Gold Silver Ratio: सोने के मुकाबले और ज्यादा गिर सकती है चांदी, चार्ट दे रहा बड़े संकेत; जानिए अब क्या करें निवेशक

Gold Silver Ratio: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से चांदी की कीमत में करीब 50% की गिरावट आ चुकी है। सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि सोने के मुकाबले भी चांदी एक-तिहाई से ज्यादा कमजोर हो गई है। अब टेक्निकल चार्ट इशारा कर रहे हैं कि यह गिरावट अभी थमने वाली नहीं है। ऐसे में सोने के मुकाबले चांदी और कमजोर पड़ सकती है।

जनवरी के बाद क्यों बदला माहौल?

रॉयटर्स के मुताबिक, 30 जनवरी के बाद से सोना और चांदी दोनों में दबाव बढ़ने लगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि बाजार को लगने लगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अब ब्याज दरों में कटौती करने के मूड में नहीं है। इसके उलट, अगर महंगाई बढ़ती रही तो ब्याज दरें बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

इस बीच ईरान युद्ध के बाद महंगाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गईं। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर अपने अनुमान बदलने शुरू कर दिए और कीमती धातुओं में बिकवाली तेज हो गई।

चांदी पर ज्यादा दबाव क्यों आया?

सोने की तुलना में चांदी पर असर ज्यादा पड़ा। इसकी वजह सिर्फ निवेशकों की बिकवाली नहीं है। दरअसल, चांदी केवल एक कीमती धातु नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और कई उद्योगों में होता है।

इसलिए जब अर्थव्यवस्था या निवेशकों के जोखिम लेने के रुख को लेकर चिंता बढ़ती है तो चांदी पर दबाव भी ज्यादा आता है। एक वजह यह भी रही कि इससे पहले चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी आई थी। ऐसे में मुनाफावसूली शुरू होने पर इसमें गिरावट भी ज्यादा देखने को मिली।

टेक्निकल चार्ट क्या कह रहा है?

एनालिस्टों के मुताबिक, गोल्ड टु सिल्वर रेशियो यानी सोने और चांदी के भाव का अनुपात लगातार ऊपर जा रहा है। हाल ही में यह 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के ऊपर निकल गया है।

टेक्निकल एनालिसिस में 200-डे मूविंग एवरेज को लंबे समय के ट्रेंड का अहम पैमाना माना जाता है। किसी भी एसेट का इसके ऊपर या नीचे जाना अक्सर बाजार की दिशा का बड़ा संकेत देता है।

अब 70 के स्तर पर रहेगी नजर

अब इस अनुपात का अगला बड़ा लक्ष्य 70 माना जा रहा है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बाजार के लिए महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर भी है। ट्रेडर्स अक्सर ऐसे गोल आंकड़ों पर खास नजर रखते हैं।

अगर गोल्ड टु सिल्वर रेशियो मजबूती से 70 के ऊपर निकल जाता है, तो इसके बाद 6 फरवरी के 72.74 के स्तर तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके बाद अगला लक्ष्य 75.25 हो सकता है। यह अप्रैल 2025 के बाद सोने के मुकाबले चांदी की गिरावट के दायरे का लगभग आधा स्तर है।

अगर चांदी वापसी करती है तो क्या होगा?

हालांकि, चांदी के लिए उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अगर चांदी में फिर से खरीदारी लौटती है, तो सबसे पहले गोल्ड टु सिल्वर रेशियो को 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के नीचे आना होगा। इसके बाद यह 22 जून के 62.68 के स्तर तक फिसल सकता है।

अगर यह अनुपात 60.56 से भी नीचे चला जाता है, तो इसे चांदी के पक्ष में मजबूत संकेत माना जाएगा। ऐसे में बाजार में चांदी की तेजी को नई ताकत मिल सकती है।

निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब

अभी के संकेत बताते हैं कि निवेशकों का झुकाव चांदी की बजाय सोने की ओर ज्यादा है। जब तक गोल्ड टु सिल्वर रेशियो ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तब तक माना जाएगा कि सोना, चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

लेकिन अगर यह अनुपात नीचे आने लगता है, तो इसका मतलब होगा कि चांदी फिर से मजबूत होने लगी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उस वक्त चांदी में दोबारा खरीदारी दिख सकती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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Jupiter Wagons Share: रेल कंपनी को मिले ₹264 करोड़ के ऑर्डर, शेयरों पर रहेगी नजर

Jupiter Wagons Share: रेल फ्रेट वैगन बनाने वाली कंपनी Jupiter Wagons Ltd को ₹264.32 करोड़ के दो बड़े ऑर्डर मिले हैं। इनमें एक ऑर्डर JSW (South) Rail Logistics से और दूसरा Central Warehousing Corporation (CWC) से मिला है। इन नए ऑर्डर्स से कंपनी के ऑर्डर बुक को मजबूती मिलेगी और आने वाले महीनों में रेवेन्यू की बेहतर विजिबिलिटी रहेगी।

