अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में गोविंद देव गिरि के प्रमोशन पर उठे सवाल

​ram mandir trust govind dev giri: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। चढ़ावा विवाद के चलते चंपत राय की जिम्मेदारी अब गोविंद देव गिरि को सौंपी गई है। दिल्ली के महेश भागचंदका को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। गिरि को महासचिव बनाए जाने के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं। उनके बारे में कहा जा रहा है उनके कोषाध्यक्ष रहते हुए ही चढ़ावा में चोरी की घटना हुई थी। कोष के लिए कोषाध्यक्ष ही सीधे जिम्मेदार माना जाता है। ऐसे में महासचिव के रूप में गोविंद गिरि का नाम लोगों के गले नहीं उतर रहा है। 

क्या कहा गोविंद देव गिरि ने?

​ट्रस्ट के नवनियुक्त महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट किया कि नई टीम का मुख्य लक्ष्य अयोध्या को दुनिया की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विकसित करना और मंदिर निर्माण के साथ-साथ ट्रस्ट के प्रशासनिक व वित्तीय कामकाज को पूरी पारदर्शिता से आगे बढ़ाना है।

 

​बैठक में वित्तीय व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने, चढ़ावे की गिनती में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और SIT जांच से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रस्ट का रुख स्पष्ट किया गया। आने वाले दिनों में जरूरत पड़ने पर ज्वाइंट या डिप्टी CEO की नियुक्ति के लिए जल्द ही SOP और दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे।

चंपतराय का दबदबा बरकरार

महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके चंपत राय का सीधे-सीधे तो नहीं, लेकिन परोक्ष रूप से ट्रस्ट में उनका दबदबा बरकरार है। दरअसल, नए कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका अशोक सिंघल फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी हैं। चंपत राय इस ट्रस्ट के आजीवन ट्रस्टी हैं। ट्रस्ट के नए सदस्य महेश पांडेय को भी चंपत राय का करीबी माना जाता है। हालांकि अध्यक्ष और महासचिव के पद अब संत समाज के पास हैं।  

 

उल्लेखनीय है कि ट्रस्ट के प्रशासनिक संचालन को सुदृढ़ करने के लिए पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) चुना गया है। इस पद के लिए 16 अभ्यर्थियों में से तीन नाम—एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह और श्रुति भारद्वाज—शॉर्टलिस्ट किए गए थे, जिसमें से जितेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम सहमति बनी।

 

​इनके अलावा अयोध्या निवासी ​वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय, जिन्होंने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में रामलला की ओर से प्रभावी कानूनी पैरवी की थी। शिक्षाविद डॉ. निर्मला यादव को भी ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया। 

देवरिया के रहने वाले पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के पहले CEO, ऑपरेशन सिंदूर के समय की इनकी कहानी जानिए

Ram Mandir CEO: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अपनी भूमिका के लिए ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ पाने वाले रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि मंदिर का चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) चुना गया है। यह फैसला तब लिया गया जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अयोध्या में हुई एक बैठक में CEO की नियुक्ति पर विचार विमर्श किया।

इसके अलावा, ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त किए: दिल्ली के महेश भागचंदका (जो VHP के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं), अयोध्या के मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की निर्मला यादव।

भारतीय वायु सेना के सम्मानित पूर्व कमांडर अप्रैल 2026 में रिटायर हुए थे और अब वे मंदिर ट्रस्ट के कामकाज के विस्तार के साथ एक अहम प्रशासनिक भूमिका संभालेंगे।

बता दें कि मिश्रा उन सीनियर मिलिट्री कमांडरों में शामिल थे जिन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनकी लीडरशिप के लिए सम्मानित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी शानदार सेवाओं और महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया था।

यह मेडल युद्ध, संघर्ष या सैन्य कार्रवाई के दौरान सबसे बेहतरीन सेवा के लिए दिया जाता है और यह भारत के सबसे बड़े युद्ध-कालीन मिलिट्री सम्मानों में से एक है।

जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के हवाई हमलों के बारे में बताया

हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में, मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चलाए गए हवाई अभियान के बारे में बात की और बताया कि कैसे भारतीय सेना ने पाकिस्तान के अंदर काफी दूर मौजूद ठिकानों की पहचान की और उन पर हमला किया।

उन्होंने एक ऑपरेशन का जिक्र करते हुए बताया कि करीब 314 किलोमीटर दूर स्थित एक टारगेट को नष्ट किया गया था। मिश्रा के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान सिर्फ एक छोटा सा ऑपरेशनल निर्देश दिया गया और इसके बाद टारगेट को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया गया।

