Ram Mandir: पांच करोड़ का रामचरितमानस…राम मंदिर में कितना आया चढ़ावा? ट्रस्ट ने दिया पूरा हिसाब

Ram Mandir Donation: अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को एक अहम बैठक हुई। इस बैठक महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने करीब तीन घंटे लंबी चली ट्रस्ट की बैठक के बाद मीडिया का सामने इसकी घोषणा की। ट्रस्ट ने दान चोरी और महत्वपूर्ण इस्तीफा-नियुक्तियों के लेकर जानकारी दी। ट्रस्ट की ओर से अब प्राप्त की गईं दान का पूरा ब्यौरा दिया गया।

चढ़ावा का दिया ब्योरा

बता दें कि, राम मंदिर में दान की गई कीमती चीजों के गायब होने के आरोपों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए गहने और अन्य कीमती वस्तुएं सार्वजनिक रूप से दिखाईं। ट्रस्ट ने कहा कि दान में मिली सभी वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका सही तरीके से रिकॉर्ड रखा गया है। ट्रस्ट ने जिन वस्तुओं को दिखाया, उनमें करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस की एक प्रति भी शामिल थी, जिसे एक श्रद्धालु ने मंदिर को भेंट किया था। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने दान की गई वस्तुओं का आधिकारिक रजिस्टर भी मीडिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि यह कदम दान की कीमती वस्तुओं के गायब होने से जुड़े आरोपों और लोगों की शंकाओं को दूर करने के लिए उठाया गया है।

मंदिर को दान में मिली इतनी चीजें

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने कहा कि कुछ लोग यह आरोप लगा रहे हैं कि मंदिर को दान में मिली कई कीमती वस्तुएं गायब हो गई हैं। उन्होंने कहा, “इसी वजह से हम दान की गई सभी वस्तुओं का आधिकारिक रजिस्टर आपके सामने लेकर आए हैं। जिन वस्तुओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनका पूरा विवरण भी हम दिखाएंगे।” ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर को दान में मिली हर वस्तु का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है। स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने बताया कि रजिस्टर में अब तक करीब 2,800 दान की गई वस्तुओं का विवरण दर्ज है। हालांकि, इनमें से केवल कुछ वस्तुओं को उदाहरण के तौर पर मीडिया और लोगों के सामने प्रदर्शित किया गया।

स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने कहा, “हमारे पास दान में मिली करीब 2,800 वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज है और सभी चीजें सुरक्षित रखी गई हैं। जिन पांच वस्तुओं को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उन्हें हम केवल उदाहरण के तौर पर आपके सामने लेकर आए हैं।” ट्रस्ट ने यह भी बताया कि अब तक मंदिर को करीब 2,926 दान की गई वस्तुएं मिल चुकी हैं। यदि कोई श्रद्धालु अपने द्वारा दान की गई वस्तु के बारे में जानकारी लेना चाहता है, तो वह ट्रस्ट के किसी अधिकारी से पहले समय लेकर अयोध्या आ सकता है। ट्रस्ट की ओर से उसे पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

ट्रस्ट ने दी ये जानकारी

ट्रस्ट ने कहा कि जो श्रद्धालु अपने दान की गई वस्तु के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं या यह जानना चाहते हैं कि उसका उपयोग कैसे किया जा रहा है, वे पहले ट्रस्ट के किसी अधिकारी से समय लेकर अयोध्या आ सकते हैं। उन्हें दान से जुड़ी पूरी जानकारी दी जाएगी। इस बीच, ट्रस्ट ने बताया कि उसकी अगली बैठक 22 अगस्त को होगी। इस बैठक में दान की कथित चोरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट पेश किए जाने की उम्मीद है। साथ ही जांच के निष्कर्षों और ट्रस्ट में नए ट्रस्टियों की नियुक्ति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने कहा कि ट्रस्ट की मांग है कि दान की कथित चोरी में शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा, “22 अगस्त को ट्रस्ट की अगली बैठक होगी। हमें उम्मीद है कि तब तक विशेष जांच टीम (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट मिल जाएगी। उसी रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी और नए ट्रस्टियों की नियुक्ति पर भी फैसला लिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि चोरी, चोरी होती है और इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सभी दोषियों को, चाहे वे अभी फरार ही क्यों न हों, पकड़कर कानून के मुताबिक सजा दिलाई जाए। ट्रस्ट भी इसी मांग पर पूरी तरह कायम है।

Ram Mandir : चंदा चोरी मामले में FIR दर्ज कराने वाले कृष्ण मोहन को ट्रस्ट की कमान, चंपत राय का इस्तीफा मंजूर