JSW से मिला ₹122.88 करोड़ का ऑर्डर

जुपिटर वैगंस ने बताया कि JSW (South) Rail Logistics के साथ ₹122.88 करोड़ का लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) साइन किया गया है। इसके तहत कंपनी पांच BFNSM1 रेक और BVCM वैगन तैयार कर सप्लाई करेगी। यह ऑर्डर सात महीने के भीतर पूरा किया जाएगा। इसके अलावा कंपनी JSW को दो BFNV वैगन भी सप्लाई करेगी।

CWC ने दिया ₹141.44 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट

सरकारी कंपनी Central Warehousing Corporation (CWC) ने जुपिटर वैगंस को ₹141.44 करोड़ का ऑर्डर दिया है। इसके तहत कंपनी आठ BLSS रेक तैयार करेगी। इनमें 32 BLSS-A वैगन, 352 BLSS-B वैगन और आठ ब्रेक वैन शामिल होंगे। इस ऑर्डर को एक साल के भीतर पूरा करना है।

रेल लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ रही मांग

BLSS वैगन का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंटेनर ट्रांसपोर्ट में होता है। ये बंदरगाहों, वेयरहाउस और औद्योगिक केंद्रों के बीच मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

जुपिटर वैगंस के मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक लोहिया ने कहा कि ये ऑर्डर कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और समय पर डिलीवरी पर ग्राहकों के भरोसे को दिखाते हैं। उनका कहना है कि रेल लॉजिस्टिक्स और फ्रेट इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश से आगे भी ऐसे ऑर्डर मिलने की अच्छी संभावना है।

जुपिटर वैगंस के शेयरों का हाल

जुपिटर वैगंस  का शेयर गुरुवार को 1.68% गिरकर ₹263.10 पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 11.20% टूटा है। वहीं, 1 साल में इसने 31% से ज्यादा का नेगेटिव रिटर्न दिया है। हालांकि, बीते 5 साल में इसने 395.95% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 11.77 हजार करोड़ रुपये है।

Stock Market Holiday: लगातार तीन दिन शेयर बाजारों में नहीं होगा कारोबार, BSE और NSE में रहेगी छुट्टी

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Share Markets Closing: आखिर ऐसा क्या हुआ कि अंतिम 75 मिनट में सेंसेक्स 500 अंक गिर गया?

इस हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बाजार में जबर्दस्त उतार-चढ़ाव रहा। ज्यादातर समय बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स में शानदार तेजी दिखी। लेकिन, कारोबार के करीब एक-सवा घंटे में सूचकांकों ने अपनी काफी बढ़त गंवा दी। अंतिम कुछ मिनटों में प्रॉफिट बुकिंग ने बाजार पर दबाव बना दिया।

75 मिनट में सेंसेक्स ने गंवाएं 500 अंक

दो दिनों के कारोबार में 1700 अंक चढ़ने वाले सेंसेक्स ने अंतिम कुछ मिनटों में घुटने टेक दिए। 1:50 बजे सेंसेक्स 77,594 अंक पर था। 3:05 में यह गिरकर 77,095 अंक पर आ गया। यह सिर्फ 75 मिनट में 500 अंक की गिरावट है। इस गिरावट ने इनवेस्टर्स को चौंकाया। खासकर लॉन्ग पोजीशन वाले इनवेस्टर्स ज्यादा परेशान दिखे।

26 जून को बीएसई-एनएसई में छुट्टी

इक्विरियस वेल्थ के एमडी और डायरेक्टर अंकुर पुंज ने रायटर्स को बताया, “चूंकि शेयर बाजार 26 जून को बंद रहेंगे, इसलिए इनवेस्टर्स ने कारोबार के अंतिम पलों में अपने पोजीशन काटे।” 26 जून को शेयर बाजारों में मुहर्रम की छुट्टी है। इसलिए बीएसई और एनएसई बंद रहेंगे। 29 जून यानी सोमवार को बीएसई और एनएसई खुलेंगे।

मानसून में कम बारिश बाजार के लिए रिस्क

बजाज फिनसर्व एएमसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “मानसून में सामान्य से कम बारिश शेयर बाजार के लिए शॉर्ट टर्म रिस्क है। लेकिन, केंद्रीय बैंक ने फॉरेन करेंसी डिपॉजिट बढ़ाने के उपाय किए हैं। सरकार ने फॉरेन इनवेस्टर्स को बॉन्ड्स में निवेश पर टैक्स में छूट दी है। इससे मार्केट में इनफ्लो बढ़ना चाहिए।”

एविएशन कंपनियों के शेयरों में तेजी

इंटरग्लोब एविएशन का शेयर अंत तक तेजी बनाए रखने में सफल रहा। यह 4.7 फीसदी चढ़कर बंद हुआ। क्रूड में नरमी का असर एविएशन कंपनियों के शेयरों पर दिखा। स्पाइसजेट के शेयरों में भी मजबूती दिखी। ऑटो और इससे संबंधित सेक्टर की कंपनियों में भी मजबूत दिखी।

ऑटो शेयरों ने भी दिखाई रफ्तार

Bajaj Auto, Maruti Suzuki, Tata Motors PV और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर 1-4 फीसदी चढ़कर बंद हुए। TVS Motor, Ashok Leyland और टाटा मोटर्स सीवी के शेयर तो 4-5 फीसदी तक उछल गए। Motherson Sumi Wiring का शेयर तो 9 फीसदी चढ़कर बंद हुआ।

