दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले CJP संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में, नेहा बोरा ने सरकार पर उठाए सवाल

Abhijeet Dipke: दिल्ली में तिरंगा फहराने को लेकर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया गया था। अब उन्हें एहतियातन हिरासत में रखा गया है। पार्टी ने कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी।

वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की प्रमुख नेहा बोरा को रविवार को रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें छोड़ा गया।

पुलिस के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत दिपके के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। उन्हें आज, 17 अक्टूबर को एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया जाएगा।

पुलिस ने बताया कि CJP के संस्थापक को दो नोटिस भेजे गए थे, जिनमें उन्हें प्रस्तावित आंदोलन के लिए कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में न जाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने इन निर्देशों का पालन नहीं किया।

पुलिस के मुताबिक, उन्होंने 50,000 रुपये का एक बॉन्ड भी भरा था और उन्हें एक साल तक सार्वजनिक शांति भंग न करने का निर्देश दिया गया था।

‘कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं’

अपनी रिहाई के बाद ANI से बात करते हुए, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

बोरा ने सवाल किया, “कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है जैसे वे कोई खूंखार अपराधी हों; हमारे देश में लंबे समय से यही चलन चला आ रहा है। मौजूदा आंदोलन ने साफ कर दिया है कि लोगों को किस तरह हिरासत में लिया जा रहा है—चाहे दिन हो या शाम, उन्हें पूरी रात हिरासत में रखा जाता है और अगले दिन सुबह या शाम को ही छोड़ा जाता है। आखिर किस अधिकार के तहत इसे सही ठहराया जा सकता है? किस कानून या आदेश के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को पूरी रात कैद में रखना जायज है?”

उन्होंने विवादित ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की CJP की मांग को फिर से दोहराया।

बोरा ने कहा, “कानूनी तौर पर, लोगों को-खासकर महिलाओं को सूर्यास्त के बाद रिहा कर दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इसके अलावा, एक नया नैरेटिव (विमर्श) फैलाया जा रहा है-अराजकता और अव्यवस्था का। कैसी अराजकता और अव्यवस्था? वैसी ही, जैसी आपने सेंट्रल दिल्ली में फैलाई थी? दिल्ली के लोग चैन की सांस भी नहीं ले पा रहे हैं; वे काम पर जाने के लिए जो भी रास्ता चुनते हैं, वह बंद मिलता है। आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं। कृपया, भारत के लोगों को बख्श दें। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग (impeachment) चलाएं और SIR को रोकें, ताकि इस देश के आम नागरिक चैन की सांस ले सकें, सुकून महसूस कर सकें और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रह सकें।”

बोरा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उन्हें अपने वकीलों से बात नहीं करने दे रही थी।

उन्होंने कहा, “उन्होंने (पुलिस ने) मेरा नाम, पता और अन्य विवरण मांगे। काफी देर तक, उन्होंने मुझे किसी कानूनी सलाहकार (वकील) से बात करने या सलाह लेने भी नहीं दिया। हमारे वकील 5-6 घंटे तक मुझसे संपर्क करने की कोशिश करते रहे; जब हमने किसी तरह उन्हें फोन किया, तब जाकर उन्हें मुझसे मिलने की अनुमति मिली। ये लोग लंबे समय से इसी तरह की हरकतें करते आ रहे हैं।”

CJP ने दिपके के ठिकाने के बारे में जानकारी मांगी

CJP ने आरोप लगाया है कि दिपके को किसी अज्ञात जगह पर ले जाया गया है और उनके वकीलों को उनसे बात नहीं करने दी जा रही है।

X पर एक पोस्ट में, CJP ने लिखा, “अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने अगवा कर लिया है। उन्हें उठाए हुए 10 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उनके माता-पिता, वकीलों या CJP की टीम को उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।”

यह घटनाक्रम CJP के अन्य सदस्यों, जिनमें सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हैं, को हिरासत में लिए जाने के बाद हुआ है। इन दोनों नेताओं को जंतर-मंतर में घुसने के आरोप में हिरासत में लिया गया था, जिसे अब विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।

बता दें कि CJP, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रही है।

यह भी पढ़ें: Yogi Adityanath Popularity Survey: यूपी में आज चुनाव हुए तो सीएम पद के लिए योगी आदित्यनाथ कितने लोकप्रिय?