ऑपरेशन के बारे में बात करते हुए, मिश्रा ने प्लानिंग, सटीकता, टेक्नोलॉजी और सशस्त्र बलों की अलग-अलग शाखाओं के बीच तालमेल के महत्व पर जोर दिया। हालांकि, ऑपरेशन से जुड़ी कई बातें अभी भी गोपनीय रखी गई हैं।

उनकी बातों से एयर कैंपेन की प्लानिंग और उसे अंजाम देने के बारे में कुछ खास जानकारी मिली, हालांकि, उन्होंने ऐसी कोई संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की, जिसका सार्वजनिक किया जाना सुरक्षा के लिहाज से ठीक न हो।

जितेंद्र मिश्रा का उत्तर प्रदेश से है खास कनेक्शन

मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा के रहने वाले हैं, जो अयोध्या से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे की दूरी पर है। वे एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं और उनके पिता बतौर लेक्चरर काम करते थे।

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में एक अहम प्रशासनिक पद संभालने के बाद अब उनका उत्तर प्रदेश से और खास जुड़ाव हो गया है।

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर जितेंद्र मिश्रा क्या करेंगे?

CEO के तौर पर, मिश्रा से उम्मीद है कि वे मंदिर ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज को संभालेंगे और इसके बढ़ते हुए ऑपरेशन्स में तालमेल बिठाएंगे।

उनकी जिम्मेदारियों में तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं, वित्तीय इंतजाम, स्टाफ के बीच तालमेल, सुरक्षा से जुड़ा तालमेल और बड़े धार्मिक आयोजनों का प्रबंधन शामिल हो सकता है।

अपने मिलिट्री करियर के दौरान बड़े संगठनों को संभालने, ऑपरेशनल प्लानिंग और तालमेल बिठाने का उनका अनुभव इस भूमिका के लिए काम का साबित हो सकता है।

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा कौन हैं?

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (SYSM, AVSM, VSM) भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी हैं, जिन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया है।

रिटायरमेंट से पहले, मिश्रा ने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया। इससे पहले, उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के तौर पर भी काम किया था।

मिश्रा को 6 दिसंबर, 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था।

जितेंद्र मिश्रा का 38 साल का IAF करियर

मिश्रा का मिलिट्री करियर 38 साल से ज्यादा का रहा, जिसमें उन्होंने 3,000 घंटे से ज्यादा की फ्लाइंग का अनुभव हासिल किया।

उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर उड़ाए और फाइटर पायलट, फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया। उन्होंने कई इंस्ट्रक्शनल और स्टाफ पद भी संभाले।

स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, मिश्रा उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल किया था। इन हथियारों का इस्तेमाल बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हमलों में किया गया था।

कारगिल युद्ध में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

IAF में अपने करियर के दौरान मिश्रा ने कई अहम ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने ईस्टर्न सेक्टर में एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर काम किया और बाद में विंग कमांडर के पद पर रहते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक डिवीन में चीफ टेस्ट पायलट बने।

ग्रुप कैप्टन के तौर पर, उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में चीफ टेस्ट पायलट और नई दिल्ली में एयर हेडक्वार्टर में ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के डायरेक्टर के तौर पर काम किया।

जून 2010 में, फ्रांस में होने वाली मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज ‘गरुड़ IV’ में भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने के लिए मिश्रा को चुना गया।

जितेंद्र मिश्रा की सीनियर IAF पोस्टिंग

एयर कमोडोर के तौर पर, मिश्रा ने एयर फोर्स स्टेशन बरेली में 15 विंग और एयर फोर्स स्टेशन पठानकोट में 18 विंग की कमान संभाली।

बाद में उन्होंने एयर हेडक्वार्टर में एयर कमोडोर (एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) के तौर पर काम किया।

एयर वाइस मार्शल के पद पर प्रमोट होने के बाद, मिश्रा ने एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट के कमांडेंट के तौर पर काम किया।

ऑपरेशन सिंदूर में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

मिश्रा को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका के लिए 2025 में स्वतंत्रता दिवस पर ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया था।

उन्हें मिले अन्य सम्मानों में 2024 में मिला ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ (AVSM) और 2013 में मिला ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ (VSM) शामिल हैं।

‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी बेहतरीन सेवा को मान्यता दी और उनके करियर में मिले सैन्य सम्मानों की लंबी सूची में एक और सम्मान जोड़ा।

जितेंद्र मिश्रा वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख कब बने?