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भारतीय बाजार का बुरा दौर हो रहा खत्म

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने कहा है कि भारतीय बाजार के लिए स्थितियां अनुकूल हो रही हैं। क्रूड में नरमी है। घरेलू डिमांड स्ट्रॉन्ग बनी हुई है। इससे आगे कॉर्पोरेट अर्निंग्स बढ़ने की उम्मीद है। अमेरिका-ईरान में लड़ाई खत्म होने से महंगाई बढ़ने का खतरा कम हुआ है। एआई कंपनियों में निवेश को लेकर उत्साह ठंडा पड़ रहा है। इससे बाजार का सेंटीमेंट पॉजिटिव बना रह सकता है।

ITR Filing 2026: AI से फाइल कर रहे रिटर्न? एक्सपर्ट्स बोले- डेटा लीक होने से लेकर टैक्स नोटिस आने तक का खतरा

ITR Filing 2026: अब तकरीबन सभी सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ईमेल लिखने से लेकर निवेश और टैक्स प्लानिंग तक में लोग AI टूल्स की मदद ले रहे हैं।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने के लिए केवल सामान्य AI चैटबॉट्स पर भरोसा करना महंगा पड़ सकता है। खासकर जब मामला कैपिटल गेन, विदेशी संपत्ति, क्रिप्टोकरेंसी या बिजनेस इनकम से जुड़ा हो।

AI पर पूरी तरह भरोसा करना क्यों गलत?

ClearTax के फाउंजर और CEO अर्चित गुप्ता का कहना है कि कई लोग अपना Form 16, सैलरी स्लिप और निवेश से जुड़ी जानकारी सीधे सार्वजनिक AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर रहे हैं। इससे टैक्स कैलकुलेशन में गलती होने का खतरा रहता है।

उनके मुताबिक, सामान्य AI टूल्स के पास टैक्स नियमों का तय ढांचा नहीं होता। यही वजह है कि एक ही Form 16 अपलोड करने पर अलग-अलग बार अलग टैक्स देनदारी दिख सकती है। अगर रिटर्न में कोई गलती होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी टैक्सपेयर की होगी, AI टूल की नहीं।

डेटा लीक का भी खतरा

रिटर्न फाइल करने में AI के इस्तेमाल से डेटा लीक होने का खतरा भी रहता है। अर्चित गुप्ता के मुताबिक, सार्वजनिक AI प्लेटफॉर्म पर सैलरी स्लिप, PAN, बैंक डिटेल या दूसरे वित्तीय दस्तावेज अपलोड करना सुरक्षित नहीं है। इससे आपकी निजी जानकारी लीक हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यह कई कंपनियों की डेटा सिक्योरिटी पॉलिसी का उल्लंघन भी माना जा सकता है। कुछ मामलों में कर्मचारियों पर कार्रवाई तक की नौबत आ चुकी है।

AI कहां तक मददगार है?

Deloitte India के पार्टनर तरुण गर्ग का कहना है कि AI को टैक्स फाइलिंग का विकल्प नहीं, बल्कि एक सहायक टूल की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। यह टैक्स नियम समझाने, जरूरी दस्तावेजों की सूची तैयार करने और पुराने-नए टैक्स रिजीम की तुलना करने में मदद कर सकता है।

हालांकि, AI से तैयार रिटर्न को अंतिम मानने के बजाय ड्राफ्ट की तरह देखें। रिटर्न फाइल करने से पहले सभी जानकारियों का मिलान आधिकारिक दस्तावेजों से जरूर करें।

रिटर्न भरने से पहले ये जांच जरूर करें

  • AIS, TIS और Form 26AS से सभी आय का मिलान करें।
  • सही ITR फॉर्म का चयन हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि करें।
  • पुराना या नया टैक्स रिजीम सही तरीके से चुना गया है या नहीं, यह जांचें।
  • TDS और TCS क्रेडिट का मिलान करें।
  • कैपिटल गेन, क्रिप्टो, विदेशी संपत्ति और अन्य जरूरी खुलासों की दोबारा जांच करें।
  • बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेटेड है या नहीं, इसकी पुष्टि करें।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI टैक्स फाइलिंग को आसान जरूर बना सकता है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा टैक्सपेयर की ही रहती है। इसलिए ITR फाइल करते समय AI की सलाह पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय आधिकारिक पोर्टल या टैक्स प्रोफेशनल की मदद लेना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

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Stock Market Holiday: लगातार तीन दिन शेयर बाजारों में नहीं होगा कारोबार, BSE और NSE में रहेगी छुट्टी

Stock Market Holiday: आज इस हफ्ते का आखिरी कारोबारी दिन था। इस हफ्ते पांच की जगह शेयर बाजार में सिर्फ चार दिन ही कारोबार हुए। यह हफ्ता शेयर बाजारों में कारोबार के लिहाज से छोटा है। इसकी वजह यह है कि 26 जून को शेयर बाजारों में कारोबार नहीं होगा। मुहर्रम के उपलक्ष्य में बीएसई और एनएसई बंद रहेंगे। दोबारा बाजार 29 जून यानी सोमवार को खुलेंगे।

