‘आप हमारा समय बर्बाद न करें…’; CJP प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार

CJP Protest in Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से बुधवार (22 जुलाई) को इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत तथा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता वकील ने CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का जिक्र करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। इस पर सीजेआई ने कहा कि हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा, “पुलिस की बर्बरता से जुड़े वीडियो भी मेरे पास हैं… यदि इस मामले को कल (गुरुवार 23 जुलाई) सूचीबद्ध किया जा सके…।” उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ पुलिस ने कथित तौर पर बर्बरता की और याचिका में तीन अनुरोध किए गए हैं। चीफ जस्टिस ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध ठुकराते हुए स्पष्ट किया कि पीठ इस स्तर पर वीडियो देखने की इच्छुक नहीं है।

उन्होंने कहा, “हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है… हम वीडियो नहीं देखना चाहते।” वकील के दोबारा छात्रों की पिटाई की बात कहने और वीडियो का हवाला देने पर CJP ने कहा, “हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते।”

यह याचिका सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से संबंधित है। उस दिन हजारों छात्र और युवा प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए मध्य दिल्ली में एकत्र हुए थे।

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।

सरकार नीट पर चर्चा के लिए तैयार

मानसून सत्र शुरू होने के बाद नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के आंदोलन को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण संसद में गतिरोध जारी है। सरकार ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि वह नीट पेपर लीक मामले में सदन में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। लोकसभा की कार्यवाही सुबह स्थगित होने के बाद दोबारा 12 बजे शुरू हुई तो लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सरकार की ओर से बयान देने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू का नाम पुकारा।

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इसी बीच कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई और इस मुद्दे पर विपक्ष के कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग भी की। रीजीजू ने कहा, “सरकार नीट पेपर लीक पर चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार है। हमने पहले दिन से यह बात कही है। लेकिन चर्चा नियम के तहत होती है। चर्चा कब होनी है, कितनी लंबी होनी है और किस नियम के तहत होनी है, इसका निर्णय स्पीकर (बिरला) सभी दलों के नेताओं से बात कर लेंगे।”

CJP Protest: NEET में ऑल इंडिया रैंक 2 लाने वाले पांशुल बंसल ने बताया क्यों नहीं गए जंतर-मंतर

NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा में 99.9999 पर्सेंटाइल और ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल करने वाले दिल्ली के छात्र पंशुल बंसल इन दिनों अपनी शानदार सफलता के साथ-साथ अपनी सोच को लेकर भी चर्चा में हैं। पेपर रद्द होने के बाद जहां देशभर में कई छात्र विरोध-प्रदर्शनों में शामिल हुए, वहीं पंशुल ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रखा और अतिरिक्त मिले समय को खुद को बेहतर बनाने का अवसर माना। शुरुआत में परीक्षा रद्द होने से उन्हें निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने जल्द ही नकारात्मक सोच छोड़कर दोबारा तैयारी शुरू कर दी।

पंशुल का मानना है कि जिन परिस्थितियों पर हमारा नियंत्रण नहीं होता, उन पर समय और ऊर्जा खर्च करने के बजाय अपने लक्ष्य पर फोकस करना ज्यादा जरूरी है। उनकी यही सकारात्मक सोच और अनुशासित तैयारी उन्हें देश के शीर्ष रैंक हासिल करने वाले छात्रों में शामिल करने में सफल रही।

प्रदर्शन करने से बेहतर लगा घर पर पढ़ना

परिणाम घोषित होने के बाद पंशुल ने कहा कि उन्होंने खुद से सवाल किया कि आखिर प्रदर्शन में जाने से उन्हें क्या मिलेगा। उन्होंने कहा कि, “मैंने सोचा कि विरोध-प्रदर्शन में जाने के बजाय घर पर पढ़ाई करूं, अपनी क्षमता बढ़ाऊं और बेहतर स्कोर हासिल करने की कोशिश करूं।”

पहले 706 अंक, दोबारा परीक्षा में पहुंचे 715 तक

नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित केआर मंगलम वर्ल्ड स्कूल के छात्र पंशुल ने दोबारा हुई परीक्षा में 715 अंक हासिल किए। उन्होंने बताया कि पहली परीक्षा में उनके लगभग 706 अंक आने की संभावना थी, लेकिन अतिरिक्त तैयारी के समय का सही उपयोग कर उन्होंने अपने प्रदर्शन में सुधार किया।

क्या था पूरा मामला?

