NEET Protest: प्रदर्शनकारी छात्रों की कानूनी लड़ाई के लिए आगे आए कपिल सिब्बल, CJP लीगल फंड में दिए ₹1 करोड़

Kapil Sibal: राज्यसभा सांसद और सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने सोमवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के लीगल एड फंड में 1 करोड़ रुपये का योगदान देने की घोषणा की। यह फंड NEET से जुड़े हालिया विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस केस का सामना कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए बनाया गया है।

सिब्बल ने कहा कि यह फंड अलग-अलग राज्यों में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों पर नजर रखने और वकीलों के नेटवर्क के जरिए कानूनी मदद मुहैया कराने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि बिहार, असम, बंगाल और महाराष्ट्र जैसी जगहों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए और उनके खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग की।

वहीं, दूसरी तरफ CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केंद्र के आश्वासन के बावजूद, देश भर में छात्रों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने बताया कि CJP सुप्रीम कोर्ट के वकील के संपर्क में है ताकि पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए गए छात्रों के लिए कानूनी मदद ली जा सके।

कपिल सिब्बल ने दी आर्थिक मदद

दास के साथ बैठे कपिल सिब्बल ने CJP को आर्थिक मदद के अपने फैसले पर सहमति जताई।

उन्होंने कहा, “मैंने कहा है कि भारत में जहां भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए हैं – चाहे वह बिहार, असम, बंगाल या महाराष्ट्र हो – और जहां छात्रों या प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया गया है, वहां सरकारों द्वारा दर्ज किए गए कानूनी मामलों पर नजर रखने के लिए हमने एक सिस्टम बनाने का फैसला किया है, ताकि हमारे वकील कानूनी मदद दे सकें। हमने मांग की है कि कोई FIR दर्ज नहीं होनी चाहिए, और अगर दर्ज की गई हैं, तो उन्हें वापस लिया जाना चाहिए।”

सिब्बल ने कहा कि CJP एक वेबसाइट बनाएगी जिसमें FIR का सामना कर रहे छात्रों की जानकारी होगी और जो वकील मुफ्त (प्रो बोनो) या अन्य कानूनी मदद देने के इच्छुक हैं, वे इस पहल से जुड़ सकेंगे।

उन्होंने आगे कहा, “मैंने अपनी तरफ से 1 करोड़ रुपये का योगदान दिया है, और मैं पूरे भारत के वकीलों से अपील करता हूं कि वे इस फंड में योगदान देकर मदद करें ताकि हम प्रभावित लोगों की मदद कर सकें। हमारे वकील उन लोगों के साथ खड़े हैं, जो कानून के दुरुपयोग से प्रभावित हुए हैं।”

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अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- बापू का शांति का रास्ता आज भी सबसे प्रासंगिक

sonam wangchuk on rajghat

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ सीधे दिल्ली के राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शांति के रास्ते हर हल मुमकिन है। बापू का रास्ता आज भी प्रासंगिक है। ALSO READ: बिहार छात्र आंदोलन पर AK-47 से फायरिंग करने वाला सिपाही सस्पेंड, भाजपा सांसद संबित पात्रा घिरे

 

वांगचुक ने कहा कि 26 दिन के अनशन और इस आंदोलन के अंत पर मैं सबसे पहले बापू को याद करने के लिए राजघाट आना चाहता था। मैं देश को बताना चाहता था कि उनका बताया गया रास्ता आज भी उतना ही उपयुक्त है जितना 100 साल पहले था।

उन्होंने कहा कि मेरी समझ है कि ये तरीके जनता के दिल तक संदेश पहुंचाते हैं। इस बार मुझे यह तसल्ली हुई कि यह देश के स्तर पर प्रासंगिक है। मैं लोगों से कहता हूं कि वे बापू द्वारा शांति के मार्ग पर चलकर ही अपनी बात रखें। मैं सभी नागरिकों को बधाई देता हूं। ALSO READ: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?