BSE-NSE में मुहर्रम की छुट्टी

बीएसई और एनएसई के हॉलिडे कैलेंडर में मुहर्रम की छुट्टी है। हालांकि, जुलाई में शेयर बाजारों में कोई छुट्टी नहीं होगी। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शेयर बाजारों में छुट्टी रहती है। बीएसई, एनएसई और एमसीएक्स बंद रहते हैं। लेकिन, इस बार 15 अगस्त शनिवार को पड़ रहा है। शनिवार को एक्सचेंजों में छुट्टी रहती है।

29 जून को दोबारा खुलेंगे बाजार

हर हफ्ते शेयर और कमोडिटी एक्सचोंजों में पांच दिन ही ट्रेडिंग होती है। शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है। इस बार शुक्रवार को अवकाश है। इस वजह से बीएसई और एनएसई लगातार तीन दिनों तक बंद रहेंगे। जो इनवेस्टर्स शेयर खरीदना या बेचना चाहते हैं उन्हें 29 जून यानी सोमवार तक इंतजार करना होगा।

14 सितंबर को गणेश चतुर्थी को भी रहेगी छुट्टी

मुहर्रम के बाद शेयर बाजार में अगली छुट्टी गणेश चतुर्थी को होगी। 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। उस दिन बीएसई और एनएसई बंद रहेंगे। उसके बात महात्मा गांधी जयंती के मौके पर 2 अक्तूबर को बाजार बंद रहेंगे। फिर 20 अक्तूबर को दशहरा की छुट्टी शेयर बाजारों में होगी।

एमसीएक्स में 26 जून को सुबह के सत्र में नहीं होगा कोराबार

कमोडिटी एक्सचेंज MCX में भी मुहर्रम की छुट्टी होगी। यह छुट्टी 26 जून को सिर्फ सुबह के सत्र में होगी। इसका मतलब है कि सुबह के सत्र का कारोबार एमसीएक्स में 26 जून को नहीं होगा। लेकिन, 26 जून को शाम के सत्र का कारोबार होगा।

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देश के ज्यादातर हिस्सों में बैंक और सरकारी ऑफिसेज में भी छुट्टी

देश के ज्यादातर हिस्सों में केंद्र सरकार के ऑफिसेज और बैंक भी 26 जून को बंद रहेंगे। हालांकि, अहमदाबाद, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, देहरादून, गंगटोक, गुवाहाटी, इंफाल, ईटानगर, जयपुर, कोहिमा, शिमला, शिलंग और तिरुवंतपुरम में बैंक खुले रहेंगे। 27 जून को भी बैंक बंद रहेंगे। इसकी वजह यह है कि 27 जून को महीने का चौथा शनिवार है। हर महीने दूसरे और चौथे शनिवार को बैंकों में छुट्टी होती है। केंद्र सरकार के ऑफिसेज में भी हर हफ्ते शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है।

सोना तो सोना है! टैक्स बढ़ने के बाद भी नहीं कम हो रही गोल्ड की चमक! सर्राफा बाजारों में उमड़ रही भारी भीड़

Gold Price Alert: आदित्य बिड़ला ग्रुप के ज्वैलरी ब्रांड ‘इंद्रिया’ (Indriya) के सीईओ संदीप कोहली ने सोने को लेकर एक बड़ी बात कही है। मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद मई महीने में बाजार थोड़ा सुस्त जरूर हुआ था, लेकिन अब ग्राहकों की डिमांड बहुत मजबूती से वापस लौट आई है।

संदीप कोहली ने कहा, ‘कस्टम ड्यूटी में 9 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद लोग नए भाव को समझने के लिए थोड़ा रुक गए थे। पूरे ज्वैलरी उद्योग में ग्राहकों की चहल-पहल थोड़ी धीमी हो गई थी, लेकिन पिछले दो हफ्तों में मांग बहुत तेजी से बढ़ी है।’

क्यों आई थी सुस्ती और अब क्यों लौट रही है रौनक?

सरकार ने मई महीने में सोने के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से सीधे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। सरकार का मकसद विदेशों से सोने की खरीद को कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना था। इस 9% की सीधी बढ़ोतरी से अचानक सोना महंगा हो गया था।

वैसे कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद अब सोने की कीमतों में आ रही हालिया गिरावट भी ग्राहकों को दोबारा शोरूम तक खींच रही है। दिल्ली में 22 कैरेट सोने का भाव ₹13244 प्रति ग्राम और मुंबई में ₹13229 प्रति ग्राम पर आ गया है, जिससे खरीदारों को राहत मिली है।

‘भारतीयों के लिए सोना सिर्फ निवेश नहीं, संस्कृति है’

