिटीज भी राडार पर यह विवाद सिर्फ हार्वर्ड तक सीमित नहीं है। अमेरिका के वॉच-लिस्ट में शामिल शीर्ष पांच चीनी कंपनियों (जैसे हुआवेई और एयर चाइना) ने देश के अलग-अलग कॉलेजों को करीब 1,140 करोड़ रु. दिए हैं। इन्हें भी राडार पर लेकर जांच हो सकती है। लैब की जासूसी और सैन्य तकनीक चोरी का खतरा अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आ रहा विदेशी पैसा सिर्फ दान नहीं, बल्कि रणनीतिक घुसपैठ का जरिया बन चुका है। फंड के इस खेल से अमेरिका के सामने कई बड़े खतरे खड़े हो गए हैं। यूनिवर्सिटी लैब्स में विदेशी फंड के जरिए गोपनीय रिसर्च और डेटा चुराए जाने की आशंका जताई जा रही है। आरोप हैं कि चीनी सेना से जुड़ी संस्थाएं फंडिंग देकर अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल अपने हथियारों को तैयार करने में कर सकती हैं। हार्वर्ड और विदेशी संस्थाओं में 7,089 वित्तीय सौदे हुए हार्वर्ड ने विदेशी संस्थाओं के साथ 7,089 अलग-अलग वित्तीय सौदे किए हैं। इस रिकॉर्ड वित्तीय सौदे के कारण हार्वर्ड अमेरिका में विदेशी फंडिंग हासिल करने वाला शीर्ष संस्थान बना है। हार्वर्ड को चीनी सैन्य विकास से जुड़ी संस्थाओं से करीब 4 करोड़ रुपए और विदेशी टैलेंट प्रोग्राम से 4 करोड़ रु. मिले हैं। ट्रम्प ने कहा था- यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निशाने पर रहती है। पिछले साल (16 अप्रैल, 205) उन्होंने एक बयान में कहा था कि यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है और यह सिर्फ वोक कर्मचारियों की भर्ती कर रहा है। अब हार्वर्ड को दुनिया की सबसे बेहतर यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की किसी भी लिस्ट में नहीं गिना जाना चाहिए। हार्वर्ड एक मजाक है जो नफरत और मूर्खता सिखाता है। इसे अब सरकारी पैसा नहीं मिलना चाहिए। ट्रम्प ने इस बयान के एक दिन पहले ही हार्वर्ड की 18 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग रोकी थी और उसका टैक्स फ्री दर्जा खत्म करने की बात कही थी। ————-
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1 अगस्त को आ रहा पोर्टल, महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने वाली दिल्ली लक्ष्मी योजना की पूरी टाइमलाइन

Lakshmi Yojana scheme: दिल्ली सरकार ने मंगलवार को महिलाओं को वित्तीय सहायता देने वाली अपनी महत्वाकांक्षी दिल्ली लक्ष्मी योजना को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को हरी झंडी दिखाई गई। इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार इस योजना का पोर्टल 1 अगस्त को लॉन्च करने जा रही है और रक्षाबंधन तक पहली किस्त जारी करने की तैयारी में है।

दिल्ली लक्ष्मी योजना की पूरी टाइमलाइन

28 जुलाई 2026: दिल्ली कैबिनेट और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा योजना को मंजूरी।

1 अगस्त 2026: योजना के लिए समर्पित आधिकारिक पोर्टल लॉन्च किया जाएगा, जहां आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

आवेदन व सत्यापन: पोर्टल लॉन्च होने के बाद प्राप्त आवेदनों का वेरिफिकेशन किया जाएगा।

रक्षाबंधन: सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार को उम्मीद है कि रक्षाबंधन तक लाभार्थियों के खातों में योजना की पहली किस्त जारी कर दी जाएगी।

2500 रुपये का गणित: कैसे मिलेंगे पैसे?

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक इस योजना के तहत मिलने वाले 2500 रुपये को दो हिस्सों में बांटा गया है। हर महीने 1000 रुपये महिलाओं को खाते में सीधे ट्रांसफर किए जाएंगे। बाकी बचे 1500 रुपये हर महीने एक रिकरिंग डिपॉजिट (RD) खाते में जमा किए जाएंगे।

3 साल का लॉक-इन पीरियड

आरडी खाते में जमा होने वाले 1500 रुपये 3 सालों के लिए लॉक रहेंगे। 3 साल का समय पूरा होने के बाद, जमा हुआ पूरा पैसा और उस पर मिला ब्याज सीधे महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। महिलाओं में बचत को बढ़ावा देने और उनके लिए फाइनेंशियल सिक्यॉरिटी तैयार करने के उद्देश्य से इस सेविंग्स कंपोनेंट को जोड़ा गया है।

इस योजना के लिए क्या हैं पात्रता के नियम?

योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा जो यहां नीचे दी गई पात्रताओं को पूरा करती हैं-

  • दिल्ली की 10 साल की निवासी: आवेदक को कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली का निवासी होना अनिवार्य है।
  • उम्र सीमा: परिवार की 21 से 60 वर्ष की आयु के बीच की महिलाएं ही पात्र होंगी।
  • परिवार से सिर्फ एक महिला: हर परिवार से सिर्फ एक महिला को लाभ मिलेगा। अगर किसी परिवार में एक से अधिक पात्र महिलाएं हैं, तो परिवार की सबसे बड़ी महिला को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • आय सीमा: परिवार की कुल वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
  • कोई पेंशन न मिलती हो: आवेदक को पहले से कोई अन्य सरकारी पेंशन न मिल रही हो।
  • कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो: आवेदक का स्वयं का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए।

कौन-कौन सी महिलाएं होंगी योजना से बाहर?

  1. सरकारी कर्मचारी।
  2. इनकम टैक्स पेयर्स (करदाता)।
  3. पेंशनर्स (पेंशन पाने वाली महिलाएं)।
  4. जिन महिलाओं या उनके परिवार के पास चार पहिया वाहन है।
  5. जिन महिलाओं के परिवार में किसी भी सदस्य का आपराधिक रिकॉर्ड है।

योजना के लिए जरूरी डॉक्युमेंट्स

आवेदकों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए नीचे दिए गए दस्तावेज जमा करने होंगे:

  • आधार कार्ड
  • वोटर आईडी कार्ड
  • परिवार के सदस्यों के दस्तावेज
  • सेल्फ-डिक्लेरेशन (Self-Declaration): इसमें आवेदक को यह शपथ पत्र देना होगा कि वे कम से कम 10 सालों से दिल्ली में रह रही हैं और उनके या उनके परिवार पर कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है।

5110 करोड़ रुपये का बजट आवंटन

दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ के सुचारू क्रियान्वयन और संचालन के लिए लगभग 5110 करोड़ रुपये का बड़ा बजट निर्धारित किया है।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए कितना फंड है पर्याप्त? एक्सपर्ट विवेक जैन से जानिए सही फॉर्मूला

Retirement Planning Guide: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय हर इंसान का लक्ष्य अलग होता है। कोई रिटायरमेंट के लिए एक फिक्स्ड रकम तय करना चाहता है, तो कोई किसी खास वित्तीय पड़ाव को हासिल करने के बाद नौकरी छोड़ना चाहता है। लेकिन सवाल यह है कि रिटायरमेंट के लिए कितना फंड या कॉर्पस काफी है?

पॉलिसीबाजार के लाइफ इंश्योरेंस चीफ बिजनेस ऑफिसर विवेक जैन के मुताबिक, रिटायरमेंट कॉर्पस का कोई एक फिक्स्ड स्टैंडर्ड नहीं हो सकता। यह आपकी जीवनशैली, रिटायरमेंट की उम्र, लाइफ एक्सपेक्टेंसी, महंगाई दर और हेल्थकेयर के खर्चों पर निर्भर करता है।

भारत में क्यों तेजी से बदल रहा है रिटायरमेंट का गणित?

यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (UNFPA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए विवेक जैन बताते हैं कि साल 2050 तक भारत में लगभग हर 5 में से 1 व्यक्ति 60 साल से अधिक उम्र का होगा। आज लोग ज्यादा लंबा जीवन जी रहे हैं और कई लोग जल्दी रिटायर होना चाहते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि आपका रिटायरमेंट का दौर पहले की तुलना में ज्यादा लंबा होगा। इसके लिए ऐसे फंड की जरूरत है जो लंबी अवधि तक महंगाई और मेडिकल खर्चों का मुकाबला कर सके।

सिर्फ ₹5,000 महीना निवेश से बन सकता है ₹3.25 करोड़ का फंड

विवेक जैन एक आसान उदाहरण से समझाते हैं कि कैसे जल्दी शुरुआत करने से बड़ा फायदा होता है। अगर कोई 25 साल का युवा हर महीने ₹5,000 का निवेश शुरू करता है और 60 साल की उम्र तक लगातार निवेश बनाए रखता है, तो 12% के अनुमानित सालाना रिटर्न के हिसाब से 60 की उम्र में उसके पास करीब ₹3.25 करोड़ का बड़ा फंड तैयार हो सकता है।

इसमें से 60% हिस्सा एकमुश्त निकाला जा सकता है, जबकि बाकी 40% हिस्से से एनुटी खरीदकर जीवनभर के लिए हर महीने रेगुलर पेंशन पाई जा सकती है।

महंगाई और हेल्थकेयर खर्चों का चक्रव्यूह

रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे बड़ी चुनौती महंगाई है। आज जो खर्च आपको सामान्य लग रहा है, आने वाले 20-30 सालों में वह कई गुना बढ़ जाएगा। इसके अलावा, मेडिकल इंफ्लेशन सामान्य महंगाई से भी तेजी से बढ़ रही है। उम्र बढ़ने के साथ बीमारियों और लंबे इलाज का खर्च बढ़ता है। इसलिए रिटायरमेंट फंड बनाते समय हेल्थकेयर के नियमित खर्चों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

40 की उम्र से पहले ही रिटायरमेंट प्लान कर रहे भारतीय

पॉलिसीबाजार के डेटा का विश्लेषण करते हुए विवेक जैन ने कुछ बेहद दिलचस्प ट्रेंड्स सामने रखे हैं:

युवाओं की हिस्सेदारी: रिटायरमेंट पॉलिसी खरीदने वाले लगभग 60% ग्राहक 40 साल से कम उम्र के हैं। वहीं, 50 साल से ऊपर के केवल 11.6% लोग ही इसे खरीद रहे हैं। यह दिखाता है कि नई पीढ़ी जल्दी वित्तीय आजादी चाहती है।

मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स की पसंद: 98% से अधिक लोग मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स (NPS, रिटायरमेंट ULIPs और पेंशन ULIPs) चुन रहे हैं। लोग अब इक्विटी में लंबी अवधि के लिए निवेश करने से नहीं डरते।

छोटे शहरों का दबदबा: रिटायरमेंट प्लानिंग अब केवल बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है। 75% से ज्यादा रिटायरमेंट पॉलिसियां टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रही हैं।

NRIs का भरोसा: कुल रिटायरमेंट पॉलिसी में करीब 10% हिस्सेदारी एनआरआई (NRIs) की है। इनका औसत निवेश साइज (₹2.25 लाख) भारतीय निवेशकों से 2.5 गुना अधिक है। एनआरआई खरीदारी में सबसे बड़ी 38% हिस्सेदारी गल्फ (खाड़ी देशों) क्षेत्र की है।

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कुल मिलाकर विवेक जैन का कहना है कि रिटायरमेंट प्लानिंग का मकसद सिर्फ सबसे बड़ा कॉर्पस जमा करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा फंड बनाना है जो आपको जिंदगीभर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाए रखे। 50 साल की उम्र के बाद रिटायरमेंट प्लान करने का जमाना अब चला गया है; जितना जल्दी शुरुआत करेंगे, आपका भविष्य उतना ही सुरक्षित रहेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Godfrey Phillips Share Price: सिगरेट की घटती बिक्री पर हाहाकार! जून तिमाही के कमजोर नतीजे ने 8% तोड़ दिया शेयर

Godfrey Phillips Share Price: दिग्गज सिगरेट कंपनी गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों को आज तगड़ा शॉक लगा। जून 2026 तिमाही के कमजोर नतीजे पर यह करीब 8% टूट गया। जून तिमाही में रेवेन्यू, मुनाफे और मार्जिन के मोर्चे पर यह फिसला तो शेयर भी फिसल गए। बिकवाली का दबाव इतना तेज है कि निचले स्तर पर खरीदारी भी शेयरों को संभाल नहीं सका। फिलहाल बीएसई पर यह 7.75% की गिरावट के साथ ₹2,037.95 पर है। इंट्रा-डे में यह 7.93% टूटकर ₹2,034.00 पर आ गया।

Godfrey Phillips के लिए कैसी रही जून तिमाही

चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में गॉडफ्रे फिलिप्स का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 44.3% गिरकर ₹189.4 करोड़ पर आ गया। इस दौरान कंपनी का बिजनेस भी नीचे आया और ऑपरेशंस से रेवेन्यू 18.9% फिसलकर ₹1,205.5 करोड़ पर आ गया। ऑपरेटिंग मोर्चे पर भी कंपनी कमजोर हुई और इसका ईबीआईटीडीए जून तिमाही में सालाना आधार पर 46.3% गिरकर ₹181.4 करोड़ और ईबीआईटीडीए मार्जिन 22.7% से 15.1% पर आ गया। जून तिमाही में कंपनी का सिगरेट वॉल्यूम सालाना आधार पर 2% और तिमाही आधार पर 3% गिर गया।