NEET UG 2026 की पहली परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। लेकिन 12 मई को प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। इस मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। इसके बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित हुई और 16 जुलाई को संशोधित परिणाम घोषित किए गए।

नहीं बदली पढ़ाई की दिनचर्या

कई छात्रों ने दोबारा परीक्षा के लिए अपनी रणनीति बदली, लेकिन पंशुल ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी रोज की पढ़ाई का शेड्यूल बिल्कुल नहीं बदला। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं किया। पिछले डेढ़ महीने में सिर्फ अपना बेहतर देने की कोशिश की और बाकी भगवान पर छोड़ दिया।”

नकारात्मक सोच से दूरी बनाकर रखा फोकस

पंशुल ने स्वीकार किया कि पहली परीक्षा अच्छी होने के बाद उनके मन में यह सवाल जरूर आया कि आखिर परीक्षा रद्द क्यों की गई। लेकिन उन्होंने इस सोच में उलझने के बजाय अपने मुख्य लक्ष्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला पर ध्यान केंद्रित रखा। उन्होंने कहा कि अगर वह नकारात्मकता में फंस जाते, तो उनकी तैयारी प्रभावित हो सकती थी। इसलिए उन्होंने हर तरह की चिंता छोड़कर सिर्फ पढ़ाई पर फोकस किया।

प्रदर्शनों पर टिप्पणी करने से किया इनकार

देशभर में NEET पेपर लीक को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। हालांकि, जब पंशुल से इन प्रदर्शनों पर राय मांगी गई तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा, “मैं इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।”

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भारत के स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर वर्ल्ड मीडिया:NYT ने लिखा- प्रदर्शनकारियों का खून बहा, लेकिन झुके नहीं; गार्डियन बोला- छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में सोमवार को दिल्ली में जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हुई। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान पथराव भी हुआ। दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए। न्यूयॉर्क टाइम्स, द गार्डियन, बीबीसी समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस आंदोलन को प्रमुखता से कवर किया है। पढ़िए, भारत के इस युवा आंदोलन पर विदेशी मीडिया ने क्या लिखा… न्यूयॉर्क टाइम्स: प्रदर्शनकारियों का खून बहा, लेकिन वे अडिग अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हजारों युवा पुलिस कार्रवाई के बावजूद पीछे नहीं हटे। अखबार के मुताबिक, संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और पुलिस कार्रवाई के अगले ही दिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर पहुंच गए और सरकार से जवाबदेही की मांग पर डटे रहे। अखबार ने लिखा कि संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समूहों के अनुसार, सोमवार की झड़प में 150 प्रदर्शनकारी घायल हुए। वहीं, दिल्ली पुलिस ने 118 पुलिसकर्मियों के घायल होने और करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की बात कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया। द गार्डियन: प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं द गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद छात्र आंदोलन जारी है। अखबार के मुताबिक, सोमवार को हुई झड़प के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर लौटे और आंदोलन जारी रखने की बात कही। रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को 50 हजार से ज्यादा लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगाकर रोक दिया। इसके बाद इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। अखबार ने लिखा कि बाद में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। द गार्डियन ने प्रदर्शनकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों को भी चोटें आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 60 लोग घायल हुए, जबकि एक प्रदर्शनकारी की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। अखबार ने लिखा कि आंदोलन अब सिर्फ शिक्षा सुधार की मांग तक सीमित नहीं रहा। बड़ी संख्या में युवा सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए भी सड़कों पर उतर रहे हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि उसने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों के जवाब में कार्रवाई की। अल जजीरा: पुलिस कार्रवाई के अगले दिन छात्र फिर सड़कों पर अल जजीरा ने लिखा कि संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बावजूद छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के अगले ही दिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर लौट आए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। रिपोर्ट में कहा गया कि संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा छात्र घायल हुए। अल जजीरा ने घटनास्थल पर टूटे बैरिकेड, बिखरे सामान और संघर्ष के निशानों का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवेश परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और मूल्यांकन में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर युवाओं में पिछले दो महीनों से नाराजगी है। अखबार ने यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक आंदोलन पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाई। विश्लेषकों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि इस आंदोलन ने सरकार की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर बहस तेज कर दी है। BBC: पुलिस कार्रवाई के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे BBC ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पुलिस कार्रवाई के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जुटे और आंदोलन जारी रखा। रिपोर्ट के मुताबिक, एक दिन पहले संसद मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था, जिसमें कम से कम 60 लोग घायल हुए। वहीं, दिल्ली पुलिस ने अपने 118 जवानों के घायल होने और 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की बात कही। रिपोर्ट में कहा गया कि पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर बना मंच और अस्थायी टेंट भी हटा दिए। कई प्रदर्शनकारियों ने BBC को बताया कि पुलिस कार्रवाई में महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया। हालांकि, पुलिस और केंद्र सरकार ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर कोई टिप्पणी नहीं की। BBC ने अपनी रिपोर्ट में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान का भी जिक्र किया। रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल ने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से जवाब मांगा और कांग्रेस सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकाला।