जब उनसे पूछा गया कि क्या कीमतें बढ़ने से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की साख कम हुई है? तो कोहली ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा, ‘भारत में ज्वैलरी की मांग कभी खत्म नहीं हो सकती क्योंकि यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है। कमोडिटी की कीमतें कैसी भी हों, ग्राहक दूसरे निवेशों के मुकाबले इसके रिटर्न का आकलन जरूर करते हैं, लेकिन मांग हमेशा बनी रहती है।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब ग्राहक खास डिजाइन वाले गहने ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

तेजी से पैर पसार रहा है ‘इंद्रिया’ ब्रांड

साल 2024 में लॉन्च हुआ यह ब्रांड देश का सबसे तेजी से बढ़ता रिटेल ब्रांड बन गया है। फिलहाल 40 से ज्यादा शहरों में इसके 81 स्टोर्स हैं और फाइनेंशियल ईयर 2027 में कंपनी 40 नए स्टोर्स और खोलने की योजना बना रही है। कंपनी ने अपने स्टोर्स में ‘स्पार्कलस्कोप’ नाम की एक नई तकनीक लॉन्च की है। इसके जरिए ग्राहक खुद देख सकेंगे कि उनके हीरे में कितनी चमक है।

नेचुरल डायमंड पर है फोकस

भारत के ₹8,000 करोड़ के ज्वैलरी मार्केट में डायमंड-स्टडेड गहनों की हिस्सेदारी 11 फीसदी है, लेकिन ‘इंद्रिया’ के लिए यह हिस्सेदारी दोगुनी यानी 22 फीसदी है। आजकल बाजार में लैब में तैयार होने वाले हीरे का चलन बढ़ रहा है। जैसे कि टाटा ग्रुप के ‘टाइटैन’ ने पिछले साल दिसंबर में लैब-ग्रोन डायमंड कैटेगरी में कदम रखा है। लेकिन इसके उलट, ‘इंद्रिया’ पूरी तरह से नेचुरल हीरों पर ही फोकस कर रहा है।

संदीप कोहली का मानना है कि ग्राहकों के लिए हीरे की क्वालिटी (4Cs) के साथ-साथ उसकी चमक सबसे पहले मायने रखती है, और उनकी नई तकनीक इसी पर फोकस करती है।

Market Outlook : हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 29 जून को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 25 जून को भारतीय इक्विटी इंडेक्स ने दिन के दौरान हुई ज्यादातर बढ़त गंवा दी और मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। निफ्टी 24,050 के आसपास रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 109.25 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 77,100.47 पर और निफ्टी 34.35 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 24,056.00 पर सेयल हुआ। लगभग 1544 शेयरों में बढ़त हुई,2488 शेयरों में गिरावट आई और 180 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन,M&M,मैक्स हेल्थकेयर,मारुति सुजुकी और टाटा कंज्यूमर शामिल रहे। जबकि ONGC,पावर ग्रिड कॉर्प,हिंडाल्को और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक महिंद्रा में गिरावट देखने को मिली।

सेक्टोरल इंडेक्स मिले-जुले रहे। FMCG में 0.7%,रियल्टी में 0.3% और ऑटो इंडेक्स में 2% से ज्यादा की बढ़त हुई। जबकि IT,एनर्जी,मीडिया,मेटल और ऑयल एंड गैस इंडेक्स 0.5-1% नीचे रहे। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि दिन के शुरुआती कारोबार में हुई बढ़त के बाद प्रॉफिट बुकिंग की वजह से घरेलू बाजार बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से रुपये को सहारा मिला और कुछ राहत भी मिली,लेकिन यह बढ़त की रफ़्तार बनाए रखने के लिए काफी नहीं थी।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो ऑटो शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसकी वजह रही मेटल की कीमतों में नरमी,सप्लाई चेन की दिक्कतों में कमी और महीने के दौरान रिटेल डिमांड में सुधार।

कुल मिलाकर बाजार का मूड पॉजिटिव रहा। हालांकि,FII की लगातार बिकवाली से तेजी सीमित हो सकती है। आने वाले समय में,Q1 के नतीजों को लेकर कमजोर उम्मीदों और मॉनसून की असमान स्थिति का असर बाजार के मूड पर पड़ सकता है,इसलिए इन पर नजर रखनी होगी।

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट, HNI ​एंड डेरिवेटिव्स,रियांक अरोड़ा का कहना है कि भारतीय इक्विटी मार्केट में आज का ट्रेडिंग सेशन थोड़ा पॉजिटिव रहा। दिन भर उतार-चढ़ाव सीमित दायरे में रहने के बावजूद बेंचमार्क इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। अहम सपोर्ट लेवल के ऊपर बने रहना लगातार खरीदारी की रुचि को दिखाता है। मार्केट में नए ट्रिगर्स आने से पहले निवेशक सोच-समझकर कदम उठा रहे हैं।

निफ्टी 30 अंक यानी 0.12%) बढ़कर 24,050 पर बंद हुआ। यह इंडेक्स 24,000 के अहम लेवल के ऊपर बना हुआ है,जो बताता है कि शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 24,000–23,950 के आसपास है और इसके बाद 23,850 के आसपास मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, रेजिस्टेंस 24,100–24,150 और उसके बाद 24,250 पर दिख रहा है। लगातार इन लेवल के ऊपर बने रहने से और बढ़त का रास्ता खुल सकता है।