दीपके, नेहा पुलिस हिरासत में

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लेकर उनका तिरंगा मार्च रोक दिया। दीपके अपने समर्थकों के साथ शाम पांच बजे के करीब कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने जा रहे थे। लेकिन पुलिस ने वहां पहुंचने से पहले ही उनको हिरासत में ले लिया गया। हालांकि उनके कुछ समर्थक तिरंगा लेकर सेंट्रल पार्क पहुंच गए थे और वहां तिरंगा फहराया। सीपीआई माले के छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। सीजेपी ने देर शाम कहा कि दीपके को दिल्ली पुलिस किसी अज्ञात जगह ले गई है।

दिल्ली पुलिस ने डेढ़ सौ अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया है। दीपके को छह दिन में दूसरी बार दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इससे पहले 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए आए दीपके को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर ही हिरासत में ले लिया गया था। एक दिन बाद 11 अक्टूबर को दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका एक बॉन्ड भर कर रिहा हुए थे। पांच दिन बाद उनको फिर से हिरासत में लिया गया। दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने इसे अघोषित आपातकाल बताया।

गौरतलब है कि सीजेपी का तिरंगा मार्च रोकने के लिए एनडीएमसी ने सेंट्रल पार्क को दिन के लिए बंद कर दिया था और पुलिस ने नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी है। इसके तहत चार या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है। बहरहाल, दीपके को हिरासत में लेने से पहले दिल्ली पुलिस झंडेवालान स्थित उस घर पर पहुंची थी, जहां वे ठहरे हुए थे। पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन नहीं करने का नोटिस दिया था। यह घर शरद पवार की एनसीपी के एक नेता का है।

पुलिस जब उनको नोटिस देने गई तो इस दौरान दीपके की पुलिस से बहस हो गई थी। दीपके ने पुलिस से कहा कि यह कोई रैली या प्रोटेस्ट नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम सिर्फ सेंट्रल पार्क तक जाकर तिरंगा फहराना चाहते हैं’। गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च का ऐलान किया था। सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों को शाम पांच बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आने के लिए कहा था।

दूसरी ओर इस मार्च को रोकने के लिए दिल्ली में 28 हजार से ज्यादा सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था। अर्धसैनिक बलों के साथ साथ दिल्ली पुलिस के जवानों ने पूरे कनॉट प्लेस को घेर लिया था। सात लेयर की बैरिकेडिंग की गई थी। ऐसी की बैरिकेडिंग और सुरक्षा बंदोबस्त करके 10 अक्टूबर का जंतर मंतर का प्रदर्शन भी रोका गया था। उस दिन सात हजार के करीब लोग हिरासत में लिए गए थे।

कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च करेगी सीजेपी

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च का ऐलान किया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके इसके लिए बुधवार को दिल्ली पहुंचे और लोगों से तिरंगा लेकर कनॉट प्लेस पहुंचने की अपील की। गौरतलब है कि दीपके के दो साथियों आशुतोष रांका और सौरव दास को जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने के मामले में पांच दिन के लिए जेल भेज दिया गया है। अजिंक्य शिंदे पांच हजार का बॉन्ड भर कर जमानत पर छूटे हैं।

बहरहाल, दीपके ने बुधवार को एक वीडियो मैसेज जारी कर कहा, ‘सभी लोग 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे तिरंगा लेकर कनॉट प्लेस पहुंचे। ये लोग मुझे भी जेल में डाल सकते हैं लेकिन मुझे परवाह नहीं’। उन्होंने आगे कहा, ‘अगर सरकार देश में इमरजेंसी लगाना चाहती है तो खुलकर आधिकारिक तौर पर लगाए। यह अघोषित इमरजेंसी क्यों’?

इससे पहले बुधवार की सुबह सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली की विशेष अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है। इन्हें मंगलवार सुबह जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। गौरतलब है कि 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से ही हिरासत में लिया था। तीनों को 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया था। इसके बाद उन्हें 50-50 हजार रुपए के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया। रिहाई की शर्त के मुताबिक, तीनों को एक साल तक शांति बनाए रखनी थी, ऐसा कोई काम नहीं करना था, जिससे शांति भंग हो। पुलिस का कहना है कि सौरव दास और रांका ने इसका उल्लंघन किया था।