मिश्रा को एयर मार्शल के पद पर प्रमोट किया गया और उन्होंने 9 जनवरी, 2023 को इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के डिप्टी चीफ के तौर पर कार्यभार संभाला।

इसके बाद, 5 दिसंबर, 2023 को वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ बने।

1 जनवरी, 2025 को मिश्रा ने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला। उन्होंने एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा की जगह ली, जो 31 दिसंबर, 2024 को रिटायर हुए थे।

बता दें कि 38 साल से ज्यादा के करियर के बाद, मिश्रा अप्रैल 2026 में इंडियन एयर फोर्स से रिटायर हुए।

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राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, ऑपरेशन सिंदूर से भी रहा है नाता

First CEO of Ram Mandir Trust: अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट ने अपने पहले CEO के नाम का ऐलान कर दिया है। वायुसेना के पश्चिमी कमान के चीफ रह चुके एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला CEO बनाया गया है। उनकी नियुक्ति के साथ अब मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और प्रबंधन के कामकाज को संभालने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी।

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राम मंदिर को कल मिल सकता है पहला CEO! 5500 लोगों ने किया था आवेदन, सेलेक्शन कमेटी ने 3 नाम किए शॉर्टलिस्ट

Ayodhya Ram Temple CEO Update: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अयोध्या स्थित राम मंदिर के प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राम मंदिर को बुधवार को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिल सकता है। चयन समिति ने मंगलवार को इस पद के लिए तीन शीर्ष उम्मीदवारों के नामों का एक पैनल तैयार कर सिफारिश दी है। राम मंदिर के पहले सीईओ की दौड़ में रिटायर ब्यूरोक्रेट सबसे आगे बताए जा रहे हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक राम मंदिर के नए सीईओ का चयन बुधवार को मणिरामदास छावनी स्थित राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के आवास पर आयोजित होने वाली बैठक में किया जाएगा।

3 सदस्यीय सर्च कमेटी ने छांटे नाम, 5,500 आवेदनों की हुई स्क्रीनिंग

तीन सदस्यीय सर्च कमेटी अयोध्या पहुंच चुकी है और उम्मीद है कि वह बैठक से पहले ट्रस्ट को अपनी अंतिम शॉर्टलिस्ट सौंप देगी। इस समिति में रिटायर जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और उद्योगपति सुरेश हावरे शामिल हैं। बुधवार को दोपहर 2 बजे से प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में सीईओ की नियुक्ति पर अंतिम फैसला लिए जाने की संभावना है।

मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि इतने बड़े और विश्व प्रसिद्ध मंदिर का श्रेष्ठ प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए हम एक उत्कृष्ट सीईओ की तलाश में थे। इसके लिए हमने जस्टिस (प्रमोद) कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावरे से मार्गदर्शन मांगा था। इस तीन सदस्यीय चयन समिति ने सुबह से शाम तक अथक परिश्रम करते हुए साक्षात्कार लिए।

गोविंद देव गिरि ने बताया कि देश भर से लगभग 5500 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें आईएएस और आईपीएस अधिकारी, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और एनजीओ से जुड़े प्रोफेशनल शामिल थे। चयन समिति ने चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत पहले 3500, फिर 1500 और अंत में 300 उम्मीदवारों को छांटा। प्रारंभिक स्क्रीनिंग के बाद 16 उम्मीदवारों के साक्षात्कार लिए गए। इसके बाद 3 अंतिम शॉर्टलिस्ट किए गए नामों का पैनल तैयार किया गया।

दान के पैसों की चोरी के आरोपों के बाद लिया गया फैसला

राम मंदिर में चंदे के प्रबंधन और दान की चोरी से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद ट्रस्ट की वित्तीय देखरेख पर सवाल खड़े हुए थे। ट्रस्ट ने खुद माना था कि दान की चोरी से उसकी छवि को नुकसान पहुंचा है। इसके बाद 6 जुलाई को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के दैनिक कामकाज और दैनिक संचालन की देखरेख के लिए एक पूर्णकालिक सीईओ नियुक्त करने का निर्णय लिया था।

सेक्रेटरी और अन्य पदों का भी हो सकता है आधिकारिक ऐलान

बुधवार को होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में सीईओ के अलावा दो सदस्यों और जनरल सेक्रेटरी (महासचिव) के पदों के लिए भी नामों की घोषणा की जा सकती है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के सचिव के पद पर भी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। जगदीश आफले मंदिर ट्रस्ट के पहले सचिव होंगे। जब गोविंद देव गिरि से पूछा गया कि क्या बुधवार को नए सीईओ के नाम की घोषणा होगी तो उन्होंने कहा कि यह तय करना ट्रस्ट पर निर्भर है। मुझे उम्मीद है कि ऐसा होगा, लेकिन ट्रस्टी बोर्ड तय करेगा कि इसे अभी करना है या नहीं।