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली और अहम बैठ सोमवार को हुई। वहीं बैठक के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के  कोषाध्यक्ष  गोविंद देव गिरी महराज ने कई अहम जानकारियां दी हैं।  गोविंग देव गिरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। कृष्ण मोहन को अब ट्रस्ट का नया महासचिव बनाया गया है। बता दें कि, चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा अपने पद से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।

कौन हैं कृष्ण मोहन 

बता दें कि, कृष्ण मोहन ने राम मंदिर में दान चोरी को लेकर एफआईआर कराई थी। इन्हीं की एफआईआर पर आज पुलिस इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही हैं, साथ ही इन्हीं के एफआईआर के आधार पर अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और उनसे दान चोरी की रकम वसूली जा रही है।

बैठक के बाद सामने आई ये बड़ी जानकारी

बता दें कि, चाढ़ावा चोरी का मामले सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की पहली बैठक करीब 3 घंटे तक चली। इस बैठक में क्या कुछ फैसले हुए इसकी जानकारी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि, चंपत राय और अनिल मिश्रा की श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से छुट्टी हो गई है। कोषाध्यक्ष गोविंद देव ने बताया कि ट्रस्ट की बैठक में दोनों का त्यागपत्र मंजूर कर लिया है। चंपत राय की जगह ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन अंतरिम महासचिव होंगे।

राम मंदिर की सबसे अहम मीटिंग

जानकारी के मुताबिक, अयोध्या में राम मंदिर परिसर मीटिंग की शुरुआत होते ही सबसे पहले राम मंदिर से जुड़ी हालिया घटना पर गहरा दुख जताया गया। इसके ठीक बाद, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बैठक के मुख्य एजेंडा को सबके सामने रखा। राम मंदिर ट्रस्ट के साल 2020 में गठन के बाद से अब तक की यह सबसे महत्वपूर्ण बैठक मानी जा रही है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मंदिर के चंदे में कथित चोरी और हेराफेरी के आरोपों की जांच चल रही है।

मामले की चल रही है जांच

राम मंदिर चंदा चोरी मामले में जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या कथित तौर पर हेराफेरी किए गए पैसों से और भी संपत्तियां खरीदी गई थीं। इसके लिए पैसों के लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अब तक मंदिर में दान इकट्ठा करने और उसकी गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, श्रद्धालुओं के दान के कथित दुरुपयोग और पैसों के इस्तेमाल की जांच अभी भी जारी है।

राम मंदिर दान चोरी केस में बड़ा खुलासा! आरोपी ने रिश्तेदारों पर उड़ाए 19 लाख, खरीदी SUV

Ram Mandir : अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली और अहम बैठ सोमवार को हुई। चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं बैठक के बीच इस मामले को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी मामले की जांच अब और गहराई से की जा रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि कथित तौर पर निकाले गए पैसों का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया।

आरोपी ने किया बड़ा खुलासा

इस मामले के आरोपी अविनाश शुक्ला ने पूछताछ के दौरान पैसों के खर्च से जुड़ी कई अहम जानकारियां दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान अविनाश शुक्ला ने बताया कि कथित तौर पर करीब 19 लाख रुपये अपने रिश्तेदारों और परिचितों पर खर्च किए गए। उसने यह भी बताया कि लगभग 6 लाख रुपये एक भाई की शादी में खर्च हुए, 5 से 6 लाख रुपये दूसरे भाई को दिए गए और करीब 3.5 लाख रुपये में एक मारुति ब्रेज़ा कार खरीदी गई।

दोस्त के खाते में ट्रांसफर किए पैसे

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि अविनाश शुक्ला ने कथित तौर पर अपने एक दोस्त के खाते में करीब 2.5 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। इतना ही नहीं, उसने उसी दोस्त को एक महंगा मोबाइल फोन भी गिफ्ट में दिए थे। पुलिस को यह भी शक है कि कुछ छोटी-छोटी रकम कई अन्य लोगों में भी बांटी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, ये जानकारियां तब सामने आईं जब पुलिस ने 24 घंटे की रिमांड के दौरान अविनाश शुक्ला से करीब 13 घंटे तक लगातार पूछताछ की। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूछताछ से उन्हें कई अहम सुराग मिले हैं।