BSE सेंसेक्स 105 अंक यानी 0.14% बढ़कर 77,100 पर बंद हुआ। इंडेक्स सीमित दायरे में ट्रेड करता रहा लेकिन पॉजिटिव जोनन में बंद होने में कामयाब रहा,जो निचले लेवल पर लगातार खरीदारी का सपोर्ट दिखाता है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,900–76,700 के आसपास है। जबकि रेजिस्टेंस 77,300–77,500 के पास दिख रहा है। इस जोन के ऊपर ब्रेकआउट से बुलिश मोमेंटम और मजबूत हो सकता है।

कुल मिलाकर मार्केट पॉजिटिव रुख के साथ कंसोलिडेट होता रहा,जिससे पता चलता है कि सेशन के दौरान सीमित बढ़त के बावजूद खरीदारों का दबदबा बना हुआ है। जब तक अहम सपोर्ट लेवल बने हुए हैं,तब तक मार्केट का स्ट्रक्चर पॉजिटिव बना रहेगा। ट्रेडर्स अच्छे रिस्क मैनेजमेंट के साथ गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं, क्योंकि मुख्य ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,राजीव शरण का कहना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर आना ग्लोबल कमोडिटी मार्केट की कहानी में एक बड़ा बदलाव है। यह बदलाव मांग में कमी के कारण नहीं,बल्कि जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने की वजह से आया है। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। इससे सप्लाई में आई वह रुकावट दूर हो रही है।

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े क्रूड आयातक देश भारत के लिए यह निश्चित रूप से अच्छी खबर है। तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की गिरावट से भारत का सालाना आयात बिल लगभग 12 से 15 अरब डॉलर कम हो जाता है। इससे करंट अकाउंट पर दबाव कम होता है और भारतीय रिजर्व बैंक को विकास को बढ़ावा देने के लिए उधार की लागत (ब्याज दरों) को अनुकूल बनाए रखने की अधिक गुंजाइश मिलती है।

घरेलू बाजारों ने इस पर अच्छी प्रतिक्रिया दी है। 25 जून को सेंसेक्स 77,000 के स्तर को पार कर गया और निफ्टी 24,100 के आसपास मज़बूत बना रहा। इसमें ऑटो,एविएशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के शेयरों ने बढ़त में अहम भूमिका निभाई। भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए निकट भविष्य का आउटलुक अच्छा दिख रहा है,बशर्ते क्रूड की कीमतें 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में स्थिर रहें और मॉनसून उम्मीद के मुताबिक अच्छा रहे।

इक्विरस वेल्थ के MD और बिज़नेस हेड,अंकुर पुंज का कहना है कि बाजार में लंबी छुट्टी से पहले,निवेशकों ने कारोबारी सत्र के अंतिम हिस्से में मुनाफावसूली की,जिससे बाजार मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। चूंकि मुहर्रम के कारण शुक्रवार को बाजार बंद रहेंगे,इसलिए निवेशकों ने अपनी इक्विटी होल्डिंग कम कर दी। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमी पर अभी भी अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं,ऐसे में निवेशकों के लिए चुनिंदा शेयरों में खरीदारी करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

कोटक सिक्योरिटीज में VP टेक्निकल रिसर्च अमोल अठावले ने कहा कि इस हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। काफी उतार-चढ़ाव के बाद,निफ्टी 0.18 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ। जबकि सेंसेक्स में 297 अंकों की बढ़त हुई। सेक्टरों की बात करें तो फार्मा इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई,जबकि मेटल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट हुई और यह 4.40 प्रतिशत नीचे आया। हफ्ते के दौरान,तेज गिरावट के बाद मार्केट को 50 डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज)के पास सपोर्ट मिला और इसमें तेजी से सुधार हुआ। हालांकि,एक बार फिर इसे 24,200/77,800 के रेजिस्टेंस जोन के पास प्रॉफिट बुकिंग का सामना करना पड़ा।

टेक्निकल तौर पर मार्केट ने एक रेंज-बाउंड पैटर्न बनाया है। नीचे की तरफ,इसे 50 डे SMA या 23,800/76,200 के पास सपोर्ट मिला है,जबकि 24,200-24,250/77,800-78,000 के रेजिस्टेंस लेवल के पास लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। पोजीशनल ट्रेडर्स के लिए, 24,000/77,000 एक इमीडिएट सपोर्ट जोनन का काम करेगा। इस लेवल के ऊपर,मार्केट 24,200/77,800 को फिर से टेस्ट कर सकता है। 24,200/77,800 के लेवल को सफलतापूर्वक पार करने पर मार्केट 24,400-24,500/78,400-78,700 की ओर बढ़ सकता है।

दूसरी ओर 24,000/77,000 के नीचे जाने पर मार्केट 23,800/76,200 तक गिर सकता है। गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है और इंडेक्स 23,650/75,700 तक जा सकता है।

बैंक निफ्टी के लिए,सपोर्ट जोन 57,800 और 57,500 पर हैं। इन लेवल के ऊपर,तेजी 58,700-59,000 की ओर जारी रह सकती है। इसके उलट, 57,500 के नीचे जाने पर अपट्रेंड कमजोर हो सकता है।