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रामलला से धोखा! चेन्नई की महिला ने 4 करोड़ का दिया था चेक, खाते में सिर्फ 3 रुपए

रामलला से धोखा! चेन्नई की महिला ने 4 करोड़ का दिया था चेक, खाते में सिर्फ 3 रुपए

Ayodhya Ram Mandir fraud: तमिलनाडु के चेन्नई की एक महिला श्रद्धालु ने हाल ही में अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 4 करोड़ रुपए का चेक सौंपा था। महिला की इच्छा थी कि इस राशि का उपयोग विशेष रूप से मंदिर परिसर में तैनात कर्मचारियों की सुविधाओं पर ही किया जाए। इसके लिए उन्होंने ट्रस्ट से एक लिखित आश्वासन की भी मांग की थी। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया था। इसके अलावा महिला ने राम मंदिर के लिए 10 हजार रुपए का अलग से भी दान दिया था।

​खाते में राशि न होने से चेक बाउंस

जब ट्रस्ट ने 4 करोड़ रुपए का यह चेक बैंक में जमा कराया, तो बैंक जांच में महिला के खाते में केवल 3 रुपए ही जमा पाए गए। पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। अब नियमानुसार बैंक महिला को नोटिस भेजकर इतनी बड़ी रकम का फर्जी/अनादरित चेक जारी करने पर जवाब तलब करेगा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

 

​क्या है पूरा मामला?

  • चेन्नई की महिला श्रद्धालु ने राम मंदिर कर्मियों के लिए 4 करोड़ रुपए का चेक दिया था। 
  • ​क्लियरिंग के दौरान उसके खाते में महज 3 रुपए की राशि पाई गई।
  • महिला ने राशि को केवल कर्मचारी कल्याण में खर्च करने का लिखित आश्वासन मांगा था।
  • बैंक नोटिस की तैयारी में है, वहीं ट्रस्ट भी बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहा है।

​इससे पहले भी बाउंस हुए हैं चेक

2020 के निधि समर्पण अभियान के दौरान भी लगभग 100 करोड़ रुपए के चेक बाउंस हुए थे, जिनमें से अधिकांश की बाद में रिकवरी कर ली गई थी। गौरतलब है कि रामलला मंदिर को हर महीने नकद, चेक और ऑनलाइन माध्यमों से करीब 3 से 4 करोड़ रुपये का दान प्राप्त होता है, जिसमें से लगभग 1 से 1.5 करोड़ रुपए सिर्फ चेक के जरिए आते हैं। 4 करोड़ रुपए के इस चेक बाउंस मामले के बाद अब ट्रस्ट और बैंक प्रशासन बड़ी रकम वाले चेक स्वीकार करने और उनकी क्लियरिंग प्रक्रिया में विशेष सतर्कता बरतने की तैयारी कर रहे हैं।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी! 30 बैंक लॉकरों की जांच में जुटी SIT, सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

Ram Mandir Chanda Chori Case: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़ी जांच अब केवल दस्तावेजों की पड़ताल तक सीमित नहीं रह गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने मामले में संपत्तियों और बैंक लॉकरों की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है। राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सभी 30 बैंक लॉकरों में रखी सामग्री का सत्यापन किया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि लॉकरों में वास्तव में कितनी और कौन-कौन सी वस्तुएं मौजूद हैं। साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि क्या उनका डिटेल्स राम मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज इन्वेंट्री से मेल खाता है या नहीं।

‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच टीम ने मंगलवार (26 अगस्त) को भी अपनी कार्रवाई जारी रखी। पूरी प्रक्रिया को वीडियो रिकॉर्ड किया जा रहा है। लॉकर खोलने से लेकर उसमें रखी प्रत्येक वस्तु की जांच तक हर चरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। टीम वस्तुओं की पहचान, उनकी संख्या, उपलब्धता और स्थिति की पुष्टि करने के साथ-साथ संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड से उनका मिलान कर रही है।

रिकॉर्ड और वास्तविक सामान का होगा मिलान

फोरेंसिक सत्यापन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज सामान और लॉकरों में वास्तव में मौजूद सामान में कोई अंतर तो नहीं है। टीम प्रत्येक वस्तु को रिकॉर्ड में दर्ज विवरण से क्रॉस-चेक कर रही है।

जांच के दौरान केवल सामान की गिनती ही नहीं की जा रही, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित वस्तु किस रिकॉर्ड में दर्ज है और मौके पर उसकी वास्तविक स्थिति क्या है। इस पूरी प्रक्रिया के आधार पर एक विस्तृत फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