 

वीडियो संदेश में क्या बोले सोनम वांगचुक

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सेहत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह अब काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं। वह धीरे-धीरे भोजन कर रहे हैं और उनके शरीर में ताकत लौट रही है। उन्होंने अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ को भी धन्यवाद दिया।

वांगचुक ने लद्दाख के आंदोलन को मिले व्यापक समर्थन के लिए जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह सभी के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने लोगों की एकजुटता और अपनी आवाज उठाने की सराहना की। वांगचुक ने अपने संदेश में आंदोलन की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह जीत उन सभी की है जिन्होंने इस मुहिम में साथ दिया।

 

गौरतलब है कि सीजेपी के आंदोलन की सबसे अहम कड़ी सोनम वांगचुक का अनशन ही था। सोनम वांगचुक की 26 दिनों की भूख हड़ताल ने बड़ी संख्या में युवाओं को जंतर मंतर की ओर आने के लिए प्रेरित किया। वांगचुक आ अनशन समाप्त होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?

mahesh jethmalani, tavleen singh and saurabh dass on CJP party viral video

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें सीजेपी से जुड़े कई लोग एक होटल में पार्टी करते दिखाई दे रहे हैं। इससे अलावा प्रदर्शनस्थल पर सीजेपी कार्यकर्ताओं के जश्न मनाते वीडियो भी जमकर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो पर मचे बवाल के बाद सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रख्यात लेखिका तवलीन सिंह के जवाब भी चर्चा में है। ALSO READ: धर्मेंद्र प्रधान पर पोस्ट से BJP में बवाल! अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता राहर घिरीं, पार्टी नेताओं ने जताई नाराजगी

 

महेश जेठमलानी ने उठाए फंडिंग पर सवाल?

इस वीडियो को सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया है। वायरल वीडियो में CJP के कुछ लोग एक होटल में पार्टी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहां जश्न का माहौल है और नाच-गाना भी चल रहा है।

महेश जेठमलानी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'क्या सच में ऐसा हो रहा है? CJP की लीडरशिप दिल्ली के एक होटल में पार्टी दे रही है। राजधानी दिल्ली में कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुए। ऐसे में सवाल यह है कि इनके ट्रैवल, खाने और रहने का खर्च किसने उठाया? इनकी फंडिंग किसने की? ALSO READ: 'बेटी के बयान से दुखी हूं, लेकिन पिता को दोष नहीं दे सकते'— केशव महंता के बचाव में बोले हिमंत बिस्वा सरमा

तवलीन सिंह ने दिया जवाब

तवलीन सिंह ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, भाजपा अब कॉकरोच को एक 'फाइव-स्टार होटल' में पार्टी करते हुए दिखाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है। क्या हम यह पूछ सकते हैं कि इतने सारे भाजपा मंत्रियों और उनकी संतानों के पास डिजाइनर कपड़े और कार्टियर के चश्मे खरीदने के लिए पैसे कहाँ से आते हैं? ALSO READ: प्रधान के बाद अब गडकरी निशाने पर! 100% शुद्ध पेट्रोल के लिए 'E20 जनता पार्टी' मैदान में

 

क्या बोले सौरव दास?

कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद सीजेपी के कार्यकर्ताओं साथ पार्टी और डांस करने के वायरल वीडियो पर की जा रही टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है। सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'इससे एक बार फिर साफ़ हो जाता है कि सरकार और गोदी एंकर, जेन-ज़ी और नई पीढ़ी की सोच और भाषा को समझ ही नहीं पा रहे हैं।'

 

उन्होंने कहा कि हम जितने दिन जरूरत होगी, उतने दिन सड़क पर बैठ सकते हैं। हम नाचते-गाते हुए भी प्रदर्शन कर सकते हैं। हम हाथ में कोल्ड कॉफी लेकर भी आंदोलन को संगठित कर सकते हैं। बदलाव के लिए लड़ने के लिए हमारा वैसा दिखना जरूरी नहीं है, जैसा पिछली पीढ़ियां किसी आंदोलन से उम्मीद करती हैं।

सौरव दास ने कहा कि यही इस पीढ़ी की पहचान है-आत्मविश्वासी, रचनात्मक, जुझारू और ऐसी, जिसे किसी एक तयशुदा छवि में बांधा नहीं जा सकता। अंकल-आंटी चाहे जितनी शिकायत करते रहें, उन्हें हमारी इस पीढ़ी के साथ जीना और हमें स्वीकार करना ही होगा।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद क्या होगा CJP का अगला कदम? कॉकरोच जनता पार्टी ने खुद किया खुलासा

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) फिलहाल खुद को एक राजनीतिक पार्टी के बजाय युवाओं के आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। संगठन ने अभी यह साफ नहीं किया है कि वह भविष्य में पूरी तरह चुनावी राजनीति में उतरेगा या नहीं। 37 दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के खत्म होने के बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस समय संगठन का मुख्य लक्ष्य चुनाव लड़ना नहीं है। उन्होंने बताया कि उनकी प्राथमिकता देशभर में संगठन का विस्तार करना, ज़्यादा से ज़्यादा युवाओं तक पहुंचना और जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।

क्या होगा सीजेपी का अगला कदम?

