राम मंदिर चढ़ावा विवाद: SIT का सख्त आदेश…जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ें ट्रस्ट के लोग

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे विवाद की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने ट्रस्ट और मंदिर से जुड़े अधिकारियों को फिलहाल अयोध्या छोड़कर कहीं न जाने के निर्देश दिए हैं। मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान चढ़ावे में मिले सोने, चांदी और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांचकर्ताओं को इन चीजों के डॉक्यूमेंटेशन में कई गड़बड़ियां मिली हैं, जिनकी अब विस्तार से जांच की जा रही है।

सोना-चांदी और हीरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी

तीन सदस्यीय एसआईटी ने रविवार को लखनऊ लौटने से पहले यह निर्देश जारी किया। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान सबसे अहम मुद्दों में से एक भगवान राम को भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों, हीरों और अन्य कीमती रत्नों के रिकॉर्ड से जुड़ा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन चढ़ावों का सही तरीके से हिसाब-किताब रखा गया था या नहीं।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान चढ़ावे के रूप में मिले सोने, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड और हिसाब-किताब में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारी इन कीमती वस्तुओं की सूची, उनके रखरखाव और लेखा-जोखा से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। सूत्रों का यह भी दावा है कि जनवरी और फरवरी 2025 में आयोजित महाकुंभ के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हो सकती हैं। उस समय मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी और रोजाना लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे थे।

 CMO को रोज भेजी जा रही रिपोर्ट

जानकारी के मुताबिक, दो महीने से अधिक समय तक प्रतिदिन करीब 10 लाख श्रद्धालु मंदिर आए। इस दौरान दान-पात्र कुछ ही घंटों में नोटों से भर जाते थे। इसी वजह से दान में मिली राशि और अन्य चढ़ावों की निगरानी तथा उनके हिसाब-किताब की प्रक्रिया एसआईटी जांच का प्रमुख विषय बन गई है।

मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के अधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ के आधार पर तैयार की गई दैनिक जांच रिपोर्ट को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा गया है। इन रिपोर्टों को अंतिम रूप देने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा जाएगा।

सूत्रों ने बताया कि एसआईटी अपनी जांच की प्रगति रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को भेज रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच केवल कथित फंड गबन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मंदिर ट्रस्ट द्वारा विभिन्न चरणों में की गई जमीन की खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट ने जिन जमीनों की खरीद की, उनकी कीमत बाजार दरों की तुलना में कहीं अधिक तो नहीं थी। इन सभी पहलुओं की विस्तृत जांच के बाद एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

बढ़ा विवाद

समाजवादी पार्टी  सहित कई राजनीतिक दलों ने इस मामले को जोरदार तरीके से उठाया था। अयोध्या राम मंदिर में मिले दान के कथित दुरुपयोग के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस तीन सदस्यीय एसआईटी में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। सरकार ने इस टीम को आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

Ram Mandir Daan Chori: दान पेटी से बैंक तक… राम मंदिर में कैसे होती है हर 1 रुपये की गिनती और निगरानी?

अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान घोटाले की जांच के बीच लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये, सोना-चांदी और कीमती सामान की गिनती और निगरानी कैसे होती है।

हर दिन एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में नकद, सोना, चांदी और दूसरी कीमती वस्तुएं दान करते हैं। इन सभी दानों को सुरक्षित रखने और उनका हिसाब-किताब रखने के लिए एक बेहद सख्त और कई लेवल की व्यवस्था बनाई गई है।

35 दान पेटियों से शुरू होती है प्रक्रिया

मंदिर परिसर में कुल 35 बड़ी स्टील की दान पेटियां लगाई गई हैं। इन पर 24 घंटे CCTV कैमरों से निगरानी रखी जाती है।

इन दान पेटियों में डबल-लॉक सिस्टम होता है, यानी किसी एक व्यक्ति के पास इन्हें खोलने का अधिकार नहीं होता। जब कोई पेटी भर जाती है, तो ट्रस्ट के अधिकारी और बैंक प्रतिनिधि की मौजूदगी में उसे खोला जाता है।

इसके बाद दान की रकम और अन्य सामग्री को विशेष सुरक्षा वाले सीलबंद बैग में रखकर सेंट्रल काउंटिंग रूम में भेजा जाता है।