हर सामान का बनाया जा रहा ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड

जांच की खास बात यह है कि प्रत्येक वस्तु के सत्यापन के दौरान ऑडियो-वीडियो साक्ष्य भी तैयार किया जा रहा है। सामान का डिटेल्स, उसकी पहचान, रिकॉर्ड में उसकी एंट्री और मौके पर उसकी मौजूदगी को डिजिटल तरीके से दर्ज किया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, इन डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से संरक्षित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में न्यायिक कार्यवाही के दौरान उनकी प्रामाणिकता पर सवाल न उठे। इस तरह जांच टीम केवल कागजी रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं रहना चाहती। बल्कि भौतिक साक्ष्यों का भी डिजिटल दस्तावेज तैयार कर रही है।

पेन ड्राइव में सुरक्षित होंगे जांच के दस्तावेज और वीडियो

फोरेंसिक सत्यापन के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट को डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा। जांच से जुड़े दस्तावेजों और वीडियो साक्ष्यों को एक पेन ड्राइव में संकलित कर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करने की भी तैयारी की जा रही है। इससे जांच में सामने आए भौतिक साक्ष्यों का डिजिटल रिकॉर्ड भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेगा।

सितंबर के पहले सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट?

सूत्रों के अनुसार, SIT की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। संभावना जताई जा रही है कि जांच टीम सितंबर के पहले सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर सकती है। वहीं, 2 सितंबर को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक भी प्रस्तावित है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसी बैठक के आसपास SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में सौंप सकती है।

फिलहाल, 30 बैंक लॉकरों की फोरेंसिक जांच को इस मामले की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। इस सत्यापन से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज संपत्तियों और वास्तविक रूप से मौजूद सामान के बीच कोई अंतर है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा भी तय हो सकती है।

आरोपियों पर BNS की गलत धाराएं लगाने का वकील का दावा

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में आरोपियों की ओर से पेश वकील ने मंगलवार को विशेष अदालत में दावा किया कि पुलिस ने मामले की जांच भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गलत धाराओं के तहत की है। आरोपियों के वकील कुल शेखर सिंह ने कहा कि मामले में चोरी और गबन, दोनों की धाराएं लगाई गई हैं। जबकि ये दोनों धाराएं एक साथ लागू नहीं हो सकतीं। सिंह ने अयोध्या के विशेष जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रजत वर्मा की अदालत में यह दलील दी।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कथित चोरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद FIR दर्ज की गई। साथ ही मंदिर में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई लोगों के बयान दर्ज किए।

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सिंह ने यह भी दलील दी है कि पुलिस ने आरोपियों को लोक सेवक के रूप में पेश किया है। जबकि राम मंदिर ट्रस्ट लोक प्राधिकरण नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने लगाई गई धाराओं में आरोपियों को लोक सेवक बताया और उन पर सार्वजनिक संपत्ति के गबन का आरोप लगाया। सिंह ने बताया कि अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अगली सुनवाई के लिए दो सितंबर की तारीख तय की है।

राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO कौन? एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजेश पांडे और पूर्व DM योगेश्वर मिश्रा का नाम रेस में शामिल, जानें कौन हैं ये

Ram Mandir Trust CEO: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। ट्रस्ट की चयन समिति ने शॉर्टलिस्ट किए गए सभी 16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू ले लिए हैं। आपको बता दें कि ट्रस्ट के CEO पद के लिए 5200 एप्लिकेशन मिले थे। इनमें से छंटनी के बाद सिर्फ 16 कैंडिडेट्स को इंटरव्यू कॉल गई थी। इन कैंडिडेट्स की सूची में पूर्व IAS और IPS अधिकारी, सेना के रिटायर अधिकारी, सिक्योरिटी और ऑर्गेनाइजेशनल मैनेजमेंट एक्सपर्ट्स और दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों के प्रशासनिक अनुभव वाले कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पूर्व IPS राजेश पांडे का भी नाम

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद की दौड़ में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडे का भी नाम है। उन्होंने खुद इस बात की पुष्टि की है कि वह मंगलवार को चयन समिति के सामने इंटरव्यू के लिए पेश हुए थे। आपको बता दें कि प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले राजेश पांडे 2003 बैच के IPS अधिकारी हैं। राजेश पांडे पीपीसी से प्रमोट होकर IPS बने थे। राजेश पांडे ने उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) जैसी महत्वपूर्ण यूनिट्स में सर्विस दी है। वह लखनऊ, अलीगढ़, मेरठ और सहारनपुर के SSP रह चुके हैं और हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर्स के लिए जाने जाते हैं।