पुलिस हिरासत के समय राहुल गांधी की नाक से बहता दिखा खून, पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान हुए चोटिल

मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब सुरक्षाकर्मियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर हो रहे कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को हटाने की कोशिश की। पुलिस ने राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और विपक्ष के अन्य नेताओं को लोक कल्याण मार्ग पर प्रदर्शन स्थल से जबरदस्ती हटाने की भी कोशिश की। हटाए जाते समय राहुल गांधी ने कहा, “भारत में लोकतंत्र अभी चल रहा है।” IANS द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में उनकी नाक से खून बहता हुआ दिखाई दिया।

बता दें कि विपक्ष के नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने उनके साथ-साथ कई सांसदों, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया है। इनमें कन्हैया कुमार भी शामिल हैं। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की गई है।

हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ANI से कहा, “सब कुछ आपके सामने है। देखिए किस तरह हमारे नेताओं, जिनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हैं, के साथ बदसलूकी की गई। क्या हम आज के देश में ऐसा माहौल चाहते हैं? क्या आपको देश में लोकतंत्र दिखाई दे रहा है? हम यहां फिर से विरोध प्रदर्शन करने आएंगे।”

हिरासत में लिए जाने से पहले, राहुल गांधी ने लोगों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की और छात्रों के खिलाफ की गई कथित कार्रवाई को देश पर हमला बताया।

X पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।”

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए गांधी ने कहा, “पीएम मोदी को लगता है कि वे बिना जवाब दिए और बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे। वे ऐसा नहीं कर सकते। इस बार तो बिल्कुल नहीं।”

लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मैं हर उस देशभक्त भारतीय से कहता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए, वे सभी प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने में हमारे साथ शामिल हों। भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।”

इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की और इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा और कांग्रेस के कई सांसद शामिल हुए। पार्टी ने NEET-UG पेपर लीक मामले और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

यह प्रदर्शन संसद के दोनों सदनों में बार-बार हुए हंगामे के बाद हुआ, जहां विपक्षी दलों ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों, जिसमें कथित NEET-UG पेपर लीक का मामला भी शामिल था, पर चर्चा की मांग की थी। वहीं, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद, कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करते हुए गए।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन लोक कल्याण मार्ग पहुंचे और राहुल गांधी से कुछ देर बातचीत की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को धरना खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश की।

X पर एक पोस्ट में, जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने उन्हें और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं से बात करने के लिए भेजा था। सिंह के अनुसार, राहुल गांधी ने शुरुआत में कहा था कि अगर केंद्र सरकार संसद में NEET और उससे जुड़े आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा कराने का आश्वासन दे देती है, तो वे प्रदर्शन खत्म कर देंगे।

सिंह ने दावा किया कि सरकार ने वह मांग मान ली थी, लेकिन बाद में गांधी ने कहा, “अब मेरी दो मांगें हैं: संसद में चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।”

इस घटनाक्रम को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए सिंह ने आरोप लगाया कि “राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता का अपनी बात से पीछे हटना… लोकतंत्र के हर नियम के खिलाफ है,” साथ ही उन्होंने कहा कि “सरकार NEET और उससे जुड़े आंदोलन से संबंधित सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार है।”