सौरव दास ने कहा कि संगठन का लक्ष्य अभी पूरी तरह साफ है। उनकी प्राथमिकता आंदोलन को देश के हर हिस्से और गांव-शहर तक पहुंचाना है। इसके लिए संगठन पूरे भारत में दौरा करेगा और युवाओं से सीधे बातचीत करेगा। उन्होंने कहा कि हाल के अनुभवों से यह पता चला है कि युवाओं और सरकार के बीच संवाद की बड़ी कमी है। उन्होंने कहा, “पिछले एक महीने में हमें महसूस हुआ कि बहुत से लोगों के पास अपनी समस्याएं और बातें रखने के लिए कोई मंच नहीं है। इसलिए हम जमीनी स्तर पर जाकर लोगों की बात सुनेंगे और उनसे जुड़ेंगे।”

सौरव दास का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चर्चा हो रही है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) भविष्य में चुनावी राजनीति में उतर सकती है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के आरोपों और शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग को लेकर संगठन के लंबे आंदोलन ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य

सौरव दास ने कहा कि संगठन का लक्ष्य अभी पूरी तरह साफ है। उनकी प्राथमिकता आंदोलन को देश के हर हिस्से और गांव-शहर तक पहुंचाना है। इसके लिए संगठन पूरे भारत में दौरा करेगा और युवाओं से सीधे बातचीत करेगा। उन्होंने कहा कि हाल के अनुभवों से यह पता चला है कि युवाओं और सरकार के बीच संवाद की बड़ी कमी है। उन्होंने कहा, “पिछले एक महीने में हमें महसूस हुआ कि बहुत से लोगों के पास अपनी समस्याएं और बातें रखने के लिए कोई मंच नहीं है। इसलिए हम जमीनी स्तर पर जाकर लोगों की बात सुनेंगे और उनसे जुड़ेंगे।” सौरव दास का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चर्चा हो रही है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) भविष्य में चुनावी राजनीति में उतर सकती है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के आरोपों और शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग को लेकर संगठन के लंबे आंदोलन ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

फिलहाल संगठन ने चुनाव लड़ने की कोई घोषणा नहीं की है। सौरव दास के बयान से साफ है कि अभी उनकी प्राथमिकता संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाना है। उनका कहना है कि किसी भी राजनीतिक फैसले से पहले संगठन देशभर में अपना नेटवर्क मजबूत करेगा और लोगों की आवाज़ बनने की कोशिश जारी रखेगा।

खत्म हुआ आंदोलन

केंद्र सरकार की ओर से संगठन की कई मांगों पर विचार करने का भरोसा मिलने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार को अपना विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया। संगठन की प्रमुख मांगों में नीट के उन अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल था, जिन्होंने आत्महत्या की, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेना और परीक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा करना भी शामिल था।

विरोध प्रदर्शन उसी दिन खत्म हुआ, जिस दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस बीच, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर समर्थकों का आभार जताया। उन्होंने इसे “युवाओं की बड़ी जीत” बताया।

अभिजीत दिपके ने कहा कि आंदोलन खत्म होने के बाद उन्हें काफी राहत महसूस हो रही है। उन्होंने कहा, “अब मैं सुकून से सो सकता हूं और अपने घर में बिना किसी चिंता के सुबह उठ सकता हूं। अब यह सोचने की जरूरत नहीं रहती कि आगे क्या होगा या शाम तक क्या स्थिति बनेगी। मन में अब कोई घबराहट नहीं है।” उन्होंने आंदोलन का साथ देने वाले सभी समर्थकों का धन्यवाद किया। दिपके ने कहा कि कई लोगों ने आलोचनाओं के बावजूद संगठन पर भरोसा बनाए रखा और हर कदम पर उनका साथ दिया। साथ ही, उन्होंने उन लोगों का भी आभार जताया जिन्होंने आंदोलन और उसके अभियान पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, ऐसी आलोचना और सवालों से संगठन को अपनी कमियों को समझने और खुद को पहले से बेहतर बनाने में मदद मिली।