बिहार नाव हादसा: लापता लोगों की तलाश जारी

वैशाली जिले में गंगा नदी में नाव पलटने से कम से कम 13 बच्चों की मौत की घटना के एक दिन बाद बुधवार को लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान जारी रहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने बताया कि हादसे में जिन बच्चों की मौत हुई उनकी उम्र 15 वर्ष से कम थी। नाव पर 20 से अधिक लोग सवार थे।

उन्होंने ने बताया कि मृतकों में नौ लड़कियां और चार लड़के शामिल हैं। बुधवार को अब तक कोई और शव बरामद नहीं हुआ है।

यह हादसा मंगलवार रात करीब साढ़े आठ बजे उस समय हुआ जब रामपुर श्यामचंद गांव के निवासी नदी के पार एक गांव में भोज में शामिल होने जा रहे थे।

सिंह ने  राहत और बचाव अभियान अब भी जारी है। छह लोगों को बचा लिया गया है।’’

जिलाधिकारी ने कहा, ‘‘मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं और अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। नाव जिसके नाम पर पंजीकृत है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

उन्होंने कहा कि सूर्यास्त के बाद नावों के परिचालन पर रोक लगाने के जिला प्रशासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यह हादसा हुआ।

सिंह ने कहा, “नाव के मालिक, संचालक और ऐसी घटनाओं को रोकने एवं निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हमें बताया गया है कि यह नाव पहले भी परिचालित होती रही थी। इस लापरवाही से सख्ती से निपटा जाएगा।”

नावों की कमी होने संबंधी दावों को खारिज करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि यदि नाव या संपर्क सड़क की मांग की जाती है, तो प्रशासन उचित कार्रवाई करेगा, क्योंकि यह एक अस्थायी जल क्षेत्र है।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की आठ नौकाएं काम कर रही हैं। प्रशासन इलाके में एसडीआरएफ के दो स्थानीय केंद्र स्थापित करने की भी योजना बना रहा है।

मृतकों की पहचान मीरा कुमारी, निशु कुमारी, अनीशा कुमारी, सुनीता कुमारी, आर्यन कुमार, मोहन कुमार, अमृता कुमारी, अंकिता कुमारी, पिंकी कुमारी, नमन कुमार, सिकी कुमारी, भोनू कुमारी और सोनम कुमारी के रूप में हुई है।

अधिकारियों ने बताया कि सूचना के अनुसार हादसे में एक ही परिवार के सात बच्चों की मौत हुई है।

इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में जिलाधिकारी फूट-फूटकर रो रही एक महिला को गले लगाकर सांत्वना देती नजर आ रही हैं।

Also Read : CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका भेजे गए तिहाड़ जेल

राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के उपनिरीक्षक जय दीप नारायण सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि क्षतिग्रस्त नाव को नदी से निकाल लिया गया है और तलाश अभियान जारी है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रत्येक मृतक के परिजन को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व विधायक सतीश कुमार यादव और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधान परिषद सदस्य अशरफ अंसारी समेत कई स्थानीय नेता घटनास्थल पर पहुंचे और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और क्षेत्र के लोकसभा सांसद चिराग पासवान ने भी एनएमसीएच पहुंचकर हादसे में बचाए गए लोगों से मुलाकात की।

पासवान ने संवाददाताओं से कहा, “मैं कल रात से ही जिला प्रशासन के संपर्क में हूं। मैं शोकसंतप्त परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा हूं। इन लोगों ने मुझे वह सब कुछ बनाया है, जो मैं आज हूं। जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, मैं यहां रहूंगा।”

उन्होंने कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता एवं राघोपुर के विधायक तेजस्वी यादव ने मंगलवार रात एक वीडियो संदेश में कहा था कि वह नयी दिल्ली से लौटने के बाद अपने विधानसभा क्षेत्र का दौरा करेंगे।

वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में विपक्ष के प्रदर्शन में भाग लेने के लिए दिल्ली गए थे।

हादसे के बाद गांव के लोगों ने प्रशास पर आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।

स्थानीय निवासी रवि कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘नाव की हालत जर्जर थी। हमने कई बार इसे बदलने की मांग की थी, लेकिन हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। इसी लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।’’

राज्य सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने हादसे में मारे गए प्रत्येक बच्चे के परिजन को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि उपलब्ध कराई है। इसके अतिरिक्त, कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत प्रत्येक मृतक के परिवार को तीन-तीन हजार रुपये तथा मुख्यमंत्री पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत मृतकों के अभिभावकों को 20-20 हजार रुपये दिए गए हैं।