News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि गांधी रात तक विरोध स्थल पर ही रह सकते थे, हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

इससे पहले दिन में, गांधी ने X पर पोस्ट किया, “कल युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के बारे में जवाब मांगने के लिए हम पीएम मोदी के घर तक मार्च कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “सरकार न तो कोई जिम्मेदारी लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर बहस करना चाहती है। भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।”

विपक्ष का पक्ष रखते हुए कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, “हमारी एक सीधी-सी मांग है। हमारे विपक्ष के नेताओं ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में यह मांग उठाई है। मांग यह है कि गृह मंत्री संसद में इस बारे में स्पष्टीकरण दें और सदन में इस मुद्दे पर चर्चा हो।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि गृह मंत्री इस बात का जवाब दें कि “किस तरह लोकतंत्र और हमारे संविधान की हत्या की जा रही है और छात्रों पर जुल्म किए जा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी पिछले 45 दिनों से प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संसद में चर्चा की बार-बार की गई मांगों पर कोई जवाब न मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।

राजीव शुक्ला ने कहा, “हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था। वे संसद में बहस नहीं करवा रहे हैं। तो हम और क्या कर सकते थे? हमें सड़कों पर उतरना ही पड़ा।”

सैयद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और खड़गे को किसी भी सदन में बोलने नहीं दिया गया और कहा कि छात्रों को “लाठी-चार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस” का सामना करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री संसद भी नहीं आते हैं। इसीलिए विपक्ष के सभी सांसद उनके आवास पर आए हैं, ताकि हमारी आवाज सुनी जा सके।”

मणिकम टैगोर ने कहा कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मिलकर शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग करना चाहता था। उन्होंने कहा, “उन्हें शिक्षा मंत्री को हटा देना चाहिए। दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। पीएम मोदी इसके लिए जिम्मेदार हैं। हमें प्रधानमंत्री से मिलने के लिए अंदर नहीं जाने दिया गया। इसलिए, वे यहां सभी सांसदों को हिरासत में ले रहे हैं।”

के. सुरेश ने आरोप लगाया, “वे हमें बेरहमी से हिरासत में ले रहे हैं। हम प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि कल दिल्ली पुलिस ने हमारे छात्रों पर बेरहमी से हमला किया था।”

लोगों को हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, “यह बीजेपी का आतंकवाद है। वे छात्रों की बात नहीं सुनते।” सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा, “अगर सांसदों का यह हाल है, तो सोचिए छात्रों के साथ क्या हो रहा होगा,” वहीं इमरान मसूद ने आरोप लगाया, “वे हमारे साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं। छात्रों की पिटाई की गई। हमें धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ रहा है। वे संसद में भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।”

इससे पहले मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल हुए छात्रों से मुलाकात की। वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आरएमएल अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।

सोमवार को नड्डा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की, जिसने प्रधान के इस्तीफे, NEET उम्मीदवारों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा (जिनमें से “20 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है”) और एक अन्य मांग रखी। बैठक के बाद, CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने X पर पोस्ट किया, “हमें अभी तक सरकार से कोई जवाब नहीं मिला है। हम अपने प्रदर्शनकारियों का ख्याल रख रहे हैं। सरकार को सिर्फ फोटो खिंचवाने के बजाय प्रधान को बर्खास्त करना चाहिए!”

धरने पर बैठे राहुल गांधी को पुलिस ने उठाया, अखिलेश भी हिरासत में

rahul gandhi

पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस के कई नेता दिल्ली में पीएम आवास के पास दोपहर करीब साढ़े 3 बजे से धरने पर बैठे। इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कांग्रेस नेता शामिल थे। कुछ घंटे बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव पीएम आवास पर पहुंचे। इन्हें दिल्ली पुलिस ने वहां से हटाया। 

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प्रधानमंत्री कार्यालय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को दावा किया कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को नीट के मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए आश्वासन दिया गया, लेकिन फिर उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी रख दी। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिक्ष का रवैया लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।