 

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SBI के शेयर में 22% उछाल का दम, बना सकता है नया रिकॉर्ड हाई; CLSA को उम्मीद

भारत के सबसे बड़े लेंडर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शेयर में अभी अच्छी गुंजाइश बाकी है। शेयर के अपने पिछले रिकॉर्ड हाई लेवल को पार कर जाने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्म CLSA ने यह अनुमान जताते हुए इस स्टॉक पर अपना पॉजिटिव नजरिया दोहराया है। ब्रोकरेज ने SBI के शेयरों पर “आउटपरफॉर्म” रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 1,275 रुपये प्रति शेयर दिया है। यह टारगेट स्टॉक के क्लोजिंग प्राइस से 22% ज्यादा है।

साथ ही यह टारगेट शेयर के BSE पर 52 सप्ताह के एडजस्टेड हाई 1,234.8 रुपये से भी ज्यादा है। CLSA ने SBI के मैनेजमेंट से मुलाकात की। बातचीत में सामने आया कि SBI की लोन ग्रोथ सिस्टम के हिसाब से मजबूत रही है। इसमें रिटेल और कॉरपोरेट दोनों तरह की डिमांड का योगदान है।

SBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए क्रेडिट ग्रोथ 13% से 15% के बीच रहने का अनुमान जताया है और कहा है कि यह सभी सेगमेंट में व्यापक स्तर पर होगी। चेयरमैन CS सेट्टी ने कहा है कि वेस्ट एशिया में संघर्ष की वजह से कोई दबाव नहीं दिख रहा है। नए वित्त वर्ष के लिए मार्जिन को लेकर 3% का गाइडेंस बरकरार है। CLSA ने मैनेजमेंट के हवाले से कहा है कि ट्रेजरी बिल से जुड़े लोन की रीप्राइसिंग के जरिए मार्जिन गाइडेंस को हासिल किया जा सकता है।

कमजोर रहा मॉनसून तो ग्रामीण क्षेत्र से मांग पर पड़ेगा बुरा असर

बातचीत से यह भी सामने आया है कि SBI कॉर्पोरेट लेंडिंग के मामले में सोच-समझकर कदम उठा रहा है, क्योंकि उसका मकसद मुनाफे वाली ग्रोथ हासिल करना है। CLSA का कहना है कि भूराजनीतिक मोर्चे पर मैक्रो चुनौतियों के बावजूद बैंक की एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है। SBI मैनेजमेंट को सिर्फ ‘अल नीनो’ की चिंता है। चेतावनी दी गई है कि अगर मॉनसून औसत से काफी कम रहा तो ग्रामीण क्षेत्र से मांग पर बुरा असर पड़ सकता है। SBI के शेयर पर 49 एनालिस्ट नजर रखते हैं। इनमें से 43 ने “बाय” रेटिंग दी है। 6 ने “होल्ड” की सलाह दी है।

CSB Bank का शेयर 6% लुढ़का, फेयरफैक्स के पूरी हिस्सेदारी बेच सकने की रिपोर्ट से भारी बिकवाली

SBI के शेयर में तेजी

25 जून को SBI के शेयर में 1 प्रतिशत की तेजी रही। BSE पर यह 1045 रुपये पर बंद हुआ। बैंक का मार्केट कैप 9.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। शेयर एक महीने में 8 प्रतिशत और एक साल में 30 प्रतिशत चढ़ा है। 3 साल का रिटर्न 88 प्रतिशत है। बैंक में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 55.52 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Hindustan Copper Share: 45% चढ़ेगा इस सरकारी कंपनी का स्टॉक! आनंद राठी ने दी खरीदने की सलाह

Hindustan Copper Share: सरकारी मेटल कंपनी हिंदुस्तान कॉपर (Hindustan Copper) के शेयर पर ब्रोकरेज हाउस आनंद राठी का रुख काफी बुलिश है। ब्रोकरेज ने स्टॉक पर BUY रेटिंग बरकरार रखते हुए 12 महीने का टारगेट प्राइस 715 रुपये रखा है। मौजूदा बाजार भाव 490 रुपये के मुकाबले यह करीब 46% संभावित उछाल का संकेत देता है।

हिंदुस्तान कॉपर पर ब्रोकरेज क्यों बुलिश है?

आनंद राठी का मानना है कि हिंदुस्तान कॉप की मल्टी-प्रॉन्ग कैपेसिटी एक्सपेंशन रणनीति आने वाले वर्षों में ग्रोथ को नई रफ्तार दे सकती है। ब्रोकरेज के मुताबिक, गुजरात कॉपर प्लांट (GCP) को दोबारा शुरू करने के लिए 20 साल का रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट किया गया है। इसके अलावा केन्दाडीह कॉपर माइन में प्रोडक्शन फिर शुरू हो गया है। साथ ही, क्षमता बढ़ाने की योजना पर भी काम चल रहा है।