राजेश पांडे उत्तर प्रदेश में दो बड़े आतंकी मामलों की जांच से जुड़े रहे हैं। पहला 2005 में अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर पर हुआ आतंकी हमला और दूसरा 2006 में वाराणसी में हुए सिलसिलेवार बम धमाके।

काशी कॉरिडोर का काम देख चुके पूर्व IAS योगेश्वर राम मिश्रा भी लिस्ट में शामिल

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व नौकरशाह योगेश्वर राम मिश्रा को भी राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए सबसे मजबूत दावेदारों में से एक माना जा रहा है। योगेश्वर राम मिश्रा का व्यापक प्रशासनिक अनुभव उनकी दावेदारी को मजबूत बनाता है। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम (काशी कॉरिडोर) के के डेवलपमेंट के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसे उनके मंदिर प्रबंधन और प्रशासनिक क्षमता से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

इंटरव्यू में उम्मीदवारों से क्या पूछा गया?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इंटरव्यू के दौरान चयन समिति ने उम्मीदवारों के प्रशासनिक और सामाजिक-धार्मिक बैकग्राउंड को गहराई से परखा। कैंडिडेट्स से उनके पेशेवर करियर और प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ राम मंदिर परिसर की सुरक्षा प्रबंधन को लेकर उनकी समझ पर सवाल किए गए। उम्मीदवारों के मंदिरों में काम करने के पूर्व अनुभव और मंदिर प्रशासन से जुड़ी जटिलताओं की उनकी समझ को जांचा गया। कैंडिडेट्स से सामाजिक और धार्मिक संगठनों से उनकी संबद्धता और हिंदू धार्मिक संस्थाओं के साथ उनके संपर्कों/संबंधों के बारे में भी पूछा गया।

क्यों पड़ी पूर्णकालिक CEO की जरूरत?

ट्रस्ट में पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति का फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है जब राम मंदिर के नाम पर मिलने वाले दान में वित्तीय अनियमितता और गबन के आरोपों के कारण ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठे हैं। इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वित्तीय अनियमितता के आरोपों के बाद ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय समेत तीन अधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसी के बाद ट्रस्ट के प्रबंधन को पारदर्शी और चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए CEO नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

राम मंदिर के पुजारियों का नया ड्रेस कोड लागू, अब बिना सिले वस्त्रों में होगी रामलला की पूजा!

राम मंदिर के पुजारियों का नया ड्रेस कोड लागू, अब बिना सिले वस्त्रों में होगी रामलला की पूजा!

Ram Mandir priest dress code: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विराजित रामलला की सेवा-पूजा कर रहे पुजारियों की वेशभूषा (ड्रेस कोड) में एक बार फिर बड़ा बदलाव किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा नवगठित 'धार्मिक न्यास समिति' की सहमति के बाद यह निर्णय लिया गया है। ​अब राम मंदिर के पुजारी सिलाई किए हुए वस्त्रों के बजाय बिना सिले वस्त्र (धोती और दुपट्टा/अंगवस्त्र) धारण करके ही पूजा-पाठ करेंगे।

क्यों बदला गया ड्रेस कोड?

​इससे पहले ट्रस्ट की ओर से पुजारियों के लिए पीले रंग की सिलाई वाली चौबंदी (कुर्ता/अंगरखा), सफेद धोती और पगड़ी तय की गई थी, जिस पर तीर्थ क्षेत्र का मोनोग्राम भी छपा हुआ था। हाल ही में हुई धार्मिक न्यास समिति की पहली बैठक में संतों ने इस पर आपत्ति जताई। संतों का तर्क था कि सिलाई वाले वस्त्र पहनना अयोध्या की प्राचीन वैष्णव परंपरा के प्रतिकूल है।

​संतों का सुझाव : गर्भगृह में प्रभु की सेवा के दौरान पुजारियों को पूर्णतः वैष्णव मर्यादा के अनुसार केवल बिना सिले वस्त्र ही धारण करने चाहिए। संतों के इस मार्गदर्शन को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि और अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।

​रोस्टर बदलाव के साथ नई व्यवस्था प्रभावी

​बदला हुआ ड्रेस कोड सावन शुक्ल प्रतिपदा (13 अगस्त) से पूरी तरह लागू कर दिया गया है। रामलला के पुजारियों की ड्यूटी का रोस्टर हर माह अमावस्या और पूर्णिमा को बदलता है। सावन कृष्ण अमावस्या तक जो पुजारी सुबह की पाली में थे, वे प्रतिपदा से शाम की पाली में आ गए हैं और नई वेशभूषा के साथ अपनी सेवा दे रहे हैं।

Ram Mandir Chadhawa Chori: यूनिफॉर्म में जेब ही नहीं होगी तो कैसे करेंगे चोरी! राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती के नए नियम सामने आए

Ram Mandir Chadhawa Chori: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था को और ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कई बड़े बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था में दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों की यूनिफॉर्म से लेकर CCTV निगरानी, सुरक्षा जांच और मंदिर परिसर से बैंक तक कैश पहुंचाने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इन बदलावों का मकसद गिनती के दौरान सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही को मज़बूत करना है। राम मंदिर में कथित दान और चढ़ावा चोरी के बाद यह एक्शन लिया गया है।

अब कर्मचारियों की यूनिफॉर्म में नहीं होंगी जेबें

राम मंदिर में दान की गिनती में शामिल कर्मचारियों के लिए नई यूनिफॉर्म पहले ही लागू की जा चुकी है। खास बात यह है कि इन वर्दियों में जेब नहीं होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गिनती के दौरान कर्मचारी नकदी या कोई अन्य सामग्री अपने साथ बाहर न ले जा सकें। इसके अलावा गिनती केंद्र में कर्मचारियों की एंट्री और एग्जिट दोनों जगह सख्त तलाशी शुरू कर दी गई है। इससे दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों की आवाजाही पर निगरानी और मजबूत होगी।

45 दिन नहीं, अब 180 दिन तक सुरक्षित रहेगा CCTV फुटेज

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने CCTV रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने की अवधि भी काफी बढ़ा दी है। पहले गिनती वाले कमरे की CCTV फुटेज 45 दिनों तक रखी जाती थी। अब इसे बढ़ाकर 180 दिन कर दिया गया है। यानी किसी भी घटना या गड़बड़ी की स्थिति में करीब छह महीने तक संबंधित CCTV रिकॉर्डिंग को जांच के लिए देखा जा सकेगा।

साधारण कैमरों की जगह लगेंगे PTZ कैमरे

चढ़ावे की गिनती केंद्र की निगरानी व्यवस्था को भी अपग्रेड किया जा रहा है। वहां लगे फिक्स्ड CCTV कैमरों को PTZ (Pan-Tilt-Zoom) कैमरों से बदला जाएगा। इन कैमरों की मदद से किसी खास जगह या गतिविधि पर कैमरे को घुमाकर नजर रखी जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर किसी व्यक्ति या गतिविधि को जूम करके देखा जा सकेगा।

दान की गिनती के लिए SBI के कर्मचारियों पर जोर

ट्रस्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से यह भी विचार करने को कहा है कि दान की गिनती जैसे संवेदनशील काम के लिए कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के बजाय बैंक के अपने कर्मचारियों को लगाया जाए। ट्रस्ट ने यह सुझाव भी दिया है कि इस काम में लगाए जाने वाले कर्मचारियों को बेहतर पारिश्रमिक दिया जाए। इसके साथ ही गिनती की पूरी प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में ट्रस्ट की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।

मंदिर से बैंक तक नकदी ले जाने का तरीका भी बदलेगा

दान की रकम को मंदिर परिसर से SBI की ब्रांच तक ले जाने की प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत नोटों के बंडलों को एक साथ पैक और सुरक्षित किया जाएगा। सके बाद उन्हें मंदिर परिसर के अंदर ही SBI के वाहन में लोड किया जाएगा। इसका उद्देश्य नकदी को मंदिर से बैंक तक ले जाने के दौरान किसी भी तरह की पिलफरेज यानी रकम में सेंधमारी की संभावना को कम करना है।

राम मंदिर ट्रस्ट को जल्द मिलेगा नया CEO

दान की गिनती की व्यवस्था में बदलाव के साथ ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट नए और पहले चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के चयन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रहा है। CEO के चयन के लिए बनाई गई सर्च कमेटी ने इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी कर ली है। 11 और 12 अगस्त को अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर में अंतिम दौर के इंटरव्यू हुए। सर्च कमेटी में रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) वीके चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे शामिल हैं।

5,585 आवेदन से 16 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट

CEO पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 3,877 आवेदनों में विस्तृत CV शामिल थे। जांच के बाद 1,580 उम्मीदवारों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। इनमें से करीब 111 उम्मीदवारों को ऑनलाइन बातचीत के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। आगे की प्रक्रिया के बाद 16 उम्मीदवारों को अयोध्या में आमने-सामने इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। इनमें रक्षा, प्रशासन, कॉरपोरेट, उद्योग, शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी पेशेवर शामिल हैं। अब सर्च कमेटी अंतिम उम्मीदवारों का मूल्यांकन करके ट्रस्ट को तीन नामों का पैनल सौंपेगी। इसके बाद नए CEO की अंतिम नियुक्ति ट्रस्ट द्वारा की जाएगी।

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क्यों जरूरी किए गए ये बदलाव?

राम मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दौरान बड़ी मात्रा में चढ़ावा आता है। ऐसे में दान की गिनती से लेकर उसकी पैकिंग, निगरानी और बैंक तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया बेहद संवेदनशील है। ट्रस्ट के नए कदमों का उद्देश्य दान की गिनती से लेकर बैंक तक पहुंचने तक पूरी प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। यानी अब राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान कर्मचारियों की यूनिफॉर्म में जेब नहीं होगा। एंट्री गेट पर तलाशी ली जाएगी। साथ ही 180 दिन की CCTV रिकॉर्डिंग और PTZ कैमरों की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं।

चढ़ावा चोरी के बाद बदली राम मंदिर की पूरी व्यवस्था, कैश गिनती, सुरक्षा व पास के लिए सख्त दिशानिर्देश

ayodhya ram mandir trust meeting

Ayodhya Ram Mandir security: ​अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर हमेशा ही विश्व में सुर्खियों में रहा है—चाहे वह राम मंदिर आंदोलन हो, भव्य मंदिर का निर्माण हो, या फिर सम्पूर्ण विश्व को साक्षी बनाने वाला राम लला का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव। ​हाल ही में राम लला के चरणों में अर्पित चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, चढ़ावा व गिनती की निगरानी, संपूर्ण सुरक्षा और VIP/VVIP दर्शन पास से जुड़े नियमों को पूरी तरह बदल दिया है और बेहद सख्त दिशानिर्देश लागू किए हैं।

​चढ़ावा और गिनती की 360-डिग्री निगरानी

​पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया को अब हाई-टेक निगरानी के दायरे में लाया गया है। दानपात्र खोलने से लेकर चढ़ावा गिनने तक की हर पल की रिकॉर्डिंग 360-डिग्री कैमरों और पेशेवर वीडियोग्राफरों (SLR और 360 डिग्री कैमरों से लैस) द्वारा की जाएगी। दानपात्र से जुड़ी पुरानी टीम को बदल दिया गया है। निगरानी के लिए 8 सदस्यीय विशेष टीम बनाई गई है, जिसमें ​2 बैंक कर्मी (भारतीय स्टेट बैंक), ​2 ट्रस्ट प्रतिनिधि, ​2 SIS सुरक्षा कर्मी, ​2 पेशेवर वीडियोग्राफर शामिल हैं। 

​चरणबद्ध तरीके से खाली होंगे दानपात्र

परिसर में स्थित लगभग 40 दानपात्रों को अब एक साथ खाली करने के बजाय अलग-अलग दिनों में खाली किया जाएगा। सीलबंद बक्सों को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों द्वारा विधिवत सील व हैंडल किया जाएगा। कोष प्रबंधन समिति के सदस्य जगदीश आफले ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच किसी भी प्रकार का कोई गतिरोध नहीं है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर में बड़ा बदलाव, ऑनलाइन दान करते ही तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद

​दर्शन पास के लिए नई व्यवस्था

​पूर्व महासचिव चंपत राय, पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र एवं गोपाल राव की ID बंद होने के बाद श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ट्रस्ट ने अपने तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की ID को दर्शन पास जारी करने के लिए अधिकृत किया है। ​वर्तमान में अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की देखरेख में श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के प्रबंध किए जा रहे हैं।

​प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव

मंदिर के इतिहास में पहली बार सचिव पद पर जगदीश आफले को नियुक्त किया गया है (जिसकी आधिकारिक घोषणा 2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक में होगी)। आफले को SBI में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Signatory) भी बनाया गया है। दूसरी ओर, ​मंदिर के आधिकारिक प्रवक्ता के लिए चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। ​CEO पद के लिए 5200 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी स्क्रीनिंग और लिस्टिंग सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली कमेटी कर रही है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में 5 बड़े फैसले, संतों को बड़ी जिम्मेदारी

​त्रि-स्तरीय (Three-Layer) अत्याधुनिक सुरक्षा चक्र

​श्रीराम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली लागू की गई है। CRPF (केंद्रीय सुरक्षा बल), PAC (प्रांतीय सशस्त्र बल) और SSF (विशेष सुरक्षा बल) के सैकड़ों जवानों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही AI-आधारित अत्याधुनिक CCTV कैमरे और स्मार्ट निगरानी प्रणाली लागू की गई है। परिसर की सुरक्षा के लिए 4 किलोमीटर लंबी परिधि दीवार (Boundary Wall) और उच्च क्षमता वाले वॉच टावर स्थापित किए गए हैं।