धरनास्थल पर राहुल गांधी से मुलाकात के बाद सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा और अन्य वरिष्ठ नेता अकबर रोड के समीप अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठे थे, जिसके बाद सरकार ने उनसे बातचीत के लिए उन्हें और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को मौके पर भेजा था।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से धरना समाप्त करने का अनुरोध किया गया क्योंकि वह स्थान प्रदर्शन के लिए निर्धारित नहीं था और वहां धरने के कारण आम लोगों को असुविधा हो रही थी। सिंह के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार नीट और उससे जुड़े आंदोलन के सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार हो जाती है तो वह धरना समाप्त कर देंगे।

 

उन्होंने दावा किया कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व से अनुमति लेने के बाद राहुल गांधी को यह आश्वासन दिया गया कि सरकार संसद में नीट और उससे जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। सिंह ने आरोप लगाया कि इसके बाद राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी रख दी और कहा कि अब उनकी दो मांगें हैं।

 

सिंह ने कहा कि जब राहुल गांधी को याद दिलाया गया कि उन्होंने पहले केवल संसद में चर्चा की मांग की थी, तो उन्होंने जवाब दिया कि अब उनकी मांगें बदल गई हैं। सिंह ने कहा कि राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का अपनी बात से पीछे हटना ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ है और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।

 

उन्होंने कहा कि सरकार नीट और उससे जुड़े आंदोलन के सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस ने अब तक इस गंभीर विषय पर नियमों के तहत औपचारिक चर्चा के लिए कोई नोटिस नहीं दिया है। सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का व्यवहार लोकतंत्र के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

क्यों अलग माना जा रहा है जेन-ज़ी का यह छात्र आंदोलन और कहां चूकी मोदी सरकार?

Gen Z student protest in Delhi

Gen Z student protest in Delhi: दिल्ली में छात्रों के 'संसद मार्च' की शुरुआत परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग से हुई थी। लेकिन समय के साथ यह प्रदर्शन केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शन में शामिल कई छात्र इसे सरकारी जवाबदेही, संस्थागत भरोसे और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक सवालों से जोड़कर देख रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत में नागरिकता कानून, किसान आंदोलन और महिला पहलवानों के प्रदर्शन जैसे कई बड़े आंदोलन हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि मौजूदा छात्र आंदोलन को अलग क्यों माना जा रहा है?

1. मुद्दा केवल शिक्षा मंत्री तक सीमित नहीं रहा

शुरुआत में प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय करने और इस्तीफे की मांग कर रहे थे। लेकिन अब प्रदर्शन में शामिल कई छात्र सरकार की समग्र शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भी सवाल उठा रहे हैं।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि जब किसी मंत्री का सार्वजनिक रूप से बचाव किया जाता है, तो उस विभाग से जुड़े विवाद केवल मंत्रालय तक सीमित नहीं रहते बल्कि सरकार की व्यापक राजनीतिक जवाबदेही का हिस्सा बन जाते हैं। वहीं सरकार का कहना रहा है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए हैं और अनियमितताओं पर कार्रवाई की जा रही है। ALSO READ: छात्रों के बाद किसान आंदोलन की तैयारी, शंभु और खनौरी बॉर्डर बंद, भारी सुरक्षा बल तैनात

2. नेतृत्व से अधिक नेटवर्क आधारित आंदोलन

इस आंदोलन की एक खास बात यह भी है कि इसका संचालन किसी एक राजनीतिक दल, छात्र संगठन या प्रमुख चेहरे तक सीमित दिखाई नहीं देता। सोशल मीडिया के जरिए अलग-अलग शहरों के छात्र एक-दूसरे से जुड़े और विरोध प्रदर्शनों का समन्वय करते दिखे। ऐसे विकेंद्रीकृत आंदोलनों को पारंपरिक राजनीतिक ढांचे से अलग माना जाता है क्योंकि इनमें निर्णय लेने का केंद्र स्पष्ट नहीं होता।

3. साझा मुद्दों ने व्यापक समर्थन की कोशिश की

प्रदर्शन का मुख्य फोकस परीक्षा प्रणाली, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर रहा है। ये ऐसे विषय हैं जिनका असर अलग-अलग राज्यों, जातियों और सामाजिक समूहों के युवाओं पर पड़ता है।

 