इन प्रोजेक्ट से हिंदुस्तान कॉपर का उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ने की उम्मीद है। झारखंड और सिक्किम की कुछ बंद खदानों को दोबारा शुरू करने की संभावना है। ये भी लॉन्ग टर्म में कंपनी की ग्रोथ को मजबूती दे सकती हैं।

पहली तिमाही में मजबूत नतीजों की उम्मीद

ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही कंपनी के लिए रिकॉर्ड रहने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉपर की ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों, रुपये की कमजोरी और प्रोडक्शन बढ़ने से कंपनी का रेवेन्यू करीब 8.5 अरब रुपये तक पहुंच सकता है। EBITDA मार्जिन भी करीब 48% रहने का अनुमान है।

लंबी अवधि की ग्रोथ पर दांव

आनंद राठी का कहना है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बढ़ती मांग से कॉपर की खपत लगातार बढ़ेगी। इसी को देखते हुए हिंदुस्तान कॉपर अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर बड़ा निवेश कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी FY30 तक बड़े कैपेक्स प्रोग्राम पर काम कर रही है। इससे आने वाले वर्षों में उत्पादन में तेज बढ़ोतरी हो सकती है।

हिंदुस्तान कॉपर का टारगेट प्राइस क्या है?

आनंद राठी ने हिंदुस्तान कॉपर पर BUY रेटिंग बनाए रखते हुए 715 रुपये का टारगेट दिया है। मौजूदा भाव 490 रुपये के मुकाबले यह लगभग 46% के संभावित उछाल का संकेत है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की विस्तार योजनाएं, बढ़ती उत्पादन क्षमता और मजबूत कॉपर डिमांड स्टॉक के लिए लंबे समय में पॉजिटिव साबित हो सकती हैं।

इन जोखिमों पर नजर रखना भी जरूरी

ब्रोकरेज का कहना है कि निवेशकों को कुछ जोखिमों का भी ध्यान रखना चाहिए। इनमें अंतरराष्ट्रीय कॉपर कीमतों में उतार-चढ़ाव, कैपेक्स प्रोजेक्ट्स में देरी, उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाओं के समय पर पूरा न होने और वैश्विक कमोडिटी बाजार में बदलाव शामिल हैं। ऐसे जोखिमों का असर शेयर के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

CSB Bank का शेयर 6% लुढ़का, फेयरफैक्स के पूरी हिस्सेदारी बेच सकने की रिपोर्ट से भारी बिकवाली

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

CSB Bank का शेयर 6% लुढ़का, फेयरफैक्स के पूरी हिस्सेदारी बेच सकने की रिपोर्ट से भारी बिकवाली

प्राइवेट सेक्टर के CSB Bank के शेयरों में 25 जून को दिन में 6 प्रतिशत तक की गिरावट दिखी। बीएसई पर भाव 322 रुपये के लो तक गया। शेयर में गिरावट की दो वजहें सामने आ रही हैं। पहली मुख्य वजह यह है कि ऐसी खबर है कि कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की अगुवाई वाली फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स, CSB बैंक में अपनी पूरी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है। मनीकंट्रोल को सूत्रों से पता चला है कि फेयरफैक्स ने IDBI बैंक में हिस्सेदारी की खरीद के लिए एक नई बोली लगाई है।

इस सौदे से सरकार और LIC, दोनों मुख्य शेयरधारकों को लगभग 50,000 करोड़ रुपये या 5 अरब डॉलर से कुछ अधिक मिलने की संभावना है। संशोधित प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है और सौदा सही दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।

इसलिए CSB Bank में बेच सकती है पूरा हिस्सा

संबंधित लोगों का यह भी कहना है कि फेयरफैक्स ने प्रतिबद्धता जताई है कि बैंकिंग क्षेत्र में IDBI बैंक ही उसका एकमात्र निवेश होगा। नतीजतन, IDBI Bank का अधिग्रहण करने पर वह CSB बैंक में अपनी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी पूरी तरह से बेच देगी। ऐसा इसलिए क्योंकि RBI के नियमों के तहत कोई प्रमोटर दो बैंकिंग लाइसेंस नहीं रख सकता है।

फेयरफैक्स ने 2018 में CSB बैंक (जिसे तब कैथोलिक सीरियन बैंक के नाम से जाना जाता था) को बचाने के लिए एक बेलआउट डील के तहत 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। एक साल बाद बैंक को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया गया।

गोल्ड की कीमत में गिरावट भी एक वजह

सोने की कीमतों में दबाव के कारण गुरुवार को गोल्ड फाइनेंसिंग कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। साथ ही CSB बैंक लिमिटेड जैसे गोल्ड फाइनेंसिंग से जुड़े लेंडर्स के शेयरों में भी गिरावट है। गोल्ड के फिसलने की वजह है कि महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते US फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने और उसके बाद US डॉलर के मजबूत होने का डर बना हुआ है। इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई है, जो पिछले 7 महीनों में इसका सबसे निचला स्तर है। CSB Bank के कुल लोन में गोल्ड लोन का हिस्सा लगभग 42-45% है।

CSB Bank का मार्केट कैप घटकर 5600 करोड़ रुपये रह गया है। शेयर साल 2026 में अब तक 33 प्रतिशत गिरा है। यह BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।