Dharmendra Pradhan Resigns: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर रणवीर शौरी ने उठाए सवाल, बोले- सपोटर्स की न सुनके सड़क पर मौजूद कॉकरोच…

Dharmendra Pradhan Resigns: NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हफ़्तों तक चले छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद, जहाँ बॉलीवुड के ज़्यादातर लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया, वहीं अभिनेता रणवीर शौरी की राय कुछ अलग थी। जब सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें मान लीं और दिल्ली के जंतर-मंतर पर जश्न मनाया जाने लगा, तो शौरी ने इस फ़ैसले के समय पर सवाल उठाए और इसे ‘जनता के दबाव में कामकाज’ बताते हुए इसकी आलोचना की।

अभिजीत दिपके और सौरव दास की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में 36 दिनों तक चले आंदोलन के बाद प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफ़ा दे दिया। इस आंदोलन में छात्र परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे थे। CJP नेताओं के साथ बातचीत के बाद, केंद्र सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज FIR वापस लेने और NEET विवाद से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवज़ा देने पर भी सहमत हो गई। मांगें माने जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर चल रहा धरना-प्रदर्शन ख़त्म कर दिया।

प्रधान के इस्तीफ़े की ख़बर सामने आते ही, रणवीर शौरी ने X (पहले ट्विटर) पर हैरानी ज़ाहिर करते हुए एक GIF के ज़रिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “और एक ही झटके में मोदी सरकार अपने किसी भी दुश्मन को तो नहीं जीत पाई, लेकिन अपने कई समर्थकों को जरूर नाराज कर दिया। #masterstroke,” और साथ में ताली बजाने वाले इमोजी भी लगाए।

जब एक सोशल मीडिया यूज़र ने पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि प्रधान को NEET पेपर लीक विवाद पर इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए था, तो शोरी ने अपनी बात विस्तार से बताई। उन्होंने लिखा, “हां, लेकिन उन्हें यह तब करना चाहिए था जब सड़कों पर हालात इतने खराब नहीं हुए थे। अब ऐसा लगता है कि समर्थकों की बात नहीं सुनी जाएगी, बल्कि सड़कों पर मौजूद ‘कॉकरोच’ की बात सुनी जाएगी!”

हाल के हफ़्तों में कई एक्टर्स और म्यूज़िशियन्स ने ऑनलाइन और प्रदर्शनों में शामिल होकर स्टूडेंट मूवमेंट का खुलकर समर्थन किया है। प्रकाश राज, शबाना आज़मी और रैपर हनुमankind ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा ने सोशल मीडिया पर अपना समर्थन जताया, जबकि गुरफतेह पीरजादा, प्रतिभा रांटा, शालिनी पांडे और कई अन्य लोगों ने मुंबई में हुए प्रदर्शनों में भाग लिया।

फाउंडर अभिजीत दिपके की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन NEET पेपर लीक को लेकर शुरू हुए थे, लेकिन जल्द ही ये शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग करने वाले एक बड़े युवा आंदोलन में बदल गए। सोनम वांगचुक ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया और भूख हड़ताल की थी, जिसे उन्होंने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के अंतिम दौर से पहले खत्म कर दिया।

प्रधान के इस्तीफ़े के बाद जंतर-मंतर पर जश्न मनाया गया। छात्रों ने नारे लगाए और इस घटनाक्रम को आंदोलन की जीत बताया। CJP ने इस्तीफ़े को एक अहम पड़ाव बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बड़े सुधारों के लिए उनका अभियान मंत्री के हटने के बाद भी जारी रहेगा।

NEET विवाद के बीच प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, पदभार संभालते ही कही बड़ी बात

छात्रों के विरोध प्रदर्शन और नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के  इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि वह 'पूर्ण विनम्रता और कर्तव्य भावना' के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। पदभार संभालने के बाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन पर भरोसा जताते हुए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने इसके लिए पीएम मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि वह उनके मार्गदर्शन में पूरी ईमानदारी से काम करेंगे तथा शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।

 

63 वर्षीय प्रह्लाद जोशी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले चार से पांच वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शिक्षा क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था के तहत देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

 

जोशी ने कहा, “पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया और शिक्षा क्षेत्र में कई अहम पहल की गईं। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत देश ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है।”