इसी वजह से आंदोलन को किसी एक पहचान आधारित राजनीति के दायरे में रखना अपेक्षाकृत कठिन माना जा रहा है। हालांकि सरकार समर्थक कुछ समूहों ने आंदोलन की मंशा और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर सवाल भी उठाए हैं। ALSO READ: सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च से पहले आंदोलन में आया बड़ा मोड़

4. संस्थानों पर भरोसे का सवाल

प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों का कहना है कि उन्हें अदालतों, जांच एजेंसियों और अन्य संस्थागत प्रक्रियाओं से अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसी वजह से उन्होंने सार्वजनिक विरोध को अपनी बात रखने का प्रभावी माध्यम माना।

हालांकि न्यायपालिका और अन्य संस्थाएं समय-समय पर ऐसे मामलों में सुनवाई और हस्तक्षेप करती रही हैं। इसलिए यह धारणा सभी पक्षों द्वारा समान रूप से स्वीकार नहीं की जाती।

5. जवाबदेही की मांग आंदोलन का केंद्रीय विषय

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग यह रही है कि बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक और भर्ती संबंधी विवादों के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए।
 

विश्लेषकों का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक सवाल उठा रहा है।

6. सरकार की प्रतिक्रिया पर बहस

सरकार की ओर से अब तक प्रशासनिक कदम, जांच और कुछ मामलों में कार्रवाई की जानकारी दी गई है। दूसरी ओर प्रदर्शनकारी इसे अपर्याप्त बताते हुए लगातार विरोध जारी रखे हुए हैं।
 

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार सरकार के सामने चुनौती केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने की नहीं, बल्कि युवाओं के बीच भरोसा कायम रखने की भी है। आने वाले समय में सरकार बातचीत, नीति सुधार या प्रशासनिक कार्रवाई—किस रास्ते को प्राथमिकता देती है, इस पर भी नजर रहेगी।

7. युवाओं की राजनीतिक भागीदारी का नया संकेत?

इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शायद इसका सामाजिक और पीढ़ीगत स्वरूप है। बड़ी संख्या में ऐसे छात्र इसमें शामिल हैं जो पहली बार किसी सार्वजनिक आंदोलन का हिस्सा बने हैं।

 

दुनिया के कई देशों में हाल के वर्षों में छात्रों और युवाओं ने जलवायु परिवर्तन, आर्थिक संकट, शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया है। भारत में भी कुछ विश्लेषक इस प्रदर्शन को उसी व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति के संदर्भ में देख रहे हैं, हालांकि इसकी दिशा और राजनीतिक प्रभाव का आकलन अभी जल्दबाजी होगा।
 

दिल्ली का यह छात्र आंदोलन फिलहाल केवल परीक्षा प्रणाली के विरोध तक सीमित नहीं दिखाई देता। यह युवाओं की आकांक्षाओं, रोजगार, शिक्षा और सरकारी जवाबदेही से जुड़े व्यापक प्रश्नों को सामने ला रहा है।

 

हालांकि यह कहना अभी जल्द होगा कि इसका दीर्घकालिक राजनीतिक असर क्या होगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि इस आंदोलन ने युवाओं की चिंताओं और सार्वजनिक संस्थानों में भरोसे के सवाल को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में सरकार की प्रतिक्रिया और आंदोलन की दिशा, दोनों ही इसके महत्व को तय करेंगे।

NEET पेपर लीक पर पीएम मोदी ने क्या कहा? किरन रिजिजू ने सब बताया

NEET paper leak: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NEET पेपर लीक मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि ऐसी घटनाओं को रोकना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं में शामिल दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार 21 जुलाई को एनडीए संसदीय दल की ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद प्रधानमंत्री के हवाले से बताया कि देश में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। पीएम मोदी ने ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया, जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “NEET परीक्षा के बारे में प्रधानमंत्री ने बताया कि गड़बड़ी की खबरें मिलने पर सरकार ने तुरंत कार्रवाई की, तेरह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसके अलावा, छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए, बिना किसी देरी के दोबारा परीक्षा कराई गई और नतीजे घोषित किए गए… उन्होंने भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे कड़े कदमों के बारे में भी बताया… उन्होंने दोषियों को सजी देने और मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाने पर ज़ोर दिया जिसमें कोई कमी न हो।”