दो शिफ्ट में होती है गिनती

उच्च सुरक्षा वाले काउंटिंग रूम में सुबह से रात तक दो शिफ्ट में काम चलता है। इस प्रक्रिया में करीब 40 पेशेवर कैश टेलर, नेशनलाइज बैंकों के अधिकारी और ऑडिटर शामिल रहते हैं।

पहली शिफ्ट में:

  • नोटों को मूल्य के हिसाब से अलग किया जाता है।
  • मुड़े-तुड़े नोट सीधे किए जाते हैं।
  • खराब या कटे-फटे नोटों को अलग रखा जाता है।

दूसरी शिफ्ट में:

  • नोटों को हाई-स्पीड कैश काउंटिंग मशीनों से गिना जाता है।
  • नकली नोटों की जांच की जाती है।
  • पूरी प्रक्रिया कैमरों की निगरानी में होती है।
  • सोना-चांदी का अलग हिसाब

नकदी के अलावा श्रद्धालुओं की ओर से दान किए गए सोने के आभूषण, चांदी के सिक्के और दूसरी कीमती चीजों की जांच अलग टीम करती है।

सरकार की मान्यता प्राप्त मूल्यांकन विशेषज्ञ (Appraisers) इन वस्तुओं का वजन और मूल्य दर्ज करते हैं। इसके बाद उन्हें मंदिर के सुरक्षित अंडरग्राउंड वॉल्ट (तिजोरी) में रखा जाता है।

बैंक में जमा होने से पहले कई लेवल की जांच

दिनभर की गिनती पूरी होने के बाद नकद राशि का मिलान किया जाता है।

  • मशीनों के रिकॉर्ड और वास्तविक नकदी का आंकड़ा मिलाया जाता है।
  • सभी रिकॉर्ड की जांच होती है।
  • ट्रस्ट और वित्तीय एजेंसियों के प्रतिनिधि दस्तावेजों पर संयुक्त हस्ताक्षर करते हैं।

इसके बाद रकम को सुरक्षा व्यवस्था के बीच बैंक पहुंचाया जाता है और मंदिर ट्रस्ट के आधिकारिक खातों में जमा किया जाता है।

डिजिटल रसीद मिलने के बाद ही होता है अंतिम रिकॉर्ड

बैंक से डिजिटल रसीद मिलने के बाद ही राशि को ट्रस्ट के केंद्रीय लेखा-जोखा (Accounting System) में स्थायी रूप से दर्ज किया जाता है।

जांच एजेंसियां क्या देख रही हैं?

SIT अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी कड़ी सुरक्षा और कई स्तरों की निगरानी के बावजूद अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो वो किस चरण में हुई। जांच का मुख्य फोकस यह है कि कहीं मानवीय लापरवाही, रिकॉर्ड में हेरफेर या निगरानी की किसी कमजोरी का फायदा तो नहीं उठाया गया।

फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियां पूरी वित्तीय प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा कर रही हैं।

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Ram Mandir: ‘प्रोफेशनल सिस्टम ही समाधान…’, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नृपेंद्र मिश्रा का बड़ा बयान

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस महीने की शुरुआत में अयोध्या राम मंदिर के दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने के आरोप लगे हैं। इस मामले पर योगी सरकार ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। वहीं मामले में निर्माण समिति के अध्यक्ष और भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने बड़ा बयान दिया है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि, मंदिर प्रबंधन का पूरा मैनेजमेंट स्ट्रक्चर, अनुभवी लोगों के हाथ में सौंप दिया जाए।

मंदिर की व्यवस्था को बदलने की मांग

राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा है कि अब मंदिर के संचालन में केवल वॉलंटियर्स पर आधारित व्यवस्था के बजाय प्रोफेशनल और व्यवस्थित प्रबंधन अपनाने की जरूरत है। उनका कहना है कि राम मंदिर में दान को लेकर सामने आए कथित विवाद ने प्रशासन और निगरानी व्यवस्था से जुड़ी कई अहम चिंताओं को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि जो संस्थाएं बड़ी मात्रा में लोगों का दान और रोजमर्रा के कामकाज संभालती हैं, वे लंबे समय तक अनौपचारिक तरीकों पर निर्भर नहीं रह सकतीं। ऐसी संस्थाओं में स्पष्ट जिम्मेदारियां, मजबूत निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही का साफ सिस्टम होना बेहद जरूरी है, ताकि कामकाज पारदर्शी और प्रभावी तरीके से चल सके।