जांच के दौरान मिले अमेरिकी डॉलर

जांच के दौरान पुलिस अविनाश शुक्ला को कई जगहों पर भी लेकर गई। इनमें कौशलपुरी का एक योग केंद्र और 14 कोसी परिक्रमा मार्ग शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्ला ने उन स्थानों की भी पहचान की, जहां कथित तौर पर दान की रकम आपस में बांटी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियों ने इस मामले में अब तक 20.39 लाख रुपये नकद, 1,121 अमेरिकी डॉलर, सोने और चांदी के गहने, अन्य कीमती सामान और एक गाड़ी जब्त की है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि UP42AP6054 नंबर की मारुति ब्रेज़ा कार कथित तौर पर दान की हेराफेरी से मिले पैसों से खरीदी गई थी। हालांकि, इस कार का पंजीकरण अविनाश शुक्ला के भाई अभिषेक के नाम पर कराया गया था।

अब तक आठ लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी

रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या कथित तौर पर हेराफेरी किए गए पैसों से और भी संपत्तियां खरीदी गई थीं। इसके लिए पैसों के लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अब तक मंदिर में दान इकट्ठा करने और उसकी गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, श्रद्धालुओं के दान के कथित दुरुपयोग और पैसों के इस्तेमाल की जांच अभी भी जारी है।

Ram Temple Donation Theft: चंपत राय के इस्तीफे के अलावा राम मंदिर डोनेशन चोरी केस में ट्रस्ट की पहली बैठक से निकलीं ये 5 बड़ी बातें

Ram Mandir Trust Meeting: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक सोमवार को हुई। इस बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट ट्रस्ट के सामने रखी गई। बैठक में ट्रस्ट के सदस्यों ने माना कि इस मामले में ट्रस्ट के साथ विश्वासघात हुआ है और जिम्मेदार लोगों ने भरोसा तोड़ा है। बैठक में उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। ट्रस्ट ने साफ कहा कि उसे राज्य सरकार की SIT और उसकी जांच पर पूरा भरोसा है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए सुरक्षा और व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

बैठक से निकलीं 5 बड़ी बातें

  • 1. SIT की रिपोर्ट ट्रस्ट के सामने पेश की गई

बैठक में सबसे पहले उत्तर प्रदेश सरकार की SIT की जांच रिपोर्ट रखी गई। ट्रस्ट के सदस्यों ने रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की और जांच पर भरोसा जताया।

  • 2. ट्रस्ट ने माना कि भरोसा तोड़ा गया

बैठक में ट्रस्ट के सदस्यों ने स्वीकार किया कि इस मामले में ट्रस्ट के विश्वास के साथ धोखा हुआ। आरोप है कि जिम्मेदार लोगों ने अधिकारियों को गुमराह किया और ट्रस्ट का भरोसा तोड़ा।

  • 3. दोबारा ऐसी घटना न हो, इसकी होगी समीक्षा

ट्रस्ट ने फैसला किया कि दान की राशि के संग्रह और निगरानी की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की दोबारा गुंजाइश न रहे।

  • 4. चंपत राय और अनिल मिश्रा से मांगा जाएगा पक्ष

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने मीटिंग का एजेंडा रखा। स्वामी गोविंद देव गिरी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर विचार का प्रस्ताव रखा। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को भी बुलाने का फैसला किया गया। दोनों इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखेंगे।

  • 5. CEO का पद बनाने का प्रस्ताव खारिज

सूत्रों के अनुसार, बैठक में ट्रस्ट के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का नया पद बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया था, लेकिन ट्रस्ट ने इसे मंजूर नहीं किया।

फिलहाल ट्रस्ट की बैठक जारी है और आने वाले समय में इस मामले को लेकर कुछ और अहम फैसले सामने आ सकते हैं। वहीं, दान की कथित गड़बड़ी की जांच SIT लगातार कर रही है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राम मंदिर ट्रस्ट बैठक Breaking: चंपत राय का इस्तीफा मंजूर, इनकी जगह बजरंग बागड़ा बनाए जाएंगे महासचिव, कौन हैं ये?

Ram Mandir Chadawa Chori Case: अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर उठे विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। राम मंदिर में चंदा चोरी मामले में विवाद के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का इस्तीफा ट्रस्ट की बैठक में स्वीकार कर लिया गया है। उनके स्थान पर बजरंग बागड़ा को नया महासचिव बनाए जाने की तैयारी है। फिलहाल ट्रस्ट की बैठक जारी है, जिसमें इस बदलाव पर अंतिम औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

मीटिंग में लिए गए फैसले पर जल्दी ही आधिकारिक बयान जारी होने की उम्मीद है।अहम बैठक से ऐन पहले ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि वह इस घटना से बहुत आहत हैं।

उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पाप में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाएंगे। राम जन्मभूमि परिसर के अंदर अतिथिगृह में चल रही इस बैठक में मंदिर से चढ़ावा की कथित चोरी की जांच और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा के इस्तीफे के मुद्दों पर अहम चर्चा होने हो रही है।

E20 Petrol: एथेनॉल वाले पेट्रोल को लेकर मचे बवाल के बीच मारुति की 1.5 करोड़ पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग से क्या पता चला?

E20 Petrol Row: देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर लोगों के बीच मौजूद चिंताओं और बहस के बीच ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनी मारुति सुजुकी ने एक बड़ा और राहत देने वाला दावा किया है। नई दिल्ली में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन औ राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाहन उद्योग के दिग्गजों ने E-20 फ्यूल को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की एक रिलीज के मुताबिक इस उच्च स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में मारुति सुजुकी के कॉरपोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने कंपनी के सर्विस डेटा के आधार पर एथेनॉल वाले पेट्रोल से इंजन खराब होने के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

मारुति सुजुकी की 1.5 करोड़ पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग से क्या पता चला?

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मारुति सुजुकी के राहुल भारती ने एक बेहद महत्वपूर्ण आंकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी ने कुल 2.84 करोड़ कारों की सर्विसिंग की थी। इन गाड़ियों में से 1.5 करोड़ से अधिक कारें तीन साल से ज्यादा पुरानी थीं। यानी वे तकनीकी रूप से ई20 सर्टिफाइड नहीं थीं।

भारती ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग के बावजूद फील्ड से ई20 फ्यूल की वजह से इंजन में जंग, सामान्य टूट-फूट या गाड़ी के किसी भी पार्ट/कंपोनेंट की लाइफ खराब होने की एक भी शिकायत या समस्या सामने नहीं आई है। उन्होंने भरोसा दिया कि ई10 के लिए डिजाइन किए गए वाहनों का ई20 ईंधन के साथ सभी मापदंडों पर परीक्षण किया जा चुका है और इसमें चिंता की कोई बात नहीं है।

माइलेज पर कितना पड़ता है असर? मारुति ने समझाया पूरा गणित

माइलेज में गिरावट के दावों पर मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने स्पष्ट गणित समझाया। उन्होंने कहा कि ई10 पेट्रोल की तुलना में ई20 पेट्रोल की कैलोरीफिक वैल्यू लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत कम होती है। माइलेज पर इसका असर भी केवल इसी सीमा तक सीमित है। जैसे कि अगर कोई कार 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है तो ई20 की वजह से उसका माइलेज केवल 0.6 किलोमीटर प्रति लीटर ही कम होगा।

इसकी तुलना में टायर का प्रेशर, ड्राइविंग का तरीका, सही गियर का इस्तेमाल, अचानक एक्सीलरेट करना, बार-बार ब्रेक लगाना और गाड़ी का रखरखाव जैसी वजहें माइलेज में इससे कहीं ज्यादा बड़ा अंतर पैदा करते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि माइलेज में होने वाले इस मामूली नुकसान की भरपाई बेहतर एक्सीलरेशन, बेहतर एंटी-नॉकिंग और शुद्ध पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल से होने वाले बेहद कम प्रदूषण से पूरी हो जाती है।

क्या बाजार में उपलब्ध हैं रेट्रोफिटमेंट किट?

राहुल भारती ने साफ किया कि वाहनों को ई20 कंप्लायंस की तय सीमा से कहीं अधिक सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में बाजार में पुरानी गाड़ियों को ई20 के अनुकूल बनाने के लिए कोई भी रेट्रोफिटमेंट किट नहीं बेची जा रही है। इस तरह के समाधान फिलहाल सिर्फ रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के स्तर तक ही सीमित हैं।

टोयोटा और हीरो मोटोकॉर्प ने भी जताई सहमती

प्रेस कॉन्फ्रेंस में टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने कहा कि ऑटोमोटिव उद्योग सबसे कड़े रेग्युलेटेड क्षेत्रों में से एक है। वाहनों को बाजार में उतारने से पहले और बाद में वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा कड़े परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।

भारत यूएनईसीई (UNECE) का हिस्सा है, इसलिए यहां के टेस्टिंग प्रोटोकॉल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ई20 को लागू करने का निर्णय पुरानी गाड़ियों पर कड़े परीक्षणों के बाद ही लिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में शुरू किए गए E85 डिस्पेंसिंग स्टेशन विशेष रूप से केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए हैं जो भविष्य की नीति की दिशा तय करते हैं।

वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी टू-व्हीलर निर्माताओं में से एक हीरो मोटोकॉर्प के चीफ बिजनेस ऑफिसर आशुतोष वर्मा ने भी मारुति के दावों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपने व्यापक सर्विस डेटा का विश्लेषण किया है और पाया है कि ई20 ईंधन पर चलने वाले वाहनों में पहले के ईंधन की तुलना में किसी भी तरह के नुकसान या खराबी की कोई अधिक घटना सामने नहीं आई है।

वैज्ञानिक सबूतों और वैश्विक मानकों पर आधारित है ई20 प्रोग्राम

इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) की पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर वर्तिका शुक्ला ने बताया कि एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम को सभी हितधारकों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसे वैज्ञानिक सबूतों और वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए व्यापक परीक्षणों का पूरा समर्थन प्राप्त है जो वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है। वर्तमान में ई20 ईंधन बीआईएस मानक और बीएस-VI (BS-VI) उत्सर्जन मानदंडों के पूरी तरह अनुरूप है और देश के सभी रिटेल आउटलेट्स पर समान रूप से उपलब्ध है।

ये भी पढ़ें- Ram Mandir Chanda Chori: चढ़ावे के सोने को बना दिया बिस्कुट और फिर… राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सनसनीखेज खुलासा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में टीवीएस मोटर कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रसाद कृष्णन, हुंडई मोटर इंडिया के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट पुनीत आनंद और बजाज ऑटो लिमिटेड के सर्कल हेड (सेल्स- नॉर्थ एंड ईस्ट) मनप्रीत सिंह बिंद्रा सहित पूरे पैनल ने ई20 कार्यक्रम पर सामूहिक विश्वास जताया और उपभोक्ताओं के हर सवाल का पारदर्शिता से जवाब देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

Ram Mandir Chanda Chori: चढ़ावे के सोने को बना दिया बिस्कुट और फिर… राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सनसनीखेज खुलासा

Ram Mandir Chanda Chori Case: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इस बात की जांच कर रही है कि क्या मंदिर से कथित तौर पर चोरी किए गए सोने के आभूषणों को पहचान मिटाने के लिए उसे गलाकर सोने के बिस्किट (Gold Biscuits) में बदल दिया गया। फिलहाल, SIT इस पूरे मामले की कई पहलुओं से जांच कर रही है। यह अभी संदेह और जांच का विषय है कि कथित तौर पर चोरी किए गए सोने को वास्तव में गलाकर बिस्किट बनाया गया था या नहीं।

अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। ‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं को शक है कि आरोपियों ने चोरी किए गए सोने और चांदी के गहनों को पिघला दिया होगा ताकि उनकी पहचान मिटाई जा सके। कई बार छापेमारी और तलाशी के बाद भी सोने-चांदी के गायब गहने नहीं मिले, जिसके बाद जांच की दिशा में तेजी आई है।

मंदिर के इंचार्ज से पूछताछ तेज

जांच के सिलसिले में राम मंदिर गए SIT अधिकारियों ने मंदिर के इंचार्ज KD बाबू से गहनों और अन्य कीमती चढ़ावे के रखरखाव, उनकी इन्वेंट्री, स्टोरेज और देखभाल के बारे में पूछताछ की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच टीम ने गहनों और अन्य कीमती दान का रिकॉर्ड मांगा है। साथ ही सरकारी कंपनी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का रिकॉर्ड भी मांगा है।

जांचकर्ताओं ने अभी तक के जांच में पाया है कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की तिमाही बैठकों में ज्यादातर ध्यान कैश दान और रेवेन्यू पर होता था। जबकि सोने, चांदी और अन्य कीमती चढ़ावे की डिटेल्स इन्वेंट्री बनाए रखने या उसकी समीक्षा करने पर बहुत कम ध्यान दिया जाता था। ‘इंडिया टुडे’ ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।

आभूषण नहीं मिले, इसलिए SIT ने बदली जांच की दिशा

जांच एजेंसियों को लगातार छापेमारी और तलाशी के बावजूद कथित तौर पर गायब सोने-चांदी के आभूषण नहीं मिले। इसके बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को शक है कि आरोपियों ने आभूषणों को पिघलाकर उनकी पहचान खत्म कर दी, जिससे उन्हें बरामद करना मुश्किल हो जाए।

मंदिर प्रशासन से मांगे गए रिकॉर्ड

जांच के दौरान SIT ने राम मंदिर पहुंचकर मंदिर प्रभारी केडी बाबू से पूछताछ की। अधिकारियों ने आभूषणों के रखरखाव, स्टोरेज, इन्वेंट्री और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए कीमती दान से जुड़े सभी रिकॉर्ड मांगे। इसके साथ ही सरकारी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Mint) के साथ हुए लेन-देन का ब्यौरा भी जांच के दायरे में लिया गया है।

7 जून को सामने आया थआ मामला

राम मंदिर में कथित दान गबन का मामला 7 जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया। प्रारंभिक जांच के आधार पर 25 जून को FIR दर्ज की गई। मंदिर में दान गिनने के काम से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

चंपत राय ने खुद को बताया व्हिसलब्लोअर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि कथित गड़बड़ी का सबसे पहले पता उन्होंने ही लगाया था। उन्होंने दावा किया कि चोरी पकड़ने के लिए उन्होंने मंदिर परिसर में सीक्रेट CCTV कैमरे लगवाए थे। उन्हीं कैमरों की फुटेज से कथित चोरी का खुलासा हुआ।

‘मुझे मेरे ही लोगों ने धोखा दिया’

पुलिस पूछताछ के दौरान चंपत राय ने कहा कि उनका दान के कथित गबन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “मुझे मेरे ही भरोसेमंद लोगों ने धोखा दिया। चोरी पकड़ने के लिए छिपे हुए कैमरे मैंने ही लगवाए थे।”

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर में दान और चढ़ावे की कथित चोरी की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच का आदेश दें। पणजी में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है, क्योंकि मंदिर में दान के मैनेजमेंट को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने BJP को भारत के मंदिरों पर आक्रमणकारियों द्वारा किए गए अतीत के कथित लूटपाट संबंधी उसके अक्सर दिए जाने वाले बयानों की भी याद दिलाई।

वेणुगोपाल ने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव के उन दावों का भी जिक्र किया, जिनमें कहा गया था कि मंदिर में दान किए गए एक किलोग्राम सोने का सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया था। इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “यह किसी आम आदमी का आरोप नहीं है। यह आरोप केंद्र सरकार के एक सेवानिवृत्त गृह सचिव ने लगाया है। अयोध्या राम मंदिर में जो कुछ हो रहा है, वह हम सभी के लिए बहुत दुखद है। यह देश के सभी आस्था रखने वालों के लिए दुखद है।”

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वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस के लोग आस्था के कारण ईश्वर में विश्वास करते हैं। लेकिन BJP के लोग ईश्वर में विश्वास नहीं करते और वे लोगों को बांटने और मंदिर को लूटने के मकसद से धर्म की बात करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या मंदिर में हुई चोरी के लिए विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पूरी तरह जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर को लूटने वालों को केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारें बचा रही हैं।

80 लाख रुपये, डॉलर, सोना और बाथरूम में छिपाया जाता था कैश…राम मंदिर चंदा चोरी विवाद में बड़ा खुलासा!

Ram Mandir Donation Theft Row   :  अयोध्या राम मंदिर में करोड़ों के चढ़ावे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दानपात्र में गड़बड़ी और करोड़ों रुपये के हेरफेर के आरोपों ने राजनीतिक व धार्मिक जगत में हलचल मचा दी है। वहीं राम मंदिर चंदा चोरी के मामले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने तेज कर दी है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि नकदी को कैसे छिपाया गया और मंदिर परिसर से बाहर कैसे ले जाया गया। अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उनके घरों से बड़ी मात्रा में नकदी, सोना, चांदी और  फॉरेन करेंसी बरामद हुई है।

बाथरूम में छिपाया चोरी की रकम

जांच में सामने आया है कि चोरी की रकम को छिपाने के लिए बाथरूम जैसी जगहों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद नकदी को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बाहर निकाला जाता था, ताकि किसी को शक न हो। जांच एजेंसियां अब तक करीब 80 लाख रुपये बरामद कर चुकी हैं। जांच के दौरान सबसे बड़ी बरामदगी अविनाश शुक्ला से जुड़े ठिकानों से हुई। पुलिस को उसके कमरे से 12 लाख रुपये नकद मिले, जबकि उसके भाई ने 8.40 लाख रुपये वापस जमा कराए।

पुलिस को अमेरिकी डॉलकर भी बरामद

इसके अलावा पुलिस ने 1,121 अमेरिकी डॉलर भी बरामद किए। इनमें 100, 50, 20, 10, 5 और 1 डॉलर के नोट शामिल हैं। साथ ही करीब 159.54 ग्राम, 11.14 ग्राम और 3.44 ग्राम वजन के सोने और चांदी के गहने भी मिले हैं। पुलिस की बरामदगी सूची के अनुसार, अनुकल्प मिश्र के पास से 16.82 लाख रुपये बरामद किए गए। वहीं, लवकुश मिश्र के एसके लॉकर से 14.25 लाख रुपये नकद मिले।

आरोपियों के पास से ये चीजें बरामद

पुलिस ने रमाशंकर मिश्र के पास से 7.32 लाख रुपये नकद, सफेद धातु के दो सिक्के और चांदी की बिछिया बरामद की। वहीं, मनीष कुमार यादव से 2 लाख रुपये और करुणेश पांडे के पास से 18.07 लाख रुपये जब्त किए गए। जांच के दस्तावेजों के अनुसार, टिन्नू यादव के हॉस्टल के कमरे से नकदी सीधे बरामद हुई। वहीं, दूसरे आरोपियों से मिली रकम को शिकायतकर्ता और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने पुलिस की औपचारिक कार्रवाई से पहले अपने लॉकर में सुरक्षित रख दिया था। टिन्नू यादव, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रहे हैं।

Ram Mandir: राम मंदिर दान विवाद के बीच ट्रस्ट के इस बैठक पर टिकी सबकी नजर, जानें पूरा समीकरण

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र अयोध्या का राम मंदिर चढ़ावे को लेकर उठे सवालों ने देश की राजनीति और धार्मिक जगत में हलचल मचा दी है। आरोप हैं कि राम मंदिर के दानपात्र में चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चंदे में गड़बड़ी हुई। अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान के इस्तेमाल को लेकर उठे सवालों के बीच 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक होने जा रही है। इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की पेशकश की है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट के आगे के कामकाज और भविष्य को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। क्योंकि ट्रस्ट की व्यवस्था ऐसी है कि कुछ स्थायी ट्रस्टियों के पास ही फैसले लेने का सबसे ज्यादा अधिकार होता है।

ट्रस्ट की शुरुआत कैसे हुई?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन फरवरी 2020 में किया गया था। यह ट्रस्ट अयोध्या जमीन विवाद पर नवंबर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनाया गया। अदालत ने केंद्र सरकार को राम मंदिर के निर्माण और उसके संचालन के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया था। नई दिल्ली में हुई पहली बैठक में महंत नृत्य गोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया। विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय को महासचिव और गोविंद गिरि महाराज को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र को मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

ट्रस्ट में कौन-कौन सदस्य हैं?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कुल 10 स्थायी ट्रस्टी हैं। हालांकि, ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद एक पद अभी खाली है।

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  • महंत नृत्य गोपाल दास: वे ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और राम जन्मभूमि आंदोलन के सबसे वरिष्ठ संतों में गिने जाते हैं। उनकी तबीयत ठीक नहीं है और वे अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में संभावना है कि 6 जुलाई की बैठक में वे शामिल नहीं हो पाएंगे।
  • चंपत राय: वे विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष और ट्रस्ट के महासचिव हैं। अगस्त 2020 में मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद से ट्रस्ट के रोज़मर्रा के कामकाज और कई अहम फैसलों में उनकी प्रमुख भूमिका रही है।
  • डॉ. अनिल मिश्र: अयोध्या के होम्योपैथी डॉक्टर और ट्रस्ट के शुरुआती सदस्यों में से एक हैं। वे मंदिर से जुड़े प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी संभालते हैं।
  • गोविंद गिरि महाराज: पुणे के प्रसिद्ध संत हैं। वे ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं और ट्रस्ट के आर्थिक व वित्तीय मामलों की देखरेख करते हैं।
  • स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती: प्रयागराज स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं। वे ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख धार्मिक नेताओं में शामिल हैं।
  • स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महाराज: कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ के प्रमुख हैं और मध्व परंपरा के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं।
  • युगपुरुष परमानंद गिरि महाराज: हरिद्वार के संत और आध्यात्मिक गुरु हैं। वे भी ट्रस्ट के महत्वपूर्ण सदस्यों में शामिल हैं।
  • महंत दिनेंद्र दास: वे अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ संत हैं। राम जन्मभूमि विवाद के दौरान वे इस मामले के प्रमुख पक्षकारों में शामिल रहे थे।
  • कृष्ण मोहन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े कार्यकर्ता हैं। उन्हें ट्रस्ट में कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद सदस्य बनाया गया। कामेश्वर चौपाल उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने 1989 में प्रस्तावित राम मंदिर की पहली ईंट रखी थी।
  • खाली पद: अयोध्या के पूर्व शाही परिवार से जुड़े ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद ट्रस्ट में उनका पद अभी तक खाली है।

किसे वोट देने का अधिकार है और किसे नहीं?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सिर्फ स्थायी ट्रस्टियों को ही वोट देने का अधिकार है। सरकारी प्रतिनिधियों सहित पांच पदेन सदस्य बैठकों में शामिल तो होते हैं, लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं है। इसलिए वे मतदान के जरिए किसी फैसले को बदल या प्रभावित नहीं कर सकते। यही वजह है कि ट्रस्ट के बड़े फैसलों का अधिकार स्थायी ट्रस्टियों के पास ही होता है। नए ट्रस्टी को शामिल करना हो या ट्रस्ट के कामकाज में कोई बड़ा बदलाव करना हो, इसके लिए स्थायी ट्रस्टियों के बहुमत की मंजूरी जरूरी होती है।

क्या चंपत राय और अनिल मिश्र पद छोड़ने के बाद भी ट्रस्ट में रह सकते हैं?