उन्होंने आगे कहा, “NDA चल रहे मीनसून सत्र के दौरान सकारात्मक भूमिका निभाएगा। देश के हित में लाए जाने वाले बिलों को पारित कराने के हमारे संकल्प में हम एकजुट हैं। हम विपक्ष से भी आग्रह करते हैं कि भले ही अलग-अलग पार्टियों की राय अलग-अलग हो, लेकिन वे देश, उसके भविष्य और युवाओं के लिए मिलकर काम करें।”

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने एनडीए के सहयोगी दलों से संसद के विधायी कार्यों में एकजुट होकर सहयोग करने की अपील की। साथ ही विपक्षी दलों से भी रचनात्मक भूमिका निभाने का आग्रह करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं। लेकिन देश के भविष्य और युवाओं के हित में सभी सांसदों की साझा जिम्मेदारी है।

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब NEET पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सोमवार को संसद की ओर मार्च कर रहे सैकड़ों प्रदर्शनकारी छात्रों को पुलिस ने रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज भी किया गया। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। इसमें हर साल 20 लाख से अधिक छात्र शामिल होते हैं। इस वर्ष पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया था और बाद में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई।

यह एग्जाम भारत में एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS), बीएएमएस (BAMS), बीएचएमएस (BHMS), बीयूएमएस (BUMS) सहित विभिन्न मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है। इसका आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा किया जाता है।

इसी दौरान सीबीएसई की ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली को लेकर भी विवाद सामने आया, जिसमें कई छात्रों ने गलत अंक दिए जाने और कुछ मामलों में दूसरे छात्रों के परिणाम जारी होने जैसी शिकायतें की थीं। इन घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

Sonam Wangchuk: 23 दिन से भूख हड़ताल…कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत? सफदरजंग अस्पताल ने दिया हेल्थ अपडेट

राजधानी दिल्ली में सोमवार 20 जुलाई को खूब गहमा-गहमी दिखी। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ अभियान में काफी कुछ देखने को मिला। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। प्रदर्शन में 10 बजे प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर मार्च किया। वहीं दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक अब अस्पताल में भर्ती हैं। उनके हेल्थ को लेकर अस्पताल से बड़ी जानकारी दी है।

बता दें कि, सोनम वांगचुक पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा है कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक युवा प्रतिनिधियों को सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती या उन्हें खुद अस्पताल से जाकर मुलाकात करने की इजाजत नहीं दी जाती। फिलहाल सोनम वांगचुक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उनके ब्लड शुगर स्तर को लेकर चिंता जरूर है, लेकिन उनकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। अस्पताल की ओर से बताया गया है कि उन्हें शरीर में पानी और जरूरी खनिजों की कमी पूरी करने के लिए ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) और पोटैशियम सिरप दिया जा रहा है।

डॉक्टरों की टीम लगातार कर रही निगरानी

सोमवार को जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में सफदरजंग अस्पताल ने बताया कि सोनम वांगचुक का इलाज वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल के अनुसार, उनकी जरूरी स्वास्थ्य जांच के सभी प्रमुख संकेत फिलहाल स्थिर हैं। अस्पताल ने कहा कि उनका ब्लड शुगर स्तर अभी भी कम है। हालांकि, ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) और पोटैशियम सिरप दिए जाने के बाद खून से जुड़े दूसरे जांच परिणामों में सुधार देखा गया है।

बुलेटिन के मुताबिक, वीएमएमसी, सफदरजंग अस्पताल और एम्स, नई दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) से पूरी तरह उबरने और किसी भी संभावित परेशानी का समय रहते पता लगाने के लिए लगातार चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है। अस्पताल ने यह भी बताया कि आगे का इलाज उनकी सेहत में होने वाले सुधार और लैब जांच की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा।

पथराव और तोड़फोड़…CJP प्रोटेस्ट में पांच IPS अधिकारी समेत 50 जवान घायल, पुलिस दर्ज करेगी FIR

संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में खूब गहमा-गहमी देखने को मिली। नीट (NEET) पेपर लीक मामले मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को संसद चलो मार्च का आयोजन किया। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। वहीं प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में पांच से अधिक आईपीएस अधिकारी घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, इस हिंसा में 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। वहीं, अब तक 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस ने दर्ज किया FIR