मैनेजमेंट का कहना है कि कंपनी ने कीमतों में बढ़ोतरी का असर ग्राहकों पर धीरे-धीरे डालने के लिए एक बैलेंस्ड प्राइसिंग स्ट्रैटेजी अपनाई है। इससे पहले जनवरी में सरकार ने सिगरेट और दूसरे तंबाकू प्रोडक्ट्स पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का नोटिफिकेशन जारी किया था। वित्त मंत्रालय ने सिगरेट और बीड़ी समेत सभी तंबाकू प्रोडक्ट्स पर 40% जीएसटी लगाने का नोटिफिकेशन जारी किया था, जो 1 फरवरी 2026 से लागू हुआ। नए टैक्स स्ट्रक्चर में 28% जीएसटी शामिल है, जिसमें पहले की एक्साइज ड्यूटी और नेशनल कैलेमिटी कंटीजेंट ड्यूटी (NCCD) को मिला दिया गया है। यह दिसंबर में सेंट्रल एक्साइज (एमेंडमेंट) बिल, 2025 को सरकार की मंजूरी के बाद आया जिसने सिगरेट और तंबाकू के अन्य प्रोडक्ट्स पर अस्थायी लेवी की जगह ली।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 16 सितंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹3,945.00 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से छह ही महीने में यह 53.54% टूटकर 23 मार्च 2026 को ₹1,832.65 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

Godfrey Phillips Q1 Results: सिगरेट कंपनी का मुनाफा 44% गिरा, डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट का ऐलान

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Godfrey Phillips Q1 Results: सिगरेट कंपनी का मुनाफा 44% गिरा, डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट का ऐलान

Godfrey Phillips Q1 Results: सिगरेट और तंबाकू प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया ने जून तिमाही के कमजोर नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 44.3% घटकर ₹189.39 करोड़ रह गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹356.31 करोड़ था।

वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 18.9% घटकर ₹1,205.5 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹1,486.2 करोड़ था।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन भी कमजोर

जून तिमाही में कंपनी के ऑपरेटिंग प्रदर्शन पर भी दबाव दिखा। EBITDA 46.3% घटकर ₹181.44 करोड़ रह गया। पिछले साल यह ₹337.6 करोड़ था।

वहीं, EBITDA मार्जिन 22.7% से घटकर 15.1% पर आ गया। इससे साफ है कि कंपनी की प्रॉफिटबिलिटी पर दबाव बढ़ा है।

एक्साइज ड्यूटी खर्च आठ गुना बढ़ा

गॉडफ्रे फिलिप्स भारत में Philip Morris International के लाइसेंस के तहत Marlboro सिगरेट बनाती और बेचती है। जून तिमाही में एक्साइज ड्यूटी से जुड़े खर्च करीब आठ गुना बढ़कर ₹3,600 करोड़ हो गए।

हालांकि, कंपनी के सिगरेट, तंबाकू और इससे जुड़े उत्पादों के कारोबार का रेवेन्यू दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹3,780 करोड़ पहुंच गया। यही कंपनी का सबसे बड़ा कारोबार है और कुल रेवेन्यू में इसकी सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है।

सरकार ने 1 फरवरी से सिगरेट पर नई एक्साइज ड्यूटी लागू की थी। सिगरेट की लंबाई के हिसाब से प्रति 1,000 सिगरेट पर ₹2,050 से ₹8,500 तक एक्साइज ड्यूटी लगाई गई। इस टैक्स बढ़ोतरी के बाद देश के करीब 10 करोड़ धूम्रपान करने वाले लोगों के लिए सिगरेट महंगी हो गई।

डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट तय

गॉडफ्रे फिलिप्स के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के फाइनल डिविडेंड के लिए 11 अगस्त 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है।

इस तारीख तक जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, उन्हें फाइनल डिविडेंड का लाभ मिलेगा।

गॉडफ्रे फिलिप्स का शेयर

कमजोर नतीजों से पहले सोमवार को गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया का शेयर 4.03% की बढ़त के साथ ₹2,215.40 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान शेयर में ₹85.80 की तेजी दर्ज की गई।

गॉडफ्रे फिलिप्स का बिजनेस

गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया सिगरेट और तंबाकू उत्पाद बनाने वाली कंपनी है। कंपनी Four Square, Red & White, Cavanders और Stellar जैसे सिगरेट ब्रांड बेचती है। इसके अलावा, यह पान मसाला, कन्फेक्शनरी और रिटेल कारोबार में भी मौजूद है। भारत के तंबाकू उद्योग की प्रमुख कंपनियों में इसका नाम शामिल है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।