की जाए मजबूत निगरानी व्यवस्था 

राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि मंदिर की पूरी प्रबंधन व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की जरूरत है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने इस बारे में कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखी है। उनका मानना है कि मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी अनुभवी और प्रोफेशनल लोगों को सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में रोजाना बड़ी संख्या में गतिविधियां होती हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में जिम्मेदारियों का स्पष्ट और व्यवस्थित बंटवारा नहीं है। ऐसे में बेहतर प्रबंधन, स्पष्ट भूमिकाओं और मजबूत निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि सभी काम सुचारू और पारदर्शी तरीके से चल सकें।

नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि फिलहाल मंदिर का प्रबंधन काफी हद तक वॉलंटियर्स के भरोसे चल रहा है। उन्होंने बताया कि वहां काम करने वाले लोगों को मौखिक रूप से उनकी जिम्मेदारियां समझा दी जाती हैं, लेकिन उनके लिए कोई लिखित आदेश, स्पष्ट जिम्मेदारियां बताई नहीं जाती। उन्होंने कहा कि मंदिर में विभिन्न कार्यों के लिए करीब 1,500 लोग काम कर रहे हैं। इतनी बड़ी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक औपचारिक प्रबंधन प्रणाली और मजबूत निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, हाल ही में सामने आया विवाद उनके लिए भी निराशाजनक है, क्योंकि यह ऐसे समय में हुआ है जब मंदिर का निर्माण अपने अंतिम चरण में है। उनका मानना है कि इस तरह की घटनाएं भक्तों के विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला श्रद्धालुओं की आस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है और इससे लोगों को दुख पहुंचा है।

यह बयान राम मंदिर में दान के पैसों के हिसाब-किताब में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बीच आया है। मंदिर के एक कर्मचारी के घर से नकदी मिलने के बाद 7 करोड़ रुपये और उससे भी बड़ी रकम से जुड़े कई दावे सामने आए, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया और जांच की मांग तेज हो गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। यह टीम रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।

Ram Mandir: राम मंदिर चंदा चोरी में मामले में सामने आए ये दो नाम, SIT जांच में अबतक हुआ ये खुलासा

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस महीने की शुरुआत में अयोध्या राम मंदिर के दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने के आरोप लगे हैं। इस मामले पर योगी सरकार ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। हीं इस मामले में जांच कर रही एसआईटी की टीम लगातार छापेमारी कर रही है। राम मंदिर के ट्रस्ट पदाधिकारी अनिल मिश्रा, महासचिव चंपत राय और उनके ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव तथा गोपाल राव से पूछताछ की गई।

जांच में सामने आए ये नाम

वहीं अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, एसआईटी की पूछताछ में टिन्नू यादव ने गिनती प्रक्रिया में अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम लिया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि दान में मिले बहुमूल्य आभूषणों के प्रबंधन और रिकॉर्ड में भी अनियमितताएं हो सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि दान और चढ़ावे से जुड़े काम में तय नियमों का सही तरीके से पालन हुआ था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं निगरानी व्यवस्था में कोई कमी तो नहीं रही। जांचकर्ता इस काम में लगे कर्मचारियों की पृष्ठभूमि, उनकी जिम्मेदारियों और नियुक्ति से जुड़ी जानकारी भी जुटा रहे हैं।

SIT की टीम कर रही हैं जांच

मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद यह जांच शुरू की गई थी। मंदिर के पूर्व लेखाकार महिपाल सिंह ने चढ़ावे के पैसे के प्रबंधन में अनियमितताओं की जांच की मांग की थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। जांच के शुरुआती दौर में एसआईटी ने राम मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान दान पेटियों, चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया और नकदी रखने की व्यवस्था की जांच की गई। सूत्रों का कहना है कि टीम को शुरुआती जांच में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां और साक्ष्य मिले हैं, जिनकी अब विस्तार से पड़ताल की जा रही है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक किसी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की है और न ही मिले साक्ष्यों के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी दी है।

बता दें कि, राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ियों की जांच करने के लिए SIT गठित की गई है। इसमें लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत (IAS), किरन एस. (IPS, आईजी रेंज) और नीलरतन (विशेष सचिव, वित्त) को शामिल किया गया है।