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में वह अपनी पूरी क्षमता और समर्पण के साथ नई जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों—उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय—का कार्यभार भी संभालते रहेंगे। वह कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं।

 

धर्मेंद्र प्रधान ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच इस्तीफा दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि उन्होंने छात्रों के हित और यह सुनिश्चित करने के लिए कि आंदोलन का दुरुपयोग “राष्ट्रविरोधी ताकतें” न कर सकें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा है।

 

प्रधान ने अपने पत्र में कहा, “जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जो स्थिति बनी है, उसका फायदा राष्ट्रविरोधी ताकतों को नहीं उठाने दिया जाना चाहिए। देश की एकता बनी रहनी चाहिए और भारत के प्रत्येक छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में नहीं फंसना चाहिए। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया है।”

 

उधर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों व आयोजकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के आश्वासन के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा 49 दिनों का आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया।

 

यह फैसला सीजेपी प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच हुई तीन दौर की वार्ता के बाद लिया गया। इन बैठकों में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह भी शामिल रहे। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन ने सरकार के आश्वासनों पर भरोसा जताते हुए आंदोलन समाप्त किया है और उम्मीद है कि तय समयसीमा के भीतर सभी सहमत शर्तों को लागू किया जाएगा।

CJP ने जंतर-मंतर पर धरना खत्म करने का किया ऐलान, सरकार के साथ इन तीन मांगों पर बनी सहमति

छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के 37 दिन बाद भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं इस इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अब अपना प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया है। सरकार के साथ बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि पार्टी अच्छे विश्वास के साथ अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा करती है। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ जिन शर्तों पर सहमति बनी है, उन्हें तय समय-सीमा के भीतर लागू किए जाने के भरोसे पर यह फैसला लिया गया है।

धरना खत्म करने का ऐलान

सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि उनकी दूसरी बड़ी मांग प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की थी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि सभी बीजेपी शासित और बीजेपी समर्थित राज्यों में दर्ज मामलों पर लागू होगी। सरकार ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है और भरोसा दिया है कि सभी एफआईआर जल्द वापस ली जाएंगी।

सरकार के साथ तीनों मांगों पर बनी सहमति

सौरव दास ने बताया कि सरकार उन्हें दर्ज सभी एफआईआर की कॉपी भी उपलब्ध कराएगी। उनके अनुसार, अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली में करीब 15 से 20 एफआईआर दर्ज हुई हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि तीन से चार दिनों के भीतर सभी कॉपी उन्हें सौंप दी जाएंगी। उन्होंने आगे कहा कि सीजेपी ने सरकार को एक लिखित गारंटी का मसौदा भी दिया है। सरकार ने कहा है कि वह मंगलवार तक इस पर अपनी ओर से जवाब साझा करेगी। सौरव दास ने उम्मीद जताई कि मंगलवार तक उन्हें एफआईआर वापस लेने और भविष्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को लेकर सरकार की लिखित गारंटी मिल जाएगी।

सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दौर की बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर कई दिनों से चल रहे प्रदर्शन के दौरान उनकी तीन प्रमुख मांगें थीं। हली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। दूसरी मांग प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और कानूनी मामलों को वापस लेने की थी, साथ ही भविष्य में उनके खिलाफ कोई नया मामला दर्ज न करने की गारंटी देने की थी। तीसरी मांग उन परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की थी, जिन्होंने नीट परीक्षा नहीं होने के बाद अपने परिजनों को खो दिया। आशुतोष रंका ने कहा कि कुछ ही देर पहले धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही उनकी पहली मांग पूरी हो गई है।

कॉकरोच जनता पार्टी की इन दो शर्तों पर सरकार की सहमति! सामने आई ये बड़ी बात

Cockroach Janta Party Protest: राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी का NEET पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन जारी है। वहीं शुक्रवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में सीजेपी के डेलिगेशन सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और CJP प्रवक्ता सौरभ दास, आशुतोष रांका शामिल हुए।बैठक के बाद सीजेपी ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उनकी दो मांगों पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई है और बातचीत का दौर अभी जारी है।

रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार ने नीट पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और इस मामले को लेकर हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्र कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों को वापस लेने के मुद्दे पर सकारात्मक रुख दिखाया है। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार ने उनकी कुछ मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि सरकार जल्द ही प्रतिनिधिमंडल के साथ एक और बैठक करेगी, ताकि बाकी मुद्दों पर भी बातचीत आगे बढ़ाई जा सके।

जेपी नड्डा से बैठक में CJP ने रखीं चार मांगें

सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक में संगठन ने सरकार के सामने अपनी चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें नीट परीक्षा विवाद के कारण कथित तौर पर अपने बच्चों को खोने वाले परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग शामिल थी।

करीब दो घंटे चली इस बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखीं। इसके अलावा, देश की परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए पांच सुझाव भी दिए गए। जेपी नड्डा ने कहा, “बैठक करीब दो घंटे तक चली। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी तीन प्रमुख मांगें और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए पांच सुझाव हमारे सामने रखे। हमने उनसे कहा है कि कल दोपहर फिर बैठक होगी। तब तक सरकार इन मुद्दों पर चर्चा करेगी और उन्हें अपना जवाब देगी।”

CJP ने  गारंटी की भी मांग की

सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि सरकार ने उनकी कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। उनके अनुसार, केंद्र ने नीट परीक्षा विवाद से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई है। सौरव दास ने यह भी मांग की कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ आगे कोई नई एफआईआर दर्ज न की जाए। साथ ही, सरकार लिखित रूप में यह भरोसा दे कि भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी को निशाना नहीं बनाया जाएगा।

वहीं, सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने भी कहा कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों में से दो पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि 1 करोड़ रुपये के मुआवजे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों को वापस लेने की मांग पर केंद्र ने सैद्धांतिक सहमति जताई है। आशुतोष रंका ने कहा कि उनकी मांग सिर्फ पहले से दर्ज एफआईआर वापस लेने तक सीमित नहीं है। संगठन चाहता है कि सरकार लिखित गारंटी दे कि भविष्य में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई एफआईआर या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

CJP का बड़ा दावा: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार ने मांगा एक दिन का वक्त, कल होगा बड़ा फैसला!

राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी का बीते 20 जून से प्रदर्शन जारी है। वहीं इस प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी और सरकार के बीच शुक्रवार को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक हुई। इसमें सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और CJP की तरफ से सौरभ दास, आशुतोष रांका शामिल हुए।

बैठक के बाद CJP के प्रवक्ताओं ने कहा,’हम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं करेंगे। दो घंटे की बातचीत में CJP ने सरकार के सामने 3 प्रमुख मांगें और परीक्षा प्रणाली में सुधार के 5 सुझाव रखे हैं।’

 सरकार के सामने सीजेपी ने रखे तीन मांग

वहीं बैठक के बाद सीजेपी ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उनकी सबसे बड़ी मांग, यानी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर जवाब देने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं। उन्होंने बताया कि सबसे पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है।

सौरव दास ने कहा कि पार्टी ने उन परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग की है, जिन्होंने नीट परीक्षा विवाद के बाद अपने बच्चों को खो दिया। इसके अलावा, जुलाई में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई एफआईआर या कानूनी मामला दर्ज न करने की मांग की गई है। अगर पहले से ऐसे मामले दर्ज हैं, तो उन्हें वापस लेने की भी मांग की गई है।

सीजेपी ने किया ये दावा

सीजेपी का दावा है कि सरकार ने उनकी दो मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। इनमें नीट विवाद से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों व युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करने की मांग शामिल है। हालांकि, पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार ने फैसला लेने के लिए थोड़ा और समय मांगा है। सौरव दास ने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर सरकार के साथ विस्तार से बातचीत हुई है। सरकार ने इस पर जवाब देने के लिए कल तक का समय मांगा है। अगर इस्तीफा नहीं दिया गया, तो हमारा आंदोलन और तेज किया जाएगा।”

जानें केंद्र सरकार ने क्या कहा

केंद्र सरकार ने अभी तक सीजेपी की ओर से बैठक के बाद किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यह बैठक नई दिल्ली के विठ्ठल पटेल हाउस में हुई थी। इसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका शामिल हुए। सीजेपी का कहना है कि वह बातचीत के लिए तब तैयार हुई, जब सरकार ने उसकी दो अहम शर्तों पर सहमति जताई। इनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करना और परीक्षा विवाद से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देना शामिल है। हालांकि, पार्टी ने साफ कहा है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी सबसे बड़ी मांग है और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

शनिवार को फिर होगी बातचीत

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच करीब दो घंटे तक बातचीत हुई। इस दौरान सीजेपी की मांगों और देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के सुझावों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि यह बातचीत शनिवार को भी जारी रहेगी। जेपी नड्डा ने कहा, “सीजेपी का प्रतिनिधिमंडल हमसे मिलने आया था। हमने उनकी सभी बातें ध्यान से सुनीं और कई मुद्दों पर चर्चा की। अब शनिवार दोपहर फिर बैठक होगी, जिसमें बातचीत को आगे बढ़ाया जाएगा।”

उन्होंने बताया कि सीजेपी ने सरकार के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखीं। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए पांच सुझाव भी दिए। जेपी नड्डा ने कहा, “करीब दो घंटे तक बैठक चली। हमने प्रतिनिधिमंडल से कहा है कि शनिवार दोपहर फिर मुलाकात होगी। तब तक सरकार इन मांगों और सुझावों पर चर्चा करेगी और उन्हें अपना जवाब देगी।”

जंतर-मंतर पर दिपके का साया बने आशुतोष रांका कौन हैं? जानें IIT, LSE और मैकिन्से से आंदोलन तक का सफर

Who is Ashutosh Ranka: IIT कानपुर से इंजीनियरिंग, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई और फिर लंदन में मैकिन्से जैसी ग्लोबल कंपनी में भारी-भरकम पैकेज वाली नौकरी! आम तौर पर लोग ऐसे करियर का सपना देखते हैं, लेकिन आशुतोष रांका इस सब से आगे बढ़कर देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन चुके हैं। NEET पेपर लीक को लेकर CJP के ‘पॉलिसी हेड’ के रूप में केंद्र सरकार से सीधी बात करने वाले आशुतोष रांका कौन हैं और कैसे एक कॉर्पोरेट कंसल्टेंट छात्रों की सबसे बड़ी आवाज बन गया, आइए आपको बताते हैं।

कौन हैं आशुतोष रांका?

आशुतोष रांका ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आधिकारिक प्रवक्ता हैं। उन्हें इस पूरे आंदोलन का ‘पॉलिसी माइंड’ माना जा रहा है, क्योंकि वे शिक्षा सुधारों और सरकारी नीतियों के खिलाफ तार्किक और नीतिगत ड्राफ्ट तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर से पढ़ाई की है और इसके बाद लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) जैसी विश्व प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की है। CJP में शामिल होने से पहले आशुतोष रांका लंदन में दुनिया की दिग्गज कंसल्टिंग फर्म मैकिन्से एंड कंपनी (McKinsey & Company) में कंसल्टेंट के रूप में काम कर चुके हैं।

फिलहाल वो आंदोलन की नीतिगत रणनीति, शिक्षा सुधारों के ड्राफ्ट और केंद्र सरकार के साथ बातचीत में CJP का प्रतिनिधित्व कर रहे है।

कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ आंदोलन का हिस्सा क्यों बने?

जब जून में CJP ने अपने प्रवक्ताओं के पैनल का ऐलान किया, तब आशुतोष रांका के शानदार एकेडमिक और प्रोफेशनल बैकग्राउंड को खास तौर पर हाईलाइट किया गया। IIT कानपुर, LSE और मैकिन्से जैसी ग्लोबल कंपनियों में काम करने के अनुभव के कारण उनके पास नीतियों के विश्लेषण और रणनीतिक समझ का गहरा अनुभव है। नीट परीक्षा में हुई धांधली के बाद उन्होंने अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल छात्रों की मांगों को कानूनी और नीतिगत रूप से मजबूत बनाने के लिए किया।

केंद्र सरकार के साथ बातचीत में अहम भूमिका

NEET आंदोलन के तहत जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच आशुतोष रांका ने सरकार के साथ बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सौरव दास के साथ आशुतोष रांका भी उस दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे, जिसने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कर छात्रों की मांगों का ड्राफ्ट सौंपा। वे केवल परीक्षा रद्द करने या जांच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली में दीर्घकालिक और पारदर्शी सुधारों की रूपरेखा पर भी काम कर रहे हैं।

जंतर-मंतर पर डटे हैं CJP संस्थापक

जहां आशुतोष रांका और सौरव दास सरकार के साथ टेबल टॉक संभाल रहे हैं, वहीं CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र अभिजीत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से किए जाने वाले एक बयान के विरोध में इस पार्टी की नींव रखी थी।