पुलिस ने बताया कि अलग-अलग जगहों से मिली शिकायतों के आधार पर अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। घटना में शामिल लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन से बने वीडियो की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर से किसी भी प्रदर्शनकारी को नहीं हटाया गया। कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ की गई, जिन्होंने कथित तौर पर पत्थरबाजी की, संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की और पुलिस पर हमला किया।

पुलिस के अनुसार, कई तस्वीरों और वीडियो में प्रदर्शनकारियों को पुलिस और अर्धसैनिक बलों पर पत्थर फेंकते हुए देखा जा सकता है। अधिकारियों का दावा है कि पुलिस ने लंबे समय तक संयम बनाए रखा। पुलिस ने यह भी कहा कि नई दिल्ली में जब हिंसक भीड़ ने दुकानों को निशाना बनाने और लगातार पत्थरबाजी करने की कोशिश की, तब स्थिति को काबू में करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया।

प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटाया गया

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलनकारियों को जंतर-मंतर से हटा दिया गया है। पुलिस ने मंच खाली करा लिया है और टेंट भी निकाल दिए हैं। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर के बाद कनॉट प्लेस से भी खदेड़ दिया गया है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि जेपी नड्‌डा से मिले। इनका दावा है कि नड्डा ने उन्हें यह भरोसा दिलाया है कि जंतर-मंतर और उसके आस-पास अब कोई कार्रवाई नहीं होगी।

पाकिस्तानी हैंडल्स फैलाने लगे दिल्ली प्रोटेस्ट को लेकर झूठा प्रॉपेगेंडा, इंडियन आर्मी फैक्ट चेक ने तुरंत खारिज किए ये दावे

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और संसद मार्च को लेकर दिल्ली में लगातार गहमागहमी जारी है। वहींदिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर सोशल मीडिया पर फेक खबरें भी तेजी से फैलाया जा  रही हैं। पाकिस्तान से संचालित कुछ प्रोपेगैंडा सोशल मीडिया हैंडल यह झूठ फैला रहे हैं कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए नई दिल्ली में भारतीय सेना तैनात की गई है। इतना ही नहीं, इन पोस्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि सेना ने प्रदर्शनकारियों पर हथियारों का इस्तेमाल किया, जिससे कई लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए।

फैलाई गई फेक खबरें 

हालांकि, यह दावा पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। सच्चाई यह है कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस और अन्य पैरा मिलिट्री फोर्स, जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान संभाल रहे हैं। इस पूरे मामले में भारतीय सेना की कोई तैनाती नहीं की गई है।फर्जी खबर फैलाने वाले लोग आम प्रदर्शन का वीडियो दिखाकर उसके साथ सेना की तैनाती और हथियारों के इस्तेमाल जैसी झूठी बातें जोड़ रहे हैं। इसका मकसद लोगों में डर और भ्रम फैलाना तथा भारतीय सेना की छवि को नुकसान पहुंचाना है।

जंतर-मंतर से हटाया गया प्रदर्शन स्थल

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलनकारियों को जंतर-मंतर से हटा दिया गया है। पुलिस ने मंच खाली करा लिया है और टेंट भी निकाल दिए हैं। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर के बाद कनॉट प्लेस से भी खदेड़ दिया गया है। इससे कुछ घंटे पहले प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च निकालने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़कर और लाठीचार्ज कर उन्हें रोक दिया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर पर इकट्ठा हो गए। आंदोलन के एक नेता ने कहा कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक वहीं डटे रहेंगे।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

पुलिस ने वह मंच भी हटा दिया, जहां सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल की थी। इसके साथ ही वहां रखे ट्रैम्पोलिन, कालीन, गद्दे और अन्य सामान भी हटा दिए गए। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल की बातचीत के बाद उनकी एक प्रमुख मांग मान ली गई है। हालांकि, उनका कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र और अन्य प्रदर्शनकारी मौजूद हैं।

सीजेपी ने सबसे पहले 6 जून को जंतर-मंतर पर एक दिन का विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद आंदोलन लगातार बढ़ता गया और कई लोगों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी, जिससे यह लंबा धरना बन गया। सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी पार्लियामेंट स्ट्रीट के पास जुटे। उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए संसद की ओर मार्च निकाला। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया।