नेपाल बॉर्डर तक 4 लेन हाईवे, 3591 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, जानिए मुजफ्फरपुर से सोनबरसा तक क्या बदलेगा

Bihar Highway Project: बिहार में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई पर ले जाने और भारत-नेपाल सीमा तक आवाजाही को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने बुधवार बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन को फोर-लेन मानकों में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 3590.73 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक यह 82.578 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट हाइब्रिड एंनुटी मॉडल से बनाया जाएगा। यह हाईवे भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनबरसा को मुजफ्फरपुर में ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का हिस्सा रहे NH-27 से सीधे जोड़ेगा।

इस हाइवे प्रोजेक्ट से बिहार को क्या फायदा होगा?

इस फोर-लेन हाईवे को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इस पर गाड़ियों की एवरेज स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। इस हाईवे पर बीच में कोई एट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग नहीं होगी। इससे गाड़ियों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार से हो सकेगी। प्रोजेक्ट के पूरा होने से रूट पर पड़ने वाले घनी आबादी वाले कई प्रमुख इलाकों को ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी। इनमें मुजफ्फरपुर, मकसूदपुर, रुन्नीसैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुतही और सोनबरसा शामिल हैं। इस अपग्रेडेड कॉरिडोर से यात्रियों और माल ढुलाई के समय में भारी बचत होगी। साथ ही ईंधन की खपत और वाहनों के रखरखाव पर भी कम खर्च होगा।

पीएम गतिशक्ति से जुड़ेगा नेटवर्क, इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स नोड्स को बूस्ट

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस हाईवे की प्लानिंग पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स नोड्स की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए की गई है। यह कॉरिडोर 5 पीएम गतिशक्ति इकोनॉमिक नोड्स को जोड़ेगा। इनमें चार इंडस्ट्रियल एस्टेट और एक मेगा फूड पार्क शामिल हैं। इसके अलावा यह चार सोशल नोड्स और मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशनों पर स्थित दो लॉजिस्टिक्स नोड्स से भी कनेक्ट होगा। यह नया रूट पहले से मौजूद NH-31 और NH-122 जैसे कॉरिडोर, बरौनी सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों और गंगा नदी के किनारे बने रिवराइन लॉजिस्टिक्स हब्स के साथ कनेक्टिविटी को और बेहतर करेगा।

क्रॉस-बॉर्डर कारोबार को भी मिलेगा पुश

सोनबरसा और पास में भिठ्ठामोड़ में स्थित लैंड पोर्ट के जरिए यह फोर-लेन हाईवे भारत और नेपाल के बीच सीमा पार यात्रियों और कार्गो की आवाजाही को बेहद आसान बनाएगा। इस 82.578 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट में बड़े स्तर पर सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार होंगे। इसपर 7 बड़े पुल होंगे, जिसमें बारहमासी बागमती नदी पर बनने वाला 340 मीटर लंबा एक प्रमुख पुल भी शामिल है। इसके अलावा 3 रेलवे ओवरब्रिज और 2 फ्लाईओवर भी होंगे।

इस नए हाईवे से इलाके की कृषि सप्लाई चेन को बहुत मजबूती मिलेगी। किसान अपनी उपज को तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। यह रूट धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक जाने वाले लोगों के लिए भी काम का साबित होगा। इस कॉरिडोर से बौद्ध सर्किट और सीतामढ़ी में स्थित प्रसिद्ध जानकी पुनौरा धाम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को वर्ल्ड क्लास सड़क कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा।

नेपाल ने भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को दिया बड़ा सम्मान, नेपाली आर्मी, भारत संग रिश्ते को नई ताकत देने की कवायद

भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने नेपाली सेना के जनरल का मानद पद दिया। यह सम्मान काठमांडू के राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में दिया गया। यह सम्मान भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच लंबे समय से चली आ रही खास परंपरा का हिस्सा है। दोनों देशों की सेनाओं के प्रमुखों को एक-दूसरे की सेना में मानद पद देने की परंपरा रही है।

नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने  मानद पद दिया

जनरल धीरज सेठ सोमवार को तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर नेपाल पहुंचे हैं। उनकी यह यात्रा 17 से 19 अगस्त तक है। इसका मकसद भारत और नेपाल के बीच सैन्य संबंधों को और मजबूत करना है। यात्रा के दौरान उन्होंने काठमांडू स्थित नेपाली सेना के मुख्यालय में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने टुंडिखेल के आर्मी पैवेलियन में जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी।

रक्षा मंत्रालय ने जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह अपने नेपाली समकक्ष के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत करेंगे। इसके अलावा, वह नेपाली सेना के सैन्य संचालन महानिदेशक से दोनों देशों के रणनीतिक हित से जुड़े मामलों पर जानकारी लेंगे।

जनरल धीरज सेठ की कहानी

18 अगस्त को जनरल धीरज सेठ शिवपुरी स्थित आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज के अधिकारियों को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह कॉलेज के प्रशिक्षकों और विदेशी अधिकारियों से भी बातचीत करेंगे। इसके अलावा, नेपाल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत-नेपाल के द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। 19 अगस्त को अपनी यात्रा के आखिरी दिन सेना प्रमुख पोखरा जाएंगे। यहां वह पूर्व सैनिकों के एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वह वीर नारियों और वीरता पुरस्कार पाने वाले लोगों को सम्मानित करेंगे। भारत लौटने से पहले वह नेपाल में रहने वाले भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों से भी मुलाकात करेंगे।

भारत-नेपाल के बीच रिश्ते मजबूत

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से मजबूत ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। दोनों देशों के इस रिश्ते को अक्सर ‘रोटी-बेटी का रिश्ता’ कहा जाता है। जनकपुर-अयोध्या और लुंबिनी-बोधगया जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध दोनों देशों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं। भारत और नेपाल लोकतांत्रिक मूल्यों, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को लेकर भी एक जैसी सोच रखते हैं। मंत्रालय के मुताबिक, जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा दोनों देशों की सेनाओं और जनता के बीच पुराने संबंधों को और मजबूत करने का मौका है। इससे भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच सहयोग के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

जनरल धीरज सेठ को परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने अपने सैन्य करियर की शुरुआत नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला से की थी। दिसंबर 1986 में उन्हें आर्म्ड कॉर्प्स में कमीशन मिला था। ईमानदारी, कड़ी मेहनत, निस्वार्थ सेवा और सेना के प्रति समर्पण ने जनरल धीरज सेठ को एक कुशल और अनुभवी सैन्य अधिकारी बनाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपने लंबे सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।

रुद्रनाथ मंदिर क्यों है खास? भगवान शिव की मुखाकृति के दर्शन और मंदिर से जुड़ी अद्भुत मान्यताएं

रुद्रनाथ मंदिर क्यों है खास? भगवान शिव की मुखाकृति के दर्शन और मंदिर से जुड़ी अद्भुत मान्यताएं

rudranath temple chamoli

उत्तराखंड के चमोली में स्थित पंच केदार के चौथे केदार श्री रुद्रनाथ मंदिर की महिमा, धार्मिक मान्यताओं और दर्शन के महत्व के बारे में जानें। यहां भगवान शिव की मुखाकृति के दर्शन होते हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने सावन मास के तीसरे सोमवार को शिव भक्तों को चमोली के श्री रुद्रनाथ मंदिर के संबंध में जानकारी दी। ALSO READ: सावन में उत्तराखंड के नीलकंठ महादेव के दर्शन क्यों हैं खास? जानें समुद्र मंथन और भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक मान्यता

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि पंच केदार में से चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ मंदिर जनपद चमोली की मनमोहक वादियों के मध्य स्थित है। यहां का शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। चमोली जनपद के भ्रमण के दौरान आप भी श्री रुद्रनाथ मंदिर के दर्शन कर भगवान शिव का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें।

क्या है मंदिर का रहस्य?

रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शिव के मुखाकृति के दर्शन होते हैं। इसे पितरों का तारण करने वाला श्रेष्ठ तीर्थ माना जाता है। कहा जाता है कि रुद्रनाथ तीर्थ में ही देवर्षि नारद ने भगवान शंकर को कनखल (हरिद्वार) में दक्ष प्रजापति द्वारा यज्ञ कराने के दौरान देवी सती के दाह की सूचना दी थी। भगवान रुद्रनाथ यहां गुफा में विराजते हैं। ALSO READ: उत्तराखंड आध्यात्मिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर, जागेश्वर से कैंची धाम तक श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

 

जानिए पंच केदार के बारे में

उत्तराखंड पंचबद्री के अलावा पंचकेदार और पंचप्रयाग की महिमा का वर्णन मिलता है। हिमालय में स्थित शिव को समर्पित पांच मंदिरों के समूह को पंच केदार कहा गया है। इनमें पहला श्री केदारनाथ मंदिर, दूसरा मदमहेश्वर, तीसरा तुंगनाथ, चौथा रुद्रनाथ और 5वां कल्पेश्वर हैं। मान्यता है कि इनका निर्माण पांडव व उनके वंशजों ने करवाया था। पंच केदार में महादेव के विभिन्न विग्रहों की पूजा की जाती है। हर केदार की अपनी विशेषता है। 

 

रुद्रनाथ जाने के 4 रास्ते

रुद्रनाथ पहुंचने के लिए पहला मार्ग गोपेश्वर के ग्राम ग्वाड़-देवलधार, किन्नखोली-किन महादेव होते हुए, दूसरा मार्ग मण्डल चट्टी-अत्रि अनुसूइया आश्रम होते हुए, तीसरा मार्ग गोपेश्वर सगर ज्यूरागली-पण्डार होते हुए, चौथा मार्ग ग्राम देवर मौनाख्य- नौलाख्य पर्वत पंडार खर्क होते हुए जाता है।

LIVE: सावन सोमवार को मंदिरों में उमड़ी भीड़, 2 बड़े हादसों में 15 की मौत

LIVE: सावन सोमवार को मंदिरों में उमड़ी भीड़, 2 बड़े हादसों में 15 की मौत

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Latest News Today Live Updates in Hindi : सोवन सोमवार और नाग पंचमी पर देशभर के शिव मंदिरों में उमड़ी भीड़। लखीसराय के अशोक धाम और बीरभूम के तारापीठ में हुए 2 दर्दनाक हादसों में 15 लोगों की मौत हो गई। पल पल की जानकारी…

सोवन सोमवार और नाग पंचमी पर देशभर के शिव मंदिरों में उमड़ी भीड़। उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए खुला। सालभर में केवल एक दिन, नाग पंचमी पर ही खुलता है यह मंदिर।राहुल गांधी ने UGC-NET की समाजशास्त्र, अंग्रेजी और वाणिज्य परीक्षाएं रद्द किए जाने को लेकर NTA और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सितंबर में दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों के प्रति चिंता जताते हुए NTA नेतृत्व की जवाबदेही की मांग की। ALSO READ: UGC-NET रद्द होने पर राहुल गांधी का NTA पर हमला, बोले- गलती एजेंसी की, सजा छात्रों को क्यों?

बिहार के लखीसराय में स्थित इंद्र दमनेश्वर मंदिर में बिजली का पोल गिरने से करंट फैलने की अफवाह के बाद भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई जबकि 12 घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। यह मंदिर अशोकधाम के नाम से भी प्रसिद्ध है। ALSO READ: सावन सोमवार पर अशोकधाम मंदिर में बड़ा हादसा, करंट की अफवाह से मची भगदड़; 8 श्रद्धालुओं की मौत
 

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में तारापीठ मंदिर के पास बिंदिशिनी होटल में सोमवार सुबह करीब 4 बजे भीषण आग लग गई। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हैं। एसी में शॉर्ट सर्किट को आग की संभावित वजह बताया जा रहा है। ALSO READ: तारापीठ मंदिर में दर्शन से पहले दर्दनाक हादसा, होटल में भीषण आग से 7 श्रद्धालुओं की मौत

तारापीठ मंदिर में दर्शन से पहले दर्दनाक हादसा, होटल में भीषण आग से 7 श्रद्धालुओं की मौत

तारापीठ मंदिर में दर्शन से पहले दर्दनाक हादसा, होटल में भीषण आग से 7 श्रद्धालुओं की मौत

fire in hotel near tarapeeth

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में तारापीठ मंदिर के पास एक होटल में सोमवार सुबह आग लगने से 7 लोगों की मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। आग लगने का कारण एसी में शॉर्ट सर्किट होना बताया जा रहा है। ALSO READ: सावन सोमवार पर अशोकधाम मंदिर में बड़ा हादसा, करंट की अफवाह से मची भगदड़; 7 श्रद्धालुओं की मौत

 

बताया जा रहा है कि हादसा सुबह करीब 4 बजे हुआ और इस समय बिंदिशिनी होटल में रुके सभी गेस्ट सो रहे थे। कहा जा रहा है कि होटल में आग ने पहले ग्राउंड फ्लोर को अपनी चपेट में लिया और फिर यह ऊपर की ओर फैली। आग लगने की वजह से पूरा होटल धुएं से भर गया। इससे वजह से लोगों का दम घुटने लगा। मौके पर कई फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया।

 

पुलिस ने हादसे में 7 लोगों के मारे जाने की पुष्‍टि की है। घायलों को रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतकों की शिनाख्त की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। ALSO READ: 'वंदे मातरम' विवाद के बाद सोनिया और राहुल की बढ़ी मुश्किलें, दोनों के खिलाफ थाने में दर्ज हुई FIR, मामले पर क्‍या बोले बंकिम चट्टोपाध्याय के वंशज?

 

तारापीठ क्यों है खास?

गौरतलब है कि बीरभूम का तारापीठ मां तारा की उपासना के लिए प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। 51 शक्तिपीठों में से 5 यहीं हैं, जिनमें बकुरेश्वर, नालहाटी, बन्दीकेश्वरी, फुलोरा देवी शामिल हैं।

दर्शन से पहलेे गई जान

सावन सोमवार होने की वजह से मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आए हुए हैं। होटल में ठहरे सभी श्रद्धालु तारापीठ मंदिर में दर्शन के लिए ही आए हुए थे। उन्हें सोमवार को मंदिर में दर्शन करने जाना था, लेकिन उससे पहले ही उनकी जलकर मौत हो गई। 

Bihar Temple Stampede: बिहार के लखीसराय में अशोकधाम मंदिर में भगदड़! 7 लोगों की मौत, बिजली का तार गिरने से एक दर्जन से ज्यादा श्रद्धालु घायल

Bihar Temple Stampede: बिहार के लखीसराय में स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर 17 अगस्त की सुबह बड़ा हादसा हो गया। मंदिर में भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसमें कम से कम 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। ‘न्यूज 18’ के मुताबिक, इस हादसे में एक दर्जन से ज्यादा श्रद्धालु घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में सभी महिलाएं होने की जानकारी सामने आई है।

हादसे के वक्त मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, करीब 50 हजार श्रद्धालु मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में मौजूद थे।  बताया जा रहा है कि वहां बिजली का एक खंभा गिर गया। इससे लोग बिजली की चपेट में आ गए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

लखीसराय के DM शैलेंद्र कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। सुबह करीब 6.30-6.45 बजे दो ट्रेनें आईं, जिससे भीड़ और बढ़ गई। हमने भीड़ का अंदाजा लगाते हुए इंतजाम किए थे। फिर हमें पता चला कि भीड़ की वजह से एक तरफ की बैरिकेडिंग टूट गई और लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े। हमने तुरंत 10-15 लोगों को यहां भेजा।”

7 लोगों की मौत की पुष्टि

मंदिर में हुए हादसे पर SDPO शिवम कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, “सात लोगों की मौत की खबर है। बताया जा रहा है कि वहां बिजली का एक खंभा गिर गया और लोग बिजली की चपेट में आ गए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हम पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही सही वजह बता पाएंगे।” घायलों को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया है। उनका इलाज जारी है।

बिजली के खंभे की अफवाह से मची भगदड़?

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हादसा अशोक धाम रेलवे स्टेशन से मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर हुआ। बताया जा रहा है कि रात के दौरान इस रास्ते पर एक बिजली का खंभा गिर गया था। सोमवार सुबह भीड़ के बीच अचानक यह अफवाह फैल गई कि गिरे हुए बिजली के खंभे में करंट दौड़ रहा है।

इस खबर से श्रद्धालुओं में घबराहट फैल गई और लोग अचानक इधर-उधर भागने लगे। देखते ही देखते रास्ते पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। भीड़ में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और दूसरे श्रद्धालुओं ने भीड़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने और घायलों की मदद करने की कोशिश की।

सभी घायल महिलाएं, कई की हालत गंभीर

हादसे में घायल हुए सभी श्रद्धालुओं के महिला होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को इलाज के लिए लखीसराय सदर अस्पताल ले जाया गया है, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और चिकित्सा व्यवस्था में जुट गईं।

मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। स्वास्थ्य विभाग और राहत-बचाव दलों को भी घटनास्थल पर लगाया गया है। अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

सावन की तीसरी सोमवारी पर उमड़ी थी भारी भीड़

सोमवार को सावन की तीसरी सोमवारी और नागपंचमी होने के कारण अशोक धाम मंदिर में सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए दूर-दूर से लोग आए थे। भारी भीड़ के बीच बिजली के खंभे को लेकर फैली अफवाह ने अचानक लोगों में डर पैदा कर दिया। इस दौरान देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। बिहार प्रशासन की ओर से फिलहाल घटना की डिटेल्स जांच की जा रही है। हादसे के सही कारण और मृतकों एवं घायलों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।

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Top News 17 August: नाग पंचमी पर मंदिरों में उमड़ी भीड़, दिल्ली कूच की तैयारी में किसान; UGC-NET री-एग्जाम की तारीख घोषित

Top News 17 August: नाग पंचमी पर मंदिरों में उमड़ी भीड़, दिल्ली कूच की तैयारी में किसान; UGC-NET री-एग्जाम की तारीख घोषित

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Top News 17 August : नाग पंचमी और श्रावण के तीसरे सोमवार को मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, दिल्ली मार्च के तैयारी में जुटे किसान। NTA ने यूजीसी नेट की रिएक्जाम का कार्यक्रम जारी किया। AI बॉस ने मांगा लेट आने वाले कर्मचारी का इस्तीफा। CJP के अभियान से जुड़े युवा के पिता की मौत हो गई। 17 अगस्त की बड़ी खबरें: 

 

नाग पंचमी और श्रावण का तीसरा सोमवार

श्रावण के तीसरे सोमवार के अवसर पर देश भर के शिव मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं का तांता। नाग पंचमी पर उज्जैन के महाकालेश्वर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर भी रात 12 बजे से श्रद्धालुओं के लिए खुला। साल भर में केवल एक दिन ही यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुलता है। ALSO READ: नाग पंचमी पर असली नाग नहीं बल्कि इस तरह नाग बनाकर करते हैं पूजा, जानिए संपूर्ण विधि

 

दिल्ली मार्च की तैयारी में किसान

किसानों ने खनौरी बॉर्डर पर बिताई रात। भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के प्रमुख जगजीत सिंह डल्लेवाल ने रविवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा सरकार से अपील की कि वे भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों को दिल्ली की ओर बढ़ने दें।

 

UGC-NET: NTA फिर लेगा 3 विषयों की परीक्षा

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने यूजीसी नेट जून 2026 के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है। अंग्रेजी और कॉमर्स की परीक्षा 9 सितंबर और समाजशास्त्र की 10 सितंबर को होगी। इन तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों में कई तरह की गंभीर खामियां सामने आई थीं। ALSO READ: NTA का बड़ा फैसला, UGC-NET परीक्षा हुई रद्द, इन 3 विषयों की दोबारा होगी Exam, जानिए क्या है कारण?

 

AI बॉस ने मांगा इस्तीफा

सैन फ्रांसिस्को में एआई से चलने वाली प्रयोगात्मक दुकान एंडॉन मार्केट में AI प्रबंधक ‘लूना’ ने एक मानव कर्मचारी को नौकरी से निकालने की सिफारिश की। कर्मचारी 23 शिफ्ट में 17 बार देर से काम पर पहुंचा था। हालांकि अंतिम फैसला AI ने अकेले नहीं लिया।

 

CJP के अभियान से जुड़े युवा के पिता की मौत

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में कॉकरोच जनता पार्टी के अभियान से जुड़े एक कार्यकर्ता के पिता की मौत हो गई। सीजेपी ने स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट का आरोप लगाया है। सीएम शुभेंदु अधिकरी ने कहा है कि तीन आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस दो अन्य की तलाश कर रही है। उन्होंने मामले में पूरा इंसाफ होने का भरोसा भी दिलाया।

यूपी के गो संरक्षण में अब जेन जी की एंट्री, गांव-गांव तैयार होंगे 10 हजार ‘गो मित्र’

यूपी के गो संरक्षण में अब जेन जी की एंट्री, गांव-गांव तैयार होंगे 10 हजार 'गो मित्र'

Gen Z enters fray for cow conservation in UP

– यूपी में बच्चों के मन में गो माता के प्रति प्रेम बढ़ाने के लिए गांव गांव चलेगा अभियान

– योगी सरकार नई पीढ़ी को बनाएगी गो संरक्षण के प्रति सजग

– तैयार किए जाएंगे मास्टर ट्रेनर, देंगे अन्य ट्रेनर को प्रशिक्षण

– गो संरक्षण में रुचि रखने वालों को दी जाएगी वरीयता

Cow Protection Campaign : योगी सरकार की प्रदेश में गो संरक्षण अभियान से अब नई पीढ़ी, खासकर जेन जी को भी जोड़ने की तैयारी है। गांव-गांव अभियान चलाकर युवाओं को गोवंश के संरक्षण, गो सेवा और इसके सामाजिक-आर्थिक महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए करीब 10 हजार ‘गो मित्र’ तैयार किए जाएंगे। पहले मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षित होंगे और फिर उनके माध्यम से अन्य लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गो संरक्षण और गो सेवा में पहले से रुचि रखने वाले लोगों को इसमें वरीयता दी जाएगी। इसके साथ ही योगी सरकार गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण, हरित ऊर्जा और रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता का मॉडल विकसित करने पर काम कर रही है।

 

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो संरक्षण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया है। सरकार का प्रयास है कि गोवंश का संरक्षण केवल गो आश्रय स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि इससे रोजगार और ग्रामीण समृद्धि के नए अवसर भी पैदा हों। इसी सोच के तहत गोशालाओं को गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पादों, प्राकृतिक खेती, बायोगैस और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

 

बच्चों और युवाओं तक पहुंचेगा गो संरक्षण का संदेश

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि नई पहल में सबसे ज्यादा जोर बच्चों और युवाओं को गो संरक्षण से जोड़ने पर रहेगा। गांवों में अभियान चलाकर उन्हें देसी गोवंश, गो सेवा, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय के महत्व की जानकारी दी जाएगी। उद्देश्य यह है कि नई पीढ़ी गो संरक्षण के पर्यावरणीय और आर्थिक पहलुओं को भी समझे।

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अभियान को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने के लिए मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। ये मास्टर ट्रेनर आगे अन्य लोगों को प्रशिक्षण देंगे। इस व्यवस्था के जरिए गांव-गांव प्रशिक्षित लोगों का नेटवर्क खड़ा करने की तैयारी है। गो संरक्षण में रुचि रखने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।

 

7,500 से अधिक गो आश्रय स्थलों में 12 लाख से ज्यादा गोवंश

उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और भरण-पोषण के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश में साढ़े सात हजार से अधिक गो आश्रय स्थल विकसित किए गए हैं, जिनमें 12 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। किसानों की फसलों को निराश्रित पशुओं से होने वाले नुकसान को कम करने के साथ गोवंश को सुरक्षित आश्रय देना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।

योगी सरकार ने गोवंश के भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में भी वृद्धि की है। प्रति गोवंश प्रतिदिन मिलने वाली राशि को 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये किया गया है। वहीं अधिकांश गो आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था भी की गई है।

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1.15 लाख पशुपालकों को सौंपे गए करीब 1.85 लाख गोवंश

गोवंश संरक्षण में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन को भी आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत करीब 1.15 लाख पशुपालकों को लगभग 1.85 लाख गोवंश सुपुर्द किए गए हैं। इससे गोवंश को परिवार आधारित संरक्षण मिलने के साथ पशुपालकों को भी इससे जुड़ने का अवसर मिला है।

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा पशुधन वाला राज्य है और दुग्ध उत्पादन में भी देश में पहले स्थान पर है। सरकार अब इस क्षमता को ग्रामीण आय और रोजगार बढ़ाने के बड़े माध्यम के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है।

 

गोशाला से गो आधारित उद्योग तक बढ़े कदम

सरकार की रणनीति गोशालाओं को धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में गोबर से गो-काष्ठ, गो-पेंट, वर्मीकम्पोस्ट, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गमले और दीपक जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ पंचगव्य, घनामृत और जीवामृत जैसे उत्पादों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

इन गतिविधियों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। इससे महिलाओं के लिए गांव में ही स्वरोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। जो गोबर पहले सामान्य अपशिष्ट के रूप में देखा जाता था, वही अब खाद, ऊर्जा और विभिन्न उत्पादों के जरिए आय का साधन बन रहा है।

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हर जिले की गोशालाओं का होगा मूल्यांकन

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने प्रदेश की गोशालाओं की क्षमता का व्यापक मूल्यांकन करने की पहल की है। इसके पीछे उद्देश्य अलग-अलग जिलों की स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार गो-आधारित आर्थिक गतिविधियां विकसित करना है।

 

योजना है कि किसी जिले में गोबर से बायोगैस की संभावना बेहतर है तो वहां उस पर जोर दिया जाए, जबकि दूसरे जिले में जैविक खाद, गो-काष्ठ या गोमूत्र आधारित उत्पादों की इकाइयां विकसित की जाएं। सरकार का लक्ष्य गो संरक्षण को स्थानीय रोजगार से जोड़ना और गांवों में आय के नए स्रोत तैयार करना है।

8 राज्यों के कलाकारों से CM योगी ने किया संवाद, बोले- विविधता में एकता ही भारत की ताकत, कलाकारों को किया सम्मानित

8 राज्यों के कलाकारों से CM योगी ने किया संवाद, बोले- विविधता में एकता ही भारत की ताकत, कलाकारों को किया सम्मानित

yogi adityanath

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विधानभवन के बाहर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले यूपी समेत विभिन्न राज्यों के कलाकारों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को अपने सरकारी आवास पर संवाद किया और उन्हें सम्मानित किया। जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश और गुजरात से लेकर छत्तीसगढ़ तक आठ राज्यों के कलाकारों ने अपनी लोक संस्कृति की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। सीएम ने इन कलाकारों से उत्तर प्रदेश में उनके अनुभव और यहां घूमने की इच्छा के बारे में जानकारी ली।  

 

संवाद के दौरान कई कलाकारों ने अयोध्या और लखनऊ घूमने की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने तत्काल अधिकारियों को उनके भ्रमण की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। कलाकारों से कहा कि जब भी किसी राज्य में जाएं तो एक दिन अतिरिक्त समय निकालकर स्थानीय स्थलों, संस्कृति और खान-पान को जरूर जानें। हर भारतीय का दायित्व है कि वह अपने देश की विशालता और विविधता को देखे। सीएम ने कहा कि कलाकारों के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति एक-दूसरे से जुड़ती है और यही सांस्कृतिक एकता भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

 

बुलडोजर बाबा कहने पर मुस्कुराए सीएम योगी

 

छत्तीसगढ़ के कुलभूषण चंद्राकर ने मुख्यमंत्री को बताया कि करीब 15 वर्ष पहले उन्हें अयोध्या जाने का अवसर मिला था, लेकिन अब वह नई अयोध्या देखने के लिए उत्सुक हैं। सीएम ने कहा कि तब की अयोध्या और आज की अयोध्या में जमीन-आसमान का अंतर है। आज की अयोध्या त्रेता युग का स्मरण कराती है। कुलभूषण ने कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री योगी को 'बुलडोजर बाबा' के नाम से जाना जाता है। इस पर मुख्यमंत्री मुस्कुराए और कहा कि बुलडोजर पसंद है ना आपको? आप गा सकते हैं, मैं गा नहीं सकता, लेकिन कम से कम गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूं।

 

श्रेष्ठ भारत के लिए एकता और सुरक्षा दोनों जरूरी

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों से कलाकारों का एक मंच पर आना ही भारत की विविधता और सांस्कृतिक एकता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि यही एक भारत श्रेष्ठ भारत है। बंगाल से महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी, अरुणाचल प्रदेश से द्वारिका-पुरी तक जब सभी एक-दूसरे से जुड़ेंगे, तभी एक भारत श्रेष्ठ भारत का संकल्प साकार होगा। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ भारत के लिए एकता और सुरक्षा दोनों जरूरी हैं। अरुणाचल प्रदेश की नीलम से बातचीत करते हुए सीएम ने लखनऊ के अनुभव पूछे और अयोध्या सहित भगवान बुद्ध से जुड़े उत्तर प्रदेश के स्थलों को देखने की सलाह दी। बिहार के सुबोध से कहा कि आप लोगों को अयोध्या जरूर जाना चाहिए, क्योंकि मां जानकी का संबंध भी उस पावन भूमि से है। मध्य प्रदेश के लेखपाल धुर्वे से बातचीत में कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश भले ही आपस में जुड़े हुए हैं, लेकिन कलाकारों के आने से मां नर्मदा का संदेश भी यहां पहुंचता है।

 

जम्मू-कश्मीर की श्रुति ने श्रीराम मंदिर के दर्शन की इच्छा जताई

 

जम्मू-कश्मीर से पहली बार उत्तर प्रदेश आईं श्रुति ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के दर्शन की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने उनकी इच्छा पर सहमति जताते हुए अधिकारियों को व्यवस्था करने के निर्देश दिए। वाराणसी की सुनिधि पाठक ने दर्शन की बेहतर व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। इस पर सीएम ने कहा कि बाहर से आने वाले श्रद्धालु भारत की परंपरा में अतिथि हैं और अतिथि का सम्मान करना हमारा दायित्व है। गुजरात के पोरबंदर से आए राजू भाई से बातचीत में मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी की जन्मभूमि पोरबंदर और भगवान कृष्ण के सखा सुदामा से जुड़ी मान्यताओं का उल्लेख किया। पोरबंदर से कलाकारों का आना उनके लिए खुशी की बात है। महोबा के जितेंद्र कुमार की आल्हा प्रस्तुति की सराहना करते हुए सीएम ने कहा कि जब वह आल्हा गा रहे थे तो सभापति भी जोश में आ गए थे। उन्होंने कहा कि कलाकार आल्हा की वीर परंपरा को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

 

हर क्षेत्र व हर जनपद में महोत्सव होने चाहिए

 

मथुरा के राजेश प्रसाद शर्मा ने मुख्यमंत्री से संवाद करते हुए कहा कि आज उनसे बात करके बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने मथुरा को तीन बड़े महोत्सव देने के लिए मुख्यमंत्री योगी का आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कलाकार केवल गायन, वादन, नृत्य और नाटक करने वाले नहीं हैं, बल्कि वे परंपरा और लोक संस्कृति के वाहक हैं। कलाकारों की प्रस्तुतियों में अतीत छिपा होता है और भविष्य उसी अतीत से प्रेरणा लेता है। अयोध्या का दीपोत्सव और रामनवमी, बरसाना का रंगोत्सव, मथुरा में जन्माष्टमी, बुंदेलखंड में आल्हा की परंपरा और प्रयागराज के माघ मेले को नई ऊंचाई देने का उद्देश्य लोक परंपराओं को मजबूत करना है। हर क्षेत्र और हर जनपद में महोत्सव होने चाहिए, ताकि स्थानीय कलाकारों को मंच मिले और लोक गाथाएं अगली पीढ़ी तक पहुंचें।

 

राज्यों की लोक संस्कृति ने बांधा समां

 

कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के कलाकारों ने रउफ एवं डोंगरी नृत्य, महाराष्ट्र के कलाकारों ने नमन और डिंडी नृत्य, अरुणाचल प्रदेश ने पराई लोकनृत्य, त्रिपुरा ने डारलॉन्ग लोकनृत्य, बिहार ने झिंझिया लोकनृत्य, मध्य प्रदेश ने गुदुमबाजा लोकनृत्य, गुजरात ने तलवार रास, छत्तीसगढ़ ने रेला पाटा लोकनृत्य और उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने कथक की प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री ने सभी कलाकारों और कोरियोग्राफर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कलाकारों ने उत्तर प्रदेश की व्यवस्था, सुंदरता और यहां मिले सम्मान की भी सराहना की। साथ ही अयोध्या और काशी में दर्शन की व्यवस्थाओं को लेकर कलाकारों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया।

क्या राहु-केतु परेशानी पैदा कर रहे हैं? नाग पंचमी पर अपनी राशि के अनुसार करें ये उपाय

हिंदू परंपरा में नाग पंचमी का खास महत्व है। इस दिन भक्त नाग देवता की पूजा करते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद मांगते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह दिन उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, जो राहु और केतु के बुरे प्रभावों को कम करना चाहते हैं।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जन्म कुंडली में राहु या केतु की खराब स्थिति जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उलझन, अचानक आने वाली रुकावटों, अस्थिरता और परेशानियों का कारण बन सकती है। वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु का संबंध ‘काल सर्प दोष’ से भी माना जाता है।

17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु अपनी राशि के अनुसार कुछ खास पूजा-पाठ और उपाय कर सकते हैं। यहां बताया गया है कि पारंपरिक रूप से हर राशि के लोगों को क्या करना चाहिए।

मेष– मेष राशि के लोग पानी में लाल फूल और लाल चंदन मिलाकर शिवलिंग का जलाभिषेक कर सकते हैं। माना जाता है कि इस उपाय से भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और राहु-केतु के बुरे प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

वृषभ– वृषभ राशि के लोग भगवान शिव को सफेद फूल चढ़ा सकते हैं। वे पानी में थोड़ा कच्चा दूध मिलाकर उससे शिवलिंग का जलाभिषेक भी कर सकते हैं।

मिथुन– मिथुन राशि के लोग भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और फिर भगवान गणेश को दूर्वा घास चढ़ा सकते हैं। परंपरा के अनुसार हरे कपड़े, हरे फल या मूंग की दाल दान करने की भी सलाह दी जाती है। भक्त “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।

कर्क– कर्क राशि के लोग नाग पंचमी पर रुद्राभिषेक कर सकते हैं या करवा सकते हैं। परंपरा के अनुसार, वे पूजा के हिस्से के तौर पर चांदी के सांपों के प्रतीकात्मक जोड़े की पूजा भी कर सकते हैं। बाद में विसर्जन या निपटान के लिए, प्राकृतिक जल स्रोतों में धातु की चीजें डालने के बजाय स्थानीय मंदिर के निर्देशों और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों का पालन करना बेहतर है।

सिंह– सिंह राशि के लोग भगवान शिव की पूजा करने से पहले सूर्य देव को जल चढ़ाकर दिन की शुरुआत कर सकते हैं। एक और पारंपरिक उपाय है तांबे के बर्तन में गेहूं भरकर किसी जरूरतमंद को दान करना।

कन्या– कन्या राशि वालों को सलाह दी जाती है कि वे जलाभिषेक करें और जानवरों व पक्षियों की देखभाल करें या उन्हें खाना खिलाएं। कुछ परंपराओं में बहते पानी में कच्चा कोयला विसर्जित करने की भी सलाह दी जाती है; हालाँकि, नदियों में सामग्री डालने के बजाय, भक्त पर्यावरण के लिए सुरक्षित कोई प्रतीकात्मक विकल्प चुन सकते हैं या किसी स्थानीय पुजारी से सलाह ले सकते हैं।

तुला– तुला राशि वाले नाग पंचमी पर शिव मंदिर जा सकते हैं और महादेव की पूजा कर सकते हैं। अपनी क्षमता के अनुसार ज़रूरतमंदों को अनाज दान करना या भोजन कराना भी इस दिन से जुड़ा एक उपाय है।

वृश्चिक– वृश्चिक राशि वाले भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं। पारंपरिक ज्योतिष में माना जाता है कि पूजा और पाठ का यह मेल राहु और केतु से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मदद करता है।

धनु– धनु राशि वाले भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा कर सकते हैं और इस मौके पर पीले कपड़े पहन सकते हैं। पारंपरिक रूप से विष्णु मंदिर में हल्दी और चने की दाल दान करने की भी सलाह दी जाती है।

मकर– मकर राशि वाले नाग पंचमी पर कुत्ते को रोटी और गुड़ खिला सकते हैं। शाम को, वे पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जला सकते हैं, बशर्ते ऐसा करना सुरक्षित और अनुमत हो।

कुंभ– कुंभ राशि के लोग ज़रूरतमंदों को कंबल या स्टील के बर्तन जैसी उपयोगी चीज़ें दान कर सकते हैं। भगवान शिव के सामने बैठकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी इस राशि से जुड़ा एक पारंपरिक उपाय है।

मीन– मीन राशि के लोग पानी में थोड़ी सी केसर मिलाकर उससे भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं। कुछ परंपराओं में बहते पानी में नारियल प्रवाहित करने की भी बात कही गई है, लेकिन प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए पर्यावरण के अनुकूल चीज़ें चढ़ाना या मंदिर द्वारा स्वीकृत विकल्प चुनना बेहतर है।

उपाय

राशि के अनुसार किए जाने वाले उपायों के अलावा, जो लोग राहु और केतु के बुरे असर का अनुभव कर रहे हैं, वे नाग पंचमी के दिन भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और उन पर जल चढ़ा सकते हैं (जलाभिषेक कर सकते हैं)। कुछ ज्योतिष परंपराओं में राहु काल के दौरान शिव की पूजा करने की खास सलाह दी जाती है।

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये उपाय वैज्ञानिक रूप से साबित तरीकों के बजाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें सेहत, पैसे, रिश्तों या ज़िंदगी की दूसरी समस्याओं के पक्के समाधान के तौर पर नहीं, बल्कि आस्था और आध्यात्मिक अभ्यास के तौर पर देखा जाना चाहिए।