Pic Credit : UNI

CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका भेजे गए तिहाड़ जेल

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को शांति बनाए रखने के लिए भरे गए बॉण्ड का कथित तौर पर उल्लंघन करने और जंतर-मंतर पहुंचने के लिए एक निजी परिसर में अनधिकृत प्रवेश करने के आरोप में बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि दास और रांका को तिहाड़ जेल में रखा गया है। उनके सहयोगी अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने की शर्त पर एक निजी मुचलके और 5,000 रुपये की जमानत राशि पर रिहा कर दिया गया।

पुलिस ने बताया कि विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने निवारक पुलिस रिपोर्ट, कार्यकर्ताओं द्वारा बार-बार कानून का उल्लंघन किए जाने और जमानत पर रिहा होने पर फिर से कानून तोड़ने तथा अन्य लोगों को उकसाने की गंभीर आशंका को ध्यान में रखते हुए दास और रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इन तीनों को बुधवार सुबह विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था।

कॉजपा नेताओं को मंगलवार तड़के हिरासत में लिया गया था। वे कथित रूप से बैरिकेड तोड़कर जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश गए, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए और वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

पुलिस ने कहा कि दास और रांका को शनिवार को भी हिरासत में लिया गया था और उन्होंने एक साल तक शांति बनाए रखने के लिए बॉण्ड पर हस्ताक्षर किए थे।

कॉजपा नेताओं के खिलाफ यह कार्रवाई विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर सीईसी कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कॉजपा और अन्य संगठनों के कई प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बढ़ाए जाने के बीच हुई है।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने असहमति की आवाज दबाने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आशु और सौरव को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनका दोष क्या है? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना।

Also Read : रूस के प्रति ट्रंप की नरमी से रिपब्लिकन पर बढ़ा दबाव

उन्होंने कहा कुछ हिम्मत दिखाइए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। यदि आप असहमति की आवाज दबाने के लिए इतने दृढ़ हैं, तो इन कायरतापूर्ण तरीकों के पीछे छिपने के बजाय आधिकारिक तौर पर आपातकाल घोषित करने का साहस दिखाइए।”

दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा कि 13 अक्टूबर की सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और कॉजपा के 11 अन्य सदस्य एक निजी परिसर से होते हुए जंतर-मंतर पहुंच गए, जबकि इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है।

पुलिस के अनुसार, मौके पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप कर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर उन्हें उनके आधिकारिक कर्तव्य निर्वहन में बाधा डाली।

पुलिस के बयान के अनुसार, सभी 14 लोगों को हिरासत में ले लिया गया। उनके खिलाफ 13 अक्टूबर को कनॉट प्लेस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223(ए) (लोक सेवक के आदेश का उल्लंघन), 332 (अपराध करने के इरादे से घर में अनधिकृत प्रवेश) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

इसके अलावा, संसद मार्ग थाने में धारा 221 (लोक सेवक के कर्तव्य निर्वहन में बाधा डालना), 115(2) (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 132 (ड्यूटी करने से रोकने के लिए लोक सेवक पर हमला या बल प्रयोग), 121(1) (लोक सेवक को ड्यूटी से रोकने के लिए जानबूझकर चोट या गंभीर चोट पहुंचाना) और 3(5) (साझा मंशा) के तहत एक अन्य प्राथमिकी दर्ज की गई। भारतीय न्याय संहिता की धारा 332, 132 और 121(1) गैर-जमानती धाराएं हैं।

पुलिस ने कहा कि सार्वजनिक शांति भंग करने और कानून का उल्लंघन करने के कथित प्रयासों के मद्देनजर दास, रांका और शिंदे को एहतियातन गिरफ्तार किया गया। सोशल मीडिया के जरिए अन्य लोगों को भी ऐसी गैरकानूनी गतिविधियों के लिए उकसाने के उनके कथित प्रयासों पर भी गौर किया गया।

बयान के अनुसार, तीनों को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धाराओं 126 और 170 के तहत कार्यवाही शुरू की गई।

Pic Credit : UNI

अमेरिकी डोनर्स दे रहे CJP को पैसा! ये दावा करने वाली अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन कौन हैं?