हां, ऐसा हो सकता है। ट्रस्ट से जुड़े लोगों के अनुसार, स्थायी ट्रस्टी को हटाने का कोई नियम नहीं है। अगर चंपत राय महासचिव का पद छोड़ देते हैं और अनिल मिश्र अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियां छोड़ देते हैं, तब भी वे ट्रस्ट के स्थायी सदस्य बने रहेंगे। वे तभी ट्रस्ट से बाहर होंगे, जब खुद अपना इस्तीफा देंगे। इसी वजह से 6 जुलाई की बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट में एक स्थायी पद पहले से खाली है और अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत खराब होने के कारण उनके बैठक में शामिल होने की संभावना भी कम है। ऐसे में बैठक में वोट देने वाले सक्रिय सदस्यों की संख्या सीमित रह सकती है।

आमंत्रित सदस्य कौन हैं और उनकी क्या भूमिका होती है?

ट्रस्ट में कुछ आमंत्रित सदस्य भी हैं। ये लोग बैठकों में शामिल होते हैं और अपनी राय रखते हैं, लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होता। इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी और विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी दिनेश चंद्र शामिल हैं। इसके अलावा कर्नाटक से विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल नागरकट्टे भी आमंत्रित सदस्य हैं। वे जनवरी 2021 से राम मंदिर के निर्माण और दूसरे सिविल कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, आमंत्रित सदस्य चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं और अपने सुझाव दे सकते हैं, लेकिन ट्रस्ट के किसी भी फैसले पर वोट नहीं दे सकते।

Exclusive: रावण के अलावा रामायण का कोई और किरदार नहीं निभाना चाहते आशुतोष राणा, वजह जान दंग रह जाएंगे आप

Exclusive: अपने नए Durlabh Darshan को लेकर आशुतोष राणा बेहद एक्साइटेड है। ये प्रोजेक्ट उन्होंने प्रोड्यूसर प्रशांत मिश्रा और फिल्म राइटर आलोक श्रीवास्तव के साथ मिलकर बनाया और लॉन्च किया। इस प्रोजेक्ट को लेकर एक्टर ने कहा कि जहां धर्म और विज्ञान दोनों मिल जाते हैं, वह दुर्लभ दर्शन है। वहीं अपने रावण के किरदार को लेकर भी उन्होंने खुलकर बात की है। बताया क्यों वह रावण का रोल करना पसंद करते हैं।

रावण का किरदार है खास

अशुतोष राणा से जब हमें पूछा कि रामायण में उन्होंने रावण के किरदार को क्यों चुना और रावण के अलावा वह किस किरदार को निभाने में दिलचस्पी रखते? इस सवाल का जवाब उन्होंने बिना देर किए दे दिया। एक्टर ने कहा कि रावण के अलावा में किसी और किरदार को नहीं निभाना चाहता हूं। रावण अपने आप में बहुत दिलचस्प किरदार है। वहीं उसके दोनों हाथ में लड्डू हैं। उन्होंने अपनी बात समझाते हुए कहा कि रावण के लिए खुद नारायण वैकुंठ से आए। वहीं वध के बाद उसे वैकुंठ मिला…और अगर वध न होता तो शिव भक्ति के चलते कैलाश में स्थान मिल जाता।

दुर्लभ दर्शन में क्या खास?

आप एक जगह बैठ कर ही देश के प्रसिद्ध मंदिरों का दर्शन एवं वहां होने वाले समस्त पूजा-अनुष्ठान देख पाएंगे, और वह भी मंदिर में अपनी प्रत्यक्ष उपस्थिति जैसे अनुभव के साथ। दुर्लभ दर्शन द्वारा तैयार की गई विशेष 6D VR टेक्नोलॉजी के जरिए यह सब अनुभव संभव हो पाएगा। दुर्लभ दर्शन, आशुतोष राणा के साथ मिल कर, विश्व के पहले 100 से अधिक 6D अनुभव वाले केंद्र खोलेगा। फिलहाल इस सुविधा का आनंद देश के ग्यारह प्रसिद्ध मंदिरों में लिया जा सकेगा। विशेष बात यह होगी कि इस वर्चुअल रियलिटी में आप 3D दृश्य के साथ-साथ मंदिर के वातावरण में मौजूद जल, वायु और सुगंध की भी हूबहू अनुभूति कर सकेंगे।

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