Mary Millben attacks CJP: अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके संगठन को अमेरिका में ऐसे डोनर से फंडिंग मिल रही है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेतृत्व में भारत के भविष्य के खिलाफ हैं। मैरी मिलबेन ने भारत के युवाओं से अपील की है कि वे कथित तौर पर देश में अशांति फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ आवाज उठाएं और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएं।

मिलबेन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब नई दिल्ली में विपक्षी दलों और CJP के समर्थकों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारी वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

PM मोदी के समर्थन में क्या बोलीं मैरी मिलबेन?

41 वर्षीय सिंगर मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया पर लिखे अपने मैसेज में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 साल तक भारत की सेवा की है, जिनमें 12 साल PM के रूप में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि PM मोदी लगातार तीन कार्यकाल के लिए चुने गए हैं। उनके अनुसार, वह अमेरिका से आने वाली कथित विघटनकारी ताकतों के सामने नहीं झुकेंगे। मिलबेन ने दावा किया कि कुछ अमेरिकी डोनर दुनियाभर में रूढ़िवादी विचारधारा वाले नेताओं को निशाना बनाने का एक पैटर्न अपनाते हैं।

उनके मुताबिक, पहले संबंधित देश के किसी अमेरिकी शिक्षित व्यक्ति को तलाशा जाता है। फिर उसे कट्टर विचारों की ओर प्रेरित कर वापस भेजा जाता है और उसके बाद कथित तौर पर अशांति फैलाने के लिए फंडिंग की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों का असर संबंधित देशों के विकास और शासन व्यवस्था पर पड़ता है। हालांकि, अमेरिकी डोनर से CJP को फंडिंग मिलने के अपने दावे के समर्थन में मिलबेन ने इस बयान में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया।

युवाओं से की शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील

मैरी मिलबेन ने भारत के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए ऐसे आंदोलनों के मुकाबले एक शांतिपूर्ण जनआंदोलन खड़ा करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसी नई आवाज उठनी चाहिए, जो देश की मिट्टी में पैदा हुई हो, यहीं पली-बढ़ी हो और यहीं शिक्षित हुई हो। उनके मुताबिक, युवाओं को संगठित होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए।

भारत में क्यों लोकप्रिय हैं मैरी मिलबेन?

मैरी मिलबेन अफ्रीकी-अमेरिकी हॉलीवुड अभिनेत्री और मशहूर सिंगर हैं। भारत में वह खास तौर पर भारतीय राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और भक्ति गीत ‘ओम जय जगदीश हरे’ की अपनी प्रस्तुतियों के लिए लोकप्रिय हैं। वर्ष 2023 में अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में भी उन्होंने भारत का राष्ट्रगान गाया था। इस वजह से भारतीय दर्शकों के बीच उनकी पहचान बनी है। इस बीच, दिल्ली के जंतर-मंतर में जबरन घुसने के आरोप में CJP के दो नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री देश में अघोषित आपातकाल लागू कर रहे हैं।

दीपके ने नागपुर में पत्रकारों से कहा कि CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराकर कौन सा अपराध कर दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शांति बनाए रखने के मुचलके के उल्लंघन और प्रदर्शन के लिए गैर-अधिसूचित क्षेत्र घोषित किए जा चुके जंतर-मंतर पर जबरन घुसने के आरोप में दास और रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया।

सीजेपी के नेता हिरासत में लिए गए

नई दिल्ली। जंतर मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिलने के बाद भी मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी के नेता वहां प्रदर्शन के लिए पहुंच गए थे। पुलिस ने सबको वहां से हटाया और पार्टी के नेता सौरव दास न आशुतोष रांका को हिरासत में लिया। हालांकि दोनों के साथ गिने चुने लोग ही थी। बाद में सीजेपी ने अपने नेताओं को हिरासत में लिए जाने का वीडियो जारी किया।

आशुतोष रांका ने सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर कहा, ‘ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रोटेस्ट जंतर मंतर पर ही होगा। आज 10 लोग आए हैं, कल एक हजार आएंगे, परसों 10 हजार आएंगे’। गौरतलब है कि जंतर मंतर पर अब प्रदर्शन नहीं हो सकते। केंद्र सरकार ने सोमवार को इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा दिया था। फिर भी सीजेपी के नेता पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में पहुंचे थे और प्रदर्शन की इजाजत मांगी थी। इससे पहले 10 अक्टूबर को सीजेपी ने बड़ा प्रदर्शन किया था। हालांकि उसमें आम आदमी पार्टी के नेता और लेफ्ट के नेता व कार्यकर्ता ज्यादा संख्या में शामिल हुए थे।

सीजेपी नेताओं का अच्छा है!

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के नेताओं का बहुत अच्छा है। उनके नाम से प्रदर्शन हो रहे हैं, दिल्ली और पूरे देश में हंगामा मच रहा है, सरकार परेशान है और नौजवान सड़कों पर है, लेकिन इन नेताओं को कुछ नहीं करना होता है। ऐसा लग रहा है कि अभिजीत दीपके ने मौके को लपका और चीफ जस्टिस की कॉकरोच वाली टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी नाम से एक सोशल मीडिया हैंडल बना दिया और उसके बाद से उसकी रॉयल्टी ले रहे हैं। उस सोशल मीडिया हैंडल से किसी भी मसले पर आंदोलन का ऐलान कर दिया जा रहा है और देश के लाखों युवा, जो पेपर लीक से लेकर एसआईआर या किसी अन्य मामलों में आक्रोशित हैं वे सड़क पर उतर जा रहे हैं।

सोचें, पारंपरिक रूप से किसी प्रदर्शन की तैयारी में कितनी मेहनत, कितने संसाधान, कितने नेता और कितनी ऊर्जा लगती है। कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों को कितना प्रयास करना पड़ रहा है। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब के नेताओं को इस तैयारी में लगाया गया है। वे रात दिन मेहनत करके लोगों को जुटा रहे हैं। सरकार की इतनी सख्ती है कि दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के कांग्रेस नेताओं को भी अपने घरों से निकल कर सेंट्रल दिल्ली पहुंचने के लिए गुरिल्ला अंदाज में कुछ उपाय करने पड़ रहे हैं। लेकिन अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कुछ नहीं करना है। वे सिर्फ सोशल मीडिया में अपील कर रहे हैं या प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। पहले भी ये नेता सड़कों पर नहीं उतरे। आज भी नहीं उतर रहे हैं।

पहली बार जब अभिजीत दीपके छह जून को अमेरिका से दिल्ली पहुंचे थे तो उनको बिना मांगे जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी गई थी। हवाईअड्डे पर ही पुलिस ने उनको मंजूरी दे दी। लेकिन उन्होंने क्या किया? तीन घंटे के प्रदर्शन में वे बेहोश हो गए और उनको एसी गाड़ी में बैठाना पड़ा और उसके बाद आंदोलन खत्म हो गया। जब 20 जून को फिर से आंदोलन शुरू हुआ तो सोनम वांगचुक और सीपीआई माले के छात्र संगठन आइसा की तीन छात्राओं ने भूख हड़ताल किया। दिल्ली पुलिस ने जब वांगचुक को उठाया तो दीपके ने कहा कि वे भूख हड़ताल जारी रखेंगे लेकिन दो घंटे भी भूख हड़ताल नहीं कर सके। उसके बाद भीड़ जुटाने की बारी आई तो लोग खुद ब खुद पहुंचे या भीम आर्मी के चंद्रशेखर भीड़ लेकर पहुंचे, जिसने आक्रामक तरीके से संसद की ओर मार्च किया।

इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। दीपके एंड कंपनी ने आठ अक्टूबर को बेंगलुरू में प्रदर्शन का ऐलान किया और प्रदर्शन से एक दिन पहले शाम को बेंगलुरू पहुंचे। फिल्म अभिनेता प्रकाश राज और जर्मनी में रहने वाले इन्फ्लूएंसर ध्रुव राठी के नाम पर दो चार हजार लोग जुटे। इसके बाद 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन होना था। पर दीपके, दास और रांका बेंगलुरू में ही रहे। वही से ऐलान किया कि 10 अक्टूबर की सुबह साढ़े 10 बजे की फ्लाइट से दिल्ली लैंड करेंगे।

सोचें, प्रदर्शन 10 बजे से होना था और नेता साढ़े 10 बजे लैंड करने वाले थे। कोर टीम के तीन लोग जहाज में थे औऱ चौथी सदस्य रत्ना सिंह उनको लेने के लिए एयरपोर्ट पहुंची थीं। सो, चारों लोग अपनी सुविधा के हिसाब से वही एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिए गए। बाकी जनता जंतर मंतर के इलाके में लाठियां खा रही थी और दिल्ली पुलिस व अर्धसैनिक बलों से गुरिल्ला वार कर रही थी। दूसरे दिन यानी 11 अक्टूबर का प्रदर्शन भी दूसरे लोगों ने किया। दीपके की दो दादी गुजर गईं इसलिए वे महाराष्ट्र चले गए और बाकी लोगों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपनी जिम्मेदारी पूरी की।

सीजेपी ने 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने सोमवार को भी जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी थी। सीजेपी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी थी। लेकिन दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। इससे पहले सीजेपी ने 20 जून से 25 जुलाई तक जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ था।

अब सीजेपी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उसने कहा कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन की तारीख नहीं मिली तो फिर आंदोलन करेंगे। सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास सोमवार को प्रदर्शन की अनुमति मांगने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। रांका ने कहा कि संगठन ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में पुलिस को चिट्ठी देकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी है। उन्होंने पुलिस को प्रदर्शन की तारीख तय करने का ऑप्शन भी दिया है।

रांका ने कहा कि किसी वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात नहीं हुई क्योंकि कोई वहां नहीं था। उन्होंने तंज करने के अंदाज में कहा, ‘ऐसा लग रहा था कि सीजेपी के पहुंचने के बाद पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन को खाली करा दिया गया है’। इसी बीच, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने हिरासत का वीडियो एडिट करके जारी किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में वकील से संपर्क करना कानूनी अधिकार है, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई। दीपके ने कहा कि उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

Ranvir Shorey: ‘सड़कों पर कब्जा करना असल में लोकतंत्र की हत्या है’, रणवीर शौरी ने CJP प्रोटेस्ट की आलोचना की

Ranvir Shorey: एक्टर रणवीर शौरी ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेताओं के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले उनकी हिरासत को लेकर हो रहे विवाद पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर उतरने के बजाय अदालतों और लोकतांत्रिक संस्थाओं का रुख करना चाहिए। उनके ये बयान हुमा कुरैशी, सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा समेत कई बॉलीवुड एक्टर्स द्वारा अधिकारियों के प्रदर्शन को संभालने के तरीके की आलोचना के बीच आए हैं।

उन्होंने आगे कहा- लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन आखिरी रास्ता होना चाहिए। यह न्यायपालिका या विधायिका के अधिकार क्षेत्र को दरकिनार करने का तरीका नहीं है! आपके ‘असहमति के अधिकार’ का मतलब यह नहीं हो सकता कि आप हफ्ते के सातों दिन ‘विरोध-प्रदर्शन’ करें, जिससे देश ठप हो जाए और हम बाकी लोगों की जिंदगी नरक बन जाए! सिर्फ अराजकतावादी, पब्लिसिटी चाहने वाले या बेवकूफ ही पहले से मौजूद कानूनी उपायों का इस्तेमाल किए बिना विरोध-प्रदर्शन करेंगे।”

जब एक X यूजर ने जवाब दिया कि रणवीर को यह नहीं पता कि ‘CJI (मुख्य न्यायाधीश) भी समझौता कर चुके हैं’ तो एक्टर ने इस दावे का मजाक उड़ाते हुए लिखा, “लंबी होती लिस्ट। मैं समझौता कर चुका हूं, दूसरे वोटर समझौता कर चुके हैं, मीडिया समझौता कर चुका है, संसद समझौता कर चुकी है, PMO समझौता कर चुका है, CEC समझौता कर चुका है, SC समझौता कर चुका है… सिर्फ सड़कों पर डफली बजाने वाली, संदिग्ध फंडिंग वाली उन पार्टियों की भीड़ ही भरोसेमंद है, जो चुनाव नहीं जीत पाईं।”

विरोध-प्रदर्शन के बारे में सब कुछ

संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की योजना बनाई थी। वे मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। यह प्रदर्शन जंतर-मंतर पर होना था। लेकिन विरोध-प्रदर्शन से पहले ही दिल्ली पुलिस ने मुंबई से आने के कुछ ही देर बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर दीपके और CJP के दो अन्य नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया। बाद में तीनों को रिहा कर दिया गया। रविवार को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन जारी रहा।

सोमवार को आशुतोष रांका ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की तारीख तय करने के लिए 24 घंटे का समय दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तय समय के अंदर कोई जवाब नहीं मिला तो CJP आगे की कार्रवाई के बारे में फैसला करेगा।